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पीड़िता- दलित नाबालिग, आरोपित- शादाब, वसीम और वशीरः दावा- मेडिकल नहीं होने दे रही थी डॉक्टर आसमा बेगम, पत्रकार को कहा- हिंदू काफिर @# के बच्चे

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला डॉक्टर पत्रकारों और पुलिसकर्मियों से उलझती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में दिख रहीं डॉक्टर का नाम आसमा बेगम है। उनकी पोस्टिंग फर्रुखाबाद के डॉक्टर राममनोहर लोहिया महिला चिकित्सालय में है। इस वीडियो का संबंध एक दलित नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार से जुड़ा हुआ है।

बलात्कार की घटना 20 अगस्त 2022 की है। इस संबंध में 23 अगस्त 2022 को शादाब, वसीम और वशीर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पीड़िता को मेडिकल के लिए ले जाया गया। आरोप है कि डॉक्टर आसमा ने भविष्य का डर दिखाकर पीड़िता से मेडिकल नहीं कराने को कहा। इसकी वजह उनका और आरोपितों का एक ही मजहब से जुड़ा होना बताया जा रहा है। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

जो वीडियो वायरल हुआ है वह 24 अगस्त का बताया जा रहा। आरोप है कि इस दौरान डॉक्टर आसमा ने एक पत्रकार को ‘हिंदू काफिर @# का बच्चा’ भी कहा। इसको लेकर उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई हैं। डॉक्टर आसमा ने भी पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। खबर लिखे जाने बलात्कार के एक आरोपित की गिरफ्तारी हो चुकी थी। पीड़िता का भी मेडिकल हो चुका है। पुलिस का कहना है कि वीडियो से जुड़े आरोपों की जाँच चल रही है।

दलित नाबालिग से रेप

20 अगस्त 2022 को एक दलित नाबालिग लड़की को अगवा कर गैंगरेप का आरोप शादाब, वसीम और वशीर पर है। 23 जुलाई को इस मामले में मऊदरवाजा थाने में केस दर्ज गया। DSP सिटी प्रदीप सिंह के मुताबिक लोकलाज के डर पीड़ित परिवार 3 दिन तक शिकायत दर्ज कराने से बचता रहा।

शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी बेटी को रात के समय सोए हुए अगवा किया गया। दावा है कि पीड़ित पिता ने आरोपितों से अपनी बेटी को छोड़ने की गुहार लगाई तो उनके साथ भी अभद्रता हुई। इस मामले में दर्ज एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पीड़ित पिता के अनुसार इससे पहले भी शादाब ने अपने दोस्तों के साथ उनकी बेटी को अगवा कर लिया था। उस समय शादाब के अब्बा के दखल के बाद लड़की घर लौट आई थी।

पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 363, 366, 342, 376-डी, 504, 506, पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की है। मुख्य आरोपित शादाब को गिरफ्तार कर लिया है। DSP सिटी प्रदीप सिंह के अनुसार मामले की जाँच चल रही है। कुछ हालात और तथ्य सबूतों से मेल नहीं खा रहे।

मेडिकल में देरी

ऑपइंडिया से बात करते हुए DSP प्रदीप सिंह ने बताया कि 23 अगस्त की शाम पीड़िता को महिला सिपाही के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया था। उस समय डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। अगली सुबह उसे फिर अस्पताल भेजा गया। लेकिन मेडिकल नहीं किया गया। इसके बाद उस दिन शाम में वरीय अधिकारी अस्पताल गए। इसी दौरान कुछ पत्रकार भी अस्पताल पहुँच गए।

DSP प्रदीप सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रशासन मेडिकल क्यों टाल रहा था, यह समझ से परे है। DSP के अनुसार जब उन्होंने केस की गंभीरता समझने का प्रयास किया तो महिला डॉक्टर भड़क गईं। वायरल हो रहा वीडियो उसी समय का है। प्रदीप सिंह ने ये माना कि अस्पताल प्रशासन का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं था।

25 अगस्त को हुआ पीड़िता का मेडिकल

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO फर्रुखाबाद कोतवाली ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल 25 अगस्त को हुआ था। साथ ही बताया कि महिला डॉक्टर और पत्रकार की तरफ से दर्ज कराए गए मामले की जाँच चल रही है। आरोपित शादाब की गिरफ्तारी 26 अगस्त 2022 को हुई थी।

डॉक्टर आसमा बेगम पर आरोप

अस्पताल में हुई घटना को लेकर पत्रकार सुंदरम सिंह ने 24 अगस्त 2022 को ही डॉक्टर आसमा बेगम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। आरोप लगाया है कि वह पीड़िता के मेडिकल में टालमटोल कर रही थी। पीड़िता को भविष्य खराब होने का डर दिखा रही थी। उनका दावा है कि आरोपितों के भी मुस्लिम होने के कारण वह पीड़िता पर मेडिकल नहीं कराने का दबाव डाल रही थी।

सुंदरम का आरोप है कि डॉक्टर आसमा ने उन्हें ‘हिन्दू काफिर @# के बच्चे’ जैसे शब्दों से संबोधित किया। महिला डॉक्टर ने फोन कर कर अपने शौहर इमरान और देवर रिजवान को अस्पताल बुला लिया। उनके साथ दर्जन भर लोग थे। आरोप है कि इनलोगों ने पत्रकार का गला दबाने और मारपीट का पुलिस के आगे ही प्रयास किया।

