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उज्जैन में मोती मस्जिद के पास भगवान गणेश की शोभायात्रा पर पथराव, ‘लव जिहाद’ थीम देख इस्लामी कट्टरपंथी भड़के: MP में चौंकने वाले हैं हिंदू लड़कियों को फँसाने के आँकड़ें

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के महिदपुर कस्बे में अनंत चतुर्दशी की पूर्व संध्या पर शुक्रवार (5 सितंबर 2025) को भगवान गणेश की परंपरागत सवारी निकाली गई। इस सवारी में ‘लव जिहाद’ पर एक झाँकी शामिल की गई थी, जिसमें टोपी, दाढ़ी और बुर्का पहने पुतलों का उपयोग किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह झाँकी जब मोती मस्जिद के सामने पहुँची, तो मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध कर लोगों पर पथराव कर दिया। जिसके चलते सवारी में अफरातफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए पथराव करने वालों को खदेड़ा। इसके बाद मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर झाँकी में धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर आपत्ति जताई।

सवारी के आयोजकों का कहना था कि ‘लव जिहाद’ के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए यह झाँकी बनाई गई थी, लेकिन विवाद बढ़ने पर प्रशासन ने आयोजकों से बात की और झाँकी को हटवाया गया। इसके बाद सवारी आगे बढ़ाई गई।

एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है लेकिन एहतियात के तौर पर RAF और पुलिस बल तैनात किया गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उज्जैन के घोंसला कस्बे में भी ‘लव जिहाद’ की झाँकी को लेकर विवाद हुआ था।

कट्टरपंथियों की ये हरकत चोर की ढाढ़ी में तिनका वाली कहावत को चरितार्थ करती है। इन हरकतों से साफ समझा जा सकता है कि मुस्लिम समुदाय खुद अपनी करनी जानता है और जब आईना दिखाया जा रहा है तो आग-बबूला हो कर ऐसी हरकतें कर रहा है। जबकि इनसे उन्हें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये सिर्फ जागरुकता के उद्देश्य से किया गया था।

इंदौर में आए दिन होते हैं लव जिहाद के खुलासे

इंदौर भी इसी इलाके में आता है, जहाँ से हाल ही में ‘मुस्लिम गैंग’ द्वारा हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं।

कुछ दिनों पहले ही उज्जैन में नफीस नाम के युवक ने हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाकर उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और उसके साथ अश्लील हरकतें की थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।

पीड़िता का कहना था कि उसने इंस्टाग्राम पर कानू पटेल नाम से रिक्वेस्ट भेजी थी। वह उससे चैट करने लगा और थोड़े दिनों बाद कहीं से उसे युवती का नंबर भी मिल गया। फोन पर बात करते हुए उसने युवती से प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा।

कुछ समय बाद युवती को उसके घर आने-जाने वाले लोगों से पता चला कि युवक का असली नाम नफीस है। पुलिस शिकायत में युवती ने बताया कि नफीस लगातार उसे धमकी दे रहा था कि अगर वह उससे नहीं मिली, तो वह उसे और उसके परिवार को जान से मार देगा।

डर कर जब वह उससे मिलने गई तो नफीस ने उससे निकाह करने और हमेशा खुश रखने का वादा किया। हालाँकि युवती ने उसे कहा कि उसके घरवाले इसके लिए राजी नहीं होंगे, लेकिन नफीस ने उसे बहला दिया।

निकाह के लिए मनाने के बाद नफीस ने युवती पर हिन्दू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने नफीस को गिरफ्तार कर लिया।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के कनाड़िया थाना क्षेत्र से ही लव जिहाद का एक और मामला भी सामने आया था, जहाँ यूसुफ खान नाम के एक आरोपित ने अपनी पहचान छिपाकर एक हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाया, उससे दुष्कर्म किया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। यूसुफ खान ने खुद को मुकेश बताकर युवती से नजदीकियाँ बढ़ाईं, शादी का झाँसा दिया और फिर उसका शारीरिक शोषण किया।

जब युवती को उसकी असली पहचान का पता चला, तो यूसुफ खान ने उसे धमकियाँ दीं और उसकी निजी तस्वीरें व वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इस मामले में कनाड़िया पुलिस ने यूसुफ खान को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। इस मामले में FIR की कॉपी भी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

लव जिहाद से जुड़े आँकड़े मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में किए थे पेश

मध्य प्रदेश में लव जिहाद के मामलों की बात करें तो राज्य की बीजेपी सरकार ने कुछ दिनों पहले ही विधानसभा में लव जिहाद से जुड़े आँकड़े पेश किए थे। इसके अनुसार जनवरी 2020 से 15 जुलाई 2024 तक प्रदेश में लव जिहाद के 283 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 73 पीड़िता नाबालिग है।

सरकार द्वारा विधानसभा में रखे गए आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि काफी मामलों में पीड़िता दबाव नहीं झेल पाती हैं। वे या तो गवाही के दौरान पलटने को मजबूर हो जाती हैं या फिर दबाव बनाकर ‘सुलह’ कर लिया जाता है। आँकड़े बताते हैं कि अब तक ऐसे 86 मामलों में से 50 मामलों में आरोपित बरी हो चुके हैं। सजा केवल 7 मामलों में हुई है, वहीं एक मामला ‘सुलह’ के कारण खत्म हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर, जहाँ पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है, वहाँ भी लव जिहादी लड़कियों को अपना निशाना बना रहे हैं। इंदौर के सिर्फ नगरीय क्षेत्र के पुलिस थानों में लव जिहाद के 55 मामले दर्ज किए गए है। वहीं, पूरे इंदौर जिले में लव जिहाद के 74 मामले सामने आए हैं। यह पूरे राज्य में सर्वाधिक है।

इसके अलावा राजधानी भोपाल में लव जिहाद के 33 मामले, खंडवा और उज्जैन में 12-12 मामले और छतरपुर में 11 मामले दर्ज किए गए हैं। राज्य के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज 283 मामलों में से 197 कोर्ट में लंबित हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीजेपी विधायक आशीष गोविंद शर्मा के सवाल के जवाब में विधानसभा में लव जिहाद के मामलों को लेकर जानकारी दी।

