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‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद, भिंडरांवाले शहीद’: ऑस्ट्रेलिया में एक और हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी हमला, 15 दिन में तीसरी घटना

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में खालिस्तान समर्थकों ने एक और हिंदू मंदिर में हमला किया है। हमलावरों ने यहाँ के श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में तोड़फोड़ कर भारत विरोधी और खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे हैं। हिंदू मंदिर में बीते 10 दिनों में यह तीसरा हमला है। इससे पहले हुए हमलों में भी खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे गए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में रविवार (22 जनवरी 2023) की रात को हमला हुआ। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद, मंदिर की दीवारों में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए हैं। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।

बता दें कि जरनैल सिंह भिंडरांवाले एक खूँखार खालिस्तानी आतंकी था। वह 20,000 से अधिक हिंदू और सिखों की हत्या के लिए जिम्मेदार था। हालाँकि, अलगाववादी खालिस्तानी भिंडरांवाले को संत बताकर उसका महिमामंडन करते रहते हैं।

बता दें कि इससे पहले गत सोमवार (16 जनवरी 2023) को मेलबर्न के कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के दौरान मंदिर की दीवारों पर  ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

वहीं, गत 12 जनवरी को भी मेलबर्न में ही BAPS स्वामीनारायण मंदिर में खालिस्तान समर्थकों ने तोड़-फोड़ की थी। इसके बाद मंदिर की दीवार ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।

बता दें कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हो रहे इन हमलों की कड़ी निंदा की थी। साथ ही, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया सरकार से इस पर जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया था। साथ कहा था कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

यही नहीं, भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ फैरेल ने भी इन घटनाओं पर दुख जताया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “भारत की तरह ही ऑस्ट्रेलिया भी एक गौरवशाली और बहुसांस्कृतिक देश है। मेलबर्न में दो हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ से हम स्तब्ध हैं। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी जाँच कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए हमारा मजबूत समर्थन है। लेकिन, इसमें घृणित भाषा और हिंसा को जगह नहीं है।”

‘मोदी हिटलर जैसे…कुछ ही समय बचा है’ : कर्नाटक के पूर्व CM सिद्धारमैया ने PM के लिए निकाले बिगड़े बोल, कहा- 100 बार भी कहें तो भी नहीं लौटेगी भाजपा

कभी माँस खा कर मंदिर जाने की वजह से विवादों में रहे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘एडोल्फ हिटलर’ कह कर सम्बोधित किया है। उन्होंने मोदी के शासन काल की तुलना मुसोलनी और फ्रांसिस्को फ्रेंकों के समय से की। भाजपा को भगवा पार्टी बताते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि अब इस सरकार का शासन बस कुछ ही दिन बचा है। रविवार (22 जनवरी 2023) को दिए इस विवादित बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार भी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिद्धारमैया ने उडुपी में एक समारोह के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि अगर मोदी 100 बार भी कहें कि भाजपा सत्ता में वापस आ रही है तो भी ऐसा नहीं होने वाला। उन्होंने आगे कहा कि हिटलर भी कुछ दिनों तक धूमधाम से घूमता था इसी तरह से मोदी का भी अभी कुछ दिनों तक समय रहेगा। इसी बयान में सिद्धारमैया ने मुसोलिनी और फ्रेन्कों का भी नाम लिया और उनकी तुलना मोदी सरकार के शासन काल से की।

इस बयान से कुछ समय पहले ही सिद्धारमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। तब उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के आगे भाजपा नेता ‘पपीज’ की हैसियत रखते हैं और सब उनके आगे डर से काँपते हैं।

भाजपा आने किया पलटवार

सिद्धारमैया के इस बयान पर भाजपा ने पलट कर जवाब दिया है। मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा कि पूरा देश प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व से परिचित है और ऐसे बयानों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। मुख्यमंत्री ने गुजरात चुनावों में सिद्धारमैया की बयानबाजी की याद दिलाते हुए कहा कि उनके ऐसे ही बयान से गुजरात में भाजपा को फायदा हुआ था और वैसा ही यहाँ कर्नाटक में भी होगा।

वहीं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सिद्धारमैया ऐसे नेता है जो मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना अध्यक्ष मानते ही नहीं। प्रह्लाद जोशी के मुताबिक पहले सिद्धारमैया को कॉन्ग्रेस पार्टी में अपने स्टैंड को क्लियर करना चाहिए। नरेंद्र मोदी को एक निर्वाचित नेता बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने खड़गे को सिर्फ नाममात्र का पार्टी प्रमुख बताया।

