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शकील का ‘कर्ज’ उतारने में मारी गई नीलम यादव, रास्ते में घेरकर काट डाले थे हाथ-कान-स्तन: बिहार पुलिस की थ्योरी पर BJP ने CM नीतीश को घेरा

बिहार के भागलपुर में 3 दिसंबर, 2022 को नीलम यादव नाम की महिला की हत्या करने वाले मुख्य आरोपित शकील मियाँ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शकील को लाक्षीपुर के मोरंग बगीचे से पकड़ा गया है। शकील के साथ इस घटना में 4 अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया है जिसमें उसका भाई जदरूद्दीन भी शामिल है।। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ चल रही है। यह गिरफ्तारी सोमवार (5 दिसम्बर, 2022) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भागलपुर पुलिस अधीक्षक ने शकील की गिरफ्तारी के लिए 5 थानों की फ़ोर्स को लगा रखा था। माना जा रहा है कि जल्द ही घटना के असली कारणों का खुलासा किया जा सकता है।

पुलिस पर शकील को बचाने का आरोप

इस मामले में भाजपा ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा ने पुलिस पर आरोपितों को बचाने का आरोप लग रहा है। भाजपा नेता निखिल आनंद ने मंगलवार (6 दिसम्बर, 2022) को वीडियो जारी करते हुए बताया कि पुलिस ने अभी तक आरोपितों की पहचान और तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की हैं। निखिल का ये भी आरोप है कि केस में नामजद आरोपितों का पुराना आपराधिक इतिहास भी है, जिन्हें पिछले अपराधों में भी पुलिस ने संरक्षण दिया है।

निखिल आनंद भाजपा के OBC मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि भागलपुर में एक OBC समुदाय की यादव जाति की महिला की मुस्लिम व्यक्ति द्वारा हत्या के मामले में स्थानीय प्रशासन भ्रम फैला रहा है। जिले के पुलिस अधीक्षक पर आरोप लगाते हुए निखिल ने कहा कि वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दबाव में केवल अनुमान से काम कर रहे हैं। आरोपित की हरकत को तालिबानी सोच वाला बताते हुए निखिल आनंद ने इस मामले को पूरी तरह से सांप्रदायिक बताया है।

अपने वीडियो में निखिल आनंद ने आगे बताया कि भागलपुर के SP इस हत्याकांड में पीड़ित द्वारा आरोपित से कर्ज लेने की कहानी गढ़ रहे हैं। वीडियो में आगे बताया गया है कि न सिर्फ मृतका के परिजनों बल्कि आस-पड़ोस के लोगों ने भी पुलिस के इस आधारहीन दावे को नकार दिया है। घटनास्थल के आसपास की कुछ अन्य महिलाओं के बयानों का हवाला देते हुए निखिल आनंद ने बताया कि आरोपित एक आदतन अपराधी है। उन्होंने दावा किया कि शकील का हिन्दू महिलाओं को तंग करने का पुराना इतिहास रहा है।

Exit Poll में गुजरात में AAP के CM कैंडिडेट की भी हार, जाडेजा की पत्नी की जीत भी नहीं पक्की: जानिए क्या है हार्दिक-अल्पेश-जिग्नेश का हाल

गुजरात विधानसभा के कुल 182 सीटों के लिए वोट डाले जा चुके हैं। दो चरणों में संपन्न चुनाव के नतीजे गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को आने वाले हैं। इससे पहले एग्जिट पोल (Exit Polls) के नतीजे आ गए हैं। इसके अनुसार गुजरात में एक बार फिर बीजेपी स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर रही है।

पिछले विधानसभा (2017) चुनाव के मुकाबले इस बार भाजपा को 20-30 सीट ज्यादा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। आजतक-एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट पोल में बीजेपी को गुजरात में 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी 05-10 और कॉन्ग्रेस 30-50 सीट हासिल करती नजर आ रही है।

भाजपा को एग्जिट पोल में स्पष्ट बहुमत (फोटो साभार आजतक)

गुजरात विधानसभा चुनाव (2022) में कुछ ऐसे चर्चित सीट हैं, जिनपर सबकी नजर रहने वाली है।

रिवाबा जडेजा

जी न्यूज़ के एग्जिट पोल के अनुमान के अनुसार पहली बार चुनाव लड़ रही क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जाडेजा को अपना सीट जीतने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। रिवाबा भाजपा की टिकट पर जामनगर उत्तर से चुनाव लड़ रही हैं। कॉन्ग्रेस ने यहाँ से बिपेंद्र सिंह जाडेजा को मौका दिया है, जबकि आप से करसनभाई करमूर मैदान में हैं। रिवाबा को कॉन्ग्रेस से अच्छी टक्कर मिल रही है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल

घाटलोडिया से चुनाव लड़ रहे सीएम भूपेंद्र पटेल आसानी से चुनाव जीत रहे हैं। घाटलोडिया विधानसभा सीट भाजपा की सुरक्षित सीट रही है। 2017 में भूपेंद्र पटेल ने कॉन्ग्रेस के शशिकांत भूराभाई को एक लाख 17 हजार मतों से हराया था। इससे पहले (2012) इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल भी जीत हासिल कर चुकी हैं।

इसुदान गढ़वी

अनुमान है कि आम आदमी पार्टी के सीएम उम्मीदवार इसुदान गढ़वी चुनाव हार सकते हैं। इसुदान गढ़वी खंभालिया सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट फिललहाल कॉन्ग्रेस के पास है। इस सीट पर भाजपा ने मुलुभाई हरदासभाई बेरा को कैंडिडेट बनाया है। वहीं कॉन्ग्रेस ने अपने पुराने ही उम्मीदवार पर भरोसा करते हुए विक्रम अर्जनभाई को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में कॉन्ग्रेस ने बीजेपी को इस सीट पर 11 हजार वोटों से पटखनी दे दी थी।

