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ईसाई राष्ट्र में क्यों लगाई फर्जी हिंदू भगवान की मूर्ति: ट्रंप के नेता की US में हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर टिप्पणी पर बवाल, हिंदू संगठनों ने रिपब्लिकन पार्टी से की कार्रवाई की माँग

अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा पर रिपब्लिकन पार्टी के नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी कहे जाने वाले अलेक्जेंडर डंकन की टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

यह प्रतिमा शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित की जा रही है, जिसकी ऊँचाई 90 फीट है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ नाम दिया गया है। डंकन ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘फर्जी हिंदू भगवान’ की मूर्ति बताया है।

डंकन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हम टेक्सास में इस मूर्ति को क्यों बनने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं।” उन्होंने बाइबिल का हवाला देते हुए कहा कि ईश्वर के अलावा किसी और देवता की पूजा करना और मूर्तियाँ बनाना गलत है। डंकन के इस बयान ने अमेरिकी हिंदू समुदाय के गुस्से को बढ़ा दिया है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की और इसे हिंदू-विरोधी तथा भड़काऊ करार दिया। संगठन ने रिपब्लिकन पार्टी से माँग की है कि वे डंकन के खिलाफ कार्रवाई करें, क्योंकि उनके बयान से न केवल धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, बल्कि यह अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के भी खिलाफ है, जो हर धर्म को समान स्वतंत्रता देता है।

सोशल मीडिया पर भी डंकन को कड़ी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। एक यूजर ने लिखा कि किसी और की आस्था को झूठा कहना आजादी नहीं है।

डॉक्टर ट्रेसी नाम की यूजर ने कहा, “हिंदू धर्म हिंसा नहीं सिखाता, बल्कि ईश्वर के अलग-अलग स्वरूपों के जरिए सद्गुणों को बढ़ावा देता है।” वहीं, जॉर्डन क्राउडर नाम के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने डंकन को याद दिलाया, “वेद ईसा मसीह के जन्म से लगभग 2000 साल पहले लिखे गए थे और ईसाई धर्म पर उनका असर साफ दिखाई देता है।”

डंकन के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा हो रहा है और लोगों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग भी की है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर निशाना भी साधा है।

GST 2.0 की धमाकेदार शुरुआत, नवरात्रि के पहले ही दिन मारुति-हुंडई-टाटा ने कार बिक्री में तोड़े रिकॉर्ड: छोटी कारों की माँग 50% तक बढ़ी

देश में 22 सितंबर 2025 से GST 2.0 लागू होने के साथ ही ऑटो सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। नवरात्रि के पहले दिन कार खरीदारों ने शोरूमों का रुख किया, जिससे मारुति सुजुकी, हुंडई और टाटा मोटर्स ने बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। बीते कई सालों में ये कार बाजार का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा है।

मारुति सुजुकी ने नवरात्रि के पहले दिन 80,000 कस्टमर इन्क्वायरी और 30,000 कार डिलीवरी के साथ 35 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (मार्केटिंग और सेल्स) पार्थो बनर्जी ने कहा, “पिछले साल की तुलना में इस साल की प्रतिक्रिया बेहद मजबूत रही है। खासकर स्मॉल कारों की माँग में लगभग 50% की वृद्धि देखी गई है। कुछ मॉडल जल्दी ही स्टॉक से बाहर हो सकते हैं।”

मारुति रोजाना 15,000 बुकिंग्स दर्ज कर रही है, जो सामान्य से 50% ज्यादा है। 18 सितंबर से कीमत कटौती के बाद अब तक 75,000 बुकिंग्स हो चुकी हैं।

हुंडई मोटर्स ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी ने एक ही दिन में 11,000 डीलर बिलिंग्स दर्ज कीं, जो पिछले पाँच सालों में उनका सबसे बड़ा एक दिन का रिकॉर्ड है।

हुंडई के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तरुण गर्ग ने कहा, “यह मजबूत त्योहार के माहौल और ग्राहकों के भरोसे का स्पष्ट प्रमाण है। हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी माँग लगातार बनी रहेगी।”

टाटा मोटर्स ने भी नवरात्रि के पहले दिन 10,000 कारों की डिलीवरी और 25,000 से ज्यादा इन्क्वायरी दर्ज की। कंपनी ने GST छूट के साथ अतिरिक्त ऑफर्स भी दिए, जिससे ग्राहक 2 लाख रुपये तक बचा सकते हैं। टाटा की सबसे सस्ती कार टिएगो की कीमत में 75,000 रुपए की कटौती हुई, जिसकी शुरुआती कीमत अब 4.57 लाख रुपए है।

सेकंड हैंड कारों को खरीदने-बेचने का काम करने वाली कार्स24 कंपनी के फाउंडर और सीईओ विक्रम चोपड़ा ने भी आँकड़े जारी किए। उन्होंने कहा कि हमने 4 साल में सबसे ज्यादा व्यापार किया। 5000 से ज्यादा कारें हमने चेक (खरीदने के लिए) की। दोपहर 2 बजे तक ही हमनें 400% ज्यादा कारें डिलीवर भी कर दी और पूरे दिन का काम बाकी है। अभी ये तो नवरात्रि के पहले दिन की शुरुआत है। आगे के दिन बेहद उत्साहजनक रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि सरकार ने GST 2.0 के तहत टैक्स स्लैब को घटाकर 5% और 18% कर दिया है, जिससे छोटी कारों (4 मीटर से कम लंबाई, 1,200 सीसी पेट्रोल या 1,500 सीसी डीज़ल इंजन) पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो गया। बड़े मॉडल्स पर 40% टैक्स लागू हुआ, जो पुराने 28%+कंपन्सेशन सेस से कम है। इस बदलाव ने कारों की कीमतें कम कीं और ग्राहकों का उत्साह बढ़ाया।

