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रोता हुआ आम का पेड़, आरती के समय मंदिर में देवता को प्रणाम करने वाला ताड़ का वृक्ष… वेदों से प्रेरित था जगदीश चंद्र बोस का शोध, नहीं मिला योगदान लायक सम्मान

भारतीय वैज्ञानिकों में जगदीश चंद्र बोस का एक खास स्थान है। खासकर जीवविज्ञान के मामले में तो वो दुनिया भर में जाने जाते हैं। उन्होंने ही पहली बार साबित किया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है। सन्न 1906 में ही उन्होंने अपने एक रिसर्च पेपर के जरिए साबित किया था कि कैसे पेड़-पौधे अपने साथ होने वाले बर्तावों पर प्रतिक्रिया देते हैं। ऐसे समय में जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मानवीय सुख-सुविधाओं पर केंद्रित था, जगदीश चंद्र बोस उन वैज्ञानिकों में थे जिन्होंने प्रकृति को समझा।

हालाँकि, भारत में वामपंथियों और इतिहासकारों ने जगदीश चंद्र बोस को भाव नहीं दिया या यूँ कहें कि उनके योगदानों की उतनी चर्चा ही नहीं की गई। शायद इसीलिए, क्योंकि जगदीश चंद्र बोस वेदों में विश्वास रखते थे और सनातन धर्म के सिद्धांतों को समझ कर ही उन्होंने आधुनिक विज्ञान के जरिए दुनिया भर में भारत का डंका बजाया। उन्होंने दिखाया था कि कैसे कोलकाता में एक आम का पेड़ तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण ‘रो रहा था।’

इससे भी ज्यादा रोचक है ‘Praying Palm Tree’ वाला रिसर्च, जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे शाम को जब पास के मंदिर में आरती होती थी जब खजूर का वृक्ष भी झुक गया था – इसका कारण क्या था। ये ऐसा ही था, जैसे ताड़ का पेड़ भी मंदिर में भगवान की प्रार्थना कर रहा हो। ये कोरी कल्पना नहीं थी। असल में तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण ऐसा हो रहा था। इसके पीछे विज्ञान था, जो उन्होंने साबित किया – कोई अंधविश्वास नहीं। असल में रात में तापमान घटते ही ये पेड़ झुक जाता था – ऐसा साबित कर के उन्होंने आसपास के लोगों को इसका सही कारण बताया।

बावजूद इसके लिबरल गिरोह उन्हें एक सफल वैज्ञानिक के रूप में स्वीकार नहीं करता। उन्होंने प्रयोगों के द्वारा सिद्ध किया कि कैसे पेड़-पौधों की जड़ें ही नहीं, बल्कि उसके पत्ते और तना भी पानी खींचते हैं। जैसे मानव हृदय रक्त खींचने के लिए फैलता-सिकुड़ता है, पेड़-पौधों की कोशिकाओं में भी ऐसे ही लक्षण उन्होंने साबित किए। जगदीश चंद्र बोस का स्वभाव ऐसा था कि उनके बनाए उपकरणों के बदले में जब भारी धनराशि के ऑफर्स आए तो उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

उनका कहना था कि ज्ञान किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हो सकती है। उन्होंने कुछ पौधों में बिजली का प्रवाह डाल कर ये साबित किया कि उसकी प्रतिक्रिया कैसी होती है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत के ऋषि-मुनि काफी पहले से ये सब जानते थे। छुईमुई का पौधा मनुष्य के छूते ही प्रतिक्रिया देता है। उन्होंने दिखाया कि अन्य पेड़-पौधों में भी ऐसा होता है, लेकिन नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने प्रदर्शित किया कि विष देने से पेड़-पौधों की भी मृत्यु हो सकती है।

जिस ‘रॉयल सोसाइटी’ में उन्होंने कई चीजें साबित की थीं, उसने उनके शोध को प्रकाशित करने में विलंब किया। उन्होंने कई पुस्तकें लिख कर खुद प्रकाशित की और हमेशा विश्वास जताया था कि उनका उद्देश्य सत्य की खोज करना है। उन्होंने वेदों के सिद्धांत की प्रशंसा करते हुए कहा कि हजारों वर्ष पूर्व ही गंगा किनारे तपस्या करने वाले हमारे ऋषि-मुनियों ने विश्व के सभी सजीव-निर्जीव वस्तुओं में एक ही ईश्वर को देखा। उन्होंने एक तत्व ही सब में देखा।

आज के युग में उस डार्विन की थ्योरी बिना किसी सबूत के पढ़ा-पढ़ा कर बताया जाता है कि आदमी पहले बंदर थे (जबकि Creation और Evolution) के कई अन्य सिद्धांत भी हैं, उस समय में कई वैज्ञानिक भी ये मानते हैं कि जगदीश चंद्र बोस के योगदानों को भुला दिया गया। जबकि बोस अपने समय से काफी आगे थे। कहा जाता है कि उनके प्रयोग गलत साबित हो चुके हैं। बोस के कार्यों को गलत साबित करने के चक्कर में कई वर्षों तक ‘प्लांट इलेक्ट्रिक सिग्नलिंग’ का कार्य रुका रहा।

