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इंडोनेशिया में शादी से पहले सेक्स पर सजा, पति-पत्नी के अलावा दूसरे से संबंध बनाने पर जेल: नए कानून का ड्राफ्ट तैयार

शादी से पहले सेक्स और अवैध संबंधों को इंडोनेशिया सरकार दंडनीय अपराध बनाने जा रही है। इसके दोषियों को जेल की सजा काटनी होगी। इंडोनेशिया की संसद में एक नया क्रिमिनल कोड (Criminal Code) पास होने वाला है, जिसके तहत शादी से पहले सेक्स (Sex Before Marriage) को अपराध मानते हुए दोषियों को एक साल तक जेल की सजा का प्रावधान किया जाएगा।

इस कानून को इंडोनेशिया की संसद जल्दी ही पास करने वाली है। नए कानून के तहत सिर्फ पति और पत्नी ही आपसी यौन संबंध स्थापित कर सकेंगे। पराए पुरुष या महिला से संबंध बनाने वालों को दंडित किया जाएगा। इसके राष्ट्रपति का अपमान और सरकारी विचारधारा का विरोध माना जाएगा। बता दें कि ये दोनों ही इंडोनेशिया में प्रतिबंधित हैं।

इस क्रिमिनल कोड के आर्टिकल 413 के पैराग्राफ 1 में कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति अगर किसी ऐसे शख्स से संबंध बनाता है, जो उसका पति या पत्नी नहीं है तो उसे व्यभिचार का दोषी माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उस पर जुर्माना लगाया जाएगा या उसे एक साल की सजा सुनाई जाएगी।” इसमें लिव-इन रिलेशन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

हालाँकि, इसमें एक शर्त भी जोड़ी गई है। शर्त में कहा गया है कि किसी व्यक्ति या महिला पर कार्रवाई तभी की जाएगी, जब ऐसा करने वाले के पति या पत्नी व्यभिचार की शिकायत दर्ज कराए। अगर आरोपित नाबालिग है तो उसके माता-पिता की ओर से शिकायत दर्ज करानी होगी। नए कानून पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है।

बता दें कि तीन साल पहले भी इस कानून को लागू करने की कोशिश की गई थी। उस दौरान दुनिया की सबसे अधिक आबादी अधिक मुस्लिम आबादी इस मुल्क में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे और इसका विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का हनन बताया था। इसके बाद वहाँ की सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए थे।

प्रस्तावित कानून को लेकर इंडोनेशिया के उप न्याय मंत्री एडवर्ड उमर शरीफ हियरीज ने कहा है कि नई आपराधिक संहिता 15 दिसंबर को पारित होने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “हमें इस क्रिमिनल कोड पर गर्व है और यह इंडोनेशियाई मूल्यों के अनुरूप है।” कानून का मसौदा बनाने में शामिल विधायक बंबांग वुरियन्टो ने कहा कि इसे अगले सप्ताह की शुरुआत में पारित किया जा सकता है।

अगर यह कानून पारित हो जाता है तो यह इंडोनेशिया के नागरिकों के साथ-साथ विदेशी यात्रियों पर भी लागू होगा। हालाँकि, इस कानून में समलैंगिकों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उन्हें इंडोनेशिया में विवाह करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। वहीं, बलात्कार के मामलों को छोड़कर गर्भपात करना या कराना भी प्रतिबंधित रहेगा।

इसको लेकर सोशल एक्टिविस्ट नुरीना सावित्री का कहना है कि इसमें 88 ऐसे अनुच्छेद हैं, जिनका अधिकारियों द्वारा गलत व्याख्या की जा सकती है और उनका दुरुपयोग हो सकता है। वहीं, इसके दर्जनों अनुच्छेदों का इस्तेमाल असहमति को दबाने के लिए किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को अपराध घोषित किया गया है। वहीं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और समलैंगिकों के खिलाफ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया गया है।

‘मंदिर की जमीन पर शव दफनाने की अनुमति नहीं’: मद्रास हाईकोर्ट ने दिया अतिक्रमण हटाने का निर्देश

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि शवों को दफनाने के लिए मंदिर की जमीन को कब्रिस्तान बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि मृत लोगों को भी सम्मान सहित दफनाने या दाह संस्कार करने का अधिकार है, लेकिन मंदिर की भूमि में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

