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निर्दलीय+AAP से करेंगे डील, विधायकों को भेजेंगे राजस्थान: गुजरात के लिए कॉन्ग्रेस ने बनाया था ‘प्लान’, BJP की रिकॉर्ड जीत ने तोड़े हसीन ख्वाब

गुजरात में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने से पहले कॉन्ग्रेस के सपने बहुत बड़े-बड़े थे। उन्होंने सोचा हुआ था कि उनके हिस्से इतनी सीट आने वाली है कि उन्हें विपक्षी पार्टियों से अपने विधायक बचाने पड़ेंगे। इस बाबत उन्होंने कल (7 दिसंबर 2022) मीटिंग भी की थी। उनका प्लान था कि नए विधायकों को वो राजस्थान में शिफ्ट करेंगे। हालाँकि जब नतीजे आए तो हालत इतनी खस्ता थी कि आधे विधायक तो दूर की बात है उनके हिस्से ही कुल 17 सीट आती दिख रही हैं।

तस्वीर साभार: eci.gov.in

देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, 7 दिसंबर 2022 को गुजरात कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकुर, राज्य के पार्टी प्रभारी रघु शर्मा समेत अन्य लोगों ने अहमदाबाद के पालदी इलाके में पार्टी हेडक्वार्टर में बैठक की थी। इस बैठक में ही निर्णय लिया गया था कि वो लोग अपने नवनिर्वाचित विधायकों को राजस्थान ले जाएँगे ताकि भाजपा उन्हें अपनी तरफ करने की कोशिश न कर सकें।

उनका प्लान ये भी था कि वो लोग अगर जीत के आँकड़ों के आधे तक भी पहुँचे तो निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पाले में कर लेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें आम आदमी पार्टी के साथ भी गठजोड़ करने में दिक्कत नहीं थी। हालाँकि नतीजे आने के बाद खेल पलट गया।

एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस ने विधानसभा चुनावों के नतीजों आने के पहले प्लान कुछ और बनाया हुआ था। वहीं नतीजे आने के बाद उनका प्लान किसी स्तर पर कारगर नहीं दिखा। अकेले भाजपा ने अपने दम पर बहुमत पाकर रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल कर ली है। वहीं कॉन्ग्रेस गठजोड़ करके भी कहीं से सत्ता में नहीं आ सकती।

ईसीआई के आँकड़ों के अनुसार  भाजपा के हिस्से जहाँ 135 सीटें आ चुकी हैं और पार्टी 21 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं कॉन्ग्रेस को अभी तक केवल 12 सीट ही मिली हैं और जो सीटें जीतने की संभावना है वो 5 सीट हैं। कुल मिलाकर कॉन्ग्रेस के हिस्से अगर सीटें आएँगे तो मात्र 17 सीट आएँगी। 

लाशों के ढेर पर राजनीति करती रह गई AAP-कॉन्ग्रेस, मोरबी की जनता ने BJP को दे दिया आशीर्वाद: पुल हादसे के बाद नदी में कूद पड़े थे कांतिलाल अमृतिया

गुजरात विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है और अब तक के रुझानों में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। राज्‍य के वीआईपी नेताओं की सीटों के अलावा इस चुनाव में एक और सीट जो चर्चा में रही है, वो है मोरबी की सीट। इस पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। गुजरात चुनाव से कुछ दिन पहले ही यहाँ हुए पुल हादसे में 130 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। विपक्ष ने इस हादसे को हथियार बनाते हुए भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। माना जा रहा था कि इस हादसे का चुनाव परिणाम पर असर जरूर देखने को मिलेगा।

हालाँकि मोरबी की जनता ने विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए यहाँ से भाजपा प्रत्याशी कांतिलाल अमृतिया को अपना वोट दिया। कच्छ जिले की इस सीट पर कांतिलाल ने 62 हजार वोटों से जीत हासिल कर ली है। कांतिलाल को 1 लाख 14 हजार से भी ज्यादा वोट मिले हैं। जबकि कॉन्ग्रेस उम्मीदवार जयंतीलाल जेराजभाई को 52 हजार वोटों से संतोष करना पड़ा है। वहीं आप उम्मीदवार पंकज कांतिलाल को 17 हजार वोट मिले हैं।

