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‘जो नरसंहार का दर्द नहीं जानता, वो कश्मीरी पंडितों का दर्द कैसे समझेगा’: इजरायली फिल्ममेकर पर भड़के भारतीय कलाकार, कहा- न फिल्म देखी, न कुछ सोचा, बस बोल दिया

‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर इजरायल के फिल्मनेकर नादव लैपिड (Nadav Lapid) के आपत्तिजनक बयान पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। खुद भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन (Naor Gilon) ने जहाँ लैपिड के बयान से किनारा कर लिया था और उनको फटकार लगाई थी। वहीं अब फिल्म के कलाकार भी सामने आकर विरोध जता रहे हैं। फिल्म के मुख्य कलाकार अनुपम खैर, पुनीत इस्सर और पल्लवी जोशी ने लैपिड के बयान पर कड़ा एतराज जताया है।

भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत कोब्बी शोशानी और बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने मंगलवार (29 नवंबर 2022) को इस मुद्दे पर एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस मौके पर अनुपम खेर ने कहा, “अगर किसी को कोई फिल्म पसंद नहीं आती है तो वे इस बारे में कह सकते हैं लेकिन एक जूरी सदस्य होने के नाते आप ‘वल्गर’ और ‘प्रोपेगेंडा’ शब्द का उपयोग नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि यह एक अभद्र टिप्पणी है। इसे एक ऐसे व्यक्ति ने कहा है जो एक एक अवसरवादी है और जिसने इस मंच का उपयोग अपने व्यक्तिगत प्रचार के लिए किया।”

द कश्मीरी फाइल्स के अभिनेता ने कहा, “इस घटना ने केवल दोनों देशों के संबंधों को मजबूत किया है क्योंकि जब कोई किसी चीज़ का विरोध करता है तो पता चलता है कि दोनों देश किस तरह से एक साथ हैं। यहाँ आना महावाणिज्यदूत का इसी ओर इशारा है, क्योंकि दोनों देशों ने दर्द का अनुभव किया है। जब वह (लैपिड) होलोकॉस्ट के दर्द को नहीं समझता है तो वह कश्मीरी पंडितों का दर्द कैसे समझेगा?”

वहीं महावाणिज्यदूत ने कहा कि वह फिल्म निर्माता द्वारा दिए गए बयान को स्वीकार नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि वह उस बयान के लिए माफी माँगते हैं जो एक निजी राय थी और इसका आधिकारिक और अनौपचारिक रूप से इजरायल से कोई लेना-देना नहीं है।

वहीं ‘द कश्मीर फाइल्स’ में अहम किरदार निभाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, ”फिल्म इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जो इंडिपेडेंट फिल्ममेकर्स के खिलाफ है जिनमें सच बोलने की हिम्मत की है। ये नादव लैपिड जैसे लोग उनके माउथपीस हैं, जिन्होंने ऐसे अपशब्द इस्तेमाल किए हैं। क्या यह व्यक्ति उस नरसंहार के बारे में भूल गया है जो यहूदियों को जर्मन द्वारा सहना पड़ा था। एक इजरायली होकर, एक यहूदी होकर, आपको इस विषय पर संवेदना होनी चाहिए। लेकिन आपने ना फिल्म ढ़ंग से देखी, ना कुछ सोचा और आप ऐसे शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि ये तो क्लीयर है कि ये शब्द उनके मुँह में डाले गए हैं। ऐसी फिल्म जिसने सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं। जिस छोटी सी फिल्म ने 400 करोड़ का बिजनेस किया है। वो फिल्म जिसने रिएलिटी दिखाई है, वो फिल्म जिसे क्रिटिक्स ने भी पसंद किया है, आप उस फिल्म को लेकर ऐसी बातें कह सकते हैं।

वहीं फिल्म की कलाकार और सह निर्माता पल्लवी जोशी ने भी लैपिड के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दशकों तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय कश्मीरी पंडित समुदाय की पीड़ा पर खामोश रहा। उन्होंने कहा कि 3 दशकों के बाद, भारतीय फिल्म उद्योग को आखिरकार एहसास हुआ कि उसे भारत की कहानी को सच्चाई और निष्पक्षता से बताने की जरूरत है।

