Home Blog Page 2188

14190 औरतें, 3 शहरों में कॉल सेंटर, 300 दलाल और WhatsApp: देश भर में फैला था सेक्स रैकेट, देह के धंधे के साथ ड्रग्स का कारोबार भी

तेलंगाना में एक बड़े स्तर के सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। कॉल सेंटर और व्हाट्सएप के जरिए इसका संचालन हो रहा था। देश के कई राज्यों में देह और ड्रग्स का यह धंधा फैला हुआ था। हैदराबाद की साइबराबाद पुलिस ने इस मामले में अब तक 18 गिरफ्तारी की है। ये गिरफ्तारी सेक्स रैकेट और मानव तस्करी से जुड़े 39 अलग-अलग मामलों में हुई है। गिरफ्तार लोगों में रैकेट से जुड़े प्रमुख दलालों के अलावा रेडिसन होटल का मैनेजर भी है।

पुलिस ने बताया है कि यह रैकेट ऑनलाइन चल रहा था। दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में कॉल सेंटर थे। व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। 14190 महिलाओं को इस रैकेट के जरिए वेश्यवृत्ति के धंधे में धकेला गया। ये देश के अलग-अलग राज्यों से हैं। कुछ महिलाएँ रूस, उज्बेकिस्तान और थाइलैंड जैसे देशों की भी हैं। सेक्स रैकेट से जुड़े आरोपित बड़े पैमाने पर ड्रग्स का धंधा भी कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित देश के अलग-अलग हिस्सों से महिलाओं को खरीद रहे थे। वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर विज्ञापन देते थे। कॉल सेंटर और व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों से संपर्क करते। उनको तस्वीरें भेजते। ग्राहकों तक उनकी पसंद की लड़की भेजने का इंतजाम करते। सब कुछ बेहद संगठित तरीके से चल रहा था। अकेले साइबराबाद और हैदराबाद में 70 प्रतिशत वेश्यावृत्ति के मामलों के लिए इसी रैकेट को जिम्मेदार बताया गया है।

आरोपितों पर साइबराबाद के चार पुलिस स्टेशनों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370 और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है। साइबराबाद के पुलिस आयुक्त स्टीफन रवींद्र के अनुसार, ऑपरेशन दो महीने से अधिक समय तक चला और इसमें साइबराबाद पुलिस की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के साथ अन्य विशेष ऑपरेशन टीम और स्थानीय पुलिस शामिल थी।

इस घटना के मुख्य आरोपित कई नामों का इस्तेमाल करते थे। मोहम्मद अब्दुल सलमान उर्फ़ ऋषि नाम के आरोपित ने लगभग 900 लड़कियों की ‘सप्लाई’ की थी। वह 6 साल से इस गिरोह के लिए काम कर रहा था। आरोपितों में मोहम्मद समीर, मोहम्मद अब्दुल रफीक खान, मोहम्मद अफसर और हरबिंदर कौर आदि भी शामिल हैं। सलमान को 15 नवंबर 2022 को ‘सन सिटी’ से गिरफ्तार किया गया था। सलमान कई होटलों में काम कर चुका है।

पुलिस आयुक्त ने आरोपी के काम करने के तरीके के बारे में बताते हुए कहा कि दलाल पीड़िता से संपर्क करते थे और आरोपितों के व्हाट्सएप्प ग्रुप में उसकी तस्वीरें डालते थे और महिलाओं को चुनते थे। इसके साथ गिरोह के लोग होटल, फ्लाइट टिकट आदि बुक करते थे। ये लोग व्हाट्सएप्प ग्रुपों में पीड़ितों की तस्वीरें पोस्ट करते थे और उन्हें कॉल गर्ल वेबसाइटों पर अपलोड करते थे।

जब भी ग्राहक व्हाट्सएप नंबर पर कॉल या संदेश भेजते थे, कॉल सेंटर के लोग गिरोह के आकाओं के साथ संपर्क विवरण साझा करते थे। इसके बाद पीड़िता को उनके पास भेजा जाता था। ग्राहक नकद या डिजिटल भुगतान ऐप के माध्यम से भुगतान करते थे।

धुआँधार प्रचार, जीत के दावे, लेकिन गुजरात में मात्र 5 सीटों पर सिमट कर रह गई AAP: केजरीवाल का ‘हिन्दू कार्ड’ भी फेल, ग्राउंड पर नहीं दिखी सोशल मीडिया वाली हाइप

आम आदमी पार्टी ने भले ही गुजरात विधानसभा चुनावों में उम्मीद के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन न किया हो, लेकिन पार्टी माहौल बनाने में कामयाब रही। हालाँकि इस काम में मेन स्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया का भी एक बड़ा योगदान था। परंतु चुनाव के नतीजे यदि सकारात्मक न हो तो बनाया गया माहौल, प्रचार और विज्ञापन सब बेकार हो जाता है। आम आदमी पार्टी के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। पार्टी तो आई थी गुजरात चुनाव जीतने का सपने लेकर लेकिन जा रही है कॉन्ग्रेस के वोट काट कर।

आँकड़ों की बात करें तो गुजरात के विधानसभा चुनाव परिणाम में AAP को मात्र 5 सीटें आई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया और मुख्यमंत्री का चेहरा इसुदान गढ़वी अपनी-अपनी सीटों पर हार गए हैं। पार्टी को 12.92% वोटों से ही संतोष करना पड़ा है, जबकि वो जीत के दावे कर रही थी। वहीं भाजपा ने 156 सीटें अपने नाम की हैं, जो गुजरात में किसी भी पार्टी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

गुजरात में विधानसभा चुनावों के ऐलान से काफी पहले ही आम आदमी पार्टी ने राज्य में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से लेकर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राघव चड्ढा जैसे पार्टी के बड़े नेता गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए काफी पहले से पहुँचने लगे। हालाँकि, शराब घोटाले में नाम आने के बाद मनीष सिसोदिया ने गुजरात आना कम कर दिया था।

दिल्ली के सीएम और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी गुजरात में धुआँधार बैठकें की, कई प्रेस कॉन्फ्रेंस किए, लोगों से मिले, तरह-तरह के वादे किए और खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर पेश करने में कामयाब रहे। फिर चाहे मुफ्त बिजली-पानी हो, महिलाओं और युवाओं के लिए भत्तों की घोषणा हो, मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक आम आदमी पार्टी की उपस्थिति आखिर तक बनी रही।

