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1% से भी कम वोट से हिमाचल ने रिवाज कायम रखा, CM बनने को लड़ कॉन्ग्रेसी भी निभा रहे परंपरा: वीरभद्र सिंह का कुनबा सबसे आगे

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव (Himachal Pradesh Assembly Election) ने कॉन्ग्रेस (Congress) की डूबती नैया को सहारा दे दिया है। यह सहारा मृतप्राय पार्टी के लिए संजीवनी का काम किया है। कॉन्ग्रेस राज्य की कुल 68 सीटों में से 40 सीटें जीतकर सरकार बनाने जा रही है। हालाँकि, जीत के बाद भी पार्टी के सामने मुश्किलों की कमी नहीं है।

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में राजा साहब के नाम से विख्यात पूर्व मुख्यमंत्री एवं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह (Virbhadra Singh) की पत्नी प्रतिभा सिंह (Pratibha Singh) ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में खूब मेहनत की और परिणाम भी सामने है। प्रदेश की सत्ताधारी भाजपा (BJP) 25 सीट तक सिमट कर रह गई। प्रतिभा सिंह को यह जिम्मेदारी सिर्फ छह महीने पहले ही मिली है। इसके बाद अपने विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) के साथ मिलकर वह प्रदेश का कोना-कोना छान मारी।

एक कहावत है कि जीत एक से हो या 100 से, उस जीत की अनुभूति सुखदायक ही होती है। कॉन्ग्रेस भी इस सुख का आनंद ले रही है और हिमाचल प्रदेश की जनता हर पाँच साल पर सत्ता को बदलने का सुख ले रही है। कॉन्ग्रेस और जनता दोनों खुश हैं। लेकिन, इन सबसे अलग हटकर देखा जाए तो भाजपा पर कॉन्ग्रेस की यह जीत मामूली दिखाई देती है, क्योंकि भाजपा ने कुछ दुस्साहसिक गलतियाँ नहीं की होती तो उत्तराखंड की तरह हिमाचल प्रदेश में सत्ता में लगातार वापसी के अभिशाप को धो सकती थी।

चुनावों से पहले देश भर में क्षत्रिय महापुरुषों को लेकर विवाद को उठना और उसमें भाजपा की एंट्री ने पार्टी को निशाने पर ला दिया और सोशल मीडिया में इतिहासचोर भाजपा जैसे ट्रेंड चलने लगे। भाजपा के खिलाफ आवाज उठने लगी। हिमाचल प्रदेश चुनाव के संदर्भ में भले ही मुख्यधारा की मीडिया किसी विशेष उद्देश्य की वजह से इन कारकों की चर्चा ना करे, लेकिन लगभग 40 प्रतिशत क्षत्रिय वोट वाले राज्य हिमाचल प्रदेश में इसका सीधा असर दिखा।

रही-सही कसर पार्टी के बागियों एवं पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल का टिकट काट कर पूरा कर दिया गया। जिन विधायकों का टिकट काटा गया, उनमें अधिकांश धूमल के समर्थक थे। इस तरह लोगों के बीच भी एक गलत संदेश भेजा गया। मंच पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा अपने पिता प्रेम कुमार धूमल की राजनीति को याद कर भावुक हो जाना, जैसे आग में घी का काम कर दिया और भाजपा के प्रति लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

इस चुनाव में भाजपा के 21 बागियों ने चुनावी मैदान में ताल ठोंका, जिनमें से तीन तो निर्दलीय जीतने में कामयाब रहे, लेकिन बागियों की वजह से कॉन्ग्रेस को अप्रत्यक्ष लाभ हुआ। परिणाम यह हुआ कि अधिकांश सीटों पर भाजपा कुछ सौ वोटों के अंतर से हार गई।

कुछ सीटें तो ऐसी भी रही, जहाँ हार-जीत का अंतर 100 से भी कम था। भोरंज सीट पर तो कॉन्ग्रेस के सुरेश कुमार ने भाजपा के अनिल धीमन को सिर्फ 60 वोटों से हराया। इस तरह 1000 वोटों से कम अंतर से हारने वाले सीटों की संख्या लगभग 10 है। अगर इन सीटों को सँभालने में भाजपा कामयाब रहती तो भाजपा बहुमत के आँकड़े 35 को आसानी से पार कर लेती।

भाजपा (BJP) के लिए यह जीत हासिल करना कोई बड़ी बात नहीं थी, क्योंकि अगर वोट शेयर की बात करें तो भाजपा और कॉन्ग्रेस को लगभग समान वोट मिले हैं। लेकिन भाजपा से 0.90 यानी एक प्रतिशत से कम वोटों की अधिकता ने कॉन्ग्रेस के राजनीतिक द्वार खोल दिए। इस चुनाव में भाजपा को कुल 43.00 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस को 43.90 प्रतिशत वोट मिले हैं।

अगर साल 2017 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो उसमें भाजपा को 49.53 प्रतिशत मत हासिल कर 44 सीटें और कॉन्ग्रेस को 42.32 प्रतिशत मत हासिल कर 21 सीटें जीती थीं। निर्दलीय एवं अन्य दलों ने 6.34 फीसदी मत प्राप्त किए थे, जिसमें माकपा को एक तथा निर्दलीय प्रत्याशियों को दो सीटें मिली थीं। इस तरह साल 2022 में भाजपा को 6.53 प्रतिशत मत का नुकसान हुआ है, जबकि कॉन्ग्रेस को 1.58 प्रतिशत वोट का लाभ हुआ है। वहीं, अन्य को लगभग 12 प्रतिशत वोट मिले हैं।

