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अनजान बुजुर्ग महिला के लिए बस कंडक्टर से भिड़ गए थे नरेंद्र मोदी, सहायता के लिए बीच में रुकवाई थी गाड़ी: बस में सवार यात्री ने सुनाई पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज अपना 73वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर में दामोदरदास मूलचंद मोदी और हीराबेन के घर पैदा हुए नरेंद्र मोदी के गुणों के चर्चे बचपन से ही सुनने में आए हैं। अभी दो दिन पहले ही आए मॉर्निंग कंसल्ट एक ताजा सर्वे में वे दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले नेता के रूप में शुमार किए गए हैं। सर्वे में 76% लोगों ने PM मोदी के नेतृत्व का लोहा माना है और उन्हें सबसे ज़्यादा अप्रूवल रेटिंग दी है। वहीं आज उनके जन्मदिन के अवसर पर भाजपा कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

PM मोदी के जन्मदिन को भाजपा सेवा पखवाड़े के तौर पर मना रही है। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में कई कार्यक्रम मनाए जा रहे हैं। बता दें कि नरेंद्र मोदी अपने माता-पिता की छह संतान में तीसरे नंबर पर हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा वडनगर के भागवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में हुई थी।

जब एक बुजुर्ग महिला के लिए कंडक्टर से भिड़ गए नरेंद्र मोदी 

पीएम मोदी के जन्मदिन पर हर साल उनके साथ रहे लोग उनसे जुड़े कई किस्से और कहानियाँ शेयर करते रहे हैं। ऐसे ही इस बार जो कहानी सामने आई है उसे गुजरात की आरएसएस कार्यकर्ता नीता सेवक ने शेयर किया है कि कैसे नरेंद्र मोदी एक बुजुर्ग महिला के लिए बस कंडक्टर से भिड़ गए थे। 

नीता सेवक ने यह खास किस्सा शेयर करते हुए बताया, “तब मोदी जी हमारे प्रचारक थे। यह 80 के दशक की बात होगी। मैं एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बस में उनके साथ जा रहा था। तभी एक बुजुर्ग महिला बस में चढ़ी। कंडक्टर टिकट लेकर उनके पास आया। इस दौरान बुजुर्ग महिला ने कंडक्टर को उस जगह के बारे में बताया जहाँ वह जाना चाहती थी। लेकिन पता चला कि वह गलत बस में चढ़ गई थी, लेकिन कंडक्टर ने बस रोककर महिला को उतारने से मना कर दिया।” उन्होंने कहा कि कंडक्टर उल्टा बुजुर्ग महिला पर आरोप लगा रहा था।

नरेंद्र मोदी ये सब देख रहे थे। नीता ने कहा कि तभी मोदी जी खड़े हुए और उस आदमी से भिड़ गए। उन्होंने उसे डाँटा और तब तक उससे भिड़े रहे जब तक कि बस रोक नहीं दी गई। इसके बाद वृद्ध महिला बस से उतर गईं। बुजुर्ग महिला को बस से उतारने के बाद, नरेंद्र मोदी ने कंडक्टर से फिर बात की। उन्होंने कहा, “क्यों, हीरो, कुछ समझ आया। मुझे उम्मीद है कि जो मैंने कहा वो तुम्हें अच्छे से समझ आ गया होगा। यह सब दोबारा नहीं होना चाहिए। बेसहारा लोगों के प्रति सम्मान दिखाओ।”

लगातार कीर्तिमान गढ़ रहे हैं PM मोदी

यहाँ भी उनके उस व्यक्तित्व और नेतृत्व की झलक मिलती है जिसकी आज पूरी दुनिया दीवानी है। संघ प्रचारक से लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक पीएम मोदी की जिंदगी से जुड़े ऐसे अनेकों किस्से हैं। जिनमें से अधिकांश कई बार सुनी और सुनाई गई है। लेकिन हार बार जब भी उनसे जुडी कोई नई कहानी आती है तो प्रेरणा के स्रोत समेटे होती है। 

बता दें कि अपनी युवावस्था से ही पीएम मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के सदस्य और प्रचारक रहे हैं। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 के दशक से हुई। हालाँकि, 1990 से पहले तक उनके राजनीतिक करियर ने ज्यादा रफ्तार नहीं पकड़ी थी लेकिन जब पकड़ी तो फिर पीछे लौटकर नहीं देखना पड़ा। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर आज प्रधानमंत्री के सफर में वे लगातार कीर्तिमान गढ़ रहे हैं। 

‘सनातन खत्म होना ही चाहिए’: अब शरद पवार की पार्टी के नेता ने खोला हिन्दू विरोधी घृणा का पिटारा, पूछा – अचानक कहाँ से हो गया इस धर्म का जन्म?

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। इसके बाद से सनातन धर्म के खिलाफ बयान देने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब शरद पवार की पार्टी के नेता और उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री रहे जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि सनातन धर्म को खत्म हो जाना चाहिए। उन्होंने पूछा है कि सनातन धर्म अचानक से कहाँ से पैदा हुआ है?

एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता जितेंद्र आव्हाड ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “सनातन धर्म खत्म होना ही चाहिए। यह तो बाबा साहब आंबेडकर की माँग थी। इसलिए ही तो उन्होंने मनुस्मृति जलाई। इतने दिन कहाँ था सनातन धर्म। हमारे प्रधानमंत्रियों के पिछले कई सालों के भाषण निकालिए, वह तो हिंदू धर्म की ही बात करते थे। अचानक से सनातन धर्म का कहाँ से जन्म हो गया?”