जगदीश चंद्र बोस के वैज्ञानिक करियर को सामान्यतः 3 चरणों में बाँटा जा सकता है। पहला चरण, जब उन्होंने 1894 से लेकर 1899 तक माइक्रोवेव रेडिएशन पर शोध किया। इसी शोध के आधार पर इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रेडिएशन को अच्छे से समझने का कार्य क्लर्क मैक्सवेल के नेतृत्व में शुरू हुआ। इसके बाद अगले 3 वर्ष उन्होंने सजीव-निर्जीव वस्तुओं पर एलेक्ट्रोग्राफ़िक प्रतिक्रिया के अध्ययन में बिताए। इसके बाद अपने निधन तक उन्होंने पेड़-पौधों पर रिसर्च किया।

अंग्रेजों के गुलाम भारत में जगदीश चंद्र बोस ने दुनिया को दिखाया कि वैदिक विज्ञान को आधार बना कर हमारा देश भी वैज्ञानिक शोधों में सक्षम है। उन्होंने एक संबोधन में कहा था कि प्राचीन चिंतकों को ये पता था कि जीवन और सोचने की क्षमता हर जगह मौजूद है, बस ऊर्जा और क्रियाकलाप के मामले में वो अलग-अलग हैं। वेदों में ‘ब्राह्मण’, अर्थात एक सत्ता का चिंतन है, जिस पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा था कि नए खोज हमारे उन पूर्वजों की बातों पर मुहर लगा रहे हैं।

जगदीश चंद्र बोस के पिता ‘ब्रह्मो’ परंपरा के अनुयायी थे। इस समाज की तरह उनका भी हिन्दू धर्म में हो रहे तमाम सुधारों को लेकर सहमति थी। तकनीक और वैज्ञानिक वैज्ञानिक रचनात्मकता के देवता भगवान विश्वकर्मा में उनकी आस्था थी। सबसे बड़े शिल्पकार के रूप में कलाकारों द्वारा विश्वकर्मा की पूजा से बोस भी प्रेरित थे। ब्रह्मो समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय को लेकर भी वो प्रेरित थे, जिन्होंने वो पूर्व-पश्चिम में संपर्क बढ़ाने के लिए योगदान देने वाला मानते थे।

जहाँ जगदीश चंद्र बोस के पिता अद्वैत वेदांत के अनुयायी थे, उनकी माँ की महाकाली में गहरी आस्था थी। विवेकानंद भी जगदीश चंद्र बोस का काफी सम्मान करते थे। पेरिस में दोनों की मुलाकात भी हुई थी। पूरे विश्व में एकत्व को लेकर उनकी धरना का विवेकानंद ने भी समर्थन किया था। तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय कैसे दुनिया भर में शिक्षा और शोध के सबसे बड़े केंद्र थे, इस संबंध में उन्होंने दुनिया को परिचित कराया और BHU के छात्रों से एक बार कहा कि बुद्धिजीवी राष्ट्रों के बीच स्थान सुनिश्चित करने के बाद हमें अपनी प्राचीन संस्कृति की बात करनी चाहिए।

30 नवंबर, 1858 को जन्मे जगदीश चंद्र बोस ने बताया था कि बचपन में चिड़िया, पशुओं और जलीय जीवों की कहानियाँ सुन कर प्रकृति के प्रति उनकी रुचि जाएगी। उनकी माँ के व्यवहार के बाद बचपन में ही उनके मन से छूत-अछूत की भावना हट गई थी और सभी जीवों को एक समान देखने की धारणा बलवती हो गई थी। 1879 में कलकत्ता से स्नातक करने वाले जगदीश चंद्र बोस का ये भी कहना था कि नैतिक मूल्यों के बिना शिक्षा का कोई महत्व ही नहीं है।

शराब के नशे में निकिता, साथ में फैजान, बैरिकेड तोड़ कर भागी गाड़ी… पुलिस से कहा – दोस्त है, घर वाले जानते हैं: लोगों को याद आए ’35 टुकड़े’

उत्तराखंड के देहरादून में पुलिस ने सोमवार (27 नवंबर, 2022) को शराब पीकर गाड़ी चलाने और बैरिकेड तोड़कर भागने के आरोप में निकिता नामक एक युवती और उसके दोस्त फैजान से पूछताछ करने के बाद ड्रिंक एंड ड्राइव के आरोप में चालान किया है। पुलिस की इस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दरअसल, बैरिकेड तोड़कर भागने के बाद जब देहरादून पुलिस निकिता और फैजान से पूछताछ कर रही थी, उस वक्त ‘इंडिया क्राइम’ नामक फेसबुक पेज ने इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो को लाइव किया था। वीडियो बना रहे व्यक्ति को पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए सुना जा सकता है।

इस दौरान, देहरादून एसएसपी दलीप सिंह एक पुलिसकर्मी से लड़की (निकिता) के घर वालों को फोन कर इस पूरी घटना की जानकारी देने के लिए कहते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा, “बाद में ये लोग तमाशा करेंगे कि हमारी लड़की को भगा ले गया।” एसएसपी के कहने पर पुलिसकर्मी निकिता से उसके घरवालों को नंबर लेकर, शराब पीकर बैरिकेड तोड़ने के बारे में बताते हुए दिखता है। इस पर लड़की कहती है, मेरे घरवाले फैजान को जानते हैं।