मोरबी पुल हादसे के बाद लोगों को बचाने के लिए मच्छू नदी में कूद कर लोगों की मदद करने वाले कांतिलाल अमृतिया खासी चर्चा में रहे थे। गौरतलब है कि ब्रिटिश काल का मोरबी ‘झूला पुल’ 30 अक्टूबर, 2022 को ढह गया था, जिसमें 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने जोर-शोर से इसको मुद्दा बनाया। हादसे का जिम्मेदार भाजपा को ठहराने की कोशिश की गई।

पुल हादसे के बाद लोगों की जान बचाते हुए कांतिलाल अमृतिया के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसमें वे लाइफ ट्यूब पहने लोगों की जान बचाने की कोशिश करते हुए दिखे थे। चश्मदीदों ने बताया था कि जब पुल हादसा हुआ उसके तुरंत बाद अमृतिया मौके पर पहुँचे और लोगों की मदद के लिए नदी में कूद पड़े। इस काम के लिए कांतिलाल की न सिर्फ सराहना की गई बल्कि भाजपा ने मौजूदा विधायक का टिकट काट कर उन्हें मोरबी से उम्मीदवार बनाया।

भाजपा के इस फैसले पर जनता ने भी मुहर लगा दी है। मोरबी हादसे को लेकर नकारात्मक राजनीति कर रहे कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) को यहाँ से भी मायूसी हाथ लगी है।

नीतीश से कितनी कुढ़ी बिहार की जनता, कुढ़नी ने दिखाया: राजद-लेफ्ट-कॉन्ग्रेस सब JDU के साथ, फिर भी BJP जीती

बिहार में सत्ताधारी जदयू (JDU) और राजद (RJD) के गठबंधन सरकार और विपक्षी दल भाजपा (BJP) के लिए नाक का सवाल बने कुढ़नी सीट के नतीजे आ गए हैं। बिहार के कुढ़नी सीट पर हुए उपचुनावों में भाजपा ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की पार्टी जदयू को पटकनी दे दी है। सबसे बड़ी बात है कि इस सीट पर जदयू के उम्मीदवार को राजद, कॉन्ग्रेस और वामपंथी दलों का भी समर्थन हासिल था।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित कुढ़नी विधानसभा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार केदार गुप्ता (Kedar Gupta) का मुकाबला जेडीयू के प्रत्याशी मनोज कुशवाहा (Manoj Kushwaha) से था। कुशवाहा को गठबंधन दलों का भी समर्थन हासिल था। इसके बावजूद केदार गुप्ता ने कुशवाहा को 3,632 वोटों से परास्त कर दिया।

इस सीट पर मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) की पार्टी वीआईपी (VIP) के उम्मीदवार नीलाभ कुमार तीसरे नंबर पर रहे। नीलाभ कुमार सिर्फ 10,000 वोट मिले। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के प्रत्याशी मुर्तजा अंसारी को 3,206 वोट मिले हैं। AIMIM प्रत्याशी से अधिक वोट NOTA को मिले। 4,448 लोगों ने NOTA को चुना है। 

इस सीट पर दोनों प्रत्याशियों के बीच मुकाबला काँटे का था। कभी भाजपा आगे निकलती तो कभी महागठबंधन के प्रत्याशी। इस सीट पर कुल 23 राउंड वोटों की गिनती हुई। पहले चार राउंड तक भाजपा आगे रही। पाँचवें राउंड में JDU आगे निकल गई, लेकिन छठे राउंड में भाजपा फिर आगे निकल गई। 9वें राउंड में भाजपा फिर पिछड़ी, लेकिन 19वें राउंड में फिर आगे निकल गई और अंत में जीत हासिल की।

भाजपा केदार गुप्ता को कुल 76,722 वोट मिले हैं, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार मनोज कुशवाहा को 73,073 वोट मिले है। इस सीट पर भाजपा का कुल वोट शेयर 42.38 प्रतिशत रहा, जबकि दूसरे नंबर पर जदयू को 40.37 प्रतिशत वोट मिले।