पीड़ित पिता ने कहा- बार-बार दौड़ा रहीं थीं डॉक्टर आसमा

दलित पीड़िता के पिता का भी कहना है कि डॉक्टर आसमा बेगम मेडिकल करने में टालमटोल कर रहीं थी। उनकी बेटी को लगातार दौड़ा रहीं थीं। कभी दिन में तो कभी रात में आने को कह रही थी। उनका यह भी दावा है कि वीडियो बना रहे पत्रकार की पिटाई महिला डॉक्टर ने पुलिस के सामने ही की थी।

डॉक्टर आसमा बेगम पर कार्रवाई की माँग

फर्रुखाबाद के विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने आरोपित डॉक्टर आसमा बेगम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि जो डॉक्टर पुलिस के सामने इस तरह का व्यवहार कर सकती है वह आम आदमी के साथ क्या करती होंगी, यह सोचनीय है। विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री से डॉक्टर आसमा बेगम को दंडित करने की माँग की है।

करणी सेना ने भी डॉक्टर आसमा बेगम के खिलाफ ज्ञापन दिया है। अपने ज्ञापन में करणी सेना ने पीड़िता का मेडिकल न करने और पत्रकार का मोबाईल तोड़ने का आरोप लगाते हुए डॉक्टर आसमा पर कठोर कार्रवाई की माँग की है।

करणी सेना ज्ञापन

डॉक्टर आसमा ने भी पत्रकार पर दर्ज करवाई FIR

डॉक्टर आसमा बेगम ने भी पत्रकार सुंदरम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पत्रकार पर घूस माँगने, सरकारी अभिलेख फाड़ने, खुद को पीटने और नशे में अभद्रता का आरोप लगाया है। इसको लेकर पत्रकार सुंदरम ने ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रशासन से घटना के समय अस्पताल की CCTV फुटेज सार्वजानिक करने की माँग की है। उन्होंने CCTV से छेड़छाड़ की भी आशंका जताई है।

पंजाब में AAP की महिला विधायक को पति ने सबके सामने जड़ा थप्पड़, पार्टी की यूथ विंग के हैं लीडर: CCTV वीडियो वायरल

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की महिला विधायक बलजिंदर कौर को उनके पति द्वारा सबके सामने थप्पड़ मारे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो 10 जुलाई का बताया जा रहा है, जिस पर अभी तक महिला विधायक और उनके पति का कोई बयान नहीं आया है। ‘पंजाब महिला आयोग’ की अध्यक्ष ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है।

यह वीडियो गुरुवार (1 सितम्बर, 2022) से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में घर के अंदर महिला विधायक के पति एक चारपाई पर बैठे दिख रहे हैं। थोड़ी सी बहस के बाद वो उठ कर अपनी पत्नी को थप्पड़ मार देते हैं। घटनास्थल पर महिलाओं और बच्चे सहित कई अन्य लोग मौजूद दिख रहे हैं। उन्होंने विधायक के पति सुखराज सिंह को रोका, जिसके बाद और और पिटने से बच गईं।

पंजाब ‘युवक कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष बरिंदर ने इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने इस घटना को अप्रत्याशित बताते हुए पुरुषों से महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने के लिए कहा है। पंजाब की राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मनीषा गुलाटी ने भी इस वीडियो का संज्ञान लिया है। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा के मुताबिक, यद्यपि ये मामला घरेलू है लेकिन फिर भी ये देखना दुःखद है कि एक विधायक को इन हालात से गुजरना पड़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, AAP की महिला विधायक बलजिंदर कौर ने साल 2009 में पटियाला स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से एम फिल की पढ़ाई की थी। फरवरी 2019 में उनकी सुखराज सिंह से शादी हुई। सुखराज सिंह AAP के यूथ विंग के नेता हैं। बलजिंदर कौर तलवंडी साबो विधानसभा से 2 बार चुनाव जीत चुकी हैं।

‘दाढ़ी वाले आदमी’ ने 7 साल की बच्ची के कपड़े खोले, मलद्वार को हाथ से… हाईकोर्ट ने दी जमानत, कहा- प्राइवेट पार्ट में कोई पदार्थ डालना रेप नहीं

मुंबई स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने सात साल की बच्ची का यौन शोषण के आरोपित शख्स को जमानत देते हुए कहा कि प्राइवेट पार्ट में किसी चीज को डालना प्रथम दृष्ट्या रेप की परिभाषा के दायरे में नहीं आता। हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध) के तहत संभोग के दौरान शरीर में अंग का प्रवेश जरूरी होता है।

आरोपित व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 और पॉक्सो (POCSO) कानून की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है। इस मामले में आरोपित पिछले तीन साल से जेल में बंद था। पिछले हफ्ते बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपित को उपरोक्त आधार पर जमानत दे दी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस भारती डांग्रे ने कहा, “हाथ से गुदा द्वार को फैलाने और उसमें को पदार्थ डालने की क्रिया को प्रथम दृष्ट्या शारीरिक संभोग में शामिल नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसमें त्वचा से त्वचा का संपर्क और कामुक आनंद शामिल ना हो।”