उन्होंने कहा, “2020 से लेकर अब तक हुए लव जिहाद के प्रकरणों में प्रदेश के सभी जिलों में असुरक्षित बालिकाओं/महिलाओं को लक्ष्य बनाकर उनका शोषण करने एवं भय या दबाव पूर्वक  मतांतरण कराने की घटनाओं  की जाँच के लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 मई 2025 को राज्य स्तरीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।”

कॉन्ग्रेस नेता की अगुवाई में सागर में निकला जुलूस, लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे: खंडवा में भगवा ध्वज पर लिखा ‘इस्लाम जिंदाबाद’, ईद मिलाद पर MP में पाकिस्तानी फौज के गाने

मध्य प्रदेश में ईद मिलाद-उन-नबी पर हिंदू-विरोधी माहौल और इस्लामी कट्टरपंथ का माहौल बनाया गया। खंडवा जिले में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में तालिबानी झंडे फहराए गए। इस दौरान तालिबानी झंडे फहराए गए। और भगवा झंडों पर ‘इस्लाम जिंदाबाद’ के स्लोगन लिखे गए। हिंदू संगठन ने घटना पर विरोध जताया।

हिंदू संगठन ने यह भी बताया कि गणेश पंडालों के पास आतिशबाजी की गई। साथ ही कल्लनगंज का नाम बदलकर कल्लन अली गंज बताया गया। हिंदू संगठन ने शुक्रवार (05 सितंबर 2025) देर रात कोतवाली पुलिस थाने पहुँचकर कार्रवाई की माँग की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कोतवाली पुलिस ने कहा कि 2 से 3 अज्ञात लोगों ने ईद मिलाद-उन-नबी के दौरान भगवा झंडा हाथ में लेकर उस पर काले रंग से ‘इस्लाम जिंदाबाद’ लिखकर फहराया। अभिषेक तिवारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

कॉन्ग्रेस नेता की बाइक रैली में ‘सर तन से जुदा’ के लगे नारे

वहीं सागर जिले में ईद मिलाद-उन-नबी पर कॉन्ग्रेस नेता फिरदौस कुरैशी और पम्मा कुरैशी के नेतृत्व में बाइक रैली निकाली गई। रैली में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। रैली का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद हिंदू संगठन ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने मामले की जाँच के बाद ब्लॉक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष फिरदौष कुरैशी, पम्मा कसाई, शहबाज कुरैशी और अन्य नामजद के खिलाफ धारा 353, 351(2), 299, 196 में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बाइक रैली जिस भी जगह से निकाली गई थी, उन सभी इलाकों की फुटेज भी पुलिस खंगाल रही है।

जिसके लिए इस्लाम है ‘सबसे जरूरी’, वो पाकिस्तान प्रेमी शबाना महमूद बनी कट्टरपंथ से जूझ रहे ब्रिटेन की गृह मंत्री: भारत से नफरत का रहा है इतिहास

पाकिस्तानी मूल की सांसद शबाना महमूद भारत विरोधी बयानबाजी में ज्यादातर देखी जाती है, जिसमें जम्मू-कश्मीर से आर्टिक्ल 370 हटाने, AFSPA को हटाने, आतंकवाद के आरोप में बंद लोगों को रिहा करने और सामूहिक कब्रों की जाँच करने जैसे मामले शामिल है। अब उन्हीं शबाना महमूद को ब्रिटेन की नई गृह मंत्री बनाया गया है। इस नियुक्ति ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

कई लोग शबाना महमूद की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि शबाना ने खुद कहा है कि उनके लिए इस्लाम सबसे महत्वपूर्ण है। आलोचकों का मानना है कि इस तरह के विचारों वाली महिला आव्रजन और सीमा नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर निष्पक्ष होकर काम नहीं कर पाएगी, खासकर जब उनका इतिहास भी विवादित रहा है।

इस्लाम को बताया सबसे महत्वपूर्ण

शबाना महमूद की नियुक्ति पर सबसे बड़ा सवाल उनके मजहबी रुख को लेकर उठा है। एक पुराने वीडियो में शबाना महमूद ने साफ तौर पर कहा था कि उनके लिए इस्लाम उनके जीवन में किसी भी चीज से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। शबाना महमूद ने यह भी कहा था कि यह उनके हर काम का मूल आधार है।

इसी बयान को आधार बनाकर अमेरिकी पत्रकार टॉमी रॉबिन्सन और कई अन्य लोगों ने ट्वीट किया है कि एक व्यक्ति, जो अपने मजहब को सबसे ऊपर रखती हो, क्या वह आव्रजन और सीमा नियंत्रण जैसे जटिल मामलों में निष्पक्षता से काम कर पाएँगी? यह पद बहुत ही संवेदनशील होता है, जहाँ देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं।

एक अन्य यूजर क्रिस रोज ने ट्वीट कर कहा कि एक ऐसी गृह सचिव जो भीड़तंत्र को बढ़ावा दे, वह ‘अयोग्य और खतरनाक’ है। ये सभी घटनाएँ उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

भारत विरोधी और कश्मीर पर प्रोपेगेंडा

शबाना महमूद पर केवल इस्लाम का पक्ष लेने का ही आरोप नहीं है, बल्कि उसका इतिहास भारत विरोधी गतिविधियों और बयानों से भी भरा हुआ है। शबाना महमूद के अम्मी-अब्बू पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से हैं और इस वजह से वह लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ बोलती रही हैं।

नवंबर 2015 में शबाना महमूद और साथियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें जम्मू-कश्मीर से सेना हटाने और अनुच्छेद 370 को लेकर भारत की आलोचना की गई थी। इसके बाद 2019 में जब भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया तो शबाना ने इसे ‘अन्याय से भरी’ और ‘एकतरफा कार्रवाई’ बताई।

फिर शबाना महमूद ने तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से भारत पर दबाव बनाने की अपील भी की थी। एक समय पर शबाना महमूद ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की माँग भी की थी।

इन सभी बातों को देखते हुए, आलोचकों का कहना है कि क्या एक ऐसी व्यक्ति, जो भारत के खिलाफ इतना पक्षपातपूर्ण रवैया रखती हो, वह भारत के साथ संबंधों में निष्पक्षता बरत पाएगी?

