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‘यादव सिर्फ 7%, हम 25%’: मुस्लिम को बनाएँ सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिलेश से बरेलवी उलेमा ने माँगी कुर्बानी

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से समाजवादी पार्टी (SP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी मुस्लिम को बनाने की माँग की गई है। यह माँग बरेलवी उलेमा मौलाना शहाबुद्दीन ने की है। वे ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

मौलाना ने कहा है कि यदि अखिलेश यादव ऐसा नहीं करते हैं तो मुस्लिमों के पास भी विकल्प खुले हैं। उन्होंने सपा के मुस्लिम प्रेम को महज दिखावा करार दिया है। ये बातें उन्होंने मंगलवार (27 सितंबर 2022) को कही।

मौलाना शहाबुद्दीन ने अपने वीडियो संदेश की शुरुआत में 28-29 सितंबर 2022 को लखनऊ में होने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन का जिक्र किया है। कहा है कि इस सम्मेलन में सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष तय होना है। मौलाना शहाबुद्दीन के अनुसार ये लगभग पहले से तय है कि अखिलेश यादव ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे।

अपने वीडियो में मौलाना शहाबुद्दीन ने आगे कहा है कि इस बार समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी मुस्लिम को बनाया जाना चाहिए, क्योंकि मुस्लिमों ने मुलायम और अखिलेश दोनों को मुख्यमंत्री बनाया। उन्होंने कहा कि पहले जो सपा पहले थी अब वो नहीं है। अब सपा बिखर चुकी है। अखिलेश यादव मुस्लिमों के मुद्दों को नजरअंदाज करते हैं।

मौलाना ने कहा है कि अखिलेश यादव की बिरादरी के लोग पूरे उत्तर प्रदेश में महज 7% हैं। राज्य में मुस्लिमों की तादाद 22 से 25% है। ये मुस्लिमों का हक है कि इस बार समाजवादी पार्टी के तमाम बड़े ओहदे वही तय करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद मुस्लिमों को देने की कुर्बानी अखिलेश यादव को देनी पड़ेगी। अखिलेश यादव ये कुर्बानी नहीं दे सकते तो आने वाले चुनावों में मुस्लिमों के पास दूसरे विकल्प मौजूद हैं।

‘मेरी जिंस टाइट थी… महसा की तरह मैं भी मार दी गई होती’: बॉलीवुड अभिनेत्री ने बताई ईरान की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी, प्रदर्शनकारियों पर चल रहीं गोलियाँ

ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन के बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी ने खुलासा किया है कि जो महसा अमीनी के साथ हुआ है, वही एक दिन उनके साथ होने वाला था। दरअसल, ईरान में इन दिनों हिजाब विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब नहीं पहनने के कारण महसा अमीनी नाम की लड़की का पुलिस की पिटाई से हुई मौत के बाद हुई। इस विरोध प्रदर्शन में अब तक 75 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हालाँकि, इसके बाद भी यह प्रदर्शन नहीं रुक रहा है जिस कारण हर रोज पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत की खबरें सामने आ रही हैं।

दरअसल, बॉलीवुड एक्ट्रेस एलनाज नौरोजी मूल रूप से ईरान की रहने वाली हैं उनका पूरा परिवार भी ईरान में ही रहता है। वह ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शन को लेकर बेहद परेशान हैं। इस बारे में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने बताया है कि ईरान में छोटी-छोटी बातों को लेकर लोगों के साथ बुरी तरह व्यवहार किया जाता है। यदि वजह थोड़ी सी भी बड़ी हुई तो उन्हें पीटा भी जाता है।

इस वीडियो में एलनाज नौरोजी ने अपने साथ हुए एक हादसे के बारे में बात करते हुए कहा है, “महसा अमिनी के साथ जो हुआ वह मेरे साथ भी हो सकता था। कुछ साल पहले जब मैं ईरान के तेहरान में थी, तब मैं अपने कजिन ब्रदर के साथ बाहर घूम रही थी। इस दौरान, अचानक ही एक महिला मेरे सामने आ गई और मुझसे पूछने लगी कि ये क्या है? उसके सवाल से मुझे समझ नहीं आया था कि वो किस बारे में सवाल कर रही है। लेकिन, उसने मुझसे फिर पूछा- ये क्या है?”

उन्होंने आगे बताया है कि ईरान की मोरल पुलिस गश्त-ए-इरशाद ने उन्हें सिर्फ इसलिए पकड़ा था, क्योंकि उनकी जीन्स टाइट थी। उन्होंने बताया, “जीन्स टाइट होने की वजह से मेरे टखने नजर आ रहे थे। बस इतनी सी बात के कारण मुझे वैन में बैठाकर ‘री-एजुकेशन’ सेंटर ले जाया गया था। ये वही जगह है, जहाँ महसा अमिनी को ले जाया गया था। मैं वहाँ काफी देर तक बैठी रही। मुझे वहाँ तब तक उस जगह पर रखा गया, जब तक मेरे लिए ढीले-ढाले कपड़े नहीं आ गए थे।”

एलनाज नौरोजी ने ईरान के हालात पर बात करते हए आगे बताया है, “जब मुझे ‘री एजुकेशन सेंटर’ ले जाया गया था तब मुझसे मेरा फोन और पासपोर्ट छीन लिया गया था। वहाँ मुझे जिस तरह से डराया गया और बर्ताव किया गया, मैं तो क्या उससे कोई भी ईरान में रहना पसंद नहीं करेगा। ईरान में किसी को कभी भी उठाकर ले जाते हैं। वहाँ की मोरल पुलिस महिलाओं के नेल के कलर (नाखून के रंग), कपड़े, हिजाब किसी भी चीज के लिए पकड़कर ले जाती है।”

