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सिख शिक्षिका के अपहरण, धर्मांतरण और जबरन निकाह पर भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा, विदेशी मंत्री ने अल्पसंख्यक आयोग को दी जानकारी

पड़ोसी देश पाकिस्तान में शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा, जिस दिन किसी अल्पसंख्यक समुदाय की महिला का अपहरण एवं धर्मांतरण अथवा रेप जैसी हिंसा नहीं होती होगी। पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के लिए नर्क के समान बन गया है। हाल में हुई एक सिख महिला के जबरन धर्मांतरण का मुद्दा भारत ने पाकिस्तान के समक्ष उठाया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S Jayshankar) ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) को इस संबंध में सूचित किया है। उन्होंने कहा कि सिख महिला के जबरन धर्मांतरण का मुद्दा उन्होंने पाकिस्तान के समक्ष उठाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पाकिस्तान सख्त कार्रवाई करेगा।

उधर आयोग ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में एक सिख लड़की के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के संबंध में मीडिया की खबरों का संज्ञान लिया था। इसके बाद विदेश मंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कदम उठाने को कहा था।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख इकबाल सिंह लालपुरा ने इस संबंध में 22 अगस्त 2022 को विदेश मंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वे अपने पाकिस्तानी समकक्ष के सामने इस मामले को उठाएँ। उन्होंने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए बात करने को भी कहा था, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ ना हों और पाकिस्तान में सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विदेश मंत्री जयशंकर ने 17 सितंबर को लिखे पत्र में लालपुरा को बताया कि सरकार ने इस घटना का संज्ञान लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही राजनयिक माध्यम से पाकिस्तान सरकार के समक्ष इसे उठाया और इस पर गंभीर चिंता जताई।

बता दें कि 20 अगस्त 2022 को पाकिस्तान के खबैर पख्तूनख्वा राज्य के बनेर जिले में दीना कौर नाम की एक सिख टीचर का बंदूक की नोंक पर अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के बाद उसका धर्मांतरण कराने के बाद जबरन निकाह कर दिया गया। परिवार ने जब पुलिस से मदद माँगी तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया।

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने पाकिस्तान की खूब आलोचना की थी और कट्टरपंथियों के आगे पाकिस्तान की शाहबाज शरीफ के घुटने टेकने की निंदा की थी। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इसकी निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन जारी है।

उद्धव ठाकरे गुट को तगड़ा झटका, असली शिवसेना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला: अब गेंद चुनाव आयोग के पाले

शिवसेना को लेकर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच चल रहे खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया है। उच्चतम न्यायालय ने आयोग के पाले में गेंद डालते हुए कहा कि वो तय करें कि शिवसेना के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कौन करेगा। यह फैसला शिंदे गुट के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की उस कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग की थी, जिसमें एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना के सिंबल पर अधिकार का दावा किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 27 जून, 2022 (मंगलवार) को सुनाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी कि शिंदे गुट को चुनाव आयोग में सुनवाई से रोका जाए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस याचिका को ख़ारिज करते हुए चुनाव आयोग की कार्रवाई में दखल से इनकार कर दिया। दरअसल शिंदे गुट ने चुनाव आयोग में एक अर्जी लगाते हुए खुद को असली शिवसेना बताया था। इस मामले पर अब अगला फैसला चुनाव आयोग को लेना है।

सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट की तरफ से कपिल सिब्बल और शिंदे गुट की तरफ से अधिवक्ता नीरज कौल ने बहस की। सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने शिंदे की सरकार बनने के तरीके को दुनिया का पहला उदाहरण बताया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिंदे समूह के पक्ष में रहा। गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे से अलग होने के बाद शिंदे समूह ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुष-बाण पर अपना दावा ठोंका है। वहीँ ठाकरे समूह न सिर्फ शिवसेना पर अपना अधिकार बता रहा है बल्कि वो शिंदे गुट में मौजूद सभी विधायकों को अयोग्य भी बता रहा है।

खतरनाक जेल से सामान्य कैदखाना में भेजा गया ISIS का खूँखार आतंकी, वकीलों ने ‘मानसिक स्थिति’ खराब होने का दिया हवाला: सिर कलम कर बनाता था वीडियो

इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के खूँखार आतंकी अल शफी अल शेख (Al Shafi Al Sheikh) को गत माह 8 आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अल शफी अल शेख को यह सजा अमेरिका की सबसे क्रूर सुपरमैक्स जेल एडीएक्स फ्लोरेंस में काटनी थी। हालाँकि, अब उसकी इस सजा में बदलाव करते हुए उसे दूसरी सामान्य जेल में रखा जाएगा।

