राजस्थान के अजेमर में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) को चप्पल और जुतों का सामना करना पड़ा। इस अपमान को कॉन्ग्रेसी नेता अशोक चांदना शायद सहन भी कर लेते लेकिन जब चल रहे थे जूते-चप्पल… तभी सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे भी लग रहे थे।
राजस्थान सरकार के मंत्री अशोक चांदना ने इसके बाद पक्के कॉन्ग्रेसी के तौर पर ट्वीट किया। ट्वीट की भाषा में धमकी से लेकर कॉन्ग्रेस में फूट और सिर-फुटौवल की नौबत भी पढ़-समझ सकते हैं। इन सबसे परे वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस के सबसे ‘युवा’ नेता राहुल गाँधी भारत-जोड़ो यात्रा पर निकले हुए हैं।
मुझ पर जूता फकवाकर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बने तो जल्दी से बन जाए क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है।
जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया तो फिर एक ही बचेगा और यह मैं चाहता नहीं हूँ।
मंत्री अशोक चांदना को अपना भाषण बीच में ही छोड़ना पड़ा। इस हंगामे से वो काफी नाराज हुए और उन्होंने 12 सितम्बर को ही रात 10:05 बजे ट्विटर पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “मुझ पर जूता फेंकवा कर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बने तो जल्दी से बन जाए क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है। जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया तो फिर एक ही बचेगा और यह मैं चाहता नहीं हूँ।”
राजस्थान के मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) के साथ-साथ एक और मंत्री शकुंतला रावत को भी काले कपड़े और जूते दिखाए गए। अशोक चांदना ने इसके पीछे सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराते हुए लड़ाई होने पर एक के ही बचने की चेतावनी दे डाली। मामला सोमवार (12 सितम्बर 2022) की शाम का है।
कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम पुष्कर मेला ग्राउंड में हुआ। इस सभा में जैसे ही मंच पर राजस्थान सरकार के मंत्री अशोक चांदना पहुँचे, वैसे ही नीचे मौजूद लोग जूते और अन्य सामान फेंकने लगे। इस दौरान अशोक चांदना का विरोध होने के साथ-साथ सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे लगे।
People shouted slogans Sachin Pilot ‘Zindabad’ and started throwing slippers in the air during Congress leader Ashok Chandna speaking on the stage in Ajmer. pic.twitter.com/rDPcQzNcUc
विरोध कर रहे लोगों ने वहाँ मौजूद गहलोत सरकार में पर्यटन मंत्री शकुंतला रावत को भाषण देने से रोक दिया। इस दौरान वहाँ मौजूद भीड़ ने न सिर्फ मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) को जूते और काले कपड़े दिखाते रहे बल्कि पानी की बोतलें भी उनके ऊपर फेंकी गईं। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
गौरतलब है कि गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को अंतिम विदाई देने के लिए उनके बेटे विजय बैंसला ने राजस्थान में अस्थि कलश यात्रा निकाली थी, जिसका सोमवार को पुष्कर सरोवर में विसर्जन हुआ। इसी दौरान एमबीसी वर्ग की जातियों को एकजुट करने के लिए इस सभा का आयोजन हुआ था। इस हंगामे को शांत करवाने का प्रयास करते पुलिस बल की लोगों से झड़प भी हुई।
देश में ‘भारत जोड़ो’, राजस्थान में कॉन्ग्रेस में तोड़ो
राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा पर हैं। किस्मत ऐसी कि उन्हें आंदोलनजीवियों का समर्थन भी मिल गया है। अफसोस देखिए कि इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस पार्टी ‘भारत तोड़ो’ अभियान में जुटी हुई है। कभी कॉन्ग्रेसियों के सोशल मीडिया पोस्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमले को लेकर होते हैं तो कभी खुद राहुल गाँधी पादरी के सामने बैठ कर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान ध्यान से सुनते रहते हैं।
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में चरागाह की जमीन पर बने एक अवैध मदरसे को ढहा दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस मदरसे को सरकार द्वारा मान्यता भी नहीं मिली हुई थी। इसे हसन नाम का एक व्यक्ति संचालित कर रहा था। तहसीलदार कोर्ट ने 2 सितम्बर, 2022 को ही नोटिस जारी कर के अवैध निर्माण संचालक को खुद से हटाने का आदेश दिया था। ऐसा न होने के बाद प्रशासन ने अवैध मदरसे पर बुलडोजर चलवा दिया। यह कार्रवाई सोमवार (12 सितम्बर, 2022) को हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मदरसा चरागाह की जमीन पर लगभग 25 वर्षों से बना हुआ था। इसका निर्माण 1997 में अमेठी के टांडा-बांदा हाईवे के पास गूजरटोला में हुआ था। सरकारी कागजातों में यह जगह सरकारी चरागाह के तौर पर दर्ज थी। स्थानीय लोगों ने इस अवैध कब्ज़े की शिकायत की तो स्थानीय लेखपाल ने 27 जून, 2022 को इसकी रिपोर्ट तहसील में जमा की, जिसमें मदरसे के चरागाह की जमीन पर बने होने की पुष्टि की गई थी।