उन्होंने आगे कहा है, “सनातन धर्म के लोग सिर्फ और सिर्फ धर्म की ही राजनीति करते हैं। अपने धर्म में ही दो शाखाएँ तैयार कर दीं। हम तो मोहन भागवत जी का समर्थन करते हैं। इस मामले में आरएसएस का समर्थन कर रहा हूँ मैं। वह कहते हैं कि यहाँ पर कुछ लोगों ने कुछ लोगों को पिछड़ा रखा। अब उन पिछड़े लोगों को आगे लाने के लिए हमें हिम्मत दिखानी चाहिए। इसके लिए हमें काम करना चाहिए। इन लोगों को पीछे रखने वाले लोग सनातनी थे।”

महाराष्ट्र के स्थानीय मीडिया पोर्टल ‘लय भारी’ के अनुसार, जितेंद्र आव्हाड ने यह भी कहा, “सनातन धर्म का समर्थन करने वाले लोगों के कुछ सवाल हैं, उन्हें इनका जवाब देना चाहिए। चार्वाक को किसने मारा? छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को किसने अस्वीकार कर दिया? हत्यारों को महात्मा ज्योतिराव फुले के पास किसने भेजा?”

आव्हाड ने आगे कहा, “सती प्रथा के खिलाफ लड़ने वाले राजा राममोहन राय के खिलाफ तलवार उठाने वाला कौन था? राजर्षि शाहू महाराज को बदनाम करने और उनकी हत्या करने वाले षड्यंत्रकारी कौन थे? वे कौन थे जिन्होंने एक विशेष जाति समूह को पानी पीने से रोका? इन सभी चीजों के अपराधी सनातनी धर्म के अनुयायी थे। हम उनका विरोध जारी रखेंगे।”

बता दें कि इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया के मच्छर की तरह खत्म करने की अपील की थी। उदयनिधि ने कहा था, “मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

उदयनिधि के बयान का कॉन्ग्रेस ने भी समर्थन किया था। तमिलनाडु कॉन्ग्रेस की महासचिव लक्ष्मी रामचंद्रन ने सनातनियों को जातिवादी और नफरत फैलाने वाला बता दिया। उन्होंने कहा था कि हिंदुत्व और सनातन आदि उत्तर भारत की उपज है। दक्षिण भारत के लोग शांतिप्रिय हैं। लक्ष्मी रामचंद्रन ने कहा था, “नफरत फैलाने वाले सनातन जातिवादी हिंदुत्व का दूसरा नाम है, जिसकी उत्पत्ति उत्तर में हुई है। दक्षिण में हमारा हिंदू धर्म शांतिप्रिय है और समावेशी होने का प्रयास करता है। रामानुजार, वल्लालर और नारायण गुरु प्रकार का हिंदू धर्म ही हमारा हिंदू धर्म है।”

‘खालिस्तानियों के लिए देश में कोई जगह नहीं’: कनाडा के गायक के पोस्टर फाड़े गए, बोले प्रदर्शनकारी – मुंबई में नहीं करने देंगे शो

महाराष्ट्र के मुंबई में कनाडा में रहने वाले गायक और खालिस्तान समर्थक शुभनीत सिंह उर्फ शुभ का एक कार्यक्रम आयोजित होना है। भाजपा की यूथ विंग भाजयुमो पोस्टर फाड़कर इस कार्यक्रम का विरोध कर रही है। भाजयुमो का कहना है कि किसी भी खालिस्तान समर्थक के लिए इस देश में जगह नहीं है। इसके अलावा, भारत का अधूरा नक्शा शेयर करने के आरोप में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की भी माँग हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंगर शुभ का कार्यक्रम मुंबई के कार्डेलिया क्रूज में 23 से 25 सितंबर तक होना है। इस कार्यक्रम का विरोध कर रहे महाराष्ट्र भाजयुमो के अध्यक्ष तजिंदर सिंह तिवाना ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने कहा है, “भारत की एकता और अखंडता के शत्रु खालिस्तानी समर्थकों का भारत में कोई स्थान नहीं है। देश को तोड़ने की साजिश रचने वाले कैनेडियन सिंगर शुभ को हम छत्रपति शिवाजी महाराज की इस पावन धरती पर मुंबई में परफॉर्म नहीं करने देंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक शिष्टमंडल ने शांतिपूर्वक तरीके से मुंबई पुलिस और आयोजकों को कार्यक्रम रद्द करने का ज्ञापन दिया है। यदि उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आयोजकों को हमारे विरोध का सामना करना पड़ेगा। मैं मुंबई के युवाओं से अपील करता हूँ कि इस देशद्रोही कैनेडियन सिंगर को सुनने से अच्छा आप अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में लगाएँ और इस शो का बायकॉट करें।”

इसके अलावा तजिंदर सिंह तिवाना ने पुलिस को दिए गए ज्ञापन की फोटो भी इंस्टाग्राम पर शेयर की है। इस ज्ञापन में उन्होंने शुभ पर सोशल मीडिया में भारत का अधूरा नक्शा शेयर करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की माँग की है। तिवाना का आरोप है कि शुभ ने 23 मार्च 2023 को इंस्टाग्राम पर स्टोरी लगाई थी। इसमें उसने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के बिना भारत का नक्शा शेयर किया था। यही नहीं, उन्होंने इंस्टाग्राम पर शुभ द्वारा लगाई स्टोरी भी शेयर की है।

सनातन विरोधी बयानों से विपक्षी गठबंधन की हालत पस्त, भोपाल में होने वाली रैली रद्द: कमलनाथ ने किया ऐलान, बोले – ये देश सनातन धर्म का है

