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पता था सुकेश ठग है, फिर भी गिफ्ट कबूल रही थी जैकलीन फर्नांडिस: श्रीलंका-बहरीन में खरीद कर दिए घर, मुंबई में बंगले के लिए भी एडवांस

बॉलीवुड हिरोइन जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) को सुकेश चंद्रशेखर ने केवल घोड़े, बिल्ली और ज्वेलरी ही गिफ्ट नहीं किए। उसने हिरोइन को श्रीलंका और बहरीन में घर खरीद कर दिए हैं। मुंबई में बंगला लेने के लिए एडवांस भी उसने ही दिया था। मीडिया रिपोर्टों में यह दावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट के हवाले से किया गया है।

ED ने जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर 215 करोड़ रुपए की वसूली मामले में जैकलीन को भी आरोपित बनाया है। इस मामले में चार्जशीट पेश कर दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच एजेंसी ने बताया है कि सुकेश ने अपनी सहयोगी पिंकी ईरानी को मकान खरीदने के बारे में बताया था। पिंकी को ही उसने जैकलीन से मिलवाने की जिम्मेदारी थी। इसके बदले पिंकी को भी करोड़ों रुपए दिए गए थे।

ईडी चार्जशीट में कहा गया है कि सुकेश ने जैकलीन के लिए श्रीलंका में एक घर खरीदा था। एक घर बहरीन में जैकलीन के माता-पिता को गिफ्ट किया था। इसके अलावा मुंबई के जुहू में एक बंगला लेने के भी एडवांस दिया था। रिपोर्ट के अनुसार जैकलीन को पता था कि सुरेश ठग है। इसके बावजूद वह उसके गिफ्ट कबूल कर रही थी। बता दें कि ₹215 करोड़ की वसूली के मामले में ईडी जैकलीन की 7.27 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त कर चुकी है।

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि सुकेश ने जैकलीन की माँ को लग्जरी कार मासेराती और पॉर्श कार गिफ्ट में दी थी। अमेरिका में रहने वाली जैकलीन की बहन को उसने 1.50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.20 करोड़ रुपए) लोन के रूप में दिए थे। इतना ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले जैकलीन के भाई को भी 15 लाख रुपए दिए गए थे।

सुकेश ने जैकलीन को BMW (5) और मिनी कूपर कार गिफ्ट की थी। हालाँकि, जैकलीन इसे लौटाने का दावा करती हैं। इसके अलावा, गुच्ची के दो जिमवियर, 52 लाख रुपए का एक अरबी घोड़ा एस्पुएला, 9-9 लाख रुपए की तीन फारसी बिल्लियाँ भी दीं। सुकेश ने जैकलीन के लिए किराए पर निजी जेट भी लिया था।

‘पूरे शरीर में थे जख्म, जल्द हो विसरा की जाँच’: सोनाली फोगाट का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने खोले कई राज़, हिसार पहुँची गोवा पुलिस

आरोपितों के पकड़े जाने के बावजूद भाजपा की महिला नेता और अभिनेत्री रहीं सोनाली फोगाट की हत्या की गुत्थी उलझती ही जा रही है और तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। मौत से पहले नॉर्थ गोवा के अंजुना बीच स्थित एक क्लब में सोनाली फोगाट को उनके PA सुधीर सांगवान और दोस्त सुखविंदर के साथ पार्टी करते हुए देखा गया था। फ़िलहाल दोनों जेल में हैं। इसी क्लब्स के वीडियोज भी सामने आए, जिसमें उन्हें ड्रग्स देते हुए दोनों को देखा जा सकता है।

कर्लिस क्लब में गोवा पुलिस की छानबीन जारी है। पुलिस की एक टीम हरियाणा के हिसार स्थित सोनाली फोगाट के घर भी पहुँची है। अब ‘आज तक’ ने अपनी स्टिंग इन्वेस्टीगेशन के माध्यम से नया खुलासा किया है। स्टिंग में गोवा के GMC बेम्बोलिन अस्पताल के सीनियर डॉक्टर मंदर कंटक ने कुछ चौंकाने वाली बातें कही हैं, जिन्होंने सोनाली फोगाट के शव का पोस्टमॉर्टम किया था। वो वहाँ एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