अपने पति और फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का जिक्र करते हुए पल्लवी ने कहा, ”विवेक और मैं हमेशा से जानते थे कि ऐसे तत्व हैं जो स्क्रीन पर सच्चाई को देखना पसंद नहीं करेंगे, लेकिन यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक रचनात्मक मंच का इस्तेमाल किया गया। नरसंहार से इनकार करने वाले के असभ्य और अश्लील बयानों के खिलाफ ‘द कश्मीर फाइल्स’ का बचाव करने के लिए भारत के लोग जिस तरह से खड़े हुए हैं, उससे हम अभिभूत हैं।”

दरअसल भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल (IFFI) के जूरी हेड और इजराइल के फिल्मकार नादव लैपिड (Nadav Lapid) कार्यक्रम के समापन के दौरान ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रोपेगेंडा और वल्गर फिल्म बता दिया था। उन्होंने कहा था कि यह मँच इस तरह की फिल्मों को दिखाने के लिए नहीं है।

सम्राट अशोक के 2300 साल पुराने शिलालेख को बना दिया था मजार, अब ASI ने वापस लिया नियंत्रण: चंदन पहाड़ी के स्मारक पर चढ़ा दी थी चादर

बिहार के सासाराम में कट्टरपंथियों द्वारा सम्राट अशोक के लगभग 2300 साल पुराने शिलालेख पर कब्जा करके उस पर मजार बनाने के मामले में एक नई जानकारी सामने आई है। मंगलवार (29 नवंबर 2022) को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, “सम्राट अशोक के शिलालेखों का लंबे समय तक अतिक्रमण किया गया। अब इस जगह की चाबी, जो एक संरक्षित स्मारक है, जिला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ASI के अधिकारियों को सौंप दी गई है।”

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सासाराम (232 या 231 ईसा पूर्व) के अशोक शिलालेख में ब्राह्मी लिपि में आठ पंक्तियाँ हैं। शिलालेख का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। शिलालेखों में संभवतः बुद्ध की मृत्यु का उल्लेख करने वाली एक तिथि भी शामिल है, लेकिन इसकी कोई ठोस जानकारी अभी तक नहीं मिली है।

मालूम हो कि रोहतास की चंदन पहाड़ी में स्थित महान मौर्य सम्राट अशोक के एक ऐतिहासिक शिलालेख पर मजार बना दी गई थी। पूरे देश में अशोक के ऐसे आठ शिलालेख हैं, जिनमें बिहार में केवल एक ही है। इस शिलालेख पर चूने से पोताई करवाकर चादर चढ़ा दी गई थी। इसके बाद से इसे सूफी संत की मजार घोषित कर सालाना उर्स का आयोजन किया जा रहा था। यही नहीं, शिलालेख की घेराबंदी करने के बाद कट्टरपंथियों द्वारा उसके गेट पर ताला लगाकर रखा जा रहा था।

गौरतलब है कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस शिलालेख को वर्ष 2008 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था। सासाराम शहर की पुरानी ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) और नए बाइपास के बीच कैमूर पहाड़ी श्रृंखला में आशिकपुर पहाड़ी की चोटी से लगभग 20 फीट नीचे स्थित कंदरा में स्थापित शिलालेख के पास ASI ने संरक्षण संबंधी बोर्ड भी लगाया था, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने इसे साल 2010 में उखाड़कर फेंक दिया।

साल 2008, 2012 और 2018 में ASI ने अशोक शिलालेख के पास अतिक्रमण हटाने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) से कहा था। इसके बाद जिलाधिकारी ने सासाराम के एसडीएम को कार्रवाई का आदेश दिया था। एसडीएम ने शिलालेख पर अवैध कब्जा करने वाले मरकजी मोहर्रम कमेटी से मजार की चाबी तत्काल प्रशासन को सौंपने के कहा था, लेकिन कमिटी ने आदेश को अनसुना कर दिया था। धीरे-धीरे यहाँ एक बड़ी इमारत अवैध रूप से बना दी गई। इस शिलालेख को ब्रिटिश राज में खोजा गया था और साल 1917 में इसे संरक्षित किया था।

