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‘200 करोड़ मुस्लिमों की जीत’: FIFA में मोरक्को की जीत पर ‘उम्माह’ के साथ भारत के एक मुख्यमंत्री, मेसी को ‘बकरी’ बना किया था रोस्ट

कतर में हुए फीफा वर्ल्ड कप (Qatar Fifa World Cup) में पुर्तगाल के साथ हुए मैच में मोरक्को (1-0) के जीतते ही सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय का अलग ही रुख देखने को मिला। अब तक जहाँ लोग अपनी पसंदीदा टीम या उसके खिलाड़ियों के प्रदर्शन की चर्चा मैच खत्म होने के बाद करते थे। वहीं इस बार मोरक्को के जीतने पर बातें उम्माह की होती नजर आईं। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला भी इस भीड़ का हिस्सा थे जिन्होंने पूरे फीफा के वक्त दो बार ट्वीट किया, वो भी सिर्फ इस्लामी देश की जीत से संबंधित।

देख सकते हैं कि एक ट्वीट में उमर अब्दुल्ला ‘मोरक्को वो हो (खुशी दर्शाने वाले शब्द)’ कहकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं और दूसरे ट्वीट में वो फुटबॉल जगत के लीजेंड माने जाने वाले मेसी की खिल्ली उड़ाते हुए एक ट्वीट रीट्वीट करते हैं। इसमें दिखाया जाता है कि कैसे बाहरी देश मेसी को महान समझते हैं और इस्लामी देश के सामने वह कुछ भी रह जाते। इस संदेश को देने के लिए एक जिंदा बकरी और एक रोस्ट होते मटन की तस्वीर को शेयर किया गया है। उनके इन दोनों ट्वीट से साफ पता चलता है कि उनके लिए फीफा में क्या जरूरी था। अगर वो खेल और खिलाड़ी को इज्जत देना जानते तो मेसी जैसे खिलाड़ी का मजाक नहीं उड़ाते।

मालूम हो कि केवल उमर अब्दुल्ला अकेले नहीं है जिन्हें मोरक्को की जीत से इतनी खुशी हुई हो। ऐसे तमाम मुस्लिम है जो एक मुस्लिम देश के फीफा में मैच जीतने पर फूल रहे हैं। 2014 में वर्ल्ड कप के विजेता रहे इस्तानबुल के फुटबॉलर मेसुत ओजिल मोरक्को की जीत को सबसे दुनिया के हर मुस्लिम की जीत से जोड़ते हैं और कहते हैं,”गर्व हो रहा है। क्या टीम है! मुस्लिम जगत के लिए क्या उपलब्धि है। अच्छा लग रहा है यह देखकर कि आधुनिक फुटबॉल के समय में भी कहानियाँ सच होती हैं। इससे कई लोगों को ताकत और उम्मीद मिलेगी।”

भारत के बारे में फर्जी न्यूज फैलाने वाले खालेद बेदौन ने कहा, “मोरक्को एक मुस्लिम देश है। वहाँ 98 फीसद लोग इस्लाम को मानते हैं। खिलाड़ियों ने भी गोल और जीत के बाद इबादत की है। ये जीत विश्व भर के 2 बिलियन मुस्लिमों की है।”

कुछ यूजर ये भी लिखते हैं कि उन्हें रोनाल्डो पसंद है और वह विश्वास नहीं कर पा रहे कि उन्होंने अपने जीवन में एक भी वर्ल्ड कप नहीं जीता। मगर साथ ही उन्हें मोरक्को की जीत की खुशी है। उन्हें उम्माह का समर्थन मिला है। देख सकते हैं कि कैसे मोरक्को की जीत से ज्यादा उम्माह की बातें ट्वीट में हो रखी हैं और शायद यही वजह है कि उमर अब्दुल्ला भी मोरक्को की जीत पर इतना खुश हुए।

विवादों में रहा कतर का फीफा

बता दें कि इस बार कतर में हुआ फीफा वर्ल्ड कप कई विवादों का हिस्सा रहा। पहले तो खबर आई कि वहाँ पर इस्लामी मजहब का प्रचार-प्रसार गैर-मुस्लिम टूरिस्टों में किया जा रहा है। फिर पता चला कि वहाँ रेनबो रंग वाले कलाई बंध बाँधने से यूरोपियन खिलाड़ियों को मना कर दिया गया है और पत्रकारों को भी इस बैंड को पहनकर मैच नहीं देखने दे दिया जा रहा।

इसी तरह मैच को एक बीयर कंपनी द्वारा स्पान्सर किया गया लेकिन कतर ने स्टेडियम में बीयर की बिक्री पर रोक लगा दी। सब कुछ इस्लामी मुल्क ने इस्लाम को देखने हुए किया और जब इस खेल में मोरक्को की जीत हुई तो यह भी खबर आई कि फ्रांच में दंगे हुए हैं, पुलिस पर पत्थरबाजी हुई है, सड़कों पर ईंट-पत्थर फेंके गए हैं।

राजीव गाँधी की हत्या में जिसकी बैटरी से उड़ाया गया था बम, उस हत्यारे को The Hindu के डायरेक्टर वाले मीडिया स्कूल ने दिया मंच, बताया ‘निर्दोष’

पत्रकारिता के प्रमुख संस्थानों में से एक एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म (ACJ) ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या के दोषी एजी पेरारीवलन को गेस्ट लेक्चर के लिए बुलाया है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित ACJ पत्रकार शशि कुमार की अध्यक्षता वाले मीडिया डेवलपमेंट फाउंडेशन के तत्वावधान में आता है। ‘द हिंदू’ के एन राम मीडिया डेवलपमेंट फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी भी हैं।

गेस्ट लेक्चर प्रोजेक्ट 39A द्वारा आयोजित किया जाता है, जो नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली (NLW, Delhi) की एक पहल है। ACJ में प्रोजेक्ट 39A पर एक अध्याय भी है और इसी पर लेक्चर देने के लिए ACJ ने सजायाफ्ता अपराधी बुलाया है। यह लेक्चर कॉलेज के एमएस सुब्बुलक्ष्मी ऑडिटोरियम में 17 दिसंबर 2022 को होना है।