जस्टिस आर महादेवन और जे सत्य नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि मंदिर की जमीन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधीन आती है और यह मंदिर की संपत्ति की कस्टोडियन है। कोर्ट ने बंदोबस्ती विभाग को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

दरअसल, तमिलनाडु के तेरुचिंदुर में स्थित अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के रास्ते में टोपी बेचने वाले एसपी सत्यानारायण ने साल 2018 में एक याचिका दी थी। अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि त्योहारों के मौसम में बड़ी संख्या श्रद्धालु मंदिर में आते हैं, लेकिन उन्हें आराम करने के लिए आसपास जगह नहीं बची है।

सत्यनारायण ने याचिका में कहा कि मंदिर के पास लगभग 30 एकड़ जमीन है, जिसका इस्तेमाल पहले आने वाले श्रद्धालुओं की गाड़ियों को पार्किंग करने और उनके आराम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अब इसका इस्तेमाल शवों को दफनाने और रात में अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है।

इस मामले में जिले के कलेक्टर को और मंदिर प्रशासन को साल 2017 में कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा यह जानते हुए कि जमीन मंदिर की है और वहाँ शवों को दफनाया जा रहा है, कोई कार्रवाई नहीं करना अक्षम्य है।

लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने मंदिर की जमीन को तीन महीने में अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने जिले के कलेक्टर को शवों को दफनाने के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने के लिए भी कहा।

हिंदुओं के 40 साल तक अवैध पार्टनर, मुस्लिम फॉर्मूला से 18 साल में लड़की की शादी करो… उपजाऊ जमीन में बीज बोओ: बदरुद्दीन अजमल

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के नेता बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओं को लेकर बेहद विवादित बयान दिया है। जनसंख्या वृद्धि पर बदरुद्दीन ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है, लेकिन हिंदू लड़कियों की शादी 40 साल की उम्र तक नहीं होती। हिंदू 40 साल के बाद शादी करते हैं, तब तक बच्चा पैदा करने की क्षमता नहीं रहती।

एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने हिंदुओं को नसीहत दी कि उन्हें मुस्लिमों की तरह अपनी लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में कर देनी चाहिए। बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि मुस्लिम लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र में हो जाती है, लेकिन हिंदू लड़कियों की शादी 40 साल की उम्र में भी नहीं होती। हिन्दू 40 साल की उम्र तक अवैध पार्टनर रखते हैं। बच्चे नहीं पैदा करते और पैसे बचाते हैं।

बदरुद्दीन अजमल के अनुसार हिंदू 40 साल की उम्र के बाद माँ-बाप के दबाव में या कहीं फँस गए तो शादी करते हैं। सवालिया लहजे में इसके बाद वो कहते हैं कि 40 की उम्र के बाद बच्चा पैदा करने की सलाहियत (क्षमता) कहाँ रहती है।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने सलाह दिया कि हिंदुओं को मुस्लिम फॉर्मूले को स्वीकार करना चाहिए और अपने बच्चों की शादी 20-22 साल की उम्र में कर देनी चाहिए। उनके अनुसार 18-20 साल की उम्र में लड़कियों की शादी करा दो और फिर देखो कितने बच्चे पैदा होते हैं। बदरुद्दीन ने आगे कहा कि जब आप उपजाऊ जमीन में बीज बोएँगे, तभी खेती अच्छी होगी। उसके बाद तरक्की ही तरक्की होगी।

एआईयूडीएफ चीफ बदरुद्दीन अजमल इस दौरान बीजेपी पर भी निशाना साध रहे थे। बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “बीजेपी सरकार मुसलमानों को हर जगह अलग-थलग करने में लगी हुई है। मोदी सरकार सिर्फ हिंदुओं को मजबूत बनाने का काम कर रही है।”

असम से भाजपा विधायक डी कलिता ने बदरुद्दीन अजमल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कलिता ने कहा, “आप मुसलमान हो और हम हिन्दू। क्या हमें आपसे सीखना है? यह भगवान राम और देवी सीता का देश है। हमें मुसलमानों से सीखने की जरूरत नहीं है।”

