गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान एक्टर और भाजपा नेता परेश रावल ने अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के खिलाफ ‘मछली पकाने’ वाली टिप्पणी की थी। उनकी इस टिप्पणी को लेकर कोलकाता पुलिस ने उन्हें समन भेजा है। इस समन में, परेश रावल को सोमवार (12 दिसंबर 2022) को तलतला पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा के पूर्व सांसद परेश रावल ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान वलसाड में आयोजित एक रैली में कहा था, “गैस सिलेंडर महंगे हैं, लेकिन उसकी कीमतें कम हो जाएँगी। लोग रोजगार भी पा जाएँगें , लेकिन क्या होगा अगर रोहिंग्या और बांग्लादेशी आप के आसपास रहना शुरू कर दें जैसा कि दिल्ली में है? आप गैस सिलेंडर का क्या करेंगे? बंगालियों के लिए मछली पकाएँगे?”
परेश रावल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया में उनकी आलोचना हो रही थी। इसके बाद उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी माँग ली थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “निश्चित तौर पर मछली कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि गुजराती मछली पकाते और खाते हैं। लेकिन, मैं बंगाली से स्पष्ट कर दूँ कि मेरा मतलब अवैध बांग्लादेशी रोहिंग्याओं से है। लेकिन, फिर भी अगर मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो मैं माफी माँगता हूँ।”
of course the fish is not the issue AS GUJARATIS DO COOK AND EAT FISH . BUT LET ME CLARIFY BY BENGALI I MEANT ILLEGAL BANGLA DESHI N ROHINGYA. BUT STILL IF I HAVE HURT YOUR FEELINGS AND SENTIMENTS I DO APOLOGISE. ? https://t.co/MQZ674wTzq
परेश रावल के इस बयान के बाद शुक्रवार (2 दिसंबर 2022) को, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता मोहम्मद सलीम ने परेश रावल के खिलाफ कोलकाता के तलतला थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। सीपीएम नेता ने एफआईआर में कहा था कि परेश रावल के बंगाली विरोधी बयानों से देश के अन्य राज्यों के लोगों में बंगाली विरोधी भावना विकसित हो सकती है।
CPI (M) नेता की शिकायत के बाद परेश रावल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 (दंगे की मंशा से उकसाना), धारा 153 A (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना ), धारा 153 B (भाषाई या नस्लीय समूहों के अधिकारों का खंडन करना) और धारा 504 (शांति भंग करने की मंशा से जानबूझकर अपमान करना ) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पाकिस्तान में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने गुरुद्वारा शहीद गंज भाई तारु सिंह को मस्जिद बताते हुए उस पर ताला जड़ दिया है। लाहौर में स्थित गुरुद्वारे को पाकिस्तान की इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने कट्टरपंथियों के साथ मिलकर सिख समुदाय के लिए बंद कर दिया है। यहाँ सिख श्रद्धालुओं के जाने पर मनाही हो गई है। इस घटना के बाद स्थानीय सिखों में आक्रोश है।
गुरुद्वारे को मस्जिद बताने वाली यह कोई पहली घटना नहीं है। 2 साल पहले भी इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को मस्जिद बताया गया था। तब भारत की तरफ से पाकिस्तान के सामने सख्त ऐतराज जताया गया था।
क्या है गुरुद्वारे को लेकर विवाद?
कट्टरपंथियों का मानना है कि गुरुद्वारा शहीद गंज भाई तारु सिंह कभी दारा शिकोह का प्रसिद्ध महल था। दारा शिकोह अपनी हत्या से पहले यहीं रहा करता था। उसे उसी के छोटे भाई औरंगज़ेब ने मरवा दिया था। वहीं सिखों का मानना है कि लाहौर के गवर्नर और मुगल साम्राज्य के प्रतिनिधि मीर मन्नू के आदेश पर यहाँ हजारों निर्दोष सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का नरसंहार किया गया था। इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनलोगों को यातना देकर मार डाला, जिन्होंने उनके सामने घुटने नहीं टेके।
ऐसे ही वीर योद्धाओं में एक भाई तारु सिंह भी थे। पाकिस्तान के लाहौर में उन्हीं के नाम आपर गुरुद्वारा शहीद गंज भाई तारु सिंह बनाया गया , जो उनका शहीदी स्थान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिखों का दावा है कि मीर मन्नू ने दीवान कौरा मल के कहने पर यहाँ एक गुरुद्वारा स्थापित करने की अनुमति दी थी। वहीं, कट्टरपंथियों का कहना है कि सिखों ने जबरन इस मस्जिद पर कब्जा किया हुआ है।
पाकिस्तान में मस्जिद बताकर गुरुद्वारा शहीद गंज भाई तारु सिंह पर जड़ दिया गया ताला ( फाइल फोटो साभार न्यूज़ 18)
कौन थे शहीद भाई तारु सिंह?
