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विधायक गायब होंगे, वापस आएँगे और केजरीवाल मीडिया के ‘चाणक्य’ बन जाएँगे: मुद्दा शराब-सिसोदिया, AAP ने बना दिया गाँधी-गंगाजल का

कुछ नेताओं को लगता है कि राजनीतिक बयानबाजी में कुछ भी सच नहीं होता, झूठ ही झूठ होता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऐसी ही राजनीति कर रहे हैं, जैसी नब्बे के दशक की फिल्मों में सफेदपोश गुंडे करते थे। वो जो बयान देते हैं, उसका कोई फैक्ट-चेक नहीं होता। वो जो भी बोल दें, आरोप हो जाता है। वो जो भी कर दें, हाइप बन जाती है। और ये सब करने में मीडिया उनकी बखूबी मदद करता है।

दिल्ली में भी यही हो रहा है। आगे बढ़ने से पहले जरा एक बार संक्षिप्त में घटनाक्रम आपको समझा दें। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, जो कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री के रूप में ज्यादा प्रचारित किए जाते हैं, आबकारी विभाग के मंत्री भी हैं। अतः, शराब वाला विभाग उनके अंतर्गत ही आता है। उन पर शराब माफिया के साथ मिल कर घोटाले का आरोप है। आरोप ये है कि उन्होंने कोरोना महामारी को बहाना बना कर शराब माफिया को टेंडर लाइसेंस में 144.36 करोड़ रुपए की छूट दी।

इसके लिए दिल्ली के आबकारी नियमों में बदलाव कर दिया गया और उप-राज्यपाल की अनुमति तक नहीं ली गई। नवंबर 2021 में दिल्ली की नई एक्साइज पॉलिसी आई थी। CBI ने इस सम्बन्ध में FIR दर्ज की है और मनीष सिसोदिया के घर पर छापेमारी भी की गई। मनीष सिसोदिया पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी बियर पर प्रति बोतल 50 रुपए की लगने वाली इम्पोर्ट फीस हटा ली, जिससे शराब माफिया को फायदा पहुँचा, बियर सस्ती हुई और सरकारी खजाने को चूना लगा।

एयरपोर्ट ऑथोरिटी द्वारा अनुमति न मिलने के बावजूद वहाँ दुकान खोलने वाले L1 लाइसेंसधारियों के 30 करोड़ रुपए जब्त करने के बदले उन्हें लौटा दिए जाने के आरोप भी हैं। साथ ही L7Z और L1 लाइसेंस की मान्यता को 2 महीने के लिए LG की अनुमति के बिना ही बढ़ा दिया गया। CBI की FIR में शराब कारोबारी समीर महेन्द्रू का नाम भी शामिल है, जो सिसोदिया का करीबी है। इसमें 15 आरोपित हैं। दिल्ली की शत-प्रतिशत शराब की दुकानें प्राइवेट कर दी गईं।

लेकिन, देखिए कैसे मनीष सिसोदिया के ठिकाने पर हुई छापेमारी को पूरी तरह से राजनीतिक रंग दे दिया गया। पहले तो इसे ‘राजपूत जाति’ से जोड़ा गया। शायद AAP को उम्मीद थी कि इससे राजपूत संगठन और समाज उसके पीछे खड़ा हो जाएगा, भाजपा का विरोध हो जाएगा, या कम से कम इस कार्रवाई का विरोध तो करेगा ही। ठीक ऐसे ही, जैसे दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में ED की कार्रवाई को जैन समाज पर अत्याचार बताया गया था।

फिर शुरू हुआ नया ड्रामा। दिल्ली में 70 में से 59 विधायक अरविंद केजरीवाल के हैं, 8 भाजपा के पास हैं। ऐसे में भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि सत्ताधारी दल के इतने बड़े बहुमत को तोड़ा जाए और सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 28 अतिरिक्त विधायक वहाँ से ले आए जाएँ। महाराष्ट्र का मामला अलग है, क्योंकि वहाँ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। विद्रोह शिवसेना में हुआ। बिहार में नीतीश कुमार की जदयू ने भाजपा पर उसे तोड़ने की साजिश का आरोप लगाते हुए राजद के साथ गठबंधन कर लिया।

इन सबके बीच अरविंद केजरीवाल ने भी मौका सूँघ लिया और निकल गए ड्रामा करने। ड्रामे का पहला चरण था ये आरोप लगाना कि भाजपा करोड़ों खर्च कर के AAP विधायकों को तोड़ रही है। नेताओं ने अलग-अलग आँकड़े दिए, अंत में जाकर 800 करोड़ रुपए वाला आरोप सेटल हुआ। अब अरविंद केजरीवाल पूछ रहे हैं कि क्या ये रुपए पीएम केयर्स से आएँगे? आरोप लगाने के बाद ‘ऑपरेशन लोटस’ में फेल करने का ड्रामा शुरू हो गया।

इस नाम का कोई ऑपरेशन है भी या नहीं, ये खुद भाजपा को नहीं पता होगा। लेकिन, मीडिया ने कुछ राज्यों में सरकार बदलने के कारण इसे यही नाम दे दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने विधायकों की बैठक बुला ली। खबर दौड़ाई गई कि कुछ विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। फिर बैठक में 9 विधायक गायब थे, जिनमें से मनीष सिसोदिया हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। बताया गया कि कोई विधायक गायब नहीं है, फोन पर उनसे बात हुई है।

किसने विधायकों को खरीदने की कोशिश की? AAP की तरफ से कोई नाम नहीं बताया गया है। किन नंबरों से विधायकों को फोन कॉल आए? इस पर कुछ भी नहीं बताया गया है। किस भाजपा नेता ने लालच दिया? किसी का नाम नहीं लिया गया है। कहीं ऐसा तो नहीं कि अरविंद केजरीवाल खुद अपने लोगों को ‘भाजपा का एजेंट’ बना कर अपने ही विधायकों को फोन कॉल करवा रहे हों? तभी जुबानी हमले ही सिर्फ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहीं कोई शिकायत दी है विधायकों को मिल रही तथाकथित धमकी या लालच को लेकर? कहीं कोई FIR दर्ज कराई है? कोई ऑडियो/वीडियो/स्क्रीनशॉट जारी किया है?

