Home Blog Page 2427

वे नहीं रहे… क्योंकि वे हिंदू थे: कुल्हाड़ी से काट दबा दी कर्नाटक की एक युवा आवाज, कहानी उस हत्या की जिसके कसाई का बेटा और PFI बताए जाते हैं किरदार

26 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की कट्टर इस्लामी हमलावरों ने हत्या कर दी थी। चिकन की दुकान चलाने वाले नेट्टारू जब घर लौट रहे थे, तब उन पर हमला किया गया था। उनके हत्यारे शाम के समय कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ के बेल्लारे में एक बाइक पर आए थे। हत्यारों ने नेट्टारू पर धारदार हथियारों से हमला किया और फरार हो गए थे। हमले के बाद प्रवीण नेट्टारू को अस्पताल ले जाया गया था लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

प्रवीण नेट्टारू की हत्या के कारणों पर शुरुआती अटकलें

प्रवीण नेट्टारू भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा (भाजयुमो) के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा की दक्षिण कन्नड़ जिला इकाई के कार्यकारी समिति के सदस्य थे। उनका बेल्लारी में पोल्ट्री व्यवसाय था। 26 जुलाई, 2022 को जब वह अपनी दुकान बंद करके घर लौट रहे थे, तब उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया और हमलावरों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे। मोटरसाइकिल पर केरल का रजिस्ट्रेशन नंबर था। जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह केरल सीमा के करीब है। प्रवीण नेट्टारू के गिरने के तुरंत बाद हमलावर भाग गए। प्रवीण नेट्टारू को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वह बच नहीं सके।

इसके बाद जब कर्नाटक पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए जाँच शुरू की। कई अटकलों में यह कहा गया कि एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या और एक मस्जिद से संबंधित मामले सहित उससे पहले की दो घटनाओं के कारण प्रवीण नेट्टारू की हत्या हो सकती है। हालाँकि, ये सभी बातें सिर्फ शुरू में ही कही गई। इस पूरे घटनाक्रम के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शुरुआत में सामान्य था। लेकिन, फिर पूरे राज्य में प्रदर्शन होने शुरू हो गए थे।

जाँच और गिरफ्तारियाँ

28 जुलाई, 2022 को कर्नाटक पुलिस ने भाजपा युवा मोर्चा के सदस्य प्रवीण कुमार नेट्टारू की हत्या के मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। आरोपितों की पहचान जाकिर और मोहम्मद शफीक के रूप में हुई। दोनों को केरल के कासरगोड से गिरफ्तार किया गया था। जाकिर 29 साल का है और सवनूर का रहने वाला है जबकि 27 साल का मोहम्मद शफीक बेल्लारी का रहने वाला है। ये दोनों हत्या के साजिशकर्ता थे, न कि वास्तविक हमलावर।

इन दो आरोपितों की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही ऐसी खबरें सामने आई थीं कि शफीक और जाकिर इस्लामी आतंकवादी संगठन पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़े हुए हैं। शफीक की पत्नी ने पुष्टि की है कि उसका पति PFI का सक्रिय सदस्य था। शफीक की पत्नी ने इंडिया टुडे को बताया था, “मेरे पति पीएफआई के सदस्य हैं और उन्हें मालूम था कि प्रवीण की हत्या हुई है।”

शफीक एसडीपीआई (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) से भी जुड़ा और उसने विभिन्न कथित ‘सामाजिक’ कार्यक्रम भी आयोजित किए थे। शफीक की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी ने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा था कि शुरू में उसके पति को हत्या की जानकारी नहीं थी। उसका कहना था कि लेकिन, जब यह पता चला कि गाँव में किसी की हत्या हुई है तो उनकी आँखों में आँसू आ गए थे।

शफीक के पिता प्रवीण नेट्टारू की दुकान में काम करते थे

इस मामले में एक और अहम तथ्य यह है कि आरोपित शफीक के पिता इब्राहिम प्रवीण नेट्टारू की चिकन की दुकान पर कसाई का काम करते थे। इस बात का खुलासा खुद इब्राहिम ने मीडिया से बातचीत के दौरान किया था। इब्राहिम ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया था, “मैं प्रवीण की दुकान पर काम करता हूँ। मेरा बेटा और प्रवीण वहाँ बात करते थे।” इब्राहिम ने अपराध में अपने बेटे की संलिप्तता से इनकार किया था। साथ ही आरोप लगाया था कि उसे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वो लोग मुस्लिम हैं। प्रवीण नेट्टारू की नृशंस हत्या एक मामला है, जहाँ आरोपित और उसका परिवार पीड़ित को जानता था।

उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल और अमरावती में कैमिस्ट उमेश कोल्हे को पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करने के लिए इस्लामवादियों ने मार डाला था। इन दोनों मामलों में मुखबिर या साजिशकर्ता पीड़ितों के परिचित थे। कन्हैया लाल की तस्वीर और लोकेशन को उसके पड़ोसी नाजिम ने लीक कर वायरल कर दिया था। नाजिम और उसके मुस्लिम साथियों ने भी उनकी दुकान की रेकी की।