सनातन विरोधी बयानों के कारण बैकफुट पर आए I.N.D.I. गठबंधन ने आगामी दिनों में होने वाली भोपाल रैली को रद्द कर दिया है। इस बात का ऐलान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किया है। इससे पहले I.N.D.I. गठबंधन की बैठक से यह बात सामने आई थी कि चुनावी राज्य मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा सरकार के विरुद्ध रैली का आयोजन किया जाएगा जिसमें विपक्षी के कई बड़े नेता शामिल होंगे।

यह रैली अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जानी थी, जिसकी तैयारियाँ चालू हो गई थीं लेकिन अब कमलनाथ ने इसके निरस्त होने की घोषणा की है। कमलनाथ ने कहा, “रैली कैंसल हो गई है।” इस रैली के निरस्त होने के पीछे सबसे बड़ा कारण I.N.D.I. गठबंधन के घटक दलों डीएमके और राजद के नेताओं द्वारा सनातन पर दिए गए बयान माने जा रहे हैं।

ऐसा प्रतीत होता है कि कमलनाथ ने सनातन को डेंगू-मलेरिया जैसा बताने वाले बयानों से होने वाले नुकसान को भी भाँप लिया है, इसलिए वह अब इन बयानों से किनारा भी कर रहे हैं। कमलनाथ में हाल ही में अंग्रेजी समाचार चैनल ‘इंडिया टुडे’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बयान देते हुए कहा, “ये सब जानते हैं कि अपना देश सनातन धर्म का है, सनातन धर्म कहता है कि सबको जोड़कर रखो, कोई कुछ कहे या डीएमके वाला कुछ भी कहता रहे। इस पर राय की कोई आवश्यकता नहीं हैं।”

लोकसभा चुनावों से पहले देश के तीन बड़े राज्यों – मध्य प्रदेश राजस्थान और छतीसगढ़ में चुनाव होने वाले हैं जो कि I.N.D.I. गठबंधन के लिए पहला टेस्ट होंगे। इसको ध्यान में रखते हुए ही पहली रैली के लिए भोपाल को चुना गया था लेकिन इस बीच सनातन पर बयानबाजी के कारण विपक्षी दलों को इस नीति में बदलाव करना पड़ गया है।

वहीं इस रैली के रद्द होने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, “इन्होंने जो सनातन धर्म का अपमान किया है, उससे देश व मध्य प्रदेश की जनता के मन में रोष है, इनको डर था कि वह रोष कहीं प्रकट न हो जाए, इसलिए गठबंधन की एमपी में रैली ही निरस्त कर दी।”

भोपाल में रद्द होने के बाद अब इस रैली के नागपुर में आयोजन की संभावनाएँ हैं। हालाँकि, इस विषय में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि अब अगली रैली के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे के साथ बैठक करके निर्णय लिया जाएगा।

शहवाज और अरबाज ने दुपट्टा खींचा, फैसल ने बाइक से कुचल दिया… स्कूल से घर लौट रही छात्रा की मौत, CCTV में कैद हुई घटना

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में छेड़खानी के कारण एक लड़की की मौत हो गई। मृतक छात्रा शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) की शाम साइकिल से स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान बाइक सवार शहवाज और अरबाज नामक युवकों ने उसका दुपट्टा खींच दिया। इससे वह गिर गई। इसी दौरान पीछे से आ रहे फैसल ने लड़की को बाइक से कुचल दिया। इससे उसकी जान चली गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अंबेडकर नगर जिले के हँसवर थाना के हीरापुर बाजार क्षेत्र का है। यहाँ के रामराजी इंटर कॉलेज में 12वीं में पढ़ने वाली 17 वर्षीय लड़की स्कूल खत्म होने के बाद रोज की तरह घर लौट रही थी। इसी दौरान शहवाज और अरबाज उसका पीछा करते हुए आए और उसका दुपट्टा खींच दिया। लड़की साइकिल पर थी। इसलिए उसका संतुलन बिगड़ा और वह बीच सड़क में जा गिरी।

इसी बीच फैसल नामक बाइक सवार भी वहाँ से गुजर रहा था। लड़की के गिरते ही फैसल भी पीछे से आ गया और उस पर बाइक चढ़ा दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। सूचना पाकर लड़की के परिजन भी मौके पर पहुँचे और आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गई। इसका फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस मामले में मृतक लड़की के पिता का कहना है कि छेड़खानी के चलते हुई सड़क दुर्घटना में उनकी बेटी का सिर और जबड़ा फट गया था। इससे ही उसकी मौत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी ने उनसे कुछ लड़कों द्वारा परेशान और छेड़छाड़ करने की बात कही थी। छेड़छाड़ करने वाले लड़के शहवाज और अरबाज हैं।

पीड़ित परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शहवाज, अरबाज और फैसल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपितों से पूछताछ कर जाँच की जा रही। घटना में प्रयुक्त बाइक जब्त की गई है। 

केदारनाथ में धरने पर बैठे पुरोहित, स्थानीय लोग और होटल-लॉज मालिक भी साथ: कहा – अब तक नहीं मिले घर और जमीन, 2013 की आपदा में सब हो गया था तबाह

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने अपनी माँगों को लेकर अपनी दुकानें बंद कर दी हैं और धरने पर बैठ गए हैं। ये लोग वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद उठाए गए क़दमों को लेकर संतुष्ट नहीं है। इस विरोध प्रदर्शन में पुरोहितों के साथ स्थानीय लोग, दुकानदार और होटल तथा लॉज मालिक भी शामिल हैं।