GST 2.0 और नवरात्रि के त्योहारी माहौल ने ऑटो सेक्टर को बड़ा बूस्ट दिया। छोटी कारों की कम कीमतों ने ग्राहकों को आकर्षित किया और मारुति, हुंडई, टाटा जैसे भरोसेमंद ब्रांड्स की डिमांड बढ़ी। डीलरशिप पर भीड़ और इन्क्वायरी में उछाल से साफ है कि यह फेस्टिव सीजन ऑटो कंपनियों के लिए शानदार रहा। आने वाले दिनों में भी यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

‘भगाओ इस बिहारन को, मैडम बीड़ी-दारू पीती है, मिथिला से है…’: DUSU की संयुक्त सचिव दीपिका झा को गाली देने वाले कौन, ABVP नेता ने कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI को बताया जिम्मेदार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP से संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करने वाली बिहार की दीपिका झा को इंस्टाग्राम पर ट्रोल किया जा रहा है। उन्होंने इसके खिलाफ दिल्ली साइबर पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। साथ ही दीपिका झा ने इसके पीछे NSUI का हाथ बताते हुए करारा जवाब दिया है।

इसकी जानकारी खुद दीपिका झा ने एक वीडियो जारी कर दी। वीडियो में दीपिका झा ने कहा, “इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पर बदतमीजी की जा रही है। बिहार से जुड़ा ‘बिहारन’ शब्द को गाली की तरह उपयोग किया जा रहा है। तमाम कमेंटबाजों के खिलाफ FIR हो चुकी है। जो-जो लिंक है इस FIR से सबके पास समय से सूचना पहुँच जाएगी।”

दीपिका झा ने नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) पर निशाना साधते हुए कहा, “पूरे NSUI को कह देना चाहती हूँ कि अब करो तुम कमेंट। अब मैं FIR-FIR खेलुँगी। एक लड़की को नीचा दिखाने के लिए तुम इस हद तक गए। तुम चाहते हो कि लड़की शांत होकर घर बैठ जाए। लेकिन नहीं, मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूँ। मैं आप सभी की टाइम-टाइम पर औकात याद दिलाती रहूँगी कि मैं क्या हूँ।”

उन्होंने राज्य के नाम पर बदतमीजी झेलने वालों के साथ खड़े रहने की भी बात कही, “किसी के भी चमचे हो अगर इस तरह का कमेंट दोबारा करा जाएगा तो मैं सदैव खड़ी रहूँगी अपने समाज के साथ, अपने राज्य के साथ और सिर्फ अपने राज्य के साथ ही नहीं अगर किसी को भी उसके राज्य के नाम को गाली की तरह इस्तेमाल किया जाएगा तो मैं सदैव उन लोगों के साथ खड़ी रहूँगी।”

दीपिका झा बताती हैं कि उन्होंने इंस्टाग्राम में पर बदतमीजी के खिलाफ दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत कर दी है। वह कहती हैं कि इस शिकायत में कुछ लोगों का नाम शामिल किया गया है, जिनके पास जल्द ही पुलिस का नोटिस पहुँच जाएगा।

इंस्टाग्राम पर लगातार किया जा रहा ट्रोल

दीपिका झा को DUSU चुनाव में संयुक्त सचिव पद पर खड़े होने के साथ उस पद पर जीत हासिल करने तक भी इंस्टाग्राम पर लगातार ट्रोल किया गया। चुनाव अभियान में दीपिका ने कई वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए, जिस पर ट्रोलर्स ने भद्दे-भद्दे कमेंट्स किए हैं। यहाँ तक की उनके राज्य और उनकी पहचान मिथिला को लेकर भी सवाल उठाए गए।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट में एक ट्रोलर ने लिखा, “भगाओ इस बिहारन को।”

दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा, “मिथिला से है या पूर्वांचल से है। मतलब वोट के लिए कुछ भी।”

दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

दीपिका झा ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प की फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की तो एक यूजर ने ट्रोल करते हुए लिखा, “मैडम की पार्टी की सरकार और मैडम उनसे ही लड़ रही।”

दीपिका झा के इंस्टाग्राम पोस्ट पर किए गए कमेंट का स्क्रीनशॉट

यहाँ तक की दीपिका झा के चरित्र को मैला करने की भी कोशिश की गई। ट्रोलर्स ने लिखा, “यह दीपिका झा सिगरेट बीड़ी दारू सब पीती है। स्टूडेंट होने के बाद भी और फिर छात्र अध्यक्ष का इलेक्शन लड़ती है और शरीफ होने का ड्रामा करती है।”

NSUI की भद्दी राजनीति

इंस्टाग्राम ट्रोल्स के पीछे दीपिका झा ने NSUI का हाथ बताया है। दीपिका झा ने NSUI को चेतावनी भी दी कि अगर इस बार वो FIR-FIR खेलेंगी। साथ ही दीपिका झा ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि इंस्टाग्राम पर भद्दे कमेंट्स करने वाले NSUI के ही ‘चमचे’ हैं।