इजरायल विरोधी गतिविधियाँ

शबाना महमूद की आलोचना सिर्फ भारत विरोधी रुख तक सीमित नहीं है। वह पहले भी इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। एक तस्वीर में शबाना महमूद एक पोस्टर पकड़े हुए दिखाई दी थीं। इस पर लिखा था, ”फिलिस्तीन को आजाद करो, इजरायली कब्जे को खत्म करो।”

2014 की डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शबाना महमूद बर्मिंघम में एक सुपरमार्केट को जबरन बंद करने में शामिल थीं, क्योंकि वहाँ कथित तौर पर ‘अवैध बस्तियों’ से सामान स्टॉक किया गया था। यहूदी लोगों ने उन पर ‘तनाव बढ़ाने’ का बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। एक लेख में, द जेरूसलम पोस्ट ने बताया था कि वह किस तरह इजरायल विरोधी बयानबाजी लगातार कर रही थीं।

आगे की चुनौतियाँ

गृह सचिव के रूप में शबाना महमूद के सामने कई चुनौतियाँ हैं, खासकर अवैध प्रवासियों से निपटने की। छोटे नावों से ब्रिटेन में आ रहे अवैध प्रवासियों को रोकना इस समय लेबर सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

रिफॉर्म यूके पार्टी इस मुद्दे पर लगातार लेबर पार्टी को घेर रही है। अब यह देखना होगा कि शबाना महमूद इन चुनौतियों से कैसे निपटती हैं और क्या वह अपने विवादित बयानों और ‘इस्लाम ही सब चीजों से ऊपर’ को पीछे छोड़कर निष्पक्षता से काम कर पाती हैं। शबाना महमूद की हर कार्रवाई पर अब ब्रिटेन और दुनिया भर की नजर रहेगी।

ईसाई हॉस्टल, ब्रेनवॉश, 60 बच्चे…अलवर में 15 साल से जारी था धर्मांतरण का खेल, चेन्नई में होती थी ट्रेनिंग: जोसेफ-जॉय जैसे नाम रखकर मनवाई जाती थी बात, न सुनने पर मारपीट

राजस्थान के अलवर जिले में बीते दिनों एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल में छोटे बच्चों के धर्म परिवर्तन का चौंकाने वाला मामला सामने आया था। अब आरोपितों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यहाँ छोटी उम्र से ही बच्चों का ब्रेनवॉश शुरू कर दिया जाता था, ताकि वे बचपन से ही ईसाई धर्म अपना लें।

इन बच्चों से कहा जाता था कि हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं। रविवार की प्रेयर ना करने पर बच्चों को मारा भी जाता था। एमआईए थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में यह हॉस्टल पिछले 15 साल से चल रहा था, जिसमें करीब 60 बच्चे रखे गए थे। ये सभी बच्चे गरीब हिंदू या सिख परिवारों से थे। हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

कैसे किया जा रहा था बच्चों का ब्रेनवॉश?

बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाता था ताकि उनके परिवारों को शक न हो। स्कूल से लौटने के बाद हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म की किताबें पढ़ाई जाती थीं। नाम बदलकर ईसाई नाम दिए जाते थे। यहाँ 8 साल के बच्चे का नाम जोसेफ, दूसरे का योहना और किसी को जॉय बुलाया जा रहा था जबकि उनका असली नाम कुछ और है।

रोज सुबह बच्चों से ईसाई प्रार्थना करवाई जाती थी और रविवार को उनके माता-पिता को बुलाकर धर्म प्रचार किया जाता था। जो बच्चा प्रेयर नहीं करता था, उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। हॉस्टल में हिंदू धर्म की देवी-देवताओं की मूर्तियों को पानी में डूबाकर बच्चों से कहा जाता था, “हिंदू देवी-देवता तो पानी में डूब जाते हैं लेकिन क्रॉस नहीं डूबता। हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं।”

किसने किया खुलासा?

इस पूरे मामले का खुलासा विश्व हिंदू परिषद (VHP) के शहर महामंत्री वीरेंद्र ने किया। उन्होंने पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद एमआईए थाना पुलिस ने छापेमारी कर दो आरोपितों बोध अमृत सिंह और सोहन सिंह को गिरफ्तार किया।

विहिप के वीरेंद्र ने बताया कि संस्था के हॉस्टल में सालों से ये खेल चल रहा है। पहले भी बच्चों के नाम पर उनके परिवार के सदस्यों को संस्था से जोड़ा था। इसके अलावा संस्था के कई सदस्यों ने लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया था। 7 साल पहले भी इसी हॉस्टल से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के बाद धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की घर वापसी करवाई गई थी।

आरोपित बोध अमृत मूल रूप से गुजरात का रहने वाला है। अमृत ने साल 2006 में ईसाई धर्म अपनाया था। उसकी ट्रेनिंग चेन्नई में हुई थी। उसके साथ 15 ट्रेनी और थे लेकिन संस्था ने अमृत को ट्रेनर के तौर पर चुना था। ट्रेनिंग में उसे सिखाया गया कि कैसे लोगों को ईसाई धर्म में कन्वर्ट करना है। कैसे बच्चों का ब्रेनवॉश करना है। इसके बाद वह अलवर के हॉस्टल में वार्डन बनकर आया था।

जाँच अधिकारी मनोहर लाल ने बताया कि एक महीने पहले ही सीकर में धर्मांतरण गैंग को पुलिस ने पकड़ा था। वहाँ से बोध अमृत भी गिरफ्तार किया गया था। हाल में ही वह जमानत पर छूटा था। अलवर से पहले वह श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर में था और वहां धर्मांतरण की गतिविधियाँ कर रहा था।

पुलिस अमृत के बारे में और ज्यादा जानकारी जुटाने में लगी है। सीकर में वह सेल्वा के साथ इस काम में लगा था। सेल्वा सीकर में धर्मांतरण गैंग का मास्टरमाइंड है। वहीं दूसरा आरोपित सोहन सिंह पहले हॉस्टल निर्माण में बेलदारी करता था, बाद में उसका भी ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन करवाया गया। जिसके बाद वह भी इस काम में शामिल हो गया था।

जानिए कौन दे रहा था फंड ?

