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अयाज से निकाह के लिए अनामिका बनी ‘उजमा’, माँ बोली – नाम छिपा कर किया ‘लव जिहाद’: पुलिस ने कहा – मर्जी से गई लड़की, 8 साल से थे प्रेम संबंध

मध्य प्रदेश के जबलपुर से ‘लव जिहाद’ का एक मामला सामने आया है। यहाँ अनामिका दुबे नाम की लड़की के फातिमा बन कर निकाह के वायरल कार्ड पर हिन्दू संगठनों ने पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। लड़की की माँ ने भी कार्ड में छपे दूल्हे अयाज पर नाम बदल कर बात करने और खुद को धोखे में रखने का आरोप लगाया है। वायरल हो रहे कार्ड में निकाह की तारीख 7 जून दर्ज है। हालाँकि पुलिस ने अयाज को क्लीनचिट देते हुए दोनों यह निकाह दोनों परिवारों की मर्जी से होने की जानकारी दी है।

वायरल हो रहे कार्ड के मुताबिक, जबलपुर के अमखेरा इलाके की रहने वाली एक लड़की के मुस्लिम युवक से निकाह का कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अनामिका दुबे को ब्रेकेट में दिखा कर इस कार्ड में उनका पहला नाम उजमा फातिमा दिखाया गया। इसी कार्ड में दूल्हे के तौर पर अयाज का नाम है जिसके अब्बा रेलवे में कार्यरत बताए जा रहे हैं। निकाह के इस कार्ड के साथ अनामिका और अयाज का मैरिज सर्टिफिकेट भी वायरल हुआ है। इस सर्टिफिकेट को 3 गवाहों की गवाही के आधार पर जारी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कार्ड और मैरिज सर्टिफिकेट के वायरल होने पर हिन्दू संगठनों ने विरोध दर्ज करवाना शुरू कर दिया। गुरुवार (1 जून, 2023) को हिन्दू संगठनों का एक प्रतिनिधि मंडल जिले की एडिशनल एसपी से मिला और मामले को साजिश बताते हुए जाँच की माँग की। हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों ने पुलिस को ज्ञापन दे कर इसमें लड़की के धर्म परिवर्तन का भी आरोप लगाया। इस बीच संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने लड़की के परिवार से भी मुलाकात की।

बताया जा रहा है कि लड़की की माँ ने भी अयाज पर अपनी बेटी के साथ ‘लव जिहाद’ की साजिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने अपनी बेटी को अयाज के घर बताते हुए वापस अपने साथ भेजने की माँग की। अनामिका की माँ का आरोप है कि अयाज ने उनसे लम्बे समय तक नाम बदल कर बातचीत की थी। लड़की की माँ ने प्रशासन पर भी अपनी बेटी के निकाह की जानकारी खुद को न देने का आरोप लगाया।

पुलिस द्वारा लड़की की माँ के आरोपों का खंडन

हालाँकि, जबलपुर पुलिस ने लड़की के माँ के आरोपों का खंडन किया है और उन्हें सब कुछ पहले से पता होने की जानकारी दी है। जबलपुर पुलिस के मुताबिक, लड़की और लड़का लगभग 8 वर्षों से एक दूसरे से प्रेम करते थे। इन दोनों ने नवंबर 2022 में निकाह करने के लिए जिले के कलेक्ट्रेट ऑफिस में आवेदन दिया था। पुलिस का यह भी दावा है कि दोनों परिवारों ने इस दौरान निकाह के लिए सहमति दी। इस दौरान लड़की के घर वालों ने अपनी एक और बेटी की शादी का हवाला दे कर फरवरी 2023 तक बड़ी बेटी अनामिका की विदाई रोकने की शर्त रखी थी।

पुलिस ने आगे बताया कि फरवरी 2023 में अनामिका की छोटी बहन की शादी हो गई। इसके बाद अप्रैल 2023 में आपसी सहमति से अनामिका को उसकी ससुराल भेजा गया था। अयाज के घर भेजने के दौरान लड़की के घर वालों ने अनामिका को गिफ्ट आदि भी दिए थे। सारांश के तौर पर पुलिस ने बताया कि इस मामले में कोई अपराध होना नहीं पाया गया है। अयाज साथ निकाह रहना और उसके घर पर रहने को लड़की की मर्जी बताया गया। लड़की के परिवार वालों ने भी अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट कहीं दर्ज नहीं करवाई है।

