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2024 चुनावों में ‘वोट चोरी’ के नहीं कोई सबूत: राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के प्रोपेगेंडा को मद्रास HC से झटका, याचिका खारिज कर ठोंका ₹1 लाख का जुर्माना

मद्रास हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप लगाया था। इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) को कोर्ट ने न सिर्फ खारिज किया, बल्कि याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ के झूठे प्रचार को बेनकाब करता है और भारत के चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे को मजबूत करता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला वकील वी. वेंकटा सिवकुमार ने दायर किया था, जिसमें माँग की गई थी कि चुनाव आयोग को राहुल गाँधी की ओर से 7 अगस्त 2025 को पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन में उठाए गए आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया जाए।

राहुल गाँधी ने इस प्रेजेंटेशन में दावा किया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई और इस बात को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी 13 अगस्त 2025 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहराया था। याचिका में माँग की गई थी कि चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट का डेटा सार्वजनिक करना चाहिए और इस मामले की जाँच की स्थिति बतानी चाहिए।

लेकिन मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्रा मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने इस याचिका को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह से भ्रामक है और इसमें कोई ठोस सबूत या स्वतंत्र जाँच का आधार नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि याचिका में सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की बातें हैं, जो कुछ प्लेटफॉर्म्स पर कही गईं, लेकिन इनके पीछे कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं।

मद्रास हाई कोर्ट का सख्त रुख

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस याचिका में कोई ठोस सामग्री या विस्तृत जानकारी नहीं है। यह एक अस्पष्ट और सामान्य शिकायत है, जिसमें कोर्ट से गहन जाँच की माँग की गई, जो उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का कोई आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह अपनी जाँच और फैसले खुद करे।

इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जो तमिलनाडु स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को एक महीने के अंदर जमा करना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले में मेरिट पर कोई राय नहीं दी गई है और चुनाव आयोग को अपने फैसले लेने की आजादी बरकरार रहेगी।

कॉन्ग्रेस का वोट चोरी प्रोपेगेंडा बेनकाब

यह फैसला कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ के दावे पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट करके इस फैसले को कॉन्ग्रेस के झूठे प्रचार का पर्दाफाश बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी का पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन विदेश में तैयार किया गया था, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
अमित मालवीय ने कहा कि कोर्ट ने याचिका को भ्रामक, अस्पष्ट और सबूतों से खाली करार दिया है। साथ ही 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाकर कोर्ट ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक हितों के लिए चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अमित मालवीय ने आगे कहा कि यह फैसला 2024 के लोकसभा चुनावों की निष्पक्षता और बीजेपी की ऐतिहासिक जीत की वैधता को मजबूत करता है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी बेकार की कानूनी लड़ाइयों और प्रचार में समय बर्बाद कर रही है, जबकि बीजेपी शासन, स्थिरता और विकास पर ध्यान दे रही है।

मद्रास हाई कोर्ट के फैसले से कॉन्ग्रेस बेनकाब

मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले से कॉन्ग्रेस की किरकिरी हुई है। राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी ने जो प्रोपेगेंडा चलाया था, वह कोर्ट में टिक नहीं सका। हालाँकि राहुल गाँधी को चुनाव आयोग ने 7 दिनों का समय दिया था, लेकिन राहुल गाँधी की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही हलफनामा दाखिल किया।

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला कॉन्ग्रेस के ‘वोट चोरी’ के दावों पर करारा प्रहार है। 1 लाख रुपए का जुर्माना और याचिका को खारिज करना साफ संकेत है कि बिना सबूत के राजनीतिक साजिशें नहीं चलेगी। यह फैसला न सिर्फ कॉन्ग्रेस के प्रचार को नेस्तनाबूद करता है, बल्कि भारत के लोकतंत्र की मजबूती को भी दिखाता है। अब सवाल यह है कि क्या कॉन्ग्रेस अपने झूठे अभियान को बंद करेगी, या फिर और बेबुनियाद दावों के साथ जनता को भ्रमित करने की कोशिश करेगी? समय ही इसका जवाब देगा।

बुर्का-मांस-नमाज और तबलीगी जमात में जाने का दबाव, आजम ने शीला को साईबा बनाकर किया निकाह: हरियाणा के नूहं में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली गिरफ्तारी

हरियाणा के नूहं जिले में एक हिंदू महिला का धोखे से धर्म परिवर्तन करवाने और उसका शारीरिक व मानसिक शोषण करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में आजम नाम के मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

यह गिरफ्तारी हरियाणा के नए कानून ‘गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम 2022’ के तहत की गई है। नूहं जिले में इस कानून के तहत यह पहली कार्रवाई है।

क्या है मामला?

