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अर्बन नक्सलियों से लेकर मुस्लिमों को भड़काने वालों तक, राहुल गाँधी की यात्रा को इन आंदोलनजीवियों का है समर्थन: यहाँ देखें सबकी कुंडली

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी तमिलनाडु के कन्याकुमारी से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू कर रहे हैं। इस यात्रा के लिए उन्होंने ‘आंदोलनजीवियों’ से समर्थन जुटाया है। यात्रा से पहले बुलाई गई एक सभा में योगेंद्र यादव सहित उनके कई साथी जमा हुए थे। आइए, यहाँ हम आपको बताते हैं कि कॉन्ग्रेस ‘टुकड़े-टुकड़े गिरोह’ के कार्यकर्ताओं समेत किन आंदोलनजीवियों के सहारे इस यात्रा को सफल बनाने की सोच रही है। इसमें वही लोग शामिल हैं, जो CAA विरोधी रहे हैं और ‘किसान आंदोलन’ सहित कई बेमतलब के प्रदर्शनों का हिस्सा रहे हैं।

इनमें से कुछ वामपंथी हैं, कुछ खुद को समाजवादी बताते हैं तो कुछ ने गाँधीवादी का चोला ओढ़ रखा है। सबसे पहला नाम तो इसमें योगेंद्र यादव का ही है, जो CAA के विरोध के समय एक्टिविस्ट बन गए थे और ‘किसान आंदोलन’ के समय किसान। उन्होंने आंदोलनजीवियों का ‘राजा बाबू’ तो कहा ही जाता है। उनके अलावा हैं मेधा पाटकर। वही मेधा पाटकर, जिन्होंने नर्मदा बचाने के नाम पर आंदोलन कर के दशकों तक कच्छ के लोगों को पानी के लिए तरसाए रखा।

पर्यावरण के नाम पर विकास परियोजनाओं को रोक कर लोगों को परेशान करना मेधा पाटकर का पुराना पेशा है। हाल ही में AAP द्वारा उन्हें गुजरात में मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाए जाने की भी अटकलें थीं, लेकिन बगावत के कारण इसे रोक दिया गया। फिर नाम आता है अरुणा रॉय का, जिनका जन्म सरकारी अधिकारियों के परिवार में हुआ था और वो खुद भी IAS में रही हैं। वो ‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ चलाती हैं।

‘अर्बन नक्सलियों’ की समर्थक अरुणा रॉय गाँधी परिवार की पुरानी वफादार हैं और यूपीए काल में देश चलाने के लिए सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में जो सलाहकार समिति बनी थी, उसकी वो सदस्य रही हैं। उन्होंने NDTV पर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश और दंगों के आरोपितों का बचाव किया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज बीजी कोलसे पाटिल भी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में राहुल गाँधी के साथ हैं। राजनीति में भी वो किस्मत आजमा चुके हैं।

CAA विरोधी रैली के दौरान उन्होंने मुस्लिमों को भड़काते हुए कहा था कि तुमलोग जनसंख्या में 20 -25 करोड़ हो, ऐसे में पुलिस से कोई डर नहीं होना चाहिए। फिर नाम आता है अली अनवर अंसारी का, जो पसमांदा मुस्लिमों के नाम पर अपने ठेका चलाते हैं। फ़िलहाल वो बिहार में जातिगत जनगणना अभियान में भी सक्रिय हैं। महात्मा गाँधी के बेटे मणिलाल के पोते तुषार गाँधी का भी समर्थन है इस यात्रा को। वामपंथी आतंकियों का वो बचाव कर चुके हैं।

डॉक्टर सुनीलम, जिन्होंने हाल ही में दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना पर भ्रष्टाचार के मनगढंत आरोप लगा थे, राहुल गाँधी की इस यात्रा को उनका भी समर्थन है। मेधा पाटकर और गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने की साजिश रचने वाले तीस्ता सीतलवाड़ का उन्होंने बचाव किया था। सफाई कर्मचारियों के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले बेजवाड़ा विल्सन का नाम भी इसमें शामिल है। अर्बन नक्सलियों के वो भी समर्थक हैं।

अब आते हैं देवानुरा महादेव पर, जो कन्नड़ लेखक हैं और मोदी सरकार पर उद्योगपतियों के हित के लिए काम करने का आरोप मढ़ चुके हैं। पूर्व प्रोफेसर गणेश एन देवी का भी इस यात्रा को समर्थक है, जो खुद को आदिवासी कार्यकर्ता बताते हैं। कथित गाँधीवादी पीवी राजगोपाल का भी राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को समर्थन है। तथाकथित पत्रकार मृणाल पांडे, अजीबोगरीब लेख लिखती रहती हैं और कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ से जुड़ी रही हैं, उन्हें तो इस यात्रा को समर्थन देना ही था। भारत मुस्लिमों के बीच बार-बार डर फैलाने वाली ‘योजना आयोग’ की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद से भी राहुल गाँधी मिले थे।

