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दोस्त प्रकाश की बीवी को भगा ले गया मकबूल, अजमेर शरीफ दरगाह ले जाकर 4 बच्चों की माँ का धर्मांतरण और निकाह: पति को आया हार्ट अटैक

कर्नाटक के गडग से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू व्यक्ति ने मुस्लिम व्यक्ति पर अपनी बीवी को भगा ले जाने और इस्लाम कबूल करवा देने का आरोप लगाया है। महिला 4 बच्चों की माँ है। पीड़ित के मुताबिक उनकी पत्नी को धर्मांतरण से पहले अजमेर दरगाह ले जाया गया था। हिन्दू संगठनों ने पुलिस से आरोपित पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। पुलिस आरोपित मकबूल, महिला और उसकी बेटी को हिरासत में ले कर पूछताछ कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित व्यक्ति का नाम प्रकाश गुजराती है। वह गडग का रहने वाला है और पेशे से सुनार है। प्रकाश की मकबूल से पहली बार मुलाकात गोवा में हुई थी। दोनों ने कर्नाटक का मूल निवासी होने के नाते गोवा में दोस्ती कर ली। गोवा से लौटने के बाद मकबूल ने प्रकाश के बगल ही किराए पर कमरा ले लिया। इस दौरान मकबूल का प्रकाश के घर आना-जाना हो गया। प्रकाश ने बताया कि कुछ ही दिन में मकबूल उसकी पत्नी का अच्छा दोस्त बन गया।

मकबूल कुछ समय बाद प्रकाश की पत्नी हेमवती को अजमेर दरगाह घुमाने ले गया। आरोप है कि यहाँ उसने हेमवती को इस्लाम कबूल करवा दिया और अपने साथ निकाह कर लिया। वापस लौटने के बाद हेमवती घर छोड़ कर मकबूल के साथ भाग गई। जाते समय वह अपनी एक बेटी को भी साथ ले गई। प्रकाश ने पहले तो मकबूल से अपनी पत्नी लौटने की काफी मिन्नतें की लेकिन मकबूल नहीं माना। प्रकाश का आरोप है कि मकबूल ने उसे हेमवती के मुस्लिम बन जाने और अपनी बीवी बताते हुए उस से दूर रहने की धमकी दी।

बताया जा रहा है कि बीवी के जाने और मकबूल की धमकी के बाद प्रकाश को हार्ट अटैक भी आया। उधर प्रकाश के 2 बेटे भी बीमार पड़ गए। प्रकाश की शिकायत पर गडग के पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि आरोपित मकबूल, हेमवती और उसकी बेटी को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं ‘श्रीराम सेना’ ने भी मामले को ‘लव जिहाद’ बताते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। संगठन का कहना है कि कार्रवाई में हीलाहवाली होने पर आंदोलन किया जाएगा।

‘सोमनाथ मंदिर में होता था गलत काम, इसीलिए गजनवी ने तोड़ दिया’: मौलाना साजिद रशीदी का ज़हर, राम मंदिर ध्वस्त करने की भी दी थी धमकी

अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने रविवार (22 जनवरी 2023) को एक बार फिर हिंदू धर्म के खिलाफ जहर उगला है। रशीदी ने कहा है कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर में गलत काम होता था और इसी वजह से मोहम्मद गजनवी ने मंदिर को तोड़ने का काम किया था। साथ ही उसने कहा कि मुगलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।

इसके साथ ही उसने इतिहास की उल्टी गंगा बहाते हुए मुगल आक्रांताओं पर ज्ञान दिया। उसने कहा, ”यह सच है कि मुगल एक काल था। मुगल जितने भी बादशाह हुए हैं, उनका एक दौर था, जमाना था। मुगलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था। इन 800 सालों में जितने भी मुगल बादशाह हुए हैं या दूसरे और बादशाह रहे हों। आप अगर उनकी हिस्ट्री को पढ़ेंगे तो उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।”

रशीदी ने आगे कहा, ”उन्होंने धर्म के नाम पर किसी भी तरह का काम किया भी नहीं। इस तरह के बहुत सारे उदाहरण हैं। जैसे गजनवी के बारे में लोग कहते हैं कि उसने सोमनाथ मंदिर तोड़ा है। जबकि हिस्ट्री ये है कि वहाँ के लोगों ने गजनवी को बताया कि वहाँ आस्था के नाम पर क्या हो रहा है। देवी-देवता के नाम पर क्या हो रहा है। कैसे वहाँ लड़कियों को लापता कर दिया जाता है।”

