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ब्लू, ग्रे, गोल्ड… ट्विटर बदल देगा ‘वेरिफिकेशन टिक’ के रंग, एलन मस्क ने बताया- 1 हफ्ते में लॉन्च होगी नई सुविधा

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क ने ट्विटर खरीदने के बाद इसमें लगातार कई बदलाव किए हैं। तमाम बदलावों में से एक चर्चित और विवादित बदलाव ‘ब्लू टिक’ का रहा है। हालाँकि, अब मस्क ने कहा है कि ट्विटर पर अलग-अलग रंग के ‘टिक’ दिए जाएँगे। साथ ही, उन्होंने मीडिया के दावों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि सस्पेंड किए गए ट्विटर अकाउंट को ‘सामान्य माफी’ के बाद फिर से शुरू (बहाल) करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

एलन मस्क ने एक ट्विटर यूजर के सवाल का जवाब देते हुए कहा है “देरी के लिए खेद है। हम अस्थायी रूप से अगले सप्ताह शुक्रवार (2 दिसंबर 2022) को वेरिफिकेशन लॉन्च कर रहे हैं। इस वेरिफिकेशन में कंपनियों के लिए गोल्डन चेक, चेक, सरकार के लिए ग्रे चेक और व्यक्तियों (सेलिब्रिटी या सामान्य व्यक्ति) के लिए ब्लू चेक शुरू कर रहे हैं। चेक एक्टिवेट करने से पहले सभी वेरिफाइड अकाउंट्स को मैन्युअल रूप से वेरिफाई किया जाएगा। यह दर्दनाक हो सकता है लेकिन जरूरी है।”

मस्क ने अपने अगले ट्वीट में कहा, “सभी वेरिफाइड अकाउंट वाले व्यक्तियों को ब्लू चेक (ब्लू टिक) दिया जाएगा, इसके लिए किसी प्रकार की सीमा नहीं होगी। व्यक्तियों के पास दूसरे प्रकार का छोटा लोगो (टिक) हो सकता है जिससे यह पता चलेगा कि वह एक संगठन से संबंधित हैं यदि उस संगठन द्वारा उसके अकाउंट को वेरिफाइड किया गया है। इस बारे में अगले सप्ताह विस्तार से बताया जाएगा।”

दरअसल, ट्विटर यूजर्स के बीच ब्लू टिक को लेकर बीते कुछ समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इससे पहले एलन मस्क ने ट्विटर ब्लू सर्विस की शुरुआत की थी। इस सर्विस में ट्विटर यूजर 8 डॉलर का पेमेंट करके अपने अकाउंट को वेरिफाई करा सकते थे। हालाँकि, कई फेक अकाउंट्स के वेरिफाई होने के बाद यह सर्विस हटा दी गई थी। इसके बाद अब, एलन मस्क ने अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए यह ऐलान किया है।

वहीं, एलन मस्क ने मीडिया के उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि सभी सस्पेंड किए गए ट्विटर अकाउंट्स को ‘सामान्य माफी’ के बाद फिर से शुरू (बहाल) करने के नकारात्मक प्रभाव होंगे। दरअसल, एपी न्यूज ने एक रिपोर्ट में दावा करते हुए कहा था, “ऑनलाइन सिक्योरिटी एक्सपर्ट का अनुमान है कि सस्पेंड किए गए ट्विटर अकाउंट से उत्पीड़न, अभद्र भाषा और गलत सूचना (फेक न्यूज) में बढ़ोतरी होगी।”

हालाँकि, एलन मस्क ने ऐसे सभी दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने एपी न्यूज पर तंज कसते हुए कहा “एपी गलत सूचनाओं का विशेषज्ञ है। ट्विटर उनसे प्रतिस्पर्धा की उम्मीद नहीं कर सकता।”

बता दें कि एलन मस्क ने गुरुवार (24 नवंबर 2022) को ट्विटर पर एक पोल क्रिएट किया था। इस पोल में मस्क ने लोगों से पूछा था, “क्या ट्विटर को सस्पेंड किए गए अकाउंट्स के लिए सामान्य माफी की पेशकश करनी चाहिए, बशर्ते उन्होंने कानून न तोड़ा हो या फिर गंभीर स्पैम में शामिल न हों।”

एलन मस्क के इस पोल पर कुल 3,162,112 यूजर्स ने वोट किया था, जिसमें 72.4% यूजर्स ने ‘हाँ’ कहा था। वहीं, 27.6% यूजर्स ने ‘नहीं’ कहा था। पोल खत्म होने के बाद मस्क ने इसको लेकर एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने कहा था कि जनता अपना फैसला सुना चुकी है। माफी अगले सप्ताह से शुरू होगी।

गले काटे, सिर में चाकू घोंपा, ताबड़तोड़ AK-47 चलाई: नाइजीरिया में ‘आतंकियों’ ने छेड़ा जिहाद; 14 गाँव लूटे, बच्चों समेत 15 लोगों को मारा

नाइजीरिया में खुलेआम फुलानी मुस्लिम आतंकियों द्वारा स्थानीय समुदाय के खिलाफ जिहाद की घोषणा करने की खबर आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार चरवाहा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले फुलानी मुस्लिम आतंकियों ने इनुगु राज्य के स्थानीय समुदायों के खिलाफ युद्ध (जिहाद) की घोषणा कर दी है। इन्होंने कई लोगों को मार दिया और उनके घरों को जला दिया।