गौरतलब है कि इसी साल कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बताया जा रहा है।

क्रिकेट के बाद हॉकी में भी न्यूजीलैंड ने तोड़ा भारत का सपना: वर्ल्ड कप से बाहर हुई भारतीय टीम, बराबरी के स्कोर के बाद पेनल्टी शूटआउट में मिली हार

भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team) को न्यूजीलैंड के साथ क्रॉसओवर मैच में हार का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही न्यूजीलैंड की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुँच गई है और मेजबान भारतीय टीम का वर्ल्ड कप 2023 (Hockey World cup 2023) में सफ़र यहीं समाप्त हो गया है।

बेहद करीबी मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां भारत को 5-4 से हार मिली। यह पहली बार नहीं है जब न्यूजीलैंड ने भारतीय खेल प्रेमियों का दिल दुखाया है। कई महत्वपूर्ण मौकों पर भारतीय क्रिकेट टीम को भी न्यूजीलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा है।

दोनों टीम के बीच मुकाबला खेल के फुल टाइम तक हुआ। दोनों टीमों ने जबर्दस्त खेल दिखाया और मुकाबला 3-3 के स्कोर पर बराबरी पर रुक गया। इसके बाद मैच का फैसला फैसला पेनेल्टी शूट आउट से होना था। पेनेल्टी शूट आउट में भी दोनों टीमों के बीच टक्कर देखने को मिली लेकिन बाज़ी न्यूजीलैंड ने मार ली और मुकाबले को 5-4 से अपने नाम कर लिया। इसी के साथ न्यूजीलैंड की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुँच गई है और भारत का वर्ल्ड कप का सफर समाप्त हो चुका है।

वहीं मैच में मिली भारत की हार के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग कमेंट करने लगे हैं। एक यूजर ने ट्वीट का कहा, “क्रिकेट हो या हॉकी, भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम मौके पर हार का सिलसिला लगातार बना हुआ है।”

उल्लेखनीय है कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम भी कई मौकों पर महत्वपूर्ण मैचों भारतीय क्रिकेट टीम को भी हरा चुकी है और भारतीय फैन्स का दिल तोड़ चुकी है। वनडे वर्ल्ड कप 2019 के सेमीफाइनल में कीवी टीम ने भारत को हराया था, वहीं वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में टीम इंडिया को न्यूजीलैंड ने हराया था। इसके आलावा T-20 मैचों में भी भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड शानदार रहा है।

मुस्लिम बनने से इनकार किया तो अपहरण कर के 3 दिनों तक रेप: पाकिस्तान में हिंदू महिला से दरिंदगी, पुलिस ने अब तक नहीं की कोई कार्रवाई

पाकिस्तान में एक विवाहित हिंदू महिला से रेप करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में एक हिंदू महिला को जबरन इस्लाम मजहब अपनाने के लिए कहा जा रहा था। महिला ने जब धर्म परिवर्तन से इनकार किया तो उसका अपहरण कर लिया गया और फिर तीन दिनों तक उसके साथ रेप किया गया।

वहीं महिला ने घटना के संबंध में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर अपनी आपबीती बताई। महिला ने कहा कि उमरकोट जिले के समारो शहर में उसके साथ रेप किया गया। महिला ने आरोप लगाया कि इब्राहिम मंगरियो, पुन्हो मंगरियो और उसके साथी ने उसका अपहरण कर लिया। ये लोग उसपर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे। बकौल महिला, जब उसने इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार किया तो आरोपितों ने उसके साथ तीन दिन तक हैवानियत की और उसके साथ रेप किया।

वहीं भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पीड़िता लड़की के वीडियो को ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट के कैप्शन में लिखा, “समारो शहर में हिंदू लड़की के अपहरण के बाद उसका ज़बरन धर्म परिवर्तन किया गया। पाकिस्तान में अलपसंख्यकों पर ऐसे अत्याचार की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही, फिर भी पाकिस्तान सरकार चुप्पी साधे बैठी है।”