इस स्टिंग में वो कहते दिख रहे हैं कि सोनाली फोगाट के शरीर पर कई जगह जख्म थे, खासकर हाथ-पाँव में। उन्होंने बताया कि जाँघों में भी जख्म था। उन्होंने बताया कि आरोपित ने कहा कि वो टॉयलेट में गिर गई थीं और दीवार से टकरा गई थीं। उन्होंने कहा कि 7 पन्नों में ये पोस्टमार्टम रिपोर्ट है। उन्होंने इस बात से नाराज़गी जताई कि 2 दिन बाद बॉडी का पोस्टमॉर्टम हुआ, जिससे ड्रग्स ओवरडोज का पता लगाने में समस्या आई।

उन्होंने बिना किसी देरी के विसरा की जाँच करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि यहाँ ड्रग्स ने ही ज़हर का काम किया था। उन्होंने कहा, “हार्ट अटैक का कुछ नहीं है उसमें, लेकिन हमने टेस्ट के लिए रखा है।” सोनाली फोगाट की हत्या के पीछे गहरी साजिश की बात कही जा रही है। वो पलवल से गुरुग्राम पहुँची थीं और वहाँ से गोवा के लिए निकल गई थीं। उन्होंने गनर को वापस भेज दिया था और परिवार को गलत शेड्यूल की जानकारी दी गई थी।

सोनाली फोगाट ने अपनी बेटी को बताया था कि गोवा में एक सप्ताह का शूट है, जबकि रिजॉर्ट 2 दिनों के लिए ही बुक था। परिवार अब भी CBI जाँच की माँग ही कर रहा है। सोनाली फोगाट के जेठ कुलदीप ने बताया कि पीए सुधीर सोनाली के पिता तक को उनसे नहीं मिलने देता था। गुरुग्राम में फ़्लैट किराए पर लेते समय कागजात में उसने सोनाली को पत्नी बताया था। गनर को उसने ही गोवा जाने से रोका था। फार्महाउस से कर्यरतेकर मोबाइल-लैपटॉप लेकर फरार हुआ था। वो भी पुलिस की गिरफ्त में है।

‘दारू में पानी मिलाएँगे… एक बार में गट-गट कर नहीं पीना है’: कार्यक्रम नशा मुक्ति का, छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री ने शराब पीने के बाँटे टिप्स

छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government, Chhattisgarh) में स्कूली शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय टेकाम ने नशामुक्ति अभियान से संबंधित एक कार्यक्रम में शराब की महिमा की जमकर बखान किया। उन्होंने शराब पीने के तरीके भी लोगों को बताए। साथ ही हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ का जिक्र किया।

हरिशवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कविता का जिक्र करते हुए टेकाम ने कहा, “मंदिर-मस्जिद झगड़ा कराते हैं, लेकिन मधुशाला एक कराती है।” उन्होंने आगे कहा, “आत्म-नियंत्रण होना चाहिए। हम भी चुनाव-सुनाव में उपयोग कर लेते हैं।”

मंत्री टेकाम का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में शिक्षा मंत्री कह रहे हैं, मैं एक बार एक मीटिंग में गया था। वहाँ एक व्यक्ति दारू के पक्ष बोल रहा था और एक विपक्ष में बोल रहा था। दारू की क्या-क्या हानि हो सकती है, क्या-नुकसान हो सकते हैं। एक पक्ष बोला कि दारू के क्या-क्या फायदे हो सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “दारू का सब उपयोग करते हैं। हम भी कभी-कभी करते हैं। चुनाव-सुनाव में इसका उपयोग करते हैं। दारू में अगर पानी मिलाएँगे तो वह निदान का काम करती है। उसमें डाइल्यूशन होना चाहिए। कितना डाइल्यूशन हो? जितना हो सकता है, उतना हो। उसके बाद ड्यूरेशन होना चाहिए। ये नहीं कि एक बार में ही गट-गट कर मार दिए।”

शिक्षा मंत्री प्रेमसाय टेकाम बलरामपुर में बुधवार (31 अगस्त 2022) को नशा मुक्ति अभियान के एक कार्यक्रम में गए थे। उस कार्यक्रम में स्कूली बच्चे भी शामिल हुए थे। वहाँ मंत्री ने दारू पीने के नुकसान बताने की जगह, उसके पीने के फायदे और पीने के तरीके बताने लगे।

जिस समय शिक्षा मंत्री दारू का बखान कर रहे थे, उस समय मंच पर जिले के एसपी और डीएम भी मौजूद थे और वे मुस्कुराते दिखे। मंत्री टेकाम का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स मंत्री जी का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं।

कार्यक्रम के बाद शिक्षा मंत्री से पत्रकारों ने सड़कों की हालत को लेकर सवाल किया। इस पर टेकाम ने कहा कि खराब सड़क के कारण हादसे कम होते हैं। जब सड़क अच्छी बन जाती है तो हादसे बढ़ जाते हैं।