उमेश कोल्हे के परिवार के साथ जो घटना घटी, उसमें उनके 16 साल पुराने दोस्त यूसुफ खान ने भी मदद की थी। कन्हैया लाल की तरह, नूपुर शर्मा का समर्थन करने के लिए उमेश कोल्हे को भी मौत के घाट उतार दिया गया था। कोल्हे की हत्या के लिए यूसुफ ने ही इस्लामवादियों को अपने दोस्त की हत्या करने के लिए उकसाया था। पुलिस के अनुसार, युसूफ खान ने उमेश कोल्हे के मैसेज को व्हाट्सएप ग्रुपों में यह कहते हुए शेयर किया था कि उमेश कोल्हे ईशनिंदा के आरोपी का समर्थन कर रहे हैं।

हत्या के कारणों पर थ्योरी

अब तक हत्या के विभिन्न कारणों के साथ तीन अलग-अलग थ्योरी सामने आ चुकी हैं। एक तो यह है कि प्रवीण नेट्टारू को इसलिए मारा गया क्योंकि उन्होंने कन्हैया लाल का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। दूसरी थ्योरी यह थी हो सकता है कि एक मुस्लिम व्यक्ति, (जिसे हिन्दू व्यक्ति की पिटाई के बाद हिंदुओं ने मिलकर पीटा था जिस कारण उसकी मौत हो गई थी) की मौत के प्रतिशोध के रूप में उनकी हत्या की गई हो। तीसरी थ्योरी में कहा गया कि प्रवीण नेट्टारू ने जिस चिकन की दुकान खोली थी, वह इलाके में मुस्लिमों द्वारा चलाई जा रही मीट की दुकानों से कहीं बेहतर कमाई कर रही थी। ऐसे में प्रवीण इस्लामवादियों के लिए नफरत का कारण बन गए थे।

पुलिस प्रशासन की उदासीनता

दूसरी थ्योरी पर फोकस करें तो कई स्थानीय हिंदू नेता कथित रूप से उस क्षेत्र में इस्लामवादियों की हिटलिस्ट में थे। बताया जाता है कि, मसूद नाम के एक मुस्लिम की मौत का बदला लेने के लिए ऐसा प्लान बनाया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवीण नेट्टारू ने स्थानीय पुलिस को धमकियों की जानकारी देते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई थी। लेकिन, पुलिस ने उन्हें यह कहते हुए सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया था कि वह कोई इतने बड़े नेता नहीं हैं जिन्हें धमकियाँ मिल रही हों।

प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़ी और गिरफ्तारियाँ

11 अगस्त, 2022 को प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड के तीन मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। ये गिरफ्तारी मंगलुरु पुलिस ने तलपडी चेक पोस्ट के पास की थी। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सुलिया के शियाबुद्दीन अली, बशीर और सुब्रमण्या के रियाज के रूप में हुई। उन्हें यह भी संदेह था कि गिरफ्तार आरोपित इस्लामिक संगठन PFI और उसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हो सकते हैं। 18 अगस्त, 2022 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले के 5 प्रमुख आरोपितों को आगे की जाँच के लिए हिरासत में ले लिया था।

प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाद सामने आया जन आक्रोश

प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाद कर्नाटक के दक्षिणी हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। बेल्लारी और सुलिया में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने बंद का आह्वान किया। 27 जुलाई की सुबह प्रवीण नेट्टारू के शव को उनके घर ले जाए जाने के दौरान सैकड़ों लोग उनके साथ थे।

इस हत्या के बाद गुस्साए भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं  ने सामूहिक इस्तीफे देने शुरू कर दिए। इस घटना के बाद पार्टी की भाजयुमो के कार्यकर्ता बेहद दुःखी और आक्रोशित यह थे। कई कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफे वाली पोस्ट भी सोशल मीडिया पर शेयर की थी।

इस मामले में, कर्नाटक भाजपा विधायक रेणुकाचार्य ने यह भी कहा कि भाजपा शासन होने के बावजूद हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। रेणुकाचार्य ने कर्नाटक में हिंदुओं की रक्षा नहीं होने पर विधायक पद से अपना इस्तीफा देने की धमकी भी दी थी।

यही नहीं, प्रवीण नेट्टारू की हत्या का विरोध कर रहे हिंदू कार्यकर्ताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील की कार को घेर लिया था और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से जवाब माँगा था।

कर्नाटक भाजपा ने सौधा में एक आधिकारिक कार्यक्रम और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के कार्यालय में एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 28 जुलाई को डोड्डाबल्लापुर में एक विशाल रैली की योजना बनाई थी। इस कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शामिल होने वाले थे। हालाँकि, इस हत्या और उसके बाद बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध को देखते हुए पार्टी ने कार्यक्रम रद्द कर दिया था।

राज्य सरकार का स्टैंड

28 जुलाई 2022 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि वह कर्नाटक में देश विरोधी और कट्टरपंथी उपद्रवियों से निपटने के लिए यूपी मॉडल को लागू करने में संकोच नहीं करेंगे। 

सीएम बसवराज बोम्मई ने कहा था, “जो भी संभव होगा, हम करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो ‘यूपी मॉडल’ या उससे भी सख्त कदम उठाने के लिए हम नहीं हिचकिचाएँगे।” यूपी मॉडल शब्द का अर्थ है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कड़े कदम, जिसमें बदमाशों और माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल शामिल है। 

27 जुलाई और 28 जुलाई की मध्यरात्रि को, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार विशेष प्रशिक्षण, खुफिया, गोला-बारूद और संसाधनों के साथ एक कमांडो फोर्स बनाएगी। यह कमांडो फोर्स राष्ट्र-विरोधी और आतंकी समूहों द्वारा शांति भंग करने की साजिश रचने पर कार्रवाई करेगी।