इस सीट पर चुनाव में उपमुख्यमंत्री ने अपने पिता लालू यादव की बीमारी का हवाला देकर इमोशनल कार्ड भी खेला था। तेजस्वी ने लालू यादव की बीमारी का हवाला दिया था और जदयू के उम्मीदवार को जिताने की अपील की थी। हालाँकि, उनकी यह अपील काम नहीं कर पाई।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बीजेपी की जीत के बाद नीतीश कुमार से इस्तीफा माँगा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के महागठबंधन ने कुढनी में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए। सारे हथकंडे अपनाए, फिर भी मतदाताओं ने भाजपा की जीत पक्की की।

बता दें कि साल 2020 विधानसभा चुनाव में कुढ़नी सीट पर राजद प्रत्याशी अनिल सहनी की जीत हुई थी। उस दौरान भाजपा उम्मीदवार केदार गुप्ता करीब 700 वोटों से हार गए थे। अनिल सहनी की सदस्यता खत्म होने के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने 3645 वोटों से कुढ़नी में जीत हासिल की है।

इसके पहले 2015 के विधानसभा चुनाव में बिहार के मंत्री मनोज कुशवाहा को भाजपा के केदार गुप्ता ने हराया था, लेकिन 2020 में वे हार गए थे। बता दें कि कुढ़नी सीट सन 1995 के बाद से अब तक 5 बार जदयू-राजद की झोली में गिरी है। इस बीच 2015 के चुनाव में यह सीट भाजपा के खाते में आई थी।

कुछ महीने पहले हुए गोपालगंज उपचुनाव में नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार को हार का मुँह देखना पड़ा था। गोपालगंज सीट को भाजपा की दिवंगत नेता सुभाष सिंह की पत्नी कुसुम देवी इस सीट पर जीत हासिल की थी। सुभाष सिंह साल 2005 से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे।

हालाँकि, मोकामा उपचुनाव में राजद ने भाजपा को हरा दिया था, लेकिन यह जीत राजद या नीतीश कुमार की ना होकर बाहुबली नेता अनंत सिंह की थी। वे जदयू में थे तब जीते थे और राजद में आने के बाद इस सीट पर उनकी पत्नी जीती। अगर वे किसी और दल में होते, तब भी यह सीट उनके ही खाते में जाती है। इसलिए इस सीट को महागबंधन की जीत नहीं कहा जा सकता।

प्रिंसिपल शफक इकबाल ने तिरंगा को फाड़ कर बना दिया डस्टर, साफ़ की कुर्सी भी: पूछने पर कहा – पुराना था, इस्तेमाल कर लिया, सरस्वती पूजा पर लगा चुका है रोक

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले से तिरंगे को अपमानित करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय के प्रिंसिपल शफक इकबाल ने तिरंगा को फाड़ कर डस्टर बना दिया। जैसे ही ग्रामीणों को इस बारे में जानकारी मिली, उन्होंने यहाँ के घाटशिला बोर्ड मध्य विद्यालय को घेर लिया।

हालाँकि, घटना के बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और सुरक्षा के लिहाज से पहले प्रिंसिपल को स्कूल के बाहर निकाला गया। जानकारी के मुताबिक, प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं आक्रोशित ग्रामीण व बच्चों के अभिभावक प्रिंसिपल को स्कूल से हटाने पर अड़ गए हैं।

आरोप है कि क्लास के दौरान शिक्षक ने ब्लैक बोर्ड साफ करने के लिए तिरंगे को फाड़ दिया। स्कूल के प्रिंसिपल ने राष्ट्रीय तिरंगा को कैंची से काटकर डस्टर बना दिया। फिर इसी तिरंगे से पहले अपनी कुर्सी पोछी और ब्लैक बोर्ड को साफ किया। बच्चे क्लास में मौजूद थे। छात्र जब घर लौटे,तो ग्रामीणों को यह जानकारी मिली। नाराज ग्रामीणों ने पूरे स्कूल को घेर लिया और शिक्षक से सवाल जवाब किए।

इस घटना के संबंध में पूछे जाने पर प्रिंसिपल ने बेतुका जवाब दिया। राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप पर शफक इकबाल ने कहा कि यह पुराना हो गया था, इसलिए इसे फाड़कर डस्टर बना दिया। उसने कहा कि उससे गलती हो गई। उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। हालाँकि, पहले तो शफक ने घटना से अनभिज्ञता जाहिर की, लेकिन जब स्कूल की अलमारी चेक की गई तो आधा फटा हुआ झंडा बरामद किया गया। इसके बाद उसने अपनी गलती मानी और कहा कि झंडा पुराना था, चूहे ने काट लिया था। मुझे लगा कि इसका इस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं तो हमने कर लिया।

