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1 लाख से भी अधिक वोटों से जीत कर CM भूपेंद्र पटेल दोबारा पहुँचे विधानसभा: भाजपा की जीत पर मुस्लिमों ने बनाए 151 किलो के लड्डू, कहा – यहाँ BJP सरकार से शांति

भाजपा राज्य में लगातार सातवीं विधानसभा चुनाव जीत रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल घाटलोडिया से चुनाव जीत गए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य के भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटिल ने मिठाई खिलाकर विधानसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन का जश्न मनाया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल अपने निर्वाचन क्षेत्र अहमदाबाद के घाटलोडिया से 1 लाख 25 हजार मतों के अंतर से आगे चल रहे थे। इस विधानसभा क्षेत्र से 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में जीते विधायक भूपेंद्र पटेल फिर से गुजरात के मुख्यमंत्री बनेंगे। 2012 में बीजेपी प्रत्याशी आनंदीबेन पटेल ने 1 लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। 2017 में भूपेंद्र पटेल ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी शशिकांत भूराभाई को 1 लाख 17 हजार वोटों के अंतर से हराया था। इस साल घाटलोडिया विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस ने अमी याग्निक और AAP ने विजय पटेल को टिकट दिया था।

उधर ताजा रुझानों में भाजपा 150 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। भाजपा की जीत पर अहमदाबाद में भी जश्न का माहौल है। भाजपा की जीत पर मणिनगर इलाके में मुस्लिम तबके के लोगों ने 151 किलो के बूंदी के लड्डू बनाए हैं। इलाके के मुस्लिम भाजपा समर्थकों ने कहा कि नरेंद्र भाई मोदी का रिकॉर्ड भूपेंद्र भाई ने तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा 150 से ज्यादा सीटों पर जीत रही है इसलिए हम 151 किलो लड्डू बनवा रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि गुजरात में भाजपा की सरकार में शांति है। हम इसलिए भाजपा की जीत पर खुशी मना रहे हैं।

आपको बता दें अहमदाबाद की मणिनगर सीट पहले पीएम नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र रह चुकी है। मणिनगर के लोगों की मानें तो क्षेत्र का काफी विकास हुआ है। कहा जाता है कि जब नरेंद्र मोदी इस सीट से पहली बार विधायक बने थे उस वक्त इलाके में काफी परेशानियाँ थीं। स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कूल-कॉलेजों की कमी थी। कपड़ा मिलों के बंद हो जाने के कारण रोजगार की समस्या भी थी। भाजपा ने यहाँ विकास के कार्य किए जिसके बाद से लगातार इस सीट पर बीजेपी की जीत होती है।

इस सीट पर इस साल भाजपा ने अमूल भट्ट को प्रत्याशी बनाया था। अमूल भट आगे चल रहे हैं और माना जा रहा है कि इस सीट पर भी भाजपा की जीत तय है।

जामनगर की पिच पर रवींद्र जडेजा की पत्नी रीवाबा ने खिलाया कमल, ननद-ससुर की फील्डिंग लगा भी रोक नही पाई कॉन्ग्रेस

गुजरात विधानसभा चुनावों में जामनगर नॉर्थ से भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी रीवाबा जडेजा 72083 वोटों से जीत गई हैं। सुबह से लगातार खबर आ रही थी कि रीवाबा अपने प्रतिद्वंदी और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार बिपेद्रसिंह से काफी वोटों से आगे हैं। हालाँकि अब उन्होंने अपनी जीत की बात कहते हुए अपने से जुड़े लोगों को आभार व्यक्त किया है।

तस्वीर साभार: eci.gov.in

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, रीवाबा जडेजा ने कहा, “जिन लोगों ने मुझे बतौर प्रत्याशी चुना, मेरे लिए काम किया, जन-जन तक पहुँचकर उनसे जुड़े…उन सबका मैं धन्यवाद देती हूँ। ये केवल मेरी जीत नहीं है बल्कि हम सब की है।” ट्वीट के मुताबिक चुनाव आयोग के आधिकारिक ट्रेंड का जिक्र है जिसमें बताया गया कि वह अपने प्रतिद्वंदी से 31, 333 वोटों से आगे हैं।

रीवाबा कहती हैं, “27 साल में भाजपा ने जिस तरह काम तिया है, गुजरात मॉडल स्थापित किया है, लोग चाहते हैं कि आगे भी विकास की गाड़ी भाजपा ही आगे लेकर जाए। गुजरात भाजपा के साथ थी और भाजपा के साथ रहेगी।”

बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनावों में जहाँ रीवाबा जडेजा भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मैदान में थीं। वहीं रवींद्र जडेजा की बहन और ससुर शुरू से कॉन्ग्रेस के समर्थन में थे। कॉन्ग्रेस ने रवींद्र जडेजा की बहन नैना और पिता अनिरुद्ध सिंह को मैदान में उतारा हुआ था। उन्होंने कहा था कि वह कॉन्ग्रेस के साथ हैं। परिवार का मसला, पार्टी के मसले से अलग है।

हिमाचल में AAP का खाता तक नहीं खुला, वोट भी बस 1%: पहाड़ ने अरविंद केजरीवाल की भविष्यवाणी पर झाड़ू फेरा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों (Himachal Pradesh Assembly Election Result) में आम आदमी पार्टी (AAP) दम तोड़ती नजर आ रही है। हिमाचल प्रदेश के शुरुआती रुझानों में AAP का अभी तक खाता भी नहीं खुला है।

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की कुल 68 सीटें हैं। इनमें से सभी सीटों पर AAP ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसकी झोली में अभी तक एक भी सीट नहीं आया है। इतना ही नहीं, प्रदेश में AAP को अभी तक सामने आए वोट प्रतिशत भी उसकी खस्ताहाल को दिखा रहे हैं।

भारतीय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर दिख रहे आँकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में आम आदमी पार्टी को सिर्फ एक प्रतिशत मत मिले हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, AAP का कोई उम्मीदवार आगे चलता हुआ भी नहीं दिखाई दे रहा है।

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कागज पर लिखकर भविष्यवाणी की थी कि गुजरात में AAP की सरकार बनेगी। केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली और पंजाब में उनकी भविष्यवाणी सच हो चुकी है। केजरीवाल ने दावा किया था कि उन्होंने 2014 के दिल्ली के चुनाव से कहा था कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस की 0 सीट आएगी और ऐसा ही हुआ था।

केजरीवाल ने कहा था, “उनकी राजनीतिक भविष्यवाणी सही साबित होती है। पंजाब में भी मेरी कई भविष्यवाणी सही साबित हुई हैं। मैंने कहा था कि नवजोत सिंह सिद्धू हारेंगे। चन्नी साहब दोनों सीटों से हारेंगे। बादल साहब का पूरा परिवार हारेगा। आज गुजरात के लिए मैं फिर लिखकर भविष्यवाणी करने जा रहा हूँ।”

उन्होंने गुजरात को लेकर आगे कहा था, “गुजरात में आम आदमी पार्टी की सरकार बन रही है। ये भविष्यवाणी नोट कर लीजिए। ये भविष्यवाणी भी सही होगी। 27 साल के कुशासन के बाद गुजरात की जनता को इन लोगों से रीलीफ मिलेगा।”

हालाँकि, गुजरात चुनाव में आम आदमी पार्टी कॉन्ग्रेस से पीछे चल रही है और अभी तक के रुझानों में वह सिर्फ पाँच सीटों पर लीड कर रही है। वहीं, BJP 154 सीटों पर आगे है। सीएम केजरीवाल की भविष्यवाणी दिल्ली के MCD चुनावों में भी फुस्स हो गई थी। उन्होंने कहा था कि MCD की कुल 250 सीटों में भाजपा को 20 से भी कम सीटें मिलेंगी। इस चुनाव में भाजपा को 104 सीटें मिली हैं।

महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ ने हाथ से लिखित एक एक कागज का टुकड़ा ट्वीट किया है। इसमें AAP के नेताओं के जीतने की बारे में लिखी गई है। इस कागज पर भविष्यवाणी की गई है, “हमारे प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया भारी मार्जिन से जीत रहे हैं। हमारे CM उम्मीदवार इशुदान जी भारी मार्जिन से जीत रहे हैं। अल्पेश जी वराछा से भारी मार्जिन से जीत रहे हैं।”

बता दें कि कागज पर लिखकर की गई यह भविष्यवाणी बकवास साबित हुई है। गुजरात के खंभालिया सीट से AAP के इशुदान गढ़वी भाजपा से पीछे चल रहे हैं। वहीं, कतरगाम सीट पर गोपाल इटालिया और वराछा सीट पर अल्पेश कथारिया भाजपा से पीछे चल रहे हैं।

