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हैदराबाद से बरामद हुई बिहार के पूर्णिया से अपहृत नाबालिग लड़की, आरोपित फराज़ भी पुलिस की हिरासत में: थाना प्रभारी मेराज हसन पर उठे थे सवाल

बिहार पुलिस द्वारा पूर्णिया से अपहृत हुई नाबालिग लड़की को हैदराबाद से सही-सलामत बरामद कर लिए जाने सूचना है। बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपित फ़राज़ को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने पीड़िता के नाबालिग होने की जानकारी देते हुए दर्ज FIR में सुधार के निर्देश दिए हैं। वहीं लोगों से लड़की की तस्वीरें वायरल न करने की अपील भी की गई है।

‘राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR)’ के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने पीड़िता की बरामदगी की जानकारी दी है। 29 नवंबर, 2022 (मंगलवार) को उन्होंने सुबह 9:28 पर इस बाबत ट्वीट भी किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लड़की की फोटो पहले शेयर कर चुके लोगों से इसे डिलीट कर लेने को कहा है।

ऑपइंडिया ने 28 नवम्बर, 2022 (सोमवार) को अपनी रिपोर्ट में भी पीड़िता के परिजनों के हवाले से लड़की के नाबालिग होने की जानकारी दी थी। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित फ़राज़ को भी हिरासत में ले लिया गया है। एक दिन पहले ऑपइंडिया से बात करते हुए बनमनखी थाना प्रभारी ने भी पुलिस टीम के फ़राज़ और पीड़िता की तलाश में निकलने की जानकारी दी थी।

बताया जा रहा है कि आगे की कार्रवाई के लिए पीड़िता और आरोपित को पूर्णिया लाने की प्रक्रिया चल रही है। गौरतलब है कि पीड़िता की बरामदगी के लिए हिन्दू संगठनों ने पूर्णिया में प्रदर्शन किया था। इस दौरान मामले को लव जिहाद बताते हुए थाना प्रभारी मेराज हुसैन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए थे।

‘एक भी दृश्य झूठा साबित हुआ तो फ़िल्में बनाना छोड़ दूँगा’: विवेक अग्निहोत्री का करारा पलटवार, IFFI में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को बताया गया था ‘प्रोपेगंडा और भद्दा’

IFFI गोवा में इजरायल के वामपंथी फिल्ममेकर नादव लापिड द्वारा द कश्मीर फाइल्स पर की गई टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ रहा है। उन्होंने इस फिल्म को भद्दी और प्रोपेगेंडा बताया है। अब इस मुद्दे पर विवेक अग्निहोत्री की टिप्पणी आई है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी फिल्म में दिखाया एक भी सीन फर्जी निकला तो वह फिल्में बनाना छोड़ देंगें।

IFFI जूरी हेड नादव के बयान के बाद विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “इफ्पी जूरी हेड ने इस फिल्म को भद्दी और प्रोपगेंडा बताया है। मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है। इस तरह की बातें तो सारे आतंकी संगठन, अर्बन नक्सल और भारत के टुकड़े-टुकड़े गैंग करते हैं। लेकिन मेरे लिए जो सबसे हैरानी की बात हुई है वो ये कि भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मंच में भारत को कश्मीर से अलग करने वाले आतंकियों के नैरेटिव को समर्थन किया गया और कुछ भारतीयों ने ही इसका इस्तेमाल किया। आखिर ये लोग कौन हैं?”

विवेक कहते हैं, “ये वही लोग हैं जो 4 साल पहले जब मैंने फिल्म पर रिसर्च शुरू किया था तब से फिल्म को प्रोपगेंडा बताते हैं। 700 लोगों के साक्षात्कार के बाद ये फिल्म बनी है। क्या वो 700 लोग जिनके भाई-बहनों को काट दिया गया, गैंगरेप किया गया, 2 टुकड़ों में बाँट दिया गया, क्या वो लोग प्रोपेगेंडा और अश्लील बातें कर रहे थे।”

