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नवरात्रि के पहले दिन PM मोदी ने की माता त्रिपुरसुंदरी की आराधना, 524 वर्ष प्राचीन माताबाड़ी का नव्य-दिव्य-भव्य स्वरुप राष्ट्र को किया समर्पित: शक्तिपीठ के बारे में जानिए सब कुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (22 सितंबर 2025) को नवरात्रि के पहले दिन त्रिपुरा के प्रसिद्ध त्रिपुरसुंदरी (त्रिपुरा सुंदरी\ Tripua Sundari) मंदिर में पूजा अर्चना की है। इस दौरान पीएम मोदी ने गोमती जिले के उदयपुर शहर में स्थित इस तीर्थ के पुनर्विकसित स्वरूप का उद्घाटन भी किया है।

इस धाम को माता के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोगों के बीच इसे त्रिपुरेश्वरी मंदिर या माताबाड़ी के नाम से भी जाना जाता है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, माता सती के शरीर के अध:-पैर का दक्षिण चरण (दक्षिण पैर की अंगुली सहित) हिस्सा यहाँ गिरा था, इसलिए यह स्थान बेहद पवित्र माना जाता है। इसे ‘कुर्भपीठ’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह मंदिर एक ऐसे टीले पर बना है जो कछुए की पीठ जैसा दिखता है। यह तांत्रिक साधना के लिए शुभ माना जाता है।

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1501 में महाराजा धन्या माणिक्य ने करवाया था। शुरू में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित था, लेकिन एक दिव्य स्वप्न में देवी माया ने महाराजा को आदेश दिया कि उन्हें इस स्थान पर अपने सुंदरतम रूप में प्रतिष्ठित किया जाए।

इसके बाद यहाँ देवी त्रिपुरसुंदरी की मूर्ति स्थापित की गई। मंदिर की स्थापत्य शैली बंगाली ‘एक-रत्न’ (Ek-Ratna) शैली की है, जो इसकी पुरानी वास्तुकला को दर्शाती है। मंदिर के पास ही कल्याण सागर नामक पवित्र झील है, जहाँ के कछुओं को श्रद्धालु पूजनीय मानते हैं। हालाँकि यह मंदिर वैष्णव और शाक्त संप्रदायों के बीच एकता का प्रतीक है।

यहाँ भगवान विष्णु की पूजा शालिग्राम शिला के रूप में की जाती है, जो कि काले रंग का एक पवित्र पत्थर होता है। ऐसा उदाहरण कि शक्ति पीठ या काली मंदिर में देवी शक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा हो, बहुत ही दुर्लभ है। यही इस मंदिर की खासियत भी है।

यहाँ त्रिपुर सुंदरी माता की एक बड़ी मूर्ति (लगभग 5 फीट ऊँची) और एक छोटी मूर्ति ‘छोटो-मा’ (लगभग 2 फीट ऊँची) है। ‘छोटो-मा’ को पहले विशेष अवसरों जैसे राजाओं द्वारा युद्ध, शिकार या उत्सवों में साथ ले जाया था।

यहाँ देवी शक्ति को माँ त्रिपुर सुंदरी के रूप में पूजा जाता है और उनके साथ भैरव को त्रिपुरेश के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि राज्य का नाम ‘त्रिपुरा’ भी देवी त्रिपुर सुंदरी से ही जुड़ा है, जिससे यह मंदिर राज्य की संस्कृति और आस्था का केंद्र बन गया है।

ऐसी लोककथाएँ हैं कि वर्तमान में जो मूर्ति स्थापित है, वह पास के ‘ब्रह्मछरा’ जलस्रोत से प्राप्त हुई थी। मूर्ति के चरणों के नीचे श्री यंत्र बना हुआ है, जो एक दिव्य और पवित्र ज्यामितीय आकृति है। इसे देखना या इसकी पूजा करना अनेक शुभ कर्मों के समान माना जाता है।

माँ को विशेष रूप से लाल गुड़हल का फूल अर्पित किया जाता है और पेडा प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यह ‘माताबाड़ी पेडा’ अब GI टैग प्राप्त कर चुका है। हर साल दीवाली के अवसर पर यहाँ दो दिवसीय दीवाली मेला आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भारत और बांग्लादेश सहित विभिन्न स्थानों से आते हैं। यह मेला त्रिपुरा की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।

मंदिर का प्रबंधन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त समिति और माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि पर्यटन हमारे विरासत और विकास के बीच एक सेतु है। खासकर आध्यात्मिक पर्यटन को उन्होंने भारत की प्रगति में एक अहम भूमिका दी है। तीर्थ स्थल न केवल आस्था के केंद्र होते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की भावना के जीवंत प्रतीक भी हैं।

इसी सोच के तहत केंद्र सरकार ने PRASHAD योजना (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive) शुरू की, जिसके माध्यम से देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों को नई पहचान दी जा रही है।

इसमें सुविधाओं का विकास, बेहतर संपर्क साधन और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

इस मंदिर का पुनर्विकास भी केंद्र सरकार की PRASAD योजना के तहत किया गया है। यह योजना भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा 2021 में स्वीकृत की गई थी। इस योजना की कुल लागत 54.04 करोड़ है, जिसमें से 34.43 करोड़ केंद्र सरकार और 17.61 करोड़ राज्य सरकार द्वारा दिए गए हैं।

प्रोजेक्ट के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य किए जा रहे हैं। जैसे मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण और संगमरमर फ्लोरिंग, नई प्रवेश द्वार और रास्ते, दुकानों और प्रसाद स्टॉल्स के लिए नया भवन, ध्यान कक्ष और अतिथि कक्ष, पुजारियों, मैनेजर और स्वयंसेवकों के लिए आवासीय क्षेत्र, विश्रामगृह, टॉयलेट ब्लॉक, जल की व्यवस्था, और बैठने की सुविधा। इसके अलावा VIP लाउंज और माताबाड़ी गैलरी शामिल है।

PRASHAD योजना के जरिए इस मंदिर में न सिर्फ आधुनिक सुविधाएँ जोड़ी गई हैं, बल्कि इसकी पवित्रता और विरासत को भी संरक्षित किया गया है। यह प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन का जीवंत उदाहरण है, जो विकसित भारत 2047 की दिशा में एक ठोस कदम है।

पर्यटन और रोजगार पर प्रभाव

फिलहाल प्रतिदिन 3000-3500 श्रद्धालु और पर्यटक मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। परियोजना पूर्ण होने के बाद यह संख्या बढ़कर 5000-7000 प्रतिदिन तक पहुँचने की संभावना है।

इससे स्थानीय होटल, टैक्सी सेवाएँ, गाइड, हस्तशिल्प विक्रेता और खाद्य व्यवसायों को सीधा और परोक्ष रोजगार मिलेगा। सरकार की योजना है कि उदयपुर शहर को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

आधुनिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण और 51 शक्तिपीठ पार्क जैसी योजनाओं के साथ यह धाम अब आस्था के साथ-साथ त्रिपुरा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक बन गया है। 524 साल पुराने त्रिपुर सुंदरी मंदिर का नवीनीकरण न सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी त्रिपुरा के लिए एक नया अध्याय साबित होगा।

जिस प्रोफेसर ने हनुमान जी की प्रतिमा के लिए लिखा- तोड़ दो, उस पर कानूनी एक्शन के विकल्प तलाश रही सूरत की यूनिवर्सिटी: कहा- हमसे नहीं वास्ता, 2021 में दे दिया था इस्तीफा