सहारा रिपोर्टर्स की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों ने शनिवार (19 नवंबर 2022) और सोमवार (21 नवंबर 2022) को अगु-अमेद समुदाय पर हमला किया था। बुधवार (25 नवंबर 2022) तक मिली जानकारी के अनुसार हमले में महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 15 लोग मारे गए थे। हमलावरों ने कई गाँवों को लूट लिया और घरों को जला दिया। इससे पहले इन्होंने 2021 में अगु-अमेद और मग्बुजी समुदायों के 14 से अधिक स्थानीय गाँवों को लूट लिया था। इन घटनाओं में कई लोग मारे गए थे और लाखों की संपत्ति नष्ट हो गई थी।

इसके अलावा, बच्चों सहित कई लोगों को इन कट्टरपंथियों ने अगवा कर लिया है। बच्चों का इस्तेमाल ये लोग फिरौती के लिए करते हैं। इनकी संख्या सौ से अधिक थी। इन्होने शनिवार (19 नवंबर 2022) और रविवार ( 20 नवंबर 2022) को अगु-अमेद समुदाय के ओहुलु मग्बेडे गाँव में हमला किया और दो बच्चों सहित आठ लोगों की हत्या कर दी थी।

घटना की पुष्टि करने वाले समुदाय के नेता ओगबू फ्रांसिस ने बताया, “हथियारबंद आतंकी मंगलवार (22 नवंबर 2022) सुबह वापस आ गए और गोलीबारी की, संपत्तियों को नष्ट किया और गाँवों को तबाह कर दिया। ओगबू के अनुसार, एक हमला अगु-अमेद समुदाय के ओहुलु मगबेडे नामक गाँव में किया गया और उन्होंने सात लोगों की हत्या कर दी थी, हमने उनकी लाशें बरामद कर ली हैं।”

हमले की पुष्टि करने वाले साइप्रियन एज़ेदेओगा ने कहा कि आतंकी मग्बुजी और एबोह शहरों में घुस गए थे। उनके पास मशीनगन और भारी हथियार हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास न तो सेना की सुरक्षा है और न ही पुलिस की। हमें सूचना मिली है कि एबोह में 10 और मग्बुजी में पाँच लोग मारे गए हैं।”

सहारा रिपोर्टर्स के अनुसार मृतकों में से कई का गला रेता हुआ था, उनके सिर में चाकू के कई निशान थे। एक अन्य समुदाय के नेता ऑगस्टाइन ओडोह ने भी हमले की पुष्टि की और कहा कि इस्लामी विद्रोहियों ने एहा-अमुफू पर युद्ध की घोषणा की है।

ओडोह ने कहा, ”हमारे लोग खुले हाथों से उनका सामना नहीं कर सकते। वे एके-47 राइफलों के साथ आते हैं और घंटों तक शूटिंग करते हैं। सरकार भले कहीं और सैनिक तैनात करेगी लेकिन इन चरवाहों और इस्लामी आतंकवादी हमलों को रोकने के लिए सैनिकों को तैनात नहीं करेगी। यह इस सरकार का पाखंड है।”

500 टन वजनी पुल के बाद अब बिहार में चोरों ने रेल के इंजन को चुराया, सुरंग खोदकर ले जाते रहे इंजन, पहले भी गायब हो चुका है स्टीम इंजन

बिहार (Bihar) में इन दिनों चोरों के हौसले बुलंद हैं। यही कारण है कि चोरों का गिरोह एक के बाद एक चोरी की बड़ी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। इससे प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बार चोरों ने बरौनी के गरहरा यार्ड से पूरे रेल के एक इंजन को ही चुरा लिया है। बताया जा रहा है कि यह चोरी सुरंग खोदकर की गई है।

उधर, अररिया जिले में तो चोरों के दूसरे गिरोह ने सीताधार नदी पर बने लोहे के पलटनिया पुल का ताला खोलकर उसके कुछ हिस्से चुरा लिए। इसके बाद पुल की सुरक्षा के लिए एक कॉन्स्टेबल को तैनात करना पड़ा है। पलटनिया पुल अररिया के फारबिसगंज को रानीगंज से जोड़ता है।

मुजफ्फरपुर में मिले इंजन के पुर्जे

पुलिस के मुताबिक, पिछले दिनों बरौनी के गरहरा यार्ड में मरम्मत के लिए लाए गए डीजल इंजन पर चोरों की नजर थी। चोरों ने पुर्जों को अलग-अलग कर चुराना शुरू किया और पूरे इंजन को गायब कर दिया। इंजन चुराने के लिए चोरों के गिरोह ने स्टेशन तक सुरंग खोद डाला। अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

मामले में पुलिस ने शक के आधार पर तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। उनकी सूचना के आधार पर पुलिस ने मुजफ्फरपुर के प्रभात कॉलोनी में स्थित कबाड़ के गोदाम पर छापा मारा। पुलिस को यहाँ से इंजन के पुर्जों की 13 बोरियाँ मिलीं।

