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‘मेरे हिसाब से बचाव कार्य नहीं किया गया’: बिल्डिंग हादसे में अम्मी और बीवी की मौत पर भड़के सपा प्रवक्ता हैदर अब्बास; नवाजिश, तारिक और फहद पर FIR

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow, Uttar Pradesh) में 24 जनवरी 2023 को हुए बिल्डिंग हादसे के मामले में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रवक्ता हैदर अब्बास की अम्मी बेगम हैदर और बीवी उजमा हैदर की मौत हो गई है। रेस्क्यू किए जाने के बाद से ही दोनों की हालत नाजुक चल रही थी।

हैदर अब्बास ने अपनी अम्मी और बीवी की मौत को प्रशासन द्वारा हत्या बताया है। इस दौरान अब्बास ने खुद से सवाल कर रहे पत्रकार को चुप रहने के लिए कहते हुए डाँट भी दिया। हैदर का कहना है कि प्रशासन ने उनके मुताबिक रेस्क्यू नहीं किया।

सपा प्रवक्ता ने राहत और बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों और जवानों को सिर्फ फोटो खिंचवाने वाला बताया। हैदर अब्बास के मुताबिक, बचाव करने आए कर्मियों के पास कोई भी टेक्निकल विशेषता नहीं थी। वहीं, पुलिस ने बुधवार (25 जनवरी 2023) को FIR दर्ज कर मोहम्मद तारिक, फहद याजदानी और नवाजिश शाहिद को नामजद आरोपित बनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस घटना में मारे गए हैदर अब्बास की अम्मी और बीवी की शवों का प्रशासन पोस्टमार्टम करवाना चाह रहा है। वहीं, हैदर अब्बास और उनके घर वाले पोस्टमार्टम का विरोध कर रहे हैं। इस बात को लेकर अस्पताल में दोनों पक्षों में बहस भी हुई।

3 आरोपितों पर नामजद FIR

हजरतगंज कोतवाली पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों के विरुद्ध नामजद FIR दर्ज की है। मामले में वादी खुद पुलिस बनी है। आरोपितों पर IPC की धारा 323, 304, 308, 420 और 120B के साथ दण्डविधि संशोधन अधिनियम 2013 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस ने अपनी FIR में किठौर से समाजवादी पार्टी के विधायक शाहिद मंजूर के बेटे नवाज़िश शाहिद, याजदानी बिल्डर्स के मालिक फहद याजदानी और एक अन्य व्यक्ति मोहम्मद तारिक को नामजद किया है। मोहम्मद तारिक इस बिल्डिंग में नवाजिश शाहिद के साथ हिस्सेदार बताए जा रहे हैं।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपितों ने अपने साथियों के साथ मिलकर घटिया सामान से इस बिल्डिंग बनाया था। इसके साथ ही ग्राउंड फ्लोर पर बड़ी-बड़ी ड्रिल मशीन से गड्ढे किए, जिनकी वजह से बिल्डिंग गिर गई। नवाजिश शाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी की तलाश की जा रही है।

3 सदस्यीय जाँच समिति गठित

हादसे की जाँच करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने 3 सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया है। जाँच समिति एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इस रिपोर्ट में हादसे के प्रत्येक जिम्मेदार की जवाबदेही तय करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के आदेश पर बनाई गई जाँच समिति लखनऊ की मंडलायुक्त रोशन जैकब की अगुवाई में बनाई गई है। समिति में संयुक्त पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया और PWD विभाग के चीफ इंजिनियर को भी शामिल किया गया है।

गिराई जाएँगी अवैध इमारतें

अलाया बिल्डिंग हादसे के बाद अब लखनऊ प्रशासन राजधानी की तमाम अवैध इमारतों को चिह्नित करने की कार्रवाई में जुट गया है। याजदान बिल्डर्स की कुंडली भी खँगाली जा रही है और उसके द्वारा किए गए अन्य निर्माणों की भी पहचान की जा रही है।

BCCI ने महिला IPL की बोली से कमाए ₹4770 करोड़, पुरुष IPL के पहले सीजन का रिकॉर्ड टूटा: अडानी ने अहमदाबाद के लिए लगाई सबसे ज्यादा बोली

