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आफताब ने श्रद्धा की हड्डियों को पीस कर बनाया पाउडर, जला डाला चेहरा, डस्टबिन में डाल दी थी आँतें, ₹2000 की ब्रीफकेस में पैक किया: 6629 पन्नों की चार्जशीट दायर

श्रद्धा वॉल्कर हत्याकांड की चार्जशीट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। श्रद्धा की हत्या के आरोपित आफताब पूनावाला ने हड्डियों को छिपाने के लिए उन्हें पीसकर पाउडर बना दिया था। यही नहीं, हत्या करने के तीन-चार महीने बाद उसने श्रद्धा के सिर के बालों और चेहरे को ब्लो टॉर्च से जलाकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने कोर्ट में श्रद्धा मर्डर केस की 6629 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट के अनुसार, आफताब पूनावाला ने पुलिस के सामने कहा है कि 18 मई, 2022 को उसने श्रद्धा की हत्या कर दी थी। इसके बाद 19 मई, 2022 को छतरपुर से ट्रैश बैग, एक चाकू और एक चॉपर खरीदा था। यही नहीं, उसने पुलिस को बताया है कि उसने छतरपुर से ही 25,000 रुपए का एक फ्रिज भी खरीदा था। फ्रिज के लिए उसने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट किया था।

इसके बाद आफताब ने उसी शाम श्रद्धा की डेड बॉडी के दोनों पैरों को काटकर ट्रेश बैग में पैक कर दिया था। इसके बाद उसकी शरीर के कटे हुए अंगों को फ्रिज के फ्रीजर में रख दिया था। श्रद्धा के शव को काटने के बाद फैले हुए खून को साफ करने के लिए उसने शॉपिंग ऐप टॉयलेट क्लीनर व जर्म फाइटर समेत अन्य समेत आर्डर किए थे।

आफताब ने यह भी कहा है कि उसने बॉडी को ब्रीफकेस में डालकर ठिकाने लगाने का प्लान बनाया था। इसके लिए वह 20 मई 2022 को महरौली बाजार से 2000 रुपए का ब्रीफकेस लाया था। हालाँकि, ब्रीफकेस के वजन के चलते उसे पकड़े जाने का डर था। इसलिए उसे अपने प्लान में बदलाव करना पड़ा।

आफताब ने यह भी कहा है कि श्रद्धा की लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसने उसकी बॉडी के छोटे-छोटे टुकड़े करने की प्लानिंग बनाई थी। इसके लिए उसने श्रद्धा की लाश से उसका सिर और अन्य अंगों को काट कर अलग कर दिया था। वहीं आँतें निकाल कर उसने छतरपुर पहाड़ी के पास रखे एक डस्टबिन में डाल दी थी।

हालाँकि, उसने शरीर के अन्य अंगों जैसे सिर, टॉरसो और दोनों कलाइयों को फ्रिज में रख दिया था। लेकिन बाकी अंगों को ब्लो टॉर्च से जलाकर कर छतरपुर पहाड़ी के पास फेंक दिया था। इसी तरह उसने शरीर के अन्य अंगों को भी टुकड़े-टुकड़े कर छतरपुर के आसपास के कई इलाकों में फेंक दिया था।

यही नहीं, उसने सबूत मिटाने के लिए छतरपुर पहाड़ी में ही अलग-लग जगह पर श्रद्धा की लाश के टुकड़ों पर पेट्रोल डालकर आग भी लगा दी थी। बाद में बची हुई हड्डियों को वह अपने किराए वाले मकान में ले आया था। वहाँ छत में मार्बल घिसने वाले ग्राइंडर से हड्डियों का पाउडर बनाया। हालाँकि, यह सब करने के बाद भी आफताब को पकड़े जाने का डर था। इसलिए उसने श्रद्धा के सिर, टॉरसो और दोनों कलाइयों को फ्रिज में ही रख दिया था।

चार्जशीट में आफताब ने यह भी कहा है कि श्रद्धा की हत्या करने के बाद करीब तीन-चार महीनों बाद उसने श्रद्धा के सिर और चेहरे को ब्लो टॉर्च से जलाकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की। इसके बाद उसने चेहरे को जंगल में जबकि बालों और कपड़ों को छतरपुर पहाड़ी के पास डस्टबिन में फेंक दिया था।