जाँच के दौरान मिला सुरंग

मामले की जाँच कर रही पुलिस को हैरानी तब हुई जब यार्ड के पास सुरंग का पता चला। पुलिस के मुताबिक, इसी सुरंग के रास्ते चोर आते थे। इंजन के पुर्जों को खोलते थे और बोरियों में भरकर ले जाते थे। इस चोरी के बारे में रेलवे अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी।

पहले भी होती रही है बड़ी चोरी की घटनाएँ

बिहार पुलिस अलग-अलग जिलों में इस तरह के चोरी की घटनाओं से परेशान है। इससे पहले पूर्णिया जिले में रेलवे स्टेशन पर सार्वजिनक प्रदर्शन के लिए रखे विंटेज मीटर गेज स्टीम इंजन को गायब कर बेच दिया गया था। जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि रेलवे के एक इंजीनियर ने ही फर्जी दस्तावेज बनाकर इस स्टीम इंजन को बेच दिया था।

इसी तरह रोहतास में अप्रैल 2022 में चोरों के गिरोह ने लगभग 500 टन वजनी 45 साल पुराने स्टील के पुल को तोड़कर बेच दिया। चोरी के इस वारदात में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के शामिल होने का आरोप लगा था। बाद में इस मामले में जल संसाधन विभाग के एक सहायक अभियंता समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

‘डियर कलेक्टर अंकल… वे मस्जिद से चिल्लाते क्यों हैं’: अजान से परेशान भोपाल के बच्चे, WhatsApp पर घूम रहा DM ऑफिस का सील लगा पत्र

व्हाट्सएप पर तीन पन्नों का एक पत्र घूम रहा है। इस दावे के साथ कि मध्य प्रदेश के भोपाल के कुछ बच्चों ने इसे लिखा है। पत्र भोपाल के कलेक्टर के नाम है। पत्र पर भोपाल कलेक्टर कार्यालय का मुहर भी लगा है। इस पत्र में मस्जिद से आने वाली शोर से होने वाली परेशानियों का जिक्र बच्चों ने किया है।

पत्र पर 9 नवंबर 2022 की तारीख दर्ज है। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता। हमने पत्र को लेकर किए जा रहे दावे के संबंध में जानकारी के लिए भोपाल के डीएम अविनाश लवानिया से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की। उन्होंने फोन नहीं उठाया। हमने व्हाट्सएप पर पत्र की कॉपी भेजकर भी उनसे इस संबंध में जानकारी लेनी चाहिए। लेकिन उनका जवाब प्राप्त नहीं हुआ। वेबसाइट पर उपलब्ध भोपाल कलेक्टर कार्यालय का लैंडलाइन नंबर बार-बार व्यस्त बता रहा था। जिला सूचना अधिकारी से संपर्क का जो लैंडलाइन नंबर वेबसाइट पर दिया गया है, वह गलत बता रहा है। जिला प्रशासन से बात होते ही हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

भोपाल के बच्चों के कथित पत्र में क्या लिखा है

इस पत्र को लिखने वाले बच्चों ने खुद को भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित निखिल बंगलो फेज-3 का निवासी बताया है। कहा है कि उनके इलाके में मुस्लिम आबादी न के बराबर है। लेकिन मस्जिद के लाउडस्पीकर से आने वाली अजान की आवाज से वे परेशान हैं। अजान अलग-अलग तरह की आवाजों में कभी दिन तो कभी रात में होती है। मस्जिद से होने वाली शोर की वजह पूछते हुए बच्चों ने इसे बंद कराने की गुहार लगाई है।

पत्र लिखने वाले कथित बच्चों ने कहा है कि उन्होंने अपनी दिक्कत अपने माता-पिता और पड़ोसियों से साझा की थी। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। बच्चों के मुताबिक उनकी कॉलोनी के बाहर बॉउंड्री वाल के पास से अक्सर अलग-अलग समय पर जोर-जोर से अलग-अलग आवाजें निकाल कर लाउडस्पीकर बजने लगते हैं। इससे उनकी पढ़ाई और खेलकूद बाधित होती है।

पत्र में बच्चों ने कहा है कि उनकी कॉलोनी में भी देवी जी का मंदिर है। यदि वहाँ कभी शोर होता है तो पुजारी चुप करवा देते हैं। लेकिन मस्जिद से अरबी में आने वाली आवाजों को कोई समझ भी नहीं पाता। बच्चों का कहना है उन्होंने स्कूल में अपने सहपाठियों से भी इस पर बात की। उन्होंने भी अपने इलाकों में इसी तरह के शोर की बात कही।

वायरल शिकायती पत्र

भारत जोड़ो यात्रा का भी जिक्र

इस पत्र में राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा का भी जिक्र है। बच्चों ने लिखा है कि उन्हें मीडिया के माध्यम से राहुल गाँधी के भोपाल आने की जानकारी मिली है। DM से गुजारिश करते हुए छात्रों ने अपनी शिकायत कॉपी राहुल गाँधी को भी देने और उनसे इस समस्या के समाधान पर चर्चा करने की गुजारिश की है। बच्चों ने पत्र में कहा है कि राहुल गाँधी दाढ़ी बढ़ाकर बिलकुल भी स्मार्ट नहीं लग रहे और उन्हें कही रुक कर शेविंग करवा लेनी चाहिए।

पत्र के आखिर में बच्चों ने पूछा है कि जब उनके आस-पास एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहते तो तो दिन-रात अज़ान किसे सुनाई जाती है। इस संबंध में अपने शिक्षकों से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए बच्चों ने सवाल किया है कि उत्तर प्रदेश में कैसे लाउडस्पीकर पैक हो गए?