उन्होंने सवाल किया कि जो कश्मीर कभी पूर्ण रूप से हिंदू सरजमीं थी वहाँ आज भी हिंदुओं को चुन चुनकर मारा जाता है क्या यह प्रोपेगेंडा और अश्लील बात है। उन्होंने यासीन मलिक का जिक्र कर कहा कि जब उसने अपने गुनाह कबूल किए और वो जेल में सड़ रहा है तो क्या ये प्रोपेगेंडा और अश्लील बात है।

फिल्म के निर्माता ने वीडियो में आगे कहा, “ये सवाल हमेशा से उठता है कि ये फिल्म एक प्रोपेगेंडा फिल्म है। मतलब वहाँ कभी हिंदू नरसंहार हुआ ही नहीं। तो मैं आज विश्व के सभी बुद्धिजीवियों को, अर्बन नक्सलियों को चुनौती देता हूँ। इन इजरायल के महान फिल्ममेकर को भी चैलेंज करता हूँ कि कश्मीर फाइल्स का एक शॉट भी कोई साबित कर दे कि ये झूठा है तो मैं फिल्में बनाना ही छोड़ दूँगा।”

उन्होंने कहा कि ये जो लोग भारत के खिलाफ खड़े होते हैं ये वही लोग हैं जिन्होंने मोपला नरसंहार का सत्या किसी के सामने नहीं आने दिया, जिन्हें डायरेक्ट एक्शन डे का सत्य सामने नहीं आने दिया, कश्मीर का सत्य नहीं सामने आने दिया। ये वही लोग है जो कोविड के समय जलती चिताओं को चंद डॉलरों में बेच रहे थे और आज जब वो द वैक्सीन वॉर फिल्म बना रहे हैं तो वो इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं।

बता दें कि IFFI गोवा में जूरी हेड के तौर पर बुलाए गए इजरायली फिल्ममेकर ने फिल्म को भद्दी और प्रोपेगेंडा बताया था जिसके बाद भारत के कई वामपंथियों ने उनका समर्थन किया और हिंदू नरसंहार पर सवाल उठाए थे।

अपनी मातृभूमि इजरायल से ही नफरत करता है IFFI में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को भला-बुरा कहने वाला फिल्म निर्माता: यहूदी पहचान से घृणा, फिलिस्तीन की तरफदारी

गोवा में आयोजित हुए 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल (IFFI) में जूरी बोर्ड के प्रमुख नादव लापिड (Nadav Lapid) कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को बताने वाली फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ पर विवादित टिप्पणी ‘प्रोपेगेंडा और अश्लील’ कहा है। उसकी इस बयान की हर तरफ आलोचना हो रही है। नादव लापिड का विवादों से पुराना नाता रहा है यहाँ तक कि उसने अपने देश इजरायल को ‘बीमार आत्मा’ करार दिया था।

दरअसल, नादव लैपिड वामपंथी विचारधारा ग्रसित इजरायली फिल्म निर्माता है। इसने अब तक कुल 13 फिल्में डायरेक्ट की हैं। नादव लैपिड को इजरायल से नफरत वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। यहूदियों के एक मात्र देश और उसकी मातृभूमि को लेकर नादव लैपिड के विचार कितने अच्छे हैं, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि उसके विचारों में इजरायल के विरोधी देश फिलीस्तीन की तरफदारी नजर आती है।

एक इंटरव्यू में लैपिड ने अपनी फिल्म ‘सिनोनिम्स’ पर बात करते हुए इजरायल को लेकर कहा था, “फिल्म इजरायल की आत्मा के बारे में बात करती है। इजरायल की आत्मा एक बीमार आत्मा है। इजरायल के अस्तित्व के गहरे सार में कुछ गलत सा सड़ा हुआ है। यह गलत सिर्फ बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायल के प्रधानमंत्री) नहीं है। बल्कि, मुझे लगता है कि इस इजरायली बीमारी या प्रकृति की विशेषता युवा इजरायली लोग हैं जो मस्कुलर बॉडी देखकर खुश होते हैं। लेकिन, न तो कोई सवाल नहीं उठाते हैं और न ही कोई संदेह नहीं करते। उन्हें सिर्फ इजरायली होने में गर्व होता है।”

एक अन्य इंटरव्यू में नादव लैपिड ने अपने देश इजरायल और वहाँ के लोगों के साथ अपने संबंधों के बारे में कहा था, “मुझे लगा कि इजरायल मेरे लिए असहनीय हो गया है। मेरी फिल्म सिनोनिम्स को इजरायल के प्रति बहुत आलोचनात्मक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।” 

