कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकर में मंत्री डी सुधाकर पर एक दलित महिला ने मारपीट और जातिसूचक गालियाँ देने का आरोप लगाया है। डी सुधाकर पर इस मामले में बेंगलुरु के येलाहांका थाने में मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने दलित उत्पीड़न के इस मामले में सुधाकर को राहत देते हुए पुलिस की आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
FIR में पीड़िता ने कहा है कि मंत्री सुधाकर अपने 35-40 साथियों के साथ 9 सितम्बर 2023 को बेंगलुरु के येलाहांका इलाके की KHB कालोनी में स्थित एक आवासीय प्लाट पर जेसीबी लेकर पहुँचे थे। उस दौरान पीड़िता घर पर मौजूद नहीं थी। इसके बाद मंत्री और उनके गुर्गों ने इस प्लॉट में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
पीड़िता ने आगे बताया है कि इसके बाद जब उसे इस संबंध में पता चला और वह घटनास्थल पर विरोध करने पहुँची तो उसकी बेटी के साथ मारपीट की गई और मंत्री ने उन्हें जातिसूचक गालियाँ दीं। इस मामले का एक कथित वीडियो भी वायरल हुआ है। पीड़िता ने इस जानकारी को पड़ोसी थाने में दर्ज करवाया, लेकिन पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।
डी सुधाकर (चित्र साभार: द न्यूज मिनट)
पीड़िता का कहना है कि उसकी इस जमीन की फर्जी रजिस्ट्री तैयार करवाई गई है। मंत्री सुधाकर का वीडियो वायरल होने और उनके ऊपर FIR दर्ज होने के बाद भी उनको कॉन्ग्रेस नेता और राज्य के मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री बचा रहे हैं। जहाँ मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस मामले को गृह मंत्री के साथ बैठक करके टालने का प्रयास किया तो वहीं उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पूरे मामले को ही झूठा बता दिया।
डी सुधाकर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में सांख्यकी और कार्यक्रम कार्यान्वन मामलों के मंत्री हैं। वह कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले की हिरियुर सीट से विधायक हैं। सुधाकर पर लगे आरोपों के बाद विपक्ष ने उनसे इस्तीफ़ा माँगा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बसावराज बोम्मई ने कहा है कि कॉन्ग्रेस दलित कल्याण की बात करती है, लेकिन उसके मंत्री दलित विरोधी हैं।
राज्य के दूसरे प्रमुख विपक्षी दल जेडी(एस) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी इस मामले पर कॉन्ग्रेस सरकार की आलोचना की है। उन्होंने भी डी सुधाकर के इस्तीफे की माँग की है। सुधाकर ने इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उन्हें राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामले पर अंतरिम रोक लगा दी है।
भारत और श्रीलंका के बीच 17 सितंबर 2023 को दोपहर 3 बजे से एशिया कप का फाइनल खेला जाना है। इसके लिए दोनों में पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन अगर मौसम बेईमान हुआ तो सारी तैयारियाँ बारिश की भेंट चढ़ जाएँगी। ऐसे में सवाल यह है कि अगर मैच में बारिश हुई तो फाइनल किसके नाम होगा?
दरअसल, एशिया कप का फाइनल कोलंबो के आर प्रेमदास स्टेडियम में होना है। मौसम की जानकारी देने वाली वेबसाइट एक्यूवेदर की मानें तो कोलंबो में बारिश होने की 90% आशंका है। अगर टॉस के बाद किसी तरह मैच शुरू हो जाता है तो भी दिनभर बूँदा-बाँदी और तेज बारिश हो सकती है। कोई भी वनडे मैच का रिजल्ट पाने के लिए दोनों टीमों का कम-से-कम 20 ओवर बल्लेबाजी करना जरूरी है।
हालाँकि, बारिश की आशंका के बीच अच्छी खबर यह है कि फाइनल के लिए अगले दिन यानि 18 सितंबर 2023 को रिजर्व डे रखा गया है। यानि कि मैच जहाँ से खत्म होगा, अगले दिन वहीं से शुरू होगा। जैसा कि भारत-पाकिस्तान मैच में भी हुआ था।
इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि रिजर्व डे में भी 80% बारिश होने की आशंका है। यूँ तो पूरा एशिया कप बारिश के साए में हुआ है, लेकिन फाइनल बारिश के चलते धुलने से दोनों टीमों के प्लेयर्स के साथ ही क्रिकेट फैंस को भी निराशा हाथ लग सकती है।
अगर मैच नहीं हुआ तो क्या होगा?