ऑपइंडिया ने भोपाल की निखिल बंगलो फेज 3 कॉलोनी बनाने वाले दीपक लालवानी से भी बात की। उन्होंने इस तरह का कोई पत्र भेजे जाने की जानकारी होने से इनकार किया। लेकिन यह बताया कि कॉलोनी से करीब 500 फीट की दूरी पर ही एक मस्जिद है। यहाँ से आने वाली आवाजें कॉलोनी में स्पष्ट सुनाई देती है।

BigB के नाम, आवाज और फोटो पर पहरा, अमिताभ बच्चन की इजाजत से ही हो सकेगा इस्तेमाल: जानिए क्या है पर्सनैलिटी का अधिकार

बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन (Bollywood Star Amitabh Bachchan) कि अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति उनकी आवाज, फोटो और नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। एक याचिका पर सुनवाई करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने यह आदेश दिया है। इस फैसले से अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन पर रोक लग गई है।

दरअसल, अमिताभ बच्चन ने अपने पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी को लेकर कुछ दिन पहले याचिका दायर की थी। उनकी, इस याचिका पर शुक्रवार (25 नवंबर 2022) को सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट और अथॉरिटी को आदेश जारी करते हुए कहा है कि अमिताभ बच्चन का नाम, फोटो और उन पर्सनैलिटी ट्रेट्स को तुरंत हटाया जाए, जो पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

यही नहीं, कोर्ट ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स से उन फोन नंबर्स के बारे में भी जानकारी देने को कहा है, जो अमिताभ बच्चन के नाम और आवाज का अवैध उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से उन ऑनलाइन लिंक्स को भी हटाने को कहा है, जो अमिताभ की पर्सनैलिटी राइट्स को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

जस्टिस चावला ने कहा है कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अमिताभ बच्चन एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं और कई विज्ञापनों में दिखाई देते हैं। इसलिए, उनकी अनुमति के बिना फोटो, नाम इत्यादि का उपयोग करने से उनकी छवि को नुकसान हो सकता है।

इससे पहले, अमिताभ बच्चन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से कहा है कि बीते कुछ समय से अमिताभ बच्चन की पर्सनैलिटी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस वजह से उन्हें अदालत आने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कोर्ट में व्हाट्सएप लकी ड्रॉ सहित अमिताभ के नाम से कई अन्य और विज्ञापनों का हवाला दिया।

उन्होंने उदाहरण देते हए कहा है कि मैसर्स स्वैग शर्ट्स, https://www.swagshirts99.com/ नामक वेबसाइट बनाकर टी-शर्ट बेच रहा है। इसमें अमिताभ बच्चन की फोटो लगी हुई है। इसी प्रकार ग्वालियर का एक पोस्टर विक्रेता अमिताभ बच्चन की फोटो वाले पोस्टर बेच रहा है।

क्या है मामला…

दरअसल, अमिताभ बच्चन का कहना था कि कई कम्पनियाँ उनके नाम, फोटो और आवाज का दुरुपयोग कर रही हैं। इसलिए, उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बिना अनुमति के उनकी पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी का उपयोग करने पर रोक लगाने की माँग की थी।

उन्होंने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके नाम से एक लॉटरी एड भी चल रहा है, जिसमें प्रमोशनल बैनर पर उनकी फोटो और KBC का लोगो लगा हुआ है। यह बैनर लोगों को सिर्फ भ्रमित करने के लिए बनाया गया है। इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है।

फ्रॉड द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों खासतौर से व्हाट्सएप पर अमिताभ बच्चन के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुकेश अंबानी के नाम का भी उपयोग कर फर्जी लॉटरी के चक्कर में लोगों को फँसाया जा रहा है।

ठगों द्वारा इस तरह की ठगी को लंबे समय से अंजाम दिया जा रहा है। इसमें यूजर्स को 15 लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक की लॉटरी जीतने का दावा करने वाले मैसेज भेजे जाते हैं। इस तरह के मैसेज पूरी तरह से फर्जी होते हैं। इनमें शेयर किए गए लिंक्स और नंबर्स के माध्यम से लोगों के साथ ठगी की जाती है।

फ्रॉड द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का स्क्रीनशॉट

इस तरह के मैसेज +92 309 7423840 और +1 914 6553526 जैसे गैर-भारतीय नंबरों से भेजे जाते हैं। इस तरह के मैसेज में लॉटरी जीतने का ऑफर होता है। इसके बाद, 7305563282 और 9644517195 जैसे नंबरों पर व्हाट्सएप कॉल करने के लिए कहा जाता है।

ठगों की चाल में फँसकर भोले-भाले लोग कभी अपनी बैंकिंग डिटेल देते हुए OTP (वन टाइम पासवर्ड) शेयर कर देते हैं तो कभी ठगों द्वारा भेजे गए अकाउंट डिटेल में अपनी मेहनत की कमाई भेज देते हैं। इसी तरह वे ठगी का शिकार हो जाते हैं।

