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‘मौलवियों को वेतन दिया जा सकता है, तो हमें क्यों नहीं’: CM केजरीवाल के आवास के बाहर पुजारियों का प्रदर्शन, हनुमान चालीसा का पाठ

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के घर के सामने मंगलवार (7 फरवरी, 2023) को हजारों पुजारियों ने वेतन की माँग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि जब मौलवियों को वेतन दिया जा सकता है, तो उन्हें क्यों नहीं? इसमें दिल्ली बीजेपी के मंदिर प्रकोष्ठ के लोग भी शामिल थे। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि अरविंद केजरीवाल के आवास के सामने हनुमान चालीसा के साथ पुजारियों ने धरना-प्रदर्शन किया।

पुजारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार जब तक उन्हें वेतन नहीं देगी और सनातन धर्म की रक्षा के लिए काम नहीं करेगी, तब तक यह धरना-प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा, “इस सरकार को हम बताना चाहते हैं कि ये तो तमाम पंडित पुजारियों की हुंकार है। हम 2024 में इन्हें दिखा देंगे कि सनातन धर्म की क्या ताकत है। जितने भी लोग जुड़े हुए हैं सभी सनातनी है। ये सनातन धर्म की ललकार है। होश में आ जाओ और समान रूप से पुजारियों का वेतन भी तय करो।”

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब पुजारियों को उनका हक दिलाने के लिए प्रदर्शन किया गया हो। इससे पहले भी इस तरह के विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। साल 2021 में दिल्ली के विभिन्न मंदिरों में पुजारियों को वेतन देने की माँग को लेकर बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीएम अरविंद केजरीवाल के घर के सामने प्रदर्शन किया था। बीजेपी ने माँग की थी कि दिल्ली के मंदिरों के पुजारियों को उचित वेतनमान दिया जाए।

केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा था कि जब मस्जिद की देखभाल करने वाले काज़ियों और इमामों को वेतन दिया जा सकता है तो मंदिर के पुजारियों को भी वेतन मिलना चाहिए। मंदिरों की सेवा करने वाले पुजारियों और साधु संतों को किसी तरह का वेतन नहीं दिया जाना, दिल्ली सरकार के भेदभाव को दर्शाता है ।

गौरतलब है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड की पंजीकृत करीब 185 मस्जिदों के 225 इमाम और मुअज्जिनों को हर महीने वेतन दिया जाता है। इसमें 18 हजार रुपए इमाम को और 14 हजार रुपए मुअज्जिनों को दिए जाते हैं। वहीं बात करें अनरजिस्टर्ड मस्जिदों की तो यहाँ के इमामों को 14 हजार और मुअज्जिनों को 12 हजार रुपए प्रति माह का मानदेय मिलता है।

‘पश्चिम बंगाल में ₹2.30 लाख करोड़ का घोटाला’: CM ममता बनर्जी पर बड़ा आरोप, कलकत्ता हाईकोर्ट में दर्ज याचिका में कैग की रिपोर्ट का भी जिक्र

भाजपा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने ‘संडे गार्जियन’ की ए​क रिपोर्ट का हवाला देते हुए ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मंगलवार (7 फरवरी, 2023) को ट्वीट किया, “यह पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर किए गए एक और घोटाले का संकेत है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में राज्य सरकार द्वारा 2.30 लाख करोड़ रुपए की भारी रकम की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। यह मामला कैग की एक रिपोर्ट पर आधारित है, जो सबूतों पर आधारित है। नतीजे का इंतजार है।”

‘संडे गार्जियन’ की यह रिपोर्ट 4 फरवरी, 2023 की है। इसमें पिछले महीने कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार पर बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगाया गया है। याचिका में राज्य सरकार पर हेराफरी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी कि गई राशि 229,099 करोड़ रुपए को उचित दस्तावेजों के बिना ही खर्च कर दिया गया।

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने उपयोगिता प्रमाण पत्र से राशि का दुरुपयोग करने और गबन की ओर इशारा किया है। याचिका में राज्य के अधिकारियों पर कथित घोटाले का समर्थन करने का भी आरोप लगाया गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में कहा गया है कि CAG की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 31 मार्च, 2021 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में विभिन्न विसंगतियों, अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा किया गया है, जो बड़े वित्तीय घोटाले और अपराध की ओर संकेत करती है।