‘पुरुषों को बंद कर के रखो, वही पैदा करते हैं समस्या’: केरल हाईकोर्ट ने छात्राओं के लिए रात के ‘हॉस्टल कर्फ्यू’ पर प्रशासन को डाँटा, कहा – महिलाओं को निकलने दें बाहर

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने लड़कियों को हॉस्टल से रात में बाहर निकलने के मामले में प्रशासन को फटकार लगाई है। न्यायालय ने कहा कि यदि शैक्षणिक संस्थानों के महिला छात्रावासों में कर्फ्यू का उद्देश्य महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, तो बेहतर होगा कि पुरुषों को ही बंद कर दिया जाए।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार (7 दिसंबर, 2022) को कहा कि महिला छात्रावास पर कर्फ्यू लगाने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा और महिला छात्रों पर अविश्वास करने से भी कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, “पुरुषों को बंद कीजिए, मैं यह कह रहा हूँ, क्योंकि वे परेशानी पैदा करते हैं। रात 8 बजे के बाद पुरुषों पर कर्फ्यू लगाएँ। महिलाओं को बाहर निकलने दीजिए।”

केरल उच्च न्यायालय ने सवाल किया कि सिर्फ लड़कियों और महिलाओं के ही रात में बाहर निकलने पर पाबंदी क्यों है। साथ ही, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उन्हें भी लड़कों और पुरुषों के समान आजादी मिलनी चाहिए। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने कहा कि रात से डरने की जरूरत नहीं है और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अँधेरा होने के बाद हर किसी का बाहर निकलना सुरक्षित रहे।

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी कोझीकोड मेडिकल कॉलेज की पाँच छात्राओं की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका के जरिए 2019 के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें रात साढ़े नौ बजे के बाद उच्चतर शिक्षण संस्थानों के छात्रावास में रहने वाली लड़कियों के बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गई थी। हाईकोर्ट ने पूछा कि मेडिकल कॉलेज के छात्रावासों में रहने वाली लड़कियों के लिए रात साढ़े नौ बजे के बाद बाहर निकलने पर पाबंदी क्यों लगा दी गई। साथ ही कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को भी इस समाज में रहना है। साथ ही सवाल दागा कि क्या रात साढ़े नौ बजे के बाद बड़ा संकट आ जाएगा? सरकार का दायित्व है कि वह परिसर (कैम्पस) को सुरक्षित रखे।

अदालत ने सवाल किया कि क्या राज्य में ऐसा कोई छात्रावास है जहाँ लड़कों के बाहर निकलने पर पाबंदी है। अदालत ने यह भी कहा कि समस्या पुरुष पैदा करते हैं, जिन्हें बंद कर रखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति रामचंद्रन ने यह भी कहा कि कुछ लोगों का कहना है कि वह पाबंदियों पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उनकी बेटी नहीं हैं। न्यायाधीश ने कहा कि उनकी कुछ रिश्तेदार महिलाएँ हैं और दिल्ली में छात्रावास में रहती हैं। वे पढ़ाई करती हैं और इस तरह की पाबंदियां वहाँ नहीं हैं।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने मतगणना केंद्र पर किया आत्महत्या का प्रयास, लोगों ने किया बीच-बचाव: गमछे का फंदा बना कर चले थे मरने, कहा – EVM गड़बड़ है

गुजरात में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने लगे हैं और भाजपा प्रचंड बहुमत की तरफ बढ़ रही है। इसी बीच गाँधीधाम से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार भरत सोलंकी ने मतगणना केंद्र पर आत्महत्या करने की कोशिश की। भरत सोलंकी ने EVM में गड़बड़ी का आरोप लगा कर गमछे का फंदा बाँधते हुए सुसाइड करने की कोशिश की।

कॉन्ग्रेस उम्मीदवार भरत सोलंकी का आरोप है कि ईवीएम ठीक से सील नहीं थी। उनका आरोप है कि ईवीएम में सिग्नेचर भी नहीं थे। आरोप लगाते हुए सोलंकी धरने पर बैठ गए और गिनती रोकने की माँग करने लगे। आरोपों पर कार्रवाई न होने की बात कहते हुए उन्होंने सुसाइड करने की कोशिश की। गाँधीधाम विधानसभा सीट से भाजपा की मालतीबेन किशोरभाई माहेश्वरी ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार भरत सोलंकी को हरा दिया है। वहीं इस सीट पर आम आदमी पार्टी को फिलहाल 3200 वोट मिले हैं। आपको बता दें कि भरत भाई सोलंकी ने पिछले दिनों राज्य में 125 सीट जीत कर सरकार बनाने का दावा किया था।