अब राजनीति देखिए। मनीष सिसोदिया की तो बात ही नहीं हो रही। बात हो रही है भाजपा की, भाजपा के ऑफर की, अरविंद केजरीवाल और AAP के आरोपों की, विधायकों के बैठक की, तथाकथित ‘ऑपरेशन लोटस’ के फेल होने की और भाजपा द्वारा आरोपों के दिए जा रहे जवाब की। मनीष सिसोदिया छोड़िए, इस शराब घोटाले की ही बात नहीं हो रही। इसे पूरे परिदृश्य से गायब करने के लिए ही तो सारा ड्रामा रचा गया था।

बात शराब घोटाले की थी, अब चर्चा महात्मा गाँधी के राजघाट पर AAP विधायकों के दौरे और फिर वहाँ भाजपा नेताओं द्वारा गंगाजल के छिड़काव की हो रही है। अरविंद केजरीवाल के पक्ष में PR होगा। उन्हें ‘चाणक्य’ बताया जाएगा, जैसे महाराष्ट्र में NCP सुप्रीमो शरद पवार को बताया गया था। ‘केजरीवाल ने अपने विधायकों को एकजुट रखा’ – ये बता कर उनकी छवि चमकाई जाएगी। वैसे भी नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्षी चेहरों में वो खुद को शामिल कराना चाह ही रहे हैं।

तो बधाई हो! राजनीति का एक नया चाणक्य पैदा हो गया है, जिसने मीडिया की नज़र में भाजपा को फेल कर दिया। विधायक गायब होंगे, फिर वापस आएँगे – बस अरविंद केजरीवाल बन गए ‘चाणक्य’। अब 800 करोड़ बोलने के लिए एक भी पैसा थोड़े न लगता है। आँकड़ा लिया, आरोप लगा दिया। भाजपा आरोप का जवाब देगी। शराब घोटाला जनता की नज़र से हट जाएगा। फिर पुरानी शराब नीति लागू हो जाएगी 1 सितंबर से। सब कोई सब कुछ भूल जाएगा। जाँच चलती रहेगी।

अब तेजस्वी यादव पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, जमीन के बदले 1458 लोगों को दी गई थी नौकरी, CBI को मिले अहम सबूत: रिपोर्ट

लैंड फॉर जॉब्स यानी जमीन के बदले नौकरी घोटाले में राजद (RJD) नेताओं के घर बुधवार को हुई सीबीआई (CBI) की छापेमारी के बाद बिहार (Bihar) की सियासत गरमा गई है। इस बड़े घोटाले से जुड़ी एक और रिपोर्ट सामने आयी है। इस रिपोर्ट में जमीन देकर नौकरी लेने के मामले में 1458 उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं।

न्यूज 18 ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि इस घोटाले से संबंधित सीबीआई को बेहद महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। ये सबूत एक हार्ड डिस्क में हैं। बताया जा रहा है कि इस हार्ड डिस्क में उन 1458 लोगों की सूची है, जिन्होंने कथित रूप से रेलवे में नौकरी करने के बदले तत्कालीन रेलमंत्री लालू यादव (Lalu Yadav) के परिवार के लोगों को जमीन दे दी थी।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि यह पूरी सूची लालू यादव के बेटे और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने तैयार की थी। तेजस्वी के खिलाफ भी सीबीआई के पास कई ठोस सबूत होने की बात कही जा रही है। ऐसे में अब उन पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीबीआई ने अब तक इस सूची के 16 लोगों का वेरिफिकेशन भी किया है और ये सभी सही पाए गए हैं। इसलिए, सीबीआई आगे बढ़ते हुए इस हार्ड डिस्क के बाकी नामों की भी जाँच कर रही है।

न्यूज 18 ने दावा किया है कि पूर्व रेल मंत्री लालू यादव के तत्कालीन ओएसडी भोला यादव ने सीबीआई की पूछताछ में इस बात का भी खुलासा किया है कि फर्जी दस्तावेज होने के बाद भी कई उम्मीदवारों को रेलवे में नौकरी दी गई थी। इन सबके बदले उम्मीदवारों ने लालू प्रसाद यादव के परिवार को अपनी जमीन ‘उपहार’ में दे दी थी।

रिपब्लिक वर्ल्ड ने भी अपनी एक रिपोर्ट में इस घोटाले को लेकर दावा किया है कि कुछ दस्तावेज उसके सामने आए हैं। इन दस्तावेजों में लाभार्थी के रूप में लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के हस्ताक्षर हैं। वहीं, गवाह के रूप में लालू यादव के पूर्व ओएसडी भोला यादव के हस्ताक्षर हैं। भोला यादव को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

