एक तरफ राज्य में लव जिहाद की घटनाओं में महिलाओं को जिंदा जलाया और मौत के घाट उतारा जा रहा था तो दूसरी तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई और दुमका के विधायक बसंत सोरेन अंडरगारमेंट खरीदने के लिए दिल्ली जा रहे थे। यह बात स्वयं मुख्यमंत्री के भाई ने कही है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बता दें कि दुमका में अंकिता नाम की एक नाबालिग छात्रा को शाहरुख नाम के शख्स ने अपने दोस्त के साथ मिलकर जिंदा जला दिया था। पाँच दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के लिए अंतत: वह जंग हार गई थी। लेकिन, उस क्षेत्र के विधायक बसंत ना ही लड़की को देखने अस्पताल गए और ना ही मौत के बाद उस गाँव में पहुँचे।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन के गाँव खजूरिया में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि राज्य में उथल-पुथल के बीच में वे दिल्ली क्यों चले गए थे। इस पर बसंत सोरेन ने कहा, “हाँ गए थे, एक्चुअली मेरे अंडरगारमेंट्स खत्म हो गए थे। अंडरगारमेंट्स लेने ही दिल्ली चला गया था।” पत्रकारों ने फिर पूछा कि क्या वे अंडरगारमेेंट दिल्ली से लाते हैं, तब उन्होंने कहा कि हाँ।
इतना ही नहीं, दुमका में पेट्रोल डालकर जलाई गई अंकिता के परिजनों से मिलने आए भाजपा नेताओं को उन्होंने निचले दर्जे का बताया। दुमका विधायक ने कहा कि बसंत सोरेन ने कहा कि किसी के घर में मौत हुई है और उसमें घटिया राजनीति करने के लिए लोग हेलीकॉप्टर से आते हैं और हेलीकॉप्टर से चले जाते हैं।
अपने भाई का बचाव करते हुए बसंत सोरेन ने कहा कि खनन घोटाला मामले में राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जो भी पत्र भेजा गया है, उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। इससे हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा मिलता है।
भारत में जब हिंदू देवी-देवताओं को लेकर अपमानजनक फिल्में और वेब-सीरीज बनाई जाती हैं, तब कथित बुद्धिजीवी और लिबरल गिरोह उसके समर्थन में आ जाता है। वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम देशों में ‘इस्लामी मूल्यों’ के खिलाफ दृश्य दिखाने पर OTT कंपनी नेटफ्लिक्स को चेतावनी मिली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ,ओटीटी के सबसे बड़े प्लेटफॉर्म्स में से एक नेटफ्लिक्स (Netflix) को इस्लामी देशों की ओर से चेतावनी दी है कि वो ऐसे कंटेंट का प्रसारण रोक दे, जो इस्लाम और सामाजिक मूल्यों के विपरीत हो। धमकी दी गई है कि अगर नेटफ्लिक्स ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ काउंसिल की ओर से लीगल एक्शन लिया जा सकता है।
नेटफ्लिक्स को ये चेतावनी गल्फ कोऑपरेशन देशों की काउंसिल में शामिल सभी देशों के सदस्यों द्वारा एक जॉइंट स्टेटमेंट के माध्यम से दी गई है। बता दें गल्फ देशों की इस काउंसिल में नामी इस्लामी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, ओमान और कतर भी शामिल हैं। इन सबके इस जॉइंट स्टेटमेंट में कई अन्य बातें भी कही गई हैं।
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काउंसिल द्वारा दिए गए इस सामूहिक बयान में कहा गया है कि नेटफ्लिक्स ऐसे कंटेंट का प्रसारण कर रहा है, जो खाड़ी देशों के मीडिया कंटेंट को लेकर नियम-कानूनों का उल्लंघन है। इसके साथ-साथ गल्फ कोऑपरेशन देशों की काउंसिल की ओर से नेटफ्लिक्स को यह भी कहा गया है कि बच्चों के लिए प्रसारित हो रहा कुछ कंटेंट भी हटाया जाए।
वहीं इस मामले में अभी तक नेटफ्लिक्स की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। बता दें वर्ष 2019 में नेटफ्लिक्स के एक सीरीज में सऊदी अरब के शासन की आलोचना कर दी गई थी, जिसके बाद ओटीटी कंपनी को उस एपिसोड की मजबूरन स्ट्रीमिंग भी रोकनी पड़ी थी।
कई इस्लामी मुल्कों ने जून 2022 में ही ‘डिज्नी+हॉटस्टार’ की फिल्म ‘लाइटईयर’ के प्रसारण पर भी बैन लगा दिया था। इस फिल्म में दो समलैंगिक किरदारों के KISS वाले दृश्य पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। बताया जा रहा है कि कई इस्लामिक देशों में समलैंगिकता को एक अपराध के तौर पर देखा जाता है।
बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और अभिनेत्री आलिया भट्ट् (Alia Bhatt) अपनी फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ की रिलीज से पहले मंगलवार (6 सितंबर, 2022) को उज्जैन में भगवान महाकाल का दर्शन करने पहुँचे थे। लेकिन, वहाँ हिंदू संगठनों के विरोध के चलते उन्हें बिना दर्शन के ही वापस लौटना पड़ा। इन खबरों को लेकर मध्य प्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने एक बयान जारी किया है।
उन्होंने कहा कि अभिनेता रणबीर कपूर और अभिनेत्री आलिया भट्ट के महाकाल बाबा के दर्शन की पूरी व्यवस्था उज्जैन प्रशासन ने की थी, लेकिन प्रशासन के आग्रह के बावजूद वे दोनों खुद दर्शन के लिए नहीं गए। नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “प्रदर्शन होगा ये एक अलग विषय है, लेकिन दर्शन के लिए कोई रोक नहीं है। उनके साथ आए बाकी लोगों और अयान मुखर्जी ने भी दर्शन किए। वहाँ पूरी व्यवस्था की गई थी। इनसे भी आग्रह किया गया था। मेरी खुद प्रशासन से बात हुई। प्रशासन के आग्रह के बावजूद रणबीर और आलिया खुद दर्शन करने नहीं गए। कलाकारों को भी लोगों की भावनाओं को आहत करने वाले शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।”
फिल्म अभिनेता रणबीर कपूर और अभिनेत्री आलिया भट्ट के महाकाल बाबा के दर्शन की पूरी व्यवस्था उज्जैन प्रशासन ने की थी, लेकिन प्रशासन के आग्रह के बावजूद रणबीर और आलिया खुद दर्शन के लिए नहीं गए।
वैसे लोगों की भावनाओं को आहत करने वाले शब्दों का प्रयोग कलाकारों को नहीं करना चाहिए। pic.twitter.com/uiWB2tf9Hj
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (6 सितंबर, 2022) को रणबीर और उनकी पत्नी आलिया महाकाल मंदिर में दर्शन करने उज्जैन पहुँचे थे। मंदिर के बाहर हिंदू संगठनों ने काली पट्टी दिखाकर उनका विरोध किया। उन्होंने रणबीर और आलिया को मंदिर में घुसने तक नहीं दिया। उनका कहना था कि वे रणबीर जैसे ‘गौ-भक्षक’ को महाकाल के मंदिर में नहीं जाने देंगे।
बता दें कि ‘ब्राह्मास्त्र’ 9 सितंबर 2022 को रिलीज होने जा रही है। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ का विरोध अभिनेता की ‘बीफ’ टिप्पणी को लेकर हो रहा है। इसमें उन्होंने खुद को सबसे बड़ा बीफ लवर बताया था। साथ ही आलिया ने भी हाल ही में कहा था कि जो लोग उन्हें पसंद नहीं करते हैं, वो फिल्म देखने मत जाएँ। वहीं डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने अच्छे से महाकाल के दर्शन किए थे। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। डायरेक्टर ने पूजा करते हुए अपने इंस्टाग्राम पर फोटो भी शेयर की है।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की पाँचवीं रिपोर्ट:
नेपाल सीमा पर रिपोर्टिंग के दौरान हमें स्थानीय लोगों से ‘थारू’ जनजाति का नाम सबसे अधिक सुनाई दिया। हमें यह भी बताया गया कि भारत और नेपाल दोनों के अंदर सीमावर्ती क्षेत्रों में हिन्दू समाज की थारू जनजाति के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं। जानकारी यह भी दी गई कि थारू जनजाति अपनी प्राचीन संस्कृति और परम्पराओं को आज भी ज्यों की त्यों सहेजे हुए हैं। इन तमाम बातों को परखने के लिए हम नेपाल की जरवा सीमा पर मौजूद थारू जनजाति की लगभग 3500 आबादी वाले एक गाँव मोहकमपुर में गए।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
मोहकमपुर बलरामपुर जिले के जरवा थानाक्षेत्र में आता है और यहाँ से मुख्य बाजार तुलसीपुर लगभग 15 किलोमीटर दूर है। इस गाँव के बाद जंगली क्षेत्र शुरू हो जाता है और कुछ ही दूरी पर नेपाल की सीमा आ जाती है। गाँव में घुसने से पहले हमें एक बोर्ड दिखाई पड़ा, जिस पर ‘स्वर्गीय श्री कन्हैयालाल स्मृति द्वार’ लिखा हुआ था। गाँव तक पक्की सड़क जाती है। इस गाँव के खेम सिंह राणा के घर के आगे चौपाल के रूप में कुछ लोग बैठे बात कर रहे थे। वहाँ हम रुक गए और चर्चा में शामिल हो गए।
गाँव का प्रवेश द्वार
‘हमारे पूर्वज महाराणा प्रताप के सिपाही’
खेम सिंह से चर्चा शुरू हुई तो उन्होंने अपने पूर्वजों को महाराणा प्रताप का साथी और सहयोगी बताया। खेम सिंह ने कहा कि उनके पुरखे देश और धर्म बचाने के लिए राणा प्रताप के साथ मुगलों के खिलाफ लड़े थे।