यह सभी सरकार से माँग कर रहे हैं कि उनके जो भवन 2013 की आपदा में बहे थे, उनके स्थान पर बनाए गए भवनों का कब्जा उन्हें दिया जाए और जमीन का अधिकार भी दिया जाए। इन लोगों को आपदा के 10 वर्षों के बाद भी जमीन का अधिकार नहीं मिल पाया है। इसके अतिरिक्त, केदारनाथ के पुरोहितों ने परिसर में चल रहे विकास कार्यों के विषय में भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

इस बंद के कारण केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लॉज और होटल बंद होने से रुकने का स्थान भी नहीं मिल रहा है जबकि भोजन की भी समस्या हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आपदा में बहे भवनों पर भूमिधारी अधिकार के तहत उनको भवन मिलने चाहिए थे।

विरोध प्रदर्शन करते पुरोहित एवं समाज के अन्य लोग केदारनाथ
विरोध प्रदर्शन करते पुरोहित एवं समाज के अन्य लोग

इसके अतिरिक्त उनका कहना है कि जो भवन बच गए थे वह भी तोड़े जा रहे हैं। इन लोगों ने यह भी शिकायत की है कि धाम में चलने वाले कामों में उनकी कोई राय नहीं ली जा रही है और नए बनने वाले भवनों को मंदिर की ऊँचाई से अधिक बनाया जा रहा है जो कि परम्परा के विरुद्ध है।

केदारनाथ में आई 2013 की आपदा

वर्ष 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत एक बड़े इलाके में भारी आपदा आई थी। एकाएक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण बड़ी संख्या में श्रृद्धालु फँस गए थे जबकि बड़ी संख्या में लापता हो गए थे। केदारनाथ मंदिर परिसर के पास एक शिला आ जाने से मंदिर को नुकसान नहीं पहुँचा था, लेकिन आसपास की सभी दुकानें और भवन बह गए थे। इस आपदा में हजारों व्यक्तियों की मृत्यु भी हो गई थी।

कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के बाद झुकी कॉन्ग्रेस सरकार: ईदगाह मैदान में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की मिली अनुमति, मुस्लिम संगठनों ने किया था विरोध

कर्नाटक की हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका के आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी ने ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी के कार्यक्रमों के आयोजन और गणेश मूर्ति स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए कर्नाटक हाईकोर्ट ने महानगरपालिका को निर्देश दिया था। गणेश चतुर्थी आयोजन की अनुमति देने पर अंजुमन-ए-इस्लाम ने आपत्ति जताई थी।

कर्नाटक के प्रमुख शहर हुबली-धारवाड़ में हिन्दुओं ने ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी से सम्बंधित कार्यक्रम करने की अनुमति माँगी थी। इसकी अनुमति देने को लेकर महानगरपालिका के मेयर और सदस्यों ने 31 अगस्त 2023 को ही प्रस्ताव पारित किया गया था। हालाँकि, इसकी आधिकारिक अनुमति आयुक्त द्वारा दी जानी थी।

आयुक्त द्वारा अनुमति देने में देरी होने के पीछे नगरपालिका के आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी पर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के दबाव के आरोप लग रहे थे। इसके विरोध में भाजपा के स्थानीय नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था और धरने पर बैठ गए थे।

भाजपा नेताओं का कहना है कि आयुक्त द्वारा अनुमति मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के चलते रोकी जा रही है। भाजपा विधायक महेश तेंगिन्कई ने आयुक्त के इस रवैये का विरोध करते हुए कहा था कि ईदगाह की जमीन महानगरपालिका की ही है।

बीते वर्ष हुबली के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पंडाल में केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी भी शामिल हुए थे
बीते वर्ष हुबली के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पंडाल में केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी भी शामिल हुए थे (चित्र साभार: द टेलीग्राफ)

वहीं आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी ने कहा था कि वह अनुमति देने से पहले अन्य तथ्यों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा था कि कानून व्यवस्था सम्बंधित राय के लिए पुलिस कमिश्नर से बात करेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इस आधार पर अनुमति नहीं देने का विरोध किया था और आयुक्त दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने ईदगाह मैदान में गणेश मूर्ति लगाकर 11 दिनों तक कार्यक्रम के आयोजन करने की अनुमति की माँग की थी। महानगरपालिका की अनुमति के विरोध में अंजुमन-ए-इस्लाम नाम के मुस्लिम संगठन ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका देकर निर्णय रद्द करने का आग्रह किया था। हालाँकि, कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट का आदेश आने के बाद महानगरपालिका के आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी ने अनुमति पत्र आयोजन करने वाले मंडल के सदस्यों को सौंप दिया। हालाँकि, आयोजन की अनुमति मात्र तीन दिनों के लिए ही दी गई है। ईदगाह मैदान को लेकर लम्बे समय से विवाद होता आया है। अंजुमन इस्लाम इस जमीन पर 999 वर्षों के लीज का दावा करती है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ 1992 में भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद ने तिरंगा लहराने के प्रयास किए थे। अंजुमन-ए-इस्लाम ने इस आपत्ति जताई थी। उस दौरान राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और उसने इसकी अनुमति नहीं दी थी। वर्ष 1994 में भी कर्नाटक सरकार ने भाजपा नेता उमा भारती को तिरंगा लहराने से रोकने के लिए शहर में कर्फ्यू लगा दिया था। इसके बाद हुए दंगों में कई मृत्यु हुई थी।

अंजुमन-ए-इस्लाम का कहना है कि उसे वर्ष 1921 में इस मैदान की 999 सालों की लीज मिली थी, परन्तु 2010 में कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस जमीन का मालिक हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका को माना था और अंजुमन का मालिकाना हक खत्म कर दिया था। तब से इसका उपयोग पार्किंग और बाजार लगाने के लिए किया जा रहा है।

