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जयपुर के मंदिर में गेट का ताला तोड़ घुसे तीन नकाबपोश: 40 किलो की दो दान पेटियाँ चोरी, भीतर ₹80 हजार होने का दावा

राजस्थान में मंदिरों पर हमले और मूर्तियों के साथ तोड़-फोड़ की घटनाएँ बढ़ती ही जा रही हैं। राजधानी जयपुर में शुक्रवार (30 सितंबर 2022) को चोरों ने जैन मंदिर का गेट तोड़कर चोरी की घटना को अंजाम दे दिया। चोर मंदिर की दान पेटियाँ उठाकर फरार हो गए।

सीसीटीवी फुटेज की जाँच से पता चला कि चोरों ने नकाब पहन रखी है। इससे उनकी पहचान में समय लग रहा है। सांगानेर थाना क्षेत्र में स्थित जैन मंदिर में शनिवार (1 अक्टूबर 2022) को पुजारी जब पहुँचे तो देखा कि मंदिर के चैनल और एल्युमिनियम वाले गेट पर लगा ताला टूटा हुआ है। अंदर जाने पर पता चला कि मंदिर में रखी दो दान पेटियाँ चोरी हो गई हैं।

घटना की शिकायत माथुर वैश्व नगर सांगानेर निवासी दिनेश जैन ने दर्ज करवाई है। कल्याण नगर के शांति विहार में स्थित इस मंदिर में रात को करीब 2:30 बजे चोरी की घटना को अंजाम दिया गया। सीसीटीवी फुटेज में मंदिर की रेकी करने के बाद तीन नकाबपोश दीवार कूदकर अंदर घुसते दिख रहे हैं।

अंदर घुसने के बाद मंदिर में नकाबपोशों ने खोजबीन की और उसके बाद दो दान पेटियाँ उठा ले गए। बदमाशों ने पहले छोटी दान पेटी ले गए, जिसका वजन लगभग 15 किलोग्राम बताया जा रहा है। वहीं, एक घंटे बाद लौटकर तीनों बदमाश वापस आए और 25 किलोग्राम वाली बड़ी दान पेटी को भी उठा ले गए।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर प्रशासन ने बताया कि दोनों दान पेटियों में लगभग 80,000 रुपए होंगे। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद घटनास्थल का दौरा किया और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

नीतीश मंत्रिमंडल का दूसरा विकेट गिरा, कानून मंत्री के बाद कृषि मंत्री का भी इस्तीफा: खुद को बताया था ‘चोरों का सरदार’, पिता हैं RJD के प्रदेश अध्यक्ष

बिहार के कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह के इस्तीफे के बाद अब कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने भी रविवार (2 अक्टूबर, 2022) को कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। सुधाकर सिंह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और चारा घोटाले के दोषी लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से विधायक हैं। बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) और राजद के बीच गठबंधन सरकार बनने के बाद उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया था।

इससे पहले शनिवार (1 अक्टूबर, 2022) को सुधारकर सिंह ने एक बयान में कहा था कि वह अपने विभाग में भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे के हिसाब से काम नहीं होने देंगे। दरअसल, सुधाकर सिंह बिहार में कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम और ‘मंडी’ प्रणाली को बहाल करने की अपनी माँग की ओर इशारा कर रहे थे।

सुधाकर सिंह ने कहा था, “राज्य के कृषि मंत्री होने के नाते, मैं राज्य में ‘महागठबंधन’ सरकार के गठन के बाद कृषि विभाग में भाजपा के एजेंडे को जारी रखने की अनुमति नहीं दूँगा।” एपीएमसी अधिनियम और 2006 में समाप्त हुई मंडी प्रणाली के बारे में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा था, “एपीएमसी अधिनियम और 2006 में ‘मंडी’ को खत्म करना किसान विरोधी निर्णय था। राज्य में ‘महागठबंधन’ सरकार को हमारे गठबंधन सहयोगियों द्वारा मतदाताओं से किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए।”

उन्होंने बिहार के कृषि विभाग में भ्रष्टाचार पर बोलते हुए कहा था, “मेरे विभाग के सभी अधिकारी चोर हैं और इस तरह विभाग के प्रमुख होने के नाते, मैं चोरों का मुखिया हूँ।” उन्होंने आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि बिहार सूखे का सामना कर रहा है और धान के खेत सूखे हैं। उन्होंने बताया था कि उनके विभाग द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट से पता चला है कि 86 फीसदी खेतों में धान का रोपड़ किया गया है, यह आँकड़ा वास्तविक नहीं लग रहा है इसलिए इस मुद्दे को उठाया है।