महिला ने वीडियो में यह भी कहा कि पुलिस ने अब तक आराेपितों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है। वहीं एक स्थानीय हिंदू नेता ने बताया कि मीरपुखास पुलिस ने अब तक आरोपितों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया है। स्थानीय नेता ने बताया कि पीड़िता और उसका परिवार रविवार (22 जनवरी, 2023) तक पुलिस स्टेशन के बाहर ही बैठा था। पीड़ित महिला ने यह भी बताया कि वह किसी तरह से आराेेपितों के चंगुल से बचकर अपने घर आने में सफल रही और फिर परिजनों के साथ पुलिस स्टेशन पहुँची।

चैटबॉट पास कर गया MBA का फाइनल एग्जाम, चिंता में दुनिया भर के विशेषज्ञ: ‘Chat GPT’ ने किया कमाल, Google को भी इससे महसूस होता है खतरा

तकनीकी विशेषज्ञ अक्सर ये कहते हैं कि आने वाला ज़माना ‘आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI)’ का है। वैसे भी, आजकल भी बोलने से सब कुछ हो रहा है। एलेक्सा से लेकर गूगल तक इसके उदाहरण हैं। अब इस दिशा में एक ऐसी खबर आई है, जो चौंकाने वाली है। ‘OpenAI’ कंपनी द्वारा लॉन्च किए गए चैटबॉट ‘Chat GPT’ ने MBA की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। अब विशेषज्ञ भी हैरान हैं कि ऐसे AI टूल्स का प्रयोग कैसे किया जा सकता है।

पेन्सिलवेनिया स्थित ‘Wharton School of Business’ के प्रोफेसर क्रिस्चियन टर्वीएश्च ने चिंता जताई है कि अब असाइनमेंट्स लिखते समय छात्र इसका गलत प्रयोग भी कर सकते हैं। हाल ही में उन्होंने एक रिसर्च पेपर जारी की गई है, जिसमें बताया गया है कि MBA की परीक्षा में ‘Chat GPA’ का परफॉरमेंस कैसा रहा। MBA के ‘ऑपरेशन्स मैनेजमेंट’ का फाइनल एग्जाम इस चैटबॉट को दिलाया गया था। केस स्टडीज पर आधारित सवालों पर भी इसने अच्छा प्रदर्शन किया है।

हालाँकि, उन्होंने कहा कि ज्यादा एडवांस प्रोसेस एनालिसिस के सवालों पर ज़रूर इसे कुछ दिक्कतें आईं। लेकिन, परीक्षा में उसने B से लेकर B- तक का ग्रेड हासिल करने की क्षमता दिखा दी। इसने लीगल डाक्यूमेंट्स तैयार करने में अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसके बाद अंदेशा जताया जा रहा है कि ये अब बार की परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण कर सकता है। ये सब तब, जब ये AI टूल अभी अपने विकास के शुरुआती चरण में ही है।

विशेषज्ञों ने कहा है कि ‘Chat GPT’ फ़िलहाल कहीं नहीं जा रहा है। उन्होंने प्रोफेसरों को खुद को इससे परिचित करने की सलाह देते हुए कहा कि ये भविष्य में और बेहतर होता जाएगा। बता दें कि माइक्रोसॉफ्ट ‘OpenAI’ में 10 बिलियन डॉलर (80976.25 करोड़ रुपए) का निवेश करने जा रहा है। गूगल इसे अपना प्रतिद्वंद्वी मान रहा है और इसके मुकाबले टूल्स विकसित करने में लग गया है। कॉपोरेट वर्ल्ड में ये क्रांति ला सकता है, जैसे कैलकुलेटर के अविष्कार से पहले सारी गणनाएँ मैन्युअली की जाती थीं।

‘सुप्रीम कोर्ट ने संविधान को हाईजैक कर लिया, छीन ली चुने हुए संसद की बादशाही’: केंद्रीय कानून मंत्री ने शेयर किया पूर्व जज का वीडियो

देश के कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कॉलेजियम विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज आरएस सोढ़ी (RS Sodhi) का वीडियो शेयर किया है। वीडियो में पूर्व जज सोढ़ी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘संविधान को हाईजैक’ करने की बात कहते हैं। रिजिजू ने कहा कि हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन हमारा संविधान सर्वोच्च है।

रिजिजू ने पूर्व जज आरएस सोढ़ी का वीडियो शेयर करते हुए कहा कहा, “एक जज की नेक आवाज: भारतीय लोकतंत्र की असली खूबसूरती इसकी सफलता है। जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से स्वयं शासन करती है। चुने हुए प्रतिनिधि लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं और कानून बनाते हैं। हमारी न्यायपालिका स्वतंत्र है लेकिन हमारा संविधान सर्वोच्च है।”