पटियाला के पंजाब विश्वविद्यालय के ‘सिख एनसाइक्लोपीडिया’ के मुताबिक, अमृतसर के फुला गाँव में भाई तारु सिंह का जन्म एक संधु जाट परिवार में हुआ था। उस समय सिख मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ रहे थे। भाई तारु सिंह को 1 जुलाई, 1745 को 25 वर्ष की उम्र में ही मार दिया गया था। इस्लाम कबूल नहीं करने पर भाई तारु सिंह का सिर उखाड़ दिया गया था। उन्हें बलिदानी के रूप में याद किया जाता है।
वैज्ञानिक और लेखक डॉ आनंद रंगनाथन ने जस्टिस एस मुरलीधर के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय से माफी माँगने से इनकार कर दिया है। दरअसल, साल 2018 में जस्टिस एस मुरलीधर ने अर्बन नक्सल और भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित गौतम नवलखा को जमानत दे दी थी। इस पर, आनंद रंगनाथन ने ट्वीट कर जज पर ‘पक्षपात’ करने के ‘आरोप’ लगाए थे।
दरअसल, अवमानना मामले में, कोर्ट ने फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री, न्यूज पोर्टल स्वराज्य और आनंद रंगनाथन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। इसके बाद अब, आनंद रंगनाथन ने बयान देते हुए कहा है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसलिए, वह माफी नहीं माँगेंगे।
आनंद रंगनाथन ने कहा, “अक्टूबर 2018 में, गौतम नवलखा को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने राहत दी थी। एस गुरुमूर्ति और विवेक अग्निहोत्री ने न्यायाधीश द्वारा इस कार्रवाई की आलोचना की थी। इन दोनों पर स्वतः: संज्ञान लेते हुए अदालत की आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया गया था। उनके तर्कों या न्यायाधीशों के तर्कों के गुण-दोष पर टिप्पणी न करते हुए, मैंने ट्वीट किया, ‘मैं उनके साथ खड़ा हूँ’ और पूछा था कि असहमति को लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व बताए जाने का क्या हुआ?” (संयोग से यह वाक्यांश पहली बार भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तब बोला गया था जब नवलखा को गिरफ्तार किया गया था।)
My statement on today’s developments in the Delhi High Court, in the suo motu criminal contempt case regarding relief provided by the hon’ble judge to UAPA-accused Gautam Navlakha.
उन्होंने यह भी कहा, “मैं उनके साथ न केवल इसलिए खड़ा था क्योंकि मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करता हूँ बल्कि इसलिए भी कि मैं अदालत की अवमानना के आरोप का मौलिक रूप से विरोध करता हूँ। यही कारण है कि मैं सार्वजनिक रूप से उस दुष्ट प्रशांत भूषण के साथ भी खड़ा रहा हूँ। भले ही मैं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और उनके फैसले पर, प्रशांत भूषण की राय से पूरी तरह असहमत था।”
अपने खुले विचारों के लिए मशहूर डॉ आनंद रंगनाथन ने कहा, “बीते 4 वर्षों से मामला चलता आ रहा है लेकिन इस मामले में कोई नोटिस या समन नहीं मिला है। मैं दोहराता हूँ, मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है और मैं अदालत की आपराधिक अवमानना के आरोप का विरोध करना जारी रखता हूँ और मैं खुलकर बोलने वाला और निरंकुश शासन का पक्षधर हूँ, इसलिए मैं माफी नहीं माँगूंगा। मैंने एक बार टिप्पणी की थी, यदि मैं इस समय जेल में नहीं हूँ तो इसका कारण यह है कि राज्य (सरकार) ने फैसला किया है कि मुझे जेल जाने की जरूरत नहीं है। शायद, राज्य (सरकार) कुछ और निर्णय लेने के लिए तैयार हो रहा है। ऐसा ही होगा।”
इस मामले में विवेक अग्निहोत्री ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लिखित माफी दी थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की पीठ ने इसके बावजूद विवेक अग्निहोत्री को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और माफी माँगने को कहा था।
As per HC order Desh Kapur has withdrawn the offending article & tendered unconditional apology to Court. Since I do not follow him I would not know whether he has tweeted his apology. Even if he does it, unless mentions my handle, I will be able to retweet it as directed by HC