यह याचिका तीन व्यक्तियों पत्रकार एवं पश्चिम बंगाल में भाजपा इकाई के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, अधिवक्ता सुमन शंकर चटर्जी और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी रित्विक पॉल ने 20 जनवरी, 2023 को दायर की थी। यह उस वक्त दायर की गई थी, जब तीनों को कैग रिपोर्ट से पता चला कि ममता बनर्जी सरकार केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को दिए गए धन के व्यय का दस्तावेजीकरण नहीं कर रही है।

‘संडे गार्जियन’ ने सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आगे लिखा है, अभी तक 2,29,099 करोड़ रुपए का यूसी (उपयोगिता प्रमाण पत्र) पश्चिम बंगाल सरकार के विभिन्न विभागों से प्राप्त नहीं हुआ है। इसमें बड़े विभाग शहरी विकास और नगरपालिका, स्कूल शिक्षा, पंचायत और ग्रामीण विकास शामिल हैं। प्रत्येक विभाग क्रमशः 30,693 करोड़ रुपए, 36,850 करोड़ रुपए और 81,839 करोड़ रुपए की सीमा तक किए गए खर्च का यूसी जमा करने में विफल रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि प्रभावी रूप से सरकारी खजाने के 2,29,099 करोड़ रुपए यूसी जैसे किसी भी दस्तावेज के बिना खर्च किए गए हैं, जबकि इसके लिए दस्तावेजीकरण अनिवार्य है। उपयोगिता प्रमाण पत्र के जरिए यह पता लगाया जाता है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को जारी की गई धन राशि सही उद्देश्य के लिए पूरी की गई है। ऐसे में यूसी के अभाव में यह पता नहीं लगाया जा सका है कि जिस राशि को केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार को दिया था, उसे उचित कार्यों में लगाया गया है या नहीं।

बता दें कि इससे पहले राज्यसभा सांसद जेठमलानी ने बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने के लिए बीबीसी ने प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री बनाई है। उन्होंने BBC को भारत विरोधी और बिकाऊ भी बताया था।

कंगाल पाकिस्तान ने रोका भारत का रास्ता, भूकंप पीड़ितों के लिए जा रही मदद सामग्री के लिए नहीं दिया अपना एयरस्पेस: तुर्की बोला – ज़रूर में काम आने वाला ही सच्चा दोस्त

पाकिस्तान की आर्थिक हालत खस्ता है। लोग वहाँ आटा के लिए एक-दूसरे का सिर फोड़ रहे हैं। बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत द्वारा तुर्की भेजे जाने वाले सहायता सामग्री के लिए अपने एयरस्पेस देने से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप से अब तक 4900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और मलबे से लगातार शव निकाले जा रहे हैं। मृतकों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। भूकंप की भयावहता को देखते हुए पूरी दुनिया ने तुर्किये के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। इसी को देखते हुए भारत ने भी एनडीआरएफ की अगुवाई में सहायता सामग्री तुर्की भेजी है।

यह सहायता सामग्री जल्द से जल्द तुर्किये तक पहुँच जाए और वहाँ के लोगों को इससे कुछ राहत मिले, इसी को देखते हुए भारत ने पाकिस्तान से उसके एयरस्पेस का प्रयोग करने की इजाजत माँगी थी। हालाँकि फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने तुर्की की स्थिति देखते हुए भी मानवीय सहायता के लिए अपने एयरस्पेस का प्रयोग करने देने से इनकार कर दिया। इस बीच भारत द्वारा भेजी गई सहायता तुर्की पहुँच चुकी है।

पाकिस्तान की इस हरकत की वजह से भारत को लम्बा रास्ता तय करके राहत सामग्री को पहुँचाना पड़ा। लेकिन भारत में तुर्की के राजदूत ने फिरात सुनेल ने भारत का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “तुर्की और हिंदी में ‘दोस्त’ एक आम शब्द है… हमारे यहाँ तुर्की में एक कहावत है- ‘दोस्त करा गुंडे बेली ओलुर’ (ज़रूरत में काम आने वाला दोस्त ही सच्चा दोस्त होता है)। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

इससे पहले सोमवार (6 फरवरी, 2023) को केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री (MoS) वी मुरलीधरन तुर्की के दूतावास गए थे और जान-माल की क्षति पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहानुभूति और मानवीय समर्थन से भी अवगत कराया था।

