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महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की पाँचवीं रिपोर्ट:

नेपाल सीमा पर रिपोर्टिंग के दौरान हमें स्थानीय लोगों से ‘थारू’ जनजाति का नाम सबसे अधिक सुनाई दिया। हमें यह भी बताया गया कि भारत और नेपाल दोनों के अंदर सीमावर्ती क्षेत्रों में हिन्दू समाज की थारू जनजाति के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं। जानकारी यह भी दी गई कि थारू जनजाति अपनी प्राचीन संस्कृति और परम्पराओं को आज भी ज्यों की त्यों सहेजे हुए हैं। इन तमाम बातों को परखने के लिए हम नेपाल की जरवा सीमा पर मौजूद थारू जनजाति की लगभग 3500 आबादी वाले एक गाँव मोहकमपुर में गए।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

मोहकमपुर बलरामपुर जिले के जरवा थानाक्षेत्र में आता है और यहाँ से मुख्य बाजार तुलसीपुर लगभग 15 किलोमीटर दूर है। इस गाँव के बाद जंगली क्षेत्र शुरू हो जाता है और कुछ ही दूरी पर नेपाल की सीमा आ जाती है। गाँव में घुसने से पहले हमें एक बोर्ड दिखाई पड़ा, जिस पर ‘स्वर्गीय श्री कन्हैयालाल स्मृति द्वार’ लिखा हुआ था। गाँव तक पक्की सड़क जाती है। इस गाँव के खेम सिंह राणा के घर के आगे चौपाल के रूप में कुछ लोग बैठे बात कर रहे थे। वहाँ हम रुक गए और चर्चा में शामिल हो गए।

गाँव का प्रवेश द्वार

‘हमारे पूर्वज महाराणा प्रताप के सिपाही’

खेम सिंह से चर्चा शुरू हुई तो उन्होंने अपने पूर्वजों को महाराणा प्रताप का साथी और सहयोगी बताया। खेम सिंह ने कहा कि उनके पुरखे देश और धर्म बचाने के लिए राणा प्रताप के साथ मुगलों के खिलाफ लड़े थे।

उन्होंने यह भी बताया कि जब राजा ही नहीं बचे तब प्रजा क्या करती और यही सोच कर उनके पूर्वज अपना धर्म बचाने के लिए पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में शरण ले लिए। खेम सिंह ने माना कि नेपाल सीमा पर थारू जनजाति अच्छी-खासी संख्या में हैं।

सीमाओं पर बढ़ी है मुस्लिम आबादी

खेम सिंह ने बताया कि वो जन्म से ही सीमा के उसी गाँव मोहकमपुर में रहे हैं। उनके अनुसार पहले के मुकाबले अब मुस्लिमों की नेपाल बॉर्डर पर आबादी बढ़ी है। इसी गाँव के कोटेदार और थारू जनजाति के ही राजेश ने हमें बताया कि भारत की सीमा में नेपाल के रास्ते मुस्लिम प्रवेश किए और वो जमीन आदि खरीद कर बसते चले गए। राजेश ने बताया कि मजारें पहले से ही बनी हुई हैं लेकिन मदरसे नए बने हैं।

इसी गाँव व समुदाय के देवशरण ने भी कहा कि सीमा पर मस्जिद और मजारों के साथ मुस्लिम आबादी पहले के मुकाबले बढ़ी है। पड़ोसी गाँव के मनोज ने भी नेपाल बॉर्डर पर मुस्लिम आबादी बढ़ने के मीडिया रिपोर्ट्स के दावों को सही माना।

ग्राम प्रधान शकीला: ग्राम सभा में 3 मस्जिदें और 1 मदरसा

चौपाल में मौजूद लोगों ने बताया कि थारू बहुल होने के बाद भी वहाँ की ग्राम प्रधान शकीला हैं। इसी के साथ वहाँ पता चला कि जो प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा, वो भी मुस्लिम समुदाय का ही है। ग्रामीणों ने इलाके के टंडवा और शेखड़ीह गाँवों को मुस्लिम बाहुल्य बताया। ग्रामीणों ने ये भी कहा कि पहले रास्ते और घरों में चोरी होती थी लेकिन जबसे योगी सरकार आई, तब से चोरी बंद हो गई। खेम सिंह ने कहा कि कभी-कभार लव जिहाद जैसी घटनाएँ भी सामने आ जाती हैं।

मोहकमपुर में थारू लोगों के मोहल्ले में हमें जानकारी दी गई कि उस पूरे ग्रामसभा में लगभग 2000 मुस्लिम आबादी है। हमें यह भी जानकारी मिली कि ग्राम सभा में 3 मस्जिदें और 1 मदरसा हैं। हालाँकि थारू समुदाय की बहुलता वाले मोहल्ले में मस्जिद नहीं दिखी। इस मोहल्ले में लोगों को भगवान शिव की पूजा करते देखा गया।

योगी सरकार में बहन-बेटियाँ सुरक्षित

खेम सिंह के मुताबिक थारू जनजाति की बहन बेटियों की रक्षा पिछली सरकारों में खुद उनके परिजनों को करनी पड़ती थी लेकिन अब ये दायित्व सरकार उठा रही है। चौपाल में मौजूद अन्य लोगों ने बताया कि अब किसी की हिम्मत नहीं होती कि वो उनके घरों की लड़कियों को नजर उठा कर देख भी लें।

