‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा रचने वाली कॉन्ग्रेस मतदाता गहन पुनरीक्षण बिहार (SIR) पर एक और झूठ फैलाते पकड़ी गई है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि बोधगया विधानसभा क्षेत्र के निदानी गाँव में सभी 947 मतदाताओं का मकान संख्या ‘6’ ही दिखाया गया है। पार्टी ने कहा कि ऐसा करके चुनाव आयोग ने असली मकान नंबर गायब कर दिए हैं।
मकान नंबर ‘6’ में 947 वोटर, कॉन्ग्रेस का दावा
कॉन्ग्रेस ने ‘वोट चोरी’ को लेकर यह दावा बाराचट्टी विधानसभा के निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 को लेकर किया है। कॉन्ग्रेस ने एक सोशल मीडिया एक पोस्ट में दावा किया कि बूथ नंबर 161 की मतदाता सूची में 947 मतदाता एक ही घर (मकान नंबर ‘6’) में रहते हैं।
कॉन्ग्रेस ने कहा कि निदानी गाँव में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर मतदाता सूची में पूरा गाँव एक काल्पनिक मकान में समा गया। चुनाव आयोग से 3 सवाल भी किए- BLO ने किस तरह डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन की?, असली मकान नंबर वोटर लिस्ट से क्यो गायब कर दिए? और इसका फायदा किसे पहुँचाया जा रहा है?
बिहार में चुनाव आयोग का करिश्मा
— Congress (@INCIndia) August 28, 2025
➡️ निदानी गांव, बोधगया (बूथ नं. 161, बाराचट्टी विधानसभा) में EC ने चमत्कार कर दिखाया
➡️ आधिकारिक वोटर लिस्ट में – 947 वोटर एक ही घर (मकान नं. 6) में रहते हैं
➡️ हकीकत? निदानी में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर लिस्ट में पूरा गांव एक काल्पनिक मकान… pic.twitter.com/EKu5u4Uom3
आगे कॉन्ग्रेस ने फर्जी वोटर, डुप्लीकेट नाम और भूतिया पहचान छिपाए जाने का भी दावा किया। कॉन्ग्रेस ने ‘लोकतंत्र की चोरी’ और ‘लोकतंत्र को लूटने’ जैसे गंभीर आरोप भी चुनाव आयोग पर लगाए।
कॉन्ग्रेस के इस दावे को विपक्ष के नेता राहुल गाँधी समेत पूरे कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने प्रचारित किया। उल्लेखनीय है कि इस समय INDI गठबंधन राहुल गाँधी के नेतृत्व में बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है।
बिहार SIR का ड्राफ्ट डाटा क्या कहता है?
चुनाव आयोग ने बिहार SIR को जो ड्राफ्ट अपलोड किया है, उसमें निदानी गाँव के बूथ नंबर-161 का डाटा ऑपइंडिया ने खंगाला। सभी लोगों को मकान संख्या ‘6’ दिया गया है। हमने पाया कि इस बूथ पर 947 मतदाताओं का नाम दर्ज है। इनमें 526 पुरुष और 421 महिलाएँ हैं।
मकान संख्या ‘6’ में 947 वोटर- क्या है सच्चाई?
कॉन्ग्रेस के दावे के बाद गया के जिलाधिकारी ने इस बूथ पर सभी मतदाताओं के मकान संख्या ‘6’ होने का कारण बताया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में बताया है, “कई गाँवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी गाँव में मौजूद हैं और सही वोटर हैं। निदानी गाँँव के 161 बूथ संख्या के वोटर स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।”
कई गांवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, सभी गांव में मौजूद हैं, सही वोटर हैं। निदानी गांव के 161 बूथ संख्या के वोटर स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।@CEOBihar @ECISVEEP pic.twitter.com/7w7GLuFyDl
— District Magistrate, Gaya (@gaya_dm) August 28, 2025
इस जानकारी के साथ ही जिलाधिकारी ने गाँव के मतदाता का वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में मतदाता बताते हैं कि SIR से वे लोग संतुष्ट हैं और इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है। साथ ही मतदाता यह भी बताते हैं कि गाँव में कोई गृह संख्या नहीं होता है। सभी मतदाताओं ने मकान संख्या ‘6’ पर फैलाई जा रही अफवाहों को झूठा करार दिया।
चुनाव आयोग ने ऑपइंडिया को बताया है, “Notional House Number एक काल्पनिक (प्रतीकात्मक) मकान संख्या होती है, जो तब दी जाती है जब किसी मतदाता के निवास स्थान पर वास्तविक मकान संख्या उपलब्ध नहीं होती। कई गाँवों, झुग्गियों या अस्थायी बस्तियों में घरों पर कोई स्थायी मकान संख्या नहीं होती। ऐसे में BLO क्षेत्र का भौतिक भ्रमण करके प्रत्येक घर को स्वतः एक क्रमांक (जैसे 1, 2, 3…) प्रदान करता है।”
चुनाव आयोग ने आगे कहा, “यह संख्या केवल सूचीकरण में सुविधा और मतदाताओं को सही क्रम में दर्ज करने के लिए दी जाती है। इसका प्रयोग मतदाता की पहचान और मतदाता सूची को क्रमबद्ध रूप से तैयार करने में होता है।”
मकान संख्या ‘6’ की तरह ही मकान संख्या ‘0’ पर भी किया था गुमराह
जिस तरीके से मकान संख्या ‘6’ को लेकर झूठ फैलाया गया है। इससे पहले भी मकान संख्या ‘0’ को लेकर कॉन्ग्रेस ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। राहुल गाँधी ने दावा किया था कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मकान नंबर ‘0’ वाले कई मतदाता हैं। राहुल गाँधी ने इन्हें ‘फर्जी मतदाता’ बताया था, जिनके घर का पता नहीं था।
बाद में चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के दावे को झूठा करार दिया था। चुनाव आयोग ने बताया कि बेघर लोगों को ये नंबर दिया गया है, जिनका पता स्पष्ट नहीं होता है। ऐसे लोगों का चुनावी फॉर्म में पूरा पता दर्ज नहीं होता है।