भाजपा विधायक डी कलिता ने बदरुद्दीन अजमल को राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के बयान न देने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि या तो आप अपने माताओं और बहनों को कलंकित करने वाले बयान न दें और अगर ऐसे बयान देने हैं तो बांग्लादेश चले जाएँ। उन्होंने कहा कि हिंदू इस तरह के बयान बर्दास्त नहीं करेंगे।

चीन से हैक हुए दिल्ली AIIMS के प्रमुख 5 सर्वर, डार्क वेब पर बेचा जा रहा 4 करोड़ मरीजों का डेटा: रिपोर्ट

लगभग सप्ताह भर से अधिक समय से हैक हुए देश के सबसे बड़े अस्पताल और दिल्ली स्थित AIIMS के सर्वर के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस हैकिंग के पीछे चीन (China) का हाथ बताया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि चीन AIIMS के लगभग 4 करोड़ लोगों का डेटा चुरा लिया है और इसे डार्क वेब पर बेच दिया है। इन डेटा में राजनेता, सेलिब्रिटी और बड़े अधिकारियों के डिटेल शामिल हैं।

हैकरों ने AIIMS के पाँच सबसे महत्वपूर्ण सर्वरों को निशाना बनाते हुए उन्हें हैक कर लिया था। इसके बदले हैकरों ने AIIMS से 200 करोड़ रुपए की फिरौती क्रिप्टोकरेंसी में माँगी थी। अब सामने आया है कि हैक किए गए डेटा को इंटरनेट के गुप्त हिस्से डार्क वेब पर इन्हें बेच दिया गया है। कहा जाता है कि डार्क वेब पर AIIMS डेटा के नाम से 1600 बार सर्च किया गया है।

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटजिक ऑपरेशन (IFSO) यूनिट के सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि AIIMS के कुल पाँच मुख्य सर्वर को हैक किया गया था। FSL की टीम अब डाटा लीक की जाँच कर रही है। उधर, IFSO के अधिकारियों का कहना है कि कोई अस्पताल का कोई भी डेटा गायब नहीं हुआ है। यह पहली बार हैकिंग का मामला IFSO द्वारा सँभाला जा रहा है।

कहा जा रहा है कि साइबर अटैक का उद्देश्य देश की मेडिकल सेवाओं को ठप करना और फिरौती की रकम वसूल करना था। इस हमले के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियाँ चौकन्नी हो गई हैं, क्योंकि AIIMS में हाई प्रोफाइल लोगों का भी इलाज होता है और उनके स्वास्थ्य से संबंधित डिटेल होता है। साइबर हमले से स्वास्थ्य सेवाएँ ठप हो जाती हैं और की मरीजों की जान खतरे में आ जाती है। मेडिकल डेटा ना मिलने से मरीजों के जरूरी ऑपरेशन रुक जाते हैं।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) ने इसे बड़ी साजिश माना है। उन्होंने आशंका जताई है कि इसके पीछे बड़े संगठित गैंग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि AIIMS सर्वर अटैक कोई सामान्य अटैक नहीं है। यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।

राजीव चंद्रशेखर ने आगे कहा कि सरकार डेटा ब्रीच को लेकर डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल लाने जा रही है। उसके लागू होने के बाद एम्स जैसी घटना होने पर पीड़ित व्यक्ति अपनी डेटा प्राइवेसी को लेकर डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के पास ईमेल भेजकर शिकायत कर सकता है।

बता दें कि हैक होने के 10 दिन बाद भी AIIMS के सर्वर को अभी बहाल नहीं किया जा सका है। हैकरों ने 23 नवंबर 2022 को सर्वर को हैक कर लिया था। सर्वर डाउन होने की वजह से AIIMS में मैनुअली काम हो रहा है। इसके कारण कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

एम्स में नेटवर्क सैनिटाइजेशन का काम चल रहा है। सर्वर और कंप्यूटर के लिए एंटीवायरस की व्यवस्था की गई है। अस्पताल के 5,000 कंप्यूटरों में से लगभग 1,200 कंप्यूटरों पर एंटीवायरस इंस्टॉल कर दिया गया है। वहीं, 50 में से 20 सर्वरों को स्कैन किया जा चुका है।

राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि CERT, NIA और दिल्ली पुलिस मामले की जाँच कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी संस्थाओं को साइबर अटैक से बचाने के लिए कई तरह के पुख्ता इंतजाम करती है, लेकिन AIIMS एक स्वायत्त संस्थान है, जो इस काम के लिए प्राइवेट एजेंसियों को हायर करती है। सरकार भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक स्टैंडर्ड तय करेगी। 

‘अल्लाह के पास बुलाओ, इस्लाम न कबूले तो जजिया वसूलो’: कतर के प्रोफेसर का ‘इस्लामी पाठ’, कहा- इनकार करे तो जंग लड़कर मार डालो

कतर यूनिवर्सिटी में इस्लामी स्टडीज पढ़ाने वाले प्रोफेसर डॉ शफी अल हाजरी ने अल-रय्यन टीवी पर 25 नवंबर को बयान दिया है कि इस्लाम को फैलाने का तीसरा और आखिरी कदम सिर्फ जंग है।

डॉ अल हाजरी ने कहा पहले लोगों को इस्लाम में आने के लिए बुलाओ। वो न आएँ तो उन्हें जिंदा रहने के लिए जजिया देने को कहो। वो तब भी मना करें तो उनपर बिन कोई दया दिखाए उन्हें मार डालो।

अल हाजरी ने कहा, “जंग, दावत का तीसरा चरण है। पहले हम अल्लाह के पास लोगों को बुलाते हैं। वो आते हैं तो उनके पास वही अधिकार होते हैं जो हमारे पास हैं। अगर वो नहीं आते तो उन्हें जजिया देना चाहिए। जजिया इसलिए ताकि वो दूसरों से सुरक्षित रह सकें। तीसरा चरण होता है कि अगर वो जजिया देने से भी मना करें तो उनसे जंग की जाए।”

बता दें कि जजिया एक कर की तरह होता है जिसे गैर मुस्लिमों से राज्य में उनकी सुरक्षा के नाम पर माँगा जाता है। इसी जजिया के नाम पर भारत में लंबे समय तक मुगलों ने हिंदुओं का शोषण किया था। इसे न दिए जाने पर मुगल शासकों को जहाँ अधिकार था कि वह गैर मुस्लिमों की संपत्ति को अयोग्य घोषित कर दें। वहीं हिंदुओं के पास धर्मांतरण के सिवा या जान देने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

कतर में धर्मांतरण का प्रयास

आज भी जजिया लेने की बात उस समय सामने आई है जब कतर आए दिन धर्मांतरण की खबरों को लेकर विवादों में है। वर्ल्ड कप के समय पता चल रहा है कि किस तरह-तरह के हथकंडे आजमा कर गैर-मुस्लिमों को मुस्लिम बनाया जा रहा है। मस्जिदों में बहुभाषी पुरुष और महिलाएँ इस्लाम और सहिष्णुता का पाठ लोगों को पढ़ा रहे हैं।

यात्रियों को वो बोर्ड दिखाए जा रहे हैं जिनमें इस्लाम के बारे में 30 से ज्यादा भाषाओं में लिखा है। इसके अलावा इस्लाम से जुड़ी किताबें भी लोगों को बाँटी जा रही हैं।

जाकिर नाइक और कतर

कतर में इस्लाम को बढ़ावा देने के कितने प्रयत्न किए जा रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने विजिटर्स को इस्लाम का पाठ पढ़वाने के लिए जाकिर नाइक को बुलाया था। हालाँकि भारत के विरोध के बाद बताया गया कि उन्होंने फीफा के लिए जाकिर नाइक को कोई भी इन्विटेशन नहीं भेजा।

‘नाम में सिंह क्यों लगाया, पगड़ी उतारो’: इंग्लिश मीडियम स्कूल के वाइस प्रिंसिपल फादर जेम्स ने सिख छात्र को धमकाया, कहा- ईसाई बनो

महाराष्ट्र (Maharashtra) के अहमदनगर स्थित एक क्रिश्चियन स्कूल के शिक्षकों पर सिख छात्र का धर्मांतरण (Religious Conversion) करने का दबाव डालने आरोप लगा है। जब छात्र ने मना किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई। इस मामले में छात्र के परिजनों ने स्कूल के दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