गाँव मोहकमपुर के ग्रामीण

सुरक्षा और विकास के मुद्दे पर चौपाल में बैठे राजेश, देवशरण और खेम चंद ने एक स्वर में कहा कि जब से योगी सरकार आई है, तब से थारू जनजाति की सुनवाई शासन और प्रशासन स्तर पर हो रही है। उन्होंने बताया कि अब उनको सभी योजनाओं का फायदा मिल रहा है। वहाँ मौजूद सभी इस बात से सहमत थे कि पिछली सरकारों में उनकी अनदेखी करते हुए उन सभी को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता था।

हमसे बात कर रहे खेम सिंह ने बताया कि थारू जनजाति के लोग मेहनत-मजदूरी और खेती कर के अपने परिवार का पेट पालते हैं। वहीं राजेश कुमार के मुताबिक सरकारी नौकरियों में थारू लोगों की संख्या बेहद कम है। ग्रामीणों के मुताबिक अब हालात थोड़े-थोड़े बदल रहे हैं। अभी के युवा इंटरमीडियट और ग्रेजुएशन भी पास कर रहे हैं और पढ़ाई की तरफ ध्यान दे रहे।

नेपाल में वामपंथी आंदोलन और भारतीय सुरक्षा बल

कोटेदार राजेश के घर पर लगी चौपाल में सभी ने सामूहिक रूप से कहा कि जब 1990 के दशक में नेपाल में वामपंथी आंदोलन हो रहा था, तब उनके गाँव तक ब्लास्ट की आवाजें सुनाई देती थीं। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ ही दूरी पर खून-खराबा देखने के बावजूद भी वो लोग बॉर्डर पर तैनात जवानों के दम पर निश्चिंत रहते थे। सभी ने एक स्वर में बताया कि सारा हंगामा बॉर्डर के उस पार ही हुआ था।

मोहकमपुर के गाँव वालों ने हमें बताया कि वामपंथी हिंसा के दौरान नेपाली पुलिस के जवानों की लाशों के साथ कुछ घायल वर्दी वाले भी भारत की सीमा में बचने के लिए आए थे। ग्रामीणों ने बताया कि तब भारतीय जवानों ने न सिर्फ उनकी माओवादियों से जान बचाई थी बल्कि घायलों का इलाज भी करवा कर हर सम्भव मदद की थी। खेम सिंह ने बताया कि उन्ही हमलों के बाद से बॉर्डर पर मौजूद नेपाल का कोयलाबास बाजार वीरान हो गया है।

थारू जनजाति के लोग सीमा पर तैनात पैरामिलिट्री SSB (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों के बर्ताव से बेहद खुश और संतुष्ट दिखे। ग्रामीणों ने SSB के जवानों को अपना भाई कहा। इसी के साथ गाँव वालों ने योगी सरकार में जिला पुलिस का भी व्यवहार अपने लिए बदला हुआ बताया।

कपड़े बेचते मुमताज़ अली

हमारी रिपोर्टिंग के दौरान उसी मोहल्ले में मुमताज़ अली बाइक पर कपड़े रख कर बेचते दिखे। मुमताज़ ने बाइक पर ढेर सारा सामान लाद रखा था। उन्होंने खुद को वहाँ से 200 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का रहने वाला बताया। उन्होंने कहा कि वो पास की बाजार तुलसीपुर में किराए पर कमरा लिए हैं। अपनी बाइक पर रखे कुल सामान की कीमत मुमताज़ ने लगभग 25 हजार रुपए बताई। उन्होंने थोक माल सीतापुर से उठाने की बात कही और पूरे बॉर्डर इलाकों में सामान बिकना बताया।

बॉर्डर पर सामान बेचते मुमताज अली

‘देशद्रोही उठाते हैं थारू लोगों की गरीबी का फायदा’ – भाजपा विधायक

नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के तुलसीपुर से भाजपा विधायक कैलाशनाथ शुक्ला ने कहा कि देशविरोधी तत्व कभी थारू लोगों की गरीबी का फायदा उठाते हैं तो कभी उनकी कम शिक्षा के दर का। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी भाजपा सरकार इस मामले में ध्यान दे रही है।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पत्नी के माध्यम से CM केजरीवाल ने बेची जमीन, ₹1.02 करोड़ की टैक्स चोरी के आरोप: शराब और बस के बाद दिल्ली में स्टाम्प ड्यूटी घोटाला

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बस और शराब घोटाले के बाद अब उन पर स्टाम्प ड्यूटी चोरी के आरोप लगे हैं। दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना (VK Saxena) ने उनके खिलाफ जाँच के आदेश दिए हैं।

सीएम केजरीवाल पर आरोप है कि हरियाणा के भिवानी में केजरीवाल ने 4.54 करोड़ रुपए में 3 प्लॉट बेचे थे, जिसकी कीमत उन्होंने कम करके दिखाई है। कागज पर इनकी कुल कीमत सिर्फ 72.72 लाख रुपए दिखाई गई है। शिकायत मिलने के बाद उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जाँच के लिए कहा है।

बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ठिकानों पर शराब घोटाले को लेकर सीबीआई ने छापेमारी की थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेस करके उपराज्यपाल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

शिकायत में कहा गया है कि सीएम केजरीवाल ने 15 फरवरी 2021 को अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल के माध्यम से 45,000 रुपए प्रति वर्ग गज के बाजार मूल्य पर अपने प्लॉट बेचे थे। वहीं, कागजों पर इसका मूल्य सिर्फ 8,300 प्रति वर्ग गज बताया गया है। शिकायत में कहा गया है, “इनमें से दो संपत्तियाँ खुद अरविंद केजरीवाल के नाम पर थीं, जबकि तीसरी संपत्ति उनके पिता गोविंद राम के नाम पर थी।”

शिकायतकर्ता का कहना है कि बाजार मूल्य से कम रेट दिखाकर सीएम केजरीवाल ने न सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी में 25.93 लाख रुपए का चूना लगाया, बल्कि पूंजीगत लाभ कर के रूप में 76.4 लाख रुपए की भी हेरफेर की।

शिकायतकर्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कागज पर 8,300 वर्ग गज की दर से 340 वर्ग गज के प्लॉट को 24.48 लाख रुपए, 416 वर्ग गज के प्लॉट को 30 लाख रुपए और 254 वर्ग गज के प्लॉट को 18.24 लाख रुपए में बेचना दिखाया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इन भूखंडों का बाजार मूल्य बहुत अधिक है और उन्होंने 45,000 वर्ग गज के हिसाब से इसे बेचा था। इन तीनों भूखंडों के लिए उन्होंने स्टाम्प शुल्क 1,41,200 रुपए, 1,73,700 रुपए और 1,12,500 रुपए भुगतान किया।

60 कंटेनर, आंदोलनजीवियों का साथ: इमरान की नकल कर Pak वाली अराजकता पैदा करेंगे राहुल गाँधी? पूरे देश में दोहराया जाएगा किसान और शाहीन बाग़ मॉडल?

राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाल रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने आंदोलनजीवियों का समर्थन लिया है। योगेंद्र यादव और मेधा पाटकर से लेकर अरुणा रॉय और तुषार गाँधी जैसों ने कॉन्ग्रेस की इस यात्रा को समर्थन दिया है। राहुल गाँधी को अर्बन नक्सलियों के समर्थकों और टुकड़े-टुकड़े गिरोह से भी अपनी यात्रा को सफल बनाने के लिए समर्थन लेने में गुरेज नहीं है। अब उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से भी प्रेरणा ली है।

2014 में इमरान खान भी कर चुके हैं कंटेनरों का इस्तेमाल, फिर बने PM

2014 में जब इमरान खान प्रधानमंत्री नहीं बने थे और आंदोलनों के जरिए वो जनता के बीच खुद को लोकप्रिय बना रहे थे, तब वो कंटेनरों में ही रहा करते थे। उसी कंटेनर में बैठ कर वो यात्रा करते थे। उसमें सारी व्यवस्थाएँ होती थीं। तब इमरान कहें ने एक कंटेंटर पर 1 करोड़ रुपए के आसपास खर्च किए थे। राहुल गाँधी भी अब 150 दिन इसी तरह के कंटेंटर में रहेंगे। कॉन्ग्रेस पार्टी को लगता है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ काफी ऐतिहासिक होने वाली है।

पार्टी को लगता है कि इससे देश की राजनीति में कॉन्ग्रेस के अच्छे दिन वापस आ जाएँगे और राहुल गाँधी ठीक उसी तरह प्रधानमंत्री के पद तक पहुँचने में कामयाब होंगे, जैसे इमरान खान ने कंटेंटर में रह कर पाकिस्तानियों की सहानुभूति बटोरी थी और आम चुनाव जीता था। कन्याकुमारी से कश्मीर तक 3750 किलोमीटर की यात्रा में वो कंटेंटर में ही रहेंगे और सोएँगे। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले इस कदम को कॉन्ग्रेस के वफादार ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताने में जुट गए हैं, जिसके सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राहुल गाँधी मुकाबला करेंगे।

कॉन्ग्रेस पार्टी ये कह कर इसका प्रचार करने में लगी है कि राहुल गाँधी इस पूरी यात्रा के दौरान किसी होटल वगैरह में नहीं रुकेंगे, बल्कि कंटेनर में ही रहेंगे। इन कंटेनरों में उनकी सारी सुख-सुविधाओं का ख्याल रखा जाएगा। उसमें सोने के लिए बिस्तर और शौचालय के अलावा AC तक की व्यवस्था रहेगी। राहुल गाँधी के अलावा अन्य नेताओं के लिए भी ऐसी ही व्यवस्थाएँ की गई हैं। कन्याकुमारी के एक गाँव में ऐसे 60 कंटेनर रखे गए हैं, जो अपने-आप में एक अलग गाँव की तरह है।