‘इस सपने को पूरा करने के लिए पाकिस्तान बेचना पड़ेगा’: क्रिकेटर अहमद शहजाद ने ब्रैड पिट का नाम ले कराई जगहँसाई, एंकर भी खुद को रोक न पाए

पाकिस्तान के क्रिकेटर अहमद शहजाद (Ahmed Shehzad) की सोशल मीडिया में खिंचाई हो रही है। वजह उन्होंने इच्छा जाहिर की है कि अगर उनकी बॉयोपिक बने तो उसमें उनका किरदार हॉलीवुड अभिनेता ब्रैड पिट (Brad Pitt) निभाएँ। शहजाद का यह जवाब सुनकर सवाल पूछने वाले एंकर भी अपनी हॅंसी नहीं रोक पाए।

पाकिस्तानी पत्रकार सैयद याहसा हुसैनी को दिए इंटरव्यू में शहजाद ने यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि अगर उनकी बॉयोपिक बने तो वह किस अभिनेता को अपना किरदार निभाते हुए देखना पसंद करेंगे। जवाब में शहजाद ने हॉलीवुड के सबसे महँगे एक्टर ब्रैड पिट का नाम ले लिया। इसका वीडियो क्लिप हुसैनी ने भी ट्विटर पर साझा किया है।

एक ट्विटर यूजर ने पाकिस्तान की कंगाली की ओर इशारा करते हुए लिखा, “इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें पाकिस्तान को बेचना होगा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “जितना बड़ा आपका करियर है। उस पर तो 15 मिनट की ही बॉयोपिक बनेगी।”

नबील नाम के एक यूजर ने तंज कसते हुए हुए पूछा, “सर क्या आप सच में सोचते हैं कि अहमद शहजाद में इतनी काबलियत है कि कोई भी फिल्म निर्माता उनके जीवन पर एक बॉयोपिक के बारे में सोचेगा और वह भी हॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार के साथ।”

एक और यूजर ने लिखा, “आपके (पाकिस्तानी पत्रकार) हँसने का तरीका एकदम सही जवाब है।”

यह वीडियो इस साल जुलाई का है, जो सोशल मीडिया पर अभी भी वायरल हो रहा है। बता दें कि शहजाद अहमद ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वकार यूनुस पर उनका क्रिकेट करियर बर्बाद करने का आरोप लगाया था। इस साल जून में शहजाद ने कहा था कि 2016 में वकार ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें कहा गया था कि अगर अहमद शहजाद और उमर अकमल को नेशनल टीम में वापस आना है, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलना जरूरी होगा।

शहजाद इस रिपोर्ट से नाराज दिखे थे, उनका मानना ​​​था कि इन बातों पर सामने बैठकर चर्चा होनी चाहिए थी। शहजाद ने कहा था, “मैंने यह पहले भी कहा है और मैं इसे फिर से कहूँगा कि कोहली का करियर आश्चर्यजनक रूप से आगे बढ़ा, क्योंकि उन्हें एमएस धोनी का साथ मिला। लेकिन दुर्भाग्य से पाकिस्तान में आपकी सफलता को लोग बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमारे सीनियर खिलाड़ी और पूर्व क्रिकेटर क्रिकेट की दुनिया में किसी को सफल होते देखना पचा नहीं पा रहे हैं। यह पाकिस्तान क्रिकेट के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।”

ममता के मंत्री मलय घटक के 6 ठिकानों पर CBI ने मारी रेड, अलमारी के ताले तोड़कर तलाशी ली: TMC समर्थकों ने हंगामा मचाया

कोयला तस्करी मामले की छानबीन के दौरान सीबीआई ने आज (7 सितंबर 2022) पश्चिम बंगाल में आसनसोल और कोलकाता समेत 6 जगहों पर छापेमारी की। ये सारी छापेमारी बंगाल के कानून व श्रम मंत्री मलय घटक (Moloy Ghatak) के ठिकानों पर की गई। इसमें एक जगह मलय घटक के भाई अभिजीत घटक से जुड़ी है और दूसरा बेटे-बहू का घर है।