यह पहली बार नहीं है जब NSUI ने ABVP को नीचा दिखाने के लिए किसी महिला का अपमान किया हो। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2025 में भी NSUI ने भद्दी राजनीति खेली। लगातार ABVP के उम्मीदवारों को निशाना बनाकर बदनाम करने की कोशिश की।

चुनाव प्रचार के दौरान दीपिका झा का एक वीडियो भी वायरल करवाया और दावा किया कि वो सिगरेट पीती हैं। NSUI ने कॉन्ग्रेस का प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाते हुए दिल्ली चुनाव में ‘वोट चोरी’ के भी आरोप लगाए थे। अब ‘बिहारन’ नाम से गाली दी जा रही है।

लेकिन फिर भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP तीन पदों पर परचम लहराया। DUSU के अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर ABVP ने जीत हासिल की। DUSU के नए अध्यक्ष बने आर्यन मान के खिलाफ भी NSUI ने नैगेटिव कैंपने चलाया था।

काशीपुर में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर मारा: ‘I Love Muhammad’ को लेकर उत्तराखंड में 400-500 की भीड़ ने किया बवाल, साजिशकर्ता समेत 7 गिरफ्तार

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के काशीपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ जुलूस के दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साजिशकर्ता नदीम अख्तर समेत 7 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके अलावा कई अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मणिकांत मिश्रा ने इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए। इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हालात की जानकारी दी गई है।

काशीपुर में हिंसा कैसे शुरू हुई

21 सितंबर की रात काशीपुर के अलीखान इलाके में हिंसा की शुरुआत हुई। खबरों के मुताबिक, नदीम अख्तर ने करीब 400-500 इस्लामी कट्टरपंथियों के साथ मिलकर एक सभा आयोजित की थी। सभा के बाद, भीड़ ने अचानक बैनर और पोस्टरों के साथ बगैर पूर्व अनुमति के जुलूस निकाला। उन्होंने ‘आई लव मुहम्मद’ के नारे लगाए और वाल्मीकि बस्ती से होते हुए शहर की ओर बढ़ने लगे।

जब पुलिस ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो भीड़ हिंसा पर उतारू हो गई। इनलोगों ने पुलिसकर्मियों पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर दिया। उन्होंने पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया। डायल-112 लिखी गाड़ी के शीशे और एक दूसरी पुलिस वाहन के बोनट को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। भीड़ ने पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी।

एसएसपी मिश्रा की निगरानी में आरोपितों की तलाश में छापेमारी और घर-घर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। इलाके में पीएसी तैनात की गई है और आरोपितों को पकड़ने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।

स्रोत-उत्तराखड पुलिस

पुलिस के अनुसार, एसएसआई अनिल जोशी की शिकायत पर कोतवाली काशीपुर में एफआईआर दर्ज की गई है। ऑपइंडिया को एफआईआर की एक प्रति मिली है। एसएसआई जोशी ने अपनी शिकायत में नदीम अख्तर को मुख्य आरोपी बनाया है। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 190, 191(2), 191(3), 232, 121(1), 132, 221, 324(3), 351(2) और 352 के तहत दर्ज की गई है।

एसएसआई ने अपनी शिकायत में बताया है कि कैसे भीड़ ने लाठी-डंडे लेकर पुलिसकर्मियों को घेर लिया। भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाला। शिकायत में सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का भी जिक्र किया गया है।

एसएसआई ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्हें बसफोड़ान पुलिस चौकी के प्रभारी एसआई मनोज धोनी का फोन आया। उन्हें बिना अनुमति के निकाले जा रहे ‘आई लव मुहम्मद’ जुलूस की सूचना दी गई। नदीम अख्तर, हनीफ गाँधी और दानिश चौधरी जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें अलीखान चौराहे पर रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने और वाल्मीकि मोहल्ले की ओर बढ़ते रहे।

एसएसआई ने एसआई कपिल कंबोज और अन्य पुलिसकर्मियों को तहसील रोड होते हुए अपने साथ आने के लिए बुलाया। जब वे मोहल्ले में पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि अलीखां की तरफ से 400-500 लोगों की एक भीड़ जुलूस की शक्ल में आगे बढ़ रही थी। उनके हाथ में लाठियाँ और डंडे थे। भीड़ एसआई मनोज धोनी, सब-इंस्पेक्टर अजीत सिंह, हेड कांस्टेबल जगत सिंह, कांस्टेबल देवनाथ और कांस्टेबल अमरदीप के साथ धक्का-मुक्की और झड़प कर रही थी।

एसएसआई ने भीड़ को समझाने की कोशिश की। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति के जुलूस नहीं निकाला जा सकता। लेकिन भीड़ ने एसआई धोनी और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मियों को घेर लिया। उन्होंने उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया। भीड़ ने एसएसआई पर भी हमला किया।

मुख्य आरोपित नदीम अख्तर समेत 7 गिरफ्तार

इस मामले में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मास्टरमाइंड 47 वर्षीय नदीम अख्तर भी शामिल है। दस अन्य लोगों को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया हैं। गिरफ्तार आरोपियों में 18 वर्षीय मोहम्मद अशद, कामरान (19 साल), मोइन रज़ा (26 साल) और दानिश (28 साल) शामिल हैं।

पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज के जरिए हिंसा में शामिल इस्लामी चरमपंथियों की पहचान कर रही है। जल्द और गिरफ्तारियाँ हो सकती है।