वहीं ग्रामीणों ने शिक्षक पर एक और गंभीर आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि इस शिक्षक के खिलाफ इस तरह के कई मामले पहले भी आ चुके हैं। स्कूल में पहले छात्र मिलकर सरस्वती पूजा करते थे। इन्होंने आने के बाद इस पर भी रोक लगा दी है।

70 साल और 20 विधानसभा चुनावों के बाद पहला हिंदू विधायक: आज़म खान के गढ़ में खिला कमल, भड़के सपा उम्मीदवार असीम रज़ा

उत्तरप्रदेश का रामपुर सदर जो अब तक समाजवादी पार्टी के आजम खान का गढ़ कहा जाता था, वहाँ एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। खबर आ रही है कि 70 साल में हुए 20 विधानसभा चुनावों के बाद पहली बार इस क्षेत्र को एक हिंदू विधायक मिला है।

रामपुर में भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना ने 80964 वोट पाकर जीत हासिल कर ली है। उनका जीत का मार्जिन 34 हजार से ज्यादा है। दूसरे नंबर पर सपा के मोहम्मद असीम राजा है। उन्हें 47262 वोट मिले हैं।

तस्वीर साभार: eci.gov.in

नतीजे आने के बाद सपा प्रत्याशी असीम राजा खासा नाराज दिखे। उन्होंने अपनी हार की वजह पुलिस को बताया।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रामपुर चुनावों में 70 प्रतिशत वोट लूटे गए हैं। आनंदी टीवी यूपी के मुताबिक उन्होंने अपनी हार के पीछे रामपुर पुलिस को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि खाकी के लोगों ने दंडों से वोटरों को वोट नहीं डालने दिए।

असीम रजा ने कहा, “5 दिंसबर को रामपुर में चुनाव हुआ था और हमने पहले भी कहा था कि रामपुर में इलेक्शन हुआ ही नहीं है। शहर के अंदर 200 बूथों पर पुलिस ने रामपुर के शहरियों को वोट डालने ही नहीं दिया है। बूथों को लूट लिया है। 252 बूथों पर मात्र 20 फीसद वोटिंग हुई है। शहर और गाँव के बाहर जो बूथ थे वो सब कैप्चर कर लिए गए थे। वहाँ 50-70-80फीसद वोटिंग हुई है। सारे बूथ कैप्चर कर लिए गए। सवा दो लाख मतदाताओं को वोट नहीं डालने दिया गया। केवल 45 हजार वोट डाले गए और उसमें भी बहुत से बूथों पर पुलिस ने खुद ही वोट डाल दिए। अभी काउंटिंग हो रही है। लेकिव जो शहर में जहाँ सपा का गढ़ था, जहाँ टोटल वोट का 70% था वहाँ वोट नहीं डालने दिए गए।”

घनी-लंबी मूँछें, गर्दन तक बाल, काला चश्मा, मजाक में भर दिया था पर्चा… द्वारकाधीश के पुजारी परिवार के इस शख्स की 8वीं जीत, PM मोदी के हैं खास

गुजरात में विधानसभा के चुनाव परिणाम आ रहे हैं और चुनाव आयोग के आधिकारिक आँकड़ों को देखें तो जहाँ भाजपा 154 सीटों पर आगे चल रही है और कॉन्ग्रेस पार्टी के खाते में मात्र 19 सीटें जाती हुई दिख रही हैं। AAP ने हाइप तो खूब बनाया, लेकिन पार्टी को आधा दर्जन सीटों से संतोष करना पड़ सकता है। गुजरात की जिन सीटों और उम्मीदवारों पर लोगों की विशेष नजर थी, उनमें से एक है द्वारका, जहाँ से भाजपा के पबुभा मानेक जीत गए हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी उनके लिए जनसभा की थी।