इन कंटेनरों को इसी तरह प्रतिदिन रात के समय वहाँ एक गाँव की तरह बसाया जाएगा, जहाँ यात्रा रुकेगी। सुबह नित्यक्रिया के बाद वापस नेतागण यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे और ये क्रम 150 दिनों तक चलता रहेगा। 2014 में इमरान खान इसी तरह की चीजें आजमा चुके हैं, जब वो कंटेनर से घूमते हुए तत्कालीन सरकार के खिलाफ आंदोलन करते थे और इस दौरान पुलिस से भी उनके समर्थकों की भिड़ंत होती थी। तब वहाँ के प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ के खिलाफ खुद को स्थापित करने के लिए उन्होंने ‘फ्रीडम मार्च’ निकाला था।

उस दौरान इंटरनेट पर एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें इमरान खान इसी तरह के एक कंटेनर में सोते हुए दिखे थे। उनकी पार्टी PTI के कार्यकर्ताओं के साथ इन लोगों ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की तरफ मार्च किया था। अब समय-समय पर विदेश यात्राओं पर छुट्टियाँ मनाने जाने वाले राहुल गाँधी भी इसी तरह के तिकड़म आजमाएँगे। भारतीय राजनीति में भी चंद्रशेखर और इंदिरा गाँधी समेत तमाम नेताओं ने यात्राएँ निकाली हैं, अब राहुल गाँधी को वैसी ही सफलता की उम्मीद है।

अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब 60 कंटेनर और हजारों लोग एक साथ सड़क से गुजरेंगे, जिनमें हो सकता है कि कई नेताओं की गाड़ियाँ भी हों, तब ट्रैफिक जाम के कारण जो अफरा-तफरी मचेगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा? 60 कंटेनर बहुत बड़ी संख्या हैं और जहाँ से भी राहुल गाँधी गुजरेंगे, वहाँ कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता-कार्यकर्ता उनके साथ चलेंगे। ऐसे में परिवहन में बड़ी समस्या आने की संभावना है, खासकर बड़े शहरों से गुजरते वक्त।

कहीं कॉन्ग्रेस की कुछ ऐसी ही तो योजना नहीं है कि जिस तरह किसानों ने एक साल तक दिल्ली को बंधक बना कर रखा और शाहीन बाग़ वालों ने जैसे लाखों लोगों को राष्ट्रीय राजधानी में महीनों परेशान किया, वैसा ही कुछ करने से कॉन्ग्रेस पार्टी को लोगों की सहानुभूति मिलेगी और वो मीडिया की नजरों में भी आएगी? ‘किसान आंदोलन’ के कारण तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े केंद्र सरकार को। CAA के नियम अब तक नहीं बने हैं।

क्या पूरे देश में दोहराया जाएगा शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन वाला मॉडल?

क्या कॉन्ग्रेस पार्टी उस माहौल को पूरे देश में ले जाना चाहती है, जो दिल्ली को झेलना पड़ा? आंदोलनजीवियों के साथ और ये 60 कंटेनर्स से तो ऐसा ही लगता है। पाकिस्तान में तब विपक्ष में रहे इमरान खान की रैलियों में भी हिंसा होती थी, पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़ते थे और कार्यकर्ताओं-पुलिस में भिड़ंत होती थी, क्या इस रणनीति के सहारे भारत को राहुल गाँधी अब पाकिस्तान में तब्दील करेंगे? जो आंदोलनजीवी उनके साथ इस यात्रा में हैं, वो सब तो यही करने के विशेषज्ञ हैं।

योगेंद्र यादव कभी किसान तो कभी मुस्लिम एक्टिविस्ट बन जाते हैं। अरुणा रॉय सोनिया गाँधी की उस सलाहकार समिति में रही हैं, जो यूपीए काल में देश चलाती थी। मेधा पाटकर ने पर्यावरण के नाम पर कच्छ को दशकों पानी के लिए तरसाए रखा। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज बीजी कोलसे पाटिल ने मुस्लिमों को भड़कते हुए उन्हें पुलिस से न डरने को कहा था। वामपंथी आतंकियों का बचाव करने वाले तुषार गाँधी भी उनके साथ हैं। कन्नड़ लेखक देवानुरा महादेव पीएम मोदी पर उद्योगपतियों का साथ देने का आरोप लगा चुके हैं।

इसी तरह मजदूरों, मुस्लिमों, आदिवासियों और सामाजिक मुद्दों के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले ऐसी लोगों को राहुल गाँधी ने इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अपने साथ जोड़ रखा है, जो केंद्र सरकार को अस्थिर करने को अपना एकमात्र उद्देश्य समझते हैं और भीड़तंत्र व अराजकता के सहारे बात मनवाने के आदी है। इस यात्रा में ‘लव जिहाद’ और इस्लामी-मिशनरी धर्मांतरण गिरोहों पर तो बात होगी नहीं, जो असली समस्या देश को कमजोर कर रही है।

एक और बात जानने लायक है कि अगस्त 2014 में इमरान खान और PTI कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए इस्लामाबाद में पुलिस ने कंटेनर्स का ही इस्तेमाल किया था। सैकड़ों स्टील के बड़े-बड़े बक्से सड़क पर रख दिए गए थे। पाकिस्तानी मौलवी उल-कादरी भी तब कंटेनरों में ही घूमा करते थे और उसकी खिड़की से जनता को संबोधित करते थे। कंटेनरों की इस अराजक राजनीति से तब पाकिस्तान में बड़ी अस्थिरता पैदा हो गई थी। एक बार तो इमरान खान को