आफताब ने पुलिस को यह भी बताया है कि उसने जिस दिन श्रद्धा की हत्या की थी, उसी दिन श्रद्धा के अकांउट से अपने अकाउंट में 54,000 रुपए भेजे थे। यही नहीं, उसके फोन में श्रद्धा का इंस्टाग्राम लॉग इन था। इंस्टाग्राम के जरिए ही उसने श्रद्धा बनकर उसके दोस्त लक्ष्मण नाडर से बात की थी। आफताब ने पुलिस से यह भी कहा है, “श्रद्धा की हत्या करने के बाद उसकी लाश को काटकर अलग-अलग जगह फेंककर मैंने सबूत मिटाए हैं। मुझसे गलती हो गई, मुझे माफ किया जाए।”

हत्या का मकसद भी आया सामने

आफताब ने पुलिस को बताया है कि जिस ऐप के जरिए वह श्रद्धा से मिला था। उसी ऐप के जरिए श्रद्धा को एक नया दोस्त मिल गया था। 17 मई की सुबह श्रद्धा उसी दोस्त से मिलने गई थी। इसके बाद, वह अगले दिन वापस आई। इस नए दोस्त को लेकर ही श्रद्धा का आफ़ताब से झगड़ा हुआ था। इसके बाद गुस्से में आकर उसने उसका कत्ल कर दिया।

‘मैं रामचरितमानस को नहीं मानती, तुलसीदास कोई संत नहीं’: सपा MLA को तुलसीदास के ग्रन्थ से दिक्कत, कहा – हिम्मत है तो मेरी ताड़ना कर के दिखाओ

रामचरितमानस को अपमानित करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। रामचरितमानस पर सबसे अधिक सवाल समाजवादी पार्टी उठा रही है। सबसे पहले सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस ग्रंथ पर आपत्ति जताई और अनर्गल बयान दिए। अब इस कडी में सिराथू सीट से सपा विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह रामचरितमानस को नहीं मानती हैं और इसमें शूद्र शब्द हटाने के लिए आंदोलन करेंगी। 

उन्होंने इसके साथ ही सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दिया और साथ ही पूछा कि उन्होंने इतनी देर से आपत्ति क्यों उठाई। अगर उन्हें इस बात का बुरा लगा था तो उन्होंने पहले ही पार्टी छोड़ देनी चाहिए थी। लेकिन वह भाजप के साथ बने रहे। पल्लवी दरअसल स्वामी प्रसाद मौर्य के उस बयान का संदर्भ दे रही थी जिसमें उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव ने जब सीएम की कुर्सी छोड़ी थी, तब उस कुर्सी को गंगाजल से धोया गया था।

पललवी ने रामचरितमानस से कुछ शब्दों को हटाने की माँग की और अपने बयान में कहा, “बहुत से लेखकों ने इसे लिखा है। और, वाल्मीकि जी की रामायण को जिन्होंने अनुवाद किया है, उन्होंने सभी रामायणों का अनुवाद करके और उसमें अपने विचार मिलाकर रामचरितमानस का निर्माण किया है। इस्लाम और कुरान में लिखा है कि मूर्ति पूजन हराम है, लेकिन मैं यह नहीं मानती। हमारे लिए मूर्ति पूजा साकार ब्रह्म है। जिसको मैं मानती नहीं हूँ। उसकी मैं बात नहीं करती हूँ। किसी पंक्ति को हटाना, महत्वपूर्ण नहीं है। हमें आंदोलन इतना बड़ा करना है कि लोगों की मानस पटल से यह बात हटें। सबसे पहले शूद्र शब्द को हटाने की बात होती है। शूद्रों का जिस तरह से दमन हुआ है। उनका शोषण हुआ है। इस चीज को लोगों के मन से हटना जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा कि रामचरितमानस में यह भी लिखा हुआ है कि ढोल्, गँवार, शुद्र, पशु, नारी, सब हैं ताड़न के अधिकारी। साथ ही धमकी के अंदाज़ में कहा कि मैं आपके सामने नारी बैठी हुई हूँ, कोई करके दिखा दे मेरी ताड़ना। यह पूछे जाने पर कि क्या आप रामचरितमानस में विश्वास नहीं करती हैं, उन्होंने कहा, “मैं रामचरितमानस में विश्वास नहीं करती हूँ। मैं उन्हें संत नहीं मानती हूँ। मैं उन्हें केवल एक अनुवादक मानती हूँ। वो एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने सभी रामायण को पढ़ते हुए एक नई रामायण का निर्माण किया।”

पोस्टर फाड़ा-फाड़ी तो देख ली, अब जानिए ‘थाला’ और ‘थलापति’ में कौन जीता: ₹550 करोड़ का साझा कलेक्शन, SRK-सल्लू से तगड़ी है अजीत-विजय Rivalry