सुधाकर सिंह ने यह भी कहा था, “हमारे (कृषि) विभाग का एक भी विंग ऐसा नहीं है जहाँ भ्रष्टाचार नहीं हो। सरकार बदल गई है, लेकिन काम करने का तरीका वही है। सब कुछ पहले जैसा ही है।”

गौरतलब है कि गत महीने एक मीटिंग के दौरान सुधाकर सिंह द्वारा शिकायत किए जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कथित तौर पर मीटिंग छोड़कर चले गए थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि सुधाकर सिंह मुख्यमंत्री द्वारा किए गए इस तरह के बर्ताव से भी नाराज रहे हों। ये भी जानने लायक बात है कि सुधाकर सिंह राजद के प्रदेश अध्यक्ष और लालू परिवार के विश्वस्त वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह के बेटे हैं। तेज प्रताप यादव को जगदानंद सिंह से खासी समस्या रहती है, जिसे वो कई बार सार्वजनिक भी कर चुके हैं।

राज्य के कृषि मंत्री पद से सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद राजनीति तेज हो गई है। इस इस्तीफे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल ने मीडिया से कहा है, “जो नीतीश कुमार की गुलामी नहीं करेगा, उसे ये हटा देंगे। पूरी घटना के पीछे मुख्य कारण यह है कि गरीब लोगों को यूरिया नहीं मिली। अगस्त में हाहाकार मचा था। गरीबों को यूरिया मिलने में काफी दिक्कतें आई थीं। कृषि मंत्री ने इसी बात को बोल दिया था कि लूट मची हुई है। नीतीश को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया है कि कोई अफसरशाही के खिलाफ बोले। यही हुआ, ऐसे में वह टिप्पणी बर्दाश्त न कर सके और हटा दिया।”

बता दें, सुधाकर सिंह का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब वह चावल घोटाले के आरोपों से घिरे हुए हैं। साथ ही, यह भी जानना जरूरी है कि बिहार कैबिनेट से यह दूसरा इस्तीफा है। इससे पहले राज्य के कानून मंत्री कार्तिकेय कुमार ने भी इस्तीफा दे दिया था। कुल मिलाकर देखें तो बिहार में महागठबंधन सरकार बने दो महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और अब तक दो मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि भले ही नीतीश या लालू कुछ भी दावे करें लेकिन सूबे की राजनीति में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

‘तुम्हारी जगह मेरे बिस्तर पर है, आओ मेरे बच्चे पैदा करो’ : मदरसे में खाना बनाने वाले नूरदीन ने स्कूली छात्राओं के सामने उतारे कपड़े, रेप और कत्ल की धमकी दी

राजस्थान के भिवाड़ी में एक व्यक्ति पर स्कूली छात्राओं के आगे कपड़े उतार कर खड़े होने का आरोप है। आरोपित का नाम नूरदीन है जो मदरसे में खाना बनाने का काम करता है। नूरदीन पर आरोप है कि उसने दलित बालिकाओं को रेप करने और कत्ल करने की धमकी दी थी। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक घटना राजस्थान के भिवाड़ी जिले में पड़ने वाले थानाक्षेत्र शेखपुर के गाँव खिदरपुर की है और पीड़ित छात्राएँ गाँव गूंतोली की रहने वाली हैं। घटना के दौरान छात्राएँ स्कूल से वापस लौट रही थीं। इसी दौरान आरोपित उनके आगे कर उनसे संबंध बनाने के लिए कहने लगा। जब छात्राओं ने इसके लिए मना किया तब नूरदीन उन्हें कत्ल करने की धमकी देने लगा।

बताया जा रहा है कि उसने छात्राओं से कहा, “तुम्हारी जगह मेरे बिस्तर पर है, आओ मेरे बच्चे पैदा करो।” कुछ ही देर बाद उसने लड़कियों के आगे कपड़े उतार दिए और छेड़छाड़ करने लगा। जैसे तैसे बच कर छात्राएँ डरी-सहमी अपने घर पहुँची। वहाँ उन्होंने अपने परिवार में सारी बातें बताईं। परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस ने की तब पुलिस ने SC/ST एक्ट और पॉक्सो के तहत केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी।