गुजरात के सूरत में स्थित वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी (VNSGU) को सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद सफाई देनी पड़ी है। दरअसल, यूनिवर्सिटी से जुड़े बताए जा रहे प्रोफेसर मधुसूदन राज के कई ट्वीट वायरल हुए, जिन्हें यूजर्स ने हिंदू-विरोधी करार देते हुए गुजरात पुलिस को टैग कर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

विवाद तब भड़का जब अमेरिका के टेक्सास में बनी हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर मधुसूदन राज का ट्वीट सामने आया। एक अमेरिकी अकाउंट ने 20 सितंबर को हनुमान जी की मूर्ति की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, “अब जब हम H1B वीजा वाले भारतीयों को यहाँ से निकाल रहे हैं, तो टेक्सास के फोर्ट बेंड काउंटी में लगी इस ‘हिंदू डेमन मंकी गॉड’ की मूर्ति को हटाना भी सरकार के लिए मुश्किल काम नहीं होगा।”

इस शर्मनाक पोस्ट को मधुसूदन राज ने रीट्वीट करते हुए लिखा ‘Smash it’ यानी ‘इसे तोड़ डालो।’

यही दो शब्द आग में घी का काम कर गए और सोशल मीडिया पर जबरदस्त आक्रोश फूट पड़ा। लोग इसे हिंदू आस्था पर सीधा हमला मानकर VNSGU को घेरने लगे। कई यूजर्स ने दावा किया कि वह अब भी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

हालाँकि, यूनिवर्सिटी के मानव संसाधन विभाग ने तुरंत बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मधुसूदन राज पहले यहाँ कार्यरत थे, लेकिन उन्होंने 2021 में इस्तीफा दे दिया था। तब से उनका विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वे मामले की जाँच कर रहे हैं और विस्तृत बयान भी जारी किया जाएगा, लेकिन साफ है कि राज के निजी विचारों और गतिविधियों से संस्थान का कोई लेना-देना नहीं है।

खबरों के मुताबिक, मधुसूदन राज इस समय विदेश में रह रहे हैं। उनके एक्स प्रोफाइल में वह खुद को ‘Born again Christian’ बताते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बयान विवादों में आए हों।

पहले भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हिंदुओं और गुजरातियों के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हैं। कभी पीएम मोदी को ‘जोकर’ बताया तो कभी भारत की स्थिति की तुलना तानाशाही से की। इतना ही नहीं, धार्मिक आस्था, मंदिरों और परंपराओं का मजाक उड़ाना भी उनकी पोस्ट्स का हिस्सा रहा है, जिसे लोगों ने बेहद अपमानजनक माना।

इन सबको देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, भले ही राज अब वहाँ के कर्मचारी न हों।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट गुजराती में मेघल सिंह परमार ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है।)

कभी ‘AK-47’ तो कभी बीच मैदान नमाज, कभी ‘6-0’ तो कभी मुस्लिम बनने का ऑफर: पाकिस्तानी क्रिकेटरों ने बैट-बॉल के गेम को बना दिया मजहब का खेल, इस्लामी एजेंडा आगे-खेल भावना पीछे

क्रिकेट को दुनिया भर में एक ऐसा खेल माना जाता है, जो लोगों को जोड़ता है, भाईचारे को बढ़ाता है और खेल भावना को सबसे ऊपर रखता है। लेकिन जब बात भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैच की आती है, तो यह सिर्फ खेल नहीं रह जाता। यह एक भावनात्मक जंग बन जाता है, जिसमें मैदान पर खेल से ज्यादा सियासत और मजहबी रंग नजर आता है।

एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी खेल के मैदान को भी मजहबी कट्टरपंथ का अखाड़ा बनाने से नहीं चूकते। साहिबजादा फरहान का बल्ले को एके-47 की तरह दिखाकर ‘फायरिंग सेलिब्रेशन’ करना हो या हारिस रऊफ का ‘6-0’ का इशारा, पाकिस्तानी खिलाड़ियों ये हरकतें खेल भावना को तार-तार करती हैं।

खेल के मैदान पर इस्लामी कट्टरपंथ फैलाते हैं पाकिस्तानी खिलाड़ी

पाकिस्तानी खिलाड़ियों का इतिहास रहा है कि वे मैदान पर खेल भावना को कम और मजहबी कट्टरपंथ को ज्यादा तवज्जो देते हैं। साहिबजादा फरहान ने एशिया कप 2025 के सुपर-4 मैच में अर्धशतक बनाकर बल्ले को बंदूक की तरह इस्तेमाल किया और ‘गोली चलाने’ का इशारा किया।

इसी तरह हारिस रऊफ ने बाउंड्री लाइन पर फील्डिंग करते हुए ‘6-0’ का इशारा किया और विमान गिराने की एक्टिंग की, जो पाकिस्तान के उस दावे से जोड़ा गया, जिसमें उसने फर्जी तरीके से भारत के छह राफेल विमान गिराने की बात कही थी।

ये इशारे खेल भावना के खिलाफ हैं और साफ दिखाते हैं कि पाकिस्तानी खिलाड़ी मैदान पर भी सियासत और मजहबी भावनाओं को लाने से नहीं हिचकते।

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने ऐसी हरकतें की हैं। मोहम्मद रिजवान का मैदान पर नमाज पढ़ना भी कई बार चर्चा का विषय बना है। 2023 में नीदरलैंड के खिलाफ एक मैच में रिजवान का बीच मैदान में नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ था।

कट्टरपंथी रहा है पाकिस्तान का ड्रेसिंग रूम

पाकिस्तानी क्रिकेट में मजहबी कट्टरपंथ का इतिहास पुराना है। पाकिस्तान के हिंदू टेस्ट क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने कई बार खुलासा किया कि उन्हें अपने करियर के दौरान मजहब के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा।

दानिश कनेरिया ने 2006 में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें कभी धर्म बदलने के लिए मजबूर तो नहीं किया गया, लेकिन टीम में उनके साथ अलग व्यवहार होता था। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ खिलाड़ी उन्हें ‘काफिर’ कहकर ताने मारते थे। यह साफ दिखाता है कि पाकिस्तानी क्रिकेट में गैर-मुस्लिम खिलाड़ियों के लिए माहौल कितना मुश्किल रहा है।

इसी तरह यूसुफ योहाना (जो अब मोहम्मद यूसुफ के नाम से जाने जाते हैं) की कहानी और भी चौंकाने वाली है। योहाना पहले ईसाई थे, लेकिन उसने साल 2005 में इस्लाम कबूल कर लिया। कई लोगों का मानना है कि यह फैसला उनके करियर को लंबा खींचने और टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए दबाव में लिया गया था।

धर्म परिवर्तन के बाद यूसुफ का व्यवहार भी बदल गया और आज वह एक कट्टरपंथी मौलाना के रूप में जाने जाते हैं। एशिया कप 2025 में ही भारत-पाकिस्तान के पिछले मैच के बाद यूसुफ ने एक टीवी शो में भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए अपशब्द कहे और भारत पर अंपायरों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। यह व्यवहार न सिर्फ खेल भावना के खिलाफ है, बल्कि उनके मजहबी कट्टरपंथ को भी दर्शाता है।

श्रीलंकाई खिलाड़ी को मैदान पर दिया मुस्लिम बनने का ऑफर

पाकिस्तानी खिलाड़ियों की हरकतें सिर्फ उनके देश तक सीमित नहीं रहतीं। कई बार वे विरोधी टीमों के खिलाड़ियों को भी निशाना बनाते हैं। कुछ साल पहले एक श्रीलंकाई खिलाड़ी ने खुलासा किया था कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने उन्हें मैदान पर इस्लाम कबूल करने का ऑफर दिया था।