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में पोंगल एक बहुत बड़ा त्यौहार है और इसीलिए वहाँ के सिनेमा जगत के लिए भी ये एक महत्वपूर्ण मौका होता है। पोंगल (Pongal Release) की छुट्टियों में वहाँ कई बड़ी फ़िल्में रिलीज़ होती आई हैं। इस बार भी 11 जनवरी को पोंगल के मौके पर तमिल सिनेमा के ‘थाला’ (Thala) और ‘थलापति’ (Thalapathy) टकराए। अजीत कुमार (Ajith Kumar) और विजय (Vijay) में किसने मारी बाजी, हम आपको यहाँ बताएँगे। लेकिन, इससे पहले आपको समझना होगा कि तमिलनाडु की राजनीतिक-सामाजिक ताने-बाने में सिनेमा बसा हुआ है।

तभी वहाँ MGR, करुणानिधि और जयललिता जैसे लोग फिल्मों में लंबी पारी खेलने के बाद राजनीति में भी शीर्ष तक पहुँचे। इसमें आप विजयकांत का भी नाम ले सकते हैं, जो नेता प्रतिपक्ष रहे। आँकड़ों की बात करें तो थाला अजीत की ‘थुनीवु’ ने जहाँ दुनिया भर में 250 करोड़ रुपए का कारोबार किया है, वहीं थलापति विजय की ‘वरिसु’ ने 300 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर अपना सफर खत्म किया है। अब फैंस को दोनों ही फिल्मों का OTT पर इंतजार है।

खास बात ये है कि अच्छी समीक्षाएँ न मिलने के बावजूद ये दोनों ही फ़िल्में इन दोनों सुपरस्टारों के करियर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फ़िल्में हैं। वो भी तब, जब हिंदी में दोनों का ही प्रदर्शन ठीक नहीं रहा। तमिलनाडु में जो स्थान कभी सुपरस्टार रजनीकांत और ‘उल्गानायगन’ कमल हासन का हुआ करता था, वहाँ आज विजय और अजीत का कब्ज़ा था। दोनों की Rivalry ऐसी है कि ‘थुनीवु’ और ‘वरिसु’ की रिलीज के दौरान फैंस ने एक-दूसरे की फिल्मों के पोस्टर फाड़ डाले और झड़प भी हुई।

लेकिन, बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस को देख कर कहा जा सकता है कि 2023 की शुरुआत कॉलीवुड के लिए खासी अच्छी रही है। विजय की ‘वरिसु’ को केरल और तेलुगु राज्यों से 50 करोड़ रुपए का कलेक्शन प्राप्त हुआ, जो इसके लिए फायदेमंद रहा। तमिलनाडु में इसने 143 करोड़ रुपए का कारोबार किया। विदेशों में इसने 90 करोड़ रुपए की कमाई कर सबको चौंका दिया। वहीं ‘थुनीवु’ ने तमिलनाडु में 115 करोड़ रुपए का कारोबार किया है।

₹45000 करोड़ का निवेश, 3 लाख नौकरियाँ: मोदी सरकार की PLI योजना से ऐसे आत्मनिर्भर बन रहा भारत, 14 क्षेत्रों की बदल रही तस्वीर

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना का लाभ अब देश को मिलने लगा है। नीति आयोग के सीईओ के परमेश्वरन अय्यर (Parameswaran Iyer) के बताया कि PLI योजना के तहत 45,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश मिला है और तीन लाख नौकरियाँ भी पैदा हुई हैं।

अय्यर ने कहा, “पीएलआई योजना के तहत परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। प्रोत्साहन के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। हम मार्च से पहले प्रोत्साहन के रूप में भुगतान को 3000 करोड़ रुपए से 4000 करोड़ रुपए के करीब जाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह योजना काम करती दिख रही है। लगभग 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश पहले ही आ चुका है। तीन लाख नौकरियाँ सृजित हुई हैं और 2 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन पहले से ही दर्ज किया जा चुका है।”

अय्यर के अनुसार, “सरकार ने 2021-22 में 88,000 करोड़ रुपए के लक्ष्य को पार कर इसे 1 लाख करोड़ रुपए के लेनदेन तक पहुँचा दिया था। वहीं चालू वित्त वर्ष का लक्ष्य 1,62,422 करोड़ रुपए है।” हाल ही में संसद में पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में पीआईएल योजना का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था पीआईएल योजना के तहत कई क्षेत्रों में सरकार ने मदद की बात कही है। हालाँकि सबसे ज्यादा डिमांड इलेक्ट्रिक क्षेत्र को लेकर है। इस क्षेत्र में निर्यात 55 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। 