गौरतलब है कि यह पूरा घोटाला यूपीए-1 के समय का है। यूपीए-1 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और लालू यादव के पास रेल मंत्रालय था। अपने मंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने लोगों को जमीन के बदले रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में ‘ग्रुप डी’ की नौकरियाँ दीं थीं।

लालू परिवार को हासिल हुई थी 1 लाख वर्ग फुट से अधिक जमीन

इस घोटाले में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है, “जाँच में पता चला है कि पटना में स्थित लगभग 1,05,292 वर्ग फुट जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों द्वारा अधिग्रहित की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि भूमि हस्तांतरण के ज्यादातर मामलों में विक्रेताओं को भुगतान नकद में दिखाया गया था। मौजूदा सर्किल रेट के मुताबिक जमीन की मौजूदा करीब 4.39 करोड़ रुपए है।”

बता दें कि इस घोटाले की जाँच में सीबीआई ने 24 अगस्त को राजद के चार नेताओं के घरों पर छापेमारी की थी। यह छापेमारी राजद के एमएलसी सुनील सिंह, राज्यसभा सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय के ठिकानों पर हुई थी।

फटा नोट नहीं लिया तो नदीम ने डिलीवरी बॉय को पीठ में मार दी गोली, भाई नईम ने भी की थी गाली-गलौज: अस्पताल में भर्ती

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में एक पिज्जा डिलीवरी बॉय को नदीम नामक युवक ने आधी रात को इसलिए गोली मार दी, क्योंकि डिलीवरी बॉय ने उससे 200 रुपए का फटा नोट लेने से मना कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये घटना शाहजहाँपुर सिटी के चौक कोतवाली क्षेत्र की बताई जा रही है। पीड़ित युवक टाउन हॉल (Town Hall) के विलंका कैफे (Vilanka Cafe) में डिलीवरी बॉय का काम करता हैं। आरोपित नदीम नामक युवक के घर पिज्जा डिलीवरी बॉय एक ऑर्डर की डिलीवरी देने पहुँचा था।

उक्त डिलीवरी बॉय का नाम सचिन कुमार कश्यप बताया जा रहा है, जो अपने दोस्त ऋतिक के साथ डिलीवरी देने पहुँचा था। आरोपी नदीम जलालनगर का निवासी बताया जा रहा है। ये घटना बुधवार (24 अगस्त, 2022) की रात को करीब 12 के आस-पास घटित हुई। बताया यह भी जा रहा है कि नदीम के साथ उसका भाई नईम भी मौजूद था।

200₹ का फटा नोट नहीं लेने पर मारी गोली

डिलीवरी बॉय सचिन के साथी ऋतिक ने बताया कि सचिन को डिलीवरी के 197 रुपए लेने थे। नदीम ने उसे 200 रुपए का फटा नोट दे दिया। फटा नोट लेने से जब उसने इनकार किया तो नदीम व उसका भाई नईम भड़क गए। दोनों गाली-गलौज करने लगे। इस पर देख सचिन ने विरोध किया। इसके बाद नदीम ने सचिन की पीठ में गोली मार दी।

वहीं इस दौरान किसी तरह ऋतिक बाल-बाल बच निकला। फायरिंग के बात दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच कर घायल युवक को राजकीय मेडिकल कॉलेज भिजवा दिया। हालाँकि, उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बरेली रेफर कर दिया गया है। इस मामले में प्रभारी निरीक्षक अमित पांडेय ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कई जगह दबिश दी गई हैं और आरोपितों की तलाश जारी हैं।

अमित बनकर अग्निवीर बनने पहुँचा ताहिर खान, सेना को हुआ शक तो खुली पोल: उत्तराखंड में हो रही थी बहाली, फर्जी नाम से बना रखे थे सारे डॉक्यूमेंट

उत्तराखंड (Uttarakhand) में इन दिनों अग्निवीरों की भर्ती की जा रही है। भर्ती के लिए बड़ी संख्या में अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में युवा पहुँच रहे हैं। इसी बीच खबर है कि कुमाऊँ रेजिमेंट सेंटर (KRC) मुख्यालय के सोमनाथ ग्राउंड से पुलिस ने अमित बनकर अग्निवीर भर्ती में पहुँचे ताहिर खान को गिरफ्तार किया है।

उत्तराखंड के रानीखेत में चल रही अग्निवीर भर्ती परीक्षा में ताहिर पहचान बदलकर आया था। उसके एडमिट कार्ड पर अमित नाम दर्ज था। शक होने पर जब उसके दस्तावेज चेक किए गए तो वे फर्जी निकले। ताहिर को गिरफ्तार कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

सेना की जाँच में सामने आया है कि ताहिर खान यूपी के बुलंदशहर के सिकंदराबाद के कोकर का रहने वाला है। उसने न केवल हाई स्कूल का फर्जी प्रमाण-पत्र बनवा रखा था, बल्कि नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर के पते पर अपना फर्जी एड्रेस प्रूफ, जाति प्रमाण-पत्र और आधार कार्ड भी बनवाया था। उसने भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन में अपना नाम अमित लिखवाया हुआ था। यही नहीं ताहिर ने तय समय में 1600 मीटर की दौड़ भी पूरी कर ली थी। जब दस्तावेजों का सत्यापन हुआ तो सेना के अधिकारियों आगे ताहिर ने सच कबूल कर लिया। ताहिर के पकड़े जाने के बाद हल्द्वानी प्रशासन की भूमिका संदेह के घेर में आ गई है कि आखिर कैसे आरोपित ने फर्जी एड्रेस प्रूफ, आधार कार्ड बनवाया।

