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नोएडा में जिसने महिला से की गाली-गलौच, उसके अवैध निर्माण पर चला हथौड़ा: बुलडोजर देख लगे ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे, SHO भी सस्पेंड

महिला से गाली-गलौच करने वाला श्रीकांत त्यागी नोएडा की जिस ग्रैंड ओमैक्स सोसायटी में रहता है, सोमवार (8 अगस्त 2022) को वहाँ बुलडोजर ने दस्तक दी। त्यागी के अवैध निर्माण को दस्ते ने तोड़ दिया। इस बीच त्यागी को सरकारी गनर दिए जाने की खबरों का पुलिस ने खंडन किया है। साथ ही फेज टू के एसचओ सुजीत उपाध्याय को पीड़ित महिला की सुरक्षा में चूक की वजह से सस्पेंड कर दिया गया है।

5 अगस्त 2022 को एक वीडियो सामने आया था। इसमें त्यागी एक महिला के साथ अभद्रता करता दिख रहा है। फिलहाल वह फरार है। उसके घर में तहखाना होने का भी दावा किया जा रहा था। लेकिन परिजनों ने इसका खंडन करते हुए उसे स्टोर रूम बताया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए बुलडोजर सोसायटी में पहुँचा तो स्थानीय लोगों ने ताली बजाकर उसका स्वागत किया। साथ ही योगी जिंदाबाद के नारे लगाए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीकांत त्यागी के घर के आस-पास के अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया है। नोएडा के पुलिस कमिश्नर अलोक सिंह ने बताया कि घटना के बाद ओमेक्स सोसायटी में घुसे 7 आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

बता दें कि रविवार (7 अगस्त 2022) को कुछ संदिग्ध लोग ओमेक्स सोसायटी में घुस गए थे। आरोप है कि उन्होंने श्रीकांत त्यागी पर छेड़छाड़ और अभद्रता का केस दर्ज करवाने वाली महिला के फ़्लैट पर जाकर उसे धमकाया। शोरगुल सुन कर आसपास के लोग जमा हुए और वहाँ अफरातफरी का माहौल खड़ा हो गया। इस दौरान मौके का फायदा उठा कर आरोपित फरार हो गए। इस घटनाक्रम के बाद जब गौतमबुद्ध नगर से भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा घटनास्थल पर पहुँचे तो उन्हें लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ा। उन्होने स्थानीय पुलिस पर अपनी नाराजगी जताई।

त्यागी के घर में तहखाने की बात का उनके परिजनों ने खंडन किया है। आज तक के मुताबिक श्रीकांत त्यागी की बहन ने बतया, “हमारे जिस स्टोर रूम को तहखाना बताया जा रहा है, वैसा स्टोर रूम सोसायटी के कई लोगों के फ़्लैट में बना है। इसके साथ सीढियाँ लगी हुई है, जिससे हम सामान ऊपर ले जाते हैं। भैया ने जो गलत किया उसका समर्थन हम परिवार वाले भी नहीं करते। लेकिन जिस प्रकार से सोसायटी वाले हमारे पीछे लगे हैं वो गलत है।”

वहीं नोएडा पुलिस के ADCP रणविजय सिंह ने नोएडा पुलिस द्वारा श्रीकांत त्यागी को गनर दिए जाने की बात का खंडन किया है। उन्होंने कहा, “नोएडा पुलिस द्वारा आरोपित श्रीकांत को कोई कभी कोई गनर नहीं मिला था। पुलिस टीमें आरोपित को पकड़ने का प्रयास कर रहीं हैं। जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।”

मदरसे में काट रहे थे पशु, मौलाना समेत 4 गिरफ्तार: महिलाओं के शामिल होने की भी खबर, शाहजहाँपुर का मामला

उत्तर प्रदेश (UP) के शाहजहाँपुर जिले के एक सरकारी मदरसे में पशुओं की अवैध कटान का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने मदरसे में छापा मार कर लगभग एक क्विंटल मांस बरामद किया है। इस मामले में 4 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें एक मौलाना भी है। अवैध कटान में कुछ महिलाओं के भी शामिल होने की जानकारी सामने आ रही है। मामला रविवार (7 अगस्त 2022) का है।