पीड़िता का नाम शीला उर्फ कंचन है। वह उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के धनपुरा गाँव की रहने वाली है और पिछले कई सालों से अपने दो बच्चों के साथ हरियाणा के नूहं में रह रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2008 में शीला की शादी छुट्टन नाम के व्यक्ति से हुई थी, लेकिन छुट्टन की नशे की लत और आपराधिक गतिविधियों के चलते उसका शादीशुदा जीवन खराब हो गया।

छुट्टन एक हत्या के केस में जेल चला गया और शीला को बच्चों समेत अकेला छोड़ दिया। इसके बाद शीला मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती रही। 2020 में शीला की मुलाकात नूहं में रहने वाले मुस्लिम व्यक्ति आजम से हुई। आजम ने मदद और बच्चों की देखभाल का भरोसा दिया।

आजम ने अपने प्रेमजाल में फँसाकर शीला का भरोसा जीता। फिर वह शीला और बच्चों को नोएडा, पानीपत और भिवाड़ी लेकर गया और किराए पर रखा। शीला ने आरोप लगाया कि आजम ने 2020 में मौलाना से जबरन धर्मांतरण कराया।

मौलाना ने उसे कलमा पढ़वाया और शीला नाम बदलकर ‘साईबा’ रख दिया। इसके बाद आजम ने जबरन निकाह भी किया। निकाह के बाद आजम हर रोज प्रताड़ित करता था। घर में रखी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी और मारपीट भी की।

आजम ने बुर्का पहनने, नमाज पढ़ने और तबलीगी जमात में जाने का भी दबाव बनाया और जबरन मांस खिलाया। शीला को बाद में पता चला कि आजम पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी है।

जब शीला ने आजम के गाँव मालब जाकर उसके परिवार से बात करनी चाही तो वहाँ हमला कर दिया। किसी तरह से जान बचाकर शीला नूहं वापस आई, लेकिन आजम भी वहाँ आ गया और फिर उसके साथ रहने लगा।

पुलिस की कार्रवाई

शीला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित महिला का कहना है कि आजम उसकी मजदूरी की कमाई छीन लेता था और लगातार शारीरिक व मानसिक शोषण करता था। उसने बताया कि आजम के साले कल्लू और हक्कू उसे फोन पर अश्लील बातें करते और निकाह का दबाव डालते थे।

शिकायत के बाद नूहं के DSP और एसपी के निर्देश पर आजम को गिरफ्तार कर लिया गया है। SP राजेश कुमार ने बताया कि यह नूहं में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली गिरफ्तारी है और मामले की जाँच की जा रही है।

बेटे की मौत का फायदा उठा घर में घुसे मिशनरी, बोले-भगवान ने की नाइंसाफी, येशू मदद करेंगे: MP में 10 साल में 200 परिवारों का धर्मांतरण, 5 गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के नवानगर इलाके में पिछले 10 साल से धर्म परिवर्तन का नेटवर्क चल रहा था। मंगलवार (9 सितंबर 2025) की रात पुलिस ने छापा मारा और मौके से आपत्तिजनक ईसाई धर्म संबंधी और किताबें बरामद की। मामले में पुलिस ने नाथन नायक, मीणा नायक, अर्पित नायक, पिंकी सोनवानी और नंदन शाह को गिरफ्तार किया है। सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

यह पूरा मामला नवानगर की बसौर बस्ती से जुड़ा है, जहाँ नाथन नायक और उसका परिवार रह रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये लोग आसपास के गरीब, दुखी और जरूरतमंद लोगों को पढ़ाई, पैसे और इलाज जैसी चीजों का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करते थे।

बस्ती वालों के अनुसार, हर रविवार, बुधवार और शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग वहाँ जमा होते थे। जैसे ही सब अंदर जाते, गेट बंद कर दिया जाता और अंदर क्या होता, किसी को पता नहीं चलता।

स्थानीय महिला रेणु देवी ने बताया कि उनके बेटे की मौत के बाद परिवार परेशान था, तभी ये लोग उनके पास आने लगे, हाल-चाल पूछने लगे और फिर यीशू की प्रार्थना में बुलाने लगे। उन्होंने साफ मना कर दिया, लेकिन कई दूसरे लोग लालच में आ गए और धर्म परिवर्तन कर लिया।

रेणु देवी ने कहा, “ये लोग मेरे ऊपर निगाह रख रहे थे। आते-जाते मुझसे हाल पूछते। कुछ दिन बाद मेरे पास बैठकर मन बहलाने की कोशिश करने लगे। हफ्ता भर ही हुआ होगा कि धर्म-कर्म की बातें करते। वो कहते- भगवान ने बहुत बड़ी नाइंसाफी कर दी। येशू मेरी मदद करेंगे। वे बहुत दयालु हैं। मुझसे इन लोगों ने प्रार्थना में आने के लिए कहा। बोलते थे कि हम पैसा-धेला सब से मदद करेंगे।”

नाथन पहले से ही ईसाई बन चुका था और सिंगरौली में आकर सिलाई की दुकान खोली थी। फिर धीरे-धीरे उसने ढाई हजार वर्ग फीट जमीन पर कब्जा कर चर्चनुमा बिल्डिंग बना ली। वहीं पर बैठकर वो और उसका परिवार धर्म परिवर्तन का काम करते थे। उसकी पत्नी मीणा महिलाओं को और बेटा अर्पित युवाओं को टारगेट करता था।

बस्ती के लोगों का कहना है कि करीब 200 से ज्यादा लोग ईसाई बन चुके हैं। यहाँ तक कि कोयला खदान में काम करने वाले कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी प्रार्थना सभा में शामिल होते थे।

पुलिस अब यह भी जाँच कर रही है कि क्या कॉलेजों में भी युवाओं को टारगेट किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए पैसों का इस्तेमाल हुआ। इसलिए उनके बैंक अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है। फिलहाल घर और दुकान सील कर दी गई है और मामले की गहराई से जाँच चल रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नवानगर थाना प्रभारी कपूर त्रिपाठी ने कहा,” सूचना मिली थी कि एक बस्ती में कुछ लोग स्थानीय लोगों को बरगलाकर अवैध रूप से उनका धर्मांतरण करा रहे हैं। इस सूचना पर तुरंत एक्शन लिया गया। मौके पर जाकर देखा तो करीब 100 लोग वहां इकट्ठा थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 लोगों को हिरासत में लिया। इन आरोपितों से पूछताछ जारी है।”