तमाम बातों के बाद आखिरकार सवाल वही है कि अगर 17 और 18 सितंबर दोनों दिन बारिश होती रही, यानि कि अगर रिजर्व डे में भी मैच पूरा नहीं हो पाया तब एशिया कप का विजेता कौन होगा? ऐसी स्थिति में वही होगा, जो 21 साल पहले साल 2002 में हुए चैंपियंस ट्रॉफी में हुआ था।
तब भी फाइनल में भारत और श्रीलंका आमने-सामने थे। बारिश के चलते मैच नहीं हो सका था। इसके बाद दोनों टीमों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया था। बारिश होने की स्थिति में इस बार भी भारत और श्रीलंका संयुक्त विजेता होंगे।
प्रधाममंत्री नरेंद्र मोदी ने द्वारका में इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (IICC) का उद्घाटन किया, जिसे ‘यशोभूमि’ नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आज ‘विश्वकर्मा योजना’ भी शुरू की। प्रधानमंत्री ने द्वारका तक का सफर दिल्ली मेट्रो में तय किया और इस दौरान एक्सप्रेव-वे मेट्रो लाइन का लोकार्पण भी किया। यशोभूमि के उद्घाटन से पहले उन्होंने कलाकारों-शिल्पकारों से मुलाकात भी की और उनका हाल-चाल भी जाना।
यशोभूमि नाम से बनाए जा रहे इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (आईआईसीसी) का अभी पहला चरण ही पूरा हुआ है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi dedicates to the nation, the Phase 1 of India International Convention and Expo Centre (IICC), called ‘YashoBhoomi’, at Dwarka. pic.twitter.com/inNBeN3SvJ
दिल्ली के द्वारका में बना ‘यशोभूमि‘ कन्वेंशन सेंटर कई आधुनिक सुविधाओं से लैस है। साइज में ये प्रगति मैदान में तैयार किए गए ‘भारत मंडपम’ से भी बड़ा है, जहाँ हाल ही में जी-20 से जुड़ी बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। ठीक वैसा ही कन्वेंशन सेंटर द्वारका में ‘यशोभूमि’ नाम से बनाया गया है, जिसके ग्रैंड बॉलरूम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में 2,500 मेहमान एक साथ शिरकत कर सकेंगे। यहां बॉलरूम के साथ ही बड़ा टाउन हाल भी है, तो एक ओपन एरिया भी है, जिसमें 500 लोग बैठ सकते हैं।
यशोभूमि को 8 मंजिला बनाया गया है, जिसमें 13 मीटिंग हाल हैं। यशोभूमि दुनिया के सबसे बड़े प्रदर्शनी हॉलों में से एक है। करीब 1.07 लाख वर्ग मीटर से अधिक एरिया में बने इन प्रदर्शनी हॉलों का उपयोग प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और व्यावसायिक कार्यक्रमों की मेजबानी के लिए किया जाएगा।
आज से विश्वकर्मा योजना की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर 2023) से विश्वकर्मा योजना की शुरुआत हो गई। पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से भाषण के दौरान इस योजना का ऐलान किया था। इस योजना के तहत कामगारों को 15000 रुपए का टूलकिट, साथ ही एक लाख रुपए का लोन 5 फीसदी ब्याज पर दिया जाएगा और पहला लोन चुकाने के बाद 2 लाख रुपए का लोन दिया जाएगा। इसका फायदा लाखों कामगारों को होगा।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को छाता तहसील के अधिकारियों को आदेश दिया कि बाँके बिहारी जी महाराज मंदिर की जिस जमीन को मुस्लिम कब्रिस्तान बता दिया गया है, उस जमीन से जुड़े राजस्व के कागजात में सुधर किए जाएँ। इसमें सुधार कर के इसे बाँके बिहारी मंदिर के नाम पर करने का आदेश दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ये फैसला सुनाया। मथुरा स्थित ‘श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट’ ने इस संबंध में याचिका दायर की थी।
इस याचिका में बताया गया था कि 2004 में राजस्व के रिकॉर्ड्स में बदलाव कर के उक्त जमीन को मुस्लिम कब्रिस्तान बता दिया गया था। 11 अगस्त, 2023 को छाता के तहसीलदार को मथुरा हाईकोर्ट ने इसका विवरण साझा करने का निर्देश दिया था। साथ ही पूछा था कि 2004 में आखिर कैसे इस जमीन का स्वामित्व बदल दिया गया, कागजात में छेड़छाड़ कैसे हुई। ट्रस्ट ने इस एंट्री को गलत बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि इसे दुरुस्त किया जाए।
‘श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट’ ने जानकारी दी थी कि ये पूरा मामला प्लॉट संख्या 1081 से जुड़ा हुआ है। ये भूमि प्राचीन काल से ही बाँके बिहारी मंदिर की रही है। भोला काला पठान ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर के इसे 2004 में कब्रिस्तान के रूप में पंजीकृत करवा दिया। मंदिर ट्रस्ट को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद आपत्ति दायर की गई। वक्फ बोर्ड के पास भी ये मामला पहुँचा। एक 7 सदस्यीय जाँच कमिटी ने भी पाया कि कागजात में अवैध छेड़छाड़ हुई है।
#BreakingNews | Allahabad High Court directs Mathura admin to restore graveyard land in the name of Banke Bihari Temple