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की 8 टीमें समूहों में विभाजित होकर बुधवार की सुबह अपने सुरक्षा दस्ते के साथ कानून मंत्री से जुड़े ठिकानों पर पहुँचीं और छापेमारी शुरू हुई। इसी बीच टीएमसी समर्थक भी उनके घर के बाहर इकट्ठा हो गए। उन्होंने वहाँ ‘मलय घटक जिंदाबाद’, ‘सीबीआई दूर हटो’ के नारे लगाए।

लेक गार्ड का घर जहाँ मंत्री का बेटा और बहू रहते हैं वहाँ पर ताला लगा हुआ था। ऐसे में सीबीआई अधिकारियों ने ताला खुलवाकर अंदर एंट्री की और अलमारी का लॉक तोड़कर लॉकर की तलाशी ली गई।

कथिततौर पर, मलय के घर छापेमारी कर यह पता लगाने का प्रयास हो रहा है कि कहीं उनका भी हाथ कोयला घोटाले में तो नहीं। इससे पहले कोयला तस्करी केस में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ हो चुकी है। वहीं खुद मलय से सीबीआई से पहले प्रवर्तन निदेशालय ने भी पूछताछ की।

कोयला तस्करी मामला

उल्लेखनीय है कि कोयला तस्करी से जुड़ा मामला साल 2020 में दर्ज किया गया था। आरोप था कि हजारों करोड़ रुपए के अवैध रूप से खनन किए गए कोयले को बंगाल के पश्चिमी हिस्सों में रैकेट द्वारा बेचा गया। इसके अलावा शिकायत में ये भी बताया गया कि तस्करी से आए पैसों को नेताओं तक पहुँचाया गया।

अब जाँच एजेंसियाँ इसी आधार पर टीएमसी नेताओं से पूछताछ कर रही हैं। इस मामले में पिछले साल ईडी ने विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की थी। आरोपितों में विनय मिश्रा, विकास और अशोक मिश्रा को आरोपित बनाया था। इसके अलावा केस में 8 आईपीएस अधिकारियों से भी पूछताछ हुई थी।

घोटालों में TMC नेताओं का नाम

बता दें कि बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई नेता इन दिनों अलग-अलग घोटाले मामले में जाँच एजेंसियों की रडार पर हैं। इनमें अभिषेक बनर्जी, मलय घटक का नाम जहाँ कोयला तस्करी मामले में है। वहीं पार्थ चटर्जी से एसएससी स्कैम में और अनुब्रत मंडल से पशु तस्करी मामले में है।

केजरीवाल सरकार ने दीपावली-छठ पर फिर बैन किए पटाखे, इस बार ऑनलाइन बिक्री और भंडारण पर भी प्रतिबंध: लोगों ने पूछा – ईद पर बैन करोगे पशु हत्या?

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने एक बार फिर से दीपावली-छठ पर पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ये ऐलान किया। पिछले साल भी हिन्दुओं के विरोध के बावजूद दिल्ली की ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ सरकार ने दीपावली-छठ पर पटाखों को प्रतिबंधित कर दिया था। दीपावली के दिन रात में गश्त करते हुए दिल्ली पुलिस पटाखे उड़ाने वालों को गिरफ्तार भी करती है।

मंत्री गोपाल राय ने ऐलान किया, “दिल्ली में लोगों को प्रदूषण के खतरे से बचाने के लिए पिछले साल की तरह ही इस बार भी सभी तरह के पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा रहा है, ताकि लोगों की जिंदगी बचाई जा सके। इस बार दिल्ली में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री/डिलीवरी पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2023 तक लागू रहेगा। प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने को लेकर दिल्ली पुलिस, DPCC और राजस्व विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाएगी।”

कुछ लोगों ने दिल्ली सरकार को याद दिलाया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का कारण मुख्यतः खेतों में पराली का जलाया जाना है, लेकिन उसका न कोई समाधान निकाला जाता है और न ही कोई कार्रवाई की जाती है। वहीं कुछ लोगों ने पूछा कि अब इसके विज्ञापनों पर कितना खर्च किया जाएगा? किसी ने सवाल किया कि दिल्ली में ईद-बकरीद पर पशुओं की हत्या या फिर अवैध बूचड़खानों पर बैन क्यों नहीं लगाया जाता है?

पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट में साबित हो गया है कि पटाखे प्रदूषण का स्रोत नहीं हैं, और ये चीज वैज्ञानिक रिपोर्ट्स में भी आ चुकी है, लेकिन जब केजरीवाल सरकार दिल्ली में प्रदूषण रोकने में फेल हो गयी तो सिर्फ पटाखों को बैन करके दिखावा क्यों? उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ये बैन नहीं मानेगी। लोगों ने दिल्ली सरकार के फैसले को मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़ कर देखना शुरू कर दिया है।

हर्षा की हत्या कट्टरपंथियों ने ‘नफरत’ के कारण की थी: NIA की 750 पेज की चार्जशीट में खुलासा, कर्नाटक में बजरंग दल कार्यकर्ता की चाकू मार की गई थी हत्या

कर्नाटक के शिवमोगा (Shivamogga, Karnataka) में बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा (Bajarang Dal Activist Harsha) की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 750 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में साफ कहा है कि हर्षा की हत्या ‘नफरत’ के कारण की गई थी।

शिवमोगा के रहने वाले 26 वर्षीय हर्षा की 20 फरवरी 2022 की रात को भारती नगर इलाके में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस इलाके में धारा 144 लगानी पड़ी थी। इसके साथ ही राज्य के अलग-अलग इलाकों में भारी प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद हत्या की जाँच NIA को सौंप दी गई थी।

जिस समय हर्षा की हत्या हुई थी, उस समय राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में बुर्का को लेकर विवाद चल रहा था। कहा जा रहा था कि हर्षा लंबे समय से कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। जब हिजाब विवाद भड़का तो उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था। इस पोस्ट के बाद उनकी हत्या को अंजाम दिया गया।

पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि हिजाब पर हर्षा का किया गया पोस्ट ही इस हत्या का का कारण है, लेकिन जैसे जैसे कट्टरपंथियों के पोस्ट सामने आते गए उससे स्थिति साफ होती गई। इन पोस्ट को देखने से पता चला कि हिजाब का विरोध एक कारण था, लेकिन हर्षा की हत्या की साजिश उससे पहले से ही रची जा रही थी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने इस वारदात को साजिश और योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या बताया था। उन्होंने कहा था, “हर्षा, जिसे हर्षा हिंदू के नाम से भी जाना जाता था। वो एक कार्यकर्ता था। वो हर तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में सबसे आगे रहता था। उसने हाल ही में हिंदुओं के कई अहम मामलों को उठाया था, जिससे कई लोग काफी चिढ़े हुए थे। कई स्थानीय लोग उसके खिलाफ थे। ये हत्या बहुत ही भयानक थी। ये हत्या से बढ़कर है। ये हार्डकोर दुश्मनी है, जिसे एक छोटे से लड़के पर दिखाया गया है। उसकी हत्या पीछे का सबसे बड़ा कारण यह था कि वो एक हिंदू एक्टिविस्ट था और बहुत ही मुखर तरीके से अपनी आवाज को उठाता था।”

हर्षा की हत्या में रियाज, नदीम, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ, अफान (रिहान) सहित कई कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया गया है। शिवमोगा पुलिस ने कहा था कि आरोपित कार में आए और हर्षा का पीछा किया, फिर उसे मारा। इन सभी के ऊपर UAPA की धाराएँ लगाई गई थीं।

पुलिस के मुताबिक पीड़ित के ऊपर साल 2016-17 में मजहबी भावनाएँ आहत करने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। हर्षा की हत्या करने में रियाज, मुजाहिद, कासिफ, आसिफ का हाथ था जबकि इसकी साजिश रचने में नदीम और अफान शामिल थे। पुलिस के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड में कासिफ मुख्य आरोपित है।

₹10 करोड़ का घर, 3 पत्नी-7 बच्चे, 181 केस: ऑटो ड्राइवर से बना चोर, 5000 से ज्यादा कार चुराए; फ्लाइट से जाता था गाड़ी उड़ाने

दिल्ली पुलिस ने देश के सबसे बड़े कार चोर को गिरफ्तार किया है। इस चोर का नाम है- अनिल चौहान। उसे मंगलवार (6 सितंबर 2022) को गिरफ्तार किया गया। कभी ऑटो चलाने वाले चौहान ने 5000 से ज्यादा कारों की चोरी की है। इससे हुई कमाई से वह आलीशान जिंदगी जीता था।

दिल्ली पुलिस ने करीब तीन महीने की मशक्कत के बाद उस पकड़ा है। 52 साल के अनिल ने चोरी की कमाई से दिल्ली, मुंबई और नॉर्थ ईस्ट में कई प्रॉपर्टी खरीद रखी है। उसकी तीन पत्नी और सात बच्चे हैं। 10 करोड़ रुपए के विला में वह रहता था। रिपोर्ट के अनुसार कई बार वह कार चोरी करने के लिए फ्लाइट से सफर करता था।