नई मुंबई के कोपरखैरणे पुलिस स्टेशन के अंतर्गत एक इलाके में 27 सितंबर 2019 को सात साल की एक बच्ची अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी। जब बच्चे अपने घर लौटे तो बच्ची के साथियों ने उसकी माँ को बताया कि एक दाढ़ी वाला व्यक्ति उसके कपड़ों को खोल दिया था। इसके बाद उसके गुदा को फैलाकर उसमें लाल रंग का कोई पदार्थ डाल दिया था।

बच्ची की माँ ने कोपरखैरणे पुलिस स्टेशन में जाकर मामले की शिकायत की। पुलिस ने IPC की धारा 377 और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। उसके बाद बच्चों द्वारा बताए गए हुलिया के आधार पर पुलिस ने 30 सितंबर 2019 को आरोपित को पास के ही एक बिल्डिंग से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित ने गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत में अगस्त 2020 में को याचिका दी थी, लेकिन अदालत ने आरोपित की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में आवेदन दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट में बहस के दौरान आरोपित के वकील ने तर्क दिया कि धारा 377 के तहत आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। जस्टिस डांग्रे ने कहा कि अप्राकृतिक कृत्य परिभाषित नहीं है और धारा 377 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जानबूझकर किसी व्यक्ति, महिला या पशु के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अप्राकृतिक शारीरिक संबंध और शारीरिक संबंध में अंतर है।

जस्टिस डांग्रे ने बच्ची के बयान को उद्धृत करते हुए कहा कि एक ‘अंकल’ ने बच्ची के कपड़े खोलने के साथ-साथ अपने कपड़े भी खोल दिए। जब बच्ची ने चिल्लाने की कोशिश की तो शख्स ने उसका मुँह बंद कर दिया और उसके ऊपर लेट गया। बाद में उसके गुदा को हाथ से फैलाकर उसमें लाल रंग का पदार्थ डाल दिया।

साल 2019 में कराए गए मेडिकल रिपोर्ट में ‘संभोग/शोषण के अनुरूप निष्कर्ष’ और ‘गुदा में कोई भी जख्म नहीं’ कहा गया था। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस डांग्रे ने कहा कि न तो माँ की शिकायत में शरीर में अंग प्रवेश कर यौन प्रताड़ित करने की बात कही गई है और ना ही लड़की ने इसका जिक्र किया। लेकिन, मेडिकल रिपोर्ट में इसका जिक्र है।

जस्टिस डांगरे ने कहा, “तीन दिनों के बाद पीड़िता की जाँच की जाती है और उसके भग (clitoris) को ‘सूजन’ के रूप में वर्णित किया जाता है। इसके साथ ही उसमें कोई हाइमन मौजूद नहीं होता है। मेडिकल राय में कहा गया है कि ‘हाइमेन और मूत्रमार्ग के किनारों पर सूजन’ हैं, जबकि पीड़ित लड़की ने कहा कि उसकी योनि को न तो छुआ गया था और न ही उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी।”

‘औरतबाजों से नहीं बचता देश का रुतबा’: हार्दिक पांड्या की फोटो शेयर कर मोहम्मद शमी की बीवी ने किया पोस्ट, नेटिजन्स सुना रहे खरी-खोटी

भारत ने एशिया कप के मैच में रविवार (28 अगस्त, 2022) को पाकिस्तान को 5 विकेट से हरा दिया। पूरे देश ने इस जीत का जश्न मनाया और पटाखे भी छूटे। लेकिन, जीत की बधाई देते हुए भारतीय तेज़ गेंदबाज मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहाँ ने जो कहा, वो चर्चा में है। बता दें कि मोहम्मद शमी और उनकी पत्नी विवाद के बाद अलग-अलग रह रहे हैं। तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय 386 विकेट ले चुके मोहम्मद शमी फ़िलहाल एशिया कप की भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं।

पाकिस्तान पर भारत की जीत के बाद हसीन जहाँ ने भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “बधाई हो। ये एक बड़ी जीत है। हमारे देश को जीत दिलाने के लिए हमारे देशों को बहुत-बहुत धन्यवाद। ये तो होना ही था। देश का रुतबा और देश की गरिमा ईमानदारों एवं देशभक्तों से ही बचती है, न कि अपराधियों व औरतबाजों से।” उनका इशारा किस तरफ था, कई लोगों को ये समझते हुए देर न लगी। कमेंट्स के जरिए लोगों ने उन्हें जम कर खरी-खोटी सुनाई।

मोहम्मद शमी ने भी इंस्टाग्राम पर हार्दिक पंड्या की तस्वीर लगाते हुए जीत की बधाई दी। बता दें कि हार्दिक पंड्या का इस जीत में अहम योगदान था, जिन्होंने विजयी छक्का लगाया। उन्होंने गेंद और बल्ले, दोनों से ही कमाल का प्रदर्शन किया। जहाँ उन्होंने गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 25 रन देकर 3 अहम विकेट झटके, वहीं बल्लेबाजी करते हुए 4 चौकों और एक छक्के की मदद से 17 गेंदों पर नाबाद 33 रन जड़े। उनकी स्ट्राइक रेट 200 के करीब रही।