प्रोजेक्ट 39A और ACJ ने इस सजायाफ्ता व्यक्ति को एक निर्दोष के रूप में चित्रित करने की पूरी कोशिश की है, जिसे सरकार ने अपना शिकार है। कई व्यक्तियों ने राजीव गाँधी के हत्यारे को मंच देने के खतरों को पहचाना और गेस्ट लेक्चरर के रूप में बुलाने पर ट्विटर पर निंदा की।

राजनीतिक विश्लेषक सुमंत रमन ने एसीजे द्वारा एजी पेरारीवलन की मेजबानी करने के फैसले पर हैरानी जताई।

अन्य लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और उन्हें रिहा कर दिया गया है, लेकिन उन्हें निर्दोष के रूप में चित्रित करना समाज के लिए अच्छा नहीं है।

पेरारीवलन के व्याख्यान का शीर्षक ‘न्याय से इनकार और एक अधूरी खोज’ है। यह अपने आप में अपराधी को भारतीय राज्य के एक निर्दोष पीड़ित के रूप में चित्रित करने के संस्थान के इरादे की और इंगित करता है। इतना ही नहीं, एनएलयू दिल्ली द्वारा एसीजे के सहयोग से की गई पहल एक कदम आगे बढ़कर है। इसमें दावा है कि भारतीय न्यायपालिका और व्यवस्था सामान्य रूप से पेरारीवलन को मानवीय गरिमा को गिराने में दोषी है। उनका दावा है कि ‘राजीव गाँधी की हत्या में पेरारीवलन की भूमिका पर गंभीर संदेह होने के बाद’ उनकी रिहाई का आदेश दिया गया था।

एजी पेरारिवलन कौन है

50 वर्षीय एजी पेरारीवलन उर्फ अरिवु तमिल कवि कुयिलदासन के पुत्र हैं। जब वह किशोर था, तब वह लिट्टे का समर्थक था। 21 मई 1991 की शाम को जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर की एक रैली में हत्या कर दी गई थी तब वह 19 साल का था।

11 जून 1991 को पेरारीवलन को हत्याकांड में उसकी भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। उसे कोर्ट द्वारा इस मामले में दोषी ठहराया गया। कोर्ट में यह साबित हो गया था कि उसने बम बेल्ट में इस्तेमाल की गई 9 वोल्ट की दो बैटरी खरीदी और उन्हें ऑपरेशन के मास्टरमाइंड लिट्टे प्रमुख शिवरासन को दिया था। पेरारीवलन ने उस समय TADA (एक कानून जिसे अब खत्म कर दिया गया है) के तहत अपना अपराध कबूल कर लिया था।

उसने अपने कबूलनामे में कहा था, “इसके अलावा, मैंने दो नौ-वोल्ट बैटरी सेल (गोल्डन पावर) खरीदे और उन्हें शिवरासन को दे दिया। उसने बम विस्फोट करने के लिए केवल इनका इस्तेमाल किया था।” हालाँकि, जिस सीबीआई अधिकारी ने उसका बयान दर्ज किया था, उसने बाद में एक डॉक्यूमेंट्री में दावा किया था कि उसने बयान के साथ छेड़छाड़ की थी और उसमें अपनी व्याख्या जोड़ दी थी। अधिकारी के अनुसार, पेरारीवलन ने कहा था कि उसे इस बात का कोई ज्ञान नहीं था कि बैटरी का इस्तेमाल राजीव गाँधी की हत्या के लिए किया जाएगा।

तमिल डॉक्यूमेंट्री ‘उइरवली- सक्कियाडिक्कुम साथम‘ में सीबीआई अधिकारी त्यागराजन का बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके अनुसार पेरारीवलन कैसे ‘निर्दोष’ था। हालाँकि, दोषी अपराधी के कबूलनामे को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था।

अधिकारी ने कहा था, “मुझे क्या चुभ रहा है कि उस समय अरिवु (पेरारीवलन) ने मुझसे कहा कि उसे नहीं पता कि बैटरी खरीदने के लिए क्यों कहा जा रहा है और वे उनके साथ क्या करेंगे। उसने मुझे बताया कि वह इसके बारे में बिल्कुल नहीं जानता था, लेकिन कबूलनामा लिखते समय मैंने वह हिस्सा छोड़ दिया था।”

सीबीआई अधिकारी के इस बयान को पेरारीवलन को ‘निर्दोष’ बताने के लिए बार-बार इस्तेमाल किया जाने लगा। हालाँकि, जिस बात को लोग नहीं जानते, वह यह है कि इस सीबीआई अधिकारी का एक संदिग्ध अतीत है, जो उनके बयान को संदेह के घेरे में डालता है।

सिस्टर अभया मामले में त्यागराजन ने कथित तौर पर न्याय को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अधिकारी त्यागराज ने अभया की हत्या को आत्महत्या साबित करने करने के लिए अधिकारी पर दबाव डाला था और आरोपितों को बचाने की पूरी कोशिश की थी। बता दें कि 27 मार्च 1992 को केरल के कोट्टयम में सेंट पायस एक्स कॉन्वेंट स्थित एक कुएँ में एक यह नन मृत पाई गई थी।

कहा जाता है कि त्यागराज ने अपने अधीनस्थ वर्गीज पी थॉमस पर यह निष्कर्ष निकालने के लिए दबाव डाला था कि सिस्टर अभया की हत्या नहीं की गई थी, बल्कि उन्होंने आत्महत्या की थी। उनके दबाव में अपराध शाखा ने दर्ज किया था कि अभया ने आत्महत्या की थी, क्योंकि उसे प्रथम वर्ष की प्री-डिग्री परीक्षा में 100 में से केवल 7 अंक मिले थे। हालाँकि, बाद में यह हत्या का खुलासा हो गया और इस मामले में फादर थॉमस कोट्टूर और सिस्टर सेफी को दोषी ठहराया गया।

टाडा अदालत ने 1998 में एजी पेरारीवलन को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं एसीजे लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि पेरारीवलन ‘निर्दोष’ है। उसके मामले की एक टाइमलाइन संक्षेप में साबित करती है कि उसकी सजा कई बार रोकी गई थी और उसकी रिहाई भी उसकी बेगुनाही साबित होने के बजाय तकनीकी कारणों से हुई थी।

