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बेड पर लेटे TMC विधायक, पैर दबा रही महिला पंचायत सदस्य: फोटो वायरल, बोले ममता बनर्जी के MLA- सर्जरी हुई है, बहुत दर्द हो रहा था

पश्चिम बंगाल के सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता भ्रष्टाचार में ही नहीं, भोग-विलास में भी आकंठ डूबे हुए हैं। टीएममसी के नेता कभी कार्यकर्ता के यहाँ खाने का नाटक करते हुए फोटो खिंचवाकर उठ जाते हैं तो कोई शिकायत करने आए लोगों को थप्पड़ से पिटवाकर कर चर्चा में रहता है।

अब एक विधायक महिला पंचायत सदस्य से पैर दबवाते हुए चर्चा में हैं। पैर दबवाने का इनका यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। ‘दीदी का सुरक्षा कवच’ कार्यक्रम के दौरान विधायक असित मजूमदार रूमा पाल से पैर दबवाते दिखे। रूमा देवानंदपुर ग्राम पंचायत की पूर्व मुखिया रही हैं और वर्तमान में चुंचुड़ मगरा पंचायत समिति की सदस्य हैं।

विधायक द्वारा एक महिला कार्यकर्ता से पैर दबवाने का फोटो शेयर होने के बाद तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि रूमा पाल ने अपने फेसबुक पेज पर इस तस्वीर को पोस्ट की थी। इस तस्वीर को लेकर राज्य की विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सवाल उठाया है। यह मामला हुगली का बताया जा रहा है।

बीजेपी के हुगली जिला सचिव सुरेश सौर ने वायरल तस्वीर पर कहा कि तृणमूल विधायक असित चारपाई पर लेटे और रूमा उसका पैर दबा रही है। तस्वीर से साफ है कि तृणमूल विधायक पार्टी की महिला नेता के साथ गुलाम जैसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाद में चाहे कोई कैसी भी सफाई दे।, जो लोगों को देखना था वो दिख रहा है।

तरह-तरह की अटकलों के बीच विधायक मजूमदार ने सफाई दी है। मजूमदार ने कहा कि हाल ही में उनके पैरों का ऑपरेशन हुआ है और उनमें टाँके लगे हैं। उन्होंने कहा कि जब वे कार्यक्रम से लौट रहे थे तो उनके पैर में बहुत दर्द हो रहा था। तब उन्होंने रूमा से पैर दबाने का आग्रह किया था।

हुगली जिले के चुंचुड़ा विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी विधायक असित मजूमदार ने कहा, “रूमा ने पार्टी कार्यकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटी या बहन के रूप में मेरे पैर दबाए।” उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि लोग इसे गलत नजरिए से लेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के अनपढ़ लोग इस तरह की बेकार बयानबाजी करेंगे।

वहीं इस घटना पर पंचायत सदस्य रूमा पाल ने कहा, “विधायक असित मजूमदार मुझसे बहुत बड़े हैं। जब उन्होंने कहा तो मैंने बेटी के रूप में उनके पैर दबाए।” रूमा पाल ने कहा कि ‘दीदी का सुरक्षा कवच’ कार्यक्रम से आते हुए समय उनके पैर में तेज दर्द हो गया था।

वे आज नहीं हैं… क्योंकि वे हिंदू थे: जानिए हत्या के सालभर बाद किस हाल में है किशन भरवाड का परिवार, इस्लामी कट्टरंपथियों ने मार डाला था

गुजरात में एक साल पहले (25 जनवरी 2022) कट्टरपंथी मुस्लिमों ने किशन भरवाड (Kishan Bharwad) को केवल हिंदू होने के कारण मार डाला था। किशन अहमदाबाद के धंधुका के रहने वाले थे। उनकी हत्या बाइक सवार दो हमलावरों ने उस वक्त की, जब वह अपने घर जा रहे थे। उन्होंने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर पैगंबर मुहम्मद से संबंधित एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसके बाद से कट्टरपंथी मुस्लिम उनके खिलाफ थे। कट्टरपंथियों ने उन पर ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगाया था।

किशन भरवाड हत्या मामले में अब तक देश भर से आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें छह मौलाना शामिल हैं। कई एजेंसियाँ इस मामले की जाँच कर रही हैं। जाँच में पाकिस्तान से संबंध भी सामने आया है। गिरफ्तार होने वालों में अहमदाबाद के जमालपुर का मौलाना मोहम्मद अयूब जवरावाला और दिल्ली का मौलाना कमर गनी उस्मान भी शामिल है। जाँच के दौरान खुलासा हुआ कि किशन की हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। इस घटना को एक साल होने पर ऑपइंडिया ने मामले की वर्तमान स्थिति, किशन के परिवार और धंधुका का हाल जानने का प्रयास किया।