हथियार लहराती मुस्लिम भीड़ और दलित परिवार के बीच खड़ा हो गया ‘बजरंग दल’… पटौदी में गोलीबारी और पत्थरबाजी: बच्चे पर थूक देते हैं, पहले भी किए हमले

गुरुग्राम के पटौदी में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ मुस्लिम भीड़ द्वारा एक दलित परिवार पर हमला किया गया है। इस दौरान घातक हथियार लहराने के साथ पत्थरबाजी और आगजनी की भी सूचना है। दलित परिवार की मदद के लिए आए ‘बजरंग दल’ सदस्यों को भी निशाना बनाया गया है। बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ के डर से दलित परिवार ने घर से भी निकलना बंद कर दिया है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घटना सोमवार (6 फरवरी, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला पटौदी के मोहल्ला बाबरशाह का है। यहाँ दलित समुदाय के राकेश अपने परिवार के साथ रहते हैं। राकेश का आरोप है कि उसी मोहल्ले के मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग एक लम्बे समय से उन्हें और उनके परिवार को तंग कर रहे हैं। पीड़ित के मुताबिक, उन्हें घातक हथियार दिखा कर डराया जाता है। बताया जा रहा है कि इस डर से राकेश और उनके परिजनों ने घर से एक सप्ताह तक निकलना ही बंद कर दिया था। राकेश का दावा है कि आरोपितों द्वारा हथियार लहराने और धमकाने के वीडियो भी उनके पास मौजूद हैं।

राकेश का कहना है कि उन्होंने अपनी प्रताड़ना की शिकायत पुलिस से कई बार की। इस बाबत उन्होंने सबूत भी दिखाए लेकिन, पुलिस ने आरोपितों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस से निराश हो कर राकेश ने रेवाड़ी में रहने वाले कुछ परिचितों को फोन किया। वहाँ से दलित परिवार की प्रताड़ना की जानकारी बजरंग दल वालों को दी गई। बताया जा रहा है कि सोमवार की रात लगभग 9 बजे बजरंग दल कार्यकर्ता रेवाड़ी और गुरुग्राम से जा कर पीड़ित परिवार से मुलाकात कर के उनका हाल-चाल ले रहे थे।

आरोप है कि इसी दौरान लगभग 250 हमलावरों की भीड़ ने दलित परिवार को निशाना बना कर हमला कर दिया। हमले में राकेश के घर पर मौजूद बजरंग दल के सदस्यों को भी टारगेट किया गया। भीड़ के हाथों में हथियारो के साथ पत्थर भी बताए जा रहे हैं। हमलावर भीड़ ने पीड़ित राकेश के मकान में तोड़फोड़ की। इस दौरान कई राउंड गोलियाँ भी चलाए जाने की सूचना है, जिससे एक व्यक्ति घायल हो गया है। घायल का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जिसके पेट में गोली लगी है। यह गोली हमलावर भीड़ द्वारा चलाने का आरोप है।

आरोप है कि पत्थरबाजी कर रही भीड़ ने राकेश के घर के आस-पास खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की। इस बीच मौके पर मौजूद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार की महिलाओं और बच्चो को बचा कर सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। हिन्दू संगठन के सदस्यों द्वारा ही पुलिस को सूचित किया गया। घटना की जानकारी होते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा। भीड़ को बल प्रयोग कर के तितर-बितर किया गया। आस-पास के डरे लोगों का कहना है कि अगर उस समय पीड़ित परिवार का कोई व्यक्ति हमलावर भीड़ के हत्थे चढ़ गया होता तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

थूक देते हैं ऊपर

दलित परिवार की महिलाओं ने बताया कि मुस्लिमों द्वारा उनके बच्चे को लगातार जाति सूचक शब्द बोले जाते हैं। आरोप है कि घर से बाहर निकलने पर पीड़ित परिवार के बच्चे पर थूक भी दिया जाता है। राकेश के परिवार की महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कई बार मुस्लिमों से जा कर अपने बच्चे को छोड़ देने की मिन्नत की लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। आरोप है कि दर्जनों लोगों ने कुछ दिन पहले घर में घुस पर पीड़ितों को मार डालने की धमकी दी थी। पीड़ित परिवार दूसरे के घरों में झाड़ू पोंछा कर के रोजी-रोटी कमाता है।