सीओ तिलक राम वर्मा ने बताया कि ताहिर खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 467, 468, 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं, हल्द्वानी के एसडीएम ने बताया कि ताहिर ने रेलवे बाजार के पते पर जाली दस्तावेजों के माध्यम से अपना प्रमाण-पत्र तैयार करवाया था। यहाँ भी उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि इसके पीछे एक सिंडिकेट हो सकता है।

‘देशभक्त बनता है, तेरा कन्हैया लाल वाला हाल होगा’: अब मुजफ्फरनगर के टेलर को मिली धमकी, कहा- भाग सकता है तो भाग, पर बचेगा नहीं

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar, Uttar pradesh) में एक हिंदू टेलर को उदयपुर के कन्हैया लाल जैसा अंजाम भुगतने की धमकी दी गई है। उसकी दुकान में धमकी भरा पत्र मिला है। इसमें लिखा है, “तू बहुत बड़ा देशभक्त बनता है। नूपुर शर्मा तो बहाना होगा, कन्हैया की तरह निशाना होगा। बचेगा नहीं, भाग सकता है तो भाग।”

इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पहुँची और जाँच-पड़ताल के बाद अज्ञात शख्स के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, धमकी भरा पत्र मिलने के बाद से टेलर और आसपास के अन्य दुकानदारों में दहशत का माहौल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शामली रोड स्थित गोशाला मार्केट में नरेन्द्र कुमार सैनी की अक्षय टेलर्स के नाम से दुकान है। बुधवार (24 अगस्त 2022) की सुबह जब नरेन्द्र ने अपनी दुकान खोली तो उन्हें अंदर एक पत्र पड़ा मिला। पत्र में लाल रंग से धमकी लिखी गई थी।

इसके बाद नरेन्द्र ने पुलिस को इस मामले की जानकारी दी। धमकी भरा पत्र फेंकने वाले का अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। मुजफ्फरनगर पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। सम्बन्धित धाराओं में मामला दर्ज कर पुलिस जाँच में जुट गई है।

पत्र मिलने के बाद से सैनी घबरा हुए हैं। उन्होंने किसी से रंजिश होने की बात से इनकार किया है। नरेन्द्र ने बताया कि वह न तो किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और ना ही नूपुर शर्मा प्रकरण को लेकर उन्होंने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर कभी किसी तरह की टिप्पणी की है। इसके बावजूद किसने उन्हें धमकी दी है, यह समझ से परे है।

सीओ सिटी कुलदीप सिंह ने कहा, “मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस मामले की जाँच की जा रही है। शुरुआती जाँच में यह मामला किसी की शरारत लग रहा है।” पुलिस ने इस क्षेत्र में लगे सीसीटीवी की मदद से आरोपित का पता लगाना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल की दिन-दहाड़े गला काटकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। कन्हैया लाल को मिल रही धमकियों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने के कारण राजस्थान पुलिस की काफी आलोचना हुई थी।

‘शराब माफिया का साथ देने वालों ने महात्मा गाँधी की समाधि को भ्रष्ट किया’: विधायकों संग राजघाट पहुँचे केजरीवाल, BJP ने गंगाजल छिड़क किया ‘पवित्र’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर गुरुवार (25 अगस्त, 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों की बैठक हुई। इसके बाद केजरीवाल अपने विधायकों के साथ महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) की समाधि राजघाट पहुँचे। इसे लेकर बीजेपी ने उन पर निशाना साधा है। भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने ऐलान किया पार्टी के कार्यकर्ता राजघाट को पवित्र करने के लिए वहाँ गंगाजल छिड़केंगे। इसके बाद नेताओं संग पहुँच कर उन्होंने राजघाट पर गंगाजल छिड़का।

उन्होंने केजरीवाल को टैग करते हुए ट्वीट किया, “कार्यकर्ताओं ने राजघाट के प्रांगण को गंगा जल छिड़क कर शुद्ध किया। भ्रष्ट दिल्ली के मुख्यमंत्री ने आज अपने शराबी कदम वहाँ रखकर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की आत्मा को बड़ा कष्ट पहुँचाया होगा।”

प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने AAP के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा AAP के 40 विधायकों को 20-20 करोड़ रुपए की पेशकश कर उनकी खरीद-फरोख्त की कोशिश नहीं कर रही है। अगर हमें आप के 50 विधायक मिल भी गए तो हम अपनी सरकार नहीं बना पाएँगे, तो यह सब झूठ है।”

उन्होंने आगे कहा कि केजरीवाल ने इस मुद्दे को मोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति पर जवाब देने की बजाए सीएम केजरीवाल ने भाजपा खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए। भाजपा सांसद ने कहा, “केजरीवाल फिल्में देख रहे होंगे और स्क्रिप्ट बना रहे होंगे। उनका आरोप है कि बीजेपी नेता उन्हें धमका रहे हैं, लेकिन वह उनके नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं। वह दावा करते हैं कि उनके विधायक गायब हैं, इसके बावजूद वह उनका नाम नहीं लेगा। अगर वह हमें उन विधायकों के नाम बताते जो लापता हैं, तो हम उनकी तलाश करते।”