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी महिला के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए। ईरान में पुलिस महिलाओं की तस्वीरें और डिटेल्स लेती हैं। किसी को भी यह पता नहीं होता है कि वो लोग किस चीज के लिए किसे पकड़कर ले जाएँगे। जिन महिलाओं या लड़कियों को वो लोग उठाकर ले जाते हैं ऐसा बहुत कम बार होता है कि वह वापस आए।

बता दें, इससे पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस मंदाना करीमी ने भी एक वीडियो शेयर करते हुए ईरान के हालात के बारे में बताया था। वीडियो में उन्होंने इमोशनल होते हुए कहा था कि अगर वह ईरान में होती तो शायद मार दी गई होतीं। उन्होंने इस वीडियो के कैप्शन में लिखा था, “मेरा नाम मंदाना है। मैं ईरान से हूँ और मुंबई में रहती हूँ। मेरी माँ और दो भाई ईरान के तेहरान में हैं। ईरान प्रोटेस्ट के कारण सरकार ने इंटरनेट और संचार सेवाओं को बंद कर दिया है। ईरान के लोग खास करके महिलाएँ बस अपनी आजादी और जीने की माँग कर रही हैं। लेकिन उन्हें मार दिया जाता है, गिरफ्तार किया जाता है और सजा दी जाती है। हमें अपनी आवाज बनने के लिए दुनिया की जरूरत है, जो आवाज़ छीन ली गई है।”

गौरतलब है कि ईरान में हिजाब विरोध प्रदर्शन और तेज होते जा रहे हैं। यहाँ महिलाएँ बाल खोलकर बिना हिजाब के पुलिस के सामने प्रदर्शन कर रही हैं। यही नहीं, प्रदर्शनकारी महिलाएँ व लड़कियाँ अपने बाल काटकर व हिजाब जलाकर भी विरोध कर रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं को पुरुषों का भी साथ मिल रहा है। सोमवार (26 सितंबर 2022) को भी ऐसा ही प्रदर्शन देखने को मिला है।

प्रदर्शन कर रही भीड़ ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुई दिखाई दी। यह भीड़ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को तानाशाह बताते हुए नारेबाजी कर रही थी। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालाँकि, बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बीच ईरान की तानाशाह सरकार ने सानंदाज और सरदाश्त के कुर्द शहरों में प्रदर्शनकारियों पर एक बार फिर गोलियाँ चलवाई हैं। इस गोलीबारी में कुछ लोगों के घायल होने की खबर है। ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन में अब तक 75 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

दिल्ली सरकार के शराब घोटाले में CBI ने की पहली गिरफ्तारी: 2020 के विधानसभा चुनावों में AAP कार्यकर्ता रहे AIB के विजय नायर गिरफ्तार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) की नेतृत्व वाली दिल्ली के आम आदमी पार्टी की सरकार (Delhi Aam Aadami Party Government) द्वारा अंजाम दिए गए शराब घोटाले (Liquor Scam) में मंगलवार (27 सितंबर 2022) को पहली गिरफ्तारी हुई। राष्ट्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने विजय नायर को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई ने शराब घोटाले में जो प्राथमिकी दर्ज की है, उसमें दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के अलावा विजय नायर का भी नाम है। इस FIR में कुल 14 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी ने बताया है कि विजय नायर अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जो राजनेता, नौकरशाह या शराब व्यापारी नहीं हैं। हालाँकि, दिल्ली सरकार की नई शराब नीति के बनाने और उसके क्रियान्वयन में सीबीआई ने नायर की सक्रिय भूमिका बताई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नायर ने साल 2020 के दिल्ली राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान लिए AAP के लिए काम किया था। इस दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों को आयोजित करने और उसके सोशल मीडिया हैंडल को मैनेज करने में मदद की थी।

कौन है विजय नायर

विजय नायर ‘ऑनली मच लाउडर’ के पूर्व CEO हैं। ऑनली मच लाउडर कंपनी महाराष्ट्र के मुंबई में पंजीकृत एक एंटरटेनमेंट ऐंड इवेंट मैनेजमेंट कंपनी है। शराब घोटाले में इसका भी नाम सामने आया है।

विवादास्पद YouTube शो ‘ऑल इंडिया बकचोद (AIB)’ के पीछे विजय नायर का हाथ माना जाता है। गाली-गलौच से भरे इस शो के आते ही बवाल हो गया। लोगों ने इसकी जरूरत के नाम पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

विजय नायर के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 15 साल की उम्र में कॉलेज छोड़ दिया और 18 साल की उम्र में अपनी खुद की कंपनी शुरू कर ली थी। कंपनी का नाम ‘ओनली मच लाउडर’ (OML) था, जो अपने NH7 वीकेंडर संगीत समारोहों के लिए जानी जाती थी।

यह स्वतंत्र कलाकारों को बढ़ावा देने के साथ-साथ कॉमेडी ‘ऑल इंडिया बकचोद’ शुरू किया था। साल 2015 के बाद से उन पर साइबर स्टॉकिंग का एक मामला चल रहा है। नायर पर एक महिला ने स्टॉकिंग का आरोप लगाया था। इसको लेकर काफी बवाल हुआ था।

दरअसल, यह शो क्रिएटिविटी और लोगों को हँसाने के नाम पर तैयार किया गया था। इस चैनल ने 2 फरवरी 2013 को अपना पहला वीडियो डाला था। बातचीत फिल्मों के सीन को लेकर थी और बीच-बीच में गालियाँ बकी जा रही थीं। इस वीडियो को 8 लाख से अधिक लोगों ने देखा था।

इस शो में रेप जैसे मुद्दों पर बात करते हुए महिलाओं के कपड़ों और उनके चाल पर आपत्तिजनक से टिप्पणी की गई थी। मनोरंजन के नाम पर भद्दी गालियाँ, फूहड़ता और निम्नस्तरीय कंटेंट परोसने के बाद ऑल इंडिया बकचोद (AIB) में कार्यरत कई लोग #MeToo कैम्पेन में नाम उजागर होने के बाद से संस्था से हटा दिए गए थे।