पहले भी हो चुके हैं हमले

बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया में डाली गई किसी पोस्ट पर शुरुआत में दोनों पक्षों के बच्चों के बीच विवाद शुरू हुआ था। बाद में यही विवाद बढ़ कर बवाल का रूप ले लिया। मौके पर पहुँचे हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं के मुताबिक मुस्लिम भीड़ इस से पहले भी राकेश के परिवार पर 3 से 4 बार हमला कर चुकी है। पिछली घटना 5 दिसंबर की बताते हुए हिन्दू संगठन पदाधिकारियों ने बताया कि उस मामले में भी पुलिस ने कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की है।

विवाद की वजह को हिन्दू संगठनों ने राकेश के घर के पड़ोसी मुस्लिमों द्वारा आए दिन शराब के नशे में बच्चों के साथ मारपीट और दंबगई दिखाना बताया है।

घटना के दौरान मौके पर मौजूद मोनू मानेसर नाम के हिन्दू संगठन पदाधिकारी का कहना था कि हमलावर भीड़ के निशाने पर राकेश के घर की महिलाएँ और बच्चे थे। उन्होंने बताया कि वो खुद अपने साथियों के साथ राकेश के परिजनों को बचाते हुए हमलावर भीड़ से घिर गए थे। मोनू का कहना है कि अगर पुलिस मौके पर न पहुँचती तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। इस दौरान उन्होंने हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों के वाहनों में तोड़फोड़ के साथ कुछ सदस्यों के घायल होने की भी जानकारी दी। फ़िलहाल मामले की शिकायत पुलिस में कर दी गई है। पुलिस घटना की जाँच कर रही है।

‘शैतानों की मूर्तियाँ फेंक दो, पूजा-पाठ छोड़ दो’: MP के इस गाँव में 5 साल से चल रहा जनजातीय समाज के ईसाई धर्मांतरण का खेल, पादरी सहित 3 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया। ईसाई मजहब से जुड़े लोग जनजातीय महिलाओं व भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कर रहे थे। साथ ही, हिंदू धर्म के खिलाफ गलत बातें भी कर रहे थे। फिलहाल पुलिस ने ईसाई पादरी समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। घटना रविवार (5 फरवरी, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला भोपाल के रातीबड़ इलाके से सटे केकड़िया गाँव का है। जहाँ गाँव के ही एक घर में जनजातीय वर्ग के करीब 40 लोगों को एकजुट कर धर्मांतरण कराया जा रहा था। गाँव के सरपंच ने हिंदू टाइगर फोर्स के सदस्यों को इसकी सूचना दी थी। सूचना के आधार पर गाँव पहुँचे हिंदू टाइगर फोर्स के सदस्यों ने धर्मांतरण की इस गतिविधि का विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया।

हिंदू टाइगर फोर्स के प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह तोमर ने आरोप लगाते हुए कहा है कि ईसाई पादरी हीरालाल जामोद के घर पर लंबे समय से जनजातीय वर्ग के लोगों को इकट्ठा किया जा रहा था। वहाँ धर्मांतरण कराने के उद्देश्य से हिंदू धर्म के खिलाफ लोगों को भड़काया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा है कि जब वह पादरी के घर पहुँचे तब वहाँ 40 से अधिक लोग मौजूद थे। सभी ईसाई मजहब की प्रार्थना कर रहे थे। यही नहीं, हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की जा रही थीं। साथ ही, हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने और शैतानों की मूर्ति फेंककर पूजा-पाठ करना छोड़ने की बात की जा रही थी।

आरोप है कि केकड़िया गाँव में धर्मांतरण का यह खेल करीब 5 साल से चल रहा है। हालाँकि अब मामला सामने आने के बाद पुलिस यह पता करने में जुटी हुई है कि अब तक कितने लोग धर्मांतरण का शिकार हुए हैं। साथ ही इसके लिए फंडिंग कहाँ से आती थी, इसकी भी जाँच की जा रही है।

गाँव के सरपंच डालचंद बंजारा ने कहा है कि मुख्य आरोपित ईसाई पादरी हीरालाल जामोद द्वारा धर्मांतरण कराए जाने की शिकायत 5 साल पहले भी हुई थी। यह शिकायत गाँव वालों ने ही की थी। हालाँकि, तब उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब आरोपितों के पास ईसाई मजहब से जुड़े साहित्य भी बरामद हुए हैं।