ओडिशा के लोगों ने जुटा दिया 3000 यूनिट ब्लड, बचाव कार्य में ओडिशा के युवा-बुजुर्ग सब शामिल: राज्य में राजकीय शोक भी घोषित

ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में स्थानीय लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शुरुआती दौर में उन्होंने ना सिर्फ पीड़ितों को बाहर निकाला और उन्हें पानी पिलाया, बल्कि इसमें गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के लिए दिल खोलकर रक्तदान भी किया। इस हादसे में 260 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1000 के लगभग लोग घायल हैं। ओडिशा और ओडिशा में एक दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया गया है।

शुक्रवार (2 जून 2023) की शाम को बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी की टक्कर के बाद स्थानीय लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुँच गए। बालासोर जिले के रणजीत गिरी, बिप्रदा बाग, आशा बेहरा और अशोक बेरा सहित दर्जनों निवासी बहानगा बाज़ार स्टेशन पहुँचकर घायलों को बचाने में लग गए।

स्थानीय निवासी गिरी के अनुसार, “मैं शाम 7 बजे के आसपास अपने दोस्तों के साथ पास की एक चाय की दुकान पर था। अचानक मैंने तेज़ आवाज़ सुनी, जिसके बाद लोगों के रोने की आवाज़ आई। हम मौके पर पहुँचे और जो देखा उससे हम दंग रह गए। बिना समय गँवाए हमने घायलों को निकालना शुरू किया। हमने पुलिस और रेलवे अधिकारियों को भी सूचित किया।”

एक अन्य निवासी बाग ने बताया, “हमने कम से कम 50 घायल यात्रियों को बचाया और यात्रियों को स्थानीय अस्पताल तक पहुँचाने के लिए अपने वाहनों का इस्तेमाल किया। बचे हुए कुछ लोग अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे थे, लेकिन अंधेरा होने के कारण हम उनकी मदद नहीं कर सके।”

दुर्घटना की भीषणता को देखते हुए स्थानीय निवासी नजदीकी अस्पतालों में रक्तदान करने भी पहुँचे, ताकि जरूरतमंदों को खून की कमी के कारण जान ना गँवानी पड़े। अस्पतालों के बाहर रक्तदान करने वालों की लंबी लाइन लगी हुई है।

एससीबी मेडिकल कॉलेज, कटक के डॉक्टर जयंत पांडा ने बताया, “युवाओं से बहुत बड़ी प्रतिक्रिया मिल रही है। सैकड़ों लोगों ने रक्तदान किया। कटक, बालासोर और भद्रक में कल रात से अब तक 3000 यूनिट से अधिक रक्त एकत्र किया जा चुका है। हमने सीएम और पीएम राहत कोष में भी दान दिया है।”

वहीं, कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो रक्तदान नहीं कर पाने के कारण दुखी हैं। ऐसे ही शख्स हैं 60 वर्षीय अशोक बेरा रक्तदान करने अस्पताल गए। बेरा ने कहा, “मैं यहाँ रक्तदान करने आया था, लेकिन मेरी उम्र के कारण इसकी अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद मैंने अपने बेटों और रिश्तेदारों से अस्पताल पहुँचकर रक्तदान करने के लिए कहा।”

बेरा रक्तदान नहीं कर पाए, लेकिन वे अन्य तरीकों से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। बेरा हादसे में बचे लोगों से बात कर उन्हें सांत्वना दे रहे हैं और फोन पर उनके परिवारों से जुड़ने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ज्यादातर बचे लोगों ने अपने मोबाइल खो दिए हैं और वे अपने परिवारों से बात नहीं कर सके। मैंने यथासंभव मदद करते हुए उन्हें अपनी स्थिति के बारे में परिवारों को सूचित कराने में मदद की।”

बेरा दो बच्चों की मदद करते देखे गए। उन बच्चों के माता-पिता का अभी पता नहीं चला है। उन्होंने कहा, “मैंने इस लड़के को मौके से बचाया और उसे अस्पताल ले आया। यहाँ मेरी मुलाकात एक ऐसी लड़की से हुई, जो अपने माता-पिता को नहीं ढूंढ पाई है। हम उनके रिश्तेदारों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।”

बताते चलें कि घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य बहुत तेजी से चल रहा है। वहाँ 1,200 कर्मियों के अलावा 200 एंबुलेंस, 50 बसें और 45 मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयाँ काम कर रही हैं। ट्रैक्टर समेत तमाम तरह के वाहनों से शवों को अस्पताल ले जाया जा रहा था।