मौलाना यहीं नहीं रुका, उसने आगे कहा, ”इसके बाद गजनवी ने वहाँ बकायदा मुआयना करवाया। जब पता चला कि वहाँ ऐसा है, तब जाके उसने सोमनाथ के मंदिर पर चढ़ाई की। सोमनाथ मंदिर को उसने तोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि वहाँ जो गलत हो रहा था, उसे रोकने का काम किया।”

ऐसा नहीं है कि मौलाना ने हिंदू धर्म के खिलाफ पहली बार जहर उगला है। इससे पहले वह राम मंदिर को तोड़ने की धमकी दे चुका है। उसने कहा था कि 50-100 साल बाद मुस्लिम शासक के आने पर अयोध्या के राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई जा सकती है। मुस्लिमों की आने वाली नस्लें इसको लेकर खामोश नहीं रहेंगी।

मौलाना रशीदी ने कहा था , ”आज मुसलमान खामोश है। मेरी आने वाली नस्ल… मेरा बेटा, उसका बेटा, उसका पोता…. 50-100 साल के बाद एक हिस्ट्री उनके सामने आएगी कि हमारी मस्जिद को तोड़कर मंदिर बना दिया गया। उस वक्त हो सकता है कि कोई मुस्लिम शासक हो, कोई मुस्लिम जज हो या मुस्लिम शासन आ जाए… कुछ नहीं कहा जा सकता है कि क्या फेरबदल हो जाए… तो क्या उस हिस्ट्री की बुनियाद पर इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई जाएगी? बिल्कुल बनाई जाएगी।”

अमेरिका में चीनी नववर्ष समारोह में अंधाधुन फायरिंग: 9 की मौत और दर्जनों घायल, पहले भी हो चुकी हैं Mass Shooting की कई घटनाएँ

अमेरिका (America) में एक बार फिर लोगों पर अंधाधुन फायरिंग (Mass Shooting) करने की घटना सामने आई है। कैलिफॉर्निया में हुई हृदयविदारक घटना में कम-से-कम 9 लोग मारे गए हैं। वहीं, गोली लगने से दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना कैलिफॉर्निया के मॉन्टेरी पार्क की है। शनिवार (21 जनवरी 2023) की रात में हुई इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई और मोर्चा सँभाल लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फायरिंग करने वाले शख्स के पास सेमी-ऑटोमेटिक गन था।

फायरिंग की यह घटना स्थानीय समय रात के 10 बजे हुई। पार्क में चीनी चंद्र नववर्ष समारोह का आयोजन (Chinese Lunar New Year Celebration) किया गया था। यहाँ हजारों लोग इस उत्सव में शामिल हुए थे। इसी दौरान एक शख्स ने आयोजन वाले स्थान पर अंधाधुन फायरिंग शुरू कर दी।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने लॉस एंजिल्स टाइम्स को बताया कि वह समारोह में शामिल था। इसी दौरान व्यक्ति डांस क्लब एरिया के पास लोगों को निशाना बनाकर गोली चलाने लगा। एक गोली उसके भी सिर के ऊपर से गुजरी। उसने बताया कि जब गोली खत्म हो जाती तो वह दोबारा लोड करता और लोगों पर फायरिंग करता।

मेरिका के कैलिफॉर्निया राज्य में स्थित है मॉन्टेरी पार्क दरअसल लॉस एंजिल्स काउंटी का एक शहर है। यह लॉस एंजिल्स के डाउनटाउन से लगभग 11 किलोमीटर दूर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यहाँ की जनसंख्या लगभग 60,000 है। इनमें लगभग 65 प्रतिशत लोग एशियाई मूल के अमेरिकी और 27 प्रतिशत हिस्पैनिक या लैटिनो हैं।

यह महाद्वीपीय शहर संयुक्त राज्य अमेरिका का पहला शहर था, जहाँ एशियाई मूल के लोग सबसे पहले आकर बसे थे। यहाँ आकर बसने वाले लोगों में चीन, ताइवान, जापान और वियतनाम के आप्रवासी प्रमुख हैं। हालाँकि, इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों के बारे में अभी कोई सूचना नहीं है।

पिछले साल अमेरिका में हुईं फायरिंग की बड़ी घटनाएँ

अमेरिका में इस तरह की घटनाएँ आम हैं। इसको लेकर वहाँ की सरकार हथियारों के लिए लाइसेेंस पर विचार कर रही है। इसके पहले 20 नवंबर 2022 को अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स शहर के LGBTQ नाइट क्लब में अंधाधुन फायरिंग की गई थी। इस फायरिंग में 5 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 18 लोग घायल हो गए थे।