खुद मैदान छोड़ने वाले पाकिस्तानी सिखा रहे खेल भावना

एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान मैच के बाद एक और विवाद ने सुर्खियाँ बटोरीं, जब भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। इसकी वजह थी भारत का पहलगाम हमले को लेकर गुस्सा, जिसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया गया। भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस के समय और मैच के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से दूरी बनाए रखी।

पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (PCB) और खिलाड़ियों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया, लेकिन सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान का इतिहास खेल भावना का समर्थन करता है? 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में पाकिस्तानी टीम ने मैदान छोड़ दिया था, क्योंकि उन्हें बॉल टैंपरिंग का दोषी ठहराया गया था। यह घटना क्रिकेट इतिहास में खेल भावना के उल्लंघन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

पाकिस्तानी खिलाड़ियों और बोर्ड का यह दावा कि भारत ने खेल भावना का उल्लंघन किया। ऐसे में हास्यास्पद लगता है-जब उनके अपने खिलाड़ी मैदान पर भड़काऊ इशारे करते हैं और मजहबी रंग लाते हैं और PCB इसका बचाव करे।

क्रिकेट या सियासत का मैदान?

पाकिस्तानी खिलाड़ियों की हरकतें बार-बार यह सवाल उठाती हैं कि क्या वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल की तरह देखते हैं? 2023 में भारत में हुए वर्ल्ड कप के दौरान, जब पाकिस्तानी खिलाड़ी मोहम्मद रिजवान पवेलियन लौट रहे थे, तो दर्शकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। इस पर पाकिस्तानी मीडिया और खिलाड़ियों ने इसे धार्मिक उन्माद से जोड़ा, लेकिन खुद रिजवान का मैदान पर नमाज पढ़ना क्या था? क्या यह खेल के मैदान को मजहबी मंच बनाने की कोशिश नहीं थी?

पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी जैसे शाहिद अफरीदी और मोहम्मद यूसुफ भी अपने बयानों से विवाद खड़ा करते रहे हैं। अफरीदी ने एशिया कप 2025 के हैंडशेक विवाद के बाद भारत सरकार पर ‘हिंदू-मुस्लिम कार्ड‘ खेलने का आरोप लगाया। यह बयान न सिर्फ आधारहीन था, बल्कि खेल को सियासत और मजहब से जोड़ने की उनकी मानसिकता को दर्शाता है।

खेल भावना की जरूरत

क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ियों की हरकतें बार-बार इसकी गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं। खेल का मैदान सम्मान, एकता और प्रतिस्पर्धा का प्रतीक होना चाहिए, न कि मजहबी या सियासी जंग का अखाड़ा। पाकिस्तानी खिलाड़ियों को यह समझना होगा कि क्रिकेट सिर्फ जीत-हार का खेल नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के प्रशंसकों के लिए एक भावना है। आखिरकार इतिहास हमेशा खेल भावना का मूल्यांकन करता है और इस मामले में पाकिस्तानी खिलाड़ी बार-बार नाकाम साबित हुए हैं।

पूर्वोत्तर के राज्यों को हम अष्ट लक्ष्मी की तरह पूजते हैं: अरुणाचल को PM मोदी ने ₹5100 करोड़ परियोजनाओं की दी सौगात, कहा- दिल की दूरी मिटाकर आपके पास लाए दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (22 सितंबर 2025) को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर पहुँचे। यहाँ प्रधानमंत्री ने ₹5100 करोड़ लागत की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन तमाम परियोजनाओं से प्रदेश के विकास में गति आएगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने जनता को भी संबोधित किया। पीएम ने अरुणाचल प्रदेश की धरती को माँ शैलपुत्री की धरती बताते हुए प्रशंसा की। साथ ही कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार ने प्रदेश को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा पीएम ने आत्मनिर्भर बन स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया और GST बचत उत्सव की शुभकामनाएँ दी।

अरुणाचल उगते सूर्य और देशभक्ति की धरती: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधन की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के महत्व की प्रशंसा से की। पीएम ने कहा, “अरुणाचल उगते सूर्य की धरती के साथ ही देशभक्ति के ऊफान की भी धरती है। जैसे तिरंगे का रंग केसरिया है वैसे ही अरुणाचल का पहला रंग केसरिया है। यहाँ का हर व्यक्ति शौर्य और सादगी का प्रतीक है।”

पीएम ने कहा, “अरुणाचल तो मैं कई बार आया हूँ, राजनीति और सत्ता के गलियारे में नहीं था तब भी आया हूँ। यहाँ की ढेर सारी यादें मेरे साथ जुड़ी हुई हैं। आप सभी के साथ बिताया हर पल मेरे लिए यादगार है। तवांग मठ से लेकर नमसाई का स्वर्णिम पगोडा तक अरुणाचल सांस्कृति का संगम है, माँ पारवती का गौरव है। मैं इस भूमि को प्रणाम करता हूँ।”

नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा, “मैं अरुणाचल प्रदेश की प्रशंसा करता हूँ कि आप सभी नमस्कार से भी पहले जय हिंद कहते हैं आप लोग स्वयं से भी पहले देश को रखते हैं।”

पीएम मोदी के अरुणाचल आना की तीन वजह

अरुणाचल प्रदेश पहुँचे पीएम मोदी ने कहा कि तीन वजह से वो अरुणाचल प्रदेश आए हैं। पीएम मोदी ने कहा, “नवरात्र में आज के दिन हम माँ शैलपुत्री की पूजा करते हैं और शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की ही बेटी है। दूसरी वजह ये है कि आज से देश में नेक्सट जेनरेशन GST रिफॉर्म्स लागू हुई है।”

तीसरी वजह बताते हुए पीएम ने कहा, “तीसरी वजह अरुणाचल को विकास के लिए ढेर सारे नए प्रोजेक्ट मिलने को लेकर है। पावर, कनेक्टिविटी और टेक सहित अनेक सेक्टर से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट मिले हैं। ये बीजेपी की डबल इंजन सरकार का डबल बेनिफिट है।”

कॉन्ग्रेस सरकार में अरुणाचल को हुआ नुकसान: पीएम मोदी

कॉन्ग्रेस सरकार में नॉर्थ ईस्ट के नुकसान को गिनाते हुए पीएम मोदी कहते हैं, “अरुणाचल में सूर्य की किरण सबसे पहले आती है। दुर्भाग्य से तेज विकास की किरण पहुँचते हुए कई दशक लग गए। अरुणाचल को प्रकृति ने काफी कुछ दिया है। यहाँ इतना कुछ है लेकिन तब जिन लोगों ने दिल्ली में बैठकर देश चलाया उन्होंने अरुणाचल को कुछ नहीं दिया।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “अरुणाचल में लोकसभा की दो ही सीटें है इसीलिए कॉन्ग्रेस ने ध्यान नहीं दिया। कॉन्ग्रेस की सोच का पूरे अरुणाचल को बहुत नुकसान हुआ। हमारा नॉर्थ ईस्ट विकास में बहुत पीछे पहुँच गया। मैंने 2014 में सत्ता में आने के बाद देश को कॉन्ग्रेसी सोच से मुक्ति दिलाने की ठान ली।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारी राजनीति किसी प्रदेश वोटों और सीटों की संख्या नहीं बल्कि नेशन फर्स्ट की भावना है। हमारा मंत्र है नागरिक भव: जिसको किसी ने नहीं पूछा उसको मोदी पूजता है। जिस नॉर्थ ईस्ट को कॉन्ग्रेस के समय में भूला दिया गया, वो 2014 के बाद विकास की प्राथमिकताओं का केंद्र बना।”