  1. जनवरी 1998 में टाडा अदालत द्वारा पेरारीवलन और 25 अन्य को मृत्युदंड दिए जाने के बाद मई 1999 में सर्वोच्च न्यायालय ने मृत्युदंड को बरकरार रखा।
  2. अक्टूबर 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने दायर अपील को खारिज कर दिया।
  3. अक्टूबर में ही दया याचिका दायर की गई थी जिसे बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल ने खारिज कर दिया था।
  4. अप्रैल 2000 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की अध्यक्षता वाली तमिलनाडु कैबिनेट ने राज्य के राज्यपाल से नलिनी को दी गई मौत की सजा को कम करने की सिफारिश की। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी भारत के राष्ट्रपति से उसकी मौत की सजा कम करने की अपील की। इसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया। कुछ दिनों बाद ही राज्यपाल ने संतन, मुरुगन और पेरारीवलन की दया याचिका को भारत के राष्ट्रपति के पास भेज दिया। यह दया याचिका अगस्त 2011 में खारिज कर दी गई थी।
  5. 30 अगस्त 2011 को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने विधानसभा में संथन, मुरुगन और पेरारिवलन की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया। उसी दिन मद्रास हाईकोर्ट ने तीनों की फांसी पर रोक लगा दी और मामला सुप्रीम कोर्ट भेज दिया गया।
  6. 18 फरवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए आया, क्योंकि राष्ट्रपति ने 2011 में ही उनकी याचिका को खारिज करते हुए क्षमादान याचिका पर फैसला करने में 11 साल का समय लिया था। जस्टिस सदाशिवम ने कहा था, “तथ्य यह है कि दया याचिका के निपटान के लिए राष्ट्रपति/राज्यपाल को कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, सरकार को लोकतंत्र की संस्था में लोगों के विश्वास को बहाल करने के लिए अधिक व्यवस्थित तरीके से काम करने के लिए मजबूर होना चाहिए …”। यहाँ यह ध्यान रखना उचित है कि जब सजा कम की गई थी, तब अभियुक्तों की दोषसिद्धि पर कोई निर्णय नहीं हुआ था। उन्हें अभी भी दोषी ठहराया गया था। हालाँकि, यह दया याचिका पर फैसला करने में देरी की तकनीकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का फैसला किया।
  7. 19 फरवरी 2014 को राजनीति हावी हो गई और मुख्यमंत्री जे जयललिता की अध्यक्षता वाली तमिलनाडु कैबिनेट ने राजीव गाँधी हत्याकांड के सभी सात दोषियों को रिहा करने का फैसला किया।
  8. 20 फरवरी 2014 को कॉन्ग्रेस सरकार ने पेरारीवलन सहित दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
  9. दिसंबर 2015 में पेरारीवलन ने फिर से तमिलनाडु के गवर्नर के पास दया याचिका दायर की और रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
  10. 2017 में तमिलनाडु सरकार पेरारीवलन को पैरोल देती है।
  11. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि दोषी द्वारा दायर दया याचिका पर निर्णय लेने का अधिकार राज्यपाल के पास है।
  12. 9 सितंबर 2018 को एडप्पादी के पलानीस्वामी की अध्यक्षता वाली तमिलनाडु कैबिनेट ने सभी सात दोषियों को रिहा करने की सिफारिश की और 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तमिलनाडु सरकार के दोषियों को रिहा करने के फैसले पर 3 महीने के भीतर निर्णय लेने के लिए कहा।
  13. फरवरी 2021 में केंद्र सरकार यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट में वापस चली गई कि उसका मानना ​​है कि तमिलनाडु सरकार के बजाय भारत के राष्ट्रपति दोषियों की छूट पर निर्णय लेने के लिए सही प्राधिकारी थे।
  14. 2021 तक डीएमके सरकार पेरारिवलन को दी गई पैरोल को बढ़ाती रही।
  15. 15 मार्च 2022 को पेरारीवलन पहली बार जमानत पर जेल से बाहर आया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद उन्होंने वेल्लोर के पुलिस अधीक्षक से अनुरोध किया कि उनकी पैरोल रद्द कर दी जाए और उन्हें जेल ले जाया जाए ताकि वह जमानत पर वहाँ से बाहर निकल सकें। अदालत ने केवल यह देखा था कि उसे बिना किसी शिकायत के दो बार पैरोल दी गई थी और वह पहले ही एक लंबी सजा काट चुका था और इसलिए वह जमानत का हकदार था। वह अभी भी दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “चूँकि वह पहले ही 30 साल से अधिक की सजा काट चुका है, इसलिए हमारा विचार है कि वह अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज के जोरदार विरोध के बावजूद जमानत का हकदार है।”
  16. 18 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए पेरारीवलन को रिहा करने का आदेश दिया। , अदालत ने कहा था, “अपीलकर्ता की क़ैद की लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए जेल के साथ-साथ पैरोल के दौरान उसका संतोषजनक आचरण, उसके मेडिकल रिकॉर्ड से पुरानी बीमारियाँ, क़ैद के दौरान हासिल की गई उसकी शैक्षणिक योग्यता और अनुच्छेद 161 के तहत ढाई साल से उसकी याचिका की लंबितता को ध्यान में रखते हुए राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद, हम इस मामले को राज्यपाल के विचारार्थ वापस भेजना उचित नहीं समझते हैं। संविधान के अनुच्छेद 142 26 के तहत अपनी शक्ति के प्रयोग कर हम निर्देश देते हैं कि अपीलकर्ता को 1991 के अपराध संख्या 329 के संबंध में सजा पूरी करने के लिए माना जाता है। अपीलकर्ता, जो पहले से ही जमानत पर है, को तत्काल रिहा किया जाता है। उनके जमानत बांड रद्द किए जाते हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि तमिलनाडु के राज्यपाल पेरारीवलन की रिहाई पर राज्य कैबिनेट के फैसले से बंधे थे और राष्ट्रपति को दया याचिका भेजते हुए उनकी कार्रवाई को अस्वीकार कर दिया था। यह कहते हुए कि यह संविधान के खिलाफ कुछ भी नहीं कर सकता है। शीर्ष अदालत ने केंद्र के इस सुझाव से सहमत होने से इनकार कर दिया था कि अदालत को इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के फैसले तक इंतजार करना चाहिए। इसने केंद्र को बताया था कि राज्यपाल केंद्र को अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत तमिलनाडु मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई सहायता और सलाह से बंधे थे। इसलिए यह स्पष्ट है कि पेरारिवलन की रिहाई तमिलनाडु सरकार की राजनीति का उत्पाद थी न कि उसकी मासूमियत की।