इसके बाद अमेरिका के फिलाडेल्फिया के किंग्स्टन इलाके में 5 नवंबर 2022 को गोलीबारी हुई थी। इस फायरिंग में 40 लोगों को गोली मारी गई थी, जिनमें 12 लोगों की मौत हो गई थी। घटना को अंजाम देने में एक से अधिक हमलावर शामिल थे।

इसके बाद 27 अक्टूबर 2022 को वॉशिंगटन (Washington) के उत्तर-पूर्व में स्थित हडसन नदी के किनारे बसे कोल्विन ट्राइब्स रिजर्वेशन (The Colville Tribal Reservation) में रहने वाले लोगों को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने तीन हमलावरों को गिरफ्तार किया था।

अमेरिका के टेक्सास राज्य में 24 मई 2022 को एक स्कूल में 18 साल के युवक ने छात्रों और टीचरों को निशाना बनाते हुए अंधाधुन फायरिंग की थी। इस घटना में 18 छात्र समेत 22 लोगों की मौत हो गई थी। फायरिंग में दर्जनों लोग घायल हुए। युवक ने AK-47 स्कूल में चलाने से पहले घर में इस्तेमाल किया था और अपने दादी को गोली मारी थी।

अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में 15 मई 2022 को एक चर्च में फायरिंग की गई थी। इस गोलीबारी में एक शख्स की मौत हो गई थी, जबकि 5 लोग घायल हुए थे। पुलिस ने संदिग्ध हमलावर को हिरासत में ले लिया था। उसके पास से हथियार के साथ-साथ दो हथगोले बरामद हुए थे।

इस्लाम कबूलने के बाद भी नसरीन ने किया हिन्दू नाम का इस्तेमाल, वसीउद्दीन को जेल भिजवाया: शिकायत दर्ज, शौहर भी ‘नवीन’ बन करोड़ों की लेन-देन करता है

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में लगभग 7 साल पहले इस्लाम कबूल कर चुकी एक महिला द्वारा हिन्दू नाम से FIR दर्ज करवाने का मामला सामने आया है। यहाँ पर साल 2015 में नीतू से नसरीन बन चुकी महिला ने अपने पूर्व नाम से एक व्यक्ति पर केस दर्ज करवा कर उसे जेल भिजवा दिया है। वहीं पुलिस ने अपनी जाँच आख्या में नीतू के नसरीन बनने का भारत में कोई प्रमाण न होने की जानकारी दी है और केस को कोर्ट में विचाराधीन बताया है।

नीतू ने कबूला इस्लाम, पति को भी मुस्लिम बनाया

यह मामला उतरौला बाजार के गैंडास बुजुर्ग थाना क्षेत्र का है। यहाँ पर नसरीन अपने शौहर जमालुद्दीन और एक नाबालिग बेटी के साथ छांगुर पीर नाम के व्यक्ति के साथ रहती है। नसरीन मूल रूप से मुंबई की रहने वाली बताई जा रही है। एक इंटरव्यू में नसरीन ने बताया कि वो सिंधि समाज की थी और दुबई में रह कर एकाउंटिंग सेक्टर में नौकरी करती थी। वहाँ पर वो कैब के स्टीरियो में कुरान की आयतें सुनती थी जिसके बाद उसने पूरे परिवार सहित इस्लाम कबूल कर लिया। अपने इस फैसले में नसरीन ने अपने शौहर जमालुद्दीन की भी सहमति बताई है जिनका पूर्व का नाम नवीन था।

इसी वीडियो में नसरीन का दावा है कि उन्होंने उमराह भी कर लिया है। इस्लामी विद्वान महताब उस्मानी ने ऑपइंडिया को बताया कि उमराह कोई गैर मुस्लिम नहीं कर सकता और उसके पहले सऊदी के अधिकारी बाकायदा कागजातों की मुकम्मल जाँच करते हैं। ऐसे में यह सवाल अनुत्तरित है कि नसरीन ने किस प्रमाण पत्र से उमराह किया होगा। वीडियो में नसरीन का कहना है कि वो मुंबई के वर्सोवा दरगाह पर बलरामपुर के छांगुर पीर से मिली थीं जिनके साथ वो उतरौला चली आईं।