किशन भरवाड का परिवार

जब किशन की हत्या हुई थी, तब उनकी बेटी महज 23 दिन की थी। ऑपइंडिया ने धंधुका में रहने वाले उनके परिजनों से संपर्क किया। किशन के परिवार में उसके माता-पिता, पत्नी, बेटी, दो भाई और एक बहन है। बेटी अब एक साल की हो गई है। किशन की हत्या के सदमे से परिवार अभी पूरी तरह से उबर नहीं पाया है। इस मामले पर बात करते हुए उनके परिवार वालों की आँखें भर आईं। आज भी परिवार के सभी सदस्य अपने लाडले किशन को बहुत याद करते हैं।

शिवभाई भरवाड ने ऑपइंडिया से बातचीत में बेटे किशन को याद करते हुए बताया कि वह हिंदुत्व विचारधारा वाले लोकप्रिय युवाओं में से एक था। उन्हें नहीं पता था कि उनके बेटे पर ऐसा हमला भी हो सकता था। उन्हें इस बात का भी अंदाजा नहीं था कि जिहादी मानसिकता के लोग उनके बेटे की तलाश कर रहे हैं। जब किशन के पिता को घटना की जानकारी हुई तो उन्हें इस बात पर विश्वास ही नहीं हुआ। शिवभाई ने कहा कि किशन धार्मिक प्रकृति का था और अपनी हिंदुत्व विचारधारा के लिए जाना जाता था। शायद उसकी विचारधारा जिहादियों की आँखों में खटक रही थी।

हिंदू संगठनों ने की मदद

शिवभाई ने बताया कि जब यह खबर आई कि किशन की इस्लामवादियों ने हत्या कर दी है, तो गुजरात भर के कई छोटे और बड़े हिंदू संगठन उनके समर्थन में आए। विभिन्न संस्थाओं के कई पदाधिकारी उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने भी पहुँचे। कानूनी लड़ाई के पहले दिन से ही इन लोगों ने बहुत मदद की।

गुजरात सरकार साथ रही

किशन के पिता ने बताया कि घटना के दिन से ही गुजरात सरकार और राज्य की पुलिस ने पर्याप्त सहयोग दिया। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने व्यक्तिगत रूप से परिवार से मुलाकात की। भरोसा दिलाया कि सभी आरोपितों को पकड़कर उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।

गौरतलब है कि घटना वाले दिन पुलिस तुरंत हरकत में आ गई थी। कुछ ही घंटों में गुजरात के कोने-कोने से आरोपितों की ढूँढकर गिरफ्तार किया गया। किशन के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने राज्य सरकार और पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया।

किशन की हत्या के बाद धंधुका के हालात

शिवभाई ने हमें भरतभाई परमार, एक करीबी पारिवारिक रिश्तेदार और एक सामाजिक नेता से भी संपर्क कराया। उन्होंने ऑपइंडिया से धंधुका के हालात के बारे में विस्तार से बात की। ऑपइंडिया से बात करते हुए भरतभाई ने कहा कि धंधुका और उसके आसपास का इलाका हमेशा से संवेदनशील रहा है। छोटी-बड़ी धार्मिक झड़पें, वाद-विवाद और संघर्ष यहाँ अक्सर होते रहे हैं। इलाके के मुस्लिमों ने हमेशा अपना वर्चस्व साबित करने और बढ़ाने की कोशिश की है। भरतभाई ने यह भी बताया कि जब किशन की हत्या हुई तो इलाके के लोगों को अहसास हुआ कि इस्लामवादी और कट्टरपंथी किसी भी छोटी सी घटना या बातचीत को नहीं भूलते हैं। उसे सालों तक याद रखते हैं। वे अपना समय साजिश रचने और हमला करने में लगाते हैं।

अब हिंदू अधिक सतर्क

भरतभाई ने कहा कि घटना के तुरंत बाद इलाके के लोगों में हिंदुत्व फिर से जाग उठा। किशन की निर्मम हत्या से हर समुदाय के लोगों में आक्रोश है। उन्होंने सर्वसम्मति से इसे एक हिंदू युवक पर हमला माना और उसके लिए न्याय की माँग करने के लिए एक साथ आगे आए। हत्या के बाद से क्षेत्र में कोई अन्य घटना नहीं हुई है, लेकिन हिंदू अधिक जागरूक और सतर्क हो गए हैं।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम

21 जनवरी, 2023 को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, आस्था फाउंडेशन, युवा ब्लड डूनेट ग्रुप धंधुका, हिंदू धर्म सेना, भगवा सेना, करणी सेना, कई अन्य हिंदू धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने किशन भारवाड़ की पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री महेंद्र मुंजपारा, गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी, धंधुका विधायक कालूभाई डाभी, गुजरात भाजपा के महासचिव प्रदीप सिंह वाघेला और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे।

