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बहाना BBC की डॉक्यूमेंट्री, पर JNU में बवाल का चेहरा वही पुराना: 2020 की जनवरी में भी ABVP को लेकर वामपंथी रो रहे थे ऐसा ही रोना

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में मंगलवार (24 जनवरी 2023) की देर शाम वामपंथी छात्रों का शुरू किया हुआ बखेड़ा देर रात तक चलता रहा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) पर आरोप और दिल्ली पुलिस को शिकायत देने के साथ इस पर विराम लग गया है। इस बार भले बवाल की वजह बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) की स्क्रीनिंग बनी हो, लेकिन इसके पीछे के चेहरे और आरोप वही पुराने हैं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी कर पहले जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष प्रोपेगेंडा यूनिवर्सिटी की स्क्रीनिंग को लेकर अड़ी। फिर एबीवीपी पर स्क्रीनिंग देख रहे छात्रों पर पत्थरबाजी का आरोप लगाया। कैंपस में हंगामे के बाद बाद वामपंथी छात्रों ने वसंत कुंज पुलिस थाने तक मार्च किया। पुलिस को शिकायत दी। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि फिलहाल कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। मामले की जाँच जारी है।

उल्लेखनीय है कि 2020 में भी वह जनवरी का ही महीना था जब वामपंथी छात्रों ने जेएनयू में हंगामा किया था। सर्वर रूम ठप कर लोगों को बंधक बनाया था। संपत्ति को नुकसान पहुँचाया था। तब भी इस बवाल का चेहरा यही आइशी घोष थी। उस समय भी एबीवीपी पर इसी तरह आरोप लगाए गए थे।

इस बार भी जेएनयूएसयू जिस डॉक्यमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अड़ा हुआ था उस पर सरकार बैन लगा चुकी है। जेएनयू प्रशासन ने शांति और सद्भाव भंग होने की आशंका जताते हुए स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी थी। यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय प्रशासन से इसकी अनुमति नहीं ली गई है। बावजूद मंगलवार की देर शाम यूनिवर्सिटी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश वामपंथी छात्रों ने की। पहले उन्होंने बिजली सप्लाई बंद करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और फिर पत्थरबाजी के आरोप लगाते हुए बवाल खड़ा करने की कोशिश हुई।

पत्रकार राहुल सिसोदिया ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें आइशी घोष को कहते हुए सुना जा सकता है, “वे एक स्क्रीन को बंद करेंगे, हम हजार स्क्रीन उनके सामने खोल कर देखेंगे। वे एक व्यूअरशिप बंद करेंगे। हम लाखों व्यूअरशिप उनको देंगे। यह जेएनयूएसयू के विरोध करने का तरीका है। अगर पुलिस में दम है, बीजेपी के लठबाज के पास दम है तो आए यहाँ और स्क्रीनिंग बंद करके दिखाए।” इसके बाद वह सभी से क्यूआर कोड स्कैन करने प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री को देखने को कहती हैं।

मंगलवार देर रात पुलिस स्टेशन के बाहर आइशी घोष ने पत्रकारों से कहा, “हमने शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने हमें घटना की जाँच का आश्वासन दिया है। हमने इसमें शामिल सभी व्यक्तियों के नाम और विवरण दिए हैं। फिलहाल, हम विरोध-प्रदर्शन वापस ले रहे हैं। हम जेएनयू प्रॉक्टर कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराएँगे”

इससे पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन और मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन ने इस ​प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी। इस स्क्रीनिंग में दोनों इस्लामी छात्र संगठनों के 50 से अधिक छात्र मौजूद थे। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से इसकी शिकायत करते हुए आयोजन करने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। एबीवीपी के अनुसार बिना अनुमति के यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर स्क्रीनिंग की गई थी।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।

Pathaan में शाहरुख को बचाने आए सलमान, ऑनलाइन लीक हो गई फिल्म… लोग कर रहे फ्री में डाउनलोड

शाहरुख खान की पठान (Shah Rukh Khan’s Pathaan) सिनेमा घरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म को लेकर शाहरुख के फैन्स काफी उतावले हैं, जगह-जगह सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स के सामने भीड़ लगी हुई है। पठान (Pathaan) के प्रॉड्यूसर के लिए चिंता की बात यह है कि फिल्म ऑनलाइन लीक हो गई है। इसे लोग स्ट्रीम करके भी देख रहे, फ्री में डाउनलोड करने का भी ऑप्शन है। ऐसा करना हालाँकि गैरकानूनी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बॉलीवुड में काम करने वाले शाहरुख खान की फिल्म पठान (Pathaan) एक नहीं बल्कि कई वेबसाइटों पर लीक कर दी गई है। 123movies, 123movierulz, Filmyzilla, Onlinemoviewatches, Filmywap, Tamilrockers – इन पोर्टल पर पठान फिल्म की स्ट्रीमिंग भी की जा रही है और डाउनलोड करने का ऑप्शन भी दिया जा रहा है। ऐसा करना गैरकानूनी है, फिर भी अवैध रूप से ये वेबसाइट फिल्म को लीक करने में लिप्त हैं।

रिलीज से ठीक पहले पठान लीक (Pathaan leaked online) होकर इस फिल्म के निवेशकों के लिए सरदर्द बन गई होगी। दूसरा पहलू हालाँकि यह भी है कि शाहरुख खान के फैन्स (Shah Rukh Khan’s fans) फिल्म की टिकटों के लिए मारामारी कर रहे हैं, कुछ तो एकसाथ सैकड़ों-हजारों टिकट खरीद लिए हैं। जिन्होंने ऐसा किया है, वो इसे शाहरुख के लिए प्यार बता रहे जबकि कुछ लोग इसे शाहरुख खान की पठान (Shah Rukh Khan’s Pathaan) फिल्म को हिट कराने के लिए उनकी पीआर टीम की कारगुजारी कह रहे।

पठान में सलमान (Salman in Pathaan)

पठान फिल्म के सेकंड हाफ में सलमान खान की एंट्री है। पठान (शाहरुख खान) को बचाने के लिए टाइगर (सलमान खान) एंट्री मारता है। अच्छा-खासा 15-20 मिनट का रोल है सलमान का। चिंता मत कीजिए, यह स्पॉइलर नहीं है। ऐसी बात भी नहीं है, जिसे खुद शाहरुख ने नहीं कही (अपने फनी अंदाज में) हो।