उसने यह भी कहा था, “मैं हमेशा मानता था कि इजरायल की कहानी एक निश्चित राजनीतिक मुद्दे को लेकर नहीं है। बल्कि, यह सभी इजरायली लोगों की कहानी है। प्रोपेगैंडा सिस्टम के कारण, इजरायली पूरी तरह से अंधे हो सकते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि उनकी आँखें खोलने के लिए, उनके शरीर को हिलाना और उनके सिर पर मारना काफी नहीं है। इसके लिए और भी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। इजरायल के लोग बड़ी ताकतों के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

वामपंथी विचारधारा से ग्रसित नादव लैपिड (Nadav Lapid) उन 250 इजरायली फिल्म निर्माताओं के समूह में भी शामिल है, जिन्होंने शोमरोन (सामरिया/वेस्ट बैंक) फिल्म फंड के लॉन्च के विरोध करते हुए ‘खुले पत्र’ पर हस्ताक्षर किए थे। फिल्म निर्माताओं का मानना था कि इस फंड को बनाने का सिर्फ एक लक्ष्य था कि इजरायली फिल्म निर्माताओं को वित्तीय सहायता और पुरस्कार देकर उस कारोबार को सफेद कर सके।

शोमरोन फिल्म फंड का आधिकारिक लक्ष्य वेस्ट बैंक (यहूदिया और सामरिया) में रहने वाले यहूदियों को अनुदान देना था। साथ ही वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों द्वारा बनाई गई फिल्मों के प्रोडक्शन को अनुदान देना था। ऐसे में नादव लापिड और उसके सहयोगियों के मानना था कि यह फंड फिलिस्तिनियों के शोषण के लिए बनाया गया है। बता दें कि वेस्ट बैंक को लेकर इजरायल और फिलस्तीन के बीच लंबे वक्त से विवाद चलता आ रहा है।

‘IFFI जूरी के मुखिया ने कश्मीरी हिन्दुओं के बलिदान का उड़ाया मजाक’: सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने दर्ज कराई पुलिस शिकायत, इजरायली राजदूत ने अनुपम खेर से माँगी माफ़ी

सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक वकील ने मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को गोवा पुलिस के पास IFFI जूरी हेड नादव लैपिड (Nadav Lapid) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लैपिड पर कश्मीरी हिंदुओं के बलिदान का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया है। एडवोकेट विनीत जिंदल (Vineet Jindal) ने नादव के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 121, 153, 153A और B, 295, 298 और 505 के तहत शिकायत रजिस्ट्रेशन करने को कहा है।

वहीं, मुबंई में आज मिडवेस्ट इंडिया में इजरायल के महावाणिज्यदूत कोब्बी शोशानी ने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर बहस से भारत और इजरायल के बीच संबंध मजबूत होंगे। कोब्बी शोशानी ने ​नादव की विवादित टिप्पणी से खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्होंने यह फिल्म देखी है, उनकी इस पर अलग राय है।

शोशानी ने एक संवाददाता सम्मेलन में अभिनेता अनुपम खेर के साथ मंच साझा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ प्रोपेगेंडा नहीं बल्कि एक शानदार फिल्म है, जो कश्मीर के लोगों की पीड़ा को व्यक्त करती है। शोशानी ने मीडियाकर्मियों से आगे कहा, “मैंने सुबह सबसे पहले अपने दोस्त अनुपम खेर को फोन किया था, वो भी सिर्फ माफी माँगने के लिए। मैं उस विवादित टिप्पणी के लिए माफी माँगता हूँ, जो (लैपिड की टिप्पणी) एक निजी राय थी। लैपिड की टिप्पणी से इजरायल का कोई लेना-देना नहीं है।”