साल 2019 में AIB ‘नए’ लोगों के साथ सोशल मीडिया पर वापसी करती नजर आई। उस दौरान AIB ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया था, जिसमें स्कूल के बच्चों को स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान गाँजा (नशा) इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है। AIB ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसकी लोगों द्वारा काफी आलोचना की गई।

‘ब्रह्मांड के केंद्र’ में भारत माता की समृद्धि के लिए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने की प्रार्थना, मेघालय के इसी जगह पर है ‘स्वर्णिम पुल’ की मान्यता

RSS के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मेघालय में पवित्र पर्वत लुम सोहपेटबनेंग का दौरा किया। मोहन भागवत की मेघालय की दो दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में संघ के सरसंघचालक ने ‘सेंग खासी’ पदाधिकारियों के साथ पवित्र शिखर, यू लुम सोहपेटबनेंग (ब्रह्मांड की नाभि) के गर्भगृह में प्रार्थना के लिए शामिल हुए। यह सभी के भलाई के लिए, ‘का मेई री इंडिया’ (भारत माता) की वृद्धि और समृद्धि और उसके सभी नागरिको के उत्थान निमित्त ही था।

प्रार्थना सेंग खासी के प्रधान पुजारी स्कोर जाला द्वारा की गई थी, और स्वधर्म आस्था ‘नियाम खासी’ के लिए पवित्र अनुष्ठानों में समाप्त हुई, जिसमें सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत, ‘ सेंग खासी किमी’ के अध्यक्ष तथा जोवाई के डोलोई ने संग भाग लिया। आशीर्वाद स्वरूप पवित्र चावल का वितरण भी किया गया और संघ प्रमुख ने पवित्र परिसर के भीतर एक पौधा लगाकर इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण अवसर का समापन किया।

सेंग खासी एक सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक संगठन है जिसका गठन 23 नवंबर, 1899 को सोलह युवा खासी पुरुषों द्वारा खासियों के अपने से चली आई परंपरा प्रेरित जीवन और धर्म की रक्षा, संरक्षण और प्रचार करने के लिए किया गया था। आज 123 साल बाद सेंग खासी इन खासी पहाड़ियों में 300 से अधिक शाखाओं में विकसित हो गया है, और यह संगठन लोगों की जड़ों और पहचान को मजबूत करके लोगों को गौरवान्वित करने के अपने उद्देश्य में प्रयास करना जारी रखता है।

अपने भाषण में मोहन भागवत ने इस पवित्र दर्शन का विलक्षण अनुभव प्राप्त करने पर अपना गहरा आभार व्यक्त किया, और कहा कि वे यू लुम सोहपेटबनेंग के पवित्र संदेश को पूरे देश में आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने कहा, “मनुष्य और भगवान को जोड़ने वाला वह ‘स्वर्णिम पुल’ अब एक सोने के हृदय के भीतर ही निवास कर रहा है।”

यू लुम सोहपेटबनेंग का शिखर वह स्थान माना जाता है जहां एक “स्वर्णिम पुल” मनुष्य को स्वर्ग से जोड़ता था। ऐसा माना जाता है कि सोलह परिवारों ने दो दुनियाओं के बीच यात्रा की, जब तक कि सात पृथ्वी पर हमेशा के लिए धरती माता की देखभाल करने और धार्मिकता अर्जित करने और सत्य का प्रचार करने के लिए बने रहे। आज के संदर्भ में यह वह पवित्र उद्गम स्थल है, जहाँ भारत की सच्ची समृद्धि को दर्शाने वाली स्मरणीय घटना हुई है। भागवत ने इस पवित्र स्थान पर अपने दो दिन के व्यस्त कार्यक्रम को समाप्त किया और आगे के निश्चित कार्यक्रमों के निमित्त गुवाहाटी के लिए रवाना हो गए।

‘लाल सिंह चड्ढा’ के हाल से आमिर खान ने नहीं ली सीख: ‘फॉरेस्ट गंप’ के बाद अब स्पेनिश फिल्म ‘चैंपियन्स’ की बनाएँगे रीमेक, अमेरिका से छुट्टी मना कर लौटे

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान (Bollywood Actor Aamir Khan) लगता है कि पिछली गलतियों से सिखना नहीं चाहते हैं। लाल सिंह चड्ढा (Lal Singh Chadha) के बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरफ फ्लॉप होने के बाद आमिर खान फिर रीमके बनाने जा रहे हैं।

आमिर खान ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ के जरिए 5 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी और उन्हें इस फिल्म से काफी उम्मीद थी। हालाँकि, सोशल मीडिया पर बॉयकॉट कैंपेन के बाद उनकी यह फिल्म औंधे मुँह गिर गई। लाल सिंह चड्ढा हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की रीमेक थी।

अब आमिर खान फिर रीमेक ही बनाने जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह फिल्म भी विदेशी फिल्म की ही रीमेक होगी। फिल्म स्पेनिश की सुपर हिट ‘चैंपियन्स’ (Campeones) की रिमेक होगी। फिल्म चड्ढा के आघात के बाद आमिर खान कुछ दिन के लिए अमेरिका चले गए थे और जब लौटे तो वही रीमेक का आइडिया लेकर लौटे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘चैंपियन्स’ फिल्म की रीमेक पर जनवरी 2023 से काम शुरू हो जाएगा। फिल्म का निर्देशन आरएस प्रसन्ना करेंगे। प्रसन्ना ‘शुभ मंगल सावधान’ का निर्देशन कर चुके हैं। वहीं, इसके संगीत पर शंकर-एहसान-लॉय काम करेंगे।

स्पेनिश फिल्म चैंपियन्स सुपरहिट रही है। इस फिल्म को फॉरेन लैंग्वेज के लिए एकेडमी अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। यह अब तक की बेस्ट स्पोर्ट्स फिल्मों में से एक है। फिल्म में दिव्यांग एक्टर को कास्ट किया गया था। आमिर खान इस फिल्म में एक घमंडी बास्केटबॉल कोच की भूमिका करेंगे, जिसे दिव्यांग टीम के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के लिए कहा गया है।