उत्तर प्रदेश के उतरौला में ही नसरीन ने 4 मई 2021 को एक घोषणा पत्र बनवाया जिसमें उन्होंने खुद, अपने शौहर और अपनी बेटी के मुस्लिम बन जाने की बात स्वीकार की है। इस घोषणा पत्र में नसरीन ने एक फार्म हाउस भी बनवाने की जानकारी दी है हालाँकि इंटरव्यू वाले वीडियो में वो अस्पताल बनवाने की बात कह रहीं हैं। इसी के साथ नसरीन ने मार्च 2022 में एक शपथ पत्र भी बनवाया है जिसमें उन्होंने साफ़ तौर पर लिखा है कि भविष्य में उन्हें नसरीन नाम से ही जाना जाए और उनका पूर्व नाम नीतू से कोई वास्ता नहीं होगा। ऑपइंडिया के पास शपथ और घोषणा पत्रों की कॉपी मौजूद है।

इन घोषणाओं के बावजूद 17 सितम्बर 2022 को नसरीन बलरामपुर जिले के गैंड़ास बुजुर्ग थाने में नीतू नाम से एक FIR दर्ज करवाती हैं। इस FIR में नीतू के पति जमालुद्दीन का नाम नवीन बताया गया है। जबकि नवीन भी साल 2015 में इस्लाम कबूल कर के जमालुद्दीन बन चुके हैं। FIR में करोड़ों रुपए के फेर-फेर का आरोप लगाते हुए वसीउद्दीन नाम के व्यक्ति को आरोपित किया जाता है। पुलिस ने यह केस IPC की धारा 406, 342, 504 और 506 के तहत दर्ज किया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है बाद में केस में धाराएँ बढ़ा कर जिला पंचायत वसीउद्दीन को जेल भेज दिया जाता है।

इस बीच वसीउद्दीन की बीवी ने उच्च अधिकारियों को शिकायत के कर नसरीन पर नीतू नाम से केस दर्ज करवाने और अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। पुलिस को दी गई शिकायत में वसीउद्दीन की पत्नी सितारा बेगम ने नसरीन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पांचजन्य के पत्रकार शिवम दीक्षित ने संबंधित प्रमाणों की कॉपी के साथ बलरामपुर पुलिस को इस बावत एक ट्वीट किया। जवाब में बलरामपुर पुलिस ने 20 जनवरी 2023 को बताया कि उनकी आख्या के मुताबिक नीतू के इस्लाम कबूलने का कोई भी प्रमाण भारत सरकार द्वारा जारी नहीं हुआ है। इसी के साथ पुलिस ने बताया कि धर्म बदलने के संबंध में कोर्ट में केस दाखिल है।

सितारा बेगम ने शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को पुलिस को भेजी गई अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि नसरीन के शौहर जमालुद्दीन भी जालसाजी में शामिल हैं। उनका कहना है कि जमालुद्दीन अपने बैंक खातों को नवीन नाम से संचालित करते हैं जिसमें करोड़ों रुपए का टर्न ओवर होता रहता है।

ट्विटर-गूगल-मेटा-माइक्रोसॉफ्ट सहित कई कंपनियों ने हजारों को नौकरी से निकाला: भारतीय कंपनियों में भी शुरू हुई छँटनी, वैश्विक मंदी का ख़तरा

वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बाद अब भारतीय कंपनियों ने भी कर्मचारियों को निकालना (Layoff 2023) शुरू कर दिया है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मंदी आती भी है तो इसका भारत का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कर्मचारियों की छँटनी ट्विटर से शुरू होकर माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजॉन होते हुए भारत की विप्रो (Wipro) तक पहुँच गई है। विप्रो ने लगभग 800 कर्मचारियों को निकालने निर्णय लिया है। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट के बाद विप्रो ने कहा कि वह 452 कर्मचारियों की छंटनी करेगी।

छंटनी के पीछे दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी ने तर्क दिया कि जिन लोगों को निकाला गया, वे फ्रेशर थे और उनका परफॉर्मेंस खराब था। कंपनी ने कहा, “हमें 452 फ्रेशर्स को बाहर करना पड़ा, क्योंकि उन्होंने ट्रेनिंग के बाद भी असेसमेंट में बार-बार खराब प्रदर्शन किया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विप्रो ने कर्मचारियों को भेजे गए टर्मिनेशन लेटर में कहा है कि ये कर्मचारी 75,000 रुपए का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं, क्योंकि ये रुपए उनके प्रशिक्षण पर खर्च किया है। हालाँकि, विप्रो ने उसी मेल में लिखा है कि कंपनी ने राशि माफ कर दी है।

विप्रो के अलावा, जिन भारतीय कंपनियों ने छँटनी की घोषणा की है, उनमें HP, स्विगी और शेयर चैट शामिल हैं। सॉफ्टवेयर कंपनी HP ने अपने 6,000 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया है। वहीं, HCL Technolog ने वैश्विक स्तर पर छँटनी की घोषणा करते हुए 350 कर्मचारियों को निकाल दिया है।

फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी (Swiggy) ने लगभग 400 कर्मचारियों को निकालने की घोषणा की है। कहा जा रहा है कि वर्कफोर्स में लगभग 10 प्रतिशत कमी करते हुए कुल 6,000 लोगों को निकालेगी। पिछले साल नवंबर में फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो (Zomato) ने 120 कर्मचारियों को हटा दिया था। इससे पहले मई 2022 में 520 कर्मचारियों को हटाया था।

वहीं, Cars24 कंपनी ने भी 600 कर्मचारियों को निकाल दिया है। इस कंपनी ने पिछले साल भी 650 कर्मचारियों को निकाला था। Edtech की शीर्ष कंपनी बायजू (Byju) ने 1,100 कंपनियों को निकाल दिया है। इसके अलावा Unacademy, Vedantu, Lido, Frontrow, Lido जैसी स्टार्टप एडुटेक कंपनियाँ भी हजारों कर्मचारियों को निकाल चुकी हैं।

ऑनलाइन सामान डिलीवरी करने वाली कंपनी डंजो (Dunzo) ने भी अपने वर्कफोर्स में 3 प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की है। इस हिसाब से लगभग 100 कंपनियों को निकाला जाएगा। डंजो कंपनी को गूगल का सपोर्ट मिला है। वहीं, वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म शेयरचैट (Sharchat) ने 20 प्रतिशत यानी लगभग 450 कर्मचारियों की छँटनी की है।

छँटनी करने वाली विदेशी कंपनियाँ

इसी तरह गूगल (Google) की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) ने विश्व स्तर पर 12,000 कर्मचारियों को निकालने की घोषणा की है। ये कंपनी की वर्कफोर्स का 6 प्रतिशत है। गूगल ने छंटनी के शिकार कर्मचारियों को 16 हफ्ते की सैलरी और 2 हफ्ते का मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके साथ ही इन लोगों को नौकरी खोजने में भी मदद का भरोसा दिया है।

गूगल के अलावा, दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने भी 10,000 कर्मचारियों की छँटनी की घोषणा की है। यह कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 5 प्रतिशत है। माइक्रोसॉफ्ट में दुनिया भर में 2.20 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। छंटनी के पीछे कंपनी कठिन आर्थिक हालात बताए थे।

इसके पहले फेसबुक (facebook) की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने अपने कुल कर्मचारियों का 13 प्रतिशत हटाने की घोषणा की थी। इस हिसाब से 11,000 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया था। उन्होंने कहा था कि बड़ी टेक कंपनियों को प्रॉफिट कमाना मुश्किल हो रहा है। इसलिए मजबूर होकर ऐसा निर्णय लेना पड़ रहा है।

अमेजन (Amazon) ने अपने 6 प्रतिशत यानी 18,000 कर्मचारियों को बाहर कर दिया है। जिन कर्मचारियों को निकाला गया, उनमें 1,000 भारतीय थे। इसके पहले ट्विटर (Twitter) ने नवंबर 2022 में 3,800 कर्मचारियों को हटाने का ऐलान किया था। इसके साथ ही 4,500 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का भी अनुबंध खत्म कर दिया था।

वहीं, सेल्सफोर्स (Salesforce) नामक कंपनी ने अपने कुल वर्कफोर्स का 10 प्रतिशत यानी 800 कर्मचारियों को हटा दिया है। सॉफ्टवेयर कंपनी एचपी HP ने 10 प्रतिशत कर्मचारयों की संख्या में कटौती करते हुए 600 लोगों को हटा दिया। वहीं, सीगेट (Seagate) ने लगभग 250 कर्मचारियों को हटा दिया है। यह कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 8 प्रतिशत है।

एक और मीडिया कंपनी स्नैपचैट (Snapchat) ने भी अपने 6,400 को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं, चीन की बहुराष्ट्रीय कंपनी अलीबाबा (Alibaba) ने पिछे साल 2022 में अपने 9,241 से ज्यादा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

‘अगला नंबर निशांत शर्मा का…’ : पंजाब में हिंदूवादी नेताओं को मिली जान से मारने की धमकी, विदेश से आई कॉल; कहा- पीतल भर देंगे

