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जिन शरद यादव ने लालू को बनवाया CM, अपनी पार्टी का RJD में कर दिया विलय उनके बेटे संग ही तेजस्वी ने कर दिया धोखा: ‘हिंदू विरोधी’ चंद्रशेखर को मधेपुरा से दिया टिकट

शरद यादव के बेटे शांतनु यादव ने दावा किया है कि लालू यादव ने उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट देने का वादा किया था लेकिन आखिरी वक्त में वो अपने वादे से पलट गए।

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले टिकटों के लिए खूब मारा-मारी मची है। मधेपुरा विधानसभा सीट से राजद से दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के बेटे शांतनु यादव को टिकट मिलने की चर्चा थी लेकिन पार्टी ने पूर्व मंत्री प्रो. चंद्रशेखर को आखिरी वक्त में अपना उम्मीदवार बना दिया। प्रो. चंद्रशेखर वही नेता हैं जो अपने हिंदू विरोधी बयानों के लिए कुख्यात हैं और रामचरित मानस को ‘नफरती ग्रंथ’ तक बता चुके हैं।

इसके बाद राजद में अपनी पार्टी का विलय करने वाले शरद यादव के बेटे शांतनु यादव ने तेजस्वी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कॉन्ग्रेस की नेता और शांतनु यादव की बहन सुभाषिनी यादव भी अपने भाई के पक्ष में आ गईं और तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लिया।

शांतनु यादव और सुभाषिनी यादव ने क्या कहा?

बीते 13 अक्टूबर को शांतनु यादव ने तेजस्वी यादव के ‘बीजेपी से लड़ने’ के एक X पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा था, “हम लड़ेंगे और जीतेंगे। ✊?” लेकिन शनिवार (17 अक्टूबर) आते-आते यह स्थिति बदल गई।

शांतनु यादव ने शनिवार सुबह X पर तेजस्वी यादव के साथ अपनी और अपने पिता शरद यादव की एक तस्वीर साझा की। इसके साथ शांतनु ने लिखा, “मेरे खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र हुआ। समाजवाद की हार हुई।”

शांतनु यादव के इस पोस्ट के बाद उनकी बहन सुभाषिनी यादव भी उनके समर्थन में आ गईं। सुभाषिनी यादव ने X पर लिखा, “जो अपने खून के नहीं हुए, वो दूसरों के क्या सगे होंगे। जो अपने ही परिवार के वफादार नहीं, वो किसी और के लिए कैसे भरोसेमंद हो सकते हैं? ये विश्वासघात की पराकाष्ठा और उनकी असहजता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जो षड्यंत्र इन्होंने रचा है, अब वही षड्यंत्र इनके खिलाफ जनता रचेगी।”

टिकट देने का वादा कर मुकर गए लालू-तेजस्वी: शांतनु ने सुनाया किस्सा

इसके बाद शांतनु यादव ने शनिवार (18 अक्टूबर) को X पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने X पर वीडियो के साथ लिखा, “राजनीति में हम झाल बजाने नहीं आए हैं मुझे भी अपने पिता का नाम और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना है। मेरा विरोध सिर्फ आवाज उठाना नहीं, बल्कि जिंदा होने और अपने हक के लिए डटे रहने का सबूत है।”

इस वीडियो में शांतनु ने बताया है कि किस तरह उनके पिता उन्हें मधेपुरा से अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। शांतनु ने कहा, “मेरे पिता ने अस्वस्थ होने पर इच्छा जताई थी कि शांतनु मेरी विरासत को आगे बढ़ाएँगे। उनका पहला कदम अपनी पार्टी (लोकतांत्रिक जनता दल) को आरजेडी में विलय करना था।”

शांतनु बताते हैं कि पिता के निधन के बाद वह आश्वस्त थे कि वह आरजेडी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और उन्होंने इसके लिए पूरी तैयारी भी कर ली थी। उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव जी और तेजस्वी यादव जी बोले कि शांतनु लोकसभा की नहीं, आप विधानसभा चुनाव की तैयारी करिए। मैंने सोचा कि वो हमारे अभिभावक है और वो कह रहे हैं तो हम विधानसभा चुनाव की तैयारी करते हैं।”

हालाँकि, शांतनु नहीं चाहते थे कि वह विधानसभा चुनाव लड़ें लेकिन लोगों के कहने पर वह इसके लिए भी तैयार हो गए थे। उन्होंने कहा, “हम गए लेकिन आखिरी में हमारी जगह किसी और को टिकट दे दिया।” उन्होंने आगे कह, “राजनीति में हम झाल बजाने नहीं आए हैं हमें भी अपने पिताजी का नाम आगे बढ़ाना है।” शांतनु का कहना है कि वह लोगों के साथ बैठेंगे और आगे का फैसला करेंगे।

आखिरी वक्त तक शांतनु को भरोसा देते रहे तेजस्वी

पत्रकार अजय झा ने 17 अक्टूबर को एक X पोस्ट में दावा किया है कि तेजस्वी यादव आखिरी वक्त तक शांतनु यादव को टिकट मिलने का भरोसा दे रहे थे। अजय झा ने लिखा है, “स्वर्गीय शरद यादव ने अपनी पार्टी का विलय राजद में किया था। उस वक्त ये सहमति बनी थी कि उनके बेटे शांतनु यादव को राजद मधेपुरा से लोकसभा का टिकट देगी। लेकिन टिकट नहीं दिया गया। इस बीच शरद यादव का निधन हो गया।”