आखिर क्या है पीएलआई

देश में निर्माण (Production) और विनिर्माण (Manufacturing) सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य PLI योजना को शुरू की गई थी। इसकी घोषणा साल 2020 में छठवीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में की गई थी। इसका उद्देश्य देश में स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण में तेजी लाना और चीन जैसे देशों से आयात को कम करना था। सरकार ने इसके लिए कुछ खास सेक्टर चिह्नित किए थे और इसके लिए बकायदा सरकार ने 1.97 करोड़ लाख करोड़ रुपए बतौर इंसेंटिव के तौर पर देने का प्रावधान भी रखा था।

सरकार ने जिन 14 क्षेत्रों को इस योजना के लिए चिह्नित किया है उनमें ऑटोमोबाइल, फार्मा, कपड़ा, खाद्य उत्पाद, उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल, उन्नत रसायन सेल समेत इत्यादि शामिल हैं ।

पाकिस्तान के इस शहर में चीन के खिलाफ 2 महीने से सड़क पर लोग: दबाई जा रही बलूचों के आंदोलन वाली खबर, इस्लामी मुल्क में सिरदर्द बना अंडरग्राउंड मौलाना

पाकिस्तान के लिए ग्वादर शहर आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही तरीके से महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन वहाँ बीते दो महीनों से लगातार आंदोलन चल रहा है। स्थानीय बलूच लोग अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। साथ ही, देश में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि सरकार ग्वादर से कोई भी खबर बाहर नहीं आने दे रही।

दरअसल, ग्वादर बलूचिस्तान प्रांत का बंदरगाह वाला शहर है। इस शहर में चीन ने काफी निवेश किया है। इस निवेश का कारण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPCE) है। इस परियोजना में चीन ने करीब 62 अरब डॉलर (5.127 लाख करोड़ रुपए) का निवेश किया है। साथ ही CPEC के लिए ग्वादर बंदरगाह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

क्यों हो रहा आंदोलन?

दरअसल, पाकिस्तान में बलूच लोगों को पहले ही दोयम दर्जे का माना जाता था। एक ओर जहाँ बलूचों को उनके अधिकार नहीं मिल रहे थे। वहीं अब CPEC के चलते उनकी जमीनों पर भी कब्जा किया जा रहा है। CPEC के रास्ते में आने वाले सैकड़ों गाँव नष्ट हो चुके हैं। इस परियोजना का विरोध करने वाले लोगों पर पाकिस्तानी सरकार बर्बरता कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, CPEC का विरोध करने वाले लोगों को या तो गायब करवा दिया जा रहा है या फिर उनकी हत्या कर दी जा रही है।

पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत प्राकृतिक संसाधनों का भंडार माना जाता है। लेकिन अब चीन इन संसाधनों का उपयोग कर रहा है। चीन ग्वादर बंदरगाह को बढ़ाता जा रहा है। इससे आसपास के अन्य क्षेत्रों पर भी खतरा मंडरा रहा है। यही नहीं, जहाँ एक ओर इस पूरी परियोजना में चीनियों को रोजगार मिल रहा है। वहीं, गरीबी और भुखमरी झेल रहे पाकिस्तान में बलूच बेरोजगार घूम रहे हैं। इन तमाम बातों के चलते शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब आंदोलन का रूप ले चुका है।

पाकिस्तान-चीन का विरोध

मौलाना हिदायतुर रहमान की अगुवाई में हो रहे इस आंदोलन में आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ हथियार भी उठा लिए हैं। बलूचिस्तान में चीनी नागरिक लंबे समय से निशाने पर रहे हैं। वहाँ चीनियों पर हमला होना आम हो गया है। यही नहीं, बलूचों ने चीनी नागरिकों को ग्वादर छोड़ने की धमकी भी दी है। साथ ही, आंदोलनकारी में चीन द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों में तोड़फोड़ कर रहे हैं।

आंदोलन कर रहे लोगों की माँगे…

ग्वादर में आंदोलन कर रहे लोग बलूचिस्तान में चीनी सरकार का कम से कम हस्तक्षेप चाहते हैं। साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान में अवैध रूप से मछली पकड़ने पर रोक लगाने की माँग की है। यही नहीं, बलूचिस्तान में जगह-जगह लगे चेकपोस्ट को कम करने की भी माँग की जा रही है। इसके अलावा, एक माँग CPEC का विरोध कर रहे लोगों के लापता होने को लेकर है।