पटना में ताड़ी बैन के खिलाफ पासी समाज का प्रदर्शन, बिहार पुलिस ने बरसाई लाठियाँ, पत्रकार भी घायल: प्रदर्शनकारी बोले- नीतीश सरकार झूठे केस में फँसा रही है

बिहार की राजधानी पटना में पुलिस और पासी समाज के प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पासी समाज के लोग अपनी माँगों को लेकर जुलूस निकाल रहे थे। समाज के लोग विधानसभा घेराव करने के लिए आगे बढ़ रहे थे। पटना के जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

पटना में पासी समाज का मार्च

रिपोर्ट्स की मानें तो पासी समाज के लोग अपनी माँगों को लेकर राजभवन की तरफ मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारी जैसे ही डाकबंगला की तरफ बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुलिस का आरोप है कि जब उन्हें रोकने के प्रयास किए जा रहे थे तो कुछ उपद्रवी पथराव करने लगे। जिसके कारण पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। लाठीचार्ज के बाद भगदड़ मच गई। भीड़ को हटाने के लिए वाटर कैनन भी मँगवाया गया। पुलिस का दावा है कि पुलिस के 67 जवान घायल हो गए हैं। खबर है कि कुछ पत्रकारों को भी चोटें आई हैं। इधर पासी समाज के लोगों का आरोप है कि राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस, पासी समाज के लोगों को झूठे केस में फँसा कर जेल भेज रही है।

क्यों हो रहा है प्रदर्शन ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक ताड़ी को बैन करने के खिलाफ पासी समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी सिलसिले में आज समाज के लोग विधानसभा का घेराव करने निकले थे। पासी समाज के लोगों का कहना है कि पासी समाज के लिए रोजगार का मुख्य साधन ताड़ी का कारोबार है जिसपर रोक लगा दी गई है। इससे तबके के लोग बेरोजगार हो गए हैं। सरकार पासी समाज के लोगों के पेट पर लात मार रही है। प्रदर्शन कर रहे पासी समाज के लोगों ने ताड़ी पर से प्रतिबंध हटाने की माँग की है।

‘हाथ में पिस्तौल, सर पर सत्ता और शराब का नशा’ : दिल्ली में MCD चुनाव से पहले AAP उम्मीदवार के डांस की Video वायरल, BJP ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हर रोज उनके किसी नेता का कारनामा सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है और पार्टी इस पर जवाब नहीं दे पाती। सत्येंद्र जैन को लेकर कटघड़े में खड़ी आम आदमी पार्टी को उनके एमसीडी उम्मीदवार ने नई परेशानी में डाल दिया है। ‘आप’ उम्मीदवार जोगेन्द्र सिंह (बंटी) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जोगेन्द्र सिंह नशे की हालत में हाथ में पिस्तौल ले कर थिरकते नजर आ रहे हैं।

बीजेपी ने भी जोगिंदर बंटी का वीडियो शेयर कर ‘आप’ को निशाने पर लिया है। वीडियो में बंटी के साथ कुछ और लोग भी हैं, जो एक गाने पर नाचते दिखाई पड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक बंटी एमसीडी चुनाव में वार्ड नंबर 19 से आम आदमी पार्टी उम्मीदवार हैं।

बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा, “केजरीवाल की सरकार, केजरीवाल का पार्षद… वार्ड नंबर 19 से आप प्रत्याशी जोगेन्द्र सिंह शराब और सत्ता के नशे में धुत पिस्तौल लिए हुए हैं। भ्रष्ट मंत्री और अपराधी प्रत्याशी यही आम आदमी पार्टी का असली चेहरा है। यह कट्टर गुंडा है! लेकिन केजरीवाल के लिए वो भी भारत रत्न का हकदार है!”