शाहरुख को बचाने के अलावा सलमान और क्या-क्या करते हैं, यह लिखना स्पॉइलर होगा। सलमान के फैन हैं तो आपको ऑनलाइन लीक हुए पठान (Pathaan leaked online) देखने की जगह सिनेमा घरों में जाना होगा।

पठान फिल्म लीक होने से पहले भी कई तरह के विवादों में फँस चुकी है। ‘बेशरम रंग’ गाने में भगवा बिकिनी को लेकर फिल्म का विरोध हो चुका है। आरोप लगाया गया था कि पठान (Pathaan) में जानबूझ कर हिन्दू भावनाओं को आहत किया गया है।

नोट: ऑपइंडिया की संपादकीय टीम पायरेसी का न तो समर्थन करती है, ना ही बढ़ावा देती है। कॉपीराइट अधिनियम के तहत पायरेसी एक अपराध है।

सपा MLA के बेटे-भतीजे की जमीन, बदनाम बि​ल्डर से एग्रीमेंट… लखनऊ में कैसे गिरी 5 मंजिला इमारत: रिपोर्ट में बताया- 9 इंच के खंभों पर थी खड़ी

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में मंगलवार (24 जनवरी 2023) की शाम एक 5 मंजिला बिल्डिंग अचानक भरभरा करा गिर गई। बिल्डिंग में करीब 15 परिवार रहते थे। 5 लोग अभी भी मलबे में दबे बताए जा रहे हैं। इस मामले में समाजवादी पार्टी के विधायक और अखिलेश सरकार में मंत्री रहे शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश को हिरासत में लिए जाने की खबर है।

रिपोर्टों के अनुसार जिस जमीन पर यह बिल्डिंग बनी थी, वह नवाजिश और तारिक के नाम पर थी। तारिक सपा विधायक मंजूर का भतीजा है और फरार बताया जा रहा है। बिल्डिंग बनाने के लिए इन्होंने यजदान बिल्डर से एग्रीमेंट किया था। यज़दान बिल्डर के मालिक का नाम फहद यजदानी है। यज़दान बिल्डर काम को लेकर काफी बदनाम रहा है। बावजूद एग्रीमेंट होने के पीछे फहद और नवाजिश की दोस्ती बताई जा रही है। इस बिल्डिंग का नाम भी नवाजिश की बेटी अलाया के नाम पर रखा गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अलाया अपार्टमेंट नाम की यह बिल्डिंग वज़ीर हसन रोड पर है। मंगलवार को आए भूकंप के कुछ ही देर बाद यह बिल्डिंग गिर गई। लेकिन यह हादसा किस वजह से हुआ यह अभी स्पष्ट नहीं है। इरफान नाम के बिजली मिस्त्री ने बताया है कि जब बिल्डिंग गिरी वह ग्राउंड फ्लोर पर बोर्ड बना रहा था। बिल्डिंग गिरने से बिजली के पैनल में शॉर्ट सर्किट होने लगी। हादसे में इरफ़ान बच गया, लेकिन उसका स्कूटर दब गया।

हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को NDRF और SDRF टीमों के साथ तत्काल मौके पर पहुँच कर फँसे लोगों को बचाने के निर्देश दिए। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने भी घटनास्थल का दौरा किया।

रात भर जगे राहत और बचावकर्मी

बचाव अभियान में शामिल राहत और बचावकर्मी पूरी रात जाग कर लोगों को सुरक्षित निकालने में लगे रहे। इसमें पुलिस, NDRF और SDRF के जवान मुख्य तौर पर शामिल थे। इसी के साथ गृह सचिव, DGP और मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी घटनास्थल पर जमे रह कर अभियान का नेतृत्व करते रहे। 11 घंटे बाद एक महिला को कंक्रीट काट कर सुरक्षित निकालने का वीडियो भी वायरल हुआ।

हादसे में समाजवादी पार्टी नेता हैदर अब्बास का परिवार भी दब गया था। हालाँकि जवानों ने उनके अब्बा अमीर हैदर, बेटे मुस्तफा सहित माँ और पत्नी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

सपा विधायक का बेटा हिरासत में

DGP उत्तर प्रदेश ने किसी भी गिरफ्तारी से इनकार किया है। लेकिन मिली जानकारी के मुताबिक मेरठ के किठौर से सपा विधायक शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश को पुलिस ने हिरासत में लिया है। वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपार्टमेंट निर्माण की जाँच के आदेश दिए हैं।

यजदान बिल्डर्स का नाम आया सामने

भारत समाचार का अपनी रिपोर्ट में दावा है कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपित यजदान बिल्डर्स है। दावा है कि यजदान बिल्डर्स पहले भी इमारतों के निर्माण में काफी बदनाम रहा है। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग का बेसमेंट काफी कमजोर था, लेकिन फिर भी उसकी खुदाई की जा रही थी। 5 मंजिला बिल्डिंग को मात्र 9 इंच के खंभों पर बनाने की भी जानकारी सामने आ रही है।

जिस जगह बिल्डिंग गिरी वहाँ काफी सघन बस्ती है। घटनास्थल पर 4 पहिया वाहनों की आवाजाही भी सम्भव नहीं थी।

छत्तीसगढ़ नान घोटाला: ₹80 लाख में जिस वकील को बघेल सरकार ने रखा, वे उससे ले रहे थे निर्देश जिसकी जाँच कर रही थी ACB

वर्ष 2015 में जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे तब कॉन्ग्रेस ने सरकार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत खराब क्वालिटी वाले अनाज का वितरण करने का आरोप लगाया था। कॉन्ग्रेस का आरोप था कि राइस मिलर्स से मोटी रिश्वत ले कर अधिकारी लोगों के बीच खराब क्वालिटी के अनाज का वितरण करवा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत खाद्यान्न खरीदकर लोगों को राशन बाँटने का काम करती रही है। कॉन्ग्रेस के आरोपों के बाद भाजपा सरकार ने NAN घोटाले की जाँच शुरू की। कुल 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित बनाए गए। बाद में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की और 2015 में चार्जशीट दायर की गई। तब तक छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तित हो गई और कॉन्ग्रेस की सरकार बन गई।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कामयाबी के बाद मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल ने भ्रष्टाचार के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को बचाने और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह व उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे लोगों को फँसाने के लिए एक अभियान सा छेड़ दिया। NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को बचाने के लिए भूपेश बघेल ने राज्य के आईपीएस अधिकारियों, न्यायपालिका और सरकार के उच्च पदों पर बैठे लोगों समेत अन्य साधनों का इस्तेमाल किया। इसके लिए गवाहों पर दबाव बनाने के साथ-साथ सबूतों के साथ छेड़-छाड़ भी की गई। मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा के जाँच पर सवाल उठाए जाने के बाद भूपेश बघेल ने जाँच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया।