इलाहाबद हाईकोर्ट ने ये आदेश भी दिया है कि 2 महीने के भीतर मंदिर को ये भूमि सौंप दी जाए। और पीछे जाएँ तो ये मामला 1991 तक जाता है, जब इस जमीन को तालाब के रूप में रजिस्टर किया गया था। ‘धर्म रक्षा संघ’ के राम अवतार गुर्जर भी इस मामले में हाईकोर्ट पहुँचे थे। ये जमीन शाहपुर गाँव में स्थित है। ये इलाका मथुरा से 60 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ कोई आता-जाता नहीं है, लेकिन चबूतरे के पास पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी रहती है।
यहाँ तक कि ग्रामीण भी मानते हैं कि ये बाँके बिहारी मंदिर का ही हिस्सा हुआ करता था, जिसे औरंगजेब के ज़माने में तोड़ डाला गया और फिर मुस्लिम इसे अपना कब्रिस्तान कहने लगे। ‘धर्म रक्षा संघ’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने फैसले पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि संगठन कई वर्षों से इस फर्जीवाड़े का विरोध कर रहा था। उन्होंने षड्यंत्रकारियों को सज़ा देने की भी माँग की। 1970 से ही इस 2.25 बीघा जमीन पर कब्जे की कोशिश इस्लामी कट्टरपंथी कर रहे हैं।
‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए राम अवतार गुर्जर ने बताया कि भोला पठान समाजवादी पार्टी का बूथ अध्यक्ष था और लेखपाल से मिल कर उसने पूरा षड्यंत्र रचा था। इतना ही नहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग बुलडोजर लेकर आए और चबूतरे के पास स्थित ऐतिहासिक कुएँ को भी तोड़ डाला था। जमीन पर कँटीले तार लगाए जाने लगे। बाँके बिहारी जी का सिंहासन तोड़ कर मजार बना दी गई। पूरा फर्जीवाड़ा कैसे किया गया, ग्रामीणों के पास इसका कागज भी मौजूद है।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में धर्मान्तरण का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ मजदूर तबके के एक हिन्दू युवक को पहले ईसाई बनाया गया और थोड़े समय बाद उसी युवक को इस्लाम कबूल करवाया गया। धर्मान्तरण की इन साजिशों में बीमारी से छुटकारा और ऑनलाइन गेम से लेकर हनी ट्रैप जैसी करतूत भी शामिल हैं। पुलिस ने शनिवार (16 सितंबर 2023) को घटना में शामिल एक मियाँ-बीवी को गिरफ्तार किया है। इनका नाम शौक़ीन और कमरबतून है।
घटना शामली जिले के थानाभवन थाना क्षेत्र की है। यहाँ के रहने वाले सूरज ने 15 सितंबर 2023 को पुलिस को फोन करके अपने खिलाफ धर्म परिवर्तन की साजिश की शिकायत की। सूरज के पिता की मौत 12 साल पहले हो चुकी है। सूरज कुल 5 भाई-बहन हैं। पिता की मौत के बाद उनकी माँ चंदो ने अपने देवर राजेंद्र से शादी कर ली थी। अक्सर बीमार रहने वाला राजेंद्र सभी बच्चों को लेकर पंजाब के एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। राजेंद्र की बीमारी ठीक करने के नाम पर उसी भट्ठे पर काम करने वालीं शामली की मूल निवासिनी कैलाशी ने उसे चर्च जाने की सलाह दी।
सूरज के मुताबिक, उसके पिता को खून की उल्टियाँ आती थीं। कुछ लोगों ने सूरज के मन में इसको लेकर भूत-प्रेत जैसे अन्धविश्वास डाल दिया। कैलाशी देवी सूरज के पूरे परिवार को लेकर चंडीगढ़ के कराली में स्थित मिनिस्ट्री चर्च ले गई, जहाँ का पादरी बलजिंदर है। यहाँ आराम के नाम पर सूरज के पूरे परिवार को 4 साल पहले ईसाई बनाकर उनके गलों में क्रॉस डाल दिया गया। इस बीच मोबाइल पर ऑनलाइन गेम फ्री फायर खेलने के दौरान सूरज की मुलाकात माही नाम की एक महिला से हुई। उसने खुद को दिल्ली की रहने वाली बताया।
माही ने सूरज को बताया कि वह ओखला में अपने मामा के यहाँ रहती है, क्योंकि उसकी माँ दुनिया में नहीं है। इसके साथ ही लड़की ने अपनी माँ के ईसाई और पिता के मुस्लिम होने की जानकारी दी। थोड़े समय की बातचीत के बाद माही और सूरज एक-दूसरे से शादी की कसमें खाने लगे। कुछ दिनों बाद माही ने खुद को बीमार बताया। इस पर सूरज ने उसे अपने साथ पादरी बलजिंदर के पास चंडीगढ़ चलने की सलाह दी। माही ने हामी भरी और शौक़ीन को लेकर सूरज के शामली स्थित गाँव मादलपुर आ गई।
सूरज के मुताबिक, गाँव में उसने माही का आधार कार्ड चेक किया तो उनका नाम कमरबतून निकला। हालाँकि सफाई देते हुए माही ने खुद को दोनों धर्मों को मानने वाली बताया। शौक़ीन और माही के साथ एक छोटी बच्ची भी थी। उसे शौक़ीन ने अपनी भाँजी बताया और कहा कि बहन की मौत के बाद वह उसे साथ ही रखता है। सूरज माही और बच्ची को लेकर चंडीगढ़ चर्च चला गया। इधर शौक़ीन सूरज के घर पर ही रुक गया। अगले दिन सूरज और माही चंडीगढ़ से लौटे। बाद में शौक़ीन और माही बच्ची को लेकर वापस दिल्ली लौट गए।
शिकायत में आगे बताया गया है कि कुछ दिनों बाद माही के बुलाने पर सूरज दिल्ली गया। यहाँ सूरज को शौक़ीन भी मिला। दोनों ने सूरज को लाल किला घुमाया और खातिरदारी करते हुए जामा मस्जिद ले गए। मस्जिद में दोनों ने सूरज को एक व्यक्ति से मिलवाया, जो हर बीमारी के इलाज का दावा कर रहा था। उस व्यक्ति ने ईसा मसीह को अपना नबी और अली को अपना अल्लाह बताया। आरोप है कि जामा मस्जिद में मिले व्यक्ति ने ईसाई मसीह के बजाय अल्लाह की इबादत करने की सलाह दी। यहीं पर सूरज को घर में क़ुरान सहित अन्य इस्लामी चीजें रखने और नमाज़ पढ़ने की सलाह दी गई।