सेल्वा नाम का व्यक्ति, जो पहले सीकर में पकड़ा गया था, उसने ही अलवर में हॉस्टल शुरू करवाया था। इनका टारगेट छोटे बच्चों का ब्रेनवॉश कर उन्हें बचपन से ही ईसाई बनाना था। एमआईए थाने के जाँच अधिकारी मनोहर ने बताया कि इस हॉस्टल का संचालन चेन्नई की संस्था Friends Missionary Prayer Band (FMPB) करती है।

ये संस्था अलग-अलग राज्यों में इस तरह की प्रेयर, मीटिंग करवाती है। इसकी कई राज्यों में शाखाएँ हैं, जो हॉस्टल भी ऑपरेट करती हैं। इसके लिए चेन्नई की संस्था ही पैसे जुटाती थी। बड़ी मात्रा में इन्हें फंडिंग मिलती है। इन पैसों का इस्तेमाल गरीब लोगों को लालच देने में किया जाता है।

हॉस्टल में स्थानीय बच्चों को नहीं लिया जाता था, सिर्फ बाहर के बच्चों को लाया जाता था। हॉस्टल की दीवार 10 फीट ऊँची थी और ऊपर 2 फीट तारबंदी भी की गई थी ताकि कोई भाग न सके या बाहर से कोई अंदर न झाँके।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। बच्चों के बयान लिए जा रहे हैं। इसके अलावा संस्था के बैंक अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है। आरोपितों के पास से ट्रांजैक्शन डिटेल्स भी मिली हैं।

यह मामला सिर्फ एक हॉस्टल का नहीं, बल्कि देशभर में फैले धर्मांतरण नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। बच्चों के मासूम दिमाग को निशाना बनाकर लालच और झाँसे में लेकर उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा था। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जाँच कर रही है।

छत्रपति शिवाजी ने की शुरुआत, महाभारत से कनेक्शन… जानें ‘अनंत चतुर्दशी’ पर ही क्यों होता है गणपति विसर्जन, क्या हैं मान्यताएँ

हर साल अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश विसर्जन के साथ भगवान गणेश के महापर्व गणेश चतुर्थी का समापन होता है। इस दिन गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है और उनका विधिवत विसर्जन किया जाता है। उत्सव के इस अंतिम दिन गणपति की आखिरी पूजा भी होती है, जिसे उत्तर पूजा कहा जाता है। आईए जानते हैं गणेश चतुर्थी और प्रतिमा विसर्जन के इतिहास, महाभारत काल और छत्रपति शिवाजी से इस महापर्व के संबंध और मान्यताओं के बारे में जो भारत देश को विश्व में एक अलग पहचान देती हैं।

विघ्नहर्ता गणेश की स्थापना और विसर्जन के पीछे की धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यता:

गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, जो आमतौर पर अगस्त या सितंबर में आती है। यह त्योहार 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है। गणेश चतुर्थी  को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान गणेश के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।

इस त्योहार की शुरुआत पहले दिन भगवान गणेश की मूर्ति को घर, ऑफिस या पंडाल में स्थापित करके होती है। लोग मंत्रों, भजनों और आरती के साथ उनकी पूजा करते हैं। दस दिनों तक भगवान को तरह-तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं और भक्ति भाव से पूजा की जाती है।

ऐसा माना जाता है कि इस त्योहार की परंपरा सातवाहन, राष्ट्रकूट और चालुक्य राजवंशों के समय से चलती आ रही है। वहीं ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक रूप से मनाना शुरू किया था ताकि लोगों में एकता और देशभक्ति की भावना बढ़े।

त्योहार का अंतिम दिन ‘अनंत चतुर्दशी’ कहलाता है, जिसे ‘गणेश विसर्जन’ के रूप में जाना जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की मूर्तियों को श्रद्धा और धूमधाम के साथ नदी, समुद्र या किसी अन्य जल स्रोत में विसर्जित करते हैं। यह माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती के पास कैलाश पर्वत लौट जाते हैं।

विसर्जन का एक विशेष महत्व है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि जब गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन होता है, तब वे अपने साथ हमारे जीवन की सारी परेशानियाँ और बाधाएँ भी ले जाते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं।

महाभारत काल से विसर्जन का क्या है संबंध?

हिंदू धर्म में एक प्रसिद्ध कथा है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत ग्रंथ की रचना की थी, लेकिन इसे लिखा भगवान गणेश ने था। ऐसा कहा जाता है कि वेदव्यास जी महाभारत लिखवाने के लिए किसी योग्य लेखक की तलाश में थे और इसके लिए ही उन्होंने भगवान गणेश से प्रार्थना की। गणेश जी मान गए, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि वे बिना रुके लिखेंगे और वेदव्यास जी को बिना रुके कथा सुनानी होगी।

इसके बाद वेदव्यास जी ने भी एक शर्त रखी कि गणेश जी बिना अर्थ समझे कुछ नहीं लिखेंगे। इसके बाद वेदव्यास जी ने लगातार 10 दिनों तक कथा सुनाई और गणेश जी ने बिना रुके उसे लिखा। 10 दिन बाद जब वेदव्यास जी ने गणेश जी को स्पर्श किया, तो देखा कि उनका शरीर बहुत गर्म हो चुका था। फिर वे उन्हें पास के एक जलकुंड में ले गए और स्नान कराया जिससे उनका ताप शांत हुआ।

यहीं से गणेश स्थापना और फिर विसर्जन की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है। मान्यता है कि गणेश जी को शीतलता प्रदान करने के लिए ही उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है।

गणेश विसर्जन की परंपरा, समय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

गणेश विसर्जन के कई तरीके हैं। कुछ लोग गणेश चतुर्थी के दिन ही विसर्जन करते हैं, हालाँकि यह बहुत प्रचलित नहीं है। वहीं कुछ लोग डेढ़ दिन (अगले दिन दोपहर बाद), कुछ लोग तीन, पाँच या सात दिन तक पूजा करके विसर्जन करते हैं। सबसे अधिक प्रचलित परंपरा है अनंत चतुर्दशी को विसर्जन करना।

गणेश विसर्जन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि इसका वैज्ञानिक पक्ष भी है। यह हमें जीवन की नश्वरता का एहसास कराता है कि हर वस्तु एक दिन प्रकृति में समा जाती है।