भाजपा नेता ने कहा, “अरविंद केजरीवाल वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने अन्नाजी को धोखा दिया। वह विकास पर बहुत ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इसलिए उनके सरकारी आवास में 21 करोड़ रुपए का एक स्विमिंग पूल मिला है। वह पीते नहीं हैं, लेकिन हमारे बच्चों को पिलाते हैं। वह सुबह 3 बजे तक रेस्टॉरेंट खोलने की अनुमति देते हैं। इन सबके बावजूद ऐसा लगता है कि वह एक अच्छे नेता हैं। वह एक देशभक्त भी हैं, जो सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते हैं और पाकिस्तान में उसकी प्रशंसा की जाती है। यही नहीं उनके सभी विधायक निजी अस्पतालों में इलाज तक कराते हैं।”

केजरीवाल और सिसोदिया पर हमला जारी रखते हुए भाजपा नेता ने कहा कि वे जो भी नाटक कर सकते हैं, कर लें। एक-दूसरे को ऑस्कर के लिए नोमिनेट भी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें जेल जाना होगा। प्रवेश ने कहा, “मनीष सिसोदिया अच्छी तरह जानते हैं कि उन्होंने फाइलों पर हस्ताक्षर किए हैं।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल के आवास पर गुरुवार (25 अगस्त, 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों की बैठक हुई। इसमें AAP के 9 विधायक गायब रहे। AAP विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा, “दिल्ली में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ फेल। आज हुई बैठक में 62 में से 53 विधायक मौजूद थे। स्पीकर देश से बाहर हैं और मनीष सिसोदिया हिमाचल में हैं। सीएम ने अन्य विधायकों से फोन पर बात की और सभी ने कहा कि वे अंतिम साँस तक सीएम केजरीवाल के साथ हैं।”

ऋतिक ने लैपटॉप में दिखाई कंगना की ‘बढ़िया-बढ़िया’ तस्वीरें, सुनाई कहानी: फिल्म समीक्षक का दावा, कहा – समय आने पर इसका भी रिव्यू करूँगा

कमाल राशिद खान (KRK) अपने बयानों को लेकर आए दिन चर्चा में बने रहते हैं। उनके बयान कभी फिल्मों को लेकर होते हैं तो कभी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों पर। केआरके ने अब ऋतिक रोशन और कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को लेकर नया दावा किया है।

दरअसल, ऋतिक रोशन (Hrithik Roshan) और सैफ अली खान स्टारर फिल्म ‘विक्रम वेधा’ (Vikram Vedha) का टीजर रिलीज हो चुका है। इस टीजर के रिव्यू को लेकर केआरके ने एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था।

इस वीडियो में केआरके यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “टीजर पर आते हैं, सैफ और ऋतिक आमने-सामने बैठे हैं और ऋतिक कहता है – एक कहानी सुनाऊँ सर, सब्र और ध्यान दोनों से सुनिएगा।” इसके बाद केआरके आगे कहते हैं “क्या ऋतिक बाबू, झूठी-झूठी कहानी सुना रहे हो। अरे यार, कभी सच्ची वाली कहानी भी सुनाओ अपनी और कंगना वाली।”

ऋतिक रोशन से हुई अपनी मुलाकात को लेकर बताते हुए केआरके इस वीडियो में आगे कहते हैं “अरे अरे रे, मैं तो भूल ही गया। आपने तो मुझे अपने घर पर बैठाकर ये पूरी कहानी सुनाई थी और लैपटॉप खोलकर उसमें बहुत सारी बढ़िया-बढ़िया फोटोज भी दिखाई थी। इस बात का रिव्यू भी मैं जरूर करूँगा लेकिन सही वक्त आने पर।”

गौरतलब है कि साल 2013 में कंगना रनौत और ऋतिक रोशन स्टारर ‘कृष 3’ रिलीज हुई थी। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ऋतिक और कंगना के अफेयर को लेकर चर्चाएं जोरों पर थीं। इसके कुछ दिनों बाद ही इन दोनों के ब्रेकअप की खबरें भी सामने आना शुरू हो गईं थीं।

हालाँकि, तमाम बातों के बीच कंगना और ऋतिक दोनों ने ही चुप्पी बनाए रखी थी। ऐसा कहा जाता है कि कंगना ऋतिक से शादी करना चाहतीं थीं। लेकिन, साल 2016 में एक इंटरव्यू के दौरान कंगना रनौत ने ऋतिक रोशन को पूर्व बॉयफ्रेंड बताया जिसके बाद न केवल दोनों के रिश्तों की बात सामने आयी बल्कि विवाद भी शुरू हो गया था।

‘जो धर्म को ललकारेगा उसे उसकी ही भाषा में जवाब देगा हिंदू’: टी राजा सिंह फिर से गिरफ्तार, कहा- यह धर्मयुद्ध है, अब हिंदू पीछे नहीं हटेगा

हैदराबाद के गोशामहल (Goshamahal, Hyderabad) से भाजपा (BJP) के निलंबित विधायक ठाकुर राजा सिंह (Thakur Raja Singh) को तेलंगाना पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया है।

बुधवार की रात को ऑपइंडिया को भेजे एक वीडियो में राजा सिंह ने कहा था, “मेरी गिरफ्तारी के लिए मुस्लिमों ने हैदराबाद प्रशासन को शुक्रवार तक का समय दिया है और कुछ लोगों ने इसके लिए मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की है।। संभव है कि मुस्लिमों को खुश करने के लिए हैदराबाद पुलिस फिर से मुझे गिरफ्तार कर सकती है।”