कालक्रम को देखते हुए ACJ और प्रोजेक्ट 39A के लिए यह दावा करना कि पेरारीवलन ‘निर्दोष’ था और राज्य के उत्पीड़न का शिकार था, बेतुका है। यह न केवल एक सजायाफ्ता अपराधी का बचाव करता है जो हत्या की साजिश का हिस्सा था, बल्कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या को भी सही ठहराता है, जिसे आतंकवाद और युद्ध के रूप में देखा जाना चाहिए।

ACJ और द हिंदू के एन राम से इसके लिंक

एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म को इस क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में से एक माना जाता है। इसकी वेबसाइट के अनुसार, कॉलेज मीडिया डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा चलाया जाता है। वेबसाइट पर इसकी पूरी जानकारी दी हुई है।

वेबसाइट के अनुसार, मीडिया डेवलपमेंट फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक ट्रस्ट है, जिसकी स्थापना 1999 में एक स्वतंत्र, खोजी, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और नैतिक पेशे के रूप में पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसका उद्देश्य शिक्षा, प्रशिक्षण और मीडिया से संबंधित अनुसंधान के माध्यम से क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। यह महत्वाकांक्षी आधुनिक पत्रकारों को पेशे में विश्वस्तरीय मानकों को प्राप्त करने की क्षमताओं से लैस करता है। यह समाज में सभी समूहों को शैक्षिक और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करके विविधता को बढ़ावा देने और पत्रकारिता तक पहुँच को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें पत्रकारिता के पेशे में गंभीर रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले लोग भी शामिल हैं।

फाउंडेशन के न्यासियों में पत्रकार, टीवी एंकर, फिल्म निर्माता और एशियाविल इंटरएक्टिव के अध्यक्ष शशि कुमार (अध्यक्ष), द हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के निदेशक एन राम, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर एवं स्तंभकार सीपी चंद्रशेखर, तूलिका पब्लिशर्स की प्रबंध संपादक राधिका मेनन और कस्तूरी एंड संस लिमिटेड के अध्यक्ष एन मुरली शामिल हैं।

अपने लक्ष्य की खोज में, 2000 में फाउंडेशन ने एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म के मूल बीडी गोयनका फाउंडेशन के साथ समझौता किया, जो बैंगलोर में छह साल से सफलतापूर्वक काम कर रहा था। कॉलेज को चेन्नई ले जाया गया और इसकी पाठ्यक्रम सामग्री का पुनर्गठन और विस्तार किया गया। यहाँ से पहला बैच जून 2001 में निकला।

द हिंदू के एन राम मीडिया डेवलपमेंट फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं, जो एसीजे का मालिक है और उसे चलाता है। यह अब एक अपराधी की मेजबानी कर रहा है।

गौरतलब है कि एन राम ने द हिंदू पर फर्जी खबरें प्रकाशित करके फाइटर जेट सौदे को पटरी से उतारने की कोशिश की थी। साल 2019 के आम चुनावों के दौरान उन्होंने राफेल सौदे में सरकार पर गलत काम करने का आरोप लगाने के लिए द हिंदू में दस्तावेजों की क्रॉप्ड और अधूरी तस्वीरें प्रकाशित की थीं। इससे जुड़े एक सौदा में बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था।

एन राम के तहत द हिंदू लंबे समय से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रोपगेंडा को आगे बढ़ा रहा है। इसको लेकर ऑपइंडिया द्वारा स्टोरी की गई है। वास्तव में द हूट में एक लेख बताता है कि कैसे द हिंदू को एलटीटीई की अपनी आलोचना को संतुलित करना था और आतंकवादी संगठन के प्रति सहानुभूति भी थी, क्योंकि इसके पाठक आधार का एक बड़ा हिस्सा एलटीटीई के प्रति सहानुभूति रखता था। इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि एन राम आज राजीव गाँधी की हत्या में मदद करने के दोषी अपराधी को एक मंच देने का समर्थन कर रहे हैं।

दूसरी ओर मीडिया डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष शशि कुमार भी ऐसे व्यक्ति हैं, जो स्पष्ट रूप से वामपंथियों के प्रति झुकाव रखते हैं। उन्होंने हाल ही में देशद्रोह कानूनों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सिद्दीक कप्पन और अन्य राष्ट्र-विरोधी तत्वों जैसे पीएफआई के सदस्यों की गिरफ्तारी को उन्होंने अपनी याचिका का आधार बनाया था।

वामपंथियों और इस्लामी चरमपंथियों का समर्थन करते हुए शशि कुमार ने हिंदुओं द्वारा ‘घृणास्पद भाषण’ के खिलाफ याचिका भी दायर की थी। अनुभवी पत्रकार शशि कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में एक इंटरवेंशन अप्लीकेशन में कहा कि मीडिया में अभद्र भाषा को बहुसंख्यक ताकतों द्वारा स्वतंत्र भाषण या धार्मिक स्वतंत्रता के रूप में स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। दिशा रवि और सिद्दीक कप्पन जैसी भारत विरोधी ताकतों के लिए आजादी की मांग करते हुए उन्होंने 153A के पक्ष में तर्क दिया, क्योंकि इससे इस्लामवादियों की संवेदनाओं को ठेस पहुँचता है।