पूरे मामले में यह ध्यान रखने लायक बात है कि अर्थशास्त्री डॉ एस गुरुमूर्ति को प्रतिवादी के रूप में हटा दिया गया था। इस पर उनके वकील ने सूचित किया कि डॉ. गुरुमूर्ति ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था हालाँकि अपना ट्वीट हटा लिया था क्योंकि जिस मूल ट्वीट पर उन्होंने प्रतिक्रिया दी थी, उस मूल ट्विटर यूजर ने अपना वो ट्वीट ही डिलीट कर दिया था।
क्या है मामला…
दरअसल, साल 2018 में जस्टिस एस मुरलीधर ने अर्बन नक्सल और भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित गौतम नवलखा को जमानत दे दी थी। इसके बाद, देश कपूर ने दृष्टिकोन नामक एक वेबसाइट के लिए एक लेख था। इस लेख में उन्होंने जस्टिस मुरलीधर पर पक्षपात करने के आरोप लगाए थे। इस लेख को आनंद रंगनाथन (अन्य लोगों ने भी) द्वारा रीट्वीट कर उनका समर्थन किया था। इस पर, कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट की अवमानना करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
अपडेट (11 दिसंबर, 2022): इस आर्टिकल में पहले उल्लेख किया गया था कि डॉ. एस गुरुमूर्ति ने बिना शर्त माफी माँगी थी। डॉ. एस गुरुमूर्ति के वकील ने हालाँकि सूचित किया है कि उन्होंने इसके लिए माफी नहीं मांगी है। इस सूचना के बाद आर्टिकल को अपडेट किया गया है।
पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस संदीप कुमार ने एक सुनवाई के दौरान कुछ ऐसा कह दिया, जिससे उनका वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो 23 नवंबर, 2022 को हुई सुनवाई के लाइव-स्ट्रीम का बताया जा रहा है।
सुनवाई का वीडियो बिहार सरकार के एक जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी अरविंद कुमार भारती नाम के मामले से जुड़ा हुआ है। उनपर भूमि अधिग्रहण के एक मामले में मुआवजे के 23-24 लाख रुपए गलत तरीके से आवंटित करने का आरोप है। अदालत ने उनसे यह बताने के लिए पेश होने को कहा था कि बँटवारे का मुकदमा (पार्टीशन सूट) लंबित होने के दौरान उन्होंने एक पक्ष को भूमि अधिग्रहण मुआवजा कैसे जारी किया। बातचीत के दौरान, अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि अधिकारी को पहले भी एक मामले में निलंबित किया जा चुका है।
पक्षकारों को हलफनामा दायर करने के लिए समय देने के बाद जस्टिस कुमार ने अधिकारी से पूछा, “भारती जी, रिजर्वेशन पर आए थे नौकरी में क्या?
अधिकारी अरविंद कुमार भारती ने रिजर्वेशन पर नौकरी मिलने की बात स्वीकार करते हुए ‘हाँ’ में जवाब दिया। अधिकारी के कोर्ट रूम से चले जाने के बाद कोर्ट रूम में मौजूद कुछ वकील हँसने लगे। इस दौरान एक वकील ने टिप्पणी की, “अब तो हुजूर समझिएगा बात।” इस पर एक दूसरे वकील ने टिप्पणी की कि दो नौकरी के बराबर हो गया होगा। उनका आशय कमाई से था। इस पर जस्टिस संदीप कुमार ने कहा, “नहीं, नहीं यह सब… कुछ नहीं होता इन लोगों का… ये बेचारा पैसा जो कमाया होगा, खतम कर दिया होगा।”
जस्टिस कुमार के इस कमेंट के बाद मौजूद वकील ठहाका लगाने लगते हैं। पूरी बातचीत पटना हाईकोर्ट द्वारा जारी वीडियो में लगभग 1.47.28 से देख सकते हैं। वीडियो के वायरल होने के बाद एक वर्ग जस्टिस कुमार की आलोचना कर रहा है। आपको बता दें कुछ दिन पहले भी जस्टिस संदीप कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। वायरल वीडियो में जस्टिस संदीप कुमार एक महिला के घर पर हुए बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बिहार पुलिस पर भड़क गए थे।
इस्लामी आक्रांताओं द्वारा दूसरे धर्मों के मंदिरों और पूजा स्थलों को तोड़ने का लंबा इतिहास रहा है। न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के कई देश इस्लामवादियों की इस हरकत का शिकार रहे हैं। भारत आने से पहले इस्लामवादियों ने विश्व के कई देशों का इस्लामीकरण करने का प्रयास किया था।