गोपाल इटालिया

आम आदमी पार्टी के विवादित नेता और गुजरात के पार्टी प्रमुख गोपाल इटालिया कतारगाम सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। इटालिया को यहाँ काँटे की टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा उम्मीदवार विनोदभाई अमरशीभाई मोरडिया उन्हें टक्कर दे रहे हैं। कतारगाम सीट अब भी भाजपा के कब्जे में है। 2017 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार विनेद मोरडिया ने ही शानदार जीत हासिल की थी।

हर्ष संघवी

मजूरा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार और गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी मैदान में हैं। यह सीट बीजेपी की पारंपरिक सीट रही है। इसलिए एग्जिट पोल में उन्हें एकतरफा जीत दर्ज करता हुआ दिखाया जा रहा है। कॉन्ग्रेस ने इस सीट से बलवंत शंतलाल जैन को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं आम आदमी पार्टी ने पीवीएस शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में हर्ष संघवी ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की थी।

कांतिलाल अमृतिया

मोरबी सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार कांतिलाल अमृतिया की जीत का अनुमान लगाया जा रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार यहाँ टक्कर देखने को मिल सकती है। यह वही मोरबी है, जहाँ पुल हादसा हुआ था, जिसमें 140 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। मोरबी में पिछले दो चुनावों में भाजपा मामूली अंतर से जीत हासिल करती आ रही है। भाजपा ने यहाँ से मौजूदा विधायक बृजेश मेरजा का पत्ता काट कर अमृतिया को उम्मीदवार बनाया। हादसे के वक्त अमृतिया का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो नदी में कूदकर लोगों की जान बचाते देखे गए।

जिग्नेश मेवाणी

जिग्नेश मेवाणी वडगाम सीट से दोबारा चुनावी मैदान में हैं। इस साल इस सीट पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी जिग्नेश मेवाणी को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। वडगाम कॉन्ग्रेस की सुरक्षित सीट मानी जाती रही है। लेकिन इस साल भाजपा के मनीभाई वाघेला उन्हें कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं।

हार्दिक पटेल

कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हार्दिक पटेल को पार्टी ने वीरमगाम सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस सीट से हार्दिक पटेल की लड़ाई आसान नहीं होने वाली है। ज़ी न्यूज एग्जिट पोल के मुताबिक उन्हें हार का सामना भी करना पड़ सकता है। इस सीट से कॉन्ग्रेस ने अपने पुराने नेता लाखाभाई भारवाड़ को टिकट दिया है। वीरमगाम सीट से आम आदमी पार्टी ने अमर सिंह ठाकोर को चुनाव में उतारा है।

अल्पेश ठाकोर

गांधीनगर दक्षिण से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अल्पेश ठाकोर की भी जीत पक्की मानी जा रही है। इस सीट पर कॉन्ग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हिमांशु पटेल 2 नंबर पर रह सकते हैं।

हालाँकि यह सिर्फ अनुमान है, 8 दिसंबर को साफ हो जाएगा कि किस उम्मीदवार के सर पर जीत का सहरा सजेगा और गुजरात में किसकी सरकार बनेगी।

उत्तराखंड में UCC पर मिले 2.5 लाख सुझाव, समिति का कार्यकाल 6 महीने और बढ़ा: लिव इन, तलाक, बच्चों की संख्या… सब पर हो रही बात

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर बीजेपी सरकार ने विशेषज्ञों की समिति का गठन किया था। इस समिति का कार्यकाल 6 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार UCC पर समिति को 2.5 लाख से अधिक सुझाव मिले हैं। इनमें से कुछ बेहद महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।

रिटायर्ड न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति का कार्यकाल अब 27 मई 2023 तक रहेगा। इसी साल मई में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस समिति का गठन किया था। उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान सत्ता में वापसी पर यूसीसी का वादा किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार समिति को शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप, बच्चों की संख्या वगैरह को लेकर भी लोगों से सुझाव मिले हैं।

5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की प्रदेश भर में अब तक 30 बैठकें हो चुकी है। इसका मकसद लोगों का सुझाव लेना था। इसके लिए बकायदा एक वेबसाइट भी बनाया गया है। हालाँकि मुस्लिमों में अभी भी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर संशय बना हुआ है। उनका मानना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का लक्ष्य उनको निशाना बनाना है। समिति उनकी आशंकाओं को दूर करने की भी लगातार कोशिश कर रही है।

समिति ने अलग-अलग समुदाय के लोगों और नेताओं के साथ बैठक करके उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया है। समिति ने हाल ही में मुस्लिमों के साथ पिरान कलियार में बैठक की थी। वहीं सिख समुदाय के लोगों के साथ उधम सिंह नगर के नानकमाता में, जबकि ईसाई समुदाय के साथ नैनीताल में और अखाड़ा परिषद के साथ हरिद्वार में अलग-अलग बैठक आयोजित की गई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आम लोगों की सलाह पर समिति ने अपनी रिपोर्ट में भी कुछ सुझाव दिए हैं। ये सुझाव लैंगिक समानता, महिलाओं की विवाह की उम्र, पैतृक संपत्तियों में बेटियों की हिस्सेदारी, LGBTQ जोड़ों के कानूनी अधिकार और लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े हुए हैं।

एशिया में सबसे ज्यादा अमीर ही नहीं, महाद्वीप के सबसे बड़े दानवीर भी हैं गौतम अडानी: Forbes ने लगाई मुहर, 60वें जन्मदिन पर दान कर दिए थे ₹60000 करोड़

