हाल ही में मीडिया संस्थान NDTV में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने वाले अडानी समूह (Adani Group) के अध्यक्ष गौतम अडानी (Gautam Adani) ने कहा है कि वे एक वैश्विक समाचार ब्रांड स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में फाइनेंशियल टाइम्स या अल जज़ीरा की तुलना करने वाला एक भी मीडिया संस्थान नहीं है।
विश्व के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति और भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी ने कहा कि उन्होंने NDTV की खरीदारी को व्यावसायिक अवसर के बजाय एक जिम्मेदारी के रूप में देखा। उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता का मतलब है कि अगर सरकार कुछ गलत कर रही तो आप कहें कि यह गलत है। इसके साथ ही यह हिम्मत भी रखनी चाहिए कि जब सरकार सही काम करे तो उसे भी कहें।”
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में दिग्गज उद्योगपति और एशिया के सबसे धनी वयक्ति गौतम अडानी ने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह बनाने की लागत उनके लिए नगण्य है। उन्होंने कहा कि NDTV के मालिक-संस्थापक प्रणय रॉय को अध्यक्ष बने रहने के लिए उन्होंने कहा था।
बता दें कि इस साल अगस्त में अडानी समूह ने NDTV में एक बड़ी हिस्सेदारी को खरीद लिया था। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इतना ही नहीं, अडानी समूह की एएमजी मीडिया नेटवर्क (AMNL) ने भी इस साल बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म BQ प्राइम में हिस्सेदारी खरीदी है। BQ प्राइम को पहले ब्लूमबर्ग क्विंट के नाम से जाना जाता है।
AMNL ने NDTV में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18% शेयर्स खरीदे थे। ये सौदा ‘विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL)’ और ‘RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए हुआ था। VCPL कंपनी AMNL की 100% सब्सिडियरी कंपनी है, वहीं RRPR एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी में। इस कंपनी में AMGNL ने 99.5% इक्विटी ख़रीदने का निर्णय लिया।
अडानी समूह ने अपनी प्रेस रिलीज में NDTV को एक प्रमुख मीडिया हाउस बताते हुए कहा था कि इसके पास 3 दशकों से विश्वसनीय ख़बरें देने का अनुभव है। इसके पास NDTV 24×7, NDTV India और NDTV प्रॉफिट नाम के 3 न्यूज़ चैनल हैं। अडानी समूह ने कहा था कि NDTV की ऑनलाइन उपस्थिति भी दमदार है, जहाँ वो विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर 3.5 करोड़ फॉलोवर्स के साथ सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले चैनलों में से एक है।
AMNL सभी प्लेटफॉर्म्स ‘न्यू एज मीडिया’ की स्थापना का लक्ष्य लेकर चल रहा है और इसके CEO संजय पुगलिया ने कहा था कि इस दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा था कि कंपनी भारतीय नागरिकों को और जो भारत में रुचि रखते हैं उन्हें सशक्त करना चाहती है। इस विजन को लोगों तक पहुँचाने के लिए NDTV एक अच्छा माध्यम है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले (Lakhimpur, UP) में दलित परिवार की दो बहनों की रेप के बाद हत्या के मामले में कॉन्ग्रेस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खुद को हमदर्द साबित करने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं ने दलित परिवार को सहायता के नाम पर जो चेक दिए थे, वे बाउंस हो गए हैं। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है।
बता दें कि 14 सितंबर 2022 को 2 दलित बहनों की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जुनैद, सोहैल, आरिफ, हाफिज, छोटे और करीमुद्दीन की गिरफ्तारी हुई थी। सिर्फ 14 दिनों में ही चार्जशीट फाइल कर दी गई थी। हालाँकि, राजनीति के लिए स्पेस मिलता नहीं देख कॉन्ग्रेस ने अब पीड़ित परिवार को उनके हाल पर छोड़ दिया।
उस समय कॉन्ग्रेस नेताओं ने परिवार को मदद के नाम पर चेक दिए थे, लेकिन वे बाउंस हो गए हैं। चेक पर किए गए हस्ताक्षर खाते के हस्ताक्षर से मैच नहीं हुए। इस कारण वे रिजेक्ट हो गए। उस दौरान कॉन्ग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी ने 1 लाख रुपए का और UP कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वाईके शर्मा 2 लाख रुपए का चेक दिया था।
वहीं, हाल ही में सुर्खियों में आए उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी ने भी 1 लाख रुपए का चेक दिया था। अमित जानी का भी चेक बाउंस हो गया है। वहीं, अमित जानी ने ऑपइंडिया को बताया कि बारिश में उनके चेक भीग गए थे। उन्होंने पीड़ित परिवार को बाद में कॉल कर कैश ले जाने को कहा था।
उधर कॉन्ग्रेस का कहना है कि इस मामले का वह समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। वहीं, चेक बाउंस के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट ऐक्ट 1881 की धारा 138 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
खेड़ी पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “विगत माह में थाना निघासन क्षेत्र में हुई दो युवतियों की हत्या के बाद विभिन्न राजनीतिक संगठनों एवं अन्य संगठनों द्वारा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता हेतु दिए गए चेक बाउन्स होने के सम्बन्ध में पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है।”
विगत माह में थाना निघासन क्षेत्र में हुई दो युवतियों की हत्या के बाद विभिन्न राजनीतिक संगठनों एवं अन्य संगठनों द्वारा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता हेतु दिए गए चेक बाउन्स होने के सम्बन्ध में पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। pic.twitter.com/18wHDOvV8y
इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष वाईके शर्मा, यूपी के फरेंदा विधानसभा से कॉन्ग्रेस विधायक वीरेंद्र कुमार और अमित जानी को आरोपित बनाया है। वीईके शर्मा ने लखनऊ के बैंक ऑफ इंडिया स्थित खाते का चेक दिया था। वीरेंद्र कुमार ने महाराजगंज के SBI बैंक के खाते का चेक दिया था, जबकि अमित जानी ने मेरठ के IDFC बैंक के खाते का चेक दिया था।
इस मामले में पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत देकर वीईके शर्मा, वीरेंद्र कुमार और अमित जानी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी में पीड़ित ने कहा कि एक खाते में पैसे नहीं थे, जबकि दो खातों से संबंधित चेक के हस्ताक्षरों का मिलान नहीं हो पाया। इस तरह गलत चेक देकर उनके साथ धोखाधड़ी की गई।
दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने ओखला से कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान (Congress Ex-MLA Asif Mohammad Khan) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आसिफ खान पर दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी से गाली-गलौच और मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
इस मामले में पुलिस ने आसिफ मोहम्मद खान को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, उनके दो सहयोगी मिनहाज और साबिर को हिरासत में लिया गया है। अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। आसिफ ने पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट और गाली-गलौच करते हुए कहा, “तुझ जैसे कितने पुलिस वाले को सीधे कर दिए।”
#UPDATE | The main accused, former Congress MLA Asif Mohd Khan has been arrested. FIR registered at Shaheen Bagh Police Station. Two others Minhaaz and Saabir have also been detained while arresting the accused. Their role in the above FIR is being examined: Delhi Police
पुलिस का कहना है कि आसिफ खान जामिया नगर की एक सभा में जोर-जोर से चिल्ला रहा थे। तब पुलिस अधिकारी ने उनसे इस बारे में बात की। इसके साथ आसिफ ने अधिकारी को गाली देना और उससे मारपीट करना शुरू कर दिया। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर आसिफ खान को गिरफ्तार कर लिया है।
आसिफ खान की इस करतूत का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में आसिफ खान को रुकने के लिए कहने पर वे सब-इंस्पेक्टर के साथ बहस कर रहे हैं और पुलिसकर्मी को गालियाँ दे रहे हैं। वीडियो में उनके समर्थक अधिकारी को धक्का देते नजर आ रहे हैं।
Congress leader Asif Mohammad Khan from Delhi's Shaheen Bagh area disrespected and assaulted the Sub-inspector of Delhi Police. Case has been registered against Asif Mohammad Khan. pic.twitter.com/kRbIcN7vWk
दक्षिण-पूर्व दिल्ली की DCP ईशा पांडे ने कहा, “इलाके में गश्त के दौरान हमारे कॉन्स्टेबल ने तैयब मस्जिद के सामने 20-30 लोगों की भीड़ को देखा और कर्मचारियों के साथ वहाँ गए। उस दौरान MCD चुनाव उम्मीदवार अरीबा खान के पिता आसिफ खान एक लाउड हैलर का उपयोग करके भीड़ को संबोधित कर रहे थे।”
DCP ने आगे कहा, “सब-इंस्पेक्टर अक्षय ने आसिफ खान से पूछा कि क्या उनके पास हैलर का इस्तेमाल करने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति है। इस पर आसिफ खान आक्रामक हो गए और पुलिस अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करने लगा। उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए आपराधिक बल का इस्तेमाल किया और SI अक्षय के साथ मारपीट की।”
दिल्ली पुलिस के अधिकारी अक्षय की शिकायत के आधार पर आसिफ खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 186 और 353 के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
दिल्ली: ओखला से पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता आसिफ मोहम्मद खान ने कांग्रेस पार्टी के बैनर-पोस्टर उतार रहे युवकों को बनाया मुर्गा..बोले- 'ये कांग्रेस के ही बैनर उतारेंगे, आम आदमी पार्टी के नहीं उतारेंगे' pic.twitter.com/jfFLLYx1yM
पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट करने का आसिफ खान का यह मामला पहला नहीं है। इससे पहले साल नवंबर 2021 में इलाके में उनके द्वारा लगाए गए पोस्टर को हटाने पर आसिफ खान ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों के साथ गाली-गलौच और मारपीट की थी। उन्होंने कर्मचारियों को मुर्गा बनवा दिया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। बाद में कर्मचारियों की शिकायत पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था।
साल 2008, तारीख 26 नवंबर, आज से ठीक 14 साल पहले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने एक ऐसा हमला किया था, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। बम धमाकों और गोलीबारी के बीच एक तरह से करीब 60 घंटे तक मुंबई बंधक बनी रही। आज भी यह आतंकी हमला भारत के इतिहास का वो काला दिन है जिसे शायद ही कोई भूला सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए, 300 से ज्यादा घायल हुए थे। और इन आतंकियों का सामना करते हुए मुंबई पुलिस, होमगॉर्ड, ATS, NSG कमांडों सहित कुल 22 सुरक्षाबलों ने अपना बलिदान दिया था।