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने महिला आईपीएल (Women’s IPL) के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसका नाम वुमेंस प्रीमियर लीग (Women’s Premier League) रखा गया है। बीसीसीआई ने इसके साथ ही महिला आईपीएल की 5 टीमों के लिए उनके मालिकों की घोषणा कर दी है। BCCI ने इस बोली से 4770 करोड़ रुपए कमाए हैं। नीलामी में अहमदाबाद फ्रैचाइजी के लिए अडानी स्पोर्ट्सलाइन (Adani Sportsline Pvt. Ltd) ने सबसे ज्यादा 1289 करोड़ रुपए की बोली लगाई है।

इसके अलावा मुंबई के लिए इंडिया विन स्पोर्ट्स (Indiawin Sports Pvt Ltd) ने 913 करोड़ रुपए की और बेंगलुरु के लिए रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स (Royal Challengers Sports PVT Ltd) 901 करोड़ रुपए की बाली लगाई है। दिल्ली के लिए जेएसडब्ल्यू जेएमआर क्रिकेट (JSW JM Cricket Pvt Ltd) ने 810 करोड़ रुपए की बोली लगाई है। वहीं लखनऊ के लिए सबसे कम 757 करोड़ रुपए की बोली  काप्री ग्लोबल होल्डिंग्स (Capri Global Holdings Pvt Ltd) ने लगाई है।

वहीं BCCI के सचिव जय शाह ने भी ट्वीट कर यह जानकारी दी और इसे महिला क्रिकेट के इतिहास में ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा, “क्रिकेट में आज एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि वुमेंस प्रीमियर लीग के उद्घाटन (WPI) के लिए लगाई गई बोली ने 2008 में पुरुषों के आईपीएल के उद्घाटन के लिए लगाई गई बोली के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। विजेताओं को बधाई। हमने कुल बोली में 4669.99 करोड़ रुपए प्राप्त किए हैं। यह महिला क्रिकेट में एक क्रांति की शुरुआत का प्रतीक है और यह आगे का मार्ग प्रशस्त करता है।”

उन्होंने आगे एक और ट्वीट कर कहा, “यह न केवल हमारी महिला क्रिकेटरों के लिए बल्कि पूरी खेल बिरादरी के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा का रास्ता है । WPL महिला क्रिकेट में आवश्यक सुधार लाएगा और एक इकोसिस्टम विकसित होगा जिससे प्रत्येक हितधारक को लाभान्वित होंगे।”

इसके अलावा जय शाह ने वायाकॉम 18 (Viacom 18) को भी महिला आईपीएल के मीडिया अधिकार जीतने पर बधाई दी।

‘अजहर भाई को कोई परेशान नहीं करेगा’: पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर की जुबान पर आया ‘मजहबी भाईचारा’, कहा- सचिन, सिद्धू जैसे क्रिकेटर थे टारगेट

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने अपने यूट्यूब चैनल पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन का एक इंटरव्यू लिया। चर्चा के दौरान बासित अली ने बताया कि कैसे पाकिस्तानी खिलाड़ी अजहरुद्दीन को छोड़कर बाकी भारतीय खिलाड़ियों पर छींटाकशी किया करते थे। बातचीत के बीच अजहरुद्दीन ने वह किस्सा भी सुनाया जब उन्होंने सामने से फोन कर यूनुस खान को बल्लेबाजी के टिप्स दिए थे और इसके बाद यूनुस ने इंगलैंड के खिलाफ मैच में दोहरा शतक जमाया था।

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने 19 जनवरी 2023 को अपने यूट्यूब चैनल पर बतौर गेस्ट भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बल्लेबाज मोहम्मद अजहरुद्दीन को बुलाया था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित यह चर्चा लगभग 35 मिनट तक चली। इस लाइव बातचीत के दौरान बासित अली ने बताया कि भारत के हर मैच से पहले उन्हें भारतीय खिलाड़ियों को परेशान करने की जिम्मेदारी दी जाती थी।

बासित ने कहा, “इंडिया के मैच से पहले जब हमारी मीटिंग होती थी तो मुझे यह जिम्मेदारी दी जाती थी कि सचिन, जडेजा, सिद्धू, कांबली जैसे खिलाड़ियों को डिस्टर्ब करना है। लेकिन जहाँ पर अजहर भाई (मोहम्मद अजहरुद्दीन) का नाम आता था तो पूरी टीम बोलती थी कि अजहर भाई को कोई परेशान नहीं करेगा।” पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कहा कि हमारे ड्रेसिंग रूम में अजहर भाई के लिए जो इज्जत थी उसे बयाँ करने के लिए मेरे पास अल्फाज़ (शब्द) नहीं हैं।