दो पत्रकारों समेत 4 अमेरिकियों का सर कलम करने के आरोपी अल शफी अल शेख को उसके बोलने के तरीके और आवाज के कारण आईएसआईएस आतंकियों और बंधकों के बीच ‘बीटल’ के नाम से भी जाना जाता है। अल शेख ब्रिटिश आतंकी अलेक्संडा कोटे और मोहम्म्द इम्वाजी के साथ मिलकर इस्लामिक स्टेट के बंधक दल के लिए काम करता था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अल शफी अल शेख को 8 आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। उसे ये सजा कोलोराडो के एडीएक्स फ्लोरेंस में एकांत कारावास के रूप में काटनी थी। लेकिन, अब उसे सामान्य जेल में रखा जाएगा। इस जेल को यूएसपी फ्लोरेंस हाई कहा जाता है।

शुक्रवार (23 सितंबर, 2022) को अमेरिका की अलेक्जेंड्रिया की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजक पक्ष ने कोर्ट से कहा कि अल शेख अमेरिकी अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया इस्लामिक स्टेट का अब तक का सबसे कुख्यात आतंकी सरगना है।

बता दें, सूडान में पैदा हुए और लंदन में पले-बढ़े अल शफी अल शेख ने दो अमेरिकी पत्रकारों और उनके सहयोगियों को बंधक बनाकर जान से मार दिया था। इसमें, पत्रकार जेम्स फोले और स्टीवन सॉटलॉफ और उनके सहयोगी पीटर कासिग और कायला मुलर शामिल हैं। इनमें से तीन का सिर कलम करते हुए का वीडियो जारी किया गया था। जबकि, मूलर की हत्या से पहले उसके साथ इस्लामिक स्टेट के चीफ बगदादी ने कई बार बलात्कार किया था।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि, अल शफी अल शेख को एडीएक्स फ्लोरेंस जेल से बचाकर सामान्य जेल में रखने के लिए उसके वकीलों ने तर्क दिया था कि उस जेल में उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब हो रही है। साथ ही पहले की भी नजरबंदी ने उसे बुरी तरह बीमार कर दिया है। वकीलों का दावा था कि सुपरमैक्स जेल या एडीएक्स फ्लोरेंस जेल के ‘कंक्रीट बॉक्स’ में रहने से उसकी स्थिति और खराब हो सकती है।

वकील के इस तर्क के बाद कोर्ट ने अल शफी अल शेख को यूएसपी फ्लोरेंस हाई जेल में रखा जाएगा, जहाँ कई अन्य कैदी भी रखे गए हैं। यदि अल शफी अल शेख एडीएक्स फ्लोरेंस में ही रहता तो वह मरते दम तक एकांतवास में रहता, यानी अकेले रहते हुए ही उसकी मौत होती।

ईसाईयत के ‘हुक्ड क्रॉस’ को स्वस्तिक बता रहा Reuters और The Guardian, नाजियों के चिह्न को हिन्दुओं से जोड़ा: मीडिया का प्रोपेगंडा, बढ़ रही हिन्दू विरोधी हिंसा

जिस तरह से पश्चिमी देशों में हिंदू, बौद्ध और जैन (Hindus, Bauddh and Jain) समुदाय के खिलाफ नफरत और हिंसा बढ़ रही है, उसमें रॉयटर्स (Reuters) जैसी न्यूज एजेंसी और गार्डियन (Guardian) जैसे प्रमुख अखबारों का प्रोपेगेेंडा प्रमुख भूमिका निभा रहा है। रॉयटर्स और गार्डियन जैसे मीडिया संस्थान हिंदुओं के प्रतीकों को बदनाम कर हिंदुओं को खिलाफ स्थानीय जनमानस में भावनाएँ भड़काने का काम कर रहे हैं।

हिंदुओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाते हुए विश्व की सबसे बड़ी ब्रिटिश न्यूज एजेंसी ने हिंदू प्रतीक स्वस्तिक के सहारे बदनाम करने की कोशिश की है। रूस में एक बंदूकधारी ने एक स्कूल में एक दर्जन से अधिक लोगों की हत्या कर दी। इसकी खबर देते हुए रॉयटर्स ने लिखा, “जाँचकर्ताओं ने कहा कि स्वस्तिक टी-शर्ट वाले एक बंदूकधारी ने 7 बच्चों सहित 13 लोगों की हत्या कर दी। खुद को मारने से पहले रूस के एक स्कूल में 20 से अधिक लोगों को घायल कर दिया।”