केजरीवाल का हिंदुत्व कार्ड भी नाकाम

केजरीवाल यह समझ चुके थे कि गुजरात चुनावों में कामयाब होने के लिए हिंदुओं को नाराज नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने अपनी हिंदुवादी छवि बनाने की कोशिश की। एक समय में “मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़कर बनाए मंदिर में नहीं रह सकता” कहने वाले केजरीवाल गुजरात के बुजुर्गों को राम लला के नि:शुल्क दर्शन कराने का वादा करने लगे। चुनाव प्रचार के दौरान अपनी तुलना भगवान कृष्ण से करते हुए कंस की औलादों का नाश करने की बात करने लगे। इतना सब कुछ कम था कि उन्होंने नोटों पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चित्र छापने की वकालत शुरू कर दी।

हालाँकि, अंततः केजरीवाल के सारे फॉर्मूले फेल हो गए और पार्टी बुरी तरह हार गई। कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। यहाँ तक कि जिन सीटों पर पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, वहाँ भी निराशा हाथ लगी।

आम आदमी पार्टी पर गुजरातियों को भरोसा क्यों नहीं?

आम आदमी पार्टी ने खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पेश करने की पूरी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके। इसका प्रमुख कारण यह है कि उसने लोगों से वादे तो किए लेकिन यह नहीं समझा सकी कि उन वादों को पूरा कैसे किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से जहाँ आम आदमी पार्टी सत्ता में है, एक के बाद एक कई घोटाले सामने आने लगे। वोटिंग से पहले सामने आ रहे इन घोटालों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

आम आदमी पार्टी के पास ऐसे कार्यकर्ता की कमी थी, जो गाँव-गाँव जाकर काम कर सकें और लोगों के पास जाकर वोट माँग सकें। सोशल मीडिया पर पार्टी के समर्थन में पोस्ट भर कर देने से चुनाव नहीं जीते जाते। चुनाव जीतने के लिए जमीन पर उतरना पड़ता है। ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी नजर ही नहीं आई। इसका कारण यह है कि पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की कमी थी, जिससे पार्टी को नुकसान पहुँचा।

आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में मीडिया और सोशल मीडिया पर ज्यादा भरोसा किया। वो भूल गए कि वोटरों को रिझाने के लिए आपको जमीन पर भी उतरना होता है। आम आदमी पार्टी जमीन पर बहुत कम दिखाई दी। साथ ही जहाँ वे नजर आए, वहाँ भी वे लोगों को यह नहीं समझा सके कि भाजपा और कॉन्ग्रेस को छोड़कर आम आदमी पार्टी को ही क्यों चुनें।

इस विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटें ऐसी थीं, जहाँ मुकाबला बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच था। खासकर ग्रामीण इलाकों में हालात ऐसे ही थे। ऐसे में आम आदमी पार्टी विकल्प के तौर पर जगह नहीं बना पाई। कई सीटों पर तो ऐसा लगा कि भाजपा और कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों के टक्कर के बीच आम आदमी पार्टी को झोंक दिया गया।

सामाजिक समीकरण भी चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। इसका फायदा आम आदमी पार्टी को सूरत नगर निगम चुनाव में मिला और पार्टी ने 27 सीटों पर जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने सूरत और सौराष्ट्र पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। पिछले विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र इलाके में पाटीदार आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव था। तब इलाके की ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल कर कॉन्ग्रेस ने भाजपा को 100 से भी कम सीटों पर रोक लिया था।

आम आदमी पार्टी की कोशिश सौराष्ट्र के इन सीटों को कॉन्ग्रेस से छीनने की थी। इसके लिए पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने का भी प्रयास किया। पार्टी ने पाटीदार बहुल सीट वराछा से अल्पेश कथीरिया को मैदान में उतारा। अल्पेश पाटीदार आंदोलन का प्रमुख चेहरा रह चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने कतारगाम से पाटीदार आंदोलन का चेहरा रहे गोपाल इटालिया और आलपाड सीट पर धार्मिक मालवीय को उम्मीदवार बनाया। पार्टी ने इन सीटों पर खूब प्रचार भी किया लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस के लिए ‘वोट कटवा’ साबित हुई। क्योंकि भाजपा के मिलने वाले वोट सुरक्षित रहे लेकिन कॉन्ग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी हो गई।

इसकी प्रमुख वजह यह है कि 2017 में पाटीदार समुदाय (और अन्य समुदायों) में पनपी भाजपा विरोधी भावना 2022 आते-आते पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी। इन समाजिक आंदोलनों के पोस्टर बॉय हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर जैसे नेता भाजपा में शामिल हो गए, वहीं दूसरी ओर चुनावों को लेकर कॉन्ग्रेस की आक्रमकता में कमी नजर आई। बीजेपी इन 5 सालों में और खासकर चुनाव से पहले विभिन्न समुदायों को लुभाने में सफल रही है और इसका असर इन सभी सीटों पर देखने को मिला।

वादे और विवादों से उबर नहीं पाई AAP

विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी को छोटी-बड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों से पार पाना पार्टी के लिए मुश्किल साबित हुआ। कभी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करने वाली पार्टी जाति का कार्ड खेलने पर मजबूर हो गई।

गोपाल इटालिया के पुराने वीडियो ने पार्टी को बैकफुट पर ला दिया। वहीं केजरीवाल के एक मंत्री के धर्मांतरण कार्यक्रम में शामिल होने के विवाद का भी गुजरात में गहरा असर पड़ा। साथ ही दिल्ली के शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया का नाम आने से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा।

इनके अलावा दिल्ली सरकार में केजरीवाल के एक अन्य मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी और उसके बाद जेलों में वीआईपी सुविधाओं का एक के बाद एक वीडियो बाहर आना… यह सब कुछ ऐसे मुद्दे थे, जो पार्टी पर गुजरात में भारी पड़ गईं।

क्या है आम आदमी पार्टी का भविष्य?

