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‘अब शुरू होगा अन्ना का दौर’: तेलंगाना आए अमित शाह से मिले RRR के स्टार, फैन्स बोले- ये शुरुआत है, जूनियर NTR होंगे अगले CM

साउथ के मशहूर एक्टर्स में से एक जूनियर एनटीआर की हाल में हैदराबाद में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई। इसकी तस्वीरें अमित शाह ने अपने ट्विटर पर शेयर की। उन्होंने बताया कि जूनियर एनटीआर के साथ उनकी मुलाकात बहुत अच्छी रही।

शाह ने ट्वीट में लिखा, “एक बहुत ही प्रतिभाशाली अभिनेता और तेलुगु सिनेमा के रत्न, जूनियर एनटीआर के साथ हैदराबाद में अच्छी बातचीत हुई।”

जूनियर एनटीआर ने इस ट्वीट की प्रतिक्रिया में अमित शाह का धन्यवाद दिया और बताया कि उनको गृह मंत्री से मिलकर बहुत अच्छा लगा।

बता दें कि जूनियर एनटीआर साउथ के मशहूर हीरो में से एक हैं। उन्होंने हाल में आरआरआर जैसी सुपरहिट फिल्म दी है। इसके अलावा वह धार्मिक वेशभूषा के कारण भी चर्चा में रहते हैं। तेलंगाना चुनावों को नजदीक देख लोग अमित शाह के साथ उनकी तस्वीरों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वही साझा तस्वीरों को धड़ाधड़ लाइक मिल रहे हैं। खबर लिखने तक शाह द्वारा शेयर तस्वीरों को 65 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके थे।

कुछ लोगों एनटीआर की सभ्यता देख उनकी तारीफ कर रहे हैं। उन्हें तेलुगु सिनेमा और भारतीय सिनेमा का सितारा कह रहे हैं। ‘जय NTR- जय NTR’ लिख रहे हैं। तो कुछ लोग इसे राजनीति से जोड़ देख रहे हैं।  यूजर हैरानी से पूछ रहे हैं, “क्या जूनियर एनटीआर के राजनीति में आने के कोई चांस हैं?”

अरुण सिंह कहते हैं, “अगले मुख्यमंत्री जूनियर एनटीआर”

एक यूजर कहता है, “भारतीय राजनीति का नया दौर शुरू होने जा रहा है।” वहीं कुछ इसे कह रहे हैं ‘अन्ना का दौर शुरू होने वाला है। ‘

एक यूजर कहता है, “ये तो बस शुरुआत है। ये आदमी हमारी उम्मीदों से भी ऊँची उड़ान को भरेगा।”

करण लिखते हैं, “एक शेर दूसरे शेर से मिल रहा है।”

उल्लेखनीय है कि जूनियर एनटीआर टीडीपी संस्थापक दिवंगत एनटी रामाराव के पोते हैं। आखिरी बार वह चुनावों के समय 2009 में सक्रिय देखे गए थे। इसके बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। लेकिन अब अमित शाह और उनकी मुलाकात के बाद लोगों को लग रहा है कि आने वाले समय में वह बीजेपी का साथ देंगे।

UP में रोहिंग्या और उनके मददगारों की हो रही तलाश: रिपोर्ट में बताया- नकली दस्तावेजों से बने भारत के वोटर, ATS की पड़ताल से सामने आया फर्जीवाड़ा

बिहार की पटना पुलिस के बाद अब उत्तर प्रदेश ATS की लखनऊ यूनिट ने घुसपैठियों को लेकर अहम खुलासा किया है। एटीएस जाँच में रोहिंग्या मुस्लिमों का फर्जी मतदाता पहचान-पत्र बनवाने की बात सामने आई है। 

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक रोहिंग्या मुस्लिमों ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर वोटर कार्ड बनवा लिया है। इससे यह भारत के मतदाता बन गए हैं। इससे इनकी पहचान काफी मुश्किल हो गई है। इसका खुलासा तकरीबन एक साल पहले पकड़े गए रोहिंग्या से पूछताछ के दौरान हुआ। लखनऊ एटीएस ने इन घुसपैठियों के पास से भारत का फर्जी वोटर कार्ड बरामद किया था। इसके बाद अब प्रदेश भर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या की तलाश की जा रही है। उनका रिकॉर्ड निकाला जा रहा है, ताकि इन घुसपैठियों और उनके मददगारों की पहचान की जा सके।