दिल्ली में 4 दिसंबर, 2022 को होने वाले एमसीडी चुनावों से पहले, तिहाड़ जेल में पार्टी के मंत्री सत्येंद्र जैन के कई वीडियो सामने आए जिसमें उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट मिलता नजर आ रहा है। इन वीडियो के जरिए बीजेपी पहले से ही आप के खिलाफ आक्रामक है। पहले वीडियो में आप नेता सत्येंद्र जैन को मसाज मिलता नजर आया एक दूसरे वीडियो में जैन विशेष भोजन का आनंद ले रहे थे।

एक अन्य वीडियो में उनके बैरक की सफाई के साथ लोग उनके बिस्तर लगाते भी दिख रहे थे। इससे पहले सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल के निलंबित अधीक्षक अजीत कुमार के साथ बात करते हुए नजर आए थे। अब आप प्रत्याशी जोगेन्द्र नशे में तमंचे पर डिस्को कर रहे हैं।

गुजरात में भी बीजेपी ने ‘आप’के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया का नया वीडियो जारी किया है। दावा किया जा रहा है कि इटालिया ने स्वामीनारायण के भक्तों के विश्वास को मूर्खतापूर्ण कहा है। वीडियो में इटालिया कुछ संप्रदाय के लोगों के खान-पान पर गुजराती में टिप्पणी कर रहे हैं।

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण की वोटिंग 1 दिसंबर को है जबकि दिल्ली नगर निगम के 250 पार्षदों के चुनाव के लिए चार दिसंबर को निकाय चुनाव होने हैं। दिल्ली निकाय चुनाव (Municipal election) के नतीजे 7 दिसंबर को घोषित किए जाएँगे।

हैदराबाद से बरामद हुई बिहार के पूर्णिया से अपहृत नाबालिग लड़की, आरोपित फराज़ भी पुलिस की हिरासत में: थाना प्रभारी मेराज हसन पर उठे थे सवाल

बिहार पुलिस द्वारा पूर्णिया से अपहृत हुई नाबालिग लड़की को हैदराबाद से सही-सलामत बरामद कर लिए जाने सूचना है। बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपित फ़राज़ को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने पीड़िता के नाबालिग होने की जानकारी देते हुए दर्ज FIR में सुधार के निर्देश दिए हैं। वहीं लोगों से लड़की की तस्वीरें वायरल न करने की अपील भी की गई है।

‘राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR)’ के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने पीड़िता की बरामदगी की जानकारी दी है। 29 नवंबर, 2022 (मंगलवार) को उन्होंने सुबह 9:28 पर इस बाबत ट्वीट भी किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लड़की की फोटो पहले शेयर कर चुके लोगों से इसे डिलीट कर लेने को कहा है।

ऑपइंडिया ने 28 नवम्बर, 2022 (सोमवार) को अपनी रिपोर्ट में भी पीड़िता के परिजनों के हवाले से लड़की के नाबालिग होने की जानकारी दी थी। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित फ़राज़ को भी हिरासत में ले लिया गया है। एक दिन पहले ऑपइंडिया से बात करते हुए बनमनखी थाना प्रभारी ने भी पुलिस टीम के फ़राज़ और पीड़िता की तलाश में निकलने की जानकारी दी थी।

बताया जा रहा है कि आगे की कार्रवाई के लिए पीड़िता और आरोपित को पूर्णिया लाने की प्रक्रिया चल रही है। गौरतलब है कि पीड़िता की बरामदगी के लिए हिन्दू संगठनों ने पूर्णिया में प्रदर्शन किया था। इस दौरान मामले को लव जिहाद बताते हुए थाना प्रभारी मेराज हुसैन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए थे।

‘एक भी दृश्य झूठा साबित हुआ तो फ़िल्में बनाना छोड़ दूँगा’: विवेक अग्निहोत्री का करारा पलटवार, IFFI में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को बताया गया था ‘प्रोपेगंडा और भद्दा’

IFFI गोवा में इजरायल के वामपंथी फिल्ममेकर नादव लापिड द्वारा द कश्मीर फाइल्स पर की गई टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ रहा है। उन्होंने इस फिल्म को भद्दी और प्रोपेगेंडा बताया है। अब इस मुद्दे पर विवेक अग्निहोत्री की टिप्पणी आई है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी फिल्म में दिखाया एक भी सीन फर्जी निकला तो वह फिल्में बनाना छोड़ देंगें।

IFFI जूरी हेड नादव के बयान के बाद विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “इफ्पी जूरी हेड ने इस फिल्म को भद्दी और प्रोपगेंडा बताया है। मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है। इस तरह की बातें तो सारे आतंकी संगठन, अर्बन नक्सल और भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग करते हैं। लेकिन मेरे लिए जो सबसे हैरानी की बात हुई है वो ये कि भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मंच में भारत को कश्मीर से अलग करने वाले आतंकियों के नैरेटिव को समर्थन किया गया और कुछ भारतीयों ने ही इसका इस्तेमाल किया। आखिर ये लोग कौन हैं?”