उन्होंने आगे कहा, “वास्तव में अधिकांश लोगों के ऐसे ही विचार हैं। यह केवल वे लोग हैं जो संविधान के प्रावधानों और लोगों के जनादेश की अवहेलना करते हैं और सोचते हैं कि वे भारत के संविधान से ऊपर हैं।”

दरअसल किरेन रिजिजू ने जिस जज आरएस सोढ़ी का वीडियो शेयर किया था, उन्होंने ‘लाइव स्ट्रीट लॉ’ को दिए साक्षात्कार में कॉलेजियम सिस्टम पर खुल कर बात की थी। उन्होंने कहा था, “जब संविधान बना था तो इसमें एक सिस्टम था। इसमें बताया गया था कि जज कैसे अपॉइंट होते हैं। संविधान में संशोधन की प्रणाली को जो असंवैधानिक बता रहे हैं, तो क्या वह संविधान में संशोधन कर सकते हैं? यह संशोधन तो पार्लियामेंट ही करेगा, लेकिन मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली दफा संविधान को ही हाइजैक कर लिया है। अब वे कहते हैं हम खुद को अपॉइंट करेंगे और इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं होगा।”

इंटरव्यू में पूर्व जज सोढ़ी आगे कहते हैं, “हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत नहीं आता है। ये हर राज्य की इंडीपेंडेंट बॉडी है। अब देखिए, हाईकोर्ट के जज को सुप्रीम कोर्ट के जज अपॉइंट करते हैं। और सुप्रीम कोर्ट के जज कहाँ से अपॉइंट होते हैं, यहीं से अपॉइंट होते हैं। ऐसे में ये हो गया है कि जो हाई कोर्ट के जज खुद को सुप्रीम समझ रहे थे, वे सब सुप्रीम कोर्ट की और देखना शुरू कर देते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट कहता है कि इसको यहाँ भेज दो, इसको वहाँ भेज दो। इसका वहाँ ट्रांसफर कर दो। अब हाईकोर्ट तो सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत हो गया लेकिन संविधान ने तो ऐसा कभी कहा ही नहीं।”

उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट अपने दायरे में सुप्रीम है, हाईकोर्ट अपने दायरे में सुप्रीम था, लेकिन अब हाईकोर्ट के सारे जज सुप्रीम कोर्ट के पीछे पूँछ हिलाते हैं। यह कोई अच्छी चीज़ है क्या? मेरे हिसाब से ये बादशाही खुद सुप्रीम कोर्ट ने ले ली, जो बादशाही संसद की थी।”

कोई उँगली के इशारों से सामान उठा कर रख देता था, तो किसी के चमत्कारों को ओशो ने भी स्वीकारा: आस्था के रहस्यों को कभी नहीं उजागर कर सकता विज्ञान

सोचने वाली बात है कि बागेश्वर धाम का इतना मुखर विरोध क्यों हो रहा है? भारत आस्था पर आधारित देश रहा है हमेशा से, और यहाँ ऐसे चमत्कार भी अक्सर घटित होते रहे हैं। जब वैज्ञानिक व्यवस्थाओं ने अपना दम तोड़ दिया, तब आस्था से कई ऐसे असंभव कार्य भी घटित हुए हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कई दिनों से निरंतर बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के विरोध में मुखर होते स्वरों को आप सब महसूस कर रहे होंगे।

मैं न तो उनसे कभी मिला हूँ और न ही उनसे मिलने की कोई आकांक्षा है। लेकिन, उनके बोलने का बेबाक और निश्छल अंदाज भाता जरूर है। उनके बोलने में कोई बल तो महसूस होता है, अन्यथा इतने विश्वास के साथ कोई बात नहीं बोली जा सकती है। जहाँ तक चमत्कार की बात है तो नास्त्रेदमस के बारे में कहा जाता है कि उसे भविष्य की घटनाएँ दिखाई देती थीं, जिसके आधार पर उसने कई भविष्यवाणियाँ कीं। आज भी उसकी भविष्यवाणियों की चर्चाएँ होती रहती है।