29 जून, 2022 को यह मामला जिले के तहसीलदार की अदालत में दर्ज हुआ। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 1 सितम्बर को मदरसा अवैध रूप से बना पाया और 2 सितम्बर तक उसको चलाने वाले हसन से उसे खुद से हटा लेने के कहा। जब हसन ने तय सीमा में अवैध मदरसे को नहीं हटाया, तब सोमवार को SDM भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और 35 मिनट तक चले बुलडोजर के बाद मदरसे को जमींदोज कर दिया गया।
इस ध्वस्तीकरण के लिए PAC का अतिरिक्त बल और 5 थानों की पुलिस बुलाई गई। सुबह 5:30 से ही बुलडोजर चलना शुरू हो गया था। मदरसा संचालक हसन पर 2 लाख 24 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इस कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
यूपी में ये स्थापित हो गया है कि गैर कानूनी चीजों में किसी को कोई रियायत नहीं मिलेगी । अमेठी में चारागाह की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से मदरसा बना लिया गया था आज जमीन का कब्जा मुक्त कराकर मदरसे के मालिक पर जुर्माना लगाया गया है ।#madarasapic.twitter.com/HAYaVykyjm
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसा संचालक हसन का कहना है कि उसने मदरसे का निर्माण ग्राम सभा के प्रस्ताव पर करवाया था और इसके निर्माण के लिए गाँव वालों ने ही चंदा जुटाया था। हसन ने बताया कि मदरसे में लगभग 150 बच्चे तालीम हासिल करते थे, लेकिन कोरोना काल से यह बंद चल रहा था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) सोमवार (12 सितंबर, 2022) को अहमदाबाद पुलिस से बदसलूकी करते हुए नजर आए। अरविंद केजरीवाल अपने होटल से एक ऑटो में बैठकर डिनर करने के लिए जा रहे थे। तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान केजरीवाल ने कहा, “आप मुझे जबरदस्ती सुरक्षा दे रहे हैं। आपको शर्म आनी चाहिए। आपके ऊपर धब्बा है, ये गुजरात की सिक्योरिटी के ऊपर धब्बा है। मुझे नहीं चाहिए ये सिक्योरिटी।”
इसका वीडियो AAP ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर भी साझा किया है। वीडियो में दिल्ली के सीएम पुलिस के साथ बदसलूकी करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसे लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने केजरीवाल पर ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
SHOCKING!
तानाशाह BJP ने @ArvindKejriwal जी को Auto Driver के घर Dinner पर जाने से रोका
मैं जनता का आदमी हूँ,जनता से मिलना चाहता हूँ। मुझे ऐसी Security नहीं चाहिए। Police सुरक्षा के नाम पर Arrest करना चाहती है
पार्टी ने अपनी ट्वीट में लिखा, “तानाशाह BJP ने अरविंद केजरीवाल जी को Auto Driver के घर डिनर पर जाने से रोका। अरविंद केजरीवाल ने कहा – मैं जनता का आदमी हूँ, जनता से मिलना चाहता हूँ। मुझे ऐसी सिक्योरिटी नहीं चाहिए। पुलिस सुरक्षा के नाम पर गिरफ्तार करना चाहती है। हमें नहीं चाहिए सिक्योरिटी। हमें जनता से मिलना हैं। कैसे रोक सकते हो?”
दरअसल, केजरीवाल आगामी गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी का प्रचार करने के लिए अहमदाबाद में थे। स्थानीय लोगों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने एक ऑटो ड्राइवर के घर डिनर का निमंत्रण ठीक उसी तरह स्वीकार किया, जैसे उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में किया था। केजरीवाल गुजरात के दो अन्य नेताओं के साथ ऑटो में बैठकर ड्राइवर के घर जाना चाहते थे, लेकिन अहमदाबाद पुलिस ने उनसे सुरक्षा कारणों से ऑटो में न जाने का आग्रह किया। इसे लेकर केजरीवाल पुलिसवालों पर आगबबूला हो गए और उन पर बरस पड़े।
केजरीवाल ने पुलिस अधिकारियों से कहा, “इसलिए गुजरात राज्य की जनता दुखी है, क्योंकि नेता जनता के बीच नहीं जाते और हम जनता के बीच जा रहे हैं तो आप हमें रोक रहे हैं। आपके इसी प्रोटोकॉल ने जनता को दुखी करके रखा है।” केजरीवाल बार-बार यह कहते रहे कि उन्हें पुलिस की सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
जब लाख कोशिशों के बाद भी केजरीवाल नहीं माने तो पुलिस की दो गाड़ियाँ ऑटो के पीछे गई, ताकि वो दिल्ली के सीएम की सुरक्षा कर सकें। ऑटो के अंदर दिल्ली के सीएम के साथ एक पुलिस अधिकारी भी था। अफसोस की बात है कि केजरीवाल सहित आप के तीन नेता ऑटो की पिछली सीट पर बैठे थे, इसलिए पुलिस अधिकारी को ड्राइवर के साथ बेहद खतरनाक स्थिति में बैठना पड़ा था।