उन्होंने यह भी बताया कि जब राजा ही नहीं बचे तब प्रजा क्या करती और यही सोच कर उनके पूर्वज अपना धर्म बचाने के लिए पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में शरण ले लिए। खेम सिंह ने माना कि नेपाल सीमा पर थारू जनजाति अच्छी-खासी संख्या में हैं।
सीमाओं पर बढ़ी है मुस्लिम आबादी
खेम सिंह ने बताया कि वो जन्म से ही सीमा के उसी गाँव मोहकमपुर में रहे हैं। उनके अनुसार पहले के मुकाबले अब मुस्लिमों की नेपाल बॉर्डर पर आबादी बढ़ी है। इसी गाँव के कोटेदार और थारू जनजाति के ही राजेश ने हमें बताया कि भारत की सीमा में नेपाल के रास्ते मुस्लिम प्रवेश किए और वो जमीन आदि खरीद कर बसते चले गए। राजेश ने बताया कि मजारें पहले से ही बनी हुई हैं लेकिन मदरसे नए बने हैं।
इसी गाँव व समुदाय के देवशरण ने भी कहा कि सीमा पर मस्जिद और मजारों के साथ मुस्लिम आबादी पहले के मुकाबले बढ़ी है। पड़ोसी गाँव के मनोज ने भी नेपाल बॉर्डर पर मुस्लिम आबादी बढ़ने के मीडिया रिपोर्ट्स के दावों को सही माना।
ग्राम प्रधान शकीला: ग्राम सभा में 3 मस्जिदें और 1 मदरसा
चौपाल में मौजूद लोगों ने बताया कि थारू बहुल होने के बाद भी वहाँ की ग्राम प्रधान शकीला हैं। इसी के साथ वहाँ पता चला कि जो प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा, वो भी मुस्लिम समुदाय का ही है। ग्रामीणों ने इलाके के टंडवा और शेखड़ीह गाँवों को मुस्लिम बाहुल्य बताया। ग्रामीणों ने ये भी कहा कि पहले रास्ते और घरों में चोरी होती थी लेकिन जबसे योगी सरकार आई, तब से चोरी बंद हो गई। खेम सिंह ने कहा कि कभी-कभार लव जिहाद जैसी घटनाएँ भी सामने आ जाती हैं।
मोहकमपुर में थारू लोगों के मोहल्ले में हमें जानकारी दी गई कि उस पूरे ग्रामसभा में लगभग 2000 मुस्लिम आबादी है। हमें यह भी जानकारी मिली कि ग्राम सभा में 3 मस्जिदें और 1 मदरसा हैं। हालाँकि थारू समुदाय की बहुलता वाले मोहल्ले में मस्जिद नहीं दिखी। इस मोहल्ले में लोगों को भगवान शिव की पूजा करते देखा गया।
योगी सरकार में बहन-बेटियाँ सुरक्षित
खेम सिंह के मुताबिक थारू जनजाति की बहन बेटियों की रक्षा पिछली सरकारों में खुद उनके परिजनों को करनी पड़ती थी लेकिन अब ये दायित्व सरकार उठा रही है। चौपाल में मौजूद अन्य लोगों ने बताया कि अब किसी की हिम्मत नहीं होती कि वो उनके घरों की लड़कियों को नजर उठा कर देख भी लें।
गाँव मोहकमपुर के ग्रामीण
सुरक्षा और विकास के मुद्दे पर चौपाल में बैठे राजेश, देवशरण और खेम चंद ने एक स्वर में कहा कि जब से योगी सरकार आई है, तब से थारू जनजाति की सुनवाई शासन और प्रशासन स्तर पर हो रही है। उन्होंने बताया कि अब उनको सभी योजनाओं का फायदा मिल रहा है। वहाँ मौजूद सभी इस बात से सहमत थे कि पिछली सरकारों में उनकी अनदेखी करते हुए उन सभी को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता था।
हमसे बात कर रहे खेम सिंह ने बताया कि थारू जनजाति के लोग मेहनत-मजदूरी और खेती कर के अपने परिवार का पेट पालते हैं। वहीं राजेश कुमार के मुताबिक सरकारी नौकरियों में थारू लोगों की संख्या बेहद कम है। ग्रामीणों के मुताबिक अब हालात थोड़े-थोड़े बदल रहे हैं। अभी के युवा इंटरमीडियट और ग्रेजुएशन भी पास कर रहे हैं और पढ़ाई की तरफ ध्यान दे रहे।
नेपाल में वामपंथी आंदोलन और भारतीय सुरक्षा बल
कोटेदार राजेश के घर पर लगी चौपाल में सभी ने सामूहिक रूप से कहा कि जब 1990 के दशक में नेपाल में वामपंथी आंदोलन हो रहा था, तब उनके गाँव तक ब्लास्ट की आवाजें सुनाई देती थीं। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ ही दूरी पर खून-खराबा देखने के बावजूद भी वो लोग बॉर्डर पर तैनात जवानों के दम पर निश्चिंत रहते थे। सभी ने एक स्वर में बताया कि सारा हंगामा बॉर्डर के उस पार ही हुआ था।
मोहकमपुर के गाँव वालों ने हमें बताया कि वामपंथी हिंसा के दौरान नेपाली पुलिस के जवानों की लाशों के साथ कुछ घायल वर्दी वाले भी भारत की सीमा में बचने के लिए आए थे। ग्रामीणों ने बताया कि तब भारतीय जवानों ने न सिर्फ उनकी माओवादियों से जान बचाई थी बल्कि घायलों का इलाज भी करवा कर हर सम्भव मदद की थी। खेम सिंह ने बताया कि उन्ही हमलों के बाद से बॉर्डर पर मौजूद नेपाल का कोयलाबास बाजार वीरान हो गया है।
