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पूछताछ के लिए मुंबई पुलिस के समक्ष पेश नहीं होंगे रणवीर सिंह, न्यूड फोटोशूट का मामला: उधर ₹119 करोड़ का घर खरीद किया ‘गृह प्रवेश’

एक पत्रिका के लिए न्यूड फोटोशूट कराने वाले अभिनेता रणवीर सिंह पूछताछ के लिए पुलिस के समक्ष पेश नहीं होंगे। उन्हें 22 अगस्त को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। अभिनेता ने मुंबई पुलिस से अतिरिक्त 2 सप्ताह का समय माँगा है, जिसके बाद वो पूछताछ के लिए पेश होंगे। मुंबई के एक NGO ने उनके खिलाफ चेंबूर पुलिस थाने में मामला दर्ज करा रखा है। उन पर महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने और उनका अपमान करने के आरोप हैं।

शिकायत दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस ने 48 घंटे का समय माँगा था। फिर रणवीर सिंह के विरुद्ध FIR दर्ज की गई थी। IPC की जिस धारा-292 के तहत ये मामला दर्ज किया गया था, उसके तहत 5 साल और धारा-293 के तहत 3 वर्ष की सज़ा का प्रावधान है। IT एक्ट की धारा-67A के तहत भी 4 वर्ष के कारावास की ही सज़ा है। वहीं रणवीर सिंह ने कहा था कि शारीरिक रूप से नंगा होने से फर्क नहीं पड़ता। हाल ही में रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने अपने नए घर में गृह प्रवेश किया, जिसे 119 करोड़ रुपए में उन्होंने अलीबाग में खरीदा है।

वर्ण फ्रंट की बात करें तो रणवीर सिंह की पिछली दोनों ही फिल्म फ्लॉप हुई है। जहाँ इस साल आई उनकी ‘जयेशभाई जोरदार’ कलेक्शन के लिए तरस गई, वहीं 2021 में आई मेगा बजट मूवी ’83’ भी बुरी तरह फ्लॉप हो गई। फ़िलहाल वो रोहित शेट्टी की ‘सर्कस’ के साथ-साथ करण जौहर की ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। दूसरी फिल्म में वो ‘रॉकी’ नाम के टाइटल किरदार में दिखेंगे। वहीं ‘सर्कस’ में वो पूजा हेगड़े और जैकलीन फर्नांडिस के ऑपोजिट डबल रोल में दिखाई देंगे।

रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट के सम्बन्ध में अक्षय कुमार की पत्नी और पूर्व अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना का बयान खासा चर्चा में आया था। ट्विंकल ने कहा कि रणवीर की तस्वीर को उन्होंने ध्यान से देखा लेकिन उन्हें उसमें कुछ भी नहीं दिखा। उन्होंने ये भी बताया कि ये फोटो देखते हुए उन्हें उनके बेटे ने पकड़ लिया था। उन्होंने कहा था, “मैं मेरी स्क्रीन पर रणवीर की फोटोज को देख रही थी, तभी मेरा बेटा आ गया, मैंने उसे बताया कि यह रिसर्च के लिए है। जहाँ लोग महिलाओं के नंगे शरीर को घूरते हैं, वहीं पुरुषों के शरीर को देखने से बचते हैं।”

स्वयं प्रकट हुआ था उज्जैन का महाकाल मंदिर: गजनी-इल्तुतमीश ने तुड़वाया, मराठों ने औरंगजेब के बनवाए मस्जिद को तोड़ किया पुनर्निर्माण

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से हिंदुओं की भावनाएँ अंतरात्मा से जुड़ी हैं। महाकाल मंदिर कोई आम मंदिर नहीं है। यह स्वयंभू मंदिर है। इसको लेकर कई मान्यताएँ हैं, जिसका जिक्र धार्मिक ग्रंथों किया गया है। हालाँकि, कालांतर में मुस्लिम आक्रमण ने हमले कर इसे ध्वस्त कर दिया, लेकिन बाद में इसका पुनर्निर्माण किया गया।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में भगवान शंकर का शिवलिंग है। इन्हें श्री महाकालेश्वर के नाम से जाना जाता है, जो भारत में स्थित बारह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। सम्राट विक्रमादित्य के समय से उज्जैन (तब अवंतिका) भारतीय समय की गणना का केंद्रबिंदु रहा। मंदिर के शिखर से कर्क रेखा गुजरती है, इसलिए इसे पृथ्वी का नाभिस्थल भी माना जाता है।

कहा जाता है कि महाकाल मंदिर में स्थित लिंगम् स्वयंभू (स्वयं पैदा हुआ) है, जो स्वयं के भीतर से शक्ति प्रदायी माना जाता है। यहाँ भगवान महाकालेश्वर दक्षिणाभिमुखी हैं। यह तांत्रिक परंपरा की एक अनूठी विशेषता है, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में सिर्फ महाकालेश्वर में है।

महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग की उत्पत्ति

पुराणों के अनुसार, एक समय उज्जयिनी में महाराजा चंद्रसेन का राज हुआ करता था। वे भगवान शिव के परम भक्त थे। भगवान शिव के गणों में मुख्य मणिभद्र राजा चंद्रसेन के मित्र हुआ करते थे। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक चिंतामणि प्रदान की। इसमें अतुलनीय तेज था।

राजा चंद्रसेन ने मणि को अपने गले में धारण कर लिया। मणि को धारण करते ही पूरा प्रभामंडल जगमगा उठा। मणि की दिव्यता से राजा चंद्रसेन की यश और कीर्ति दूसरे देशों में भी फैलने लगी। राज्य में धन-धान्य बढ़ने लगा।

राजा चंद्रसेन की यश और कीर्ति को बढ़ता देखकर अन्य राजाओं ने मणि को प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए। कुछ समय बाद अन्य राजाओं ने मिलकर राजा चंद्रसेन पर आक्रमण कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही राजा चंद्रसेन भगवान महाकाल की शरण में जाकर ध्यानमग्न हो गए।

उसी दौरान एक विधवा अपने पाँच साल के छोटे बालक को साथ लेकर वहाँ दर्शन के लिए आई। राजा चंद्रसेन को ध्यानमग्न देखकर बालक प्रेरित हुआ। घर जाकर बालक ने एक पत्थर लिया और उसे अपने घर के एकांत स्थान में रखकर उसके ध्यान में मग्न हो गया। वह इतना लीन हो गया कि उसकी माता उसे बार-बार बुलाती रही, लेकिन बालक को इसका पता नहीं चला।

बालक के व्यवहार से क्रुद्ध होकर महिला ने उसे पीटना शुरू कर दिया और पूजा का समान उठाकर फेंक दिया। बालक को जब चेतना आई तो वहाँ का दृश्य देखकर वह बहुत दुखी हुआ। अचानक वहाँ चमत्कार हुआ और वहाँ एक सुंदर मंदिर बन गया। मंदिर में एक दिव्य शिवलिंग विराजमान था। यह देखकर महिला आश्चर्यचकित रह गई। भगवान महाकाल तब ही से उज्जयिनी में विराजमान हैं। महाकाल को उज्जैन का राजाधिराज माना जाता है।

उसी दौरान भगवान महावीर प्रकट हुए और कहा कि इस शिवभक्त बालक की आठवीं पीढ़ी में यशस्वी नंद जन्म लेंगे और वे भगवान नारायण के अवतार के पालनहार बनेंगे। इस तरह इस मंदिर का निर्माण द्वापर युग के नंद जी के 8 पीढ़ी पहले हुआ।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ईस्वी पूर्व छठी शताब्दी में उज्जैन में राजा चंद्रप्रद्योत का शासन काल का उल्लेख मिलता है। इस मंदिर की व्यवस्था के लिए उन्होंने अपने पुत्र कुमार संभव को जिम्मेवारी दी थी। कालांतर में 10वीं शताब्दी के आसपास इस क्षेत्र पर परमार क्षत्रियों का शासन स्थापित हो गया और उन्होंने इस मंदिर की देखभाल की।

सम्राट विक्रमादित्य और महाकालेश्वर

विक्रम संवत की शुरुआत करने वाले उज्जैन के अधिपति सम्राट विक्रमादित्य का यहाँ 57 ईसा पूर्व में शासन था। सम्राट विक्रमादित्य माता हरसिद्धि के परमभक्त थे, जिनका मंदिर महाकाल मंदिर से थोड़ी दूरी पर है। वहीं, सम्राट की बहन राजकुमारी सुंदरा महाकाल की परमभक्त थीं।

कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी बहन सुंदरा को वचन दिया था कि वे उनकी शादी वैसी जगह कराएँगे जहाँ अवंतिका जैसा तीर्थ नगर और महाकाल जैसा मंदिर हो। इसके बाद उन्होंने कालीसिंध नदी के तट पर सुंदरगढ़ नामक गर बसाया। आज इसे सुंदरसी कहा जाता है, जो शुजापुर जिले में है।

सम्राट विक्रमादित्य ने सुंदरगढ़ में भव्य महाकाल मंदिर का निर्माण करवाया, ताकि विवाह के बाद उनकी बहन महाकाल की पूजा-अर्चना कर सके। इस मंदिर के चारों तरफ काल भैरव, नवग्रह, बड़े गणेश, चिंताहरण गणेश, गोपाल मंदिर का निर्माण भी कराया। नगर बस जाने के बाद सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी बहन सुंदरा का विवाह कराया। 

कहा जाता है कि शाजापुर के इस महाकाल मंदिर के गर्भगृह में एक गुफा है, जिससे राजकुमारी सुंदरा के स्नान के लिए उज्जैन के शिप्रा नदी का जल आता था। इस जलमार्ग का निर्माण सम्राट विक्रमादित्य ने कराया था। बाद में तपस्वी बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए इस गुफा के रास्ते उज्जैन जाते थे। अब इस गुफा को बंद कर दिया गया है।

सम्राट विक्रमादित्य के बारे में कहा जाता है कि उन्हें माता हरसिद्धि और माता बगलामुखी ने साक्षात दर्शन दिया था। आवंतिका नगरी की रक्षा इसके चारों ओर स्थित देवियाँ आज भी करती हैं। विक्रमादित्य से सिंहासन बत्तीसी और विक्रम बेताल की कथा भी जुड़ी है। विक्रमादित्य का वर्णन स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में मिलता है।

मान्यता है कि विक्रमादित्य जैसा कोई न्यायप्रिय राजा नहीं हुआ। वह रात में वेश बदलकर अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते थे। विक्रमादित्य के परलोक गमन के बाद यह नगरी महाकाल के अधीन हो गई। उन्हीं के अधीन रहकर राज करना होता था। महाकाल को उज्जैन का अधिपति कहा जाता है।

कहा जाता है अवंतिका क्षेत्र में वहीं राजा रात में रूक सकता है, जो विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय हो। इसलिए आज भी कोई मंत्री-विधायक रात में उज्जैन में रूकने से डरते है। कहा जाता है कि जिसने भी ऐसा किया, अगले दिन उसकी कुर्सी चली गई या मौत हो गई।

कहा जाता है कि विक्रमादित्य का शासन श्रीलंका से लेकर तिब्बत, चीन, आज के तुर्कमेनिस्तान, ईरान और अरब तक था। अरब पर विक्रमादित्य के विजय का वर्णन अरबी कवि जिरहाम किनतोई ने अपनी पुस्तक ‘शायर उल ओकुल’ में किया है। यह किताब तुर्की की राजधानी इस्तांबुल की लाइब्रेरी मकतलब-ए-सुल्तानिया रखे होने की बात कही जाती है।

मुस्लिम आक्रांता इल्तुतमिश ने मंदिर तोड़वाया

इतिहाकारों के अनुसार, 11वीं सदी के आठवें दशक में गजनी सेनापति ने इस मंदिर पर हमला किया। इसके बाद 11वीं सदी के उत्तरार्ध व 12वीं सदी के पूर्वार्ध में राजा उदयादित्य और राजा नरवर्मा के शासनकाल में मंदिर का पुनर्निमाण किया गया।

भारत में जब मुस्लिम आक्रमणकारियों का राज कायम हुआ तब उनमें से एक इल्तुतमिश ने 1234-35 ईस्वी में इस मंदिर को ध्वस्त करा दिया था। कहा जाता है कि हिंदुओं ने ज्योतिर्लिंग को एक कुंड में छिपा दिया था। इसके बाद मुगल आक्रांता औरंगजेब ने इस स्थान पर मस्जिद का निर्माण करवा दिया।

इतिहासकारों के अनुसार, मंदिर को ध्वस्त कराने के बाद महाकाल ज्योतिर्लिंग को लगभग 500 वर्षों तक मंदिर के अवशेषों में ही पूजा जाता था। ग्वालियर-मालवा के तत्कालीन सूबेदार और सिंधिया राजवंश के संस्थापक राणोजी सिंधिया ने जब बंगाल विजय के दौरान उज्जैन में पड़ाव डाला। उन्होंने जब महाकाल मंदिर की दुर्दशा देखकर व्यथित हो उठे।

कहा जाता है कि उन्होंने अधिकारियों और उज्जैन के कारोबारियों को आदेश दिया कि बंगाल विजय से लौटने तक भव्य महाकाल मंदिर बनवा दी जाए। राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने अपनी आत्मकथा ‘राजपथ से लोकपथ पर’ में इसका जिक्र किया है।

राणोजी सिंधिया जब बंगाल विजय से वापस उज्जैन पहुँचे तो वहाँ औरंगजेब द्वारा निर्मित मस्जिद को ढहवा दिया और नवनिर्मित मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा कराकर महाकाल की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने उन्होंने सिंहस्थ कुंभ का फिर से आयोजन शुरू करवाया।

महाकालेश्वर मंदिर की बनावट

बारह ज्योतिर्लिंगों में तीसरे नंबर पर आने वाले महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर तीन खंडों विभक्त है। मंदिर के निचले खंड में महाकालेश्वर, बीच में ओंकारेश्वर तथा सबसे ऊपर वाले खंड में नागचन्द्रेश्वर के शिवलिंग प्रतिष्ठ हैं।

महाकालेश्वर मंदिर के शिखर के तीसरे तल पर भगवान शंकर और माता पार्वती नाग के आसन बैठी हुई हैं। यहाँ एक शिवलिंग भी है। इस सुन्दर और दुर्लभ प्रतिमा का दर्शन सिर्फ नागपंचमी के दिन होते हैं।

कोटि तीर्थ कुण्ड के पूर्व में एक विशाल बरामदा है। यहीं से महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश का रास्ता है। इस बरामदे के उत्तरी छोर पर भगवान राम और देवी अवन्तिका की आकर्षक प्रतिमाएँ हैं। गर्भगृह के पश्चिम, उत्तर और पूर्व में गणेश, पार्वती और कार्तिकेय के चित्र स्थापित हैं। दक्षिण में नंदी की प्रतिमा है। दीवारों पर चारों ओर शिव की मनोहारी स्तुति अंकित है।

‘मेरी गिरफ्तारी क्रांति लाएगी’ : दिल्ली में फिर जुट रहे किसान, राकेश टिकैत को पुलिस ने हिरासत में लिया

वर्ष 2020-21 में लगभग एक साल तक चले किसान आंदोलन को फिर से हवा देने की तैयारी की जा रही है। इसके चलते किसानों का दिल्ली आगमन भी शुरू हो गया है। इसी दौरान प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी सहित अपनी कई और माँगों को लेकर किसान नेताओं ने सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

इसी के चलते भारी संख्या में किसान पंजाब और हरियाणा से दिल्ली पहुँच रहे हैं। लेकिन इस बार दिल्ली पुलिस ने आंदोलन की शुरुआत से पहले ही दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले टीकरी बॉर्डर पर सीमेंटेड बैरिकेड्स लगाने शुरू कर दिए हैं। वहीं सुरक्षा से जुड़े मजबूत इंतजाम भी किए जा रहे हैं।

राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

पिछले साल लंबे समय तक चले किसान आंदोलन के चेहरे बने किसान नेता राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर से हिरासत में लिया है। रविवार को टिकैत अपने समर्थकों के साथ दिल्ली आना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। वहीं टिकैत के समर्थकों ने पुलिस की इस कार्रवाई का भी विरोध किया और सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे।

इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “सरकार के इशारे पर काम कर रही दिल्ली पुलिस किसानों की आवाज को नहीं दबा सकती। यह गिरफ्तारी एक नई क्रांति लेकर आएगी। यह संघर्ष अंतिम साँस तक जारी रहेगा। ना रुकेंगे ना थकेंगे, ना झुकेंगे।”

बता दें कि टिकैत ने शनिवार को भी अपने एक सम्बोधन में कहा था, “केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ को हटाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने संबंधी एक कानून बनाए जाने समेत अन्य माँगों को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में चल रहा किसानों का धरना शीर्ष जिला अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद आज समाप्त हो गया। छह सितंबर को दिल्ली में एक बैठक के दौरान एसकेएम की भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।”

‘CM योगी का सिर काटने वाले को ₹2 करोड़ का इनाम’ : मुरादाबाद पुलिस के ‘फेक अकॉउंट’ से मैसेज वायरल, प्रोफाइल में पाकिस्तानी झंडा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हत्या के लिए एक फेसबुक पोस्ट में इनाम का ऐलान करने का मामला प्रकाश में आया है। पोस्ट में लिखा गया कि जो कोई भी सीएम योगी आदित्यनाथ का सिर काटकर लाएगा उसे 2 करोड़ रुपए का इनाम मिलेगा।

इस मैसेज के वायरल होने के बाद आरएसएस की महिला कार्यकर्ता आयुषी माहेश्वरी ने मुरादाबाद पुलिस में शिकायत दी। मैसेज देखते ही पुलिस सकते में आ गई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अब पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है। दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस फेसबुक अकॉउंट से धमकी देने का काम हुआ वो आत्म प्रकाश पंडित के नाम पर है। जब पुलिस ने आत्म प्रकाश को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस मैसेज के बारे में कुछ नहीं पता। उन्होंने अपनी ओर से ऐसा कुछ अपलोड नहीं किया।

पूछताछ के बाद एसएसपी के निर्देश पर सिविल लाइन्स पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 153, 505 (2) एवं 67 एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। वहीं पूरी जाँच साइबर सेल को सौंप दी गई है।

अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि आत्म प्रकाश नाम के शख्स के फेसबुक अकॉउंट को हैक कर लिया गया था। इसके बाद मुरादाबाद पुलिस के नाम से एक फर्जी फेसबुक पेज बनाया गया और योगी आदित्यनाथ का सिर काटने की धमकी दी गई। साथ ही 2 करोड़ रुपए इनाम का ऐलान किया गया।

पुलिस ने बताया कि जिस पेज से धमकी दी गई उसकी प्रोफाइल में पाकिस्तान का झंडा लगा था। अब पुलिस ने अकॉउंट संबंधी जानकारी लेने के लिए फेसबुक को ईमेल किया है। ईमेल में फेसबुक से संबंधित अकॉउंट को चलाने वाले की जानकारी माँगी गई है और इसे बंद करने को कहा गया है।

विरोध के आगे झुका Zomato, महाकाल का नाम इस्तेमाल करने पर माँगी माफ़ी: MP के गृह मंत्री ने उज्जैन एसपी से तलब की रिपोर्ट, कहा – होगी कार्रवाई

हिन्दू विरोध के कारण फिल्मों के बॉयकॉट के बाद भी बॉलीवुड एक्टर सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस लिस्ट में नया नाम ऋतिक रोशन (Hritik Roshan) का है। दरअसल, ऋतिक रोशन ने फूड डिलेवरी कम्पनी जोमैटो (Zomato) के एक ऐड में उज्जैन के प्रसिद्ध शिव मंदिर महाकाल का नाम ले लिया, जिसके बाद से विवाद शुरू हो गया है। यही नहीं, इस पूरे मसले पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कार्यवाही की बात कही है।

जोमैटो के विवादित विज्ञापन में ऋतिक रोशन कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “थाली का मन किया। उज्जैन में हैं तो महाकाल से मँगा लिया।” इस विज्ञापन को लेकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा,”मैंने उज्जैन के पुलिस अधीक्षक से कहा है कि वो वीडियो की वास्तविकता की जाँच करें और देखकर मुझे रिपोर्ट करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सके।”

हालाँकि, इस विज्ञापन को लेकर शुरू हुए विरोध के आगे Zomato को झुकना पड़ा है और कंपनी की तरफ से माफी माँगते हुए सफाई जारी की है। जोमैटो ने अपने बयान में कहा है कि हमने इस विज्ञापन में ‘महाकाल रेस्टोरेंट’ का जिक्र किया था न कि महाकालेश्वर मंदिर का।

बता दें कि इस विज्ञापन में ऋतिक द्वारा महाकाल का नाम लिए जाने पर महाकाल मंदिर के पुजारियों ने भी आपत्ति जताते हुए कहा था कि यदि ऋतिक रोशन माफी नहीं माँगते हैं तो हम कोर्ट जाएँगे। महाकाल मंदिर के एक पुजारी ने कहा था कि ऐसे विज्ञापन बनाने से पहले कंपनी को सोच-विचार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि हिन्दू सहिष्णु है इसलिए कोई कुछ भी कह रहा है और यदि यही बात किसी और के लिए कही गई होती तो कंपनी में आग लगा दी जाती।

इस विज्ञापन को लेकर जोमैटो ने भले ही माफी माँग ली हो, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग ऋतिक रोशन के माफी माँगने पर अड़े हुए हैं। इसको लेकर ट्विटर पर लगातार ट्वीट किए जा रहे हैं और कह रहे हैं कि महाकाल हमारी आस्था और शक्ति का केंद्र है, आपकी माँ की रसोई नहीं, जहाँ आप थाली मँगवाएँगे। ‘ऋतिक रोशन माफ़ी माँग’ ट्विटर पर भी ट्रेंड कर रहा है।

देश के No.1 अभियंता ‘सड़जी’ हुए क्रोधित, हर सवाल का एक जवाब – चलो प्रिये, दुनिया को No.1 बनाने की बात करें

देश के नंबर वन अभियंता क्रोधित हैं, कहते हैं कि जी लगाकर उन्हें सम्बोधित नहीं किया गया, यह धृष्टता है। अब कोई अभियंता जी को नाम लेकर ऐसे सम्बोधित करेगा कि जैसे उसके घर में बाप-भाई या कंपनी में मैनेजर-मालिक न हो तो बुरा लगेगा ही। फिर ऐसी बातचीत में से जी उचट जाए और कोई जी भर के मन की भड़ास निकालने लग जाए तो दोष क्यों देना? वैसे भी जो जी लगाकर बात न करे उससे क्या ही मुँह लगाना?

बात तो उन से ही की जानी चाहिए जिनका जी आपमें लगा हो और आपका जी जिनमें लगा हो। जब दोनों के जी मिल जाएँ तो तो जी भर के बातें की जा सकती हैं। नहीं तो जी उमछाने लगता है। वो लोग कितने प्रिय लगते हैं जो जी-जी कर के बात करते हैं और जो जी के अलावा कुछ नहीं बोलते वो तो लाड़ले हो जाते हैं। फिर बात वही होनी चाहिए जो जी को भाए। जैसे अभी पार्टी का जी जिस विषय पर बात करने का हो तो उस विषय की ही बात की जाए। इधर-उधर की बात की भी जाए तो लौटकर उस विषय पर आ जानी चाहिए। बात वैसे ही हो जैसे दो प्रियजन बात कर रहे हों।

“हमारे मोहल्ले की समस्याओं पर ध्यान दीजिए।”
“चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“देखिए, लोगों को ऑक्सीजन की कमी हो रही है।”
“चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“आप इतना पलटते क्यों हैं?”
“वो देखो अमरीका वाले मोहल्ला क्लिनिक देखने आ रहे हैं। चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“अच्छा! ये आपके स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप क्यों लग रहे हैं?”
“चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“देखो वो जेल जा रहे हैं।”
“लेकिन हमारा हेल्थ मॉडल वर्ल्ड में नंबर वन है, चलो प्रिये! मोहल्ला क्लिनिक की बात करें।”

“आपके राज में कोई नया अस्पताल नहीं बना, आपका वादा और दावा झूठ लग रहा है।”
“चलो प्रिये! हैप्पीनेस क्लास की बात करें।”

“देखो वो आपके स्वास्थ्य मंत्री जेल चले गए हैं।”
“चलो प्रिये! शिक्षा मॉडल की बात करें।”

“लेकिन स्वास्थ्य मंत्री?”
“हमारा शिक्षा मंत्री दुनिया का बेस्ट शिक्षा मंत्री है।”

“आपके राज में नलों में पानी नहीं आ रहा।”
“चलो प्रिये! क्लासरूम की बात करें।”

“आपके राज में नाले उफान पर हैं, बसें डूब जाती हैं।”
“चलो प्रिये! स्कूल की बात करें।”

“वो स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की बात की थी वो भी नहीं बनी, आप तो कहते थे कि बनवा दी।”
“चलो प्रिये! स्कूल को नंबर वन बनाने की बात करें।”

“आपके स्कूलों का रिजल्ट बिगड़ रहा है।”
“हमारे पास दुनिया का बेस्ट शिक्षा मंत्री है। चलो प्रिये! स्कूल में लगे टाइल्स की बात करें।”

“स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, जो हैं उनको वेतन नहीं मिल रहा।”
“लेकिन बिजली तो मुफ्त मिल रही है न? मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? चलो प्रिये!, हम तुमको स्कूल दिखा कर लाते हैं।”

“अच्छा ये बताओ आपके शिक्षा मंत्री के बच्चे खुद आपके स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते।”
“सबको मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए। चलो प्रिये! फ्री शिक्षा की बात करें।”

“आप तो अटक गए हैं। अच्छा, आपके यहाँ शराब एक पर एक फ्री क्यों मिल रही है?”
“हम कट्टर ईमानदार हैं। हम शिक्षा की बात कर रहे हैं आप शराब की।”

“हाँ वो ठीक है, लेकिन आपके यहाँ शराब मामले में कुछ घोटाला हुआ है।”
“हमारे शिक्षा मंत्री दुंनिया में बेस्ट हैं, दुनिया भर से लोग स्कूल देखने आते हैं।”

“आते तो हैं लेकिन अभी बात तो शराब की हो रही है। शिक्षा मंत्री ही आबकारी मंत्री हैं। उनको जवाब देना चाहिए न।”
“हाँ तो शिक्षा के बारे में पूछिए।”

“लेकिन आबकारी मंत्री होने के नाते वो जवाब नहीं देंगे क्या?”
“नहीं, शिक्षा मंत्री होने के नाते देंगे।”

“हम आपसे शराब की बात कर रहे हैं, आप शिक्षा की बात क्यों बीच में ला रहे हैं।”
“शराब की बात भी कोई करता है क्या? शिक्षा सबका अधिकार है।”

“लेकिन जहाँ घोटाला हुआ प्रश्न तो वहाँ का पूछा जाएगा न?”
“हमने दिल्ली को शिक्षा में नंबर वन बनाया है। दिल्ली को हर क्षेत्र में पच्चीस साल में नंबर वन बना देंगे।”

“पच्चीस साल तो न हम रहेंगे न आप, आप अभी का जवाब क्यों नहीं देते। वो देखिए, आपके शिक्षा मंत्री पर छापा पड़ गया।”
“लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर छपी है वो देखिए। कितना मुश्किल होता है उधर खबर छपवाना। यह सब इसलिए हुआ कि हमारे पास दुनिया का नंबर वन शिक्षा मंत्री है।”

“मतलब वो खबर आपने छपवाई?”
“छपी तो है! न्यूयॉर्क टाइम्स, कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। देखना हमारे स्कूल अब न्यूयॉर्क में भी खुलेंगे।”

“वो खबर तो लगता है आपके ही आदमी ने छापी है, तस्वीरें भी गलत है। उधर देखिए आपके शिक्षा मंत्री के घर सीबीआई बैठी है।”
“नहीं, आबकारी मंत्री के घर बैठी है। शिक्षा मंत्री के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर छपी है वो देखिए। “

“पर वो तो एक ही आदमी हैं!”
“नहीं, सीबीआई हमारे शिक्षा मंत्री को उठा कर नहीं ले जा सकती, चाहे तो आबकारी मंत्री को उठा ले जाए। शिक्षा मंत्री के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपा है।”

“लेकिन आदमी तो एक ही है।”
“हाँ तो! उसमे से आबकारी वाला जो है, सो सीबीआई ले जाए।”

“कैसी बातें कर रहे हैं?”
“हम अपने देश को नंबर वन बनाएंगे।”

“कैसे नंबर वन बनाएँगे? वो शराब वाले मामले में जवाब तो दीजिए?”
“हम दुनिया को नंबर वन बनाएंगे।”

“हैं? दुनिया को?”
“हम रुकने वाले नहीं हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स देख लीजिए देखिए क्या खबर छपी है।”

“खबर तो छपी है, लेकिन क्या अब शिक्षा मंत्री भी जेल जाएँगे? “
“ये सब हमारे खिलाफ साजिश है, क्योंकि हम दुनिया को नंबर वन बनाना चाहते हैं, इसलिए पहले हमारे नंबर वन स्वास्थ्य मंत्री को जेल में ड़ाल दिया, फिर शिक्षा मंत्री के घर छापा मारा है और अब देखिए, परिवहन मंत्री पर भी छापा मारने की तैयारी कर रहे हैं।”

“लेकिन परिवहन मंत्री की तो बात ही नहीं की?”
“देखो बदतमीजी से बात कर रहे हो, जी लगाकर बात करो। न्यूयॉर्क टाइम्स क्यों नहीं देखते। “

“ऐसा लगता है आपके ही किसी कार्यकर्ता ने खबर छापी है। वो देखिये शिक्षा मंत्री बौखलाए घूम रहे हैं।”
“तमीज से बात करो। बड़ों से ऐसे बात की जाती है?”

“लेकिन जो पूछ रहे हैं, वह तो बता दीजिए कि आप इन मंत्रियों पर कोई एक्शन कब लेंगे?”
“जी लगाकर बात करो।”

“अरे?”
“जी लगाकर बात करो।”

“लेकिन… “
“जी लगाकर बात करो।”

“जी! अब तो कह दीजिए यह सब क्या हो रहा है जी?”
“चलो प्रिये! दुनिया को नंबर वन बनाने की बात करें। प्रिये! मिसकॉल करें।“

‘सत्येंद्र जैन को मंत्री पद के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकते’: दिल्ली HC ने खारिज की याचिका, मनी लॉन्ड्रिंग में कार्रवाई का सामना कर रहे हैं AAP नेता

दिल्ली हाई कोर्ट ने AAP नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन को मंत्री पद के लिए अयोग्य ठहराने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा की एक रिट याचिका में कही बातों के आधार पर जैन को ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित नहीं किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली सरकार की कैबिनेट में मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन के खिलाफ दायर एक याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिककर्ता की अपील थी कि जैन ने अपनी याददाश्त खो दी है, इसी के आधार पर उन्हें ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित कर दिया जाना चाहिए।

आपको बताते चलें कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “एक रिट याचिका में कही बातों के आधार पर जैन को ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें मंत्रिमंडल तथा विधानसभा से अयोग्य ठहराया जा सकता है।”

कोर्ट ने कहा, “AAP विधायक विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमे का सामना कर रहे हैं और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अदालत की है।” वहीं कोर्ट ने यह भी माना कि यह सच है कि प्रतिवादी नंबर 5 (सत्येंद्र जैन) भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के साथ ही धन शोधन रोकथाम कानून के तहत विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमों का सामना कर रहा है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा, “तथ्य यही है कि दंड प्रक्रिया संहिता-1973 अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, जो पूछताछ, जाँच और मुकदमे के संबंध में एक व्यवस्था उपलब्ध कराती है।” कोर्ट ने यह भी कहा, “दंड प्रक्रिया संहिता में कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अभियोजन/अदालत की है।”

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वो सत्येंद्र जैन को को मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति घोषित नहीं कर सकती और न ही उन्हें विधानसभा या दिल्ली सरकार में मंत्री पद से अयोग्य ठहरा सकती है। इसके परिणामस्वरूप रिट याचिका खारिज की जाती है।

आप सरकार के नेता मनीष सिसोदिया को CBI ने दिया लुक आउट नोटिस

गौरतलब है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार में केवल सत्येंद्र कुमार जैन ही नहीं, बल्कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी शराब घोटाले के मामले में फँसते जा रहे हैं। इस केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 14 लोगों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है और इस लिस्ट में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy CM Manish Sisodia) का नाम भी शामिल किया गया है।

‘इन लोगों को भाव मत दो, जिसे देखना है देखेगा’: लोगों को पसंद नहीं आया Liger के हीरो का घमंड, कहा – बॉलीवुड के साथ आकर बदले तेवर, होगा बॉयकॉट

बॉलीवुड के रंग में रंग रहे साउथ के मशहूर हीरो विजय देवरकोंडा की आने वाली फिल्म ‘लाइगर’ पर बॉयकॉट की तलवार लटकने जा रही है। देवरकोंडा ने हाल में एक इंटरव्यू के दौरान इस बॉयकॉट ट्रेंड पर बयान दिया था जिसके बाद लोग उनसे नाराज हैं और उनकी फिल्म के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया पर #BoycottLiger ट्रेंड करवा रहे हैं।

इससे पहले लाइगर के विरोध का कारण केवल ये था कि इसके साथ करण जौहर के प्रोडक्शन का नाम जुड़ा है। लेकिन देवरकोंडा के लगातार आते बयानों ने ऑडियंस को उनके विरोध में खड़ा कर दिया है। लोग अब उन्हें घमंडी कहते हुए सबक सिखाने की बात कर रहे हैं।

हमें इन्हें भाव नहीं देना चाहिए: विजय देवरकोंडा

दरअसल, लाइगर की रिलीज से पहले विजय की एक छोटी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें वह अनन्या पांडे के साथ दिखाई दे रहे हैं। इसमें वह खुद को कूल दिखाते हुए कह रहे हैं,  मुझको लगता है हम इन लोगों को कुछ ज्यादा ही भाव दे रहे हैं। हमको क्या है। हम तो पिक्चर बनाएँगे। जो देखना चाहते हैं देखेंगे। जो नहीं देखना चाहते हैं वो टीवी में या फोन में देखेंगे। हम क्या कर सकते हैं।”

लोगों ने ट्रेंड कराया #BoycottLiger

इस बयान को सुनने के बाद लोग कह रहे हैं- अब तुम बॉयकॉट की ताकत देखना। यूजर्स का उनसे कहना है, “भाई तुम अच्छे एक्टर हो लेकिन तुम इस तरह बॉलीवुड से नजदीकियाँ बढ़ाकर अपने को मुश्किल में डाल रहे हो। अल्लू अर्जुन और महेश बाबू को फॉलो करो।”

मल्लिकार्जुन पत्तार ने कहा, “तुम इस सवाल के जवाब को देने से बच सकते थे। लेकिन अब तुम संकट में हो”

सैम कुमार ने कहा, “बॉलीवुड बॉयकॉट है भाई, वो जो भी हो, तुम्हें हिट होना है तो कहीं और जाना पड़ेगा। कहीं भी जाओ चाहे बिहार चले जाओ लेकिन बॉलीवुड में नहीं।”

बॉयकॉट ट्रेंड के बाद बोले विजय देवरकोंडा- डरो मत

बता दें कि सोशल मीडिया पर जो बॉयकॉट लाइगर का ट्रेंड शुरू हुआ है, उसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजय ने अपना बयान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने करण जौहर से अनुरोध करके अपनी फिल्म को नॉर्थ तक की ऑडियंस के लिए तैयार किया है।

वह बॉयकॉट ट्रेंड पर वह बोले,

“मुझे नहीं पता कि उन लोगों (बॉयकॉट करने वालों) का मसला क्या है और वे क्या चाहते हैं। हम अपनी तरफ से सही हैं। मेरा जन्म हैदराबाद में हुआ था। चार्मे का जन्म पंजाब में हुआ था। पुरी सर का जन्म नरसीपट्टनम में हुआ था। क्या हमें काम नहीं करना चाहिए? हमने इस सिनेमा को बनाने के लिए तीन साल तक कड़ी मेहनत की है। क्या हमें अपनी फिल्में रिलीज नहीं करनी चाहिए? क्या हम घर में बैठ जाएँ? दर्शकों का हम पर जो प्यार बरस रहा है, वह आप सब देख रहे हैं। मैं उन दर्शकों के लिए फिल्में कर रहा हूँ। मुझे उन्हीं की जरूरत है। जब तक हमारे पास ये लोग नहीं हैं, तब तक किसी भी डरने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने कहा, “जब हम सही हों और अपना धर्म निभाएँ तो किसी और की सुनने की जरूरत नहीं, जो आ रहा है आने दो, हमें लड़ना होगा। मुझे डर नहीं है। मैं दिल से कहता हूँ कि हमने ये अपने दिन से किया है। हम सब इस देश के हैं और जानते हैं कि हमने अपने लोगों के लिए कितना किया है। हम वो लोग नहीं है जो कम्प्यूटर के आगे बैठ बस ट्वीट करें। हम वो हैं जो, जब कुछ होता है तो सबसे पहले आगे आते हैं।”

उल्लेखनीय है कि विजय अपनी आने वाली फिल्म के सुपरहिट होने की गारंटी ले चुके हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश में फिल्म प्रमोशन के दौरान कहा, “मैं आपको गारंटी देता हूँ, फिल्म धमाल मचा देगी। आपको मेरे लिए एक काम करना चाहिए, आपको 25 अगस्त को गुंटूर में धमाका मचा देना चाहिए। 25 अगस्त को वाट लगा देंगे।”

PM मोदी के पंजाब दौरे पर आतंकियों की नजर, रच रहे बड़े हमले की साजिश: खुफिया एजेंसियाँ अलर्ट, पुलिस ने बढ़ाई चौकसी

मुंबई में 26/11 जैसे आतंकी हमले की धमकी के बाद अब पंजाब में भी आतंकी हमले का खतरा मँडरा रहा है। खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, आतंकियों ने चंडीगढ़ और मोहाली में आतंकी हमले की साजिश रची है। सबसे बड़ी बात यह है कि खुफिया एजेंसियों ने इस यह अलर्ट तब जारी किया है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार (24 अगस्त, 2022) को पंजाब दौरे पर जाने वाले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर चंडीगढ़ और मोहाली के बस स्टैंड पर आतंकी हमले की साजिश रची गई है। इस अलर्ट के बाद पंजाब पुलिस से लेकर तमाम जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हो गई हैं।

इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि पंजाब के 10 राजनेता भी आतंकियों के निशाने पर हैं। खुफिया एजेंसी द्वारा दी गई लिस्ट में पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा, पूर्व मंत्री गुरकीरत कोटली, परमिंदर पिंकी और विजयइंदर सिंगला का नाम शामिल है। इस लिस्ट के सामने आने के बाद इन नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पंजाब पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। पुलिस को इन लोगों के पास से कुछ अहम जानकारियाँ मिली हैं। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आयी है कि टारगेट किलिंग के लिए दिल्ली, मोहाली और मोगा इन लोगों के निशाने पर थे।

इस आतंकी हमले को लेकर जाँच एजेंसियाँ और पुलिस इसलिए भी खासा सक्रिय है, क्योंकि 24 अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी पंजाब दौरे पर जाएँगे। इस दौरे पर पीएम मोदी को मोहाली के टाटा कैंसर हॉस्पिटल का उद्घाटन करना है।

सब इंस्पेक्टर की गाड़ी में बॉम्ब लगाने का बनाया था प्लान

गौरतलब है कि पंजाब पुलिस और महाराष्ट्र एटीएस (आतंकवाद निरोधी टीम) के जॉइंट ऑपरेशन में एक संदिग्ध की भी गिरफ्तारी हुई है। इस गिरफ्तारी को लेकर बताया गया है कि संदिग्ध का नाम राजिंदर सिंह है जो कि पंजाब पुलिस के सब इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह की कार में बम लगाने की प्लानिंग कर रहा था।

इतना ही नहीं, इससे पहले भी दो अन्य संदिग्ध लोगों को भी दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया था। इन पर भी दिलबाग सिंह की कार पर बॉम्ब लगाने का आरोप लगाया गया है। ये दोनों ही संदिग्ध देश छोड़ने की फिराक में थे। बता दें कि दिलबाग सिंह पंजाब पुलिस के ऐसे सब इंस्पेक्टर हैं जो आतंकियों के विरुद्ध जारी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

SC-ST एक्ट से परेशान CA ने चौथी मंजिल से कूदकर की आत्महत्या, केस में माँ का नाम डालने से था आहत: राजस्थान पुलिस पर भी प्रताड़ना का आरोप

दलितों के सशक्तिकरण के नाम बना भेदभावपूर्ण SC-ST ACT आज समाज के लिए कितना भयानक साबित हो रहा है, इसका ताजा गवाह राजस्थान के जयपुर का रक्षित आत्महत्या मामला है। इस ऐक्ट ने एक हँसते-खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया। आर्थिक नुकसान को शायद वे सँभाल भी लेते, लेकिन संकट के दौर से गुजर रहे परिवार को अब पालनहार बेटे का नुकसान बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

अपनी माँ के खिलाफ दायर झूठे एससी-एसटी केस के कारण जयपुर के मुहाना थाना क्षेत्र में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट रक्षित खंडेलवाल ने गुरुवार (18 अगस्त 2022) को आत्महत्या कर ली है। अपने परिवार की बेइज्जती से परेशान होकर रक्षित चौथे माले पर स्थित अपने फ्लैट से कूद गए और अपनी जान दे दी।

रक्षित का एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने आपबीती लिखी है। उन्होंने लिखा है कि भीम सिंह नाम के एक व्यक्ति ने उनके परिवार, यहाँ तक कि उनकी माँ के खिलाफ SC-ST में झूठा मुकदमा लिखाया है। इसके कारण उनको परिवार को Dy SP सतीश वर्मा लगातार परेशान कर रहे थे।

रक्षित ने अपनी सुसाइड नोट में लिखा कि वे लोग बुरे लोग नहीं हैं। समय ने उन्हें बर्बाद कर दिया है और उनके परिवार के पास पैसा नहीं है। भीम सिंह लगातार उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने डीएसपी से आग्रह कि उनके परिवार को परेशान ना करे। उन्होंने लिखा कि मरना बहुत जरूरी था।

अपनी चार पेज की सुसाइड नोट में रक्षित ने लिखा है कि भीम ने उनके परिवार के खिलाफ जयपुर और भरतपुर में 420 और एससी-एसटी ऐक्ट में झूठा केस दर्ज किया है। उन्होंने लिखा, “इसके कारण हमारा पूरा परिवार परेशान है। यहाँ तक उसने मेरी माँ खिलाफ तक केस कर दिया। इसमें उसका साथ डीएसपी सतीश वर्मा दे रहे हैं। आए दिन ये लोग हमें परेशान करते हैं और घर पर पुलिस टीम भेजते हैं। हम को क्रिमिनल नहीं हैं।”

सुसाइड नोट में रक्षित ने परिवार की आर्थिक तंगी का भी जिक्र किया है। उसने लिखा है, “बहुत लोगों को मैं सॉरी बोलना चाहता हूँ, लेकिन मेरी बात कोई क्यों नहीं मानता। मेरे पास पैसा नहीं है। वो बहुत पहले चले गए। कोई ये बात समझता ही नहीं कि नुकसान हो गया। प्लीज मेरे जाने के बाद मेरे परिवार को परेशान मत करना।”

उन्होंने उसमें आगे लिखा, “मैं एक सीधा-साधा लड़का था, जिसकी एक नॉर्मल लाइफ थी। बेहतर बनने के चक्कर में मेरी पूरी लाइफ खराब हो गई। हमारे परिवार की इज्जत, पैसा सब खत्म हो गया। आज मेरे लिए सभी बुरा-भला बोलते हैं। भीम सिंह जैसे लोग पैसे के लिए मुझे बुरा-भला बोलते हैं। हम इंसान खराब नहीं, वक्त खराब था, जो सब खत्म कर गया।”

रक्षित पर थी परिवार की जिम्मेदारी

25 साल के रक्षित के पिता रमाकांत खंडेलवाल का जयपुर में कपड़ों का शोरूम था। कोरोना महामारी के दौरान उनके व्यापार पर जबरदस्त चोट पहुँची और व्यापार पूरी तरह बर्बाद हो गया। रक्षित पर माँ मंजू खंडेलवाल एवं छोटे भाई आर्यन सहित परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी।

वे अपनी जिम्मेदारी को निभा भी रहे थे और मेहनत कर परिवार को एक बार फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच उन्होंने आत्महत्या कर ली। सुसाइड के अगले दिन उनके कमरे से सुसाइड नोट मिला तो पता चला कि वे इस झूठे केस के कारण परिवार की हो रही बेइज्जती से विचलित हो गए थे।

उन्होंने सुसाइड नोट में अपने परिवार और लोगों से बहुत भावनात्मक अपील की। उन्होंने लिखा कि वे अपने माता-पिता और परिवार से बेहद प्यार करते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी बन गई है कि वे आगे की जीवन-यात्रा को नहीं जारी रख सकते हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे उनके परिवार को परेशान ना करें, बल्कि सपोर्ट करें।

राजस्थान के जालौर में हेडमास्टर पर SC-ST एक्ट में कार्रवाई

बता दें कि राजस्थान के जालौर के सुराणा गाँव के एक विद्यालय के हेडमास्टर छैल सिंह पर मटका में पानी पीने को लेकर SC-ST एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसको लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है। वहीं, राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी कह रहे हैं कि स्कूल में मटका था ही नहीं।

स्कूल के दलित शिक्षकों एवं छात्रों का भी कहना है कि स्कूल में मटका है ही नहीं पानी पीने के लिए और सभी लोग एक ही टंकी से पानी पीते हैं। वहीं, बच्चे के पिता ने इसे जातीय रंग देते हुए अपनी प्राथमिकी में पिटाई का कारण मटका से पानी बताया है।

अधिकारियों के अनुसार, स्कूल के दो आपस में किसी बता पर झगड़ा कर रहे थे, इसी दौरान वहाँ से गुजर रहे हेडमास्टर छैल सिंह ने दोनों को एक-दो थप्पड़ लगा दिए थे। बाद में उस दलित छात्र की अस्पताल में मौत हो गई थी। इसके बाद इसे राजनीतिक रंग दे दिया गया है।