अपने आवेदन में उन्होंने कहा, “यह एक विडंबना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए [समुदायों या समूहों के बीच सांप्रदायिक वैमनस्य और घृणा पैदा करने] के तहत एक अपराध के लिए प्रकाशन और टेलीकास्ट के उदाहरणों को बहुसंख्यक ताकतों द्वारा अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत संरक्षण करने की माँग की जाती है। इस संबंध में संवैधानिक कथन स्पष्ट है, कोई अस्पष्टता वारंट कानून नहीं है।” यूपीएससी जिहाद पर एक शो प्रसारित करने के बाद सुदर्शन न्यूज के खिलाफ मामले में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया गया था।

इन सबके साथ इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि एक दोषी को एसीजे में जगह मिलेगी। जहाँ तक प्रोजेक्ट 39A का संबंध है, तो वे मृत्युदंड के पूरी तरह खिलाफ हैं। यहाँ तक कि मृत्युदंड को वो मानव बलि के रूप में प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहे हैं। केवल तीन हफ्ते पहले प्रोजेक्ट 39A को मौत की सजा के “उन्मूलन की लड़ाई में अपनी अटूट प्रतिबद्धता और उपलब्धियों के लिए” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

एसीजे, इसके संस्थापक ट्रस्टी, इसके अध्यक्ष और यहाँ तक कि प्रोजेक्ट 39A के मजबूत वामपंथी पूर्वाग्रह के साथ के गठजोड़ में आश्चर्य की बात नहीं है कि वे एक सजायाफ्ता अपराधी को सरकार द्वारा शिकार किए गए निर्दोष के रूप में चित्रित करना चाहेंगे।

शादीशुदा महिला ने अपनी मर्जी से किसी और पुरुष से बनाए संबंध, बाद में वो शादी से मुकर गया: झारखंड हाईकोर्ट ने बताया ये बलात्कार है या नहीं

झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा है कि शादी का वादा कर के किसी शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी से संबंध बनाना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है। अर्थात, कोई शादीशुदा महिला ये कह कर किसी पुरुष पर बलात्कार का इल्जाम नहीं लगा सकती कि आरोपित ने शादी का वादा कर के उसे फुसला लिया। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि केस दर्ज कराने वाली विवाहित ने ये जानते हुए दूसरे पुरुष से संबंध बनाया कि तलाक के बिना उसकी शादी नहीं हो सकती, इसीलिए रेप केस के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

जस्टिस संजय कुमार द्विदेदी ने ये फैसला सुनाया। बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता ने पीड़िता से वादा किया था कि वो उसके पति से तलाक के बाद उससे शादी कर लेगा। साथ ही एक मंदिर में उसने पीड़िता की माँग में सिंदूर भी भर दिया था। इसके बाद कई मौकों पर दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए। हालाँकि, अंत में उसने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इसके खिलाफ वो याचिका लेकर हाईकोर्ट पहुँचा।

मंगलवार (6 दिसंबर, 2022) को एकल पीठ ने ये निर्णय सुनाया। हाईकोर्ट के सामने सवाल ये था कि अपनी मर्जी से शादीशुदा महिला ने किसी अन्य पुरुष शारीरिक संबंध बनाए और वो व्यक्ति उससे शादी का वादा कर के मुकर गया, ऐसे में इसे IPC की धारा-376 के तहत अपराध माना जाए या नहीं। अदालत ने ये भी कहा कि अगर शुरू से आरोपित की मंशा धोखाधड़ी की रही हो, तब ये मामला धारा-420 के तहत माना जा सकता है।

मामला कुछ यूँ है कि नवंबर 2019 में देवघर जिले के सारवाँ मेले में आरोपित व्यक्ति की पोस्टिंग की गई थी। पीड़िता के पिता दुकान चलाते हैं, जहाँ इन दोनों की मुलाकात हुई। जब इन दोनों के बीच संबंध बने, उससे पहले ही महिला ने तलाक की याचिका कोर्ट में दायर कर दी थी। आरोपित पक्ष का कहना है कि दोनों बालिग़ हैं और उन्होंने मर्जी से संबंध बनाए, ऐसे में रेप का मामला बनता ही नहीं। आरोपित की माँ ने भी महिला के विरुद्ध केस दर्ज कराया था।

जिस विधायक ने कहा था ‘सपने में भी नहीं छोड़ूँगा AAP का साथ’ , वो भी होगा BJP में शामिल: गुजरात में केजरीवाल के पास बचेंगे सिर्फ 4 MLA

गुजरात विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने का दावा करने के बाद आम आदमी पार्टी महज 5 सीट में सिमट गई थी। गुजरात चुनाव में करारी हार झेलने के बाद अब AAP को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, गुजरात के जूनागढ़ जिले की विसावदर सीट से विधायक चुने गए भूपत भयाणी भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत और भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर विधायक भूपत भयाणी आम आदमी पार्टी का दामन छोड़ने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि भयाणी दो साल पहले तक भाजपा में ही थे। इसलिए, उनका भाजपा में शामिल होना ‘घर वापसी’ की तरह देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि विसावदर सीट से जीत हासिल करने के बाद भूपत भायाणी ने आम आदमी पार्टी नहीं छोड़ने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “मैं उस पार्टी के साथ व्यापार करने का सपना भी नहीं देखूँगा, जिसने मुझे विधायक बनाया है। क्योंकि मैं किसान का बेटा हूँ। हालाँकि, अब वह अपने ही बयान से पलटते नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि भयाणी सोमवार (12 दिसंबर 2022) को गाँधी नगर में सीएम भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में भाजपा में शमिल होंंगे।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, आम आदमी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े भूपत भयाणी ने विसावदर सीट पर 65675 वोट हासिल करते हुए जीत दर्ज की थी। भयाणी ने शुरुआती रुझानों में ही बढ़त हासिल कर ली थी। उनके अलावा इस सीट पर निवर्तमान भाजपा विधायक हर्षद कुमार और कॉन्ग्रेस से करशनभाई वड़ोदैया मैदान में थे। एक ओर जहाँ, हर्षद कुमार को 58771 वोट मिले थे। वहीं, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे थे।