विसर्जन के समय जल में जो चीजें डाली जाती हैं – जैसे हल्दी, कुमकुम, दूर्वा, चंदन, फूल आदि, ये सभी जल को शुद्ध करने वाले होते हैं। खासकर हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पानी को साफ रखते हैं। बरसात के मौसम में यह पानी तालाबों, नदियों और पोखरों को शुद्ध करता है, जिससे जलजीवों को राहत मिलती है।

मुंबई गणेश विसर्जन के खास इंतजाम

आज देशभर में गणेश उत्सव का आखिरी दिन है। अनंत चतुर्दशी के मौके पर भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। मुंबई में इस मौके पर खास इंतजाम किए गए हैं। इस साल मुंबई में करीब 1.80 लाख मूर्तियों का विसर्जन होगा। इनमें 6,500 सार्वजनिक गणेश पंडाल और लगभग 1.75 लाख घरेलू मूर्तियाँ शामिल हैं। ये मूर्तियाँ शहर के अलग-अलग समुद्र तटों, तालाबों और 205 कृत्रिम झीलों में विसर्जित की जाएँगी।

इसके लिए यहाँ 21,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं पहली बार पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही है। गिरगांव चौपाटी पर एक AI कंट्रोल रूम बनाया गया है। बड़े गणपति पंडालों को QR कोड दिए गए हैं और जुलूस में शामिल वाहनों पर स्टिकर लगाए गए हैं। इससे पुलिस को ट्रैफिक और भीड़ को रियल टाइम में मैनेज करने में मदद मिलेगी।

‘मोदी एक महान प्रधानमंत्री, हम हमेशा दोस्त रहेंगे’: चीन से करीबियाँ देख भारत के लिए रातोंरात बदले ट्रंप के सुर, मीडिया से कहा- हम तो बस तेल खरीद के कारण हुए निराश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों के उलझे हुए ताने-बाने में फँसते नजर आए। एक तरफ वो कहते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच ‘बहुत खास रिश्ता’ है और प्रधानमंत्री मोदी को अपना ‘पुराना दोस्त’ बताते हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत के रूस से तेल खरीदने पर गहरी नाराज़गी जताते हैं और उसी नाराज़गी में भारत पर 50% का भारी टैरिफ भी लगा देते हैं।

अजीब बात ये है कि कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया था कि अमेरिका ने भारत और रूस दोनों को ‘चीन के अंधेरे में खो दिया है।’ और अब वही ट्रंप रिश्तों की मिठास की बात कर रहे हैं।

बयान पलटना कोई ट्रंप से सीखे- पहले भारत से नाराज, अब मोदी ‘महान’

टैरिफ और तनाव के बीच ट्रंप अपने बयानों से फिर पलटते दिखें। जब पत्रकारों ने उनसे भारत के साथ संबंधों को लेकर सवाल किया, तो ट्रंप का लहजा बिल्कुल बदल गया। ट्रंप ने कहा, “मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूँगा, वह एक महान प्रधानमंत्री हैं… मुझे सिर्फ यह पसंद नहीं है कि वह इस समय क्या कर रहे हैं, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच एक विशेष संबंध है। चिंता की कोई बात नहीं है।”

यह बयान दिखाता है कि ट्रंप व्यापारिक मुद्दों पर सख्त होने के साथ-साथ अपने बयानों से बखूबी पलटना जानते है। जब भारत के साथ दोस्ती खत्म होते हुए दिखी और चीन-रूस के साथ नजदीकी बढ़ते हुए दिखी, तब ट्रंप को पुराना रिश्ता अपना याद आने लगा।

वहीं, अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने कहा था कि पहले ट्रंप अमेरिका-भारत के संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया है, जिसके बाद मोदी-रूस-चीन करीब आ पाए।

चीन को लेकर ट्रंप का बयान

ट्रंप ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को ‘अंधेरे चीन’ के हाथों ‘खो दिया‘ है। यह बयान तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तिआनजिन शिखर सम्मेलन में एक साथ देखा गया था।

ट्रंप का यह मानना है कि तीनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती दुनिया में एक ‘नया विश्व व्यवस्था’ का संकेत है। हालाँकि, जब भारतीय विदेश मंत्रालय से इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया माँगी गई, तो प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जवाब दिया, ‘इस वक्त इस पर कोई टिप्पणी नहीं है।’ भारत ने सीधे तौर पर ट्रंप के बयान का जवाब नहीं दिया, लेकिन यह चुप्पी बहुत कुछ कहती है।

अमेरिका का भारत पर नया टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% का भारी टैरिफ लगाया है। उन्होंने इस फैसले के पीछे की वजह भारत द्वारा रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदना बताया। ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से ‘बहुत निराश’ हैं और उन्होंने यह बात भारत को बताई भी है।

यह टैरिफ दो हिस्सों में लगाया गया है, 25% का बेस टैरिफ और 25% का अतिरिक्त लेवी। इस टैरिफ के बाद से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध पिछले कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं। इस वजह से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार जारी है।

व्यापार वार्ता पर उम्मीद

टैरिफ के तनाव के बावजूद, ट्रंप ने भारत और अन्य देशों के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं पर आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यापार वार्ता ‘बहुत बढ़िया’ चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ भी अच्छा कर रहा है। यह बयान दिखाता है कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार है, भले ही मौजूदा मतभेद हों।

हालाँकि, उनके वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत रूस से तेल खरीदकर मुनाफा कमा रहा है और यह यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को आर्थिक मदद देने जैसा है। इसके अलावा पीटर नवारो ने यह भी कहा कि भारत के तेल खरीदने से अमेरिका में लोगों की नौकरियाँ खतरे में पड़ रही है, जो बिल्कुल ही बेतुका बयान है।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों को राज्य कर्मचारियों का दर्जा, योगी सरकार ने बढ़ाया 3 गुना वेतन: छुट्टियाँ और प्रमोशन भी मिलेंगे

काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। 40 साल के लंबे इंतजार के बाद, उन्हें अब राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलेगा, जिससे उनका वेतन तीन गुना तक बढ़ जाएगा।

गुरुवार (4 सितंबर 2025) को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की 108वीं बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस फैसले से पुजारियों और मंदिर के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के साथ-साथ प्रमोशन और छुट्टी जैसी कई अन्य सुविधाएँ भी मिलेंगी।

पुजारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी

मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों को 30000 रुपए वेतन मिलता था। नई नियमावली के तहत अब उन्हें 80000 से 90000 रुपए तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा, नियमावली लागू होने के बाद उन्हें प्रमोशन, अवकाश और अन्य सुविधाएँ भी मिलेंगी। मंदिर न्यास परिषद ने पुजारियों, कर्मचारियों और सेवादारों के लिए चार श्रेणियाँ तय की हैं और उन्हें राज्य कर्मचारियों की तरह ग्रेड और मैट्रिक्स दिए जाएँगे।

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का अधिग्रहण 1983 में किया गया था, लेकिन इसके बाद से अब तक कोई कर्मचारी सेवा नियमावली लागू नहीं हो पाई थी। लंबे समय से इस मुद्दे पर काम हो रहा था, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था। अब जाकर यह सेवा नियमावली मंजूर हुई है।

मंदिर परिसर में और भी कई बड़े बदलाव

इस बैठक में सिर्फ पुजारियों के वेतन पर ही नहीं, बल्कि मंदिर के कई विकास कार्यों पर भी मुहर लगी। न्यास ने मिर्जापुर के ककरही में अपनी 46 बीघा जमीन पर एक वैदिक शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान बनाने का फैसला लिया है। भक्तों की सुविधा के लिए श्रीकाशी विश्वनाथ धाम से शक्ति पीठ विशालाक्षी माता मंदिर तक एक कॉरिडोर भी बनाया जाएगा।

इसके अलावा, एक डिजिटल संग्रहालय की स्थापना और मंदिर से जुड़े अन्य कार्य शामिल हैं। बेनीपुर-सारनाथ स्थित संकट हरण हनुमान मंदिर का विकास और गौशाला का आधुनिकीकरण भी किया जाएगा। धाम की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम और कैमरों को आधुनिक बनाया जाएगा।

भक्तों को प्रसाद के रूप में लड्डू और रुद्राक्ष माला भी दी जाएगी और ‘संगम तीर्थ जल आदान-प्रदान योजना’ के तहत सभी ज्योतिर्लिंगों को इस योजना से जोड़ा जाएगा।

दंडी संन्यासियों को भी मिलेगा लाभ

बैठक में दंडी संन्यासियों के लिए भी एक अहम निर्णय लिया गया। उन्हें रोजाना प्रसाद, भोजन और 101 रुपए दक्षिणा दी जाएगी। इसके साथ ही, मंदिर में दैनिक दर्शनार्थियों के परिचय पत्रों का नवीनीकरण फिर से शुरू किया जाएगा। कुल मिलाकर, यह बैठक काशी विश्वनाथ मंदिर के कर्मचारियों और पुजारियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।

मुंबई के कर्जत में बन रही थी ‘हलाल टाउनशिप’, सांप्रदायिक विवाद के बाद वीडियो हटाया-बैनर ढके: NHRC ने महाराष्ट्र सरकार को भेजा नोटिस

मुंबई के पास कर्जत में बन रही ‘हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस टाउनशिप का प्रचार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही भारी आलोचना का शिकार हुआ, क्योंकि इसमें इसे सिर्फ मुसलमानों के लिए बताकर पेश किया गया था।

यह टाउनशिप सुकून एम्पायर के नाम से विकसित की जा रही है। विज्ञापन वीडियो के साथ-साथ मुंबई में कई जगहों पर इसके बड़े-बड़े बैनर भी लगाए गए थे, जिन्हें अब काली चादरों से ढक दिया गया है। सोशल मीडिया पर जब वीडियो पर आपत्ति जताई गई और आरोप लगे कि इस प्रोजेक्ट के जरिए सांप्रदायिक आधार पर बंटवारा करने की कोशिश की जा रही है, तो डेवलपर्स ने माफी माँग ली।

करीब 100 किलोमीटर दूर कर्जत स्थित इस टाउनशिप के वीडियो में बुर्का पहने एक महिला दिखती है, जो इसे ‘समान विचारधारा वाले मूल्यों’ वाले परिवारों के लिए सुरक्षित जगह बताती है, जहाँ बच्चों को ‘सुरक्षित और हलाल’ वातावरण मिलेगा। यही प्रचार विवाद का कारण बना और इसे लेकर राजनीतिक व सामाजिक विरोध शुरू हो गया।

महाराष्ट्र के कर्जत में बन रही ‘हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने 1 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए इस टाउनशिप को ‘राष्ट्र के भीतर एक राष्ट्र’ करार दिया और कहा कि इस मामले में महाराष्ट्र सरकार से जवाब माँगा गया है।

राजनीतिक स्तर पर भी विरोध तेज हो गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने डेवलपर्स की नीयत पर सवाल उठाते हुए विज्ञापन हटाने और परियोजना की जाँच की माँग की।

वहीं, भाजपा प्रवक्ता अजीत चव्हाण ने इस टाउनशिप को ‘ग़ज़वा-ए-हिंद की ओर कदम’ बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं का महाराष्ट्र या मुंबई में कोई स्थान नहीं है और यह संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने डेवलपर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

यह टाउनशिप ‘सुकून होम्स बिल्डर्स एंड डेवलपर्स’ द्वारा विकसित की जा रही है, जो छोटी कंपनी है। कंपनी ने ‘सुकून एम्पायर’ को अपनी प्रमुख परियोजना बताया है, जिसे अप्रैल 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत की प्रजनन दर 1.9%, बुजुर्गों की आबादी 10% के पार: जनसंख्या गिरावट से जूझ रहे एशिया-यूरोप के कई देश, US में भी आबादी घटने का खतरा

आज दुनिया एक बेहद महत्वपूर्ण जनसंख्या मोड़ पर खड़ी है। एक ओर कुछ देशों में अब भी जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, तो दूसरी ओर कई देश गंभीर गिरावट का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की ‘विश्व जनसंख्या संभावना 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दशकों में वैश्विक आबादी का विकास पहले के अनुमान से धीमा रहेगा।

2030 के बाद दुनिया की जनसंख्या लगभग 10.2 अरब तक पहुँचेगी, जो पिछले अनुमानों से करीब 70 करोड़ कम है। इसका मतलब है कि जन्म दर लगातार घट रही है और बहुत से देशों में लोग अब परिवार छोटा रखने लगे हैं।

इस बदलाव के असर गहरे हैं। जब किसी देश में जन्म दर गिरती है और बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ती है, तो सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, पेंशन और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।