लोगों का मानना ​​है कि यह राज्य में आम आदमी पार्टी की शुरुआत है और पार्टी भविष्य में (यानी 2027 के विधानसभा चुनाव में) अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। परंतु राजनीति में खासकर चुनाव के लिहाज से भी पाँच साल की अवधि को बड़ा और महत्वपूर्ण माना जाता है।

2017 के चुनावों में किसी तरह अपना गढ़ बचाने में कामयाब रही बीजेपी ने इस साल सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाली बीजेपी ने नरेंद्र मोदी की भारी लोकप्रियता के बल पर 2014 में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी और तभी से पार्टी केंद्र में भी सत्ता में है।

आम आदमी पार्टी का गुजरात में मजबूत संगठन नहीं है। इस चुनाव में करारी हार का पार्टी कार्यकर्ताओं पर भारी प्रभाव पड़ेगा। कार्यकर्ताओं को जीत की नहीं बल्कि कुछ सीटों की उम्मीद थी, जो उन्हें नहीं मिली। उन्हें 5 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। कार्यकर्ता बाहर न निकलें तो परिणाम क्या होता है, यह कॉन्ग्रेस से बेहतर और कौन समझा सकता है!

‘रिकॉर्ड तोड़ने में भी बनाया रिकॉर्ड’ : गुजरात में प्रचंड जनादेश के लिए PM मोदी हुए जनता के आगे नतमस्तक, कहा- देश आज शॉर्टकट नहीं चाहता

गुजरात में रिकॉर्ड जीत के बाद बीजेपी मुख्यालय में गुरुवार (8 दिसम्बर 2022) शाम को कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का जश्न मनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियों में आप देख सकते हैं कि गुजरात में जीतने के बाद बीजेपी के कार्यकर्ता गुलाल, अबीर लगाकर कैसे नाच मना रहे हैं।

गुजरात में लगातार 7वीं बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। इस जीत के बाद जनता और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करने दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह जनता जनार्दन के सामने नतमस्तक हैं, ये जनादेश अभिभूत करने वाला है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी प्रत्यक्ष नहीं जीती, वहाँ भाजपा का वोट शेयर आपके स्नेह का साक्षी है। इसके साथ ही उन्होंने गुजरात, हिमाचल और दिल्ली की जनता का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा, “आपका प्यार उपचुनावों में भी दिखा। यूपी के रामपुर में भाजपा जीती है। बिहार के उपचुनावों में भाजपा का प्रदर्शन आने वाले दिनों का स्पष्ट संदेश कर रहा है।”

‘भाजपा को मिला जनसमर्थन युवा सोच’

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा को मिला जनसमर्थन नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतिबिम्ब है। भाजपा को मिला जनसमर्थन भारत के युवाओं की ‘युवा सोच’ का प्रकटीकरण है। भाजपा को मिला जनसमर्थन गरीब, शोषित, वंचित, आदिवासियों के सशक्तीकरण के लिए मिला समर्थन है। लोगों ने भाजपा को वोट दिया, क्योंकि भाजपा हर सुविधा को प्रत्येक गरीब, मध्यमवर्गीय परिवार तक जल्द से जल्द पहुँचाना चाहती है। लोगों ने भाजपा को वोट दिया, क्योंकि भाजपा देश के हित में बड़े से बड़े और कड़े से कड़े फैसले लेने का दम रखती है।

‘युवाओं ने हमारे काम पर भरोसा किया’

प्रधानमंत्री के शब्दों में, “गुजरात की जनता ने तो रिकॉर्ड तोड़ने में भी रिकॉर्ड कर दिया। गुजरात के इतिहास का सबसे प्रचंड जनादेश भाजपा को देकर प्रदेश के लोगों ने नया इतिहास बना दिया है। जाति, वर्ग, समुदाय और हर तरह के विभाजन से ऊपर उठकर भाजपा को वोट दिया है। युवा तभी वोट देते हैं जब उन्हें भरोसा होता है और सरकार का काम प्रत्यक्ष नजर आता है। आज युवाओं ने जब भाजपा को भारी संख्या में वोट दिया है तो इसके पीछे का संदेश बहुत स्पष्ट है कि युवाओं ने हमारे काम को जाँचा, परखा और उस पर भरोसा किया है।”

‘भाजपा अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा करती है’

उन्होंने कहा कि देश आज शॉर्टकट नहीं चाहता है। वह बोले कि गुजरात के नतीजों ने सिद्ध किया है कि सामान्य मानवी में विकसित भारत के लिए कितनी प्रबल आकांक्षा है। संदेश साफ है कि जब देश के सामने कोई चुनौती होती है, तो देश की जनता का भरोसा भाजपा पर होता है। हम विचार पर भी बल देते हैं और व्यवस्था को भी सबल बनाते रहते हैं। भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की अथाह संगठन शक्ति पर भरोसा करके ही अपनी रणनीति बनाती है और सफल भी होती है।

‘मैंने गुजरात से वादा किया था’

पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई व गुजरात की जनता को नमन करते हुए पीएम बोले, “मैंने गुजरात से वादा किया था कि इस बार भूपेन्द्र, नरेंद्र का रिकॉर्ड तोड़े इसके लिए नरेन्द्र जी-जान से मेहनत करेगा। हमें निरंतर इन जुल्मों के बीच आगे बढ़ना है। हमें अपनी सहनशक्ति और समझशक्ति को बढ़ाना है। हमें सेवाभाव का विस्तार भी करना है और सेवाभाव से ही जीतना है।”

‘आधुनिक इंफ्रांस्ट्रक्चर विकसित करने पर फोकस’

अपने संबोधन में पीएम ने कहा, “देश ने बीते आठ सालों में गरीबों को सशक्त करने के साथ-साथ आधुनिक इंफ्रांस्ट्रक्चर को विकसित करने पर भी फोकस किया है। हम राष्ट्र निर्माण का व्यापक लक्ष्य लेकर निकले हैं, इसलिए केवल 5 वर्ष के राजनीतिक नफा-नुकसान को देख हम कोई घोषणा नहीं करते। गुजरात में एससी/एसटी की करीब 40 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से 34 सीटें भाजपा ने जीती हैं। आज जनजातीय समाज भाजपा को अपनी आवाज मान रहा है, उनका जबरदस्त समर्थन भाजपा को मिल रहा है। इस बदलाव को पूरे देश में महसूस किया जा रहा है। इस जनादेश में एक और संदेश है और वो यह कि समाज के बीच दूरियाँ बढ़ाकर, राष्ट्र के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी करके, जो राजनीतिक दल तत्कालिक लाभ लेने के फिराक में रहते हैं, उन्हें देश की जनता, देश की युवा पीढ़ी देख भी रही हैं और समझ भी रही हैं।”