खुद को पहले से परेशान बताते हुए सूरज ने माही और शौक़ीन की बातें मान ली। उसने नमाज़ पढ़ने के साथ अन्य इस्लामी तौर-तरीके सीखने और अपनाने शुरू कर दिए। इस बीच उसका नाम सूरज से असद रखने का दबाव बनाया जाने लगा। उसे इसी नाम से आधार कार्ड बनवाने के लिए भी कहा गया। सूरज का आरोप है कि माही और शौक़ीन ने असद नाम रखने पर उसका पासपोर्ट बनवा देने का भी भरोसा दिया। सूरज के अनुसार, जिस दिन उससे असद नाम के आधार कार्ड के फार्म पर दस्तखत करवाए जा रहे थे, उस दिन उसे बहला-फुसला कर करवाए जा रहे अपने धर्म परिवर्तन की साजिश का पक्का यकीन हो गया।
ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत के अनुसार, सूरज ने अपनी तरफ से यह भी पता लगा लिया कि जिस शौक़ीन को कमरबतून उर्फ़ माही अपना मामा बता रही थी, वो असल में उसका शौहर है। इसके साथ ही जिस छोटी बच्ची को शौक़ीन अपनी भाँजी बता रहा था वो असल में कमरबतून और शौक़ीन की ही बेटी है। शौक़ीन और माही मूल रूप से गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के निवासी हैं, जो फ़िलहाल दिल्ली के ओखला इलाके में रह रहे थे।
सूरज ने पुलिस को कॉल करके दोनों के अपने घर में होने की जानकारी दी। शामिल पुलिस ने घेराबंदी करते हुए शौक़ीन और माही को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपितों पर IPC की धारा 420, 467 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध 2021 की धारा 3/5 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। दैनिक जागरण के मुताबिक सूरज को इस्लामी मुल्क भेजने की भी साजिश रची जा रही थी। शामली जिले के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक इस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जाँच की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर से आतंक और आतंकवादियों का सफाया करने के लिए भारतीय सेना ने कमर कस ली है। सेना के 10 स्पेशलाइज्ड यूनिट इस अभियान में जुटे हैं। ड्रोन से बम बरसाया जा रहा है। जहाँ सेना का ऑपरेशन चलाया जा रहा है, उसके आसपास के जिलों को भी अलर्ट पर रखा गया है। 5 दिनों में सेना ने 4 बड़े सैन्य ऑपरेशन चलाए हैं।
अनंतनाग ऑपरेशन तो अभी भी जारी है। सेना और पुलिस के तीन अधिकारियों (एक कर्नल, एक मेजर और एक डीएसपी) की हत्या के पीछे छिपे आतंकवादियों की तलाश के लिए दक्षिण कश्मीर के इस इलाके में सेना डटी है। इस इलाके में बीते पाँच दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बीच शनिवार (16 सितंबर) को सेना को एक बड़ी कामयाबी बारामुला में हाथ लगी।
A Joint operation was launched today morning in Uri Sector. Contact established & firefight ensued. 03xTerrorists eliminated. 02xAK Rifles, 01xPistol, 07xHand Grenades, 01xIED and other war like stores along with Pak Currency Notes recovered.
नियंत्रण रेखा (LoC) के पास इस ऑपरेशन में भारतीय सेना और पुलिस ने तीन आतंकी मार गिराए। कश्मीर ज़ोन पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर बारामुला के उरी और हाथलंगा इलाके हुए इस एनकाउंटर की जानकारी दी। सेना के चिनार कोर ने इस पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मारे गए आतंकी के पास से पाकिस्तानी रुपया भी मिला है।
कट्टर इस्लामी मानसिकता वाले आतंकी जंगल वारफेयर की ट्रेनिंग लिए हुए हैं। इसी कारण से भारतीय सेना ने 10 स्पेशलाइज्ड यूनिट इस अभियान में उतारे हैं। आतंकियों के सफाए के लिए 4 बड़े सैन्य ऑपरेशन जो चलाए गए हैं, वो क्या-क्या हैं, आइए जानते हैं।
ऑपरेशन सुजलिगला
‘ऑपरेशन सुजालीगाला’ के दौरान राजौरी के नरला इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू करने के बाद हुई गोलीबारी में दो आतंकवादी मारे गए। इसी अभियान में एक राइफलमैन रवि कुमार ने अपना बलिदान दिया। जबकि तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे।
विशेष बलों के साथ भारतीय सेना के जवानों के नेतृत्व में यह ऑपरेशन 11 सितंबर को पतराडा के जंगल में शुरू किया गया था। संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर सुरक्षा बलों ने गोलियाँ चलाई थीं। इसके बाद आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच भयंकर झड़प हुई। लेकिन दोनों आतंकी अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाते हुए अपना सामान छोड़कर भागने में कामयाब रहे। 1-2 दिन के अंदर ही सेना-पुलिस ने दोनों को घेर कर मार गिराया।
#WATCH | Indian Army personnel pay last respects to Indian Army dog Kent, a six-year-old female labrador of the 21 Army Dog Unit. The canine soldier laid down her life while shielding its handler during the Rajouri encounter operation in J&K. Kent was leading a column of… pic.twitter.com/gAxkTusG33
VIDEO | Soldier Kent, a six-year-old female Labrador of the 21 Army Dog Unit, lost its life while while saving its handler during an encounter between the security forces and the terrorists in Jammu and Kashmir’s Rajouri on Tuesday.