भारत आने के बाद इस्लामी आक्रांताओं का यह प्रयास जारी रहा। वास्तव में इस्लामवादियों ने पूरी दुनिया का इस्लामीकरण करने का लक्ष्य बनाया था, जिसमें भारत भी शामिल था। उनके लिए, इस निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका भारत में हिंदुओं द्वारा बनाई गए पवित्र स्थानों और प्रमुख हिंदू पूजा स्थलों को नष्ट करना था। इसके चलते, मुगल आक्रांता बाबर के शासन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर साल 1527 में बाबरी मस्जिद बनाई गई थी।
इसके अलावा, कई अन्य हिंदू मंदिरों और हिंदुओं द्वारा निर्मित खास जगहों को ध्वस्त कर इस्लामी पूजा स्थलों में परिवर्तित कर दिया गया था। ऐसी ही एक मस्जिद है ‘देवल मस्जिद’, जो तेलंगाना के निजामाबाद जिले के बोधन इलाके में स्थित है।
हिंदू मंदिर तोड़ बनाई गई देवल मस्जिद
रिपोर्ट्स के अनुसार, देवल मस्जिद की संरचना मूल रूप से एक हिंदू-जैन मंदिर थी जिसे राष्ट्रकूट राजा इंद्रवल्लभ (इंद्र तृतीय) द्वारा 10वीं शताब्दी के आसपास बनवाया गया था।
इसके बाद, इस मंदिर का जीर्णोद्धार कल्याणी चालुक्य शासक सोमेश्वर के समय में हुआ था। राजा सोमेश्वर ने इसका नाम ‘इंद्रनारायण स्वामी मंदिर’ रख दिया था। इसके बाद कई वर्षों तक महान योद्धा काकतीय सेनापति सीतारामचंद्र शास्त्री ने 100 स्तंभों वाले इस खूबसूरत मंदिर का संरक्षण किया था।
हालाँकि, साल 1323 में मोहम्मद बिन तुगलक ने बोधन किले पर हमला कर सीतारामचंद्र शास्त्री को अपना गुलाम बनाते हुए इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर दिया था। यही नहीं, उनका नाम बदलकर आलम खान रख दिया था।
हालाँकि, तुगलक की सेना के जाते ही महान योद्धा काकतीय सेनापति सीतारामचंद्र शास्त्री ने हिंदू धर्म अपना लिया था। इसके बाद, जब तुगलक की सेना ने बोधन किले पर आक्रमण किया तो किसी को भी बंदी नहीं बनाया गया बल्कि लोगों के साथ भयंकर मारकाट की गई और किले को तोड़ दिया गया। साथ ही, तुगलक ने सीतारामचंद्र शास्त्री का सिर भी काट दिया और इंद्रनारायण स्वामी मंदिर को देवल मस्जिद में बदल दिया।
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद
ज्ञानवापी मस्जिद का पूरा परिसर एक विवादित संरचना है। इसे मुगल आक्रांता औरंगजेब ने पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर के खंडहरों पर बनाया गया था। इससे पहले, कुतुब अल-दीन ऐबक समेत कई अन्य इस्लामी शासकों ने इस परिसर को ‘अपवित्र’ किया था।
आज भी इस प्राचीन मंदिर के हिस्से मस्जिद की बाहरी दीवारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। खासकर पश्चिमी दीवार पर मंदिर के अवशेषों को साफ तौर पर देखा जा सकता है। इसके अलावा, वर्तमान मंदिर के अन्य हिस्सों में भी हिंदू पूजा स्थल के विध्वंस, मस्जिद के निर्माण के पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर, विवादित मस्जिद परिसर से सटा हुआ है। इस मंदिर में श्रद्धालु पूजा और प्रार्थना कर सकते हैं। इसका निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने साल 1780 में करवाया था।
काशी विश्वेश्वर मंदिर को तोड़कर बनाई गई ज्ञानवापी मस्जिद
इसी साल 12 मई को वाराणसी की एक अदालत ने विवादित ढाँचे के वीडियोग्राफिक सर्वेक्षण की अनुमति दी थी। वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए और कहा कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट 17 मई तक जमा करनी होगी।
एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में 54 सदस्यीय टीम ने 14 मई को ज्ञानवापी परिसर के बेसमेंट और पश्चिमी दीवार का सर्वे किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वे टीम ने ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित ढाँचे की आठ तहखानों को खोला था।
इस्तांबुल में हागिया सोफिया
इतिहास में ऐसे सबूत उपलब्ध हैं जिनसे कहा जा सकता है हागिया सोफिया एक चर्च था, लेकिन अब यह एक मस्जिद है।हागिया सोफिया को छठी शताब्दी में तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में आग से नष्ट हुए एक पुराने चर्च के स्थान पर बनाया गया था।
इसे जस्टिनियन चर्च के नाम से जाना था। इसका निर्माण साल 537 में तत्कालीन शासक जस्टिनियन ने किया था। इसके बाद, यह सैकड़ों वर्षों तक एक चर्च बना रहा। लेकिन फिर, ओटोमन की सेना ने शहर पर आक्रमण कर दिया।