अरबपति गौतम अडानी एशिया के सबसे बड़े दानवीर हैं। मंगलवार (6 दिसंबर, 2022) को फोर्ब्स एशिया की हीरोज ऑफ फिलानथ्रॉपी (Forbes Asia’s Heroes of Philanthropy) की लिस्ट जारी की गई। इस लिस्ट के 16वें संस्करण में भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) के अलावा शिव नाडर (Shiv Nadar) और अशोक सूता (Ashok Soota) का नाम भी शामिल है।

फोर्ब्स की सूची के अनुसार, ये तीनों एशिया के सबसे बड़े दानवीर हैं। वहीं, इस लिस्ट में मलेशियाई-इंडियन बिजनेसमैन ब्रह्मल वासुदेवन और उनकी पत्नी शांति कंडिया को भी जगह दी गई है। फोर्ब्स की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि बिना किसी रैंकिंग वाली इस सूची में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अग्रणी परोपकारी कार्य करने वाले लोगों को शामिल किया गया है।

मालूम हो कि अडानी ने इस साल जून में अपने 60वें जन्मदिन के मौके पर 60000 करोड़ रुपए दान देने का संकल्प लिया था। यह रकम शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर खर्च की जाएगी। जन्मदिन से एक दिन पहले (23 जून, 2022) अडानी ने एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी थी। इस ट्वीट में वे स्कूली बच्चों के साथ नजर आए थे। उन्होंने लिखा था, “मेरे​ पिता की 100वीं जयंती और मेरे 60वें जन्मदिन पर अडानी परिवार ने देश भर में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कौशल विकास के लिए 60 हजार करोड़ रुपए दान करने का संकल्प लिया है।”

इसी कारण उन्हें एशिया के सबसे बड़े दानवीर लोगों की सूची में शामिल किया गया है। अडानी फाउंडेशन का गठन 1996 में किया गया था। हर साल यह फाउंडेशन भारत में 37 लाख लोगों की मदद करता है। अरबपति शिव नाडर अपनी मेहनत के दम पर देश के बड़े दानवीर लोगों में गिने जाते हैं। उन्होंने शिव नाडर फाउंडेशन के माध्यम से एक दशक में एक अरब डॉलर परमार्थ कार्यों में लगाए हैं। इस साल उन्होंने फाउंडेशन को 11,600 करोड़ रुपए का दान दिया है। इस फाउंडेशन की स्थापना 1994 में हुई थी।

वहीं, तकनीकी क्षेत्र के दिग्गज अशोक सूता ने न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के अध्ययन के लिए अप्रैल 2021 में स्थापित मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट को 600 करोड़ रुपए संकल्प किया था। उन्होंने 200 करोड़ रुपए खर्च करके SKAN- एजिंग और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के लिए वैज्ञानिक शोध की शुरुआत की, जिसे उन्होंने तीन गुना कर दिया है। फोर्ब्स एशिया ने सूता के हवाले से कहा, “भारत में केवल दो तरह के लोग (मेडिकल) शोध कर रहे हैं। एक वे लोग हैं जो दवा की खोज कर रहे हैं और दूसरे वे लोग हैं, जो राष्ट्रीय व राज्य स्तर के संस्थानों में पैसे के लिए शोध कर रहे हैं।”

कुआलालंपुर स्थित निजी इक्विटी फर्म क्रिएटर के सीईओ एवं संस्थापक मलेशियाई-इंडियन ब्रह्मल वासुदेवन और उनकी वकील पत्नी शांति कंडिया क्रिएटर फाउंडेशन के माध्यम से मलेशिया और भारतीय लोगों की मदद करते हैं। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसे उन्होंने 2018 में स्थापित किया था। उन्होंने इस साल मई में पेराक में यूनिवर्सिटी टुंकू अब्दुल रहमान (यूटीएआर) केम्पर परिसर में एक शिक्षण अस्पताल के निर्माण के लिए 50 मिलियन मलेशियाई रिंगिट यानी 11 मिलियन डॉलर (90,86,05,500 रुपए) दिए थे।

वासुदेवन ने फोर्ब्स एशिया को बताया, “हमें खुशी है कि और लोग भी हमारे साथ इस काम में आगे आ रहे हैं। अब इस परियोजना के लिए पूरी तरह से वित्तपोषण मिल गया है।”

मोदी-योगी को माँ-बहन की गालियाँ, हिन्दू समाज पर अभद्र टिप्पणी: ग्राम प्रधान सत्तार गिरफ्तार, डर से हिन्दुओं ने बंद कर लिए थे घरों-दुकानों के दरवाजे

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गंदी-गंदी गालियाँ देने के आरोप में सत्तार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपित खानपुर सादात नाम के गाँव का प्रधान है। सत्तार पर पूरे हिन्दू समाज को भी अपमानित करने का आरोप है। इस घटना का एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है। मामला रविवार (4 दिसंबर, 2022) का है।

मामला थाना कोतवाली लहरपुर क्षेत्र का है। इस मामले की पुलिस में शिकायत अंकित नाम के युवक ने की है। अंकित का कहना है कि घटना के दिन वो अपने दोस्त अमित के साथ किसी काम से गाँव खानपुर सादात गए थे। यहाँ उन्होंने पाया कि उस गाँव का प्रधान सत्तार PM मोदी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को माँ-बहन सहित गंदी-गंदी गालियाँ दे रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी बीच सत्तार ने पूरे हिन्दू समाज पर भी अभद्र टिप्पणी की।