बासित अली आगे कहते हैं कि वसीम अकरम, सलीम मलिक, राशिद लतीफ, इंजमाम-उल-हक और वकार यूनुस जैसे खिलाड़ियों ने भी कभी अजहर भाई को स्लेज नहीं किया। उन्होंने कहा मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के किसी भी खिलाड़ी ने कभी अजहर भाई का अपमान किया है। यूट्यूब वीडियो में यह बातचीत 7 मिनट 25 सेकेंड से सुनी जा सकती है।

इसके बाद पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन से यूनुस खान को दिए टिप्स के बारे में पूछा गया। अजहर ने बताया कि जब उनके (पाकिस्तान) के मैच टीवी पर आते हैं तो मौका मिलने के बाद थोड़ा-थोड़ा देखा करता था। उन्होंने कहा, “मुझे यह देखकर अच्छा नहीं लग रहा था कि 10 हजार रन बनाने के बाद भी यूनुस इतना स्ट्रगल कर रहे हैं। मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैंने यूनुस को फोन लगाया और उन्हें क्रीज के अंदर रहकर बैटिंग करने की सलाह दी।”

बता दें कि यह मैच 2016 में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच इंग्लैंड में ही खेला जा रहा था। इस मैच में यूनुस खान ने 218 रन बनाए थे। मैच के बाद यूनुस ने इस पारी का श्रेय भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन को दिया था। मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान यूनुस खान ने बताया था कि मैच से पहले उनके पास भारत से अजहरुद्दीन का कॉल आया था। अजहरुद्दीन ने उन्हें क्रीज में रुककर खेलने की सलाह दी थी।

गणतंत्र दिवस 2023: पहली बार कर्तव्यपथ पर सबसे आगे VVIP की जगह बैठेंगे मजदूर और रेहड़ी-पटरी वाले श्रमयोगी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल होंगे मुख्य अतिथि

इस बार दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day 2023) पर होने वाली परेड को देखने के लिए कर्तव्यपथ पर सबसे आगे वीवीआईपी की जगह श्रमिक, रिक्शे वाले, रेहड़ी-पटरी वाले और मजदूर बैठे दिखाई देंगे। इन श्रमयोगी में वो लोग और उनके परिजन भी शामिल हैं, जिन्होंने सेंट्रल विस्टा बनाने में मदद की है। ऐसा भारत के इतिहास में पहली बार होने जा रहा है।

इस साल परेड में सीटों की संख्या 45,000 से घटाकर 32,000 कर दी गई है। बीटिंग रिट्रीट में 10 फीसदी सीटें ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध होंगी। इसके अलावा पहली बार ट्रैफिक सिगनल पर भीख माँगने वाले 11-18 आयु वर्ग के स्लम बच्चे इस साल गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेंगे। वे ‘भिक्षा से शिक्षा की ओर’ लिखे गए नारों वाली तख्तियाँ लेकर चलेंगे।

प्रोजेक्ट स्माइल के प्रताप विक्रम सिंह ने कहा, “ये बच्चे कॉन्वेंट और सरकारी स्कूलों के बच्चों की तरह ही गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल कर रहे हैं। डेढ़ साल पहले ये बच्चे किसी से बात नहीं करना चाहते थे। हम पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं थे। हमें उनका भरोसा जीतने में काफी समय लगा। इसके लिए हमने उन्हें खिलौने दिए, उनके लिए स्मार्ट क्लास शुरू की और उन्हें एक्सपोजर दिया।”

24 से 26 जनवरी तक तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुँचे मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्तह अल-सिसी (Abdel Fattah El-Sisi) 74वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इसके अतिरिक्त मिस्र का 120 सदस्यीय मार्चिंग दल कर्तव्यपथ पर परेड का हिस्सा होगा।

गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। नई दिल्ली और उसके आसपास 6,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने कहा कि पुलिस ने लगभग समारोह में 70,000 लोगों के लिए व्यवस्था की है।

समारोह स्थल पर कुल 6,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया पर भी लोगों को जागरूक कर रही है और लोगों को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, गतिविधि और वस्तु के बारे में सतर्क होने की सलाह दे रही है।