गुजरात चुनावों में पिटी भद्द, जीत के दावे फर्जी निकले, फिर भी खुशी से फूल रहे केजरीवाल: लोग बोले- कितनी बेशर्मी है

गुजरात विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को मिली करारी हार के बावजूद अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्विटर पर खुशी-खुशी एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में चेहरे पर मुस्कान के साथ अपने कार्यकर्ताओं को बता रहे हैं कि आज का दिन बड़ी खुशी का दिन है क्योंकि महज 10 साल पहले शुरू हुई उनकी आम आदमी पार्टी अब एक राष्ट्रीय पार्टी बन गई है।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल को गुजरात चुनावों में 12.92% वोट शेयर के साथ मात्र 5 सीट ही मिली जबकि नतीजे आने से पहले उनके दावे थे कि इस बार राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने वाली है। उन्होंने खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देकर भी दावा किया था कि गुजरात में आप ही आएगी। इतना ही नहीं मीडियाकर्मियों के सामने उन्होंने कोरे कागज पर अपनी पक्की जीत के दस्तखत भी किए थे। लेकिन नतीजे आने के बाद तस्वीर एकदम अलग दिखी और आप प्रमुख इस मामले पर बिलकुल चुप रहे।

अपनी वीडियो में बस उन्होंने आभार व्यक्त किया। साथ ही बोले कि आप सिर्फ 10 साल पहले अस्तित्व में आई और अब उनकी 2 राज्यों में सरकार है और इन चुनावों के बाद वो कानूनन राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। ऐसे में वो अपने कार्यकर्ताओं का आभार देते हैं और इसे एक उपलब्धि बताते हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद नेटीजन्स ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। कुछ लोग उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी बनने पर मुबारकबाद देते दिखे तो कुछ भड़क गए कि आखिर चुनाव से पहले इतने दावे किए और अब आकर बस ये बता रहे हैं कि AAP राष्ट्रीय पार्टी बन गई।

एक यूजर ने इसे देख पूछा कि क्या गुजरात में हारने के लिए बधाई दे रहे हो क्या?

एक यूजर ने लिखा, “बस करो केजरीवाल जी, और कितनी बेशर्मी, बड़बोलापन और अति आत्मविश्वास दिखाओगे, कागज पे लिखे हुए आपके अहंकार को स्वाभिमानी गुजरात ने मिट्टी में मिला दिया और आपको आपकी गुजरात में हैसियत भी दिखा दी।”

‘अब तो अगले जन्म में ही गुजरात में परफॉर्म कर पाऊँगा’: गालीबाज कॉमेडियन कुणाल कामरा का छलका दर्द, यूजर्स बोले- तेरे हर जन्म में यहाँ BJP सरकार होगी

गालीबाज स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) एक बार फिर चर्चा में हैं। गुजरात में बीजेपी की रिकॉर्ड जीत के बाद उन्होंने गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को ट्वीट किया। ट्वीट में कुणाल ने लिखा, “अब तो अगले जन्म में ही अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा, राजकोट और वापी में परफॉर्म कर पाऊँगा।” इसको लेकर सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने उन पर जमकर निशाना साधा। स्मित रघानी नाम के यूजर ने कहा, “अच्छा है, कचरा चाहिए भी नहीं यहाँ।”

अक्सर विवादों में रहने वाले कुणाल कामरा का मजा लेते हुए एक यूजर ने कहा, “तेरे जितने भी जन्म होंगे, गुजरात में उस वक्त बीजेपी की ही सरकार होगी।”

एक और यूजर ने कहा, “गुड बॉय! अब जाओ और कुछ अच्छे कर्म करो, ताकि तुम्हें तुम्हारे अगले जन्म में परफॉर्म करने का मौका मिल सके।”

इसके अलावा ट्विटर पर कई यूजर्स ऐसे भी रहे, जिन्होंने कुणाल की बात को गंभीरता से ना लेते हुए मजाक उड़ाया। डॉ लिग्मा नाम के यूजर ने लिखा कि ‘पहली बार हँसा हूँ इसके चुटकुले पर।’

समीर लिखते हैं, “गुजरात में वैसे भी @#@# को ज्‍यादा भाव नहीं मिलता…. यकीन न हो तो AK420 से पूछ लो।”

स्वाति नाम की यूजर लिखती हैं कि ‘भगवान का शुक्र है। गुजरात में जरूरत नहीं तुम जैसे लोगों की।’

दरअल, गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। राज्य की 182 सीटों में से 156 बीजेपी के खाते में आई है और वहाँ एक बार फिर भाजपा की सरकार बन रही है। वहीं, इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को 17 और आम आदमी पार्टी को 5 सीटें मिली हैं, जबकि 4 सीटें अन्य ने जीती हैं।

गौरतलब है कि इस साल मई में गालीबाज कॉमेडियन कुणाल कामरा ने जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को देशभक्ति गीत सुनाने वाले बच्चे का मजाक उड़ाया था। उसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ऐक्शन में आ गया था।

NCPCR ने ट्विटर इंडिया को पत्र लिखकर कामरा के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई का निर्देश देते हुए फर्जी वीडियो को तत्काल हटाने के लिए कहा था। NCPCR ने कामरा के इस कृत्य को राजनैतिक एजेंडा बताया था और उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर बच्चे के वायरल वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर कामरा ने ट्विटर पर शेयर किया था।

भाजपा की रिकॉर्ड तोड़ जीत ने गिराया कॉन्ग्रेस का ग्राफ, AAP और AIMIM को भी मिली शर्मनाक हार: पढ़ें गुजरात विधानसभा चुनाव का सार

गुजराती (और गैर-गुजराती भी) पिछले 6 महीनों से एक-दूसरे से एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि इस साल क्या लग रहा है? गुजरात और देश को अब वह जवाब मिल गया है। गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी 156 सीटों के साथ जहाँ अपना गढ़ बचाने में कामयाब हो गई है। वहीं कॉन्ग्रेस गुजरात भी मात्र 17 सीटों पर सिमट गई। इसी तरह आम आदमी पार्टी के हिस्से केवल 5 सीटें आईं।

तस्वीर साभार: results.eci.gov.in

भाजपा को हराने में विफल रहा विपक्ष

गुजरात विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए अपना गढ़ बचाने और विपक्ष के लिए उसे भेदने का चुनाव था। आखिर बीजेपी जीत ही गई। यह जीत कोई साधारण जीत नहीं है, भाजपा की यह जीत ‘भूतो न भविष्यति’ वाली जीत है। दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियाँ अपने ‘बीजेपी रोको’ अभियान में पूरी तरह विफल रही हैं।

किसी सियासी पार्टी के लिए राज्य में लगातार 27 साल शासन करना और फिर चुनाव में अभूतपूर्व बहुमत हासिल करना एक असाधारण घटना है। राजनीति में ‘सत्ता विरोधी लहर’ को लेकर खूब चर्चा की जाती है। लेकिन ऐसा लगता है कि यह ‘एंटी-इनकंबेंसी’ गुजरात का रास्ता भटक चुकी है।

बीजेपी ने क्या किया?