शहर पर कब्जा करने के बाद, ओटोमन्स ने 1453 में चर्च को एक मस्जिद में बदल दिया। आक्रमणकारी सुल्तान मेहमद द्वितीय ने चर्च में सभी ईसाई कार्यों और प्रार्थनाओं को रोकने का आदेश देते हुए इसे मस्जिद में बदल दिया था। इसके बाद, यह साल 1935 तक एक मस्जिद बना रहा। हालाँकि, फिर तुर्क साम्राज्य के पतन के बाद तुर्की गणराज्य के पहले राष्ट्रपति और संस्थापक द्वारा इसे एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया था।
On May 29, 1453 Byzantine Empire ended when Ottomans breached Constantinople’s ancient land wall after besieging city for 55 days. The fall of Constantinople further led to Hagia Sophia, a church being converted into a Mosque. (4/n) pic.twitter.com/8xqxKrxFys
शुरुआत में, इस संग्रहालय में धार्मिक अनुष्ठानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन बाद में साल 1991 में एक परिसर के एक हिस्से को प्रार्थना कक्ष के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई। साथ ही, इस्लामिक प्रार्थना अज़ान के लिए मीनारों का उपयोग करने की भी अनुमति दी गई।
साल 2018 में, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने हागिया सोफिया को एक मस्जिद में बदलने के अपने इरादे की घोषणा की थी। इसके बाद, आधिकारिक तौर पर साल 2020 में इसे एक मस्जिद घोषित किया गया। इस प्रकार, यह अब एक मस्जिद है, जहाँ नियमित अजान, नमाज और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हागिया सोफिया में, गैर-मुस्लिम पर्यटक के रूप में जा सकते हैं। लेकिन, उन्हें प्रार्थना कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं है और उन्हें इस्लामी स्थलों पर लागू सभी नियमों का पालन करना होता है।
जेरूसलम में अल अक्सा मस्जिद
इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष में प्रमुख आक्रोश का एक बड़ी वजह इजरायली यहूदियों और फिलिस्तीनी मुस्लिमों के बीच धार्मिक विभाजन है। यहूदी धर्म का सबसे पवित्र स्थान टेंपल माउंट जेरूसलम में है। जहाँ, प्रार्थना करने के लिए यहूदी एकजुट होते हैं। टेम्पल माउंट कॉम्प्लेक्स अल-अक्सा मस्जिद का हिस्सा है। हालाँकि, अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक के बनने से पहले, टेंपल माउंट पर एक भव्य यहूदी मंदिर था।
टेंपल माउंट को यहूदियों का दूसरा सबसे पवित्र मंदिर कहा जाता है। हालाँकि, 70वीं ईस्वी में यहूदियों के विद्रोह के बाद सजा के रूप में रोमन साम्राज्य द्वारा इसे नष्ट कर दिया गया था। टेंपल माउंट को 516 ईसा पूर्व में बनाया गया था। वहीं, यहूदियों के सबसे बड़े पवित्र स्थल सोलोमन के मंदिर को 586 ईसा पूर्व में नव-बेबीलोनियन साम्राज्य द्वारा नष्ट कर दिया गया था। फाउंडेशन स्टोन, वर्तमान में यहूदियों के लिए सबसे पवित्र स्थल, डोम ऑफ द रॉक पर ही स्थित है। हालाँकि, यहूदियों को इसमें जाने की अनुमति नहीं है क्योंकि यह इस्लामिक मस्जिद अल-अक्सा के अंदर स्थित है।
मक्का में काबा और आसपास की मस्जिद
इस्लामी इतिहासकारों के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद को 620 ईस्वी में मक्का छोड़ना पड़ा था। 629/630 ईस्वी में वापस लौटने पर, उन्होंने काबा को मूर्तियों से ‘साफ’ कर दिया। वेबसाइट ‘Wiki Daiyah’ के अनुसार, अब्दुल्ला बिन मसूद ने उल्लेख किया है, “अल्लाह के रसूल ने मक्का में प्रवेश किया, तब काबा के चारों ओर तीन सौ साठ मूर्तियाँ थीं।”
इसके बाद, उसने अपने हाथ में ली हुई एक छड़ी से मूर्तियों को मारना शुरू कर दिया और कहा: ‘सत्य (यानी इस्लाम) आ गया है और झूठ (अविश्वास) गायब हो गया है। वास्तव में झूठ (अविश्वास) हमेशा के लिए गायब हो जाता है।” [कुरान 17: 81] गौरतलब है कि बांग्लादेश से निर्वासन झेल रही लेखिका तसलीमा नसरीन ने पिवहले साल अक्टूबर में दुर्गा पूजा के अवसर पर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हुए हमलों के बाद भी इस मुद्दे को उठाया था।
Mohammad destroyed 360 idols of pagans inside Kaaba. His followers have been following in his footsteps.