दिल की दूरी मिटा दिल्ली आपके पास लाए: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने ये पक्का किया कि सरकार दिल्ली में बैठकर नहीं चलेगी। अफसर और मंत्रियों को नॉर्थ ईस्ट आना होगा। यहाँ रात्रि मुकाम करना होगा। कॉन्ग्रेस के समय में दो-तीन महीने में एक या दो मंत्री आता था। बीजेपी सरकार में 800 से ज्यादा बार मंत्री नॉर्थ ईस्ट आ चुके हैं। सिर्फ ऐसा नहीं है कि आए और चले गए। हमारे मंत्री आते हैं तो प्रयास रहता है कि दूरदराज के क्षेत्र में जाएँ।”

पीएम मोदी कहते हैं, “मैं खुद ही प्रधानमंत्री के तौर पर 70 से ज्यादा बार नॉर्थ ईस्ट आया हूँ। अभी पिछले हफ्ते ही मैं मिजोरम मणिपुर और असम गया था और रात गुवाहाटी में गया था। नॉर्थ ईस्ट में मुझे दिल से पसंद है। इसीलिए हमने दिल की दूरी भी मिटाई और दिल्ली को आपके पास लेकर आए हैं। हम नॉर्थ ईस्ट के 8 राज्यों को अष्ट लक्ष्मी के रूप में पूजते हैं इसीलिए यहाँ विकास का इंतजार नहीं कर सकते। केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा पैसे खर्च कर रही है।”

सीमावर्ती गाँव पहले पलायन को मजबूर थे: पीएम मोदी

अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती गाँव पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “कॉन्ग्रेस की एक पुरानी आदत है कि विकास का जो भी काम मुश्किल होता है वो उसको हाथ नहीं लगाते हैं। कॉन्ग्रेस की इस आदत से नॉर्थ ईस्ट और अरुणाचल को नुकसान हुआ। पहाड़ों, जंगलो के बीच हो जहाँ विकास के काम करना चुनौती होता था उन क्षेत्रों को कॉन्ग्रेस पिछड़ा कहकर भूल जाती थी। जो बॉर्डर से सटे गाँव थे उनके देश का आखिरी गाँव कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती थी और अपनी नाकामियों को छुपा लेती थी।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “यही वजह है कि बॉर्डर क्षेत्र से लगातार पलायन होता रहे। जिनको कॉन्ग्रेस बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट कहती थी, हमने उनको एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट बनाया उनको विकास में प्राथमिकता दी। कॉन्ग्रेस जिनको लास्ट विलेज कहती थी, हमने उनका फर्स्ट विलेज बनाया। वाइब्रेंट विलेज योजना ने लोगों का जीवन आसान बनाया है। अरुणाचल प्रदेश के 450 अधिक बॉर्डर गाँव में तेजी आई है, वहाँ बिजली, नेटवर्क जैसी सुविधा मिली है। अब बॉर्डर के गाँव टूरिज्म का केंद्र बन रहे हैं।”

अरुणाचल में पर्यटन बढ़ रहा है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “अरुणाचल में टूरिज्म बढ़ रहा है। बीते दशक में यहाँ टूरिस्ट की संख्या में दोगुना वृद्धि हुई है। आजकल दुनिया में कॉन्फ्रेस और कन्सर्न टूरिज्म की बाढ़ आ रही है इसीलिए तवांग में बनने जा रहा आधुनिक कन्वेंन्शन सेंटर अरुणाचल के टूरिज्म में नया आवाम जोड़ेगा। अरुणाचल को वाइब्रेंट विलेज से भी मील का पत्थर साबित होगा।”

पीएम ने कहा, “अरुणाचल अब कृषि और बागवानी में आगे बढ़ रहा है। यहाँ के किवी, संतरा, इलायची और पाइनऐपल अरुणाचल को नई पहचान दे रहे हैं।”

माँ-बहन को सशक्त करने के लिए तीन करोड़ लखपति दीदिया बना रही है, ये बहुत बड़ा मिशन है लेकिन ये मोदी का मिशन है। पेमाखांडू जी और उनकी टीम इस मिशन को गति दे रही है। वर्किंग वुमन हॉस्टल बन रहा है। आपको अब हर महीने घर के बजट में राहत मिलने वाली है। किचन का सामान, बच्चों की पढ़ाई की चीजे, जूते-चप्पल अब सस्ते हो गए हैं।

देश पर आई चुनौती के बावजूद इनकम टैक्स घटाया: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, “साल 2014 से पहले कितनी परेशानी थी, महँगाई आसमान छू रही थी। चारों तरफ महाघोटाले हो रहे थे। तब की कॉन्ग्रेस सरकार जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाती जा रही थी। उस समय साल के 2 लाख रुपए कमाने पर भी इनकम टैक्स लग जाता था और आम जरूरत की कई चीजों पर 30 प्रतिशत से अधिक टैक्स लेती थी। बच्चों की टॉफी पर भी 3 प्रतिशत टैक्स लेती थी।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “बीते सालों में देश के सामने अनेक चुनौतियाँ आई लेकिन हम इनकम टैक्स घटाते गए। 11 साल पहले 2 लाख और इसी साल 12 लाख वार्षिक आय पर इनकम टैक्स जीरो कर दिया। और आज से हमने GST को भी सिर्फ दो स्लैब में कर दिया। बहुत सारी चीजे टैक्स फ्री हो गई हैं। अब आराम से घर बनाए, स्कूटर बाइक खऱीदे, घूमने फिरने जाएँ। ये सब पहले से सस्ते हो गए हैं। ये GST बचत उत्सव आपके लिए यादगार बनने वाला है।”

पीएम ने ₹5100 करोड़ की परियोजनाओं की रखी आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईटानगर में ₹5100 करोड़ की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें हीओ जलविद्युत परियोजना (240 मेगावाट) और तातो-I जलविद्युत परियोजना (186 मेगावाट) के सियोम उप-बेसिन में बनाई जाएँगी।

तवांग में बनने जा रहे अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर की भी प्रधानमंत्री ने आधारशिला रखी। सीमावर्ती जिले तवांग में 9,820 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित यह केन्‍द्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, सांस्कृतिक उत्सवों और प्रदर्शनियों की मेजबानी के लिए एक ऐतिहासिक इमारत के रूप में कार्य करेगा। साथ ही 1,500 से अधिक प्रतिनिधियों की मेजबानी करने की क्षमता वाले इस केन्‍द्र से प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक संभावना को गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने 1,290 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली अनेक प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया। ये परियोजनाएँ कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, अग्नि सुरक्षा, कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावासों सहित विभिन्न क्षेत्रों को लाभ देंगी। इन पहलों से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। साथ हीजीवन स्तर और कनेक्टिविटी में सुधार भी होगा।

कभी दूर से हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुआ रण देख रहा था संजय, आज बिहार के ‘राजपरिवार’ में रण करवा रहा हरियाणा का संजय

महाभारत में किरदारों में से एक हैं, सारथी संजय। उन्होंने ही महल में बैठकर दिव्यदृष्टि के जरिए धृतराष्ट्र को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुए रण का हाल सुनाया था। अब इसी हरियाणा से आने वाले राजद के राज्यसभा संजय यादव के कारण बिहार के ‘राजपरिवार’ यानी लालू यादव-राबड़ी देवी के कुनबे में घमासान मच गया है।

लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने X पर अपने परिवार और पार्टी को अनफॉलो कर अपनी छिपी हुई नाराजगी जगजाहिर कर दी है और ऐसा करने वाली वह घर की इकलौती सदस्य नहीं है। इससे पहले तेज प्रताप यादव और मीसा भारती भी संजय यादव को लेकर तेजस्वी यादव से नाराजगी जता चुके हैं।

संजय यादव से जुड़ी पोस्ट शेयर करने के बाद बढ़ी रोहिणी की नाराजगी

लालू परिवार के इस सियासी झगड़े के केंद्र में तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव हैं। मूल रूप से हरियाणा से आने वाले संजय यादव राजद से राज्यसभा सांसद भी हैं। तेज प्रताप यादव कई मौकों पर पार्टी में जयचंद होने की बात कहते रहे हैं और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह दरअसल संजय यादव के लिए ही कहा जा रहा है।

रोहिणी भी संजय यादव के तेजस्वी यादव पर बढ़ते प्रभाव से नाखुश हैं। तेजस्वी यादव ने बिहार में एक यात्रा निकाली थी, इसके लिए एक खास बस डिजाइन की गई जिसमें तेजस्वी के लिए आगे की सीट तय की गई थी। इस दौरान के दौरान सामने आई तस्वीरों में संजय यादव उस सीट पर बैठे दिखे जिससे रोहिणी बिफर गईं।

रोहिणी ने फेसबुक पर पोस्ट शेयर किया जिसमें एक शख्स ने संजय यादव की तीखी आलोचना की थी। इसमें लिखा था, “फ्रंट सीट सदैव शीर्ष के नेता-नेतृत्वकर्त्ता के लिए चिह्नित होती है और उनकी अनुपस्थिति में भी किसी को उस सीट पर नहीं बैठना चाहिए…वैसे अगर ‘कोई’ अपने आप को शीर्ष नेतृत्व से भी ऊपर समझ रहा है, तो अलग बात है!!”

रोहिणी द्वारा शेयर किया गया पोस्ट

X पोस्ट के बाद रोहिणी को अकाउंट करना पड़ा प्राइवेट

इस फेसबुक पोस्ट के बाद रोहिणी ने बीते शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को X पर भी 2 पोस्ट शेयर किए गए। एक पोस्ट में उन्होंने पिता को किडनी डोनेट किए जाने का जिक्र किया तो दूसरे में खुद को किसी पद की लालसा ना होने का दावा किया।

पहली पोस्ट में रोहिणी ने लिखा, “जो जान हथेली पर रखते हुए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने का जज्बा रखते हैं, बेखौफी-बेबाकी-खुद्दारी तो उनके लहू में बहती है।” जबकि दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैंने एक बेटी और बहन के तौर पर अपना कर्तव्य एवं धर्म निभाया है और आगे भी निभाती रहूँगी, मुझे किसी पद की लालसा नहीं है, न मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है, मेरे लिए मेरा आत्म सम्मान सर्वोपरि है।”

रोहिणी की X पोस्ट

इसके बाद इन पोस्ट्स को लेकर खूब विवाद हुआ तो रोहिणी आचार्य को अपना अकाउंट प्राइवेट करना पड़ा। माना जा रहा था कि रोहिणी ने आलोचना से बचने के लिए यह अकाउंट प्राइवेट किया है।

रोहिणी ने परिवार और पार्टी को किया अनफॉलो

रोहिणी ने जो अकाउंट प्राइवेट किया था वो अब पब्लिक कर दिया है। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने सैकड़ों लोगों को अनफॉलो किया है जिसमें उनके परिवार के लोग और पार्टी भी शामिल है। कभी X पर 100 से अधिक लोगों को फॉलो करने वालीं रोहिणी अब केवल 3 लोगों को ही फॉलो करती हैं। जिसमें एक उनके पति समरेश सिंह, एक रहात इंदौरी के नाम का हैंडल और एक सिंगापुर के अखबार ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ का हैंडल है।

केवल तीन लोगों को फॉलो करती हैं रोहिणी

‘राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहती हैं मीसा भारती’

लालू के परिवार में कलह के कई किरदार है जिसमें एक नाम मीसा भारती का भी है। संजय यादव को लेकर मीसा भारती लगातार मुखर हैं ही तो दूसरी तरफ दावा किया जाता है कि वह पार्टी की कमान खुद अपने हाथ में लेना चाहती हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अजीत द्विवेदी ने एक शो में बातचीत के दौरान दावा किया कि मीसा भारती, तेजस्वी यादव की बड़ी चैलेंजर हैं। उन्होंने कहा, “6-8 महीने पहले राबड़ी देवी के आवास पर मीसा भारती का बड़ा विवाद हुआ था। मीसा ये चाहती थी कि उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए।”

अजीत द्विवेदी कहते हैं, “उनका (मीसा भारती) कहना है कि अगर तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री के दावेदार हैं। उनको मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलनी है। उनको सत्ता मिलनी है तो पार्टी का संगठन मेरे पास रहे। लोग बताते हैं कि उस रात में मीसा भारती होटल में रहने चली गई थी।”

तेज प्रताप यादव पहले ही किए जा चुके हैं घर और परिवार से बाहर

तेज प्रताप यादव इस दिनों सियासी वनवास झेल रहे हैं। उन्हें RJD से निकाल दिया गया है और अब वह भगवान कृष्ण और गीता की कसमें खा रहे हैं कि वह कभी भी दोबारा उस पार्टी में नहीं जाएँगे। वह भी संजय यादव के मामले को लेकर खुलकर RJD के विरोध में खड़े हैं।

इस विवाद में वह भी रोहिणी आचार्य की तरफ खड़े हैं। वह सीधे तौर पर कह रहे हैं कि कुछ लोग तेजस्वी यादव की कुर्सी हथियाने की फिराक में है। उन्होंने कहा कि परिवार के मतभेदों को फायदा उठाकर बाहरी लोग सत्ता हासिल करना चाहते हैं।

तेज प्रताप के इससे पहले भी सत्ता को लेकर परिवार के भीतर संघर्ष होते रहे हैं लेकिन जिस तरह मीसा भारती और रोहिणी आचार्य ने खुलकर अपनी राय रखी है उसे पार्टी के लिए बड़े संकट की आमद के तौर पर देखा जा रहा है।

गाँव की 1100 एकड़ जमीन को वक्फ प्रॉपर्टी बता हड़पना चाहती थी मस्जिद, 313 साल पुराने ताम्र पत्र मंसूबे हुए नाकाम: जानिए मद्रास हाई कोर्ट ने क्या कहा

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के तिरुनेलवेली की 1100 एकड़ जमीन पर मस्जिद के वक्फ संपत्ति का दावा खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि मस्जिद को सिर्फ 2.34 एकड़ जमीन का हक है, जो 1712 में मदुरै के राजा ने दी थी और इसका जिक्र ताँबे की प्लेट (कॉपर प्लेट) के लेख में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्जिद ने 2011 में वक्फ ट्रिब्यूनल में केस दायर कर कहा था कि उसे करीब 1100 एकड़ जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में मिली है, ट्रिब्यूनल ने 2016 में मस्जिद के हक में फैसला दे दिया।

इसके बाद सरकार ने 2018 में वक्फ ट्रिब्यूनल के 2016 के फैसले को चुनौती दी और कहा कि मस्जिद को किसी भी जमीन का हक नहीं है क्योंकि वह जमीन पहले ही रैयतवारी जमीन के रूप में घोषित हो चुकी है और कई गरीब लोगों को खेती के लिए बाँटी जा चुकी है।