इटली के मीराबेली जो बाद में भविष्यवक्ता बने, एक जूते की दुकान में काम करते थे और किसी ग्राहक को जो भी जूता दिखाना होता था उसे अपने उँगली के इशारे मात्र से उठाते और यथा स्थान पहुँचा देते थे। यह चमत्कार नहीं था तो क्या था? देवराहा बाबा और मेहर बाबा के चमत्कार किसी से छिपे नहीं हैं। मेहर बाबा के चमत्कारों की चर्चा ओशो जैसे तार्किक व्यक्ति ने की है और स्वीकारा भी है। वैदिक साहित्य में अष्ट सिद्धियों का जिक्र आता है और इन सिद्धियों से यह सब संभव है।

मंत्र बल और साधना से इन सिद्धियों को पाया जा सकता है। पश्चिम और उसके मानसपुत्रों का हमेशा से प्रयास रहा है सनातन की हर परंपरा को आडंबर साबित करना। जो भूत-प्रेत को अंधविश्वास बताते नहीं थकते थे, लेकिन आज उनके यहाँ प्रयोगशालाएँ बनी हुई है भूत-प्रेतों पर रिसर्च हेतु। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी आडंबरी हैं और अंधविश्वास फैला रहे हैं या नहीं, यह शोध का विषय है और आगे भविष्य में कभी न कभी सामने आ जाएगा।

मैं इनका विरोध करने वालों से सिर्फ यह कहना चाहता हूँ कि यह सिद्ध पुरुष हों या न हों आतंकवादी नहीं हैं। हैरत इस बात पर है कि जो आतंकियों के विरोध से हमेशा कतराते हैं, लेकिन बागेश्वर धाम के महंत का इतना मुखर विरोध कर रहे हैं जैसे इनकी भैंसें छोर ली हों उन्होंने। और हाँ, आस्था के विषय को विज्ञान की कसौटी पर नहीं तोला जा सकता क्योंकि विज्ञान इतना विकसित कभी नहीं हो सकता जो पूरी तरह से इस रहस्य को उजागर सके।

इसीलिए, जिनको सियासत देखना है हर विषय में उनसे अनुरोध कि और भी विषय हैं उन पर हिम्मत करिए कभी, सिर्फ़ सनातन को टार्गेट करने से परहेज़ करिए।

(इस लेख को पं. राजू शर्मा नौंटा (Surendra Pandit) ने लिखा है)

रहने के लिए कोई और जगह देखें मुस्लिम… स्वीडन में तुर्की के दूतावास के सामने खुलेआम जलाया गया कुरान, भड़के इस्लामी मुल्क

एक दूसरे के धूर विरोधी तुर्की और स्वीडन के बीच इस बार कुरान को लेकर विवाद गहरा गया है। NATO में स्वीडन को शामिल करने के बीच तुर्की बाधा बना हुआ है। इस बीच स्वीडन में कुरान जलाने के बाद तुर्की और स्वीडन के रिश्ते में और कड़वाहट आ गई है। तुर्की ने स्वीडन के रक्षा मंत्री की यात्रा को रद्द कर दिया है।

स्वीडन के धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘हार्ड लाइन’ के नेता रासमस पलुदान (Hard Line Leader Rasmus Paludan) ने शनिवार (21 जनवरी 2023) तो स्टॉहोम में तुर्की के दूतावास के सामने मुस्लिमों की दीनी किताब कुरान को सार्वजनिक तौर पर जलाया। इतना ही नहीं, इस दौरान पलुदान ने इस्लाम और आव्रजन को लेकर एक घंटे तक भाषण भी दिया।

लगभग 100 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए पलुदान ने कहा, “अगर आपको (मुस्लिमों को) लगता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए तो आप रहने के लिए कोई और जगह देखिए।” उन्होंने इस्लाम से स्थानीय लोगों को होने वाली दिक्कत के बारे में बात की।

दरअसल, तुर्की के दूतावास के सामने इस प्रदर्शन के लिए पलुदान ने बकायदा पुलिस से परमीशन ली थी। पुलिस ने ना सिर्फ अनुमति दी, बल्कि प्रदर्शन स्थल पर पलुदान और अन्य प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा भी दी थी। प्रदर्शन के दौरान पलुदान ने लाइटर से कुरान को जलाया।