यह भी कहा जा रहा है कि टी-सीरीज के गुलशन कुमार के बायोपिक ‘मुगल’ में आमिर खान को लिया जाएगा। यह फिल्म कई सालों से अटकी पड़ी है। हालाँकि, इसको लेकर किसी तरह का कन्फर्मेशन नहीं है।

जहाँ से उखाड़े गए थे, वापस वहीं पौधे लगवा रहीं श्रीकांत त्यागी की पत्नी: नोएडा की ओमेक्स सोसाइटी में फिर बवाल, लोगों से हुई बहस

श्रीकांत त्यागी प्रकरण के बाद सुर्ख़ियों में रही नोएडा की ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी एक बार फिर चर्चा में है। इस बार चर्चा का कारण श्रीकांत त्यागी की पत्नी अनु त्यागी हैं, जिन्होंने सोसायटी के पार्क में फिर से पौधे लगवाने शुरू कर दिए हैं। इसके बाद विवाद बढ़ने पर एक बार फिर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रीकांत की पत्नी अनु त्यागी ने सोसाइटी के पार्क में लगवाने के लिए फिर से पौधे मँगवाए थे। इन पौधों के कारण एक बार फिर सोसाइटी के लोगों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। जिसके बाद अनु त्यागी की सोसाइटी के लोगों से बहस हो गई। विवाद बढ़ता देखकर किसी ने पुलिस को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुँच कर पुलिस ने विवाद शांत कराया।

इस विवाद के दौरान नोएडा अथॉरिटी एडिशनल सीईओ मौके पर मौजूद थे। उन्होंने ग्रैंड ओमैक्स सोसाइटी में अनु त्यागी सहित सभी सोसाइटी वालों को 48 घंटे के अंदर अपने-अपने अवैध अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है यदि सभी लोग अपने से अतिक्रमण नहीं हटाएँगे तो पुलिस बल के माध्यम से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

हालाँकि, अब बताया जा रहा है कि सोसाइटी में उसी स्थान पर दोबारा पेड़ लगाए गए हैं जहाँ से उखाड़े गए थे। अब तक पाम के 7 पेड़ लगाए गए हैं। ये पेड़ उसी कद के हैं जो उखाड़े गए थे। सोसाइटी में पेड़ लगाने का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीकांत त्यागी की पत्नी अनु त्यागी के समर्थन में सोमवार (26 सितंबर, 2022) को त्यागी समाज के लोगों ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी के बाहर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में मांगे राम त्यागी ने पुलिस और नोएडा प्राधिकरण से सोसाइटी में हुए सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने और पेड़-पौधों को हटाने की माँग की थी। हालाँकि, पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाकर प्रदर्शन खत्म करा दिया था।

इस प्रदर्शन के दौरान मांगे राम त्यागी ने पुलिस और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अनु त्यागी के घर के बाहर से उखाड़े गए पेड़ों को फिर से लगवाया जाए। साथ ही यह भी कहा था कि उनके घर का जो भी हिस्सा तोड़ा गया था उसका भी फिर से निर्माण कराया जाए और अगर ऐसा नहीं होता है तो सोसाइटी के जिन 299 फ्लैटों में अवैध निर्माण है और अन्य लोगों ने जो पौधे लगा रखे हैं, उन्हें भी हटाया जाए। त्यागी ने यह भी कहा था कि यदि माँगें पूरी नहीं होंगी तो त्यागी समाज के द्वारा नोएडा में ही धरना प्रदर्शन किया जाएगा और यहीं पर उनके समाज के लोगों का टैंट लगेगा।

वहीं, इस मामले में अनु त्यागी के कहा है कि कल त्यागी समाज के लोग यहाँ पेड़ लगाने पहुँचे थे। नोएडा प्राधिकरण और पुलिस ने 24 घंटे का समय मांगा था इसीलिए यह पेड़ पार्क में लगवाने के लिए मंगाए थे। जब सब के घरों के सामने पेड़ लग सकते हैं, हमारे घर के सामने क्यों नहीं लग सकता।

श्रीकांत त्यागी का नोएडा की सोसाइटी में गाली देते हुए वीडियो हुआ था वायरल

दरअसल, यह पूरा मामला पेड़-पौधे लगाने से ही शुरू हुआ था। श्रीकांत त्यागी कथित तौर पर पेड़-पौधे लगाकर अतिक्रमण की कोशिश कर रहा था, जिसके बाद सोसाइटी के लोगों ने इसका विरोध किया था। विवाद के दौरान श्रीकांत त्यागी ने एक महिला को धक्का देते हुए गाली-गलौच की थी। इसके कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।

इसके बाद, पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर श्रीकांत त्यागी पर मुकदमा दर्ज किया गया था। हालाँकि, घटना के तुरंत बाद श्रीकांत त्यागी फरार हो गया था। लेकिन, फिर 4 दिन बाद 9 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मेरठ से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद से वह जेल में बंद है।

अब पलटा लेस्टर हिंसा के लिए हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराने वाला BBC, फिर भी जारी रखी मुस्लिम भीड़ को बचाने की कोशिश: नहीं ला रहा पीड़ित हिन्दुओं की आपबीती

इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) और बर्मिंघम में बीते दिनों कट्टरपंथियों इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाया गया। ताज़ा घटनाक्रम में यूके में पहली बार हिंदुओं-मुस्लिमों के बीच टकराव की खबर 28 अगस्त को आई थी। लेकिन इसके बाद लेस्टर में हिंदुओं, उनके घरों, मंदिरों और संपत्तियों पर सोची समझी साजिश के तहत हमला किया गया। यहाँ हिंदुओं के खिलाफ कई हमले हुए हैं, जो इस्लामवादियों, आतंकी संगठन अलकायदा (Al Qaeda) और आईएसआईएस (ISIS) के समर्थकों जैसे माजिद फ्रीमैन द्वारा फैलाई गई भ्रामक और गलत सूचनाओं से प्रेरित हैं।