राज्य में कॉन्ग्रेस जीत गई, लेकिन पार्टी हाईकमान को डर अभी भी सता रहा है कि कहीं उनके विधायक पाला ना बदल लें। इसलिए पार्टी मतगणना के दिन ही उन्हें चंडीगढ़ पहुँचने का फरमान जारी करने की खबर आई थी। कहा जा रहा था कि नवनिर्वाचित विधायकों को वहाँ से छत्तीसगढ़ या राजस्थान पहुँचाया जाएगा। हालाँकि, आज शाम शिमला में ही सीएम पद को लेकर बैठक होने वाली है। उधर पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर कॉन्ग्रेसी रिवाज की तरह खींचतान जारी है।

मुख्यमंत्री की रेस में राज्य की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके 33 वर्षीय विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह हैं। इसमें सबसे अधिक विक्रमादित्य सिंह का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। हालाँकि, विक्रमादित्य सिंह कह चुके हैं कि वे अपनी माँ को ही सीएम बनते देखना चाहते हैं। बात यही खत्म नहीं होती है। इन माँ-बेटे के अलावा पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू, ठाकुर कौन सिंह और आशा कुमारी भी मुख्यमंत्री की रेस में शामिल बताए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पद पर मंथन को लेकर राजधानी शिमला में आज कॉन्ग्रेस पार्टी का मंथन होना है। इस मंथन में हिमाचल प्रदेश कॉन्ग्रेस के प्रभारी राजीव शुक्ला और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल होंगे। देखना ये ही हिमाचल में सर्वसम्मति से इस पद के लिए किसे चुना जाता है या फिर अन्य कॉन्ग्रेस शासित राज्यों की तरह हिमाचल भी गुटबाजी का शिकार बनकर जनता के लिए एक बुरे सपने की तरह बन जाएगा।

‘लड़कियाँ स्कूल जा नहीं सकती, पर मर्द 2-3 निकाह करेंगे’: बोले असम CM इसको बदलना होगा, कहा- हम चाहते हैं वे स्कूल-कॉलेजों में पढ़ें

अपने बेबाक बयानों से चर्चा में रहने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर से मुस्लिमों को लेकर बड़ा बयान दिया है। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है, “हम उस व्यवस्था के खिलाफ हैं जहाँ मुस्लिम लड़कियाँ स्कूल में नहीं पढ़ सकती हैं और मुस्लिम पुरुष 2-3 महिलाओं से निकाह करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था को बदलना होगा।

असम के सीएम ने गुरुवार (8 दिसंबर, 2022) को मोरीगाँव की एक सभा में कहा कि उनकी पार्टी मुस्लिमों की उस व्यवस्था के खिलाफ है, जिसमें कई बीवियाँ रखने का चलन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो उस व्यवस्था के खिलाफ हैं जहाँ मुस्लिम लड़कियाँ स्कूल में नहीं पढ़ सकती हैं और मुस्लिम पुरुष 2-3 महिलाओं से निकाह करते हैं।

असम के सीएम ने आगे कहा कि वह ‘सबका साथ सबका विकास’ को आगे लाने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि आजाद भारत में रहने वाले मर्दों को तीन-चार स्त्रियों से (बिना पूर्व शौहर को तलाक दिए) विवाह करने का कोई अधिकार नहीं हो सकता। हमें मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए काम करना होगा।

हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि अगर असमिया हिंदू परिवारों से डॉक्टर हैं तो फिर मुस्लिम परिवारों से भी डॉक्टर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि ‘पोमुवा’ मुस्लिम छात्र मदरसों में पढ़कर जुनाब, इमाम बनें। वह चाहते हैं कि वे स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ें। उन्होंने कहा कि कई विधायक ऐसी सलाह इसलिए नहीं देते क्योंकि उन्हें ‘पोमुवा’ मुसलमानों के वोट चाहिए। बांग्लादेश से आने वाले बंगाली भाषी मुसलमानों को असम में ‘पोमुवा मुस्लिम’ कहा जाता है।

असम के सीएम सरमा का निशाना एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल पर था। पिछले दिनों उन्होंने हिंदुओं के विवाह को लेकर तथ्यहीन व आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसकी वजह से उन्हें माफी भी माँगनी पड़ी थी। असम के सीएम ने बदरुद्दीन अजमल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि एआईयूडीएफ प्रमुख की सलाह के अनुसार महिलाएँ 20-25 बच्चे पैदा कर सकती हैं लेकिन उनके भविष्य में भोजन, कपड़े और शिक्षा पर होने वाला सारा खर्चों को विपक्ष (बदरुद्दीन) को वहन करना होगा।

आपको बता दें कि असम के करीमगंज में सांसद बदरुद्दीन ने कहा था कि एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओं को नसीहत दी कि उन्हें मुस्लिमों की तरह अपनी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में कर देनी चाहिए। बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है, लेकिन हिंदू लड़कियों की शादी 40 साल की उम्र में भी नहीं होती। हिंदू 40 साल की उम्र तक अवैध पार्टनर रखते हैं। बच्चे नहीं पैदा करते और पैसे बचाते हैं। उन्होंने सलाह दिया कि हिंदुओं को मुस्लिम फॉर्मूले को स्वीकार करना चाहिए और अपने बच्चों की शादी 20-22 साल की उम्र में कर देनी चाहिए। उनके अनुसार 18-20 साल की उम्र में लड़कियों की शादी करा दो और फिर देखो कितने बच्चे पैदा होते हैं। बदरुद्दीन ने आगे कहा कि जब आप उपजाऊ जमीन में बीज बोएँगे, तभी खेती अच्छी होगी। उसके बाद तरक्की ही तरक्की होगी।