कर्नाटक में पैर पसारता इस्लामिक कट्टरपंथ

बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथ दक्षिणी राज्यों में भी पाँव पसार रहा है। टीपू सुल्तान का महिमामंडन होता रहता है। ऐसा दिखाया जाता है कि निजाम ने जानबूझ कर पाकिस्तान को छोड़ भारत को चुना।

कर्नाटक ने वर्ष 2022 की शुरुआत में इस्लामवाद और उसके कट्टरपंथ का बड़ा स्वरूप देखा है। राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड होने के बाद भी मुस्लिम छात्राओं ने इस्लामी पारंपरिक पोशाक के अनुसार हिजाब पहनने के लिए अड़ियल रुख अपनाया। 2022 के शुरुआती महीनों में यह एक बड़ा मुद्दा रहा। इसके अलावा, लाउडस्पीकर से दिन में 5 बार नमाज खासतौर से सुबह-सुबह का शोर आसपास के निवासियों की परेशानी का दूसरा बड़ा कारण था।

इसके अलावा, नूपुर शर्मा की पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित ईशनिंदा पर विरोध की आड़ में विरोध या हिंसा की घटनाओं ने बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्ष और भाजयुमो नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्याओं से पहले के महीनों में राज्य में कई ऐसी घटनाएँ होती रहीं हैं। ऐसी घटनाएँ बतातीं हैं कि इस्लामिक कट्टरपंथ किस हद तक हावी होता जा रहा है।

‘शूद्रों को नहीं था अनुष्ठान का अधिकार, ब्राह्मणों ने महिलाओं को भी इसी समूह में रखा’: बिना सबूत पढ़ा रहा NCERT, RTI में भी नहीं दे पाया तथ्य

बचपन से ही हर एक छात्र को वर्ण व्यवस्था (Varna System) के बारे में पढ़ाया जाता है। सदियों से वर्ण व्यवस्था पर बहस होती आ रही है, लेकिन सही मायने में वर्ण व्यवस्था क्या है इसे कोई सही रूप से समझा नही पाया है। कक्षा 6 की NCERT पुस्तक के अध्याय 5 में वर्ण व्यवस्था पर जो छात्रों को पढ़ाया जा रहा है, वही आज समाज में आपसी मतभेद का सबसे बढ़ा कारण बनता जा रहा है।

कक्षा 6 की NCERT पुस्तक के पृष्ठ संख्या 47-48 में लिखा है, “पुरोहितों ने लोगों को चार वर्णों में विभाजित किया, जिन्हें वर्ण कहते हैं। उनके अनुसार प्रत्येक वर्ण के अलग-अलग कार्य निर्धारित थे। पहला वर्ण ब्राह्मणों का था। उनका काम वेदों का अध्ययन-अध्यापन और यज्ञ करना था, जिनके लिए उन्हें उपहार मिलता था। दूसरा स्थान शासकों का था, जिन्हें क्षत्रिय कहा जाता था। उनका काम युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था।

इसी में आगे लिखा गया है, “तीसरे स्थान पर विशु या वैश्य थे। इनमें कृषक, पशुपालक और व्यापारी आते थे। क्षत्रिय और वैश्य, दोनों को ही यज्ञ करने का अधिकार प्राप्त था। वर्णों में अंतिम स्थान शूद्रों का था। इनका काम अन्य तीनों वर्गों की सेवा करना था। इन्हें कोई अनुष्ठान करने का अधिकार नहीं था। प्रायः महिलाओं को भी शूद्रों के समान माना गया।”

शूद्रों को लेकर इसमें कहा गया है, “महिलाओं तथा शूद्रों को वेदों के अध्ययन का अधिकार नहीं था। राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य पुरोहितों के अनुसार, सभी वर्गों का निर्धारण जन्म के आधार पर होता था। उदाहरण के तौर, पर ब्राह्मण माता-पिता की संतान ब्राह्मण होती थी।” 

NCERT के द्वारा वर्णित वर्ण व्यवस्था के इस अध्याय को आधार बनाते हुए लेखक के द्वारा एक आरटीआई (RTI) NCERT को दायर की गई थी। इस RTI में NCERT से 2 प्रमुख बिन्दुओं पर जानकारी माँगी गई थी।

  1. प्रायः महिलाओं को भी शूद्रों के समान माना गया है। महिलाओं तथा शूद्रों को वेदों के अध्ययन का अधिकार नहीं था।
  2. पुरोहितों के अनुसार सभी वर्णों का निर्धारण जन्म के आधार पर होता था। उदाहरण के तौर पर, ब्राह्मण माता-पिता की संतान ब्राह्मण होती थी।

इन दोनों प्रमुख बिन्दुओं पर NCERT के पास कोई भी तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध नही है। NCERT ने मनुस्मृति का उल्लेख तो किया, लेकिन उसके पास इसकी कोई सत्यापित कॉपी भी नहीं है, जिसके आधार पर छात्रों को यह वर्षों से पढ़ाया जा रहा है।

भारत देश के इतिहास एवं पारम्परिक रीति-रिवाजों से हम भी भली-भाँति परिचित हैं, जहाँ महिलाओं को ईश्वर के रूप में सदियों से पूजा जाता आ रहा है। इसके बावजूद हमारे देश में महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार कैसे नहीं दिया गया? वेदों के अध्ययन को लेकर यजुर्वेद के अध्याय 26 के दूसरे मंत्र में लिखा गया है:

“हे मनुष्यों! मैं ईश्वर (यथा) जैसे (ब्रह्मराजन्याभ्याम्) ब्राह्मण, क्षत्रिय (अर्याय) वैश्य (शूद्राय) शूद्र (च) और (स्वाय) अपने स्त्री, सेवक आदि (च) और (अरणाय) उत्तम लक्षणयुक्त प्राप्त हुए अन्त्यज के लिए (च) भी (जनेभ्यः) इन उक्त सब मनुष्यों के लिए (इह) इस संसार में (इमाम्) इस प्रकट की हुई (कल्याणीम्) सुख देने वाली (वाचम्) चारों वेद रूपवाणी का (आवदानि) उपदेश करता हूँ, वैसे आप लोग भी अच्छे प्रकार उपदेश करें।”

इस मंत्र में साफ-साफ चारों वर्णों को वेदों का पाठ करने के लिए कहा गया है। हर एक वर्ण को वेदों का पाठ करने की पूरी पूरी आजादी है तो फिर NCERT बिना प्रमाणिकता के क्यों ऐसे लेख छात्रों को पढ़ा रहा है, जो समाज में आपसी मतभेद का कारण बन रहा है? 

NCERT की पुस्तक में लिखा है, पुरोहितों के अनुसार सभी वर्णों का निर्धारण जन्म के आधार पर होता था। उदाहरण के तौर पर, ब्राह्मण माता-पिता की संतान ब्राह्मण ही होती थी। NCERT ने इसका स्रोत मनुस्मृति को बताया है, जिसका सत्यापित प्रमाण उनके पास नहीं है।

वहीं, मनुस्मृति में महाराज मनु ने लिखा है, “ब्राह्मण शूद्र बन सकता है और शूद्र ब्राह्मण बन सकता है। किसी भी वर्ण का व्यक्ति ऐसे गुणों को प्राप्त करके किसी भी वर्ण में बदल सकता है।” भगवद्गीता में लिखा है, “ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण उनके गुणों और कौशल से वितरित होते हैं और वे जो कर्म करते हैं, वह जन्म से प्राप्त नहीं होता है।”

इस पूरे अध्याय में NCERT ने वेदों में वर्णित कथनों को घूमा-फिरा कर लिखा है और आज तक छात्रों को यही सब पढ़ाया जा रहा है। जब शिक्षा ही मतभेदों की तर्ज पर दी जाएगी तो लोगों मे मतभेद होना लाजिमी है। 

आसिम अंसारी ने 10 साल की बच्ची को डंडे से पीट-पीट कर अधमरा किया, गाड़ी से कुचलने के लिए सड़क पर फेंका: झारखंड में ST परिवार के साथ फिर बर्बरता

झारखंड में जुर्म का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला गढ़वा जिले का है। आरोप है आसिम अंसारी नामक व्यक्ति ने एक आदिवासी परिवार की 10 वर्षीय बच्ची को 50 हजार रुपए के लालच में पहले तो डंडों से पीटकर अधमरा कर दिया, उसके बाद मासूम को मरने के लिए हाइवे पर फेंक दिया।

दैनिक जागरण’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के गढ़वा जिले के गढ़वा थाना क्षेत्र के ओबरा गाँव में रहने वाले आरोपी व्यक्ति आसिम अंसारी ने मानवता को शर्मसार कर देने वाला कुकृत्य किया है। वो बच्ची को बेरहमी से पीट रहा था, लेकिन मासूम को एक बस चालक ने अपनी सूझबूझ से बचा लिया और ग्रामीणों के सहयोग से स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ उसका इलाज भी चल रहा है।

बताया जा रहा है कि पीड़िता के पिता बाहर ही काम करते हैं और उसकी माँ मजदूरी का काम करती हैं। माँ ने यह जानकारी दी कि गुरुवार (1 सितंबर, 2022) सुबह करीब आठ बजे वह मजदूरी करने के लिए गढ़वा जाने लगी तो अपनी बेटी को 1140 रुपये स्वयं सहायता समूह के ऋण का किस्त जमा करने के लिए देकर गई। इसके अलावा उसने मजदूरी करके तथा समूह से ऋण लेकर 50 हजार रुपए जमा कर घर में रखे थे।

पीड़िता की माँ के अनुसार, पैसे निकालने के दौरान बच्ची के साथ उसकी सहेली भी वहीं मौजूद थी। माँ के घर से चले जाने के करीब आधा घंटा बाद बच्ची ने अपनी सहेली को घर से जाने को कह दिया। उसके बाद बच्ची घर के दरवाजे में कुंडी चढ़ाकर बिना ताला बंद किए ही 1150 रुपये स्वयं सहायता समूह में जमा करने के लिए निकल गई।

जब 10 वर्षीय बच्ची अपने घर से चली गई तो उसकी सहेली वापस उसके घर आई और 50 हजार रुपए भी निकाल लिए। इससे पहले वो घर से जाए, पीड़ित बच्ची घर को लौट आई। उसे देखकर उसकी सहेली भागने लगी, लेकिन बच्ची ने उसका पीछा किया और उसके घर तक जा पहुँची। लेकिन, वहाँ उसकी सहेली के घर पर उसका अब्बा आसिम अंसारी पहले से ही मौजूद था।