सरकार ने यह भी बताया कि 362 लोग उन जमीनों पर खेती कर रहे हैं और उनके पास वैध पट्टे हैं। सरकार ने कहा कि ये सारी जमीन पहले ही इनाम एक्ट के तहत 1966 में सरकार के नाम हो चुकी है और अब इसमें 362 किसान खेती कर रहे हैं, जिन्हें सरकारी पट्टा दिया गया है।

कोर्ट ने माना कि 1712 में राजा ने मस्जिद के लिए जमीन जरूर दी थी और उसकी तस्दीक पुराने रिकॉर्ड्स और 1925 में ट्रांसक्राइब हुई ताँबे की पट्टी से होती है। लेकिन ताँबे की प्लेट में सिर्फ 75 कोठा जमीन का जिक्र है, जो हिसाब से सिर्फ 2.34 एकड़ बनती है। इसलिए कोर्ट ने कहा कि मस्जिद को सिर्फ उतनी ही जमीन दी जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि 2011 के दीवानी मुकदमे में मस्जिद का 1100 एकड़ से अधिक भूमि पर दावा आधुनिक सर्वेक्षण संख्याओं पर आधारित था। इनमें से किसी भी सर्वेक्षण का उल्लेख 1712 के अनुदान या 1952 के फैसले में नहीं किया गया था। कोर्ट को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि इन जमीनों का सर्वेक्षण कब किया गया था और मदुरै समस्तनम के मूल अनुदान से इनका आधिकारिक संबंध कब था।

कोर्ट ने 1712 के तांबा पत्रक का हवाला देते हुए बताया कि मस्जिद को केवल 2.34 एकड़ जमीन का ही अधिकार है। बाकी जमीन या तो किसी और पक्ष की है या फिर सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई थी।

मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में गहराई से सुनवाई करने के बाद ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब इतिहास खुद प्रामाणिक दस्तावेजों जैसे तांबा पत्रकों के जरिए सामने आता है, तो झूठे दावे टिक नहीं पाते।

अब वक्फ बोर्ड को 2.34 एकड़ की सही लोकेशन पहचाननी होगी, जैसा उस पट्टी में लिखा है। कोर्ट ने ये भी कहा कि जब 1923 से पहले सर्वे नंबर की व्यवस्था ही नहीं थी, तो मस्जिद ने बिना पक्के सबूतों के इतनी बड़ी जमीन पर कैसे दावा कर दिया?

पथराव, सर तन से जुदा के नारे और पुलिस पर हमला: उन्नाव में ‘I Love Muhammad’ के जुलूस में इस्लामी कट्टरपंथियों का हंगामा, सोशल मीडिया पर भी किए भड़काऊ पोस्ट

उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘I Love Muhammad’ के बैनर को लेकर शुरू हुआ बवाल अब देश के दूसरे हिस्सों में पहुँच रहा है। ‘आई लव मोहम्मद’ लिखने पर FIR दर्ज करने का दावा कर इस्लामी कट्टरपंथी देश में अलग-अलग जगहों पर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार (21 सितंबर 2025) को कट्टरपंथियों की भीड़ ने उन्नाव में जमकर हंगामा किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्नाव में 100 से अधिक मुस्लिम समुदाय के लोग बिना अनुमति के कानपुर की घटना के विरोध में जुलूस निकालने लगे। इसमें ना केवल पुरुष बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं।

इस दौरान जुलूस में ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे खुलेआम लगाए गए, पुलिस पर हमला और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। गंगाघाट कोतवाली के प्रभारी इंस्पेक्टर अजय कुमार सिंह की वर्दी फाड़ दी गई। पुलिस ने समझाने की कोशिश की तो कट्टरपंथी भीड़ ने पुलिस पर ही पथराव करना शुरू कर दिया।

हालात इतने बिगड़ गए कि मजबूरन पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके चलते मौके पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। हंगामे के बाद दंगा नियंत्रण वाहन और PAC केे जवानों की तैनाती की गई, कई थानों से फोर्स मँगवाई गई जिसके बाद हालातों पर काबू पाया जा सका। घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

पुलिस ने इस मामले में बवाल करने वाले 6 लोगों को हिरासत में लिया है, इसके बाद जिन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया उनके परिजन और समर्थकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। पुलिस फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है।

पुलिस की शुरुआती जाँच में सामने आया है कि जुलूस से पहले सोशल मीडिया पर ‘I Love Muhammad’ से जुड़े भड़काऊ पोस्ट भी किए गए थे। पुलिस की साइबर सेल अब इन पोस्ट की जाँच कर रही है। वहीं, पुलिस ने हंगामा करने वाले लोगों की पहचान के लिए CCTV फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई की जा रहा है।

30 लोगों के खिलाफ FIR

उन्नाव पुलिस ने इस घटना के बाद 8 नामजद समेत 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि जिले में धारा 163 लागू थी जिसके चलते लोगों को इकट्ठा होना मना था फिर भी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए हैं। साथ ही, उपद्रवियों द्वारा किए गए पथराव से ना केवल दुकानों को बल्कि कई घरों को भी नुकसान पहुँचा है।

कानपुर में सिर्फ ‘I Love Muhammad’ को लेकर नहीं हुई FIR

देशभर में प्रदर्शन कर रहे लोगों का दावा है कि कानपुर में ‘I Love Muhammad’ का बैनर लगाने को लेकर FIR दर्ज की गई है। इस कथित FIR के चलते ही मुस्लिम समाज के लोग देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन असली कहानी कुछ और ही है।

दरअसल, इस महीने की शुरुआत में कानपुर में बारावफात के जुलूस के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के एक धार्मिक बैनर को फाड़ दिया था। जो FIR की मुख्य वजह बना था। इस तथ्य को नजरअंदाज कर इस्लामी कट्टरपंथियों की देशभर में हंगामा करने पर आमादा नजर आ रही है।

3 दिन का शोक, घुटनों के बल बैठे CM, अंतिम यात्रा में उमड़ पड़ा असम… कहानी उस ज़ुबीन गर्ग की जिन्होंने 38000+ गानों को दी आवाज, संगीत को बनाया जीवन

गुवाहाटी ने रविवार (21 सितम्बर 2025) को ऐसा दृश्य देखा, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। हजारों-लाखों लोग एयरपोर्ट से शहर तक सड़कों के दोनों ओर खड़े रहे, बस एक अंतिम झलक पाने के लिए। वह झलक उस शख़्स की, जिसकी आवाज ने असम के हर दिल की धड़कन को सुरों से सजाया था।

प्रसिद्ध गायक, संगीतकार, अभिनेता और सांस्कृतिक प्रतीक ज़ुबीन गर्ग अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी पार्थिव शरीर जब गुवाहाटी पहुँचा, तो आम सी चलने वाली भीड़ एक जुलूस में बदल गई, मानो पूरा असम उनके साथ चल पड़ा हो।

52 साल के ज़ुबीन गर्ग का निधन शुक्रवार (19 सितम्बर 2025) को सिंगापुर में हुआ। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फ़ेस्टिवल में भाग लेने वहाँ गए थे। शुक्रवार को यॉट पर सैर के दौरान उन्होंने पानी में तैरने के लिए लाइफ जैकेट उतारी, फिर पानी में उतरते ही उनकी तबियत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए। तुरंत उन्हें निकाला गया, सीपीआर दिया गया फिर अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