प्रदर्शन से एक दिन पहले पुलिस द्वारा अनुमति देने के कारण तुर्की बिफर गया था। उसने स्वीडन के राजदूत को समन भेज कर तलब कर लिया था। तुर्की ने राजदूत से कहा कि पलुदान को प्रदर्शन की अनुमति क्यों दी गई। इस महीने में तुर्की ने दो बार तलब किया। इसके पहले 12 जनवरी को स्वीडन में तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयब आर्दोआन का पुतला जलाने पर स्वीडन के राजदूत को समन भेजा गया था।

बता दें कि पलुदान पिछले साल मई में कुरान जलाओ यात्रा शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने स्वीडिश लोगों से इसे जलाने का आग्रह किया था। इसके बाद पूरे स्वीडन में दंगे फैल गए थे। इस दंगे में कई लोगों की मौत हो गई थी। इतना ही नहीं तुर्की और पाकिस्तान स्वीडन से नाराज हो गए थे।

21 जनवरी को पलुदान द्वारा तुर्की के दूतावास के सामने कुरान जलाने के बाद तुर्की ने स्वीडन के रक्षा मंत्री की प्रस्तावित तुर्की यात्रा को रद्द कर दिया। स्वीडन के रक्षामंत्री पाल जॉनसन 27 जनवरी 2023 को तुर्की आने वाले थे।

इस यात्रा के दौरान जॉनसन स्वीडन के NATO में प्रवेश पर तुर्की द्वारा रोक लगाने को लेकर चर्चा करने वाले थे। दरअसल, स्वीडन अमेरिका और पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन NATO में शामिल होना चाहता है, लेकिन तुर्की बार-बार इसमें बाधा डाल देता है। NATO का नियम है कि इसमें कोई भी नया सदस्य तभी शामिल किया जा सकता है, जब उसमें सभी सदस्य देशों की सहमति शामिल हो।

कुरान जलाने की हालिया घटना के बाद तुर्की के रक्षामंत्री हुलुसी अकार ने कहा कि इस बैठक को इसलिए रद्द कर दिया गया, क्योंकि इसने अपना महत्व और अर्थ खो दिया था। तुर्की ने इसे हेट क्राइम और इस्लामोफोबिया बताया। तुर्की के अलावा कुरान जलाने की घटना की पाकिस्तान, सऊदी अरब, जॉर्डन और कुवैत ने भी निंदा की।

वहीं, स्वीडन की सरकार ने इस प्रदर्शन से खुद को अलग रखा है। स्वीडिश सरकार का कहना है कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विशेष महत्व है। स्वीडन के रक्षामंत्री जॉनसन ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच फिर से एक बार बातचीत होगी दोनों देश सामरिक मसले पर चर्चा कर सकेंगे।

तुर्की ना सिर्फ स्वीडन को NATO सदस्य बनने से रोक रहा है, बल्कि फिनलैंड को भी वह संगठन की सदस्यता नहीं लेने दे रहा है। 30 सदस्यों वाले NATO के 28 सदस्यों का इन्हें समर्थन मिल चुका है। सिर्फ हंगारी और तुर्की ही दोनों देशों को समर्थन नहीं दे रहे हैं। हालाँकि, हंगरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों को समर्थन देगा। हालाँकि, तुर्की ऐसा कोई वादा नहीं कर रहा है।

दरअसल, तुर्की स्वीडन पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) से संबंध होने का आरोप लगाता है। इसके साथ ही वह स्वीडन से इस संगठन के नेता मौलवी फतुल्लाह गुलेन के प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है। कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी तुर्की से अलग कुर्दों के लिए मुल्क की माँग करती है।

अलग देश के लिए कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी के सशस्त्र आंदोलन को तुर्की आतंकवादी गतिविधि कहता है। तुर्की ने इस संगठन को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है। तुर्की के अलावा, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी उसे आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

तुर्की का कहना है कि PKK के खिलाफ स्वीडन संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं, स्वीडन में कुर्द और PKK के समर्थन में लोग सड़कों पर निकल आए, जबकि तुर्की में लोग स्वीडन में कुरान जलाने की घटना के बाद सड़कों पर हैं।

‘बकवास किताब है रामचरितमानस, इस पर लगे बैन’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम पर भी उगला ज़हर, कहा – सत्यानाश हो ऐसे धर्म का