इससे पहले ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर इजरायल के फिल्मकार और IFFI जूरी हेड के विवादित बयान पर उनके देश के राजदूत ने माफी माँगी थी। सिलसिलेवार कई ट्वीट करके उन्होंने जूरी हेड लैपिड को जम कर खरी-खोटी सुनाई। भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलन ने लैपिड को खुला लेटर लिखा। उन्होंने अंग्रेजी में किए ट्वीट में लिखा कि कश्मीर फाइल्स पर उनकी आलोचना के बाद ऐसा लिखना पड़ रहा है और यह हिब्रू भाषा में नहीं है, क्योंकि वो चाहता हैं कि भारतीय भाई-बहन भी इसे समझ सकें।

उन्होंने लिखा, “यह काफी लंबा है इसलिए मैं चाहता हूँ कि आप मूल बात पहले जान लो। राजदूत ने कहा, “आपको शर्म आनी चाहिए।” गिलन ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में मेहमान को भगवान की तरह माना जाता है। आपने IFFI में जजों के पैनल के हेड के रूप में भारतीय आमंत्रण का अपमान किया है। उनके भरोसे, सम्मान और गर्मजोशी के साथ किए गए स्वागत का भी मजाक बना दिया।”

बता दें कि नादव लैपिड ने गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में ​विवेक ​अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने 1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों को निकाले जाने और उनके सामूहिक नरसंहार पर आधारित ‘द कश्मीर फाइल्स’ को अश्लील (Vulgar) और प्रोपेगेंडा (Propaganda) फिल्म बताया है। अभिनेता अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री ने जहाँ इसका कड़ा विरोध किया है। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी, अभिनेत्री स्वरा भास्कर और शिवसेना नेता संजय राउत इसका समर्थन कर रहे हैं।

‘अल फ़लाह’ हॉस्टल के संचालक मोहम्मद इम्तियाज ने 10वीं के नाबालिग छात्र के साथ किया अप्राकृतिक दुष्कर्म, धक्का-मुक्की कर परिजनों को बाहर निकाला

बिहार में पूर्णिया जिले के एक निजी हॉस्टल में नाबालिग बच्चे के साथ अप्राकृतिक कुकर्म का मामला सामने आया है। हॉस्टल का नाम ‘अल-फलाह’ बताया जा रहा है। कुकर्म का आरोप हॉस्टल संचालक इम्तियाज पर लगा है। पीड़ित कक्षा 10 का छात्र है। घटना बुधवार (23 नवम्बर, 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला सहायक खजांची हाट थाना क्षेत्र की है। जिस हॉस्टल में यह घटना घटित हुई है वो लाइन बाजार के मेजर कॉलोनी में है। यहाँ पर अमौर थाना क्षेत्र के रहने वाले छात्र ने गुरुवार को अपने घर पहुँच कर अपनी आपबीती बताई। छात्र ने हॉस्टल के संचालक मुन्ना उर्फ़ मोहम्मद इम्तियाज पर अपने साथ जबरन कुकर्म का आरोप लगाया। छात्र का कहना है कि उसके साथ लगभग 3 दिनों तक कुकर्म हुआ है।

पीड़ित छात्र की उम्र 14 साल बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि अप्राकृतिक कुकर्म के चलते उसकी तबीयत खराब होने लगी थी। पीड़ित छात्र द्वारा दी गई जानकारी पर उसके परिजन आरोपित इम्तियाज़ के पास पहुँचे। आरोप है कि यहाँ पर मुन्ना ने छात्र के घर वालों से झगड़ा किया और उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसी दौरान इम्तियाज ने छात्र के घर वालों को हॉस्टल से बाहर भी निकाल दिया। पीड़ित छात्र के पिता का कहना है कि उन्होंने एक सप्ताह पहले ही अपने बेटे को हॉस्टल में रखा था। उन्होंने बताया कि वो अपने बेटे को उच्च शिक्षा देना चाहते थे।

परिजनों के शोरगुल से जब आस-पास के लोग जमा होने लगे तब इम्तियाज वहाँ से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि फरार होने से पहले वो अपना मोबाइल और गाड़ी छोड़ कर गया है। इम्तियाज के फरार होने के बाद पीड़ित छात्र के घर वाले सीधे सहायक खजांचीहाट थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने आरोपित के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने हॉस्टल संचालक इम्तियाज़ के खिलाफ केस दायर कर के जाँच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी सुनीता कुमारी के मुताबिक, आरोपित की तलाश की जा रही है।