घटना के बाद लड़कियाँ डरी सहमी रहने लगी और उन्होंने स्कूल जाने से इंकार कर दिया। बाद में शनिवार को वही छात्राएँ अपने परिजनों के साथ शनिवार को फिर से स्कूल गईं। इसी दौरान उन छात्राओं ने मदरसे में मौजूद आरोपित को पहचान लिया।

आरोप है कि जब लड़की के परिजन और ग्रामीण आरोपित नूरदीन के पास शिकायत ले कर गए तो उसने ग्रामीणों से भी झगड़ा करना शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच सक्षम अधिकारी कर रहे हैं और जरूरी कार्रवाई की जा रही है। मामले की जाँच तिजारा डीएसपी प्रेम बहादुर कर रहे हैं। अभी तक आरोपित पकड़ा नहीं गया है। आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

गरबा के दौरान मुस्लिम टीचर ने DJ बंद कर लगाया ताजिया का मजहबी शोक: बच्चों का छाती पीटते Video सामने आया, गुजरात में PFI कनेक्शन का संदेह

गुजरात (Gujarat) के एक स्कूल में नवरात्रि के दौरान एक आयोजित फंक्शन में बच्चों से गरबा कराने के बजाए उनसे ताजिया प्ले कराया गया। स्कूल के मुस्लिम शिक्षक ने गरबा की जगह ताजिया प्ले के लिए बच्चों पर दबाव डाला। इस घटना को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामला गुजरात के खेड़ा जिले का है। जिले के नाडियाद के हथाज गाँव स्थित प्ले सेंटर स्कूल में यह घटना को अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि नवरात्रि के उत्सव को लेकर 30 सितंबर 2022 को स्कूल में गरबा का आयोजन किया गया था। इस दौरान मुस्लिम टीचर की यह करतूत सामने आई।

स्कूल ने गरबा आयोजन में सभी बच्चों को स्कूल आने के लिए कहा था। हालाँकि, जब आयोजन किया गया तो गरबा वाली संगीत की जगह ताजिया का संगीत बजाया गया। इस दौरान बच्चों को विधर्मी नामों वाली टी-शर्ट पहने हुए ताजिया का प्रदर्शन करते देखा गया।

इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि गरबा करने के बजाय स्कूल के पुरुष और महिला छात्रों को मुहर्रम के जुलूस के दौरान शोक के हिस्से के रूप में दोनों हाथों से अपनी छाती पीटते हुए देखा जा सकता है।

इस बात की जानकारी जब ग्रामीणों को मिली तो वे भड़क उठे। उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर दोषियों को सजा दिलाने की माँग की है। हिंदू धर्म सेना के अध्यक्ष खेड़ा ने कहा, “हमने एक ज्ञापन सौंपा है। कल नदियाड के हथाज गाँव के एक प्राथमिक विद्यालय में एक दिवसीय गरबा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। छात्र गरबा कर रहे थे और डीजे सिस्टम चल रहा था। इसी बीच गरबा थम गया।”

खेड़ा ने आगे कहा, “स्कूल के शिक्षकों में मुस्लिम शिक्षक हैं और हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि उन्होंने अचानक गरबा बंद कर दिया और मजहबी पाठ करने लगे। उन्होंने छात्रों को धार्मिक प्रतीकों वाली टी-शर्ट भी पनने के लिए दी थी।”

इस घटना के पीछे हाल ही में प्रतिबंधित किए गए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हाथ बताया जा रहा है। स्कूल में ऐसे करने के पीछे क्या उद्देश्य है और यह योजना क्यों बनाई गई और किसके अनुरोध पर अनुरोध किया गया, इसकी जाँच की जा रही है।

बता दें कि ताजिया अरबी शब्द अज़ा से बना है, जिसका अर्थ है मृतक को याद करना। यह आमतौर पर शिया मुसलमानों द्वारा किया जाता है, जहाँ वे कर्बला की लड़ाई में पैगंबर मुहम्मद के पोते हुसैन की मौत को फिर से याद करते हैं। मुहर्रम में ताजिया के जुलूस में ले जाने पर अलग-अलग गाने बजाए जाते हैं और इस्लामिक धार्मिक नारे लगाए जाते हैं।