अहमदनगर के राहुरी फैक्ट्री इलाके में डी पॉल इंग्लिश मीडियम स्कूल है। यहाँ 14 साल का एक सिख विद्यार्थी पढ़ाई करता है। आरोप है कि स्कूल के दो पादरियों ने उसके बाल काट दिए और ईसाई धर्म अपनाने के लिए बाध्य किया। जब छात्र ने मना किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।

इस मामले में छात्र के परिजनों ने स्कूल के फादर जेम्स और फादर सैंटो के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A, 298, 153A और 506 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। दोनों शिक्षकों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता हरजीत सिंह वाधवा ने कहा कि इस घटना को लेकर सिख समुदाय में गुस्सा है और इस संबंध समुदाय के लोग जल्दी ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की जाएगी।

आरोप है कि नाबालिग सिख छात्र से स्कूल के उप प्रधानाध्यापक फादर जेम्स और सैंटो ने कहा, “नाम के आगे सिंह क्यों लगाते हो? पगड़ी क्यों लगाती हो, केश क्यों रखती हो, हाथों में कड़े क्यों पहनती हो? अगर तुम स्कूल में आना चाहते हो तो इन सबको हटा दो और दूसरे बच्चों की तरह बनो।”

छात्र का कहना है कि उसके पिता की पाँच साल पहले मौत हो गई थी। उसकी माँ और परिवार के अन्य सदस्य मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं। वह इस स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ता है। वहाँ फादर सैटों प्रिंसिपल, फादर जेम्स वाइस प्रिंसिपल और बबीता क्लास टीचर हैं।

छात्र ने आरोप लगाया, “अगस्त 2022 में एक दिन आरुष तानपुरे क्लास ले रहे थे, तभी रूबी सिस्टर क्लास में आ गईं। वह मेरे करीब आईं और मेरे दाहिने हाथ में हमारे सिख धर्म के निशान को देखकर मुझे खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि इसे हटाओ या फिर प्रिंसिपल से इसे पहनने की अनुमति लो। फिर मैं माँ को लेकर आया। प्रधानाध्यापक ने इसे निकालने के लिए कहा। उसके अनुसार मैंने स्कूल जाना शुरू किया।”

छात्र ने आगे बताया, “30 नवंबर 2022 को हमारे स्कूल में खेल प्रतियोगिता चल रही थी। मैं भी अपने दोस्तों के साथ एक तरफ खड़ा थ। उसी दौरान फादर जेम्स आए और कहा कि तुम्हारा नाम क्या है। मैंने नाम बताया तो उन्होंने कहा कि नाम में सिंह क्यों लगाए हो। मैंने कहा कि हमारे धर्म में नाम के आगे सिंह लगाना जरूरी है। फिर उन्होंने पगड़ी के बारे में पूछा और अंत में कहा कि इसको हटाओ और बाल कटाओ। अन्य बच्चों की तरह स्कूल आओ। हमारे धर्म को अपनाओ।”

छात्र ने बताया कि उसने फादर जेम्स को जवाब देते हुए कहा कि वह ना तो पगड़ी हटाएगा, ना ही बाल कटवाएगा और ना ही ईसाई बनेगा। इसके बाद फादर जेम्स उस पर चीखने लगे और मारने के लिए उसकी तरफ दौड़े। इसके बाद छात्र वहाँ से भागकर क्लास में आ गया। छात्र का कहना है कि फादर जेम्स उसके पीछे क्लास में आए और कहा कि अगर कैंसर हो जाए तो बाल कटवाना पड़ेगा। इसलिए ईसाई बन जाओ।

छात्र का कहना है कि घर आकर उसने इस बारे में अपनी दादी और माँ को बताया। उसके बाद उसकी दादी ने छात्र के चाचा को फोन कर उसके घर गई और घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद छात्र का चाचा उसे लेकर पुलिस स्टेशन गए और मामले में मुकदमा दर्ज कराया।

अन्नू है अनवर यह जानते ही हिंदू छात्रा ने तोड़ लिए रिश्ते, फिर भी नहीं माना: ब्लैकमेल कर रेप, इस्लाम कबूलने का डाला दबाव