बता दें कि 2018 में मोहम्मद शमी की पत्नी ने उनके खिलाफ अन्य महिलाओं से सम्बन्ध बनाने, घरेलू हिंसा और बलात्कार के अलावा मैच फिक्सिंग जैसे आरोप भी लगाए थे। उस साल BCCI ने भी मोहम्मद शमी का कॉन्ट्रैक्ट रोक दिया था और उन पर FIR भी दर्ज हो गई थी। बाद में मैच फिक्सिंग के आरोपों से BCCI ने उन्हें मुक्त कर दिया। मोहम्मद शमी के परिजनों पर भी पत्नी ने मुकदमा ठोका था। मोहम्मद शमी ने उसके बाद भारतीय टीम में कमबैक भी किया।

‘द कश्मीर फाइल्स’ के सितारों को फिल्मफेयर अवॉर्ड में नहीं बुलावा, बोले विवेक अग्निहोत्री- यदि बुलाएँगे भी तो मैं नहीं जाऊँगा

67वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (Filmfare Awards 2022) का आयोजन 31 अगस्त 2022 की रात मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में हुआ। अवॉर्ड शो में रणवीर सिंह, कियारा आडवाणी, दिशा पटानी, विक्की कौशल, कैटरीना कैफ, दीपिका पादुकोण समेत कई बॉलीवुड सितारों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ से जुड़े हुए किसी भी व्यक्ति को शो में इनवाइट नहीं किया गया था।

इस दुर्भाग्यपूर्ण वाकये को राजीव सिंह राठौर नाम के एक ट्विटर यूजर ने उठाया है। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM), मध्य प्रदेश के सदस्य हैं। उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के आयोजकों की साल 2022 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ से दूरी का जिक्र करते हुए कहा है कि अब बॉलीवुड का पूरी तरह से बहिष्कार करने का समय आ गया है।

उन्होंने ट्वीट में कहा, “फिल्मफेयर ने फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ से जुड़े एक भी व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया। बॉलीवुड से किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया। यह दर्शाता है कि न केवल कुछ फिल्मों बल्कि पूरे बॉलीवुड के बहिष्कार की आवश्यकता है। यदि आप हमारी भावनाओं का सम्मान नहीं कर सकते, तो आप हमारे पैसे और प्रशंसा के भी लायक नहीं हैं।”

इस संबंध में ऑपइंडिया ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री से बात की। उन्होंने कहा, “यह 100% सच है। साल 2014 तक फिल्मफेयर अवॉर्ड के आयोजक मुझे और मेरी पत्नी को बुलाते थे, लेकिन उसके बाद उन्होंने बुलाना बंद कर दिया। मैं इससे बहुत खुश हूँ।” साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अवॉर्ड नाइट्स में जाने की उनकी अब दिलचस्पी भी नहीं रही। इसलिए वे बुलाएँगे तो भी मैं नहीं जाऊँगा। अग्निहोत्री ने कहा, “यह स्टैंड लेने का समय है ताकि हर कोई जान सके कि कौन भारत के साथ खड़ा है और कौन नहीं। यदि पाकिस्तान मुझे बुलाएगा तो क्या मैं जाऊँगा?”

इससे पहले अग्निहोत्री ने उन मीडिया हाउसों की आलोचना की थी जिन्होंने 68वें राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड्स में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की उपेक्षा की खबर चलाई थी। दरअसल यह अवॉर्ड 2020 में रिलीज फिल्मों के लिए था, जबकि ‘द कश्मीर फाइल्स’ इस साल रिलीज हुई है। इस तथ्य की अनदेखी कर कुछ मीडिया हाउस ने खबर इस तरह चलाई जैसे ‘द कश्मीर फाइल्स’ पुरस्कार के योग्य ही नहीं पाया गया।

गौरतलब है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ इस साल 11 मार्च को रिलीज हुई थी। अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन पाठक, पल्लवी जोशी स्टारर फिल्म ने करीब 337.23 करोड़ रुपए का बिजनेस किया है। कोविड-19 महामारी के दौर में 300 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाली यह एकमात्र हिंदी फिल्म थी।

किसी को जिंदा जलाया, किसी को उठाया… एक्टिव है गैंग, छोटी उम्र की हिंदू लड़कियाँ टारगेट: रिपोर्ट में दावा- पहचान बदलकर फँसाना, फिर निकाह-धर्मांतरण आम

झारखंड के दुमका में शाहरुख़ हुसैन नाम के युवक ने नाबालिग छात्रा अंकिता सिंह को जला कर मार डाला। इसमें उसका साथ दिया उसके दोस्त नईम ने। अब इस मामले के कनेक्शन ‘अंसार उल बांग्ला’ नामक बांग्लादेशी आतंकी संगठन से जुड़ रहे हैं। दोनों आरोपित 72 घंटे की रिमांड पर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। नईम के मोबाइल फोन से कुछ ऐसे वीडियोज मिले हैं, जो बताते हैं कि वो ‘अंसार उल बांग्ला’ से प्रभावित है।

वो अक्सर मोबाइल पर आतंकी संगठन की गतिविधियों को देखता रहता था। ये वो संगठन है, जो गैर-मुस्लिम लड़कियों को फँसा कर उन्हें इस्लाम कबूलवाने की गतिविधियों पर काम करता है। सीमावर्ती इलाकों में खासकर के इस संगठन के लोग सक्रिय हैं। ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल में पाया है कि दुमका के डंगालपाड़ा, सानीडंगाल, जरुवाडीह और बंदरजोड़ी में कई ऐसी लड़कियाँ मिलीं, जो इन गतिविधियों का शिकार बनी हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं।