थारू जनजाति के लोग सीमा पर तैनात पैरामिलिट्री SSB (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों के बर्ताव से बेहद खुश और संतुष्ट दिखे। ग्रामीणों ने SSB के जवानों को अपना भाई कहा। इसी के साथ गाँव वालों ने योगी सरकार में जिला पुलिस का भी व्यवहार अपने लिए बदला हुआ बताया।
कपड़े बेचते मुमताज़ अली
हमारी रिपोर्टिंग के दौरान उसी मोहल्ले में मुमताज़ अली बाइक पर कपड़े रख कर बेचते दिखे। मुमताज़ ने बाइक पर ढेर सारा सामान लाद रखा था। उन्होंने खुद को वहाँ से 200 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का रहने वाला बताया। उन्होंने कहा कि वो पास की बाजार तुलसीपुर में किराए पर कमरा लिए हैं। अपनी बाइक पर रखे कुल सामान की कीमत मुमताज़ ने लगभग 25 हजार रुपए बताई। उन्होंने थोक माल सीतापुर से उठाने की बात कही और पूरे बॉर्डर इलाकों में सामान बिकना बताया।
बॉर्डर पर सामान बेचते मुमताज अली
‘देशद्रोही उठाते हैं थारू लोगों की गरीबी का फायदा’ – भाजपा विधायक
नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के तुलसीपुर से भाजपा विधायक कैलाशनाथ शुक्ला ने कहा कि देशविरोधी तत्व कभी थारू लोगों की गरीबी का फायदा उठाते हैं तो कभी उनकी कम शिक्षा के दर का। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी भाजपा सरकार इस मामले में ध्यान दे रही है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बस और शराब घोटाले के बाद अब उन पर स्टाम्प ड्यूटी चोरी के आरोप लगे हैं। दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (VK Saxena) ने उनके खिलाफ जाँच के आदेश दिए हैं।
सीएम केजरीवाल पर आरोप है कि हरियाणा के भिवानी में केजरीवाल ने 4.54 करोड़ रुपए में 3 प्लॉट बेचे थे, जिसकी कीमत उन्होंने कम करके दिखाई है। कागज पर इनकी कुल कीमत सिर्फ 72.72 लाख रुपए दिखाई गई है। शिकायत मिलने के बाद उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जाँच के लिए कहा है।
बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ठिकानों पर शराब घोटाले को लेकर सीबीआई ने छापेमारी की थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेस करके उपराज्यपाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
शिकायत में कहा गया है कि सीएम केजरीवाल ने 15 फरवरी 2021 को अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के माध्यम से 45,000 रुपए प्रति वर्ग गज के बाजार मूल्य पर अपने प्लॉट बेचे थे। वहीं, कागजों पर इसका मूल्य सिर्फ 8,300 प्रति वर्ग गज बताया गया है। शिकायत में कहा गया है, “इनमें से दो संपत्तियाँ खुद अरविंद केजरीवाल के नाम पर थीं, जबकि तीसरी संपत्ति उनके पिता गोविंद राम के नाम पर थी।”
शिकायतकर्ता का कहना है कि बाजार मूल्य से कम रेट दिखाकर सीएम केजरीवाल ने न सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी में 25.93 लाख रुपए का चूना लगाया, बल्कि पूंजीगत लाभ कर के रूप में 76.4 लाख रुपए की भी हेरफेर की।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कागज पर 8,300 वर्ग गज की दर से 340 वर्ग गज के प्लॉट को 24.48 लाख रुपए, 416 वर्ग गज के प्लॉट को 30 लाख रुपए और 254 वर्ग गज के प्लॉट को 18.24 लाख रुपए में बेचना दिखाया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन भूखंडों का बाजार मूल्य बहुत अधिक है और उन्होंने 45,000 वर्ग गज के हिसाब से इसे बेचा था। इन तीनों भूखंडों के लिए उन्होंने स्टाम्प शुल्क 1,41,200 रुपए, 1,73,700 रुपए और 1,12,500 रुपए भुगतान किया।
राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाल रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने आंदोलनजीवियों का समर्थन लिया है। योगेंद्र यादव और मेधा पाटकर से लेकर अरुणा रॉय और तुषार गाँधी जैसों ने कॉन्ग्रेस की इस यात्रा को समर्थन दिया है। राहुल गाँधी को अर्बन नक्सलियों के समर्थकों और टुकड़े-टुकड़े गिरोह से भी अपनी यात्रा को सफल बनाने के लिए समर्थन लेने में गुरेज नहीं है। अब उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से भी प्रेरणा ली है।
2014 में इमरान खान भी कर चुके हैं कंटेनरों का इस्तेमाल, फिर बने PM