पुलिस के अनुसार उसने 27 साल के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों से 5000 से ज्यादा कार चुराए हैं। उसके पास से पिस्टल और कारतूस भी बरामद हुए हैं। वह 25-30 सहयोगियों की मदद से गंगटोक, असम के कुछ हिस्सों, नेपाल और अन्य स्थानों पर चोरी की कारों को आसानी से बेच रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कभी अनिल दिल्ली के खानपुर इलाके में ऑटो रिक्शा चलाता था। 1995 के बाद उसने कार चोरी शुरू की। 27 साल में उसने सबसे ज्यादा मारुति 800 मॉडल चुराया। चोरी के दौरान उसने कई टैक्सी ड्राइवरों की हत्या भी की। इसके बाद वह असम जाकर रहने लगा। कार चोरी के पैसों से उसने दिल्ली, मुंबई और पूर्वोत्तर राज्यों में प्रॉपर्टी खरीदी। वह असम में सरकारी कॉन्ट्रैक्टर बन गया था और वहाँ के स्थानीय नेताओं से उसकी अच्छी जान-पहचान हो गई थी। अनिल को पुलिस ने पहले भी गिरफ्तार किया था। 2015 में एक बार वह कॉन्ग्रेस MLA के साथ गिरफ्तार किया गया था। तब उसे 5 साल की जेल हुई थी। उसके खिलाफ 181 केस दर्ज हैं

एक अधिकारी ने बताया, “इंस्पेक्टर संदीप गोदारा के नेतृत्व में सेन्ट्रल दिल्ली में हाई-एंड एसयूवी और सेडान (High End SUVs and Sedans ) की चोरी की जाँच कर रही टीम को चौहान पर शक हुआ। उसकी तलाश में टीमों को असम, सिक्किम, नेपाल और एनसीआर भेजा गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह महँगी कारों में घूमता है और खुद को एक बिजनेसमैन या फिर सरकारी अधिकारी बताता था।” 23 अगस्त को पुलिस को सूचना मिली कि चौहान दिल्ली में है और अपने साथियों के साथ चोरी करने की योजना बना रहा है। अधिकारी ने आगे बताया, “हमने उसे देशबंधु गुप्ता रोड से एक बाइक और पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया। बाद में उसके पास से 5 पिस्तौल बरामद की गई।”

ब्रिटेन में हिंदुओं को निशाना बना रहे पाकिस्तानी: चाकू लेकर निकली कट्टरपंथी भीड़ ने घरों में की तोड़फोड़, भगवा झंडे उखाड़े; देखिए Video

ब्रिटेन के लिसेस्टर शहर से हिंदुओं पर हमले की लगातार वीडियोज आ रही है। इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा करके हिंदुओं के घरों को निशाना बना रहे हैं। उनके हाथों में हथियार और मुँह पर हिंदुओं के लिए गालियाँ हैं। सड़कों से पुलिस नदारद है। कोई उन्हें नहीं रोक रहा। वहीं सोशल मीडिया पर वामपंथी हिंदुओं को ही हमले का दोषी बता रहे हैं।

हिंदुओं पर हमले की वीडियोज

सामने आई एक वीडियो में दिख रहा है कि कैसे कट्टरपंथी भारी तादाद में सड़कों पर जुटे हुए है। हिंदू लोग अपने घरों से उनकी वीडियो बना रहे हैं और यह देख हैरान हो रहे हैं कि आखिर क्यों पुलिस इनको नहीं रोक रही, ये कैसे हाथों में हथियार लेकर खुलेआम घूम पा रहे हैं।

वीडियो में हिंदुओं से मारपीट, उनके घरों में तोड़फोड़, घर के बाहर लगे भगवा झंडे को उखाड़ना साफ तौर पर दिख रहा है। वीडियो बनाने वाले आपस में कह रहे हैं कि ये उपद्रव करने वाले मुस्लिम हैं। इनके हाथों में चाकू जैसे धारदार हथियार हैं।

कुछ अन्य विदेशी भी इन वीडियोज को लेकर यही बता रहे हैं कि इंग्लैंड में कैसे हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ अपना शिकार बना रही है और मेनस्ट्रीम मीडिया ने इसे कवर करने की जगह अपनी आँख मूँदी हुई है।

यूजर्स इसे एक सुनियोजित हमला बता रहे हैं। उनका कहना है, “ये हमला सुनियोजित था। ये अचानक नहीं हुआ। वो लोग हथियार के साथ और पूरी तैयारी के साथ आए थे। नस्लीय टिप्पणी कर रहे थे, पुलिस के सामने लोगों को धमका रहे थे और मार रहे थे।”