‘OTP दे दो वरना अकॉउंट बंद हो जाएगा’ : KYC फ्रॉड का बॉलीवुड अभिनेता अनु कपूर भी हो गए शिकार, 1 गलती की वजह से ₹4.36 लाख की चपत लगी

बॉलीवुड अभिनेता अनु कपूर (Annu Kapoor) ऑन लाइन फ्रॉड का शिकार हुए हैं। फ्रॉड कॉल करने वाले ने उन्हें केवाईसी (KYC) अपडेट करने के लिए कहा था। इसके बाद उसने, अनु कपूर से उनकी बैंक डिटेल्स व ओटीपी माँगा और कुछ ही देर में उनके अकॉउंट से 4.36 लाख रुपए निकाल लिए गए। हालाँकि, खबर होने पर अभिनेता ने धोखाधड़ी के बारे में पुलिस को समय से सूचित किया तो उन्हें कुछ पैसे वापस भी मिल गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (29 सितंबर 2022) को, अनु कपूर शूटिंग के लिए जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें एक फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम कृष्णकुमार रेड्डी और खुद को एक प्राइवेट बैंक के हेड ऑफिस का कर्मचारी बताया। इस पर, अनु कपूर ने उस फ्रॉड को एकाउंटेंट से बात करने के लिए कहा। लेकिन फ्रॉड ने कहा कि यह प्रक्रिया केवाईसी (KYC) से संबंधित है इसलिए वह उनसे ही बात करेगा।

फ्रॉड ने यह भी कहा था कि यदि केवाईसी पूरी नहीं होती है तो उनका अकाउंट निष्क्रिय कर दिया जाएगा। जिस पर अनु ने अपना बैंक अकाउंट नंबर और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) फ्रॉड को बता दिया। इसके 10 मिनट बाद ही अनु को उनके बैंक से कॉल आया और बताया गया कि उनके खाते से छेड़छाड़ की गई है। अनु कपूर ने फौरन अपने अकॉउंट को फ्रीज करवाया और अकॉउंट से जुड़े फोन नंबर को भी बदलवाया।

अनु कपूर ने कस्टमर केयर से बात की तो पता चला कि अकाउंट एक्सेस ब्लॉक होने से पहले दो किस्तों में उनके अकाउंट से 4.36 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। जानकारी होने पर, अनु ने आनन-फानन में स्थानीय ओशिवारा पुलिस स्टेशन में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई।

ओशिवारा पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर दिगंबर कुरकुटे ने कहा है, “ठग ने 4.36 लाख रुपए अनु कपूर के अकाउंट से निकालकर दो अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए थे। हालाँकि बैंक ने उनसे तुरंत संपर्क किया और इस ट्रांजैक्शन की जानकारी दी, साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि उनके अकाउंट से छेड़छाड़ की गई है।”

फिलहाल पुलिस और बैंक की तत्परता के चलते अनु कपूर के खाते से निकाले गए 4.36 हजार में से 3.8 लाख रुपए वापस मिल गए हैं। जबकि शेष अन्य की रिकवरी करने में बैंक जुटा हुआ है। इस घटना के बाद अनु कपूर ने पुलिस अधिकारियों के साथ ट्विटर पर एक फोटो शेयर की। साथ ही ट्वीट कर कहा, “मैं मुंबई पुलिस की ओशिवारा साइबर क्राइम विंग को मेरे बैंक खाते में धोखाधड़ी के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूँ और प्रशंसा व्यक्त करता हूँ।”

‘कोर्ट ब्लास्ट करने जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो’: ज्ञानवापी के शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर सुनवाई से पहले CM ऑफिस में धमकी, 1 हिरासत में

उत्तर प्रदेश पुलिस ने वाराणसी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह धमकी लखनऊ के पाँच कालिदास मार्ग पर मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद एक ड्यूटी स्टाफ को फोन पर दी गई थी। इसी धमकी का दूसरा कॉल वाराणसी के SP देहात को आया था। जाँच में पता चला कि यह फोन वाराणसी के फुलवरिया से किया गया था। धमकी शुक्रवार (30 सितम्बर 2022) को आई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमकी के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से वाराणसी पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने धमकी को गंभीरता से लेते फ़ौरन ही धमकी देने वाले की तलाश शुरू कर दी। पड़ताल के बाद पुलिस ने एक सब्ज़ी विक्रेता को हिरासत में लिया गया। सब्ज़ी विक्रेता का कहना है कि किसी ने उनका फोन चुरा कर ये हरकत की है। फ़िलहाल पुलिस सब्ज़ी विक्रेता से पूछताछ कर रही है।