गुजरात की इस सीट पर भाजपा का एक दशक से कब्जा है। 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा (BJP) उम्मीदवार मालती माहेश्वरी ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार किशोर पिंगोल को 20, 270 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया था। तब यहाँ भाजपा को 52.6 फीसदी वोट जबकि कॉन्ग्रेस को 39.3 फीसदी वोट मिले थे। 2012 में भी यहाँ बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। गुजरात की गाँधीधाम सीट को 2008 में परिसीमन के बाद SC कैटेगरी के लिए रिजर्व किया गया था। गाँधीधाम में कुल 3,15,272 वोटर हैं। जिसमें एससी वोटर ज्यादा हैं।

वहीं गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के नतीजों की बात करें तो अब तक के रुझानों में भाजपा को 150 से ज्यादा सीटों पर जीत मिलती नजर आ रही है। वहीं कॉन्ग्रेस सिर्फ 17 सीटों पर आगे है। सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी सिर्फ 6 सीटों पर आगे चल रही है वहीं अन्य 4 सीटों पर आगे है।

भारत जोड़ो यात्रा इफेक्ट: जिसके घर में राहुल गाँधी ने किया जलपान, वह बुजुर्ग महिला खुद 40 मिनट बाहर खड़ी रहने को हुईं मजबूर

राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ इन दिनों राजस्थान में है। इसी दौरान वे कोटा के लाडपुरा पहुँचे थे। यहाँ उपप्रधान अशोक मीणा के घर में उनके जलपान की व्यवस्था की गई थी। लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा कारणों से अशोक मीणा की माँ उर्मिला को अपने ही घर में प्रवेश करने के लिए 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में यात्रा के तीसरे दिन कोटा के गोपालपुरा में पौने 3 घंटे का टी ब्रेक हुआ। राहुल और उनके साथ चलने वाले कुछ सीनियर लीडर्स के लिए स्नैक्स की व्यवस्था लाडपुरा के उप प्रधान अशोक मीणा के निवास पर थी। करीब 40 मिनट मकान में नेताओं का जमावड़ा रहा। इस दौरान अशोक मीणा की माँ उर्मिला बाहर ही रहीं।

उर्मिला ने बताया कि वह अपने गाँव वाले मकान पर थीं। वहाँ से आईं तब तक सुरक्षा जाँच प्रक्रिया हो चुकी थी। उनके पास ‘पास’ नहीं था, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इसलिए वह बाहर ही इंतजार करती रहीं। वहीं उपप्रधान अशोक मीणा ने बताया कि उन्होंने राहुल गाँधी से सिंचाई को लेकर बात की।

एक ट्विटर यूजर ने इस मामले को लेकर राहुल गाँधी से माफ़ी की माँग की और महिला को हुई तकलीफ के बारे में बताया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “राहुल गाँधी जी इस लाडपुरा उप प्रधान की माँ महिला उर्मिला जी से माफी माँगेंगे जो खुद महिला के घर अल्पाहार ले रहे थे और वो सिक्योरिटी चेक की वजह से बाहर खड़ी परेशान हो रही थी!”

राहुल गाँधी भले हीं ‘भारत जोड़ो यात्रा’ कर रहे हैं, लेकिन इस रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाता है कि वह लोगों से कितना जुड़े हुए हैं। वह मजे से ब्रेकफास्ट करते रहे और घर की मालकिन अपने ही घर जाने का इंतजार करती रहीं। वहीं बुधवार को ही केबलनगर में नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान राहुल गाँधी ने संसद में बोलने नहीं दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद टीवी को ओम बिरला का चेहरा पसंद है। इसीलिए टीवी पर उन्हें ही 24 घंटे दिखाया जाता है।

‘यह जमीन अल्लाह की… यहाँ से सभी बुत (मूर्तियाँ) उठवा दी जाएँगी’: अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में लगे नारे-पोस्टर… चुनावी नतीजों के बीच भुला दी गई खबर