हिंदुओं से घृणा करने वाला पत्रकार हमले का जिम्मेदार

बता दें कि हिंदुओं के विरुद्ध ब्रिटेन में नजर आ रही घृणा फैलाने के पीछे विदेशी मीडिया द इंडिपेंडेंट के पत्रकार सनी हुंडल का नाम सामने आ रहा है। सनी ने अपने ट्विटर पर 30 अगस्त को एक वीडियो शेयर करके हिंदुत्व को बीच में घसीटा था। वीडियो में कुछ लोग पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। ऐसे में सनी ने लिखा, “लिसेस्टर में हिंदुत्व चरमपंथी समूहों ने सड़कों पर उपद्रव किया। हैरानी की बात है।”

अब इसी ट्वीट को हिंदुओं पर होते हमलों के पीछे वजह माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि सनी हुंडल अक्सर भारतीयों को और हिंदुओं को निशाना बनाते हैं। उनकी वजह से पाकिस्तानी मुस्लिम हिंदुओं को और उनके घर को निशाना बना रहे हैं।

वायरल ट्वीट में एक पाकिस्तानी ने बताई ‘सच्चाई’ , मुस्लिमों बोले- ये ब्रिटेन की घटना नहीं

इन दावों के साथ-साथ एक ट्वीट भी शेयर हो रहा है जिसे लेकर दावा है कि ये एक पाकिस्तानी ने किया है। इसमें लिखा है कि लोग इस उपद्रव के पीछे मान रहे हैं कि हिंदुओं ने एक निर्दोष मुस्लिम को पीट दिया। लेकिन हकीकत में वो पाकिस्तानी निर्दोष नहीं था। जब पाकिस्तान मैच हारा और भारतीय खुशी मनाने लगे तो वो शख्स उनके पास गया और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने लगा। उसने उन लोगों को इशारे में गाली भी दी। वहाँ और भी पाकिस्तानी थे मगर किसी भारतीय ने किसी को कुछ नहीं कहा।

मालूम हो कि यह ट्वीट लिसेस्टर की घटना के संदर्भ में शेयर किया जा रहा है। हालाँकि कुछ मुस्लिम इस पोस्ट को फेक बता रहे हैं। पोस्ट की सच्चाई क्या है ये तो पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन हिंदुओं पर हमले कट्टरपंथियों के हमले लगातार हो रहे हैं और इसके प्रमाण भी सोशल मीडया पर मौजूद हैं।

हिंदुओं का आरक्षण खा रहे ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’, भारत माता को बीमारी बताता पादरी: क्या कन्याकुमारी में मिशनरी साजिशों के खिलाफ भारत को जोड़ेगे राहुल गाँधी

कन्याकुमारी भारत के दक्षिणतम छोर पर स्थित है। यहीं से 7 सितंबर 2022 को राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) अपनी भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) शुरू कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के करीब दो दशक पुराने राजनीतिक जीवन का यह एक बड़ा चैप्टर है। वे राजनीतिक तौर पर श्रम नहीं करने के लिए कुख्यात हैं। ऐन मौकों पर पार्टी को बेसहारा छोड़ विदेश निकल लेने के लिए चर्चा में रहते हैं। कॉन्ग्रेस को उसके सबसे बुरे दौर में लाकर खड़ा कर देने के जिम्मेदार हैं।

इस तरह की भारी-भरकम उपलब्धियों वाला शख्स जब 150 दिन लंबी राजनीतिक प्लानिंग करे तो उसकी प्रशंसा उदार मन से होनी चाहिए। वैसे भी वाजपेयी कहकर गए हैं- कोई छोटे मन से बड़ा नहीं होता। करीब 3500 किलोमीटर की इस यात्रा में राहुल गाँधी कथित आर्थिक असमानता, सामाजिक भेदभाव और सत्ता के केंद्रीकरण से लड़ेंगे।

2024 के आम चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खुद को खड़ा करने के प्रयासों के तहत प्रायोजित इस यात्रा का नाम ‘भारत जोड़ो’ रखना किसी भी तरह से तार्किक नहीं लगता है। ऐसा लगता है कि अपनी राजनीति को चमकाने के लिए कॉन्ग्रेस ने भारत को जानबूझकर घसीटा है, क्योंकि देश के अस्तित्व के सामने ऐसा कोई खतरा नहीं दिखता कि उसे जोड़ने की बात की जाए। बावजूद इसके राहुल गाँधी कन्याकुमारी से नई लकीर खींच सकते हैं। वे उन ताकतों पर वार कर सकते हैं जो भारत को बाँटने की साजिशों में जुटे हैं। मसलन, ईसाई मिशनरी।