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अरबी पढ़ाने के नाम पर आतंक की ट्रेनिंग, 30 ठिकानों पर NIA की छापेमारी: तमिलनाडु, तेलंगाना में ISIS के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, DMK पार्षद के पति से भी पूछताछ

भारत के दक्षिण क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के ट्रेनिंग सेंटरों का पर्दाफाश राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर रही है। इसके तहत एनआईए ने शनिवार (16 सितंबर, 2023) की सुबह तमिलनाडु और तेलंगाना में लगभग 30 संदिग्ध आईएसआईएस सेंटर्स पर छापेमारी शुरू की।

ISIS कट्टरपंथ और भर्ती मामले में एनआईए ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में 21, चेन्नई में 3, तेनकासी में 1, तेलंगाना में हैदराबाद/साइबराबाद में 5 जगहों पर छापेमारी की।

बीते साल कोयंबटूर में कार बम धमाका हुआ था। इस मामले में ISIS मॉड्यूल के ताजा सबूत मिलने के बाद इससे जुड़े लोगों की अचल संपत्तियों पर NIA ये छापेमारी कर रही है। इसका संबंध कोयंबटूर के संदिग्धों से हो सकता है। गौरतलब है कि देश के दक्षिणी राज्यों में ISIS और उसके कारिदें युवाओं को अपने जाल में फँसा कट्टर इस्लामिक आतंकवाद के लिए हथियार बना रहे हैं। बीते साल कोयंबटूर में कार बम धमाका कर इन्होंने दहशत फैलाने की कोशिश की थी। NIA अब इन आतंकियों पर शिकंजा कस रही है।

भारतीय और विदेशी मुद्रा सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त

तमिलनाडु के कोयंबटूर में, एनआईए की तलाशी कोवई अरबी कॉलेज के आसपास केंद्रित रही। कॉलेज में पढ़ाई करने वालों और इससे जुड़े लोगों के घर एनआईए की जाँच के दायरे में आ गए हैं। कोयंबटूर निगम डीएमके पार्षद के पति से भी पूछताछ की गई। हालाँकि, एनआईए के अधिकारी पूछताछ के बाद कुछ ही घंटों में पार्षद के घर से चले गए।

NIA ने इस छापेमारी में भारतीय और विदेशी मुद्रा के नोटों सहित कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए। एनआईए के सूत्रों मुताबिक, “तलाशी के दौरान भारतीय मुद्रा में 60 लाख रुपए और 18,200 अमेरिकी डॉलर के अलावा स्थानीय और अरबी भाषाओं में कई आपत्तिजनक किताबें भी जब्त की गईं।” यह मामला “भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए कुछ लोगों के एक समूह के गुप्त अभियान से जुड़ा है।

अरबी भाषा क्लास के बहाने कट्टरपंथ की पढ़ाई

एनआईए के अधिकारियों ने कहा, “उनके क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों में अरबी भाषा की कक्षाएँ आयोजित करने की आड़ में कट्टरपंथी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। इस तरह की कट्टरपंथी गतिविधियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप्प और टेलीग्राम जैसे मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए से ऑनलाइन प्रसारित किया जा रहा था।

एनआईए की जाँच से पता चला है कि आईएसआईएस से प्रेरित एजेंट खिलाफत विचारधारा का प्रचार कर रहे थे। ये विचारधारा भारत के धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के संवैधानिक रूप से स्थापित सिद्धांतों के लिए हानिकारक है।

एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक, “मामले में शामिल लोगों ने युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने की साजिश रची थी, जो बाद में आतंकवादी और गैर-कानूनी कामों और गतिविधियों में शामिल पाए गए। ऐसा ही एक आतंकी हमला अक्टूबर 2022 के कोयंबटूर कार बम विस्फोट से जुड़ा है।”

प्राचीन मंदिर के सामने आतंकियों ने किया था बम धमाका

एनआईए ने सितबंर की शुरुआत में कोयंबटूर के आईएसआईएस से प्रेरित 2022 के कार आईईडी बम विस्फोट आतंकी हमले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। इसकी पहचान मोहम्मद अजरुद्दीन उर्फ अजर तौर पर हुई। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला 13वां शख्स था। एनआईए ने 27 अक्टूबर 2022 को मामला अपने हाथ में लिया और फिर से मामला दर्ज किया।

बीते साल ये धमाका कोयंबटूर के उक्कदम में ईश्वरन कोविल स्ट्रीट पर एक प्राचीन मंदिर अरुल्मिगु कोट्टई संगमेश्वर थिरुकोविल के सामने 23 अक्टूबर को हुआ था। कार में मौजूद इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस को मृतक आरोपी जेम्सा मुबीन चला रहा था।

मुबीन और उसके सहयोगी ने स्वयंभू खलीफा अबू-अल-हसन अल-हाशिमी अल-कुरैशी के लिए ‘बायथ’ या शपथ ली थी। इसके बाद से ही वो साजिश रचने और आतंकी कामों अंजाम देने के लिए कट्टर ISIS विचारधारा के हिसाब से काम कर रहे थे। एनआईए की जाँच के मुताबिक, आरोपितों का इरादा इस आतंकी हमले के जरिए ‘काफिरों (इस्लाम को न मानने वाले) से बदला’ लेने का था।

एनआईए ने अब तक इस मामले में एनआईए कोर्ट, पूनामल्ली, चेन्नई में दो आरोपपत्र दायर किए हैं। इस साल 20 अप्रैल को छह आरोपितों और इसी साल 2 जून को 5 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था। 12वें आरोपी मोहम्मद इदरीस को इसी साल 2 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।