पाकिस्तानी आतंकी हमले को नाकाम करने में वीरगति को प्राप्त हुए सुरक्षाबलों की बात करें तो मुंबई पुलिस, एटीएस, NSG कमाण्डों में प्रमुख नाम ATS प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक काम्टे, एसीपी सदानंद दाते, एनएसजी के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसआई विजय सालस्कर, इंस्पेक्टर सुशांत शिंदे, एसआई प्रकाश मोरे, एसआई दुरूगड़े, एएसआई नाना साहब भोंसले, एएसआई तुकाराम ओंबले, कॉन्सटेबल विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अंबादास पवार और एम.सी. चौधरी जैसे प्रमुख नाम हैं।
इनके अलावा होमगॉर्ड मुकेश बी जाधव, अरुण चिट्टे, हवलदार गजेंद्र सिंह, नागप्पा आर महाले, किशोर के.शिंदे, संजय गोविलकर, सुनील कुमार यादव ने भी आतंकियों का सामना करते हुए अपना बलिदान दिया था।
साभार-न्यूज़ 18
देश के इन वीर-बलिदानियों पर आगे बात करने से पहले उस दिन क्या हुआ था यदि उस पर संक्षेप में एक नजर डालें तो 26/11 मुंबई हमलों की छानबीन से जो कुछ सामने आया है, वह बताता है कि 10 हमलावर कराची से नाव के रास्ते मुंबई में घुसे थे। इस नाव पर चार भारतीय भी सवार थे, जिन्हें किनारे तक पहुँचते-पहुँचते आतंकियों ने मार डाला था। रात के तकरीबन आठ बजे थे, जब ये हमलावर कोलाबा के पास कफ़ परेड के मछली बाजार पर उतरे। वहाँ से वे चार ग्रुपों में अलग-अलग बँट गए और टैक्सी लेकर आतंकी मंसूबों को अंजाम देने मुंबई में अपने टारगेट की तरफ निकल गए।
कहा तो यह भी जाता है कि इन लोगों की आपाधापी और हड़बड़ाहट देखकर कुछ मछुआरों को शक भी हुआ और उन्होंने पुलिस को जानकारी भी दी। लेकिन शुरू में मुंबई पुलिस ने इसे कोई ख़ास तवज्जो नहीं दी और न ही आगे बड़े अधिकारियों या खुफिया एजेंसियों को जानकारी दी।
मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बात करें तो रात करीब साढ़े 9 बजे के आसपास छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर गोलीबारी की पहली खबर मिली। यहाँ दो आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 100 से ज्यादा लोग हमले में घायल भी हुए। आतंकियों के पास एके-47 राइफलें थीं। यहीं पर हमला करने वालों में एक आतंकी अजमल आमिर कसाब भी था, जिसे बाद में मुंबई पुलिस के एएसआई तुकाराम ओंबले ने जकड़ लिया और 10 में से जीवित पकड़ा जाने वाला यही एकमात्र आतंकी था।
आगे अपने विदेशी ग्राहकों के लिए मशहूर लियोपोल्ड कैफे में दो आतंकियों ने जमकर गोलियाँ चलाईं। इस गोलीबारी में भी 10 लोग मारे गए थे। हालाँकि, जल्द ही यहाँ दोनों आतंकियों को भी सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया। इसके बाद हमला नरीमन हाउस बिजनेस एंड रेसीडेंशियल कॉम्प्लेक्स पर हुआ। हमले से कुछ देर पहले ही पास के गैस स्टेशन में बड़ा धमाका भी हुआ। जिसके बाद नरीमन हाउस में मौजूद लोग बाहर की तरफ आए और इसी दौरान आतंकियों ने उन पर फायरिंग झोंक दी। सबसे बड़ा हमला होटल ताज पर था यदि आतंकी यहाँ अपने मंसूबों में पूरी तरह कामयाब होते तो आतंकी इतिहास में इस दिन की चोट और भी गहरी होती।
कसाब, लियोपोल्ड कैफ़े और होटल ताज महल पैलेस एंड टावर
इन पाकिस्तानी आंतकियों से लड़ते-लड़ते देश के वीर जाँबाजों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। मुंबई पुलिस के बहादुर पुलिसकर्मियों, ATS के जवानों और एनएसजी कमांडो सहित तमाम सुरक्षाबलों ने इन आतंकियों का डटकर सामना किया और 10 में से 9 आतंकियों को मारकर अनगिनत लोगों की जान बचाई।
उनमें से आइए जानतें हैं कुछ बहादुर योद्धाओं के बारें में जिन्होंने अपनी जान की परवाह न कर उस दिन लोगों की सुरक्षा करते हुए खुद बलिदान हो गए थे।
मुंबई एटीएस चीफ हेमंत करकरे
मुंबई एटीएस के चीफ हेमंत करकरे जब यह आतंकी हमला हुआ उस समय अपने घर में खाना खा रहे थे, जब उनके पास आतंकी हमले को लेकर क्राइम ब्रांच ऑफिस से फोन आया। करकरे तुरंत घर से निकले और एसीपी अशोक काम्टे, इंस्पेक्टर विजय सालस्कर के साथ मोर्चा सँभाला।
हालाँकि, कामा हॉस्पिटल के बाहर चली मुठभेड़ में आतंकी अजमल कसाब और इस्माइल खान की अंधाधुंध गोलियाँ लगने से वह बलिदान हो गए। बाद में मरणोपरांत उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। हेमंत करकरे ने मुंबई सीरियल ब्लास्ट और मालेगाँव ब्लास्ट की जाँच में भी अहम भूमिका निभाई थी। हालाँकि इनके ऊपर कई कई दूसरे आरोप भी थे जो बाद में इनके बदनामी का कारण भी बनें।
एसीपी अशोक काम्टे
अशोक काम्टे मुंबई पुलिस में बतौर एसीपी तैनात थे। जिस वक्त मुंबई पर आतंकी हमला हुआ, वह एटीएस चीफ हेमंत करकरे के साथ थे। कामा हॉस्पिटल के बाहर पाकिस्तानी आतंकी इस्माइल खान ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी। तभी एक गोली उनके सिर में जा लगी। घायल होने के बावजूद उन्होंने लश्कर आतंकी इस्माइल खान को मार गिराया।
सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर विजय सालस्कर
कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड के लिए खौफ का दूसरा नाम रहे सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर विजय सालस्कर भी कामा हॉस्पिटल के बाहर हुई फायरिंग में हेमंत करकरे और अशोक काम्टे के साथ आतंकियों की गोली लगने से बलिदान हो गए थे। विजय सालस्कर को भी मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
एएसआई तुकाराम ओंबले