2014 में जब इमरान खान प्रधानमंत्री नहीं बने थे और आंदोलनों के जरिए वो जनता के बीच खुद को लोकप्रिय बना रहे थे, तब वो कंटेनरों में ही रहा करते थे। उसी कंटेनर में बैठ कर वो यात्रा करते थे। उसमें सारी व्यवस्थाएँ होती थीं। तब इमरान कहें ने एक कंटेंटर पर 1 करोड़ रुपए के आसपास खर्च किए थे। राहुल गाँधी भी अब 150 दिन इसी तरह के कंटेंटर में रहेंगे। कॉन्ग्रेस पार्टी को लगता है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ काफी ऐतिहासिक होने वाली है।
पार्टी को लगता है कि इससे देश की राजनीति में कॉन्ग्रेस के अच्छे दिन वापस आ जाएँगे और राहुल गाँधी ठीक उसी तरह प्रधानमंत्री के पद तक पहुँचने में कामयाब होंगे, जैसे इमरान खान ने कंटेंटर में रह कर पाकिस्तानियों की सहानुभूति बटोरी थी और आम चुनाव जीता था। कन्याकुमारी से कश्मीर तक 3750 किलोमीटर की यात्रा में वो कंटेंटर में ही रहेंगे और सोएँगे। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले इस कदम को कॉन्ग्रेस के वफादार ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताने में जुट गए हैं, जिसके सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राहुल गाँधी मुकाबला करेंगे।
कॉन्ग्रेस पार्टी ये कह कर इसका प्रचार करने में लगी है कि राहुल गाँधी इस पूरी यात्रा के दौरान किसी होटल वगैरह में नहीं रुकेंगे, बल्कि कंटेनर में ही रहेंगे। इन कंटेनरों में उनकी सारी सुख-सुविधाओं का ख्याल रखा जाएगा। उसमें सोने के लिए बिस्तर और शौचालय के अलावा AC तक की व्यवस्था रहेगी। राहुल गाँधी के अलावा अन्य नेताओं के लिए भी ऐसी ही व्यवस्थाएँ की गई हैं। कन्याकुमारी के एक गाँव में ऐसे 60 कंटेनर रखे गए हैं, जो अपने-आप में एक अलग गाँव की तरह है।
Bharat Jodo Yatra: Rahul Gandhi to sleep in container for next 150 days
इन कंटेनरों को इसी तरह प्रतिदिन रात के समय वहाँ एक गाँव की तरह बसाया जाएगा, जहाँ यात्रा रुकेगी। सुबह नित्यक्रिया के बाद वापस नेतागण यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे और ये क्रम 150 दिनों तक चलता रहेगा। 2014 में इमरान खान इसी तरह की चीजें आजमा चुके हैं, जब वो कंटेनर से घूमते हुए तत्कालीन सरकार के खिलाफ आंदोलन करते थे और इस दौरान पुलिस से भी उनके समर्थकों की भिड़ंत होती थी। तब वहाँ के प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ के खिलाफ खुद को स्थापित करने के लिए उन्होंने ‘फ्रीडम मार्च’ निकाला था।
उस दौरान इंटरनेट पर एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें इमरान खान इसी तरह के एक कंटेनर में सोते हुए दिखे थे। उनकी पार्टी PTI के कार्यकर्ताओं के साथ इन लोगों ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की तरफ मार्च किया था। अब समय-समय पर विदेश यात्राओं पर छुट्टियाँ मनाने जाने वाले राहुल गाँधी भी इसी तरह के तिकड़म आजमाएँगे। भारतीय राजनीति में भी चंद्रशेखर और इंदिरा गाँधी समेत तमाम नेताओं ने यात्राएँ निकाली हैं, अब राहुल गाँधी को वैसी ही सफलता की उम्मीद है।
अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब 60 कंटेनर और हजारों लोग एक साथ सड़क से गुजरेंगे, जिनमें हो सकता है कि कई नेताओं की गाड़ियाँ भी हों, तब ट्रैफिक जाम के कारण जो अफरा-तफरी मचेगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा? 60 कंटेनर बहुत बड़ी संख्या हैं और जहाँ से भी राहुल गाँधी गुजरेंगे, वहाँ कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता-कार्यकर्ता उनके साथ चलेंगे। ऐसे में परिवहन में बड़ी समस्या आने की संभावना है, खासकर बड़े शहरों से गुजरते वक्त।
कहीं कॉन्ग्रेस की कुछ ऐसी ही तो योजना नहीं है कि जिस तरह किसानों ने एक साल तक दिल्ली को बंधक बना कर रखा और शाहीन बाग़ वालों ने जैसे लाखों लोगों को राष्ट्रीय राजधानी में महीनों परेशान किया, वैसा ही कुछ करने से कॉन्ग्रेस पार्टी को लोगों की सहानुभूति मिलेगी और वो मीडिया की नजरों में भी आएगी? ‘किसान आंदोलन’ के कारण तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े केंद्र सरकार को। CAA के नियम अब तक नहीं बने हैं।
क्या पूरे देश में दोहराया जाएगा शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन वाला मॉडल?