शाहजहाँपुर पुलिस के मुताबिक कांट थानाक्षेत्र के मोहल्ला पट्टी में यह सरकारी मदरसा है। पुलिस को मुखबिर ने यहाँ अवैध पशु कटान की जानकारी दी थी। जानकारी पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर एक भैंस का निर्ममता से कत्ल करते हुए शादान कुरैशी, आमिर, बाबर और मौलाना वसीउद्दीन को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार हुए सभी आरोपित शाहजहाँपुर जिले के ही रहने वाले हैं।

पुलिस प्रेसनोट

पुलिस के मुताबिक जिस मदरसे में पशु काटे जा रहे थे, वहीं मौलाना बसीउद्दीन का घर भी है। वहाँ से पुलिस ने करीब एक क्विंटल भैंस का मांस, पशु काटने के औजार, पशु का कटा सिर और खाल बरामद किया है। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 429 व धारा 3/11(ठ) पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अवैध कटान में कुछ महिलाएँ भी सहयोग कर रहीं थीं।

शाहजहाँपुर के डिप्टी SP सदर अखंड प्रताप सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

गुजरात की समुद्री सीमा में घुस रहा था पाकिस्तानी जंगी जहाज ‘आलमगीर’, भारत के ‘डार्नियर’ की उड़ान देखकर भागा

भारत की सीमा में घुसने का प्रयास पाकिस्तान हर तरफ से करता रहता है। हाल में उसके जंगी जहाज पीएनएस आलमगीर ने समुद्री रास्ते से भारत में घुसपैठ की कोशिश की थी। लेकिन, इंडियन कोस्ट गार्ड पर तैनात डोर्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्ट ने उसे खदेड़कर वापस लौटा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएनएस आलमगीर को आता देख पहले भारतीय एयरक्राफ्ट ने चेतावनी जारी की। लेकिन, इसके बावजूद वह भारत की ओर आता रहा और कोई जवाब तक नहीं दिया। भारत ने अपनी ओर से कोई एक्शन लेने से पहले उन्हें रेडियो संचार सेट पर कॉल भी किया। मगर फिर भी उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद भारतीय डॉर्नियर ने उस जहाज को खदेड़ने की कार्रवाई शुरू की, जिसे देख पाकिस्तानी जहाज का कप्तान घबराया और आलमगीर को भारतीय समुद्री सीमा से बाहर निकाल ले गया।

बताया जा रहा है कि भारतीय सीमा से आलमगीर को भगाने के लिए इंडियन डॉर्नियर ने उसके सामने दो से तीन दफा एग्रेसिव फॉर्मेशन में उड़ान भरी। यही देख पीएनएस कप्तान को पता चल गया कि भारत गुस्से में एक्शन लेने की बात कर रहा है। पीएनएस के वापस जाते समय भारत ने उस पर लगातार नजर बनाए रखी।

बता दें कि घुसपैठ की यह घटना जुलाई 2022 के शुरुआती दिनों की हैं। पाकिस्तानी पीएनएस ने गुजरात के नजदीक समुद्री सीमा में घुसने की कोशिश की थी। ये वो जगह है जहाँ भारत अपने देश के मछुआरों को भी जाने की अनुमति नहीं देता है। यहाँ की सुरक्षा में इंडियन कोस्ट गार्ड और इंडियन एयर फोर्ट तैनात रहते हैं ताकि पाकिस्तान की किसी भी घटिया हरकत को अंजाम तक न पहुँचने दिया जा सके।

यहाँ की सुरक्षा को देखने के लिए कुछ दिन पहले ही डायरेक्टर जनरल वी एस पठानिया ने भी कुछ दिन पहले ही पोरबंदर क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने तटीय इलाके की निगरानी के लिए नए कोस्ट गार्ड में ध्रुव हेलिकॉप्टर्स को शामिल किया था। इन्हीं एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर्स और कोस्ट गार्ड के जहाजों से दिन-रात समुद्री तट की निगरानी होती है। इनका काम आने वाले खतरों पर नजर रखना होता है।