अपनी शिकायत में अंकित ने आगे बताया है कि जब उन्होंने सत्तार को रोकने की कोशिश की तब उन्हें भी गालियाँ दी गईं। सत्तार ने अंकित और अमित वो जान से मार देने की भी धमकी दी। शिकायत में बताया गया है कि सत्तार की हरकत से वहाँ मौजूद हिन्दुओं में डर बैठ गया और उन्होंने अपने घरों और दुकानों के दरवाजे बंद कर लिए। बताया यह भी गया कि प्रधान द्वारा दी गई गालियों को सुन कर स्थानीय हिन्दू समाज के लोगों में गुस्सा भी है। अंकित ने पुलिस से आरोपित प्रधान पर केस दर्ज करने की माँग भी की है।

सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी काफी वायरल हो रहा है जिसमें किसी को मोदी और योगी पर अभद्र टिप्पणी करते सुना जा सकता है। पीड़ित अंकित के मुताबिक, ऑडियो में आवाज ग्राम प्रधान सत्तार की है। प्रधान सत्तार की बताई जा रही इस ऑडियो में मोदी और योगी को माँ और बहन की गालियों के साथ ‘अपनी-अपनी बेटी बेच देते तो वोट मिल जाते’ जैसे शब्द कहते हुए सुने जा सकते हैं। इसी ऑडियो में ‘परचम लहराएगा’ और ‘आग लगा’ देने जैसी आवाजें भी सुनाई दे रही हैं।

अंकित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित ग्राम प्रधान सत्तार पर IPC की धारा 504, 506, 295- A और दण्डविधि संशोधन 2013 की धारा 7 के तहत केस दर्ज कर लिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने छापेमारी कर के सत्तार को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई के लिए न्यायालय भेज दिया है।

क्या Google को खा जाएँगे एलन मस्क: आम आदमी की जुबान भी पकड़ लेता है ChatGPT, जानिए इसके बारे में सबकुछ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च ग्रुप OpenAI ने चैटबॉट ‘चैटजीपीटी’ (ChatGPT) लॉन्च किया है। यह चैट बॉट संवाद आधारित है जो मानवीय भाषा और व्यवहार को समझकर जवाब देने में सक्षम है। इसकी विशेष क्षमताओं के कारण यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले समय में यह गूगल (Google) को कड़ी टक्कर देते हुए उसकी जगह भी ले सकता है।

ChatGPT क्या है

आसान शब्दों में चैट जीपीटी को समझें तो यह एक ऐसा चैट बॉट है, जिससे यूजर्स सवाल पूछ सकते हैं। हालाँकि, अब तक सामने आए कई अन्य चैट बॉट्स भी जवाब देने में सक्षम हैं। लेकिन, वे सिर्फ कुछ खास सवालों (जिस विषय के लिए उसे बनाया गया हो) के जवाब ही दे सकते हैं। वहीं, ChatGPT इन सब से काफी अलग है, जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करके सभी तरह के सवालों का जवाब देने में सक्षम है। इसमें टेक्निकल और नॉन टेक्निकल दोनों ही तरह के सवालों के जवाब शामिल हैं।

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की कंपनी Open AI द्वारा बनाया गया ChatGPT 3.5 लैंग्वेज मॉडल पर आधारित है। इसे कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह लिखने-पढ़ने से लेकर अन्य सभी तरह के कार्यों में यूजर्स का सहयोग करेगा। साथ ही, यह अनावश्यक या काल्पनिक सवालों को भी समझता है। यानी कि चैट जीपीटी की सेल्फ सेंसरिंग भी बेहतरीन है।

कैसे काम करता है ChatGPT

ChatGPT को AI और मशीन लर्निंग द्वारा तैयार किए गए, सिस्टम को संवादात्मक इंटरफ़ेस के माध्यम से जानकारी प्रदान करने और सवालों के जवाब देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सामान्य चैट बॉट की तरह ही है, जिन्हें कुछ विशिष्ट कीवर्ड और वाक्यों को समझने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। समय के साथ-साथ बॉट अधिक से अधिक प्रश्नों को समझने के लिए स्वयं को ट्रेंड कर लेते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो कोई भी बातचीत करने वाला AI चैटबॉट अनुभव से सीखता और ट्रेंड होता है।

इसी प्रकार, ChatGPT को भी कुछ शब्द नहीं, बल्कि कई लाख शब्दों और वाक्यों के लिए AI के माध्यम से ट्रेंड किया गया है। इसी ट्रेनिंग के द्वारा अब यह सभी सवालों के जवाब देने में सक्षम है।

ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI का कहना है इसे इसलिए बनाया गया था ताकि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग में आसानी हो। OpenAI ने कहा है कि चैटजीपीटी सवालों के जवाब देता है, अपनी गलतियों को स्वीकार करता है और अनुचित अनुरोधों या सवालों को नकार देता है। यानी, यदि ChatGPT को लगता है कि सवाल गलत है या काल्पनिक है तो वह इस बारे में भी यूजर को बता देता है।

फिलहाल OpenAI ने ChatGPT को जाँच और बीटा टेस्टिंग के लिए ही लॉन्च किया है। लेकिन अगले साल एपीआई एक्सेस की भी उम्मीद की जा रही है। एपीआई एक्सेस मिलने के बाद सॉफ्टवेयर डेवलपर्स इस चैट बॉट को अपने सॉफ्टवेयर में इनबिल्ड करने में सक्षम होंगे।

ChatGPT की विशेषताएँ

ChatGPT की ऐसी कई विशेषताएँ जिनके कारण यह कहा जा रहा है कि यह बॉट गूगल को कड़ी टक्कर देने में सक्षम है। उदाहरण के लिए देखें तो, यह सवालों के जवाब देने के अलावा गणित के समीकरणों को भी हल कर सकता है। यही नहीं, इसे टॉपिक बताने पर उसके बारे में बड़े-बड़े लेख या पूरी पुस्तक भी लिखने के साथ ही फिल्मों की कहानियाँ भी लिखने में सक्षम है।