उल्लेखनीय है कि जून 2021 में रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत लाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड नूर आलम को यूपी एटीएस ने साथी समेत गाजियाबाद के डासना से गिरफ्तार किया था। नूर आलम फर्जी दस्तावेजों पर रोहिंग्या को भारत लाता था। एटीएस ने आरोपितों के कब्जे से आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल और 70 हजार रुपए बरामद किया था।

नूर आलम से पहले 6 जनवरी 2021 को एटीएस ने उसके साले अजीजुल्लाह को पकड़ा था। अजीज फर्जी दस्तावेजों के सहारे बीते 20 साल से भारत में रह रहा था। वहीं 28 फरवरी 2021 को मोहम्मद फारूक और हसन को अलीगढ़ से गिरफ्तार करने के बाद फारूक के भाई को 1 मार्च को उन्नाव से गिरफ्तार किया गया था। शाहिद को फर्जी भारतीय दस्तावेजों और 5 लाख रुपए के साथ पकड़ा गया था। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि इन घुसपैठियों को प्रतिबंधित सिमी समर्थित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का संरक्षण प्राप्त है।

PFI की संलिप्तता हाल ही में बिहार से भी सामने आई है। पटना पुलिस की जाँच में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा अपने संगठन में भर्ती करने के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेशी घुसपैठियों का आधार कार्ड बनवाने की बात सामने आई थी। पटना पुलिस ने इस बात की भी आशंका जताई थी कि पीएफआई आधार कार्ड बनवाने के लिए फर्जी कागजात तैयार करवाने के साथ ही ऐसे तरीके अपना रहा है, जिससे घुसपैठियों की पहचान बेहद मुश्किल होगा। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट में इस कड़ी में बिहार के सीमांचल क्षेत्र खासतौर से किशनगंज, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, सुपौल और पूर्णिया जिलों को टारगेट करने की बात कही गई थी।

कर्नाटक: कॉन्ग्रेस कार्यालय के कोने-कोने में चिपकाए सावरकर के पोस्टर, पूर्व CM ने कहा था- कहीं भी लगाओ, पर मुस्लिम इलाके में नहीं

कर्नाटक के शिवमोगा से स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के बाद शुरू हुआ पोस्टर विवाद अभी थमा नहीं है। खबर है कि राज्य में जगह-जगह से सावरकर के पोस्टर फाड़े जाने की घटना के बाद अब कुछ लोगों ने विजयपुरा स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय में ही सावरकर के पोस्टर चिपका दिए। ये काम बीती रात हुआ।

सामने आई वीडियो में ऑफिस के कोने-कोने में सावरकर के पोस्टर लगे दिख रहे हैं। कोई जगह ऐसी नहीं है जहाँ ये पोस्टर न हों। नोटिस बोर्ड से लेकर खंबों तक और दीवारों से लेकर मुख्य द्वार तक जगह-जगह पोस्टर चिपके दिख रहे हैं।

सिद्धारमैया के बयान पर बवाल

बता दें कि इस तरह कॉन्ग्रेस कार्यालय पर सावरकर के पोस्टर कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया के विवादित बयान के जवाब में चिपकाए गए। कुछ दिन पहले टीपू सुल्तान और वीर सावरकर के पोस्टर पर विवाद बढ़ा तो कॉन्ग्रेस नेता ने टीपू सुल्तान का समर्थन करते हुए सावरकर का विरोध किया था।

सिद्धारमैया ने कहा था,

“उन्होंने (भाजपा ने) मुस्लिम इलाके में सावरकर की तस्वीर लगाने की कोशिश क्यों की? वो कोई भी पोस्टर, कहीं भी लगाएँ लेकिन मुस्लिम इलाके में ही क्यों?…और भाजपा को टीपू सुल्तान के पोस्टर से इनकार क्यों है?”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेसी नेता सिद्धारमैया अपने इस बयान के बाद लगातार निशाने पर हैं। उनके ऊपर कुछ दिन पहले अंडे फेंके गए थे और उनके विरोध में काले झंडे लहराते हुए ‘गो बैक सिद्धारमैया’ के नारे लगे थे। इन सबका इल्जाम उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर मढ़ा था।