जिस खेल में भारत ने जीता 34% गोल्ड मेडल, उसे कॉमनवेल्थ वालों ने हटा दिया: रिकॉर्ड तोड़ कर भी अपने पिछले प्रदर्शनों से पीछे रह गया भारत

आपने अभिनव बिंद्रा का नाम सुना होगा, जिन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था। या फिर जसपाल राणा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (2004 एथेंस ओलंपिक में चाँदी) और गगन नारंग (2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य) के नाम से आप परिचित होंगे। महिलाओं में हीना सिद्धू, श्रेयसी सिंह और युवा मनु भाकर का नाम आपने कहीं न कहीं पढ़ा होगा। जिन्हें खेलों में दिलचस्पी है, वो रंजन सोढ़ी, सौरभ चौधरी और जीतू राय के नामों से भी परिचित होंगे। 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक विजेता विजय कुमार को भी जानते होंगे। इन सब ने एक से बढ़ कर एक रिकार्ड्स बनाए और तोड़े हैं।

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन

बर्मिंघम में चल रहे 63वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत मेडल का पचासा पूरा करने पर है, जिसमें 17 स्वर्ण पदक शामिल हैं। भारत इस समय मेडल की अंक तालिका में चौथे स्थान पर काबिज है। उससे ऊपर क्रमशः ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा हैं। अब हो सकता है कि कॉमनवेल्थ खेलों के बाद भारत में राजनीतिक खेल शुरू हो जाए और बताया जाए कि भारत ने फलाँ साल से कम मेडल जीते हैं, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री हुआ करते थे।

लेकिन, भारत की मेडल टैली तुलनात्मक रूप से कम होने के पीछे दूसरे कारण हैं। 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 101, 2014 में 64 और 2018 में 66 मेडल जीते थे। अब आपको बताते हैं कि फर्क क्या है। 2010 में भारत ने शूटिंग में 30 (29.70%), 2014 में 17 (26.56%) और 2018 में 16 मेडल (24.24%) जीते थे। जैसा कि आप देख रहे हैं, हर साल भारत ने शूटिंग में काफी अच्छा प्रदर्शन किया।

इतना ही नहीं, अब तक शूटिंग में भारत ने 503 में 135 मेडल (26.83%) जीते हैं और यही वो खेल हैं जिसमें हमारे देश ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। अब आप सोच रहे होंगे कि हम शूटिंग की बात क्यों कर रहे। असल में इसका कारण ये है कि इस बार बर्मिंघम में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को शामिल नहीं किया गया है। अगर शूटिंग होता, तो हो सकता था कि भारत की मेडल संख्या पिछले प्रदर्शनों को देखते हुए इससे कहीं अधिक होती।

कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को क्यों हटाया गया?

आप अंदाज़ा लगा लीजिए कि 2022 से पहले भारत के पास आए 181 स्वर्ण पदकों में से 63 (34.08%) अकेले शूटिंग में आए थे, अर्थात एक तिहाई से भी अधिक। कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को ‘लॉजिस्टिक्स’ का कारण देकर हटा दिया गया और भारत ने इस खेल से हटने की भी चेतावनी दी, लेकिन ‘कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (CGF)’ के वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे के बाद मामला शांत हो गया। इसके लिए चंडीगढ़ में अलग से शूटिंग और तीरंदाजी की प्रतियोगिता का ऐलान किया गया, लेकिन 2021 में कोरोना के कारण ये संभव न हो सका।

सहमति बनी थी कि इसकी मेडल टैली को कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ जोड़ा जाएगा। भारत को शूटिंग प्रतिस्पर्धा में 44 चाँदी और 28 कांस्य के पदक जीते हैं। शूटिंग को प्रतियोगिता से हटाए जाने के कारण शूटर्स और उनके कोच और संगठनों/संस्थाओं में नाराजगी भी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ वाले भारत को आगे इन देशों से बेहतर करता नहीं देखना चाहते। कई युवा शूटर इस गम से इन खेलों को देख ही नहीं रहे। यही कारण है कि भले ही भारत ने शनिवार (6 अगस्त, 2022) को एक दिन में 14 मेडल जीत इतिहास रच दिया हो, मेडल रैली शूटिंग न होने के कारण कम दिख रही है।