आरोपित आसिम अंसारी ने वहाँ बच्ची को बड़ी बेरहमी से डंडों से पीटा। उसके बाद जब बच्ची मार खाकर अधमरी हो गई, तब आरोपी ने उसे गाड़ियों से कुचलने के लिए एनएच 343 पर फेंक दिया। बच्ची की किस्मत अच्छी थी कि एक बस चालक ने उसे बेसुध पड़े देख लिया और उसको सड़क से सुरक्षित हटाया। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से उसे परिजनों को बताया और फिर बच्ची को गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

‘अपनी बेटी मेरे पास भेजो नहीं तो पूरे परिवार का सर तन से जुदा कर दूँगा’: मोहम्मद रहीस ने हिंदू पिता को दी धमकी, कहा- तेरी बेटी की अश्लील फोटो वायरल करूँगा

धीरे-धीरे ही सही, लव जेहाद (Love Jihad) का पर्दाफाश होने के बाद अब जेहादी खुलेआम उत्पात मचाने लगे हैं। झारखंड में अंकिता सिंह को जलाकर मारने और दिल्ली के संगम विहार में नैना मिश्रा को गोली मारने की घटना के बीच यूपी के बागपत से ऐसी ही जोर-जबरदस्ती की एक घटना सामने आई है।

बागपत में मोहम्मद रहीस नाम का लड़का एक हिंदू लड़की के माता-पिता पर अपनी बेटी को उसके पास भेजने का लगातार दबाव बना रहा है। बेटी को नहीं भेजने पर उसने पूरे परिवार का ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी है। पिता ने थाने में तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

लड़की के पिता ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद रहीस उन पर अपनी बेटी को उसके पास भेजने के लिए मानसिक दबाव बना रहा है। जब उन्होंने मना किया तो उनकी बेटी की अश्लील तस्वीर सोशल मीडिया पर डाल दी। साथ ही परिवार को हत्या की धमकी दी है।

लड़की के पिता का कहना है कि वे बागपत के खेकड़ा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। 18 जुलाई को वे अपनी पत्नी के साथ स्कूटर से दिल्ली की ओर जा रहे थे। इसी बीच गाजियाबाद का रहने वाला मोहम्मद रहीस नाम का मुस्लिम लड़का उन्हें रास्ते में रोक लिया।

लड़की के पिता का कहना है कि रहीस उनकी पत्नी से बोला कि ‘अपनी बेटी को मेरे पास भेज दो, नहीं तो तुम्हारा और तुम्हारे पति का सर तन से जुदा कर दूँगा’। इसके बाद से उनका परिवार डरा हुआ है।

लड़की के पिता बताया कि हंगामा देखकर मौके पर इकट्ठा हो गए। भीड़ को देखकर लड़का वहाँ से भाग गया। इसके बाद से वह लगातार उनके परिवार पर लड़की को भेजने का दबाव बना रहा है। 23 अगस्त को उसने अपने ह्वॉट्सएप स्टेटस पर उसकी बेटी की अश्लील तस्वीर लगा दी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित पिता ने बताया कि उसकी बेटी एक स्कूल में पढ़ाती थी। वहीं, वह लड़का शुक्र बाजार में ठेला लगाता था। 30 मई को उसकी बेटी बिना बताए लापता हो गई थी। हिंदू संगठनों के हंगामे के बाद पुलिस ने उनकी बेटी को एक महीने बाद बरामद कर परिजनों को सौंप दिया था।

उसके बाद से वह युवक लड़की को उसके पास भेजने का दबाव बना रहा है। इसके साथ ही परिजनों को हत्या की धमकी दे रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार मुस्लिम लड़के साथ पीड़ित की बेटी का प्रेम प्रसंग है। पीड़ित पिता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

‘8 साल में मेट्रो का 500 km नया रूट बना, 1000 कम पर चल रहा काम’: PM मोदी ने केरल को दी ₹4600 करोड़ की योजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय केरल दौरे पर हैं। उन्होंने गुरुवार (1 सितंबर, 2022) को कोच्चि मेट्रो के विस्तारीकरण सहित विभिन्न परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया तथा तीन रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए आधारशिला रखी है। प्रधानमंत्री ने कुरुप्पंथरा-कोट्टायम चिंगवनम खंड को जोड़ने वाली भारतीय रेलवे की 27 किलोमीटर की दोहरी लाइन का भी उद्घाटन किया।

इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज केरला का कोना-कोना ओणम के पावन उत्सव की खुशियों से सराबोर है। उत्साह के इस अवसर पर केरल को कनेक्टिविटी से जुड़ी 4600 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उपहार मिला है।”

उन्होंने यह भी कहा, “हम भारतवासियों ने, आज़ादी के अमृतकाल यानी आने वाले 25 साल में विकसित भारत के निर्माण का विराट संकल्प लिया है। विकसित भारत के इस रोडमैप में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा रोल है।”

मेट्रो के विकास पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “बीते आठ वर्षों में केंद्र सरकार ने मेट्रो को अर्बन ट्रांसपोर्ट का सबसे प्रमुख साधन बनाने के लिए लगातार काम किया है। केंद्र सरकार ने मेट्रो को राजधानी से निकालकर, राज्य के दूसरे बड़े शहरों में भी विस्तार दिया है। हमारे देश में पहली मेट्रो करीब-करीब 40 साल पहले चली थी। उसके बाद के 30 साल में देश में 250 किलोमीटर से भी कम मेट्रो नेटवर्क तैयार हो पाया था। बीते 8 वर्षों में देश में मेट्रो का 500 किलोमीटर से ज्यादा का नया रूट तैयार हुआ है, 1000 किलोमीटर से अधिक के मेट्रो रूट पर पर काम चल रहा है।”