वहीं, ब्रिटेन के प्रसिद्ध अखबार गार्डियन ने भी ऐसा ही किया है। उसने भी अपनी खबर में स्वास्तिक के माध्यम से हिंदुओं को बदनाम करने और उनके खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने का काम किया है। गार्डियन ने अपनी खबर में लिखा, “स्वस्तिक वाले टी-शर्ट पहने एक बंदूकधारी ने रूसी स्कूल में 15 की हत्या कर दी।”

इन दोनों ब्रिटिश न्यूज एजेंसियों की खबर पर दुनिया में मानवीय शुभता के हिंदू प्रतीक ‘स्वस्तिक’ और जर्मन तानाशाह हिटलर द्वारा प्रयोग किए गए नाजी प्रतीक ‘हेकेनक्रेज’ या ‘हूक्ड क्रॉस’ (Heckenkreuz or Hooked Cross) के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली अमेरिकी NGO ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है।

कॉलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) ने कहा, “@guardian और @Reuters, कृपया इस भयानक त्रासदी की सही-सही रिपोर्ट करें। टी-शर्ट पर नाज़ी चिह्न को बताने के लिए #Hakenkreuz (हुक्ड क्रॉस) शब्द का प्रयोग होना चाहिए, स्वास्तिक नहीं। सभी नाजी साहित्य और उस युग की समकालीन रिपोर्टिंग भी यही कहती हैं।”

बता दें कि पश्चिमी मीडिया नाजियों के हुक्ड क्रॉस को हिंदू धर्म के शुभ प्रतीक स्वस्तिक बताकर प्रोपेगेंडा फैलाते रहे हैं। इससे विश्व भर में हिंदुओं के खिलाफ और उनके धर्मस्थलों पर हमले बढ़ रहे हैं। कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन में हिंदुओं पर हमले हाल के दिनों में कई गुना बढ़े हैं। इन हमलों को लेकर भारत सरकार को विदेशों में रहने वाले हिंदुओं को लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ी।

दरअसल, इन देशों में रहने वाले हिंदू और हिंदू संगठन लगातार वहाँ के अधिकारियों और सरकार को बताते रहे हैं कि नाजियों के हुक्ड क्रॉस और हिंदुओं के स्वस्तिक में भारी अंतर है। इस अंतर को समझते हुए हुक्ड क्रॉस को स्वस्तिक से ना जोड़ा जाए और ना ही उसे स्वस्तिक कहा जाए। इसके बावजूद हिंदू विरोधी मीडिया संस्थान हिंदुओं के इस प्रतीक का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ हिंसा के लिए स्थानीय लोगों को लगातार उकसा रहे हैं।

अमेरिका के राज्यों और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस अंतर को समझते हुए इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए हैं। पिछले महीने 23 अगस्त को अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया ने इसको लेकर एक कानून भी पारित किया है। कैलिफोर्निया राज्य की सीनेट ने सर्वसम्मति से एक विधेयक AB2282 पारित किया।

इस विधेयक में नाजी हेकेनक्रेज़ (जर्मन में हुक्ड क्रॉस) के प्रदर्शन को अपराध बनाया गया है। इसके साथ ही इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह स्वस्तिक जैसा दिखता है, लेकिन यह बिल हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से जुड़े स्वस्तिक के प्रदर्शन को अपराधीकरण नहीं करता। इसका मतलब स्पष्ट है कि कैलिफोर्निया की सीनेट मानती है कि हिंसा को प्रतीक बना हुक्ड क्रॉस हिंदुओं के स्वस्तिक से अलग है।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स संसद (NSW Parliament) ने हेक्रेनक्रेज के प्रदर्शन को अपराध घोषित किया, लेकिन स्वस्तिक को उससे अलग रखा। इसी तरह का बिल ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया और क्वींसलैंड में पास किया गया। यहाँ भी सरकारों ने हिंदुओं के माँग को ध्यान में रखते हुए नाजी हेकेनक्रेज और स्वस्तिक से अलग माना।

हिटलर ने अपनी आत्मकथा या अपने भाषणों में हेकेनक्रेज को स्वस्तिक कभी नहीं बताया है। इसके बावजूद भी पश्चिम की मीडिया इस हिंसक नाजी प्रतीक को हिंदुओं के पवित्र प्रतीक स्वस्तिक से जोड़ने का प्रयास करती है। जब नाजी सिंबल का कहीं पर प्रदर्शन होता है, उसे स्वस्तिक बता देती है।