बालासोर ट्रेन दुर्घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राजकीय शो घोषित किया है। वहीं, देश भर में कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। सभी पार्टियों ने इस दर्दनाक घटना पर एकजुटता प्रदर्शित की है। भाजपा ने अपने 9 साल की उपलब्धियों से संबंधित कार्यक्रम रद्द कर दिया है। वहीं, गोवा-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने का समारोह भी रद्द कर दिया गया है।

बिहार में एक्सप्रेस ट्रेन पर हमला, कई यात्री घायल: शराब तस्करों को छुड़ाने के लिए जम कर पत्थरबाजी, खिड़की-दरवाजों को भी पहुँचा नुकसान

बिहार की राजधानी पटना में स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस ट्रेन में पथराव का मामला सामने आया। दरअसल, दो शराब तस्कर ट्रेन के टॉयलेट में शराब रखकर तस्करी कर रहे थे। इन्हें छुड़ाने के लिए उपद्रवियों ने ट्रेन में पथराव कर दिया। इससे कई यात्री घायल हुए हैं, साथ ही ट्रेन को भी नुकसान पहुँचा है। रेलवे पुलिस ने दोनों शराब तस्करों को गिरफ्तार कर उनके पास से भारी मात्रा में शराब जब्त की। घटना शनिवार (3 जून 2023) सुबह की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शराब तस्करों ने झाँसी से कोलकाता जा रही स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बों के टॉयलेट में शराब रखकर उनके गेट अंदर से बंद कर लिए थे। टॉयलेट का गेट काफी देर तक नहीं खुलने के कारण यात्रियों का परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस कारण, यात्री गेट खुलवाने की कोशिश भी कर रहे थे। 

हालाँकि इसके बाद भी गेट न खुलता देख यात्रियों को अनहोनी की आशंका हुई। कुछ यात्रियों ने रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) को इसकी जानकारी दी। इसके बाद आरपीएफ ने भी टॉयलेट गेट खुलवाने की कोशिश की, लेकिन तस्कर पकड़े जाने के डर से गेट नहीं खोल रहे थे। इस बीच टॉयलेट में किसी आरोपित के छिपे होने की आशंका के चलते यात्रियों के बीच डर का माहौल बन गया।

वहीं, दूसरी ओर आरपीएफ लगातार गेट खुलवाने की कोशिश में जुटी हुई थी। इसी बीच ट्रेन जैसे ही पटना के ब्लॉक चौराहे के पास पहुँची, वहाँ मौजूद उपद्रवियों ने शराब तस्करों को छुड़ाने के लिए ट्रेन में पथराव कर दिया। लूट-पाट की घटना का अंदेशा जताते हुए आरपीएफ के जवानों ने तत्काल ट्रेन के दरवाजों को लॉक किया। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के लिए अधिक पुलिस फोर्स बुलाई।

कुछ ही देर में आरपीएफ के कई जवान समेत पटना पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। इसके बाद पुलिस ने टॉयलेट का गेट खोलकर दोनों शराब तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तस्करों के पास से एक दर्जन से अधिक बैग में रखी शराब बरामद की है। ट्रेन में हुए पथराव में कई यात्री घायल हो गए। वहीं, ट्रेन के खिड़की, दरवाजों को भी काफी नुकसान हुआ है। 

ट्रेन दुर्घटना के बाद ‘कवच’ को बनाया जा रहा निशाना, जबकि ओडिशा वाले रूट में ये था ही नहीं: चरणबद्ध तरीके से इस रक्षा प्रणाली से किया जा रहा लैस

ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों के बीच हुई टक्कर में 260+ लोगों के मारे जाने के बाद रेलवे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स पूछ रहे हैं कि जब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जब ‘कवच’ का उद्घाटन किया था तो उन्होंने कहा था कि इस रक्षा प्रणाली से ट्रेनों की टक्कर नहीं होगी, क्योंकि ट्रेन ड्राइवरों को पहले ही अलर्ट मिल जाएगा।

सोशल मीडिया यूजर रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल मंत्रालय पर तंज कस रहे हैं। राहुल नाम के यूजर ने इसको लेकर ट्वीट किया है। वहीं, राजद ने भी भाजपा सरकार पर तंज कसा है।

कॉन्ग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने वैष्णव का वो वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा है, जिसमें वे कवच प्रणाली को लेकर विस्तार से बता रहे थे। श्रीनिवास ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जब एक Train Derail होकर दूसरे Railway Track पर आ गयी थी, तब ‘Kavach’ कहाँ था?? 300 के आसपास मौतें, करीब 1000 लोग घायल। इन दर्दनाक मौतों के लिए कोई तो जिम्मेदार होगा?”