इसके बाद खोज का दायरा बम्बल और नारला सहित आस-पास के क्षेत्रों तक बढ़ाया गया। इस ऑपरेशन में हताहतों में 21 आर्मी डॉग यूनिट की 6 साल की मादा लैब्राडोर केंट भी शामिल थी। अपने हैंडलर की रक्षा करते हुए उसने अपना बलिदान दिया था।
‘ऑपरेशन सुजलिगला’ के बारे में रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि एक संयुक्त अभियान में भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस (जेकेपी) ने 07 सितंबर 2023 से दो आतंकवादियों की गतिविधियों पर नजर रखी तथा उन्हें ट्रैक किया। उन्होंने बताया, “हमारे सैनिकों ने आतंकवादियों को घेर लिया और 12 सितंबर को भारी गोलाबारी हुई। इसमें एक आतंकवादी उसी रात मारा गया। खराब मौसम तथा प्रतिकूल इलाके के बावजूद, रात भर भारी गोलीबारी के बाद 13 सितंबर बुधवार की सुबह दूसरे आतंकवादी का पीछा किया गया तथा उसे भी मार गिराया गया।”
उनके मुताबिक, “आतंकी के पास से बड़ी मात्रा में जंगी सामान बरामद किया गया। इसमें पाकिस्तान के मार्क वाली दवाएँ भी शामिल हैं। 63 राजस्थान राइफल के एक सैनिक ने सर्वोच्च बलिदान दिया और एक एसपीओ के साथ तीन सैनिक घायल हो गए। सेना के एक डॉग केंट ने भी अपने हैंडलर की रक्षा में जान दे दी।”
हांजीवेरा बाला का आईईडी ऑपरेशन
सेना ने एक अन्य ऑपरेशन में उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में सोमवार (11 सितंबर) को इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) निष्क्रिय किया था। इसके कारण एक बड़ा हादसा टल गया था।
सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने एक्स पर पोस्ट किया, “चिनार वॉरियर्स और जम्मू -कश्मीर पुलिस ने बारामूला के हांजीवेरा बाला के पायनियर कॉलेज के पास एक आईईडी को बरामद कर और उसे नष्ट करके सोमवार को एक बड़ी आतंकी घटना को टाल दिया।” इसमें कहा गया कि सेना कश्मीर को आतंक मुक्त रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।
29 राष्ट्रीय राइफल्स को सोमवार सुबह रोड ओपनिंग प्रोसीजर (आरओपी) के दौरान पट्टन के हंजिवेरा इलाके में आईईडी मिला था। इसके बाद इलाके को तुरंत घेर लिया गया और व्यस्त राजमार्ग पर यातायात रोक दिया गया। बाद में एक बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुँचा और आईईडी को निष्क्रिय कर दिया गया। बाद में यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई।
ऑपरेशन गारोल
ऑपरेशन गैरोल एक खास सोर्स से मिले इनपुट पर अनंतनाग जिले के कोकरेनाग के गारोल के जंगलों में चलाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस इलाके में 12 सितंबर की शाम को आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन रात में इसे बंद कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि 13 सितंबर की सुबह आतंकवादियों की तलाश उन्हें एक ठिकाने पर देखे जाने की सूचना के बाद फिर से शुरू की गई। इस मुठभेड़ में सेना के कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष, जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।
इस अभियान के दौरान 14 सितंबर से लापता एक और सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। गोलीबारी के दौरान लगी चोटों के वजह से इनकी जान चली गई। इस अभियान में सेना के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी। कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष ढोंचक और डीएसपी हुमायूं मुजम्मिल भट्ट की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर आतंकवादी उजैर खान को सेना ने धर दबोचा। उसके साथी भी कोकरेनाग जंगल के क्षेत्र में फँस गए हैं।
इस संयुक्त अभियान में सुरक्षा बलों ने ड्रोन का इस्तेमाल कर संदिग्ध आतंकवादी ठिकानों पर ग्रेनेड गिराए।
सेना के उत्तरी कमान कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी अनंतनाग में कोकेरनाग वन क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन का जायजा लेते हुए (फोटो साभार एक्स हैंडल @NorthernComd_IA)
हेरॉन ड्रोन, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी), कार्ल गुस्ताफ एम4, रॉकेट लॉन्चर, आईईडी और क्वाडकॉप्टर कुछ ऐसे उपकरण हैं, जिनका इस्तेमाल सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित संयुक्त बल कर रहे हैं। ये ऑपरेशन जारी है और 17 सितंबर को पाँचवें दिन में प्रवेश कर गया है। भारतीय सेना ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं और वन क्षेत्र में ड्रोन तैनात कर दिए हैं। यहाँ आतंकवादी छिपे हुए हैं।
ऑपरेशन खांदा
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में नियंत्रण रेखा के पास शनिवार (16 सितंबर) को सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें तीन आतंकवादी ढेर किए गए। नियंत्रण रेखा के पास भारतीय सेना और बारामुला पुलिस का सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है।
आतंकियों को सबक सिखाने के इन सैन्य अभियानों में राज्य पुलिस भी सहयोग कर रही है। इसके तहत जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले में पुलिस के विशेष जाँच दल (एसआईयू) ने 13 आतंकवादी कमांडरों की संपत्तियाँ कुर्क की हैं।