मुंबई पुलिस के एएसआई तुकाराम ओंबले का जब गिरगाँव चौपाटी पर अजमल कसाब से सामना हुआ, तब वह पूरी तरह निहत्थे थे। यह जानने के बावजूद कि सामने वाले के हाथों में एके-47 है, वह अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकी कसाब पर टूट पड़े। इस दौरान उन्हें कसाब की बंदूक से कई गोलियाँ लगीं और वह बलिदान हो गए लेकिन कसाब से अपनी पकड़ ढीली नहीं की। बलिदानी तुकाराम ओंबले को उनकी इस जाँबाजी के लिए शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन नेशनल सिक्यॉरिटी गार्ड्स (एनएसजी) के कमांडो थे। वह 26/11 एनकाउंटर के दौरान मिशन ऑपरेशन ब्लैक टारनेडो का नेतृत्व कर रहे थे और 51 एसएजी के कमांडर थे। जब ताज महल पैलेस और टावर्स होटल पर कब्जा जमाए बैठे आतंकियों से लड़ रहे थे तो एक आतंकी ने पीछे से उन पर हमला किया जिससे घटनास्थल पर ही वह बलिदान हो गए। मरणोपरांत 2009 में उनको अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
एनएसजी कमांडो गजेंद्र सिंह
एनएसजी कमांडो गजेंद्र सिंह, 51 एसएजी (स्पेशल एक्शन ग्रुप) का हिस्सा थे, उन्होंने नरीमन हाउस को खाली कराते समय वीरगति को प्राप्त की, आतंकियों द्वारा फेंका गया एक ग्रेनेड उनके पास ही फट गया, जिससे गंभीर रूप से घायल होने के कारण उन्होंने अपना बलिदान दे दिया।
शशांक शिंदे
वे छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पुलिस स्टेशन मुंबई के प्रभारी थे। सीएसटी में आतंकी हमला हुआ तो आतंकवादियों को उलझा कर रखा। पीछे से एक आतंकी ने उन पर हमला किया। उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।
प्रकाश पी मोरे
प्रकाश पी मोरे, एल.टी. मार्ग थाने में तैनात पुलिस सब-इंस्पेक्टर थे। जिन्होंने अपनी अंतिम साँस तक बहादुरी से लड़ाई लड़ी और देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
बापूसाहेब दुरूगड़े
बापूसाहेब दुरूगड़े, एल.ए.1 थाने के पुलिस सब-इंस्पेक्टर थे जो 26/11 के हमलों के दौरान बलिदान हो गए थे।
विशेष रूप से उल्लेखित इन कुछ नामों के अलावा कुल करीब 22 नाम हैं जिन्होंने मुंबई आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकियों के मंसूबों को नाकाम करने और उन्हें मौत के घाट उतारने में अपना बलिदान देकर बहादुरी की मिसाल पेश की थी। इसके अलावा भी विभिन्न विभागों से जुड़ें ऐसे हजारों दूसरे सुरक्षा बलों के जवान हैं जिन्होंने अनगिनत लोगों की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाई। बता दें कि आतंकियों के खिलाफ मुंबई में 11 जगहों पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की थी।
लोग आज भी 26 नवंबर 2008 के उस दिन को नहीं भूले हैं, जब पाकिस्तानी आतंकियों ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को बंधक बना लिया था। इतना ही नहीं इस आतंकी हमले का दोष हिंदुओं के सिर पर डालने की भी पूरी तैयारी की गई थी। लेकिन मुंबई पुलिस इंस्पेक्टर संजय गोविलकर के सूझबूझ ने इसे विफल कर दिया था। उनके कारण ही पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब जिंदा पकड़ा गया था। इसका खुलासा मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे राकेश मारिया ने अपनी एक किताब में किया है।
इससे पता चलता है कि अगर उस दिन आतंकवादी कसाब जिंदा नहीं पकड़ा जाता तो भारत समेत पूरी दुनिया इस घटना को ‘हिंदू आतंकवाद’ मान रही होती। 26/11 हमले को अंजाम देने वाला पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इसे भारत के ही हिंदुओं की ओर से किए गए आतंकवादी हमले का रूप देने की बेहद खतरनाक साजिश रची थी।
अजमल कसाब को हिंदू बनाकर मुंबई की सड़कों पर खून बहाने के लिए उतारा गया था। उसके हाथ में कलावा (लाल धागा) बँधा था और उसे एक हिंदू नाम दिया गया। कसाब समेत सभी 10 हमलावरों को नकली आईकार्ड के साथ हिंदू बनाकर मुंबई भेजा। कसाब को समीर चौधरी जैसा हिंदू नाम दिया गया, ताकि मारे जाने के बाद उसकी पहचान हिन्दू के तौर पर हो और ऐसा लगे कि इस हमले में ‘हिंदू आतंकवाद’ का हाथ था।
ऐसा होने पर यह प्रचारित किया जाता कि ‘भगवा आतंकवाद’ के नाम पर लोगों का खून बहाया जा रहा है। इसके पीछे आरएसएस है। इतना ही नहीं, कुछ विदेशों से पोषित पत्रकार और समाजिक कार्यकर्ता इस थ्योरी को सच साबित करने के लिए समीर चौधरी का घर और पता ठिकाना ढूँढ़ने में लग जाते और आखिरकार उसे समीर चौधरी साबित कर ही दिया जाता। मगर गोविलकर की होशियारी और सतर्कता ने उसकी कलई खोल दी और पाकिस्तान की ‘हिंदू आतंकवाद’ की प्लॉटिंग धरी की धरी रह गई।
हमले के समय गोविलकर डीबी मार्ग पुलिस थाने में तैनात थे। उन्हें गिरगाँव चौपाटी पर नाकाबंदी करने को कहा गया था। यहीं पर उनकी टीम की भिड़ंत अजमल कसाब और उसके साथी इस्माइल के साथ हुई थी। दोनों आतंकी एक छीनी हुई स्कोडा कार से वहाँ पहुँचे थे। आतंकियों की फायरिंग में कॉन्स्टेबल तुकाराम ओंबले बलिदान हो गए। ओंबले ने अपने सीने पर 40 गोली खाई थी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में इस्माइल मारा गया। साथी को घायल देख अन्य पुलिसकर्मी भी बौखला गए और उसे मारने के लिए आगे बढ़े। पुलिसकर्मी कसाब को भी मारने आगे बढ़े लेकिन गोविलकर ने उन्हें समझाया और सलाह दी कि उसे मत मारो, वही तो सबूत है।
गोविलकर ने इस सारे घटनाक्रम पर कहा था, “अगर एक पल की भी देरी हुई होती तो कसाब भी पुलिस की गोली से मारा जाता। कसाब के जिंदा पकड़े जाने से ही उस रात पता चल सका कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे और मुंबई पर हमला करने की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी।” ये तमाम जानकारी उस रात न मिल पाती अगर संजय गोविलकर कसाब को जिंदा न पकड़वाते। गोविलकर को इस बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पदक से भी नवाजा गया था।