बता दें कि भारतीय रेलवे द्वारा विकसित कवच का उद्घाटन पिछले साल मार्च में हुआ था। उस दौरान कहा गया था कि यह भारतीय रेलवे के लिए मील का पत्थर साबित होगा। रेल हादसों को रोकने में भारतीय रेलवे के इस कवच को मास्टर स्ट्रोक और बड़ी क्रांति कहा जा था।

मार्च 2022 में कवच टेक्नोलॉजी के ट्रायल में एक ही पटरी पर दौड़ रही दो ट्रेनों को दौड़ाया गया था। इनमें से एक ट्रेन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) सवार थे और दूसरी ट्रेन के इंजन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन मौजूद थे। इन ट्रेनों में कवच लगा होने के कारण एक ही पटरी पर आमने-सामने आने के बावजूद ट्रेन नहीं टकराए थे और यह परीक्षण सफल रहा था।

इस बीच अब तक के भीषणतम ट्रेन दुर्घटनाओं में से एक बालासोर ट्रेन दुर्घटना को लेकर घिरने पर रेलवे ने जवाब दिया है। रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा है जिस रूट पर यह दुर्घटना हुई है, उस रूट पर ऐंटी-कॉलिजन कवच सिस्टम नहीं लगाया गया था। रेलवे द्वारा हर रूट पर कवच को लगाने की प्रक्रिया जारी है।

साल 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2,164 किलोमीटर के लिए कवच प्रणाली को रेलवे बोर्ड ने स्वीकृत किया है। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा पहले चरण में 615 किलोमीटर लंबी नागपुर से झारसुगुड़ा रेल खंड में सर्वे का कार्य आरंभ किया जा चुका है।

क्या है कवच रक्षा प्रणाली

कवच एक एंटी कोलिजन डिवाइस नेटवर्क है जो कि रेडियो कम्युनिकेशन, माइक्रोप्रोसेसर, ग्लोबर पोजिशनिंग सिस्टम तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक की मदद से रेलवे ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा। इसके तहत जब दो आने वाली ट्रेनों पर इसका उपयोग होगा तो ये तकनीक उन्हें एक दूसरे का आकलन करने में और टकराव के जोखिम को कम करने में ऑटोमेटिक ब्रेकिंग एक्शन शुरू कर देगी। इससे ट्रेनें टकराने से बच सकेंगीं।

यदि ड्राइवर कहीं स्पीड कंट्रोल करना या ब्रेक लगाना भूल जाता है तो कवच (Kavach ) प्रणाली ब्रेक इंटरफेस यूनिट द्वारा ट्रेन को कंट्रोल कर लेती है। कवच प्रणाली द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य विशेषताओं में रेलवे फाटकों पर स्वत: सीटी बजाना और जोखिम की स्थिति में अन्य ट्रेनों को नियंत्रित एवं सावधान करने के लिए ऑटो-मेनुअल एसओएस प्रणाली को तुरंत सक्रिय करना शामिल है।

कवच सिस्टम के एक्टिवेट होते ही आसपास के क्षेत्र में सभी ट्रेनों का संचालन तुरंत रुक जाता है। रेलवे मंत्री अश्विन वैष्णव ने इस तकनीक के संबंध में बताया था कि ये SIL4 प्रमाणित है, जिसका अर्थ है कि 10,000 सालों में कोई एक गलती की संभावना है।

BJP नेता को घर में घुस कर मार दी गोली, पश्चिम बंगाल में दिन-दहाड़े हुई हत्या: पार्टी बोली – TMC के गुंडों की करतूत

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में दो अज्ञात हमलावरों ने भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक भाजपा नेता प्रशांत बसुनिया कूचबिहार के दिनहाटा क्षेत्र में भाजपा की स्थानीय समिति के महासचिव थे। भाजपा ने इस हत्या में टीएमसी के लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया।

मृत भाजपा नेता प्रशांत बसुनिया के परिजनों ने पुलिस को बताया है कि बसुनिया गुरुवार (1 जून 2023) दोपहर अपने घर में भोजन करने जा रहे थे। तभी दो लोगों ने घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी। हमले के बाद आनन-फानन में घरवाले उन्हें दिनहाटा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुँचे। जहाँ जाँच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस का कहना है कि प्रशांत बसुनिया की माँ ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि वह दो हमलावरों में से एक को पहचान सकती हैं। यही नहीं, बसुनिया की माँ का दावा है कि वह हमलावर को पहले भी देख चुकीं हैं। स्थानीय दिनहाटा थाने के एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि गए प्रशांत बसुनिया के पड़ोसियों और परिवार वालों से पूछकर आरोपितों की पहचान करने में जुटे हुए हैं।

भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि दिनहाटा में टीएमसी के सैकड़ों सदस्य भाजपा में शामिल हो रहे हैं। पार्टी नेताओं के सामूहिक इस्तीफे से टीएमसी इतनी नाराज थी कि उसने नृशंस हत्या को अंजाम दिया। उन्होंने आगे कहा है, “मैं इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग करता हूँ। पुलिस द्वारा की गई जाँच को सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोग प्रभावित कर सकते हैं।”

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने भी दावा किया कि बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) द्वारा भेजे गए आरोपितों ने प्रशांत बसुनिया की हत्या की है। उन्होंने कहा है, “यह एक राजनीतिक हत्या है। पंचायत चुनाव से पहले भाजपा के संगठन को कमजोर करने के लिए प्रशांत बसुनिया को निशाना बनाया गया। राजनीति का अपराधीकरण करना TMC की उपलब्धि है।”

वहीं, दिनहाटा सीट से TMC विधायक उदयन गुहा भाजपा के आरोपों को खारिज करते नजर आए। उन्होंने कहा “अपराध का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। बसुनिया का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।” इसके अलावा, टीएमसी जिलाध्यक्ष प्रतापब्रतीम रॉय ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि टीएमसी हिंसा और हत्या की राजनीति में विश्वास नहीं करती है।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है। बंगाल में भाजपा नेता व पार्टी समर्थकों के साथ हुई हिंसा की लंबी लिस्ट है। इसमें, हत्या लेकर बलात्कार तक की घटनाएँ शामिल हैं। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 292 में से 213 सीटें जीतीं थी। वहीं BJP के खाते में 77 सीटें गई थीं। इस जीत के बाद, तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं बल्कि सीपीएम और कॉन्ग्रेस समेत राजनीति विरोधियों के खिलाफ हिंसा की थी।


जीत के जश्न में डूबे TMC कार्यकर्ताओं ने भाजपा के कई कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या कर दी थी। ऐसे ही TMC के ‘गुंडों’ ने बीजेपी नेता अविजीत सरकार और उनके कुत्तों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में 693 हिंसक घटनाएं हुईं थीं। इस दौरान 11 लोगों की मौत भी हुई। लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद 1 जून से 31 दिसंबर, 2019 के बीच राजनीतिक हिंसा के 852 मामले सामने आए। इस दौरान 61 लोगों की हत्या हो गई। इसी तरह, जनवरी 2021 पहले सप्ताह में 23 हिंसक घटनाएँ हुईं। इसमें 43 लोग घायल हुए। वहीं, साल 2020 में कुल 663 राजनीतिक हिंसक घटनाएँ हुईं। इसमें 57 लोगों की मौत हो गई।  

हाई लेवल मीटिंग के बाद अब घटनास्थल का दौरा करेंगे PM मोदी, पीड़ितों से भी मिलेंगे: ओडिशा ट्रेन दुर्घटना में मौतों का आँकड़ा 260 के पार

ओडिशा के बालासोर में तीन ट्रेनों की भीषण टक्कर (Odisha Train Accident) अब तक 260 लोगों की मौत की खबर आ रही है। वहीं, करीब 1000 लोग घायल हैं। हादसे में दुर्घटनाग्रस्त हुईं ट्रेन की बोगियों में अभी भी लोगों के फँसे होने की आशंका है। हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) घटनास्थल का दौरा करेंगे।

पीएम मोदी हादसे वाली जगह पर जाएँगे और कटक में अस्पताल में भर्ती पीड़ितों से भी मुलाकात करेंगे। हादसे की जानकारी सामने आने के बाद पीएम मोदी ने शनिवार (3 जून 2023) एक उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें NDRF के प्रमुख भी शामिल थे।

वहीं, इस घटना की जाँच रेलवे ने शुरू कर दी है। जाँच की जिम्मेदारी दक्षिण-पूर्वी सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त को दी गई है। बता दें कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अधीन काम करता है और इस प्रकार के सभी हादसों की जाँच करता है।