राजस्थान में 1 महीने में 50000 गायों की मौत, कहर ढा रहा लंपी वायरस: खुले में फेंकी गई हजारों लाशें, बोलीं पूर्व CM – कॉन्ग्रेस सरकार विफल

राजस्थान में लंपी वायरस की वजह से एक महीने में 50 हजार से ज्यादा गायों की मौत हो गई है। इन गोवंश को दफनाने के बजाय खुले में फेंका जा रहा है, जिससे रिहायशी इलाकों में इंसानों के लिए नई बीमारी का खतरा पैदा हो रहा है। गोवंश में फैले इस वायरस की तुलना इंसानों के लिए जानलेवा रहे कोरोना वायरस से की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीकानेर जिले में लंपी बीमारी से रोजाना 200 से 300 गायों की मौत हो रही हैं, लेकिन प्रशासन इन आँकड़ों को छिपाने में लगा हुआ है। निगम प्रशासन की ओर से बीकानेर शहर से महज 5 किमी दूर जोरबीर में गायों के शव को खुले में फेंका गया है। हजारों गायों के शवों को जंगली जानवर और चील गिद्ध नोंच रहे हैं। 3 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों का दुर्गंध से जीना दूभर हो गया है। लोगों पर संक्रमण और बीमारी का खतरा मंडरा रहा है।

राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने गायों की मौत पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है। वसुंधरा राजे ने कहा, “भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘माँ’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र अब तक कभी नहीं हुआ। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार लंपी संक्रमण से गाय को बचाने के लिए ना तो उपचार की व्यवस्था कर रही है और ना ही उन्हें मरने के बाद दो गज जमीन मिल रही है।”

मरने के बाद खुले मैदान में पड़ी गायों की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने एक और ट्वीट किया, “यह तस्वीर भले ही बीकानेर की हो, लेकिन पूरे राजस्थान में आज गौमाता की यही स्थिति है। मृत गायों को खुले में फेंकने से संक्रमण तेजी से फेल रहा है। कहीं यह महामारी न बन जाए, क्योंकि मृत गायों की दुर्गंध और प्रदूषण से आस-पास के लोगों में भी अन्य बीमारियाँ फेल रही है।”

बता दें कि बीकानेर के अलावा जोधपुर, जालोर, पाली और बीकानेर में हालात बेहद खराब हैं।

रात की रौशनी में भव्यता बिखेरने लगा है महाकाल कॉरिडोर: 300 करोड़ रुपए की लागत से पहले चरण का काम लगभग पूरा, नवंबर में PM मोदी करेंगे उद्घाटन

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बाबा महाकाल मंदिर मन्दिर (Baba Mahakal Temple) परिसर में महाकाल कॉरिडोर (Mahakal Corridor) के पहले चरण का काम लगभग पूरा होने वाला है। जिले के कलेक्टर आशीष सिंह ने कार्य की प्रगति का निरीक्षण किया और कहा कि जो काम बचे हैं, उसे जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि कॉरिडोर के विकास के बाद कई तस्वीरें सामने आई हैं, जो इसकी खूबसूरती को दिखाती हैं।

लगभग 752 करोड़ रुपए की लागत से महाकाल कॉरिडोर का विकास किया जा रहा है। इसके पहले चरण की लागत लगभग 300 करोड़ रुपए है। इसी साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बाबा महाकाल दर्शन करने जाएँगे और इस दौरान पहले चरण के कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे।

इस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और वैदिक एप की लॉन्चिंग भी करेंगे। इस घड़ी की विशेषता है कि यह ग्रीनविच समय पद्धत‍ि व हिन्दू कालगणना के समय अनुसार होगी, जिसमें 24 घंटे के बजाए 30 घंटे की होगी। इसे लख़नऊ के एक व्यक्ति ने विकसित किया है।  

सोशल मीडिया पर महाकाल कॉरिडोर के कुछ फोटो भी सामने आए हैं। इन फोटो में रात की रोशनी में जगमगाता महाकाल कॉरिडोर बेहद भव्य और खूबसूरत नजर आ रहा है। कॉरिडोर में वृक्षारोपण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसका काम पूर्ण होने के बाद यह और भी भव्य दिखेगा।

पहले चरण में महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिडवे जोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डेक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्पलेक्स, गणेश स्कूल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। 200 मीटर लंबा पैदल पथ का काम भी पूरा हो चुका है।

इसमें 108 शिवस्तंभ बनाए गए हैं, जिनमें भगवान शिव की विभिन्न मुद्राओं को अंकित किया गया है। पौराणिक सरोवर रूद्र सागर के किनारे विकसित हो रहा है। शिव, शक्ति और अन्य धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी करीब 200 मूर्तियों और म्यूरल्स के माध्यम से इसे सजाया गया है।

इसके साथ ही महाकाल थीम पार्क के अन्तर्गत महाकालेश्वर की कथाओं से युक्त म्यूरल वॉल तथा सप्त सागर हेतु डेक एरिया बनाया गया है। इस डेक के नीचे शॉपिंग क्षेत्र और बैठने की जगह बनाई गई है।