मजहबी कट्टरपंथ के बचाव में अक्सर आपने ‘आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता’ वाली दलील सुनी होगी। पर क्या 26/11 हमले में शामिल रहा कसाब यदि ‘समीर चौधरी’ बनकर ही मरा होता तो क्या यही ‘बुद्धिजीवी’ और कॉन्ग्रेसी तब भी कहते कि आतंकवाद का धर्म नहीं होता? यकीनन नहीं। वे हिंदुओं को बदनाम करने का प्रोपेगेंडा हाथों हाथ लेते।
इसके बावजूद कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरएसएस पर साजिश का आरोप लगाया था। हिंदू विरोधी अजीज बर्नी ने ‘26/11 RSS की साज़िश’ नाम की किताब लिखी थी। खास बात ये है कि इस किताब का विमोचन दिग्विजय सिंह ने ही किया था। वैसे भी ‘हिंदू आतंकवाद’ कॉन्ग्रेस का पसंदीदा टू लाइनर रहा है और दिग्विजय सिंह इसके चैंपियन रहे हैं। वह कई बार हिंदू आतंकवाद की थ्योरी प्लांट करने की नाकाम कोशिश भी कर चुके हैं।
श्रद्धा वालकर हत्या (Shraddha Walkar Murder) का आरोपित आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawala) के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) जोर-शोर से लगी है। दिल्ली पुलिस महरौली से लेकर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक के जंगलों एवं तालाबों की खाक छान रही है। इसी बीच हरियाणा में कुछ मानव अवशेष मिले हैं।
हरियाणा के सूरजकुंड के जंगलों में फरीदाबाद पुलिस को एक सूटकेस में बंद मानव शरीर के कुछ अंग मिले हैं। इस शव के ऊपरी हिस्से गायब हैं। पुलिस का कहना है कि शव को देखकर ऐसा लगता है कि इसकी हत्या कहीं और की गई है और इसे लाकर यहाँ फेंक दिया गया है, ताकि शव की शिनाख्त ना हो सके।
शव को प्लास्टिक की थैली और बोरी में लपेटा गया था और उसे सूटकेस में डाल दिया गया था। सूटकेस के पास के कुछ कपड़े और एक बेल्ट भी बरामद किया गया है। इलाके को सील करके घेराबंदी कर दी गई है। वहीं, फरीदाबाद पुलिस ने श्रद्धा वालकर की हत्या की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस से कहा कि DNA सैंपल की जरूरत हो तो वह नमूने को सुरक्षित रखेगी।
फरीदाबाद पुलिस के PRO सूबे सिंह ने कहा, “फरीदाबाद के सूरजकुंड के एक वन क्षेत्र में एक सूटकेस में शव मिला है। शव के ऊपर का हिस्सा गायब है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति की हत्या कहीं और की गई है और शव का एक हिस्सा यहां फेंका गया है ताकि उसकी शिनाख्त न हो पाए।”
फरीदाबाद के सूरजकुंड के एक वन क्षेत्र में एक सूटकेस में शव मिला है। शव के ऊपर का हिस्सा गायब है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि किसी व्यक्ति की हत्या कहीं और की गई है और शव का एक हिस्सा यहां फेंका गया है ताकि उसकी शिनाख्त न हो पाए: सूबे सिंह, PRO, फरीदाबाद पुलिस (24.11) pic.twitter.com/vogtExJVUi
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शरीर के जो हिस्से मिले हैं, उनमें धड़ भी है। यह धड़ महीनों पुराना है। शव को देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि यह पुरुष का है या महिला का। इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने इन हिस्सों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। इसके साथ ही DNA सैंपल के लिए नमूने को सुरक्षित रखकर दिल्ली पुलिस को सूचित कर दिया है।
पुलिस को शक है कि यह शव के ये टुकड़े मुंबई की रहने वाली आरोपित आफताब की लिव-इन पार्टनर 27 साल की श्रद्धा वालकर के शरीर के हिस्से हो सकते हैं। आफताब श्रद्धा को लेकर मुंबई से दिल्ली आ गया था और महरौली में रह रहा था, लेकिन वह नौकरी करने गुरुग्राम जाता था। महरौली में फ्लैट किराए पर लेने से पहले उसने इलाके की रेकी भी की थी।
दिल्ली पुलिस की पूछताछ में आरोपित आफताब ने बताया था कि उसने शव के 35 टुकड़े करके अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया था। उसने महरौली के जंगलों का नाम बताया था। हालाँकि, वहाँ से पुलिस वहाँ से कुछ मानव शरीर की हड्डियाँ बरामद की हैं। श्रद्धा के शरीर के प्रमुख हिस्से और सिर अभी तक नहीं मिला है।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने आफताब के फ्लैट से 5-6 इंच लंबे पाँच चाकू और श्रद्धा के सिर के बाल बरामद किए हैं। ये रसोई में इस्तेमाल होने वाले चाकू से अलग हैं और बेहद धारदार हैं। पुलिस का मानना है कि इनका इस्तेमाल आरोपित आफताब ने श्रद्धा वालकर की हत्या के बाद उसके शरीर को काटने के लिए किया था। इन हथियारों को फोरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया गया है।
आफताब ने पुलिस को बताया था कि उसने श्रद्धा के शरीर को काटने के लिए कई हथियारों का इस्तेमाल किया था। पुलिस का कहना है कि वह अन्य दूसरे बड़े हथियार की तलाश कर रही है। हालाँकि, इसमें पुलिस को अभी तक सफलता नहीं मिली है। वहीं, आफताब के फ्लैट से बरामद चाकू की फोरेंसिक जाँच के बाद ही पता चला पाएगा कि इन हथियारों का इस्तेमाल शरीर को काटने के लिए हुआ था या नहीं।
पूछताछ आरोपित आफताब दिल्ली पुलिस को इसकी सही जानकारी भी नहीं दे रहा है। वह पुलिस को भरमाने की भरपूर कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ पुलिस महरौली के तालाब और जंगलों से लेकर और हरियाणा के जंगलों में श्रद्धा के सिर को खोज रही है।
इधर गुरुवार (24 नवंबर 2022) को आफताब का लगभग 8 घंटे तक पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ। इस दौरान उससे श्रद्धा के साथ उसके रिलेशनशिप, कैसे हत्या की, शव के टुकड़े को कहाँ-कहाँ फेंका, उसके बचपन आदि के बारे में 50 सवाल किए गए। इस दौरान पुलिस ने उससे हिंदी में सवाल किए, लेकिन उसने सबका अंग्रेजी जवाब में दिया।