कॉन्ग्रेस MP के पाकिस्तान कनेक्शन, परिवार के 3 सदस्यों पर विदेशी नागरिकता: असम SIT ने 96 पेज की रिपोर्ट CM सरमा को सौंपी, गौरव गोगोई ने आरोपों को नकारा

असम सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बुधवार (10 सितंबर) को कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई के कथित पाकिस्तान कनेक्शन की जाँच के बाद अपनी 96 पेज की रिपोर्ट मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को सौंपी।

रिपोर्ट लोक सेवा भवन में SIT के सदस्यों मुन्ना प्रसाद गुप्ता, रोजी कलिता, प्रणबज्योति गोस्वामी और मैत्रेयी देका की मौजूदगी में दी गई।

CM सरमा ने X पर एक पोस्ट में कहा कि असम कैबिनेट ने ‘भारत विरोधी गतिविधियों’ की जाँच के लिए SIT बनाई थी और ‘हैरान करने वाले तथ्य’ सामने आए हैं।

उन्होंने लिखा, “17 फरवरी 2025 को असम कैबिनेट ने एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और उसके साथियों की भारत विरोधी गतिविधियों की जाँच के लिए SIT बनाई थी। इस गहन जाँच के दौरान SIT ने ऐसे चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं जो देश की संप्रभुता को कमजोर करने की बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि जाँच में यह भी पता चला कि पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने असम के एक सांसद की पड़ोसी देश की यात्रा में मदद की।

उन्होंने लिखा, “SIT ने एक ब्रिटिश नागरिक की संलिप्तता भी पाई, जो एक भारतीय सांसद से शादीशुदा है, और वह अली तौकीर शेख की नापाक गतिविधियों में शामिल है। इसके अलावा जाँच में यह भी खुलासा हुआ कि पाकिस्तान सरकार के गृह मंत्रालय ने असम के एक माननीय सांसद की उनके देश की यात्रा में मदद की।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य सरकार SIT की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन करेगी। CM सरमा ने दावा किया कि गोगोई के परिवार के चार में से तीन लोग विदेशी नागरिकता रखते हैं।

उन्होंने X पर लिखा, “असम सरकार अब SIT की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन करेगी और इसे राज्य कैबिनेट के सामने रखेगी। कैबिनेट में चर्चा के बाद जाँच में मिली जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा।”

इस बीच, कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई ने दावा किया कि CM सरमा के आरोप ‘बनावटी कहानी’ पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा, “वह (असम CM हिमंता बिस्वा सरमा) सोचते हैं कि असम के लोग इतने मूर्ख हैं कि उनके बेतुके आरोपों पर विश्वास कर लेंगे। वह असम के लोगों की बुद्धि और समझ का सम्मान नहीं करते। असम के लोग जानते हैं कि उन्होंने सिर्फ आरोपों के आधार पर एक बनावटी कहानी बनाई है ताकि अपनी सरकार के भ्रष्ट शासन को छिपा सकें और यह दिखा सकें कि उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी का इस्तेमाल अपने परिवार को अमीर बनाने, भारी संपत्ति और अवैध धन इकट्ठा करने के लिए किया।”

जैसा कि OpIndia ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोल्बर्न दिल्ली के क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। हैरानी की बात है कि पाकिस्तानी मूल का अली तौकीर शेख CDKN के एशिया के लिए रीजनल डायरेक्टर हैं। वो भारत के खिलाफ खासकर अपने X अकाउंट के जरिए फेक न्यूज फैलाता रहा है। उसने दिल्ली दंगों का मुद्दा संसद में उठाने के लिए गोगोई का समर्थन भी किया था।

गौरतलब है कि हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि कोलबर्न 2011-15 के बीच क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) और LEAD जैसे संगठनों के लिए काम करते हुए अधिकतर समय पाकिस्तान में रहीं। सरमा ने दावा किया कि कोलबर्न पाकिस्तान सरकार की एक टास्क फोर्स में शामिल थीं, जो कथित तौर पर ISI का मुखौटा थी।

सरमा ने बार-बार उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। सरमा ने इस साल फरवरी में दावा किया था, “ISI से संबंधों के आरोप, युवाओं को पाकिस्तान दूतावास में ले जाकर ब्रेनवॉश और कट्टरपंथी बनाने, पिछले 12 सालों से भारतीय नागरिकता न लेने, धर्म परिवर्तन के कार्टेल में हिस्सा लेने और जॉर्ज सोरोस जैसे बाहरी स्रोतों से राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने के लिए फंड लेने जैसे गंभीर सवालों का जवाब देना होगा। ये चिंताएँ नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं।”

सरमा ने कोलबर्न की ब्रिटिश नागरिकता और उनके सुपरवाइजर अली तौकीर शेख के भारत विरोधी प्रोपेगैंडा का भी जिक्र किया। सरमा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या गौरव गोगोई के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कार्यकाल में ISI का असम के मुख्यमंत्री कार्यालय तक दखल था।

गृह मंत्री अमित शाह ने 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर संसदीय चर्चा के दौरान यही बात कही थी। उन्होंने गोगोई की ओर मुखातिब होते हुए कहा था, “आप कई बार पाकिस्तान गए हैं, लेकिन क्या कभी बॉर्डर वाले इलाकों में गए हैं। क्या आप समझते हैं कि हमारे सैनिक किस परिस्थितियों में काम करते हैं।”

बिना कोई नोटिस दिए ‘गौरक्षक’ पुनीथ केरहल्ली को कर्नाटक पुलिस ने किया गिरफ्तार: मोहम्मद जुबैर बोला- ये तो ‘एहतियाती’ कार्रवाई, लोगों ने पूछा- तुम पर होता तो?