लोगों का मानना है गुजरात में बीजेपी ने तीन दशकों में बहुत अच्छा काम किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, पानी, पर्यटन स्थलों का विकास, हर क्षेत्र में काम हुआ है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी महत्वपूर्ण योगदान है। गुजरात के लोगों ने नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर जो भरोसा किया वह आज भी कायम है। यह एक बड़ी वजह है कि बीजेपी यहाँ पंचायत से लेकर विधानसभा तक के चुनाव भारी बहुमत से जीत लेती है।

वैसे देखा जाए तो 2017 के विधानसभा चुनाव वास्तव में भारतीय जनता पार्टी के लिए कठिन थे। एक तरफ पाटीदार आंदोलन जोरों पर था, दूसरे समुदाय के लोग भी आंदोलन कर रहे थे और सबसे बड़ी बात कि मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी जैसा दमदार चेहरा नहीं था। लोग नरेंद्र मोदी का विकल्प तलाश रहे थे। कॉन्ग्रेस भी पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय हो गई थी। इन सब के बाद भी भाजपा 99 सीटों के साथ सरकार बचाने में कामयाब रही।

इस चुनाव में भाजपा के साथ ऐसी कोई समस्या नहीं थी। इन पाँच वर्षों के दौरान विभिन्न समाजों को जोड़ लिया गया। किसी तरह का आंदोलन नहीं हुआ। बाज़ी इस हद तक पलट गई कि हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर जैसे युवा नेता जो कभी भाजपा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद किया करते थे, वो इसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे।

साथ ही पिछले साल पार्टी ने मुख्यमंत्री समेत पूरे मंत्रिमंडल में फेरबदल किया था, जिसका सीधा असर अब देखने को मिला है। कोरोना के बाद उत्पन्न हुई परिस्थियों की वजह से लोग विजय रुपाणी सरकार से थोड़े असंतुष्ट थे। हालाँकि, उस वक्त कमोबेश सभी राज्यों में ऐसी ही स्थिति थी। भाजपा चाहती तो रुपाणी सरकार के साथ ही चुनावों में जा सकती थी और सत्ता कायम रख सकती थी। लेकिन पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता बनाए रखना नहीं था। पार्टी का जो लक्ष्य था उसे प्राप्त कर लिया गया है। भूपेंद्र पटेल सरकार ने एक साल चुपचाप काम किया, काम चलता रहा और ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे जनता नाराज हो। जिसका असर इस चुनाव के नतीजों में साफ देखने को मिला। भाजपा ने 150+ का आँकड़ा पार किया और इनमें 156 पर जीत सुनिश्चित की।

कॉन्ग्रेस का गिरता ग्राफ

2014 के आम चुनावों में बड़ा झटका लगने के बाद से कॉन्ग्रेस का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है। फिर भी पार्टी ने 2017 में गुजरात लिधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतीं। इसके बाद भी गुजरात कॉन्ग्रेस में नेतृत्व की कमी की वजह से उसे नुकसान पहुँचा। नेतृत्व न हो तो संगठन भी गिर जाता है और संगठन न हो तो सरकार बनाना तो दूर सम्मानजनक सीट भी नहीं मिल पाता। आज के परिणाम उसी का उदाहरण हैं जिनमें पार्टी ने 17 सीटें जीती हैं।

कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने 2017 के विधानसभा चुनाव में काफी मेहनत की थी। ऐसा लग रहा था इन चुनावों में कॉन्ग्रेस ने ज्यादा दिलचस्पी दिखाई ही नहीं। ऐसा लग रहा है कि पार्टी आलाकमान ने भी औपचारिकता भर पूरी कर ली। एक तरफ राहुल गाँधी ने प्रचार अभियान के तहत सिर्फ तीन रैलियाँ की तो बुलाए जाने के बावजूद प्रियंका गाँधी गुजरात नहीं पहुँचीं। गुजरात चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने अपनी कैंपेनिंग भी काफी देरी से शुरू की जिसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी भी ली थी।

दूसरी तरफ पार्टी तब कड़ी मेहनत करती है, जब उसे लोगों से पॉजिटिव फीडबैक मिलता है। गुजरात में पार्टी का लगातार गिरता ग्राफ देख लोग समर्थन में नहीं उतरे। जहाँ कॉन्ग्रेस ने जीत हासिल की है, वहाँ उम्मीदवार मजबूत थे और अपनी लोकप्रियता और क्षमता के दम पर उन्होंने चुनाव जीता न कि पार्टी के सिंबल पर।

शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई आम आदमी पार्टी!

आम आदमी पार्टी ने 6 महीने पहले से ही गुजरात में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। माहौल बनाने की शुरुआत तो एक साल पहले ही हुई थी। लेकिन पार्टी में भी वह उबाल नहीं आ सका जिससे उन्हें सम्मानजनक सीट हासिल हो सके। अंतत: उन्हें कॉन्ग्रेस का वोट काटकर ही संतोष करना पड़ा। सूरत में जहाँ पार्टी मजबूत मानी जा रही थी, कुछ खास हासिल नहीं कर पाई।

आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल किया, लेकिन सोशल मीडिया उन्हें चुनाव नहीं जिता सका। उनके हिस्से सिर्फ 5 सीटें आईं। चुनाव जीतने के लिए आपको मजबूत संगठन चाहिए, जमीन पर कार्यकर्ता चाहिए। ‘आप’ के पास कार्यकर्ता तो थे, लेकिन वे सोशल मीडिया पर “Only AAP” लिखने में ज्यादा व्यस्त थे। घर-घर वोट माँगने के लिए कार्यकर्ताओं की कमी ने इस चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुँचाया।

केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने गुजरात में रेवड़ी वाली राजनीति करने की कोशिश की लेकिन मुफ्त के प्रलोभनों में जनता ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। दूसरी ओर दिल्ली सरकार के नेताओं पर करप्शन के आरोपों ने भी लोगों को आम आदमी पार्टी के खिलाफ वोट डालने पर मजबूर कर दिया। रही सही कसर पार्टी अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने पूरी कर दी।

आम आदमी पार्टी में भी नेतृत्व की कमी है। गोपाल इटालिया और ईसुदान गढ़वी जैसे पार्टी के बड़े नेता अपनी सीट नहीं बचा सके। यदि मजबूत नेतृत्व न हो तो संगठन जीवित नहीं रहता, यदि रहता भी है तो लोग काम नहीं करते। संगठन खड़ा कर चलाना कोई बीजेपी से सीखे।

चुनाव में AIMIM

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का प्रदर्शन इससे भी बुरा रहा। पार्टी ने 14 मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ा। नतीजे भी वैसे ही आए जैसा की अनुमान लगाया जा रहा था। पार्टी सभी सीटों पर हार गई। दूसरी तरफ कई सीटों पर कॉन्ग्रेस के वोट काटे, जैसा कि पहले के चुनावों में भी होता रहा है।

कुल मिलाकर कहें तो यह चुनाव भाजपा के लिए रिकॉर्ड तोड़ने, कॉन्ग्रेस के जीवित रहने और आम आदमी पार्टी के लिए पैर जमाने का एक अवसर था। जिसमें मोदी की लोकप्रियता, तीन दशकों की मेहनत और मजबूत संगठन के दम पर बीजेपी ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। कॉन्ग्रेस अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाई और आम आदमी पार्टी भी पूरी तरह से विफल रही।

गुजरात ने नया इतिहास बनाया, हिमाचल प्रदेश ने पुराना इतिहास दोहराया: दोनों राज्यों में किसको कितनी सीटें, यहाँ देखें फाइनल आँकड़े

गुजरात (Gujarat) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) के नतीजे सामने आ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 68 और गुजरात में 182 विधानसभा सीटें हैं। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो गई थी और अब दोनों राज्यों की तस्वीर साफ हो गई है। गुजरात में भाजपा प्रचंड बहुमत का रिकॉर्ड बना रही है तो हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बन रही है।

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे

गुजरात विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इतिहास रच दिया है। पार्टी को 156 सीटों पर जीत हासिल हुई है। 1 करोड़ 66 लाख मतदाताओं का वोट पाकर बीजेपी ने 52.50 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया है।

साभार चुनाव आयोग

पीएम ने गुजरात की जनता को दी बधाई

गुजरात के गठन के बाद से सबसे अधिक सीटें लाने के रिकॉर्ड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुजरात प्रदेश के लोगों को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया,

“धन्यवाद गुजरात। अभूतपूर्व चुनाव परिणामों को देखकर मैं भावनाओं से बहुत अधिक अभिभूत हूँ। लोगों ने विकास की राजनीति को आशीर्वाद दिया और इच्छा व्यक्त की है कि यह गति और तेजी से चलती रहे। मैं गुजरात की जन शक्ति को नमन करता हूँ।”

उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं का भी हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी ने कहा, “गुजरात बीजेपी के सभी मेहनती कार्यकर्ताओं से मैं कहना चाहता हूँ कि आप चैंपियन हैं। ये ऐतिहासिक जीत आप लोगों के बिना संभव नहीं थी, जो हमारी पार्टी की असली शक्ति हैं।”

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता बदलने की परंपरा कायम है। हिमाचल के सभी 68 विधानसभा सीटों पर नतीजों का ऐलान हो चुका है। नतीजों में 40 पर कॉन्ग्रेस और 25 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। यहाँ भी तीन निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली है। हिमाचल में 2017 के मुकाबले भाजपा को 19 सीटों का नुकसान हुआ है।

साभार चुनाव आयोग

चुनाव आयोग की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, हिमाचल में भाजपा का वोट शेयर 43 प्रतिशत रहा, जबकि जीत हासिल करने वाली कॉन्ग्रेस का वोट शेयर 43.91 प्रतिशत रहा।

कॉन्ग्रेस को विधायक बिकने का डर

आम आदमी पार्टी (AAP) पहाड़ में खाता भी नहीं खोल पाई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नतीजों के बाद इस्तीफा दे दिया है। इधर, कॉन्ग्रेस में मुख्यमंत्री चुनने के लिए मंथन जारी है। चुनाव जीतने के बाद भी कॉन्ग्रेस किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।

रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने विधायकों से जीत का प्रमाणपत्र लेकर चंडीगढ़ चले जाने का निर्देश दिया है। वहाँ से कॉन्ग्रेस पार्टी अपने विधायकों को राजस्थान या छत्तीसगढ़ में शिफ्ट कर सकती है। दूसरी तरफ गुजरात में भाजपा का शपथग्रहण समारोह 12 दिसंबर दोपहर 2 बजे तय किया गया है।

AIMIM को सीट 0, वोट NOTA से भी कम: गुजरात के मुस्लिमों को ओवैसी के आँसू पर भी नहीं एतबार

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 कई मायनों में अलग रहा है। हाल के वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कॉन्ग्रेस के अलावा किसी तीसरी पार्टी ने प्रभावी भूमिका निभाई है। गुजरात में इस साल बीजेपी, कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सत्ता संघर्ष था। वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भी गुजरात के 14 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए।

AIMIM ने गुजरात की उन 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जहाँ मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। इनमें से ज्यादातर कॉन्ग्रेस की परंपरागत सीट रही है। इनमें से 12 सीटों पर aimim को करानी हार मिली। चुनाव आयोग की साइट के अनुसार, पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले। नोटा का वोट शेयर इन चुनावों में जहाँ 1.6% दिखाई दे रहा है। वही AIMIM का केवल 0.29% है। पार्टी एक भी सीट पर जीत हासिल करने में विफल रही।

ओवैसी को उम्मीद थी कि गुजरात के मुसलमान उनका तहे दिल से स्वागत करेंगे। ओवैसी ने अपने उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए कई बार गुजरात का दौरा किया और कई सभाएँ कीं। ओवैसी की सभाओं में लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही थी। एक तरफ ओवैसी की सभाओं में भीड़ नजर आ रही थी तो दूसरी तरफ कई जगहों पर उनका भारी विरोध भी देखने को मिला।