उसके बाद से कई ऐसे सबूत सामने आए हैं जिससे साबित होता है कि भूपेश बघेल न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा का बचाव कर रहे थे बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को घोटाले में फँसाने की कोशिश कर रहे थे। साल 2020 में कोर्ट से जमानत मिलते ही अनुल टुटेजा और आलोक शुक्ला को दोबारा बहाल कर दिया गया। टुटेजा को वाणिज्य और उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया तो दूसरे मुख्य आरोपित आलोक शुक्ला को शिक्षा के साथ-साथ अन्य विभागों का प्रभारी प्रधान सचिव बनाया गया।

ऑपइंडिया के पास नान घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के व्हाट्सएप चैट उपलब्ध हैं। दरअसल फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान आईपीएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश के फोन जब्त कर लिए गए थे। इसके बाद विभाग के अधिकारियों को व्हाट्सएप पर अनिल टुटेजा और यश टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ बातचीत की जानकारी मिली थी। व्हाट्सएप पर टुटेजा और राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों जैसे एसआरपी कल्लूरी, कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख के बीच हुई बातचीत से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा ने आईपीएस अधिकारियों को अपने इशारों पर नचाया और किस तरह राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। ऑपइंडिया द्वारा इस पर विस्तृत लेख प्रकाशित किया गया था। जिसे आप हिंदीअंग्रेजी में पढ़ सकते हैं।

अनिल टुटेजा को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने 2020 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। एसएलपी में ईडी ने कोर्ट को उन व्हाट्सएप चैट्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी जिन्हें आयकर विभाग द्वारा प्राप्त किया गया था। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि घोटाले के मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला ने छत्तीसगढ़ EOW प्रमुख, ACB प्रमुख, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिकारी, एसआईटी के अन्य सदस्यों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मदद से केस को कमजोर किया। सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर व गवाहों को धमका कर SIT से अनुकूल रिपोर्ट तैयार करवाया गया।

निलंबित आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह ने 22 दिसंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जानकारी दी कि किस तरह उनपर टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को को फँसाने के लिए दबाव बनाया गया। जीपी सिंह ने दावा किया कि भूपेश बघेल ने उन्हें 2 बार मिलने के लिए बुलाया था। 14 सितंबर, 2019 और 10 मई, 2020 को मुख्यमंत्री (भूपेश बघेल) के आवास पर बुलाया गया था। इस दौरान उन्हें रमन सिंह को फँसाने के निर्देश दिए गए। इतना ही नहीं, जीपी सिंह और सीएम बघेल के बीच आधी रात को हुई बैठक के खत्म होने से पहले जीपी सिंह से NAN घोटाले के मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को जाँच में हुई प्रगति के बारे में सूचित करने के लिए कहा गया था। जीपी सिंह ने बताया कि असफल होने पर उन्हें परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई थी। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि स्वयं भूपेश बघेल ने उन्हों एक हिट लिस्ट सौंपा। उस हिट लिस्ट को भी उनकी याचिका के साथ संलग्न किया गया था।

भूपेश बघेल द्वारा जीपी सिंह को दी गई हिटलिस्ट

व्हाट्सएप चैट के आधार पर ऑपइंडिया के रिपोर्टों की पुष्टि जीपी सिंह द्वारा अदालत को दी गई हिटलिस्ट भी करती है। इससे आगे ऑपइंडिया ने अब छत्तीसगढ़ में राजनेताओं और नौकरशाहों के मिलीभगत द्वारा आपराधिक न्याय प्रणाली को प्रभावित करने वाले सबूतों का अध्ययन किया है। ऑपइंडिया ने जिन व्हाट्सएप चैट्स को प्राप्त किया था, उनमें कई दस्तावेज भी थे। इन दस्तावेजों का आदान-प्रदान आईपीएस अधिकारियों और अनिल टुटेजा के बीच हुआ था। टुटेजा के फोन से बरामद अटैचमेंट और दस्तावेज से उस हिट लिस्ट की पुष्टि होती है जिसे भूपेश बघेल ने जीपी सिंह को सौंपा था।

EOW द्वारा हाईकोर्ट में जमा कराए जाने वाले स्टेटस रिपोर्ट मुख्य आरोपित और उनके बेटे (अनिल टुटेजा और यश टुटेजा) तैयार कर रहे थे

ऑप इंडिया को प्राप्त चैट्स में से यश और आईपीएस अधिकारी कल्याण एलेसेला के बीच हुई बातचीत भी शामिल है। उस चैट के अध्ययन से यह साबित होता है कि हाईकोर्ट में जमा कराए जाने वाले स्टेटस रिपोर्ट को अनिल टुटेजा और यश टुटेजा मिलकर तैयार कर रहे थे। 16 फरवरी, 2019 को यश टुटेजा ने EOW के एसपी कल्याण एलेसेला (वह विभाग जो नान घोटाले में अनिल टुटेजा की जाँच करने वाला था) को एक संदेश भेजा।

यश टुटेजा ने कल्याण एलेसेला को एक ड्राफ्ट (स्टेटस रिपोर्ट) भेजा। उस समय के घटनाक्रम और सच्चाई को समझने के लिए यश द्वारा भेजे गए इस संदेश को जानना जरूरी है। भेजे गए अटैचमेंट में लिखा था, “कॉन्फ्रेंस में चर्चा के आधार पर स्थिति रिपोर्ट के लिए निम्नलिखित क्रम पर ध्यान दें”। स्टेटस रिपोर्ट का मसौदा लिखने के बाद नीचे वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन के नाम से हस्ताक्षर किया गया था।

यश टुटेजा और कल्याण एलेसेला के बीच हुई बातचीत

इस चैट से अनुमान लगाया जा सकता है कि टुटेजा, दयान कृष्णन और कल्याण एलेसेला के बीच एक कॉन्फ्रेंस कॉल हुई थी। अनुमान लगाया जा सकता है कि इस कॉल के दौरान उस स्थिति रिपोर्ट पर चर्चा हुई थी जिसे EOW उच्च न्यायालय में दाखिल करने वाला था। आपको बता दें दयान कृष्णन उच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ वकील हैं जो छत्तीसगढ़ सरकार (भूपेश बघेल) की ओर से नान घोटाले में ACB-EOW का पक्ष रख रहे थे।