क्या कॉन्ग्रेस पार्टी उस माहौल को पूरे देश में ले जाना चाहती है, जो दिल्ली को झेलना पड़ा? आंदोलनजीवियों के साथ और ये 60 कंटेनर्स से तो ऐसा ही लगता है। पाकिस्तान में तब विपक्ष में रहे इमरान खान की रैलियों में भी हिंसा होती थी, पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़ते थे और कार्यकर्ताओं-पुलिस में भिड़ंत होती थी, क्या इस रणनीति के सहारे भारत को राहुल गाँधी अब पाकिस्तान में तब्दील करेंगे? जो आंदोलनजीवी उनके साथ इस यात्रा में हैं, वो सब तो यही करने के विशेषज्ञ हैं।
योगेंद्र यादव कभी किसान तो कभी मुस्लिम एक्टिविस्ट बन जाते हैं। अरुणा रॉय सोनिया गाँधी की उस सलाहकार समिति में रही हैं, जो यूपीए काल में देश चलाती थी। मेधा पाटकर ने पर्यावरण के नाम पर कच्छ को दशकों पानी के लिए तरसाए रखा। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज बीजी कोलसे पाटिल ने मुस्लिमों को भड़कते हुए उन्हें पुलिस से न डरने को कहा था। वामपंथी आतंकियों का बचाव करने वाले तुषार गाँधी भी उनके साथ हैं। कन्नड़ लेखक देवानुरा महादेव पीएम मोदी पर उद्योगपतियों का साथ देने का आरोप लगा चुके हैं।
इसी तरह मजदूरों, मुस्लिमों, आदिवासियों और सामाजिक मुद्दों के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले ऐसी लोगों को राहुल गाँधी ने इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अपने साथ जोड़ रखा है, जो केंद्र सरकार को अस्थिर करने को अपना एकमात्र उद्देश्य समझते हैं और भीड़तंत्र व अराजकता के सहारे बात मनवाने के आदी है। इस यात्रा में ‘लव जिहाद’ और इस्लामी-मिशनरी धर्मांतरण गिरोहों पर तो बात होगी नहीं, जो असली समस्या देश को कमजोर कर रही है।
एक और बात जानने लायक है कि अगस्त 2014 में इमरान खान और PTI कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए इस्लामाबाद में पुलिस ने कंटेनर्स का ही इस्तेमाल किया था। सैकड़ों स्टील के बड़े-बड़े बक्से सड़क पर रख दिए गए थे। पाकिस्तानी मौलवी उल-कादरी भी तब कंटेनरों में ही घूमा करते थे और उसकी खिड़की से जनता को संबोधित करते थे। कंटेनरों की इस अराजक राजनीति से तब पाकिस्तान में बड़ी अस्थिरता पैदा हो गई थी। एक बार तो इमरान खान को
राजस्थान में लंपी वायरस की वजह से एक महीने में 50 हजार से ज्यादा गायों की मौत हो गई है। इन गोवंश को दफनाने के बजाय खुले में फेंका जा रहा है, जिससे रिहायशी इलाकों में इंसानों के लिए नई बीमारी का खतरा पैदा हो रहा है। गोवंश में फैले इस वायरस की तुलना इंसानों के लिए जानलेवा रहे कोरोना वायरस से की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीकानेर जिले में लंपी बीमारी से रोजाना 200 से 300 गायों की मौत हो रही हैं, लेकिन प्रशासन इन आँकड़ों को छिपाने में लगा हुआ है। निगम प्रशासन की ओर से बीकानेर शहर से महज 5 किमी दूर जोरबीर में गायों के शव को खुले में फेंका गया है। हजारों गायों के शवों को जंगली जानवर और चील गिद्ध नोंच रहे हैं। 3 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों का दुर्गंध से जीना दूभर हो गया है। लोगों पर संक्रमण और बीमारी का खतरा मंडरा रहा है।
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने गायों की मौत पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है। वसुंधरा राजे ने कहा, “भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘माँ’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र अब तक कभी नहीं हुआ। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार लंपी संक्रमण से गाय को बचाने के लिए ना तो उपचार की व्यवस्था कर रही है और ना ही उन्हें मरने के बाद दो गज जमीन मिल रही है।”
भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र अब तक कभी नहीं हुआ। राजस्थान की कांग्रेस सरकार लंपी संक्रमण से गाय को बचाने के लिए ना तो उपचार की व्यवस्था कर रही है और ना ही उन्हें मरने के बाद दो गज जमीन मिल रही है।#lumpyskindisease#SaveCows#Rajasthanpic.twitter.com/8c4KnF8jmF
मरने के बाद खुले मैदान में पड़ी गायों की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने एक और ट्वीट किया, “यह तस्वीर भले ही बीकानेर की हो, लेकिन पूरे राजस्थान में आज गौमाता की यही स्थिति है। मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए, क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियाँ फेल रही है।”