मंगलवार (22 नवंबर 2022) को आरोपित आफताब का पॉलीग्राफ टेस्ट का पहला सेशन हुआ था। इसे लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। वहीं, उसका नार्को एनालिसिस टेस्ट अगले सप्ताह सोमवार या मंगलवार (28-29 नवंबर 2022) को किया जा सकता है।
टाटा ग्रुप के पास लौटने के बाद एयर इंडिया (Air India) में कई बदलाव किए गए हैं। इसी सिलसिले में एयर इंडिया क्रू मेंबर्स के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई हैं। यह गाइडलाइन उनके सजने-सँवरने (grooming) को लेकर जारी की गई है। जिसमें पुरुष और महिला दोनों क्रू मेंबर्स को क्या पहनना है, उनका नया लुक कैसा होगा, इस बारे में दिशा-निर्देश है।
महिलाओं के लिए क्या हैं बदलाव?
Times of India की एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा बदलाव महिला क्रू मेंबर्स के सजने-सँवरने (grooming) को लेकर किया गया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक अब महिला क्रू मेंबर्स को एक-एक चूड़ी ही पहनने की इजाजत होगाी, वो भी बगैर डिजाइन वाले, कान में सिर्फ साधारण टॉप्स पहन सकते हैं। झुमका और बाली पहनने की इजाजत नहीं होगी। बिंदी की साइज भी 0.5 सेंटीमीटर तय कर दी गई है। इसके अलावा लिपस्टिक और नेल पेंट का रंग एक जैसा रखने की हिदायत दी गई है। गाइडलाइन्स में यह भी बताया गया है कि महिलाएँ साड़ी कैसे पहनेंगी।
पुरुष क्रू मेंबर्स के लिए जारी हिदायतें
अगर पुरुष क्रू मेंबर्स की बात करें तो जिन क्रू मेंबर्स के सिर में बाल हैं, उनके लिए हेयर जेल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं जिन पुरुष क्रू मेंबर्स के सिर में कम बाल हैं उन्हें अब अपने सिर को क्लिन शेव्ड रखना होगा। पुरुष कर्मचारियों से कहा गया है कि दाढ़ी नहीं चलेगी। उन्हें अपने साथ शेविंग किट रखनी होगी।
महिला और पुरुष कर्मचारियों के बालों का रंग भी तय
Air India की ओर से जारी नई गाइडलाइंस में क्रू मेंबर्स के बालों के रंग को लेकर खास हिदायत है। यह महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों पर लागू है। जिन क्रू मेंबर्स के बाल सफेद हो गए हैं, उन्हें अब कलर करके ड्यूटी पर आना होगा। कलर के नाम मेहंदी या रंग-बिरंगे बाल बिल्कुल नहीं चलेंगे। बालों को सिर्फ नेचुरल ब्लैक कलर से रंगने की इजाजत दी गई है।
एयरलाइंस के कर्मचारियों को गर्दन, कलाई और टखने पर किसी भी तरह का धार्मिक चिन्हृ गुदवाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें धार्ममिक, राजनीतिक और कंपनी से जुड़े मामलों को सोशल मीडिया पर डालने से रोका गया है।
गुजरात में जारी विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election) की प्रक्रिया के बीच सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने का दौर शुरू हो गया है। इसके जरिए एक बार फिर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) एवं गृहमंत्री अमित शाह (MHA Amit Shah) को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
गुजरात में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए भाषण को अपने हिसाब से मैनुपुलेट कर मामले को विवादास्पद और अपने हिसाब से रंग देने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले लोग स्पीच की क्लिपिंग को शेयर कर साल 2022 में ‘मुस्लिमों पर अत्याचार करने’ का आरोप लगाकर अमित शाह को गिरफ्तार करने की बात कह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बयान को तोड़-मरोड़ किया गया पेश
ऐसे ही एक ट्विटर यूजर शिवम ने NDTV की खबर के लिंक को शेयर करते हुए लिखा, “भारत के गृहमंत्री ने 2002 के मुस्लिम नरसंहार का महिमामंडन कर रहे हैं, जो अपनी पार्टी के लोगों को उकसाने के लिए जेल भी गए थे। मोदी पुलिस, कानून और व्यवस्था के प्रभारी थे, जिनके इरादे गलत थे। उन्होंने समय पर कार्रवाई न करके दंगों का समर्थन किया। इस नफरत के लिए अमित शाह को गिरफ्तार किया जाना चाहिए था।”
India’s home minister glorifying Muslim genocide of 2002 incited by his partymen who went to jail for the same. Modi was in charge of police, law and order whose intentions were evils and supported the riots by not acting on time. Amit Shah should have been arrested for this hate
rizoven नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि एक गृह मंत्री को भड़काऊ और संवेदनशील भाषणों से बचना चाहिए। वह राष्ट्र की माँ की तरह हैं और उन्हें अपने बच्चों के बीच नफरत नहीं फैलानी चाहिए।”
दरअसल, पहले NDTV ने गृहमंत्री अमित शाह के भाषण वाली खबर को ट्विटर पर शेयर किया था। खबर में NDTV ने कैप्शन में लिखा, ‘उन्हें 2002 में सबक सिखाया गया, अब गुजरात में स्थायी शांति’: अमित शाह।’ हालाँकि, इस दौरान NDTV अपने हेडलाइन को तीन बार बदला।
बुधवार की शाम 4:55 मिनट पर एनडीटीवी ने हेडलाइन दिया ‘साल 2002 में उन्हें सबक सिखाया गया, गुजरात में स्थायी शांति है’। इसके बाद शाम 7:02 बजे एनडीटीवी ने हेडलाइन को बदलकर ‘साल 2002 में भाजपा ने सबक सिखाया… गुजरात में स्थायी शांति है’ कर दिया। इसके बाद 7:17 बजे एनडीटीवी ने फिर हेडलाइन बदला और ‘साल 2002 में दंगाइयों को सबक सिखाया गया… गुजरात में स्थायी शांति है’ कर दिया।
लगातार हेडलाइन बदलने के बाद ndtv ने इन ट्वीट को डिलीट कर दिया। मगर इस बीच NDTV की भ्रामक हेडलाइन से पाठक भ्रमित हो गए और उन्होंने वही समझा, जो बताने की कोशिश की गई। इस खबर पर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के डब्बे जलाने के बाद स्वत: हुई प्रतिक्रिया के रूप में साल 2002 के गोधरा दंगे का गृहमंत्री द्वारा महिमामंडन बताया है।
अमित शाह ने रैली में क्या कहा?