ब्रिटिश स्कॉलर मैक्स मुलर ने भी ‘स्वस्तिक’ को भारतीय शब्द बताते हुए इसके प्रयोग पर आपत्ति जताई थी। वो ये नहीं चाहते था कि दुनिया ये मानें कि इस क्रॉस की उत्पत्ति भारत में हुई है। असल में हिटलर बचपन में अकेले में चर्च में गायिकी का आनंद लेता था और साथ ही पादरी भी बनना चाहता था। वो एक मोनेस्टरी है, जहाँ ऐसे ही चिह्न थे। यही चिह्न नाजी ‘Hakenkreuz’ की प्रेरणा बना। चैनल ने इसे 20वीं शादी का ऐसा विश्वासघात बताया है, जिसमें मोहरे सिर्फ एक ही तरफ से चले जा रहे थे।

ऑस्कर एंट्री के बाद ‘दादा साहब फाल्के अवॉर्ड’ भी गुजरात के नाम, सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं अभिनेत्री आशा पारेख: 60-70 के दशक में बोलती थी तूती

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख (Asha Parekh) को इस साल के दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार (27 सितंबर, 2022) को इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए आशा पारेख को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है। अनुराग ठाकुर ने कहा, “आशा भोंसले, हेमा मालिनी, उदित नारायण झा, पूनम ढिल्लों और टीएस नागभरण की सदस्यता वाली दादा साहब फाल्के समिति ने 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में आशा पारेख को पुरस्कार देने का फैसला किया है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 79 वर्षीय अभिनेत्री को 2022 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार शुक्रवार (30 सितंबर, 2022) को विज्ञान भवन में प्रदान करेंगी। आशा पारेख का जन्म एक गुजरती परिवार में हुआ था। हाल ही में भारत सरकार ने दिलम ‘छेल्लो शो’ को ऑस्कर में आधिकारिक एंट्री के रूप में भेजने का फैसला लिया था।

भारतीय सिनेमा जगत में दादा साहब फाल्के पुरस्कार को सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के काम को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। भारतीय सिनेमा को ऊँचाइयों तक पहुँचाने में आशा पारेख का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने वाली वह 52वीं हस्ती होंगी। फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के काम को सम्मानित करने के लिए हर साल यह अवॉर्ड दिया जाता है। पारेख से पहले दक्षिणी भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया था।

95 से ज्‍यादा फिल्‍मों में कर चुकी हैं काम

महज 10 साल की उम्र में अदाकारी की दुनिया में कदम रखने वाली आशा पारेख 95 से ज्‍यादा फिल्‍मों में काम कर चुकी हैं। यही नहीं, वह अभिनेत्री के साथ-साथ प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। पारेख ने 1990 के दशक के आखिर में धारावाहिक ‘कोरा कागज’ का निर्देशन किया था। 1992 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। इसके बाद उन्हें कई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 1963 में ‘अखंड सौभाग्यवती‘ फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का गुजरात राज्य पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्हें 1971 में फिल्म ‘कटी पतंग’ के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया था।

पंजाबी, गुजराती भाषा में भी कर चुकी हैं काम

बताया जाता है कि आशा पारेख अपने दौर में सबसे अधिक फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। वह हिंदी के अलावा पंजाबी, गुजराती और कन्नड़ फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। उनकी खुद की प्रोडक्शन कंपनी भी है। आशा पारेख 1998 से 2001 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

डॉक्टर आशिक ने प्रेमिका जननी से बनवाया अश्लील वीडियो, फिर ब्लैकमेल कर मँगवाने लगा हॉस्टल की अन्य लड़कियों की न्यूड वीडियोज

तमिलनाडु के मदुरै शहर में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से मिलती-जुलती घटना घटी है। यहाँ एक डॉक्टर की प्रेमिका उसे अपने साथ हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की अश्लील वीडियो व फोटो भेजा करती थी। ये फोटो व वीडियो आरोपित अपने ही मोबाइल से बनाती थी। आरोपित महिला का नाम जननी है जबकि डॉक्टर का नाम आशिक है। पुलिस ने डॉक्टर और उसकी प्रेमिका को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला गुरुवार (22 सितम्बर 2022) को दर्ज हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला अन्ना नगर थानाक्षेत्र का है। यहाँ एक हॉस्टल में रहने वाली BED की छात्रा जननी पर आरोप है कि उसने अपनी सहेलियों की आपत्तिजनक तस्वीरें अपने प्रेमी डॉक्टर आशिक को व्हाट्स एप पर भेजी हैं। बताया जा रहा है कि तस्वीरें तब खींची गईं हैं जब लड़कियाँ या तो कपड़े बदल रहीं थीं या वो नहा रही थीं। एक दिन नहा रही एक लड़की को शक हुआ तो उसने युवती का मोबाइल चेक किया।