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार ने हिंदू कार्यकर्ता पुनीथ केरहल्ली को बिना किसी ताजा अपराध के सीधे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उन्हें 10 सितंबर 2025 को ‘आगे होने वाले अपराध रोकने’ के नाम पर गिरफ्तार किया। वहीं, मोहम्मद जुबैर ने इस गिरफ्तारी को ‘एहतियाती कार्रवाई’ बताया है।

इसके अलावा, बेंगलुरु पुलिस हिंदू कार्यकर्ता पुनीथ केरहल्ली से जबरन एक ऐसा बॉन्ड साइन करवा रही थी, जिसमें लिखा हो कि वे आगे किसी भी ‘आपराधिक गतिविधि’ नहीं करेंगे। लेकिन हिंदू कार्यकर्ता पुनीथ ने इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ बताते हुए साइन करने से मना कर दिया। फिर कोर्ट में पेश करके 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

वहीं, हिंदू संगठनों और बीजेपी का आरोप है कि यह कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ‘हिंदू विरोधी’ नीति का हिस्सा है और सरकार जानबूझकर हिंदूवादी आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है। मोहम्मद जुबैर के ट्विट पर लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें लिखा कि क्या होगा अगर भाजपा तुझे किसी भी बड़े या छोटे आयोजन से पहले एहतियात के तौर पर गिरफ्तार करना शुरू कर दें?? तु भी एक कथित अपराधी हैं और आतंकियों से कनेक्शन भी है।

मोहम्मद जुबैर के ट्विट पर लोगों की प्रतिक्रिया

पुलिस की ‘एहतियात’ या कॉन्ग्रेस की हिंदू विरोधी चाल?

पुनीथ केरहल्ली पर पहले से कुछ केस दर्ज हैं, जो ज्यादातक गौ-तस्करी रोकने और हिंदू हितों की आवाज उठाने से जुड़े हैं। लेकिन इस बार कोई नई शिकायत नहीं थी। न कोई हिंसा हुई थी और ना ही कोई बयानबाजी। फिर भी उन्हें ‘BNS की धारा 127’ के तहत गिरफ्तार किया गया। यह धारा आमतौर पर तब लगाई जाती है जब किसी को समाज के लिए ‘खतरा’ माना जाए।

जब पुलिस ने पुनीथ को कोर्ट में पेश किया, तो उनसे कहा गया कि एक ‘अंडरटेकिंग‘ दें, जिसमें यह स्वीकार करें कि वे आगे से कोई आपराधिक काम नहीं करेंगे और शांति भंग नहीं करेंगे। पुनीथ ने कहा कि उन्होंने कोई अपराध किया ही नहीं, तो ऐसा बॉन्ड क्यों साइन करें। पुनीत ने इसे नकारा और उसी वजह से उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया।

ये वही कॉन्ग्रेस सरकार है, जो खुलेआम हिंदू त्योहारों और भावनाओं पर रोक लगाने की कोशिश करती रही है। लेकिन अब वह एक कदम आगे बढ़ गई है, अगर कोई हिंदू आवाज उठाता है, तो उसे बिना अपराध किए भी जेल भेजा जा सकता है।

मुस्लिम नेता का भड़काऊ बयान, लेकिन सरकार खामोश

इसी दौरान एक और मामला सामने आया। बीजेपी नेता सीटी रवि ने एक गणेश विसर्जन कार्यक्रम में मंच से जोश में बयान दिया, जिस पर तुरंत FIR दर्ज हो गई। जबकि कई कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं के भड़काऊ बयान आज तक बिना एक्शन के लटक रहे हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार अब साफ तौर पर हिन्दू कार्यकर्ताओं को दबाने की नीति पर काम कर रही है। पुनीथ केरहल्ली का मामला उसी का ताजा उदाहरण है, न कोई नया केस, न वारंट। और जब कोई हिंदू सिर उठाकर बोलता है, तो उसे कॉन्ग्रेस सरकार ‘एहतियातन’ जेल भेज देती है।

जाकिर नाइक की वीडियो से हुआ ब्रेनवॉश, ‘CEO’ असरार ने आतंकी बनाया: ब्यावर में ISIS टेरर मॉड्यूल से जुड़ा कामरान गिरफ्तार, पुलिस ने बिस्तर से दबोचा

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा से कामरान कुरैशी उर्फ समर खान को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार (11 सितंबर 2025) को गिरफ्तार किया। उसे एक पैन इंडिया टेरर मॉड्यूल (देशभर में फैले आतंकी नेटवर्क) से जुड़े होने के आरोप में पकड़ा गया है।

इस मामले में अब तक ISIS से जुड़े कुल पाँच आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि ये लोग किसी बड़े त्योहार से पहले भारत के किसी शहर में धमाका करने की साजिश रच रहे थे।

क्या है पूरा मामला

कामरान कुरैशी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह भगोड़े जाकिर नाइक और तारिक जमील, तारिक मसूद जैसे कट्टरपंथी मौलवियों के वीडियो देखकर प्रभावित हुआ। इन वीडियो और कट्टरपंथी कंटेंट के जरिए उसकी ब्रेनवॉशिंग हुई और वह आतंक की ओर बढ़ा। वह गजवा-ए-हिंद से जुड़ी विचारधारा का समर्थन करने वाले एक वॉटस्ऐप ग्रुप का हिस्सा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कामरान की ऑनलाइन मुलाकात असरार दानिश नाम के एक युवक से हुई, जो झारखंड का रहने वाला है। असरार दानिश इस पूरे आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड है और पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में रहता है।

असरार को ग्रुप में ‘सीईओ’ कहा जाता है। उसे बुधवार (10 सितंबर 2025) को रांची के लोअर बाजार थाना क्षेत्र के न्‍यू तबारक लॉज से गिरफ्तार किया गया था।

इस मामले में एटीएस अब और सक्रिय हो गई है। असरार की गिरफ्तारी के बाद आधा दर्जन संदिग्ध व्यक्तियों का सत्यापन कर रही है। असरार ने ही कामरान को पैसे देकर और दूसरों को जोड़ने का काम सौंपा। वे खिलाफत (इस्लामी शासन) की सोच को बढ़ाने के लिए जमीन खरीदकर ट्रेनिंग कैंप शुरू करने की योजना बना रहे थे।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

बुधवार (10 सितंबर 2025) की सुबह 5:30 बजे दिल्ली पुलिस की टीम ने ब्यावरा की शहीद कॉलोनी में छापा मारा। कामरान को बिस्तर से उठाकर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया गया।

पुलिस को वहाँ मजहबी किताबें भी मिली। कामरान के अब्बू अब्दुल रशीद का कहना है कि कामरान किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं था। उसके अब्बू ने कहा, “वह कभी मैकेनिक की दुकान में काम करता था, कभी वकील के यहाँ 4-5 हजार रुपये की नौकरी करता था। कामरान अगर आतंकी गतिविधियों में होता तो हमसे 100 रुपये की मदद क्यों माँगता?”

पुलिस को कामरान के मोबाइल फोन में संदिग्ध चैट और डेटा मिला है, जिसमें आतंक से जुड़ी बातचीत के सबूत हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, झारखंड से गिरफ्तार आतंकी आफताब नासिर कुरैशी से पूछताछ में कामरान का नाम सामने आया था।

असरार दानिश के जरिए पाकिस्तान से जुड़े लोगों की मदद से भारत में खिलाफत मॉड्यूल लागू करने की कोशिश हो रही थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार, ये ग्रुप देश के युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें आतंक की राह पर लाने की योजना बना रहा था। कामरान कुरैशी की गिरफ्तारी से दिल्ली पुलिस ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है। मामले की जाँच जारी है।

जबलपुर की बस्ती में घुसपैठियों से लोग हुए परेशान, घरों के बाहर चिपकाए ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर: हिंदू संगठनों ने ‘रोहिंग्या’ बताया, पुलिस ने कहा- ‘खानाबदोश’

जबलपुर की शिवराज बस्ती में पोस्टर लगे हैं, जिसमें लिखा है कि ‘यह मकान बिकाऊ है’। बस्ती के लोगों ने यह कदम कुछ अनजान और अवैध घुसपैठियों से परेशान होकर लगाया है। बस्ती के लोग इन्हें रोहिंग्या या संदिग्ध बता रहे हैं। इन लोगों पर गंदगी फैलाने, चोरी करने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप हैं। हालाँकि, पुलिस की जाँच में कुछ और ही बात सामने आई है।

क्या है पूरा मामला?

दैनिक भास्कर की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिवराज बस्ती में रहने वाले कुछ परिवारों ने बताया है कि पिछले कुछ समय से करीब 50 लोग यहाँ आकर रह रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर खानाबदोश (जिनका कोई स्थायी निवास नहीं) हैं। कुछ लोग झोपड़ियाँ बनाकर रह रहे हैं और कुछ किराए पर कमरे लिए हैं।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि ये लोग भीख माँगते हैं, गंदगी फैलाते हैं और उपद्रव कर माहौल को खराब करते हैं। जब कुछ लोगों ने इनका विरोध किया तो अवैध घुसपैठियों ने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसी वजह से कई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए हैं और घरों के बाहर लिखवा दिया है ‘मकान बेचना है’। यह मामला 5 सितंबर 2025 के आस-पास का बताया जा रहा है। इसका एक वीडियो यूट्यूब पर भी मिला है, जिसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग देखी जा सकती है।

बस्ती में बने दो गुट

अवैध घुसपैठियों को लेकर शिवराज बस्ती के लोगों में भी दो गुट बन गए हैं। एक गुट इन्हें हटाना चाहता है और मानता है कि ये लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं और इनसे खतरा है। वहीं, जिन लोगों ने घुसपैठियों को किराए पर कमरे दिए हैं, वे इनका समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये लोग अपना कमाते-खाते हैं और कोई परेशानी पैदा नहीं करते हैं। यह पूरा मामला अब पुलिस की जाँच के दायरे में आ गया है।

बस्ती में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वो इस बस्ती में कई सालों से रह रही हैं। इसके अलावा आधार कार्ड बारिश में बह गया और लोग उन्हें चोरी करने वाला, गंदगी फैलाने वाला बताते हैं।

पुलिस की जाँच और विरोधाभासी बयान

इन पोस्टरों की जानकारी मिलने पर कुछ हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जाँच शुरू की तो पता चला कि यहाँ रहने वाले लोग महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के हैं और खानाबदोश हैं। पुलिस ने बताया कि ये लोग कहीं से भगाए नहीं गए हैं, बल्कि अपनी मर्जी से यहाँ रह रहे हैं।

‘ये गाँधीवादी नहीं गालीवादी पार्टी है’: PM मोदी की माँ का बिहार कॉन्ग्रेस ने किया अपमान, AI से Video बनाकर उड़ाया माँ-बेटे के रिश्ते का मजाक; BJP भड़की

बिहार के दरभंगा में राहुल गाँधी की वोट अधिकार यात्रा के दौरान मंच से रिजवी उर्फ राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ की गाली दी थी। मामले का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि इतने से कॉन्ग्रेस को चैन नहीं मिल सका है। अब कॉन्ग्रेस पार्टी ने AI का इस्तेमाल कर एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ का अपमान किया है।

AI से बनी यह वीडियो बिहार कॉन्ग्रेस (Bihar Congress) के एक्स हैंडल से पोस्ट की गई है। वीडियो में पीएम मोदी का AI मॉडल कह रहा है, “आज की वोट चोरी डन हो गई, अब जाता हूँ सोने।”

इसके बाद सपने में उनकी माँ आकर कहती हैं, “अरे बेटा पहले तो तुमने मुझे नोटबंदी की लंबी लाइनों में खड़ा किया, तुमने मेरे पैर धोने का रील बनवाया और अब बिहार में मेरे नाम पर राजनीति कर रहे हो। तुम मेरे अपमान के बैनर-पोस्टर छपवा रहे हो, तुम फिर से बिहार में नौटंकी करने की कोशिश कर रहे हो। राजनीति के नाम पर कितना गिरोगे?”

कॉन्ग्रेस की ओछी हरकत के बाद इस वीडियो को लेकर भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ का अपमान कर रही है। यह अब गाँधी की कॉन्ग्रेस नहीं रही, यह ‘गालियों की कॉन्ग्रेस’ बन गई है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री की माँ को गाली देने का कोई पछतावा नहीं। कॉन्ग्रेस ने न सिर्फ झूठ बोलकर आरोपित का बचाव किया, बल्कि तारिक अनवर का भी बचाव किया और अब बिहार कॉन्ग्रेस ने एक घिनौने वीडियो के साथ सारी हदें पार कर दीं। यह पार्टी गाँधीवादी की बजाय गालीवादी हो गई है। महिला और मातृ शक्ति का अपमान कॉन्ग्रेस की पहचान है।”

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस वीडियो की कड़ी निंदा की है। उन्होंने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “राहुल गाँधी के इशारे पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने माननीय प्रधानमंत्री जी की दिवंगत माँ का मजाक उड़ाया है। कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माँ को गाली दी थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस का ‘शाही परिवार’ भारत की माताओं और बहनों का अपमान कर रहा है। यह न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह देखना भी घिनौना है कि एक पार्टी भारत के गरीबों से इतनी नफरत करती है। कॉन्ग्रेस महिला विरोधी है, कॉन्ग्रेस भारत के गरीबों से नफरत करती है।”

कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए ऐसी गिरी हुई हरकतें करना कोई बड़ी बात नहीं है और बार-बार पीएम मोदी की माँ का ही नहीं बल्कि देश की हर माँ का अपमान कर रही है।

दरभंगा में राहुल गाँधी की वोट अधिकार यात्रा के मंच से पीएम मोदी की माँ को गाली दिए जाने की घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कॉन्ग्रेस और राजद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा था, “मेरी माँ अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजनीति से कोई लेना-देना न होने के बावजूद मेरी माँ को कॉन्ग्रेस-राजद के मंच से घिनौनी गालियाँ दी गईं। यह बेहद दुखद, दर्दनाक और व्यथित करने वाला है।”

पार्टी की इस हरकत को बीते अब ही कुछ ही दिन हुआ था कि फिर यह साबित कर दिया गया कि कॉन्ग्रेस से देश की माँ-बेटियों का सम्मान करने की उम्मीद करना ही गलत है, क्योंकि यह इनकी पहचान बन चुकी है।

भारत को तटस्थ देख बदले US प्रशासन के सुर: नए राजदूत ने कहा- इंडिया हमारी प्राथमिकता, विदेश मंत्री ने माना- दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण संबंध

अमेरिका की राजनीति में भारत को एक महत्वपूर्ण और केंद्रीय साझेदार के रूप में माना जा रहा है। पहले कभी डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की नीतियों पर सवाल उठाए थे, वहीं अब उनका प्रशासन भारत को ‘भविष्य की दिशा तय करने वाला साझेदार’ बता रहा है। इस बदलाव का संकेत कई घटनाओं से भी मिलता है, जैसे कि भारत के मंत्रियों को व्यापार वार्ता के लिए वॉशिंगटन बुलाना।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने भी भारत के साथ रिश्ते को ‘दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक’ बताया है। अमेरिका के अगले राजदूत नामित किए गए सर्जियो गोर ने साफ किया है कि भारत को चीन से दूर करके अपनी तरफ लाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ट्रंप प्रशासन के इस रणनीतिक बदलाव से यह साफ है कि अमेरिका अब भारत के बिना आगे नहीं बढ़ना चाहता।

भारत अब अमेरिका की ‘टॉप रिलेशनशिप’

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने भारत के साथ अमेरिका का रिश्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक बताया है। मार्क रुबियो का मानना है कि 21वीं सदी में दुनिया का भविष्य कैसा होगा, यह तय करने में यह रिश्ता बहुत मायने रखता है। मार्क रुबियो का कहना है कि 21वीं सदी की कहानी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लिखी जाएगी। भारत का महत्व इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने अपनी कमान का नाम भी बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक’ कर दिया है।