ऐसे में सरकारों को अधिक वृद्ध लोगों की देखभाल करनी पड़ती है, लेकिन कार्यबल यानी काम करने वाले युवाओं की संख्या घटने लगती है। यही वजह है कि आज जनसंख्या का यह बदलाव केवल जनसंख्या विज्ञान का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी बन गया है।

युवा से वृद्धावस्था की ओर बढ़ता देश भारत

भारत लंबे समय तक ‘युवा राष्ट्र’ कहलाता रहा है। यह वह देश है जहाँ कामकाजी उम्र की आबादी सबसे ज्यादा मानी जाती थी। लेकिन अब आँकड़े बदलती तस्वीर दिखा रहे हैं। नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) 2023 की रिपोर्ट बताती है कि भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 1971 में 5.2 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। यह 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) से भी कम है।

इसके साथ ही 0–14 साल की आयु वर्ग की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। 1991 में यह 36% से ज्यादा थी, जो अब 24% पर आ गई है। यानी नए बच्चों की संख्या कम हो रही है। दूसरी तरफ कामकाजी उम्र (15–59 साल) वाले लोगों की हिस्सेदारी बढ़कर 66% हो चुकी है।

यह फिलहाल भारत की आर्थिक ताकत है, लेकिन आने वाले समय में यही समूह धीरे-धीरे वृद्ध होता जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि 60 साल और उससे ऊपर की आबादी अब लगभग 10% हो चुकी है।

दक्षिण भारत के राज्यों जैसे केरल और तमिलनाडु में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 14–15% तक पहुँच गई है। शिशु मृत्यु दर (IMR) और जन्म दर में गिरावट सकारात्मक है, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि आने वाले वर्षों में भारत का युवा आधार सिकुड़ सकता है।

बीते दिनों RSS प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या और जनसांख्यिकीय बदलाव पर अपनी राय रखते हुए कहा कि हर भारतीय दंपत्ति को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार जिन समुदायों की जन्म दर तीन से कम होती है, वे धीरे-धीरे विलुप्त हो जाते हैं। इसी वजह से उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार में तीन बच्चों को शामिल करना जरूरी है।

भागवत ने कहा कि डॉक्टरों ने भी उन्हें बताया है कि सही उम्र में शादी करना और तीन बच्चे पैदा करना माता-पिता और बच्चों दोनों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। उनके अनुसार तीन भाई-बहनों वाले घरों में बच्चे आपस में सामंजस्य, अहंकार प्रबंधन और रिश्तों को संभालने की कला सीखते हैं, जिससे उनके भविष्य के पारिवारिक जीवन में संतुलन बना रहता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की जनसंख्या नीति प्रतिस्थापन स्तर पर 2.1 बच्चों की सिफारिश करती है, लेकिन वास्तविक जीवन में 0.1 बच्चा होना संभव नहीं है। इसलिए गणना के हिसाब से दो बच्चों के बाद तीसरा बच्चा होना चाहिए।

भागवत का कहना था कि जनसंख्या को नियंत्रित और पर्याप्त बनाए रखने के लिए प्रत्येक परिवार को तीन बच्चों का लक्ष्य रखना चाहिए, लेकिन इससे ज्यादा नहीं। तभी बच्चों की परवरिश और शिक्षा सही ढंग से हो पाएगी।

जनसांख्यिकी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सभी समुदायों में जन्म दर घट रही है और यह बदलाव हिंदुओं में अधिक नजर आता है क्योंकि उनकी जन्म दर शुरू से ही कम रही है। भागवत ने धर्मांतरण और घुसपैठ को भी जनसंख्या असंतुलन का कारण बताया।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण भारतीय परंपराओं का हिस्सा नहीं है और न ही यह किसी धर्म द्वारा सही ठहराया जाता है। इसी तरह अवैध घुसपैठ भी देश की समस्या है, जिसे कानून और समाज दोनों को मिलकर रोकना होगा।

भागवत ने कहा कि सरकार घुसपैठ रोकने का प्रयास करती है, लेकिन नागरिकों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे अवैध घुसपैठियों को रोज़गार न दें। उनका कहना था कि देश के नागरिकों को ही प्राथमिकता से काम और रोज़गार मिलना चाहिए।

अन्य देशों का अनुभव खराब

भारत अकेला नहीं है। एशिया, यूरोप और अमेरिका के कई देश इस चुनौती से जूझ रहे हैं। जापान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 2008 के बाद से वहाँ की जनसंख्या लगातार घट रही है। शादी और बच्चों के प्रति रुझान कम हो चुका है और अब वहाँ बुजुर्गों की संख्या युवाओं से कहीं अधिक हो गई है।

इसी तरह दक्षिण कोरिया में जन्म दर दुनिया की सबसे कम है, जिसके कारण सरकार को कई सामाजिक और आर्थिक संकट झेलने पड़ रहे हैं। यूरोप भी इस संकट का सामना कर रहा है। ग्रीस में जन्म दर इतनी घट गई है कि वहाँ 5% स्कूल बंद करने पड़े। बुल्गारिया, लिथुआनिया और लातविया जैसे देशों में 2050 तक जनसंख्या में 20% से अधिक गिरावट आने की आशंका है। इटली और जर्मनी जैसे देशों की स्थिति भी चिंताजनक है।

रूस में युद्ध, आर्थिक संकट और उच्च मृत्यु दर के कारण जनसंख्या लगातार घट रही है। वहीं अमेरिका में पहली बार 2025 में यह आशंका जताई गई है कि प्राकृतिक रूप से वहाँ की आबादी घट सकती है। यानी जन्म और मृत्यु के बीच का संतुलन टूटने की संभावना है।

एलन मस्क भी दे चुके हैं चेतावनी

टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क इस विषय पर लगातार बोलते रहे हैं। उनका मानना है कि ‘कम जन्म दर मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।’ मस्क खुद 13 बच्चों के पिता हैं और  ‘अधिक बच्चे पैदा करने’ की सोच का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि अगर हर परिवार तीन बच्चे पैदा करे, तो जनसंख्या स्थिर रह सकती है।