हालाँकि, इसके बाद फोन पर बात कर रही युवती की माँ ने कहा कि वह फैजान को नहीं जानती हैं। इस पर निकिता ने पुलिसकर्मी के हाथ से फोन लेकर पूछा कि मम्मी आप फैजान को नहीं जानतीं? इसके तुरंत बाद निकिता फिर बोलती है दोस्त है। इसके बाद, पुलिसकर्मी निकिता की माँ से पूछता है कि यहाँ कोई भी उसका गार्जियन है, इस पर नहीं का जवाब मिलने के बाद पुलिस द्वारा कार्रवाई करने की बात कही जाती है। साथ ही, दोनों ही आरोपित फैजान और निकिता का मेडिकल कराने के लिए कहा जाता है।

वीडियो में ही, इस पूरे घटनाक्रम पर एसएसपी देहरादून दलीप सिंह कहते हैं कि लड़की हिंदू है और लड़का मुस्लिम (दूसरी कम्युनिटी का) है। लड़की की माँ से हुई बातचीत देखकर ऐसा लगता है कि फैजान के संबंध लड़की के परिवार से नहीं हैं। दोनों का मेडिकल कराकर कार्रवाई की जाएगी।

ऑपइंडिया से हुई बातचीत में इंडिया क्राइम पेज चलाने वाले कपिल भाटिया ने बताया है कि निकिता और फैजान को देहरादून पुलिस ने पकड़ा है। इसमें फैजान शराब के नशे में झूम रहा था। पुलिस ने ड्रिंक एंड ड्राइव के आरोप में चालान किया है।

शराब पीकर गाड़ी चलाने तथा लड़की के हिंदू और लड़के के मुस्लिम होने पर इंडिया क्राइम के फेसबुक पर कई तरह के कमेंट्स सामने आए हैं। कन्नू जोशी लाइव नामक फेसबुक यूजर ने अपने कमेंट में कहा “35 टुकड़े याद दिलाओ इनको।”

एक अन्य यूजर मनजीत साजवान ने लिखा, “इसके घरवालों को जल्द से जल्द एक फ्रिज की व्यवस्था करनी चाहिए।”

रघुवर राणा ने कमेंट कर कहा, “इन लड़कियों को अभी भी सबक नहीं मिला है। गुड वर्क सर।”

वहीं, नीरज थापियाल ने लिखा, “इसके भी टुकड़े होने वाले हैं।”

राम भक्त ठाकुर ने लिखा, “लड़की के माता पिता से हाथ जोड़ कर निवेदन करता हूँ कि इसको संभाल लो। वरना 35 में ही मिलेगी। क्योंकि ये शांति दूत किसी के नहीं।”

ऊषा चौहान ने कमेंट करते हुए कहा, “ऐसी कार्यवाही होती रहे तो दुबारा कोई ऐसी हरकत नहीं करेगा, सोचने पर मजबूर होगा।”

‘मौलाना साद को सौंपी जाए निजामुद्दीन मरकज की चाबियाँ’: दिल्ली HC के आदेश पर पुलिस को आपत्ति नहीं, तबलीगी जमात ने फैलाया था कोरोना

दिल्ली निजामुद्दीन मरकज को पूरी तरह से खोलने की माँग वाली अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह मरकज यानी तब्लीगी जमात के मुख्यालय की चाभी मौलाना साद को सौंपेगी। ‘दिल्ली वक्फ बोर्ड’ की अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मरकज की चाबी उस व्यक्ति को सौंपने की हिदायत दी, जिससे ली गई थीं।

दिल्ली पुलिस के वकील रजत नायर ने दलील दी कि उसे इसको लेकर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं कि निजामुद्दीन बंगलेवाली मस्जिद का वास्तविक मालिक कौन है और वह सिर्फ उसी व्यक्ति को चाबियाँ सौंप सकती है जिससे उन्होंने कब्जा लिया था, जो मौलाना मुहम्मद साद है। पुलिस ने अदालत के सामने दावा किया कि साद फरार है, इसपर मरकज की प्रबंध समिति के एक सदस्य ने दावा किया कि साद फरार नहीं है वह परिसर में ही मौजूद है और चाबी लेने के लिए एजेंसी के सामने पेश हो सकता है।

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि पुलिस ने जिस व्यक्ति से कब्जा लिया है, उस व्यक्ति को कब्जा वापस करें। जज ने कहा, “मैं यहाँ संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर फैसला नहीं कर रहा हूँ। आप पता लगाएँ कि आपको क्या करना है, लेकिन चाबी दे दीजिए। आप इसे अपने पास नहीं रख सकते।” दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या आप अभी वहाँ कब्जे में हैं? आपने किस क्षमता से कब्जा लिया है? महामारी रोग अधिनियम के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की गई थी, वह अब समाप्त हो गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पुलिस से सवाल किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस के वकील नायर ने कहा कि उन्हें क्षतिपूर्ति मुचलके पर संपत्ति सौंपने में कोई आपत्ति नहीं होगी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने नायर का बयान दर्ज किया कि साद द्वारा क्षतिपूर्ति मुचलका भरने के बाद चाभियाँ सौंप दी जाएँगी।

निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद, मदरसा काशिफ-उल-उलूम और एक छात्रावास है। निजामुद्दीन मरकज को मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के बीच तबलीगी जमात द्वारा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बंद कर दिया गया था। आपको बता दें मौलाना साद को दिल्ली पुलिस ने मार्च 2020 में दर्ज एफआईआर में मुख्य आरोपित बनाया है। उन पर जमात के सदस्यों के साथ कोरोना संबंधी मानदंडों के उल्लंघन का आरोप है।

कोरोना महामारी के समय निजामुद्दीन मरकज में बड़ी संख्या में तबलीगी जमात के लोग ठहरे हुए थे। मरकज में ठहरे लोगों में जब कोरोना के मामले पाए गए, तब मामला खुला। दिल्ली पुलिस ने इसके बाद मरकज को सील कर दिया था। इतना ही नहीं जब मरकज के लोगों को अस्पतालों में ले जाया जा रहा था तो उनमें से कइयों ने अस्पताल परिसर में थूकना शुरू कर दिया था कुछ तो अस्पताल स्टाफ पर भी थूक रहे थे।

AIIMS हैक के पीछे चीन-उत्तर कोरिया? 5000 कम्प्यूटरों पर ₹200 करोड़ माँग रहे हैकर्स का कब्ज़ा, 7 दिन से ठप्प डिजिटल सेवाएँ: आतंक एंगल से जाँच कर रही NIA

दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (AIIMS)’ में हुए साइबर अटैक मामले में 2 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। दोनों कर्मचारी सिस्टम एनालिस्ट हैं। दोनों कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर एम्स प्रशासन ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।

इधर मामले की जाँच तेज हो गई है। जाँचकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यह साइबर हमला चीन या नॉर्थ कोरियायी हैकर्स के द्वारा किया गया हो सकता है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट ने 25 नवंबर, 2022 को जबरन वसूली (फिरौती) और साइबर आतंकवाद का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच एनआईए (NIA) भी कर रही है। जानकारी के मुताबिक एनआईए इस हैकिंग की जाँच टेरर एंगल से करेगी।

क्रिप्टोकरेंसी में माँगी गई फिरौती?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम्स के कंप्यूटर्स पर रैनसमवेयर (Ransomware) नाम का साइबर हमला हुआ है। यह हमले मोटी रकम वसूली के लिए ही किए जाते हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो हैकर्स ने अस्पताल से फिरौती के तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में 200 करोड़ रुपए की माँग की है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि एम्स के अधिकारियों को अब तक फिरौती माँगे जाने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली है।

इस बीच दिल्ली एम्स की तरफ से जानकारी दी गई है कि सर्वरों की स्कैनिंग का काम जारी है। अब तक 50 में से 30 सर्वर में एंटी वायरस डालकर स्कैन किया जा चुका है। एम्स में लगभग 5000 कंप्यूटर हैं। फिलहाल 2000 कंप्यूटरों की स्कैनिंग का काम हो चुका है। सर्वर पूरी तरह से ठीक होने में 5 दिन का समय लग सकता है।

अभी कैसे चल रहा है काम?

23 नवंबर, 2022 से ही एम्स दिल्ली में ऑनलाइन सेवाएँ बाधित हैं। फिलहाल जरूरी सेवाएँ ऑफलाइन (मैनुअल) मोड में चल रही हैं। ऐसे में मैनुअल मोड में काम के लिए कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है, ताकि इलाज के लिए दूर-दूर से आ रहे मरीजों को दिक्कत न हो। मरीजों का ओपीडी कार्ड हाथ से बनाया जा रहा है। एडमिशन प्रोसेस भी हाथ से लिखकर किए जा रहे हैं। यहाँ तक कि सैंपल जाँच भी मैन्युअली ही हो रही है।

इलाज पर इसका बहुत ज्यादा असर तो नहीं हो रहा है, लेकिन काम में समय अधिक लग रहा है। एम्स की तरफ से नोटिस जानकारी दी गई है कि इस हफ्ते एम्स नेटवर्क को फॉर्मेट किया जाएगा। ताकि आगे के लिए सिस्टम को और भी सुरक्षित किया जा सके।

बता दें कि 23 नवंबर, 2022 को एम्स के सर्वर में रैनसमवेयर अटैक हुआ था। जिसके बाद पूरी डिजिटल सेवाएँ ठप हो गईं हैं। एनआइसी (नेशनल इन्फार्मेटिक सेंटर), इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-आइएन) और सीडैक (सेंटर फार डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) की टीम इस समस्या का हल निकालने में जुटी हैं।

e₹-R के लिए हो जाइए तैयार, डिजिटल रुपए के लॉन्च के लिए तैयार है रिजर्व बैंक: इन 8 बैंकों से होगी लेनदेन की शुरुआत, समझिए कैसे करेगा काम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार (1 दिसबंर, 2022) से रिटेल डिजिटल रुपए (Digital Rupee) E-Rupee लॉन्च करने का ऐलान किया है। रिटेल डिजिटल करेंसी के लिए इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान, डिजिटल रुपए का निर्माण, डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल के लिए होने वाले इसके उपयोग की पूरी प्रक्रिया की टेस्टिंग की जाएगी। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने 1 नवंबर को होलसेल ट्रांजैक्शन के लिए डिजिटल रुपए (e₹-R) को लॉन्च किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ने रिटेल (e₹-R) डिजिटल रुपए की लॉन्चिंग को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। एक बयान में रिजर्व बैंक ने कहा है कि पायलट प्रोजेक्ट में ग्राहकों और व्यापारियों का क्लोज्ड ग्रुप होगा जो चुनिंदा स्थानों को कवर करेगा।

ई-रुपी (डिजिटल रुपए) का डिस्ट्रीब्यूशन बैंकों के माध्यम से किया जाएगा। यूजर इसे मोबाइल फोन और डिवाइसेज में डिजिटल वॉलेट में रख सकेंगे। डिजिटल वॉलेट के माध्यम से, पर्सन-टु-पर्सन या पर्सन-टु-मर्चेंट ट्रांजेक्शन कर सकेंगे। यही नहीं, मर्चेंट को क्यूआर कोड से भी पेमेंट किया जा सकेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पायलट प्रोजेक्ट के ट्रायल के लिए 8 बैंकों को चुना गया है। इसमें, पहले चरण 4 में बैंक शामिल होंगे।

इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), यस बैंक (Yes Bank) और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल (IDFC First Bank) हैं। वहीं, दूसरे चरण में भी चार बैंकों को शामिल किया गया है। इसमें, बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India), HDFC बैंक (HDFC Bank) और कोटक महिंद्रा बैंक ( Kotak Mahindra Bank) शामिल हैं।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत, मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर से होगी। इसके बाद, अहमदाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, पटना और शिमला में भी इसे शुरू किया जाएगा। इसके बाद, कुछ अन्य बैंकों और शहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।

बड़ी बात यह है कि e₹-R या डिजिटल करेंसी की वैल्यू भी कागजी नोटों के बराबर ही होगी। यूजर्स डिजिटल करेंसी देकर कागजी नोट भी प्राप्त कर सकते हैं। रिजर्व बैंक ने डिजिटल करेंसी को दो कैटेगरी सीबीडीसी-डब्ल्यू (CBDC-W) और सीबीडीसी-आर (CBDC-R) में बाँटा है। CBDC-W मतलब होलसेल करेंसी और CBDC-R का मतलब रिटेल करेंसी से है। भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी विकसित करने की दिशा में रिजर्व बैंक के इस कदम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुलिस ने क्रेन से खिंचवाई कार, अंदर CM जगन की बहन: हैदराबाद में राजनीतिक नौटंकी का वीडियो, सीएम आवास की घेराबंदी से पहले ली गईं हिरासत में

हैदराबाद का सोमाजीगुडा इलाका उस समय एक अजीब राजनीतिक नौटंकी का गवाह बना, जब वाईएसआरटीपी (YSRTP) की संस्थापक और पार्टी प्रमुख वाईएस शर्मिला रेड्डी की कार को पुलिस ने क्रेन से उठवा लिया। हैरानी की बात यह रही की इस दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की बहन शर्मिला कार में ही बैठी रहीं।

हालाँकि, इसके बाद शर्मिला को हैदराबाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें मंगलवार (28 नवंबर, 2022) को दूसरी बार तब हिरासत में लिया गया जब वह हैदराबाद स्थित तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के ऑफिस व आवास (प्रगति भवन) की ओर बढ़ रही थीं। भारत राष्ट्र समिति के कार्यकर्ताओं पर शर्मिला के समर्थकों से मारपीट करने का आरोप है और वह इसी के विरोध में सीएम आवास तक जा रही थीं। शर्मिला को दो दिन में दूसरी बार हिरासत में लिया गया है।

यह हाई वोल्टेज ड्रामा उस समय देखा गया जब शर्मिला अपने काफिले से एक गाड़ी को खुद चला रही थीं। कार की विंडशील्ड और खिड़कियों को सोमवार को चेन्नाराओपेट में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकर्ताओं ने तोड़ दिया था। वाईएसआरटीपी प्रमुख को पुलिस ने सोमाजीगुडा सर्कल (Somajiguda circle) में रोक दिया। इस मामले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि जब क्रेन से कार को ले जाया जा रहा था तब वह अंदर ही बैठी रहीं। वह अपनी गाड़ी से नहीं उतरीं।

दरअसल वाईएसआरटीपी के कई कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को शर्मिला की कार को हिरासत में लेने से रोकने के लिए घेर लिया। उन्होंने खुद को टोयोटा एसयूवी में बंद कर लिया लेकिन पुलिस ने एक क्रेन को बुला लिया। हालाँकि, उन्होंने गाड़ी से बाहर निकलने से इनकार कर दिया। क्रेन ने एसयूवी को उठा लिया जबकि शर्मिला गाड़ी के अंदर बैठी हुई थीं। इस दौरान उन्होंने अपने ड्राइवर और निजी सुरक्षा अधिकारी को गाड़ी को छोड़ देने को कहा। पुलिस ने उन्हें बाहर निकलने के लिए मनाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानीं।