जिस कन्याकुमारी में ब्रह्मा-विष्णु-महेश लिंग स्वरूप में मौजूद हैं और जहाँ के मंदिर के स्तंभों से भी संगीत की ध्वनि निकलती है, वहाँ हिंदुओं का हक ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन  (Crypto Christian)’ खा रहे हैं। यह खुद मद्रास हाई कोर्ट ने माना है। इसी साल जनवरी में एक पादरी को राहत देने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने कन्याकुमारी के जनसांख्यिकी बदलाव की तरफ ध्यान खींचा था।

हाई कोर्ट ने कहा था, “धार्मिक तौर पर कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव देखा गया है। 1980 के बाद से जिले में हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे। हालाँकि 2011 की जनगणना बताती है कि 48.5 फीसदी आबादी के साथ हिंदू सबसे बड़े धार्मिक समूह हैं। पर यह जमीनी हकीकत से अलग हो सकती है। इस पर गौर किया जाना चाहिए कि बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ पाने के लिए खुद को हिंदू बताते रहते हैं।”

जिस पादरी के मामले को लेकर हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी, अब उसकी भी करतूत जान लीजिए। उसने ‘भारत माता’ को ‘बीमारी’ बताया था। हाई कोर्ट ने भी कहा था कि पादरी का मकसद हिंदुओं को नीचा दिखाना था। कन्याकुमारी में हिंदुओं को लक्षित कर गतिविधियाँ सामान्य है। यहाँ के सरकारी स्कूल में भी यीशु की प्रार्थना के लिए बच्चों को मजबूर किया जाता है। इसी प्रताड़ना से तंग आकर एक हिंदू छात्रा ने इसी साल अप्रैल में अपने ही शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक छात्रा से कहा जाता था कि ‘भगवदगीता बुरी है। बाइबल में अच्छी चीजें हैं। इसलिए हमें बाइबल पढ़नी चाहिए।’ ये हालिया मामले हैं। कन्याकुमारी की हालत यह है कि ईसाइयों ने उस शिला पर स्मारक बनाने का भी विरोध किया था, जिस पर स्वामी विवेकानंद ने चिंतन किया था।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राहुल गाँधी कन्याकुमारी से हिंदुओं पर हो रहे इस आक्रमण के खिलाफ कुछ बोलने की भी हिम्मत जुटा पाएँगे? वैसे इसकी उम्मीद कम दिखती है क्योंकि कॉन्ग्रेस की पहचान ही इस्लामी कट्टरपंथियों का तुष्टिकरण और ईसाई मिशनरियों को पोषित करने वाले की रही है। ये उस इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण अंग हैं, जिनके कारण कॉन्ग्रेस इतने सालों तक देश की सत्ता पर काबिज रही और आज भी भारत विरोधी वैश्विक दुष्प्रचार में उसके काम आते हैं।

लेकिन राहुल गाँधी को यह समझना होगा कि ईसाई मिशनरियों की साजिशों के खिलाफ लड़ाई में भारत को जोड़ने की बात कहे बिना वे 2024 के पहले परिद्श्य में नहीं उभर सकते। क्योंकि आज का भारत यह जानता है कि उसे जुड़ने की जरूरत केवल इस्लामी कट्टरपंथ और ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण अभियानों के खिलाफ ही है। क्या राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस इस सत्य से साक्षात्कार को तैयार हैं?

‘हम उस गौ-भक्षक को मंदिर में नहीं घुसने देंगे’ : महाकाल के दर्शन किए बिन लौटे रणबीर-आलिया, हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा

खुद को सबसे बड़ा बीफ लवर बताने वाले बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर और उनकी पत्नी आलिया भट्ट को मंगलवार (6 सितंबर 2022) को महाकाल के दर्शन नहीं मिल पाए। मंदिर के बाहर खड़े हिंदू संगठनों ने काली पट्टी दिखाकर उनका जमकर विरोध किया। लोगों ने कहा कि वह रणबीर जैसे गौ-भक्षक को महाकाल के मंदिर में नहीं जाने देंगे।

बिन महाकाल के दर्शन के लौटे रणबीर-आलिया

बता दें कि ब्रह्मास्त्र फिल्म की रिलीज से पहले रणबीर कपूर और आलिया भट्ट महाकाल मंदिर में आशीर्वाद लेने गए थे। उनके साथ फिल्म डायरेक्टर अयान मुकर्जी भी थे। इस दौरान हिंदू संगठन के कई लोग वहाँ आए और रणबीर की 11 साल पुरानी ‘बीफ’ टिप्पणी पर उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान प्रदर्शनकारी वीवीआईपी गेट पर जुटे रहे और जय श्रीराम के नारे लगाए गए।