द्वारका विधानसभा सीट पर पबुभा मानेक का सीधा मुकाबला कॉन्ग्रेस के अहीर मुलू कंदोरिया से था। 144 करोड़ की संपत्ति वाले कारोबारी पबुभा मानेक प्रतिदिन 5 घंटे गौशाला में बिताते हैं। घनी-लंबी मूँछें, काला चश्मा, गर्दन तक आते बाल और रौबदार चेहरा – ये उनकी पहचान है। महज 8वीं तक पढ़े हैं, लेकिन देश-विदेश की जानकारी रखते हैं। पहली बार वो 1990 में निर्दलीय लड़े थे और जीते थे। उन्होंने दोस्तों के कहने पर मजाक-मजाक में पर्चा भर दिया था और वापस भी लेने वाले थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

वो वाघेर क्षत्रिय समुदाय से आते हैं। उन्होंने 1995 और 1998 के विधानसभा चुनावों में भी निर्दलीय जीत दर्ज की थी। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस में आ गए, जहाँ से टिकट लेकर वो 2002 के विधानसभा चुनाव में विजयी हुए। हालाँकि, गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर वो भाजपा में आ गए और 2007, 2012, 2017 और 2022 का चुनाव इसी पार्टी से लड़ा और जीता। वो द्वारकाधीश मंदिर के पुजारियों के परिवार से आते हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान द्वारका के भाजपा विधायक पबुभा मानेक

पहली बार चुनाव लड़ने के दौरान अपने पिता की अनुमति के लिए उन्हें मनाने के लिए दोस्तों को भेजना पड़ा था। उन्होंने 2002 में शंकर सिंह वाघेला के कहने पर कॉन्ग्रेस ज्वाइन किया था। कहा जाता है कि द्वारका में मुस्लिमों के तबके का एक हिस्सा भी उन्हें वोट के रूप में मिलता है। वहाँ हाल ही में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ी कार्रवाई हुई है। पबुभा मानेक शिपिंग, ट्रांसपोर्ट और रियल एस्टेट कारोबार में हैं। उन पर एक बार मोरारी बापू पर हमला करने का आरोप भी लगा था। अब भगवान बलराम पर मोरारी बापू ने विवादित बयान दिया था।

गुजरात में AAP की सरकार बनेगी… अरविंद केजरीवाल ने तारीख़ लिख कर किया था दस्तखत, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर CM फेस तक – सब हार गए

भाजपा गुजरात विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने जा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर वायरल हो रही है। यह तस्वीर उस इलेक्शन कैंपेन की बताई जा रही है जब अरविंद केजरीवाल ने लिखित तौर पर दावा किया था कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाएगी। इतना ही नहीं केजरीवाल ने अपने दस्तखत के साथ तारीख भी लिखी थी। गुजरात चुनाव में आम आदमी पार्टी के बुरे हश्र के बाद केजरीवाल का यह लिखित दावा वायरल हो रहा है।

केजरीवाल ने दावा किया था कि सत्ता विरोधी लहर और कॉन्ग्रेस की उदासीनता का फायदा AAP को मिलेगा।

अरविंद केजरीवाल की गुजरात में आप सरकार बनाने का दावा करने वाली तस्वीर वायरल

एनडीटीवी के एक प्रोग्राम में अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि दिल्ली के एमसीडी चुनावों में भाजपा की सिर्फ 20 सीटें आएँगी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि गुजरात में आम आदमी पार्टी सरकार बनाएगी। दोनों ही दावों को लेकर लोग अरविंद केजरीवाल पर तंज कर रहे हैं।

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भी अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के झूठे दावों की कलई खोल दी है। आप के सीएम उम्मीदवार इसुदान गढ़वी अपनी सीट भी नहीं बचा पाए और उन्हें खंभालिया सीट पर भाजपा उम्मीदवार मुलुभाई बेरा ने मात दे दिया। इसुदान गढ़वी के अलावा आम आदमी पार्टी के अन्य दो बड़े नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा है। पाटीदार आंदोलन के प्रमुख चेहरे अल्पेश कथीरिया और आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया को भी करारी हार मिली है।

अल्पेश कथीरिया सूरत के वराछा रोड सीट पर चुनाव लड़ रहे थे जिन्हें भाजपा के किशोर कनानी ने हरा दिया। सूरत के ही कतारगाम सीट पर चुनाव लड़ रहे आप के प्रदेश अध्यक्ष को भाजपा के विनोद भाई मोरडिया ने शिकस्त दे दी।