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। अनवर खान पर पहचान छिपाकर हिंदू छात्रा से जान पहचान करने और फिर ब्लैकमेल कर रेप का आरोप है। वह पीड़ित छात्रा पर धर्म परिवर्तन के लिए भी दबाव डाल रहा था। पुलिस ने केस दर्ज कर अनवर को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित छात्रा ने पुलिस को बताया है कि अनवर से उसकी दोस्ती करीब 8 साल पहले सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। अनवर खान ने सोशल मीडिया पर अपना नाम अन्नू रखा हुआ था। संपर्क में आने के बाद दोनों का मिलना-जुलना भी हुआ। 5 साल पहले छात्रा को पता चला कि अन्नू का असली नाम अनवर है। वह एक मुस्लिम है। इसके बाद पीड़िता ने उससे दोस्ती तोड़ दी। मिलना और बात करना बंद कर दिया।

छात्रा के अनुसार इसके बाद भी अनवर बाज नहीं आया। जब उसे लड़की की सगाई होने की जानकारी मिली तो उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। छात्रा के घर पहुँचकर उसने सगाई तोड़ने की धमकी दी और इस्लाम कबूल कर निकाह का दबाव बनाया। आरोप है कि इसी दौरान अनवर ने छात्रा के साथ दुष्कर्म भी किया। छात्रा ने गुरुवार (01 दिसंबर, 2022) को यह बात अपने परिवारवालों को बताई। इसके बाद परिजनों ने हिंदूवादी संगठनों से संपर्क कर मदद माँगी और थाने पहुँचे।

मामला संज्ञान में आने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता थाने पहुँचे और आरोपित की गिरफ्तारी की माँग की। इसके बाद छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने रेप, धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने समेत कई अन्य धाराओं में अनवर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

इंदौर के सरकारी लॉ कॉलेज में लव जिहाद को बढ़ावा: ABVP का दावा, 6 शिक्षकों के पढ़ाने पर लगी रोक-जाँच रिटायर्ड जज से कराने का भरोसा

मध्य प्रदेश के इंदौर के एक सरकारी लॉ कॉलेज ने छह शिक्षकों के क्लास लेने पर रोक लगा दी है। इन पर लव जिहाद और मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देने, देश और सेना के खिलाफ दुष्प्रचार करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के आरोपों के बाद कॉलेज प्रबंधन ने यह कार्रवाई की है। साथ ही मामले की जाँच किसी रिटायर्ड जज से कराने का भरोसा भी दिलाया है।

मामला इंदौर के शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय का है। गुरुवार (01 दिसंबर, 2022) को आरोपित प्रोफेसर्स के खिलाफ छात्रों ने जमकर हंगामा भी किया। ABVP के नेतृत्व में महाविद्यालय प्रबंधन को शिकायत दी गई। शिकायत मिलने के बाद महाविद्यालय प्रबंधन ने जिला न्यायालय के किसी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से इन आरोपों की जाँच कराने का आश्वासन दिया है। साथ ही जाँच होने तक आरोपित शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक महाविद्यालय में एबीवीपी इकाई के अध्यक्ष दीपेंद्र ठाकुर ने महाविद्यालय के प्राचार्य इनामुर्रहमान को अमीक खोखर, मिर्जा मोजीज बेग, फिरोज अहमद मीर, सुहैल अहमद वानी, मिलिंद कुमार गौतम और पूर्णिमा बिसे के खिलाफ शिकायत सौंपी है। प्रोफेसर्स पर मजहबी कट्टरता फैलाने, लव जिहाद को बढ़ावा देने और देश विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा देने जैसे आरोप हैं। एबीवीपी का आरोप है कि छात्रों के अलग-अलग मैसेजिंग ग्रुप बनाए गए है जिनका इस्तेमाल नफरत फैलाने वाले संदेशों को अग्रेषित करने के लिए किया जाता है। आरोप है कि शिक्षक कॉलेज के नए छात्र-छात्राओं के बीच मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देते हैं। उनके मन में भारत की सरकार तथा सेना को लेकर नकारात्मक विचार डालते हैं।

प्रोफेसर्स के खिलाफ प्रदर्शन करते छात्र (फोटो साभार नेटवर्क 18)