झा ने आगे लिखा, “अब विधानसभा चुनाव में एक बार फिर तेजस्वी यादव ने शांतनु को मधेपुरा सीट से विधानसभा चुनाव की तैयारी करने को कहा। दो दिन पहले फोन करके पेपर तैयार करने को भी कहा गया।”

उन्होंने आगे कहा, “यहाँ तक कि कल (16 अक्टूबर) आकर सिंबल लेकर जाने को कहा गया। लेकिन आखिरी वक्त में फिर से राजद ने सिटिंग विधायक को दे दिया। शांतनु ने इसके बाद तेजस्वी से मुलाकात कर साफ कर दिया कि इस विश्वासघात वो अब उनके साथ नहीं रह सकते हैं।”

जब शरद यादव ने लालू यादव को दिलाई थी बिहार CM की कुर्सी

यूँ तो शरद यादव मध्य प्रदेश में जन्मे थे लेकिन उनकी राजनीति की धाक उत्तर प्रदेश और बिहार तक थी। जय प्रकाश नारायण ने छात्र आंदोलन के बाद जिस उम्मीदवार को हलधर किसान के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़वाया वो शरद यादव ही थे। इसके बाद वे 1989 में बदायूँ से लोकसभा पहुँचे और बिहार के मधेपुरा से भी 4 बार लोकसभा सांसद रहे।

मार्च 1990 में बिहार विधानसभा चुनाव हुए और कॉन्ग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। जनता दल के विधायक दल का नेता चुनने की बारी आई तो सबको लगा कि रामसुंदर दास मुख्यमंत्री होंगे क्योंकि वे प्रधानमंत्री वीपी सिंह और जॉर्ज फर्नांडीस की पहली पसंद थे। इस बीच लालू यादव के नाम की चर्चा चलने लगी क्योंकि वे देवीलाल, शरद यादव और नीतीश कुमार की पसंद थे।

जब जनता दल विधायक दल का नेता सर्वसम्मति से चुनने की कोशिश की गई, तो शरद यादव विधायकों से वोटिंग के जरिए नेता चुनने पर अड़े गए। उन्हें सीधे मुकाबले में दास की जीत का अंदाजा था। वहाँ वोटिंग हुई और शरद यादव की सेट की गई फील्डिंग की बदौलत लालू यादव जीत गए। इसके बाद भी लालू यादव को शपथ ग्रहण का न्योता नहीं मिल रहा था तो उन्होंने खुद यह सुनिश्चित किया कि लालू को ना केवल न्यौता मिले बल्कि उनका भव्य शपथ ग्रहण समारोह भी हो।

बाद में उनके लालू यादव से मतभेद भी हुए। शरद यादव JDU में चले गए, फिर अपनी पार्टी भी बनाई और अंत में मार्च 2022 में अपनी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में कर दिया। उन्होंने तब कहा था, “हमारी पार्टी का आरजेडी में विलय विपक्षी एकता की दिशा में पहला कदम है। देशभर में बीजेपी को हराने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट होना बहुत जरूरी है।”

लालू यादव खुद उनका यह एहसान मानते रहे और जब शरद यादव का निधन हुआ तो उन्होंने उन्हें बड़ा भाई बताते हुए कहा कि उनसे मतभेद तो हुए लेकिन कभी मनभेद नहीं हुए थे।

‘हिंदू विरोधी’ चंद्रशेखर को आरजेडी ने दिया टिकट

आरजेडी ने जिन पूर्व मंत्री चंद्रशेखर को टिकट दिया है उनका ‘हिंदू विरोधी’ बयानों को इतिहास रहा है। वो रामचरितमानस को ‘नफरत फैलान वाला ग्रंथ’ और ‘पोटेशियम साइनाइड’ तक बता चुके हैं।

जनवरी 2023 में ‘नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने रामचरितमानस के एक दोहे “अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए” का जिक्र करते हुए कहा था कि यह समाज में नफरत फैलानेवाला ग्रंथ है। उन्होंने इस कार्यक्रम से बाहर आकर कहा कि किसी जमाने में मनुस्मृति ने समाज में नफरत का बीज बोया, उसके बाद रामचरितमानस ने समाज में नफरत पैदा की।

यही शिक्षा मंत्री जो रामचरितमानस पर सवाल उठाते थे वे इस्लाम को ही मोहब्बत का पैगाम देने वाला मजहब मानते हैं। इतना ही नहीं सितंबर 2023 में तो उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद को मर्यादा पुरुषोत्तम बता दिया था। उन्होंने जन्माष्टमी पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था, “जब शैतानियत बढ़ गई दुनिया में, ईमान खत्म हो गया, बेईमान और शैतान ज्यादा हो गए तो मध्य एशिया के इलाके में ईश्वर ने, प्रभु ने, परमात्मा ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रोफेट मुहम्मद साहब को पैदा किया।”

2023 के सितंबर में ही उन्होंने रामचरितमानस में जहरीला रसायन पोटेशियम साइनाइड होने का दावा कर दिया था। इतना ही नहीं वे रामचरितमानस का खुलकर विरोध करते हैं और अब आरजेडी ने उन्हें उनके काम का ईनाम देते हुए शरद यादव के बेटे से वादाखिलाफी कर उन्हें टिकट दे दिया है।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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