इससे पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव घटनास्थल पर पहुँचे थे। उन्होंने हालात का जायजा लिया था। वहीं, ओडिशा से आने वाले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बालासोर से बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी ने अस्पताल में जाकर घायलों से मुलाकात की और उनका हालचाल पूछा।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी बालासोर के लिए रवाना हो गई हैं। वहीं, तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि और शिव शंकर, अनबिल महेश घटनास्थल का दौरा करने के लिए रवाना हुए हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में भी स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखा गया है, ताकि हादसे में प्रभावित लोगों का इलाज किया जा सके।

बता दें कि ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार (2 जून) की शाम हावड़ा जा रही 12864 बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस के कई डिब्बे बाहानगा बाजार में पटरी से उतर गए और दूसरी पटरी पर जा गिरे। पटरी से उतरे ये डिब्बे 12841 शालीमार-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस से टकरा गए और इसके डिब्बे भी पलट गए।

अधिकारी ने बताया कि कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतरने के बाद एक मालगाड़ी से टकरा गए, जिससे मालगाड़ी भी दुर्घटना की चपेट में आ गई। फिलहाल इस रूट की सभी ट्रेनों को रोक दिया गया है। हालाँकि, जाँच के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक कारणों का पता चलेगा।

इस घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकार ने मुआवजा देने का ऐलान किया है। रेल मंत्रालय की ओर से हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, हादसे में घायल लोगों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, जिन लोगों को मामूली चोट लगी हैं, उन्हें 50 हजार रुपए दिए जाएँगे।

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रेन दुर्घटना के पीड़ितों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। ये राशि पीएमएनआरएफ (PMNRF) फंड से दिए जाएँगे। इस तरह मृतकों को 12 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है।

समुद्र किनारे सूटकेस में पैक मिली लड़की की सिर कटी लाश, हाथ में डमरू-त्रिशूल का टैटू

महाराष्ट्र में मुंबई के मीरा-भयंदर इलाके में शुक्रवार (2 जून 2023) को एक सूटकेस में एक महिला का सिर कटा शव मिला है। धड़ के हिसाब से महिला की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है। मृतका के एक हाथ में त्रिशूल और डमरू का टैटू बना हुआ है जबकि दूसरे हाथ में कलावा बँधा है। शव के दोनों पैर आपस में बँधे मिले हैं। पुलिस ने शव को कब्ज़े में ले कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। केस दर्ज कर के पीड़िता की पहचान के साथ पूरे मामले की जाँच भी शुरू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला का शव मुंबई के उत्तान सागरी इलाके में मिला है। इसे समंदर के किनारे अल्फ़ा ब्रांड के सूटकेस में भर कर फेंका गया था। सुबह 8 बजे मार्निंग वॉक करने निकले एक व्यक्ति ने इस सूटकेस को सबसे पहले देखा और संदिग्ध लगने पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को सिर विहीन पाया। मृतका के हाथ पर डमरू और त्रिशूल के टैटू के साथ ॐ का भी चिन्ह मिला है। दाएँ हाथ में कलावा के साथ सफेद रंग का कंगन भी था। पीड़िता ने लाल रंग की टी-शर्ट और हरे रंग की लेगिंग पहन रखी थी।

बताया जा रहा है कि अज्ञात मृतका के दोनों पैर बँधे हुए मिले हैं। पुलिस ने मृतका का शव कब्ज़े में ले कर पहचान के प्रयास शुरू कर दिए हैं। लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस मामले में पुलिस की तरफ से हत्या की धारा 302 और सबूत मिटाने की धारा 201 के तहत अज्ञात कातिल पर केस दर्ज किया गया है। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जानकारी जुटा रही है कि कहीं बैग पानी के रास्ते समुद्र में ले जाने की कोशिश तो नहीं की गई थी जहाँ से उसे किनारे ही फेंक दिया गया हो।

लड़की के शव के पास कोई कागजात आदि बरामद नहीं हुए हैं। गौरतलब है कि कुछ समय पहले मुंबई के ही एक अन्य केस में वाशिम के पास बोरे में सिर कटी लाश मिली थी। पुलिस ने मृतका के अब्बा मुख्तार खान को गिरफ्तार किया था। शुरुआती पूछताछ में पुलिस को गुमराह करने के बाद आखिरकार मुख़्तार ने अपनी ही बेटी रईसा की हत्या करने की बात कबूली थी। आरोपित ने बताया कि वह अपनी बेटी की मानसिक बीमारी से तंग था।