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव के बाद अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी रामचरितमानस के खिलाफ विवादित बयान दिया है। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिन्दुओं के इस ग्रंथ को बकवास किताब बताते हुए बैन करने की माँग कर डाली है। मौर्य ने रामचरित मानस को तुलसीदास द्वारा अपनी ख़ुशी के लिए लिखी गई किताब करार दिया है। स्वामी प्रसाद ने यह बयान रविवार (22 जनवरी, 2023) को दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भले ही वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं लेकिन जाति के नाम पर जो भी विशेष वर्ग को अपमानित करे उस पर आपत्ति जताते हैं। मौर्य ने सीधे रामचरितमानस का नाम लेते हुए कहा कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं और इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग की। उन्होंने आगे कहा कि अगर वो अंश न हट पाएँ तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

स्वामी प्रसाद ने अपनी बयानबाजी इसके बाद भी जारी। उन्होंने कहा कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ मानते ही नहीं हैं क्योकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण भले ही कितना गलत करे वो सही और शूद्र कितना भी सही करे वो गलत होता है। मौर्य के अनुसार, अगर उसे ही धर्म कहते हैं वो ऐसे धर्म का सत्यानाश हो और ऐसे धर्म को वो दूर से नमस्कार करते हैं।

अपने बयान में सपा नेता ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री पर भी नकारात्मक टिप्पणी की। स्वामी प्रसाद मौर्य के मुताबिक, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म का प्रचार नहीं कर रहे हैं बल्कि उसे दफनाने का काम कर रहे हैं। धीरेन्द्र शास्त्री के कार्यों को ढोंग और ढकोसला बताते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रशासन से उनके ऊपर अंधविश्वास फैलाने के आरोप में एक्शन लेने की भी माँग की। इसी दौरान उन्होंने साल 2024 लोकसभा चुनावों में भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश में 80 सीटें जीतने के दावे को ‘मुंगेरीलाल का सपना’ बताया।

नील आर्मस्ट्रांग के 19 मिनट बाद चाँद पर जिन्होंने रखा था कदम, उन्होंने 93 की उम्र में रचाई चौथी शादी: पहली शादी को हो गए हैं 69 साल

चाँद की सतह पर कदम रखने वाले दुनिया के दूसरे व्यक्ति बज एल्ड्रिन (Buzz Aldrin) ने 93 वर्ष की आयु में चौथी शादी की है। एल्ड्रिन 1969 में ‘अपोलो 11’ स्पेस फ्लाइट (Apollo 11 Space Flight)  के पायलटों में से एक थे। उन्होंने मिशन के कमांडर नील आर्मस्ट्रांग (Neil Armstrong) के बाद चंद्रमा की सतह पर कदम रख इतिहास रच दिया था।

उन्होंने ट्विटर पर शनिवार (21 जनवरी 2023) को अपनी शादी की जानकारी दी। उन्होंने अपनी और अपनी 63 वर्षीय पत्नी एंका फॉर (Anca Faur)  की तस्वीरें साझा कीं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शादी लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया में एक छोटे से समारोह में हुई है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मेरे 93वें जन्मदिन पर, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे लंबे समय के प्यार डॉ. एंका फॉर और मैं शादी के बंधन में बंध गए हैं। हमने लॉस एंजिल्स में एक छोटे से निजी समारोह में शादी की। हम भागे हुए किशोरों की तरह उत्साहित हैं।”

इससे पहले बज एल्ड्रिन ने तीन शादियाँ की थीं, लेकिन उनकी तीनों शादियाँ लंबे समय तक नहीं चल पाई थीं। एल्ड्रिन ‘अपोलो 11’ मिशन के तीन सदस्यीय चालक दल के एकमात्र जीवित सदस्य है। चंद्रमा की सतह पर कदम रखने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग थे। आर्मस्ट्रांग के चन्द्रमा की सतह पर उतरने के 19 मिनट बाद एल्ड्रिन चन्द्रमा पर उतरे थे। 1971 में, पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने नासा से इस्तीफ़ा दे दिया था। उन्होंने 1998 में ‘शेयरस्पेस फाउंडेशन’ की स्थापना की थी।

डॉ. एंका फॉर ने केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की हुई है। वह 2019 से बज़ एल्ड्रिन की कंपनी बज़ एल्ड्रिन वेंचर्स एलएलसी (Buzz Aldrin Ventures LLC) की कार्यकारी उपाध्यक्ष हैं। उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में बज एल्ड्रिन की शादी की चर्चा हो रही है और इस संबंध में किए गए उनके ट्वीट को काफी लाइक्स और कमेंट मिल रहे हैं