उन्होंने कहा, “प्रयास है कि खराब सड़कें जल्द बन जाएँ, लेकिन जहाँ खराब सड़कें होती हैं, वहाँ सड़क दुर्घटना कम होती है। वहाँ लोगों की मृत्यु कम होती है। जहाँ चकाचक सड़कें बन जाती हैं, वहाँ हादसे ज़्यादा होते हैं।”

आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि को प्रणाम करेंगे PM मोदी, वेद पाठशाला की नई इमारत का होगा शिलान्यास: केरल के कलाडी का ये है इतिहास

केरल का कलाडी आदि शंकराचार्य का जन्मस्थान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (1 सितंबर, 2022) का दौरा यहाँ पर होना है। कोच्चि एयरपोर्ट से ‘आदि शंकर जन्म भूमि क्षेत्रम्’ पहुँचने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम है। कलाडी में आज भी वो मंदिर मौजूद हैं, जहाँ शंकराचार्य की माँ पूजा करती थीं। वहीं पर आज श्रृंगेरी मठ है। कलाडी नाम के पीछे भी एक रोचक कहानी है। कहा जाता है कि पहले पेरियार नदी गाँव से कुछ दूरी पर बहती थी।

एक दिन शंकराचार्य की माँ नदी की तरफ जाते हुए बेहोश हो गईं। फिर शंकराचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की, जिसके बाद उन्होंने आशीर्वाद दिया कि नदी उनके पदचिह्नों का अनुसरण करेगी। फिर शंकराचार्य पेरियार नदी को गाँव के पास ले आए। कलाडी का अर्थ पदचिह्न ही होता है। वहाँ ‘आर्यम्बा का वृन्दावन’, अर्थात शंकराचार्य की माँ की समाधि भी है। यहाँ स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर में उनके माता-पिता पूजा करते थे

कलाडी कांची कामकोटि पीठम ने यहाँ एक सुंदर कीर्ति स्तंभ का निर्माण कराया है। कलाडी के मणिकमंगलम कार्त्यायनी मंदिर में शंकर के पिता पुजारी थे। संस्कृत पर शोध के लिए यहाँ एक विश्वविद्यालय भी है। बेलूर के रामकृष्ण मठ की एक शाखा भी श्रृंगेरी के पास ही स्थित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहाँ एक वेद पाठशाला की आधारशिला भी रखेंगे। हजार वर्षों तक आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि अस्पष्ट थी, लेकिन सन् 1910 में सच्चिदानंद शिवभिवामा नरसिंह भारती (श्रृंगेरी मठ के 33वें उत्तराधिकारी) और त्रावणकोर के महाराजा मूलम थिरुन्नाल रामा वर्मा ने इसे ढूँढ निकाला

1927 में चंद्रशेखर भारती ने यहाँ वेदांत पाठशाला की स्थापना की। 1991 में शंकराचार्य विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिश रही है कि आदि शंकराचार्य को भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बता कर पेश किया जाए। उन्होंने राष्ट्र एवं हिन्दुओं को एक किया था। पीएम मोदी ने केदारनाथ में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया था। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में उनकी 108 फुट ऊँची प्रतिमा बन रही है। पीएम मोदी कोच्चि को मेट्रो की नई लाइन की सौगात भी देंगे।

तालाब में तैरती मिली उस सिरफिरे की लाश, जिसने घर में घुसकर 18 साल की लड़की के गले पर मार दिया था चाकू: मध्य प्रदेश के खंडवा का मामला

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में एकतरफा प्यार में एक लड़की पर चाकू से वार करने वाले आरोपी की लाश गाँव के तालाब से मिली है। बताया जा रहा है कि 21 वर्षीय आरोपित बबलू ने आत्महत्या कर ली है। पुलिस इस मामले में मौत के कारणों के जाँच की बात कह रही है। बबलू के हमले में घायल पीड़िता का इलाज अस्पताल में चल रहा है। मृतक का शव बुधवार (31 अगस्त 2022) को बरामद हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मूंदी थानाक्षेत्र के गाँव बांगरदा की है। मृतक बबलू पर आरोप था कि 29 अगस्त 2022 (सोमवार) को वह 18 वर्षीया पीड़िता के घर में दीवार फाँद कर घुसा और उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगा। जब पीड़िता ने बबलू की बात नहीं मानी तो उसने चाकू से उसका गला रेत दिया और मौके से भाग गया। घायल लड़की को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा था।

पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर खंडवा पुलिस आरोपित की तलाश कर रही थी। अचानक से उसकी लाश तालाब में तैरती मिली। पीड़ित लड़की के पिता ने बताया कि मृतक नशे का आदी था और लोगों को बेवजह परेशान करता था। कुछ दिन पहले भी उनका उससे विवाद हुआ था। उस समय मामला समझा-बुझाकर खत्म हो गया था।

तालाब में बबलू की लाश होने की जानकारी के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। नाव की मदद से उसकी लाश निकाली गई। मूंदी थाने के प्रभारी ब्रजभूषण हिरवे ने कहा है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। खंडवा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। पुलिस मामले के पड़ताल कर रही है।

पंजाब में जबरन धर्म परिवर्तन के पीछे विदेशी ताकतें, चमत्कारी इलाज-फ्रॉड से हिंदू-सिखों को बना रहे ईसाईः अकाल तख्त के जत्थेदार बोले- धर्मांतरण विरोधी कानून जरूरी

पंजाब (Punjab) में ईसाइयों द्वारा कराए जा रहे जबरन धर्मांतरण (Religious Conversion in Christianity) को लेकर अकाली तख्त (Akal Takht) ने चेतावनी दी है और कहा है कि इस प्रथा अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पंजाब में धर्मांतरण विरोधी कानून की जरूरत बताई है। सिख समुदाय से

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि जिस तरह से धर्मांतरण की गतिविधियाँ राज्य में संचालित हो रही हैं, उसको देखते हुए सिख समुदाय के लोगों को धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की माँग करनी चाहिए। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस संबंध में 5 सितंबर 2022 को आनंदपुर साहिब में एक बैठक भी बुलाई है।

ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हमने पंजाब में कभी भी धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग नहीं की है। हम नहीं चाहते थे, लेकिन अब ऐसी स्थिति बन गई है कि हमें माँग करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सिखों को इस कानून की माँग के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से तथाकथित ईसाई मिशनरी चमत्कारिक इलाज और कपटपूर्ण सिखों का जबरन धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। पंजाब के सिखों और हिंदुओं को ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराने के लिए उन्हें गुमराह किया जा रहा है और यह सरकार की नाक के नीचे हो रहा है।

अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि भारत के कानून में धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के कारण कोई भी सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है।

राज्य पर आरोप लगाते हुए जत्थेदार सिंह ने कहा कि पिछले छह महीनों से सिखों द्वारा शिकायत दर्ज की गई है मिशनरी जनता को गुमराह करके जबरन धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, “हम अपने धर्म में भी चमत्कारिक इलाज (पाखंडवाद) के खिलाफ हैं। बाइबल भी ऐसे लोगों की निंदा करती है, लेकिन यहाँ इस तरह के अंधविश्वासों का इस्तेमाल सिखों को लुभाने के लिए किया जा रहा है।”

जत्थेदार ने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और यहाँ के गरीब हिंदुओं और सिखों को धर्मांतरित करने के लिए ‘विदेशी ताकतें’ फंडिंग कर रही हैं। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए कहा कि अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण करने वाले लोग आरक्षण का लाभ भी ले रहे हैं। यह कैसे हो रहा है, यह एक प्रश्न है।

असम के बाद अब यूपी के मदरसों की बारी, योगी सरकार ने सर्वे के दिए आदेश: फंडिंग, मौलवी, सिलेबस से लेकर बच्चों को मिल रही सुविधाओं तक की होगी जाँच

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में प्रयास कर रही है। मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है। इसके लिए 5 अक्टूबर, 2022 तक की समयसीमा भी तय की गई है। उन मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं।

इस सम्बन्ध में एक बैठक भी हुई थी। उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। दरअसल, इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।

इन मदरसों में जिनका संचालन ठीक से हो रहा होगा, उन्हें मान्यता के दायरे में भी लाया जाएगा। किन मदरसों को कहाँ से फंडिंग मिल रही है, इसकी भी जाँच की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड’ से उन मदरसों को मान्यता दिलाई जाएगी, जो इसके योग्य होंगे। इतना ही नहीं, सरकार को ये जानकारी भी हासिल करनी है कि इन मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षक कौन हैं और वो क्या पढ़ा रहे हैं। मदरसों का सिलेबस क्या है, रिपोर्ट में ये भी जुटाया जाएगा।

‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCRCP)’ के मानकों के अनुरूप ये काम किया जा रहा है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि बच्चों के मूल अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए ये आवश्यक है। पीने का पानी और फर्नीचर से लेकर बिजली सप्लाई और शौचालय की उचित व्यवस्था बच्चों के लिए आवश्यक हैं। इन मदरसों में जाँचा जाएगा कि ये मिल रहा है या नहीं। मदरसों का संचालन कौन सी संस्थाएँ कर रही हैं, इस पर भी सरकार की नजर होगी।

कई ऐसे मदरसे हैं जो NGO द्वारा संचालित हो रहे हैं, इसीलिए इन मदरसों की आय की स्रोत का पता लगाना ज़रूरी है। फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में 16,461 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें से 560 मदरसे सरकारी अनुदान से चल रहे हैं। पिछले 6 वर्षों से इस सूची में कोई नया मदरसा नहीं जुड़ा है। मदरसों में काम करने वाली महिलाओं को भी गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद छुट्टी देने का निदेश दिया गया है। बता दें कि असम में हाल ही में 3 मदरसों को आतंकी कनेक्शन के कारण ध्वस्त किया गया है और कई गिरफ्तार हुए हैं।

अबकी बार जंगल में परवान चढ़ा सलीम-अनारकली का प्रेम, इश्क में कई बार भागने की कोशिश कर चुकी है 4 बच्चों की माँ

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में है बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व। यहाँ की एक प्रेम कहानी चर्चा में है। यह लव स्टोरी सलीम और अनारकली की है। सलीम एक जंगली हाथी है, जबकि अनारकली यहाँ की सबसे प्रसिद्ध हथिनी।

रिपोर्टों के अनुसार हथिनी की उम्र 58 साल है और हाथी 35 साल के आसपास का है। दोनों एक-दूसरे को काफी पसंद कर रहे हैं। उनका यह प्रेम वन अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। बताया जा रहा है कि प्रेम में अनारकली कई बार भागने की कोशिश कर चुकी है। एक बार तो उसे नेशनल पार्क वापस लाने के लिए अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक सुधीर मिश्रा के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि आमतौर पर झुंड में रहने वाले हाथी किसी जंगली हाथी को स्वीकार नहीं करते हैं। कभी-कभार ऐसा भी होता है कि जो जंगली हाथी अपने झुंड से अलग हो जाते हैं वे मादा को भी अपने साथ ले जाते हैं। ऐसा ही एक जंगली हाथी सलीम, अनारकली के प्रेम में डूबा हुआ है। वह हाथियों के कैंप में पहुॅंच जाता है और अनारकली को धक्का देते हुए अपने साथ जंगल में ले जाता है। यह कई बार हो चुका है। हर बार वन अधिकारियों को अनारकली को खोजकर वापस कैंप में लाना पड़ता है।

कैंप में कुल 14 हाथी हैं। बांधवगढ़ के पालतू हाथियों की संख्या बढ़ाने में अनारकली का बड़ा योगदान है। उसके चार बच्चे हैं- सूर्या, गणेश, गायत्री और लक्ष्मी। गर्भाधारण की उसकी संभावनाएँ अभी भी बची हुई हैं। इसलिए वन अधिकारी नहीं चाहते कि वह कैंप से निकलकर जंगल में रहने लगे।

गौरतलब है कि 27 अगस्त 2022 से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सात दिवसीय गज महोत्सव शुरू हुआ था। इस महोत्सव के दौरान सभी हाथियों की तेल से मालिश की गई थी। साथ ही अनारकली का विशेष श्रृंगार भी किया गया था। अनाकरली को बांधवगढ़ के कैंप में 1978 में बिहार के प्रसिद्ध सोनपुर मेले से खरीदकर लाया गया था।

बंगाल से नोएडा बेटी के घर आया 65 साल का अकबर अली, 3 साल की बच्ची से किया गलत काम: अदालत ने ‘डिजिटल रेप’ का दोषी माना, उम्रकैद

नोएडा की सूरजपुर जिला और सत्र अदालत (Surajpur District and Sessions Court) ने मंगलवार (30 अगस्त 2022) को ‘डिजिटल रेप’ (Digital Rape) के दोषी 65 साल के अकबर अली को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