बता दें कि सितंबर 2022 में दिल्ली के राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्यपथ’ कर दिया गया था। अंग्रेजी हुकूमत के समय राजपथ को ‘Kings Way‘ कहा जाता था। किंग्सवे, अंग्रेज राजा जॉर्ज पंचम के नाम पर रखा गया था। राजपथ का नाम बदले जाने के बाद कर्तव्यपथ पर यह पहली गणतंत्र दिवस परेड होने जा रही है।

Hindenburg की जिस रिपोर्ट से शेयर टूटे, अडानी ग्रुप ने उसे बताया पक्षपाती: कहा- FPO के दौरान जानबूझकर लाई गई

अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक फाइनेशियल रिसर्च फर्म हिंडेनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने अडानी ग्रुप (Adani Group) में एकाउंटिंग और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता जताते हुए मंगलवार (24 जनवरी 2023) को एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट को अडानी समूह ने दुर्भावनापूर्ण और पक्षपाती बताया है।

रिपोर्ट के सामने आने के बाद अडानी ग्रुप के लिस्टेड शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है। वहीं, अडानी ग्रुप ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाया है। इसके कारण अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी (Gautam adani) के नेटवर्थ में भी भारी कमी आई है।

हिंडेनबर्ग में अपने रिपोर्ट में कहा है कि अडानी एंटरप्राइजेज में पिछले 8 वर्षों में पाँच चीफ फाइनैंशियल ऑफिसर (CFO) आए। अकाउंटिंग से जुड़े मुद्दों के लिहाज से यह एक चिंता की एक अहम बात है। रिसर्च में ग्रुप की कंपनियों के शेयर को 85 प्रतिशत ओवरवैल्यूड बताया गया है। इसके साथ ही इसके कर्ज को लेकर भी सवाल उठाया गया है।

Hindenberg Research की रिपोर्ट पर अडानी ग्रप ने प्रतिक्रिया दी है। अडानी समूह के मुख्य फाइनैंशियल ऑफिसर जुगेशिंदर सिंह ने अपने बयान में कहा कि रिपोर्ट में ही गई बातें सेलेक्टिव हैं और गलत जानकारी पेश की गई है। जुड़े तथ्यों के सत्यापन के लिए कंपनी से संपर्क किए बिना यह रिपोर्ट जारी की गई है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा, “रिपोर्ट के प्रकाशन का समय भारत में आने वाली अब तक की सबसे बड़ी एफपीओ, जो अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा लाई जा रही है, उसे नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य के लिए अदानी समूह की प्रतिष्ठा को कमजोर करने के इरादे को दर्शाता है।” अडानी ग्रुप ने कहा कि इन आरोपों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा परीक्षण के बाद पहले ही खारिज किया जा चुका है।

अपने बयान में कंपनी के सीएफओ ने कहा कि रिपोर्ट चुनिंदा निराधार एवं गलत सूचनाओं और बदनाम करने के लिए लगाए गए आरोपों का दुर्भावनापूर्ण संयोजन है। अडानी समूह अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना हमेशा सभी कानूनों के अनुपालन में आगे रहा है। इसके साथ ही वह कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्चतम मानकों को बनाए रखता है।

शेयरों में भारी गिरावट

हिंडेनबर्ग रिसर्च की यह रिपोर्ट अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अदानी एंटरप्राइजेज के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) से पहले आई है। FPO इश्यू 27 जनवरी 2023 (शुक्रवार) को खुलेगा। इसका प्राइस 3,112 से 3,276 रुपया प्रति शेयर तय किया गया है। इस FPO से 20,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा एफपीओ है।

इस रिपोर्ट के आने के अगले दिन यानी 25 जनवरी 2023 को कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 1.5 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अडानी द्वारा हाल ही में खरीदे गए अंबुजा सीमेंट का शेयर 9.6 प्रतिशत, अडानी पोर्ट्स के स्टॉक 7.2 प्रतिशत गिर गए। कंपनी के अन्य शेयर ACC, अडानी ट्रांसमिशन, अडानी पावर, एनडीटीवी के शेयर भी 5 फीसदी से अधिक गिर चुके हैं।