न लाइब्रेरी, न टॉयलेट, न लैब… लेकिन हिंदू छात्राओं के सिर पर हिजाब जरूर: CM शिवराज ने की दामोह के ‘गंगा-जमना’ स्कूल की मान्यता रद्द, बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दमोह स्थित ‘गंगा जमना हायर सेकेंडरी स्कूल ‘ की मान्यता रद्द करने की घोषणा की है। इसी स्कूल की टॉपर छात्राओं का हिजाब के साथ पोस्टर वायरल हुआ था जिसका काफी विरोध हो रहा था। स्थानीय प्रशासन की जाँच में स्कूल के संचालन में तमाम अनियमितताऐं मिली थीं। शुक्रवार (2 जून 2023) को किए गए एक ट्वीट में CM शिवराज सिंह ने ऐसी हरकत करने वालों पर कठोर कार्रवाई की भी घोषणा की है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, “दमोह के एक विद्यालय में अनियमितताएँ पाए जाने पर उसकी मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गयी। मेरे भांजे-भांजियों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी एवं मध्यप्रदेश सरकार ऐसे कृत्यों के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

मिलीं ये कमियाँ

इस स्कूल के फैली अनियमितताओं के संदर्भ में 2 जून को लोक शिक्षण सागर संभाग के संयुक्त संचालक ने आदेश जारी किया है। अपने आदेश में उन्होंने गंगा जमुना स्कूल को अशासकीय शिक्षण संस्था बताया है। उन्होंने लिखा है कि स्कूल ने मध्यप्रदेश माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शालाओं की मान्यता नियम 2017 एवं मान्यता संशोधन नियम 2020 में बताए गए नियमों का पालन नहीं किया है। इसी के साथ स्कूल में लाइब्रेरी नहीं थी। भौतिक शास्त्र एवं रसायन शास्त्र की अलग-अलग प्रयोगशालाओं में पुराने फर्नीचर और पुरानी सामग्री पाई गई।

इसी आदेश में आगे बताया गया है कि इन प्रयोगशालाओं में छात्रों द्वारा प्रयोग के लिए जरूरी सामान भी उपलब्ध नहीं थे। स्कूल में कुल छात्र-छात्राओं की सँख्या 1208 थी जिनके लिए अलग-अलग शौचालय भी नही पाए गए। इन छात्रों को पीने के शुद्ध पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं थी। एक क्लास में मानकों से ज्यादा छात्र बिठा कर पढ़ाई कराई जा रही थी जिनके बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर भी नहीं मिले। छात्र-छात्राओं के खेलने के संसाधन भी स्कूल में उपलब्ध नहीं थे। इसी जाँच में बच्चों को स्कूल लाने वाले वाहनों के रख-रखाव को भी संतोषजनक नहीं पाया गया।

जारी पत्र में 2 जून (शुक्रवार) को ही स्कूल की मान्यता रद्द करने के आदेश दिए गए। इस आदेश की कॉपी मध्य प्रदेश के सभी सीनियर व संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दी गई। गौरतलब है कि इस स्कूल के प्रबंधक का नाम हाजी मुहम्मद इदरीश है। स्कूल की टॉपर छात्राओं के हिजाब में पोस्टर वायरल होने के बाद उन्होंने एक पत्र लिख कर कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से माफ़ी माँगी थी। पत्र में उन्होंने हिजाब को स्कार्फ बताया था जिस से राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो सहमत नहीं हुए। उन्होंने स्कूल को मान्यता देने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई को जरूरी बताया है।

न करेंगे फोन इस्तेमाल, न देंगे मीडिया को बयान: HC ने मनीष सिसोदिया को दी 7 घंटे की बेल, सिर्फ बीमार पत्नी से मिलने की है इजाजत

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को कोर्ट से मामूली राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने AAP नेता को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए शनिवार (3 जून 2023) को 7 घंटे की जमानत दी है। उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया की तबीयत बिगड़ है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, मनीष सिसोदिया जेल से अपने घर पहुँच गए हैं।

सीमा सिसोदिया की तबीयत फिर से बिगड़ गई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद मनीष सिसोदिया अपने घर पहुँचे, लेकिन पत्नी से नहीं मिल सके। उनके घर पहुँचने से पहले ही सीमा सिसोदिया को अस्पताल में एडमिट करवाना पड़ा है। सीमा को नजदीकी राममनोहर लोहिया अस्पताल के आपातकालीन वॉर्ड में भर्ती कराया गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (2 जून 2023) को मनीष सिसोदिया की अंतरिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया। हालाँकि, उन्हें शनिवार को सुबह 10 बजे से लेकर शाम को 5 बजे तक सुरक्षा अभिरक्षा में अपनी बीमार पत्नी से मिलने की इजाजत दे दी है। इस दौरान वे मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेंगे और ना ही मीडिया को कोई बयान देंगे।