पंजाब में एक और हिंदूवादी नेता ने खुद को जान से मारने की धमकी मिलने की शिकायत दर्ज करवाई है। शिवसेना हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशांत शर्मा ने बताया कि उन्हें विदेश के नम्बरों से लगातार धमकियाँ आ रहीं हैं। इस बीच एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति हाथ में AK-47 ले कर निशांत शर्मा को गाली देते हुए हवाई फायरिंग कर रहा है। निशांत के अलावा अमित अरोड़ा, पवन गुप्ता और अन्य हिंदूवादी नेता भी खालिस्तानियों के निशाने पर बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निशांत शर्मा ने अपनी जान का खतरा बताते हुए कहा है कि उन्हें व्हाट्सएप पर ऑडियो और वीडियो कॉल कर के धमकी दी जा रही है। धमकियाँ देने वाले नंबर विदेशी हैं। निशांत के अनुसार हिंदू नेता सुधीर सूरी की हत्या के बाद वो खालिस्तानियों ने निशाने पर हैं। उन्होंने अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम से भी धमकी भरे कॉल आने की शिकायत की है। अपने ऊपर चल रहे खतरे को देखते हुए निशांत जनवरी 2023 में ही अलग-अलग पुलिस स्टेशनों ने 3 केस दर्ज करवा चुके हैं।

जिन नामों से निशांत को सबसे ज्यादा धमकाया जा रहा है उसमें जग्गू भगवानपुरिया और गोल्डी बराड़ प्रमुख हैं। इन धमकियों में पीतल भर देंगे जैसी बातें भी शामिल हैं। सुधीर सूरी की हत्या के बाद खालिस्तानी गोपाल सिंह चावला की एक वीडियो पाकिस्तान में वायरल हुई थी। वायरल वीडियो में गोपाल सिंह ने सुधीर सूरी के कातिल को मुबारकबाद दी थी और अगला नंबर निशांत शर्मा व अमित अरोड़ा का बताया था। निशांत का यह भी कहना है कि पंजाब पुलिस ने उन्हें सुरक्षा दी है और वो लगातार पंजाब पुलिस के सम्पर्क में भी हैं।

अपनी FIR में निशांत ने बताया है कि उन्हें लश्कर-ए-खालसा नामक संगठन से लगातार धमकी मिल रही है। उन्होंने बताया है कि पूर्व में भी उनकी जान लेने का प्रयास किया गया है। निशांत के साथ रहने वाले परमिंदर भट्‌टी और एक पत्रकार को भी खालिस्तानियों ने मार डालने की धमकी दी है। हाईकोर्ट में डाली गई एक याचिका में भी निशांत के मुताबिक जेलों में बंद गैंगस्टरों की जल्द से जल्द सुनवाई कर के उन्हें सजा दी जाए वरना उन्हें भारी भरकम सुरक्षा के बीच कोर्ट लाने से कई युवा प्रभावित होते हैं।

गौरतलब है कि जनवरी 2023 में ही दिल्ली के भलस्वा इलाके से पकड़े गए नौशाद और जगजीत ने भी पाकिस्तान से पंजाब के हिंदूवादी नेताओं को खत्म करने का टारगेट मिलने की जानकारी दी थी। इसके लिए उन्हें बाकायदा हथियार और पैसे भी भेजे जा चुके थे।

‘इस धरती पर सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक हैं PM नरेंद्र मोदी’: ब्रिटिश MP ने संसद में माना लोहा, कहा – दुनिया का सबसे तेज़ एक्सप्रेस ट्रेन है भारत

भारतीय मूल के ब्रिटेन के सांसद लॉर्ड करण बिलिमोरिया (Lord Karan Bilimoria) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ग्रह के सबसे ताकतवर व्यक्तियों में से एक हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और ब्रिटेन को निश्चित ही भारत का पार्टनर और करीबी दोस्त होना चाहिए।

बिलिमोरिया ने गुरुवार (19 जनवरी, 2023) को ब्रिटेन का भारत के साथ संबंध पर महत्व के बहस के दौरान हाउस ऑफ लार्ड्स (House Of Lords) में यह बात कही। उन्होंने कहा, ”नरेंद्र मोदी ने बचपन में अपने पिता के चाय स्टॉल पर चाय बेची। आज वह इस ग्रह के सबसे ताकतवर व्यक्तियों में से एक हैं। आज भारत के पास जी-20 की प्रेसीडेंसी है। आज भारत के पास 25 वर्षों के भीतर 32 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का विजन है।”

उन्होंने आगे भारत की तुलना एक ऐसे एक्सप्रेस ट्रेन से की, जो गंतव्य की ओर निकल चुकी है। उन्होंने कहा, “इंडियन एक्सप्रेस अब अपने स्टेशन से निकल चुकी है। यह अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती ट्रेन है। सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। ब्रिटेन को निश्चित ही भारत को विश्वसनीय और करीबी दोस्त होना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन के सांसद बिलिमोरिया ने ऐसे समय में पीएम मोदी और भारत की तारीफ की है, जब बीबीसी ने पीएम मोदी के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री सीरीज रिलीज की है। दरअसल  बीबीसी की ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री सीरीज में भारत विराधी एजेंडे को हवा दी गई है। इसमें गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया गया है। दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