गुजरात विधानसभा चुनाव में AIMIM

गुजरात विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के अलावा एक और बड़ी पार्टी किस्मत आजमा रही थी। एआईएमआईएम ने 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। जो इस प्रकार हैं-

  1. मांडवी – मुहम्मद इकबाल मंजालिया
  2. भुज – शकील समा
  3. वडगाम (SC) – कल्पेश सुंधिया
  4. सिद्धपुर – अब्बासभाई नोडसोला
  5. वेजलपुर – ज़ैन बीबी शेख
  6. बापूनगर – शाहनवाज पठान
  7. दरियापुर – हसन खान पठान
  8. जमालपुर-खड़िया – साबिर कबलीवाला
  9. दानिलिम्दा (एससी) – कौशिका परमार
  10. खंभालिया – याकूब बुखारी
  11. मांगरोल – सुलेमान पटेल
  12. गोधरा – मुफ्ती हसन कछबा
  13. सूरत पूर्व – वसीम कुरैशी
  14. लिम्बायत – अब्दुल बसीर शेख

ओवैसी की पार्टी को गुजरात में मिले झटके

जब चुनाव के लिए पर्चा दाखिल किया ही जा रहा था कि एआईएमआईएम को झटका लगा। दरअसल, बापूनगर सीट से एआईएमआईएम प्रत्याशी शाहनवाज पठान ने पर्चा वापस लेने के आखिरी दिन अपना पर्चा वापस लेकर कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए।

AIMIM ने लगभग सभी मुस्लिम बहुल सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इन सीटों पर ज्यादातर कॉन्ग्रेस के विधायक थे। एआईएमआईएम ने जिन प्रमुख सीटों पर चुनाव लड़ा उनमें जमालपुर-खड़िया, दानिलिमदा, दरियापुर और वडगाम शामिल हैं।

मुस्लिम वोट कटने के डर से कॉन्ग्रेस ने यह बात फैलानी शुरू कर दी कि एआईएमआईएम बीजेपी की बी टीम है और ओवैसी आरएसएस का एजेंट है। वे इस बात को फैलाने में काफी हद तक सफल भी रहे।

आपको याद ही होगा, दूसरे चरण के वोटिंग से पहले अहमदाबाद में जामा मस्जिद के शाही इमाम ने कहा था कि मुसलमानों को अपने वोटों में बँटवारा नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों से एआईएमआईएम के बजाय कॉन्ग्रेस को वोट देने की अपील की थी।

इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान पूरे गुजरात में कई जगहों पर ओवैसी को काले झंडे दिखाकर और ‘ ओवैसी गो बैक’ के नारे लगाकर विरोध जताया गया। जिसमें सूरत और अहमदाबाद शामिल हैं।

ऑपइंडिया की टीम ने मुस्लिमों के मन को समझने की कोशिश की

गौरतलब हो कि पहले चरण के चुनाव से पहले ही ऑपइंडिया की टीम ने अहमदाबाद और सूरत के मुस्लिम वोटरों से थाह लेने की कोशिश की थी। टीम ने अधिक से अधिक मुस्लिमों से मिलकर यह जानने की कोशिश की कि वे गुजरात चुनाव में AIMIM को कैसे देखते हैं। इस पर हमें मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ मिलीं। मुस्लिम समुदाय के ज्यादातर लोगों का मानना ​​था कि एआईएमआईएम, कॉन्ग्रेस का वोट काटकर भाजपा की मदद करने के अलावा कुछ नहीं कर सकती।

जब वोट के लिए रो पड़े ओवैसी

आपको बता दें कि पहले चरण के मतदान के बाद जब ओवैसी दूसरे चरण की सीटों के लिए प्रचार कर रहे थे तो भावुक हो गए थे। 2 दिसंबर को जमालपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए वह फूट-फूट कर रो पड़े।

इस दौरान अपनी पार्टी के उम्मीदवार साबिर काबलीवाला के लिए वोट माँगते हुए असदुद्दीन ओवैसी अचानक रो पड़े। रोते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने दुआ के साथ-साथ लोगों से अपील की कि वे साबिर को जिताएँ, ताकि यहाँ दोबारा किसी बिलकिस के साथ अन्याय न हो। रैली में रोते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने दुआ की कि अल्लाह साबिर को जीत दिला दे।

17 सीटें, 5 ही आईं BJP की झोली में: केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के लोकसभा क्षेत्र का कुछ ऐसा रहा हाल, पिता के इलाके में भी मिली हार

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की सत्ता भाजपा (BJP) के हाथ से निकल गई है। अभी तक सामने आए नतीजों में राज्य में भाजपा के खाते में 25 सीटें आई हैं, जिनमें 18 सीटों पर वह जीत हासिल कर चुकी है और 7 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।

राज्य के 68 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस (Congress) को बहुमत हासिल करते हुए 40 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसमें से 39 पर कॉन्ग्रेस जीत चुकी है और एक सीट पर वह बढ़त बनाए हुए है। वहीं, 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद और नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) के लोकसभा क्षेत्र हमीरपुर में आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। हालाँकि, इसके कई कारण हैं। विधायकों के टिकट में कटौती, बागियों का रूख आदि।

हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 17 विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें से 10 सीटों पर कॉन्ग्रेस ने जीत दर्ज की है। वहीं, पाँच सीटें ही भाजपा के खाते में आई हैं, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं। जिन सीटों पर भाजपा हारी है, उनमें अनुराग ठाकुर के पैतृक क्षेत्र भोरंज, आवासीय क्षेत्र हमीरपुर और उनके पिता प्रेमसिंह धूमल की सीट सुजानपुर भी शामिल है।

जिन 10 सीटों पर कॉन्ग्रेस जीती है, उनमें धरपुर, भोरागंज, सुजानपुर, बड़सर, नदवाँ, चिंतापूर्णी, गगरेट, हरोली, कुटलहर और घुमरवीन सीट शामिल है। धरपुर में कॉन्ग्रेस के चंद्र शेखर भाजपा के रजत ठाकुर को हराया। भोरांज में कॉन्ग्रेस के सुरेश कुमार ने भाजपा के अनिल धीमन को 60 वोटों से हरा दिया है। सुजानपुर में कॉन्ग्रेस के राजिंदर सिंह ने भाजपा के रणजीत सिंह राणा को 401 वोटों से हरा दिया। बड़सर में कॉन्ग्रेस के इंद्रदत्त लखनपाल ने भाजपा की माया शर्मा को हराया। नदावँ में कॉन्ग्रेस के सुखविंदर सिंह ने भाजपा के विजय कुमार को हराया।

