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जिस रैप सॉन्ग को Gen Z का गुस्सा बताकर बेच रही कॉन्ग्रेस, वो पार्टी का पेड कैंपेन? जानिए ग्रैंड ओल्ड पार्टी के नाम पर क्यों हो रही रैपर और इंफ्लुएंसर की भर्ती

दरअसल, पिछले तीन महीने से कॉन्ग्रेस रैप सॉन्ग राइटर, इंफ्लुएंसर और फूड ब्लॉगर्स की वैकैंसी के लिए हायरिंग कर रही है। ऑपइंडिया को ऐसी ही वैकेंसी पर जारी की गई तीन वैकेंसी पोस्ट मिली, जो टेकेंद्र शर्मा नाम के व्यक्ति के अकाउंट से पोस्ट की गई। इन पोस्ट में साफ लिखा गया था कि ये हायरिंग कॉन्ग्रेस के लिए की जा रही हैं।

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक रैप सॉन्ग वायरल हो रहा है, जिसके बोल सरकार विरोधी हैं। इसे एक स्ट्रगलिंग रैपर ने गाया है। कॉन्ग्रेस IT सेल इसे देश के Gen Z का सरकार के प्रति गुस्सा बताकर बेच रही है। ये वही प्रोपेगेंडा है, जो नेपाल में Gen Z प्रदर्शन के बाद भारत में देखने को मिला था।

इस वीडियो में वामपंथियों का वही रोना-धोना रैप के जरिए दिखाया गया है। इसे एक्स यूजर अंकित मयंक ने भी शेयर किया है, जो खुद को राहुल गाँधी के बब्बर शेर बताते हैं। वीडियो शेयर कर अंकित ने लिखा, “तो भारत में Gen Z अब फासीवादी शासन का पर्दाफाश करने और उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए म्यूजिक का इस्तेमाल कर रही है। एक जबरदस्त रैप गीत, जरूर शेयर करें। आगे दिलचस्प समय आने वाला है।”

रैप सॉन्ग की सच्चाई

Gen Z का गुस्सा बताकर पेश किए जा रहे इस वीडियो की सच्चाई कुछ और है। इसे पता लगाने के लिए ऑपइंडिया ने पड़ताल शुरू की। इस पड़ताल में सामने आए कुछ वैकैंसी पोस्ट। ये वैकैेंसी पोस्ट Linkedin पर कॉन्ग्रेस ने जारी करवाए थे।

दरअसल, पिछले तीन महीने से कॉन्ग्रेस रैप सॉन्ग राइटर, कार्टूनिस्ट, फूड और ट्रैवल इंफ्लुएंसर की वैकैंसी के लिए हायरिंग कर रही है। ऑपइंडिया को ऐसी ही वैकेंसी पर जारी की गई तीन वैकेंसी पोस्ट मिली, जो टेकेंद्र शर्मा नाम के व्यक्ति के अकाउंट से पोस्ट की गई। इन पोस्ट में साफ लिखा गया था कि ये हायरिंग कॉन्ग्रेस के लिए की जा रही हैं।

ऑपइंडिया की पड़ताल यही नहीं रुकी। पूरा मामला जानने के लिए ऑपइंडिया ने हायरिंग की पोस्ट करने वाले टेकेंद्र शर्मा से फोन पर बात की। शर्मा ने बताया कि उन्होंने ही कॉन्ग्रेस के लिए भर्ती निकाली थीं और इससे संबंधित पोस्ट भी किए, लेकिन वह कॉन्ग्रेस के सदस्य नहीं हैं। उनका काम केवल CV शॉर्ट लिस्ट करके कॉन्ग्रेस पार्टी को भेजना है। यानी टेकेंद्र शर्मा ने कबूला कि उन्होंने रैप सॉन्ग राइटर, इंफ्लुएंसर और अन्य वैकेंसी पर भर्ती कॉन्ग्रेस के कहने पर ही पोस्ट की।