विवेक कहते हैं, “ये वही लोग हैं जो 4 साल पहले जब मैंने फिल्म पर रिसर्च शुरू किया था तब से फिल्म को प्रोपगेंडा बताते हैं। 700 लोगों के साक्षात्कार के बाद ये फिल्म बनी है। क्या वो 700 लोग जिनके भाई-बहनों को काट दिया गया, गैंगरेप किया गया, 2 टुकड़ों में बाँट दिया गया, क्या वो लोग प्रोपेगेंडा और अश्लील बातें कर रहे थे।”

उन्होंने सवाल किया कि जो कश्मीर कभी पूर्ण रूप से हिंदू सरजमीं थी वहाँ आज भी हिंदुओं को चुन चुनकर मारा जाता है क्या यह प्रोपेगेंडा और अश्लील बात है। उन्होंने यासीन मलिक का जिक्र कर कहा कि जब उसने अपने गुनाह कबूल किए और वो जेल में सड़ रहा है तो क्या ये प्रोपेगेंडा और अश्लील बात है।

फिल्म के निर्माता ने वीडियो में आगे कहा, “ये सवाल हमेशा से उठता है कि ये फिल्म एक प्रोपेगेंडा फिल्म है। मतलब वहाँ कभी हिंदू नरसंहार हुआ ही नहीं। तो मैं आज विश्व के सभी बुद्धिजीवियों को, अर्बन नक्सलियों को चुनौती देता हूँ। इन इजरायल के महान फिल्ममेकर को भी चैलेंज करता हूँ कि कश्मीर फाइल्स का एक शॉट भी कोई साबित कर दे कि ये झूठा है तो मैं फिल्में बनाना ही छोड़ दूँगा।”

उन्होंने कहा कि ये जो लोग भारत के खिलाफ खड़े होते हैं ये वही लोग हैं जिन्होंने मोपला नरसंहार का सत्या किसी के सामने नहीं आने दिया, जिन्हें डायरेक्ट एक्शन डे का सत्य सामने नहीं आने दिया, कश्मीर का सत्य नहीं सामने आने दिया। ये वही लोग है जो कोविड के समय जलती चिताओं को चंद डॉलरों में बेच रहे थे और आज जब वो द वैक्सीन वॉर फिल्म बना रहे हैं तो वो इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं।

बता दें कि IFFI गोवा में जूरी हेड के तौर पर बुलाए गए इजरायली फिल्ममेकर ने फिल्म को भद्दी और प्रोपेगेंडा बताया था जिसके बाद भारत के कई वामपंथियों ने उनका समर्थन किया और हिंदू नरसंहार पर सवाल उठाए थे।

अपनी मातृभूमि इजरायल से ही नफरत करता है IFFI में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को भला-बुरा कहने वाला फिल्म निर्माता: यहूदी पहचान से घृणा, फिलिस्तीन की तरफदारी

गोवा में आयोजित हुए 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल (IFFI) में जूरी बोर्ड के प्रमुख नादव लापिड (Nadav Lapid) कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को बताने वाली फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ पर विवादित टिप्पणी ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ कहा है। उसकी इस बयान की हर तरफ आलोचना हो रही है। नादव लापिड का विवादों से पुराना नाता रहा है यहाँ तक कि उसने अपने देश इजरायल को ‘बीमार आत्मा’ करार दिया था।

दरअसल, नादव लैपिड वामपंथी विचारधारा ग्रसित इजरायली फिल्म निर्माता है। इसने अब तक कुल 13 फिल्में डायरेक्ट की हैं। नादव लैपिड को इजरायल से नफरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। यहूदियों के एक मात्र देश और उसकी मातृभूमि को लेकर नादव लैपिड के विचार कितने अच्छे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसके विचारों में इजरायल के विरोधी देश फिलीस्तीन की तरफदारी नजर आती है।