मार्क रुबियो के अनुसार, भारत-अमेरिका के बीच कई अहम मुद्दे हैं जिन पर उन्हें मिलकर काम करने की जरूरत है, जैसे कि यूक्रेन और अन्य मामले। मार्क रुबियो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में एक ऐसा प्रतिनिधि होना चाहिए, जिसकी सीधी पहुँच अमेरिकी राष्ट्रपति तक हो। इसलिए मार्क ने सर्जियो गोर को इस पद के लिए सही उम्मीदवार बताया हैं। क्योंकि वह प्रशासन और ट्रंप ऑफिस दोनों जगह से काम करवा सकते हैं। ऐसा व्यक्ति होने से दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

भारत को चीन से दूर करके अमेरिका की तरफ लाना

अमेरिका के अगले राजदूत के तौर पर सर्जियो गोर को चुना गया है। सर्जियो गोर ने कहा अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता भारत को चीन से दूर करके अपनी तरफ लाना है। इसके अलावा, भले ही अभी भारत और अमेरिका के बीच कुछ छोटे-मोटे मतभेद हों, लेकिन ये जल्द ही सुलझ जाएँगे। दोनों देशों के बीच दशकों पुराने और चीन की तुलना में काफी गहरे संबंध हैं।

सर्जियो गोर ने कहा कि चीन सिर्फ भारत के साथ लगी सीमा पर ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया में विस्तारवाद की नीति अपना रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत का बाज़ार उनके कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) के लिए खुले। सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत का मध्यवर्ग अमेरिका की पूरी आबादी से भी बड़ा है।

ट्रंप प्रशासन की बदली सोच

सुनवाई के दौरान रूबियो ने साफ कहा कि सेर्जियो गोर सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के भरोसेमंद लोगों में हैं और उनके पास सीधे ओवल ऑफिस तक पहुँच है। ऐसे में भारत को अमेरिका में वो जगह मिल रही है, जहाँ से नीतियाँ बनती हैं। यह अमेरिका की नीति में एक बड़ा बदलाव है, जो दिखाता है कि भारत को अब सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि रणनीतिक साथी माना जा रहा है।

ट्रंप प्रशासन का यह यू-टर्न सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी नहीं है। भारत के मंत्रियों को अमेरिका बुलाया गया है। वहाँ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी है। यह सब दर्शाता है कि अब अमेरिका समझ चुका है कि भविष्य की वैश्विक व्यवस्था भारत को साथ लिए बिना नहीं बनाई जा सकती।

जहाँ कभी ट्रंप प्रशासन भारत को लेकर दोराहे पर खड़ा था, अब वहीं भारत को भविष्य का केंद्र मान रहा है। दिल्ली को अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि रणनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव भारत की मजबूती का संकेत भी है और दुनिया में उसकी बढ़ती अहमियत का सबूत भी।

राहुल गाँधी ने म्यांमार से बनवाया ‘वोट चोरी’ का खाका? चर्चा शुरू होते ही कॉन्ग्रेसी देने लगे सफाई: जानिए क्या है मेटाडाटा, जिसे खंगालने पर मिले ‘विदेशी’ लिंक

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग (ECI) को बदनाम करने के लिए ‘वोट चोरी’ की साजिश का प्रपंच रचा। इसके लिए बकायदा कागज भी सामने लेकर आए । लेकिन वे अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। बुधवार (10 सितंबर 2025) को यह खुलासा हुआ कि राहुल गाँधी ने इस साल 7 अगस्त 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जिन दस्तावेजों से ‘वोट चोरी’ को साबित करने की कोशिश की थी, वह असल में म्यांमार में तैयार किया गया था।

यह खुलासा सबसे पहले एक्स हैंडल ‘खुरपेंच’ ने किया। 7 पोस्ट की एक थ्रेड में इस अकाउंट ने ठोस सबूतों के साथ दावा किया कि राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ वाला दस्तावेज भारत के बाहर बनाया गया था।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इस दस्तावेज को अपनी वेबसाइट पर साझा किया था, जिसे ‘वोट चोरी प्रूफ’ नाम के टेक्स्ट से हाइपरलिंक किया गया था। गूगल ड्राइव के एक फोल्डर में कुल 3 PDF फाइलें मिलीं, जिसका नाम था, ‘Rahul Gandhi’s Presentation’। इन फाइलों में अंग्रेजी, हिंदी और कन्नड़ भाषा में वही दस्तावेज मौजूद थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस नेता ने 7 अगस्त की अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया था।

एक्स हैंडल ‘खुरपेंच’ ने इन फाइलों का मेटाडाटा खंगाला। जानकारी के लिए बता दें कि मेटाडाटा किसी भी फाइल की वह जानकारी होती है, जो उसकी सामग्री से अलग होती है।

मेटाडाटा में लेखक का नाम, फाइल बनने की तारीख, समय और साइज जैसी जानकारियाँ होती हैं। इसकी मदद से किसी फाइल को इस्तेमाल करना, ढूँढना और व्यवस्थित करना आसान हो जाता है।

क्या है मेटाडाटा

मेटाडाटा को ‘डेटा के बारे में डेटा’ कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण संदर्भ परत है, जो रॉ डाटा को मीनिंगफूल ढाँचे में लाता है और उसको इस्तेमाल करने लायक बनाता है। मेटाडाटा डेटा और उसके इस्तेमाल के बीच पुल का काम करता है, ताकि ये यूजर और सिस्टम दोनों जानकारी को सही तरीके से समझ सके और उपयोग कर सके।