इससे पहले सोमवार (28 नवंबर 2022) को शर्मिला के काफिले पर टीआरएस के समर्थकों ने हमला कर दिया था और बाद में उनकी गिरफ्तारी से वारंगल जिले में उनकी पदयात्रा के दौरान तनाव पैदा हो गया था। पुलिस ने शर्मिला की पदयात्रा को रोक दिया था और उन्हें और वाईएसआरटीपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को चेन्नारोपेटा मंडल में गिरफ्तार कर लिया था। शर्मिला को कथित तौर पर टीआरएस विधायक पी. सुदर्शन रेड्डी के बारे में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

‘सीमा पार आतंकवाद और ISIS मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती’: NSA अजीत डोभाल ने लगाई उलेमाओं की ‘क्लास’, समझाया क्या होता है ‘जिहाद’

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने सीमा पार आतंकवाद और आईएसआईएस (ISIS) से प्रेरित आतंकवाद को मानवता के खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम में जिहाद का मतलब इंद्रियों और अहंकार के खिलाफ लड़ाई है, न कि निर्दोषों के खिलाफ।

उन्होंने कहा कि अतिवाद और कट्टरता, धर्म का बिगड़ा हुआ रूप हैं। इनके खिलाफ लड़ाई को धर्म विशेष के लिए टकराव के तौर पर नहीं देखना चाहिए। डोभाल ने नई दिल्ली में मंगलवार (29 नवंबर 2022) को भारत और इंडोनेशिया के बीच एक दूसरे के धर्म के प्रति शांति और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने में उलेमाओं की भूमिका पर आयोजित चर्चा के दौरान यह बात कही।

इस दौरान इंडोनेशिया के एनएसए महमूद मोहम्मद भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि युवकों की ऊर्जा को सही दिशा देने की ज़रूरत है। मजहब का संकीर्ण प्रयोग नहीं होना चाहिए। प्रोपेगेंडा और नफरत से निपटने के लिए उलेमा को टेक्नोलोजी का भी प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हेट स्पीच, पक्षपात, प्रोपेगेंडा, हिंसा और धर्म के दुरुपयोग का कोई स्थान नहीं।

उन्होंने भारत व इंडोनेशिया के बीच पारस्परिक शांति और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में उलेमाओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस्लाम के मूल सहिष्णु और उदारवादी सिद्धांतों पर लोगों को शिक्षित करने और प्रगतिशील विचारों से अवगत कराने में उलेमाओं की अग्रणी भूमिका है। डोभाल ने कहा, “दोनों देश (भारत और इंडोनेशिया) आतंकवाद और अलगाववाद के शिकार रहे हैं। हालाँकि, हमने चुनौतियों पर काफी हद तक काबू पा लिया है, लेकिन सीमा पार आतंकवाद और आईएसआईएस प्रयोजित आतंकवाद आज भी एक खतरा बना हुआ है।”

डोभाल ने इंडोनेशिया में हाल ही में आए भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति भी संवेदना जाहिर की। एनएसए ने कहा, ”इंडोनेशिया में हाल ही में आए भूकंप से जान-माल के नुकसान से हम सभी को दुख हुआ है। हमें भूकंप पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना है। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। दुख की इस घड़ी में भारत इंडोनेशिया के साथ खड़ा है।

MCD चुनाव से पहले केजरीवाल का ‘RWA कार्ड’: ‘मिनी पार्षद’ बना कर दी जाएँगी विशेष शक्तियाँ, सरकार फंड के साथ-साथ समस्याओं के समाधान का भी वादा

दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए रविवार (4 दिसंबर, 2022) को वोटिंग होना है। ऐसे में, सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने ‘RWA’ कार्ड खेला है। केजरीवाल ने ऐलान किया है कि यदि दिल्ली एमसीडी में AAP की सरकार बनी तो रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को मिनी पार्षद का स्टेटस दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को अरविंद केजरीवाल ने ऐलान करते हुए कहा है कि यदि दिल्ली एमसीडी (नगर निगम) चुनाव में आम आदमी पार्टी जीतती है तो एक स्‍कीम लॉन्‍च की जाएगी। इस स्कीम का नाम ‘जनता चलाएगी एमसीडी’ होगा। इसके अंतर्गत आरडब्‍ल्‍यूए को म‍िनी पार्षद की ताकत दी जाएगी। साथ ही, इन मिनी पार्षदों को ऑफिस चलाने के ल‍िए द‍िल्‍ली सरकार से फंड दिया जाएगा।

केजरीवाल ने यह भी कहा है कि आरडब्ल्यूए के जरिए लोगों की तमाम तरह की समस्‍याओं का समाधान होगा। लोगों को क‍िसी नेता के चक्‍कर काटने की जरूरत नहीं होगी। इससे लोगों का काम आसानी से हो जाएगा।