हाल ही में देखा गया कि जब यहाँ हिंदू डर के साए में जीने को मजबूर थे। उस वक्त यूके का मीडिया (बीबीसी) इस्लामवादियों द्वारा की गई हिंसा के लिए हिंदुओं पर दोष मढ़ने में व्यस्त था। हालाँकि, बीबीसी ने अब अपनी ताजा रिपोर्ट में इस बात से किनारा कर लिया है। उसने यू-टर्न लेते हुए कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि हिंसा हिंदुओं द्वारा शुरू की गई थी। दरअसल, बीबीसी ने हाल ही में ‘क्या गलत सूचनाओं के कारण लेस्टर में हिंसा भड़की’ (Did misinformation fan the flames in Leicester?) शीर्षक से अपनी एक रिपोर्ट प्रकाशित की।

इसमें उसने कहा, “कुछ लोग तनाव और उसकी प्रतिक्रिया को हिंदुत्व की विचारधारा से जोड़ते हैं। उनका मानना है कि भारतीय हिंदूवादी राजनीति को लेस्टर में लाया जा रहा है, लेकिन अभी तक बीबीसी को इस तरह के समूहों से इस मामले में कोई सीधा संबंध नहीं मिला है।”

लेस्टर पर बीबीसी की रिपोर्ट

इससे पहले मीडिया ऐसी ख़बरें चला रहा था जैसे यूके में लेस्टर के अलावा जहाँ भी हिंसा हुई उन सबके लिए हिंदू जिम्मेदार हैं। हिंदुत्व और हिंदुओं के खिलाफ इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश करने के कुछ दिनों बाद यूटर्न ले लिया गया। यह सबसे अच्छा तरीका है खुद को पाक साफ बताने का। बीबीसी ने इस बात को स्वीकार किया है कि हिंदुओं ने लेेस्टर में हिंसा की शुरुआत नहीं की थी। लेकिन, यह भी सच है कि इस्लामवादी वहाँ हिंदुओं के खिलाफ उग्र हो गए थे।

बीबीसी ने एक सप्ताह तक लेस्टर हिंसा को लेकर किए गए दावों का फैक्ट चेक किया और ये देखना चाहा कि किसने हिंसा को भड़काने का काम किया, कौन इसके लिए जिम्मेदार रहा। लेकिन, बीबीसी को इस तथ्य की पुष्टि करने के लिए भी कोई सबूत नहीं मिला कि यह लेस्टर के मुस्लिम समुदाय ने शुरू किया था। इसके अलावा साक्ष्य के रूप में सामने आए कई वीडियो के बावजूद बीबीसी इस बात की जाँच करने में विफल रहा कि कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय ने हिंसा कैसे शुरू की।

यूके के मीडिया ने इस बात को स्वीकार किया है कि इस्लामवादियों द्वारा गलत सूचना फैलाई गई। आईएसआईएस और अलकायदा समर्थक माजिद फ्रीमैन का नाम लेते हुए बीबीसी ने कहा कि उसने ही एक हिंदू युवक द्वारा मुस्लिम लड़की के अपहरण किए जाने की फर्जी खबर फैलाई थी। बीबीसी ने आगे यह भी स्वीकार किया कि हिंसा फैलाने के लिए लेस्टर के बाहर से हिंदुओं को ले जाने वाले लंदन के कोच की तरह अन्य फर्जी खबरें भी फैलाई गईं। जबकि ऑपइंडिया यह पहले ही बता चुका था कि लंदन कोच कंपनी के मालिक ने इस खबर को बेबुनियाद बताते हुए कहा था कि उनके कोच हिंसा के दिनों में लेस्टर में भी नहीं थे।

बीबीसी ने लेस्टर में मंदिर को अपवित्र करने और झंडे को नीचे गिराए जाने की बात करते हुए (वे यह उल्लेख करने में विफल रहते हैं कि एक झंडे को आग भी लगा दी गई थी), इस ओर इशारा किया कि वह एक हिंदू भी हो सकता है, जिसने ध्वज को गिराया। क्योंकि झंडा नीचे गिराने वाले कि पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

लेस्टर पर बीबीसी की रिपोर्ट

यही नहीं, बीबीसी हिंदुओं के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने वाले इस्लामवादियों को बचाने की कोशिश भी करता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वह उनके (हिंदुओं) खिलाफ हिंसा को भड़काता भी है। बीबीसी ने एक ट्विटर हैंडल की पहचान को छुपाया, जब वह एक मंदिर के बारे में गलत सूचना फैला रहा था।

लेस्टर पर बीबीसी की रिपोर्ट

ऑपइंडिया इस ट्विटर हैंडल को खोजने में कामयाब रहा। इसे @aart123 नाम के एक हैंडल से शेयर किया गया था। फेक न्यूज वाला ट्वीट अभी भी सोशल मीडिया पर मौजूद है। ऐसे में बिना किसी अस्पष्ट कारण के बीबीसी ने इस ट्विटर हैंडल की पहचान को छिपाने का काम किया।

इसके अलावा हिंदुओं को निशाना बनाने वाले इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने वाले बीबीसी ने अलकायदा और आईएसआईएस समर्थक माजिद फ्रीमैन को सामुदायिक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया।

लेस्टर पर बीबीसी की रिपोर्ट

बीबीसी का दुख, लेस्टर के हिंदुओं का भारतीय हिंदुओं ने किया समर्थन

भले ही बीबीसी की रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य गलत सूचनाओं के बारे में बात करना था। लेकिन कई अन्य तथ्य भी हैं, जो बीबीसी के वास्तविक इरादे को दर्शाते हैं। सबसे पहले, उन्होंने इस्लामवादियों द्वारा किए गए कुकृत्य पर कैसे पर्दा डालने की कोशिश की और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा फैलाने वालों की पहचान छिपाई। इससे भी कहीं ज्यादा दुख उन्हें इस बात का पहुँचा कि कैसे भारत के हिंदुओं ने लेस्टर के हिंदुओं को अपना समर्थन दिया।