इस पूरे मामले में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्रुतकीर्ति सूर्यवंशी ने कहा है कि धर्मांतरण के लिए जनजातीय महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस ने मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2019 के तहत मामला दर्ज किया है। इसमें, हीरालाल जामोद, गब्बर सिंह और हेम सिंह को आरोपित बनाया गया है। आरोपित गिरफ्तार हो गए हैं। संदिग्धों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कहा जा रहा है कि गाँव के रास्ते में करीब 2 किलोमीटर पहले एक बोर्ड लगा हुआ है। इस बोर्ड में लव जिहाद और धर्मांतरण कराने वालों का प्रवेश वर्जित की बात कही गई है। इस बोर्ड में हिंदू धर्म और देवी देवताओं के खिलाफ गलत बयानबाजी वर्जित किए जाने की बात भी लिखी हुई है।

BJP नेता रहीं गौरी को जज बनने से रोकना चाहती थी लेफ्ट लॉबी, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिकाएँ: माँ अमृतानंदमयी और भारत माता को दिया धन्यवाद

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मंगलवार (7 फरवरी, 2023)  को मद्रास उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judge) के रूप में अधिवक्ता एलसी विक्टोरिया गौरी (LC Victoria Gowri) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। जब गौरी अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ले रहीं थीं, लगभग उसी वक्त उनके खिलाफ याचिकाएँ ख़ारिज की गईं। मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और बीआर गवई की पीठ कर रही थी।

मद्रास उच्च न्यायालय के पुस्तकालय कक्ष के अंदर चार अन्य लोगों के साथ विक्टोरिया गौरी को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में चुना गया है। सुप्रीम कोर्ट कहा कि उन्हें एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में चुना गया है और ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें उन्हें (अतिरिक्त न्यायाधीशों को) स्थायी रूप से नियुक्त नहीं किया गया है। 

कोर्ट ने आगे कहा, “हम रिट याचिकाओं पर विचार नहीं करेंगे। कारण बाद में पता चलेगा।” इसके साथ ही पीठ ने कहा कि कॉलेजियम ने गौरी के खिलाफ सारे तथ्यों को देखा होगा। शीर्ष न्यायालय कॉलेजियम के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

जस्टिस खन्ना ने कहा, “मामला गौरी की योग्यता/पात्रता से नहीं बल्कि उनकी उपयुक्तता से संबंधित है। उपयुक्तता से संबंधित जाँच व्यक्ति के स्तर पर आकलन करना होगा। इसलिए न्यायालय इसमें आगे नहीं जा सकता। इससे पूरी प्रक्रिया में ही समस्या पैदा हो जाएगी। दूसरी बात, हम कॉलेजियम को निर्देशित नहीं कर सकते।”

वहीं शपथ ग्रहण के दौरान अपने संबोधन में गौरी ने कहा, “मैं माता अमृतानंदमयी और भारत माता को धन्यवाद देती हूँ। मैं अपने पति और अपनी दो बेटियों को धन्यवाद देती हूँ, जो जीवन में मेरे सभी प्रयोगों में मेरे साथ खड़े रहे। मैं यहाँ सभी वरिष्ठ जजों के चरणों में नमन करती हूँ और आपका आशीर्वाद चाहती हूँ।” इससे पहले, वकीलों ने अतीत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ गौरी के कथित बयानों का हवाला दिया था और दावा किया था कि उनके न्यायाधीश बनने से ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता बाधित होगी। गौरी के बारे में कहा गया था कि वो भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़ी रही थीं।

गौरी के साथ चार अन्य वकीलों को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है। ये पदोन्नति एक कॉलेजियम द्वारा सिफारिश से की गई थी। इसमें प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ शामिल थे। ये सिफारिशें 17 जनवरी को की गई थीं। बाद में मद्रास हाई कोर्ट बार काउंसिल ने कॉलेजियम की सिफारिश पर आपत्ति जताई थी और एससी कॉलेजियम के साथ-साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी पत्र लिखा था।

‘क्या हो अगर रोहिंग्या आस-पास रहने लगें’: परेश रावल की स्पीच पर वामपंथियों ने की थी जो FIR, उसे कोलकाता HC ने रद्द किया

कोलकाता हाईकोर्ट ने भाजपा नेता और एक्टर परेश रावल को बड़ी राहत दी। दरअसल, परेश रावल पर गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान बांगलादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को बंगाली कहने का आरोप लगा था। इस मामले की सुनवाई करते हुए कोलकाता हाईकोर्ट ने परेश रावल के खिलाफ एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया।