टाइम्स नाऊ के पत्रकार के अनुसार, फोन कॉल पर कहा गया था कोर्ट ब्लास्ट करने जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो।

मालूम हो कि यह धमकी वाराणसी कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर फैसले से पहले दी गई है। गौरतलब है कि 29 सिंतबर 2022 को ज्ञानवापी-माँ श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई के दौरान शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने का मुद्दा उठाया गया था। हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग नुमा आकृति वाला पत्थर कब का है? इसे जानने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जाँच और वैज्ञानिक जाँच की माँग की है। हिन्दू पक्ष की इस माँग पर न्यायालय ने अगली तारीख 7 अक्टूबर तय की थी।

महाराष्ट्र: ठाकरे गुट का 3000+ शिवसैनिकों ने छोड़ा हाथ, सब एकनाथ शिंदे के साथ आए

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) आजकल मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनकी पार्टी शिवसेना (Shiv Sena) के दो टुकड़े होने के बाद अब नेता के साथ-साथ कार्यकर्ता भी एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं। वर्ली, मुंबई के 3000 से अधिक शिवसेना के कार्यकर्ता रविवार (2 अक्टूबर 2022) को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए।

यह ठाकरे परिवार के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि जहाँ के लोगों ने पार्टी छोड़कर शिंदे गुट को ज्वॉइन किया है, वह क्षेत्र आदित्य ठाकरे का है। उद्धव ठाकरे के बेटे और पूर्व सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे मुंबई के वर्ली विधानसभा क्षेत्र से ही विधायक हैं।

पार्टी सदस्यों के एक-एक करके साथ छोड़ते जाने के बाद शिवसेना पर उद्धव ठाकरे की पकड़ और दावा, दोनों कमजोर होता जा रहा है। बता दें कि एकनाथ शिंदे गुट कहता रहा है कि असली शिवसेना उनकी गुट है। वहीं, उद्धव ठाकरे अपने गुट को लेकर ऐसा दावा करते हैं।

इससे पहले 27 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एकनाथ शिंदे समूह के असली शिवसेना होने के दावे पर फैसला लेने से रोकने से इनकार कर दिया था। दिन भर की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने ठाकरे गुट की ओर से दायर अर्जी को खारिज कर दिया था।

जस्टिस एम.आर. शाह, कृष्णा मुरारी, हिमा कोहली और पी.एस. नरसिम्हा वाली बेंच ने कहा कि पार्टी के भीतर विवाद और पार्टी के ‘धनुष और तीर’ पर चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी। कोर्ट ने कहा था, “हम निर्देश देते हैं कि भारत के चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी।”

बता दें कि जून में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार से विधायक एकनाथ शिंदे शिवसेना के 39 अन्य बागी विधायकों के साथ अलग हो गए थे। वे NCP और कॉन्ग्रेस के साथ शिवसेना के गठबंधन के खिलाफ थे।

एकनाथ शिंदे और उनके साथ विधायकों बागी रवैए के बाद राज्य की उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई है।

उसके बाद से ही ठाकरे और शिंदे गुट शिवसेना पर अपना दावा कर रहे हैं। शिंदे का कहना है कि उनका गुट ही असली शिवसेना है। मामला कोर्ट तक पहुँच गया है कि पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली की मेजबानी कौन करेगा। दोनों गुटों ने रैली आयोजित करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को अलग-अलग पत्र दिया था।

इसके बाद बृहन्मुंबई नगर निगम ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए दोनों गुटों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ठाकरे गुट बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँच गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट को 2 अक्टूबर से 6 अक्टूबर के बीच रैली करने की अनुमति दी है।

पंजाब: सिद्धू मूसेवाला मर्डर में गिरफ्तार मुख्य गैंगस्टर पुलिस हिरासत से चौथी बार फरार, हड़कंप मचा

पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्‍या के मामले में गिरफ्तार आरोपित दीपक टीनू के फरार होने की खबर सामने आई है। सिद्धू मूसेवाला को गोली मारने वाला शूटर दीपक टीनू पंजाब पुलिस की हिरासत से फरार हुआ है। जिसके बाद से पंजाब पुलिस में हड़कंप मच हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शूटर दीपक टीनू गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का करीबी गुर्गा है। उसका नाम उस चार्जशीट में भी था जिसमें मूसेवाला की हत्या में शामिल 15 शूटर, मास्टरमाइंड और अन्य का नाम शामिल थे। दीपक टीनू उस वक्त फरार हुआ है जब मानसा का सीआईए स्टाफ उसे रात के करीब 11 बजे अपने निजी वाहन से कपूरथला जेल से मानसा लेकर जा रहा था।

बता दें, दीपक टीनू को दिल्ली पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर पंजाब लेकर आई थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है जब वह पुलिस की गिरफ्त से फरार हुआ हो। अब तक वह कुल 4 बार पुलिस के हाथ लगने के बाद फरार हो चुका है। इससे पहले दीपक साल 2017 में अंबाला सेंट्रल जेल में सलाखों के पीछे था। तब, वह एक पुलिस अधिकारी की आँखों में काली मिर्च का स्प्रे कर फरार हो गया था।

दीपक टीनू के फरार होने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। मसलन, सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपित को क्या बिना किसी सुरक्षा के लिए ले जाया जा रहा था, यदि हाँ, तो क्यों? यदि सुरक्षा थी तो पुलिस क्या कर रही थी वह फरार कैसे हुआ? साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसे निजी वाहन से क्यों ले जाया जा रहा था?

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मानसा पुलिस ने दीपक टीनू के फरार होने की पुष्टि की है। मानसा पुलिस ने बताया है कि आज सुबह गैंगस्‍टर लॉरेंस विश्नोई के करीबी दीपक टीनू को सीआइए स्‍टाफ द्वारा निजी वाहन से कपूरथला जेल से रिमांड पर मानसा लाया जा रहा था। इसी दौरान दीपक टीनू फरार हो गया। सिद्धू मूसेवाला हत्‍याकांड से उसके कनेक्‍शन के बारे में जाँच हो रही थी।

बता दें, सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को पंजाब के मानसा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में मूसेवाला के साथ कार में बैठा हुआ एक दोस्त और चचेरा भाई भी घायल हुआ था।

‘मार दिया है, लाश उठा लो’ : दिल्ली में सरेआम फैजान, बिलाल और आलम ने मनीष को 60 बार चाकू घोंपा, लोग देखते रहे; CCTV में पूरी वारदात कैद

देश की राजधानी दिल्ली में मनीष नाम के एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई है। इस हत्या का आरोप फैजान, बिलाल और आलम नाम के युवकों पर लगा है। बताया जा रहा है कि पुराने केस को वापस न लेने के चलते इस घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फ़ैल गया है। मामला शनिवार (1 अक्टूबर 2022) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दिल्ली नार्थ ईस्ट इलाके के सुंदर नगरी की है। यहाँ 25 साल के मनीष की हत्या चाकुओं से गोद कर हुई है। मनीष पर चाकुओं के 60 वार किए गए हैं। आरोपित और मृतक एक ही क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। मनीष के परिजनों के अनुसार 1 साल पहले मनीष का मोबाईल छीन कर उसकी गर्दन और पेट पर चाकुओं से हमला किया गया था। इस घटना की मनीष ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी जिसके बाद कासिम और मोहसिन को गिरफ्तार किया गया था।

घटना के बाद जेल में बंद कासिम और मोहसिन मनीष और उनके घर वालों पर केस वापसी का दबाव बना रहे थे। इस दौरान मनीष के परिजनों को धमकियाँ भी दी जा रही थीं। ऐसी जानकारी है कि मनीष ने इन धमकियों की शिकायत कोर्ट में की थी। साथ ही धमकियों से डरे बिना 28 सितम्बर 2022 को आरोपितों के विरुद्ध गवाही दी थी।

