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लालू के करीबी सहित कई राजद नेताओं के ठिकानों पर CBI की छापेमारी, नौकरी के बदले जमीन घोटाले का मामला: स्पीकर के इस्तीफे से अटका बहुमत परीक्षण

इससे पहले विधानसभा सचिवालय की तरफ से जो नोटिस भेजा गया, उसे विजय सिन्हा ने लेने से इनकार कर दिया था। अब उन्होंने कहा है कि बहुमत का सम्मान करते हुए वो इस्तीफा दे रहे हैं।

केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने बुधवार (24 अगस्त, 2022) की सुबह बिहार की राजधानी पटना में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में राजद नेता अशफाक करीम, सुनील सिंह, सुबोध राय और फैयाज अहमद के आवास पर रेड मारी। राजद विधान पार्षद और बिस्कोमान (कोऑपरेटिव संस्था) पटना के अध्यक्ष सुनील सिंह ने अपने आवास पर सीबीआई की छापेमारी पर कहा, “यह जानबूझकर किया जा रहा है। इसका कोई मतलब नहीं है। वे यह सोचकर ऐसा कर रहे हैं कि डर से विधायक उनके पक्ष में आ जाएँगे।”

सुनील सिंह लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में में से एक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौकरी के बदले जमीन घोटाले के सिलसिले में पटना में राजद के पूर्व एमएलसी सुबोध राय और राजद सांसद फैयाज अहमद के आवास पर भी सीबीआई की छापेमारी चल रही है।

वहीं, बिहार विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आज (24 अगस्‍त, 2022) से शुरू होने जा रहा है। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष के अनुरोध पर विधानसभा स्पीकर विजय सिन्हा ने आज सुबह 11 बजे सदन का विशेष सत्र बुलाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार का बहुमत परीक्षण भी होना है। दूसरी तरफ, विधानसभा अध्‍यक्ष विजय सिन्‍हा (Vijay Sinha) ने सत्र बुलाने के बाद इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें जो नोटिस दिया गया है, वह नियमों और प्रावधान के खिलाफ है।

इससे पहले विधानसभा सचिवालय की तरफ से जो नोटिस भेजा गया, उसे विजय सिन्हा ने लेने से इनकार कर दिया था। अब उन्होंने कहा है कि बहुमत का सम्मान करते हुए वो इस्तीफा दे रहे हैं। इसके बाद उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी अध्यक्ष वाली कुर्सी पर बैठे।

गौरतलब है कि केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने पिछले महीने (27 जुलाई, 2022) बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पूर्व OSD भोला यादव को गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारी रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले को लेकर हुई थी। भोला यादव इस मामले में आरोपित था। वह 2004 से 2009 तक लालू यादव के ओएसडी रहे। लालू यादव उस वक्त केंद्रीय रेल मंत्री थे। उसी समय रेलवे भर्ती घोटाला हुआ था। आरोप है कि भोला यादव ही घोटाले का कथित सरगना है। भोला राजद से विधायक और विधान पार्षद भी रह चुका है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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