ये वो लड़कियाँ हैं, जो ‘लव जिहाद’ का शिकार बनीं। निकाह करा के उनका इस्लामी धर्मांतरण तक कराया गया। पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज और जामताड़ा में भी ऐसी पीड़िताएँ हैं। मीडिया संस्थान ने दुमका के डंगाल मोहल्ले की एक लड़की से बात की, जिसने बताया कि एक मुस्लिम लड़के से उसे प्यार हुआ था। बाद में उसे उसके मजहब के बारे में पता चला। शादी के बाद 10 साल बीत चुके हैं और अब बच्चे भी स्कूल जाने लगे हैं।

दुमका गाँधी मैदान के नजदीक रहने वाली एक युवती के पिता ने बताया कि 8 साल पहले उनकी बेटी उन्हें छोड़ कर चली गई थी। ऐसे कई मामलों में लोकलाज के कारण लोग चुप रहते हैं। दुमका के अधिवक्ता संघ ने भी निर्णय लिया है कि वो दोनों आरोपितों का केस नहीं लड़ेंगे। झारखंड के गृह विभाग ने भी एक रिपोर्ट में कहा था कि साहिबगंज व पाकुड़ में चिह्नित अवैध प्रवासियों ने वोटर आईडी, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस बनवा रखा है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन इलाकों में जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश और पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया व अंसार उल बांग्ला जैसे प्रतिबंधित संगठनों का दबदबा बढ़ रहा है। साहिबगंज, पाकुड़ और धनबाद जैसे जिलों में भी इसी तरह की गतिविधियाँ चल रही हैं। दुमका की अधिवक्ता प्रियादत्ता सिन्हा भी बता चुकी हैं कि नाबालिग लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर इस्लामी धर्मांतरण कराने का गिरोह सक्रिय हैं और उच्च-स्तरीय जाँच में चीजें सामने आ सकती हैं।

प्रियादत्ता सिंह ने ‘दैनिक जागरण’ को बताया था, “दुमका में इस तरह का एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। खासतौर पर हिन्दू नाबालिग लड़कियों को निशाना बना कर उन्हें धर्म-परिवर्तन के लिए जाल में फँसाया जाता है। लोकलज्जा के कारण कई मामले तो पुलिस तक पहुँचते ही नहीं। अंकिता सिंह हत्याकांड निंदनीय है और दोनों आरोपितों को फाँसी की सज़ा होनी चाहिए। मैंने दुमका की एक ऐसी ही पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी।”

ये भी जानने लायक बात है कि नईम 2021 में भी एक नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर चुका है। इस लड़की को भी उसी तरह प्रताड़ित किया जा रहा था, जैसे अंकिता के मामले में देखने को मिला है। नईम ने नाबालिग लड़की को अगवा कर निकाह का दबाव डाला था। उसे बेचने की धमकी दी थी। इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत वह गिरफ्तार भी हुआ था। बाद में उसे जमानत दे दी गई। जेल से बाहर आने के बाद वह नाबालिग पीड़िता के परिवार को केस उठाने की धमकी भी दे रहा था।

नौसेना को मिला पहला स्वदेशी युद्धपोत ‘INS विक्रांत’: पहली बार राष्ट्रगान, ब्रिटिशों का निशान हटा; PM मोदी ने छत्रपति शिवाजी को किया समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर (युद्धपोत) INS विक्रांत को कोच्चि के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में देश को समर्पित किया। यह युद्धपोत पूर्णत: स्वदेशी है। इसके साथ पीएम ने नौसेना के नए झंडे ‘निशान’ का भी अनावरण किया। इसे लहराने के दौरान पहली बार विक्रांत पर ‘जन गण मन’ बजाया गया।

बता दें कि INS विक्रांत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसका डिजाइन से लेकर निर्माण तक, सब कुछ भारत में ही हुआ है। इसका निर्माण भारत के प्रमुख औद्योगिक घरानों के साथ-साथ 100 से अधिक लघु एवं मध्यम उपक्रमों द्वारा उपलब्ध कराए गए स्वदेशी उपकरणों से किया गया है।

भारत के पास INS विक्रमादित्य नाम से एक युद्धपोत पहले से ही मौजूद है। स्वदेशी INS विक्रांत का निर्माण रक्षा क्षेत्र में भारत के आत्मनिर्भरता को दिखाता है। इस युद्धपोत पर अलग-अलग तरह के 30 से ज्यादा लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर आदि तैनात किए जा सकते हैं।

युद्धपोत को समर्पित करने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने आजादी के 75 साल बाद भारतीय नौसेना के झंडे बदल दिया है और नए झंडे ‘निशान’ का अनावरण किया। ‘निशान’ को अपनाने से पहले भारतीय नौसेना के झंडे पर सेंट जॉर्ज के क्रॉस वाले होते थे। यह ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान अपनाया गया था।

‘निशान’ के अनावरण के साथ ही 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के बाद पहली बार नौसेना के ध्वज को फहराने के दौरान भारत का राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ गाया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौसेना के झंडे को सलामी भी दी।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे इस युद्धपोत को मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज को समर्पित करते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज को भारतीय ‘नौसेना का पितामह’ कहा जाता है। नौसेना के झंडे में शिवाजी महाराज की शील्ड से प्रेरित अष्टकोणीय प्रतीक को भी शामिल किया गया है।