गुजरात विधानसभा की कुल 182 सीटों में से भाजपा के पास फिलहाल 156 सीटें हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक के भाजपा में शामिल होने से यह संख्या बढ़कर 157 हो जाएगी। बताया जा रहा है कि अन्य चार आप विधायक भी भाजपा के संपर्क में हैं। इसके अलावा, चुने गए सभी निर्दलीय उम्मीदवार भी कभी न कभी भाजपा का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अभी कुछ और विधायक भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

गेंद माँगने पर दलित बच्चे को दी गंदी-गंदी गालियाँ, परिजनों से मारपीट भी: UP के फतेहपुर में जुबैर अंसारी समेत 3 पर FIR, Video भी वायरल

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में क्रिकेट खेल रहे बच्चों से मारपीट की घटना सामने आ रही है। यहाँ जुबेर नाम के एक पेट्रोल पंप मालिक पर आरोप है कि उसने अपने कर्मचारियों कमरुल हसन और नौशाद के साथ मिलकर, क्रिकेट खेल रहे बच्चे और उसके परिजनों को पीटा है। हमले में 3 लोगों के घायल होने की सूचना है जिसमें एक दलित समुदाय से भी बताया जा रहा है। पुलिस ने शनिवार (10 अप्रैल 2022) को तीनों आरोपितों पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जहानाबाद थानाक्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि यहाँ के गाँव रामबाग में शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) को 2 टीमों के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था। इस दौरान बैटिंग करती टीम के एक शॉट पर क्रिकेट बॉल मैदान के पास बने जुबेर के पेट्रोल पंप पर चली गई। दलित समुदाय की महिला अनीता देवी ने अपनी शिकायत में बताया है कि उसका बेटा उस गेंद को लेने पेट्रोल पम्प पर गया था।

पीड़िता का कहना है कि जब वो गेंद लेने गया तब वहाँ मौजूद पेट्रोल पम्प के कर्मचारियों ने गेंद अपने मालिक को दे दी। जब पीड़ित जुबेर से गेंद माँगने गया तब उसे जातिसूचक शब्द बोल कर गालियाँ दी जाने लगीं। पीड़ित की माँ का कहना है कि गालियाँ देने के बड़ा जुबेर अंसारी ने अपने कर्मचारियों कमरुल हसन और नौशाद के साथ उसके बेटे की पिटाई की। इसी दौरान उसी महिला के परिवार के 2 अन्य बच्चे भी वहाँ पहुँच गए और पीड़िता को बचाने की कोशिश करने लगे।

अपने शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि पहले जुबेर ने उनके बेटे से उसके गाँव का नाम पूछा बाद में उन्हें गालियाँ देते हुए साले शब्द के साथ उनकी जाति को जोड़ा गया। इस दौरान पीड़िता के तीनों परिजनों की पिटाई की गई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

वायरल हो रहे वीडियो में एक महिला को जमीन में गिरा देखा जा सकता है और आस-पास लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। आरोप है कि जुबेर, कमरुल और नौशाद ने मिल कर महिला के परिवार के तीनों सदस्यों को मारा और उनकी जाति को टारगेट कर के गालियाँ दीं। इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने नौशाद, कमरुल और जुबेर अंसारी पर IPC की धारा 323, 504 और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

मेले में बहन से छेड़छाड़ कर रहे थे मुस्लिम युवक, भाई ने विरोध किया तो हुई मॉब लिंचिंग: MP में नगर निगम ने आरोपितों के घर पर बुलडोजर चलाया

मध्य प्रदेश के उज्जैन में बहन से हुई छेड़छाड़ का विरोध करने पर भाई की हत्या करने का मामला सामने आया था। इस मामले में, उज्जैन नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों के घर पर बुलडोजर चलाया है। छेड़छाड़ और हत्या करने वाले सभी आरोपित मुस्लिम हैं। मामले में, 6 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं जबकि तीन अन्य फरार बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उज्जैन में आयोजित हुए कार्तिक मेले में झूला झूल रही एक युवती से मुस्लिम युवक छेड़छाड़ कर रहे थे। इस पर उसके भाई ने विरोध किया तो उन लोगों ने अपने अन्य साथियों को बुलाकर चाकू से हमला कर दिया था। इससे युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतक की पहचान, दीपक उर्फ दीपू जादम के रूप में हुई है।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने घटना स्थल पर पहुँचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था। साथ ही, पुलिस आरोपितों की तलाश में जुट गई थी। फिलहाल पुलिस ने 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, 3 अन्य आरोपित फरार बताए जा रहे हैं।

आरोपितों की पहचान सलमान, जीशान, इशराक, सलीम उर्फ सद्दाम, उस्मान के रूप में हुई है। एक अन्य आरोपित नाबालिग है, जिसे पुलिस हिरासत में रखा गया है। फरार आरोपितों की पहचान यासिर, शकील और अकील के रूप में हुई है।

युवती से छेड़छाड़ और हत्या के आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके घरों पर बुलडोजर चलाया गया है। उज्जैन नगर निगम, राजस्व व पुलिस विभाग की मौजूदगी में मामले में संलिप्त 3 आरोपितों के घर ही गिराए गए हैं। वहीं, अन्य आरोपितों के घरों को वेरिफाइ कर उन पर भी कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। गिरफ्तार आरोपितों में से एक आरोपित का परिवार किराए के मकान में रह रहा था। उपरोक्त मकान को भी खाली कराया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम पर उज्जैन एसडीएम कल्याणी पांडे का कहना है, “कार्तिक मेले में हुई हत्या में शामिल आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद उनके घरों की जाँच की गई थी। इस जाँच में नगर निगम ने पाया कि तीन घर बिना अनुमति लिए बनाए गए थे। इसके बाद नगर निगम ने आरोपितों के परिजनों को सूचना देकर अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की है। अन्य आरोपितों के घर भी चिन्हित किए जा रहे हैं। सभी पर कार्रवाई होगी।”

‘हिंदू सड़कों पर काँवड़ निकाल सकते हैं, लेकिन मुस्लिम नमाज नहीं पढ़ सकते’: हिंदुओं की शादी की ‘रखैल’ से तुलना करने वाले AIMIM नेता शौकत अली ने फिर जहर उगला