अब आते हैं अमित शाह की बातों पर। गुजरात चुनाव के प्रचार के दौरान खेड़ा जिले महुधा शहर में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित एक रैली में अमित शाह ने कहा, “कहीं भी कर्फ्यू ना लगाना पड़े, ऐसा कोई राज्य बना है तो वह आपका और मेरा गुजरात है। ये 2002 में कॉन्ग्रेसियों ने आदत बनाई थी, इसलिए दंगे हुए थे। लेकिन, 2002 ऐसा सबक सिखाया कि वे हिंसा के रास्ते भूल गए। 2002 से 2022 तक हिंसा करने की उन्होंने सोचा भी नहीं।”
अमित शाह ने आगे कहा, “गुजरात में सांप्रदायिक दंगे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करके गुजरात की भाजपा सरकार ने गुजरात में अखंड शांति की स्थापना की है।” गृहमंत्री ने सा के भाषण में भाषा और तथ्य बहुत स्पष्ट हैं, जिसे कोई भी आसानी से समझ सकता है।
अमित शाह ने अपने भाषण में साफ कहा कि साल 2002 के पहले कॉन्ग्रेस दंगाइयों का समर्थन करती थी, जिसके कारण गुजरात में पहले हर समय कहीं ना कहीं दंगे होते रहते थे और कर्फ्यू लगाना पड़ता था। उन्होंने उस दौर के कुख्यात डॉन इज्जू शेख, पीरजादा और लतीफ को भी याद किया और कहा कि ऐसे लोग अब कहीं नहीं हैं।
अमित शाह ने साफ कहा कि साल 2002 में कॉन्ग्रेसियों की आदत के कारण दंगे हुए, लेकिन भाजपा सरकार ने दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, जिसके बाद आज तक वहाँ दंगे नहीं हुए और गुजरात में स्थायी शांति बहाल हुई। अमित शाह ने अपने भाषण में दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। ये दंगाई सिर्फ दंगाई थे।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर ‘दंगाइयों के खिलाफ’ और कॉन्ग्रेसियों के खिलाफ कार्रवाई को ‘मुस्लिमों के खिलाफ कार्रवाई’ के तौर पर प्रचारित कर प्रोपेगेेंडा फैलाया जा रहा है। इस प्रोपेगेंडा से यह साफ भी जाहिर हो रहा है कि अमित शाह की बात सही है कि कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति के लिए दंगे को एक टूल के रूप में इस्तेमाल करती थी।
सबक सिखाने का क्या था अर्थ?
अमित शाह की यह बात भी साफ है कि दंगाइयों के खिलाफ भाजपा सरकार ने कड़ी कार्रवाई की, जिसके कारण आजतक दंगे नहीं हुए। बता दें कि गोधरा दंगों के बाद तत्कालीन मोदी सरकार ने गुजरात में दंगा करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी, जिसमें दर्जनों लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग थे। इसलिए कार्रवाई को मुस्लिमों के खिलाफ प्रचारित करना चुनावी प्रोपेगेेंडा के सिवाय और कुछ नहीं है।
राजस्थान के भीलवाड़ा में गुरुवार (24 नवम्बर 2022) की शाम बाईक सवार हमलावरों ने इब्राहिम नाम के युवक की गोली मार कर हत्या कर दी। इसी गोलीबारी में इब्राहिम का भाई टोनी पठान गंभीर रूप से घायल हो गया है जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घटना से नाराज भीड़ ने जिला अस्पताल में तोड़फोड़ की है। बवाल की आशंका के चलते शहर में भारी फ़ोर्स तैनात कर दिया गया है और 48 घंटों के लिए इंटरनेट सेवाओं को बैन कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने इस गोलीबारी के आरोप में 22 वर्षीय कालू तापड़िया सहित 2 लोगों को हिरासत में लिया है। इसमें एक नाबालिग भी है। पुलिस इस हत्याकांड को मई 2022 में हुई आदर्श तापड़िया नाम के व्यक्ति की हत्या के बदले के तौर पर देख रही है। इब्राहिम की हत्या का मुख्य आरोपित रघुबीर उर्फ़ कालू तापड़िया बताया जा रहा है। हमले में प्रयोग हुई स्कूटी और पिस्टल को भी बरामद कर लिया गया है। हालाँकि पुलिस का कहना है कि अभी मामले की जाँच चल रही है। मृतक आदर्श कालू का भाई था। प्रशासन ने घटनास्थल और आस-पास धारा 144 लागू कर दी है।
Rajasthan | Accused identified, raids being conducted to nab them. Prima facie, it looks like a revenge murder as a murder had happened almost 6 months back wherein the victims of this incident were accused in the former incident: IG Ajmer range, Rupendra Singh (24.11) https://t.co/Jylzje8nEUpic.twitter.com/v8NCE3Cjrk
जानकारी के मुताबिक घटना बड़ला चौराहे की है। यहाँ चौराहे पर इब्राहिम और टोनी पठान नाम के 2 भाई खड़े थे। तभी अचानक हमलावर उधर से गुजरे। उन्होंने इब्राहिम और टोनी पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं। हमले के बाद हमलावर मौके से भाग निकले। मृतक इब्राहिम की उम्र 34 साल थी जबकि घायल टोनी पठान 22 साल का है।
इब्राहिम के परिवार को 20 लाख रुपए की मदद