उन्होंने कहा था कि पैगंबर मोहम्मद ने खुद काबा में इस्लाम की उत्पत्ति से पूर्व के अरब देवताओं की 360 मूर्तियों को नष्ट कर दिया था। बांग्लादेशी मुस्लिम सिर्फ उनके नक्शेकदम पर चल रहे हैं।
शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटीमें ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)’ और ‘स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI’) के सदस्यों के बीच झड़प की खबर है। बताया जा रहा है कि इस भिंड़त में 8 से 10 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर माहौल को काबू कर लिया है। कॉलेज में शांति है, लेकिन तनाव का माहौल है। दोनों तरफ से एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप किए गए हैं। घटना मंगलवार (6 दिसंबर, 2022) सुबह की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की शुरुआत यूनिवर्सिटी के समरहिल चौक से शुरू हुई। यहाँ दोनों पक्षों में कुछ देर बहसबाजी चली, जिसके बाद सभी लोग अलग-अलग रास्तों पर चले गए। थोड़ी ही देर बाद आर्ट्स ब्लॉक पर दोनों पक्ष एक बार फिर से भिड़ गए। इस बार हमले में कुछ छात्रों द्वारा लोहे की रॉड और डंडों का प्रयोग किया गया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कार पार्किंग के पास छात्रों को एक दूसरे से उलझते देखा जा सकता है।
इसी वीडियो में पुलिस के आगे भी हालात को तनावपूर्ण देखा गया। वहीं ABVP की तरफ से इस घटना पर एक पीड़िता छात्रा का वीडियो जारी किया गया है। ABVP का दावा है कि SFI के कार्यकर्ताओं ने धारदार हथियार से ABVP से जुड़े छात्रों पर हमला किया है जिसमें 8 से 10 छात्र घायल हो गए हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी होने की भी जानकारी इसी ट्वीट में दी गई है। SFI कार्यकर्ताओं को इसी ट्वीट में ‘रक्तरंजित इतिहास वाले वाममपंथी गुंडे’ कहा गया है।
आज पुनः वामपंथी गुंडों द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अपना रक्तरंजित इतिहास दोहराया गया।एसएफआई के कार्यकर्ताओं द्वारा एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर तेजधार हथियारों के साथ हमला किया गया जिसमें हमारे 8 से 10 कार्यकर्ता घायल हुए जोकि अस्पताल में भर्ती हैं। pic.twitter.com/eWraoOLadl
इस वीडियो में एक लड़की बता रही है कि पिछले 2 दिनों से वामपंथी छात्र कॉलेज कैम्पस का माहौल खराब करने में लगे हुए थे। वीडियो में आगे बताया गया है कि SFI से जुड़े छात्रों ने ABVP के बी आर आंबेडकर पुण्यतिथि के कार्यक्रम में समापन के दिन घुस कर हंगामा किया। इस वीडियो में छात्रा ने सभी वामपंथियों को समाज और मानवता का विरोधी बताते हुए उनके बहिष्कार की भी अपील की है।
SFI ने ABVP पर लगाया आरोप
वही SFI ने इस पूरे विवाद का आरोप ABVP पर मढ़ने की कोशिश की है। SFI के सचिवालय सदस्य सन्नी सेकटा के मुताबिक, ABVP कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी में उनकी छात्र हित की लड़ाई को कुचलना चाह रहे लड़ाई का माहौल उनकी तरफ से ही बनाया जा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्म है, क्योंकि गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को विधानसभा चुनावों के परिणाम आने वाले हैं और एग्जिट पोल्स में सत्ताधारी भाजपा व विपक्षी कॉन्ग्रेस में काँटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
महाराष्ट्र के पालघर में 5 साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। बच्ची से दुष्कर्म के मामले में 19 साल के शाहनवाज शाह को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक, बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। शाहनवाज दुष्कर्म के बाद फरार होने की फिराक में था।
पुलिस के मुताबिक, मामला रविवार (4 दिसंबर, 2022) का है। दोपहर के वक्त जब बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी तो शाहनवाज ने उसे चॉकलेट का लालच दिया। बच्ची को अपने घर ले जाकर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपित ने बच्ची को धमकाया था कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो वह उसे मार डालेगा। बच्ची जब रोते हुए अपने घर पहुँची तो उसके माता-पिता को दुष्कर्म की जानकारी हुई। बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और बोइसर पुलिस से संपर्क कर आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। बच्ची अस्पताल में भर्ती है।
Maharashtra | A 19-year-old youth, Shahanawaz Shah, arrested by Police for allegedly raping a 5-year-old girl in Palghar. He had lured her with chocolate while she was playing outside her house. The girl is under treatment at a hospital: Palghar Police