एक इंटरव्यू में लैपिड ने अपनी फिल्म ‘सिनोनिम्स’ पर बात करते हुए इजरायल को लेकर कहा था, “फिल्म इजरायल की आत्मा के बारे में बात करती है। इजरायल की आत्मा एक बीमार आत्मा है। इजरायल के अस्तित्व के गहरे सार में कुछ गलत सा सड़ा हुआ है। यह गलत सिर्फ बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल के प्रधानमंत्री) नहीं है। बल्कि, मुझे लगता है कि इस इजरायली बीमारी या प्रकृति की विशेषता युवा इजरायली लोग हैं जो मस्कुलर बॉडी देखकर खुश होते हैं। लेकिन, न तो कोई सवाल नहीं उठाते हैं और न ही कोई संदेह नहीं करते। उन्हें सिर्फ इजरायली होने में गर्व होता है।”

एक अन्य इंटरव्यू में नादव लैपिड ने अपने देश इजरायल और वहाँ के लोगों के साथ अपने संबंधों के बारे में कहा था, “मुझे लगा कि इजरायल मेरे लिए असहनीय हो गया है। मेरी फिल्म सिनोनिम्स को इजरायल के प्रति बहुत आलोचनात्मक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।” 

उसने यह भी कहा था, “मैं हमेशा मानता था कि इजरायल की कहानी एक निश्चित राजनीतिक मुद्दे को लेकर नहीं है। बल्कि, यह सभी इजरायली लोगों की कहानी है। प्रोपेगैंडा सिस्टम के कारण, इजरायली पूरी तरह से अंधे हो सकते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि उनकी आँखें खोलने के लिए, उनके शरीर को हिलाना और उनके सिर पर मारना काफी नहीं है। इसके लिए और भी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। इजरायल के लोग बड़ी ताकतों के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

वामपंथी विचारधारा से ग्रसित नादव लैपिड (Nadav Lapid) उन 250 इजरायली फिल्म निर्माताओं के समूह में भी शामिल है, जिन्होंने शोमरोन (सामरिया/वेस्ट बैंक) फिल्म फंड के लॉन्च के विरोध करते हुए ‘खुले पत्र’ पर हस्ताक्षर किए थे। फिल्म निर्माताओं का मानना था कि इस फंड को बनाने का सिर्फ एक लक्ष्य था कि इजरायली फिल्म निर्माताओं को वित्तीय सहायता और पुरस्कार देकर उस कारोबार को सफेद कर सके।

शोमरोन फिल्म फंड का आधिकारिक लक्ष्य वेस्ट बैंक (यहूदिया और सामरिया) में रहने वाले यहूदियों को अनुदान देना था। साथ ही वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों द्वारा बनाई गई फिल्मों के प्रोडक्शन को अनुदान देना था। ऐसे में नादव लापिड और उसके सहयोगियों के मानना था कि यह फंड फिलिस्तिनियों के शोषण के लिए बनाया गया है। बता दें कि वेस्ट बैंक को लेकर इजरायल और फिलस्तीन के बीच लंबे वक्त से विवाद चलता आ रहा है।

‘IFFI जूरी के मुखिया ने कश्मीरी हिन्दुओं के बलिदान का उड़ाया मजाक’: सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने दर्ज कराई पुलिस शिकायत, इजरायली राजदूत ने अनुपम खेर से माँगी माफ़ी

सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक वकील ने मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को गोवा पुलिस के पास IFFI जूरी हेड नादव लैपिड (Nadav Lapid) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लैपिड पर कश्मीरी हिंदुओं के बलिदान का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया है। एडवोकेट विनीत जिंदल (Vineet Jindal) ने नादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 121, 153, 153A और B, 295, 298 और 505 के तहत शिकायत रजिस्ट्रेशन करने को कहा है।

वहीं, मुबंई में आज मिडवेस्ट इंडिया में इजरायल के महावाणिज्यदूत कोब्बी शोशानी ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर बहस से भारत और इजरायल के बीच संबंध मजबूत होंगे। कोब्बी शोशानी ने ​नादव की विवादित टिप्पणी से खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्होंने यह फिल्म देखी है, उनकी इस पर अलग राय है।