उत्तर प्रदेश AIMIM के अध्यक्ष शौकत अली मुरादाबाद जिले के निकाय चुनाव के लिए जनसभाओं विवादित और भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सड़क जाम करके काँवड़ यात्रा निकाल सकते हैं तो मुस्लिम सड़कों पर नमाज क्यों नहीं पढ़ सकते। उनके कई वीडियो सामने आए हैं।

अपने विवादित बयानों के लिए कुख्यात शौकत अली वीडियो में कहते नजर आ रहे हैं कि मुरादाबाद में 1980 में ईद के दिन ईदगाह मैदान में गोली चलवाई गई। मुस्लिमों का कत्लेआम किया गया। 1984 में प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने बाबरी मस्जिद का ताला खुलवा था, तब भी फसाद हुए थे।

लोगों को भड़काते हुए उन्होंने आगे कहा कि मेरठ के हाशिमपुरा को भूल मत जाना, जहाँ 47 नौजवानों को रात के 12 बजे घरों से निकाला गया। वे सभी 35 साल से कम उम्र के थे। उन्हें पीएसी के ट्रक डाला कर ले गए और गाजियाबाद में नहर के किनारे ले जाकर सबको गोली मार दी गई थी।

वहीं, एक अन्य वीडियो में शौकत अली ने कहा कि एक महीने तक नेशनल हाइवे बंद रहा और पुलिस के अधिकारी काँवड़ियों के पैर दबाए और उनकी मसाज की। उन्होंने कहा कि अगर हिन्दू सड़क जाम करके काँवड़ यात्रा निकाल सकते हैं तो मुस्लिम सड़क पर नमाज क्यो नहीं पढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा, “काँवड़ के दौरान हमने तो कोई एतराज नहीं किया, लेकिन अगर हम किसी मॉल में या सड़क पर नमाज पढ़ लें तो हंगामा खड़ा हो जाता है। कुछ लोगों को तो हमारी अजान से भी तकलीफ हो रही है। आए दिन कोई न कोई जोकर आकर नमाज पर अंगुली उठाता है।”

इस साल अक्टूबर में शौकत अली हिंदुओं की शादी को लेकर घृणा से भरे बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हिंदू एक महिला से शादी करते हैं और तीन रखैल रखते हैं। इस मामले में शौकत अली पर IPC की धारा 153A, 295A और 188 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

राज्य में एक रैली को संबोधित करते हुए शौकत अली ने कहा, “लोग कहते हैं कि हमने तीन शादियाँ की हैं। दो शादियाँ होने पर भी हम समाज में दोनों पत्नियों को सम्मान देते हैं, लेकिन आप (हिंदू) एक से शादी करते हैं और तीन रखैल रखते हैं।”

औवेसी के करीबियों में शामिल शौकत अली ने आगे कहा, “आप (हिंदू) न तो अपनी पत्नी का सम्मान करते हैं और न ही रखैलों का। अगर हमारी दो शादियाँ होती हैं तो हम उन्हें सम्मान के साथ रखते हैं और हमारे बच्चों के नाम भी राशन कार्ड में होते हैं।”

इतना ही नहीं, संभल में एक जनसभा में बोलते हुए शौकत अली ने कहा था कि मुस्लिमों ने 832 सालों तक हिंदुस्तान पर शासन किया है और हिन्दू लोग मुस्लिम बादशाहों के सामने हाथ जोड़ कर जी-हुजूरी किया करते थे। 

’60 निर्दोषों को ब्राह्मणों की भीड़ ने जिंदा जलाया’ : ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानियों ने प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू किया, ट्रॉली पर हिंदू विरोधी पोस्टर

ब्रिटेन और कनाडा में हिंदुओं के विरुद्ध झूठ फैलाने के बाद अब खालिस्तानियों ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अपना हिंदूविरोधी प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू किया है। ये लोग 1984 में हुए सिख नरसंहार में कॉन्ग्रेसियों को क्लिन चिट देकर केवल हिंदू और ब्राह्मणों को निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें एक बड़ी ट्रॉली दिख रही है और उसके पीछे लिखा गया है कि हिंदू ब्राह्मणों की भीड़ ने 60 से ज्यादा निर्दोष सिखों को जलाकर मार डाला।

फोटो में देख सकते हैं कि ट्रॉली के आसपास कुछ सिख हैं जिन्होंने भारत के नक्शे के ऊपर “होंद चिल्लर” के साथ 1984 सिख नरसंहार लिखा हुआ है। साथ ही दोनों तरफ लिखा गया है, “60 से अधिक निर्दोष लोगों को ब्राह्मण हिंदुओं की भीड़ ने जिंदा जलाया।”

ऑस्ट्रेलिया हिंदू मीडिया के ट्विटर से इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा गया, “मेलबर्न में खालिस्तान की रैली के जरिए झूठी खबर फैलाकर खालिस्तान सिर्फ ऑस्ट्रेलियाई हिंदुओं के खिलाफ नफरत बढ़ाने का काम कर रहा है। अगर ये सब इतना शांतिपूर्ण है तो फिर कार्यक्रम के एक भी आयोजक ने अपनी पहचान का खुलासा क्यों नहीं किया? इसमें ये क्यों नहीं लिखा गया कि कैसे तुम लोगों के आदर्श भिंडरावाले ने 20 हजार हिंदुओं को मारा था।”

उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी अपना एजेंडा फैलाने के लिए कुछ समय से काफी सक्रिय हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में नगर कीर्तन के वक्त खालिस्तानी झंडे, टीशर्ट और बुकलेट आदि भी बाँटने की घटना प्रकाश में आई है। ये कीर्तन विक्टोरिया सिख गुरुद्वारा काउंसिल द्वारा करवाया जाता है।

गौर देने वाली बात है कि ऑस्ट्रेलिया में ऐसी घटनाएँ तभी देखने को मिली हैं जब कुछ दिन पहले गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा जनमत संग्रह की बात ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में कराने की, की गई थी। इससे पहले कनाडा और ब्रिटेन में ऐसा ही हिंदूविरोधी प्रोपेगेंडा फैलाते हुए खालिस्तानियों को देखा जा चुका है।