मामले का कानूनी पहलू

ऑपइंडिया ने कानूनी रूप से मामले की वर्तमान स्थिति और अभियुक्तों की वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी जुटाई। हमारी जाँच के अनुसार, मामला अभी भी विचाराधीन है। सभी आरोपित फिलहाल जेल में हैं। निचली अदालत और गुजरात हाई कोर्ट ने आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उनके अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की है, जिस पर फैसला आना बाकी है। आरोपितों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। ऐसे में जमानत मिलने की संभावना न के बराबर है। किशन भारवाड का परिवार अब तक की कार्रवाई से संतुष्ट है।

जिहादी हमले को स्थानीय झड़प का रूप देने की साजिशें

किशन भारवाड पर हमला एक जिहादी-आतंकवादी हमला था। हालाँकि, इस्लामवादियों और उदारवादियों ने इसे स्थानीय संघर्ष के रूप में बताने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे अपने प्रयासों में विफल रहे। जब मामला ताजा था, उस वक्त हमने खुलासा किया था कि इस्लामवादी किशन के लिए न्याय की माँग कर रहे लोगों पर नजर रख रहे थे। बाद में उन्होंने मैसेज व फोन करके उन्हें धमकी दी और उन पर भी हमले की योजना बनाई थी।

28 जनवरी 2022 को हमने ऐसे ही एक ऑनलाइन इस्लामिक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। जिसमें हमने बताया था कि सिंडिकेट कैसे चल रहा था और एक-एक कर हिंदू युवाओं को निशाना बना रहा था। बाद में पुलिस जाँच में पता चला कि किशन की हत्या के पीछे मुख्य साजिश​कर्ता मौलाना उस्मानी ने मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी इस्लामिक रैकेट में शामिल करने के लिए एक सोशल मीडिया टीम बनाई थी।

यह रिपोर्ट मूल रूप से ऑपइंडिया गुजराती में प्रकाशित हुई है, इस लिंक पर क्लिक कर आप इसे पढ़ सकते हैं।

तिहाड़ से माल लेकर निकलती थी हिरोइनें, मिठाई के डब्बे में होता था कैश: जेल के आलीशान कमरे में रहता, खुद को मीडिया कंपनी का मालिक बताता था महाठग

ठग सुकेश चंद्रशेखर मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट से कई खुलासे हुए हैं। चार्जशीट के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर ने अपनी सहयोगी से पहली मुकालात में खुद को मीडिया कंपनी का मालिक बताया था। इतना ही नहीं मिलने आने वाले एक्ट्रेस को सुकेश मिठाई के डब्बों से कैश निकाल कर दिया करता था। ऑपइंडिया अपनी एक रिपोर्ट में पहले ही बता चुका है कि जेल में रहते हुए भी सुकेश एक लग्जरियस लाइफ़स्टाइल मेंटेन कर रहा था। इससे बढ़कर अब कई और चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आई हैं।

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में दी गई जानकारी के मुताबिक, तिहाड़ जेल में सुकेश का आलीशान कमरा था। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि पिंकी ईरानी और तीन अन्य अभिनेत्रियाँ जिन्होंने वर्ष 2018 में तिहाड़ की जेल नंबर 1 में सुकेश से मुलाकात की थी उन्होंने तकरीबन एक सी जानकारी दी है। उनके मुताबिक, कमरे में फ्रिज से लेकर रैक तक मिठाई के डिब्बे बिखरे रहते थे। सुकेश ने मिठाई के डिब्‍बों में रखे कैश से पिंकी और मिलने आई दूसरे अभिनेत्रियों को पेमेंट किया।

उन अभिनेत्रियों और पिंकी ने मिठाई के डिब्बे से नोटों के बंडल निकाले जाने की बात कबूली है। कमरे में डायसन का पंखा, एयर कंडीशनर, एलईडी टीवी, रोलेक्श की घड़ियाँ, महँगे बैग और एप्पल के कई प्रोडक्ट्स थे।

सुकेश की साथी पिंकी ईरानी को भी दिल्ली पुलिस ने आरोपित बनाया है। दिल्ली पुलिस पिंकी को गिरफ्तार कर चुकी है और उससे पूछताछ की जा रही है। पिंकी ने बताया कि सुकेश से उसकी मुलाकात यूनिटेक प्रमोटर संजय चंद्रा और उसके भाई अजय चंद्र ने कराई थी। जब अभिनेत्रियाँ जेल में सुकेश से मिलने आती थी तो चंद्र ब्रदर्स भी सुकेश के वार्ड में मौजूद होते थे। बता दें कि चंद्र बंधुओं को फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया है।