लेस्टर पर बीबीसी की रिपोर्ट

वे इस तथ्य पर भी हैरान हैं कि लेस्टर हिंसा के बारे में बात करने के लिए साझा किए गए 30 टॉप URL में से 11 इंडिया के ऑपइंडिया लिंक थे। वे जिन लेखों का हवाला देते हैं, उनमें से एक हेनरी जैक्सन रिसर्च फेलो शार्लोट लिटिलवुड (Charlotte Littlewood) का है। इसमें उन्होंने बताया था कि लेस्टर में हिंदू परिवार दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। 9 हिंदू परिवारों ने पलायन कर लिया है। वहाँ कट्टरपंथी मुस्लिमों के आतंक से वे अपने घरों के बाहर हिंदू-प्रतीक तक नहीं लगा सकते। बीबीसी इस बारे में लिखता है कि कैसे पुलिस ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है। लेकिन लिटिलवुड अपनी बात पर कायम हैं।

एक रिपोर्ट जिसे बीबीसी द्वारा निष्पक्ष और तटस्थ बताया जा रहा है। वह केवल हिंदू समुदाय को बदनाम करने और लेस्टर में हिंसा को बढ़ावा देने वाले कट्टर मुस्लिम समुदाय को बचाने का एक और प्रयास है। दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में बीबीसी ने लेस्टर हिंसा के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया था।

बीबीसी की पूर्व रिपोर्ट

इस ओर ध्यान दें कि अपनी ताजा रिपोर्ट में बीबीसी ने हिंसा के लिए पूरी तरह से हिंदुओं पर दोष मढ़ने कि बजाए यह कहकर अपने आपको निष्पक्ष दिखाने कि कोशिश की है कि वे नहीं जानते कि हिंसा किसने शुरू की। हालाँकि, वे अभी भी पीड़ितों-हिंदुओं से कोई सरोकार नहीं रखते हुए लेस्टर के इस्लामवादियों को बचाने में लगे हुए हैं। यहाँ तक कि बीबीसी ने अपनी पिछली रिपोर्टों के लिए कोई माफी भी नहीं माँगी है, जिसमें उन्होंने हिंदुओं पर झूठा आरोप लगाया था कि हिंसा के लिए वे जिम्मेदार हैं।

कॉन्ग्रेस, ईसाई मिशनरी और मशीनरी… ‘राष्ट्रपति के संतान’ सबसे त्रस्त: जहाँ मंत्री ‘जमीनखोर’, वहाँ जनजातीय समाज को कौन बचाए

अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) वर्ग से आने वाले पहाड़ी कोरबा (Pahadi Korba) भारत के राष्ट्रपति की ‘दत्तक संतान’ कहे जाते हैं। खेती और पशुपालन उनकी जीविका का मुख्य साधन है। सनातन के प्रति समर्पित यह जनजातीय समाज छत्तीसगढ़ में अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।

जैसा कि मैनेजर राम भगत ने ऑपइंडिया को बताया, “कोरबा और नगेशिया ऐसी जनजाति हैं, जिनमें धर्मांतरण न के बराबर हुआ है। इनके ऊपर भी कई माध्यमों से चर्च दबाव बनाते हैं। पर इनका संकल्प है कि कंदमूल, फल-फूल खाकर रह जाएँगे, लेकिन धर्म नहीं बदलेंगे। पर आज षड्यंत्र कर उनकी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है।” भगत जशपुर जिला बीजेपी जनजाति मोर्चा (BJP ST Morcha) के उपाध्यक्ष हैं। साथ ही वनवासी कल्याण आश्रम की सरहुल पूजा समिति के जिला उपाध्यक्ष का दायित्व भी उनके पास है।

संरक्षित जनजाति में आते हैं पहाड़ी कोरबा

भगत जिस खतरे के बारे में बात कर रहे हैं, उसे समझने के लिए हम हर्रापाठ नाम के गाँव चलते हैं। झारखंड की सीमा से लगे छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के मनोरा ब्लॉक में यह गाँव है। सड़क से सटे इस गाँव में पहाड़ी कोरबा रहते हैं। यादवों के कुछ घरों को छोड़कर ज्यादातर आबादी जनजातीय समाज की है। खुद को बीजेपी से जुड़ा बताने वाले हर्रापाठ के नंदकुमार यादव ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “इस गाँव में जो जनजातीय वर्ग के लोग रहते हैं वे हिंदू सनातन परंपरा को मानने वाले हैं। लेकिन जब से कॉन्ग्रेस की सरकार आई है, ईसाई मिशनरी इधर भी धर्मांतरण का प्रयास कर रहे हैं। लोगों को बहला-फुसला रहे हैं। मेरे गाँव में भी गिरिजाघर बनाने के लिए पहाड़ी कोरबा की जमीन पर वे कब्जा कर रहे थे।”

हर्रापाठ में ही वे पहाड़ी कोरबा परिवार रहते हैं, जिनकी 24.88 एकड़ जमीन राज्य के खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत (Amarjeet Bhagat) के बेटे आशीष भगत के नाम पर धोखे से लिखवाई गई थी। जब यह धोखाधड़ी हुई थी, तब भगत जशपुर के प्रभारी मंत्री भी हुआ करते थे।

इस फर्जीवाड़े में जिनलोगों की जमीन गई, उनमें से एक लाल साय राम भी हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “वो पूरी जमीन (करीब 25 एकड़) हमारे पुरखों की है। इसमें हम कई परिवार हिस्सेदार हैं। हमलोगों को सरकारी अनुदान दिलाने के नाम पर जशपुर ले जाया गया। वहाँ कुछ कागजों पर हमसे अँगूठा लगवाया/दस्तख्त करवाए। जमीन बिकने की बात हमें तब पता चली जब पटवारी नापने आया।”