कॉन्ग्रेस का पक्ष

अब सवाल यह है कि आखिर रैप सॉन्ग राइटर, इंफ्लुएंसर और ब्लॉगर की हायरिंग कॉन्ग्रेस कर क्यों रही है? इस सवाल का जवाब माँगने के लिए ऑपइंडिया ने कॉन्ग्रेस से संपर्क करने की कोशिश की। ऑपइंडिया ने कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश और प्रवक्ता पवन खेड़ा को एक ई-मेल भेजा।

ई-मेल में कुछ सवाल थे। इसमें सीधे तौर पर पूछा गया कि कॉन्ग्रेस का टेकेंद्र शर्मा से क्या रिश्ता है और क्या वाकई में पार्टी ऐसा कोई भर्ती अभियान (Recruitment Drive) चला रही है? साथ ही पूछा गया कि कॉन्ग्रेस उन सरकार विरोधी कंटेंट को ऑर्गनिक बताएगी या फिर खुद का ही कंटेंट बताएगी?

इस ई-मेल को भेजे 24 घंटे से ऊपर हो गया है लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। वहीं रैप गाने वाले रैपर का तो कोई अता-पता ही नहीं है। ये कॉन्ग्रेस के लिए आम बात है, पहले प्रोपेगेंडा चलाना और जब फैक्ट्स के साथ पकड़े जाओ तो जवाब देने से बचना। इससे साफ है कि जिस सरकार विरोधी कंटेंट को सोशल मीडिया यूजर्स Gen Z या देशभर का गुस्सा समझकर कंज्यूम कर रहे हैं, वो कॉन्ग्रेस पैसा देकर वायरल कर रही है।

कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया

यह कोई संयोग नहीं है कि रैप सॉन्ग राइटर की वैकेंसी पर भर्ती निकालने के बाद कॉन्ग्रेस के यूट्यूब पेज पर अचानक से रैप सॉन्ग पोस्ट होने लगे हैं। वोट चोरी हो या पीएम मोदी के अमेरिका के साथ रिश्ते। इन सभी मुद्दों पर कॉन्ग्रेस ने सरकार को टारगेट कर रैप सॉन्ग निकाले हैं।

ये हाल ही में कॉन्ग्रेस के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया रैप सॉन्ग है, जिसमें पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के रिश्ते को सोशल मीडिया पर वायरल मीम्स के साथ ट्रोल किया गया है।

इसके अलावा ‘वोट चोरी, गद्दी छोड़’ नाम से भी कॉन्ग्रेस ने रैप सॉन्ग बनाया है। इसमें राहुल गाँधी की छवि को साफ दिखाया गया है और उनके ‘वोट चोरी’ के दावों को सही दावे के साथ पेश किया गया है और चुनाव आयोग के तथ्यों पर सवाल उठाए गए हैं।

इसस पता लगता है कि कॉन्ग्रेस ने रैप सॉन्ग राइटर की पोस्ट के लिए हायरिंग नि कलवाई और क्यों निकलवाई ये भी साफ है। ताकि सोशल मीडिया पर सरकार-विरोधी कंटेंट बना सके और जनता का गस्सा बताकर Gen Z को भड़का सकें।

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम का सरकार विरोधी ‘पेड कैंपेन’

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम ने ऐसे किसी सोशल मीडिया कंटेंट को Gen Z का गुस्सा बताकर पेश कर रही है। हाल ही में कॉन्ग्रेस ने ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा चलाया था। तब भी कॉन्ग्रेस ने सोशल मीडिया पर ‘पेड कैंपेन’ चलाया। कई इंफ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर इस मुद्दे पर रील बना रहे थे। और कुछ ने तो बाद में माफी तक माँगी थी।

तब भी खुलासा हुआ था कि ये सब कॉन्ग्रेस के ‘पेड कैंपेन’ के तहत किया गया था, जिसके लिए 20 से 30 हजार रुपए खर्चे गए थे। ये सब कॉन्ग्रेस के भारत के Gen Z को ब्रेनवॉश करने के तरीके हैं, जो दुनियाभर की जानकारी केवल सोशल मीडिया से ही लेते हैं। कॉन्ग्रेस इसका पूरा फायदा उठा रही है।

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पूजा राणा
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