अब चूँकि यश टुटेजा द्वारा कल्याण एलेसेला को भेजे गए स्टेटस रिपोर्ट में दयान कृष्णन के हस्ताक्षर हैं। इससे समझा जा सकता है कि कॉन्फ्रेंस कॉल के बाद दयान कृष्णन यश टुटेजा के माध्यम से अनिल टुटेजा की जाँच करने वाले विभाग तक स्टेटस रिपोर्ट भेज रहे हैं। हाईकोर्ट में EOW को ही स्टेटस रिपोर्ट सबमिट करना है। चूँकि हम संबद्ध सभी लोगों के चैट प्राप्त नहीं कर सके हैं इसलिए उपलब्ध चैट के आधार पर यह केवल एक अध्ययनशील अनुमान हो सकता है। दयान कृष्णन द्वारा स्टेटस रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद यश टुटेजा इसमें संशोधन करता है और इसे उच्च न्यायालय में दायर की जाने वाली रिपोर्ट के रूप में EOW के एसपी कल्याण एलेसेला को भेजता है। इसलिए, किसी को तो यह सवाल पूछना होगा कि क्या सच में एसीबी का पक्ष रखने वाले वकील पहले नान घोटाले के मुख्य आरोपित के साथ स्टेटस रिपोर्ट साझा कर रहे थे? फिर आरोपित इस रिपोर्ट को संशोधित कर उस जाँच एजेंसी के अधिकारी को भेज रहे थे जिसे जाँच के बाद रिपोर्ट हाईकोर्ट में सबमिट करनी थी।

विभाग द्वारा कोर्ट में जमा कराया गया स्टेटस रिपोर्ट यश टुटेजा द्वरा तैयार किया गया था इसकी पुष्टि भी ऑपइंडिया को प्राप्त चैट से होती है। यश टुटेजा द्वारा स्टेटस रिपोर्ट साझा किए जाने के एक दिन बाद, 17 फरवरी, 2019 को कल्याण एलेसेला ने यश टुटेजा के साथ अपडेट स्टेटस रिपोर्ट साझा किया।

यश टुटेजा और कल्याण एलेसेला के बीच हुई बातचीत

अनिल टुटेजा के फोन से बरामद दस्तावेज संख्या 73ea6827-acf0-4712-9ba0-cc37cd5f757c ही अंतिम स्टेटस रिपोर्ट है। जो यश टुटेजा ने पिता अनिल के साथ साझा किया था। यह वही स्टेटस रिपोर्ट है जिसे एलेसेला ने यश टुटेजा के साथ साझा किया था।

EOW एसपी द्वारा यश टुटेजा को शेयर किया गया फाइनल स्टेटस रिपोर्ट

दिलचस्प बात यह है कि अनिल टुटेजा के फोन से बरामद दस्तावेजों में से एक में ऐसे कार्यों की लिस्ट भी प्राप्त हुई है जिसे आने वाले समय में पूरा किया जाना था। यह लिस्ट भी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

यह दस्तावेज़ 21 फरवरी, 2019 को अनिल टुटेजा के साथ साझा किया गया था। ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता कि अनिल टुटेजा को किसने यह लिस्ट भेजा। दरअसल यह लिस्ट किसी चैट में नहीं बल्कि फोन से बरामद किया गया था।

अनिल टुटेजा के फोन से बरामद दस्तावेज

नान मामले से जुड़े इस टास्क लिस्ट से यह स्पष्ट है कि जीपी सिंह को वास्तव में एक हिटलिस्ट दी गई थी। टास्क लिस्ट से यह भी साबित होता है कि NAN घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, मुकेश गुप्ता, अमन सिंह और अन्य को फँसाने के लिए मिलीभगत की गई थी। टास्क लिस्ट के कुछ विशेष कार्य इस प्रकार हैं-

1- मुकेश गुप्ता के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करें
2-अमन सिंह के मामले में उचित जवाब तैयार करना था – जिसे 27 फरवरी, 2019 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।

इस टास्क लिस्ट से यह साबित होता है कि नान घोटाले में अनिल टुटेजा और दूसरे सरकारी अधिकारी कुछ लोगों को फँसाने की कोशिश कर रहे थे। ये वही लोग हैं जिनका नाम जीपी सिंह को प्राप्त हिटलिस्ट में दर्ज है। जीपी सिंह द्वारा दायर की गई याचिका के अनुसार यह हिटलिस्ट उन्हें खुद भूपेश बघेल ने दी थी।

टास्क लिस्ट पर गौर करें तो एक टास्क ‘अदालत में एसीबी का पक्ष रखने के लिए लॉ डिपार्मेंट द्वारा वकील के रूप में दयान कृष्णन की नियुक्ति की अनुमति प्राप्त करना’ भी था। दिसंबर 2019 में अनिल टुटेजा को बचाने के लिए भूपेश बघेल द्वारा दयान कृष्णन जैसे निजी वकील की नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ था। बहस के दौरान यह पता चला था कि सरकार मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा को बचाने के लिए कृष्णन को 80 लाख का भुगतान कर रही थी। प्राप्त चैट की कड़ियों को जोड़ें तो पता चलता है कि नान घोटाला मामले में दयान कृष्णन एसीबी-ईओडब्ल्यू का प्रतिनिधित्व करते हुए अनिल टुटेजा के साथ मिलकर काम कर रहे थे।

अनिल टुटेजा के फोन से एक अन्य सरकारी दस्तावेज भी बरामद हुआ है। इसमें दयान कृष्णन को एसीबी वकील के रूप में नियुक्त किए जाने की पुष्टि की गई थी।

अनिल टुटेजा के फोन से बरामद दस्तावेज

आयकर विभाग द्वारा अनिल टुटेजा के फोन से बरामद दस्तावेजों से मामले से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं। ऑपइंडिया भी प्राप्त दस्तावेजों का लगातार अध्ययन कर रहा है:

1- भूपेश बघेल द्वारा गठित SIT का उद्देश्य NAN घोटाले में अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की भूमिका की जाँच करना था। फिर EOW के एसपी और ACB-EOW के अन्य अधिकारी केस से जुड़े अपडेट्स मुख्य आरोपित के साथ साझा क्यों कर रहे थे? जीपी सिंह ने खुलासा किया है कि उन्हें भूपेश बघेल ने अनिल टुटेजा के साथ केस के अपडेट्स साझा करने के निर्देश दिए थे।

2-भूपेश बघेल ने दयान कृष्णन जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता को एसीबी का पक्ष अदालत में रखने के लिए नियुक्त किया। वही एसीबी जो नान घोटाले में मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा के भूमिका की जाँच कर रहा था। क्या दयान कृष्णन एसीबी का स्टेटस रिपोर्ट यश टुटेजा के साथ साझा कर रहे थे जिसे एसीबी अनिल टुटेजा के खिलाफ अदालत में दायर करने वाली थी?