क्या है Hindenburg की रिसर्च रिपोर्ट में

उधर, हिंडेनबर्ग ने बुधवार (25 जनवरी 2023) को कहा कि वह यूएस ट्रेडेड बॉन्ड और नन-इंडियन ट्रेडेड डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए अडानी ग्रुप की कंपनियों में शॉर्ट पोजिशन रखेगी। अगर शॉर्ट पोजिशन को आसान भाषा में समझें तो इसे मंदड़ियों का खेल कहा जाता है। किसी को लगता है कि अगर कोई शेयर नीचे जाएगा तो वह उसे बेच देता है और जब कंपनी का शेयर नीचे जाता है तो उसे खरीद लेता है।

कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अडानी समूह ने मॉरीशस और कैरेबियन द्वीप समूह जैसे टैक्स हेवन में संस्थाओं का उपयोग किया है। यानी रिसर्च फर्म ने अडानी ग्रुप पर टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए।

फर्म ने अडानी ग्रुप की कंपनियों के वैल्युएशन में भी हेरफेर का आरोप लगाया है। उसने कहा कि अडानी ग्रुप की प्रमुख सात कंपनियों के शेयर 85 प्रतिशत तक ओवर वैल्यूड हैं। यानी इन कंपनियों के शेयर की वैल्यू जितनी होनी चाहिए, उससे 85 प्रतिशत है।

इतना ही नहीं, रिसर्च फर्म ने अडानी समूह की कंपनियों पर लोन को लेकर भी आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों ने लोन ले रखा है और इन शेयरों को गिरवी रखकर समूह की वित्तीय स्थिति को जोखिम में डाल दिया है।

रिसर्च फर्म का कहना है कि 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अडानी समूह का कुल सकल ऋण 40% बढ़कर 2.2 ट्रिलियन रुपए (2.2 लाख करोड़ रुपए) हो गया।Refinitiv डेटा से पता चलता है कि अदानी समूह की सात प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में ऋण इक्विटी से अधिक है। अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड पर ऋण उसकी इक्विटी से 2,000% अधिक है।

यहाँ तक 8 सालों में कंपनी ने 5 CFO बदल दिए। हिंडेनबर्ग का कहना है कि उसने इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए कंपनी के हजारों दस्तावेजों की गहन जाँच की है। इसके साथ ही उसने कंपनी के पूर्व वरिष्ठ कर्मचारियों का भी इंटरव्यू लिया है।

JNU में पत्रकार के साथ वामपंथी छात्रों ने की बदसलूकी, देखिए Video: लिंचिंग की भी कोशिश, ABVP अध्यक्ष का दावा

बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में वामपंथी छात्रों ने मंगलवार (24 जनवरी 2023) रात जमकर बवाल काटा। एबीवीपी के जेएनयू अध्यक्ष ने दावा किया है कि संगठन के एक कार्यकर्ता की लिंचिंग की भी कोशिश हुई थी। वहीं एक पत्रकार के साथ भी वामपंथी छात्रों की धक्का-मुक्की का वीडियो सामने आया है।

वामपंथी छात्रों ने जनम टीवी (Janam TV) के एक पत्रकार पर तब हमला किया, जब वह कैंपस में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के बारे में रिपोर्ट कर रहे थे। जिस पत्रकार के साथ मारपीट की गई, उनकी पहचान गौतम नारायणन के रूप में हुई है। वे मलयालम समाचार चैनल जनम टीवी में काम करते हैं।

घटना का वीडियो जनम टीवी ने ट्विटर पर शेयर किया है। वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, “पत्रकार और उनके साथ आए कैमरामैन पर जेएनयू कैंपस में वामपंथी जिहादियों ने हमला किया।”. जनम टीवी के अनुसार दोनों पर वामपंथी छात्रों ने उस समय हमला किया, जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रतिबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की अवैध स्क्रीनिंग के बारे में रिपोर्ट कर रहे थे।

वीडियो में रिपोर्टर को जेएनयू के एक छात्र द्वारा धक्का देते हुए देखा जा सकता है। बाद में वही छात्र रिपोर्टर को पीठ में भी मारता है। इस बीच, जब पत्रकार गौतम नारायणन कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की अवैध रूप से स्क्रीनिंग के बारे में कुछ सवाल पूछते हैं तो अन्य वामपंथी छात्र उनके साथ बहस करने लगते हैं। वामपंथी छात्रों ने पत्रकार और कैमरामैन पर हमला करने से पहले नारेबाजी भी की।