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि हर शुक्रवार को महाविद्यालय के प्राचार्य मुस्लिम शिक्षक और मुस्लिम समुदाय के छात्र-छात्रा मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हैं। इस वक्त कक्षाएँ नहीं लगती हैं। शिकायत में महाविद्यालय परिसर में मांस खाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। आरोप यह भी है कि शिक्षक नई शिक्षा नीति के खिलाफ भी छात्रों को भड़काते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ शिक्षक छात्राओं को बाहर चलने और अकेले में कैफे में मिलने के लिए भी बुलाते हैं। इंटरनल मार्क्स का हवाला देकर छात्राओं पर दबाव बनाया जाता है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राचार्य इनामुर्रहमान ने कहा है कि महाविद्यालय का माहौल वैसा नहीं है, जैसे आरोप लगाए गए हैं। एबीवीपी की शिकायत गंभीर है और मैंने जिला न्यायालय के किसी रिटायर्ड जज से इसकी जाँच कराने का निर्णय लिया है। प्राचार्य ने बताया कि शैक्षणिक कार्य से अस्थायी तौर पर हटाए गए लोगों में दो हिंदू शिक्षक भी हैं, जिनके खिलाफ एबीवीपी ने मनमर्जी से काम करने, विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए हैं।

ब्रेकिंग न्यूज! रवीश कुमार के जाते ही NDTV पर एंकरिंग करने लगे संबित पात्रा, निष्पक्ष रहने की खाई कसम: वायरल Video का क्या है सच

एनडीटीवी (NDTV) से रवीश कुमार (Ravish Kumar) के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर संबित पात्रा (Sambit Patra) की एक वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि वो एनडीटीवी के नए प्राइम टाइम होस्ट हैं।

देख सकते हैं कि इस वीडियो में एडीटीवी के लोगो हैं। ऊपर गुजरात चुनाव की तस्वीरें हैं। नीचे संबित पात्रा की वीडियो है। इस वीडियो में संबित पात्र कसम खाते दिख रहे हैं कि वो एंकर सीट पर बैठकर कोई पक्षपात नहीं करेंगे किसी पार्टी का पक्ष नहीं लेंगे।

सचिन नाम के यूजर इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखते हैं, “गौतम अडानी ने प्राइम टाइम के लिए रवीश कुमार की रिप्लेसमेंट ढूँढ निकाली है।”

आशिक अपने ट्वीट में कहते हैं, “रवीश के इस्तीफे के बाद संबित पात्रा एनडीटीवी पर होस्ट करेंगे।”

अबूशहमा खान लिखते हैं, “संबित पात्रा एनडीटीवी के प्राइमटाइम पर आधिकारिक तौर पर होस्ट बना दिए गए हैं।”

अब संबित पात्रा की इस वीडियो का सच क्या है आइए जानते हैं।

जैसा कि सोशल मीडिया पर शेयर हो रही वीडियो देखने से ही पता चल रहा है ये एक एडिट हुई क्लिप है। संबित पात्रा एनडीटीवी के लिए बल्कि टीवी टुडे के लिए ‘टू द प्वाइंट’ शो कर रहे हैं। इस वीडियो को 2018 में पोस्ट किया गया था। उस समय संबित को टीवी टुडे ने गेस्ट एंकर बनाकर बुलाया था।

देख सकते हैं कि गेस्ट के तौ पर जीवीएल नरसिम्हा, प्रियंका चतुर्वेदी और सपा प्रतिनिधि मौजूद हैं। वीडियो में संबित प्रियंका को कॉन्ग्रेस का बता रहे हैं जबकि हाल में बीते चुनावों के वक्त प्रियंका शिवसेना से जुड़ी थीं और तब से इसी पार्टी में है।

‘पेट से बाहर आने से पहले पूछेगा बच्चा…’: आजम खान पर FIR, बोलीं शहनाज बेगम- बहुत गंदा बोला, औरतों को किया लज्जित

समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सजायाफ्ता नेता आजम खान (Azam Khan) की मुश्किलें कम कहाँ से होंगी, वे और बढ़ती ही जा रही है। उनकी मुश्किलों को बढ़ाने में उनकी जबान का खास योगदान है। आजम खान ने एक बार फिर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला बयान दिया है। इसको लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।