बच्ची के घरवालों की शिकायत पर यूपी के रहने वाले शाहनवाज (19 वर्ष) के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की मानें तो आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तर प्रदेश भागने की योजना बना रहा था। भागने से पहले ही उसे धर-दबोचा गया। आरोपित शाहनवाज के पास से रविवार की रात को महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जाने का टिकट भी बरामद हुआ है। घटना के बारे में जानकारी होते ही आक्रोशित विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पुलिस थाने में जमा हो गए। कार्यकर्ताओं ने पुलिस को ज्ञापन देकर आरोपित को कड़ी से कड़ी सजा देने की माँग की है।
महाराष्ट्र से इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आपको बता दें कि 2 दिन पहले ही महाराष्ट्र के कल्याण से भी 9 साल के बच्ची की रेप और हत्या की खबर सामने आई थी। 15 साल के एक आरोपित ने पिता से बदला लेने के लिए पहले उसकी 9 साल की बच्ची के साथ रेप किया और बाद में उसकी हत्या कर दी थी।
उत्तर कोरिया (North korea) से एक बार फिर दिल दहला देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यहाँ के शासक किम जोंग उन (Kim Jong Un) का क्रूर चेहरा एक बार फिर सामने आया है। यहाँ हाई स्कूल के दो छात्रों को इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया क्योंकि इन्होंने दक्षिण कोरियाई नाटक शो ‘के-ड्रामा’ (दक्षिण कोरिया की फ़िल्में-वेब सीरीज) देखा था और इसे वितरित किया था। ‘के-ड्रामा’ देखना और वितरित करना देश में गैरकानूनी है।
रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया में पहली बार इस तरह की सजा दी गई है। हालाँकि, दिसंबर 2020 में उत्तर कोरियाई सरकार द्वारा एक कानून पारित करवाया गया था जिसके तहत के-ड्रामा सहित दक्षिण कोरिया से रिलीज किसी तरह की फिल्म से जुड़ी सामग्री का उपयोग करना एक जघन्य अपराध माना गया था। जिन नाबालिग बच्चों की गोली मारकर हत्या की गई है, उनकी उम्र 16 से 17 साल के करीब होने का अनुमान है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नाबालिग अक्टूबर की शुरुआत में उत्तर कोरिया के रयांगगैंग प्रांत के एक हाई स्कूल में मिले थे। यह क्षेत्र चीन की सीमा से सटा हुआ है। वहाँ उन्होंने कई कोरियाई और अमेरिकी नाटक शो देखे। उत्तर कोरियाई सरकार को जैसे ही इस बात की खबर लगी वैसे ही दोनों नाबालिगों को जनता के सामने लाया गया और फिर सरेआम गोली मार दी गई।
वहीं तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong) अपने अजीबोगरीब और सनक भरे फरमानों के लिए भी अक्सर चर्चा में रहते हैं। अब फरमान बच्चों के नाम को लेकर आया है। इसके तहत बच्चों के नाम के लिए उन कोरियाई शब्द तय किए गए हैं जिनका अर्थ बम, बंदूक, सैटेलाइट वगैरह है। कहा गया है कि बच्चों के नाम नाजुक होने की जगह सख्त होने चाहिए और उससे देशभक्ति की झलक मिलनी चाहिए।
बच्चों के चोंग इल (बंदूक), चुंग सिम (वफादारी), पोक इल (बम) और यूआई सॉन्ग (सैटेलाइट) जैसे नाम रखने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही दक्षिण कोरिया में ए आरई (प्यार करने वाला) और सु एमआई (सुपर ब्यूटी) जैसे प्रचलित नाम जिनसे प्यार, सुंदरता जैसे भावनाओं का प्रकटीकरण होता है उनको बदलने के भी आदेश दिए गए हैं। किम जोंग के मुताबिक ये नाम पश्चिमी संस्कृति से प्रेरित हैं।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में धारा 144 लागू कर दी गई है साथ ही प्रशासन ने अलर्ट भी जारी किया है। ऐसा अखिल भारत हिंदू महासभा की तरफ से मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद के भीतर हनुमान चालीसा पढ़ने के ऐलान के बाद किया गया। बताया जा रहा है कि हिंदूवादी संगठन के 7 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंदू महासभा के ऐलान के बाद देश के कई हिस्सों से कार्यकर्ता मथुरा पहुँचने लगे। कथित शाही ईदगाह मस्जिद पर लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करने आ रहे हिंदू महासभा के कार्यकर्ता सौरभ शर्मा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
Hindu Mahasabha Leader Arrested During Bid To Recite Hanuman Chalisa At Mathura Shahi Masjid Idgahhttps://t.co/sooNth0dnW
उनके अलावा शाही मस्जिद में हनुमान चालीस का पाठ करने जा रहे हिंदूवादी संगठन के 7 कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार कार्यकर्ता श्री कृष्ण जन्मस्थान परिसर के गेट पर पहुँचे थे तभी पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया। पोतरा कुंड के पास दिल्ली से आए तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। सभी से पूछताछ की जा रही है। दिल्ली से आए महासभा के कार्यकर्ता देवदत्त ने जानकारी दी है कि वह अखिल भारत हिंदू महासभा की अध्यक्ष राज श्री चौधरी के कहने पर श्री कृष्ण जन्मस्थान आए थे।