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने, नेदुम्बासरी में कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर जनसभा को संबोधित हुए कहा, “भ्रष्ट व्यक्तियों के खिलाफ हम कार्रवाई करते हैं, इसलिए राष्ट्रीय राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण शुरू हुआ है।” उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने वालों को बचाने के लिए कुछ राजनीतिक समूह खुलकर आगे आ रहे हैं। वे एक गुट में संगठित होने का प्रयास कर रहे हैं। देशवासियों को ऐसे समूहों के प्रति सजग रहना होगा।”

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोलने पर बल दे रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना का बहुत बड़ा फायदा केरल के युवाओं को होगा। आजादी के अमृत काल में देश आधुनिक बुनियादी ढांचों पर बहुत ज्यादा बल दे रहा है।

‘ये हत्या की धारा से भी ज्यादा गंभीर है’: गुजरात दंगों पर साजिश रचने वाली को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली जमानत, 2 सितंबर को फिर सुनवाई

गुजरात दंगों से जुड़े मामले में सबूतों से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर गुरुवार (1 सितंबर, 2022) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को फिलहाल जमानत देने से मना किया। इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार 2 सितंबर को होगी।

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की अगुवाई वाली पीठ ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम राहत देते हुए जमानत देगी। लेकिन, फिर भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर सुनवाई को कल दोपहर 2 बजे के लिए स्थगित कर दिया गया है। तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, “चूँकि मामला हाईकोर्ट में है, इसलिए आप वहीं सुनवाई होने दें।” उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह आँखें बंद करके ना रखे, लेकिन आँखें पूरी खोले भी नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सवाल करते हुए पूछा, “मान लीजिए हम तीस्ता को अंतरिम राहत दे देते हैं और मामले की सुनवाई होने देते हैं, तो?” इस पर मेहता ने कहा ” मैं इसका विरोध करूँगा। गुजरात दंगों के बाद तीस्ता साजिश में शामिल थी और ये IPC की धारा 302 से भी ज्यादा गंभीर है।” गौरतलब है कि तीस्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी 25 जून 2022 को हुई थी। जिसके बाद सीतलवाड़ ने अहमदाबाद कोर्ट में जमानत की अपील की थी। लेकिन, उन्हें जमानत नहीं मिल पाई थी। इसके बाद तीस्ता ने गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया था। गुजरात हाईकोर्ट ने तीस्ता की जमानत अर्जी पर नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की तारीख 19 सितंबर तय कर दी थी।

चूँकि, तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत मिलने में देरी हो रही थी। इसलिए, उसने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। यदि सर्वोच्च न्यायालय अगली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दिए गए तर्कों से संतुष्ट होती है और गुजरात हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करती है तो फिर तीस्ता को जमानत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

बता दें, गुजरात दंगा मामले में निर्दोष लोगों को फँसाने के लिए फर्जी सबूत गढ़ने के आरोप में तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद गुजरात पुलिस के विशेष जाँच दल की ओर से कोर्ट में पेश किए गए एक हलफनामे में कहा गया था कि तीस्ता का उद्देश्य बड़े षड़यंत्र को अंजाम देते हुए गुजरात सरकार को गिराना या अस्थिर करना था।

‘देश विरोधी साजिश का पता चला तो मदरसे को गिरा दूँगा’: जिहादी तत्वों को असम के CM की दो टूक, ध्वस्त हो चुके हैं 3 मदरसे

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा अक्सर अपने बेबाक निर्णयों के कारण चर्चा में बने रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि कई मदरसे आतंक का हब हैं वहाँ पढ़ाई के बदले आतंकियों की ट्रेनिंग होती हैं। वहीं अब सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक बयान में कहा कि मदरसों की आड़ में देश विरोधी गतिविधि करने वाले संस्थान तोड़े जाएँगे।

असम में आतंकी कनेक्शन के कारण हाल के दिनों में 3 मदरसे ध्वस्त किए जा चुके हैं। गुरुवार (1 सितंबर, 2022) को सीएम हिमंत बिस्वा सरमा मीडिया को बताया कि मदरसों को ध्वस्त करने का हमारा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल यह स्पष्ट है कि मदरसों का इस्तेमाल जिहादी तत्वों द्वारा नहीं किया जाए। उन्होंने कहा, “अगर हमें कोई विशेष जानकारी मिलती है कि मदरसे की आड़ में भारत विरोधी गतिविधियों के लिए संस्थान का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो हम उन्हें तोड़ देंगे।”

वहीं असम में बुधवार (31 अगस्त, 2022) को बोंगाईगाँव में मदरसे को आतंकवादी संगठन अलकायदा से संबंधों के कारण गिरा दिया गया था। बताया यह भी जा रहा है कि इस कार्रवाई का संबंध बीते दिनों राज्य के अलग-अलग इलाकों से पकड़े गए अलकायदा के आतंकियों से भी हैं। इससे पहले असम के बरपेटा जिले में एक निजी मदरसे को गिरा दिया था।

हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल में मदरसों को आतंकियों का हब बताया