औपनिवेशिक भारतीय नौसेना के झंडे में सफेद रंग की पृष्ठभूमि पर लाल रंग में सेंट जॉर्ज का क्रॉस होता था। इसके ऊपरी हिस्से में बाएँ तरफ ब्रिटेन का झंडा यूनियन जैक बना होता था। आजादी के बाद भी झंडे और बैज का इस्तेमाल जारी रहा। हालाँकि, 26 जनवरी 1950 को इसमें थोड़ा बहुत बदलाव किया गया था। इसके बाद साल 2001 में इसमें थोड़ा बदलाव किया।

अब नौसेना के इस झंडे को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब इस झंडे की पृष्ठभूमि को सफेद रखा गया है। इसके साथ ही ऊपर बाईं ओर तिरंगा को दर्शाया गया है और आगे की ओर नौसेना के चिह्न को रखा गया है। इस तरह पुराने झंडे को पूरी तरह बदल दिया गया है।

क्या है सेंट जॉर्ज क्रॉस

सेंट जॉर्ज क्रॉस का नामकरण एक ईसाई योद्धा के नाम पर किया गया है, जो तीसरे धर्मयुद्ध (क्रूसेड- ईसाइयों की मुस्लिमों से धार्मिक लड़ाई) में शामिल हुए थे। यह क्रॉस इंग्लैंड के झंडे को भी प्रदर्शित करता है। इस झंडे को इंग्लैंड ने सन 1190 में अपनाया था। बाद में ब्रिटेन की शाही नौसेना ने अलग-अलग आकार में अपना लिया था। इस झंडे का वर्तमान स्वरूप सन 1707 के आसपास अंगीकार किया गया था।

बिहार के सरकारी स्कूल में 7 साल की बच्ची से रेप, महिला टीचर ने बिस्किट देकर कहा- घर में मत बताना: दिल्ली में तीसरी कक्षा के छात्र से कुकर्म

बिहार और दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों के यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। बिहार के बेगूसराय में दूसरी क्लास की बच्ची से स्कूल के सफाईकर्मी ने रेप किया। दिल्ली के मधु विहार स्थित स्कूल में तीसरी कक्षा के छात्र के साथ स्कूल के सीनियर ने कुकर्म की घटना को अंजाम दिया।

रिपोर्ट के अनुसार बेगूसराय के जीरोमाइल थाना क्षेत्र स्थित एक मध्य विद्यालय में 7 साल की बच्ची के साथ सफाइकर्मी ने टॉयलेट में रेप किया। उसने इस घटना के बारे में किसी को नहीं बताने की धमकी भी बच्ची को दी। स्कूल की दो शिक्षिकाओं को जब इस घटना का पता चला तो उन्होंने भी कथित तौर पर बच्ची को बिस्किट देते हुए घर में इसके बारे में किसी को बताने से मना किया।

आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की। लेकिन स्थानीय लोगों के हंगामे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित सफाईकर्मी सीताराम मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही स्कूल के प्रिंसिपल को भी गिरफ्तार किए जाने की सूचना है।

पीड़िता के परिवार का कहना है कि उनकी शिकायत को प्रिंसिपल ने अनसुना कर दिया था। बताया जाता है मलिक ने टॉयलेट में बच्ची को अकेला पाकर इस घटना को अंजाम दिया। दो शिक्षिकाओं ने पीड़िता को बिस्कुट देकर उसकी बहन के साथ घर भेज दिया। रास्ते में तबीयत बिगड़ने के बाद वह बेहोश हो गई। पीड़िता इतनी डरी हुई थी कि उस समय परिजनों को इस घटना के बारे में पता नहीं चल पाया। बाद में उसने परिवार के लोगों को इस घटना के बारे में बताया।

29 अगस्त को पीड़िता के परिजन स्कूल पहुॅंचे तो प्रिंसिपल ने एक्शन लेने की जगह आरोपित को उनके सामने पीटकर मामला दबाने की कोशिश की। आरोप यह भी है कि मामले को दबाने के लिए पीड़िता के पिता और चेचेरे भाई के साथ एक शिक्षिका के पति ने भी मारपीट की। 1 सितंबर को जब स्थानीय लोगों ने इस घटना को लेकर हंगामा करते हुए सड़क जाम कर दिया उसके बाद पुलिस हरकत में आई। जिला मुख्यालय के डिप्टी एसपी निश्चित प्रिया का कहना है कि गुरुवार को मामले की जानकारी होते ही पुलिस ने केस दर्ज कर फौरन कार्रवाई की।

दिल्ली के स्कूल में छात्र ने दूसरे छात्र से किया कुकर्म

दूसरी घटना राजधानी दिल्ली के मधु विहार थाना क्षेत्र की है। यहाँ सरकारी सर्वोदय बाल विद्यालय में पढ़ने वाले क्लास 3 के एक छात्र के साथ अप्राकृतिक यौनाचार हुआ। इस मामले में आरोपित स्कूल की क्लास 10 में पढ़ने वाला एक छात्र है। उसे पुलिस ने IPC की धारा 377 के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

जिस शिला पर विवेकानंद ने किया था चिंतन, वहाँ स्मारक का विरोध कर रहे थे ईसाई: कॉन्ग्रेसी मंत्री हुमायूँ कबीर को भी नहीं आया रास, RSS ने पूरा किया काम