पिंकी ईरानी के मुताबिक, सुकेश ने उसे अपनी ‘न्यूज एक्सप्रेस’ नाम की कंपनी में जॉब ऑफर किया था। सुकेश ने खुद को मीडिया कंपनी का मालिक बताते हुए कहा था कि एक क्रिमिनल केस में वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। पिंकी के मुताबिक सुकेश ने उसे कई इंटरनैशनल नंबर्स से फोन भी किया। ईरानी ने अपने बयान में कहा कि मेरा काम सुकेश को मॉडल्‍स और अभिनेत्रियों से मिलवाना होता था। दोनों अगस्‍त 2021 तक एक दूसरे के संपर्क में थे।

जैकलीन से लेकर नोरा फतेही और तीसरी मॉडल तक से बातचीत की मध्यस्थता पिंकी ईरानी ही करती थी। पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट से पता चलता है कि सुकेश ने तिहाड़ जेल के अधिकारियों को रिश्वत खिलाई थी। जेल अधिकारी सुकेश के लिए जेल में जरूरी इंतजाम करते थे। बता दें चंद्रशेखर पर दिल्ली, मुंबई, कर्नाटक और अन्य राज्यों में कम से कम 32 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एके एंटनी के बेटे अनिल का कॉन्ग्रेस से इस्तीफा, बताया ट्वीट हटाने का था दबाव: BBC की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री का किया था विरोध

अनिल एंटनी (Anil Antony) ने बुधवार (25 जनवरी 2023) को कॉन्ग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। वे वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी (AK Antony) के बेटे हैं। उन्होंने बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री का विरोध किया था। कहा था कि इससे देश की संप्रभुता कमजोर होगी। इस्तीफा देते हुए बताया है कि उन पर यह ट्वीट हटाने का दबाव दिया जा रहा था।

अनिल एंटनी ने इस्तीफा देते हुए ट्वीट कर कहा है, “मैंने कॉन्ग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। मुझे मेरा ट्वीट हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन मैंने मना कर दिया। जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं, वहीं लोग मुझ पर ट्वीट हटाने का दबाव दे रहे थे। जो लोग प्रेम का प्रचार करने वाले थे, वहीं फेसबुक पर अब मेरे खिलाफ नफरत-अपशब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे ही पाखंड कहते हैं। जिंदगी चलती रहती है।” अनिल ने इसके साथ ही अपना इस्तीफा भी शेयर किया है ।

उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा है, “कल (24 जनवरी 2023) जो भी हुआ मुझे यह महसूस हो रहा है कि यह कॉन्ग्रेस पार्टी में मेरी सभी भूमिकाओं को छोड़ने का समय है। मेरा मानना है कि मेरे पास कुछ विशेष शक्ति है, जिस वजह से मुझे पार्टी के लिए योगदान देने का मौका मिला। लेकिन अब मुझे कॉन्ग्रेस नेतृत्व के करीबी लोगों से यह मालूम पड़ चुका है कि वे सिर्फ चाटुकारों और चमचों के साथ काम करना चाहते हैं, जो बिना सवाल के उनकी माँगों को पूरा करें।”

अनिल एंटनी ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा था, “मुझे लगता है की भाजपा से एक बड़े मतभेद के बावजूद, जो लोग ब्रिटिश सरकार प्रायोजित चैनल BBC और इराक युद्ध के पीछे दिमाग वाले व्यक्ति जैक स्ट्रा जैसे लोगों के विचारों को आगे रखते हैं, वह भारतीय संस्थानों के लिए खतरनाक मिसाल कायम कर रहे हैं। इससे हमारी संप्रभुता कमजोर होगी।” उल्लेखनीय है कि जैक स्ट्रॉ ब्रिटेन के पूर्व विदेश सचिव थे और माना जाता है कि इराक युद्ध के पीछे इन्हीं का दिमाग था।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने गुजरात दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।

बिहार में 2459 मदरसों की जाँच का हाई कोर्ट का आदेश, 609 मदरसों को सरकारी पैसे देने पर भी रोक: जाली दस्तावेजों से मान्यता लेने का मामला

उत्तर प्रदेश और असम के बाद अब बिहार में भी मदरसों की जाँच की जाएगी। हालाँकि, ये जाँच पटना हाईकोर्ट के आदेश पर की जाएगी। कोर्ट ने राज्य के 2459 मदरसों की मान्यता की जाँच करने के लिए कहा है। इसके साथ ही जाँच पूरी होने तक 609 मदरसों की अनुदान राशि को रोकने का आदेश दिया है। इनमें से ज्यादातर मदरसे फर्जी कागजात पर अनुदान ले रहे थे।