उधर हैदराबाद पुलिस के एक IPS अधिकारी का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कह रहा है, “मुहम्मद सिर्फ मुस्लिमों के नहीं, सबके प्रोफेट हैं। हम पुलिस वाले उसको (राजा सिंह की गिरफ्तारी को) Ego पर ले रहे हैं। उसे गिरफ्तार करेंगे।”

पुलिस अधिकारी खुद को मुस्लिमों के साथ बताते हुए आगे कहता है, “हम भी इस प्रोटेस्ट में साथ हैं। अपने पीसफुल प्रोटेस्ट के लिए परमिशन नहीं लिया, क्योंकि वो आपकी दिल की तकलीफ थी। ये सबका प्रोटेस्ट है। इसलिए आपका (मुस्लिमों का) साथ दिया और अभी भी आपका साथ देंगे। हम पर भरोसा रखो.. हम जो करेेंगे आप आकर देख लीजिए, फिर भी आपको भरोसा ना आए तो आप आगे जो चाहें करें।”

उधर, विधायक की गिरफ्तारी पर तेलंगाना पुलिस ने कहा, “राजा सिंह को पीडी एक्ट (Preventive Detention Act) के तहत हिरासत में लिया गया। रिकॉर्ड बताते हैं कि उसके खिलाफ दर्ज 101 आपराधिक मामलों में से वह 18 सांप्रदायिक अपराधों में शामिल था। मंगलहाट पुलिस ने उस पर पीडी के आदेश को अमल में लाया, उसे सेंट्रल जेल, चेरियापल्ली में बंद किया जा रहा है।”

बता देें कि पीडी एक्ट एक ऐसा कानून है, जिसके तहत पुलिस किसी को आदतन और कुख्यात अपराधी बताकर एक साल तक के लिए जेल में बंद रख सकती है। इस कानून का सबसे विवादास्पद हिस्सा वह है, जिसमें इस ऐक्ट के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 22 (1) और 22 (2) के तहत मिला संरक्षण उस व्यक्ति को नहीं मिल पाएगा।

इसके पहले राजा सिंह को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें बेल मिल गई थी, जिसका मुस्लिमों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध किया जा रहा है। वहीं, राजा सिंह अपनी गिरफ्तारी की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी।

ठाकुर राजा सिंह ने गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “मुझे सूचना मिली है कि मेरे पुराने केसों को जोड़कर मुझे परेशान कर सकती है पुलिस। कल मुख्यमंत्री कार्यालय में एक मीटिंग हुई और मुख्यमंत्री जी को भी अब Ego आ गया कि किसी भी हालत में राजा सिंह को जेल में डाला जाए या तड़ीपार किया जाए।”

वीडियो में विधायक सिंह ने आगे कहा, “मैं मुख्यमंत्री जी को बताना चाहूँगा कि ना हम गोली से डरते हैं, ना हम फाँसी से डरते हैं, ना ही हम किसी जेल से डरते हैं। ये धर्मयुद्ध है। कोई हमारे भगवान को गाली दे, ये हमें बर्दाश्त नहीं। जो धर्म को ललकारेगा, जिस भाषा में वो समझेगा उस भाषा में राजा सिंह ही नहीं, भारत का हर हिंदू उस दुश्मन का जवाब देगा।”

कॉन्ग्रेस नेता और कट्टरपंथियों का सरकार पर दबाव

उधर इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी में विधायक राजा सिंह को जमानत मिलने के बाद गुरुवार (25 अगस्त 2022) को भी हैदराबाद में मुस्लिमों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। मुस्लिमों के एक समूह ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर विधायक को गिरफ्तार करने का दबाव डाला।

इसके पहले मंगलवार को उन्हें जमानत मिलने के बाद शहर के शालीबांदा में तो पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़प हुई। इस दौरान ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। पुलिस वैन में भी तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा बाजारों से दुकानें जबरन बंद कराने की, राजा सिंह के पोस्टर्स पर चप्पल मारने की, उनका पुतला जलाने की घटना भी प्रकाश में आई है।

राजा सिंह के बयान पर तेलंगाना कॉन्ग्रेस के सचिव राशिद खान ने आग लगाने की बात कही थी। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें राशिद खान को अल्लाह हू अकबर, नारा-ए-तकबीर, सर तन से जुदा नारे लगाने वाली भीड़ का समर्थन करते गया।

कथित पैगंबर पर राजा सिंह की टिप्पणी

बता दें कि उल्लेखनीय है कि सोमवार (22 अगस्त 2022) को ठाकुर राजा सिंह ने मुनव्वर फारूकी के विरुद्ध एक वीडियो बनाया था। इसमें उन्होंने इस्लाम पर बात करते हुए एक बुजुर्ग पर बात की थी, जिस पर मुस्लिमों ने कहा कि वो पैगंबर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी है। इसके बाद शहर भर में प्रदर्शन हुए। मंगलवार सुबह पुलिस ने टी राजा को गिरफ्तार कर लिया था।

उधर उसी दिन दोपहर में बीजेपी ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड किया। राजा सिंह को जब कोर्ट में पेश किया गया तो कोर्ट ने उन्हें 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेजा। हालाँकि, अगले दिन उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

वो मुगल मर्दिनी रानी, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी के बाद मराठा साम्राज्य को सँभाला; औरंगजेब को बार-बार चटाई धूलः पर्दे पर आएगी ताराबाई की कहानी