यह तस्वीर भले ही बीकानेर की हो, लेकिन पूरे राजस्थान में आज गौमाता की यही स्थिति है। मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए। क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियां फेल रही है।#lumpyskindiseasepic.twitter.com/GMbH7hBReN
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बाबा महाकाल मंदिर मन्दिर (Baba Mahakal Temple) परिसर में महाकाल कॉरिडोर (Mahakal Corridor) के पहले चरण का काम लगभग पूरा होने वाला है। जिले के कलेक्टर आशीष सिंह ने कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया और कहा कि जो काम बचे हैं, उसे जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि कॉरिडोर के विकास के बाद कई तस्वीरें सामने आई हैं, जो इसकी खूबसूरती को दिखाती हैं।
लगभग 752 करोड़ रुपए की लागत से महाकाल कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। इसके पहले चरण की लागत लगभग 300 करोड़ रुपए है। इसी साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बाबा महाकाल दर्शन करने जाएँगे और इस दौरान पहले चरण के कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे।
इस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और वैदिक एप की लॉन्चिंग भी करेंगे। इस घड़ी की विशेषता है कि यह ग्रीनविच समय पद्धति व हिन्दू कालगणना के समय अनुसार होगी, जिसमें 24 घंटे के बजाए 30 घंटे की होगी। इसे लख़नऊ के एक व्यक्ति ने विकसित किया है।
सोशल मीडिया पर महाकाल कॉरिडोर के कुछ फोटो भी सामने आए हैं। इन फोटो में रात की रोशनी में जगमगाता महाकाल कॉरिडोर बेहद भव्य और खूबसूरत नजर आ रहा है। कॉरिडोर में वृक्षारोपण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसका काम पूर्ण होने के बाद यह और भी भव्य दिखेगा।
पहले चरण में महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिडवे जोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डेक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्पलेक्स, गणेश स्कूल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। 200 मीटर लंबा पैदल पथ का काम भी पूरा हो चुका है।
इसमें 108 शिवस्तंभ बनाए गए हैं, जिनमें भगवान शिव की विभिन्न मुद्राओं को अंकित किया गया है। पौराणिक सरोवर रूद्र सागर के किनारे विकसित हो रहा है। शिव, शक्ति और अन्य धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी करीब 200 मूर्तियों और म्यूरल्स के माध्यम से इसे सजाया गया है।
इसके साथ ही महाकाल थीम पार्क के अन्तर्गत महाकालेश्वर की कथाओं से युक्त म्यूरल वॉल तथा सप्त सागर हेतु डेक एरिया बनाया गया है। इस डेक के नीचे शॉपिंग क्षेत्र और बैठने की जगह बनाई गई है।
वहीं, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप कार, बस व दोपहिया वाहन की मल्टीलेवल पार्किंग बनकर तैयार हो चुकी हैं। इस क्षेत्र में धर्मशाला व अन्न क्षेत्र भी बनाए जा रहे हैं। मन्दिर के अंदर वाले भाग में सुरक्षा व्यवस्था के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और इन्हें एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स से जोड़ा गया है।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की रहने वाली एक मुस्लिम महिला रूबी खान ने बुधवार (7 सितंबर, 2022) को विधिवत गणपति विसर्जन किया। इससे पहले गणेश चतुर्थी के अवसर पर पूजा करने के बाद उन्हें मौलानाओं द्वारा फतवा भी दिया गया था। इसके बावजूद भी उन्हें नरोरा घाट पर बप्पा का विसर्जन किया। इस दौरान उन्होंने तमाम मौलानाओं से यह भी कहा कि वे इन फतवों से नहीं डरती हैं।
“हमने गणपति स्थापित किया था, आज उनका विसर्जन कर रहे हैं। मैंने भगवान गणेश की मूर्ति 31 तारीख को स्थापित की थी, तभी से मौलानाओं ने मेरे ऊपर ये फतवा जारी कर दिया कि ये हिंदू बन चुकी है, इसने अपने यहाँ मूर्ति रख ली है। इसको इस्लाम से खारिज करो और परिवार को जिंदा जला कर मार डालो – इस तरह की धमकियाँ आने लगी। बाहर निकलती हूँ तो उलटी-सीधी कमेंटबाजी की जाती है कि हिंदू जा रही है ,लेकिन मुझे फतवा से और मौलानाओं से कोई डर नहीं है। मैंने जिस तरीके से धूमधाम से गणपति की स्थापना की थी, उसी धूमधाम से विसर्जन करने जा रही हूं।”