दिल्ली एमसीडी चुनाव की तैयारियों में जुटे अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा, “मेरी सभी आरडब्ल्यूए से विनती है कि चुनाव में सिर्फ 3-4 दिन बचे हैं। आप चाहे किसी भी पार्टी के हों, हम आपको सशक्त करेंगे। आरडब्‍ल्‍यूए अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से भी लोगों से आम आदमी पार्टी को जिताने की अपील करें। पार्टी को 250 में से 250 में जीत दिलाएँ। कोई और पार्षद बना तो आपके काम को रोक देगा। हम इस सिस्टम को चलाने के लिए पारदर्शी बनाएँगे, चेक करेंगे की इस सिस्टम से कितनी समस्या का समाधान हुआ। मेरा अनुमान है कि 230 सीट आनी चाहिए।”

केजरीवाल ने यह भी कहा है कि देखने को मिला है कि अक्‍सर छोटे-छोटे कामों के लिए जनता को नेताओं के चक्‍कर काटने पड़ते हैं, ऐसे में अब जनता निर्णय लेगी और सरकार काम करेगी। एक तरह से देखें कि जितनी भी आरडब्‍ल्‍यूए हैं, उन्हें मिनी पार्षद का दर्जा दिया जाएगा। आरडब्‍ल्‍यूए वो बॉडी होती हैं, जो जनता के सबसे करीब होती हैं।

उन्होंने कहा, “आरडब्‍ल्‍यूए को अपना दफ्तर चलाने और छोटे-छोटे काम कराने के लिए फंड उपलब्‍ध कराए जाएँगे। सही मायनों में आरडब्‍ल्‍यूए का सशक्‍तीकरण किया जाएगा। इसकी मंशा जनता को दिल्‍ली का मालिक बनाना है। आम आदमी पार्टी चाहती है कि जनता दिल्‍ली की असली मालिक बने। इसके जरिए दिल्‍ली के हर नागरिक को दिल्‍ली का मुख्‍यमंत्री बनाया जाएगा।”

AAP के वादे के अनुसार, पार्षद किसी इलाके का बॉस होता है और ठीक वैसे ही आरडब्‍ल्‍यूए को उस वॉर्ड का नेता माना जाएगा। कहा गया है कि किसी भी व्‍यक्ति को काम कराना है तो उसे नेता के चक्‍कर नहीं काटने होंगे और मिनी पार्षद का स्‍टेटस मिलने के बाद लोगों को आरडब्‍ल्‍यूए के दफ्तर जाकर बताना होगा कि उनकी क्या समस्‍या है। गली, पानी, बिजली, नाली, नुक्‍कड़ वही सारी समस्‍याओं को हल करेंगे। आरडब्‍ल्‍यूए के पास वो ताकत होगी, जिनसे वो लोगों के सभी जरूरी काम कर सके।

गौरतलब है कि इस साल के चुनाव से पहले दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में विभाजित किया गया था। उत्तरी दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और पूर्वी दिल्ली। बीते 15 सालों से तीनों ही जोन या नगर निगम में भाजपा का ही कब्जा रहा है। इसी साल मई में केंद्र सरकार ने तीनों नगर निगम क्षेत्रों (MCD) को मिलाकर एक कर दिया था। इसका मतलब यह है कि अब दिल्ली में तीन की जगह केवल एक ही महापौर (मेयर) होगा। यानी अब तीन की जगह एक ही मेयर पूरी दिल्ली को चलाएगा।

बता दें कि दिल्ली नगर निगम चुनाव (Delhi MCD Election) के लिए मतदान रविवार (4 दिसंबर, 2022) को होगा। मतदान सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चलेगा। वहीं वोटों की गिनती 7 दिसंबर को होगी।

पाकिस्तान में मरने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं अहमदी, ‘कुत्ता’ लिख कर कब्रों को किया तहस-नहस: अगस्त में भी 16 कब्रों को कर दिया था तबाह

पाकिस्तान (Pakistan) के पंजाब प्रांत से अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय की कई कब्रों के साथ बेअदबी का मामला सामने आया है। कट्टरपंथियों ने अहमदियों की कब्रों पर अपशब्द लिखकर उन्हें नुकसान पहुँचाया। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रवक्ता ने मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को यह जानकारी दी। जमात अहमदिया पाकिस्तान के अधिकारी अमीर महमूद ने बताया कि लाहौर से लगभग 100 किलोमीटर दूर हाफिजाबाद जिले के प्रेम कोट कब्रिस्तान में कब्रों के पत्थरों पर अपशब्द लिखा गया था।

उन्होंने कहा कि कब्रों को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों ने उस पर ‘अहमदी डॉग‘ (Ahmadi Dog) भी लिखा है, जो उनके परिवार वालों के लिए बेहद तकलीफदेह है। महमूद ने अल्पसंख्यक समुदाय की कब्रों को अपवित्र करने की घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने की माँग की है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान में रह रहे अहमदी मरने के बाद भी अपनी कब्रों में सुरक्षित नहीं हैं।