वहीं जेएनयू ABVP के अध्यक्ष रोहित ने कहा, “जेएनयू प्रशासन ने बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्कीनिंग नहीं करने को लेकर चेताया। उसके बाद छात्रों के एक समूह ने एबीवीपी के एक कार्यकर्ता की लिंंचिंग करने की कोशिश की। दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया से भी छात्र स्क्रीनिंग में हिस्सा लेने के लिए आए थे। हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस अराजक तत्वों की पहचान कर उचित कार्रवाई करेगी।”

उल्लेखनीय है कि जेएनयू छात्रसंघ कार्यालय में वामपंथी छात्र बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करना चाहते थे, जबकि प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। बाद में उन्होंने एबीवीपी पर पत्थरबाजी का आरोप लगाते हुए बवाल काटा था। इससे पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन और मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन ने इस ​प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी। इस स्क्रीनिंग में दोनों इस्लामी छात्र संगठनों के 50 से अधिक छात्र मौजूद थे। ABVP ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से इसकी शिकायत करते हुए आयोजन करने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। ABVP के अनुसार बिना अनुमति के यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर स्क्रीनिंग की गई थी।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

बागेश्वर धाम के महंत को नागपुर पुलिस की क्लीन चिट: अंधविश्वास की FIR कराने वाली संस्था को भेजा गया जवाब, बताया – वीडियो की बारीकी से हुई जाँच

महाराष्ट्र की नागपुर पुलिस ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को अपनी जाँच में क्लीन चिट दे दी है। शास्त्री पर यह FIR ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के श्याम मानव ने दर्ज करवाई थी। इस केस में श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर अंधविश्वास और जादू टोने का आरोप लगाया था। पुलिस ने ‘श्रीराम चरित्र चर्चा’ नाम के उस आयोजन के वीडियो निकाल कर जाँच की और बताया कि उसमें अंधविश्वास जैसा कुछ भी नहीं था। नागपुर पुलिस ने अपना जवाब श्याम मानव को भी भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने केवल अपने धर्म का प्रचार किया है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यक्रम के 7 और 8 जनवरी के दिव्य दरबार को हुए आयोजन के वीडियो की बारीकी से जाँच हुई है। कमिश्नर के अनुसार वीडियो देख कर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला है कि उस कार्यक्रम में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जिसे अंधविश्वास माना जाए।

क्या था पूरा मामला

गौरतलब है कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री जनवरी 2023 के पहले सप्ताह में नागपुर में ‘श्रीराम चरित्र चर्चा’ नाम से कार्यक्रम आयोजित किए थे। इस कार्यक्रम के दौरान ही ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ के अध्यक्ष और शिकायतकर्ता श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर अंधविश्वास और जादू-टोना फैलाने का आरोप लगा कर पुलिस में केस दर्ज करवाया था। तब श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री पर साल 2013 के महाराष्ट्र जादू-टोना विरोधी कानून और 1954 के ‘ड्रग्स एंड रेमेडीज एक्ट’ के उल्लंघन का आरोप लगाया था।

श्याम मानव ने धीरेन्द्र शास्त्री को चमत्कार कर के दिखाने पर 30 लाख रुपए इनाम देने की भी घोषणा की थी। हालाँकि, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी सफाई में इन आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को केवल सनातन धर्म का प्रचारक और ईश्वर का भक्त बताया था। तब से पुलिस मामले की जाँच कर रही थी।

JNU से निकलकर जामिया पहुँच गया BBC का जिन्न: प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का ऐलान, हंगामे के बाद CRPF-RAF की तैनाती

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री पर हंगामे के बाद चार छात्रों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। हंगामे की शुरुआत आज (25 जनवरी 2023) शाम 6 बजे एमसीआरसी लॉन में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के ऐलान के बाद हुआ। बताया जा रहा है कि इस बीच लेफ्ट, एनएसयूआई और ABVP के गुटों के बीच पथराव भी हुआ।

इससे पहले जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में मंगलवार 24 जनवरी 2023 की शाम से लेकर देर रात इस डॉक्यूमेंट्री को लेकर हंगामा देखने को मिला था। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में भी इस्लामी छात्र संगठन बिना अनुमित इसकी स्क्रीनिंग कर चुके हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जामिया यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीआरपीएफ, रेपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के जवानों को तैनात किया गया है। जामिया में BBC डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग से पहले लेफ्ट के नेता को हिरासत में लिया गया है। दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के बाहर से 4 छात्रों को हिरासत में लिया है। साथ ही यूनिवर्सिटी के बाहर किसी के रुकने और खड़े होने पर रोक लगा दी है।