पुलिस ने जानकारी दी कि राज्य जाँच एजेंसी (एसआईए) ने जम्मू संभाग के रियासी जिले के ऊपरी इलाकों में छापा मारा। इसमें कुछ ओवर-ग्राउंड वर्कर देश-विरोधी तत्वों को रसदी मदद और जानकारी दे रहे थे। इस तलाशी के दौरान कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
यूपी की योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े ट्रस्ट को अवैध रूप से ब्याज का भुगतान करने के मामले में जिला सहकारी बैंक के दो वरिष्ठ बैंक अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (16 सितंबर, 2023) को निलंबित किए गए दो बैंक अधिकारियों में उप महाप्रबंधक शकील अहमद और सचिव उपेन्द्र कुमार सारस्वत शामिल हैं। ये दोनों जिला सहकारी बैंक रामपुर के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हुई जाँच के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों पर आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी, जौहर ट्रस्ट और रामपुर पब्लिक स्कूल को अवैध तरीके से ब्याज का भुगतान करने का आरोप है। निलंबन के बाद दोनों अधिकारियों को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
जाँच में पता चला कि जिला सहकारी बैंक की जौहर यूनिवर्सिटी शाखा ने जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट के नाम से संचालित बैंक खातों को बचत खाता मान लिया। इसके बाद, शाखा ने जुलाई 2022 में जौहर विश्वविद्यालय को 17.58 लाख रुपए और जौहर ट्रस्ट को 2.18 लाख रुपए का ब्याज दिया।
इसके अलावा जिला सहकारी बैंक की डिग्री कॉलेज शाखा ने भी रामपुर पब्लिक स्कूल के नाम से संचालित खाते को बचत खाता मान लिया गया। इसके बाद, पब्लिक स्कूल को भी 3.67 लाख रुपए का ब्याज दिया। दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों अकाउंट समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
जबकि, नियमों के मुताबिक जिला सहकारी बैंक तीनों संस्थाओं द्वारा संचालित इन खातों को न तो बचत खाता मान सकता है और न ही इन पर ब्याज दे सकता है। ताज्जुब की बात यह है कि सरस्वती शिशु मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर, आर्य समाज और जिला पंचायत सहित कई अन्य संस्थाओं के भी जिला सहकारी बैंक में खाते हैं लेकिन, उन्हें बैंक से आजतक कोई ब्याज भुगतान नहीं मिला है। यहीं से गड़बड़ी का पता लगता है।
कैसे खुली पोल
बता दें कि यह मामला जब स्थानीय विधायक आकाश सक्सेना के संज्ञान में आया तो उन्होंने अपर मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर मामले की जाँच कराने की माँग की। वहीं जानकारी मिलने के बाद विधायक सक्सेना ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजी जिसके बाद एक जाँच समिति का गठन किया गया।
समिति ने अपनी जाँच में पाया कि ब्याज का भुगतान नियमों के विरुद्ध है। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार ने कार्रवाई करते हुए दोनों दोषी पाए गए बैंक अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और उन्हें मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी आयकर (आईटी) विभाग ने पूर्व कैबिनेट मंत्री के खिलाफ टैक्स चोरी की जाँच के संबंध में रामपुर में सपा नेता आजम खान के परिसरों पर छापेमारी की थी। तीन दिनों तक चली एजेंसी की छापेमारी कथित तौर पर जौहर ट्रस्ट से जुड़ी थी। इस मामले में भी 800 करोड़ रुपए की कर चोरी का अनुमान लगाया गया है।
संसद के विशेष सत्र शुरू होने के एक दिन पहले 17 सितंबर 2023 को नए संसद भवन के गजद्वार पर तिरंगा फहराया गया है। इसे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने फहराया है। आज 17 सितंबर को निर्माण के देवता विश्वकर्मा पूजा है। इसके साथ ही आज हैदराबाद मुक्ति दिवस है। संयोग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आज जन्मदिन है।
जब उपराष्ट्रपति गजद्वार पर तिरंगा फहरा रहे थे, उस लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला सहित तमाम नेता मौजूद थे। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल, कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी और प्रमोद तिवारी भी मौजूद रहे।
हालाँकि, विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा था कि इस समारोह के लिए उन्हें देर से न्यौता मिला। खरगे ने शनिवार (16 सितंबर 2023) को राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें समारोह का न्यौता 15 सितंबर को देर शाम को मिला था। खरगे का कहना है कि वह 16-17 सितंबर को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने के लिए हैदराबाद में हैं और रविवार की रात में लौटेंगे।
दरअसल, सोमवार (18 सितंबर 2023) से शुरू होने वाले पाँच दिवसीय संसद सत्र की कार्यवाही नए भवन में होने की उम्मीद है। इसके लिए नए संसद भवन में मंत्रियों के कमरों का बंटवारा भी किया जा चुका है। नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई 2023 को किया था।