साभार चुनाव आयोग

चुनाव आयोग के तरफ से जारी किए गए ताजा रुझानों में केजरीवाल के दावों की धज्जियाँ उड़ चुकी हैं। 182 सीटों वाली विधानसभा में उनकी पार्टी सिर्फ 5 सीटों पर आगे चल रही है, उनमें से कुछ पर पार्टी को मामूली बढ़त मिल रही है जो कभी भी पलट सकती है।

आज (08 दिसंबर, 2022) सुबह 8 बजे से ही गुजरात और हिमाचल प्रदेश राज्य विधानसभा चुनाव में डाले गए वोटों की गिनती जारी है। गुजरात में अब तक के रुझानों में भाजपा 150 से ज्यादा सीटों के साथ ऐतिहासिक जनादेश हासिल करने जा रही है। कॉन्ग्रेस 17 और आप 5 सीटों पर आगे चल रही है।

जिस पर नाबालिगों के अवैध धर्मांतरण का आरोप, उसे दैनिक भास्कर ने दिया ‘प्राइड ऑफ सेंट्रल इंडिया’ अवॉर्ड: FIR के बाद से फरार है ईसाई संगठन का अध्यक्ष

जिस ईसाई संगठन पर नाबालिगों के अवैध धर्मांतरण का आरोप है, उसके अध्यक्ष डॉ. विवर्त लाल को दैनिक भास्कर ने सम्मानित किया है। मीडिया संस्थान के इस कार्यक्रम में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद थे। प्राइड ऑफ सेंट्रल इंडिया अवॉर्ड नामक यह आयोजन दैनिक भास्कर ने 1 दिसंबर 2022 को दिल्ली में किया था। मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी के अध्यक्ष लाल को ‘सामाजिक कार्यों’ के लिए यह सम्मान मिला है।

दैनिक भास्कर के ‘प्राइड ऑफ सेंट्रल इंडिया अवॉर्ड’ का यह दूसरा संस्करण था। लाल को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में नामित किए जाने के दो सप्ताह बाद सम्मानित किया गया है।

उल्लेखनीय है NCPCR के औचक निरीक्षण के बाद मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी पर अवैध धर्मांतरण का मामला दर्ज किया गया था। NCPCR के प्रमुख प्रियांक कानूनगो द्वारा उनके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराने के बाद प्राथमिकी में अध्यक्ष सहित ईसाई संगठन से जुड़े 10 लोगों को नामजद किया गया है।

NCPCR द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में 9 अन्य आरोपित सदस्यों के साथ नामजद डॉ. विवर्त लाल फिलहाल फरार हैं। ऐसे में दैनिक भास्कर के कार्यक्रम में लाल के बदले उनके सहयोगी सलिल ने अवॉर्ड स्वीकार किया था।

फरार आरोपित विवर्त लाल के निजी सहायक सलिल ने स्वीकार किया पुरस्कार (इमेज स्रोत- दैनिक भास्कर)

लाल के खिलाफ मामला मध्य प्रदेश के दमोह जिले से सामने आने वाले कथित जबरन धर्मांतरण से संबंधित है। NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने दमोह में मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी के दस सदस्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। कानूनगो ने शिकायत में कहा था कि मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी के बाल गृह में रहने वाले कई हिंदू नाबालिग छात्रों को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया गया है और उन्हें जबरदस्ती पढ़ाई से दूर रखा जा रहा है। उन्हें भविष्य में पादरी बनने के लिए मिशनरी अधिकारियों द्वारा लालच दिया जा रहा है।

यह मामला तब सामने आया जब कानूनगो ने 13 नवंबर 2022 को मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी द्वारा संचालित बाल गृह का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि संगठन के कामकाज में भारी अनियमितताएँ पाई गईं और आवश्यक दस्तावेज पेश करने में भी वे विफल रहे।

ऑपइंडिया के पास उपलब्ध एफआईआर की प्रति के अनुसार, “मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी में 91 बच्चे पंजीकृत थे, जिनमें से 45 उपस्थित थे। इनमें से अधिकांश बच्चे हिंदू हैं और कुछ मुसलमान हैं। लेकिन इन सभी को ईसाई धर्म की शिक्षा दी जा रही है। संगठन के पास अपने कामकाज के लिए उचित दस्तावेज भी नहीं थे।”