हालाँकि इस बयान पर बवाल मचने के बाद उन्होंने माफी माँगी थी। अजमल ने कहा था, “अगर मेरे शब्दों से किसी की भावना को ठेस पहुँची है तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूँ।”

बिहार के जिस IPS अफसर पर बनी वेब सीरिज ‘खाकी’, वे करप्शन में सस्पेंड: विजिलेंस ने अमित लोढ़ा पर दर्ज किया केस

बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा को भ्रष्टाचार के मामले में सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर बनी वेब सीरिज ‘खाकी- द बिहार चैप्टर’ हाल में चर्चा में रही है। नेटफ्लिक्स पर प्रसारित इसी सीरिज को लेकर ही वे विवादों में भी आए हैं।

लोढ़ा के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (special vigilance unit) ने जाँच के बाद भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया है। लोढ़ा ने ‘बिहार डायरीज’ नाम से एक किताब भी लिखी है। इसी पर आधारित वेब सीरीज 25 नवंबर 2022 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। Netflix और फ्राइडे स्टोरी टेलर ने मिलकर यह सीरीज बनाई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार लोढ़ा पर लोकसेवा अधिनियम के उल्लंघन का आरोप है। उन्होंने किताब लेखन और वेब सीरीज निर्माण को लेकर पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार से अनुमति नहीं ली थी। इसके अलावा वेब सीरीज के फाइनेंस और शूटिंग से जुड़े मुद्दे को लेकर भी वह कठघरे में हैं। वेब सीरीज निर्माण में लगने वाली राशि का इंतजाम करने में उनकी भूमिका की बात कही जा रही है।

विशेष निगरानी इकाई के अनुसार लोढ़ा ने नेटफ्लिक्स तथा फ्राइडे स्टोरी टेलर के साथ व्यावसायिक करार किया था। आरोप लगने के बाद मामले की जाँच हुई और रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी गई। इसी रिपोर्ट और सरकार के निर्देश के तहत निगरानी इकाई ने लोढ़ा और उनके सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में पीसी एक्ट और आइपीसी की धाराएँ लगाई गई हैं। इस मामले की जाँच पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी करेंगे।

अमित लोढ़ा साल 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने बिहार पोस्टिंग के बाद अपराधियों का ताबड़तोड़ सफाया किया। अमित लोढ़ा पहली बार तब चर्चा में आए, जब उन्होंने शेखपुरा के ‘गब्बर सिंह’ कहे जाने वाले अशोक महतो और उसके साथी पिंटू महतो को सलाखों के पीछे पहुँचाया था। अमित लोढ़ा को राष्ट्रपति पुलिस पदक, पुलिस पदक और आंतरिक सुरक्षा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।

दोबारा सेक्स से रुखसार ने किया इनकार, शौहर अनवर ने गला घोंट मार डाला: लाश बोरी में डाल फेंका, सास से कहा- आपकी बेटी कहीं चली गई

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दोबारा सेक्स से इनकार करने पर अनवर ने अपनी बीवी रुखसाना की हत्या कर दी। लाश को भाई के साथ मिलकर ठिकाने लगाया। फिर सास से कहा कि उसकी बेटी कहीं चली गई है।

दामाद की सूचना पर रुखसार की अम्मी ने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बीच एक लाश मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र में रतूपुरा की झाड़ियों से बरामद हुआ। यह जगह अनवर के घर से करीब 50 किलोमीटर दूर है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से हत्या गला घोंटकर करने की बात सामने आई। पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि बीवी के साथ अनवर के रिश्ते अच्छे नहीं थे। इसके बाद पुलिस पूछताछ में वह टूट गया और अपना गुनाह कबूल लिया। अनवर के साथ उसके भाई दानिश को भी गिरफ्तार किया गया है। उस पर लाश ठिकाने में अनवर की मदद का आरोप है।

अनवर की अमरोहा जनपद के कोतवाली के मोहल्ला सराय कोहना में बेकरी है। उसने बताया है कि सोमवार (5 दिसंबर 2022) की सुबह करीब 4 बजे उसने बीवी रुखसार के साथ संबंध बनाए। थोड़ी देर बाद उसने दोबारा सेक्स को कहा। लेकिन रुखसार ने इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर उसने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

इसके बाद उसने दानिश की मदद से शव के हाथ-पैर बाँधे। एक बोरी में लाश डालकर उसे सिल दिया। फिर बाइक से रतूपुरा में सड़क किनारे जंगलों में फेंक आया। इसके बाद घर लौटकर अनवर ने सास को फोन किया। उनसे कहा कि रुखसार घर छोड़कर कहीं चली गई है।

सड़क किनारे शव देखकर ग्रामीणों ने मुरादाबाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मृतक महिला के शव की शिनाख्त के लिए कई जनपदों में शव के फोटो भेजे थे। इसी क्रम में अमरोहा कोतवाली में रुखसार की गुमशुदगी दर्ज होने की बात सामने आई। तस्वीरों का मिलान कराया गया तो बोरे में बंद शव रुखसार का निकला। क्षेत्राधिकारी नगर, विजय कुमार राणा ने बताया कि घटना में प्रयुक्त मोटर साइकिल भी बरामद कर ली गई है।

जमानत के कुछ ही घंटों बाद TMC नेता साकेत गोखले दोबारा गिरफ्तार, मोरबी पर RTI से लेकर गुजरात समाचार का न्यूज तक गढ़ दिया था

तृणमूल कॉन्‍ग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले (Saket Gokhle) को फिर से गिरफ्तार किया गया है। अहमदाबाद की एक अदालत से जमानत मिलने के कुछ ही घंटों बाद उसकी दोबारा गिरफ्तारी हुई। उस पर मोरबी पुल हादसे को लेकर झूठा ट्वीट करने का आरोप है।