सिख परिवार में जन्म, अब करती हैं येशु-येशु: जानिए कौन है अभिनेत्री सोनम बाजवा, कहती है – येशु ने मेरा दिल चुरा लिया, ईसाई मजहब को करती हूँ फॉलो

पंजाबी फिल्मों की अभिनेत्री सोनम बाजवा सोशल मीडिया एक्स पर ट्रेंड कर रही हैं। हालाँकि, वह पंजाबी इंडस्ट्री और सोशल मीडिया अपनी बोल्ड तस्वीरों और अदाओं से पहले से ही काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा का कारण उनका ईसाई होना बताया जा रहा है। एक्स पर ऐसे कई पोस्ट हैं जिनमें उनके क्रिप्टो क्रिश्चियन होने का दावा किया जा रहा है। 

सोशल मीडिया एक्स पर उज्जल राय ने लिखा, “यह सोनम बाजवा है। वह एक क्रिप्टो ईसाई है। उसके पुराने पोस्ट देखें, यीशु के बारे में सैकड़ों पोस्ट हैं। हमें ऐसे नए धर्मान्तरित ईसाइयों के प्रति जागरूक होना होगा।”

दरअसल, सोनम बाजवा के कई पुराने पोस्ट वायरल हो रहे हैं। जिसमें वह जीसस के प्रति अपना प्रेम जाहिर कर रही हैं। एक पोस्ट में कहती है, “मैं ईसाई मजहब को फॉलो करती हूँ लेकिन मैं ईसाई नहीं हूँ। मेरा उनसे एक खास रिश्ता है न कि मजहब से।”

पैनफैक्ट नाम के एक्स हैंडल ने एक साथ उनके कई पुराने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “”सोनम बाजवा – यीशु ने मेरा दिल चुरा लिया, मैं यीशु का ऋणी हूँ। ऐसा माना जाता है कि उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था। सोनम बाजवा (सोनमप्रीत कौर बाजवा) का जन्म उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक सिख परिवार में हुआ था लेकिन उनकी ईसा मसीह पर गहरी आस्था है।”

वहीं स्क्विंट निऑन नाम के एक्स हैंडल ने कई तस्वीरें शेयर करते हुए पोस्ट किया, “सोनम बाजवा फाइल्स: वह पादरी अंकित सजवान को अपना आध्यात्मिक पिता मानती हैं। अंकित सजवान वही “बोलने लगी” वाला पादरी हैं जिनके खिलाफ एफआईआर हुई थी। फिर भी उसने दिल्ली के सीएम केजरीवाल से मुलाकात की और बड़े पैमाने पर लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए पूरा तालकटोरा स्टेडियम बुक कर लिया।”

इसके अलावा भी सोशल मीडिया पर कई पोस्ट लोग शेयर करते हुए उनके क्रिश्चियन होने का दावा कर रहे हैं। कुमार नाम के हैंडल ने पोस्ट किया, “राइस बैग का एक और कमाल!” साथ में उन्होंने सोनम के कई पुराने पोस्ट को साझा किया है।

सोशल मीडिया पर लोग सोनम बाजवा को ट्रोल कर रहे हैं जिसे आप नीचे दिए गए पोस्ट में देख सकते हैं।

कौन है सोनम बाजवा 

सोनम बाजवा पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम है। पंजाबी फिल्मों के लिए सोनम सबसे ज्यादा रकम लेने वाली अभिनेत्रियों में शुमार है। मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली अभिनेत्री सोनम बाजवा का जन्म 16 अगस्त, 1989 को उत्तराखंड के नानकमत्ता में एक सिख परिवार में हुआ था। उस वक्त ऊधमसिंह नगर नैनीताल जिले का हिस्सा था। सोनम की शुरूआती शिक्षा रुद्रपुर में हुई है। वहीं स्कूली पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करते हुए मॉडलिंग स्टार्ट कर दिया था। हालाँकि, उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,अभिनेत्री सोनम बाजवा के पिता एक शिक्षक और उनकी माता रितु बाजवा भी एक अध्यापिका है और इसके साथ ही उनके जुड़वा भाई का नाम जयदीप बाजवा है। सोनम ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 2013 के दौरान फिल्म ‘बेस्ट ऑफ लक’ से की। इस फिल्म में उन्होंने गाँव की मासूम छोरी बनकर हर किसी का दिल जीत लिया था। इसके बाद उन्होंने 2014 में ‘पंजाब 1984’ फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ डेब्यू किया था। पंजाबी फिल्मों के साथ ही सोनम तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी डेब्यू कर चुकी हैं।

गौरतलब है कि सोनम जल्द ही दिलजीत दोसांझ के साथ अपनी नई फिल्म रन्ना च धन्ना में दिखने वाली हैं। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शहनाज गिल और सोनम बाजवा हैं। इससे पहले साल 2021 में रिलीज हुई फिल्म ‘हौसला रख’ में भी ये तीनों सितारे एक साथ नजर आए थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान, माँ सीता को अपशब्द… महाराष्ट्र के सतारा में यूँ ही नहीं हुआ था बवाल, हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान ‘ईशनिंदा’ नहीं?