केजरीवाल के व्यवहार पर भड़के नेटिजन्स
असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने तंज कसा, “दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कल गुजरात में जिस तरह से अपना मजाक बनाया, वह इस बात का प्रमाण है कि केजरीवाल कितने महान अभिनेता हैं! इस धरती पर कोई भी अवार्ड शो उनकी प्रतिभा को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।”
The mockery created by Delhi CM @ArvindKejriwal ji yesterday in Gujarat is a testimony to the fact that how great actor Kejriwal ji is! Any award show in this planet will be low to recognise his talent! pic.twitter.com/hvK8FHpfqU
बीजेपी नेता तजिंदर सिंह बग्गा ने कहा, “ओए घटिया आदमी अरविंद केजरीवाल, गुजरात को बदनाम करना बंद कर। तुम्हारी पार्टी ने खुद चिट्ठी लिख कर गुजरात पुलिस से सुरक्षा माँगी थी और केजरीवाल पर हमले का अंदेशा जताया था। अब मीडिया के कैमरों के सामने पब्लिसिटी की भूख के कारण तुमने गुजरात पुलिस के सामने ड्रामा शुरू कर दिया।”
ओए घटिया आदमी @ArvindKejriwal गुजरात को बदनाम करना बंद कर । तुम्हारी पार्टी ने खुद चिट्ठी लिख कर गुजरात पुलिस से सुरक्षा माँगी थी और केजरीवाल पर हमले का अंदेशा जताया था । अब मीडिया के कैमरों के सामने पब्लिसिटी की भूख के कारण तुमने गुजरात पुलिस के सामने ड्रामा शुरू कर दिया https://t.co/rlsl6MnUOPpic.twitter.com/gOJ6iR07ch
भाजपा नेता प्रीति गाँधी ने कहा, “आम आदमी पार्टी की गुजरात इकाई ने केजरीवाल के गुजरात दौरे पर विशेष सुरक्षा की माँग को लेकर पत्र लिखा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन पर हिंसक हमले की संभावना है। अब जब गुजरात पुलिस उन्हें सुरक्षा दे रही है तो वह उन पर बंधक बनाने का आरोप लगाया जा रहा है।”
Aam Aadmi Party Gujarat unit wrote a letter demanding special protection for Kejriwal on his Gujarat visit. They emphasized that there is a possibility of a violent attack on him.
Now when Gujarat Police is giving him protection, he is accusing them of holding him hostage!! 1/2 pic.twitter.com/Scsp77GJiO
दिलचस्प बात यह है कि AAP गुजरात ने अरविंद केजरीवाल के लिए सुरक्षा माँगी थी। अप्रैल 2022 में, जब अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में अपना चुनाव प्रचार शुरू किया था, तो AAP की गुजरात विंग ने उनके लिए सुरक्षा माँगी थी। सुरक्षा की माँग करने वाले पत्र गुजरात में पार्टी के आधिकारिक हैंडल से साझा किया गया था।
આમ આદમી પાર્ટી દ્વારા મુખ્યમંત્રી શ્રી અરવિંદ કેજરીવાલ તેમજ મુખ્યમંત્રી શ્રી ભગવંત માન સાહેબના ગુજરાત પ્રવાસના સમગ્ર કાર્યક્રમમાં કોઈપણ સ્થળે કે સમયે અસામાજિક તત્વો દ્વારા હિંસક હુમલો થાય તેવી શક્યતાનાં પગલે યોગ્ય સુરક્ષા તકેદારી રાખવા કમિશ્નરશ્રીને જાણ કરવામાં આવી. pic.twitter.com/9xyjT02Hv5
— AAP Gujarat । Mission2022 (@AAPGujarat) April 1, 2022
“बॉलीवुड स्टार्स तो आजकल गुटखा बेच रहे हैं। उनको जब फुर्सत मिलती है, तब कोई रिमिक्स या फिर वाहियात फिल्म बना लेते हैं। 5-6 फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद भी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ये जवाबदेही फिल्म प्रोड्यूसर्स, कंटेंट राइटर्स और प्लेटफॉर्म (जिस मीडियम पर लोग फिल्में देखते हैं) की है।”
बॉलीवुड के डायरेक्टर-एक्टर प्रकाश झा (Prakash Jha) ने यह बातें कहीं हैं। इन दिनों प्रकाश झा अपनी फिल्म ‘मट्टो की साइकिल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी फिल्म 16 सितंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इससे पहले वो आश्रम, आरक्षण, गंगाजल और राजनीति जैसी सुपरहिट फिल्में और वेब सीरीज बना चुके हैं।
दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में प्रकाश झा ने कहा, “इन लोगों को (बॉलीवुड वालों को) लगता है कि बड़े स्टार्स की बदौलत किसी भी फिल्म को हिट करा लेंगे, लेकिन दर्शक अच्छी स्टोरी, अपने बीच की कहानी देखना पसंद करते हैं। ये वाकई में दयनीय स्थिति है। इंडस्ट्री को अपने भीतर चिंतन करने की जरूरत है, नहीं तो जिस जनता ने इन्हें स्टार बनाया हैं, वही इन्हें डुबो देगी।”
फिल्म ‘मट्टो की साइकिल (Matto ki Saikil)’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के बायकॉट और एक के बाद एक बड़े स्टार्स की फ्लॉप हो रही फिल्मों के साथ-साथ साउथ इंडिया में बन रहे सिनेमा और उनके एक्सपेरिमेंट पर भी चर्चा की।