हिंसा के बाद काशीपुर में डेरा डाले एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कहा कि कानून-व्यवस्था को भंग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस पर हमला करने और सार्वजनिक शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से शांत रहने, अफवाहों से बचने और अधिकारियों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।

अयोध्या में बाबरी के बदले मस्जिद बनाने के मंसूबों पर NOC भारी: सुप्रीम कोर्ट की कृपा से ‘खैरात’ में मिली जमीन तो चंदा खूब वसूला, पर लेआउट प्लान नहीं हुआ पास

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जमीन दे दी लेकिन 5 साल बाद भी उस पर काम ठप पड़ा है। मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट ने चंदा तो जुटाया लेकिन सरकारी विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) नहीं ले सका। अब NOC ना होने के चलते इसके लेआउट प्लान को भी अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने खारिज कर दिया है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पत्रकार ओम प्रकाश सिंह द्वारा दाखिल RTI में सामने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों का अनिवार्य NOC ना होने के चलते ADA ने यह प्लान खारिज किया है।

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक अयोध्या फैसले में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया था।

इसके बाद 3 अगस्त 2020 को तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने अयोध्या के पास धन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित कर दी। इसके बाद मस्जिद निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट ने 23 जून 2021 को ADA में लेआउट प्लान की मंजूरी हेतु आवेदन दायर किया था।

RTI के जवाब में ADA ने स्वीकार किया कि मस्जिद ट्रस्ट ने 4 लाख रुपए आवेदन और जाँच शुल्क के रूप में जमा किए। ADA के मुताबिक, मस्जिद निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागरिक उड्डयन, सिंचाई एवं राजस्व विभाग, नगर निगम, जिलाधिकारी कार्यालय और अग्निशमन विभाग की NOC माँगी गई थी।

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव ने क्या कहा?

मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि उन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से आपत्तियाँ आई थीं। अग्निशमन विभाग की साइट जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित मस्जिद और अस्पताल भवन की ऊँचाई को देखते हुए अप्रोच रोड की चौड़ाई कम से कम 12 मीटर होनी चाहिए। जबकि मौके पर दोनों मार्ग छह मीटर से ज्यादा चौड़े नहीं पाए गए और मुख्य सड़क महज चार मीटर चौड़ी निकली थी।

हुसैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए जमीन देने का आदेश दिया और उत्तर प्रदेश सरकार ने हमें जमीन दी। इसके बाद भी आवश्यक NOC क्यों नहीं मिलीं और ADA ने प्लान को क्यों खारिज किया, यह समझ से बाहर है।”

उन्होंने आगे कहा कि अग्निशमन विभाग की आपत्ति के बारे में उन्हें जानकारी है लेकिन बाकी किसी भी विभाग की आपत्ति को लेकर उन्हें कुछ जानकारी नहीं है। बकौल हुसैन, RTI के जवाब से स्थिति स्पष्ट हो गई है और अब हम आगे की कार्रवाई करेंगे।

इस बीच अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है और यह पूरे होने के चरण में है। तो दूसरी और मस्जिद परियोजना लापरवाहियों के चलते अभी तक अधर में ही अटकी हुई है। जो लोग शताब्दियों तक कथित ढांचे को मस्जिद बताते हुए लड़ रहे थे, उनके लिए मस्जिद की प्राथमिकता कितनी है, यह 5 जमीन आवंटन के 5 वर्ष बाद स्पष्ट हो जाता है।

‘कूर्म पीठ’ पर बना शक्तिपीठ, कच्छप मरने से पहले लेते हैं माँ का आशीर्वाद: जानें माता त्रिपुरसुंदरी मंदिर के कछुए क्यों हैं खास, अनुष्ठानों में भी विशेष महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्निर्मित त्रिपुरसुंदरी मंदिर का उद्घाटन 22 सितंबर 2025 को किया। 51 शक्तिपीठों में शामिल देवी त्रिपुरीश्वरी का यह मंदिर अपनी दिव्यता, तांत्रिक साधना के लिए जाना जाता है। राज्य के गोमती जिले के उदयपुर शहर में यह स्थित है और कछुओं से इसका संबंध काफी दिलचस्प है।

महाराजा धन्य माणिक्य ने मंदिर की स्थापना 1501 ई. में की थी। 524 साल पुराना यह मंदिर एक छोटी पहाड़ी की चोटी पर बना है, जो कछुए की पीठ जैसी दिखती है। इसीलिए त्रिपुरसुंदरी मंदिर को कूर्म पीठ (कूर्म का अर्थ कछुआ होता है) के नाम से भी जाना जाता है।

शक्तिपीठ मंदिर के बगल में कल्याण सागर झील है। इस कृत्रिम झील में दुर्लभ बोस्तामी कछुओं का घर है। इससे झील की खूबसूरती बढ़ गई है।

बोस्तामी कछुआ विलुप्त जीव माना जाता है, लेकिन त्रिपुरसुंदरी मंदिर (जिसे उदयपुर माताबाड़ी भी कहा जाता है) के परिसर में ये आसानी से दिख जाएँगे।

ये आकार में बड़े होते हैं और अक्सर मीठे पानी की झील के किनारे तक आ जाते हैं। शक्तिपीठ में आने वाले भक्त अनुष्ठान के रूप में बोस्तामी कछुओं को ब्रेड क्रम्ब्स, बिस्कुट और मुरमुरे खिलाते हैं।