बताया जा रहा है कि यह देश का पहला मामला है, जब किसी आरोपित को 3 साल की बच्ची के साथ ‘डिजिटल रेप’ का दोषी करार देते हुए POCSO अधिनियम के साथ-साथ IPC की धारा 375 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह घटना नोएडा के सेक्टर-39 थाना क्षेत्र के सलारपुर गाँव (Salarpur Village) की है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अकबर अली की उम्र 75 साल बताई गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अकबर अली मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। वह साल 2019 में अपनी शादीशुदा बेटी से मिलने नोएडा के सेक्टर-45 स्थित सलारपुर गाँव आया था। यहाँ उसने पड़ोस में रहने वाली तीन साल की बच्ची को टॉफी का लालच दिया और उसे अपने घर ले आया। अकबर अली की हरकतों से डरी-सहमी बच्ची अपने घर पहुँची और माता-पिता को पूरी बात बताई। उसके बाद परिजनों ने थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई।

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नितिन बिश्नोई (Nitin Bishnoi) ने बताया कि 2019 में बच्ची के माता-पिता की शिकायत के आधार पर अकबर अली के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मेडिकल जाँच में रेप की पुष्टि होने के बाद अकबर अली को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद से वह जेल में बंद है। उसने सत्र न्यायालय और हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी, लेकिन उसकी अपील खारिज कर दी गई थी। 30 अगस्त 2022 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार सिंह ने अकबर अली को परिस्थितिजन्य साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टरों, जाँच अधिकारियों, परिजनों और पड़ोसियों की गवाही पर दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

क्या होता है ‘डिजिटल रेप’

‘डिजिटल रेप’ डिजिटल या वर्चुअल रूप से किया गया यौन अपराध नहीं है। आसान शब्दों में समझे तो ‘डिजिटल रेप’ का मतलब रिप्रोडक्टिव ऑर्गन की जगह किसी की मर्जी के बिना उँगलियों या हाथ-पैर के अँगूठे से या फिर किसी अन्य वस्तु जैसे खिलौने का प्रयोग कर जबरन सेक्स करना है। यहाँ अंग्रेजी में डिजिट शब्द का अर्थ उँगली, हाथ-पैर के अँगूठे जैसे शरीर के अंगों से है।

बता दें कि दिल्ली के निर्भया कांड (Nirabhaya rape case) के बाद देश की संसद में नए बलात्कार कानून (Rape Law) को पेश किया गया था। 2013 में पहली बार ‘डिजिटल रेप’ को मान्यता देते हुए इसे धारा 375 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की श्रेणी में रखा गया। इससे पहले देश में ऐसा कोई कानून नहीं था, जिससे ‘डिजिटल रेप’ पीड़िता को न्याय मिल सके।

‘बिना माँस खाए 1-2 दिन रहिए’: गुजरात हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकार को लगाई फटकार, जैन पर्व पर बूचड़खाने बंद करने को बता रहा था मौलिक अधिकार पर रोक

गुजरात हाईकोर्ट ने बूचड़खाने को लेकर कोर्ट पहुँचे मुस्लिम समुदाय के लोगों को फटकार लगाई और कहा कि क्या वे एक-दो दिन बिना माँस के जिंदा नहीं रह सकते? दरअसल, जैन धर्मांवलंबियों के पवित्र पर्युषण पर्व पर अहमदाबाद नगर निगम ने (AMC) ने बूचड़खाने को बंद रखने का आदेश दिया था।

AMC के आदेश के बाद ‘कुल हिंद जमीयत-अल कुरैश एक्शन कमिटी’ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निगम के आदेश को चुनौती दी थी। कमिटी की ओर से दानिश कुरैशी रजावाला और एक अन्य व्यक्ति द्वारा याचिका में कहा कि यह बूचड़खाना अहमदाबाद का इकलौता बूचड़खाना है और पर्व पर इसे खुला या बंद रखने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जस्टिस संदीप भट्ट की एकल पीठ ने कहा, “आप लोग अंतिम समय में भागे चले आ रहे हैं? हम इस पर विचार नहीं करेंगे। जब भी प्रतिबंध लगाया जाता है तो आप लोग भागे-भागे कोर्ट आ जाते हैं। आप लोग एक-दो दिन माँस खाने से खुद को रोक सकते हैं।”

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की स्थायी समिति ने 18 अगस्त को पारित एक प्रस्ताव में जैन त्योहार पर्युषण पर्व के दौरान बूचड़खाने को बंद रखने का आदेश दिया है।

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि पूरे अहमदाबाद शहर में एक ही बूचड़खाना है और इस बूचड़खाने के खुला रखने या बंद रखने से किसी व्यक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने गुजरात हाईकोर्ट के दिसंबर 2021 के फैसले का उदाहरण दिया। इसमें कोर्ट ने AMC से कहा था कि किसी भी व्यक्ति के खान-पान की आदतों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की जा सकती।