शोशानी ने एक संवाददाता सम्मेलन में अभिनेता अनुपम खेर के साथ मंच साझा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ प्रोपेगेंडा नहीं बल्कि एक शानदार फिल्म है, जो कश्मीर के लोगों की पीड़ा को व्यक्त करती है। शोशानी ने मीडियाकर्मियों से आगे कहा, “मैंने सुबह सबसे पहले अपने दोस्त अनुपम खेर को फोन किया था, वो भी सिर्फ माफी माँगने के लिए। मैं उस विवादित टिप्पणी के लिए माफी माँगता हूँ, जो (लैपिड की टिप्पणी) एक निजी राय थी। लैपिड की टिप्पणी से इजरायल का कोई लेना-देना नहीं है।”

इससे पहले ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर इजरायल के फिल्मकार और IFFI जूरी हेड के विवादित बयान पर उनके देश के राजदूत ने माफी माँगी थी। सिलसिलेवार कई ट्वीट करके उन्होंने जूरी हेड लैपिड को जम कर खरी-खोटी सुनाई। भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलन ने लैपिड को खुला लेटर लिखा। उन्होंने अंग्रेजी में किए ट्वीट में लिखा कि कश्मीर फाइल्स पर उनकी आलोचना के बाद ऐसा लिखना पड़ रहा है और यह हिब्रू भाषा में नहीं है, क्योंकि वो चाहता हैं कि भारतीय भाई-बहन भी इसे समझ सकें।

उन्होंने लिखा, “यह काफी लंबा है इसलिए मैं चाहता हूँ कि आप मूल बात पहले जान लो। राजदूत ने कहा, “आपको शर्म आनी चाहिए।” गिलन ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में मेहमान को भगवान की तरह माना जाता है। आपने IFFI में जजों के पैनल के हेड के रूप में भारतीय आमंत्रण का अपमान किया है। उनके भरोसे, सम्मान और गर्मजोशी के साथ किए गए स्वागत का भी मजाक बना दिया।”

बता दें कि नादव लैपिड ने गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में ​विवेक ​अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने 1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों को निकाले जाने और उनके सामूहिक नरसंहार पर आधारित ‘द कश्मीर फाइल्स’ को अश्लील (Vulgar) और प्रोपेगेंडा (Propaganda) फिल्म बताया है। अभिनेता अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री ने जहाँ इसका कड़ा विरोध किया है। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी, अभिनेत्री स्वरा भास्कर और शिवसेना नेता संजय राउत इसका समर्थन कर रहे हैं।

‘अल फ़लाह’ हॉस्टल के संचालक मोहम्मद इम्तियाज ने 10वीं के नाबालिग छात्र के साथ किया अप्राकृतिक दुष्कर्म, धक्का-मुक्की कर परिजनों को बाहर निकाला

बिहार में पूर्णिया जिले के एक निजी हॉस्टल में नाबालिग बच्चे के साथ अप्राकृतिक कुकर्म का मामला सामने आया है। हॉस्टल का नाम ‘अल-फलाह’ बताया जा रहा है। कुकर्म का आरोप हॉस्टल संचालक इम्तियाज पर लगा है। पीड़ित कक्षा 10 का छात्र है। घटना बुधवार (23 नवम्बर, 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला सहायक खजांची हाट थाना क्षेत्र की है। जिस हॉस्टल में यह घटना घटित हुई है वो लाइन बाजार के मेजर कॉलोनी में है। यहाँ पर अमौर थाना क्षेत्र के रहने वाले छात्र ने गुरुवार को अपने घर पहुँच कर अपनी आपबीती बताई। छात्र ने हॉस्टल के संचालक मुन्ना उर्फ़ मोहम्मद इम्तियाज पर अपने साथ जबरन कुकर्म का आरोप लगाया। छात्र का कहना है कि उसके साथ लगभग 3 दिनों तक कुकर्म हुआ है।