2.75 एकड़ में फैले इस झील में मछली पकड़ना और कछुओं को बाहर निकालना सख्त मना है। त्रिपुरसुंदरी मंदिर के बगल में होने की वजह से कल्याण सागर झील को भी पवित्र माना जाता है।

यह आस्था, विरासत और जैव विविधता के बीच के अनोखे संबंध को भी दर्शाता है। कल्याण सागर और बोस्तामी कछुए की परंपरा और एक-दूसरे पर निर्भरता देखने लायक है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रेंगने वाले जीव अपनी मृत्यु से पहले त्रिपुरसुंदरी मंदिर के चरणों में जाते हैं और देवी का आशीर्वाद लेते हैं।

बोस्तामी कछुओं की देखभाल माताबारी मंदिर समिति द्वारा की जाती है।

त्रिपुरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएसपीसीबी) ने झील के पास प्लास्टिक बैग न ले जाने को लेकर सख्त हिदायत दी है। बोर्ड समय-समय पर झील के पानी की गुणवत्ता की जाँच भी करता है।

झील में बोस्तामी कछुओं की एक अच्छी आबादी हो गई है। ये दुर्लभ सरीसृप त्रिपुरसुंदरी मंदिर के आध्यात्मिक पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग हैं।

हिंदू धर्म में आस्था और प्रकृति का गहरा तालमेल देखने को मिलता है। शक्तिपीठ में बोस्तामी कछुओं की मौजूदगी और लोगों की श्रद्धा अनोखे आध्यात्मिक संबंध को भी उजागर करता है।

बीजेपी के नेतृत्व वाली त्रिपुरा सरकार ने हाल के वर्षों में पवित्र कछुओं के संरक्षण के लिए काफी प्रयास किए हैं।

सरकार ने वैश्विक संरक्षण संगठन, टर्टल सर्वाइवल अलायंस के साथ मिलकर इसका वैज्ञानिक अध्ययन भी शुरू किया है।

एक साल के इस कार्यक्रम का उद्देश्य कछुओं की पूरी आबादी की गणना करना, उनके स्वास्थ्य का आकलन करना और दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियाँ तैयार करना है। कल्याण सागर की पवित्रता बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं के बीच जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

कहीं हाथ काटने की धमकी, कहीं ‘सर तन से जुदा’ के नारे: जानें कैसे ‘I Love Muhammad’ के नाम पर इस्लामी कट्टरपंथी मचा रहे बवाल, झूठ फैलाकर की जा रही हिंसा

I Love Muhammad से जुड़े विवाद को लेकर देशभर में जगह-जगह पर इस्लामी कट्टरपंथियों की उन्मादी भीड़ हिंसक प्रदर्शन कर रही है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात समेत देश के कई राज्यों में इससे जुड़े प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की गई है। इसकी शुरुआत कानपुर में दर्ज की गई एक FIR से हुई है।

अलग-अलग शहरों में पुलिस पर पथराव किए गए और जुलूस में सरेआम ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए जा रहे हैं। वहीं, बरेली में एक मौलाना ने इस विवाद में इंस्पेक्टर को मारने की धमकी दी है।

बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर हटाने की कार्रवाई पर पुलिस और मुस्लिम समुदाय आमने-सामने आ गए। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नफीस खान ने मौके पर पहुँचकर खुलेआम इंस्पेक्टर को जान से मारने की धमकी दी। नफीस का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वह ‘तेरे हाथ काट लूँगा, तेरी वर्दी उतरवा दूँगा’ कहता नजर आ रहा है।

बरेली में कैसे हुआ विवाद?

यह पूरा मामला बीते 19 सितंबर से शुरू हुआ, जब जुमे की नमाज के बाद शहर के कई इलाकों में ‘आई लव मोहम्मद’ के पोस्टर लगाए गए। ये पोस्टर दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन ‘जमात रजा-ए-मुस्तफा’ के पदाधिकारी मोईन खान के नेतृत्व में लगाए गए थे। पुलिस ने इसे कानून-व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील मानते हुए 20 सितंबर की रात किला क्षेत्र से पोस्टर हटवा दिए।

अगले ही दिन फिर वही पोस्टर लगाए जाने लगे। जब किला पुलिस रविवार को कार्रवाई करने पहुँची, तो मौके पर भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जमा हो गए। पुलिस को घेरकर दबाव बनाने की कोशिश की गई और भीड़ ने फोन कर IMC नेता डॉ. नफीस खान को बुला लिया। मौके पर पहुँचते ही नफीस ने पुलिस टीम से अभद्रता की और इंस्पेक्टर सुभाष कुमार को सरेआम धमकी दी। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया।

एसपी सिटी मानुष पारीक ने पुष्टि की है कि डॉ. नफीस खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

उत्तराखंड के काशीपुर कट्टरपंथियों ने की पत्थरबाजी

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ जुलूस के दौरान अचानक पथराव, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएँ हुईं। इस दौरान पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, गाली-गलौज की गई और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ भी की गई है।

पुलिस ने इस घटना को लेकर 3 नामजद और 400-500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने 15 आरोपितों को जेल भेज दिया है। साथ ही, जिस जगह पर हंगामा किया गया वहाँ प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण भी हटाया है।