(यह लेख किसी भी तरह की हिंसा को सही ठहराने या बढ़ावा देने के लिए नहीं है। यह केवल उन तथ्यों को बताने के लिए है कि महाराष्ट्र के सतारा जिले में हाल ही में हुई हिंसा की वजह क्या थी)

महाराष्ट्र में सतारा जिले के पुसेसावली गाँव में हुई हिंसा से क्षेत्र में दहशत फैल गई है और कानून-व्यवस्था के हालात बिगड़ गए हैं। यह हिंसा 10 सितंबर 2023 की रात को शुरू हुई और अगले दिन भी जारी रही। इस दौरान गुस्साई भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने कई स्थानीय लोगों की दुकानों और घरों में आग लगा दी थी।

भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने लगभग 16-17 लोगों को चोटें पहुँचाई हैं। पुलिस ने घटना का संज्ञान लेकर 28 नामजद और 100 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया है। इस मामले में कुल चार मुकदमे दायर किए गए हैं, जिनकी प्रतियाँ ऑपइंडिया को मिली हैं। यहाँ हम आपको यहाँ बताने जा रहे है कि इसकी असली वजह क्या थी?

हिंसा किस वजह से भड़की?

मीडिया में आई कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रविवार 10 सितंबर को पुसेसावली गाँव में हिंसा के दौरान और उसके बाद क्या हुआ। हम इस रिपोर्ट में बताएँगे कि उस क्षेत्र में पहली बार हिंसा किस वजह से शुरू हुई, जिसकी वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के एक शख्स की मौत हो गई। सतारा के डीएसपी ने ऑपइंडिया से इस बात की पुष्टि की है।

फोटो खास तौर पर ऑपइंडिया ने प्राप्त की है

ऐसा कहा जा रहा है कि ये सब 18 अगस्त को शुरू हुआ। सतारा के औंध पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 295 ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, किसी के धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) के तहत एक शिकायत दर्ज की गई थी।

इस शिकायत में जिक्र किया गया कि पुसेसावली के आदिल बागवान और एक अन्य शख्स, जिसका इंस्टाग्राम आईडी ‘officialsaffu80’ है, ने सोशल मीडिया पर भगवान राम और देवी सीता के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट की थीं।

ऑप इंडिया की प्राप्त की गई एफआईआर की कॉपी

इसमें देवी सीता को गलत बताते हुए और रावण द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार करने की बात कहते हुए उन पर अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। यह टिप्पणी मोटे तौर पर हिंदी में ‘यह सनातन धर्म की पहचान है’ पढ़ी गई। इस टिप्पणी से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई थीं और सनातन धर्म का अपमान हुआ था।

स्थानीय हिंदुओं ने इस घटना का संज्ञान लिया और पुसेसावली के आदिल और इंस्टाग्राम अकाउंट आईडी ‘officialsaffu80’ वाले एक अन्य शख्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। शिकायत में साफ जिक्र किया गया कि आरोपितों ने गाँव में सांप्रदायिक तनाव और हिंदू एवं मुस्लिम समुदायों के बीच खाई पैदा करने की जानबूझकर ये कोशिश की थी।

आरोपित मुस्लिमों की अपमानजनक पोस्ट का सिलसिला रहा जारी

इसके बाद 10 सितंबर को अल्तमश बागवान ने अपनी इंस्टाग्राम आईडी ‘al.tamash2069’ से सोशल मीडिया पर एक अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की। इसमें भी देवी सीता का अपमान किया गया था। इस भयानक टिप्पणी ने कट्टर मुस्लिमों की मानसिकता की पोल खोल कर रख दी कि वो भारत में इस्लाम का राज कायम करने को किस तरह बेताब हैं।

फोटो खास तौर पर ऑपइंडिया ने प्राप्त की है

इसके अलावा एक शख्स मुज़्ज़मिल बागवान ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इस टिप्पणी में महाराष्ट्र के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज को कायर कहा गया था। इससे आहत होकर स्थानीय ग्रामीणों ने अल्तमश और मुज्जमिल के खिलाफ IPC की धारा 153ए और 295ए के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

10 सितंबर को झड़प एक की मौत

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर 10 सितंबर को पुसेगांव क्षेत्र में झड़पें हुईं। इसमें एक शख्स की मौत हो गई। सतारा पुलिस ने छत्रपति शिवाजी महाराज और माता सीता का अपमान करने वाली आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले आरोपितों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

इस बीच, एक स्थानीय दैनिक अखबार तरुण भारत के पत्रकारों में से एक सरफराज ने तीसरी शिकायत दर्ज की। इसमें 28 लोगों के साथ ही 100 अन्य अज्ञात लोगों पर गाँव में हिंसा पैदा करने का आरोप लगाया गया।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त की गई एफआईआर की कॉपी

आईपीसी की धारा 302, 307, 324, 141, 143, 147, 148, 149, 427, 435, 449 और 450 के तहत ये शिकायत दर्ज की गई। इसमें शिकायतकर्ता ने कहा कि 28 लोग इलाके में मस्जिद के पास इकट्ठा हुए थे और कथित तौर पर उन्होंने मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए आए अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों पर हमला किया था।

इस शिकायत में यह भी कहा गया कि भीड़ ने लाठी, डंडों और पत्थरों से हमला किया और मस्जिद के पास के इलाके में खड़े वाहनों में आग लगा दी। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि भीड़ ने पुलिस जीपों पर हमला किया और गाँव के अंदर कानून व्यवस्था बदहाल कर डाली।

इस हिंसा के दौरान 32 साल के नुरुल हसन लियाकत शिकलगर की जान चली गई। इस मामले में शिकायत के आधार पर पुलिस ने 23 संदिग्धों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने मामले की जाँच के लिए इनकी 7 दिन की पुलिस हिरासत की माँग भी की।

वकील की दलील – संदिग्धों का घटना से नहीं था कोई लेना-देना

अदालत को बताया गया 23 संदिग्धों को पुलिस ने केवल संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया था और प्रथम दृष्ट्या संदिग्धों अपराध में किसी भी तरह की संलिप्तता सामने नहीं आई है। संदिग्धों के वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपित आदतन अपराधी नहीं हैं और मौजूदा अपराध को लेकर उनसे कुछ भी बरामद नहीं किया गया है।