रूबी खान ने गणपति विसर्जन को लेकर ये कहा
बताया जा रहा है कि गणेश विसर्जन के दौरान रूबी खान के पति आसिफ खान और उनकी दोनों बहनें फराह एवं निदा भी मौजूद रहीं। वहीं महिला की सुरक्षा की बात करें तो अलीगढ़ पुलिस ने रूबी आसिफ खान के साथ दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। ये पुलिसकर्मी अलीगढ़ से लेकर बुलंदशहर तक रूबी आसिफ खान के साथ ही रहने वाले हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले जब रूबी खान ने अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की थी, तब उनके खिलाफ कुछ मौलानाओं ने फतवा जारी कर दिया था। इसमें यह कहा गया कि इस्लाम में मूर्ति पूजा की पाबंदी है, ऐसे में मूर्ति घर में लाना उसकी इबादत और पूजा करना, ये इस्लाम के खिलाफ है, जो रूबी ने किया है, इसलिए उन्हें इस्लाम से बेदखल कर देना चाहिए। फतवा जारी होने के बाद रूबी खान ने उन मौलवियों को उग्रवादी तक घोषित कर दिया था।
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सहायक आयुक्त पंचायत (जेकेएएस) अब्दुल राशिद कोहली को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को बताया कि राजौरी के जिलाधिकारी विकास कुंडल ने सहायक आयुक्त (पंचायत) अब्दुल राशिद कोहली के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया। एक अधीनस्थ अधिकारी ने उनके खिलाफ शिकायत की थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरे मामले की गहनता से जाँच के लिए एडीसी राजौरी की अध्यक्षता में जाँच कमेटी भी गठित की गई है, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
Good to see instant action and justice in Jammu & Kashmir after Sanjeet Sharma complained that one Govt official Abdul Rashid Kohli (JKAS) mocked Hindu religion and eating habits of vegetarians in Rajouri. Abdul Rashid Kohli suspended. Inquiry ordered. ?? pic.twitter.com/5dDugYRRu5
पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्विटर पर आदेश की प्रति शेयर करते हुए लिखा, “जम्मू-कश्मीर में तत्काल कार्रवाई और न्याय को देखकर अच्छा लगा। संजीत शर्मा ने शिकायत की कि एक सरकारी अधिकारी अब्दुल राशिद कोहली (JKAS) ने राजौरी में शाकाहारियों और हिन्दू धर्म में खाने की आदतों का मजाक उड़ाया था। अब्दुल राशिद कोहली को निलंबित कर जाँच का आदेश दिया।”
बताया जा रहा है कि यह शिकायत एसी पंचायत के कार्यालय में कार्यरत पंचायत सचिव संजीत शर्मा ने की है। डीसी राजौरी विकास कुंडल को लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा, “एसी पंचायत अब्दुल रशीद कोहली के साथ हम होटल ब्लू स्टार मुरादाबाद में दोपहर का भोजन करने के लिए गए थे। उनके साथ पंचायत सचिव जहीर मलिक, उतिश अशोक और एमआइएस आपरेटर तारिक मिर्जा भी साथ थे। सभी ने खाने का ऑर्डर दिया। उन तीनों ने मांसाहारी खाने का ऑर्डर दिया जबकि मैंने शाकाहारी खाने का। इस पर एसी कोहली ने कहा कि वह मांसाहारी भोजन क्यों नहीं ले रहे हैं। मैंने जवाब दिया कि मैं शाकाहारी हूँ।”
इसके बाद उन्होंने हिंदू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए शर्मा को बार-बार मांसाहारी खाना खाने के लिए कहा। कोहली ने इस दौरान यह तक कह डाला कि अगर तुम बीफ खाओगे तो पवित्र हो जाओगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजीत शर्मा ने आरोप लगाया है कि वह उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए उकसा रहे थे। इस पर भी उन्होंने सख्ती से आपत्ति जताई तो उन्होंने नौकरी में प्रताड़ित करने की धमकी तक दे डाली।
इस शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी विकास कुंडल ने एसी पंचायत को निलंबित करने का आदेश जारी करते हुए कहा कि उनका यह आचरण न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनके द्वारा अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भी आहत करता है। उनकी टिप्पणी से जिले में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। जिलाधिकारी ने कहा कि अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त पवन परिहार की अध्यक्षता वाली समिति मामले की जाँच करेगी और 15 दिनों में रिपोर्ट देगी।