Sunday, July 21, 2024
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मेधा पाटकर को चेहरा बनाने निकली थी AAP, मोहरों ने गुजरात चुनाव से पहले ही कर दी बगावत: केजरीवाल के होश उड़े, दिल्ली छोड़ भाग रहे अहमदाबाद

मेधा पाटकर को उनकी गुजरात विरोधी रुख के कारण सबसे ज्यादा नापसंद किया जाता है। सरदार सरोवर बाँध के काम को रोकने में मेधा पाटकर ने महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके कारण गुजरात के कई इलाकों को दशकों तक सूखा झेलना पड़ा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Delhi CM & AAP Convener Arvind Kejriwal) अगले दो दिन गुजरात के दौरे पर हैं। उम्मीद है कि वे राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Election) के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवारों से मिलेंगे।

सूत्रों का कहना है कि ऐसी खबरें आने के बाद कि मेधा पाटकर गुजरात में AAP की तरफ से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होंगी, पार्टी नेताओं में असंतोष फैल गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी द्वारा बनाए गए 19 उम्मीदवारों में से 13 ने आम आदमी पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि उन्हें मनाने के लिए केजरीवाल शुक्रवार को एक बैठक कर सकते हैं।

इस हफ्ते की शुरुआत में खबरें आई थीं कि गुजरात विरोधी ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की कार्यकर्ता मेधा पाटकर गुजरात में AAP की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होंगी। यह कई लोगों के लिए आश्चर्य वाली बात थी। अब तक यही माना जाता रहा कि AAP के गुजरात प्रमुख इसुदन गढ़वी पार्टी के पसंदीदा उम्मीदवार हैं।

हालाँकि, इन खबरों को तब और हवा मिली, जब आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने मेधा पाटकर (Medha Patekar) की तारीफ करने वाले एक वीडियो को रीट्वीट किया। बाद में इस वीडियो को इसुदान गढ़वी ने भी रीट्वीट किया।

मेधा पाटकर को उनकी गुजरात विरोधी रुख के कारण सबसे ज्यादा नापसंद किया जाता है। सरदार सरोवर बाँध के काम को रोकने में मेधा पाटकर ने महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके कारण गुजरात के कई इलाकों को दशकों तक सूखा झेलना पड़ा।

गुजरात के कुछ हिस्सों में आज सिर्फ नर्मदा नदी का पानी आ रहा है, क्योंकि मेधा पाटकर जैसे लोगों ने पर्यावरण के नाम पर बाँध की ऊँचाई को बढ़ाने के काम में अड़ंगा डाल कर रूकवा दिया था। पाटकर की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निभाई गई भूमिका के कारण गुजरात के लोगों ने उन्हें माफ नहीं किया है।

मेधा पाटकर साल 2014 में लोकसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुई थीं, लेकिन साल 2015 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, उसके बाद से पाटकर ने सक्रिय राजनीति में लौटने की घोषणा नहीं की है। इसके बाद भी AAP ने मेधा पाटकर को मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार बनाए जाने की खबरों का खंडन नहीं किया गया है।

गुजरात विरोधी रुख रखने वाली मेधा पाटकर पर धन के दुरुपयोग करने के भी आरोप लगे हैं। इस साल जुलाई में उनके खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर पैसे की हेराफेरी का आरोप लगाया गया था।

इससे पहले 5 अप्रैल 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के दौरान संदिग्ध धनशोधन (Money Laundering) के लिए अभियान की कार्यकर्ता रहीं मेधा पाटकर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। ED के अलावा, पाटकर के संदिग्ध लेन-देन की जाँच राजस्व खुफिया विभाग और आयकर विभाग भी कर रहा है।

अगर संदिग्ध सौदों की बात करें तो AAP नेता और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी आबकारी नीति घोटाले में सीबीआई जाँच के दायरे में हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि मनीष सिसोदिया पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से AAP उम्मीदवार नाखुश हैं।

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Nirwa Mehta
Nirwa Mehtahttps://medium.com/@nirwamehta
Politically incorrect. Author, Flawed But Fabulous.

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