जिन कैबिनेट मंत्रियों के कमरों का बंटवारा किया जा चुका है उनमें गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, अर्जुन मुंडा, विदेश मंत्री एस जयशंकर, धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी, अश्विनी वैष्णव शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अपर ग्राउंड फ्लोर पर स्मृति ईरानी को कमरा नंबर जी-8, अर्जुन मुंडा को जी-9, एस जयशंकर को जी-10, नरेंद्र सिंह तोमर को जी-11, निर्मला सीतारमण को जी-12, अश्विनी वैष्णव को जी-17, पीयूष गोयल को जी-30, नितिन गडकरी को जी-31, गृह मंत्री अमित शाह को जी-33, राजनाथ सिंह को जी-34 और धर्मेंद्र प्रधान को जी-41 आवंटित किया गया है।
बता दें कि पुराने संसद भवन में इन वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों का कार्यालय ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कमरों में था। सरकार के अन्य कैबिनेट मंत्रियों को नए संसद भवन में फर्स्ट फ्लोर पर कार्यालय के लिए कमरे का आवंटन किया गया है।
पहली मंजिल पर आरके सिंह को कमरा नंबर एफ- 16, किरेन रिजिजू को एफ-17, गजेंद्र सिंह शेखावत को कमरा नंबर एफ-18, पशुपति पारस को एफ-19, ज्योतिरादित्य सिंधिया को एफ-20, गिरिराज सिंह को एफ-36, वीरेंद्र कुमार को एफ-37, सर्बानंद सोनोवाल को एफ-38 और नारायण राणे को एफ-39 आवंटन किया गया है।
सरकार ने उधमपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदल दिया है। अब यह जंक्शन शहीद कैप्टन तुषार महाजन के नाम से जाना जाएगा। शनिवार (16 सितंबर, 2023) को केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में स्टेशन के इंट्री गेट का बोर्ड भी बदल दिया गया है। बोर्ड पर बलिदानी का नाम हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषाओं में लिखा गया है। कैप्टन तुषार साल 2016 में कश्मीर के पम्पोर इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए थे।
बता दें कि शासन स्तर पर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मंजूरी इसी माह 6 सितंबर को ही मिल चुकी थी। इस कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। शनिवार को केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह के साथ रेलवे बोर्ड और विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी इस मौके पर मौजूद थे। बोर्ड के साथ स्टेशन के अंदर भी हिंदी, इंग्लिश और उर्दू भाषा में शिलापट बनाए गए हैं। इन शिलापट में कैप्टन तुषार महाजने की वीरता के बारे में बताया गया है। इस मौके पर बोलते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने इस बदलाव को युवाओं में देश के लिए समर्पण को बढ़ाने वाला बताया।
#WATCH | Jammu and Kashmir: Udhampur railway station renamed as 'Martyr Captain Tushar Mahajan Railway Station' (16.09)
Captain Tushar Mahajan made the supreme sacrifice while fighting terrorists in J&K's Pampore, in 2016. pic.twitter.com/TVyIdSXVwy
डॉ जितेंद्र ने आगे बताया कि साल 2017 में उन्होंने ही उधमपुर स्टेशन का नाम बदल कर बलिदानी कैप्टन की स्मृति में रखने की माँग उठाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके ही व्यक्तिगत हस्तक्षेप से स्टेशन का नाम बदल पाया। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक उन्होंने इस कदम से कैप्टन तुषार को अमर करने का प्रयास किया है।
VIDEO: "युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा शहीद कैप्टन तुषार महाजन रेलवे स्टेशन"
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैप्टन तुषार महाजने के पिता एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल थे। तुषार बचपन से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे। वहीं उनके बचपन के दोस्त निशांत का कहना है कि स्कूल में एक बार उन्होंने आंतकियों पर तब निबंध लिखा था जब क्लास के अन्य छात्र ये सब जानते ही नहीं थे। इस निबंध में तुषार ने आतंकियों से लड़ने का संकल्प लिया था। पढ़ने में तेज तुषार 16 साल की उम्र में ही NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) की परीक्षा पास कर के सेना में भर्ती हो गए थे।
साल 2016 के फरवरी महीने में तुषार 9 पैरा मिलिट्री के साथ कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहे थे। इस दौरान पुलवामा के पम्पोर इलाके में आतंकियों से उनकी टुकड़ी की मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में तुषार ने एक आंतकी को मार गिराया। साथी जवानों की मदद के दौरान तुषार को 4 गोलियाँ लगीं। हालाँकि, उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया था लेकिन अधिक खून बह जाने के चलते इलाज के दौरान तुषार वीरगति को प्राप्त हो गए।
आज 17 सितंबर है यानी ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’। आज ही के दिन 1948 में निजाम के चंगुल से निकालकर हैदराबाद का भारत में विलय किया गया था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैदराबाद में स्थित परेड ग्राउंड में गए और निजाम की सेना और रजाकारों (निजाम के शासन के सशस्त्र समर्थक) के खिलाफ लड़ने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
#WATCH | Telangana: Union Home Minister Amit Shah inspects the parade during Hyderabad Liberation Day celebrations at Parade Ground. pic.twitter.com/2Xh1eDCsSl