इस आंदोलन को लेकर बलूच नेशनल मूवमेंट के नेता हकीम बलूच कहते हैं, “बलूचिस्तान के लोग चीन के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। हमारा मानना ​​है कि पाकिस्तानी सरकार और सेना के साथ मिलकर चीनी सरकार बलूचों के संसाधनों को लूट रही है। वो लोग कहते हैं कि CPEC बलूचिस्तान के लिए मिलियन डॉलर परियोजना है। लेकिन बलूचिस्तान के लोगों के लिए यह परियोजना शुरुआत से ही आपदा की तरह है।”

बलूचों का रोजगार छीन अमीरों की झोली भर रहा पाक

इस आंदोलन का कारण चीन-पाकिस्तान गलियारे से जुड़ा होने के साथ ही रोजी रोटी से भी जुड़ा है। बलूचिस्तान के लोगों का मुख्य पेशा मछली पकड़ना है। लेकिन चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के कारण जगह-जगह चेकपोस्ट लगा दिए गए हैं। साथ ही मछली पकड़ने के लिए बलूचों को लंबी यात्रा करनी पड़ रही है। इससे उनके सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

दूसरी तरफ, कराची के बड़े-बड़े व्यापारी ग्वादर में आकर गैर कानूनी तरीके से मछली पकड़ रहे हैं। इसके बाद वह ट्रकों से मछलियों को बाहर भेज रहे हैं। लोगों का आरोप है कि चीनी जहाज भी मछली पकड़ने के कारोबार में शामिल हैं। इससे उनकी कमाई में बड़ा असर पड़ा है।

अब आगे क्या…?

मौलाना हिदायतुर रहमान की अगुवाई में हो रहा यह आंदोलन लगातार जारी है। मौलाना फिलहाल अंडरग्राउंड हैं। लेकिन, आंदोलनकारी अपनी माँगों को लेकर डटे हुए हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो चीन की करोड़ों रुपए की योजना CPEC ध्वस्त हो जाएगी। इस कारण चीन पाकिस्तान को सहायता देना बंद कर देगा। पाकिस्तान लंबे समय से दूसरे देशों के सहारे ही चल रहा है। यदि चीन ने पाकिस्तान के सिर से हाथ अलग कर लिया तो उसे बचाने वाला कोई नहीं होगा।

यही कारण है कि पाकिस्तान सरकार इस आंदोलन को दमन करने में जुटी हुई है। पाकिस्तान सरकार अब तक 100 से अधिक आंदोलनकारियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है।

‘ऐसे दीन में रहने का क्या फायदा’: युसूफ खान के परिवार ने किया हिन्दू बनने का ऐलान, अपनी जमीन पर बनवाएँगे मंदिर

मध्य प्रदेश के मुरैना में एक मुस्लिम परिवार ने हिन्दू बनने की घोषणा की है। यह एलान करने वाले परिवार के मुखिया का नाम युसूफ खान है। युसूफ ने खुद को पिछले 30 साल से मुस्लिमों से ही पीड़ित बताया है। उन्होंने कहा कि उनके समाज के ही कुछ लोग उनका पुश्तैनी मकान तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। युसूफ ने यह भी कहा कि वो अपनी जमीन पर मंदिर बनवा देंगे। पीड़ित ने प्रशासन पर भी अपनी शिकायत पर ध्यान न देने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुरैना के जौरा इलाके के अस्पताल रोड का है। यहाँ युसूफ अपनी परिवार के साथ रहते हैं। युसूफ ने अपने घर को पुश्तैनी बताया है। उनका आरोप है कि पिछले 3 दशकों से उनके ही मुस्लिम समाज ने उन्हें बुरी तरह से तंग कर रखा है। युसूफ ने अपने ही पड़ोसियों पर अपने खानदानी मकान को तोड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। एक CCTV फुटेज का दावा भी करते हुए युसूफ ने कहा कि उसमें आरोपितों को उनका घर क्षतिग्रस्त करते साफ़ देखा जा सकता है।

खुद को बेहद प्रताड़ित बताते हुए युसूफ ने कहा कि अगर ये सब जारी रहा हो वो अपने पूरे परिवार के साथ हिन्दू बन जाएँगे। अपने घर को तोड़ने की साजिश रचने वालों को जवाब देते युसूफ ने कहा कि वो अपनी खानदानी जमीन भी मंदिर बनवाने के लिए फ्री दान कर देंगे। उन्होंने किसी भी हाल में अपनी जमीन हथियाने वालों की कोशिश कर रहे लोगों को न सफल होने देने की भी घोषणा की। युसूफ का घर एक मस्जिद के पास है। मस्जिद के आस-पास रह रहे लोग युसूफ पर अपने घर को मस्जिद के लिए देने का दबाव बना रहे हैं।