3- दयान कृष्णन ने संभवतः यश टुटेजा के साथ स्टेटस रिपोर्ट का ड्राफ्ट साझा किया, यश ने इस स्टेटस रिपोर्ट को संपादित किया और कल्याण एलेसेला (EOW के एसपी) को भेजा। फिर एलेसेला ने यश द्वारा इसे दयान कृष्णन तक पहुँचाया (क्योंकि स्टेटस रिपोर्ट की फाइलिंग वकील द्वारा की जानी थी)। क्या दयान कृष्णन को भी भूपेश बघेल द्वारा अनिल टुटेजा के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए थे ताकि एसआईटी केस को कमजोर कर सके?

4- दयान कृष्णन की नियुक्ति की पुष्टि करने वाला सरकारी दस्तावेज भी अनिल टुटेजा के फोन से बरामद किया गया था – क्या दयान कृष्णन सचमुच एसीबी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे या वो मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा के लिए काम कर रहे थे जिसकी जाँच एसीबी को करनी थी?

5- अनिल टुटेजा के साथ एक टास्क लिस्ट क्यों साझा की गई जिसमें वकील के रूप में दयान कृष्णन को नियुक्त किए जाने का जिक्र है? क्या दयान कृष्णन को इसलिए एसीबी के वकील के तौर पर नियुक्त किया गया ताकि वो अनिल टुटेजा की मदद कर सकें?

यह साबित करने के लिए कि दयान कृष्णन को संभवतः अनिल टुटेजा की मदद करने के लिए एसीबी का वकील नियुक्त किया गया था, एक और महत्वपूर्ण चैट का उल्लेख जरूरी है। यह चैट कल्याण एलेसेला और यश टुटेजा के बीच का है। फाइनल स्टेटस रिपोर्ट शेयर किए जाने के एक दिन बाद यानि 18 फरवरी, 2019 को कल्याण एलेसेला ने यश टुटेजा को दयान कृष्णन के हवाई टिकट की एक प्रति भेजी।

यश टुटेजा और कल्याण एलेसेला के बीच हुई बातचीत

यहाँ यह जानना जरूरी है कि एसीबी के वकील का हवाई टिकट EOW के एसपी मुख्य आरोपितों को क्यों भेज रहे थे?

ऑपइंडिया द्वारा इन बिंदुओं की जाँच से कुछ निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं:

1- जीपी सिंह का दावा कि भूपेश बघेल ने उन्हें एक हिटलिस्ट सौंपा था वह इस लेख में उल्लेखित दूसरे दस्तावेजों और उपलब्ध चैट के विश्लेषण से सही साबित होता है। यह भी साबित होता है कि EOW के अधिकारी ACB उनके वकील और राज्य के अन्य आईपीएस अधिकारी अनिल टुटेजा को बचाने के लिए उनके साथ मिलकर काम कर रहे थे। इतना ही नहीं हिटलिस्ट में शामिल लोगों को फँसाने की कोशिश भी की जा रही थी।

2- रमन सिंह ने जोर देकर कहा था कि एसीबी के वकील को अनिल टुटेजा के इशारे पर काम करने के लिए नियुक्त किया गया था। क्योंकि वकील अनिल टुटेजा को केस से निकालने के लिए तैयार थे। इस लेख में हुए खुलासों से रमन सिंह की बात सच हो सकती है।

3- नान घोटाले में अनिल टुटेजा की भूमिका की जाँच होनी थी लेकिन जाँच को खुद टुटेजा नियंत्रित कर रहे थे।

4- भूपेश बघेल ने एसआईटी का गठन किया ताकि रमन सिंह सरकार में मुख्य आरोपित अनिल टुटेजा जिसके खिलाफ चार्जशीट तक फाइल हो चुकी थी को बचाया जा सके और इस जाँच को कमजोर किया जा सके।

5- भूपेश बघेल सरकार द्वारा उच्च न्यायालय को जानबूझकर गुमराह किया गया। एसीबी द्वारा कोर्ट में एक ऐसी स्टेटस रिपोर्ट दायर की गई जिसे आरोपित ने खुद तैयार और संपादित किया था। सवाल यह भी है कि क्या दयान कृष्णन भी इस खेल में बराबर के भागीदार थे?

6- हालाँकि इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि दयान कृष्णन जैसे वरिष्ठ वकील एसीबी/ईओडब्ल्यू और टुटेजा के बीच हो रही मिलीभगत से अनजान थे। यदि कृष्णन इन बातों से अनजान नहीं थे तो क्या उन्हें भी अदालत को गुमराह करने के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जाना चाहिए?

नान घोटाला बहुत बड़ा घोटाला है। उससे भी बड़ी बात यह है कि बघेल सरकार न केवल मुख्य अभियुक्तों को बचाने की कोशिश कर रही है बल्कि रमन सिंह और अन्य को घोटाले में फँसाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। जैसा कि ऑपइंडिया पहले भी कह चुका है कि नान घोटाला एक ऐसा मामला है जिसने एक व्यवस्था को बहुत नुकसान पहुँचाया है। इस मामले में हमने देखा किस तरह पुलिस अधिकारियों, आईएएस अधिकारियों, न्यायाधीशों और राजनेताओं के मिली भगत से भ्रष्टाचार के मामले को कमजोर करने और आरोपितों को बचाने की कोशिश हुई। हमने देखा कि किस तरह अपने राजनीतिक विरोधियों को फँसाने के लिए सबूतों को प्रभावित किया गया, गवाहों को धमकी दे कर स्टेटमेंट बदलने के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं अधिकारियों को दंडात्मक पोस्टिंग के नाम पर डराने की भी कोशिश हुई। अधिकारियों के मिली भगत से हवाला लेन-देन को जारी रखे जाने समेत और भी बहुत कुछ अंजाम दिया गया। जैसे-जैसे हम इस घोटाले की परतें उधेड़ते जाएँगे और ऑपइंडिया को प्राप्त व्हाट्सएप चैट का और गहन अध्ययन करेंगे वैसे-वैसे हम अपनी ‘द छत्तीसगढ़ फाइल्स’ सीरीज में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से फॉलो-अप प्रश्न पूछते रहेंगे।