उत्तर प्रदेश में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU, Aligarh) में मुस्लिम छात्रों ने 6 दिसंबर बाबरी ढाँचे के गिराने की बरसी को काला दिवस के रूप में मनाया और आपत्तिजनक नारे लगाए। इस दौरान छात्रों ने ‘जब अरजे खुदा के काब से, सब बुत उतरवाए जाएँगे’ की तख्तियाँ लेकर ‘मस्जिद वहीं थी, वहीं है और आगे भी वहीं रहेगी’ नारे लगाए।

विश्वविद्यालय के छात्र नेता मोहम्मद फरीद के नेतृत्व में मंगलवार (6 दिसंबर 2022) को बड़ी संख्या में मुस्लिम छात्र कैंटीन में एकजुट हुए और वहाँ से डक प्वाइंट पहुँचे। इस दौरान छात्रों ने कहा, “बाबरी मस्जिद अभी जिंदा है। मस्जिद वहीं थी, वहीं है और इंशाअल्लाह आगे भी वहीं रहेगी।”

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हाथों में पोस्टर ले रखे थे, जिसमें लिखा था, “जब अरजे खुदा के काब से, सब बुत उतरवाए जाएँगे।” उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद कभी खत्म नहीं हो सकती है और हमेशा वहीं रहेगी। वे अपनी आने वाली नस्लों को बताकर जाएँगे कि बाबरी मस्जिद वहीं है।

इस छात्रों ने नारे लगाए, ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इलल्लाह’। ये वही नारे हैं, जो कश्मीर में कभी आतंकी लगाया करते थे। बता दें कि ‘जब अरजे खुदा के काबे से, सब बुत उतरवाए जाएँगे’ एक विवादित नारा है, जिसका अर्थ है कि ‘एक दिन अल्लाह की इस ज़मीन से सभी बुत यानी मूर्तियाँ उठवा दी जाएँगी और सिर्फ अल्लाह का ही नाम रहेगा।

हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा का विशेष स्थान है, जबकि इस्लाम में मूर्ति पूजा यानी बुतपरस्ती को गुनाह माना गया है। इसलिए जब भी इस नारे की चर्चा होती होती है तो इसे हिंदू विरोध के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। इस शायरी को पाकिस्तान के शायर फैज अहमद फैज ने लिखा था। फैज ने इन नज्म को पाकिस्तान के कट्टरपंथी तानाशाह जिया उल हक के जमाने में लिखी थी।

भारत में जब भी देशविरोधी गतिविधियाँ अंजाम दी जाती है, उस समय इस नारे को खूब लगाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय बाद बाबरी ढाँचे की जगह राममंदिर निर्माण के बाद भी कट्टरपंथियों का यह कहना है कि ‘वहाँ मस्जिद थी, है और आगे भी रहेगी’ इसी सोच का परिचायक है।

AMU के छात्रों के इस प्रदर्शन को लेकर अलीगढ़ के भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गौरव शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को काला दिवस मनाने पर रोक लगाई है। इसके बाद भी AMU में इसे काला दिवस के रूप में मनाया गया। उन्होंने इस मामले की जाँच की माँग की।

बता दें कि इसी नारे को लेकर दिसंबर 2019 में IIT कानपुर में विवाद हुआ था। एक प्रदर्शन के दौरान इस नारे को लगाया गया था। उस दौरान IIT निदेशक को दी गई शिक़ायत में कहा गया था कि ये पंक्तियाँ “सभी मूर्तियों को नष्ट करने का आह्वान करती हैं” (जैसा कि मूर्ति पूजा इस्लाम में निषिद्ध है) और इस बात पर ज़ोर दिया गया है, “केवल अल्लाह की पूजा होनी चाहिए।

बाद में लिबरल गैंग ने इस पर लीपापोती करने की कोशिश की थी और फैज को नास्तिक और वामपंथी बताकर उनका बचाव किया था। इसको लेकर लोगों ने सवाल उठाए थे कि अगर फैज नास्तिक थे तो मजहब के आधार पर बने पाकिस्तान में वे क्यों चले गए थे। फैज का बचाव करने वालों में बॉलीवुड के स्वघोषित बुद्धिजीवी जावेद अख्तर भी शामिल थे।

छठी बार विधायक बने CM जयराम ठाकुर: क्या हिमाचल प्रदेश में BJP बदल देगी 32 सालों वाला पैटर्न या फिर 5 साल बाद लौटकर ही दम लेगी कॉन्ग्रेस