गवाही देने के ठीक 3 दिन बाद कथिततौर पर इसी बात से नाराज हो कर मनीष की हत्या कर दी गई। हत्या का फुटेज CCTV में दर्ज हो गया। इस फुटेज में दिख रहे हमलावर फैज़ान, बिलाल और आलम बताए जा रहे हैं। घटना के समय आस-पास लोग भी मौजूद दिख रहे हैं जिसमें से किसी ने भी मनीष को बचाने की हिम्मत नहीं की। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद आरोपितों ने कहा, “मार दिया है, लाश उठा लो।” पुलिस का कहना है कि मनीष को पहले धमकी देने वाले अन्य आरोपितों की भी तलाश की जा रही है।

‘हेलो की जगह अब से बोलें वंदे मातरम’: महाराष्ट्र में शिंदे सरकार ने जारी किया सर्कुलर, सरकारी अधिकारियों और स्कूल-कॉलेजों पर लागू होगा

महाराष्ट्र (Maharashtra) की एकनाथ शिंदे की सरकार (Eknath Shinde Government) ने राज्य में ‘हेलो’ की जगह कर्मचारियों को ‘वंदे मातरम’ कहने का सरकारी संकल्प (Government Resolution) जारी किया है। इससे पहले अगस्त में राज्य के संस्कृति मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने सरकारी कर्मचारियों को फोन कॉल पर ‘हेलो’ के बजाय ‘वंदे मातरम’ बोलने के लिए कहा था।

सरकार के इस आदेश के बाद अब सरकारी कर्मचारी और अधिकारी मोबाइल या लैंड लाइन पर फोन करते या रिसीव करते वक्त सामने वाले व्यक्ति को हेलो की जगह वंदे मातरम से संबोधित करेंगे। इसके साथ ही मिलने वालों भी इसी शब्द से संबोधन करेंगे।

इससे संबंधित सर्कुलर महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी किया गया है। सर्कुलर का यह आदेश सरकारी, अर्ध-सरकारी, स्थानीय नागरिक निकायों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।

राज्य सरकार के जीआर में कहा गया है कि अधिकारी मिलने आने वाले लोगों से भी वंदे मातरम कहकर अभिवादन करेंगे। इसके लिए जागरूकता पैदा करने की भी बात कही गई है। जीआर में ‘हेलो’ को पश्चिमी संस्कृति की नकल बताया गया है और कहा गया है कि यह ‘बिना किसी विशिष्ट अर्थ का अभिवादन है और इससे कोई स्नेह नहीं दिखता।’

सर्कुलर में आगे कहा गया है, “भारतीय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। उसी को चिह्नित करने के लिए माननीय मंत्री (सांस्कृतिक मामलों) ने सभी से आगंतुकों या साथी अधिकारियों के साथ बैठक शुरू करने की अपील की है और सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों को ‘हेलो’ के बजाय ‘वंदे मातरम’ की बधाई दी जाती है।”

बता दें राज्य में उद्धव ठाकरे की सरकार बदलने के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे की सरकार बनी थी। इस सरकार के शपथ ग्रहण के बाद महाराष्ट्र के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने यह प्रस्ताव पेश किया था। हालाँकि बाद में उन्होंने कहा था कि इसकी जगह पर राष्ट्रवाद को दर्शाने वाले किसी भी शब्द का प्रयोग किया जा सकता है।

सरकार के इस आदेश का समाजवादी पार्टी और AIMIM ने निंदा की है। सपा ने कहा कि यह भाजपा द्वारा लोगों को विभाजित करने का एक और प्रयास है। सपा ने सीएम एकनाथ शिंदे पर भाजपा के दबाव में आने का आरोप लगाया गया है। सपा नेता अबू आज़मी ने कहा कि दिवंगत बालासाहेब ठाकरे फोन पर जवाब देते समय हमेशा ‘जय महाराष्ट्र’ कहते थे, न कि ‘वंदे मातरम’।

वहीं, AIMIM के नेता वारिस पठान ने कहा, “बीजेपी के पास मुद्दे नहीं बचे हैं। वे कभी शहर के नाम बदलने की बात करते हैं तो कभी कुछ। इनसे महंगाई, बेरोजगारी पर सवाल पूछ दो तो चीते से भी तेज भाग जाते है। वंदे मातरम बोल दिया तो क्या बेरोजगारी कम हो जाएगी, महंगाई कम हो जाएगी। इनका काम ध्यान भटकाना है।”