इब्रहिम की मौत की खबर सुनते ही उसके परिजनों और समर्थकों ने अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू कर दी। हालत संभालने के लिए भारी पुलिस फ़ोर्स को भेजा गया। मुस्लिम सद्भाव समिति के अध्यक्ष शरीफ खान ने इस घटना को बेहद पीड़ादायक बताते हुए जल्द कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। ख़ान ने मृतक इब्राहिम के परिजनों के लिए 50 लाख रुपए और सरकारी नौकरी की भी माँग की। बताया जा रहा है कि अधिकारी 20 लाख रुपए की सहायता राशि पर सहमत हो गए। इसके बाद इब्राहिम का जनाजा उठाया गया। अजमेर रेंज के IG रुपिंदर सिंह ने बताया कि हमलावर की पहचान हो चुकी है और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
पुलिस के आगे खून खराबे की धमकी
एक रिपोर्ट के मुताबिक इब्रहिम की हत्या के बाद जब पुलिस वाले मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ कर रहे थे तभी बाइक सवार 2 युवक वहाँ आए थे। बताया जा रहा है कि दोनों ने पुलिस को खुली धमकी देते हुए बताया कि अब तुम लोग सिर्फ लाश देखोगे। दावा ये भी है कि पुलिस वालों ने उन दोनों को पकड़ने की कोई कोशिश नहीं की।
आदर्श तापड़िया हत्याकांड
गौरतलब है कि 10 मई, 2022) की देर को भीलवाड़ा में आदर्श तापड़िया की चाकू घोंप कर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने सरिया मार कर आदर्श के पैरों को भी तोड़ डाला था। यह विवाद आदर्श के छोटे भाई से मुस्लिम समुदाय के लोगों की बहस के बाद शुरू हुआ था। आदर्श पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था और अपना परिवार चलाने के लिए किराने की दुकान भी संभलता था। बताया जा रहा है कि मृतक इब्राहिम का संबंध आदर्श तापड़िया हत्याकांड से था।
कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि राहुल गाँधी के नेतृत्व में निकाली जा रही भारत जोड़ो यात्रा में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। ऐसा तब हुआ जब यात्रा मध्य प्रदेश के खरगोन से गुजर रही थी। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर यह दावा किया है।
भाजपा का दावा खरगोन में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे
अमित मालवीय ट्विटर पर लिखा,
“राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शामिल होने के लिए ऋचा चड्ढा के सार्वजनिक आवेदन के बाद, खरगोन में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे। एमपी कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल ने इस वीडियो को पोस्ट किया फिर इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया।”
After Richa Chaddha’s public application to join Rahul Gandhi’s Bharat “Jodo” Yatra, “Pakistan Zindabad” (listen towards the end of the video) slogans raised in Khargon.
INC MP posted the video and then deleted it after the faux pas came to light.
भाजपा के इल्जाम पर कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से जवाब आया है। बीजेपी के आरोपों का जवाब कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने दिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि
“भारत जोड़ो यात्रा को अपार जन समर्थन मिलता देख बौखलाई भाजपा ने यात्रा को बदनाम करने के लिए एक डॉक्टर्ड विडियो चलाया है। हम इसके ख़िलाफ़ तुरंत क़ानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। हम भाजपा के ऐसे घिनौने हथकंडों के लिए तैयार हैं। उनको करारा जवाब दिया जाएगा!”
भारत जोड़ो यात्रा को अपार जन समर्थन मिलता देख बौखलाई भाजपा ने यात्रा को बदनाम करने के लिए एक डॉक्टर्ड विडियो चलाया है।हम इसके ख़िलाफ़ तुरंत क़ानूनी कार्यवाही कर रहे हैं। हम भाजपा के ऐसे घिनौने हथकंडों के लिए तैयार हैं। उनको करारा जवाब दिया जाएगा!
इसके पहले भाजपा ने यात्रा को लेकर आरोप लगाए थे कि भारत जोड़ो यात्रा में शामिल सेलिब्रिटिज को राहुल गाँधी के साथ चलने के लिए पैसे दिए जा रहे हैं। आपको बता दें पूजा भट्ट, सुशांत सिंह, अमोल पालेकर, रिया सेन, रश्मि देसाई समेत कई एक्टर महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी के साथ पदयात्रा कर चुके हैं। इसे लेकर महाराष्ट्र के बीजेपी विधायक नितेश राणे ने ट्वीट किया। इस ट्वीट में बिना नाम वाला एक व्हाट्सएप मैसेज है, जिसमें मध्य प्रदेश में भी अभिनेताओं की भागीदारी का आह्वान किया गया। व्हाट्सएप मैसेज के अनुसार, अभिनेता अपनी पेमेंट बताकर राहुल गाँधी के साथ 15 मिनट तक चलने के लिए समय चुन सकते हैं।
So the Rahul Gandhi Yatra is stage managed.. This is a proof of how actors r bein paid to come and walk with him.. Sab Golmaal hai bhai !
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के बाद कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा तीन दिनों से मध्य प्रदेश में चल रही है। जो 4 दिसंबर,2022 को मध्य प्रदेश से राजस्थान में प्रवेश करेगी।