साय के अनुसार पटवारी ने ही उन्हें बताया कि उनकी जमीन मंत्री ने खरीद ली है, जबकि वे न तो कभी मंत्री अमरजीत भगत और न उनके उस जज बेटे आशीष भगत से मिले थे, जिनके नाम पर जमीन लिखी गई थी। उन्हें जो लोग जशपुर लेकर गए थे, वे कॉन्ग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता बताए जाते हैं। उनसे ही इन परिवारों को साढ़े 10 लाख के छह चेक मिले थे।

पहाड़ी कोरबा लाल साय का घर और भाजयुमो नेता नितिन राय

पटवारी से जब जमीन बिकने की जानकारी मिली तो ये परिवार चेक लेकर बीजेपी के स्थानीय नेता कृष्ण कुमार राय के घर गए। राय को पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार में मंत्री का दर्जा प्राप्त था। राय के भतीजे और भाजयुमो के सरगुजा संभाग प्रभारी नितिन राय ने ऑपइंडिया को बताया, “इन गाँवों से हमारा पूर्वजों से लगाव रहा है। ये लोग चेक लेकर हमारे पास आए थे। हमने जाँच की तो पता चला कि अमरजीत भगत जो यहाँ के प्रभारी मंत्री थे, उन्होंने इन्हें ठग कर, षड्यंत्र कर अपने जज बेटे के नाम से जमीन खरीद ली थी। इस मामले में दलाली करने वाले लोगों ने इनसे कहा कि बहुत बड़े मंत्री ने तुम्हारी जमीन ली है। तुम्हारी जमीन कोई वापस नहीं करा सकता। हमने आंदोलन किया। धरना दिया। लेकिन जिला प्रशासन ने हमारी नहीं सुनी। इसके बाद हम इनलोगों को राज्यपाल अनुसूइया उइके के पास लेकर गए। उसके बाद विवाद बढ़ता देख अमरजीत भगत को जमीन वापस करनी पड़ी।”

नितिन राय के अनुसार, “पहाड़ी कोरबा की जमीन पर ईसाई मिशनरी भी कब्जा कर रहे हैं। इसी गाँव (हर्रापाठ) का भुनेश्वर कोरबा है, उसकी जमीन पर भी कब्जे की कोशिश हुई थी। वह केस भी चल रहा है।” भुनेश्वर राम ने सड़क से ही सटी अपनी वह जमीन भी ऑपइंडिया को दिखाई जिस पर अधूरा निर्माण हुआ पड़ा है। उन्होंने बताया कि घुड़ा एक्का और दया कुजूर उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे थे। उन्होंने रोका तो उन्हें भगा दिया। वे कहते हैं, “ये लोग ईसाई हो चुके हैं। यहाँ गिरिजाघर बनाना चाहते थे।” इस मामले में भी प्रशासन ने तब कार्रवाई की जब बीजेपी नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने दखल दिया।

पहाड़ी कोरबा भुनेश्वर राम की जमीन पर कब्जा कर किया गया निर्माण

लाल साय का मामला हो या भुनेश्वर राम का, ये पहाड़ी कोरबा से जुड़े वे मामले हैं जो संज्ञान में आ गए। जिनमें राजनीतिक दबाव के चलते जनजातीय वर्ग की जमीन बच गई। ऐसे सैकड़ों मामले बताए जाते हैं जिनमें फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति वर्ग की जमीन रजिस्ट्री करवाई गई है। जैसा कि नितिन राय ने ऑपइंडिया को बताया, “दलालों की पैनी नजर यहाँ की जमीनों पर है। इसका कारण बॉक्साइट है। पांड्रा पाट, बागीचा क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हुई है। उसकी जाँच हो जाए तो सभी कोरबा पहाड़ी के जमीन वापस मिल जाएँगे।”

इसलिए सवाल अमरजीत भगत के जमीन लौटाने के साथ ही समाप्त नहीं हो जाते? उन्हें जशपुर के प्रभारी मंत्री पद से हटाए जाने के साथ ही उनके पाप धुल नहीं जाते? नियम है कि जज को संपत्ति खरीदने से पहले इसकी जानकारी देनी होती है। क्या उनके बेटे आशीष भगत ने ऐसा किया? इस मामले में जो लोग दलाल की भूमिका में थे, जिन्हे कॉन्ग्रेस का ही कार्यकर्ता बताया जा रहा है, उन पर कोई कार्रवाई हुई? अमरजीत भगत के साथ उनके संबंधों की जाँच हुई? जमीन लौटाने की बात कहते हुए अमरजीत भगत ने दावा किया था कि इस सौदे में नियमों का पालन हुआ था। लेकिन पहाड़ी कोरबा संरक्षित जनजाति हैं। उनकी जमीन दूसरी जनजाति भी नहीं खरीद सकते। फिर उरांव जनजाति से आने वाले अमरजीत भगत के बेटे ने ऐसा कैसे कर लिया? जाहिर है कि इस सौदे में प्रशासनिक मिलीभगत भी रही होगी। लेकिन साल भर बाद भी इस मामले में किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आखिर वो कौन सी ‘योग्यता’ है जिसकी वजह से अमरजीत भगत आज भी भूपेश बघेल के मंत्रिमंडल में बने हुए हैं? इन सवालों का जवाब आज तक नहीं मिले हैं। आखिर क्यों?

माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़ने वाली बुर्कानशीं महिलाओं को हैदराबाद पुलिस ने बताया ‘मानसिक बीमार’, भाई बोला – मेरी माँ और बहनों को सिज़ोफ्रेनिया है

हैदराबाद के खैरताबाद इलाके में मंगलवार (27 सितंबर, 2022) को माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़ने वाली दो मुस्लिम महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले को लेकर नामपल्ली के विधायक जेएच मेराज ने मीडियाकर्मियों को बताया, “2 बुर्का पहने महिलाओं ने स्पैनर से देवी की मूर्ति को खंडित कर दिया। उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया है। मैं आयुक्त से विस्तृत जाँच करने का अनुरोध करता हूँ।” उन महिलाओं पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति पर भी हमला करने की कोशिश की, क्योंकि उसने उन्हें रोकने की कोशिश की थी।

इससे पहले उन्होंने एक चर्च के बाहर लगी मदर मैरी की मूर्ति को भी तोड़ने की कोशिश की।

हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP ने देवी दुर्गा और मदर मैरी की मूर्तियों को तोड़ने वाली दोनों महिलाओं को लेकर कहा, “ये दोनों महिलाएँ अपने अम्मी-अब्बू के साथ रहती हैं। ये मानसिक रूप से बीमार हैं। वे 2018 में जेद्दा से लौटे थे और तब से इसका सामना कर रहे हैं। इनका एक भाई भी है, जो साथ में रहता है।

भाई असीमुद्दीन ने पुलिस को बताया, “मैं अभी तक अपनी बहनों से नहीं मिला हूँ, लेकिन मैंने सुना है कि क्या हुआ है, इसलिए मैं सामने नहीं आया। मेरी माँ और बहनों को सिज़ोफ्रेनिया है और भाई को पैरानॉयड सिज़ोफ्रेनिया है। उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया है। मैं माफी माँगता हूँ। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है, इसलिए मुझे इस बात का ध्यान रखना होगा।”

हैदराबाद के सेंट्रल जोन के DCP राजेश कुमार ने बताया, “आज सुबह दो मुस्लिम महिलाओं ने खैरताबाद स्थित एक पंडाल में घुसकर देवी दुर्गा माता की मूर्ति के एक हिस्से में तोड़फोड़ की। एक महिला को स्पैनर ले जाते हुए भी देखा गया था।” DCP ने आगे यह भी बताया कि प्रतिमा पर हमला करने के दौरान एक व्यक्ति ने महिलाओं को रोकने की कोशिश की तो उस पर हमला किया गया। हालाँकि, महिलाओं के कट्टरपंथी रवैये को देखते हुए स्थानीय लोग जुट गए और उसे पकड़ लिया। लोगों ने पुलिस को सूचना देकर उन्हें सैदाबाद पुलिस के हवाले कर दिया।

बता दें कि दोनों महिलाओं को पहली बार एक चर्च के बाहर देखा गया था, जहाँ उन्होंने बाहर रखी मदर मैरी की मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की थी। फिर वे एक दुर्गा पूजा पंडाल गईं, जो नवरात्रि दौरान चर्च से कुछ मीटर की दूरी पर बनाया गया था। अचानक काले बुर्के पहने दो मुस्लिम महिलाएँ दुर्गा पूजा पंडाल (Puja Pandal) में घुस गईं और माता दुर्गा (Durga Mata) की प्रतिमा को खंडित कर दिया। उन्होंने प्रतिमा के कई हिस्सों को खंडित कर दिया है।

वसीम ने ‘अर्जुन’ बन कर हिन्दू युवती को फाँसा, मंदिर में की शादी, बच्चा पैदा होने के बाद बोला – अब मुस्लिम बनो: मारपीट कर घर से निकाला

देश में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ लगातार आवाज़ उठ रही है। इसके बाद भी इस तरह की घटनाएँ रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। लव जिहाद का नया मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर से सामने आया है। जहाँ वसीम ने अपना नाम अर्जुन और खुद को हिन्दू बताते हुए लड़की को प्रेम जाल में फँसाया और फिर मंदिर में शादी कर ली। शादी के एक साल बाद वसीम की सच्चाई सामने आने पर लड़की ने शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद वसीम को गिरफ्तार कर लिया गया है।

दरअसल, सीतापुर के लहरपुर तहसील अंतर्गत तंबौर थाना क्षेत्र में रहने वाली युवती ने ‘लव जिहाद’ के मामले में आरोपित वसीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पीड़िता ने वसीम के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी जब पहचान हुई तो आरोपित ने अपना नाम अर्जुन बताते हुए खुद को आगरा का निवासी बताया था। दोनों की शादी भी हिन्दू रीति रिवाज से मंदिर में हुई थी। हालाँकि, बच्चा पैदा होने के बाद चीजें बदल गईं।

पीड़ित युवती ने आरोप लगाया है कि बच्चा पैदा होने के बाद वसीम उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने लगा था। लेकिन, जब उसने इनकार किया तो मारपीट करने लगा। पीड़िता का कहना है कि उसे वसीम की सच्चाई शादी के एक साल बाद पता चली है। दोनों की शादी साल 2018 में हुई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित युवती और वसीम के घरवाले विवाद के चलते तहसील कार्यालय पहुँचे थे, जहाँ पीड़िता ने वकीलों को सारी सच्चाई बता दी। इसके बाद ‘लव जिहाद’ का मामला देखकर वकील ने चौकी इंचार्ज जय प्रकाश यादव को फोन कर पुलिस बुला ली।

चौकी प्रभारी के तहसील कार्यालय पहुँचने पर युवती ने बताया कि एक साल पहले वसीम ने अपना नाम अर्जुन बताते हुए उससे मंदिर में शादी रचाई थी। जिससे उनका एक बच्चा भी है। इस दौरान, जब पीड़िता और चौकी प्रभारी बात कर रहे थे तभी आरोपित वसीम और उसके परिजन मौका मिलते ही फरार हो गए थे। हालाँकि, बाद में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

लहरपुर कोतवाली प्रभारी राजीव सिंह का कहना है कि युवक और युवती दोनों तंबौर क्षेत्र के निवासी हैं। वकील की सूचना पर पुलिस ने युवती का बयान लेकर केस दर्ज किया है। इसके साथ ही आरोपित वसीम को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।