प्रकाश झा के अनुसार बॉलीवुड अच्छी कहानियाँ लिखने के मामले में साउथ इंडिया में बन रहे सिनेमा से कहीं पीछे हैं। इसका कारण उन्होंने बताया कि यहाँ (बॉलीवुड में) अच्छे स्क्रिप्ट राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को कोई पूछता ही नहीं है। इंटरव्यू के दौरान प्रकाश झा ने साउथ के फिल्मी इंडस्ट्री की जमकर तारीफ करते हुए कहा:
“साउथ इंडस्ट्री लगातार एक्सपेरिमेंट कर रही है, वो ऐसी कहानियाँ ला रहे हैं, जो दर्शकों को लुभाती हैं। साउथ के अलावा पंजाबी, तेलुगु, तमिल, बंगाली जैसी रीजनल फिल्मों में भी ऐसा ही है। लेकिन बॉलीवुड में ऐसा नहीं है। बॉलीवुड में जो अच्छी कहानियाँ कहने वाले डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, राइटर हैं, उन्हें तो कोई पूछता ही नहीं है।”
बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर लगातार सवाल उठते हैं। क्या वाकई में ऐसा है? इसके जवाब में प्रकाश झा ने कहा, “ऐसा हो भी सकता है, लेकिन मैंने इस पर कोई रिसर्च नहीं की है। मेरे परिवार का भी कोई इंडस्ट्री में नहीं रहा है, लेकिन मैं काम कर रहा हूँ।”
बता दें कि ‘मट्टो की साइकिल (Matto ki Saikil)’ फिल्म एक दिहाड़ी मजदूर की जद्दोजहद को दिखाती है। फिल्म की शूटिंग 2 साल पहले ही पूरी हो चुकी थी। कोरोना के दौरान इसे बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी भेजा गया था, जहाँ इसकी वर्चुअल स्क्रिनिंग हुई थी। दो साल तक सिनेमा हॉल बंद थे, इसलिए अब फिल्म को रिलीज किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की 3 दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक 2022 का समापन 12 सितम्बर 2022 (सोमवार) को रायपुर में हुआ। इस अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने जनसंख्या नियंत्रण नीति बनाने पर जोर दिया। इसी के साथ उन्होंने न्यायपालिका में हिंदी भाषा के प्रयोग पर भी अपनी बात रखी। इस सम्मेलन में संघ से जुड़े 36 संगठनों के 240 से अधिक प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर डॉ मनमोहन वैद्य ने बताया कि जनसंख्या नीति के लिए संघ ने प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव में संघ ने अगले 50 वर्षों का लक्ष्य बना कर अपने संसाधनों की उपलब्धता और कामकाजी युवाओं की संख्या का अनुपात निकाला है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य के मुताबिक एक दीर्घकालिक समान जनसंख्या नीति बननी चाहिए और वो सभी पर समान रूप से लागू भी होनी चाहिए। इस संबंध में सवाल और जवाब नीचे के वीडियो में 28:45 के आगे सुना जा सकता है।
कुछ राजनैतिक दलों द्वारा संघ के विरोध और इसे नफरत फैलाने वाला बताने के सवाल पर भी डॉ वैद्य ने कहा, “नफरत वो पाल कर रखते हैं। उनके बाप-दादाओं ने भी संघ को रोकने का प्रयास किया और 2 बार बिना वजह प्रतिबंध लादे गए, फिर भी संघ आगे बढ़ता रहा। हम अपने सत्य के सिद्धांत और त्याग के दम पर आगे बढ़ते रहे। उन्हें तो ये भी नहीं पता कि संघ का गणवेश बदल गया है।”
जब डॉ वैद्य से हिन्दू राष्ट्र के मुद्दे पर सवाल हुआ, तब उन्होंने कहा कि राष्ट्र मतलब समाज होता है और वो पहले से ही हिन्दू है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि इस बात की घोषणा भी नहीं करनी है लेकिन हिंदुत्व को यहाँ के लोगों को अपने आचार-विचार में धारण करना होगा। उन्होंने ये भी कहा कि संघ सबको प्रेम और अपनेपन का आमंत्रण देगा। डॉ वैद्य ने जाति, लिंग और आर्थिक आधार पर भेदभाव को खत्म करने के बाद ही हिन्दू राष्ट्र हो पाना सम्भव बताया।
अन्य मुद्दों पर बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने हिंदी भाषा के अधिक से अधिक प्रयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया है कि न्यायपालिका और अन्य प्रशासनिक काम हिंदी में होने चाहिए। भारतीय चिकित्सा पद्धति को उन्नत बताते हुए उन्होंने कहा कि आरोग्य भारती ने सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति को अपनाने का विचार रखा है।
संघ की समन्वय मीटिंग में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी जागरण मंच द्वारा जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही गई। डॉ वैद्य ने अर्थव्यवस्था को मापने का पैमाना सिर्फ GDP तक सीमित न रखने का विचार रखा।
डॉ. मनमोहन वैद्य ने कोरोना काल में देश की एकजुटता को याद दिलाते हुए न सिर्फ डॉक्टर और सुरक्षाकर्मियों की तारीफ की बल्कि आम नागरिकों द्वारा किए गए सहयोग को भी सराहा। उन्होंने कहा कि संघ कार्य कोरोना में थोड़ा बाधित हुआ था पर अब फिर जोर पकड़ चुका है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट स्टीफंस कॉलेज (St. Stephen’s College) की दाखिला प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर अपना फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने कॉलेज को 2022-23 में दाखिले के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से तय की गई नीतियों का पालन करने को कहा। सोमवार (12 सितंबर 2022) को कोर्ट ने अपने दिए फैसले में सेंट स्टीफंस कॉलेज को अपना प्रॉस्पेक्टस वापस लेने का निर्देश दिया।
संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और उनके प्रशासन के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार को दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्ण स्वतंत्र (बिना शर्त के, निरंकुश) नहीं माना। इसी आधार पर कोर्ट ने सेंट स्टीफंस कॉलेज (St. Stephen’s College) को 2022-23 में दाखिले के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से तय की गई नीतियों का पालन करने कहा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों से जुड़े संस्थान (जैसा कि दिल्ली का सेंट स्टीफंस कॉलेज है) अपने हिसाब से छात्र-छात्राओं को दाखिला देने के लिए यूनिवर्सिटी पर दबाव नहीं डाल सकती है।
सेंट स्टीफंस कॉलेज और CUET से जुड़ा मामला
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को अपना प्रॉस्पेक्टस वापस लेने का निर्देश दिया। सेंट स्टीफंस कॉलेज (St. Stephen’s College) के प्रॉस्पेक्टस में लिखा हुआ था कि उनके यहाँ एडमिशन लेने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के 85% जबकि उनके खुद के कॉलेज वाले इंटरव्यू को 15% वेटेज दिया जाएगा। कोर्ट में याचिका दाखिल होने की वजह भी यही बनी।
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के स्कोर को 100 पर्सेंट वेटेज देना है। यह नियम हर कॉलेज, हर यूनिवर्सिटी पर लागू है। सेंट स्टीफंस कॉलेज ने लेकिन इस नियम से अलग जाकर अपने लिए स्पेशल नियम खुद ही बनाया। और इसके लिए उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और उनके प्रशासन के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार का तर्क रखा।
दिल्ली हाई कोर्ट में इस संबंध में जो जनहित याचिका दाखिल की गई थी, वो कनिका पोद्दार नाम की एक लॉ स्टूडेंट ने दायर की थी। दूसरी याचिका सेंट स्टीफंस कॉलेज की थी। जनहित याचिका में कोर्ट से सेंट स्टीफंस कॉलेज को यह निर्देश दिए जाने की माँग की गई थी कि वह कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में मिले मार्क्स के आधार पर एडमिशन दे।
बता दें कि अनुच्छेद 30 देश में धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों को कई अधिकार देता है। इसके तहत सभी अल्पसंख्यकों को देश में अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थानों को स्थापित और संचालित करने का अधिकार होगा।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने दंगा भड़काने और पुलिस पर हमला करने के मामले में सोमवार (12 सितंबर, 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) के दो विधायकों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने 7 साल पुराने मामले की सुनवाई के दौरान AAP विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी और संजीव झा व 15 अन्य लोगों को दोषी ठहराया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इसी सुनवाई में सज़ा का भी ऐलान किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 7 सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि पुलिस की ओर से पेश किए गए सबूतों व गवाहों से साफ है कि दोनों AAP विधायक न केवल दंगाई भीड़ में शामिल थे बल्कि नारेबाजी कर भीड़ को भड़काने का काम भी किया था। इन दोनों विधायकों के उकसाने के बाद ही भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की थी।
बता दें, यह पूरा मामला 20 फरवरी, 2015 का है। इस मामले में जब एक बेक़ाबू भीड़ ने दिल्ली के बुराड़ी पुलिस स्टेशन पर हमला करते हुए पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। ये सभी दंगाई पुलिस से गिरफ्तार किए गए दो लोगों को छोड़ने की माँग कर रहे थे। इस हमले में हवलदार भारत रतन, मोहन लाल और कॉन्स्टेबल बाबू सहित कई जवान घायल हुए थे।
आम आदमी पार्टी के दो विधायकों को दोषी करार दिए जाने के बाद भाजपा अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर हमलावर है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “फिर एक बार AAP का घिनौना चेहरा हुआ जग जाहिर हुआ है। AAP के 2 विधायकों को कोर्ट ने दंगा भड़काने और पुलिस के साथ मारपीट करने में दोषी करार दिया है। ऐसे ही दंगाइयों-गुंडों का आप गढ़ बन गई है। अरविंद केजरीवाल संविधान की धज्जियाँ उड़ाने वाले इन लोगों को पार्टी और विधायक पद से तुरंत बरख़ास्त करो।”
फिर एक बार AAP का घिनौना चेहरा हुआ जग जाहिर!