सोमवार (6 फरवरी 2023) को कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस राजशेखर मैंथा की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए परेश रावल के खिलाफ दर्ज केस खारिज करने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि परेश रावल ने गुजराती में बयान दिया था। उस बयान का कोई भी अंग्रेजी अनुवाद नहीं है। उनके बयान पर ऐसे लोगों ने टिप्पणी की है जो निश्चित तौर पर गुजराती नहीं समझते। यही नहीं, परेश रावल ने अपने बयान पर सफाई देते हुए माँफी भी माँगी है।

दरअसल, गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान वलसाड जिले में एक रैली में रावल ने कहा था, “गैस सिलेंडर महँगे हैं। लेकिन उसकी कीमतें कम हो जाएँगी। लोग रोजगार भी पा जाएँगें, लेकिन क्या होगा अगर रोहिंग्या और बांग्लादेशी आप के आसपास रहना शुरू कर दें। जैसा कि दिल्ली में हो रहा है? आप गैस सिलेंडर का क्या करेंगे? बंगालियों के लिए मछली पकाएँगे?”

इस बयान के बाद सोशल मीडिया में परेश रावल की काफी आलोचना हो रही थी। इसके बाद उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी माँग ली थी। उन्होंने कहा था, “निश्चित तौर पर मछली कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि गुजराती मछली पकाते और खाते हैं। मैं स्पष्ट कर दूँ कि बंगाली से मेरा मतलब अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्याओं से है। लेकिन, फिर भी अगर मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो मैं माफी माँगता हूँ।”

परेश रावल इस बयान के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता मोहम्मद सलीम ने उनके खिलाफ कोलकाता के तलतला थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। सीपीएम नेता ने एफआईआर में कहा था कि परेश रावल के बंगाली विरोधी बयानों से देश के अन्य राज्यों के लोगों में बंगाली विरोधी भावना विकसित हो सकती है।

CPI (M) नेता की शिकायत के बाद परेश रावल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 (दंगे की मंशा से उकसाना), धारा 153 A (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना ), धारा 153 B (भाषाई या नस्लीय समूहों के अधिकारों का खंडन करना) और धारा 504 (शांति भंग करने की मंशा से जानबूझकर अपमान करना ) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ था।

इसके बाद कोलकाता पुलिस ने परेश रावल को समन भेजकर पेश होने के लिए कहा था। लेकिन वह पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। साथ ही उन्होंने इस समन और दर्ज एफआईआर के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

दुकान के बाहर बुलाया, फिर सिर में दाग दी गोली… उदयपुर में ‘बजरंग दल’ के नेता की हत्या, कन्हैया लाल का यही रेत डाला गया था गला

राजस्थान के उदयपुर में बजरंग दल के नेता की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई। नेता का नाम राजू परमार उर्फ राजू तेली है। यह घटना अंबामाता थाना क्षेत्र में रामपुरा चौराहे की है। प्रीतम सिंह नाम के शख्स ने फेसबुक पर पोस्ट शेयर कर उनकी हत्या की जिम्मेदारी ली है। उसने अपना फेसबुक प्राइवेट कर रखा है, लेकिन उसका पोस्ट वायरल हो गया है। इसमें वह लिखता है, “जय माता दी सभी भाइयों को। मैं प्रीतम सिंह, उदयपुर में रामपुरा चौराहे पर हुए हत्याकांड पर।राजेंद्र परमार (राजू तेली), जो कि अंबामाता थाने का हिस्ट्रीशीटर है, वह मेरे मामा जी की जमीन हड़पना चाहता था। इसलिए मैंने उसको गोली मार दी और वो मर गया। जय श्री राम, जय महाकाल।”

प्रीतम सिंह नाम के शख्स ने फेसबुक पर उनकी हत्या की जिम्मेदारी ली। (फोटो साभार: ETV)

मीडिया रिपोर्ट्स में जमीनी विवाद के चलते बजरंग दल के नेता की हत्या करने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है ​कि उदयपुर में सोमवार (6 फरवरी, 2023) को रात करीब आठ दो बदमाशों ने उन्हें दुकान के बाहर बुलाया और उनके सिर में गोली मार दी। स्थानीय लोग उन्हें अस्पताल लेकर पहुँचे, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। वारदात की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता, एएसपी चंद्रशील ठाकुर समेत कई पुलिस अधिकारी हॉस्पिटल पहुँचे।