यूपी के उन्नाव में पथराव, कन्नौज में लगाए गए ‘सिर तन से जुदा’ के नारे

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में कट्टरपंथियों की भीड़ ने रविवार (21 सितंबर 2025) को जमकर हंगामा किया है। बिना अनुमति के सैकड़ों की संख्या में मुस्लिमों ने जुलूस निकालना शुरू कर दिया था। इस दौरान जुलूस में ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे खुलेआम लगाए गए, पुलिस पर हमला और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई।

गंगाघाट कोतवाली के प्रभारी इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह की वर्दी फाड़ दी गई। पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो कट्टरपंथी भीड़ ने पुलिस पर ही पथराव करना शुरू कर दिया। उन्नाव पुलिस ने इस घटना के बाद 8 नामजद समेत 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

इसके अलावा यूपी के कन्नौज में भी इसे लेकर भारी बवाल हुआ। कन्नौज की सफदरगंज मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम युवकों ने इस घटना को लेकर जुलूस निकाला और इस जुलूस में ‘सिर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाए गए।

गुजरात के गोधरा में कट्टरपंथियों ने थाने मे की तोड़फोड़

गुजरात के गोधरा में शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को कट्टरपंथियों ने ‘I Love Muhammad’ के प्रदर्शन को लेकर खूब हिंसा हुई थी। सोशल मीडिया पर लगातार भड़काऊ पोस्ट डालने वाले एक इन्फ्लुएंसर को गोधरा सिटी बी डिवीजन थाने द्वारा बुलाया गया था जिसे छुड़ाने के लिए उपद्रवियों की भीड़ ने जमकर हंगामा किया।

देर रात तक यह हंगामा चलता रहा और थाने में जमकर तोड़फोड़ की गई और फर्नीचर, खिड़कियाँ और पुलिस के वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया गया। साथ ही, भीड़ ने पुलिस कर्मियों पर पथराव भी शुरू कर दिया। पुलिस ने इसके बाद भीड़ पर लाठीचार्ज किया और पुलिस को आँसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े जिसके बाद ही बेकाबू भीड़ पर काबू पाया जा सका।

औवेसी और तौकीर रजा की बयानबाजी से प्रदर्शनों को मिली हवा

इस मामले को लेकर AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और IMC के अध्यक्ष तौकीर रजा समेत कई बड़े मुस्लिम नेताओं ने भी बयानबाजी की है। असदुद्दीन ओवैसी ने X पर लिखा कि अगर I LOVE मोहम्मद लिखना जुर्म है तो वह इसकी हर साज काटने को मंजूर हैं। ओवैसी ने लिखा, “तुम पर मैं लाख जान से कुर्बान या-रसूल, बर आएँ मेरे दिल के भी अरमान या-रसूल।”

तौकीर रजा ने भी इस घटना को लेकर मुसलमानों के सड़कों पर उतरने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि ‘I Love Muhammad’ कहना जुर्म बना दिया गया है। रजा ने कहा, “अगर मुसलमान सड़कों पर आ गया तो मुल्क में क्या हालात बनेंगे। हमें सड़कों पर आने को मजबूर ना करें।”

नेताओं की बयानबाजी के बाद प्रदर्शनों का सिलसिला और तेज हुआ और देश भर में मुसलमान सड़कों पर आ गए। कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शनों के अलावा, अलग-अलग शहरों में जुलूस भी निकाले जा रहे हैं। इन लोगों को बताया गया है कि कानपुर में ‘I Love Muhammad’ का बैनर लगाने पर FIR दर्ज कर ली गई थी। असल में कानपुर में सिर्फ ‘I Love Muhammad’ के बैनर को लेकर FIR किया जाने का दावा पूरी तरह सही नहीं है।

कानपुर में FIR को लेकर फैलाया जा रहा ‘झूठ’

कानपुर में ‘I Love Muhammad’ के बैनर लगाने को लेकर विवाद हुआ था लेकिन पूरी कहानी इस विवाद से आगे की है। 4 सितंबर को रावतपुर थाना क्षेत्र में सजावट के लिए ‘I Love Muhammad’ का लाइट बोर्ड लगाया गया था।

स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बोर्ड वहाँ से थोड़ी दूरी पर लगवा दिया गया। इसके बाद अगले दिन यानी 5 सितंबर को बारावफात के जुलूस के दौरान मुस्लिमों ने हिंदुओं के एक धार्मिक पोस्टर को फाड़ दिया।

FIR के मुताबिक“जुलूस निकाले जाने पर रावतपुर गाँव में हिंदू बस्ती से जुलूस निकाल रहे मुस्लिम समुदाय के कुछ अज्ञात मुस्लिम युवकों के द्वारा रास्ते में लगे हिंदू समुदाय के धार्मिक पोस्टर को जानबूझकर जुलूस में शामिल गाड़ी…में सवार मुस्लिम युवको द्वारा डंडों की मदद से फाड़ दिया गया।”

कानपुर में FIR का मामला केवल ‘I Love Muhammad’ के बैनर से जुड़ा हुआ नहीं है। वो बस इस पूरे विवाद का एक हिस्सा है जबकि असली कहानी मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदुओं के धार्मिक पोस्टर को मुस्लिमों द्वारा फाड़े जाने की है। इसके बाद भी एक तबके को बैनर हटाने को लेकर उकसाया जा रहा है और यह तबका सड़कों पर हंगामा कर रहा है।

बच्चों और महिलाओं के कत्लेआम पर पाकिस्तानी फौज के खिलाफ गुस्से में आवाम, सोशल मीडिया से सड़क तक लोगों का हंगामा: अंतर्राष्ट्रीय मदद की लगा रहे गुहार