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल में दिए एक बयान में मदरसों को आतंकियों का हब कह दिया था। सीएम ने कहा कि मदरसों को आतंकियों के ट्रेनिंग हब के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि इन मदरसों में शिक्षा की बजाए आतंक की ट्रेनिंग दी जा रही है। सीएम सरमा ने कहा कि असम में अब तक ऐसे तीन मदरसों को गिराया जा चुका है।

इससे पहले भी 23 मई, 2022 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि देश में जब तक मदरसे रहेंगे, तब तक बच्चे इंजीनियर और डॉक्टर बनने के बारे में नहीं सोच पाएँगे। सीएम हिमंता के मुताबिक, अगर आप बच्चों को धर्म से जुड़ी शिक्षा देना चाहते हैं तो घर पर दें, उसके लिए मदरसे का होना जरूरी नहीं है।

मेधा पाटकर को चेहरा बनाने निकली थी AAP, मोहरों ने गुजरात चुनाव से पहले ही कर दी बगावत: केजरीवाल के होश उड़े, दिल्ली छोड़ भाग रहे अहमदाबाद

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Delhi CM & AAP Convener Arvind Kejriwal) अगले दो दिन गुजरात के दौरे पर हैं। उम्मीद है कि वे राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Election) के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवारों से मिलेंगे।

सूत्रों का कहना है कि ऐसी खबरें आने के बाद कि मेधा पाटकर गुजरात में AAP की तरफ से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होंगी, पार्टी नेताओं में असंतोष फैल गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी द्वारा बनाए गए 19 उम्मीदवारों में से 13 ने आम आदमी पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि उन्हें मनाने के लिए केजरीवाल शुक्रवार को एक बैठक कर सकते हैं।

इस हफ्ते की शुरुआत में खबरें आई थीं कि गुजरात विरोधी ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की कार्यकर्ता मेधा पाटकर गुजरात में AAP की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होंगी। यह कई लोगों के लिए आश्चर्य वाली बात थी। अब तक यही माना जाता रहा कि AAP के गुजरात प्रमुख इसुदन गढ़वी पार्टी के पसंदीदा उम्मीदवार हैं।

हालाँकि, इन खबरों को तब और हवा मिली, जब आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने मेधा पाटकर (Medha Patekar) की तारीफ करने वाले एक वीडियो को रीट्वीट किया। बाद में इस वीडियो को इसुदान गढ़वी ने भी रीट्वीट किया।

मेधा पाटकर को उनकी गुजरात विरोधी रुख के कारण सबसे ज्यादा नापसंद किया जाता है। सरदार सरोवर बाँध के काम को रोकने में मेधा पाटकर ने महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके कारण गुजरात के कई इलाकों को दशकों तक सूखा झेलना पड़ा।

गुजरात के कुछ हिस्सों में आज सिर्फ नर्मदा नदी का पानी आ रहा है, क्योंकि मेधा पाटकर जैसे लोगों ने पर्यावरण के नाम पर बाँध की ऊँचाई को बढ़ाने के काम में अड़ंगा डाल कर रूकवा दिया था। पाटकर की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निभाई गई भूमिका के कारण गुजरात के लोगों ने उन्हें माफ नहीं किया है।

मेधा पाटकर साल 2014 में लोकसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुई थीं, लेकिन साल 2015 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, उसके बाद से पाटकर ने सक्रिय राजनीति में लौटने की घोषणा नहीं की है। इसके बाद भी AAP ने मेधा पाटकर को मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार बनाए जाने की खबरों का खंडन नहीं किया गया है।

गुजरात विरोधी रुख रखने वाली मेधा पाटकर पर धन के दुरुपयोग करने के भी आरोप लगे हैं। इस साल जुलाई में उनके खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर पैसे की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।

इससे पहले 5 अप्रैल 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के दौरान संदिग्ध धनशोधन (Money Laundering) के लिए अभियान की कार्यकर्ता रहीं मेधा पाटकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। ED के अलावा, पाटकर के संदिग्ध लेन-देन की जाँच राजस्व खुफिया विभाग और आयकर विभाग भी कर रहा है।

अगर संदिग्ध सौदों की बात करें तो AAP नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी आबकारी नीति घोटाले में सीबीआई जाँच के दायरे में हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि मनीष सिसोदिया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से AAP उम्मीदवार नाखुश हैं।

असम में आतंकी अजमल हुसैन गिरफ्तार, बांग्लादेशी आतंकियों को घर में देता था पनाह: अलकायदा से जुड़े अब तक 38 दबोचे जा चुके हैं

असम पुलिस ने अलकायदा के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। उसे बुधवार (31 अगस्त, 2022) को पुलिस ने पकड़ा था। लंबी पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसने गुवाहाटी में अपने एक अड्डे पर बांग्लादेशी आतंकी को पनाह दी थी। इसकी गिरफ़्तारी के बाद AQIS और ABT के गिरफ्तार आतंकियों की संख्या 38 हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स’ के अनुसार असम के गोलपाड़ा जिले के एसपी ने बताया कि संदिग्ध आतंकी को गुरुवार (1 सितंबर ,2022) को अदालत में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, “पूछताछ के दौरान, उसने एक्यूआईएस/एबीटी का सदस्य होने की बात कबूल की। ​​उसने अपने घर में बांग्लादेशी नागरिकों को पनाह दी थी, जो पहले से ही अलकायदा और एबीटी के सदस्य हैं।”