इसके अलावा हाल में अपनी कोडागु यात्रा के दौरान जब वह एक मंदिर गए थे, तब भी ये बात सामने आई कि वो माँस खाकर मंदिर में भगवान के दर्शन को गए। इस पर भी काफी बवाल हुआ। मगर, कॉन्ग्रेस नेता ने गलती मानने की बजाय उसे ये कहकर सही ठहराया कि क्या भगवान बोलते हैं कि एक दिन पहले खाकर मंदिर जा सकते हैं या रात में खाकर सुबह जा सकते हैं।

मुस्लिम महिला ने कुरान जलाया, अशोक पर लगा दिया ईशनिंदा का आरोपः सैकड़ों की भीड़ ने घर घेरा, सर तन से जुदा के लगे नारे; पाकिस्तान के हैदराबाद का Video वायरल

पाकिस्तान के हैदराबाद में एक हिंदू युवक पर कुरान का अपमान करने का आरोप लगाकर उसे मारने की माँग की जा रही है। सामने आई वीडियोज में युवक के घर के बाहर सैंकड़ों की तादाद में खड़े कट्टरपंथियों को ‘सर तन से जुदा’ का नारा देते सुना जा सकता है। ये भीड़ युवक के घर में घुसकर उसको मारने की माँग कर रही थी और पुलिस से भी चहती थी कि वो हिंदू युवक को भीड़ को सौंपें।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंदू युवक की पहचान अशोक कुमार के तौर पर हुई है। वह हैदराबाद के सदर में राबिया सेंटर पर सफाईकर्मी का काम करता है। पुलिस ने उसके खिलाफ ईशनिंदा कानून की धारा 295 बी के तहत केस को दर्ज किया है। शिकायत देने वाला एक दुकानदार बिलाल अब्बासी है।

अब्बासी ने ही पुलिस में कहा कि सफाईकर्मी अशोक ने कुरान का अपमान किया। इसके बाद पुलिस सफाईकर्मी को पकड़ने उसके घर गई, लेकिन तब सैंकड़ों लोग सड़कों पर इकट्ठा हो गए। इन लोगों की माँग थी कि बस अशोक को उनके हाथ में सौंप दिया जाए। भीड़ का नारा था- ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा सर तन से जुद, सर तन से जुदा।’

हैदराबाद में बिगड़ते हालात को देखने के बाद पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज किया और आँसू गैस भी छोड़े। लेकिन भीड़ तितर-बितर होकर भी अशोक को मारने की माँग करती रही। इसके बाद पुलिस ने अशोक को गिरफ्तार कर लिया।

बताया जा रहा है कि वास्तविकता में एक मुस्लिम महिला ने कुरान की प्रति को जलाया था, अशोक ने नहीं। मगर हिंदू सफाईकर्मी से बिलाल अब्बासी की पहले से कोई लड़ाई थी। इसी के चलते अब्बासी ने अशोक पर ईशनिंदा जैसा गंभीर इल्जाम लगाया और हिंदू युवक समेत उसके पूरे परिवार को खतरे में डाल दिया।

बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने का एक ढंग यह भी है कि उन पर ईशनिंदा का इल्जाम लगा दिया जाए। इसके बाद क्या होता है, वो सब जानते ही हैं। कुछ को बेरहमी से सड़क पर मौत के घाट उतार दिया जाता है तो कुछ लोगों को अदालत के जज मौत की सजा सुना देते हैं।

सेंटर फॉर रिसर्च एंड सेक्योरिटीस स्टडीज जैसा थिंकटैंक बताता है कि 1947 से लेकर अब तक 1415 मामले हैं जब पाकिस्तान में ईशनिंदा के केस रिपोर्ट हुए। इनमें 18 महिलाएँ और 71 आदमियों को कानून ने मौत की सजा सुनाई। वहीं असली संख्या अनुमान से कही ज्यादा हो सकती है।

पाकिस्तान में ईशनिंदा के इल्जाम के अलावा अपहरण, हत्या, धर्मांतरण वो तरीके हैं जिनसे अल्पसंख्यकों को सताया जाता है।

लोगों ने CM नीतीश कुमार के काफिले पर बोला हमला: लाठी-डंडों से तोड़ डाली गाड़ियाँ, बरसाए पत्थर

बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले पर पथराव किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। घटना में तीन-चार गाड़ियों के शीशे टूट गए। पत्थरबाजी पटना जिले के गौरीचक थाना के सोहगी गाँव में हुई। सीएम सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के होने के बावजूद अज्ञात लोगों ने इस हमले को अंजाम दिया। घटना के वक्त नीतीश कुमार इस काफिले में नहीं थे।

जानकारी के मुताबिक, पटना-गया मेन रोड वाले जिस रास्ते से काफिला गुजर रहा था, वहाँ एक युवक की हत्या से नाराज लोग प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में उन्होंने काफिले को गुजरते देखा तो भीड़ और भड़क गई। सड़कों से पत्थर उठाकर काफिले पर फेंके जाने लगे। इस पथराव में गाड़ियाँ तो क्षतिग्रस्त हुई हीं, लेकिन साथ में कुछ लोग चोटिल भी हुए।

सोशल मीडिया पर पथराव की घटना की एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे भीड़ गाड़ियों को रोक उन पर पथराव कर रही है। कुछ लोग लाठी-डंडा लेकर वाहनों के शीशे तोड़ रहे हैं। वहीं अगल-बगल वाले रोकने की बजाय हल्ला मचा रहे हैं। वीडियो बनाने वाले को कहते सुना जा सकता है, “आज ये लोग तोड़ देंगे। ये सारी प्रशासन की गाड़ियाँ हैं।”

बता दें कि 22 अगस्त 2022 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निर्माणाधीन रबर डैम के निरीक्षण करने के लिए पहुँचना है। वहाँ वह जिले में सूखे की स्थिति पर होने वाली बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे। कथिततौर पर वह हेलीकॉप्टर से गया आते, इसलिए उन्हें लाने वाली गाड़ियों का काफिला एक दिन पहले वहाँ जा रहा था। हालाँकि रास्ते में ये घटना घटित हो गई। आक्रोशित लोगों ने काफिले को अपने निशाने पर ले लिया।

कमलनाथ के गढ़ में चल रहा ईसाई धर्मांतरण का खेल, लालच और धमकी के सहारे जाल फैला रहे मिशनरी: थाने पहुँचे जनजातीय समाज के लोग

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा जिले में ईसाई धर्मांतरण की खबर सामने आई है। छिंदवाड़ा के तामिया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कई गाँवो में धर्मांतरण का जाल फैलाया जा रहा है अब तक कई लोग इसके शिकार भी बन चुके हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले में ईसाई मिशनरी काफी सक्रिय है। मिशनरी के लोग गाँव-गाँव जाकर भोले-भाले जनजातीय समाज के लोगों को बहलाने-फुसलाने के साथ ही कई प्रकार के लालच देकर धर्मांतरण करा रहे हैं। साथ ही जो लोग धर्मांतरण से इनकार कर रहे हैं, उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है।

छिंदवाड़ा में धर्मांतरण कराए जाने को लेकर तामिया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गाँवों के करीब 60-70 लोगों ने तामिया थाना जाकर बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

धर्मांतरण को लेकर शिकायत दर्ज कराने वाले जनजातीय समुदाय के लोगों ने बताया है कि दमुआ के 12 नंबर में रहने वाले एक ईसाई व्यक्ति द्वारा ग्राम पंचायत बाराचोमडी, झापिया समेत आसपास के अन्य गाँवो में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया जा रहा है। तामिया थाने पहुँचे शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि प्रत्येक बुधवार जनजातीय समाज के लोगों को इलाज से लेकर पैसों समेत अन्य प्रकार का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब कमलनाथ के क्षेत्र में धर्मांतरण की खबर सामने आई है। ग्रामीण बताते हैं कि इससे पहले भी जिले में हो रहे धर्मांतरण को लेकर शिकायत दर्ज की गई है लेकिन किसी भी प्रकार के कार्रवाई नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनजातीय बहुल्य क्षेत्र तामिया, जुन्नारदेव, बिछुआ और हर्रई में पहले भी धर्मांतरण के मामले सामने आए हैं। इसी वर्ष अप्रैल में ही तामिया ब्लॉक के सांगाखेड़ा देलखारी में भी धर्मांतरण हुआ था जिसे लेकर हिंदूवादी संगठनों ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद, धर्मांतरित हुए जनजातियों ने वापस हिन्दू धर्म अपना लिया था।