आज आपको हम एक ऐसे स्मारक के बारे में बता रहे हैं, जिसने स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवंत रखा। महान विभूतियों के नाम पर अनेकों सार्वजनिक स्थलों का नामकरण वर्षों से होता आया है। लेकिन, जिन स्थानों से उन विभूतियों का नाता और रिश्ता रहा है – वह स्थल और भी महत्वपूर्ण और विशेष हो जाते है। वह स्थान कोई साधारण जगह नहीं होती, बल्कि कर्म भूमि का भाग होती है जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती है।

स्वामी विवेकानंद के जीवन काल से जुड़े हुए अनेकों स्थल सरकार या उनके संगठन ‘रामकृष्ण मिशन’ द्वारा संरक्षित किए गए है। स्वामी जी ने अपने जीवन काल में पूरे भारत का भ्रमण किया था, एक परिव्राजक सन्यासी के तौर पर। इसलिए, उनसे जुड़े हुए विशेष स्थल भी सम्पूर्ण भारत में मौजूद है। जहाँ-जहाँ उनका प्रवास हुआ, वह स्थान खुद ही विशेष बन गया क्योंकि उनके पदचिह्न वहाँ पर है।

जिस शिला पर मिला था स्वामी जी को अपने जीवन का उद्देश्य

स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ा हुआ ऐसा ही एक विशेष जगह है दक्षिण भारत का आखिरी तट कन्याकुमारी, जहाँ पर समुद्र के बीच में उन्होंने एक शिला पर 3 दिन और रात साधना और चिंतन किया था भारत के भूत, वर्तमान और भविष्य पर। ये ध्यान उन्होंने उन्होंने 25-27 दिसंबर 1892 तक धरा था। यह स्थान और भी विशेष हो जाता है, क्योंकि स्वामी जी को अपने जीवन का उद्देश्य भी यही मिला था और माता कन्याकुमारी का सम्बन्ध भी इस शिला से रहा है।

जिस शिला पर स्वामी विवेकानंद ने ध्यान कर भारत के अवनति का कारण और उन्नति के रास्ते को जाना, मान्यता अनुसार यह वही शिला थी जहाँ माता पार्वती ने कन्याकुमारी  के रूप में अवतार लेकर भगवान शिव के लिए तप किया था। वो शिला जहाँ स्वामी जी को ज्ञात हुआ कि ‘धर्म नहीं, बल्कि धर्म का अज्ञान’ भारत की अवनति का कारण था। इसलिए उन्होंने अमेरिका के शहर शिकागो में आयोजित ‘विश्व धर्म महासभा (World Parliament of Religions)’ में जाकर, हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करने का निश्चय किया।

ऐसा करने के पीछे उद्देश्य था कि पश्चिमी देश वेदांत के महत्व को समझें और भारत  के हर नागरिक को अपने धर्म पर गर्व हो। क्योंकि, जो भारत स्वामी जी के समक्ष था वो उनकी आकांक्षाओं से कोसों दूर था। उनके समक्ष एक एक ऐसा भारत था, जहाँ पढ़े लिखे लोगों ने स्वयं को भारत माता और उसकी संस्कृति आत्मा से अलग कर लिया था, जहाँ लोगों के पास दो वक्त की रोटी कमाने के अलावा किसी और कार्य  के लिए ना समय था ना ही उत्साह।

स्वामी विवेकानंद के अपने 39 वर्ष की अल्प आयु में ही हमें भारत माँ की असली तस्वीर का बोध करवा गए जिसकी शुरुआत उनके अपने लक्ष्य और ‘भारत माँ के कार्य समझने’ से हुई।

शिला से विवेकानंद शिला स्मारक तक

कन्याकुमारी में समुद्र के बीचोंबीच स्थित शिला पर स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी पर कन्याकुमारी के लोगों द्वारा एक शिला स्मारक बनाने की कल्पना की गई। ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ और साथ ही एक समिति का गठन भी किया। स्मारक के शिला पर बनने के विचार से ही कन्याकुमारी में उपस्थित ईसाई समुदाय ने बेबुनियादी मान्यताओं के आधार पर इस बात का विरोध करना शुरू कर दिया। साथ ही केंद्रीय मंत्री हुमायूँ कबीर और उस वक्त के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भक्तवत्सल्म भी शुरुआती काल में स्मारक के विरोध में थे।

‘विवेकानंद स्मारक समिति’ के सदस्य जब अपनी समस्या को लेकर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)’ के द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी गोकवलकर के पास पहुँचे तो ये पवित्र कार्य के लिए एकनाथ रानाडे को चुना गया, जो उस वक्त संघ के वरिष्ठ प्रचारक थे। एकनाथ रानाडे की परिपूर्णता और निपुणता को देख संघ परिवार के लोग मजाक में अक्सर कहते थे, “यदि क़ुतुब मीनार का भी स्थानांतरण करना हो तो एक व्यक्ति है जो ये काम कर सकता है और वह हैं एकनाथ जी।”

सामाजिक मनोविज्ञान के बहुत बड़े अभ्यासक होने के साथ वे ये भी जानते थे कि जनभावना के आगे राजनीति किस तरह नया मोड़ ले लेती है, इसी कारण चाहे हुमायूँ कबीर हो या भक्तवत्सलम को स्मारक के लिए सहमत करवाना हो, या 3 दिनो में 323 सांसदों के हस्ताक्षर करवाने हो, उनके लिए एक सफल चुनौती थी। विवेकानंद शिला स्मारक एक ऐसा स्मारक है जो ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का जीता-जागता उदाहरण है।

एक ऐसा स्मारक, जहाँ आर्थिक मामलों में दिक्कत पड़ने पर पूरे राष्ट्र ने आर्थिक योगदान दिया और जब आज भी कोई व्यक्ति राजस्थान, असम, ओडिशा, या महाराष्ट्र से कन्याकुमारी आकर स्मारक को देखता है तो अनायास ही कहता है, “मैंने भी इस स्मारक के निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग किया है।” इस स्मारक को बनाने में पूरे देश ने योगदान दिया, इसीलिए सही मायने में यह एक ‘राष्ट्रीय स्मारक’ हुआ !