AAP के 2 MLA को कोर्ट ने दंगा भड़काने और पुलिस के साथ मारपीट करने में दोषी करार दिया।
दंगा भड़काने के आरोपित अखिलेशपति त्रिपाठी दिल्ली की मॉडल टाउन सीट से विधायक हैं। जबकि दूसरे आरोपित संजय झा दिल्ली के ही बुराड़ी से विधायक हैं। इन दोनों AAP विधायकों के आलवा कोर्ट ने बलराम झा, श्याम गोपाल गुप्ता, किशोर कुमार, ललित मिश्रा, जगदीश चंद्र जोशी, नरेंद्र सिंह रावत, नीरज पाठक, राजू मलिक, अशोक कुमार, रवि प्रकाश झा, इस्माइल इस्लाम, मनोज कुमार, विजय प्रताप सिंह, हीरा देवी और यशवंत को भी दोषी ठहराया है।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की दसवीं रिपोर्ट:
बलरामपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में मस्जिदें-मदरसे और मजारें बढ़ने की जमीनी सच्चाई का पता लगाने के लिए हमने इसके सीमावर्ती इलाकों का भी दौरा किया। बलरामपुर जिले के शहरी इलाकों में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उससे जुड़ी समस्याओं वाली हमारी रिपोर्ट आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
सीमावर्ती इलाकों में रिपोर्टिंग के दौरान हमने बलरामपुर जिले में नेपाल सीमा के सबसे अंतिम और बड़े मार्केट तुलसीपुर को केंद्र बनाया। यहीं से हमने बढ़नी बॉर्डर रोड, जरवा बॉर्डर रोड के साथ-साथ श्रावस्ती रोड पर दिखने वाली इबादतगाहों की जानकारी जुटाई।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
SSB बेस कैम्प से 1 किलोमीटर दूर मस्जिद
नेपाल बॉर्डर की रक्षा करती SSB कैम्प के बेस ऑफिस बलरामपुर शहर से जैसे ही हम तुलसीपुर की दिशा में सीमाओं की तरफ बढ़े, तब हमें मुख्य सड़क पर ही एक बड़ी मस्जिद दिखाई दी। ख़ास बात ये है कि ये मस्जिद SSB कैम्प और थाना कोतवाली देहात के बीच में बनी हुई है। इस मस्जिद के आस-पास जिला न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी हैं।
SSB बेस कैम्प के पास बनी मस्जिद
शिवा नगर इलाके में 2 मस्जिदें आस-पास
जैसे ही हम तुलसीपुर की तरफ आगे बढ़े, बलरामपुर शहर से लगभग 5 किलोमीटर बाद शिवा नगर इलाके में हमें 2 मस्जिदें आस-पास दिखाई दीं। सड़क से दोनों मस्जिदों की दूरी क्रमशः आधे और एक किलोमीटर थी। इनमें से एक तो खेतों के बीच नई बनी दिखाई दे रही थी। यहाँ यह बात गौर करने योग्य है कि यही रास्ता बढ़नी और जरवा जैसे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी जोड़ता है।
शिवा नगर इलाके में खेतों में बनी नई मस्जिद
इसी मस्जिद से बस कुछ ही मीटर की दूरी पर दूसरी मस्जिद साफ-साफ दिखाई देती है।
पहली मस्जिद सिंगल मीनार और दूसरी वाली डबल मीनार के साथ
सड़क से सटी मज़ार
इसी सड़क पर थोड़ा आगे बढ़ने के बाद हमें एक मज़ार दिखा। मज़ार के आस-पास सड़क पर कुछ गाएँ दिखाई दीं। मज़ार का हालत देख कर लगा कि उस पर रंग-रोशन नया हुआ था। आस-पास हमें कोई इस मज़ार का इतिहास नहीं बता पाया।
सड़क के किनारे बनी मज़ार
लौकहवा गाँव में 2 मस्जिदें
जरवा बॉर्डर पर बढ़ते हुए तुसलीपुर बाजार से लगभग 4 किलोमीटर पहले हमें लौकहवा नाम का गाँव दिखाई दिया। इस गाँव में हमें मुख्य सड़क से ही 4 मीनारें दिखीं। स्थानीय निवासी सीपी मिश्रा ने हमें बताया कि गाँव मुस्लिम बाहुल्य है और उसमें मस्जिदों के अलावा मदरसे भी हैं।
लौकहवा गाँव में इबादतगाहें
तुलसीपुर शहर में घुसते ही मदरसा
तुलसीपुर वैसे देवीपाटन मंदिर के लिए जाना जाता है। दुनिया भर के श्रद्धालु यहाँ आते रहते हैं। जैसे ही हम इस शहर में प्रवेश किए, वैसे ही हमें एक मदरसा दिखाई दिया। इस मदरसे का नाम ‘जमीयत बनत अल सलाहित सिन’ है। यह मदसा जरवा बॉर्डर जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है। इसके आस-पास कुछ अन्य बोर्ड उर्दू भाषा में लिखे हुए थे।
तुलसीपुर स्थित मदरसा जमीयत बनत अल सलाहित सिन