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों का एक पैटर्न रहा है। पिछले 32 वर्षों से ये पैटर्न यूँ ही चला आ रहा है और इसे न तो भाजपा बदल पाई है और न ही कॉन्ग्रेस पार्टी। वो पैटर्न ये है कि 1990 से अब तक यहाँ कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार बहुमत प्राप्त करने में कामयाब नहीं हो पाई है। अंतिम बार यहाँ किसी पार्टी ने दोबारा बहुमत प्राप्त किया था, वो कॉन्ग्रेस ही थी। कॉन्ग्रेस पार्टी ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में 1982 और 1985 में ये कारनामा किया था।

लेकिन, 1990 से ये पैटर्न चालू हो गया और उस साल हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के साथ ही दिग्गज नेता शांता कुमार मुख्यमंत्री बने। वो पहले भी लगभग ढाई वर्षों तक राज्य की कमान सँभाल चुके थे। हालाँकि, 1993 में भाजपा सत्ता में रहते हुए हार गई और लगभग एक वर्ष के राष्ट्रपति शासन के बाद 1993 में भाजपा की हार हुई थी और कॉन्ग्रेस ने वीरभद्र सिंह को फिर से मुख्यमंत्री बनाया था। 1998 में फिर से भाजपा की जीत हुई।

इस साल कॉन्ग्रेस पार्टी की हार के साथ ही प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने। पिछले 3 दशक से राज्य में वीरभद्र और धूमल व उनके परिवारों का दबदबा रहा है। धूमल के बेटे अनुराग सिंह ठाकुर फ़िलहाल केंद्र की मोदी सरकार में खेल एवं युवा मामलों के अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भी सँभाल रहे हैं। वो BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। साथ ही वो चौथी बार सांसद भी बने हैं। इसी तरह 6 बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद हैं और उनके बेटे विधायक हैं।

2003 के चुनाव में भी उससे पहले विपक्ष में रही कॉन्ग्रेस की जीत हुई थी और उसने वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाया था। 2007 के दिसंबर में हुए चुनावों में कॉन्ग्रेस हार गई और प्रेम कुमार धूमल के पास फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पहुँच गई। 2017 में कॉन्ग्रेस पार्टी फिर जीत गई और वीरभद्र सिंह अंतिम व छठी बार मुख्यमंत्री बने। 2017 के चुनावों में भाजपा जीती और जयराम ठाकुर पर भरोसा जताया गया। अब 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा हारती हुई दिख रही है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर चल रहे आधिकारिक आँकड़ों की मानें तो कॉन्ग्रेस पार्टी फ़िलहाल 38 सीटों पर आगे चलती दिख रही है और ये बहुमत से 3 ज्यादा का आँकड़ा है। वहीं भाजपा 27 सीटों पर आगे चल रही है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सराज विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस के चेतराम ठाकुर को 20,000 से भी अधिक वोटों से पटखनी दे दी है और छठी बार विधायक बने हैं। शिमला ग्रामीण से वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य सिंह भी जीत गए हैं। ऐसे में फिर वही पैटर्न राज्य में दिख रहा है।

‘तुम्हारा रंग काला… शादी के बाद भाग जाऊँगी’: टूट गई शादी, दूल्हे के पक्ष का दावा- दुल्हन के परिजनों ने सारा सामान छीना, लाठी-डंडे से मारा भी

उत्तर प्रदेश के बरेली में शादी टूटने का एक मामला अदालत में पहुँच गया है। आरोप है कि लड़की ने लड़के के रंग और शिक्षा पर सवाल उठाते हुए शादी से इनकार कर दिया। लड़के के परिजनों ने लड़की पक्ष पर मारपीट करने और सामान छीनने का भी आरोप लगाया है।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार मामला करीब छह महीने पुराना है। दिल्ली के निहाल विहार इलाके के रहने वाले दुर्गा प्रसाद की शादी बरेली की युवती से तय हुई थी। तिलक और गोद भराई के लिए लड़का पक्ष के लोग लड़की के घर पहुँचे। गोद भराई की रस्म के बाद लड़की ने दुर्गा से कहा, “तुम दिखने में सुंदर नहीं हो, ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं हो और तुम्हारा रंग भी काला है। मेरी सहेलियाँ शादी के बाद मेरा मजाक उड़ाएँगी।” लड़की ने होने वाले दूल्हे को धमकी दी, “यदि तुमने शादी से इनकार नहीं किया तो शादी के बाद मैं भाग जाऊँगी। फिर तुम्हारी और तुम्हारे घर वालों की बदनामी होगी। इससे अच्छा होगा तुम खुद ही शादी से मना कर दो।”