शिला स्मारक से जीवंत संगठन तक

एकनाथ रानाडे का लक्ष्य सिर्फ बाकी स्मारकों की भाँति, विवेकानंद शिला स्मारक को एक निर्जीव स्मारक बनाना नहीं था, बल्कि वो इस स्मारक को जीवंत बनाना चाहते थे। जिस से वह सनातन धर्म का विचार देश के हर घर तक ले जाना चाहते थे, जिसके लिए “सिंह के पौरुष से युक्त, परमात्मा के प्रति अटूट निष्ठा से संपन्न और पवितृय की भावना से उद्वीप्त सहस्त्रों नर-नारी, दरिद्रों एवं उपेक्षित के प्रति हार्दिक सहानुभूति लेकर, देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भ्रमण करते हुए एक मुक्ति का, सामाजिक पुनरुत्थान का, सहयोग और समता का संदेश देंगे।”

जैसा की स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “विराट की पूजा न करो, जीवित भगवान को जरूरतमंद, दलित, पीड़ित लोगों में देखो।” 7 जनवरी, 1972 को अधिकृत तौर पर विवेकानंद केंद्र कि स्थापना हुआ। आज  ये समाज कल्याण के कार्य जैसे की शिक्षा, ग्रामीण विकास, युवा विकास, प्राकृतिक संसाधन विकास, सांस्कृतिक अनुसंधान और प्रकाशन के कार्य करता है। विवेकानंद केंद्र अपने शाखा केंद्रों और सेवा परियोजनाओं के माध्यम से 1005 से अधिक स्थानों पर 25 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में काम कर रहा है और दिन- प्रतिदिन बढ़ रहा है।

इसमें देश के युवाओं की एक बड़ी संख्या भी सम्मिलित है। विवेकानंद शिला स्मारक हम सब के लिए एक प्रेरणा स्रोत है जो स्वामी जी की ही तरह एक वट वृक्ष के समान है जो अपने अंदर अनेकों लोगों को भारतीय संस्कृति जीवित रखने और एक श्रेष्ठ मनुष्य बन ने का संदेश देता है।

(लेखिका आकृति कैंथोला और लेखक निखिल यादव , विवेकानंद केंद्र , उत्तर प्रान्त के कार्यकर्ता है।)

वसीम रिजवी की किताब ‘मोहम्मद’ पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यति नरसिंहानंद की गिरफ्तारी की माँग भी ठुकराई

सुप्रीम कोर्ट ने वह जनहित याचिका खारिज कर दी है जिसमें यति नरसिंहानंद सरस्वती और वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र त्यागी को गिरफ्तार करने की माँग की थी। याचिका भारतीय मुस्लिम शिया इस्ना आशारी जमात की ओर से दायर की गई थी। याचिका में रिजवी की किताब ‘मोहम्मद’ पर भी प्रतिबंध लगाने की अपील की गई थी।

शीर्ष अदालत से याचिकाकर्ता ने यति नरसिंहानंद और रिजवी को इस्लाम, पैगंबर मोहम्मद और मजहब से जुड़े विषयों पर टीका टिप्पणी करने से रोकने की भी माँग की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और एसआर भट की पीठ ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 32 के तहत इस तरह की याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।

गिरफ्तारी की माँग पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा यदि अनुच्छेद 32 के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने और किसी की गिरफ्तारी के मामले में कार्रवाई आगे बढ़ती है तो फिर ललिता कुमारी मामले में दिए गए फैसले का क्या औचित्य रह जाएगा। साथ ही याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्होंने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है।

अदालत के इन सवालों के बाद याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी की अपील वापस लेने की बात कहते हुए पीठ से अन्य माँगों पर गौर करने की गुहार लगाई। लेकिन पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि यह आर्टिकल 32 के तहत सुनवाई के योग्य नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता अन्य विकल्पों के तहत इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। याचिका में रिजवी और यति नरसिंहानंद को सुरक्षा और अखंडता, सामाजिक सद्भाव, शांति तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए खतरा बताया गया था।

गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने यति नरसिंहानंद सरस्वती से ही अपनी किताब ‘मोहम्मद’ का विमोचन करवाया था। उन्होंने कुरान की आयतें हटाने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कुरान की 26 आयतों को आतंकवाद को बढावा देने वाला बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए रिजवी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

किताब ‘मोहम्मद’ को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी तथा पार्टी के अन्य नेताओं ने नवंबर 2021 में को हैदराबाद में रिजवी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। ओवैसी ने शिकायत में कहा था, “हिंदी में लिखी गई किताब में इस्लाम और उसके अनुयायियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।”