वहीं, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप कार, बस व दोपहिया वाहन की मल्टीलेवल पार्किंग बनकर तैयार हो चुकी हैं। इस क्षेत्र में धर्मशाला व अन्न क्षेत्र भी बनाए जा रहे हैं। मन्दिर के अंदर वाले भाग में सुरक्षा व्यवस्था के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और इन्हें एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स से जोड़ा गया है।

‘इसे ज़िंदा जला कर मार डालो’: फतवों के बावजूद मुस्लिम महिला ने गणपति पूजा के बाद किया विधिवत विसर्जन, मौलानाओं ने कहा था – इसे इस्लाम से ख़ारिज करो

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की रहने वाली एक मुस्लिम महिला रूबी खान ने बुधवार (7 सितंबर, 2022) को विधिवत गणपति विसर्जन किया। इससे पहले गणेश चतुर्थी के अवसर पर पूजा करने के बाद उन्हें मौलानाओं द्वारा फतवा भी दिया गया था। इसके बावजूद भी उन्हें नरोरा घाट पर बप्पा का विसर्जन किया। इस दौरान उन्होंने तमाम मौलानाओं से यह भी कहा कि वे इन फतवों से नहीं डरती हैं।

इस दौरान रूबी खान ने कहा,

“हमने गणपति स्थापित किया था, आज उनका विसर्जन कर रहे हैं। मैंने भगवान गणेश की मूर्ति 31 तारीख को स्थापित की थी, तभी से मौलानाओं ने मेरे ऊपर ये फतवा जारी कर दिया कि ये हिंदू बन चुकी है, इसने अपने यहाँ मूर्ति रख ली है। इसको इस्लाम से खारिज करो और परिवार को जिंदा जला कर मार डालो – इस तरह की धमकियाँ आने लगी। बाहर निकलती हूँ तो उलटी-सीधी कमेंटबाजी की जाती है कि हिंदू जा रही है ,लेकिन मुझे फतवा से और मौलानाओं से कोई डर नहीं है। मैंने जिस तरीके से धूमधाम से गणपति की स्थापना की थी, उसी धूमधाम से विसर्जन करने जा रही हूं।”

रूबी खान ने गणपति विसर्जन को लेकर ये कहा

बताया जा रहा है कि गणेश विसर्जन के दौरान रूबी खान के पति आसिफ खान और उनकी दोनों बहनें फराह एवं निदा भी मौजूद रहीं। वहीं महिला की सुरक्षा की बात करें तो अलीगढ़ पुलिस ने रूबी आसिफ खान के साथ दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। ये पुलिसकर्मी अलीगढ़ से लेकर बुलंदशहर तक रूबी आसिफ खान के साथ ही रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले जब रूबी खान ने अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की थी, तब उनके खिलाफ कुछ मौलानाओं ने फतवा जारी कर दिया था। इसमें यह कहा गया कि इस्लाम में मूर्ति पूजा की पाबंदी है, ऐसे में मूर्ति घर में लाना उसकी इबादत और पूजा करना, ये इस्लाम के खिलाफ है, जो रूबी ने किया है, इसलिए उन्हें इस्लाम से बेदखल कर देना चाहिए। फतवा जारी होने के बाद रूबी खान ने उन मौलवियों को उग्रवादी तक घोषित कर दिया था।

‘बीफ खाओगे तो पवित्र हो जाओगे’: हिन्दू कर्मचारियों को धर्मांतरण के लिए उकसाने वाला अधिकारी अब्दुल राशिद निलंबित, शाकाहार का उड़ाया था मजाक

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सहायक आयुक्त पंचायत (जेकेएएस) अब्दुल राशिद कोहली को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को बताया कि राजौरी के जिलाधिकारी विकास कुंडल ने सहायक आयुक्त (पंचायत) अब्दुल राशिद कोहली के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया। एक अधीनस्थ अधिकारी ने उनके खिलाफ शिकायत की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरे मामले की गहनता से जाँच के लिए एडीसी राजौरी की अध्यक्षता में जाँच कमेटी भी गठित की गई है, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्विटर पर आदेश की प्रति शेयर करते हुए लिखा, “जम्मू-कश्मीर में तत्काल कार्रवाई और न्याय को देखकर अच्छा लगा। संजीत शर्मा ने शिकायत की कि एक सरकारी अधिकारी अब्दुल राशिद कोहली (JKAS) ने राजौरी में शाकाहारियों और हिन्दू धर्म में खाने की आदतों का मजाक उड़ाया था। अब्दुल राशिद कोहली को निलंबित कर जाँच का आदेश दिया।”

बताया जा रहा है कि यह शिकायत एसी पंचायत के कार्यालय में कार्यरत पंचायत सचिव संजीत शर्मा ने की है। डीसी राजौरी विकास कुंडल को लिखे अपने पत्र में उन्होंने कहा, “एसी पंचायत अब्दुल रशीद कोहली के साथ हम होटल ब्लू स्टार मुरादाबाद में दोपहर का भोजन करने के लिए गए थे। उनके साथ पंचायत सचिव जहीर मलिक, उतिश अशोक और एमआइएस आपरेटर तारिक मिर्जा भी साथ थे। सभी ने खाने का ऑर्डर दिया। उन तीनों ने मांसाहारी खाने का ऑर्डर दिया जबकि मैंने शाकाहारी खाने का। इस पर एसी कोहली ने कहा कि वह मांसाहारी भोजन क्यों नहीं ले रहे हैं। मैंने जवाब दिया कि मैं शाकाहारी हूँ।”