बताया जा रहा है कि तलाशी के दौरान जननी के मोबाइल में कई लड़कियों के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिले। इस मामले की शिकायत पहले हॉस्टल की वार्डन से की गई। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने केस दर्ज करते हुए जननी और आशिक को गिरफ्तार कर लिया। आशिक रामनाथपुरम कामुदी का रहने वाला है। दोनों पर IT एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस से हुई पूछताछ में जननी ने बताया कि वह पहले आशिक द्वारा चलाए जा रहे क्लिनिक में काम कर चुकी है। अरोपिता ने बताया कि दोनों के बीच तब से रिलेशन हैं। जननी के मुताबिक पहले उसने अपनी नग्न तस्वीरें आशिक को भेजीं लेकिन आशिक हॉस्टल की अन्य लड़कियों की तस्वीरों की माँग करता रहा। आखिरकार आशिक़ की जिद के चलते जननी ने हॉस्टल में अपनी सहेलियों की भी अश्लील तस्वीरें बनाना शुरू कर दिया।

पुलिस ने आशिक और जननी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। दोनों मोबाइल को फरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। पुलिस इस बात की भी तहकीकात कर रही है कि कहीं आशिक ने वो फोटो और वीडियो किसी और को तो नहीं भेजे। गौरतलब है कि इसी माह चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में भी इस प्रकार का मामला सामने आया था जहाँ हॉस्टल की एक लड़की पर अपने साथ रह रही लड़कियों का नहाते समय वीडियो बनाने आरोप लगा था। तब ये बताया गया था कि अरोपिता ने वो वीडियो हिमाचल प्रदेश में रहने वाले एक दोस्त को भेजे थे।

बिहार में बालू माफिया का आतंक, राजद नेता ने युवक के सिर में मारी गोली: RJD विधायक का है प्रतिनिधि, डिप्टी CM तेजस्वी यादव के साथ डालता है तस्वीर

बिहार के गया में बालू का चालान नहीं देने पर एक युवक को गोली मार दी गई है। हमले का आरोप राजद विधायक अजय यादव के प्रतिनिधि बैजू यादव पर लगा है। बैजू यदव ने अपनी कई तस्वीरें लालू और तेजस्वी यादव के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माँझी के साथ भी फेसबुक पर डाल रखी हैं। गोली लगने से बुरी तरह से घायल पीड़ित विकास का इलाज पटना में चल रहा है, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने केस दर्ज कर के फरार हो गए बैजू यादव की तलाश शुरू कर दी है। घटना रविवार (25 सितम्बर, 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना अतरी थानाक्षेत्र की है। यहाँ 23 साल का विकास कुमार एकलव्य एक कम्पनी में ऑपरेटर के पद पर काम करता है। उसका काम कम्पनी में डंप किए गए बालू का चालान काट कर देना है। बताया जा रहा है कि घटना के दिन कार में सवार हो कर अतरी विधायक अजय यादव का प्रतिनिधि बैजू यादव कम्पनी में पहुँचा और विकास से बालू का चालान माँगने लगा। विकास ने मालिक द्वारा रोके जाने की दलील दे कर चालान देने से मना कर दिया। इस बार बैजू यादव नाराज हो गया।

पीड़ित विकास के चाचा राम प्रवेश द्वारा पुलिस को दिए बयान में बताया गया है कि कुछ ही देर के बाद बैजू यादव ने विकास के सिर में गोली मार दी। उन्होंने बताया कि गोली मार कर आरोपित अपने साथियों सहित फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस ने वो घटना में प्रयोग हुआ वाहन जब्त कर लिया है। घटना के बाद बैजू यादव के घर में ताला लगा है। पुलिस फरार बैजू की तलाश कर रही है। इस बीच घायल विकास पटना में वेंटिलेटर पर है। एक निजी अस्पताल से जवाब मिल जाने के बाद विकास के परिजन उसे IGIMS अस्पताल ले गए हैं जहाँ उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना पर बिहार की सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने इसे जंगलराल की हद पार करना बताया है।

कहानी तब की, जब अमेरिका नक्शे पर था भी नहीं: एडवांस बुकिंग में चोल युग पर बनी फिल्म ने ‘विक्रम वेधा’ को पटका, अकेले तमिलनाडु में बिके 2.5 लाख टिकट