Meta पर लगा ₹2265 करोड़ का जुर्माना, हैकिंग वेबसाइट को किया था 50 करोड़ यूजर्स का डेटा लीक: जाँच में दोषी पाए जाने के बाद मिली सजा

फेसबुक की पेरेन्ट कंपनी मेटा (META) पर 265 मिलियन यूरो ( लगभग 2265 करोड़) का जुर्माना लगाया गया है। मेटा पर यह जुर्माना एक हैकिंग वेबसाइट पर 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का डेटा लीक होने के बाद लगाया गया है। दरअसल, पिछले साल 100 से भी ज्यादा देशों के यूजर्स की फेसबुक आईडी, नाम, फोन नंबर, उनका पता, जन्मतिथि और ईमेल सहित उपयोगकर्ता डेटा पिछले साल ऑनलाइन उपलब्ध करवा दिए गए थे। अप्रैल, 2021 में इस मामले की जाँच शुरू की गई।

जाँच पूरी होने के बाद मेटा को ‘यूरोपियन डेटा प्राइवेसी पॉलिसी’ के उल्लंघन का दोषी पाया गया जिसके बाद यह जुर्माना लगाया गया। द गार्जियन के रिपोर्ट के मुताबिक जाँच में यूरोपीय संघ के डेटा संरक्षण कानूनों के दो नियमों का उल्लंघन किया है। आयरलैंड सरकार की ओर से फेसबुक को कई सुधारात्मक उपाय करने के भी आदेश दिया गए थे।

पूरे मामले पर मेटा का कहना है कि डेटा लीक मामले में उसने आयरलैंड के डेटा प्राइवेसी कमिश्नर (डीपीसी) की जाँच में पूरा सहयोग किया है और अपने सिस्टम में बदलाव भी किया है। इन बदलावों में फोन नंबर्स के इस्तेमाल वाले फीचर्स को हटाना भी शामिल था।

यह पहली बार नहीं है जब फेसबुक की पेरेन्ट कंपनी पर इतना भारी भरकर जुर्माना लगा हो। यह चौथा मामला है जब आयरलैंड के डेटा प्राइवेसी कमिश्नर ने मेटा की किसी कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाया है। डीपीसी, यूरोपीय यूनियन (ईयू) के भीतर मेटा का प्रमुख प्राइवेसी रेगुलेटर भी है और इसने 13 दूसरे सोशल मीडिया समूहों से भी पूछताछ की है। सितंबर, 2022 में मेटा के इंस्टाग्राम पर 405 मिलियन यूरो का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया गया था, हालाँकि मेटा ने इस जुर्माने के खिलाफ अपील करने की योजना बनाई है।

आयरलैंड में यूरोपीय यूनियन का मुख्यालय होने की वजह से डीपीसी एप्पल, गूगल, टिकटॉक और अन्य टेक्नोलॉजी से जुड़ी दिग्गज कंपनियों को रेगुलेट करता है। अब भी इस तरह की चालीस कंपनियों और फर्मों से पूछताछ चल रही है, जिनमें मेटा से जुड़े 13 फर्म शामिल हैं।

पहले ‘औकात’ की बात, अब ‘राक्षस’ से तुलना… कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी को बताया ‘रावण’, BJP ने कहा – गुजरात की जनता दिखाएगी आईना

गुजरात चुनाव के पहले चरण के लिए मंगलवार (29 नवंबर, 2022) को प्रचार का आखिरी दिन है। इसी क्रम में वहाँ सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। दूसरी ओर नेता एक-दूसरे पर कीचड़ उछलने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। नया उदाहरण कॉन्ग्रेस के नए-नवेले अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के ने सोमवार (28 नवंबर, 2022) को पेश किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रावण से किया है, जिसके बाद भाजपा ने उनकी मानसिकता पर सवाल उठाए हैं।

खड़गे ने कहा कि पीएम मोदी हर वक्त अपनी बात करते हैं और हर मुद्दे पर कहते हैं कि मोदी की सूरत को देखकर वोट दें। खड़गे ने प्रधानमंत्री का अपमान करते हुए कहा, “तुम्हारी सूरत कितनी बार देखें। पार्षद चुनाव में तुम्हारी सूरत देखें। एमएलए चुनाव (विधानसभा) में भी तुम्हारी सूरत देखें। हर जगह आपका ही चेहरा देखें। कितने चेहरे हैं आपके। क्या आपके रावण की तरह 100 मुख हैं?” इससे पहले कॉन्ग्रेस