फर्जी कागजात के आधार पर मदरसों द्वारा अनुदान लेने को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को जाँचका आदेश दिया है। कोर्ट ने उन्हें सभी जिलाधिकारियों से बैठक करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने जाँच पूरी होने तक 609 मदरसों को दी जाने वाली अनुदान राशि पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही जाली कागजात के आधार पर मान्यता लेने वाले मदरसों के खिलाफ FIR के बाद हुई कार्रवाई को लेकर DGP से जानकारी माँगी है। कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी 2023 को करेगा।

मदरसों के फर्जीवाड़े की शिकायत सीतामढ़ी के रहने वाले मोहम्मद अलाउद्दीन बिस्मिल ने जनहित याचिका दायर कर की थी। याचिकाकर्ता के वकील राशिद इजहार ने कोर्ट को बताया कि माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक मोहम्मद तस्नीमुर रहमान ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीतामढ़ी जिले के 88 मदरसों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अनुदान लिया है।

उधर कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। अपने हलफनामे में उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के अन्य जिलों के 609 मदरसों ने सरकारी अनुदान प्राप्त किया है। उन सभी की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया है। 

‘पठान चलेगा, थिएटर जलेगा’: शाहरुख खान-दीपिका पादुकोण की फिल्म के कहीं जले पोस्टर, कहीं विरोध में हनुमान चालीसा पाठ

शाहरुख़ खान की विवादित फिल्म ‘पठान’ बुधवार (25 जनवरी, 2023) को देश-विदेश के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। इससे एक दिन पहले बिहार के भागलपुर में लोगों ने थिएटर के बाहर से ‘पठान’ के पोस्टर्स उतार कर फाड़ डाले और साथ ही उसे आग के हवाले कर दिया। भागलपुर में ‘बजरंग दल’ और ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)’ के कार्यकर्ताओं ने सिनेमाघर के बाहर जम कर विरोध प्रदर्शन भी किया।

साथ ही वहाँ पर ‘फिल्म चलेगा तो हॉल जलेगा’ के नारे भी गूँजे। भागलपुर के दीपप्रभा सिनेमा हॉल ने ‘पठान’ फिल्म लगाई हुई है। प्रदर्शनकारियों ने साफ़ कहा कि वो फिल्म को यहाँ चलने नहीं देंगे। पूरे देश भर में शाहरुख़ खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम की इस फिल्म के बॉयकॉट की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भगवा और सनातन धर्म को अपमानित करने वाली फिल्म को प्रदर्शित होने का अधिकार मिलना ही नहीं चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हिंदुत्व से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सनातन का विरोध करने वालों को सिर्फ भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थिएटर के मैनेजर ललन सिंह ने इस घटना का आरोप ‘असामाजिक तत्वों’ पर मढ़ा। स्थानीय पुलिस-प्रशासन में ज्ञापन देने के बाद उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया गया। असम के गुवाहाटी में भी फिल्म के पोस्टर्स जलाए गए थे, जिसके बाद SRK ने राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को रात के 2 बजे फोन कॉल कर के चिंता जाहिर की थी।

सलमान खान के कैमियो वाली ‘पठान’ को 8000 सिनेमा हॉल्स (5500 भारत में और विदेश में 2500) में रिलीज करने का दावा किया जा रहा है। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के विरोध प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित ‘रंगमहल टॉकीज’ ने पोस्टर उतरवा दिए हैं और कहा है कि वहाँ ‘पठान’ नहीं दिखाई जाएगी। ग्वालियर में थिएटरों के बाहर पुलिस तैनात करनी पड़ी। कर्नाटक में कलबुर्गी में ‘शेट्टी थिएटर’ के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुआ।

बेलगावी में ‘स्वरूप थिएटर’ के बाहर प्रदर्शन कर रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। इंदौर में हाथ में डंडे लेकर ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के कार्यकर्ताओं ने फिल्म की स्क्रीनिंग रुकवाने की कोशिश की। थिएटरों के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। मुंबई पुलिस ने फिल्म का विरोध करने वाले ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ताओं को नोटिस भेजी है। हालाँकि, कोलकाता जैसी जगहों पर शाहरुख़ खान के लिए दीवानगी भी देखने को मिल रही है।

काम के बहाने लड़की को बुलाया, बंधक बना मुस्लिम बनने का शाहनवाज ने डाला दबाव: इनकार करने पर जलाकर मारने की कोशिश

उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक नाबालिग लड़की को धर्मांतरण से इनकार करने पर जलाकर मारने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपित मोहम्मद शाहनवाज ने लड़की को नौकरी दिलाने का झाँसा देकर लखनऊ बुलाया। यहाँ एक मकान में उसे बंधक बनाकर इस्लाम कबूलने का दबाव डालने लगा। मना करने पर लड़की की बेरहमी से पिटाई की और फिर उसे जलाने की कोशिश की। लड़की का इलाज चल रहा है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 17 वर्षीया पीड़िता कानपुर के गुजैनी थानाक्षेत्र के अम्बेडकर नगर की रहने वाली है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। बुर्जुग दादी के साथ किराए के मकान में रहती है। वह कानपुर के यशोदा नगर स्थित एक ब्यूटी पॉर्लर में काम करती थी। लगभग 3 महीने पहले एक सहेली के माध्यम से वह मोहम्मद शाहनवाज से मिली। शाहनवाज ने उसे अच्छे ब्यूटी पार्लर में काम दिलाने का वादा कर लखनऊ बुलाया।

शाहनवाज की बातों में आकर लड़की कानपुर के पार्लर से 4 दिनों की छुट्टी लेकर लखनऊ चली गई। लखनऊ में शाहनवाज ने उसे आलमबाग में बुलाया और एक कमरे में रखा। यहाँ वह लगातार नशा करता रहा और पीड़िता को किसी से नहीं मिलवाया। जब लड़की ने घर वापस जाने की बात कही तब उसे बंधक बना लिया। पीड़िता का आरोप है कि बंधक बनाकर शाहनवाज धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था।

जब लड़की ने धर्मान्तरण से इनकार किया तो उसे बेल्ट और तार से पीटा गया। लड़की के अनुसार शाहनवाज ने उसे 25 दिनों तक बंधक बनाकर प्रताड़ित किया। शिकायत में बताया गया है कि 3 जनवरी 2023 को लड़की ने शाहनवाज की कैद से भागने की कोशिश की, लेकिन वो पकड़ी गई। इस बात से नाराज शाहनवाज ने पीड़िता पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगाने की कोशिश की। लड़की की चीख-पुकार सुन आसपड़ोस के लोग जमा हुए तो शाहनवाज ने आग बुझाई और पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती करवा दिया।

लड़की का आरोप है कि अस्पताल में भी शाहनवाज ने धमकी दी कि अगर किसी से कुछ कहा तो उसे जहर का इंजेक्शन लगवा देगा। लड़की ने खुद को धमकाने में शाहनवाज के घर वालों को भी शामिल बताया है। बताया जा रहा है कि एक दिन पीड़िता ने शाहनवाज के सोने के दौरान अपनी बुआ को फोन किया और उन्हें अस्पताल बुलाया। बुआ के पहुँचने के बाद उसने अपने साथ हुई घटनाओं के बारे में बताया और किसी अन्य अस्पताल में ले जाने को कहा।

लड़की की बुआ ने उसे परमपुरवा के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। यहाँ पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज किए हैं। लड़की ने पुलिस पर भी अपनी कार्रवाई में हीलाहवाली और शाहनवाज को बचाने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि लम्बे समय तक लखनऊ के जिला अस्पताल में उसकी देखरेख न होने की वजह से उसके शरीर में संक्रमण फ़ैल गया है। फिलहाल अभी तक इस मामले में शाहनवाज की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस मामले में कानपुर के गुजैनी थाने में FIR दर्ज कर जाँच की जा रही है।

टुकड़े-टुकड़े होने से पहले दोस्त से मिलकर आई थी श्रद्धा, 6629 पेज की चार्जशीट में आफताब का एक-एक गुनाह दर्ज: शव के मिल चुके हैं 13 टुकड़े, 182 गवाह

महाराष्ट्र की श्रद्धा वालकर मर्डर केस में दिल्ली पुलिस ने उसके लिव इन पार्टनर आफ़ताब पूनावाला के खिलाफ मंगलवार (24 जनवरी 2023) को साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। 6629 पन्नों की इस चार्जशीट में बताया गया है कि हत्या के दिन श्रद्धा अपने एक दोस्त से मिलने गुरुग्राम गई थी। इससे आफ़ताब काफी नाराज हुआ था। जिस दोस्त से श्रद्धा मिली थी उसे आफ़ताब बिलकुल भी पसंद नहीं करता था और यही नाराजगी श्रद्धा के कत्ल की वजह बनी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपनी चार्जशीट में पुलिस ने बताया है कि आफताब ने श्रद्धा की लाश काटने के लिए कई तरह के औजार प्रयोग किए। पुलिस ने शव के 13 टुकड़े बरामद कर पाई है। सबूत के तौर पर पुलिस ने CCTV फुटेज जैसे डिजिटल प्रमाण, आफ़ताब के फोन और लैपटॉप से मिली जानकारी के साथ मोबाइल फोन की लोकेशन और फॉरेंसिक सबूत आदि का जिक्र किया है। फ़िलहाल आफ़ताब पूनावाला की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ा कर 7 फरवरी 2023 तक कर दी गई है।