शुक्रवार (30 सितंबर 2022) सिनेमा फैन्स के लिए बेहद मजेदार होने वाला है। शुक्रवार को जहाँ एक ओर 500 करोड़ के बजट वाली मणि रत्नम की पोन्नियिन सेल्वन (Ponniyin Selvan) का पहला भाग रिलीज हो रहा है। वहीं, ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्टारर विक्रम वेधा (Vikram Vedha) भी दर्शकों के मनोरंजन को तैयार है। इन दोनों ही फिल्मों की एडवांस बुकिंग शनिवार (24 सितंबर) से शुरू हो चुकी है। जिसमें अब तक सामने आए आँकड़ों में ‘पोन्नियिन सेल्वन-I’ ने ‘विक्रम वेधा’ को पछाड़ दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोन्नियिन सेल्वन (Ponniyin Selvan advance booking) के तमिलनाडु में करीब 2.5 लाख टिकट बिक चुके हैं। इन टिकट्स से फिल्म ने 4.50 करोड़ रुपये की कमाई की है। पोन्नियिन सेल्वन की एडवांस बुकिंग की यह स्थिति तब है जब केवल 225 सिनेमाघरों के लिए एडवांस बुकिंग ओपन की गई है।

ऐसे में, यदि और अधिक थिएटर्स में एडवांस बुकिंग शुरू की जाएगी तो पोन्नियिन सेल्वन की कमाई के आँकड़े और भी अधिक होंगे। कहा जा रहा है कि जैसे ही ‘पोन्नियिन सेल्वन-I’ की एडवांस बुकिंग के लिए सभी थिएटर्स को ओपन किया जाएगा फिल्म 15 करोड़ के आस पास की एडवांस बुकिंग या इससे अधिक भी कमाई कर सकती है।

बता दें, पोन्नियिन सेल्वन को दो पार्ट में बनाया गया है। इस फिल्म के पहले पार्ट के OTT राइट्स पहले ही अमेज़न प्राइम को भारी कीमत पर बेचे जा चुके हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो अमेजन पर इस फिल्म को 125 करोड़ रुपए में बेचा गया है। बड़े बजट वाली इस फिल्म के लिए यह एक अच्छी कीमत है।

यही नहीं, इंटरनेशनल मार्केट में फिल्म की एडवांस बुकिंग खुलते ही धमाल मचा रही है। ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला ने शनिवार (24 सितंबर) को ट्वीट कर बताया था कि फिल्म ने सिर्फ अमेरिका में ही $400,000 (₹3.25 करोड़ से अधिक) की कमाई है। साथ ही सिंगापुर में भी एडवांस बुकिंग बेहतरीन दिखाई दे रही है।

वहीं, ‘विक्रम वेधा’ (Vikram Vedha advance booking) की बात करें तो मध्य भारत से लेकर उत्तर भारत तक के थिएटर्स में स्क्रीन हासिल करने के बाद भी फिल्म की एडवांस बुकिंग अपेक्षाकृत काफी कम रही है। विक्रम वेधा के अब तक मात्र 17 हजार टिकट ही बिके हैं। ऐसे में इस फिल्म का ग्रॉस कलेक्‍शन 45 लाख के आसपास बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि साउथ इंडिया में ‘पोन्नियिन सेल्वन-I’ को तूफानी रिस्पॉन्स मिल रहा है। यहाँ एडवांस बुकिंग शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही फ़िल्म के शो हाउसफुल हो गए। टिकट बुक होने की स्पीड को देखते हुए थिएटर्स मालिकों ने सुबह 4 बजे तक के शो ओपन कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये शो भी हाउसफुल हो गए हैं।

PFI पर रेड का राउंड 2, गिरफ्तार कट्टरपंथियों में मौलवी से लेकर वकील और नेता तक: अरब मुल्कों से आती थी फंडिंग, अकेले कर्नाटक से धरे गए 45

देश भर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के खिलाफ चल रही छापेमारी के बीच मंगलवार (27 सितम्बर 2022) तक कुल 170 सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। ये गिरफ्तारियाँ 8 अलग-अलग राज्यों में हुई हैं। केरल वाली स्थिति को देखते हुए दिल्ली के शाहीन बाग और जामिया क्षेत्र में धारा 144 लागू कर अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये छापेमारी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और महाराष्ट्र में हुई है। इसमें अबतक 170 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। अकेले कर्नाटक से 45 गिरफ्तारियाँ होने की सूचना है। दिल्ली के शाहीन बाग़, निजामुद्दीन और जामिया इलाकों में भी NIA ने छापेमारी की है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम से भी कई दर्जन हिरासत में