विभिन्न प्रकार की कम्यूटर लैंग्वेज की समझ भी इस बॉट में विकसित की गई है, जिससे यह कोडिंग के दौरान डेवलपर्स को यह बता सकता है कि क्या-क्या गलतियाँ हो रहीं हैं। कम्प्यूटर की लैंग्वेज के बाद मानवीय भाषाओं में भी इसकी अच्छी पकड़ है यही कारण है कि यह एक भाषा को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट कर सकता है।

कैसे करें ChatGPT का उपयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित चैट बॉट चैटजीपीटी का उपयोग करना बेहद आसान है। इसके लिए, https://chat.openai.com पर जाकर लॉग इन/साइन अप करने के बाद दिखाई देने वाली चैट विंडो से, यूजर ChatGPT का उपयोग कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर ऐसे कई कंटेंट हैं जिनमें ChatGTP से बात करने के बाद उसके द्वारा दिए गए जवाबों के बारे में बताया गया है। लेखक जेफ़ यांग ने ट्वीट कर बताया है कि उन्होंने चैटजीपीटी को बिल्ली की शैली में जीरो पॉइंट ऊर्जा के बारे में विस्तार से बताने के लिए कहा था।


इस पर, ChatGTP ने जवाब दिया, “म्याऊँ, म्याऊँ, म्याऊँ, म्याऊँ! जीरो पॉइंट ऊर्जा, ऊर्जा की उस मात्रा की तरह है जो हमेशा मौजूद रहती है, यहाँ तक ​​कि तब भी जब वस्तु स्थिर या शांत अवस्था में हो।” इसका मतलब यह था कि ChatGTP ने बेहतरीन अंदाज में जीरो पॉइंट एनर्जी को समझा दिया।

ChatGPT कितना लाभकारी

यूँ तो चैटजीपीटी का उपयोग कर बहुत सारी ऐसी जानकारियाँ हासिल की जा सकतीं हैं। लेकिन, सबसे बड़ी बात यह है कि इसे बनाने वाली कंपनी OpenAI का कहना है कि ChatGPT कभी-कभी गलत जानकारी भी दे सकता है। साथ ही, इसका नॉलेज साल 2021 से पहले हुई वैश्विक घटनाओं तक ही सीमित है। इसके अलावा, आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि क्या यह Google (गूगल) की जगह ले सकता है? तो इसका उत्तर हाँ और नहीं दोनों हो सकते हैं।

दरअसल, Google एक सर्च इंजन है जिससे करेंट न्यूज से लेकर फोटोज, वीडियोज, सोशल मीडिया कंटेंट इत्यादि सर्च किया जा सकता है। वहीं, ChatGPT में फिलहाल ऐसा संभव नहीं है। लेकिन, यह गूगल से बेहतर तरीके से काम करने में सक्षम है और चीजों को अच्छे ढंग से समझकर उसके बारे में विस्तार से बताता भी है, जबकि गूगल में ऐसा नहीं होता है। इसलिए, कुछ मामलों में यह Google से बेहतर भी साबित हो सकता है।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ में स्वरा भास्कर को पैसे के बदले मिला ‘अली का टिश्यू पेपर’, कहा- झुकती नहीं, इसलिए नहीं मिलता काम: राहुल गाँधी का भी असर माना

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) हाल ही में मध्य प्रदेश के उज्जैन में कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुईं। सोशल मीडिया पर उनकी राहुल के साथ कई तस्वीरें सामने आई हैं। स्वरा भास्कर ने ‘टाइम्स आफ इंडिया’ से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शामिल होने और कथित रूप से ‘बोलने की कीमत चुकाने’ समेत कई मुद्दों पर बातचीत की।

‘भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra)’ में शामिल होने के सवाल पर अभिनेत्री ने कहा, “इस यात्रा का जो संदेश है, उससे मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हुई। इसमें कुछ भी गुप्त नहीं है।” वह यह भी कहती हैं कि पिछले 8 वर्षों में सार्वजनिक संस्कृति और राजनीतिक संस्कृति बिगड़ी है। उन्होंने दावा किया कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ नफरत का विरोध करने का एक क्रांतिकारी तरीका है और समाज में जिस तरह से नफरत फैल रही है, उससे वह बहुत चिंतित हैं।

स्वरा भास्कर का ये भी आरोप है कि इस दौरान मेनस्ट्रीम मीडिया ने भी अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई है। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से राहुल गाँधी से काफी प्रभावित हैं।

राहुल गाँधी की प्रशंसा करते हुए वह कहती हैं कि कौन कहता है कि वह एक अनिच्छुक नेता हैं? बकौल स्वरा, वह 3600 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चल रहे हैं और आम लोगों से मिल रहे हैं, जो उन्हें अपनी तरह-तरह की समस्याएँ बता रहे हैं। स्वरा भास्कर ने कहा, “वह मुझे बिल्कुल भी अनिच्छुक नेता नहीं लगते। वह मुझे ऐसे नेता लगते हैं, जिसकी भारत को आज सबसे अधिक आवश्यकता है। स्वरा ने कहा, “हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं, जहाँ जो लोग झुकते नहीं हैं, उन्हें हर तरह से बदनाम किया जाता हैं। यह मेरे साथ पिछले 8 साल से हो रहा है। सत्ता पर सवाल उठाने वालों को हमेशा बदनाम करने की कोशिश होती रहेगी।”

क्या आपने कभी राजनीति में शामिल होने के बारे में सोचा है? इसके जवाब में स्वरा कहती हैं, “नहीं। लेकिन हर कोई सोचता है कि मैं राजनीति में शामिल होना चाहती हूँ। मुंबई में कई निर्माता हमेशा कहते हैं कि उसे कास्ट मत करो, वह वैसे भी राजनीति में शामिल होने जा रही है। लेकिन मुझे नहीं पता कि आप राजनीति से क्या मतलब रखते हैं। अगर आपका मतलब चुनावी राजनीति से है, तो फिलहाल मेरी कोई योजना नहीं है।”