इसके बाद उन्होंने हिंदू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए शर्मा को बार-बार मांसाहारी खाना खाने के लिए कहा। कोहली ने इस दौरान यह तक कह डाला कि अगर तुम बीफ खाओगे तो पवित्र हो जाओगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजीत शर्मा ने आरोप लगाया है कि वह उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए उकसा रहे थे। इस पर भी उन्होंने सख्ती से आपत्ति जताई तो उन्होंने नौकरी में प्रताड़ित करने की धमकी तक दे डाली।

इस शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी विकास कुंडल ने एसी पंचायत को निलंबित करने का आदेश जारी करते हुए कहा कि उनका यह आचरण न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनके द्वारा अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भी आहत करता है। उनकी टिप्पणी से जिले में कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। जिलाधिकारी ने कहा कि अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त पवन परिहार की अध्यक्षता वाली समिति मामले की जाँच करेगी और 15 दिनों में रिपोर्ट देगी।

₹27360 करोड़ लगाकर 14500 स्कूलों का कायाकल्प करेगी मोदी सरकार, 18 लाख छात्रों को होगा फायदा: PM SHRI योजना को मिली मंजूरी, 5 साल में दिखेगा असर

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को बड़ा फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत 14500 स्कूलों का कायाकल्प किया जाएगा। पुराने स्कूलों को अपग्रेड करते समय आधुनिक सुंदर ढाँचे, स्मार्ट कक्षाओं, खेल सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में जानकारी दी है।

पीआईबी के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने 14 हजार से अधिक ‘पीएम श्री स्कूलों’ (पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया) की स्थापना के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को मंजूरी दी। 5 साल की इस परियोजना की लागत 27360 करोड़ रुपए है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार, राज्य, केंद्र शासित और स्थानीय निकायों द्वारा प्रबंधित स्कूलों में से चयनित मौजूदा स्कूलों को मजबूत बनाया जाएगा। इसमें कुल 18128 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी केंद्र की होगी। इस योजना से 18 लाख से अधिक छात्रों को लाभ होगा।

इन स्कूलों का उद्देश्य न केवल संज्ञानात्मक या बौद्धिक विकास करना होगा, बल्कि प्रमुख कौशल से लैस समग्र एवं पूर्ण रूप से विकसित विद्यार्थि‍यों को तैयार करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी घटकों या विशेषताओं का समावेश होगा और ये आदर्श स्कूलों के रूप में कार्य करेंगे। प्रत्येक कक्षा में हर बच्चे की अच्छी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके आलावा इस योजना के तहत मेंटरशिप प्रदान करके अन्य स्कूलों को उनके संबंधित क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करेगा। साथ ही रोजगार बढ़ाने के लिए क्षेत्र कौशल परिषदों और स्थानीय उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा।

इसमें सोलर पैनल और एलईडी लाइट, प्राकृतिक खेती के साथ न्यूट्रीशन गार्डन, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जल संरक्षण और संचयन, पर्यावरण की सुरक्षा से संबंधित परंपराएँ अभ्यास जैसी पर्यावरण के अनुकूल पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।

शिक्षक दिवस पर PM ने किया था ऐलान

बता दें कि शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2022) के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम श्री योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत 14500 स्कूलों को अपग्रेड और विकसित करने का ऐलान किया गया है। पीएम ने कहा था कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की पूरी भावना को समाहित करते हुए ‘पीएम श्री’ स्कूल मॉडल स्कूल बनेंगे। इसमें केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों को शामिल किया जाएगा। पीएम ने कहा था कि ‘पीएम श्री’ स्कूलों में नवीनतम तकनीक, स्मार्ट कक्षाओं, खेल और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा।

दिल्ली में CPR पर इनकम टैक्स की रेड, कॉन्ग्रेस नेता की बेटी के हाथों में है थिंक टैंक की कमान: गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की कर चोरी से जुड़ा है मामला

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने दिल्ली के थिंक टैंक सहित कई राज्यों में बुधवार (7 सितंबर 2022) को छापेमारी की। यह छापेमारी पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) और उनके कथित कर चोरी से संबंधित है। जिन-जिन जगहों पर छापेमारी की गई उनमें दिल्ली के अलावा, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि शामिल हैं।

आयकर विभाग ने जिन जगहों पर छापेमारी की है, उनमें दिल्ली स्थित नामी थिंकटैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ (CPR) भी शामिल है। CPR ने अपनी वेबसाइट पर फंडिंग के बारे में कहा है कि भारत सरकार द्वारा एक गैर-लाभकारी संस्था (NGO) के रूप में मान्यता प्राप्त होने के कारण इसमें दिया गया योगदान कर-मुक्त है।

एनडीटीवी के अनुसार, CPR ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, “सीपीआर फाउंडेशन, कॉर्पोरेट CSR, सरकारों और बहुपक्षीय एजेंसियों सहित विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से अनुदान प्राप्त करता है।” साल 1973 में स्थापित इस संस्था के अनुसार, वार्षिक लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