दरअसल, 28 नवंबर 2022 को रामपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार असीम रजा के पक्ष में चुनाव प्रचार करने के लिए आजम खान गंज थाना के शुतुरखाना मुहल्ले में पहुँचे थे। यहाँ सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विवादास्पद बात कह दी।

आजम खान ने कहा, “बहुत कम अकल है। अगर अकल होती तो जो लोग आज दावा कर रहे हैं कि 35 बरस बाद हमें छोड़ा है तो ये हमें छोड़ देते, इस काबिल मैं छोड़ देता इन्हें? जो आज तुम्हारे और हमारे साथ हुआ है, चार सरकारों में रहते हुए मैंने ऐसा किया होता तो बच्चों तुम्हारी मुस्कुराहट की कसम खाकर कहता हूँ, माँ से पेट से पैदा होने से पहले बच्चा कहता कि पूछ लो आजम खान से कि बाहर निकलना भी है या नहीं।”

दरअसल, आजम खान भाजपा सरकार पर इंतकाम लेने का आरोप लगा रहे थे। उन्होंने कहा था, “आज जो मेरे और हमारे लोगों के साथ हो रहा है, उसका इंतकाम लेने के लिए कोई जरूर पैदा होगा। भले ही मैं उस दिन रहूँ या न रहूँ, लेकिन आप तो रहेंगे ही।”

आज खान के इन बयानों पर शुतुरखाना की एक महिला शहनाज बेगम की गंज थाने में तहरीर दी। इसके आधार पर उनके खिलाफ IPC की धारा 294(b), 354(क)1(iv), 504, 505(2), 509, 153-A(1) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है।

शहनाज बेगम ने कहा कि मोहम्मद आजम खान का बयान बहुत गंदा था और उन्हें बहुत बुरा लगा। इसलिए उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज देकर मुकदमा दर्ज कराया है। अपने शिकायत में शहनाज ने लिखा है, “आजम खान ने पूरे महिला समाज/मातृत्व को अमर्यादित भाषा इस्तेमाल कर लज्जित और अपमानित किया है।”

अपनी शिकायत में आजम खान ने कहा, “रामपुर के गंज थाना के मुहल्ला खजान खां के कुआं में जनसभा को संबोधित करते हुए मोहम्मद आजम खान ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की ओर इंगित करते हुए कहा कि ‘ऐ बेगैरत आवाज और बता क्या देना चाहता है तू, ऐ जमाने के कैंसर-ए-जिल्लत और खबानी के लंबरदार और बता इस शहर को क्या देना चाहता है तू, ऐ बेहया अपनी माँ की कोख से जने हुए और बता क्या देना चाहता है तू’।”

आजम खान का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें वे चंद्रशेखर आजाद जिंदाबाद बोलने के बाद ‘एसपी साहब जिंदाबाद, सीओ साहब जिंदाबाद, पुलिसवालों जिंदाबाद, तुम्हारे डंडे जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। दरअसल, आजम खान चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के साथ-साथ पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों पर भी अपनी झल्लाहट और खुन्नस निकाल रहे हैं। इसलिए कभी शायरी के अंदाज में गाली तो जिंदाबाद के नारे के साथ उन पर कटाक्ष कर रहे हैं।

इससे पहले भी आजम खान ने विवादित बयान देते हुए कहा था, “मेरी मौत चाहते हो तो मुझे यहाँ गोली मार दो। खुदा की कसम वो मौत मेरी जिंदगी की तकलीफों से सस्ती होगी। तुम्हें मालूम है, हम जुल्म के कितने पहाड़ सह रहे हैं। हम पर हँसो, बेच दो अपना जमीर, बेच डालो इनके टके के लिए और बता डालो उन अफसरों को जो हमारी बर्बादी चाहते हैं।”

बता दें कि अमर्यादित भाषा और भड़काऊ बयान देने के कारण ही सपा नेता आजम खान को 3 साल की कैद की सजा हुई है। इसके कारण उनकी विधानसभा की सदस्यता भी रद्द कर दी गई और मतदान करने पर भी रोक लगा दिया गया। आजम की सदस्यता रद्द होने के कारण ही रामपुर में विधानसभा उपचुनाव हो रहे हैं, जहाँ वे आसिम रजा का प्रचार कर रहे हैं।