मिली जानकारी के मुताबिक अहमदाबाद की एक अदालत ने मोरबी पुल हादसे को लेकर फेक न्यूज फैलाने के मामले में गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को गोखले को जमानत दे दी थी। लेकिन मोरबी पुलिस ने दर्ज किए गए एक अन्य मामले में उसे गिरफ्तार कर लिया।

इस संबंध में ट्वीट करते हुए टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने गुजरात पुलिस पर गोखले को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है, “8 दिसंबर को रात 8.45 बजे उसे (साकेत गोखले) फिर से गिरफ्तार कर लिया है। वह अहमदाबाद में साइबर पुलिस थाने से निकल रहा था। पुलिस की टीम ने बिना नोटिस/वारंट के उसे गिरफ्तार किया और किसी अज्ञात स्थान पर ले गई। यह निंदनीय है।”

साकेत गोखले को दोबारा गिरफ्तार किए जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें वह पुलिस से थाना परिसर में बहस करते दिख रहा है। वीडियो उसकी दोबारा गिरफ्तारी से कुछ समय पहले का बताया जा रहा है।

गोखले को 5 दिसंबर 2022 को पहली बार गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे अदालत ने दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया था। उस समय डेरेक ओ ब्रायन ने बताया था कि गोखले नई दिल्ली से फ्लाइट लेकर जयपुर पहुँचे थे। वहाँ गुजरात पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए पहले से मौजूद थी। गिरफ्तारी के बाद उसे अहमदाबाद ले जाया गया था।

आपको बता दें कि गोखले एक पूर्व आरटीआई एक्टिविस्ट हैं और वर्तमान में तृणमूल कॉन्‍ग्रेस के प्रवक्ता हैं। उन्होंने एक मनगढ़ंत समाचार रिपोर्ट साझा की थी। गुजराती समाचार पत्र की कथित क्लिपिंग साझा करते हुए दावा किया था कि पीएम मोदी की मोरबी यात्रा पर 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। जो क्लिपिंग साझा की थी, वह कथित तौर पर ‘गुजरात समाचार’ का था। भाजपा ने इसे मनगढ़ंत बताते हुए कहा था कि ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हुई है। साथ ही बताया था कि ऐसा कोई आरटीआई जवाब भी नहीं है। ‘गुजरात समाचार’ ने भी कहा था कि उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित ही नहीं की है।

तथाकथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए, गोखले ने दावा किया था कि 5.5 करोड़ रुपए विशुद्ध रूप से ‘स्वागत, कार्यक्रम प्रबंधन और फोटोग्राफी’ के लिए खर्च हुए थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि मोदी के इवेंट मैनेजमेंट और पीआर की लागत 135 लोगों के जीवन से अधिक है। गोखले ने कहा कि आपदा में मारे गए 135 पीड़ितों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी गई, जो कुल मिलाकर 5 करोड़ रुपए होती है। हालाँकि गोखले ने जैसा दावा किया है, ऐसी कोई आरटीआई और ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं है।

सरकार की फैक्ट चेक यूनिट ने भी 1 दिसंबर 2022 को गोखले के उस ट्वीट को पिनपॉइंट किया था, जिसमें उन्होंने न्यूजपेपर के कुछ कटआउट्स को शेयर कर फर्जी न्यूज फैलाई थी। PIB ने गोखले के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर कर बताया था कि ट्वीट में किया गया दावा फर्जी है। गोखले ने 1 दिसंबर 2022 को सुबह करीब साढ़े 8 बजे फर्जी ट्वीट किया था और उसी दिन शाम साढ़े सात बजे के आसपास PIB ने इसे फर्जी करार दिया था।

14190 औरतें, 3 शहरों में कॉल सेंटर, 300 दलाल और WhatsApp: देश भर में फैला था सेक्स रैकेट, देह के धंधे के साथ ड्रग्स का कारोबार भी

तेलंगाना में एक बड़े स्तर के सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। कॉल सेंटर और व्हाट्सएप के जरिए इसका संचालन हो रहा था। देश के कई राज्यों में देह और ड्रग्स का यह धंधा फैला हुआ था। हैदराबाद की साइबराबाद पुलिस ने इस मामले में अब तक 18 गिरफ्तारी की है। ये गिरफ्तारी सेक्स रैकेट और मानव तस्करी से जुड़े 39 अलग-अलग मामलों में हुई है। गिरफ्तार लोगों में रैकेट से जुड़े प्रमुख दलालों के अलावा रेडिसन होटल का मैनेजर भी है।

पुलिस ने बताया है कि यह रैकेट ऑनलाइन चल रहा था। दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद में कॉल सेंटर थे। व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। 14190 महिलाओं को इस रैकेट के जरिए वेश्यवृत्ति के धंधे में धकेला गया। ये देश के अलग-अलग राज्यों से हैं। कुछ महिलाएँ रूस, उज्बेकिस्तान और थाइलैंड जैसे देशों की भी हैं। सेक्स रैकेट से जुड़े आरोपित बड़े पैमाने पर ड्रग्स का धंधा भी कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित देश के अलग-अलग हिस्सों से महिलाओं को खरीद रहे थे। वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर विज्ञापन देते थे। कॉल सेंटर और व्हाट्सएप के जरिए ग्राहकों से संपर्क करते। उनको तस्वीरें भेजते। ग्राहकों तक उनकी पसंद की लड़की भेजने का इंतजाम करते। सब कुछ बेहद संगठित तरीके से चल रहा था। अकेले साइबराबाद और हैदराबाद में 70 प्रतिशत वेश्यावृत्ति के मामलों के लिए इसी रैकेट को जिम्मेदार बताया गया है।