बजरंग दल में पूर्व जिला संयोजक रह चुके 38 वर्षीय राजू उर्फ राजेन्द्र परमार प्रॉपर्टी डीलिंग का बिजनेस करते थे। इसके कारण उनका कई लोगों से विवाद भी चल रहा था। सेंट्रल जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर दिलीप नाथ के साथ भी राजू का कालीवास गाँव में जमीन का विवाद चल रहा था। कहा जा रहा है कि दिलीप नाथ ने ही अपने गुर्गों के जरिए यह हत्या करवाई होगी। फिलहाल पुलिस ने हत्यारों का पता लगाने के लिए आसपास की दुकानों के सीसीटीवी वीडियो चेक किए हैं, जिसमें दो बदमाश भागते नजर आ रहे हैं। पुलिस को आशंका है कि इन्होंने ही राजू को गोली मारी है।

पुलिस को जानकारी मिली है कि बदमाश पैदल ही परमार के पास आए थे। दोनों ने उन्हें करीब से सिर में दो गोली मारी है। वारदात के दौरान वहाँ से एक बारात गुजर रही थी। इस शोरगुल का फायदा उठाते हुए आरोपितों ने वारदात को अंजाम दिया और वहाँ से भाग निकले। राजू परमार गोवंश बचाने के काम में काफी सक्रिय था। वह हिंदू संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप जाना जाता था। उनको अपने ऊपर पहले से ही फायरिंग होने की आशंका थी, इसलिए वह कुछ दिनों से अकेले घर से बाहर निकलने से परहेज कर रहे थे। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में उनकी उम्र 42 वर्ष बताई जा रही है।

कन्हैया लाल हत्याकांड

उल्लेखनीय है कि राजस्थान का उदयपुर कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के बाद से काफी चर्चा में रहा है। पिछले वर्ष जून में (28 जून 2022) उदयपुर में मोहम्मद गौस और रियाज ने टेलर कन्हैया लाल की दुकान पर आकर गला रेतकर उनकी हत्या कर दी थी। घटना के बाद दोनों हत्यारों ने हँसते हुए अपनी वीडियो जारी की थी और वो हथियार भी दिखाया, जिससे कन्हैया का गला रेता था।

26 पुलिस के जवान, 3 प्लान, फिर धराया 27 केसों वाला मोहम्मद ज़ाकिर सैय्यद… दबोचने में ऐसे काम आया एंबुलेंस, ईरानी महिलाओं ने जम कर की पत्थरबाजी

मुंबई पुलिस ने रविवार (5 फरवरी, 2023) को कल्याण इलाके से एक ईरानी चेन स्नैचर को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम मोहमद ज़ाकिर सैय्यद है जिसकी उम्र लगभग 27 साल है। ज़ाकिर को पकड़ने के लिए 26 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई थी। ज़ाकिर न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी अपराध कर रहा था। उस लूट, छिनैती, डकैती और चोरी सहित पर कुल 27 केस दर्ज हैं। ज़ाकिर को बचाने के लिए कुछ ईरानी महिलाओं ने पुलिस पर पथराव भी किया जिसमें लगभग आधे दर्जन जवान ,घायल हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ज़ाकिर को कल्याण इलाके के अम्बिवली से दबोचा गया है। इस क्षेत्र को ईरानी बस्ती नाम से भी जाना जाता है। पुलिस ने बताया कि उसे पकड़ने में काफी मशक्क्त करनी पड़ी। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई लेवल पर प्लान बनाए थे जिन्हे A, B और C का नाम दिया गया था। नदी के किनारे बसी इस बस्ती का रास्ता एक पुल से हो कर जाता है। पुल से वाहनों को आता देख ज़ाकिर सतर्क हो जाया करता था और भाग निकलता था। ज़ाकिर को शक न हो इसके लिए पुलिस ने सरकारी वाहनों के बजाए एम्बुलेंस और प्राइवेट वाहनों का इस्तेमाल किया।