बात दें कि CPR भाजपा और सरकार के खिलाफ प्रोपगेंडा चलाता रहा है। इसकी मुख्य कार्यकारी और अध्यक्ष यामिनी अय्यर हैं, जो कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी हैं। वहीं, इसकी गवर्निंग बोर्ड की अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पूर्व पूर्व प्रोफेसर मीनाक्षी गोपीनाथ हैं। प्रताप भानु मेहता भी इसके अध्यक्ष रह चुके हैं।

आयकर विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई आरयूपीपी, उनसे जुड़ी संस्थाओं, ऑपरेटरों और अन्य के खिलाफ एक साथ शुरू की गई है। माना जाता है कि आयकर विभाग की यह कार्रवाई चुनाव आयोग (EC) की सिफारिश पर की गई है।

चुनाव आयोग ने हाल ही में फिजिकल सत्यापन के दौरान गैर-मौजूद पाए जाने के बाद 87 संस्थाओं को RUPP की सूची से हटा दिया था। आयोग ने कहा था कि वह 2,100 से अधिक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जो नियमों और चुनावी कानूनों का उल्लंघन कर रहे है।

ये संस्थान फंडिंग का विवरण और उन्हें देने वालों के नाम-पते देने में आनाकानी करते रहे हैं। इनमें से कुछ पार्टियाँ ‘गंभीर’ वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त रहने की बात कही गई है। इसके बाद आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की है।

‘लव जिहाद’ के मामले को लेकर पुलिस से भिड़ीं MP नवनीत राणा, फोन टैपिंग का भी लगाया आरोप: अभी तक नहीं बरामद हुई है हिन्दू लड़की

महाराष्ट्र में अमरावती से सांसद नवनीत राणा बुधवार (7 सितंबर, 2022) को स्थानीय पुलिस स्टेशन में अधिकारियों के साथ भिड़ गईं। दरअसल, नवनीत राणा ‘लव जिहाद’ के एक मामले को लेकर पुलिस की कार्यवाही से नाखुश थीं। इसलिए, उन्होंने खुद थाने में आकर अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने अपने फोन टैप होने का भी आरोप लगाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्दलीय सांसद नवनीत राणा ने अमरावती के राजापेठ पुलिस स्टेशन जाकर अपना आक्रोश प्रकट किया। थाने में उनकी पुलिस निरीक्षक मनीष ठाकरे और डीसीपी के साथ जोरदार बहस हो गई। राणा ने बताया कि यह एक ‘लव जिहाद’ का मामला है और इसमें एक विशेष समुदाय के लड़के ने हिंदू लड़की को भगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित लड़की को सुरक्षित उसके घर वापस नहीं लाया जाता तब तक वो पीछे नहीं हटेगी।

पुलिस स्टेशन में सांसद नवनीत राणा ने दावा किया कि यहाँ एक महिला सांसद का फोन रिकॉर्ड किया जा रहा है और वो ये जानना चाहती हैं कि यह काम किसके आदेश पर किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों से यह सवाल किया कि क्या एक दलित महिला होने की वजह से उनके साथ यह सब कुछ किया जा रहा है?

वहीं इस घटनाक्रम के बाद सांसद ने ‘एबीपी न्यूज’ से बातचीत करते हुए बताया कि पीड़िता के अपहरण के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी वह लड़की अभी तक अपने माता-पिता के पास नहीं पहुँची। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 15-20 दिनों में ‘लव जिहाद’ के कुछ 5 केस दर्ज हो चुके हैं। नवनीत ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस से इंवेस्टिगेशन के बारे में पूछा तो उलटा पुलिस उनकी गलती निकालने लगी।

नवनीत राणा के मुताबिक, उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यदि आरोपित युवक आपकी कस्टडी में हैं तो उससे सख्ती से पेश आइए, फिर 1 घंटे में लड़की का पता निकल जाएगा। राणा के अनुसार, इस दौरान उनका फोन रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने इसे पुलिस की सबसे बड़ी गलती बताया। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री के आदेश के बिना किसी का भी फोन रिकॉर्ड करने का अधिकार नहीं है।

नवनीत राणा ने अमरावती में सबसे ज्यादा ‘लव जिहाद’ के मामले सामने आने का जिम्मेदार पुलिस को ठहराया। राणा ने कहा कि पिछले कुछ समय से अमरावती में कोई भी खुलेआम मर्डर करके चला जाता है, शराब के अवैध धंधे यहाँ फल-फूल रहे हैं और जुए की भी खुलेआम छूट देखने को मिल रही है। राणा ने कहा कि जब मैं पुलिस से सवाल करने लगीं, तो वे बदतमीजी पर उतर आए।

इसके साथ-साथ सांसद नवनीत राणा ने यह भी माँग की है कि ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को पुलिस को कंट्रोल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर एक के साथ में प्रॉपर ट्रीटमेंट होगी तब जाकर भविष्य में इस तरह का अपराध करने की सोचने वाले लड़के का दिल दहल जाएगा। उन्होंने कहा, “जब बार-बार इस तरह की घटनाओं से पीड़ित लोग हमारे पास आते हैं तो हमें बहुत दुःख होता है कि हम इस पद पर होने के बाद भी अपने समाज के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं।”