वहीं पुलिस ने मस्जिद के रास्ते पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं। गाड़ियों की सघन चेकिंग की जा रही है। ईदगाह मस्जिद के पास रेल लाइन भी बंद कर दी गई है। स्थानयी एसएसपी ने बताया कि इस तरह का आह्वान करने वाले संगठन और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही धारा 144 लागू की गई है। निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Uttar Pradesh | Police barricading placed at various places in Mathura this morning & vehicle checking being done by them in wake of a call given by Akhil Bharat Hindu Mahasabha to recite Hanuman Chalisa at Shri Krishna Janmabhoomi complex-Shahi Idgah Masjid maidan here today. pic.twitter.com/LvDK1uy8UJ
आपको बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री और ‘अखिल भारत हिंदू महासभा’ की अध्यक्ष राजश्री चौधरी ने 6 दिसंबर को सनातन ‘समर्पण दिवस’ मनाने का ऐलान किया था। दरअसल 6 दिसंबर, 1992 राम मंदिर तोड़कर बनाई गई बाबरी ढाँचे का विध्वंस कर दिया गया था। इस दौरान राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं व कारसेवकों पर उत्तर प्रदेश की उस वक्त की मुलायम सरकार ने गोलियाँ चलवा दी थीं। राजश्री ने कारसेवकों की आत्मा की शांति और श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पुनरुद्धार के अभियान की शुरुआत का भी ऐलान किया था।
इसके लिए कार्यकर्ताओं से मंगलवार (6 दिसंबर, 2022) तक मथुरा पहुँचने का आह्वान किया गया था। साथ ही महासभा की तरफ से श्री कृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भ गृह में हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान भी किया गया था।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में दुनिया का पहला गोल्ड एटीएम लगाया गया है। इस एटीएम से पैसों की जगह सोने के सिक्के निकलते हैं। अब यहाँ के लोगों को सोने के सिक्के खरीदने के लिए ज्वैलर्स की दुकान पर नहीं जाना पड़ेगा। वे इस रियल टाइम Gold ATM से सोने के सिक्के निकाल सकते हैं। इस एटीएम को सोना खरीदने और बेचने का कारोबार करने वाली कंपनी गोल्डसिक्का प्राइवेट लिमिटेड ने लगाया है।
कंपनी ने 5 दिसम्बर 2022 को ट्वीट किया, “हमें यह घोषणा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि हमने गोल्ड एटीएम को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस उपलब्धि के माध्यम से हम भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाने और बंगारू तेलंगाना के मिशन में योगदान देने के लिए अपनी जर्नी शुरू कर रहे हैं।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोल्डसिक्का प्राइवेट लिमिटेड (Goldsikka Pvt Ltd) ने 3 दिसंबर 2022 को हैदराबाद स्थित स्टार्टअप कंपनी मैसर्स ओपनक्यूब टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के समर्थन से अपना पहला गोल्ड एटीएम लॉन्च किया। यह भारत और दुनिया का पहला रियल टाइम गोल्ड एटीएम है। यह एटीएम गोल्डसिक्का के हेड ऑफिस अशोक रघुपति चेम्बर्स, प्रकाश नगर मेट्रो स्टेशन बेगमपेट में लगाया गया है। इस एटीएम से 0.5 ग्राम से लेकर 100 ग्राम तक के सिक्के खरीदे जा सकते हैं। एटीएम में 0.5 ग्राम, 1 ग्राम, 2 ग्राम, 5 ग्राम, 10 ग्राम, 20 ग्राम, 50 ग्राम और 100 ग्राम समेत आठ विकल्प मौजूद हैं।
गोल्ड एटीएम की खासियत
फर्म के मुताबिक, इस गोल्ड एटीएम का उपयोग करना बेहद आसान है। इस ATM की सेवा खरीददारों के लिए 24×7 उपलब्ध रहेगी और वे अपने बजट के भीतर सोना खरीद सकते हैं। इसका एक और बड़ा फायदा यह है कि सर्राफा बाजार में सोने की कीमत में गिरावट होते ही लोग गोल्ड एटीएम से क्रेडिट या डेबिट कार्ड का उपयोग करके तुरंत सोने के सिक्के खरीद सकते हैं।
कंपनी देश भर में और भी गोल्ड एटीएम खोलने की योजना बना रही है। गोल्डसिक्का के अनुसार, वे हैदराबाद में एयरपोर्ट, ओल्ड सिटी, अमीरपेट, कुकटपल्ली पेद्दापल्ली, वारंगल और करीमनगर में अगली 3-4 मशीनों की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, कंपनी की योजना अगले 2 साल में पूरे भारत में करीब 3,000 गोल्ड एटीएम खोलने की है।
गोल्ड एटीएम का उपयोग
गोल्ड एटीएम का इस्तेमाल अन्य एटीएम की तरह की करना है। ग्राहक एटीएम से गोल्ड खरीदने के लिए अपने डेबिट, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे पहले अपना डेबिट/क्रेडिट कार्ड गोल्ड एटीएम में डालें। फिर अपने कार्ड का पिन नंबर दर्ज करें। आपको कितने मूल्य के सोने के सिक्के चाहिए वह दर्ज करें। इसके बाद मशीन से सोने के सिक्के निकलने लगेंगे।
सिक्योरिटी के लिए अलार्म सिस्टम, CCTV कैमरे
सेफ्टी के लिए मशीन में इनबिल्ट कैमरा, अलार्म सिस्टम, एक्सटर्निल CCTV कैमरा लगाया हुआ है। इसके अलावा लोगों की सुविधा के लिए ग्राहक सहायता टीम भी है। बताया जा रहा है कि अगर राशि डेबिट होने के बाद भी सोना नहीं निकलता है, तो ट्रांजैक्शन फेल होने के 24 घंटे के भीतर आपको आपका पैसा वापस मिल जाएगा।