जरवा की तरफ बढ़ते ही हमें तुलसीपुर बाजार के मुहाने पर एक और मदरसा दिखा। इस मदरसे का नाम मदरसा अहले सुन्नत फैज़ुल उलूम है। हरे रंग से रंगे इस मदरसे में फ़िलहाल ताला लगा हुआ था और छात्र नहीं दिखाई दिए।
मदरसा अहले सुन्नत फैज़ुल उलूम
तुलसीपुर बाजार के बाहर ही मुख्य सड़क पर हमें एक और ईमारत दिखी, जिस पर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ था। हम हालाँकि यह नहीं पता लगा पाए कि वो इमारत किस काम में आती है।
अरबी में लिखे कुछ शब्द
तुलसीपुर जरवा रोड पर कई मज़ारें और इबादतगाहें
बलरामपुर-तुलसीपुर रोड से जब हम तुसलीपुर-जरवा रोड की तरफ आगे बढ़े, तब भी इबादतगाहों के मिलने का सिलसिला ज्यों का त्यों रहा। लगभग 15 किलोमीटर लम्बी नेपाल की ओर जाने वाली इस सड़क पर भी हमें जगह-जगह मस्जिदें, मदरसे और इबादतगाहें दिखीं। यहाँ ख़ास बात ये दिखी कि लोगों के घर भले ही टूटे-फूटे हों पर इबादतगाहें चमचमाती हालत में थीं।
जरवा रोड पर बनी इबादतगाह
हमें कई इबादतगाहें तो ऐसी जगहों पर दिखीं, जहाँ आस-पास आबादी ही नहीं थी। हमने वहाँ से गुजर रहे लोगों से पूछा कि उस जगह इबादत करने कौन आता है तो हमें किसी ने साप्तहिक तो किसी ने मासिक मेला लगना बताया।
एकांत में बनी इबादतगाह
तुलसीपुर बाजार खत्म होते ही हमें आउटर में एक दरगाह दिखाई दी। हमें बताया गया कि उस दरगाह पर मुस्लिमों से कहीं ज्यादा हिन्दू आते हैं। हमें ये भी बताया गया कि उस दरगाह पर अगरबत्ती और चादरपोशी आदि का टर्न ओवर लाखों रुपए महीने का है।
तुलसीपुर बाजार के बाहर बनी दरगाह
खाली स्थानों पर मज़ारों के पक्के और नए निर्माण भी जरवा बॉर्डर की तरफ बढ़ते हुए साफ देखे जा सकते हैं।
जरवा बॉर्डर मार्ग पर एक और मज़ार
इन मज़ारों के बारे में एक ख़ास बात का भी पता लगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले इन्हें एक निश्चित हिस्से में पक्का बनाया गया। फिर इनके आस-पास के एक बड़े हिस्सा का पक्का निर्माण करवाया गया। अधिकतर मामलों में यह निर्माण लगभग मुख्य सड़क तक पहुँचता दिखाई देता है।
सड़क से सटी ईदगाह
जरवा बॉर्डर की तरफ जाते हुए हमने पाया कि इबादतगाहों का निर्माण न सिर्फ सड़क के किनारे हुआ है बल्कि गाँवों के बीच में भी मस्जिदों को देखा जा सकता है। ऐसी मस्जिदें हमें कई गाँवों में दिखीं।
गाँव के बीच मस्जिद
मदरसातुल मुदा
जरवा बॉर्डर के रास्तों पर हमें कई मदरसे भी दिखाई दिए। इन मदरसों में पढ़ने वाले कई छात्र भी मौजूद थे।
लाल किले में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘लव कुश रामलीला’ के दशहरा उत्सव में साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार प्रभास बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे और रावण दहन करेंगे। बता दें, बीते 2 सालों में कोरोना महामारी के चलते यह विशाल आयोजन नहीं हो सका था। लेकिन, इस बार होने वाली रामलीला और रावण दहन में कई सुपरस्टार शामिल होंगे।
ऐतिहासिक लव कुश रामलीला में रावण दहन के लिए प्रभास को चुने जाने पर बात करते हुए ‘लव कुश रामलीला’ समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने कहा, “साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एक बहुत लोकप्रिय नाम होने के अलावा, प्रभास ऐसे प्रोजेक्ट कर रहे हैं जो हमारे भारतीय इतिहास में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। प्रभास ने बाहुबली फिल्म की और अपनी आगामी परियोजना आदिपुरुष में भी राम की भूमिका निभाते नजर आएँगे। इसलिए, हमें लगा कि इस साल रावण दहन करने के लिए वह सबसे बेहतर विकल्प हैं।”