आयकर विभाग द्वारा अनुल टुटेजा के फोन से प्राप्त सभी व्हाट्सएप चैट, अटैचमेंट्स, फाइलें और अन्य दस्तावेज जो हमें भी प्राप्त हुए और जिनके आधार पर हम रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं उन्हें हमने जनहित में उन्हें सार्वजनिक कर दिया है। जिन्हें यहाँ देखा जा सकता है-

https://drive.google.com/drive/folders/1KqlOtQ-1ty2eyghcUlg0FJ8rmkGYBpqm

(नुपूर शर्मा की यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। इसका अनुवाद राजन झा ने किया है।)

BBC की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर JNU में बवाल, वामपंथी छात्रों के पत्थरबाजी के दावे को ABVP ने नकारा

दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) की स्क्रीनिंग को लेकर बवाल बढ़ता जा रहा है। पहले मंगलवार (24 जनवरी 2023) की देर शाम बिजली कटने से डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग नहीं होने और वामपंथी छात्रों की नारेबाजी की खबर आई। उसके बाद देर रात कैंपस के कुछ वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गए। इसमें कुछ छात्र हंगामा करते नजर आए। पत्थरबाजी का भी दावा किया जा रहा है।

पत्थरबाजी को लेकर अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं। जेएनयू छात्र संघ का आरोप है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर पत्थर फेंके। जेयूएनएसयू की अध्यक्ष आइसी घोष ने एबीवीपी पर पत्थरबाजी का आरोप लगाया है। वहीं एबीवीपी ने इसे नकार दिया है। कुछ रिपोर्टों में देर रात कैंपस में बिजली सप्लाई बहाल कर देने की बात कही गई है।

लेकिन पत्रकार प्रदीप भंडारी ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा है, “लाइट कटने के बाद JNU में पत्थरबाजी शुरू हो गई। कई जगह हिंसा की खबर भी आ रही है। आश्चर्य की बात यह है कि एक तरफ वामपंथी डाक्यूमेंट्री देखकर विक्टिम कार्ड खेलना चाहते थे और दूसरी तरफ जबर्दस्त पत्थरबाजी कर रहे हैं।”

पत्रकार सचिन गुप्ता ने ट्वीट कर कहा है कि बिजली गुल होने के बाद मोबाइल, लैपटॉप पर अलग-अलग समूह में कुछ छात्र विवादित डॉक्यूमेंट्री देख रहे थे। इस बीच कुछ पत्थर फेंके गए। डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों का आरोप है कि पत्थर बीजेपी और आरएसएस के लोगों ने फेंके।

गौरतलब है कि बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ को प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद कुछ छात्र संगठन और राजनीतिक समूह इसकी स्क्रीनिंग पर अमादा हैं। जेएनयू में छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने गुजरात दंगों पर विवादित डॉक्यूमेंट्री का पोस्टर शेयर करते हुए छात्रों से स्क्रीनिंग में शामिल होने की अपील की थी। जेएनयू प्रशासन ने एक एडवाइजरी जारी कर ऐसा नहीं करने को कहा था। इससे विश्वविद्यालय में शांति और सद्भाव भंग होने की आशंका जताते हुए बताया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन से इसकी अनुमति नहीं ली गई है।

इससे पहले हैदराबाद यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन और मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन ने इस ​प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी। इस स्क्रीनिंग में दोनों इस्लामी छात्र संगठनों के 50 से अधिक छात्र मौजूद थे। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से इसकी शिकायत करते हुए आयोजन करने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग की थी। एबीवीपी के अनुसार बिना अनुमति के यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर स्क्रीनिंग की गई थी।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।

कंगना रनौत की ट्विटर पर शानदार वापसी: 20 महीने बाद वापस मिला हैंडल, लोग बोले – अब वामपंथियों की लगेगी क्लास

चर्चित अभिनेत्री और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की ट्विटर पर वापसी हो चुकी है। मई 2021 में उनका ट्विटर ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया था। उन्होंने खुद मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। कई ट्विटर यूजर्स ने कंगना की वापसी पर खुशी जताई है। इसके बाद उनके फैंस ने कहा कि ट्विटर पर कंगना की वापसी राष्ट्रवादियों के लिए बड़ी खबर है, वहीं हिंदू-विरोधी और देश विरोधियों के लिए एक झटका है।

कंगना ने ट्वीट कर कहा, “सभी को हैलो। यहाँ वापस आना अच्छा है।” उनकी वापसी से नेटीजंस ने खुशी जताई है और उनकी इस ट्वीट पर जबरदस्त प्रतिक्रिया और लाइक्स मिल रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, “आपका स्वागत है। लेकिन, उन्होंने आपका ब्लू टिक ले लिया है।”

एक यूजर ने कंगना की फोटो के साथ ‘अभी तो हमें और जलील होना है’ का मीम शेयर किया। उन्होंने ट्वीट में कहा, “इस बीच, वामपंथी ‘उदारवादी’, तथाकथित ‘बुद्धिजीवी’, और दलाल मीडिया/पत्रकार/समीक्षक/बॉलीवुड ड्रग माफिया और नेपोटिज्म इंडस्ट्री का हाल कुछ ऐसा हो गया है।”

वहीं एक यूजर ने कहा, “वेलकम बैक, कंगना। ट्विटर पर आपकी वापसी राष्ट्रवादियों के लिए एक बड़ी खबर है और राष्ट्र-विरोधी और हिंदू-विरोधियों के लिए एक झटका है।”

इसके साथ ही उन्होंने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की शूटिंग समाप्त होने के बारे में जानकारी दी है और इस संबंध में एक वीडियो भी पोस्ट किया है। फिल्म 20 अक्टूबर 2023 को रिलीज होगी। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “और यह (शूटिंग) समाप्त हो गया। ‘इमरजेंसी’ फिल्म का फिल्मांकन समाप्त हो गया है। आपसे सिनेमाघरों में 20 अक्टूबर, 2023 को मिलते हैं।”

उल्लेखनीय है की मई 2021 में उनका ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया था। दरअसल, उन्होंने बंगाल चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर ट्वीट किया था, जिसके बाद उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया था। कंगना अपनी बेबाकी और राष्ट्रवादी बयानों की वजह से चर्चा में रहती हैं। ट्विटर पर भी वह अपने पोस्ट के लिए विरोधियों के निशाने पर रहती थीं।