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पीएम मोदी काम के बारे में कुछ नहीं बोलते हैं और वे सिर्फ झूठ बोलते हैं। उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री ने सालाना 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही थी लेकिन क्या गुजरात में किसी को रोजगार मिला। साथ ही आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को उद्घाटन करने की आदत है। उन्होंने कहा कि भले ही कोई भी चीज़ किसी ने तैयार की हो, वह उसमें चूना लगाकर, कलर करके कहते हैं कि यह मेरा है।

वहीं भाजपा ने खड़गे के इस अनर्गल बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रावण कहना उनका घोर अपमान है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस नेता पीएम मोदी का अपमान कर चुके हैं। 2002 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की चीफ रह चुकीं सोनिया गाँधी ने ‘मोदी को मौत का सौदागर’ कह कर संबोधित किया था। उन्होंने पूछा कि इन लोगों को बार-बार पीएम मोदी को अपमानित कर के क्या मिलता है?

संबित पात्रा ने कहा, “आज पूरा देश और गुजरात क्षुब्ध है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम को रावण कहा है। इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। ये सिर्फ मोदी जी का अपमान नहीं, बल्कि पूरे देश और गुजरात का अपमान है। गुजरात की जनता कॉन्ग्रेस को आईना दिखाएगी। ये सिर्फ खड़गे का बयान नहीं है, बल्कि सोनिया और राहुल गाँधी का बयान है।”

संबित पात्रा ने कहा कि सुबोध कांत सहाय ने मोदी को ‘हिटलर की मौत मरने’ की बात कही थी। प्रधानमंत्री को कॉकरोच, यमराज, बंदर जैसे उपनाम कॉन्ग्रेस के नेताओं ने दिए। टुकड़े-टुकड़े गैंग, देश को खंडित करने वाले लोग पीएम मोदी को गाली देते हैं। संबित पात्रा ने सभी गुजरातियों से अपील है कि जिस पार्टी के अध्यक्ष ने मोदी का अपमान किया है, वो सब इस पार्टी को सबक सिखाएँ और शत-प्रतिशत गुजराती घर से बाहर निकलें, लोकतांत्रिक तरीके से कॉन्ग्रेस के खिलाफ वोट देकर बदला लें।

श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों से गूँजेगा पंचकूला का हर एक चौक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘गीता महोत्सव’ का किया शुभारंभ: गीता पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार भी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 2 दिवसीय हरियाणा दौरे पर हैं। वह मंगलवार और बुधवार (29 और 30 नवंबर, 2022) को प्रदेश की कई योजनाओं की शुरुआत करेंगी। इसी सिलसिले में वह कुरुक्षेत्र पहुँचीं, जहाँ उन्होंने ‘गीता महोत्सव’ की औपचारिक शुरुआत की और ब्रह्म सरोवर पहुँच कर यज्ञ में आहुति दी। ‘गीता महोत्सव’ को लेकर बड़ी तैयारियाँ की गईं हैं। इसके अंतर्गत पंचकूला जिले का प्रत्येक चौक गीता के श्लोकों से गूँजेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कुरुक्षेत्र पहुँचने पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उनका स्वागत किया। इस कार्यक्रम के बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का दौरा किया। वहाँ उन्होंने विश्विद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में ‘अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार’ में भाग लेंगी।

इसके अलावा, वह राज्य को तीन बड़ी योजनाओं की सौगात देंगी। इसमें, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य परीक्षण योजना की शुरुआत करने के साथ ही राज्य के 6 जिलों में रोडवेज की बसों में ई-टिकटिंग प्रणाली की शुरुआत राष्ट्रपति के द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, राष्ट्रपति सिरसा जिले को मेडिकल कालेज की सौगात देंगी। इसका शिलान्यास कुरुक्षेत्र से ही होगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सर्वेक्षण योजना का भी शुभारंभ करेंगी। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के लोगों का हेल्थ चेकअप किया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में अंत्योदय परिवार के लोगों को शामिल किया गया है। राष्ट्रपति सिरसा जिले में 21 एकड़ भूमि पर बनने वाले चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल की भी आधारशिला रखेंगी। ‘गीता महोत्सव (गीता जयंती)’ पर हरियाणा का पंचकुला जिला पूरी तरह से गीतामय नजर आएगा। इसके लिए, हर चौक पर डिजिटल स्क्रीन की व्यवस्था की गई है। इस स्क्रीन पर गीता के श्लोक नजर आएँगे।