असम का शोक और ठहराव

उनकी अचानक मौत की खबर ने पूरे असम को हिला दिया। अगले ही दिन पूरा राज्य मानो ठहर गया बाजार बंद हो गए, तीन दिन का राजकीय शोक घोषित हुआ, परीक्षाएँ स्थगित कर दी गईं और जगह-जगह लोग मोमबत्तियाँ जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने लगे। हर गली-मोहल्ले में उनकी तस्वीर के सामने दीये जलते नजर आए। यह सिर्फ शोक नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक व्यक्तित्व के प्रति गहरी आस्था और अपनापन था।

शनिवार (20 सितम्बर 2025) को सिंगापुर में पोस्टमार्टम के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके मित्रों को सौंप दिया गया। दिल्ली होते हुए जब पार्थिव शरीर गुवाहाटी पहुँचा, तो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा खुद वहाँ मौजूद थे। वो जुबीन को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके पार्थिव शरीर के सामने घुटनों के बल बैठ गए।

योजना थी कि सुबह उनके निवास पर लाने के बाद सरसजाई स्टेडियम में रखा जाएगा ताकि लोग सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक उनका अंतिम दर्शन कर सकें। लेकिन जिस संख्या में लोग उमड़े, उसने पूरा कार्यक्रम बदल दिया। एयरपोर्ट से घर तक का सफर छह घंटे का हो गया।

भीड़ देखकर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि लोग पूरी रात और अगले दिन भी स्टेडियम में उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे।

अंतिम संस्कार मंगलवार को होने की संभावना है और सरकार उनके लिए स्मारक स्थल तय कर रही है, जैसा कि डॉ भूपेन हजारिका के लिए किया गया था।

विनम्र शुरुआत से सांस्कृतिक शिखर तक

ज़ुबीन का जन्म 18 अप्रैल 1972 को मेघालय के तुरा में हुआ। उनका परिवार कला-संस्कृति से गहराई से जुड़ा था। उनकी माँ प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना और अभिनेत्री थीं, पिता कवि-गीतकार। बचपन से ही उन्हें संगीत की साधना मिली। तीन साल की उम्र से गाना शुरू किया, माँ पहली गुरु थीं। उन्होंने तबला से लेकर गिटार तक, एक दर्जन से अधिक वाद्ययंत्र बजाना सीखा।

जोरहाट में पले-बढ़े ज़ुबीन ने असमिया लोकगीत, बिहू और सत्रिया संगीत के साथ आधुनिक धुनों को आत्मसात किया। कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़कर उन्होंने संगीत को ही अपना जीवन बना लिया। 1992 में उनका पहला एलबम अनामिका आया और छा गया।

ज़ुबीन का पहला एल्बम अनामिका, इसमें कविता कृष्णमूर्ति का एक गाना भी शामिल था

इसके बाद माया, आशा, रंग, मुक्ति, पाखी, शिशु, रूमाल जैसे एलबमों ने उन्हें असम का सबसे बड़ा सितारा बना दिया। उन्होंने 38 हजार से अधिक गीत गाए, असमिया, हिंदी, बांग्ला, मराठी, तमिल, तेलुगु, उड़िया, नेपाली और कई अन्य भाषाओं में।

ज़ुबीन गर्ग की लगभग पूरी डिस्कोग्राफी का एक प्रशंसक संग्रह (फोटो साभार : गुवाहाटी प्लस)

अकेले असमिया में पाँच हजार से ज्यादा गाने गाए और लिखे। उनकी आवाज असमिया सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक गूँजी। गैंगस्टर के गाने ‘या अली’ ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके अलावा राम रे (कांटे), दिल तू ही बता (कृष 3) जैसे गीत भी लोकप्रिय हुए। लेकिन उन्हें मुंबई की चमक-दमक रास नहीं आई और वह वापस असम लौट आए।

सिर्फ गायक नहीं, असम की आत्मा

ज़ुबीन सिर्फ गायक नहीं थे, बल्कि असम की आत्मा थे। उन्होंने लोकगीतों और आधुनिक संगीत का ऐसा संगम किया कि एक नई शैली ने ही जन्म ले लिया। उनके गीतों में ब्रह्मपुत्र की गूंज, चाय बागानों की खुशबू और असम की जिजीविषा झलकती थी।

उनके कंसर्ट्स में लाखों की भीड़ उमड़ती थी। लोग उन्हें ज़ुबीन दा कहते, क्योंकि वह सहज, सरल और हर किसी के अपने लगते थे। मंच पर भी वह किसी रस्मी औपचारिकता में बंधे नहीं रहते थे। कभी मजाक करते, कभी गुस्सा दिखाते, कभी खुलकर पीते लोगों को यह बेबाक़ी पसंद थी। उनकी आवाज विरोध का भी स्वर बनी।

2019-20 में CAA विरोध प्रदर्शनों में उन्होंने अपने गीतों से आंदोलन को धार दी। ‘मृत्यु एटिया होहोज’ जैसे गीत ने प्रदर्शनकारियों की आँखों में आँसू ला दिए। पर्यावरण संरक्षण हो, भाषा अधिकारों की लड़ाई हो या आपदा राहत हर जगह वह आगे रहते थे।

विवाद और आलोचना भी

जहाँ लाखों लोग उन्हें पूजते थे, वहीं आलोचना भी होती थी। मंच पर शराब पीकर प्रदर्शन करना, वादों को तोड़ना, कभी-कभी अपशब्द बोलना यह सब उनकी छवि का हिस्सा था। लेकिन यही उनकी खासियत भी बनी लोगों ने उन्हें वैसे ही स्वीकार किया, जैसे वह थे।

उनकी सेहत पिछले कुछ वर्षों से बिगड़ी हुई थी। कई बार दौरे और बेहोशी की घटनाओं के कारण अस्पताल में भर्ती हुए। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद वह खुद पर सख़्त नियंत्रण नहीं रख पाए।

यही कारण है कि उनकी मौत के बाद उनके प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा और आयोजनकर्ता श्यामकानु महांता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशंसकों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने बीमार ज़ुबीन को थकाऊ गतिविधियों से नहीं रोका। कई जगह FIR दर्ज हुई है और अब CID जाँच कर रही है।

एक युग का अंत, लेकिन धुनें अमर

असम के लिए ज़ुबीन गर्ग का जाना वैसा ही है जैसा किसी परिवार का सिर उठ जाना। लोग मानते हैं कि उन्होंने पिछले तीन दशकों में असम को एक नई सांस्कृतिक पहचान दी। गली-गली उनके गीत गाए जाते थे, हर त्योहार और हर आंदोलन में उनकी आवाज गूँजती थी।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उनके लिए स्मारक बनाएगी। लेकिन असम के लोगों के लिए असली स्मारक वह जगह नहीं होगी जहाँ उन्हें दफनाया जाएगा, बल्कि वह हर गीत होगा जो उनके होंठों से निकला और हर दिल में बस गया।

ज़ुबीन गर्ग का यह अंतिम सफर दिखा गया कि वह सिर्फ एक गायक नहीं थे, वह असम की आत्मा थे। उनका जाना एक ऐसी खाली जगह छोड़ गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। लेकिन उनकी आवाज, उनकी धुनें और उनका बेबाक़ अंदाज हमेशा जिंदा रहेगा।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में राजू दास ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है)

क्या है नव मध्यम वर्ग, कैसे मोदी राज में हुआ उदय, कैसे इनके दम से पूरा होगा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्वप्न: जानिए India की ग्रोथ स्टोरी में इनका रोल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (21 सितंबर 2025) को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नियो मिडिल क्लास (Neo Middle Class) या नव मध्यम वर्ग का जिक्र किया है। पीएम मोदी ने कहा, “पिछले 11 साल में देश में 25 करोड़ लोगों ने गरीबी को हराया है। गरीबी से बाहर निकलकर 25 करोड़ का समूह ‘Neo Middle Class’ के रूप में देश के अंदर एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है।”

क्या है Neo Middle Class?