बता दें पिछले लंबे समय से ही अलकायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) इस क्षेत्र में सक्रियता दिखा रही हैं। इससे पहले भी सुरक्षा बलों की टीम ने इन आतंकी संगठनों के 37 गुर्गों को गिरफ्तार किया था। बुधवार को पकड़े गए संदिग्ध आतंकी का नाम अजमल हुसैन बताया जा रहा है।

असम पुलिस ने संदिग्ध आतंकी अजमल हुसैन को मटिया थाना मामला संख्या 105/22 यू/एस 121/121(ए)/120(बी) में गिरफ्तार किया। वहीं इस पर आईपीसी आरडब्ल्यू की धारा 18/18(बी)/19/20 यूए भी लगाई गई। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि हुसैन ने खुद इस बात को माना है कि वह गुवाहाटी में अपने ठिकाने पर बांग्लादेशी जिहादियों को शरण दे रहा था, वहीं उसने असम के बारपेटा जिले में अलकायदा से ट्रेनिंग ली थी।

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार (29 अगस्त 2022) को असम पुलिस ने बारपेटा जिले में अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से अन्य 2 संदिग्ध लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इन दोनों की पहचान मोरनोई थाना क्षेत्र के टीलापारा नतून मस्जिद (Tilapara Natun Mosque) के इमाम अब्दुस सुभान और जलालुद्दीन शेख के रूप में हुई हैं।

फिलहाल असम पुलिस अधिकारी आतंकी गतिविधियों के संदर्भ में राज्य के कई छोटे-बड़े मदरसों और मस्जिदों ध्वस्त करने का अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में असम के बारपेटा जिले के ढकलियापारा में स्थित शेखुल हिंद महमूदुल हसन जमीउल हुडा इस्लामिक अकादमी नाम के एक मदरसे को सोमवार को बारपेटा जिले के जिला प्रशासन और पुलिस ने ध्वस्त कर दिया।

‘ये शिर्क है, तुम्हें शर्म आनी चाहिए’: शाहरुख खान के गणेश चतुर्थी ट्वीट पर भड़के कट्टरपंथी, पूछा – तुम मुस्लिम हो भी या नहीं?

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान ने बुधवार (31 अगस्त 2022) को गणेश चतुर्थी के अवसर पर एक तस्वीर शेयर की। ये तस्वीर उनके घर में स्थापित गणपति की थी। इसी फोटो को शेयर कर उन्होंने सभी को गणेश चतुर्थी की बधाई भी दी, लेकिन शायद उनके ही मजहब के कुछ लोगों को अभिनेता की ये बात रास नहीं आई। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर कुछ मुस्लिम उन्हें गालियाँ देने लगे।

इस पोस्ट को शेयर करते हुए अभिनेता ने लिखा, “मैंने और मेरे छोटे बेटे (अबराम) ने गणपति जी का घर पर स्वागत किया है। मोदक स्वादिष्ट थे। सीख ये है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ता और भगवान में विश्वास के माध्यम से आप अपने सपनों को जी सकते हैं। सभी को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ।”

शाहरुख इस पोस्ट पर कुछ लोग भड़क उठे और उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगे। तैमूर उल हसन नामक एक यूजर ने इस ट्वीट का रिप्लाई करते हुए लिखा, “मुस्लिमों के लिए कितनी शर्म की बात है सर। आपको मुस्लिम या हिंदू होने के लिए किसी एक धर्म को चुनना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और पैगंबर मुहम्मद मानवता के जीवन को बदलने के लिए आए थे। पैगंबर ने हमें सुंदर मजहब दिया।”

वहीं जीशान अहमद अंसारी ने लिखा, “सभी मुस्लिमों को उनकी आने वाली सभी फिल्मों का बहिष्कार करना चाहिए क्योंकि अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है और वह शिर्क नौजुबिल्लाह कर रहा है। अल्लाह उसे सही रास्ते पर ले जाएँ।”

इसी क्रम में अंसार खान ने SRK को जवाब देते हुए ट्वीट किया, “मुस्लिम होना गलत है, और तुम अपना ईमान खो दोगे। इस तरह की चीजों से दूर रहें। हालाँकि, किसी भी धर्म के बारे में गलत न बोलें।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “आप मुस्लिम हैं या हिंदू? कृपया पुष्टि करें। इस्लाम में हम केवल अल्लाह में विश्वास करते हैं और पैगंबर मुहम्मद उनके दूत हैं!”

जैनब खान नामक यूजर ने शाहरुख की पोस्ट पर कमेन्ट करते हुए लिखा, “नबी पाक पर ग़लत बयानबाजी होती हैं, तब तो आपके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकलता है। नाम के लिए क्या से क्या न कर जाओ। एक बात बोलूँ, यहीं नहीं रहना है।”

शाहरुख के ट्वीट का जवाब देते हुए मौलाना हकीमुल्ला ने कहा, “पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित लोगों सहित सभी मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करने के लिए आपको शर्म आनी चाहिए।”

गौरतलब है कि शाहरुख खान ने यही पोस्ट अपने इंस्टाग्राम के अकाउंट पर भी की थी, लेकिन वहाँ भी शाहरुख को लोगों ने घेरा। एक यूजर ने तो इसको उनकी आने वाली फिल्म ‘पठान’ से जोड़ा और लिखा, “पठान के बॉयकोट होने का डर।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये शिर्क है। तुम मुस्लिम हो, सच का साथ दो।”

शाहरुख खान की पोस्ट पर भड़के लोग