एसडीएम डॉ ऋचा राठी का कहना है कि तीन गीता महोत्सव के अंतर्गत सेक्टर-5,6,7 व 8 स्थित गीता चौक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसे भव्य रूप से सजाया जाना है। यही नहीं, गीता जयंती महोत्सव के दौरान विद्यार्थियों द्वारा किया जाने वाला श्लोकोच्चारण भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। गीता जयंती महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन 4 दिसंबर की सुबह 11.45 से जिले के विभिन्न स्कूलों के 2500 से अधिक विद्यार्थी एक साथ वैश्विक गीता से जुड़ते हुए अष्टादश श्लोकों का पाठ करेंगे।

दलित नाबालिग लड़की का सुहैल ने स्कूल से किया अपहरण, जंगल में बंधक बनाया: FIR के बाद गिरफ्तार, खेत में मिले बच्ची का बैग और अंडरगार्मेंट्स

उत्तर प्रदेश की बागपत पुलिस ने अनुसूचित जाति की नाबालिग लड़की के अपहरण के आरोप में सुहैल नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। पीड़िता 23 नवम्बर 2022 को सुबह अपने घर से अचानक लापता हो गई थी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस टीम ने जाँच के दौरान इस मामले में सुहैल को खोजा और तब पता चला कि उसने पीड़िता को जंगल के अंदर एक खेत में छिपा कर रखा था।

यह मामला थानाक्षेत्र सिंघावली अहीर का है। यहाँ 23 नवम्बर को पीड़िता के पिता ने पुलिस ने अपनी बेटी के अचानक ही लापता हो जाने की शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि सुबह लगभग 7:30 पर उनकी बेटी को उनकी पत्नी स्कूल छोड़ कर आई थी। बाद में स्कूल के प्रिंसिपल ने लगभग 1 घंटे बाद फोन कर के उनकी बेटी के कहीं बिना बताए ही चले जाने की जानकारी दी। प्रिंसिपल की कॉल के बाद पीड़िता के परिजन स्कूल पहुँचे और अपनी बेटी की तलाश शुरू कर दी।

शिकायत में आगे बताया गया कि तलाश के दौरान एक गन्ने के खेत में पीड़िता का स्कूल बैग और प्राइवेट कपड़े मिले। थक हार कर उसी दोपहर लगभग 2 बज कर 54 मिनट पर पीड़ित परिवार ने पुलिस में FIR दर्ज करवाई। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस को 2 मोबाईल नंबर देते हुए बताया कि उनकी बेटी की बात अक्सर उन पर होती थी जिसके लिए उसे कई बार डाँटा भी गया था।

शिकायत में लड़की के पिता ने पुलिस से अपनी बेटी को जल्द से जल्द खोजने की गुहार लगाई थी। इस शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 363 के तहत केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी थी। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

FIR दर्ज करने के बाद बागपत पुलिस ने पीड़िता को खोजने के लिए कई थानों की फ़ोर्स लगा दी। इस दौरान पुलिस को घटना के पीछे सुहैल नाम के आरोपित के होने की जानकारी मिली। पुलिस ने सुहैल को गिरफ्तार कर के पूछताछ शुरू की। कुछ ही समय में सुहैल ने अपना गुनाह कबूल करते हुए पीड़िता की लोकेशन पुलिस को बता दी। पुलिस ने पीड़िता को जंगल के एक खेत से बरामद कर लिया।

जिले के पुलिस अधीक्षक IPS नीरज जादौन का कहना है कि पीड़िता का मेडिकल करवाया गया है। साथ ही लड़की को 164 के बयान के लिए अदालत भेजा जा रहा है। पीड़िता की बरामदगी के बाद सुहैल को नामजद करते हुए FIR में IPC की धारा 506 के साथ पॉक्सो एक्ट और SC/ST एक्ट की वृद्धि की गई है।