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी फौज अपने ही मुल्क के नागरिकों पर हमला कर रहा है, जिसमें 30 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। इस बर्बर कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता ने सरकार और फौज के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और सोशल मीडिया पर शवों की तस्वीर शेयर कर विरोध हो रहा है। इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय मदद की गुहार भी लगाई गई है।

हमले पर पाकिस्तानी राजनेताओं और जनता का गुस्सा

पाकिस्तानी फौज के आम नागरिकों पर हमले के बाद देशभर में गुस्सा देखा जा रहा है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की स्थानीय शाखा ने इसे अपने ही नागरिकों पर ‘जेट-बॉम्बिंग’ कहा है।

खैबर पख्तूनख्वा असेंबली के सदस्य अब्दुल गनी आफरीदी ने भी फौज की आलोचना की है। अब्दुल गनी ने कहा कि तिराह में बेगुनाह बच्चों, नौजवानों और औरतों को मारना मानवता के खिलाफ एक खुला अपराध है। अब्दुल गनी ने आगे कहा कि ये बच्चे आतंकवादी नहीं थे। उनके हाथों में खिलौने थे, बंदूकें नहीं।

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस हमले में मारे गए मासूम बच्चों की दिल दहला देने वाली तस्वीरें साझा की हैं। रिपोर्टर फिरोज बलोच ने बच्चों की तस्वीरें पोस्ट की हैं। ये दिल दहला देने वाली हैं। खाट पर लेटे शवों पर चादरें पड़ी थीं, जिन्हें एक-एक कर हटाया गया। आसपास रोने की आवाजें थीं। लोगों की आँखों में खून उतर आया।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार

पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जहनवाज वेशा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से पूछा है कि क्या इन बच्चों के कोई अधिकार नहीं हैं? क्या पाकिस्तान को अपने ही नागरिकों की हत्या का लाइसेंस मिल गया है?

इमरान खान के समर्थकों ने भी इस घटना को गाजा या सीरिया से जोड़ा है। समर्थकों ने सवाल उठाया कि जब गाजा या सीरिया में बमबारी होती है, तो पूरी दुनिया हिल जाती है। लेकिन तिराह घाटी में मारे गए बच्चों के लिए कोई नहीं बोल रहा। शायद इसलिए क्योंकि ये पाकिस्तान के गरीब परिवारों से थे। न इनके पास पावर है, न प्लेटफॉर्म।

फौज और सरकार पर गंभीर आरोप

इस हमले के बाद पाकिस्तानी फौज पर अत्याचार के आरोप लग रहे हैं। पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने भी अपनी गलती मानी है। पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जेट विमानों ने चार घरों को निशाना बनाया, जो पूरी तरह से नष्ट हो गए।

इसके अलावा, बलूच जनता भी पाकिस्तानी फौज से नाराज है और उन्होंने विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। राजनेता मौलाना फजल-उर-रहमान ने भी आरोप लगाया है कि बलूचिस्तान में लोगों के गायब होने में फौज का हाथ है। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी फौज ‘आतंकवाद-विरोधी अभियानों’ के नाम पर अपने ही लोगों पर अत्याचार कर रही है।

योगी राज में बीमारू से ‘बेस्ट’ बना उत्तर प्रदेश, 2023 में ₹37000 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस के साथ रहा नंबर वन: CAG की रिपोर्ट में खुलासा, केंद्र ने बंगाल-केरल को दिया सबसे ज्यादा अनुदान

उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला राज्य बन गया है। ₹37,000 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस के साथ इसने देश के सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। ये तब हुआ है, जब यहाँ पेट्रोलियम पर सबसे कम टैक्स लिया जाता है। एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्यों में गिना जाता था। लेकिन अब देश का सबसे ‘उत्तम प्रदेश’ बन गया है।

सबसे ज्यादा रेवेन्यू सरप्लस वाला राज्य बना उत्तर प्रदेश

नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022-23 के दौरान देश के 16 राज्यों में रेवेन्यू सरप्लस थे, जिसमें उत्तर प्रदेश 37,263 करोड़ रुपए के साथ सबसे ऊपर था, उसके बाद गुजरात और ओडिशा का स्थान आता है।

15वें वित्त आयोग ने राज्यों के लिए राजकोषीय उत्तरदायित्व निर्धारित किए थे। इसमें राज्यों को 2022-23 के दौरान राजस्व घाटा खत्म करने और राजस्व सरप्लस पर जोर दिया गया था उत्तर प्रदेश ने योगी सरकार के दौरान राजस्व संग्रह सिस्टम और प्रबंधन के क्षेत्र में काफी सुधार किए हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

सीएजी के मुताबिक, “31 मार्च 2023 तक, कुल 28 राज्यों में से 16 राज्य राजस्व अधिशेष में थे और 12 राजस्व घाटे में थे।”

जिन 16 राज्यों की राजस्व अधिशेष उनके राजस्व व्यय से ज्यादा थे, उनमें उत्तर प्रदेश के बाद गुजरात का नंबर आता है, जहाँ 19,865 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष रहा। इसके बाद ओडिशा (19,456 करोड़ रुपये), झारखंड (13,564 करोड़ रुपये), कर्नाटक (13,496 करोड़ रुपये), छत्तीसगढ़ (8,592 करोड़ रुपये), तेलंगाना (5,944 करोड़ रुपये), उत्तराखंड (5,310 करोड़ रुपये), मध्य प्रदेश (4,091 करोड़ रुपये) और गोवा (2,399 करोड़ रुपये) का स्थान है। पूर्वोत्तर राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और मणिपुर भी राजस्व अधिशेष वाले राज्य है।