महाराष्ट्र में भी रेड के दौरान कई संदिग्धों के हिरासत में लिए जाने की खबर है। औरंगाबाद और नांदेड़ में ATS की छापेमारी के दौरान लगभग 14 संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर है। असम के विभिन्न जिलों से PFI के 25 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

इसके अलावा, कर्नाटक के विभिन्न जिलों में भी छापेमारी के बाद कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। कर्नाटक के कोलार से PFI के 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, गुजरात ATS ने अहमदाबाद, सूरत, नवसारी और बनासकांठा से 15 लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों के तार विदेशों जुड़े मिले हैं। 

दिल्ली से PFI के 30 संदिग्ध गिरफ्तार

दिल्ली के जामिया, शाहीन बाग और निजामु्द्दीन सहित विभिन्न इलाकों से NIA और दिल्ली पुलिस ने करीब 30 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के मोबाइल फोन और अन्य डिवाइस समेत कई दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। वहीं, जामिया नगर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह कर्फ्यू 17 नवंबर तक के लिए लगाया गया है।

इसके साथ ही जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को एक जगह इकट्ठा होने से रोक दिया गया है। उनसे कहा गया है कि वे कैंपस के अंदर ही रहे हैं। अगर वे कैंपस के बाहर एक जगह इकट्ठा होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यूपी से वकील सहित कई गिरफ्तार

यूपी के 8 जिलों में NIA, ATS और पुलिस ने मिलकर छापेमारी की। इस रेड में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। यूपी के बुलंदशहर के स्याना के मोहल्ला चौधरियान से एक वकील अफजल को गिरफ्तार किया गया है। वकील लंबे समय से PFI से जुड़ा था।

मेरठ में पीएफआई दफ्तर पर इसका लगातार आना-जाना था। एटीएस करीब एक साल से इसकी निगरानी कर रही थी। वहीं, बुलंदशहर के मोहल्ला फैसलाबाद से एटीएस की टीम ने दो संदिग्धों को रियाज़ और खालिद को एटीएस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया।

यूपी के ही शामली में छापेमारी कर 4 लोगों को हिरासत में लिया। ATS ने शामली जिले के कैराना में सुबह 4 बजे मामौर गाँव से दो भाइयों मौलाना जाहिद और साबिर को उठाया। वहीं, गाँव पावटली कलां से SDPI के जिला पंचायत सदस्य परवेज के बड़े भाई जाबिर को कस्टडी में लिया गया। गाँव गोगवान से सरवन अली को पकड़ा गया है।

मध्य प्रदेश से कई गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के भोपाल, उज्जैन, इंदौर समेत 8 जिलों में PFI सदस्यों के ठिकानों पर रेड के बाद 22 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन संदिग्धों की जानकारी पूर्व में पकड़े गए 4 आरोपियों की पूछताछ में मिली थी। वहीं, 3 संदिग्ध फरार होने में कामयाब हो गए हैं।

भोपाल के शाहजहाँनाबाद इलाके में स्थित PFI की राजनीतिक विंग SDPI के ऑफिस में रेड डालकर अब्दुल रऊफ को पकड़ा है। रऊफ SDPI का मध्य प्रदेश अध्यक्ष है। ऑफिस से कुछ दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जो आपत्तिजनक बताए जा रहे हैं। SDPI का ऑफिस शाहजहाँनाबाद थाने से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर स्थित है।

वहीं, उज्जैन जिले से 4 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उज्जैन शहर के नयापुरा से मस्जिद के इमाम जुबेर को हिरासत में लिया गया है। वहीं, नगारची बाखल इलाके से इसाक को पकड़ा गया है। इसकी नलिया बाखल में जामा-ए-शाकेब मस्जिद के पास एसएस स्टील नाम से फेब्रिकेशन की दुकान है।

मुस्लिमों पर जुल्म की झूठी कहानियाँ सुना गल्फ से फंडिंग

गिरफ्तार किया गया PFI का सदस्य शफीक पाएथ लखनऊ-दिल्ली से लेकर नेपाल बॉर्डर तक PFI का नेटवर्क फैलाया था। वह भारत में मुस्लिमों पर जुल्म की झूठी कहानियाँ सुनाकर जकात के नाम पर खाड़ी देशों से रकम बटोरता था। इसका इस्तेमाल लव जिहाद, धर्मांतरण और हिंसा के लिए करता था।