भाजपा के मुताबिक, कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के साथ चलने के लिए बॉलीवुड हस्तियों को पैसे दे रही है। बीजेपी ने इसके लिए ‘पेड पीआर’ शब्द का इस्तेमाल किया है। क्या आपको पैसे मिले, या आपने पैसे दिए? इस पर वह कहती हैं, “नहीं। मैं पैसे क्यों दूँगी? मेरा मतलब है, मैं किसी को तब तक पैसे नहीं देती, जब तक कोई मेरे बाल नहीं बनाता और मेकअप नहीं करता।”

इसके बाद वह एक किस्सा बताती हैं कि एक बार वो एक कॉफी शॉप में बैठी थी, तभी एक लड़का आया और उसने उन्हें एक टिश्यू पेपर थमाते हुए कहा, “मेरे जाने के बाद आप इसे पढ़ना।” उसने इसमें लिखा था, “हाय, स्वरा, मेरा नाम अली है। मेरी इच्छा बस आपको धन्यवाद कहने की है। क्योंकि भारत में रहने वाले एक मुस्लिम के रूप में, आपको पता नहीं है कि आप जैसे लोगों से हमें कितनी ताकत और एकजुटता की भावना मिलती है।” स्वरा के शब्दों में, “मुझे लगता है कि यह मेरा भुगतान है।”

‘300 साल भी गुजर जाएँ, लेकिन मस्जिद वहीं तामीर करेंगे’: इस्लामवादियों ने विध्वंस के 30 साल पूरे होने पर चलाया ‘बाबरी ज़िंदा है’ ट्रेंड, नेहरू को भी पड़ रही ‘गाली’

बाबरी ढाँचे के विध्वंस (Babri Demolition) को मंगलवार (6 दिसंबर, 2022) को 30 वर्ष पूरे हो गए। कई मुस्लिम ट्विटर यूजर्स सोशल मीडिया साइट पर ‘बाबरी ज़िंदा है’, ‘6 दिसंबर’, ‘बाबरी मस्जिद’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करा रहे हैं, ताकि हिंदू समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणियाँ पोस्ट की जा सकें। 6 दिसंबर, 1992 को सैकड़ों कारसेवकों ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर विवादित ढाँचे को गिरा दिया था।

बसेरी फैजल नाम के एक ट्विटर यूजर ने उस दिन को ‘ब्लैक डे’ करार दिया और कहा कि ‘बाबरी मस्जिद’ को वहाँ मंदिर बनाने के लिए ढहा दिया गया था। उसने कहा, “6 दिसंबर को भारत में उस जगह को बाबरी मस्जिद के रूप में याद किया जा रहा है। इसकी हमेशा बहुत गहरी छाप रहेगी और इसे इतनी आसानी से नहीं मिटाया जा सकता है।”

मोहम्मद नईम नाम के एक अन्य व्यक्ति ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मुस्लिम कभी जमीन के लिए नहीं लड़ा, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ा। इसमें वो कहते दिख रहे हैं, “हमारा जो हक है वह हमें दो। अलग जमीन देकर हमारी तौहीन की गई।” वीडियो में ओवैसी को भीड़ को हिंदुओं के खिलाफ भड़काते हुए भी देखा जा सकता है। नईम ने वीडियो को कैप्शन में लिखा, “बाबरी मस्जिद हम आपको कभी नहीं भूल सकते! इंशाअल्लाह, 6 दिसंबर 1992 एक काला दिन था।”

AIMIM नेता अख्तरुल इमान ने 1992 में हुई इस घटना की कुछ तस्वीरें साझा कीं और कहा कि कथित तौर पर हिंदुओं द्वारा दिए गए घाव अभी भी ताजा है। उन्होंने कहा, “मस्जिद में मूर्ति रखवाने वाला नेहरू था, बाबरी का ताला खुलवाने वाला राजीव गाँधी था, बाबरी शहीद कराने वाला नरसिम्हा राव था! बाबरी मस्जिद ज़िंदा है और क़यामत तक हमारे दिलों में ज़िंदा रहेगा।”

इस बीच, कई और मुस्लिम यूजर्स ने बाबरी के विवादित ढाँचे की तस्वीर शेयर की और धमकाया कि ‘गिरा हुआ ढाँचा एक दिन उठ खड़ा होगा।’ कई लोगों ने हिंदू समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणियाँ भी पोस्ट कीं और कहा कि ‘मस्जिद’ को अवैध रूप से गिराया गया था।

एक मुस्लिम ट्विटर यूजर इलियास ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों ने अवैध रूप से विवादित ढाँचे को ध्वस्त किया था। उसने तत्कालीन भाजपा सदस्यों को ‘आतंकवादी’ भी कहा। उसने ट्वीट कर कहा, “6 दिसंबर 1992। 30 साल पहले, आरएसएस और भाजपा के आतंकवादियों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद पर हमला किया और इसे अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया। दोषियों को कभी दंडित नहीं किया गया, बल्कि उन्हें भारतीय समाज के बहुमत द्वारा महिमामंडित किया गया था।”

खुद को ‘एंटी इस्लामोफोबिया सोशल मीडिया एक्टिविस्ट’ बताने वाले मोहम्मद साकिब अनवर ने ट्वीट किया, “30 साल गुज़र गए हैं और 300 साल भी गुज़र सकते है लेकिन बाबरी मस्जिद इंशाअल्लाह उसी जगह तामीर की जाएगी, गुरबा के हाथों ही सही।”