‘चीनी कंपनी Huawei के साथ क्या है कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश का रिश्ता?’: USA समेत कई देशों में हो चुकी है बैन, किताब की तस्वीर भी आई सामने

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी (Mahesh  Jethmalani) ने मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) से चीनी कंपनी हुआवै (Huawei) के साथ उनके संबंधों पर सफाई देने को कहा है। Huawei को सुरक्षा कारणों से संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

जेठमलानी ने एक ट्वीट में कहा, “वर्ष 2005 से, जयराम रमेश चीनी दूरसंचार कंपनी हुआवै की भारत में गतिविधियों के लिए पैरवी कर रहे हैं (नीचे उनकी पुस्तक के अंश देखें)। हुआवै को कई देशों में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित कर दिया गया है। जयराम अब भारत सरकार के चीन को लेकर रुख पर सवाल उठाते हैं। उन्हें हुआवै के साथ उनके संबंधों का खुलासा करना चाहिए।”

इससे पहले, जेठमलानी ने एक ट्वीट में रमेश को ‘चीनी दुष्प्रचार का मुखपत्र’ कहा था। उन्होंने 30 दिसंबर, 2022 को ट्वीट किया था, “जयराम रमेश द्वारा भारत के फार्मा उद्योग का अपमान करना स्वाभाविक है। वह एक उत्साही सिनोफिल (चीन से प्रभावित) और चीनी दुष्प्रचार के मुखपत्र हैं। उनके झूठ का गैम्बिया और उज्बेकिस्तान सरकार ने पर्दाफाश किया है।”

जेठमलानी ने जो स्क्रीनशॉट साझा किया वह 2005 में आई उनकी किताब ‘मेकिंग सेंस ऑफ चिंडिया: रिफ्लेक्शंस ऑन चाइना एंड इंडिया (Making sense of Chindia: Reflections on China and India)’ की है। पुस्तक में जयराम रमेश ने चीन के इतिहास, संस्कृति और अन्य पहलुओं में अपनी रुचि का उल्लेख किया है। उन्होंने इस बारे में बताया है कि कैसे कई मौकों पर प्रतिस्पर्धा और टकराव के बावजूद भारत और चीन स्वाभाविक दुश्मन नहीं बने हैं।

किताब में इस बारे में भी विस्तार से बताया गया है कि भारत और चीन के बीच संबंध कैसे फायदेमंद हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि 130 पेज की किताब में हुआवेई का चार बार इसका उल्लेख किया गया है।

महेश जेठमलानी जिस चैप्टर का स्क्रीनशॉट साझा किया है, वह वह ‘द सी-आई-ए ट्रायंगल (The C-I-A Triangle)’ से था। भारत और अमेरिका बनाम चीन को संबंध को स्पष्ट करने की आवश्यकता के बारे में बताते हुए, वह बताते हैं कि कैसे अमेरिका-भारत समझौता होने के बावजूद, भारत और चीन के बीच व्यापार में उछाल आया है। उन्होंने विशेष रूप से हुआवै का उल्लेख किया और कहा, “चीनियों को लगता है कि भारत व्यापार वीजा देने, चीनी FDI को मंजूरी देने और सार्वजनिक निविदाओं में से मिले कॉन्ट्रैक्ट को अनावश्यक रूप से बाधित कर रहा है। चीनी नेटवर्किंग प्रमुख हुआवेई टेक्नोलॉजीज की बेंगलुरु में एक बड़ी उपस्थिति है और इसका विस्तार करना चाहती है।”

वहीं आगे ‘वाजपेयी गोज टू चाइना (Vajpayee Goes to China)’ शीर्षक वाले चैप्टर में, जयराम रमेश ने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय पहलों के मद्देनजर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने चीनी कंपनियों, विशेष रूप से हुआवै के भारत में हतोत्साहित होने के बारे में भी बात की । उन्होंने आगे के चैप्टर में फिर से उल्लेख किया कि हुआवै ने बेंगलुरु में 500 भारतीय इंजीनियरों को नियुक्त किया है और निराशा व्यक्त की कि भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों ने कंपनी के बारे में चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने लिखा, “जब भारत में चीनी निवेश की बात आती है तो हम पुरानी मानसिकता के कैदी हो जाते हैं।”

चीनी कंपनी हुआवै के लिए जयराम रमेश के प्यार ने 2010 में सुर्खियाँ बटोरी थीं। यह नहीं भूलना चाहिए कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत में हुआवै के निवेश के संबंध में दिए गए उनके एक बयान पर नाराजगी व्यक्त की थी।

ऑस्कर के लिए नॉमिनेट होने वाला पहला भारतीय गाना बना ‘RRR’ का ‘नाटू-नाटू’, गोल्डन ग्लोब के बाद SS राजामौली की फिल्म के लिए दोहरी ख़ुशी

‘RRR’ फिल्म के गाने नाटू-नाटू ने गोल्डन गलोब्स अवार्ड के बाद अब एक और इतिहास रच दिया है। फिल्म के गाने नाटू-नाटू को 95वें अकादमी पुरस्कार अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया है। इस गाने को ओरिजनल सॉन्ग के लिए नॉमिनेट किया गया है। ‘द एकेडमी’ ने ट्वीट कर यह जानकारी दी।

वहीं ‘RRR’ फिल्म ने ट्वीट कर कहा,”हमने इतिहास रच दिया है। यह साझा करते हुए गर्व और सौभाग्य की बात है कि नाटू-नाटू को 95वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ मूल गीत के लिए नामांकित किया गया है।” रिज अहमद और एलिसन विलियम्स ने अकादमी अवॉर्ड के लिए नामांकन की घोषणा की है।

वहीं इससे पहले बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ने वाली एसएस राजामौली की फिल्म ‘RRR’ ने गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड (Golden Globe Awards) में भी इतिहास रचा था । फिल्म के गाने ‘नाटू-नाटू’ को बेस्ट ऑरिजिनल सॉन्ग का पुरस्कार मिला था। इस गाने के तेलुगू वर्जन को एमएम कीरावानी (MM Keeravaani) ने कंपोज किया है।

कीरावानी ने गोल्डन ग्लोबन अवॉर्ड ग्रहण करते हुए ख़ुशी का इजहार किया था और फिल्म के कलाकार एन टी रामाराव जूनियर और रामचरण को गाने में शानदार प्रस्तुति देने के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था, “राम चरण और रामा राव को पूरी ताकत के साथ डांस करने के लिए शुक्रिया।” इस गाने ने इस श्रेणी में बड़े-बड़े दिग्गजों को हराकर यह पुरस्कार प्राप्त किया है। ‘नाटू-नाटू’ के साथ टेलर स्विफ्ट और लेडी गागा समेत कई दिग्गजों के गाने को भी पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया था।