62 साल पहले 3 बहनों ने तानाशाह के नाक में कर दिया दम, निर्ममता से हुई हत्या: 25 नवंबर की वो कहानी, जिससे उठी ‘उत्पीड़ित महिलाओं’ की आवाज

आज का दिन महत्वपूर्ण है और महत्वपूर्ण हो भी क्यूँ नहीं, क्योंकि आज ही के दिन महिलाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति हिंसा, शोषण एवं उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के उन्मूलन हेतु संयुक्त राष्ट्र के द्वारा घोषित ‘इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ वायलेंस अगेंस्ट वीमेन’ (International Day for the Elimination of Violence against Women) मनाया जाता है।

महिलाओं एवं लड़कियों के खिलाफ हिंसा किसी एक या दो देश कि कहानी नहीं है, बल्कि विश्वव्यापी है। माना जाता है कि पूरे विश्व में हर तीन में से एक महिला किसी न किसी तरह के उत्पीड़न/ हिंसा का शिकार होती है। समय की माँग है कि हम एक जागरूक नागरिक की भांति आत्ममंथन करें कि आखिर महिलाओं की स्थिति अभी तक ऐसी क्यों बनी हुई है? हमारे समाज में आखिर क्यूँ इनकी सुरक्षा का प्रश्न सदैव उठ खड़ा होता है?

3 बहनों ने किया तानाशाह के नाक में दम, आज ईरान में हो रहा विरोध

अतीत के पन्नों को पलटा जाए तो पता चलता है कि क्यों संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा इस दिन को ‘एक अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के रूप में घोषित किया गया। बात उस समय की है जब डोमिनिकन गणराज्य के शासक राफेल ट्रुजिलो की तानाशाही अपने चरम पर थी, जिसका पुरजोर विरोध तीन मिराबल बहनों द्वारा किया गया था, जो वहाँ की राजनीतिक कार्यकर्ता थीं। इनका नाम पैट्रिया मर्सिडीज मिराबल, मारिया अर्जेंटीना मिनेर्वा मिराबल तथा एंटोनिया मारिया टेरेसा मिराबल था।

इनके विरोध के बढ़ते स्वर को देखते हुए तानाशाह ट्रुजिलो द्वारा 25 नवंबर 1960 को इन तीनों बहनों की निर्मम हत्या करवा दी गई। चूँकि इन बहनों का बलिदान बेकार न जाए एवं इससे प्रेरित महिला वर्ग के मनोबल को और संबल मिल सके, वर्ष 1981 से महिला अधिकारों के प्रबल समर्थकों द्वारा इनके स्मृति के रूप में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई। आगे चलकर 7 फरवरी 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 54/134 को अपनाया और आधिकारिक तौर पर 25 नवंबर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया।

आज के परिदृश्य की बात करें तो एक साल पूर्व अफ़ग़ानिस्तान में हुए तख्तापलट वाली तालिबान सरकार में भी डोमिनिकन शासक राफेल ट्रुजिलो की तानाशाही शासन का रुख देखने को मिलता है, जहाँ आए दिन महिलाओं एवं लड़कियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें उनके मूल अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। परंतु वहाँ की महिलाएँ एवं लड़कियाँ भी हार नहीं मान रही हैं। वे लगातार तालिबान की तानाशाही सरकार के महिला विरोधी सोच एवं उनकी नीतियों का पुरजोर विरोध कर रही हैं।

हाल ही में, ईरान में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहाँ कुछ महीने पहले महसा अमिनी नामक एक युवती की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हिजाब समेत अन्य प्रतिबंधों के विरोध में वहाँ के महिला वर्ग ने आंदोलन छेड़ दिया जो कि थमने का नाम नहीं ले रहा है।

शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न सहती महिलाएँ

जगजाहिर है कि महिला का स्थान हर प्रकार से समाज में सबसे ऊपर होता है। इन्हें जग जननी कहते हैं। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि हिंसा से प्रताड़ित बहुतायत महिलाएँ एवं लड़कियाँ परिवार और समाज को देखते हुए प्रतिष्ठा और शर्म के कारण उन पर हो रही हिंसा को अभिव्यक्त नहीं कर पाती हैं। परंतु समाज का एक तबका अपनी पुरुषवादी एवं पित्तृसत्तात्मक सोच से ऊपर नहीं उठ पा रहा है। फलतः महिलाएँ एवं लड़कियाँ आए दिन प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रताड़ित होती आ रही हैं। और ये कोई नई घटना नहीं है।

यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर, अनुमानित 736 मिलियन महिलाओं में से लगभग तीन में से एक महिला अपने जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा या यौन उत्पीड़न का शिकार होती हैं। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की 30 प्रतिशत महिलाएँ शामिल हैं।

वर्ष 2020 में पूरे विश्व में लगभग 81,000 महिलाओं एवं लड़कियों की हत्याएँ हुई। इनमें से लगभग 47,000 (58 प्रतिशत) की मृत्यु एक अंतरंग साथी (इंटीमेट पार्टनर) या परिवार के किसी सदस्य के हाथों हुई। वैश्विक स्तर पर, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा निम्न और निम्न-मध्यम-आय वाले देशों को विषमतापूर्वक रूप से प्रभावित करती हैं।