वहीं, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री ‘इडिया: द मोदी क्वेश्चन’ को ऐसे समय में रिलीज किए जाने पर बुधवार (25 जनवरी 2023) को सवाल उठाया। उन्होंने पूछा है कि ‘इडिया: द मोदी क्वेश्चन’ को ऐसे समय में क्यों रिलीज किया गया, जब भारत ने जी20 की अध्यक्षता सँभाली है।

खान ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वह इस बात पर हैरान है कि लोग एक विदेशी डॉक्यूमेंट्री निर्माता, हमारे औपनिवेशिक शासकों की राय को देश की शीर्ष अदालत के फैसले से अधिक महत्व दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा, “इतने सारे न्यायिक फैसले, जिनमें इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी शामिल है, डॉक्यूमेंट्री बनाते समय इन सभी चीजों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।”

इससे पहले जेएनयू में BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर मंगलवार की रात जमकर बवाल हुआ। देर रात तक छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। कैंपस में दो छात्र गुटों के बीच पत्थरबाजी की खबर भी सामने आई। जेएनयू छात्र संघ ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर पथराव किया। वहीं एबीवीपी ने इसे नकार दिया। दरअसल, जेएनयू में छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने गुजरात दंगों पर विवादित डॉक्यूमेंट्री का पोस्टर शेयर करते हुए छात्रों से स्क्रीनिंग में शामिल होने की अपील की थी, जबकि जेएनयू प्रशासन ने एक एडवाइजरी जारी कर ऐसा नहीं करने को कहा था।

केरल में भी कॉन्ग्रेस और वामपंथी दलों ने स्क्रीनिंग करने का ऐलान कर रखा है। केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (KPCC) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने कहा है कि गणतंत्र दिवस पर राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। इसको लेकर केपीसीसी के प्रवक्ता शिहाबुद्दीन ने कहा है, “डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाना संविधान के खिलाफ है। मोदी सरकार इस पर कैसे प्रतिबंध लगा सकती है? यह केंद्र के खिलाफ हमारा विरोध है।”

केरल में भगवान अयप्पा पर बनी फिल्म ‘मलिकप्पुरम’ ने कमाए ₹100 करोड़, अब तमिल-तेलुगु और हिंदी में भी रिलीज को तैयार: एक और ‘कांतारा’?

मलयालम नायक उन्नी मुकुंदन की फिल्म मलिकप्पुरम ब्लॉकबस्टर साबित हुई है। मात्र 3.5 करोड़ रुपए में बनी फिल्म ने करीब 100 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म अब तमिल और तेलुगु में रिलीज होने जा रही है। फिल्म को हिंदी में भी रिलीज किया जाएगा। इस फिल्म में भगवान अय्यपा के प्रति एक 8 साल की बच्ची की श्रद्धा को दिखाया गया है।

50 करोड़ क्लब में शामिल ‘मलिकप्पुरम’ मलयालम भाषा में 30 दिसंबर, 2022 को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी। 2 हफ्तों तक फिल्म ने जमकर कमाई की लेकिन पोंगल के अवसर पर थलपति विजय की फिल्म वारिसु और अजित कुमार की फिल्म थुनिवु के रिलीज होने के बाद फिल्म को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। हालाँकि ‘मलिकप्पुरम’ की कहानी और विष्णु शशि शंकर के शानदार निर्देशन की वजह से लोग ‘मलिकप्पुरम’ देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

अब यह फिल्म 26 जनवरी, 2023 को तमिल और तेलुगु में रिलीज की जा रही है। उन्नी मुकुंदन ने खुद सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी दी।

फिल्म की कामयाबी से खुश मुकुंदन ने इंडिया टूडे से खास बातचीत में यह भी जानकारी दी कि एक हफ्ते बाद फिल्म को हिंदी में भी रिलीज किया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ पूरा देश इस फिल्म को देखे।” फिल्म की कामयाबी को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मुकुंदन ने कहा कि वो स्क्रिप्ट को लेकर बहुत कॉन्फिडेंट थे। फिल्म की कहानी सबरीमाला और भगवान अयप्पा के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने कहा कि मुझे पता था कि यह सबरीमाला मुद्दे के कारण केरल में अच्छा प्रदर्शन करेगा उन्होंने साफ किया कि मलिकप्पुरम में कुछ भी विवादास्पद नहीं है।