चार्जशीट पर सुनवाई अगले माह की 7 फरवरी हो तय हुई है। इस चार्जशीट में पुलिस ने 182 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट दाखिल होने के दौरान आफ़ताब भी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ा हुआ था। उसने कहा कि चार्जशीट की एक कॉपी उसके वकील को दे दी जाए। कुछ ही समय बाद आफ़ताब ने पलटी मारी और चार्जशीट अपने वकील को न देने की माँग करते हुए कहा कि वो वकील बदलने जा रहा है।

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के एक कॉल सेंटर में आफ़ताब से मिली श्रद्धा ने घरवालों की मर्जी के खिलाफ आफ़ताब के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी थी। बाद में दोनों एक साथ दिल्ली आ गए, जहाँ आफ़ताब आए दिन श्रद्धा की पिटाई करने लगा। आखिरकार 18 मई 2022 को आफताब पूनावाला ने दिल्ली के छतरपुर इलाके में श्रद्धा वालकर की गला दबाकर हत्या कर दी और लाश को 35 टुकड़ों में काटकर जंगल में फेंक दिया।

श्रद्धा की हत्या के बाद भी आफताब उसका सोशल मीडिया चलाता रहा। आखिरकार दिल्ली पुलिस ने 8 नवम्बर 2022 को श्रद्धा के 59 वर्षीय पिता मदन वालकर की शिकायत पर 12 नवंबर 2022 को आफ़ताब को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जंगलों से श्रद्धा के शव के कुछ टुकड़े बरामद किए। वहीं, आफ़ताब के फ्लैट से हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद किए गए। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि हत्या के बाद आफ़ताब की लाश के कटे हिस्सों के साथ कई दिन रहा। इस दौरान उसने एक नई गर्लफ्रेंड भी बना ली थी, जो मनोवैज्ञानिक है।

पुलिस ने आफ़ताब का लम्बे समय तक रिमांड लिया और इस दौरान उसका नार्को और पॉलिग्राफी टेस्ट भी करवाया। आरोप यह भी है कि आफताब जाँच को अंतिम समय तक भटकाने की कोशिश करता रहा। पुलिस आफ़ताब को जल्द सजा दिलाने के लिए कोर्ट में स्पीडी ट्रायल का प्रयास कर रही है।

जहाँ मिलती पादरी बनने की ट्रेनिंग, वहाँ समलैंगिक क्लब; दिखाए जाते अश्लील वीडियो: मरने के बाद पोप बेनेडिक्ट की किताब से खुलासा

पोप बेनेडिक्ट 16वें (Pope Benedict XVI) निधन के बाद एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं। दरअसल मरणोपरांत उनकी एक किताब प्रकाशित हुई है। किताब में उन्होंने पोप फ्रांसिस के अंतर्गत चलने वाले कैथोलिक चर्च में अनैतिक काम को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

पोप बेनेडिक्ट ने इस किताब को लेकर पहले ही निर्देश दिए थे कि इसे उनके मरणोपरांत ही प्रकाशित किया जाए। उनका दावा है कि पोप फ्रांसिस के कार्यकाल में पादरी संबंधी गठन (Priestly Formation) में जबरदस्त पतन हुआ है। उनका दावा है कि सेमिनरी, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका में चलाए जा रहे सेमिनरियों में खुलेआम समलैंगिक क्लब संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने अपनी किताब में आगे दावा किया, “विभिन्न सेमिनरियों में समलैंगिक क्लबों का गठन किया गया था जो खुले तौर पर काम करते हैं और इन सब कार्यों की वजह से सेमिनरी का पूरा माहौल को बदल गया है।” दिवंगत पोप ने अपनी किताब ‘ईसाई धर्म क्या है (What Christianity Is)’ में आगे दावा किया है कि एक बिशप ने सेमिनरी में अश्लील फिल्में दिखाने की अनुमति दी थी। किताब में वह वह दक्षिणी जर्मनी के एक सेमिनरी के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि इस सेमिनरी में पादरी और आम छात्र एक साथ रहते थे और पत्नियों, बच्चों और कुछ मामलों में गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर खाना खाते थे।

उल्लेखनीय है कि पोप बेनेडिक्ट का 31 दिसंबर, 2022 को 95 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया था। पोप बेनेडिक्ट जर्मनी के रहने वाले थे। उन्होंने 11 फरवरी 2013 को दुनिया को यह कहकर चौंका दिया था कि वह अब कैथोलिक चर्च का नेतृत्व नहीं कर पाएंगे। 600 वर्षों के इतिहास में ऐसा करने वाले पहले ईसाई धर्मगुरु थे। बहरहाल यह पहली बार नहीं है जब चर्च और इससे जुड़ी संस्थाओं में अनैतिक कामों को लेकर सवाल उठे हैं। 