बात जब हिंसा/ उत्पीड़न के स्वरूप की करते हैं तो यह प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों रूप में हमारे समाज में विद्यमान है। महिला वर्ग पर हिंसा पब्लिक और प्राइवेट, हर जगह देखने एवं सुनने को मिलता है। इसमें शारीरिक हिंसा, मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार, व्याभिचार/ बलात्कार, नशीले पदार्थ के सेवन के लिए मजबूर करना, यौन हिंसा/ उत्पीड़न, मानव तस्करी, बाल विवाह, महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध इत्यादि शामिल है।

कोरोना में हुआ महिलाओं पर अत्याचार

पूरा विश्व जब कोरोना जैसे महामारी से त्रस्त था तब भी उस दौरान महिलाएँ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से घरेलू हिंसा से प्रभावित थीं। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कोरोना काल के दौरान महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था, “लोगों को महिलाओं के महत्व को समझना होगा”। परंतु महिला वर्ग पर हिंसा आज तक नहीं रुका है, जो कि एक गम्भीर चिंता का विषय है।

यूएन द्वारा अनेकों प्रयास किए जा रहे हैं ताकि महिलाओं एवं लड़कियों पर हो रहे किसी भी तरह के उत्पीड़न या हिंसा का उन्मूलन किया जा सके। यूएन का ‘यूनाइट अभियान’ (UNITE Campaign) इसी तरह के मज़बूत प्रयास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

इस बात से कोई इनकार नही कर सकता कि हमारे समाज में व्याप्त असमानतावादी सोच नारी सशक्तिकरण के मार्ग में एक प्रमुख अवरोध है, चाहे इसे हम स्वीकार करें या ना करें। समाज में महिला की स्थिति प्रमुख है, और सदैव रहेगी। हम कब समझेंगे कि जिस परिवार एवं समाज में महिला वर्ग को उचित सम्मान नहीं मिलता है वह परिवार/ समाज गर्त की ओर जाता है। यहाँ एक श्लोक प्रासंगिक है-


“शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा।।”
 
अर्थात, जिस कुल या परिवार में स्त्रियाँ कष्ट भोगती हैं, वह कुल शीघ्र ही नष्ट हो जाता है और जहाँ स्त्रियाँ प्रसन्न रहती हैं, वह कुल या परिवार सदैव फलता-फूलता और समृद्ध रहता है।

आखिर हम कब इस बात को समझेंगें कि महिलाएँ हैं तो हमारा अस्तित्व हैं, ये नहीं तो हमारा अस्तित्व नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा है, “नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है”। जरूरत है कि हम अपने मानस में उपरोक्त श्लोक के भाव को धारण करें और नारी सशक्तिकरण के मार्ग को प्रशस्त करें।

नोट: इस लेख को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के वरिष्ठ सलाहकार डॉ मुकेश कुमार श्रीवास्तव द्वारा लिखा गया है। लेख में व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत हैं।

श्याम बनकर समीर रजा ने हिंदू लड़की को फँसाया, फोटो वायरल करने की धमकी दे करने लगा ब्लैकमेल: धर्मांतरण के बाद निकाह का दबाव, पैसे भी ठगे

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद (Muradabad, Uttar Pradesh) जिले के कटघर थाना क्षेत्र से लव जिहाद का फिर मामला सामने आया है। समीर रजा नाम के एक मुस्लिम युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट पर श्याम नाम से फेक आईडी बनाई। इसके बाद इलाके की एक हिन्दू लड़की को फँसाकर धर्मांतरण का प्रयास किया।

समीर रजा सोशल मीडिया पर हिंदू लड़की से दोस्ती करने के बाद उससे चैटिंग करने लगा। इस बीच उसने लड़की से कुछ तस्वीरें माँगी। इन्हीं तस्वीरों और चैटिंग का स्क्रीन शॉट घरवालों को दिखाने की धमकी देकर वह छात्रा को ब्लैकमेल करने लगा। आरोपित छात्रा पर ना सिर्फ धर्म परिवर्तन कर निकाह करने दबाव बना रहा था, बल्कि पीड़िता से 2000 रुपए भी ऐंठ लिए।

सच्चाई कैसे आई सामने ?

पीड़िता 12वीं की छात्रा है। उसके पिता ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले बेटी के मोबाइल पर सोशल मीडिया ऐप स्नैपचैट पर श्याम नाम से एक मैसेज आया। उसने चैटिंग कर छात्रा को प्रेम के झूठे जाल में फँसा लिया। चैटिंग के दौरान आरोपित ने अपना नाम लक्की बताया।

आरोपित ने छात्रा से उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया। फिर वाट्सएप कॉल करके बात करने लगा। बातचीत के दौरान पीड़िता को आरोपित पर शक हुआ। 16 नवंबर 2022 को आरोपित ने युवती को एक कैफे में मिलने के लिए बुलाया। वहाँ बातचीत के दौरान पीड़िता को पता चला कि उसके साथ बात करने वाला शख्स समीर रजा एक मुस्लिम है।