विवर्त लाल और 9 अन्य अभियुक्तों के खिलाफ NCPCR द्वारा दर्ज शिकायत (FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध)

एनसीपीसीआर ने शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि छात्रावास के अधिकारियों द्वारा बच्चों और उनके माता-पिता के संबंध में कोई उचित दस्तावेज नहीं रखा जा रहा है। इसमें कहा गया है कि अनाथ बच्चों को संगठन के अध्यक्ष के नाम पर जबरदस्ती ‘लाल’ नाम दिया गया था। एनसीपीसीआर ने कहा था, “यह धर्मांतरण और मानव तस्करी का भी मामला बनता है।”

पुलिस ने तब किशोर न्याय अधिनियम की धारा 42 और 75 और मप्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 और 5 के साथ-साथ 10 सदस्यों के खिलाफ आईपीसी की धारा 370 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी में नामित 10 सदस्यों की पहचान संगठन के अध्यक्ष डॉ. विवर्त लाल, सचिव आरडी लाल, शीला लाल, मंजुला वर्णवास, सनित लाल, जीके हेनरी, अर्नेस्ट, विवेक लाल, इंजिला लाल और डॉ अजय लाल के रूप में की गई है।

एनसीपीसीआर द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अवार्डी डॉ विवर्त लाल सहित 10 अभियुक्तों का उल्लेख किया गया है

कथित तौर पर, मामले में नामजद अभियुक्तों के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में बिशप डॉ. अजय लाल ने अग्रिम जमानत माँगी थी, जिसे दमोह कोर्ट ने 17 नवंबर 2022 को खारिज कर दिया। डॉ. विवर्त लाल अभी भी फरार हैं। जैसा कि हमने पहले बताया था, डॉ. अजय लाल को इस साल 15 अगस्त 2022 को उनकी ‘समाज सेवा’ गतिविधियों के लिए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के हाथों सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष 2021 में कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य द्वारा पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था।

विशेष रूप से, जितेंद्र गौतम नाम के IBC24 के पत्रकार ने बिशप अजय लाल और दमोह कलेक्टर के बीच संबंधों को उजागर किया था। उसे कलेक्टर के पीआरओ वाई कुरैशी द्वारा धमकी भी दी गई थी।

मौजूदा मामले में, मिड इंडिया क्रिश्चियन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. विवर्त लाल को दिल्ली में दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित ‘प्राइड ऑफ सेंट्रल इंडिया, 2022’ नामक एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। उन्हें मध्य प्रदेश के दमोह क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय ‘समाज सेवा’ के लिए सम्मानित किया गया।

आरोपित डॉ विवर्त लाल को दैनिक भास्कर ने प्रिंट फॉर्मेट में छापा

1 दिसंबर 2022 को आयोजित समारोह में मध्य प्रदेश के 55 अन्य समाजसेवियों को भी केंद्रीय मंत्री सिंधिया के हाथों सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सिंधिया ने कहा कि समारोह में पुरस्कार पाने वाले सभी लोग मध्य प्रदेश के ‘रत्न और नवरत्न’ हैं।

मैनपुरी में डिंपल यादव ‘सांत्वना वोट’ से निहाल, ससुर मुलायम के निधन से खाली हुई थी सीट: गुजरात में भी सपा की साइकिल को सवार मिला

उत्तरप्रदेश के मैनपुरी उपचुनावों में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी डिंपल यादव लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। अभी तक आए आँकड़ों के अनुसार वह 257742 मार्जिन से आगे चल रही हैं। डिंपल यादव को जहाँ 552698 वोट मिले हैं। वहीं भाजपा के रघुराज सिंह शाक्य 294956 वोट पाकर पीछे हैं। यह सीट मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई थी।

सोशल मीडिया पर डिंपल यादव की कई ऐसी वीडियोज हैं जिनमें मुलायम सिंह यादव के नाम डिंपल यादव के लिए वोट माँगा गया था और वह केवल हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन कर रही थीं। इस जीत को जहाँ मैनपुरी और सपा द्वारा मुलायम सिंह यादव की जीत कहा जा रहा है। नतीजों की तस्वीर आने के बाद डिंपल ने घर से निकल स्थानीय मंदिर में माथा भी टेका।