लड़की की बात सुनकर लड़के के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपने और परिवार की इज्जत का ख्याल करते हुए शादी से मना कर दिया। दूल्हे के शादी से इनकार करते ही लड़की पक्ष के लोग नाराज हो उठे। आरोप है कि लड़की पक्ष के लोगों ने दूल्हा पक्ष के लोगों के साथ बदसलूकी की। उनका सामान छीन लिया।

इतना ही नहीं युवती के बहनोई पर भी दूल्हा पक्ष के लोगों को धमकी देने और गाली-गलौज का इल्ज़ाम है। कहा जा रहा है कि इस बीच दोनों पक्ष के लोगों ने विवाद सुलझाने की भी कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। दुल्हन के परिजनों पर दूल्हा पक्ष से 2 लाख रुपए माँगने का भी इल्जाम लगाया गया है। आरोप है कि रुपए न देने पर दुल्हन पक्ष के लोगों ने उनपर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

जब रिश्तेदारों के बीच बातचीत से मामला नहीं सुलझा तो दूल्हे के पक्ष ने कोर्ट का रुख किया। दोनों पक्षों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

‘ब्राह्मणों पंजाब-हरियाणा छोड़ो’: JNU के बाद सिरसा के कॉलेज में लिखा, सिख दंगों के लिए बताया दोषी; खालिस्तानी आतंकी पन्नू पर FIR

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के बाद अब हरियाणा में जातिसूचक नारे लिखे गए हैं। इन नारों के साथ खालिस्तान का भी समर्थन किया गया है। अराजक तत्वों ने देश विरोधी नारों के साथ ब्राह्मण विरोधी नारे लिखे हैं। इस मामले में सिख फॉर जस्टिस (SJF) के आतंकी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, हरियाणा के सिरसा जिले के डबवाली उपमंडल में डॉ बीआर अंबेडकर कॉलेज है। इस कॉलेज की बाहरी दीवारों पर 6 जगह ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिखे मिले। इसके साथ ही लिखा था, ‘ब्राह्मणों पंजाब-हरियाणा छोड़ो’। सन 1984 के सिख दंगों के लिए ब्राह्मणों को जिम्मेदार ठहराया गया था।

इस तरह के नारे लिखे होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और इन्हें मिटवाया। स्थानीय पुलिस ने सिख फॉर जस्टिस के आतंकी और खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) और अज्ञात के खिलाफ देशद्रोह एवं साजिश रचने का मामला दर्ज किया है।

पुलिस का मानना है कि इस घटना को 6 या 7 दिसंबर 2022 की रात को अंजाम दिया गया है। दरअसल, गुरपतवंत ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दिवार पर लिखे इन नारों को दिखाया गया है। वीडियो में पन्नू ने हरियाणा को पंजाब का हिस्सा बताकर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को चुनौती दी और मेलबर्न में 29 जनवरी 2023 को वोटिंग की बात भी कही।

पुलिस का कहना है कि कई संदिग्ध लोगों के फोन नंबर ट्रैस किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कॉलेज के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी जाँच की जा रही है। बता दें कि इससे पहले खालिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, लेकिन आतंकी द्वारा जातिसूचक नारे की यह अपने आप में संभवत: पहली घटना है।

बता दें कि इससे पहले JNU परिसर में कई जगह जातिसूचक नारे लिखे गए थे। विश्वविद्यालय परिसर के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज- II भवन की दीवारों पर ब्राह्मण और वैश्य समुदायों के खिलाफ नारे लिखे गए थे।

एक जगह लिखा था ‘ब्राह्मण-बनिया, हम आ रहे हैं बदला लेने’। एक जगह लिखा था ‘ब्राह्मण परिसर छोड़ो, ब्राह्मण भारत छोड़ो’। वहीं, एक जगह ‘अब खून बहेगा’ लिखा हुआ था। इसके साथ ही तीन प्रोफसरों के चैंबर के गेट पर ‘शाखा में जाओ’ लिखा गया था।