ईडी के सूत्रों के मुताबिक, शफीक ‘गल्फ तेजस डेली’ अखबार के जरिए नफरत फैलाने का काम करता था। ‘गल्फ तेजस डेली’ केरल से प्रकाशित होने वाले ‘तेजस’ अखबार का हिस्सा है। इसी अखबार जुड़ा सिद्दीक कप्पन हाथरस कांड की कवरेज करने पहुँचा था। इसके बाद यूपी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

फिर इसका इस्तेमाल पीएफआई भारत में कट्‌टरता का पाठ पढ़ाने में होता था। टारगेट पर होते थे छोटे काम-धंधे पर लगे लोग। उन्हें एजुकेशन और इलाज के नाम पर दी जाने वाली मदद से धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा था। यहां आपको बता दें कि शफीक पाएथ को केरल के कोझिकोड से गिरफ्तार किया था।

पिछले सप्ताह भी NIA ने डाला था रेड

बता दें कि करीब 5 दिन पहले NIA और ED ने मिलकर 11 राज्यों के विभिन्न शहरों और इलाकों में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में 106 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में इनसे लिंक के आधार पर मंगलवार (27 सितंबर 2022) को NIA के साथ विभिन्न एजेंसियों ने फिर से एक्शन लिया है। 

गिरफ्तार किए लोगों पर विदेशी फंडिंग करने, दो समुदायों के बीच हिंसा फैलाने, दंगा कराने, लव जिहाद, देश में अराजकता फैलाने, हथियार इकट्ठा करने, लोगों का ब्रेनवॉश कर कट्टर बनाने जैसे कई देशद्रोही गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

NASA ने सफलतापूर्वक टेस्ट की ‘पृथ्वी को बचाने’ वाली तकनीक, एस्टेरॉयड से टकराया स्पेसक्राफ्ट: धरती की तरफ आने वाले खतरे की बदल देगा दिशा

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नेशनल ‘एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA)’ का ‘डार्ट (Double Asteroid Redirection Test – DART)’ मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। डार्ट मिशन को यह निर्धारित करने के लिए तैयार किया गया था कि क्या एक अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर तीव्र गति से आ रहे एस्टेरॉयड की दिशा को बदलने में सक्षम है। सवाल था कि क्या आगे भी इस तकनीक से अपने ग्रह को बचाया जा सकता है?

इतिहास में यह पहली बार है, जब प्लैनेटरी डिफेंस टेस्ट (Planetary Defense Test), यानी DART मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अब भविष्य में किसी भी एस्टेरॉयड को खत्म करने में किया जा सकेगा, क्योंकि पृथ्वी को सबसे ज्यादा खतरा एस्टेरॉयड से है। डार्ट मिशन के तहत मंगलवार (27 सितंबर, 2022 ) सुबह 4.45 मिनट पर एस्टोरायड डिडिमोस (Didymos) के चंद्रमा जैसे पत्थर डाइमॉरफोस (Dimorphos) से टकरा कर टेस्ट पूरा किया गया। नासा ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसका वीडियो भी शेयर किया है।

NASA के मुताबिक, DART ने एस्टोरायड के चंद्रमा जैसे पत्थर डाइमॉरफोस को निशाना बनाया। डिडिमोस (Didymos) का कुल व्यास 2560 फीट (780 मीटर) है। डाइमॉरफोस इसके चारों ओर चक्कर लगाता हुआ दिख रहा है। उसका व्यास 530 फीट (160 मीटर) का है। खास बात यह है कि इन दोनों से ही पृथ्वी को कोई खतरा नहीं था। इस बात की पुष्टि इस मिशन में स्पेस एजेंसी की वन वे ट्रिप ने की है। उनके अनुसार, एस्टेरॉयड का रास्ता बदलने के लिए उससे स्पेसक्राफ्ट को टकराया जा सकता है। इस तकनीक को ‘कायनेटिक इम्पैक्ट’ कहा जाता है।

बता दें कि इस मिशन को अंजाम देने से पहले स्पेसक्राफ्ट करीब 10 महीने स्पेस में रहा। इस मिशन में टकराव का असर देखने के लिए जेम्स वेब स्पेस और हबल समेत कई टेलीस्कोप और कैमरा स्पेसक्रॉफ्ट को ट्रैक कर रहे थे। NASA के अनुसार, प्लैनेटरी डिफेंस स्ट्रेटेजी के हिस्से के रूप में एस्टेरॉयड डाइमॉरफोस के साथ DART का प्रभाव पृथ्वी की ओर आ रहे डाइमॉरफोस से गृह को सुरक्षित करने की तकनीक को दिखाता है।