आरोपितों पर साइबराबाद के चार पुलिस स्टेशनों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 370 और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है। साइबराबाद के पुलिस आयुक्त स्टीफन रवींद्र के अनुसार, ऑपरेशन दो महीने से अधिक समय तक चला और इसमें साइबराबाद पुलिस की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के साथ अन्य विशेष ऑपरेशन टीम और स्थानीय पुलिस शामिल थी।

इस घटना के मुख्य आरोपित कई नामों का इस्तेमाल करते थे। मोहम्मद अब्दुल सलमान उर्फ़ ऋषि नाम के आरोपित ने लगभग 900 लड़कियों की ‘सप्लाई’ की थी। वह 6 साल से इस गिरोह के लिए काम कर रहा था। आरोपितों में मोहम्मद समीर, मोहम्मद अब्दुल रफीक खान, मोहम्मद अफसर और हरबिंदर कौर आदि भी शामिल हैं। सलमान को 15 नवंबर 2022 को ‘सन सिटी’ से गिरफ्तार किया गया था। सलमान कई होटलों में काम कर चुका है।

पुलिस आयुक्त ने आरोपी के काम करने के तरीके के बारे में बताते हुए कहा कि दलाल पीड़िता से संपर्क करते थे और आरोपितों के व्हाट्सएप्प ग्रुप में उसकी तस्वीरें डालते थे और महिलाओं को चुनते थे। इसके साथ गिरोह के लोग होटल, फ्लाइट टिकट आदि बुक करते थे। ये लोग व्हाट्सएप्प ग्रुपों में पीड़ितों की तस्वीरें पोस्ट करते थे और उन्हें कॉल गर्ल वेबसाइटों पर अपलोड करते थे।

जब भी ग्राहक व्हाट्सएप नंबर पर कॉल या संदेश भेजते थे, कॉल सेंटर के लोग गिरोह के आकाओं के साथ संपर्क विवरण साझा करते थे। इसके बाद पीड़िता को उनके पास भेजा जाता था। ग्राहक नकद या डिजिटल भुगतान ऐप के माध्यम से भुगतान करते थे।

धुआँधार प्रचार, जीत के दावे, लेकिन गुजरात में मात्र 5 सीटों पर सिमट कर रह गई AAP: केजरीवाल का ‘हिन्दू कार्ड’ भी फेल, ग्राउंड पर नहीं दिखी सोशल मीडिया वाली हाइप

आम आदमी पार्टी ने भले ही गुजरात विधानसभा चुनावों में उम्मीद के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन न किया हो, लेकिन पार्टी माहौल बनाने में कामयाब रही। हालाँकि इस काम में मेन स्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया का भी एक बड़ा योगदान था। परंतु चुनाव के नतीजे यदि सकारात्मक न हो तो बनाया गया माहौल, प्रचार और विज्ञापन सब बेकार हो जाता है। आम आदमी पार्टी के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। पार्टी तो आई थी गुजरात चुनाव जीतने का सपने लेकर लेकिन जा रही है कॉन्ग्रेस के वोट काट कर।

आँकड़ों की बात करें तो गुजरात के विधानसभा चुनाव परिणाम में AAP को मात्र 5 सीटें आई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया और मुख्यमंत्री का चेहरा इसुदान गढ़वी अपनी-अपनी सीटों पर हार गए हैं। पार्टी को 12.92% वोटों से ही संतोष करना पड़ा है, जबकि वो जीत के दावे कर रही थी। वहीं भाजपा ने 156 सीटें अपने नाम की हैं, जो गुजरात में किसी भी पार्टी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

गुजरात में विधानसभा चुनावों के ऐलान से काफी पहले ही आम आदमी पार्टी ने राज्य में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से लेकर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राघव चड्ढा जैसे पार्टी के बड़े नेता गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए काफी पहले से पहुँचने लगे। हालाँकि, शराब घोटाले में नाम आने के बाद मनीष सिसोदिया ने गुजरात आना कम कर दिया था।

दिल्ली के सीएम और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी गुजरात में धुआँधार बैठकें की, कई प्रेस कॉन्फ्रेंस किए, लोगों से मिले, तरह-तरह के वादे किए और खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर पेश करने में कामयाब रहे। फिर चाहे मुफ्त बिजली-पानी हो, महिलाओं और युवाओं के लिए भत्तों की घोषणा हो, मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक आम आदमी पार्टी की उपस्थिति आखिर तक बनी रही।

केजरीवाल का हिंदुत्व कार्ड भी नाकाम

केजरीवाल यह समझ चुके थे कि गुजरात चुनावों में कामयाब होने के लिए हिंदुओं को नाराज नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने अपनी हिंदुवादी छवि बनाने की कोशिश की। एक समय में “मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़कर बनाए मंदिर में नहीं रह सकता” कहने वाले केजरीवाल गुजरात के बुजुर्गों को राम लला के नि:शुल्क दर्शन कराने का वादा करने लगे। चुनाव प्रचार के दौरान अपनी तुलना भगवान कृष्ण से करते हुए कंस की औलादों का नाश करने की बात करने लगे। इतना सब कुछ कम था कि उन्होंने नोटों पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चित्र छापने की वकालत शुरू कर दी।

हालाँकि, अंततः केजरीवाल के सारे फॉर्मूले फेल हो गए और पार्टी बुरी तरह हार गई। कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। यहाँ तक कि जिन सीटों पर पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, वहाँ भी निराशा हाथ लगी।

आम आदमी पार्टी पर गुजरातियों को भरोसा क्यों नहीं?