वहीं दूसरी ओर खबर है कि डिंपल के चुनाव में बढ़त बनाते ही अखिलेश यादव के चाचा ने अपनी पार्टी प्रसपा का विलय सपा के साथ कर लिया है। इस संबंध में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने गुरुवार को संयुक्त रूप से सैफई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा की।

गुजरात चुनावों में सपा सिर्फ एक सीट पर आगे

उल्लेखनीय है कि जहाँ डिंपल यादव की जीत के बाद उत्तरप्रदेश में सफा को मजबूत करने का काम हो रहा है। वहीं गुजरात में एक अकेली सीट है जहाँ सपा का जादू चला है। ये सीट पोरबंदर के कुटियाना सीट की है। ईसी के मुताबिक सपा प्रत्याशी कांधलभाई जडेजा कुटियाना सीट से काफी आगे हैं। कांधलभाई 60163 वोटों के साथ आगे चल रहे हैं, वहीं भाजपा उम्मीदवार ढेलिबेन भूराभाई ओदेदरा को 33532 वोट मिले हैं। कुटियाना सीट पर सपा उम्मीदवार कांधलभाई लगभग 46 फीसद से भी ज्यादा वोट शेयर पाए हैं। वहीं, उनके बाद भाजपा उम्मीदवार को केवल 26.12 फीसद वोट मिल रहे हैं।

BJP के हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर की शानदार जीत: कॉन्ग्रेस के जिग्नेश मेवाणी को मिली कड़ी टक्कर

गुजरात विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। अब तक सामने आए नतीजों में भाजपा एक बार फिर प्रचंड बहुमत हासिल करने जा रही है। हालाँकि, चुनाव में तीन प्रमुख चेहरे भी हैं, जो कभी भाजपा सरकार की विरोध का गुजरात में चेहरा बने थे। इनमें से दो चेहरे भाजपा में शामिल होकर चुनाव जीत गए हैं।

साल 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान तीन चेहरे हीरे बनकर उभरे थे। इन चेहरों को कॉन्ग्रेस सहित विपक्षी दलों का खूब सहयोग मिला था। अब ये तीनों चेहरे खुद मैदान में हैं। ये तीन चेहरे हैं- हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी।

तीनों युवा नेताओं ने मिलकर राज्य में भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी। पाटीदारों के लिए आरक्षण का मुद्दा उठाने वाले हार्दिक पटेल ने बड़ा आंदोलन चलाया था। अल्पेश ठाकोर ने पिछड़े वर्ग और जिग्नेश मेवाणी ने दलितों को एकजुट किया था। उस दौरान इन तीनों के कारण भाजपा के कई विधायक हार गए थे।

बाद में तीनों युवा नेता कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। विधानसभा चुनावों की घोषणा से ठीक पहले हार्दिक पटेल कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें गृहनगर विरमगाम सीट से मैदान में उतारा है। हार्दिक यहाँ से कॉन्ग्रेस के लाखाभाई भरवाड़ को हराया दिया है।

अल्पेश ठाकोर भी चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। ठाकोर को भाजपा ने गाँधीनगर दक्षिण सीट से मैदान में उतारा था। अल्पेश का मुकाबला कॉन्ग्रेस के हिमांशु पटेल और आम आदमी पार्टी के देवेंद्र पटेल से है। यहाँ अल्पेश ने यहाँ कॉन्ग्रेस को पराजित किया है।

वहीं, जिग्नेश मेवाणी कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के तौर पर वडगाम से चुनावी मैदान में हैं। मेवाणी का मुकाबला भाजपा के मणिलाल वाघेला से था। इस मुकाबले में मेवाणी को कड़ी टक्कर मिल रही है। साल 2017 में जिग्नेश ने इस सीट को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीता था।

साल 2019 के लोकसभा चुनावों के जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीट कर कहा था, “किसी ऐसे व्यक्ति को वोट दें जो आपके बच्चों को ऑक्सफोर्ड (Oxford) भेजता है न कि अयोध्या। ऐसे व्यक्ति को वोट दें, जो आपको अच्छे स्कूल और अस्पताल बनाने का वादा करता है, न कि राम मंदिर। ऐसे व्यक्ति के लिए वोट करें, जिसका शासन में ट्रैक रिकॉर्ड है और आतंकवाद में नहीं।”