मोहम्मद सादाब शेख नाम के एक व्यक्ति ने भी ट्वीट किया और हिंदू कारसेवकों के खिलाफ घृणित टिप्पणियाँ पोस्ट कीं। उसने कहा, “बाबरी मस्जिद सिर्फ एक मस्जिद नहीं थी, उस पर इतिहास खुदा हुआ था। और 6 दिसंबर, 1992 को हिंदू कारसेवकों द्वारा इसके विध्वंस ने एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में भारत के भविष्य के बारे में एक सवाल खड़ा कर दिया। बाबरी मस्जिद विध्वंस के 30 साल। हम कभी नहीं भूलेंगे, कभी माफ नहीं करेंगे।”

बाबरी ढाँचा इस्लामी आक्रांताओं केअत्याचार का प्रतीक था। यह अत्याचार और बर्बरता का प्रतीक था। 6 दिसंबर 1992 को, अयोध्या में विवादित ढांचे को विभिन्न हिंदू कार्यकर्ताओं ने ढहा दिया था। इस्लामी समुदाय इस दिन को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाते हैं, जबकि हिंदू पक्ष इसे ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाते है।

तेलंगाना से भाजपा नेता टी राजा सिंह ने उन कारसेवकों को सलाम किया, जिनकी बलिदान की नींव पर अयोध्या में ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर’ पूरी भव्यता के साथ आकार ले रहा है। उन्होंने ट्वीट किया, “6 दिसम्बर 1992 शौर्य दिवस पर प्रथम शहीद राम कोठारी – शरद कोठारी एवं कारसेवा में अपना बलिदान देने वाले कोटि-कोटि जनों को श्रद्धांजलि! उन सभी कारसेवकों को कोटिशः नमन, जिनकी बलिदानी नींव पर अयोध्या में ‘श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर’ सम्पूर्ण भव्यता के साथ आकार ले रहा है। जय श्री राम।”

हिंदू कार्यकर्ताओं में से एक समित ठक्कर ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “कोई पछतावा नहीं, कोई पश्चाताप नहीं, कोई दुख नहीं, कोई शोक नहीं।”

9 नवंबर, 2019 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राम लला विराजमान के पक्ष को सही माना और अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित भूमि हिंदुओं को सौंप दी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक ट्रस्ट बनाने को कहा था जो भव्य राम मंदिर के निर्माण का काम संभाले। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन फरवरी 2020 में किया गया था। 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई अन्य नेताओं और संतों की उपस्थिति में मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए राम जन्मभूमि में भूमिपूजन किया गया था। मंदिर का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है।

अलीगढ़ की जिस लड़की की ‘हत्या’ में जेल में बंद है एक विधवा का बेटा विष्णु, वह 7 साल बाद आगरा में ‘जिंदा’ मिली: पति और 2 बच्चे भी साथ

साल 2015। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की एक नाबालिग लड़की मंदिर गई। गायब हो गई। फिर एक लाश मिली जो इसी लड़की की बताई गई। अपहरण कर हत्या का आरोप एक विधवा के बेटे विष्णु गौतम पर लगा। वह जेल में बंद है। साल 2022 में अब वही लड़की जिंदा मिली है। शादीशुदा है। दो बच्चे भी हैं। आगरा में रहती है।

लड़की के जीवित होने की खबर सामने आने के बाद विष्णु की रिहाई की आवाज उसके परिजनों ने उठाई है। लड़की को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है। पुलिस ने जाँच के बाद सामने आए तथ्यों पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

इस मामले की शुरुआत 17 फरवरी 2015 को हुई थी। 17 वर्षीया एक नाबालिग लड़की के पिता ने थाना गौंडा थाने ने बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि मंदिर में जल चढ़ाने गई उनकी बेटी अचानक ही गुम हो गई। 18 फरवरी को पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 363 और 366 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की।

6 अप्रैल 2015 को लड़की के घर वालों ने इस मामले में अपने ही गाँव ढाटौली के विष्णु गौतम को आरोपित किया। दावा किया कि मेले में विष्णु को लड़की के साथ देखा गया था। 24 मार्च 2015 को पुलिस ने लावारिस हालत में एक लड़की की लाश बरामद की। नाबालिग लड़की के घर वालों ने उसे अपनी बेटी का बताया। इसके बाद विष्णु पर हत्या की धारा 302 और सबूत मिटाने की धारा 201 भी लगा दी गई।

25 सितंबर 2015 को पुलिस ने इस केस में विष्णु गौतम के खिलाफ चार्जशीट लगा दी। FIR के दौरान इस केस के विवेचक सब इंस्पेक्टर खालिद खान थे। लगभग 2 साल जेल में रहने के बाद विष्णु गौतम की जमानत 11 अप्रैल 2017 को इलाहबाद हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा की अदालत से मंजूर हुई। इस दौरान विष्णु को सबूतों से छेड़छाड़ न करने, कोर्ट में तय तारीख पर हाजिर रहने और गवाहों को न धमकाने की हिदायत मिली थी। पुलिस कार्रवाई के साथ कोर्ट की सुनवाई तक विपिन खुद को निर्दोष बताता रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिला अदालत में विष्णु के केस का ट्रायल शुरू हो गया। इसके चलते लड़की के घर वालों ने उसे फिर से जेल भेजने की माँग की। विष्णु को फिर से जेल भेज दिया गया। इस दौरान उसकी माँ अपने स्तर से बेटे की बेगुनाही के सबूत तलाशती रही। आखिरकार उन्हें जानकारी मिली कि जिस लड़की के अपहरण और हत्या के केस में उनका बेटा जेल काट रहा है, वो जीवित है और आगरा के एत्माद्दौला इलाके में अपने पति और 2 बच्चों के साथ रह रही है।