हाईकोर्ट ने उन्हें सिर्फ अपने परिवार से बात करने की इजाजत दी है। उन्हें मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही अदालत ने मनीष सिसोदिया को पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट शनिवार (3 जून 2023) की शाम तक अदालत में जमा करने के लिए कहा है।

मनीष सिसोदिया की पत्नी सीमा सिसोदिया खतरनाक बीमार से पीड़ित हैं। उन्हें मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple sclerosis) है। इस बीमारी में इंसान के दिमाग और रीढ़ की हड्डी को अक्षम हो जाती है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करती है, जिसके कारण पीड़ित को अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है।

मनीष सिसोदिया के घर में उनकी पत्नी के अलावा और कोई नहीं है। उनका एक बेटा है, जो अपनी पढ़ाई के लिए विदेश में रहता है। मनीष सिसोदिया ने कहा था कि वे अपनी पत्नी का ख्याल रखने वाले अकेले व्यक्ति हैं। इसके आधार पर उन्होंने कोर्ट से कई बार जमानत की अपील की थी। अप्रैल में भी उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर अपोलो में भर्ती कराया गया था।

‘या खुदा’ बोलकर इमरान ने किया मंत्री गणेश जोशी पर हमला, सुरक्षाकर्मियों ने पकड़कर डंडा छीना: घरवाले बोले- वो ‘सिरफिरा’ है, पता नहीं घर से कैसे निकला

देहरादून में एक युवक द्वारा भाजपा नेता व उत्तराखंड सरकार में मंत्री गणेश जोशी पर हमले की खबर है। हमलावर का नाम इमरान बताया जा रहा है जिस पर बाजार में मौजूद अन्य दुकानदारों से भी मारपीट का आरोप है। हमले के दौरान इमरान ने मजहबी नारेबाजी भी की। आरोपित के घर वालों ने उसकी मानसिक स्थिति ठीक न होने की दलील दी है। स्थानीय लोगों ने हमलावर की पिटाई कर दी। बाद में उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। घटना शुक्रवार (2 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला देहरादून के डाकरा बाजार का है। यहाँ शुक्रवार को राज्य सरकार में सैनिक कल्याण व कृषि मंत्री गणेश जोशी जनसम्पर्क कर रहे थे। इस दौरान वहाँ मौजूद एक इमरान नाम का युवक अचानक ही उनकी तरफ लपका। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमले के समय इमरान के पास डंडा था। इमरान ने मंत्री जोशी को पकड़ने की कोशिश की। हालाँकि इस दौरान मंत्री के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने इमरान के हाथ से डंडा छीन लिया।

हंगामे को देखते हुए घटनास्थल पर आस-पास के लोग भी जमा हो गए। उन्होंने इमरान की पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमरान को मंत्री जोशी के सुरक्षाकर्मियों से उलझते देखा जा सकता है। बाद में पुलिस ने इमरान ने इमरान को भीड़ की पिटाई से बचाया और हिरासत में ले लिया। फिलहाल उस से पूछताछ जारी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इमरान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह घटना के 2 दिन पहले ही देहरादून आया था।

लगाया था ‘या खुदा’ का नारा

ऑपइंडिया ने इस मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से बात की। उन्होंने बताया कि उन पर हमले के दौरान इमरान ने ‘या खुदा’ का नारा लगाया था। उन्होंने कहा कि उन पर हमले से पहले इमरान कई लोगों के साथ न सिर्फ मारपीट कर चुका था बल्कि उसने कई जगहों पर तो चाकू भी लहराए थे। बकौल गणेश जोशी दिल्ली में हुई चाकूबाजी की घटना से लोग और उनके सुरक्षाकर्मी अतिरिक्त सतर्क हैं।

खुद पर इमरान की पिटाई के दौरान चुप रहने के कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा लगाए गए आरोपों को मंत्री गणेश जोशी ने बेबुनियाद बताया। मंत्री का दावा है कि उन्होंने ही पुलिस को बुला कर हमलावर को सौंपा था। बाद में इमरान के घर वालों ने मंत्री जोशी से मुलाकत की और हमलावर को सिरफिरा बताया। मंत्री के मुताबिक इमरान के घर वालों का दावा है कि वो उसे एक कमरे में बाँध कर रखते थे लेकिन घटना के दिन वो न जाने कैसे कमरे से निकल कर भाग गया।