पीड़ित छात्र की उम्र 14 साल बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि अप्राकृतिक कुकर्म के चलते उसकी तबीयत खराब होने लगी थी। पीड़ित छात्र द्वारा दी गई जानकारी पर उसके परिजन आरोपित इम्तियाज़ के पास पहुँचे। आरोप है कि यहाँ पर मुन्ना ने छात्र के घर वालों से झगड़ा किया और उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसी दौरान इम्तियाज ने छात्र के घर वालों को हॉस्टल से बाहर भी निकाल दिया। पीड़ित छात्र के पिता का कहना है कि उन्होंने एक सप्ताह पहले ही अपने बेटे को हॉस्टल में रखा था। उन्होंने बताया कि वो अपने बेटे को उच्च शिक्षा देना चाहते थे।

परिजनों के शोरगुल से जब आस-पास के लोग जमा होने लगे तब इम्तियाज वहाँ से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि फरार होने से पहले वो अपना मोबाइल और गाड़ी छोड़ कर गया है। इम्तियाज के फरार होने के बाद पीड़ित छात्र के घर वाले सीधे सहायक खजांचीहाट थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने आरोपित के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने हॉस्टल संचालक इम्तियाज़ के खिलाफ केस दायर कर के जाँच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी सुनीता कुमारी के मुताबिक, आरोपित की तलाश की जा रही है।

Meta पर लगा ₹2265 करोड़ का जुर्माना, हैकिंग वेबसाइट को किया था 50 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक: जाँच में दोषी पाए जाने के बाद मिली सजा

फेसबुक की पेरेन्ट कंपनी मेटा (META) पर 265 मिलियन यूरो ( लगभग 2265 करोड़) का जुर्माना लगाया गया है। मेटा पर यह जुर्माना एक हैकिंग वेबसाइट पर 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का डेटा लीक होने के बाद लगाया गया है। दरअसल, पिछले साल 100 से भी ज्यादा देशों के यूजर्स की फेसबुक आईडी, नाम, फोन नंबर, उनका पता, जन्मतिथि और ईमेल सहित उपयोगकर्ता डेटा पिछले साल ऑनलाइन उपलब्ध करवा दिए गए थे। अप्रैल, 2021 में इस मामले की जाँच शुरू की गई।

जाँच पूरी होने के बाद मेटा को ‘यूरोपियन डेटा प्राइवेसी पॉलिसी’ के उल्लंघन का दोषी पाया गया जिसके बाद यह जुर्माना लगाया गया। द गार्जियन के रिपोर्ट के मुताबिक जाँच में यूरोपीय संघ के डेटा संरक्षण कानूनों के दो नियमों का उल्लंघन किया है। आयरलैंड सरकार की ओर से फेसबुक को कई सुधारात्मक उपाय करने के भी आदेश दिया गए थे।

पूरे मामले पर मेटा का कहना है कि डेटा लीक मामले में उसने आयरलैंड के डेटा प्राइवेसी कमिश्नर (डीपीसी) की जाँच में पूरा सहयोग किया है और अपने सिस्टम में बदलाव भी किया है। इन बदलावों में फोन नंबर्स के इस्तेमाल वाले फीचर्स को हटाना भी शामिल था।

यह पहली बार नहीं है जब फेसबुक की पेरेन्ट कंपनी पर इतना भारी भरकर जुर्माना लगा हो। यह चौथा मामला है जब आयरलैंड के डेटा प्राइवेसी कमिश्नर ने मेटा की किसी कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाया है। डीपीसी, यूरोपीय यूनियन (ईयू) के भीतर मेटा का प्रमुख प्राइवेसी रेगुलेटर भी है और इसने 13 दूसरे सोशल मीडिया समूहों से भी पूछताछ की है। सितंबर, 2022 में मेटा के इंस्टाग्राम पर 405 मिलियन यूरो का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया गया था, हालाँकि मेटा ने इस जुर्माने के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है।

आयरलैंड में यूरोपीय यूनियन का मुख्यालय होने की वजह से डीपीसी एप्पल, गूगल, टिकटॉक और अन्य टेक्नोलॉजी से जुड़ी दिग्गज कंपनियों को रेगुलेट करता है। अब भी इस तरह की चालीस कंपनियों और फर्मों से पूछताछ चल रही है, जिनमें मेटा से जुड़े 13 फर्म शामिल हैं।