बता दें कि सबरीमाला में भगवान अय्यप्पा के समकक्ष देवता मलिकप्पुरथम्मा या मंजामाथा का लोगों पर उतना ही भावनात्मक प्रभाव है जितना अय्यप्पन का। फिल्म की कहानी देवी मलिकप्पुरम की कहानी और अवधारणा पर आधारित है। इसके पहले दक्षिण भारत से ही कन्नड़ भाषा की फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की थी। कांतारा भी एक कम बजट (16 करोड़) की फिल्म थी जिसने 400 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी। मलिकप्पुरम सिर्फ 3.5 करोड़ में बनी फिल्म है जो अब तक 100 करोड़ की कमाई कर चुकी है।

‘मालिकप्पुरम’ को मिला कर उन्नी मुकुंदन ने तीन बैक-टू-बैक हिट फिल्में दे चुके हैं। इससे पहले ‘मेप्पडियन’ और ‘शफीकिंते संतोषम’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया था।

इधर BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री, उधर कोर्ट ने गुजरात दंगों के 22 आरोपितों की किया बरी: लावारिस हड्डियों के आधार पर लगा था 17 मुस्लिमों की हत्या का आरोप

गुजरात की एक जिला अदालत ने साल 2002 दंगों के 22 आरोपितों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। ये सभी आरोपित पंचमहल जिले के देलोल गांव में हुई हिंसा में नामजद किए गए थे। इस हिंसा में कुल 17 लोगों की जान गई थी जिसमें 2 नाबालिग भी शामिल थे। सभी मृतक अल्पसंख्यक समुदाय से थे। बरी हुए 22 लोगों में 8 लोगों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई है। सुनवाई के आरोपितों के दौरान कई गवाह भी अपनी बातों से मुकर गए थे। ये फैसला मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को सुनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह निर्णय पंचमहल न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हर्ष त्रिवेदी की अदालत ने सुनाया। बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ता गोपाल सिंह सोलंकी ने बहस की थी। इस बहस के दौरान जहाँ अभियोजन पक्ष ने आरोपितों के लिए सजा की माँग की थी, वहीं हर्ष सोलंकी ने अपने मुवक्किलों को बेगुनाह बताया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अभियोजन पर सबूत न जमा कर पाने के साथ कई गवाहों के मुकरने की भी दलील दी। दलील में यह भी बात शामिल थी कि पुलिस पीड़ितों के शवों को भी बरामद नहीं कर पाई थी।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपितों ने 28 फरवरी 2002 को 17 पीड़ितों का कत्ल कर दिया था। सबूत के तौर पर अभियोजन पक्ष ने पुलिस द्वारा बरामद कुछ हड्डियों का हवाला दिया था। ये हड्डियाँ अधजली हालत में नदी के किनारे सुनसान जगह बरामद हुई थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपितों ने पीड़ितों को मार कर सबूत मिटाने के लिए जला दिया था। हालाँकि, बचाव पक्ष कोर्ट को यह समझाने में सफल रहा कि बरामद हुई हड्डियों से पीड़ितों की पहचान नहीं स्थापित हो पाई है।

क्या था मामला

गौरतलब है कि इसी पंचमहल जिले के गोधरा बाजार के पास अयोध्या से लौट रहे 59 रामसेवकों को एक हिंसक भीड़ ने 27 फरवरी, 2002 को तब जला दिया था जब वो साबरमती एक्सप्रेस से वापस अपने घर लौट रहे थे। इस घटना के एक दिन बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। आरोप है कि इस घटना के एक दिन बाद 28 फ़रवरी को पंचमहल के देलोल गाँव में एक भीड़ ने अल्पसंख्यकों के घरों पर हमला किया, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा के आरोप में 22 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।

बता दें कि गुजरात दंगों पर BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। जहाँ एक तरफ जामिया-JNU जैसे शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के एक वर्ग द्वारा प्रशासन की रोक के बावजूद इसकी स्क्रीनिंग की जा रही है, केरल में इसकी स्क्रीनिंग के लिए कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट साथ आ गए हैं। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया से इसे हटवा दिया है, लेकिन फिर भी इसे लेकर विपक्ष की बयानबाजी रुक नहीं रही है।