आम आदमी पार्टी ने खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पेश करने की पूरी कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके। इसका प्रमुख कारण यह है कि उसने लोगों से वादे तो किए लेकिन यह नहीं समझा सकी कि उन वादों को पूरा कैसे किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से जहाँ आम आदमी पार्टी सत्ता में है, एक के बाद एक कई घोटाले सामने आने लगे। वोटिंग से पहले सामने आ रहे इन घोटालों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

आम आदमी पार्टी के पास ऐसे कार्यकर्ता की कमी थी, जो गाँव-गाँव जाकर काम कर सकें और लोगों के पास जाकर वोट माँग सकें। सोशल मीडिया पर पार्टी के समर्थन में पोस्ट भर कर देने से चुनाव नहीं जीते जाते। चुनाव जीतने के लिए जमीन पर उतरना पड़ता है। ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी नजर ही नहीं आई। इसका कारण यह है कि पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की कमी थी, जिससे पार्टी को नुकसान पहुँचा।

आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में मीडिया और सोशल मीडिया पर ज्यादा भरोसा किया। वो भूल गए कि वोटरों को रिझाने के लिए आपको जमीन पर भी उतरना होता है। आम आदमी पार्टी जमीन पर बहुत कम दिखाई दी। साथ ही जहाँ वे नजर आए, वहाँ भी वे लोगों को यह नहीं समझा सके कि भाजपा और कॉन्ग्रेस को छोड़कर आम आदमी पार्टी को ही क्यों चुनें।

इस विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटें ऐसी थीं, जहाँ मुकाबला बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच था। खासकर ग्रामीण इलाकों में हालात ऐसे ही थे। ऐसे में आम आदमी पार्टी विकल्प के तौर पर जगह नहीं बना पाई। कई सीटों पर तो ऐसा लगा कि भाजपा और कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों के टक्कर के बीच आम आदमी पार्टी को झोंक दिया गया।

सामाजिक समीकरण भी चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। इसका फायदा आम आदमी पार्टी को सूरत नगर निगम चुनाव में मिला और पार्टी ने 27 सीटों पर जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने सूरत और सौराष्ट्र पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। पिछले विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र इलाके में पाटीदार आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव था। तब इलाके की ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल कर कॉन्ग्रेस ने भाजपा को 100 से भी कम सीटों पर रोक लिया था।

आम आदमी पार्टी की कोशिश सौराष्ट्र के इन सीटों को कॉन्ग्रेस से छीनने की थी। इसके लिए पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने का भी प्रयास किया। पार्टी ने पाटीदार बहुल सीट वराछा से अल्पेश कथीरिया को मैदान में उतारा। अल्पेश पाटीदार आंदोलन का प्रमुख चेहरा रह चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने कतारगाम से पाटीदार आंदोलन का चेहरा रहे गोपाल इटालिया और आलपाड सीट पर धार्मिक मालवीय को उम्मीदवार बनाया। पार्टी ने इन सीटों पर खूब प्रचार भी किया लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस के लिए ‘वोट कटवा’ साबित हुई। क्योंकि भाजपा के मिलने वाले वोट सुरक्षित रहे लेकिन कॉन्ग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी हो गई।

इसकी प्रमुख वजह यह है कि 2017 में पाटीदार समुदाय (और अन्य समुदायों) में पनपी भाजपा विरोधी भावना 2022 आते-आते पूरी तरह से समाप्त हो चुकी थी। इन समाजिक आंदोलनों के पोस्टर बॉय हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर जैसे नेता भाजपा में शामिल हो गए, वहीं दूसरी ओर चुनावों को लेकर कॉन्ग्रेस की आक्रमकता में कमी नजर आई। बीजेपी इन 5 सालों में और खासकर चुनाव से पहले विभिन्न समुदायों को लुभाने में सफल रही है और इसका असर इन सभी सीटों पर देखने को मिला।

वादे और विवादों से उबर नहीं पाई AAP

विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी को छोटी-बड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों से पार पाना पार्टी के लिए मुश्किल साबित हुआ। कभी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करने वाली पार्टी जाति का कार्ड खेलने पर मजबूर हो गई।

गोपाल इटालिया के पुराने वीडियो ने पार्टी को बैकफुट पर ला दिया। वहीं केजरीवाल के एक मंत्री के धर्मांतरण कार्यक्रम में शामिल होने के विवाद का भी गुजरात में गहरा असर पड़ा। साथ ही दिल्ली के शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया का नाम आने से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा।

इनके अलावा दिल्ली सरकार में केजरीवाल के एक अन्य मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी और उसके बाद जेलों में वीआईपी सुविधाओं का एक के बाद एक वीडियो बाहर आना… यह सब कुछ ऐसे मुद्दे थे, जो पार्टी पर गुजरात में भारी पड़ गईं।

क्या है आम आदमी पार्टी का भविष्य?

लोगों का मानना ​​है कि यह राज्य में आम आदमी पार्टी की शुरुआत है और पार्टी भविष्य में (यानी 2027 के विधानसभा चुनाव में) अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। परंतु राजनीति में खासकर चुनाव के लिहाज से भी पाँच साल की अवधि को बड़ा और महत्वपूर्ण माना जाता है।

2017 के चुनावों में किसी तरह अपना गढ़ बचाने में कामयाब रही बीजेपी ने इस साल सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाली बीजेपी ने नरेंद्र मोदी की भारी लोकप्रियता के बल पर 2014 में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी और तभी से पार्टी केंद्र में भी सत्ता में है।

आम आदमी पार्टी का गुजरात में मजबूत संगठन नहीं है। इस चुनाव में करारी हार का पार्टी कार्यकर्ताओं पर भारी प्रभाव पड़ेगा। कार्यकर्ताओं को जीत की नहीं बल्कि कुछ सीटों की उम्मीद थी, जो उन्हें नहीं मिली। उन्हें 5 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। कार्यकर्ता बाहर न निकलें तो परिणाम क्या होता है, यह कॉन्ग्रेस से बेहतर और कौन समझा सकता है!