पाकिस्तान में यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अल्पसंख्य समुदाय के साथ दुर्व्यवहार किया गया हो। पहले भी पंजाब प्रांत के अन्य अहमदी कब्रिस्तानों में इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। लेकिन अभी तक इन मामलों में एक भी अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और ना ही उन पर कोई मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस साल अगस्त में भी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अहमदी समुदाय की 16 कब्रों को नुकसान पहुँचाने का मामला सामने आया था। बताया गया था कि लाहौर से लगभग 150 किलोमीटर दूर फैसलाबाद जिले के चक 203 आरबी मनावाला में एक कब्रिस्तान में कट्टरपंथियों ने कब्रों पर इस्लामी प्रतीकों का उपयोग करने के लिए उसे नुकसान पहुँचाया था।

बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय अहमदी बेहद कमजोर हैं। यही कारण के वहाँ के इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें अक्सर निशाना बनाते हैं। पाकिस्तानी संसद ने 1974 में अहमदी समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। एक दशक बाद उन्हें अपने आप को मुस्लिम कहने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया था। यही नहीं उन्हें हज पर सऊदी अरब जाने से भी रोक दिया गया था। वहीं, पूर्व तानाशाह जनरल जिया-उल हक ने अहमदियों के लिए खुद को मुस्लिम कहने को एक दंडनीय अपराध बना दिया था। पाकिस्तान में हिंदुओं, ईसाई के अलावा अहमदी, सिख और पारसी भी अल्पसंख्यक हैं।

‘इस्लाम क़बूलो वरना तेरा घर ढाह कर मजार बना देंगे: हिन्दू परिवार की महिलाओं को शाहरुख़, जावेद और अजीज की धमकी, छोड़ना पड़ा था घर

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक हिन्दू परिवार को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार का घर गिरा कर वहाँ मज़ार बनाने की धमकी दी गई है। इसी के साथ हिन्दू परिवार की महिलाओं को मुस्लिम बनाने का एलान किया गया है। इस मामले का मुख्य आरोपित शाहरुख़ है जो फिलहाल जेल में बंद है। शाहरुख़ के साथ जावेद और अजीज नाम के 2 अन्य आरोपितों पर भी FIR दर्ज हुई है।

शाहरुख़ एक पेशेवर अपराधी बताया जा रहा है जिस पर पहले से ही कई केस दर्ज है। वह उज्जैन के नजरपुर इलाके का रहने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बाणगंगा थानाक्षेत्र का है। यहाँ के कुम्हेड़ी कांकड़ इलाके में रहने वाले एक हिन्दू परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। एक महिला शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसके घर के बगल मुख्य आरोपित शाहरुख़ की मौसी का घर है। शाहरुख़ अपनी मौसी के के घर आता-जाता रहता था।

शिकायत में बताया गया है कि गलत गाड़ी चलाने के चलते पीड़िता का 2 साल पहले शाहरुख़ से झगड़ा हुआ था। आरोप है कि तब से शाहरुख़ लगातार पीड़िता को धमका रहा था। इसी क्रम में 30 अक्टूबर को एक बार फिर से शाहरुख़ अजीज और जावेद के साथ पीड़िता के घर धमकाने पहुँचा। तब शाहरुख़ ने पीड़िता का घर तहस-नहस करने की धमकी दी। शिकायत में आगे बताया गया है कि इस दौरान शाहरुख़ ने महिला के घर पर मजार बना देने का एलान किया था। आरोप है कि इस दौरान पीड़ित के परिवार को उसी मज़ार पर बिठा देने की धमकी दी गई थी।

शिकायत में आगे बताया गया है कि इसी विवाद के बीच में शाहरुख़ के साथी अजीज ने पीड़ित परिवार को गालियाँ दीं। जावेद ने हिन्दू परिवार को काट कर फेंक देने की भी धमकी दी। बाद में पीड़ित परिवार का काम लगा देने की धमकी देते हुए आरोपित वहाँ से चले गए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने कुछ समय पहले शाहरुख़ की धमकियों के चलते घर तक छोड़ दिया था। इसी के साथ पीड़ित परिवार ने खुद पर शिकायत को वापस लेने के दबाव का भी आरोप लगाया है। थाने के टीआइ राजेंद्र सोनी के अनुसार मुख्य आरोपित शाहरुख खान फिलहाल एक अन्य मामले में जेल में बंद है।

इंदौर के एक स्थानीय समाचार पत्र के मुताबिक, आरोपित शाहरुख़ ने 3 नवम्बर को पीड़ित परिवार को धमकी दी थी। शाहरुख़ बाइक चोर भी है, जिसने कुछ समय पहले कई गुंडों के साथ जन्मदिन मनाते हुए अपना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था। वह अक्सर अवैध हथियारों के साथ अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डालता रहता है। जिस स्थान पर हिन्दू परिवार को प्रताड़ना का आरोप है वहाँ मुस्लिम समुदाय के महज 2 से 3 घर बताए जा रहे हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, शाहरुख़ ने हिन्दू परिवार को धमकी दी है कि अगर उसे अपने घर में रहना है तो इस्लाम कबूल करना होगा। बताया ये भी जा रहा है कि आरोपित के डर से हिन्दू परिवार अपना खुद का घर होने के बाद भी एक लंबे समय तक किराए पर रहे।