सिख शिक्षिका का अपहरण के बाद धर्मांतरण, मुस्लिम से करा दिया निकाह: Pak पुलिस ने नहीं दर्ज की FIR, अब सड़क पर प्रदर्शन

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सिख टीचर को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कराने का मामला सामने आया। घटना 20 अगस्त 2022 की है। अब सिख समुदाय घटना के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है। पाकिस्तान के थाने के बाहर नारेबाजी की वीडियो सामने आई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दीना कौर नाम की सिख टीचर का अपहरण शनिवार को हुआ था। अगले दिन 21 अगस्त 2022 को परिवार को कहा गया कि उनकी बेटी का निकाह मुस्लिम से करवा दिया गया। परिवार फौरन पुलिस थाने पहुँचा, लेकिन पुलिस ने इस मामले पर गंभीरता से संज्ञान नहीं लिया। मामले में कोई एफआईआर न होने पर सिख भड़क गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। सिखों की माँग है कि जब तक उनकी लड़की वापस नहीं मिलती तब तक

भारत में भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इस घटना की निंदा की। सिरसा ने कहा, “एक परिवार कैसे चुपचाप अपनी बेटियों को जबरन धर्म परिवर्तन और भावनात्मक रूप से शोषण होते देख सकता है? यह बुनियादी मानवाधिकारों के खिलाफ है और हम पाकिस्तान के सिख भाइयों के समर्थन में खड़े हैं। मैं भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर जी से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करता हूँ। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इन बातों पर ध्यान नहीं दे रहे। सिखों की सुरक्षा की माँग को लेकर हम जो ट्वीट करते हैं वो भी इग्नोर किए जाते हैं।”

बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार लगातार होता आया है। मई में दो सिखों को पेशावर में मार दिया गया था, तब भारत में इसका जमकर विरोध हुआ था। इसके अलावा कभी ईसाइयों की लड़की तो कभी हिंदुओं की लड़कियों का जबरन धर्मांतरण पाकिस्तान में अब सामान्य हो गया है। आए दिन खबरें आती हैं जिनमें अपहरण, धर्मांतरण और मुस्लिम व्यक्ति से निकाह जैसी बात कॉमन होती हैं।

‘तुम सबके L@^$ काट के मुँह में खिला दूँगी’: 14 दिन के लिए कस्टडी में भेजी गई गालीबाज महिला, RWA बोला – फ्लैट खाली करो

नॉएडा में सिक्योरिटी गार्ड्स और बिहारियों को गंदी-गंदी गालियाँ बकने वाली महिला वकील भाव्या रॉय को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। साथ ही ‘रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA)’ ने फ्लैट के मालिक को उक्त गालीबाज महिला को निकाल बाहर करने के लिए भी कहा है। थाना सेक्टर-126 के तहत आने वाली जेपी विशटाउन सोसायटी के प्रबंधन ने जानकारी दी कि महिला कुछ ही दिन पहले यहाँ रहने आई थी।

महिला वहाँ किराए पर रहती है, इसीलिए फ्लैट के असली मालिक को उससे घर खाली कराने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि गेट खोलने में देर करने के बाद महिला ने भड़क कर सिक्योरिटी गार्ड्स को गंदी-गंदी गालियाँ सुनाई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। महिला के खिलाफ IPC (भारतीय दंड संहिता) की धाराओं 153-A (भाषा/नस्ल को लेकर अपमानजनक टिप्पणी), 323 (किसी को स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 504 (उकसाना), 505(2) (विभिन्न समुदायों में वैमनस्य पैदा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

वहीं सिक्योरिटी गार्ड अनूप कुमार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उक्त महिला वकील की गाड़ी के आगे एक और गाड़ी लगी थी, ऐसे में उन्होंने जाकर उससे कहा कि कुछ समय और लगेंगे तो वो भड़क गई। उन्होंने बताया कि महिला नशे में थी और उनकी गाली देते हुए उनकी वर्दी भी फाड़ डाली। गार्ड ने कहा कि हम गार्ड लोगों को भी इज्जत दी जानी चाहिए। भाव्या रॉय सोसाइटी में टॉवर-15 के फ्लैट संख्या 901 में रहती है। आरोप है कि उसने गार्ड को जान से मार डालने की धमकी भी दी।

नोएडा में महिला ने सिक्योरिटी गार्ड्स को दी भद्दी-भद्दी गालियाँ, वीडियो वायरल

महिला ने बिहारियों को लेकर भी अपशब्द का प्रयोग किया और कहा, “ये यहाँ जितने भी बिहारी हैं ना यहाँ, Behen*h&d इनको सँभालो।” थाना सेक्टर-126 में जेपी सोसाइटी की उक्त महिला को रविवार (21 अगस्त, 2022) को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। भाव्या रॉय ने गार्ड को धक्का भी मारा। गार्ड और उसके साथियों ने महिला से लाख आग्रह किया, उसने गाली देना बंद नहीं किया। महिला खुद की ही गाड़ी से पुलिस थाना गई और इस दौरान वो खुद ही ड्राइव भी कर रही थी।

वीडियो में महिला कहती है, “मैं तेरी $#ड फाड़ दूँगी। अबे भो%ड़ी के, तुम बहन%$द मेरी इज्जत करते हो? ये बोलेगा मेरे को माधर%$द? इसकी माँ की &त। तुमलोगों के टट्टे साले बड़े हो गए हैं, बहन%$द, तुम सबके लं%# काट के मुँह में खिला दूँगी भो%ड़ी के। This Shit Doesn’t Work. खाल खींच लूँगी इस माधर%$द की।” इस दौरान महिला ने अपनी जाँघ थपथपाते हुए हमला भी कर दिया। हालाँकि, इस दौरान गार्ड्स मिन्नतें करते रहें।

भारत ने अफगानिस्तान को भेजी मेडिकल सामग्रियों की 10वीं खेप, 5 लाख कोरोना वैक्सीन और कई जीवन रक्षक दवाएँ भी शामिल: अब तक भेजे 32 टन

कई मौकों पर विश्व समाज को ये देखने को मिला है कि भारत के लिए मानवीय संवेदनाएँ हमेशा ही सबसे ऊपर रहीं हैं। यही कारण है कि अपने पड़ोसी देशों से लेकर सुदूर देशों तक जहाँ भी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, वहाँ मदद के लिए भारत का हाथ जरूर पहुँच जाता है। हालिया उदाहरण अफगानिस्तान का है, जिसे भारत सरकार द्वारा चिकित्सा सहायता सामग्रियाँ भेजी गई है।

भारत सरकार द्वारा यह चिकित्सा सामग्री शनिवार (20 अगस्त, 2022) को काबुल के इंदिरा गाँधी हॉस्पिटल को सौंपी गई है। इसके सम्बन्ध में विदेश मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि भारत ने मानवीय सहायता के रूप में चिकित्सा सामग्री की 10वीं खेप भेजी है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) द्वारा की गई अपील के बाद से अब तक भारत ने 32 टन चिकित्सा सहायता सामग्री अफगानिस्तान के लोगों के लिए भेजी है। विदेश मंत्रालय द्वारा बताया गया है कि यह 10वीं चिकित्सा सहायता आपूर्ति थी, जिसमें आवश्यक जीवन रक्षक दवाएँ, टीबी रोधी दवाएँ और कोविड-19 (कोरोना वायरस) के टीकों की 5 लाख खुराक भी भेजी गई हैं।

भारत ने सबसे पहले बढ़ाया था सहायता का हाथ

उल्लेखनीय है कि जून के आखिरी सप्ताह में आए भूकंप और तेजी से फैले कोरोना संक्रमण के बाद अफगानिस्तान की हालत बेहद नाजुक हो गई थी। ऐसे में उसे मानवीय सहायता की आवश्यकता थी। तब भारत ने सबसे पहले सहायता का हाथ बढ़ाया था।

बता दें कि भारत सरकार अफगानिस्तान के मौजूदा हालातों को लेकर बेहद सजग है। अफगानिस्तान में भले ही तालिबान का शासन आ गया हो, लेकिन भारत ने वहाँ के आम लोगों को मानवीय मदद देना जारी रखा है। भारत ने इसी साल जून में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अपने दूतावास में एक “तकनीकी टीम” को तैनात करके अपनी राजनयिक उपस्थिति को एक बार फिर से स्थापित किया है।

यही नहीं, अफगानिस्तान के भारतीय दूतावास में अब कामकाज भी शुरू हो चुका है। ज्ञात हो जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था, तब काबुल स्थित भारतीय दूतावास को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया था। लेकिन, अब हालात सामान्य होते ही एक बार फिर भारतीय दूतावास में काम शुरू हो गया है।

‘दुर्भाग्य है, हमारी औरतें करवा चौथ पर छलनी देखती हैं’: राजस्थान में कॉन्ग्रेसी मंत्री ने हिंदू आस्था पर उठाया सवाल, लोगों ने पूछा- हिजाब या हलाल पर क्यों नहीं बोलते

राजस्थान की गहलोत सरकार में मंत्री गोविंद मेघवाल ने हिंदुओं के त्योहार करवाचौथ पर विवादित टिप्पणी की है। उनका कहना है कि करवाचौथ के मौके पर जो औरतें छलनी का प्रयोग करती हैं वो अंधविश्वास का शिकार हैं।

जानकारी के मुताबिक, गोविंद राम मेघवाल ने शनिवार (20 अगस्त 2022) रात जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में डिजीफेस्ट के कार्यक्रम में अपना यह बयान दिया। उन्होंने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के भाषण की तारीफ की और बोले,

“चीन में 80 फीसदी महिलाएँ काम करती हैं,अमेरिका में 50 फीसदी महिलाएँ काम करती हैं, इसलिए ये देश विज्ञान की दुनिया में जी रहे हैं। लेकिन हमारा दुर्भाग्य है कि हमारे यहाँ करवाचौथ पर महिलाएँ छलनी को देखती हैं।”

गोविंद मेघवाल ने आगे छलनी वाली रस्म को अंधविश्वास से जोड़ा और कहा कि यहाँ केवल जाति-धर्म के नाम पर लड़वाने का काम हो रहा है। इसके बाद वह महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ अंबेडकर का उदाहरण देते दिखे और बताया कि शिक्षा बहुत जरूरी है। शिक्षा के बिन बुद्धि नहीं आएगी और बिन बुद्धि के पैसा नहीं आएगा। जीवन पशु के बराबर हो जाएगा।

गोविंद मेघवाल के बयान पर बीजेपी भड़की

गोविंद मेघवाल ने भले ही अपने बयान को शिक्षा के साथ जोड़ बैलेंस किया हो, लेकिन उन्होंने अपने बयान में जो हिंदू आस्थान पर सवाल उठाए उससे भाजपा भड़क गई है। बीजेपी के प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कहा कि हिंदू आस्थाओं का मजाक उड़ाना कॉन्ग्रेस नेताओं की परंपरा बन गई है। मंत्री ने हिंदुओं की आस्थाओं का मजाक उड़ाया है।

करवाचौथ पर टिप्पणी सुन यूजर्स ने उठाए सवाल

वहीं सोशल मीडिया पर गोविंद मेघवाल का बयान सुन लोग उनकी क्लास लगा रहे हैं। लोगों की माँग है कि गोविंद माफी माँगे। एक यूजर ने लिखा, “गजब! गोविंद रामजी को हिंदू रीति-रिवाज से भी तकलीफ है। वैसे इनकी जानकारी के लिए भारत में लाखों महिलाएँ हैं जो करवा चौथ, हिंदू संस्कृति निभाकर भी ऊँचे पदों पर आसीन है। अपनी सोच बदलिए। कभी दूसरे धर्म भी ज्ञान दीजिए जो आपका खास वोट बैंक भी है या डर लगता है।”

गौतम अग्रवाल ने कहा, “फिर से कॉन्ग्रेस नेता ने हिंदू धर्म और उसकी रस्म का मजाक उड़ाया है। खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण बताने वाले राहुल गाँधी अपने नेता के विचारों से सहमत हैं क्या।”

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस नेता द्वारा इस तरह हिंदू रिवाजों का मखौल उड़ाए जाने के बाद जहाँ लोग कॉन्ग्रेस पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि दूसरे मजहब को लेकर ऐसी बातें क्यों नहीं कही जाती। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस करे तो क्या करे। उन्हें पता है हिजाब, हलाला पर बात की तो हश्र क्या होगा। इसलिए वह हिंदू संस्कृति का मजाक उड़ाते हैं।