‘रिकॉर्ड तोड़ने में भी बनाया रिकॉर्ड’ : गुजरात में प्रचंड जनादेश के लिए PM मोदी हुए जनता के आगे नतमस्तक, कहा- देश आज शॉर्टकट नहीं चाहता

गुजरात में रिकॉर्ड जीत के बाद बीजेपी मुख्यालय में गुरुवार (8 दिसम्बर 2022) शाम को कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का जश्न मनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियों में आप देख सकते हैं कि गुजरात में जीतने के बाद बीजेपी के कार्यकर्ता गुलाल, अबीर लगाकर कैसे नाच मना रहे हैं।

गुजरात में लगातार 7वीं बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। इस जीत के बाद जनता और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करने दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह जनता जनार्दन के सामने नतमस्तक हैं, ये जनादेश अभिभूत करने वाला है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी प्रत्यक्ष नहीं जीती, वहाँ भाजपा का वोट शेयर आपके स्नेह का साक्षी है। इसके साथ ही उन्होंने गुजरात, हिमाचल और दिल्ली की जनता का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा, “आपका प्यार उपचुनावों में भी दिखा। यूपी के रामपुर में भाजपा जीती है। बिहार के उपचुनावों में भाजपा का प्रदर्शन आने वाले दिनों का स्पष्ट संदेश कर रहा है।”

‘भाजपा को मिला जनसमर्थन युवा सोच’

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा को मिला जनसमर्थन नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतिबिम्ब है। भाजपा को मिला जनसमर्थन भारत के युवाओं की ‘युवा सोच’ का प्रकटीकरण है। भाजपा को मिला जनसमर्थन गरीब, शोषित, वंचित, आदिवासियों के सशक्तीकरण के लिए मिला समर्थन है। लोगों ने भाजपा को वोट दिया, क्योंकि भाजपा हर सुविधा को प्रत्येक गरीब, मध्यमवर्गीय परिवार तक जल्द से जल्द पहुँचाना चाहती है। लोगों ने भाजपा को वोट दिया, क्योंकि भाजपा देश के हित में बड़े से बड़े और कड़े से कड़े फैसले लेने का दम रखती है।

‘युवाओं ने हमारे काम पर भरोसा किया’

प्रधानमंत्री के शब्दों में, “गुजरात की जनता ने तो रिकॉर्ड तोड़ने में भी रिकॉर्ड कर दिया। गुजरात के इतिहास का सबसे प्रचंड जनादेश भाजपा को देकर प्रदेश के लोगों ने नया इतिहास बना दिया है। जाति, वर्ग, समुदाय और हर तरह के विभाजन से ऊपर उठकर भाजपा को वोट दिया है। युवा तभी वोट देते हैं जब उन्हें भरोसा होता है और सरकार का काम प्रत्यक्ष नजर आता है। आज युवाओं ने जब भाजपा को भारी संख्या में वोट दिया है तो इसके पीछे का संदेश बहुत स्पष्ट है कि युवाओं ने हमारे काम को जाँचा, परखा और उस पर भरोसा किया है।”

‘भाजपा अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा करती है’

उन्होंने कहा कि देश आज शॉर्टकट नहीं चाहता है। वह बोले कि गुजरात के नतीजों ने सिद्ध किया है कि सामान्य मानवी में विकसित भारत के लिए कितनी प्रबल आकांक्षा है। संदेश साफ है कि जब देश के सामने कोई चुनौती होती है, तो देश की जनता का भरोसा भाजपा पर होता है। हम विचार पर भी बल देते हैं और व्यवस्था को भी सबल बनाते रहते हैं। भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की अथाह संगठन शक्ति पर भरोसा करके ही अपनी रणनीति बनाती है और सफल भी होती है।

‘मैंने गुजरात से वादा किया था’

पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई व गुजरात की जनता को नमन करते हुए पीएम बोले, “मैंने गुजरात से वादा किया था कि इस बार भूपेन्द्र, नरेंद्र का रिकॉर्ड तोड़े इसके लिए नरेन्द्र जी-जान से मेहनत करेगा। हमें निरंतर इन जुल्मों के बीच आगे बढ़ना है। हमें अपनी सहनशक्ति और समझशक्ति को बढ़ाना है। हमें सेवाभाव का विस्तार भी करना है और सेवाभाव से ही जीतना है।”

‘आधुनिक इंफ्रांस्ट्रक्चर विकसित करने पर फोकस’

अपने संबोधन में पीएम ने कहा, “देश ने बीते आठ सालों में गरीबों को सशक्त करने के साथ-साथ आधुनिक इंफ्रांस्ट्रक्चर को विकसित करने पर भी फोकस किया है। हम राष्ट्र निर्माण का व्यापक लक्ष्य लेकर निकले हैं, इसलिए केवल 5 वर्ष के राजनीतिक नफा-नुकसान को देख हम कोई घोषणा नहीं करते। गुजरात में एससी/एसटी की करीब 40 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से 34 सीटें भाजपा ने जीती हैं। आज जनजातीय समाज भाजपा को अपनी आवाज मान रहा है, उनका जबरदस्त समर्थन भाजपा को मिल रहा है। इस बदलाव को पूरे देश में महसूस किया जा रहा है। इस जनादेश में एक और संदेश है और वो यह कि समाज के बीच दूरियाँ बढ़ाकर, राष्ट्र के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी करके, जो राजनीतिक दल तत्कालिक लाभ लेने के फिराक में रहते हैं, उन्हें देश की जनता, देश की युवा पीढ़ी देख भी रही हैं और समझ भी रही हैं।”