अर्जुन कुमार ने यह भी कहा, “एक और कारण है कि हमने प्रभास को आमंत्रित किया है। यह कारण है उनकी लोकप्रियता। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर्स ने आज पूरे भारत में इतनी लोकप्रियता हासिल की है। उनमें प्रभास सबसे आगे हैं। हमें अभी अन्य हस्तियों को आमंत्रित करना है, हम बेहद खुश हैं कि प्रभास आ रहे हैं। इस कार्यक्रम में आकर वह नई पीढ़ी और युवाओं को हमारी संस्कृति की ओर आकर्षित करेंगे।”
अर्जुन कुमार ने यह भी कहा है कि दशहरे में कुल तीन पुतले होंगे। एक पुतला रावण का, एक कुंभकरण का और एक मेघनाद का। प्रभास इन तीनों ही पुतलों का दहन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल के पुतले 100 फीट ऊँचे होंगे। लव कुश रामलीला समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी आमंत्रित किया है। हालाँकि, इन दोनों की उपस्थिति की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
गौरतलब है कि प्रभास अपनी आगामी फिल्म ‘आदिपुरुष’ के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। आदिपुरुष हिंदुओं की आस्था और प्रेरणा के प्रतीक महाकाव्य रामायण पर आधारित है। इस फिल्म में प्रभास के अलावा सोनल चौहान, सैफ अली खान और कृति सेनन को अहम किरदारों में कास्ट किया गया है।फिल्म का निर्माण टी-सीरीज फिल्म्स और रेट्रोफाइल्स द्वारा किया जा रहा है। इसे एक ही समय में हिंदी और तेलुगु दोनों में शूट किया गया था। तमिल, मलयालम और कन्नड़ में भी इस फिल्म को डब करके रिलीज किया जाएगा।
पौराणिक ऐतिहासिक महाकाव्य रामायण पर आधारित इस फिल्म में प्रभास राम की भूमिका में नजर आएँगे। जबकि, कृति सेनन जानकी (सीता) और सैफ अली खान लंकेश (रावण) के रूप में दिखाई देंगे। आदिपुरुष 12 जनवरी, 2023 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज होगी।
महाराष्ट्र की एक 17 वर्षीय यूट्यूबर पिता की डाँट के बाद घर छोड़ कर भाग गई थी, जो कि अब प्रदेश के इटारसी स्टेशन में मिली है। बताया जा रहा है, घर में मिलीडाँट के बाद यह लड़की अपने पैतृक घर लखनऊ जा रही थी। इस लड़की को फैंस के बीच बिंदास काव्या के नाम से जाना जाता है। जबकि वास्तविक नाम काव्या यादव है। इसके यूट्यूब में 44 लाख सब्सक्राइबर्स हैं हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में रहने वाली यूट्यूबर काव्या शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को दोपहर 2 बजे घर से निकल गई थी। जिसके बाद, उसके माता-पिता ने उसकी खोज करनी शुरू की। इसके बाद भी काव्या का कुछ पता नहीं चल रहा था।
काफी परेशान होने के बाद, काव्या के माता-पिता ने उसके यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड करते हुए काव्या के लापता होने की जानकारी दी थी। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा था। काव्या के पैरेंट्स ने उसके गुम होने की सूचना औरंगाबाद के छौनी थाने में भी दी थी। इसके बाद औरंगाबाद पुलिस और जीआरपी ने उसे ढूँढने के लिए संयुक्त अभियान शुरू करते हुए कई थानों को सूचना दी थी।
इस सूचना और वायरल वीडियो के आधार पर ही जीआरपी को जानकारी मिली की काव्या महाराष्ट्र के भुसावल से आ रही कुशीनगर एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में है। इसके बाद इटारसी जीआरपी ने सक्रियता दिखाते हुए उसे ढूँढ लिया और फिर उसके पैरेंट्स को इसकी सूचना दी।
इस पूरे मामले में, भोपाल रेल एसपी हितेश चौधरी ने कहा है, “औरंगाबाद पुलिस ने सूचना दी थी कि 17 साल की किशोरी यूट्यूब स्टार है, और वहाँ से लापता हुई है। संभवत: वह एलटीटी-गोरखपुर कुशीनगर एक्सप्रेस में सवार हुई है। इटारसी में कुशीनगर एक्सप्रेस में सर्चिंग की तो किशोरी स्लीपर कोच में बैठी मिली। चाइल्ड लाइन की मदद से उसे थाने लाया गया। रात 12 बजे किशोरी के परिजन इटारसी पहुँचे।” उसके मिल जाने के बाद माता-पिता ने YouTube से सूचना दी कि वो उसे लेने जा रहे हैं।