जानकारी पुख्ता कर लेने के बाद विष्णु की माँ वृन्दावन के एक भगवाचार्य के साथ अलीगढ़ के एसएसपी कलानिधि नैथानी से मिलीं। उन्होंने अपने बेटे के लिए न्याय माँगा। SSP अलीगढ़ ने फ़ौरन ही मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए और लड़की को हाथरस गेट से गिरफ्तार कर लिया गया। विपिन की माँ ने अब कोर्ट से अपने बेटे की रिहाई की गुहार लगाई है। SHO गौंडा का कहना है कि लड़की के कोर्ट में दिए बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। DSP राघवेंद्र सिंह के मुताबिक लड़की के DNA की जाँच करवाई जाएगी।

‘पश्चिमी मीडिया चला रहा झूठ’: ईरानी पत्रकार ने ‘मोरालिटी पुलिस’ खत्म किए जाने की खबरों पर NYT को लताड़ा, कहा – मौलानाओं की सरकार को जाना ही होगा

ईरान में सितंबर 2022 के मध्य में महासा अमीनी नामक महिला को वहाँ की मोरालिटी पुलिस ने प्रताड़ित कर के मार डाला। इसके बाद ही वहाँ हिजाब के विरोध में महिलाओं का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच मीडिया में खबर चली कि विरोध प्रदर्शन के आगे झुकते हुए इस्लामी मुल्क ने ‘Morality Police’ को ख़त्म कर दिया है। हालाँकि, ईरान की पत्रकार मसीह अलीनेजाद का इस संबंध में कुछ और ही कहना है। उन्होंने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT)’ पर फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाया है।

ईरानी-अमेरिकी मूल की पत्रकार से ‘ABC News’ ने जब पूछा कि क्या ‘मोरालिटी पुलिस’ को खत्म किया जाना महिला प्रदर्शनकारियों की जीत है, तो उन्होंने जवाब में कहा कि इस खबर उन्हें और ईरानियों में खासी चोट पहुँची है, क्योंकि NYT में इस खबर की हेडिंग देख कर वो हैरान थे। उन्होंने पूछा कि ये किस किस्म की जीत है? उन्होंने इसे एक कोरा झूठ और भ्रामक सूचना करार दिया। मसीह अलीनेजाद ने कहा कि मात्र 2 महीनों में ईरान की सरकार ने 500 से अधिक लोगों को मार डाला है।

उन्होंने जानकारी दी कि मृतकों में 62 बच्चे हैं। साथ ही 18,000 से भी अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। ‘मोरालिटी पुलिस’ को ख़त्म किए जाने की खबर को उन्होंने ईरान की सरकार का प्रोपेगंडा वाला कदम करार दिया। महिला पत्रकार ने कहा कि जब किसी तानाशाह की गद्दी हिलती है तो वो भ्रामक सूचनाओं का इस्तेमाल कर के बाकी दुनिया को भरमाता है। उन्होंने कहा कि समाज में विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए भी ऐसा किया जाता है।

उन्होंने ये जानकारी भी दी कि जिस दिन मीडिया ने ‘मोरालिटी पुलिस’ को खत्म करने की खबर चलाई, उसी दिन ईरान के एक एम्यूजमेंट पार्क को सिर्फ इसीलिए बंद कर दिया गया, क्योंकि वहाँ एक महिला ने हिजाब नहीं पहन रखा था। उक्त महिला की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। महिला पत्रकार ने बताया कि 7 साल की बच्चियाँ भी बिना हिजाब के स्कूल तक नहीं जा सकती हैं। साथ ही सवाल दागा कि ऐसे में लड़कियाँ कॉलेज-यूनिवर्सिटी कैसे पहुँचेंगी?

मसीह अलीनेजाद ने कहा कि ‘Morality Police’ को खत्म किया जाना ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुद्दा ही नहीं है, बल्कि लिंगभेद को रोकना है। उन्होंने याद दिलाया कि किस तरह 5 साल पहले भी पश्चिमी मीडिया ने खबरें चलाई थीं कि ईरान की ‘मोरालिटी पुलिस’ अब हिजाब न पहनने वाली महिलाओं को गिरफ्तार नहीं करेगी, बल्कि ‘शैक्षिक प्रशिक्षण’ के लिए भेजेगी। उन्होंने कहा कि अब इसी पुलिस ने महासा अमीनी को मार डाला, जिसके बाद मुल्क भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।

ईरानी-अमेरिकी पत्रकार ने इंटरव्यू में कहा, “ईरान में निहत्थे लोग गोली-बन्दूक का सामना कर रहे हैं। लोगों ने इस्लामी गणतंत्र को ‘ना’ कह दिया है। हाल ही में FIFA वर्ल्ड कप में जब अमेरिका के हाथों ईरान की हार हुई तो ईरानियों ने जश्न मनाया। लोग अब इस सरकार को सरकार समझते ही नहीं हैं। ये हत्यारी सरकार है। ईरान सरकार कुछ भी कहे, इस्लामी गणतंत्र का अंत होने से ही समस्या का समाधान होगा, क्योंकि तब इस सरकार को भी जाना पड़ेगा।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये 21वीं सदी है और ईरान के नागरिक एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र चाहते हैं, न कि इस्लामी तानाशाही। उन्होंने कहा कि मजहब लोगों के घरों में रहे और उन्हें आज़ादी व सम्मान मिले, यही इस आंदोलन का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया ‘मोरालिटी पुलिस’ को खत्म किए जाने को जीत बता रहा है, जबकि असली जीत तब होगी जब मौलानाओं की सरकार जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग आशावान हैं और जीत ज़रूर मिलेगी।