चिंतापूर्णी सीट पर कॉन्ग्रेस के सुदर्शन सिंह बबलू ने भाजपा के बलबीर सिंह को हराया। गगरेट में कॉन्ग्रेस के चैतन्य शर्मा ने भाजपा के राजेश ठाकुर को हराया। हरोली में कॉन्ग्रेस के मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा के रामकुमार को हटाया। कुटलहर में कॉन्ग्रेस के दविंदर कुमार ने भाजपा के विरेंदर कंवर को हराया। घुमरवीन से कॉन्ग्रेस के राजेश धर्मानी ने कॉन्ग्रेस के राजिंदर गर्ग को हराया।

जसवान-परागपुर में भाजपा के विक्रम सिंह ने कॉन्ग्रेस के सुरिंदर सिंह को हराया है। ऊना सीट पर भाजपा के सतपाल सिंह सत्ती ने कॉन्ग्रेस के सतपाल सिंह रायजादा को हराया। झंडुटा सीट पर भाजपा के जीतराम कटवाल ने कॉन्ग्रेस के विवेक कुमार को हराया। बिलासपुर से भाजपा के त्रिलोक जमवाल ने कॉन्ग्रेस के बंबर ठाकुर को करीब 250 वोटों से हराया। श्रीनैना देवीजी सीट से भाजपा के रणधीर शर्मा ने कॉन्ग्रेस के रामलाल ठाकुर को लगभग 190 वोटों से हराया।

हमीरपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत डेहरा और हमीरपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। डेहरा से निर्दलीय होशियार सिंह ने भाजपा के रमेश चंद को लगभग 6500 वोटों से हराया है। हमीरपुर में आशीष शर्मा ने कॉन्ग्रेस के पुष्पेंद्र वर्मा को लगभग 12000 वोटों से हराया। यहाँ भाजपा तीसरे नंबर पर रही।

हिमाचल प्रदेश में भाजपा के हार की प्रमुख कारणों में क्षत्रिय महापुरुषों को लेकर समाज में टकराव उत्पन्न करने वालों के प्रति लोगों का गुस्सा, वर्तमान विधायकों के टिकट में कटौती, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को टिकट नहीं देने से उपजा असंतोष और टिकट बँटवारे में खामियाँ आदि शामिल हैं। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में क्षत्रियों की आबादी लगभग 35 प्रतिशत है।

भाजपा ने 11 विधायकों के टिकट काट दिए थे। इसके कारण भाजपा से 21 नेता बागी हो गए थे। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का टिकट काटने के बाद उनके समर्थकों के खेमे में असंतोष था, जिसका खामियाजा पार्टी को राज्य में सत्ता गँवाकर चुकानी पड़ी। चुनाव प्रचार के दौरान अनुराग ठाकुर अपने पिता को याद करके मंच पर ही भावुक हो गए थे।

PM मोदी ने खुद किया था कॉल, लेकिन इस बागी नेता ने वापस नहीं लिया पर्चा: अब जब्त करवा ली अपनी जमानत, बातचीत का वीडियो हुआ था वायरल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। एक बार फिर जनता ने रिवाज कायम रखते हुए राज बदल दिया है। प्रदेश की 68 सीटों में से कॉन्ग्रेस ने 40 सीटें जीती हैं। वहीं, भाजपा 25 पर सिमट गई है। इसके अलावा 3 सीटों पर निर्दलीय ने जीत दर्ज की है। वहीं आम आदमी पार्टी यहाँ अपना खाता भी नहीं खोल पाई।

राज्य की कई सीटों पर सबकी नजर थी। इनमें से एक सीट फतेहपुर है। फतेहपुर सीट उस वक्त चर्चा में आई थी, जब चुनाव प्रचार के दौरान कृपाल परमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फोन कॉल का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। उस वक्त ऐसा दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी के बागी और निर्दलीय उम्मीदवार कृपाल परमार को फोन करके यहाँ से चुनाव नहीं लड़ने को कहा था।

कृपाल सिंह परमार का हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुत बुरा हश्र हुआ है। वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। इस सीट से कॉन्ग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने बीजेपी के राकेश पठानिया को हरा दिया। कॉन्ग्रेस के भवानी सिंह को 32452 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के राकेश पठानिया को 25462 वोट ही हासिल हुए हैं। इनके अलावा तीसरे स्थान पर रहे कृपाल परमार को 2794 वोट मिले हैं। फतेहपुर सीट पर 2012 से ही कॉन्ग्रेस का कब्जा रहा है।

चुनाव से पहले परमार ने आरोप लगाया था कि बीजेपी में उनकी उपेक्षा हुई, अपमान किया गया और उन्हें पुलिस केस में फँसाने के भी प्रयास किए गए। इन सब आरोपों के साथ कृपाल परमार ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। परमार की नाराजगी दूर करने के लिए खुद पीएम ने उन्हें फोन किया था। हालाँकि, पार्टी की तरफ से इस पर कुछ नहीं कहा गया।

वायरल वीडियो में भी फोन के दूसरी तरफ से आवाज जा रही है, “अगर मोदी का तुम्हारे जीवन में कोई रोल है…” इस पर परमार जवाब दे रहे हैं, “बहुत रोल है।” आगे सुनाई दे रहा है, “इस फोन कॉल की कीमत को कम मत आँकना।” परमार ने जवाब दिया, “नहीं, यह मेरे लिए भगवान का आदेश है।” इसके बाद परमार ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की शिकायत भी की कि वह उन्हें 15 सालों से जलील कर रहे हैं।

बता दें कि सराज सीट से CM जयराम ठाकुर ने कॉन्ग्रेस के चेतराम ठाकुर को रिकॉर्ड 20 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया है। वे रिकॉर्ड 7वीं बार इस सीट से जीते हैं। वहीं, मंडी जिले की सुंदरनगर सीट पर BJP के राकेश जमवाल ने कॉन्ग्रेस के सोहन लाल ठाकुर को 8 हजार 125 वोटों से हराया।