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के एक चर्च में सेक्स पार्टी का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद पोप ने जाँच के आदेश दिए हैं। सेक्स पार्टी पादरी माइकल मैककॉय ने लॉकडाउन के दौरान आयोजित की थी। सेक्स पार्टी का आरोप जिस पादरी पर लगा है, उसने साल 2021 में आत्महत्या कर ली थी। मामले की जाँच लीवरपूल के आर्कबिशप को सौंपी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सेक्स पार्टी का खुलासा पूर्व पादरी रॉबर्ट बयर्ने के इस्‍तीफे की जाँच के दौरान हुआ है। दिसंबर 2020 में मैककॉय ने चर्च के अंदर बने अपने घर में कुछ ईसाइयों को कथित तौर पर सेक्‍स पार्टी के लिए तैयार किया। कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लंदन में लॉकडाउन लगा हुआ था। ऐसे में चर्च खाली पड़ा था। मौके का फायदा उठाकर मैककॉय ने यह पार्टी आयोजित की थी।

सरकारी नौकरी में होना था परमानेंट इसलिए 5 महीने की बेटी को नहर में फेंक ​मार डाला: राजस्थान में पति-पत्नी गिरफ्तार

राजस्थान के बीकानेर में 5 महीने की एक बच्ची मार डाली गई, क्योंकि वह अपने पिता के सरकारी नौकरी के परमानेंट होने की राह का कथित रोड़ा थी। बच्ची को नहर में फेंकने के आरोप में पुलिस ने उसके माँ-बाप को गिरफ्तार किया है। घटना रविवार (22 जनवरी 2023) की है। अंशु उर्फ़ अंशिका को नहर में फेंकने के बाद आरोपित उसके दुर्घटनावश नहर में गिरने की कहानी गढ़ रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बीकानेर के छत्तरगढ़ इलाके का है। यहाँ का रहने वाला झंवरलाल चांडासर गाँव के स्कूल में संविदाकर्मी के तौर पर विद्यालय सहायक पद पर तैनात है। उसे जल्द ही अपनी नौकरी के परमानेंट होने की उम्मीद थी। लेकिन स्थायी नौकरी के लिए 2 से अधिक बच्चे न होने की शर्त थी। झंवरलाल ने विभाग में जमा किए गए अपने शपथ पत्र में सिर्फ सिर्फ 2 संतान होने की जानकारी दी थी। बताया जा रहा है कि इसी वजह से उसने अपनी ही एक बेटी को मार डालने की साजिश रची।

जानकारी के मुताबिक इस साजिश में झंवरलाल ने अपनी पत्नी को भी शामिल कर लिया था। 2 दिन पहले भंवरलाल अपने साले के घर छतरगढ़ गया। वहाँ से पति-पत्नी रविवार शाम 5 बजे वापस अपने घर दियातरा के लिए निकले। अंशिका सहित एक और बच्चा उनके साथ था। तय प्लान के मुताबिक दोनों इंदिरा गाँधी नहर प्रोजेक्ट (IGNP) के रास्ते से जा रहे थे। यहाँ एक जगह रुक कर झंवरलाल ने बेटी अंशिका को नहर में फेंक दिया। आसपास मौजूद कुछ लोगों ने घटना को देखा और शोर मचाया। इसे देख कर पति-पत्नी भाग निकले।

नहर के पास खड़े लोगों ने अंशिका को निकाला, तब तक उसकी जान निकल चुकी थी। लोगों ने पुलिस को सूचना दी तो इलाके की नाकाबंदी कर दी गई। इस दौरान खाजूवाला इलाके में चेकिंग कर रहे एक पुलिसकर्मी ने दंपती को रोक कर पूछताछ की। झंवरलाल ने पुलिस से अपने साले के घर से वापस लौटने की बात कही। हालाँकि पुलिस के ट्रेनी सब इंस्पेक्टर मुकेश कुमार ने पति-पत्नी सहित उनकी बाइक और आधार कार्ड की भी फोटो खींच ली। बाद में उन्हें जाने दिया गया।

जब अंशिका की मौत के मामले ने तूल पकड़ा तब जाँच कर रही पुलिस द्वारा खींची गई ये तस्वीरें काम आईं। आधार कार्ड और बाइक नंबर को ट्रेस करते हुए पुलिस आख़िरकार झंवरलाल तक पहुँच गई। पहले तो झंवरलाल और उनकी पत्नी ने अपनी बेटी के दुर्घटनावश नहर में गिरने की जानकारी दी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने गुनाह को कबूल कर लिया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया है।