मुग़ल आक्रांताओं में सबसे क्रूर शासक माने जाने वाले औरंगजेब के सम्पूर्ण भारत जीतने के सपने के बीच दीवार बनी रानी ताराबाई पर मराठी फिल्म बनने जा रही है। इसकी शूटिंग मंगलवार (23 अगस्त, 2022) से शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि यह फिल्म औरंगजेब के अत्याचारों का काला चिट्ठा खोलेगी। मराठा साम्राज्य की महारानी ताराबाई के इतिहास को फिल्म में दिखाया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म की रिलीज डेट को लेकर तो निर्माताओं ने अभी स्पष्ट बात नहीं की है। लेकिन फिल्म को 2023 में रिलीज कर दिया जाएगा, ऐसी खबरें सामने आ रही है। ‘रानी ताराबाई’ के जीवन पर बनी इस फिल्म का नाम ‘मोगल मर्दिनी छत्रपति ताराराणी’ रखा गया है। फिल्म में रानी ताराबाई का किरदार सोनाली कुलकर्णी निभाने वाली हैं।

रानी ताराबाई का इतिहास

आपने अक्सर भारत के उन वीर योद्धाओं के बारे में सुना होगा, जिन्होंने राष्ट्र और धर्म के लिए विदेशी आक्रांताओं को धूल चटाई। इस सूची में सम्राट पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप, छत्रपती शिवाजी महाराज और पेशवा बाजीराव जैसे वीर सहित कई नाम शामिल हैं। इन सबके बारे में आप सभी जानते होंगे, लेकिन आप में से ज्यादातर लोग शायद मराठा साम्राज्य की वीरांगना ‘महारानी ताराबाई’ के इतिहास से परिचित नहीं होंगे।

स्टोरी टाइम्स’ में छपे एक लेख के मुताबिक, रानी ताराबाई ने अपनी वीरता और कौशल से मराठा साम्राज्य को मुगल आक्रांत औरंगजेब से कई सालों तक बचाकर रखा। रानी ताराबाई का जन्म 1675 में हुआ था। वो छत्रपति शिवाजी महाराज के सरसेनापति हंबीरराव मोहिते की पुत्री थीं। इनका विवाह संभाजी महाराज के सौतेले भाई और शिवाजी महाराज के छोटे बेटे छत्रपति राजाराम महाराज से हुआ था।

सन् 1700 में मराठा छत्रपती राजाराम महाराज की मृत्यु के बाद ताराबाई ने अपने 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी द्वितीय का राज्याभिषेक करवाकर उन्हें मराठा साम्राज्य का महाराज घोषित किया। अपने पुत्र को राजगद्दी पर बैठाकर ताराबाई ने ही मराठा साम्राज्य को औरंगजेब और मुगलों से संरक्षित रखा। उन्होंने 1700 से 1707 ईस्वी तक औरंगजेब से सीधे लोहा लिया।

फोटो साभार: इंडिया टाइम्स

इन 7 सालों में ताराबाई लगातार मुगलों पर आक्रमण करती रहीं। वे सेना को उत्साहित करतीं और किले बदलती रहती। उन्होंने जनता और सेना का विश्वास जीतकर मराठों को बढ़ाना शुरू किया। इस दौरान ताराबाई ने औरंगजेब की नाक के नीचे से सूरत की तरफ से मुगलों के क्षेत्रों पर आक्रमण करना शुरू किया। औरंगजेब मरते दम तक ताराबाई से नहीं जीत पाया और 1707 में उसने दम तोड़ दिया।

‘पब्लिकेशन डिवीजन’ की पुस्तक ‘भारत की नारी रत्न‘ में इतिहासकारों के हवाले से जिक्र है, “वह मराठा रानी एक बाघिन के जैसी हैं। एक छोर से दूसरे छोर, एक किले से दूसरे किले तक दौड़ती रहती, सैनिकों की परेशानियों को भी वो अपना मानती हैं। असहनीय तेज धूप को सहती और भूमि पर ही सोती। अपने सिपाहियों का जोश बढ़ाती, मुगलों द्वारा कब्जा की गई सीमा में आक्रमण करने की रणनीति तैयार करती। उनकी सोच इतनी चौकस और निर्णय इतने अचूक होते थे कि युद्धक्षेत्र तथा दरबार दोनों ही जगहों पर कुशल योद्धा और अनुभवी राजनीतिज्ञ उसका सम्मान करते थे। शुरू में कमजोर दिखाई पड़ रहे मराठा आक्रमणों ने अब इतना जोर पकड़ लिया था की मुगल साम्राज्य की नींव हिल गई।”

आपको बताते चलें कि सन 1789 में छत्रपती शिवाजी महाराज के बड़े बेटे संभाजी महाराज और उनकी माता साईबाई की बेरहमी से हत्या करने के बाद औरंगजेब ने स्वराज (मराठा साम्राज्य का उपनाम) की राजधानी राजगढ़ पर हमला करवाया। जिसक लिए उसने 15000 सिपाहियों की फौज भेजी और उन्होंने इस किले पर कब्जा कर लिया।

8 वर्षों तक मुगलों से बचाकर रखा जिंजी किला

जिस समय मुगलों ने रायगढ़ पर कब्जा कर लिया था, तब वहाँ से ताराबाई और राजाराम महाराज सुरक्षित बच निकले थे। तब वे जिंजी किले आ पहुँचे, अब ये स्थान तमिलनाडु में है। दक्षिण में मराठा साम्राज्य का ये आखिरी किला था। इस पर भी मुगल कब्जा करना चाहते थे। इसके लिए मुगल सेनापति ज़ुल्फ़िकर अली खान ने 8 सालों तक संघर्ष किया।