चाहे किसी दस्तावेज के लेखक की पहचान करनी हो, डेटाबेस के फ़ील्ड की संरचना तय करनी हो या किसी फोटो में स्थान से जुड़ा टैग जोड़ना हो, मेटाडाटा वह ढाँचा देता है जो बिखरे हुए डेटा को उपयोगी जानकारी में बदल देता है।

अपनी जाँच में ‘खुरपेंच’ ने पाया कि राहुल गाँधी की प्रेजेंटेशन के तीनों वर्ज़न म्यांमार स्टैंडर्ड टाइम (MMT) में बनाई गई हैं। MMT म्यांमार का टाइम जोन है, जो कॉर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (UTC) से 6 घंटे 30 मिनट आगे है। तुलना के लिए बता दें कि भारतीय मानक समय (IST) UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।

भारत में बनी PDF फाइलों में हमेशा UTC +5:30 का समय दिखेगा, न कि +6:30। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता के ‘वोट चोरी’ दस्तावेज के मेटाडाटा से साफ है कि ये फाइलें म्यांमार टाइम जोन में बनी हैं।

‘खुरपेंच’ ने यह भी बताया कि वीपीएन (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करने या गूगल ड्राइव से फाइल शेयर करने पर भी PDF फाइल का एम्बेडेड मेटाडाटा नहीं बदलता।

इस खुलासे से कॉन्ग्रेस खेमे में हलचल मच गई। आरोपों का जवाब देने के लिए कॉन्ग्रेस की IT सेल के ट्रोल और समर्थक एक्स पर सक्रिय हो गए। खुरपेंच के दावों को कॉन्ग्रेस नेता और समर्थक नकारने में लग गए। गुरुवार (11 सितंबर 2025) को कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने राहुल गाँधी की सफाई में चैट जीपीटी की मदद लेने की कोशिश की, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं हुआ।

उन्होंने दावा किया कि टाइमजोन में गड़बड़ी किसी सॉफ्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन की समस्या या फिर एडोबी बग के कारण हुई है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह एक घंटे का फर्क किसी स्थान परिवर्तन का सबूत नहीं है, बल्कि यह आम तकनीकी गड़बड़ी है। एडोबी प्रोडक्ट्स में अक्सर टाइमस्टैम्प से जुड़ी ऐसी दिक्कतें आती हैं, जहाँ मेटाडाटा फील्ड्स में ऑफसेट मेल नहीं खाता।”

इसके जवाब में ‘खुरपेंच’ ने बताया कि एडोबी किसी भी बग को तुरंत पहचानकर ठीक कर देता है। उसने साफ किया कि कौन-सा सॉफ्टवेयर वर्ज़न इस्तेमाल हुआ और पूछा कि आखिर कौन-सा बग था जिसने IST को बदलकर MMT दिखा दिया।

उसने यह भी बताया कि यह पीडीएफ एडोबी इलस्ट्रेटर (Adobe Illustrator) से बनाई गई थी, इसलिए इसकी तुलना दूसरे एडोबी प्रोडक्ट्स जैसे लाइटरूम (Lightroom) या ब्रिज (Bridge) से करना बिल्कुल गलत है।

जब कॉन्ग्रेस समर्थित कुछ ट्रोल्स ने ‘लाइटरूम में टाइमज़ोन बग’ का मामला उठाया, तो ‘खुरपेंच’ ने साफ किया कि यह बग 14 साल पहले ही ठीक कर दिया गया था और एडोबी इलस्ट्रेटर (जिससे राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ दस्तावेज बना) में ऐसा कोई बग था ही नहीं।

इसके बाद से सुप्रिया श्रीनेत और राहुल गाँधी ने अब तक इन गंभीर आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।

कॉन्ग्रेस के अलावा वामपंथी और प्रोपेेगेंडा जर्नलिस्ट और मीडिया ने भी खुरपेंच के खिलाफ ‘फैक्टचेक’ का खेल शुरू किया। आल्टन्यूज के जुबैर और अभिषेक ने अडोबी इलस्ट्रेटर के जरिए ये बताने की कोशिश की कि राहुल गाँधी के दस्तावेज सही हैं और म्यांमार में बनाए जाने के दावे गलत।

यह ध्यान देना जरूरी है कि राहुल गाँधी का राजनीतिक करियर विदेशी शक्तियों की संलिप्तता को लेकर लगातार विवादों में घिरा रहा है। चाहे कॉन्ग्रेस का चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समझौता (MoU) करना हो या फिर राहुल गाँधी की रहस्यमयी विदेशी यात्राएँ, उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ हमेशा देश की नजरों में रही हैं।

विदेशी अधिकारियों से गुप्त मुलाकातें, कजाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया से चलाए गए बॉट्स के जरिए सोशल मीडिया पर असर डालने वाले कैंपेन इन सबने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रति जनता का शक और गहरा कर दिया है।

इसके अलावा भारत के दुश्मन माने जाने वाले देश तुर्की में कॉन्ग्रेस के दफ्तर खोलने की योजना, संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियाँ और बिना किसी सबूत के बार-बार भारत की चुनावी प्रणाली पर सवाल खड़े करना वाकई चिंताजनक है।

नोट- खबर को मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इस लिंक के जरिए इसे पढ़ा जा सकता है।