मुखबिर ने पुलिस को सूचित किया था कि एक चाय की दुकान पर ज़ाकिर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच आता है। पुलिस की टीमें उसकी घेराबंदी में मछली बाजार, कोलीवाड़ा आदि इलाकों में सिविल ड्रेस में एम्बुलेंस और रिक्शों में बैठी थीं और ज़ाकिर का इंतज़ार कर रही थी। टीम में कुल 26 स्टाफ थे। आखिरकार सूचना सही साबित हुई और वांटेड ज़ाकिर सफ़ेद शर्ट में चाय की दुकान पर आया। पुलिस की एक टीम को अपनी तरफ बढ़ता देख उसे शक हुआ और वो भागना शुरू कर दिया।

कुछ ही देर बाद आस-पास के लोग भी ज़ाकिर के समर्थन में एकजुट होने लगे। इस बीच पुलिस ने एम्बुलेंस आगे कर के ज़ाकिर को रोक कर उसे अंदर बिठा लिया। स्थानीय लोगों ने पुलिस के वाहन को घेर लिया और उस पर पत्थरबाजी करने लगे। इस भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। जब ज़ाकिर सैय्यद को एक एम्बुलेंस में पुलिस बिठा कर ले जा रही थी तब लगभग 800 मीटर तक उसका पीछा किया गया। इस एम्बुलेंस के ड्राइवर को भी बाहर खींच लिया गया और स्थानीय ईरानी महिलाओं ने उसके साथ मारपीट की।

हालाँकि, बाद में अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स ने पहुँच कर हंगामा कर रहीं महिलाओं और ज़ाकिर समर्थकों को हटाया। उधर दूसरी एम्बुलेंस में ज़ाकिर को गिरफ्तार कर के थाने ले जाया गया।

जो आपने देखा, वो तो दूसरा हिस्सा था… प्रीक्वल होगी ‘कांतारा’ सीरीज की अगली फिल्म, ऋषभ शेट्टी ने किया ऐलान: रहस्यों पर रिसर्च में लगी है टीम

दक्षिण भारतीय फिल्मों के दर्शकों के लिए एक अच्छी खबर है। सितंबर 2022 में आई कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ के लेखक-निर्देशक-मुख्य अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने इसके प्रीक्वल का ऐलान किया है। इसका मतलब है कि 2024 में रिलीज होने वाला ‘कांतारा’ के दूसरे भाग में असल में इससे पहले की कहानी दिखाई जाएगी। ‘कांतारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर 100 दिन पूरे किए हैं। इसी अवसर पर ऋषभ शेट्टी ने इसके प्रीक्वल की घोषणा की।

बता दें कि ‘कांतारा’ ने दुनिया भर में 100 करोड़ रुपए से भी अधिक का कलेक्शन किया है। अब उन्होंने खुलासा किया है कि ये तो असल में कहानी का दूसरा हिस्सा था और पहला हिस्सा तो अब दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘कांतारा’ के कई रहस्य सामने आने बाकी हैं, ऐसे में इसकी शूटिंग के दौरान ही उन्हें प्रीक्वल का आईडिया आ गया था। हालाँकि, इस मामले में और विवरण जुटाए जा रहे हैं और आधा काम ही हो पाया है।

उन्होंने जानकारी दी कि ‘कांतारा’ के प्रीक्वल को लेकर रिसर्च अभी शुरुआती चरण में ही है और इसीलिए इस संबंध में अधिक जानकारी देना संभव नहीं है। इस फिल्म का निर्माण भी ‘Homable Films’ के बैनर तले ही होगा, जिसने ‘KGF 2’ और ‘कांतारा’ का निर्माण किया था। ये प्रोडक्शन हाउस प्रभास की ‘सालार’ का निर्माण भी कर रहा है। अगले कुछ वर्षों में कंपनी हजारों करोड़ रुपयों के कई फिल्मों का निर्माण करने वाली है।

‘कांतारा 2’ का बजट भी ‘कांतारा’ से ज़्यादा होगा, जो मात्र 16 करोड़ रुपए में बन गई थी। साथ ही फिल्म का प्रीक्वल और भव्य भी होने वाला है। ‘कांतारा’ के बारे में बता दें कि ‘KGF 2’ के बाद सबसे ज्यादा कमाई करने वाली कन्नड़ फिल्म है। ‘कांतारा’ में ‘शिवा’ के रहस्यमयी पिता के बारे में ज्यादा नहीं बताया गया था, कि उनकी कहानी क्या थी। इसीलिए, अगले हिस्से में इस फिल्म के कई किरदारों की पिछली कहानी दिखाई जाएगी।