15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिलने के पहले से ही निजाम हैदराबाद को एक स्वतंत्र मुल्क बनाने की कोशिश में था। निजाम मीर उस्मान अली खान ने 3 जून 1947 को फरमान जारी कर हैदराबाद को आजाद मुल्क घोषित कर दिया था।इसके बाद सरदार पटेल के नेतृत्व में कार्रवाई पर हैदराबाद को भारत में मिला लिया गया।
जब हैदराबाद को भारत में मिलाने की बातचीत चल रही थी, तब हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने भारत में विलय के आग्रह को खारिज कर दिया था। उसे रजाकारों के नेता कासिम रिजवी ने भरोसा दिया था कि हैदराबाद को मिलाने के लिए भारत किसी तरह की सैनिक कार्रवाई करता है तो उसके नेतृत्व में रजाकार भारती सेना का मुकाबला करेंगे।
भारतीय नेतृत्व को डराने के लिए कासिम के नेतृत्व में क्रूर रजाकारों और निजाम के सैनिकों ने राज्य के हिंदुओं पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, कासिम रिजवी ने धमकी दे डाली कि अगर भारत ने उस पर किसी तरह सैनिक कार्रवाई करने की कोशिश की तो उसे 1.40 करोड़ हिंदुओं की हड्डियों एवं राख के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। वीपी मेनन ने अपनी किताब ‘द इंटीग्रेशन ऑफ स्टेट्स’ में इसका जिक्र किया है।
रजाकारों के अत्याचारों को देखतेे हुए तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 13 सितंबर 1948 को ऑपरेशन पोलो शुरू किया और 17 सितंबर को हैदराबाद को भारत में मिला लिया। पाँच दिनों की कार्रवाई में 1373 रजाकार और हैदराबाद रियासत के 807 जवान मारे गए। वहीं, भारतीय सेना के 66 जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए।
अंत में निजाम और कट्टरपंथी मुस्लिमों के संगठन रजाकारों ने सरेंडर कर दिया। इसके बाद रिजवी को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लगभग एक दशक तक जेल में रखने के बाद कासिम रिजवी को इस शर्त पर रिहा कर दिया गया कि वह 48 घंटों में पाकिस्तान चला जाएगा। रिजवी को पाकिस्तान ने अपने शरण दे दी थी।
हैदराबाद मुक्ति आंदोलन को लेकर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपने स्पष्ट विचार रखे थे। उन्होंने कहा था कि निजाम के अत्याचारी शासन में रहने वाले लोगों ने निजाम के खिलाफ के बड़े आंदोलन को शुरू किया। इसमें कई हीरो ने अपने बलिदान दिए। डॉक्टर अंबेडकर के अलावा, शेड्यूल कास्ट फेडरेशन ने भी निजाम का खुलकर विरोध किया था।
उस समय फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष भाऊसाहेब मोरे ने दलित समुदाय को लेकर निजाम के खिलाफ पम्फलेट बाँटा था। उसमें कहा गया था, निजाम को उखाड़ फेंका जाना चाहिए और उसकी जगह एक लोकतांत्रिक सरकार बनाई जानी चाहिए। यह अंबेडकर के हर अनुयायी की नीति होनी चाहिए। दलितों को रजाकारों के साथ भी शामिल नहीं होना चाहिए।” यहाँ तक कि दलित नेता मोरे ने दलितों को मुस्लिम इलाके में भी जाने से मना किया था।
डॉक्टर अंबेडकर ने भी हैदराबाद के दलितों से अपील की थी। उन्होंने कहा था, “मैं एक ही बात कहना चाहता हूँ कि पाकिस्तान, निजाम और मुस्लिम लीग के मुस्लिमों पर विश्वास करना दलित समुदाय को नुकसान पहुँचाएगा। पाकिस्तान या हैदराबाद के दलितों को इस्लाम की ओर नहीं जाना चाहिए। उनका प्राथमिक उद्देश्य अपनी जीवन की सुरक्षा करना होनी चाहिए है।”
डॉक्टर अंबेडकर ने कहा कि हैदराबाद के दलित समुदाय को निजाम को स्वीकार नहीं करना चाहिए। डॉक्टर अंबेडकर ने आगे कहा था, “हमें भारत विरोधियों का साथ देकर अपने समुदाय के मुँह पर कालिख नहीं पोतना चाहिए।” डॉक्टर अंबेडकर के इस बयान का जिक्र धनंजय कीर ने अपनी पुस्तक ‘बायोग्राफी ऑफ डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर’ में किया है।
निजाम के खिलाफ डॉक्टर अंबेडकर ने पहली रैली 30 दिसंबर 1938 को कन्नड़ जिले के मक्रणपुर में आयोजित की गई थी। औरंगाबाद की इसी रैली में भाऊसाहब मोरे ने डॉक्टर अंबेडकर के पहले ‘जय भीम’ का नारा दिया था। इस रैली ने हैदराबाद मुक्ति आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी।
दरअसल, निजाम दलितों पर जुल्म की सीमा पार कर चुका था। निजाम का शासन हिंदुओं के प्रति अत्याचार के कुख्यात हो चुका था और उसके शासन को लेकर लोगों को विद्रोह पनपने लगा था। इसके कारण निजाम ने शेड्यूल कास्ट फेडरेशन के कई नेताओं की हत्या करवा दी। इसके विरोध में दलित नेताओं के समर्थन में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भी आए।
दलितों पर अत्याचार और उनके धर्मांतरण से बाबा साहेब को ठेस पहुँची। निजाम के शासन के अंतर्गत आने वाले मराठवाड़ा में दलितों की हालत और भी बदतर थी। दलितों के साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव होता था और उन्हें शिक्षा से भी वंचित रखा गया था। डॉक्टर अंबेडकर और सरदार पटेल के प्रयास मराठवाड़ा निजाम के चंगुल से मुक्त हो गया। इसके बाद वहाँ बड़े पैमाने पर स्कूल-कॉलेज खुले।
बताते चलें कि ये वही मराठवड़ा है जिसकी मुक्ति का विरोध असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के नेता करते है। मराठवाड़ा मुक्ति दिवस पर AIMIM के सांसद तिरंगा फहराने के कार्यक्रम से भी अनुपस्थित रहे। यह वही AIMIM है, जो रजाकारों की MIM से संबंधित है और ओवैसी के पूर्वज इससे जुड़े थे। इस तरह दलितों से अंतर्मन से घृणा करने वाले राजनीति के लिए ‘जय भीम जय मीम’ की बात कर रहे हैं।