बता दें कि ज़ुल्फ़िकर अली खान ने सितंबर 1690 में पहली बार जिंजी किले पर आक्रमण किया। वहीं राजाराम का स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण शासन को ताराबाई ने अपने हाथों में लिया। तब से लेकर जनवरी 1698 तक मुगल सेनापति इस किले को जीतने कोशिश करता और हर बार उसे पराजित होना पड़ता। ताराबाई ने अपने गढ़ के बचाने के साथ-साथ मुगलों को खदेड़ कर मराठा भूमि से भगा दिया था।

फोटो साभार: इंडिया टाइम्स

रानी ताराबाई के बारे में यह भी कहा जाता है कि वे गुरिल्ला युद्ध का बहुत प्रयोग करती थीं। वहीं उन्होंने औरंगजेब की रिश्वत नीति को भी अपनाया था। औरंगजेब शत्रु सेना के सेनापतियों को घूस देकर युद्ध में फायदा लेता था। इसके अलावा शाही सेना कि एक ओर तकनीक महारानी प्रयोग करती थीं। ताराबाई और उनके सेनापति दुश्मन साम्राज्य में घुसकर अपने टैक्स कलेक्टर नियुक्त करने लगे। इस तरह वे मुग़लों के इलाके से ही कर जोड़कर, मराठा धन में बढ़ोतरी कर रही थीं।

ताराबाई की वीरता के मुगल दरबारी भी थे कायल

‘बेटर इंडिया’ के एक आर्टिकल के मुताबिक महारानी ताराबाई की वीरता और युद्धनीति के मुगल भी कायल थे। मुगल सेना के एक अधिकारी भीमसेन ने ताराबाई को लेकर कहा, “अपने पति की तुलना में ताराबाई मजबूत शासक थीं। उन्होंने उस समय की परिस्थितियों को इतने अच्छे तरीके से नियंत्रित किया कि कोई मराठा नेता उनके आदेश के बिना कोई काम नहीं करता था।” बताते चलें कि वह तलवार की लड़ाई, तीरंदाजी, घुड़सवार सेना, सैन्य रणनीति, कूटनीति और राज्य के अन्य सभी विषयों में अच्छी तरह से निपूर्ण भी थी।

वहीं मुगल इतिहासकार खफी खान ने महारानी ताराबाई के बारे में लिखा, “मराठा अधिकारियों के दिलों पर उनका राज था। महारानी ताराबाई के संघर्ष, उनकी तमाम योजनाओं, उनके युद्ध अभियान और औरंगजेब के मरने तक उसकी मुग़ल फ़ौज को लगातार हराते रहने के कारण मराठों की शक्ति दिन प्रतिदिन बढ़ती ही चली गई।”

‘फिरोजपुर SSP ने बरती लापरवाही, पर्याप्त बल होने के बावजूद कानून-व्यवस्था में फेल’: PM मोदी की सुरक्षा चूक पर सुप्रीम कोर्ट, केंद्र को जाएगी जाँच रिपोर्ट

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे में की सुरक्षा में बड़ी चूक हुई थी। ये घटना 5 जनवरी, 2022 की है। तब राज्य में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस मामले में गुरुवार (25 अगस्त, 2022) को सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आया है।

इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय कमेटी द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध होने के बाद भी फिरोजपुर एसएसपी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में असफल रहे।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री के दौरे के लिए 2 घण्टे पहले मिली सूचना के बाद भी फिरोजपुर एसएसपी द्वारा जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं। इसलिए पुलिस को वीवीआईपी सुरक्षा के लिए बेहतर ट्रेनिंग की आवश्यकता है।

इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि जाँच रिपोर्ट में पीएम मोदी की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कुछ उपाय सुझाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट सरकार को यह रिपोर्ट भेजेगा, ताकि उचित कदम उठाए जा सकें।

इस पूरे मामले में, पंजाब भाजपा सचिव तजिंदर सिंह सरन ने कहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली सरकार ने अहंकार में भर कर पीएम मोदी की सुरक्षा प्रोटोकॉल का मजाक उड़ाया था। दोषी एसएसपी नहीं, बल्कि तत्कालीन साजिशकर्ता सीएम चन्नी हैं।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला 5 जनवरी, 2022 का है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक में भगत सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करनी थी। साथ ही पंजाब के ही फिरोजपुर में जनसभा को भी संबोधित करना था। इसके लिए पूरा रूट हेलीकॉप्टर द्वारा तय किया जाना था। लेकिन, मौसम खराब होने के कारण पीएम मोदी के काफिले को सड़क मार्ग से जाना पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को हुसैनीवाला पहुँचने में 2 घण्टे का समय लगने वाला था। इसके लिए, पंजाब डीजीपी ने सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद होने की पुष्टि भी की थी, जिसके बाद पीएम का काफिला फिरोजपुर के रास्ते हुसैनीवाला की ओर निकला था।

हालाँकि, इस रास्ते मे करीब 30 किलोमीटर पहले ही प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के काफिले को एक फ्लाई ओवर पर रोक लिया था। इस फ्लाईओवर पर ही पूरा काफिला 20 मिनट तक फंसा रहा। उनके इस काफिले में हुई रुकावट को सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानते हुए जाँच के आदेश दिए गए थे।