पादरी ने चर्च में की सेक्स पार्टी, फिर कर ली आत्महत्या

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के एक चर्च में सेक्स पार्टी का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद पोप ने जाँच के आदेश दिए हैं। सेक्स पार्टी पादरी माइकल मैककॉय ने लॉकडाउन के दौरान आयोजित की थी। सेक्स पार्टी का आरोप जिस पादरी पर लगा है, उसने साल 2021 में आत्महत्या कर ली थी। मामले की जाँच लीवरपूल के आर्कबिशप को सौंपी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सेक्स पार्टी का खुलासा पूर्व पादरी रॉबर्ट बयर्ने के इस्‍तीफे की जाँच के दौरान हुआ है। जाँच में सामने आया कि रॉबर्ट ब्रायन के इस्तीफे के बाद मैककॉय पादरी बनने जा रहा था।

हालाँकि, इस बीच दिसंबर 2020 में मैककॉय ने चर्च के अंदर बने अपने घर में कुछ ईसाइयों को कथित तौर पर सेक्‍स पार्टी के लिए तैयार किया। कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लंदन में लॉकडाउन लगा हुआ था। ऐसे में चर्च खाली पड़ा था। मौके का फायदा उठाकर मैककॉय ने यह पार्टी आयोजित की थी।

दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में इससे पहले कोई भी शिकायत नहीं हुई थी। लेकिन, मामले का खुलासा होने के बाद मैककॉय के खिलाफ गवाही देने के लिए बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं।

‘संडे टाइम्‍स’ ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि मामले का खुलासा होने के बाद कई लोगों ने इस मामले की शिकायत की है। मैककॉय के खिलाफ गवाही देने वालों का आरोप है कि उसने चर्च के अंदर बने अपने घर में सेक्‍स पार्टी आयोजित की थी।

हालाँकि,ऑपइंडिया इस आरोप की पुष्टि नहीं करता। लेकिन, ये आरोप काफी हद सही इसलिए लग रहे हैं क्योंकि पादरी मैककॉय पर बच्चों के यौन शोषण करने का आरोप लगा था। इन आरोपों के बाद जब पुलिस ने उसके खिलाफ जाँच शुरू की तो 4 दिन बाद ही उसने आत्महत्या कर ली थी। बता दें कि ‘सेक्स पार्टी’ की जाँच कर रहे अधिकारियों को इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि मैककॉय से पहले चर्च के पादरी रहे रॉबर्ट ब्रायन इसमें शामिल हुए थे या नहीं। चर्च में हुई सेक्स पार्टी के इस खुलासे के बाद पूरी दुनिया में इसकी आलोचना हो रही है।

DU की नाबालिग छात्रा से जहाँगीरपुरी के शाकिब ने किया बलात्कार, धर्मांतरण-निकाह का भी दबाव: घर पर की पत्थरबाजी, अश्लील वीडियो से कर रहा ब्लैकमेल

देश की राजधानी दिल्ली में एक नाबालिग लड़की से रेप और इस्लामी धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया है। पीड़िता डीयू (Delhi University) की छात्रा है। नाबालिग का आरोप है कि जहाँगीरपुर का रहने वाला शाकिब उसे निकाह के लिए ब्लैकमेल कर रहा है। शाकिब पर पीड़िता के अश्लील फोटो और वीडियो बनाने का भी आरोप है। शाकिब पर रविवार (22 जनवरी 2023) को लड़की के घर पर पत्थरबाजी करने का भी आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपित पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। FIR होने के बाद शाकिब फरार हो गया है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की शिकायत पुलिस में रविवार-सोमवार की गई है। शिकायत करने वाली नाबालिग लड़की ने बताया कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा है। कुछ दिनों पहले अपने एक परिचित दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाक़ात जहाँगीरपुरी के शाकिब से हुई। कुछ दिनों की बातचीत के बाद शाकिब और लड़की में नजदीकियाँ बढ़ गईं। इसी बीच शाकिब ने लड़की को अपने जहाँगीरपुरी स्थित घर पर बुलाया। लड़की वहाँ गई तो कोई और मौजूद नहीं था। लड़की को विश्वास में ले कर शाकिब ने उसे जूस पीने के लिए दिया।

पीड़िता का आरोप है कि शाकिब ने जूस में कोई नशीली चीज मिला रखी थी। जूस पीते ही लड़की बेहोश हो गई। आरोप है कि इसी बेहोशी के दौरान शाकिब ने उसे से रेप किया और उसकी अश्लील वीडियो बना ली। छात्रा को अपने सात हुई अनहोनी का एहसास होश में आने के बाद हुआ। लड़की का कहना है कि उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो दिखा कर तब से शाकिब उस से 2-3 बार और रेप कर चुका है। शिकायत में बताया गया है कि शाकिब ने अपनी बात न मानने पर लड़की के फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी है। पीड़िता का कहना है कि उसने डर कर अपने माता-पिता से इन बातों को छिपा रखा था।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे बताया है कि शाकिब उस पर खुद से निकाह करने और धर्म बदलने का भी दबाव डाल रहा है। जब वह ऐसा करने से मना करती है तब उसे अंजाम ठीक न होने की धमकियाँ दी जाती हैं। शाकिब की हरकतों से तंग आ कर लड़की ने उस से अपनी बातचीत भी बंद कर ली थी। इस बात से नाराज हो कर आरोपित ने रविवार (22 जनवरी, 2023) को लड़की के घर पर पत्थर और अंडे फेंके। आख़िरकार पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी बात बता दी। लड़की द्वारा मिली जानकारी के बाद उसके माता-पिता ने पुलिस को बुलाया और शाकिब के खिलाफ केस दर्ज करवाया।

पुलिस ने मिली शिकायत पर आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 328, 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज होते ही शाकिब फरार हो गया। पुलिस का कहना है कि आरोपित को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ऑपइंडिया ने इस मामले की पुष्टि के लिए दिल्ली पुलिस की नार्थ वेस्ट DCP से बात की। DCP ने हमें बताया कि जहाँगीरपुरी थाने में पॉक्सो का एक केस दर्ज हुआ है। हालाँकि, उन्होंने इस मामले में अधिक जानकारी न होने की बात कही। से बात करते हुए ACP जहाँगीरपुरी ने बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी के प्रयास चल रहे हैं।