धर्म परिवर्तन का बनाया दबाव

सच्चाई सामने आने के बाद आरोपित ने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का दबाव बनाने लगा। आरोप है कि छात्रा के इनकार करने पर आरोपित ने उसे चैट के स्क्रीनशॉट और फोटो दिखाकर ब्लैकमेल किया। उसने लड़की को धमकी दी कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो चैट का स्क्रीनशॉट और फोटो उसके घरवालों को दिखा देगा। ऐसा न करने के बदले उसने छात्रा से दो हजार रुपये भी ऐंठ लिए।

लड़की ने दिखाई समझदारी

समीर रजा लड़की से और पैसे माँगने लगा। बात हाथ से निकलता देख लड़की ने समझदारी दिखाई। उसने सारी बात अपने परिजनों को बता दी। इसके बाद परिजनों ने पैसे देने के बहाने आरोपित को बुलाया और धर दबोचा। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

कटघर थाना के प्रभारी मनीष सक्सेना ने बताया कि बिलारी तहसील के एक गाँव का निवासी आरोपित समीर रजा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और धमकी देने का केस दर्ज किया गया है। आरोपित समीर रजा को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

‘खड़े होंगे मुसलमान, देश जलेगा’: उत्तराखंड के मदरसों में ‘मॉर्डन शिक्षा’ से चिढ़ा मौलाना, कहा- प्राइवेट मदरसों में कुछ न करने देंगे

उत्तराखंड सरकार ने वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आने वाले राज्य के सभी मदरसों में ड्रेस कोड और एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद मौलाना साजिद रशीदी ने कहा है कि सरकार ने प्राइवेट मदरसों को छूने की हिम्मत की तो देश जलने लगेगा।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा है, “हर राज्य में एक मदरसा बोर्ड है जो सरकार के अधीन काम करता है। उन मदरसों में, सरकार ड्रेस कोड का आदेश दे सकती है। यही नहीं, फिल्में और गाने भी चला सकती है। इन मदरसों में सरकार जो चाहे वो कर सकती है और उसे कोई नहीं रोक रहा। लेकिन, सरकार यह सुन ले कि हम उन्हें प्राइवेट मदरसों में कुछ नहीं करने देंगे, क्योंकि भारतीय मुसलमान 4% बच्चों को प्राइवेट मदरसों से मौलवी और मौलाना बनने के लिए रखते हैं। अगर सरकार उन 4% मदरसों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती है, तो सभी भारतीय मुसलमान इसके खिलाफ खड़े होंगे और ऐसा नहीं होने देंगे।”

साजिद रशीदी ने आगे कहा है, “हम सरकार से कुछ नहीं लेते। ये वो मूर्ख लोग हैं जिन्होंने सरकार की आय के लिए अपने मदरसे सरकार को दे दिए और अब इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। इसलिए, हमारे बड़े मौलवी और उलेमा दूसरों को मदरसों के लिए सरकार से कोई पैसा नहीं लेने के लिए कहते हैं।”

दरअसल, गुरुवार (24 नवंबर 2022) को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा था कि वक्फ बोर्ड के दायरे में आने वाले सभी 103 मदरसों को मॉडर्न बनाया जाएगा। मदरसों में ड्रेस कोड और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा था कि पहले चरण में 7 मदरसों को मॉडर्न बनाया जा रहा है। इसमें देहरादून, उधमसिंह नगर और हरिद्वार के दो-दो मदरसों एवं नैनीताल जिले के एक मदरसे को मॉडर्न स्कूल की तर्ज पर चलाने के लिए चुना गया है। इसके बाद इस व्यवस्था को अन्य मदरसों पर भी लागू कर दिया जाएगा।

सभी धर्म के बच्चों का होगा दाखिला

इन मदरसों में सभी धर्म के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। मदरसों में सुबह 6:30 से 7:30 बजे तक कुरान की तालीम दी जाएगी। इसके बाद सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक मदरसे सामान्य स्कूल की तरह चलेंगे, जबकि दो बजे के बाद फिर मदरसे के रूप में चलने लगेंगे। मदरसों को लेकर एक बड़ा फैसला यह भी हुआ है कि मदरसों को मदरसा बोर्ड से नहीं, बल्कि उत्तराखंड बोर्ड से पंजीकृत किया जाएगा।

मदरसों में स्मार्ट क्लास

मदरसों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की तरह संचालित किया जाएगा। मदरसों में स्मार्ट क्लास होगी ताकि इनसे पढ़कर निकलने वाले बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें। जिन मदरसों में क़ुरान पढ़ाया जाता है, वहाँ अब आधुनिक शिक्षा दी जाएगी।

मदरसों के सर्वे कराए जाने के बाद से ही राज्य सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर लगातार कोशिशें कर रही है। फ़िलहाल यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि मदरसों में ड्रेस कोड किस तरह का होगा, उसका कैसा रंग होगा? हालाँकि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है। बोर्ड अभी इन पर विचार कर रहा है।

जिस हिंदू घर में टाइल्स लगाने गया था फरमान अली, उसी घर की बच्ची को स्कूल से किया अगवा: रेप कर जान से मारने की दी धमकी

उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly, UP) में मुस्लिम युवक फरमान अली द्वारा एक हिंदू किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। किशोरी आठवीं की छात्रा है। फरमान अली कुछ दिन पहले अपने पिता अब्बास अली के साथ किशोरी के घर टाइल्स लगाने का काम करने गया था।

टाइल्स लगाने के दौरान फरमान किशोरी पर गंदी नजर रखने लगा। साथ ही स्कूल आने-जाने के दौरान भी वह उसका पीछा करता था। मौका देखकर आरोपित फरमान अली किशोरी को स्कूल से अगवा कर मंगलवार (22 नवंबर 2022) को किसी अज्ञात स्थान पर लेकर गया। इसके बाद पीड़िता को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

घटना के बारे किसी को बताने पर पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए फरमान अली मौके से फरार हो गया। जब घटना के अगले दिन पीड़िता की तबीयत बिगड़ी तब जाकर उसके पिता को आरोपित के दुस्साहस की पूरी कहानी के बारे में पता चला।

किशोरी के पिता रिपोर्ट लिखवाने थाने जा रहे थे तो फरमान और उसके पिता अब्बास अली ने उन्हें शहीद गेट के पास रोक लिया और गाली-गलौच करते हुए जातिसूचक शब्द कहे। दोनों ने रिपोर्ट लिखवाने पर परिवार समेत जान से मारने की धमकी भी दी। बाद में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेताओं की मदद से किशोरी के पिता ने फरमान पर दुष्कर्म व पॉक्सो अधिनियम और उसके पिता अब्बास अली पर एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई।

इज्जतनगर इंस्पेक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। विहिप के महानगर अध्यक्ष दुर्गेश कुमार गुप्ता का कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से घटना को अंजाम दिया है। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हिंदू जागरण मंच के पास शरण ली तो उन्हें कार्रवाई का भरोसा मिला। गुरुवार को वह अन्य पदाधिकारियों के साथ पीड़ित किशोरी और उसके पिता को लेकर थाने पहुँचे और रिपोर्ट दर्ज कराई।

ग्रामीणों ने नैनीताल हाईवे पर लगाया जाम

इसी बीच रात आठ बजे के करीब अचानक से ग्रामीणों व हिंदू संगठनों में गुस्सा फैल गया। एकजुट होकर सभी ने नैनीताल हाईवे पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे जाम की स्थिति बनी रही। इज्जतनगर इंस्पेक्टर अरुण कुमार श्रीवास्तव ने लोगों को समझाया। आरोपित की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी का आश्वासन दिया, तब जाकर लोगों ने जाम खोला।

जिस साल बलिदान हुए टंट्या भील, उस साल पैदा ही हुए थे RSS के संस्थापक: राहुल गाँधी निकले झूठे, कहा था- संघ ने फाँसी पर चढ़वाया

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान मध्यप्रदेश में दिया गया भाषण विवादों में है। अपने भाषण में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को घेरने के लिए कई बातें कहीं। इसी क्रम में वह आरएसएस पर भी बरसे और ऐसी बातें बोलते गए जो बिलकुल निराधार थीं।

राहुल गाँधी ने बोला कि जनजातीय समुदाय के क्रांतिकारी टंट्या मामा को अंग्रेजों ने फाँसी पर चढ़ाया और अंग्रेजों का साथ देने वाले आरएसएस थी। उन्होंने इस दौरान आदिवासी और वनवासी शब्द को भी मुद्दा बनाया। राहुल ने कहा कि वो लोग जनजातीय समुदाय के लोगों को देश का पहला नागरिक मानते हैं इसलिए आदिवासी कहते हैं जबकि भाजपा उन्हें जंगल में रहने वाला मानती है इसलिए वनवासी बुलाती है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के इस बयान के बाद उनका जमकर मजाक उड़ रहा है। भाजपा के कुछ नेताओं ने उन्हें दोबारा से पप्पू कहना शुरू कर दिया है। इसका कारण है राहुल गाँधी का भाषण देते समय अर्जित किया गया अल्पज्ञान। 

उन्होंने मध्य प्रदेश में क्रांतिकारी टंट्या मामा की जन्मस्थली में भाषण देने के दौरान 24 मिनट 51 सेकेंड के स्लॉट पर कहा कि आरएसएस की मदद पाकर अंग्रेजों ने टंट्या मामा को फाँसी पर चढ़वाया। जबकि यदि तथ्यों पर गौर करें तो इस बात का हकीकत से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है।

क्रांतिकारी टंट्या भील ने साल 1889 को बलिदान दिया था। वहीं संघ की स्थापना करने वाले डॉ केशव हेडगेवार उसी वर्ष जन्मे थे। उन्होंने टंट्या भील के बलिदान के 36 साल (1925) बाद जाकर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को स्थापित किया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कैसे संघ ने अंग्रेजों की मदद की होगी।

इसी भाषण में राहुल गाँधी ने बिरसा मुंडे के बलिदान का उदाहरण देकर भी आरएसएस को कोसा…बिना ये बात जाने कि क्रांतिकारी बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में हुआ था और उन्होंने बलिदान 1900 में दिया था।

राहुल गाँधी के भाषण की क्लिप अब सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग उनका यह बयान ट्वीट करते हुए कह रहे हैं, “इसलिए लोग तुमको पप्पू कहते हैं।”