वे बार-बार चेतावनी देते हैं कि अगर जन्म दर घटती रही, तो ‘पश्चिम का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।’ मस्क ‘जनसंख्या विस्फोट’ की चिंता को गलत मानते हैं। उनका कहना है कि यह एक ‘भ्रांत धारणा’ है और असली खतरा ‘जनसंख्या गिरावट’ है। उन्होंने यह भी कहा है कि वास्तव में प्रतिस्थापन दर 2.1 नहीं, बल्कि लगभग 2.7 होनी चाहिए, क्योंकि कुछ परिवार बच्चे नहीं पैदा करते।

विशेषज्ञों का मानना है कि मस्क की बातें कहीं-कहीं अतिशयोक्ति भी हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट बताती हैं कि दुनिया की आबादी अभी भी बढ़ रही है और यह 2100 तक चरम पर पहुँचेगी।

गति धीमी हो रही है और कई देशों में गिरावट जरूर देखने को मिल रही है। कुछ अध्ययनों का तो कहना है कि आबादी घटने के बावजूद अगर शिक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य में निवेश बढ़े तो समाज का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।

भारत के सामने चुनौतियाँ

भारत को आने वाले समय में कई मोर्चों पर सोचना होगा। जैसे-

  1. सतत विकास। अगर युवा घटेंगे और बुजुर्ग बढ़ेंगे, तो स्वास्थ्य, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पर अधिक दबाव होगा।
  2. अर्थव्यवस्था पर असर। कामकाजी उम्र की आबादी कम होने से श्रमबल घट सकता है, जिससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
  3. महिलाओं की भूमिका। जन्म दर घटने का एक कारण महिलाओं की शिक्षा और रोजगार है, जिसे सकारात्मक माना जाना चाहिए। लेकिन साथ ही परिवार को सहयोगी नीतियाँ देना भी जरूरी है।
  4. जनसंख्या नीति। सरकार को बच्चों की देखभाल, मातृत्व-पितृत्व अवकाश और परिवार-अनुकूल योजनाओं को मजबूत करना होगा।

दुनिया के लिए चुनौती

घटती जनसंख्या और बढ़ती वृद्धावस्था आज दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती है। जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोप और रूस में इसके प्रभाव पहले से दिख रहे हैं। अमेरिका और भारत जैसे देशों में भी इसका असर धीरे-धीरे महसूस किया जाने लगा है।

भारत को अपनी युवा आबादी के वर्तमान लाभ का पूरा उपयोग करना होगा और साथ ही भविष्य की तैयारी करनी होगी। यदि अभी से परिवार-अनुकूल नीतियाँ, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दशकों में भारत भी वही स्थिति झेलेगा जो आज जापान या यूरोप झेल रहे हैं।

एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन्स, फाइटर जेट्स… ऑपरेशन सिंदूर में सबकुछ खोने के बाद जागा पाकिस्तान, बढ़ाने लगा अपने परमाणु हथियार: 200+ करेगा न्यूक्लियर वॉरहेड्स, इंटरनेशनल रिपोर्ट में सामने आई बात

अमेरिका के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए रिसर्च से पता चला है कि पाकिस्तान तेजी से अपने परमाणु हथियारों के भंडार को बढ़ा रहा है। ‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान के पास फिलहाल 170 परमाणु बम हैं और 2030 तक यह संख्या 200 तक पहुँच सकती है।

इस रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने यह फैसला भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिली करारी हार के बाद लिया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पाकिस्तान को यह समझ आ गया है कि पारंपरिक युद्ध में वह भारत का मुकाबला नहीं कर सकता, इसीलिए वह अपनी परमाणु ताकत बढ़ा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर की कहानी: क्यों घबराया पाकिस्तान?

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक संघर्ष के दौरान, भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इस ऑपरेशन में भारतीय मिसाइलों ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह किए और उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया। हमले इतने सटीक थे कि पाकिस्तान की वायुसेना अपने F-16 और मिराज जैसे लड़ाकू विमानों को भी नहीं बचा पाई।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान एयरफोर्स और मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज को अपने तबाह हुए सैन्य ठिकानों की मरम्मत के लिए सरकारी ठेके जारी करने पड़े। इस संघर्ष के दौरान, किराना हिल्स पर भी एक धमाका हुआ था। यह जगह पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हुई है। हालाँकि, भारत ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली और पाकिस्तान ने भी इस बात को दबाने की कोशिश की। इससे यह साफ हो गया कि दोनों देश किसी भी तरह से परमाणु ठिकानों पर हमले की बात नहीं करना चाहते थे।

भारत से मिली हार का नतीजा: परमाणु हथियारों की दौड़

ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को यह साबित करा दिया कि पारंपरिक युद्ध में वह भारत के सामने कमजोर है। भारत की सैन्य क्षमता इतनी मजबूत है कि वह पाकिस्तान के आतंकी और महत्वपूर्ण ठिकानों को भी आसानी से निशाना बना सकती है। इसी डर से पाकिस्तान ने अब अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर दिया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के पास फिलहाल 170 परमाणु वॉरहेड हैं और वह 2030 तक इसे 200 तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही, पाकिस्तान अपनी मिसाइलों को भी आधुनिक बना रहा है। वह छोटी, मध्यम और बैलिस्टिक मिसाइलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर चुका है। इसके पास ‘अब्दुल्ला’, ‘बाबर’, ‘शाहीन’ और ‘हत्फ-IX’ जैसी मिसाइलें हैं, जो अलग-अलग दूरी तक हमला कर सकती हैं।

पाकिस्तान की ‘फुल स्पेक्ट्रम डेटरेंस’ नीति

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अपनी एक नई परमाणु नीति अपनाई है, जिसे वह ‘फुल स्पेक्ट्रम डेटरेंस‘ कहता है। इस नीति का उद्देश्य भारत को हर स्तर पर, चाहे वह रणनीतिक, ऑपरेशनल या टैक्टिकल हो रोकने का है। पाकिस्तान का मानना है कि इस नीति से वह भारत के किसी भी हमले का जवाब दे सकता है, यहाँ तक कि छोटे हमलों का भी। इसका मतलब है कि पाकिस्तान ने ‘पहले हमला नहीं करने’ की नीति को भी छोड़ दिया है।

कुल मिलाकर, इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारत की सैन्य ताकत ने पाकिस्तान को इतना डरा दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अब पूरी तरह से परमाणु हथियारों पर निर्भर हो रहा है।