हालांकि सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को लेकर सख्त कदम उठाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।

दूसरी ओर, इस विवाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया था। दरअसल, पाकिस्तान मूल के ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने संसद में गुजरात दंगे का मुद्दा उठाया। इस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा था कि इस डॉक्यूमेंट्री में अपने भारतीय समकक्ष के चरित्र चित्रण से वह सहमत नहीं हैं।

BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री हटाई गई तो TMC सांसद महुआ मोइत्रा को आया गुस्सा, JDU का भी समर्थन भारत विरोधी विदेशी ताकतों को

गुजरात दंगों पर आधारित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने इस संबंध में किए गए ट्वीट और यूट्यूब वीडियो के लिंक को ब्लॉक करने के आदेश दिए हैं। इसी सिलसिले में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने आपत्ति जताई है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है कि भारत में कोई भी बीबीसी का शो न देख सके। शर्म की बात है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सम्राट और दरबारी इतने असुरक्षित हैं।”

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने भी डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि डॉक्यूमेंट्री में केवल तथ्य हैं। बकौल त्यागी, गुजरात दंगों में कई लोग मारे गए थे और इस संबंध में अगर फैक्टस सामने आ रहे हैं तो किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है। दरअसल विवाद बीबीसी की ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री सीरीज से जुड़ा है। इसमें गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया गया है। दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

इससे पहले केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जारी इस विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था। इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे।

बीबीसी की पूर्व रिपोर्टर जिल मैकगिवरिंग ने इस डॉक्यूमेंट्री में कहा है, ”गोधरा कांड एक ऐसे राज्य में हुआ था जहाँ हिंदू बहुसंख्यकों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच तनाव का लंबा इतिहास रहा है। यहाँ सांप्रदायिक हिंसा और घृणित हिंसा का भी इतिहास रहा है।”

मैकगिवरिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंगों का बदला लेने वाले कट्टरपंथी हिंदू के रूप में दिखाने की कोशिश है। जिसने कथित तौर पर चीजों को ऐसे पेश किया जिससे लगे गोधरा कांड के कारण हिंदुओं के बीच में गुस्सा था। इस गुस्से के कारण ही यह सब हुआ। इस तरह से बीबीसी ने ‘साबरमती एक्सप्रेस’ में आग लगाने वाले कट्टरपंथियों की भूमिका पर पर्दा डालने का असफल प्रयास किया है।

मेरी गलती क्या है, ये तो बताइए… बिहार की महिला कॉन्स्टेबलों ने बुजुर्ग शिक्षक पर दनादन बरसाईं लाठियाँ

बिहार के कैमूर में में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में दो महिला पुलिसकर्मी एक बुजुर्ग व्यक्ति को लाठियों से बेतहाशा पीट रही हैं। जिस बुजुर्ग को वे पीट रही हैं, वह बुजुर्ग एक निजी स्कूल में शिक्षक है। सबसे बड़ी बात है यह इस दौरान शिक्षक बार-बार पूछता रहा कि उसका कसूर क्या है। बाद में एसपी ने दोनों कॉन्स्टेबल को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया।

घटना बिहार के भभुआ शहर के मंडल कारागार के पास की है। शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को 65 वर्षीय बुजुर्ग टीचर नवल किशोर पांडेय रोड पार कर रहे थे। इसी दौरान महिला पुलिस कर्मी उन पर लाठियाँ बरसाने लगीं। शिक्षक बार-बार पूछते रहे कि उनकी गलती क्या है, ये तो बताइए। वे कहते रहे ‘मैं तो साइकिल से सड़क पार कर रहा था’।

इस दौरान दर्जनों लोग उस रास्ते से गुजरते रहे, लेकिन पुलिस की वर्दी का खौफ ऐसा कि किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। हालाँकि, किसी ने वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया। जब मामला एसपी के संज्ञान में आया तो कार्रवाई की गई।

दोनों महिला कॉन्स्टेबल की पहचान नंदिनी कुमारी और जयंती कुमारी के रूप में हुई है। कैमूर जिले के एसपी ललित मोहन शर्मा ने बताया कि नंदिनी कुमारी और जयंती कुमारी को 3 माह के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। पांडेय एक निजी स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक हैं।