इस वर्ग को मोटे तौर पर समझें तो Neo Middle Class ऐसा सामाजिक-आर्थिक वर्ग है, जो हाल ही में गरीबी से ऊपर उठ पाया है लेकिन अभी स्थिर और सुरक्षित मध्यमवर्ग की स्थिति तक नहीं पहुँच सका है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले पीएम मोदी ने 2012 में किया था। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और 3 दिसंबर 20212 को पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा था कि पार्टी का संकल्प पत्र इस नए वर्ग को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है।

इसके बाद अगस्त 2024 में उद्योग जगत का कार्यक्रम हो या आज का संबोधन, पीएम मोदी ने लगातार इस शब्द का इस्तेमाल किया है। जो दिखाता है कि यह नया वर्ग उनके विकसित भारत के सपने के लिए कितना मायने रखता है।

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट बताती है कि नियो मिडिल क्लास में वे लोग शामिल हैं जो गरीबी रेखा से थोड़ा ऊपर कमाते हैं लेकिन स्थापित मिडिल क्लास जैसी आर्थिक सुरक्षा से अभी तक वंचित हैं।

1990 में भारत में आर्थिक सुधार हुए और उसके बाद से इस क्लास में विस्तार हुआ है। मोदी सरकार आने के बाद इस वर्ग में लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। नीति आयोग के डिसक्सन पेपर ‘मल्‍टीडायमेंशनल पावर्टी इन इंडिया सिन्‍स 2005-06’ के मुताबिक, 2013-14 से 2022-23 के बीच 24.82 करोड़ लोग विविध प्रकार की (मल्‍टीडायमेंशनल) गरीबी से बाहर निकले हैं।

भारत का लक्ष्य 2030 से बहुआयामी गरीबी को आधा करना है और आने वाले दिनों में इस लक्ष्य के चलते इस क्लास के और बढ़ने की पूरी संभावना है।

मोदी सरकार में गरीबी कम करने को लेकर चली योजनाओं पर PIB ने लिखा है, “पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसी उल्लेखनीय पहलों ने स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे वंचित रहने में काफी कमी आई है।”

इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण, उज्ज्वला योजना के माध्यम से स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन वितरण, सौभाग्य के माध्यम से बिजली कवरेज में सुधार और स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसे अभियानों का भी जिक्र किया गया है।

ग्रोथ स्टोरी में कितना अहम है Neo Middle Class?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक यानी आजादी के 100वें वर्ष में भारत को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। उनका मानना है कि यह Neo Middle Class इस सपने को पूरा करने में सबसे अहम भूमिका निभा सकता है।

ऐसा सोचना सही भी है, आसान भाषा में समझें तो, जब कोई परिवार गरीबी से निकलता है, उसकी कमाई बढ़ती है तो उसकी खपत की क्षमता भी बढ़ जाती है। यह खपत की बढ़ी हुई क्षमता बाजार को गति देने का काम करती है और नए रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

साथ ही, इस वर्ग के बढ़ने से सामाजिक स्थिरता भी बढ़ती है। गरीबी से बाहर निकले लोगों में नया आत्मविश्वास आता है और यही लोग फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करते हैं। इनकी आने वाली पीढ़ियों की भी बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं तक पहुँच बनती है। जिससे इस वर्ग में नया आत्मविश्वास पैदा होता है।

मोदी सरकार की योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत ने गरीबों को ऊपर उठाकर इस वर्ग तक पहुँचाने में मदद की है। आने वाले समय में यही वर्ग भारत को दुनिया के बड़े देशों से मुकाबले के लिए खड़ा करेगा।

विकसित देशों में मजबूत मिडिल क्लास ही रीढ़ बनता है। भारत में भी यह नियो मिडिल क्लास नई तकनीक को अपना रहा है, UPI का इस्तेमाल कर रहा है और स्टार्टअप इंडिया व मुद्रा लोन जैसी योजनाओं से कारोबार शुरू कर भारत को आर्थिक ताकत दे रहा है। यह वर्ग अगर आगे बढ़ता रहा तो भारत ना केवल घरेलू बाजार में बल्कि पूरी दुनिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक ताकत बन जाएगा।

‘BJP ने EVM हैक करने की बात स्वीकारी’: कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने रेखा गुप्ता का अधूरा Video वायरल कर फैलाया झूठ, जानें क्या है हकीकत

कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का अधूरा वीडियो शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि बीजेपी ने खुलेआम EVM हैक करने की बात को स्वीकारा है। ये अधूरा वीडियो सीएम गुप्ता का NDTV को दिए गए इंटरव्यू से लिया गया है।

इस वीडियो को एडिट कर सिर्फ सीएम गुप्ता के जवाब का क्लिप वायरल किया जाता है। इस वीडियो क्लिप को इस तरह से पेश किया जाता है कि सीएम गुप्ता ने EVM में हुए हेरफेर के आरोपों को स्वीकार कर लिया है।

अधूरे वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

कॉन्ग्रेस के इस अधूरे वीडियो में इंटरव्यू कहती हैं, “ABVP और BJP केवल इसीलिए जीत रहे हैं क्योंकि वे EVM हैक कर रहे हैं और चुनाव आयोग उनका समर्थन कर रहा है।” इस पर रेखा गुप्ता जवाब देती हैं, “हाँ, जब वे 70 साल से ऐसा कर रहे थे तो किसी को कोई समस्या नहीं थी लेकिन जब हमने ऐसा किया तो अचानक यह गलत हो गया। यह सही है।”

इसके बाद वीडियो के इस कटे हुए भाग को खूब शेयर किया गया, जिसमें कैप्शन दिया गया कि BJP ने EVM हैक करने की बात स्वीकार कर ली है।

हालाँकि, ऑपइंडिया ने असली वीडियो खोज निकाला है और कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम के अधूरे वीडियो का फैक्ट-चेक कर दिया। पूरे वीडियो में इंटरव्यू ले रही एंकर सवाल पूछती हैं कि राहुल गाँधी ने दावा किया है कि BJP सिर्फ EVM हैक करने के बाद ही जीतती है।

इस सवाल क जवाब देते हुए रेखा गुप्ता ने कहा, “जब वो जीतते हैं तो ये जनता का जनादेश होता है। जब हम जीतते हैं तो ये अचानक EVM हैकिंग हो जाता है। कोई मुझे बताए कि ये फॉर्मूला किस किताब में लिखा है? राहुल गाँधी कहाँ से पढ़े हैं?” रेखा गुप्ता ने राहुल गाँधी पर गलत धारणाएँ बनाकर आम नागरिकों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

इंटरव्यू में आगे बढ़ते हुए जब उनसे कहा गया कि GenZ भी BJP के खिलाफ उठ सकती है, इस पर रेखा गुप्ता ने जवाब दिया, “युवा और GenZ पहले ही अपनी बात कह चुके हैं। विश्वविद्यालयों में ABVP की जीत दर्शाती है कि हमें कितना समर्थन प्राप्त है।” उन्होंने अंत में कहा, “जनता का आशीर्वाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ है और हमेशा रहेगा।”

अधूरे वीडियो और पूरे वीडियो के बीच अंतर से साफ समझ आता है कि कॉन्ग्रेस किस तरह भ्रामक कहानी फैलाने के लिए इस तरह की घिनौनी हरकत पर उतर सकती है और EVM हैकिंग से ‘वोट चोरी’ के अपने आरोपों को बढ़ावा दे सकती है।