गुजरात चुनावों में पिटी भद्द, जीत के दावे फर्जी निकले, फिर भी खुशी से फूल रहे केजरीवाल: लोग बोले- कितनी बेशर्मी है

गुजरात विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को मिली करारी हार के बावजूद अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्विटर पर खुशी-खुशी एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में चेहरे पर मुस्कान के साथ अपने कार्यकर्ताओं को बता रहे हैं कि आज का दिन बड़ी खुशी का दिन है क्योंकि महज 10 साल पहले शुरू हुई उनकी आम आदमी पार्टी अब एक राष्ट्रीय पार्टी बन गई है।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल को गुजरात चुनावों में 12.92% वोट शेयर के साथ मात्र 5 सीट ही मिली जबकि नतीजे आने से पहले उनके दावे थे कि इस बार राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने वाली है। उन्होंने खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देकर भी दावा किया था कि गुजरात में आप ही आएगी। इतना ही नहीं मीडियाकर्मियों के सामने उन्होंने कोरे कागज पर अपनी पक्की जीत के दस्तखत भी किए थे। लेकिन नतीजे आने के बाद तस्वीर एकदम अलग दिखी और आप प्रमुख इस मामले पर बिलकुल चुप रहे।

अपनी वीडियो में बस उन्होंने आभार व्यक्त किया। साथ ही बोले कि आप सिर्फ 10 साल पहले अस्तित्व में आई और अब उनकी 2 राज्यों में सरकार है और इन चुनावों के बाद वो कानूनन राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। ऐसे में वो अपने कार्यकर्ताओं का आभार देते हैं और इसे एक उपलब्धि बताते हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद नेटीजन्स ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। कुछ लोग उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी बनने पर मुबारकबाद देते दिखे तो कुछ भड़क गए कि आखिर चुनाव से पहले इतने दावे किए और अब आकर बस ये बता रहे हैं कि AAP राष्ट्रीय पार्टी बन गई।

एक यूजर ने इसे देख पूछा कि क्या गुजरात में हारने के लिए बधाई दे रहे हो क्या?

एक यूजर ने लिखा, “बस करो केजरीवाल जी, और कितनी बेशर्मी, बड़बोलापन और अति आत्मविश्वास दिखाओगे, कागज पे लिखे हुए आपके अहंकार को स्वाभिमानी गुजरात ने मिट्टी में मिला दिया और आपको आपकी गुजरात में हैसियत भी दिखा दी।”

‘अब तो अगले जन्म में ही गुजरात में परफॉर्म कर पाऊँगा’: गालीबाज कॉमेडियन कुणाल कामरा का छलका दर्द, यूजर्स बोले- तेरे हर जन्म में यहाँ BJP सरकार होगी

गालीबाज स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) एक बार फिर चर्चा में हैं। गुजरात में बीजेपी की रिकॉर्ड जीत के बाद उन्होंने गुरुवार (8 दिसंबर 2022) को ट्वीट किया। ट्वीट में कुणाल ने लिखा, “अब तो अगले जन्म में ही अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा, राजकोट और वापी में परफॉर्म कर पाऊँगा।” इसको लेकर सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने उन पर जमकर निशाना साधा। स्मित रघानी नाम के यूजर ने कहा, “अच्छा है, कचरा चाहिए भी नहीं यहाँ।”

अक्सर विवादों में रहने वाले कुणाल कामरा का मजा लेते हुए एक यूजर ने कहा, “तेरे जितने भी जन्म होंगे, गुजरात में उस वक्त बीजेपी की ही सरकार होगी।”

एक और यूजर ने कहा, “गुड बॉय! अब जाओ और कुछ अच्छे कर्म करो, ताकि तुम्हें तुम्हारे अगले जन्म में परफॉर्म करने का मौका मिल सके।”

इसके अलावा ट्विटर पर कई यूजर्स ऐसे भी रहे, जिन्होंने कुणाल की बात को गंभीरता से ना लेते हुए मजाक उड़ाया। डॉ लिग्मा नाम के यूजर ने लिखा कि ‘पहली बार हँसा हूँ इसके चुटकुले पर।’

समीर लिखते हैं, “गुजरात में वैसे भी @#@# को ज्‍यादा भाव नहीं मिलता…. यकीन न हो तो AK420 से पूछ लो।”

स्वाति नाम की यूजर लिखती हैं कि ‘भगवान का शुक्र है। गुजरात में जरूरत नहीं तुम जैसे लोगों की।’

दरअल, गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। राज्य की 182 सीटों में से 156 बीजेपी के खाते में आई है और वहाँ एक बार फिर भाजपा की सरकार बन रही है। वहीं, इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को 17 और आम आदमी पार्टी को 5 सीटें मिली हैं, जबकि 4 सीटें अन्य ने जीती हैं।

गौरतलब है कि इस साल मई में गालीबाज कॉमेडियन कुणाल कामरा ने जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को देशभक्ति गीत सुनाने वाले बच्चे का मजाक उड़ाया था। उसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ऐक्शन में आ गया था।

NCPCR ने ट्विटर इंडिया को पत्र लिखकर कामरा के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई का निर्देश देते हुए फर्जी वीडियो को तत्काल हटाने के लिए कहा था। NCPCR ने कामरा के इस कृत्य को राजनैतिक एजेंडा बताया था और उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर बच्चे के वायरल वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर कामरा ने ट्विटर पर शेयर किया था।