दरअसल, बरहुली गाँव निवासी नवल किशोर पांडेय निवासी जब स्कूल से लौट रहे थे, तब मंडल कारा के पास जयप्रकाश चौक पर जाम लगी हुई थी। एक लेन का ट्रैफिक बंद था। दोनों महिला पुलिसकर्मी जाम हटाने की कोशिश कर रही थीं।

इसी दौरान बुजुर्ग शिक्षक साइकल लेकर सड़क पार करने की कोशिश करने लगे। इस पर महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रुकने के लिए कहा, लेकिन वे कुछ बोलकर आगे बढ़ते रहे। तब एक महिला पुलिसकर्मी ने उनकी साइकल पीछे से पकड़ ली और एक आगे आकर खड़ी हो गईं।

इससे बुजुर्ग टीचर नीचे गिर गए। इस पर पांडेय ने महिला पुलिसकर्मियों से कुछ कहा। कुछ देर की कहासुनी के बाद दोनों महिला पुलिसकर्मी टीचर पर लाठियाँ बरसाने लगीं। पांडेय का कहना है कि उन्हें 20 से अधिक डंडे मारे गए, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।

महिला पुलिसकर्मियों ने शिक्षक पर गाली देने के आरोप लगाया। वहीं, शिक्षक ने कहा, “वो बोल रही थीं कि मैंने गालियाँ दी हैं, जबकि मैंने कुछ नहीं कहा था। एक सज्जन ने कहा- छोड़ दो, तब जाकर दोनों पुलिसकर्मियों ने लाठी चलाना छोड़ा।” उन्होंने कहा कि वे इतने लज्जित हैं कि उनके थाने में शिकायत नहीं दर्ज कराई।

फोन कंपनी वाले बनकर आए चोर, 4 घंटे में उखाड़ ले गए 29 फीट लंबा मोबाइल टॉवर: पटना की घटना, कीमत ₹8 लाख थी

बिहार की राजधानी पटना में चोरों ने 29 फ़ीट लम्बे मोबाईल टॉवर पर ही हाथ साफ कर दिया है। यह मोबाईल टॉवर शाहीन क़याम नाम के एक व्यक्ति के पर लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि चोरों ने मकान मालिक से खुद को टॉवर मेंटिनेंस करने वाले कर्मचारी बताया था। घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। घटना 4 माह पुरानी बताई जा रही है जिसका केस सोमवार (16 जनवरी 2023) को दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पीरबहोर थानाक्षेत्र का है। यहाँ साल 2006 में एक घर पर एयरसेल कम्पनी ने मोबाईल टॉवर लगाया था। कुछ समय बाद इस टॉवर को GTL कम्पनी ने खरीद लिया। GTL के मैनेजर मोहम्मद शाहनवाज ने पुलिस ने इस टॉवर के चोरी होने की तहरीर दी है। तहरीर में लिखा गया है कि पीरबहोर थानाक्षेत्र के वार्ड नंबर 28 में शाहीन क़याम के घर पर लगा टॉवर 31 अगस्त 2022 के निरीक्षण में गायब मिला था। शिकायत में टॉवर की कीमत लगभग 8 लाख 32 हजार रुपए बताते हुए उसके अन्य उपकरणों के भी गायब होने की जानकारी दी गई है।

हालाँकि मामले की शिकायत 16 जनवरी 2023 को दी गई है। मोहम्मद शाहनवाज का कहना है कि पहले GTL कम्पनी अपने स्तर से टॉवर की तलाश करती रही लेकिन जब वह नहीं मिला तो थाने में शिकायत दर्ज करवाया गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस टॉवर की तलाश में जुट गई है। इस घटना के बारे में जिस पर पर टॉवर लगा था उसके मकान मालिक के बेटे अनवर का कहना है कि कुछ लोग खुद को कम्पनी के मेंटिनेंस विभाग से बता कर आए थे और लगभग 4 घंटे में पूरा टॉवर निकाल कर चले गए। अनवर ने GTL कम्पनी पर भी लम्बे समय से टॉवर का भाड़ा न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वो खुद ही चाह रहे थे कि टॉवर हट जाए और उनकी छत खाली हो जाए।

वहीं पीरबहोर थाने के प्रभारी सबिह उल हक ने मामले को कन्फ्यूजन वाला बताते हुए कहा कि इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि टॉवर कौन ले गया है। थानेदार के मुताबिक GTL कम्पनी एक बार टॉवर का कुछ सामान भी ले जा चुकी है जिसमें जेनरेटर भी शामिल था। हालाँकि पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच करवाई जा रही है। पुलिस के बयान में मकान मालिक द्वारा एयरसेल से भाड़ा न मिलने पर 5 साल पहले ही टॉवर ले जाने के लिए कहे जाने की बात सामने आई है।