‘सिख फॉर जस्टिस’ के कई ट्वीट में देख सकते हैं कि कैसे बताया जा रहा है कि मेलबर्न में आखिरी युद्ध, 29 जनवरी को किया जाएगा। पिछले महीने की बात करें तो कई खालिस्तानी, खालिस्तान का झंडा लेकर ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर भी देखे गए थे। एक यूजर ने इन वीडियोज को शेयर करते हुए कहा था कि ऑस्ट्रेलिया के लोग तो यह भी नहीं जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया के कुछ सिख समूह कट्टरपंथी समूह से जुड़े हुए हैं।

हिन्दुओं का धर्मांतरण कराने वाले मौलाना पर ब्रिटेन ने लगाया बैन, बच्चियों का अपहरण कर करा देता है जबरन निकाह: ऋषि सुनक की सरकार का बड़ा फैसला

ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार रोधी व मानवाधिकार दिवस के मौके पर कुल 30 व्यक्तियों और संस्थानों पर बैन लगा दिया है। इन सभी लोगों पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप है। इसमें पाकिस्तान में हिन्दुओं का जबरन धर्मांतरण करवाने वाला मौलाना अब्दुल हक भी शामिल है। ब्रिटिश शासन ने अपने द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे स्वतंत्र और मुक्त समाज की सोच को बताया है। प्रतिबंधित लोगों व समूहों की यह सूची शुक्रवार (9 दिसंबर, 2022) को जारी की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिर्टिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने यह लिस्ट जारी की है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन दुनिया भर में मानवाधिकार के मूल्यों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। क्लेवरली के मुताबिक, लिस्ट में शामिल प्रतिबंधित लोग या समूह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मानवाधिकार के हनन में शामिल थे। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन डर और स्वतंत्रता के मूल्यों को बचाने के लिए अपने पास उपलब्ध हर विकल्प का इस्तेमाल करेगा।

ब्रिटिश शासन ने मौलाना अब्दुल हक को मियाँ अब्दुल हक नाम से संबोधित किया है। उस पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण और लड़कियों के जबरन निकाह का आरोप है। मौलाना अब्दुल हक इस लिस्ट में एकलौता पाकिस्तानी है। उसके अलावा उगांडा, निकारगुआ, रूस, क्रीमिया आदि देशों के अन्य लोग शामिल हैं। सबसे अधिक प्रतिबंधित संख्या रूस के लोगों की है।

कौन है मौलाना अब्दुल हक

गौरतलब है कि मौलाना अब्दुल हक पाकिस्तान के शीर्ष कट्टरपंथियों में गिना जाता है। उसका प्रभाव क्षेत्र सिंध प्रान्त में अधिक है। वह कई वर्षों में पाकिस्तान में हिन्दुओं के जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर विवादों में रहा है। मौलाना पर हिन्दू समाज की नाबालिग लड़कियों के भी अपहरण और अधिक उम्र के मुस्लिमों से जबरन निकाह के आरोप लगते आए हैं। आरोप यह भी है कि पाकिस्तान की पुलिस द्वारा उस पर कभी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

पंजाब में थाने पर हमले में इस्तेमाल RPG रॉकेट लॉन्चर रूस में बना, पाकिस्तान से तस्करी कर लाया गया: आतंकी रिंदा के गाँव में NIA की छापेमारी, 10 हिरासत में

पंजाब के तरनतारन (Tarantaran, Punjab) के सरहाली कलां पुलिस स्टेशन को शुक्रवार (9 दिसंबर 2022) की देर रात करीब 12 बजे रॉकेट लॉन्चर से हमला किया गया था। इस मामले में बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) के सदस्य पुलिस स्टेशन पहुँचे और जाँच की। इस दौरान एक अहम जानकारी सामने आई है। पता चला कि हमले में रूस में बने आरपीजी-22 का इस्तेमाल किया गया है।

इस आतंकी हमले में पुलिस ने 10 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ के लिए उन्हें अपने साथ लेकर गई है। पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें से तीन अमृतसर से और दो को तरनतारन से पकड़ा गया है। इसके साथ ही गोविंदवाल जेल में बंद एक कैदी समेत 9 अन्य लोगों से पूछताछ की गई है।

आतंकी गतिविधियों को देखते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) भी इस मामले में ऐक्टिव हो गई है। NIA ने जिस थाने पर हमला किया गया था, उससे करीब 15 किलोमीटर की दूर हरिके पाटन स्थित आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा के करीबी लखवीर सिंह लांडा के घर और ट्यूबवेल पर छापेमारी की। इस दौरान लांडा के घर पर कोई नहीं मिला।

थाने पर हमला करने वाले संदिग्धों की संख्या पाँच बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि संदिग्ध दो बाइक और एक ब्रेजा SUV में सवार थे। हमलावरों के हरिके पाटन और सरहाली के बीच एक ढाबे पर रूकने की बात भी कही जा रही है। इस दौरान हमलावरों ने ढाबा मालिक से खाना भी माँगा था।

कहा जा रहा है कि पाँच में से चार संदिग्ध हिंदी में बात कर रहे थे। इनमें से एक बीमार और शारीरिक रूप से अक्षम था। बता दें कि हमले की जिम्मेवारी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने ली है। घटना में UAPA के तहत मामला दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है।

घटना की जाँच के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। हमले में इस्तेमाल RPG सेना में इस्तेमाल किया जाता है, जिसे रॉकेट लॉन्चर से दागा गया था। इसे पाकिस्तान से तस्करी कर लाया गया है। हमले की शुरुआती जाँच में पुलिस ने रॉकेट लांचर और प्रोपेलर बरामद कर लिया है। पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज भी लगी है।

यह पिछले सात महीने में दूसरा हमला है। RPG का इस्तेमाल कर हाईवे से ग्रेनेड दागा गया था, जो सरहाली थाने के सुविधा केंद्र से टकराया था। जिस वक्त हमला किया गया, उस समय SHO समेत करीब 10 पुलिसकर्मी थाने में मौजूद थे। हालाँकि, हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। इस मामले में सरहाली कलां थाने के SHO प्रकाश सिंह को हटाकर सुखबीर सिंह को भी प्रभार दिया गया है।