युसूफ का कहना है कि जब उनकी मर्जी के बिना उनके मकान को कई बार तोड़ने की कोशिश हुई तब उन्होंने आरोपितों की करतूत उजागर करने के लिए CCTV कैमरे लगवा लिए। उनका दावा है कि इन कैमरों में कई लोग उनका घर तोड़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं जिनके खिलाफ बार-बार शिकायत के बाद भी पुलिस कोई एक्शन नहीं ले रही है। युसूफ का दावा है कि उनके पास अपना मकान बनवाने की अनुमति भी है लेकिन इसके बावजूद उन्हें घर नहीं बनवाने दिया जा रहा है।

युसूफ ने हिन्दुओं से अपील की है कि वो उनकी मदद करें। उन्होंने बताया कि भले ही मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें करोड़ों रुपए दे दें पर वो उन्हें जमीन नहीं देने वाले। युसूफ ने कहा कि जहाँ प्रताड़ना मिल रही ऐसे दीन में रहने का क्या फायदा। वहीं जानकारी के मुताबिक जिलाधिकारी मुरैना ने इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने युसूफ के आरोपों की जाँच के लिए एक प्रशासनिक टीम का भी गठन किया है।

अमेरिका के पार्क से काट कर ले गए छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति, तलाश में जुटे अधिकारी

कैलिफोर्निया (California) के सैन जोस के एक पार्क से छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति गायब होने की खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया के अधिकारियों ने बताया कि कोई भारतीय शासक की मूर्ति को अपने हिसाब से काटकर पार्क से चुराकर ले गया। बताया जा रहा है कि ग्वाडालूप रिवर पार्क में श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति लगाई गई थी। भारत में सैन जोस सिस्टर सिटी (पुणे) का यह एक उपहार था।

अधिकारी सैन जोस पार्क से चुराई गई मूर्ति के मामले की जाँच कर रहे हैं। सैन जोस पार्क्स एंड रिक्रिएशन ने 3 फरवरी 2023 को इस मामले को लेकर ट्वीट किया, “हमें आपको यह सूचित करते हुए खेद हो रहा है कि ग्वाडालूप रिवर पार्क से श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति गायब है।” हालाँकि, पार्क के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि मूर्ति किस दिन यहाँ से चुराई गई है।

छत्रपति शिवाजी महाराज एक भारतीय शासक थे, जिन्होंने 1600 की सदी के दूसरे हिस्से में इस्लामी आक्रांताओं के विरुद्ध लड़ाई छेड़ी और मराठा साम्राज्य की स्थापना की। वह एक महान योद्धा थे और अपनी बहादुरी, रणनीति और प्रशासनिक कौशल के लिए जाने जाते थे। उन्होंने हमेशा से स्वराज्य और मराठा विरासत पर ही ध्यान केंद्रित किया था। इस घटना के बाद पार्क के अधिकारियों ने मूर्ति के बारे में कोई भी जानकारी मिलने पर लोगों को पुलिस को सूचित करने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि हिन्दू हृदय सम्राट व मराठा गौरव की उपाधि से अलंकृत महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को पुणे के जुनार स्थित शिवनेरी दुर्ग में शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था। माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव की वीरांगना नारी थीं। वह उनकी पहली गुरु भी थीं, जो रामायण, महाभारत के साथ शिवाजी को भारतीय वीरों और महापुरुषों की कहानियाँ सुनाती थीं। दादा कोणदेव के संरक्षण में शिवाजी ने युद्ध कौशल की सारी कलाएँ सीखीं।

शिवाजी को गुरिल्ला युद्ध या छापामार युद्ध का आविष्कारक माना जाता है। शिवाजी के गुरु समर्थ रामदास थे। छत्रपति शिवाजी तुलजा भवानी के उपासक थे। शिवाजी का राज्य वास्तविक और कानूनी दोनों तरह से एक संप्रभु राज्य था। महादेव गोविंद रानाडे के अनुसार, “नेपोलियन प्रथम की तरह शिवाजी अपने समय में एक महान संगठनकर्ता और नागरिक संस्थानों के निर्माता थे।”

बड़े-बड़े अधिकारी करते थे सलाम, जी रही थी VIP वाली लाइफ: फर्जी IPS जोया खान गिरफ्तार, घर से मिली नीली बत्ती, आइकार्ड्स और यूनिफॉर्म

हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है जो IPS (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी बन कर लोगों पर रौब झाड़ रही थी। महिला का नाम जोया खान है जो मेरठ की रहने वाली है। गुरुग्राम पुलिस जोया को ले कर शनिवार (4 फरवरी, 2023) को उनके मेरठ स्थित घर पहुँची। यहाँ जोया के घर की तलाशी के दौरान पुलिस की वर्दी और बैज के साथ लाल व नीली बत्तियाँ बरामद हुई हैं। जोया को 5 साल पहले भी फर्जी IFS (भारतीय विदेश सेवा) अधिकारी बन कर लोगों को प्रभाव में लेने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस को जोया खान के फ़्लैट से फर्जी आइकार्ड्स भी मिले हैं। मेरठ में जोया का फ़्लैट सदर बाजार स्थित वेस्ट एंड रोड पर तिवारी कैंपस में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जोया को 2 फरवरी, 2023 को गुरुग्राम में गिरफ्तार किया गया था। वहाँ की STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स) को जोया की हरकतों की सूचना मिली थी। IPS बन कर जोया न सिर्फ लोगों के साथ अधिकारियों पर रौब झाड़ रही थी बल्कि इसी नाम पर वह कई VIP सुविधाएँ भी ले रही थीं।

बताया जा रहा है कि जोया की बातचीत का अंदाज़ ऐसा था कि अच्छे-अच्छे अधिकारी भी उन्हें सैल्यूट करते थे। वह अक्सर लक्जरी गाड़ियों से से चला करती थी।

जानकारी के मुताबिक फर्जी IPS बन कर ज़ोया ने नोएडा, सहरानपुर, मेरठ और गाजियाबाद जैसे शहरों में VIP प्रशासनिक सुविधाएँ हासिल की थी। साल 2019 तक तो उनके साथ पुलिस का गनर और सुरक्षा एस्कॉर्ट भी देखा जाता था। 28 मार्च 2019 को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली थी। इस रैली में भी जोया खान को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ देखा गया था। वह आवाज बदलने में भी माहिर बताई जा रही हैं। अब IPS वैभव कृष्ण नोएडा के SSP थे तब किसी बात पर जोया खान उन पर भी भड़क गईं थी।

वैभव कृष्ण को जोया की हरकत पर उनके पुलिस अधिकारी होने का शक हुआ था। उसी के बाद पुलिस ने ज़ोया खान की जाँच शुरू कर दी थी। यही जाँच करते हुए नोएडा पुलिस जोया के फ़्लैट तक भी पहुँच गई थी। जाँच के दौरान ही यह जानकारी हुई थी कि ज़ोया खान ग्रेजुएट हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ज़ोया ने PCS का एक्जाम दिया था लेकिन उसमें उसे असफलता हाथ लगी। फ़िलहाल पुलिस जोया और उसके घर से बरामद चीजों को ले कर वापस गुरुग्राम लौट चुकी है। गुरुग्राम पुलिस अभी भी जोया के अन्य फर्जीवाड़ों की जाँच कर रही है।

कुरान पर हाथ रख कर चीटिंग, मारा, पैसे लूटे, ज़िंदगी खराब कर दी… राखी सावंत का शौहर आदिल दुर्रानी मुंबई पुलिस की हिरासत में

राखी सावंत (Rakhi Sawant) के शौहर आदिल दुर्रानी को मंगलवार (7 फरवरी 2023) को हिरासत में ले लिया गया है। राखी सावंत ने अपने शौहर पर पैसा लूटने, मारपीट करने को लेकर मुंबई के ओशीवारा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसी के सिलसिले में आदिल दुर्रानी को हिरासत में लिया गया है। राखी ने बकायदा इस संबंध में ओडियो क्लिप जारी करके मीडिया को इसकी जानकारी दी है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही उनकी की माँ का ब्रेन कैंसर की वजह से निधन हो गया था।

ऑडियो में वह कहती हैं, ”अभी आदिल खान दुर्रानी मुझे मेरे घर पर मिलने आया था। वह गिरफ्तार हो चुका है, क्योंकि मैंने उनपर एफआईआर किया हुआ है। अभी-अभी ओशिवारा पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया है। मैं भी ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुँच रही हूँ। यह कोई नाटक नहीं है। मेरी जिंदगी खराब की है इसने। मुझे मारा है। मेरा पैसा लूटा है। कुरान पर हाथ रखकर भी इसने मेरे साथ चीटिंग की है। मैं मीडिया से गुहार लगाती हूँ कि सच्चाई का साथ दो। सारे सबूत मैंने मीडिया को दिए हैं।”

उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम तब हो रहा है जब एक दिन पहले ही राखी अपने शौहर दुर्रानी को अपने हाथों से खाना खिलते स्पॉट हुई थी। बहरहाल, राखी अगले वीडियो में पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ी दिखती हैं और वहाँ मीडिया से कहती हैं, “मुझसे आदिल कहता है कि उसे मुझसे मिलना है। फिर मैंने मिलने का कारण पूछा। मैंने मिलने से इनकार कर दिया। सोमवार (6 फरवरी, 2023 रात भी आपने पैच-अप की गलत खबर चलाई थी। हाथों से खाने खिलने से पैच अप नहीं होता। इससे मेरी माँ वापस नहीं आएँगी।”

इस मामल को लेकर डीसीपी जोन 9 अनिल पारस्कर ने अपने बयान में कहा, “हमने राखी सावंत की शिकायत पर आदिल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आदिल को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं आदिल दुर्रानी को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया है।” उल्लेखनीय है की बीते कई दिनों से आदिल और राखी की खबरें सुर्खियाँ बटोर रही है। एक दिन दोनों के बीच पैच-अप की खबर आती है और अगले ही दिन आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। अब मामला आदिल की हिरासत तक पहुँच चुका है।

राहुल गाँधी ने CM योगी आदित्यनाथ का किया अपमान, बताया ‘ठग’: BJP बोली – उत्तर प्रदेश बर्दाश्त नहीं करेगा ऐसी बात

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर विवादित बयान दिया है। राहुल ने कहा है कि योगी धार्मिक नेता नहीं, बल्कि मामूली ठग हैं। फिलहाल, राहुल के इस बयान को लेकर भाजपा हमलावर है। यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राहुल गाँधी को हिंदुत्व का महाज्ञानी न बनने की सलाह दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (6 फरवरी, 2023) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में राहुल गाँधी से उत्तर प्रदेश को लेकर सवाल किया गया। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है कि भाजपा देश की सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में जो कर रही है वह धर्म नहीं, अधर्म है।

राहुल गाँधी ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश में कोई भी धर्म हिंसा को बढ़ावा नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी भाषा के चलते धार्मिक नेता नहीं कहे जा सकते और सिर्फ भगवा पहन लेने से कोई धार्मिक नेता नहीं हो जाता। राहुल गाँधी ने आरोप लगाया कि वह अपने मठ का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “योगी कोई धार्मिक नेता नहीं हैं। बल्कि मामूली ठग हैं।”

इसके बाद राहुल गाँधी से उत्तर प्रदेश में धर्म की आँधी को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में धर्म की अंधी नहीं चल रही। बकौल राहुल गाँधी, उन्होंने इस्लाम पढ़ा, ईसाई धर्म पढ़ा, बौद्ध धर्म पढ़ा, हिंदू धर्म जानते हैं – कोई भी धर्म नफरत फैलाने को नहीं कहता। जैसे ही कोई तपस्या करना बंद कर देता है, वह भ्रम की स्थिति में चला जाता है। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस तपस्वियों की पार्टी है, भाजपा और संघ इसके उलट हैं।

राहुल गाँधी के इस बयान पर उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए उन्हें मुंगेरीलाल के सपने देखने वाला करार दिया। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “राहुल गाँधी को अपना बयान वापस लेना चाहिए। ऐसी बात को उत्तर प्रदेश स्वीकार और बर्दाश्त नहीं करेगा। राहुल गाँधी से संसद में वरिष्ठ हैं, लेकिन उनमें अब तक गंभीरता नहीं आ रही।”

उन्होंने यह भी कहा है, “जो व्यक्ति इतनी पुरानी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहा हो, 4 बार से ज्यादा सांसद रहा हो। पीएम बनने के मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहा हो। उसके मुँह से ऐसी बातें अच्छी नहीं लगतीं। उत्तर प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जब ऐसा होता है तो कॉन्ग्रेस और उनके नेताओं को यह बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए वह ऐसी बातें करते हैं।”

केशव प्रसाद मौर्य ने आगे कहा है, “राहुल हिंदुत्व के महाज्ञानी ना बनें। धर्मशास्त्र क्या होते हैं, गंगा-यमुना-सरस्वती संगम क्या है, राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण कैसे हो रहा है। यह सब उन्हें नहीं पता। ऐसे बयानों से वह उत्तर प्रदेश का अपमान कर रहे हैं।”

वहीं, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा है कि राहुल गाँधी को अपने इस बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए। राहुल ने हिंदुओं और गोरखनाथ मठ का अपमान किया है। भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे बयानों के कारण ही शायद उन्हें पप्पू भी कहा जाता है।