आरोपित पुसेसावली के रहने वाले हैं और वे 10 सितंबर की रात को क्या हुआ था, केवल ये देखने के लिए घटनास्थल पर गए थे। वकील ने कहा कि वो मस्जिद में नहीं गए थे और न ही उनको कथित अपराध से जोड़ा जा सकता है। हालाँकि कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस घटना से लगभग 5000 घरों वाले गाँव में संपत्ति और कानून व्यवस्था को नुकसान पहुँचा है। कोर्ट ने संदिग्धों की चार दिनों की पुलिस हिरासत का आदेश दिया।

जिला प्रशासन ने सोमवार (1) तड़के से ही जिले में इंटरनेट बंद कर दिया था। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा भी लागू की थी। बताया जाता है कि पुलिस ने घटना में दर्ज तीसरी पुलिस शिकायत के आधार पर 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

पैंगबर का अपमान गलत तो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कैसे सही?

हमारा ये लेख किसी भी तरह की हिंसा को जायज ठहराने और बढ़ावा देने के लिए नहीं है, लेकिन हाल में सतारा में हुई हिंसा को लेकर साफ तथ्यों और वजहों को लेकर है। मुख्यधारा की मीडिया रिपोर्टों में जोर-शोर से इस बात का जिक्र किया गया कि हिंसा की वजह कुछ ‘कथित’ अपमानजनक, आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट रही।

इनमें दावा किया गया कि युवक की मौत हिंसा में एक “ऐतिहासिक शख्सियत और पौराणिक चरित्र” के बारे में एक ‘आपत्तिजनक’ पोस्ट को लेकर हुई। यहाँ ये बात गौर करने लायक है कि भगवान राम और देवी सीता हिंदुओं के पूज्य हैं, लेकिन पक्के तौर पर वो पौराणिक पात्र नहीं हैं जैसा कि मेन स्ट्रीम मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया है।

हिंदू देवी-देवताओं और महाराष्ट्र के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करना ईशनिंदा से कम नहीं है। जब दुनिया भर में इस्लामवादी ईशनिंदा पर कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने वाले शख्स की मौत की माँग करते हैं।

उन्होंने इसे लेकर पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा, कमलेश तिवारी, महाशय राजपाल, किशन भरवाड, हर्ष, श्रीलंकाई के प्रियंता कुमारा, कन्हैया लाल के मामले में ऐसा किया है और इसमें दो राय नहीं की ये लिस्ट बढ़ती रहेगी। यदि पैगंबर मुहम्मद का अपमान करना पाप माना है तो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना पाप है। यह एक अनैतिक काम है और इसकी भी देश और दुनिया भर में निंदा की जानी चाहिए।

इस्लामवादियों का दावा है कि इस्लाम शांति का धर्म है, लेकिन हिंदू धर्म है तो सबसे शांतिपूर्ण धर्म है, क्योंकि यह हिंदू देवताओं के अपमान पर भी ‘सर तन से जुदा’ की माँग नहीं करता है बल्कि न्याय पाने के लिए कानून की मदद लेता है।

इसका सबूत इस मामले में हिंदुओं की तरफ से दर्ज कराई गई दो एफआईआर हैं, जो कुछ स्थानीय लोगों ने आरोपित मुस्लिमों की अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट करने के बाद दर्ज कराई थी। कोई भी हिंदू सीधे सिर तन से जुदा करने नहीं निकला था। हालाँकि, गाँव में हिंसा भड़क उठी, जिसमें अज्ञात उन्मादी भीड़ ने गाँव में कानून व्यवस्था के हालात को बिगाड़ दिया और इससे एक शख्स की की मौत हो गई।

बताया गया कि भीड़ में से कुछ अज्ञात लोगों ने स्थानीय ग्रामीणों के घरों और दुकानों में भी आग लगा दी। इसे लेकर पुलिस 23 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, लेकिन उनके वकील ने कहा था कि वो लोग सिर्फ यह देखने के लिए घटनास्थल पर गए थे कि 10 सितंबर की रात को क्या हुआ था।

स्थानीय लोगों का दावा न्याय के लिए लिया था कानून का सहारा

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया से इस बातचीत में कहा कि लोगों ने न्याय पाने का कानूनी तरीका अपनाया गया था। उनका कहना है कि मुसलमानों ने हमला किया। उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 18 अगस्त को देवी सीता का अपमान करने वाली पहली पोस्ट वायरल होने के बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा था।

इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर पुलिस की मौजूदगी में एक छोटा सा विरोध प्रदर्शन भी किया। पुलिस ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया की कि ऐसी कोई घटना दोबारा नहीं होगी।

हालाँकि, लगभग 10 दिनों के अंतराल के अंदर ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर छत्रपति शिवाजी महाराज और देवी सीता का अपमान को लेकर की गई। स्थानीय लोगों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार भी एक पुलिस शिकायत दर्ज की गई।

इस बीच एक दूसरे स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि घटना के दिन कुछ पत्रकारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस को यह नहीं बताया कि मुस्लिमों की भीड़ ने भी हमला किया था। उन्होंने कहा, “कुछ भी एकतरफा नहीं है।

कथित तौर पर, पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 353 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की है। 15 अन्य गिरफ्तारियाँ भी की गई हैं। इलाके में शांति कायम रहे इसके लिए गाँव में पुलिस की गश्त जारी है। इंटरनेट और अन्य सेवाएँ बहाल कर दी गई हैं। आगे की जाँच चल रही है।