सूट बेचने आता था सुहैल

ऑपइंडिया ने पीड़िता के पिता से बात की। उन्होंने हमें बताया कि पहले तो उनकी बेटी काफी डरी हुई थी लेकिन अब धीरे-धीरे नार्मल हो रही है। पीड़िता के पिता द्वारा हमें जानकारी दी गई कि सुहैल ने कहा है कि वो जब सूट बेचने आया था तब उसका परिचय उनकी बेटी से हुआ था। भावुक मन से उन्होंने कहा कि सुहैल ने उनकी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी।

‘कश्मीर फाइल्स की रिलीज के बाद घाटी में हुई सबसे ज्यादा हत्याएँ, एक दल के खिलाफ हुआ दुष्प्रचार’: IFFI जूरी हेड के समर्थन में संजय राउत, जमानत पर हैं बाहर

गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में ​विवेक ​अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर विवादित टिप्पणी का मामला गरमा गया है। अभिनेता अनुपम खेर और विवेक अग्निहोत्री ने जहाँ इसका कड़ा विरोध किया है। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी, अभिनेत्री स्वरा भास्कर और शिवसेना नेता संजय राउत इसका समर्थन कर रहे हैं।

IFFI जूरी ​हेड नादव लापिद ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को अश्लील और प्रोपेगेंडा फिल्म बताया है। शिवसेना नेता संजय राउत ने इस पर कहा, “यह ‘द कश्मीर फाइल्स’ के बारे में सच है। जब एक दल द्वारा दूसरे दल के विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा था। तब एक और पार्टी सरकार के प्रचार में व्यस्त थी। लेकिन इस फिल्म के रिलीज होने के बाद कश्मीर में सबसे ज्यादा हत्याएँ हुईं। कश्मीरी पंडित और सुरक्षाकर्मी मारे गए।”

उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत, जो हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आए हैं, उन्होंने आगे कहा, “ये सिनेमा आने के बाद, कश्मीर में सबसे ज्यादा किलिंग हुई। पंडितों को मारा गया। सु​रक्षाकर्मियों को मारा गया। तब कहाँ थे ये कश्मीर फाइल्स वाले? जब कश्मीरी पंडितों के बच्चे आंदोलन कर रहे थे। तब कोई आगे नहीं आया, ना ही कश्मीर फाइल्स 2.0 की कोई योजना थी। आप उसे भी बनाओ।”

ध्यान दें कि संजय राउत ने जहाँ नादव लैपिड का समर्थन करते हुए इस्लामवादियों की बजाए हिंदुओं की हत्याओं के लिए ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को दोषी ठहराया है। वहीं भारत में इजरायल के राजदूत ने नदव की विवादित टिप्पणी के लिए माफी माँगी है। उन्होंने एक पत्र में कहा कि उन्हें कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार पर नकारात्मक टिप्पणी के मामले पर शर्म आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि नदव द्वारा ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए इस्तेमाल किए गए अश्लील शब्द के बारे में पूछे जाने पर संजय राउत ने कहा कि उन्होंने यह फिल्म नहीं देखी है।

संजय राउत द्वारा की गई टिप्पणी का वीडियो ‘जी मराठी’ ने शेयर किया है। ‘एबीपी माँझा’ ने भी इसे शेयर किया गया था, लेकिन इस वीडियो को जल्द ही प्राइवेट कर दिया गया, इसलिए लोग इसे एक्सेस नहीं कर सके।

बता दें कि IFFI का 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया 20 नवंबर से 28 नवंबर के बीच गोवा में आयोजित किया गया था। फेस्टिवल के आयोजकों ने नादव लैपिड को प्रमुख जूरी के तौर पर इजरायल से बुलाया था। फिल्म देखने के बाद नादव ने कहा कि वह ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखकर न सिर्फ हैरान हुए, बल्कि परेशान भी हुए हैं। नादव लैपिड ने आगे कहा कि उन्हें यह फिल्म दुष्प्रचार करने वाली लगी, जो ऐसे महोत्स्व में दिखाने लायक नहीं थी।