Homeदेश-समाजदिल्ली में CPR पर इनकम टैक्स की रेड, कॉन्ग्रेस नेता की बेटी के हाथों...

दिल्ली में CPR पर इनकम टैक्स की रेड, कॉन्ग्रेस नेता की बेटी के हाथों में है थिंक टैंक की कमान: गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की कर चोरी से जुड़ा है मामला

चुनाव आयोग ने हाल ही में फिजिकल सत्यापन के दौरान गैर-मौजूद पाए जाने के बाद 87 संस्थाओं को RUPP की सूची से हटा दिया था। आयोग ने कहा था कि वह 2,100 से अधिक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जो नियमों और चुनावी कानूनों का उल्लंघन कर रहे है।

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने दिल्ली के थिंक टैंक सहित कई राज्यों में बुधवार (7 सितंबर 2022) को छापेमारी की। यह छापेमारी पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) और उनके कथित कर चोरी से संबंधित है। जिन-जिन जगहों पर छापेमारी की गई उनमें दिल्ली के अलावा, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि शामिल हैं।

आयकर विभाग ने जिन जगहों पर छापेमारी की है, उनमें दिल्ली स्थित नामी थिंकटैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ (CPR) भी शामिल है। CPR ने अपनी वेबसाइट पर फंडिंग के बारे में कहा है कि भारत सरकार द्वारा एक गैर-लाभकारी संस्था (NGO) के रूप में मान्यता प्राप्त होने के कारण इसमें दिया गया योगदान कर-मुक्त है।

एनडीटीवी के अनुसार, CPR ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, “सीपीआर फाउंडेशन, कॉर्पोरेट CSR, सरकारों और बहुपक्षीय एजेंसियों सहित विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से अनुदान प्राप्त करता है।” साल 1973 में स्थापित इस संस्था के अनुसार, वार्षिक लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

बात दें कि CPR भाजपा और सरकार के खिलाफ प्रोपगेंडा चलाता रहा है। इसकी मुख्य कार्यकारी और अध्यक्ष यामिनी अय्यर हैं, जो कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी हैं। वहीं, इसकी गवर्निंग बोर्ड की अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पूर्व पूर्व प्रोफेसर मीनाक्षी गोपीनाथ हैं। प्रताप भानु मेहता भी इसके अध्यक्ष रह चुके हैं।

आयकर विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई आरयूपीपी, उनसे जुड़ी संस्थाओं, ऑपरेटरों और अन्य के खिलाफ एक साथ शुरू की गई है। माना जाता है कि आयकर विभाग की यह कार्रवाई चुनाव आयोग (EC) की सिफारिश पर की गई है।

चुनाव आयोग ने हाल ही में फिजिकल सत्यापन के दौरान गैर-मौजूद पाए जाने के बाद 87 संस्थाओं को RUPP की सूची से हटा दिया था। आयोग ने कहा था कि वह 2,100 से अधिक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जो नियमों और चुनावी कानूनों का उल्लंघन कर रहे है।

ये संस्थान फंडिंग का विवरण और उन्हें देने वालों के नाम-पते देने में आनाकानी करते रहे हैं। इनमें से कुछ पार्टियाँ ‘गंभीर’ वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त रहने की बात कही गई है। इसके बाद आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -