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तेज प्रताप यादव ने दी ‘मातम’ की शुभकामनाएँ, कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन भी मुहर्रम की मुबारकबाद देकर हुए ट्रोल: देखें वीडियो

बिहार में जारी राजनीतिक उठापठक जारी है। इस बीच तेज प्रताप यादव मुहर्रम पर अपनी एक हरकत के कारण सुर्ख़ियों में हैं। दरअसल, उन्होंने मातम वाले पर्व मुहर्रम के मौके पर मुस्लिमों को मुहर्रम की शुभकामनाएँ दी है। वहीं अक्सर अपने बयानों से सुर्ख़ियों में रहने वाले वाले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अधीर रंजन चौधरी ने भी मुहर्रम की बधाई देकर एक और गलती कर दी है।

हालाँकि, गलती करने के बाद जब जहाँ कॉन्ग्रेस नेता ने पोस्ट डिलीट कर दी, वहीं लालू के पुत्र तेजस्वी का मुहर्रम पर दी गई शुभकामना वायरल हो रही है।

बता दें कि डिलीट करने के बाद भी अधीर रंजन की मुहर्रम पर मुबारकबाद देती पोस्ट वायरल है। क्योंकि उनकी पोस्ट का स्क्रीन शॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग कॉन्ग्रेस नेता को ट्रोल कर रहे हैं।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने भी मीडिया से बातचीत के दौरान मुहर्रम की बधाई दी है। न्यूज एजेंसी ANI ने उसका वीडियो भी जारी किया है।

वीडियो में तेज प्रताप यादव ने कहा, “मैं पूरे देश भर में मुहर्रम पर अपने सभी मुस्लिम भाइयों को बधाई देता हूँ। ढेर सारी शुभकामनाएँ।”

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब तेज प्रताप यादव अपने बयान के कारण मुश्किलों में फँसे हैं। इससे पहले भी वो कई उल्टे-सीधे बयान देते रहे हैं। फिलहाल, लोग तेज प्रताप यादव के मुहर्रम पर दिए गए बयान को लेकर उनकी आलोचना कर रहे हैं।

गौरतलब है कि मुहर्रम शोक मनाने का 10वाँ दिन होता है। ऐसे मौके पर बधाई देना वर्जित है। मुहर्रम को रोज ए आशूरा के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि मुहर्रम इस्लामी हिजरी वर्ष का पहला महीना होता है। हिजरी वर्ष का आरंभ इसी महीने से होता है। इस माह को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है।

जबरील कुरैशी ने किया हिन्दू नाबालिग लड़की का अपहरण, दोस्तों संग मिल कर किया गैंगरेप: धर्मांतरण न करने पर परिवार को हत्या की धमकी

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप और जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। नाबालिग लड़की को प्यार का झाँसा देकर पहले जबरील कुरैशी ने उसे अगवा किया, फिर अपने चार साथियों के साथ मिलकर उसका रेप किया। इसके बाद आरोपित ने धर्म परिवर्तन न करने पर उसके पिता और भाई को जान से मारने की धमकी दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना से हिन्दू संगठनों में काफी आक्रोश है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दखल के बाद पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर आरोपित जबरील कुरैशी सहित पाँच लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मोबाइल नंबर ट्रेस कर अगवा लड़की को बरामद कर लिया है। वहीं, मुख्य आरोपित जबरील कुरैशी अपने चार साथियों के साथ अभी भी फरार है। वीएचपी ने फरार आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की माँग की है।

यह मामला खागा कोतवाली क्षेत्र का बताया जा रहा है। पीड़ित पिता ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि नाबालिग लड़की फतेहपुर के खागा इलाके में अपने ननिहाल में रहती है। 6 अगस्त को खागा के ही रहने वाले जबरील कुरैशी ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर उनकी नाबालिग बेटी को अगवा कर लिया। फिर उसे अपने घर में बंधक बनाकर उसके साथ रेप किया।

उन्होंने कहा, “आरोपितों ने धर्म परिवर्तन नहीं करने पर बेटी को धमकी दी कि वो मुझे और मेरे बेटे को जान से मार देंगे। हमारी सिर्फ इतनी सी माँग है कि आरोपितों के खिलाफ सम्बंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजे।”

बता दें कि विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय महामंत्री वीरेंद्र पांडेय ने खागा कोतवाली पहुँचकर आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की है। डीएसपी ने बताया कि पिता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर सभी की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा। जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लड़की का मेडिकल कराया गया है।

ओवैसी की पार्टी का नेता निकला ISIS आतंकी, 15 अगस्त को बम ब्लास्ट की रच रहा था साजिश: यूपी ATS ने आजमगढ़ से दबोचा

उत्तर प्रदेश ATS ने आजमगढ़ से ISIS के आतंकी सबाउद्दीन आजमी को गिरफ्तार किया है, जो स्वतंत्रता दिवस पर बम ब्लास्ट की साजिश रच रहा था। ये गिरफ़्तारी मंगलवार (9 अगस्त, 2022) को हुई है। बता दें कि देश 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है और देश भर में इसके लिए कई कार्यक्रमों की योजनाएँ है, कई चल रहे हैं। ये भी पता चला है कि ISIS आतंकी सबाउद्दीन आजमी असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का भी सक्रिय सदस्य है।

अब आतंकरोधी दस्ते की टीम सबाउद्दीन आजमी को लेकर मुख्यालय पहुँची है, जहाँ उनसे पूछताछ जारी है। इस दौरान ATS ने उनके मोबाइल फोन का डेटा भी खँगाला है। वो आतंकी जिहाद करने के लिए युवाओं का ब्रेनवॉश भी कर रहा था। ISIS द्वारा तैयार किए गए टेलीग्राम चैनल से भी वो जुड़ा हुआ है। इस चैनल का नाम ‘अल स्वायर मीडिया’ है। ATS पता कर रही है कि सबाउद्दीन आजमी कहाँ बम विस्फोट करने की साजिश रच रहा था।

जम्मू कश्मीर में जिस तरह से आतंकियों पर कार्रवाई हो रही है, इस पर वो कश्मीर के लोगों से भी बातचीत कर के उन्हें भड़का रहा था। राजनीति को ही उसने युवाओं का ब्रेनवॉश का माध्यम बनाया था। AIMIM से जुड़े हुए वो अन्य लोगों को भी अपनी आतंकी गतिविधियों में जोड़ रहा था। नगर पालिका माहुल के वार्ड नंबर 9 से उसने सभासद का चुनाव भी लड़ा था। चुनाव के प्रचार-प्रसार को जरिया बना कर वो जिहादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

आतंकी गतिविधियों के लिए वो खुद का संगठन भी तैयार कर रहा था। पार्टी के नाम से उसने अपना एक व्हाट्सएप्प ग्रुप भी बना रखा था। इसमें से इसके गिरोह के कई लोगों का खुलासा होने की आशंका है। इसके कई साथियों को जल्द ही दबोचा जा सकता है। आजमगढ़ जिले की ख़ुफ़िया यूनिट और पुलिस ने भी इस गिरफ़्तारी के बाद सक्रियता और सतर्कता बढ़ा दी है। इस गिरफ़्तारी से इस गिरोह द्वारा बम ब्लास्ट की साजिश विफल हो गई है।

मुहर्रम पर बरेली और वाराणसी में बवाल, पथराव और धारदार हथियारों से किया हमला, दर्जनों लोग हुए घायल: वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के बरेली और वाराणसी में मुहर्रम के जुलूस के दौरान बवाल हो गया। यहाँ ताजिया जुलूस के दौरान बवाल के बाद जमकर मारपीट हुई और धारदार हथियार से हमला किया गया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। सबसे ज्यादा बवाल वाराणसी के मिर्जामुराद इलाके में हुआ। यहाँ ईंट-पत्थर के साथ हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा हैं कि करधना बाजार में ताजिया ले जाते समय जामुन का पेड़ काटने को लेकर विवाद हुआ था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ताजिये के लिए खदेरू साव की दुकान के सामने छायादार जामुन के पेड़ को काटने लगे, जिसका विरोध करने पर विवाद बढ़ गया। लोगों ने कहा कि ताजिया जाने के लिए पर्याप्त रास्ता है। विवाद के बीच दुकानदार को लाठी डंडों से पीट दिया। उन्होंने दुकान को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे पूरे गाँव में अफरातफरी मच गई।

सूचना पाकर मौके पर भारी मात्रा में पुलिस फोर्स पहुँची। उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने उन्हें अलग करने के लिए बल का प्रयोग किया गया। इसी बीच जैसे ही घटना की जानकारी हिन्दू संगठन के लोगों को लगी, वे भी जय श्रीराम व वंदेमातरम का नारा लगाते हुए पहुँच गए। इसके बाद डीआईजी, एडिशनल एसपी, एसपी ग्रामीण भी वहाँ पहुँच गए।

वहीं बरेली में मुहर्रम जुलूस के दौरान भोजीपुरा के मझौआ गंगापुर में दुकानों में जमकर पत्थरबाजी की गई। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी सामने आया है। इसमें आप देख सकते हैं कि कैसे लोगों ने दूसरे समुदाय की दुकानों को निशाना बनाया है और वहाँ जमकर पथराव किया। पथराव करने वालों में महिलाएँ भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों में करीब आधे घंटे तक पत्थरबाजी होती रही, जिसको लेकर वहाँ अफरा-तफरी मच गई। हालाँकि, पुलिस अब दोनों पक्षों के लोगों से बातचीत कर मामला शांत कराने में जुट गई है।

‘मैं क्यों आमिर खान को फ्री में ट्रोल करूँ? ‘ : लाल सिंह चड्ढा के डायरेक्टर अद्वैत चंदन ने ‘ट्रोलर्स’ पर तंज कसा, बोले- मुझे भी पैसे दो

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को बॉयकॉट करने की माँग पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर ट्रेंड में हैं। इस बीच फिल्म के डायरेक्टर अद्वैत चंदन ने इस माँग को लेकर अपना रिएक्शन दिया है।

अद्वैत ने #BoycottLaalSinghChaddha ट्रेंड पर लिखा, “मुझको पता चला है कि आमिर सर को ट्रोल करने के लिए लोगों को पैसे दिए गए हैं। यह सुनकर बहुत दुख हुआ। यह ठीक नहीं है। मैं बिना पैसे के उन्हें ट्रोल क्यों करूँ?” अपने इस बयान के साथ उन्होंने ट्रोलर्स पर तंज कसने के लिए “Pay Every TRoll” लिखा।

अद्वैत चंदन की स्टोरी का स्क्रीनशॉट

बता दें कि लाल सिंह चड्ढा के आने से पहले सोशल मीडिया पर आमिर खान की कुछ पुरानी क्लिप वायरल होने लगीं थीं। एक में उन्होंने बता रखा था कि देश में असहिष्णुता के कारण उनकी बीवी देश छोड़ने की बातें करती हैं। वहीं एक में उन्होंने कहा था कि अगर लोगों को उनकी फिल्म नहीं पसंद तो वह उसे न देंखें। इसी तरह करीना कपूर की एक भी एक क्लिप सामने आई थी जिसमें वह दर्शकों पर गुस्सा जाहिर करते हुए कह रही थीं कि अगर उन्हें फिल्म नहीं पसंद तो वो न जाएँ।

इन वीडियोज के वायरल होने के बाद लोगों ने आमिर की फिल्म को बॉयकॉट करना शुरू कर दिया था। यह देख आमिर खान ने कहा भी था, “मुझे दुख होता है। मुझे ये भी लगता है कि जो ये कह रहे हैं उन्हें लगता है मैं देश से प्यार नहीं करता। लेकिन ये गलत हैं। ऐसा नहीं है। मेरी फिल्म को बॉयकॉट मत करो। प्लीज उसे देखो।”

गौरतलब है कि आमिर खान ने फिल्मी दुनिया में 4 साल बाद दोबारा एंट्री की है। उनकी फिल्म की एडवांस बुकिंग भी शुरू हो गई है। रिलीज डेट 11 अगस्त 2022 है। इसी बीच अक्षय कुमार की रक्षा बंधन भी आ रही है। ऐसे में पहले ही आमिर की फिल्म के लिए चुनौती थी। लेकिन अब इसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं क्योंकि दर्शक इसे देखने से मना कर रहे हैं।

केजरीवाल ने दिए 9 साल में सिर्फ 857 ऑनलाइन जॉब्स, चुनावी राज्यों में लाखों नौकरियों के वादे: RTI से खुलासा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनावी राज्यों में बेरोजगारों के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएँ कर रहे हैं। चाहे उत्तराखंड हो, गोवा, पंजाब हो या गुजरात हर राज्य के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा केजरीवाल ने जो ने बेरोजगार युवाओं ख्वाब दिखाए हैं न। दिल्ली उसी सपने के टूटने का दंश झेल रही है। मतलब जहाँ सत्ता में हैं वहाँ तो रोजगार का आँकड़ा पिछले 9 साल में भी हजार के आँकड़ें तक नहीं पहुँचा लेकिन चुनावी राज्यों में रोजगार देने के साथ-साथ यदि किसी बेरोजगार युवा को रोजगार नही मिल पाता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का वादा भी कर डाला है।

दरअसल, केजरीवाल के रोजगार को लेकर बड़े-बड़े वादों और विज्ञापनों की पोल दिल्ली में नौकरियों पर डाले गए एक RTI ने खोल दी है। RTI एक्टिविस्ट विवेक पांडेय के द्वारा दायर की गई एक आरटीआई ने दिल्ली सरकार के कथनी और करनी के अंतर को उजागर कर दिया है। उनकी कथन औऱ करनी में बहुत बड़ा अंतर है, जोकि अब साफ साफ नजर आ रहा है।

दिल्ली में लाखों नौकरियों के वादे निकले झूठ

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार के द्वारा बेरोजगार युवाओं को दिए गए रोजगार की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विवेक पांडेय के द्वारा ऑनलाइन माध्यम से एक आरटीआई रोजगार निदेशालय में दायर की गई थी। जिसमें वर्ष 2014 से 2022 के बीच अब तक दिल्ली सरकार के द्वारा दी गई नौकरियों की कुल संख्या का वर्षवार विवरण एवं नौकरियों की संख्या और दिए गए रोजगार का नाम शामिल था। जिसके जवाब में रोजगार निदेशालय ने जो आँकड़ें दिए हैं। वह चौंकाने वाले है और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के झूठे वादों की पोल खोल रहे है।

रोजगार निदेशालय के द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया है कि वर्ष 2014 से अब तक मात्र 857 रोजगार ही दिए गए जिसमें 2014 में – 417, वर्ष 2015- 176, वर्ष 2016- 102, वर्ष 2017- 66, वर्ष 2018- 68, वर्ष 2019 – 0, वर्ष 2020- 28 , वर्ष 2021- 0, वर्ष 2022 में भी अभी तक मामला 0 पर अटका हुआ है। इन आँकड़ों को आप दिए गए RTI जवाब में देख सकते हैं।

बता दें कि आरटीआई से मिली यह सूचना स्वयं दिल्ली सरकार की है। इससे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल स्वयं भी इनकार नहीं कर सकते। यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि आरटीआई में माँगी गई जानकारी भी अधूरी दी गई है। विभाग ने यह नही बताया कि यह रोजगार के पद क्या हैं, साथ ही इनमें क्या सरकारी एवं प्राइवेट नौकरियाँ दोनों शामिल हैं।

14 लाख से ज्यादा बेरोजगार युवाओं को है दिल्ली में रोजगार ली तलाश

बता दें कि दिल्ली सरकार के द्वारा वर्ष 2020 रोजगार बाजार को लॉन्च किया गया था। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मुताबिक, यह पोर्टल बेरोजगार युवाओं और दिल्ली के छोटे व्यापारियों के लिए लाइफलाइन साबित हुआ था। इस पोर्टल पर अब तक 14 लाख बेरोजगार लॉगिन कर चुके हैं। वहीं 10 लाख रोजगार को रोजगार बाजार पोर्टल पर एडवर्टाइज किया गया है।

अब आप खुद समय सकते हैं कि जहाँ अरविन्द केजरीवाल 9 साल से शासन में हैं वहाँ का यह हाल है। दिल्ली में रोजगार की वास्तविक स्थिति दिल्ली सरकार द्वारा ही दिए गए आरटीआई जवाब में साफ-साफ नजर आ रही है। वैसे शुरू से ही अरविंद केजरीवाल के ज्यादातर वायदे झूठे साबित हुए हैं। इन्हें देख कर यही लगता है कि मुख्यमंत्री जी बस सत्ता में आने के लिए जनता से झूठे वादों की एक झड़ी लगा रहे हैं। बस एक बार सत्ता आ जाए बाद की बाद में देखी जाएगी।

रामविलास का पूरा कुनबा BJP के साथः पशुपति पारस बोले- हम नहीं नीतीश के साथ, चिराग ने कहा- बिहार में लगे राष्ट्रपति शासन

बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता यूनाइटिड दल (जदयू) का गठबंधन टूटने के बाद दूसरे दलों के नेताओं ने नीतीश के फैसले पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्री व लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष पशुपति पारस ने जहाँ जदयू और राजद के होने वाले गठबंधन को बिहार के लिए अच्छा संकेत नहीं माना। वहीं चिराग पासवान ने नीतीश कुमार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।

केंद्रीय मंत्री व आरएलजेपी अध्यक्ष पशुपति पारस ने कहा, “इससे पहले भी राजद और जदयू के बीच प्रयोग हुआ था, लेकिन वह चला नहीं। दोबारा ऐसा गठबंधन आ रहा है। ये बिहार के विकास के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं। हमने सोच लिया है कि हमारी पार्टी एनडीए का ही हिस्सा बनकर रहेगी।”

वही रामविलास पासवान के बेटे व लोजपा नेता चिराग पासवान ने कहा, “नीतीश कुमार की विश्वसनीयत शून्य है। हम चाहते हैं कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो। राज्य में फिर चुनाव हों। तुम्हारी (नीतीश कुमार) कोई विचारधारा है या नहीं? अगले चुनावों में जदयू को जीरो मिलेगा।”

बता दें कि बिहार में एक बार फिर से दल बदलने के लिए आगे बढ़ चुकी नीतीश कुमार ने अपने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद वो पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर राजद नेताओं से मिलने के लिए निकल गए। 

इस्तीफा देते समय मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, “सभी सांसद और विधायक इस बात पर सहमत हुए कि हमें NDA छोड़ देना चाहिए। इसके तुरंत बाद मैंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।”

उल्लेखनीय हैं कि ऐसी खबरें आ रही हैं कि 160 विधायकों के समर्थन का पत्र पेश करते हुए नीतीश कुमार ने नई सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। वामपंथी दल पहले ही उन्हें समर्थन का ऐलान कर चुके हैं और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी उनकी फोन पर बात हुई है। तेजस्वी यादव के साथ बैठक के बाद महागठबंधन की नई सरकार का औपचारिक ऐलान होगा।

जब सिंध में हिन्दुओं-सिखों का हो रहा था कत्लेआम, 10000 स्वयंसेवकों के साथ पहुँचे थे ‘गुरुजी’: भारत-Pak विभाजन के समय कहाँ थे कॉन्ग्रेस नेता?

आज़ाद भारत के इतिहास में आज़ादी का दिन 15 अगस्त जितना महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है, उतना ही महत्व रखने वाले 15 अगस्त के पहले के कुछ दिन भी है। वे 15 दिन और उनमें होने वाली घटनाएँ आने वाले भविष्य के लिए निर्णायक होने वाली थीं। 1 से 15 अगस्त की कुछ विशेष घटनाओं और इन दिनों के दौरान प्रमुख नेताओं ने क्या गतिविधियाँ की, इस पर प्रशांत पौल द्वारा लिखी पुस्तक “वे पन्द्रह दिन” कुछ रोचक तथ्य सामने लाती है।

यह पुस्तक कुछ नवीन चर्चाओं को जन्म भी देती है जो चिंता करने योग्य है। भारत अपनी आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा है, लेकिन हमें इस उत्साह के वातावरण में विभाजन के कारणों को नहीं भूलना चाहिए। यह भी नहीं भूलना चाहिए की आज़ादी हमें मिली नहीं थी, बल्कि अनेक वीरों के वर्षों के संघर्ष के बाद हमने पाई थी। 15 अगस्त, 1947 के कुछ दिनों पहले आज़ादी मिलने की जितनी ज्यादा खुशी और उत्साह था, उतना ही विभाजन के प्रति भय और आक्रोश भी था।

जैसे-जैसे आजादी का दिन निकट आ रहा था, एक नया वातावरण तैयार हो रहा था। यह वातावरण आज़ाद भारत की खुशी का भी था और विभाजन के दुख का भी। विभाजन, जिसकी नींव मजहब पर रखी गई, उसने अपने ही घरों और मकानों में रहने वाले लोगो को शरणार्थी बना दिया था। जल्द ही पाकिस्तान बनने वाले भारत के उस हिस्से में भय पूर्ण वातावरण बना चुका था। लाहौर और कराची इस आग में जल रहे थे और जल रहे थे वो लोग, जो बचपन से वहाँ पैदा हुए और बड़े हुए।

हिंदुओं और सिखों के लिए अब कई पाकिस्तान बनने वाले भारत में रहना जैसे एक जुर्म बन गया था, जिसकी सज़ा थी केवल मौत। हिंदू और सिख व्यापारियों को भगाना, मारना और उनकी बहन-बेटियों को उठा ले जाना अब आम बात बनती जा रही थी। ‘मुस्लिम नेशनल गार्ड’ जैसे संगठन आक्रमकता बढ़ा रहे थे और दंगे भड़का रहे थे। दंगों, आगजनी, लूटपाट और बलात्कार के इस अशांत वातावरण के बीच हिंदू और सिखों की रक्षा और मदद के लिए कौन था? उन लोगों की दुःख एवं पीड़ा को अपनी पीड़ा समझ कर आगे नहीं आई कोई राजनीतिक पार्टियाँ और ना ही आए वह नेता, जो उस समय इतिहास में खुद को दर्ज कराना चाहते थे।

उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ही था, जिसने कराची और लाहौर जैसे प्रांतों में रहने वाले हजारों लाखों सिखों को यह अहसास दिलाया की उनके साथ भी कोई है और वे एकजुट रहें। दंगों और आगजनी के बीच संघ के प्रमुख गुरु गोलवलकर 5 अगस्त से चार दिन के सिंध प्रांत के प्रवास पर जाने वाले थे। अपनी जान की चिंता न करते हुए, गुरु जी ही थे जो जमीनी स्तर पर जा कर, उस अशांत और भयपूर्ण वातावरण में भी हिंदुओं और सिखों के लिए डट कर खड़े थे।

5 अगस्त के दिन बंबई के जुहू से गुरू जी टाटा एयर सर्विसेज के विमान से कराची के लिए रवाना हुए। गुरु जी की सुरक्षा का जिम्मा स्वयंसेवकों ने अपने हाथों में लिया हुआ था। शांत रहने वाले कराची एयरपोर्ट पर उस दिन काफी चहल पहल थी और क्योंकि की आज गुरु जी यहाँ आने वाले थे। स्वयंसेवकों के मन में एक चिंता भी थी, क्योंकि गुरु उस सिंध प्रांत के प्रवास पर थे जो दस दिनों के भीतर ही पाकिस्तान में जाने वाला था।

जिस कराची को पाकिस्तान की स्थायी राजधानी कहा जा रहा था, ऐसे शहर में हिंदुओं का पथ-संचलन निकालना और गुरु जी की आमसभा आयोजित करने की सोचना भी एक साहसी कदम था। और ऐसा ही हुआ। संघ ने दस हज़ार स्वयंसेवकों का यह शानदार संचलन निकाला। सुरक्षा ऐसी थी कि किसी भी मुस्लिम की हिम्मत नहीं हुई कि इस पर हमला कर दे। कराची के प्रमुख चौराहे के पास स्थित खाली मैदान में गुरू जी की आमसभा हुई।

इसमें उन्होंने कहा, “हमारी मातृभूमि पर एक बड़ी विपत्ति आन पड़ी है। मातृभूमि का विभाजन अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति का ही परिणाम है। मुस्लिम लीग ने जो पाकिस्तान हासिल किया है, वह हिंसात्मक पद्धति से, अत्याचार का तांडव मचाते हुए हासिल किया है। हमारा दुर्भाग्य है कि कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए। मुस्लिमों और उनके नेताओं को गलत दिशा में मोड़ा गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि वे इसलाम पंथ का पालन करते हैं, इसलिए उन्हें अलग राष्ट्र चाहिए। जबकि देखा जाए तो उनके रीति-रिवाज, उनकी संस्कृति पूर्णतः भारतीय है अरबी मूल की नहीं।”

उन्होंने आगे कहा था, “यह कल्पना करना भी कठिन है कि हमारी खंडित मातृभूमि, सिंधु नदी के बिना हमें मिलेगी। यह प्रदेश सप्त सिंधु का प्रदेश है। राजा दाहिर के तेजस्वी शौर्य का यह प्रदेश है। हिंगलाज देवी के अस्तित्व से पावन हुआ, ये सिंध प्रदेश हमें छोड़ना पड़ रहा है। इस दुर्भाग्यशाली और संकट की घड़ी में सभी हिंदुओं को आपस में मिल-जुलकर, एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए। संकट के यह दिन भी खत्म हो जाएँगे, ऐसा मुझे विश्वास है।”

5 अगस्त को जब दिल्ली में बड़े नेता सोए हुए थे और लाहौर, बंगाल व पंजाब में भीषण दंगों का दौर चल रहा था, उस समय भी गुरु जी जैसा तपस्वी मातृभूमि की रक्षा के लिए तत्पर था। 6 अगस्त को गुरुजी स्वयंसेवकों की भारी सुरक्षा के साथ हैदराबाद जो की कराची से 94 मील दूर है, वहाँ के लिए रवाना हुए। गुरु जी हैदराबाद में हिंदुओं को भारत कैसे सुरक्षित पहुँचाया जाए, इस बात का चिंतन कर रहे थे। इसी को लेकर लगभग दो हजार स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण वहाँ हुआ।

आज़ाद भारत की होने वाली सरकार को यह होश ही नहीं था कि सिंध में क्या हो रहा है। हजारों लाखों हिंदू सिखों को सुरक्षित भारत लाना – यह सोचने और करने वाला सिर्फ RSS ही था। ऐसे अनेकों महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, जो हमें आसानी से इतिहास की पुस्तकों में नहीं मिलते। यह प्रसंग हमें इतिहास को एक अलग दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित भी करता है और विभाजन के कारणों से अवगत भी। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमने अपने दो हाथ, जो आज पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं, उनको अपने से अलग करके आज़ादी प्राप्त की थी।

देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। आज पाकिस्तान में जहाँ हिन्दू समाज लगभग समाप्त ही हो गया है, वही बांग्लादेश में भी हिन्दू जनसंख्या में भरी गिरावट आई है। हिन्दू या अन्य अल्पसंख्यक धर्मों के लोगों पर निरंतर हमले होते रहते है, उनका जबरन धर्मांतरण किया जाता है। भारतीयों को इन विषयों से अवगत रहना चाहिए, ताकि हमारे देश कि एकता, अखंडता एवं संप्रभुता अखंडता पर फिर से कोई प्रश्न ना उठा सके।

(लेखक सतीश कुमार और निखिल यादव विवेकानंद केंद्र, उत्तर प्रांत के क्रमशः विभाग एवं प्रांत युवा प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं)

‘बच्चा ऐसे ही होता है’: रेप के आरोप में मिर्ची बाबा गिरफ्तार, दिग्विजय सिंह की जीत के लिए किया यज्ञ, कमलनाथ सरकार में था राज्यमंत्री का दर्जा

वैराज्ञानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसे ग्वालियर के एक होटल से पकड़ा गया। कॉन्ग्रेस का करीबी रहा मिर्ची बाबा 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त तब चर्चा में आया था, जब उसने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जीत के लिए यज्ञ किया था। कॉन्ग्रेस नेता की हार पर उसने समाधि लेने की बात कही थी। साध्वी प्रज्ञा ने उस चुनाव में दिग्विजय सिंह को पराजित किया था।

भोपाल-ग्वालियर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बाबा (Mirchi Baba Rape Case) को गिरफ्तार किया। पीड़िता के मुताबिक, वह संतान प्राप्ति के लिए बाबा से मिली थी। लेकिन मिर्ची बाबा ने मौके का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। साथ ही धमकाया कि वह इस बारे में किसी को नहीं बताए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता रायसेन जिले की रहने वाली है। उसने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि उसकी शादी को चार साल हो चुके हैं, लेकिन कोई संतान नहीं हैं। संतान प्राप्ति की चाह में वह मिर्ची बाबा के पास पूजा-पाठ के लिए गई थी, लेकिन बाबा ने संतान होने का दावा कर उसे इलाज के नाम पर नशे की गोलियाँ खिलाकर उसके साथ बलात्कार किया। विरोध करने पर बाबा ने कहा कि बच्चा ऐसे ही होता है। यह घटना इसी साल जुलाई की बताई जा रही है। पीड़िता के बयान के बाद कथित बाबा पर धारा 376, 506 और 342 के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

बता दें कि वैराज्ञानंद को नागा साधु का दर्जा हासिल है, वह कॉन्ग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। इसके साथ ही उसे कमलनाथ सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल चुका है।

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, राबड़ी देवी के आवास पर नई सरकार के लिए मंथन: बोली JDU – देश कर रहा इंतजार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद वो पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर राजद नेताओं से मिलने के लिए निकल गए। जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “नए स्वरूप में नए गठबंधन के नेतृत्व की जवाबदेही के लिए नीतीश कुमार को बधाई। नीतीश जी आगे बढ़िए, देश आपका इंतजार कर कर रहा है। नीतीश कुमार ने शाम के 4 बजे मंगलवार (9 अगस्त, 2022) को राज्यपाल फागू चौहान को अपना इस्तीफा सौंपा।

इस्तीफा देते समय मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, “सभी सांसद और विधायक इस बात पर सहमत हुए कि हमें NDA छोड़ देना चाहिए। इसके तुरंत बाद मैंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।” वामपंथी दल पहले ही उन्हें समर्थन का ऐलान कर चुके हैं और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी उनकी फोन पर बात हुई है। तेजस्वी यादव के साथ बैठक के बाद महागठबंधन की नई सरकार का औपचारिक ऐलान होगा।

ये भी कहा जा रहा है कि 160 विधायकों के समर्थन का पत्र पेश करते हुए नीतीश कुमार ने नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है।