घाटे वाले 12 राज्यों का संयुक्त राजस्व घाटा 2,22,648 करोड़ रुपए था। 2022-23 में राज्यों के राजस्व घाटे को पाटने के लिए वित्त आयोग ने 86,201 करोड़ रुपए का अनुदान दिया, जो कुल राजस्व घाटे का 39 % था। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 राज्य ऐसे थे जिनका राजस्व व्यय उन्हें मिलने वाले राजस्व से अधिक था।

राजस्व घाटे वाले राज्य आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल थे। बिहार, केरल, मेघालय और महाराष्ट्र में राजस्व की प्राप्ति राजस्व व्यय का 90-100 फीसदी रहा। यानी राजस्व घाटा 0-10 फीसदी तक रहा।

12 राज्यों को अभी भी हो रहा घाटा

असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजस्व प्राप्तियाँ राजस्व व्यय का 80-90 प्रतिशत थीं। यानी राजस्व घाटा 10-20 फीसदी रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश और पंजाब ऐसे राज्य रहे, जहाँ राजस्व की प्राप्ति राजस्व व्यय का 75-80 प्रतिशत थीं। राजस्व घाटा 20-25 फीसदी था

रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में राजस्व घाटा अनुदान राज्यों को दिए गए कुल वित्त आयोग अनुदान का 50 प्रतिशत था।

अनुदान पाने वाले राज्यों में बंगाल अव्वल

राजस्व घाटा अनुदान का सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल को मिला। उसे कुल अनुदान का 15.76 फीसदी दिया गया, ताकि वह अपने राजस्व घाटे को पाट सके। दूसरे नंबर पर केरल है, जिसे कुल अनुदान का 15.28 प्रतिशत मिला। इसके बाद आंध्र प्रदेश (12.24 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (10.88 प्रतिशत), पंजाब (9.60 प्रतिशत), उत्तराखंड (8.28 प्रतिशत), असम (5.67 प्रतिशत), राजस्थान (5.64 प्रतिशत), नागालैंड (5.26 प्रतिशत) और त्रिपुरा (5.13 प्रतिशत) का स्थान आता है।

बंगाल- केरल समेत 10 राज्यों को वित्त आयोग राजस्व घाटा अनुदान का लगभग 94 प्रतिशत दिया गया।

हरियाणा के टैक्स सिस्टम में जबरदस्त सुधार

सीएजी की रिपोर्ट में कुछ ऐसे राज्य भी चर्चा की गई है जिसने अपने टैक्स सिस्टम को मजबूत किया है। इससे उनकी अर्थव्यवस्था पहले से मजबूत हुई है। इसमें पहले नंबर पर हरियाणा है, जो कुल आय का 80 फीसदी हिस्सा खुद कमाता है। दूसरे नंबर पर तेलंगाना है और फिर महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और गोवा का नंबर आता है।

H1-B वीजा फीस और टैरिफ चुनौतियों के बीच एस जयशंकर और मार्को रूबियो की मुलाकात, अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- ‘भारत बेहद अहम’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही H1-B वीजा की फीस ₹88 लाख कर दी थी। इसके बाद, न्यूयॉर्क में सोमवार (22 सितंबर 2025) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच एक अहम मुलाकात हुई। मुलाकात में मार्को रूबियों ने ‘अमेरिका के लिए भारत को काफी अहम’ बताया है।

मुलाकात के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा

मार्को रूबियो ने कहा कि भारत अमेरिका के लिए ‘बेहद महत्वपूर्ण’ देश है। मार्को रूबियो ने भारत की व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों में भागीदारी की सराहना की। मार्को रूबियों ने यह भी कहा कि दोनों देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र और खुले वातावरण को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, विशेष रूप से क्वाड के माध्यम से।

रूबियो और जयशंकर पहले भी मिल चुके हैं। जुलाई 2025 में वे ‘क्वाड’ (QUAD) की बैठक में मिले थे। क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस समूह का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि क्वाड के माध्यम से स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना जरूरी है।

एस जयशंकर ने भी इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कई द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्राथमिक मुद्दों पर प्रगति के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता है।

वीजा फीस का भारत पर असर

बता दें, कि भारत H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाला देश है। पिछले साल, अमेरिका ने जितने भी H-1B वीजा दिए, उनमें से 71% भारतीयों को मिले थे। डोनाल्ड ट्रंप के वीजा फीस बढ़ोतरी के बाद नए शुल्क से भारतीय आईटी कंपनियों की लागत में तेजी से बढ़ोतरी होगी। इससे छोटे-छोटे बिजनेस और स्टार्टअप को भी मुश्किलें आ सकती हैं। भारत सरकार और तकनीकी कंपनियाँ इस फैसले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह भारतीय पेशेवरों के अमेरिका जाने के रास्ते को कठिन बना सकता है।

भारत और अमेरिका के रिश्ते पहले से अधिक जटिल हो चुके हैं, लेकिन इन व्यापारिक और वीजा विवादों के बावजूद दोनों देश सहयोग को बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। दोनों पक्षों ने यह संदेश दिया है कि चाहे चुनौतियाँ बढ़ें, वे संवाद और सहयोग को जारी रखेंगे।