भीड़ को देख रणबीर कपूर और आलिया भट्ट मौके से निकल गए जबकि ब्रह्मास्त्र की टीम के अन्य लोगों ने महाकाल के दर्शन भी किए और पूजा-अर्चना भी की। फिल्म डायरेक्टर अयान मुकर्जी ने भी मंदिर के गर्भगृह में पहुँच प्रार्थना की। 

उन्होंने कहा कि उनका मंदिर आने का बहुत मन था और अब उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने बताया, “मेरी ख्वाहिश है कि फिल्म बहुत सफल हो। हमने बहुत अच्छी फिल्म बनाई है, लेकिन हमें अभी इस बारे में बात नहीं करनी। बस लोगों को फिल्म अच्छी लगे।”

हिंदू प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पीटा

इस बीच पुलिसकर्मियों द्वारा बजरंग दल कार्यकर्ताओं को पीटे जाने की वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई बजरंग दल के नेता अंकित चौबे ने बताया, “हम लोग रणबीर कपूर का विरोध करने आए थे। उसने हमारी गाय माता को लेकर अश्लील बयान दिए हैं। उनके बीफ पर टिप्पणी की है। हम उसका विरोध करने आए थे। लेकिन प्रशासन ने हमारे कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। हम प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध करते हैं और इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे।”

बजरंग दल के नेता ने कहा, “रणबीर कपूर-आलिया भट्ट को महाकाल बाबा के मंदिर में नहीं घुसने देंगे। वो मीडिया में कहता है कि बीफ खानी अच्छी चीज है तो ऐसे गौभक्षक को हम महाकाल के मंदिर में नहीं घुसने देंगे। पूरे देश में उसका विरोध होगा। हम यहाँ काले झंडे दिखाने आए थे। हम शांतिप्रिय ढंग से विरोध कर रहे थे, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। अब पहले हम रणबीर-आलिया के विरोध में प्रदर्शन करेंगे और फिर प्रशासन के खिलाफ।”

रणबीर कपूर की बीफ टिप्पणी के कारण विरोध

बता दें कि रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म 9 सितंबर 2022 को रिलीज होने जा रही है। इसी कारण वह महाकाल मंदिर आए थे। हालाँकि विरोध के बाद वह उज्जैत के जिला अधिकारी आशीष सिंह के घर रुके। आशीष फिल्म डायरेक्टर अयान के दोस्त बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर मंगलवार को उज्जैन में हुई घटना की अधिकतर वीडियो है। इसके अलावा वो वीडियो भी मौजूद है जिसमें रणबीर खुद ‘बिग बीफ गाय’ कह रहे हैं।

सरकारी जमीन पर अवैध मदरसा, सच दिखाने पहुँची मीडिया टीम को बनाया बंधक: निजामुद्दीन में मदरसा संचालक और साथियों की हरकत

भारत के दो राज्यों उत्तर प्रदेश और असम में अवैध मदरसों पर बुलडोजर चलने की खबरें सुर्ख़ियों में हैं, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में इससे बिल्कुल विपरीत माहौल देखने को मिला है। हाल ही में LnDO (Land And Development Office) की जमीन पर खड़े अवैध मदरसे का सच दिखाने जब एक मीडिया की टीम पहुँची तो कैमरामैन और रिपोर्टर को ही मदरसा संचालक व उसके साथियों द्वारा बंधक बना लिया गया।

अवैध बताया जा रहा ये मदरसा दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित हैं, जिसे ‘मदरसा जामिया अरबिया’ के नाम से जाना जाता है। जब ‘हेडलाइंस इंडिया‘ की एक टीम इस मदरसे की पोल खोलने यहाँ पहुँची, तो शुरू में तो थोड़ी बहसबाजी की गई, लेकिन जब रिपोर्टर सवाल पूछता गया तो उसे और कैमरामैन को बंधक बना लिया गया।

यूपी और असम में हो रही हैं कार्यवाही

उल्लेखनीय है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। वहीं यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में नई कोशिशों में जुटी हुई है। इसको लेकर मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है।

बताया जा रहा है कि इसके लिए 5 अक्टूबर, 2022 तक की समयसीमा भी तय की गई है। उन मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं। एक अहम बैठक के बाद उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। वहीं इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है।

गौरतलब है कि यूपी के अलावा असम में भी पिछले कुछ दिनों से मदरसों को लेकर सरकार गंभीर बनी हुई है। हाल ही में राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने प्रदेश के तीन मदरसों को ध्वस्त कर दिया था। इन मदरसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के केंद्र रूप में होता था। इन मदरसों से जुड़े कई मौलवियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गोलपारा में चौथे मदरसे को खुद जनता ने ही ध्वस्त कर डाला।