‘नंगी फोटो जूम करके देख रही थी, तभी बेटा आ गया…’ : ट्विंकल खन्ना ने रणवीर के न्यूड फोटोशूट पर दिया रिएक्शन, बताया- होना पड़ा शर्मिंदा

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट पर बॉलीवुड से प्रतिक्रियाएँ आने का सिलसिला अब भी जारी है। हाल में रणवीर की तस्वीरों पर ट्विंकल खन्ना ने रिएक्ट किया है। ट्विंकल ने कहा कि रणवीर की तस्वीर को उन्होंने ध्यान से देखा लेकिन उन्हें उसमें कुछ भी नहीं दिखा। उन्होंने ये भी बताया कि ये फोटो देखते हुए उन्हें उनके बेटे ने पकड़ लिया था।

ट्विंकल खन्ना ने रणवीर सिंह की न्यूड फोटो पर लिखे अपने ब्लॉग में कहा कि रणवीर अंडर एक्सपोज्ड हैं और दूरबीन या मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर जूम करके देखने के बावजूद उन्हें कुछ भी नजर नहीं आया हैl बस दो पैरों के बीच उन्हें छाया ही दिख रही थीं।

बेटे ने ट्विंकल को पकड़ा

ट्विंटल ने इस फोटो शूट पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि वो जब रिसर्च के लिए रणवीर की तस्वीर को लैपटॉप स्क्रीन पर जूम करके देख रही थीं तभी उनका बेटा आरव पीछे से आ गया और उन्हें ऐसे में समय में शर्मिंदा होना पड़ा।

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखे अपने आर्टिकल में बताया, “मैं मेरी स्क्रीन पर रणवीर की फोटोज को देख रही थी, तभी मेरा बेटा आ गया, मैंने उसे बताया कि यह रिसर्च के लिए है। जहाँ लोग महिलाओं के नंगे शरीर को घूरते हैं, वहीं पुरुषों के शरीर को देखने से बचते हैं।”

सास से जुड़ा किस्सा बताया

ट्विंकल ने अपने ब्लॉग में अपनी सास से जुड़े एक किस्से को भी साझा किया। उन्होंने बताया, “कुछ साल पहले की बात है… पम्मी बुआ, जिन्हें आज भी ऑडियो या वीडियो कॉल से फर्क नहीं पड़ता, उन्होंने अपने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया था। तब बाथरूम में उनके 72 साल के पति अपना टॉवल खोल रहे थे। उन्होंने अपने पति से कहा- ‘मोहनजी, लीजिए फोन, दीदी ने मुंबई से आपको बर्थडे विश करने के लिए फोन किया है।’ इस पर मेरी सास ने तुरंत फोन को काट दिया। क्योंकि उन्हें मोहनजी बिन कपड़ों के दिख गए थे।”

विद्या बालन की प्रतिक्रिया का समर्थन

ट्विंकल ने रणवीर सिंह का फोटोशूट देखने के बाद जो विद्या बालन का रिएक्शन आया, उस पर भी अपनी सहमति व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें रणवीर के न्यूड फोटोशूट से दिक्कत नहीं है। उन लोगों को भी आँख सेंकने का मौका मिलना चाहिए।

‘फाँसी चढ़ा दो, माफ़ी नहीं माँगूँगा’: बोला सैनिटरी पैड पर श्रीकृष्ण को दिखाने वाला डायरेक्टर, यूपी में केस दर्ज

फिल्म ‘मासूम सवाल’ में सैनिटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण को दिखाए जाने पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में निर्माता-निर्देशकों पर FIR दर्ज की गई है। ये मामला ‘हिंदू राष्ट्र नवनिर्माण सेना’ के संस्थापक अमित राठौड़ ने दर्ज कराया है। निर्देशक संतोष उपाध्याय के अलावा ‘NAKSHATRA 24 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक और फिल्म से जुड़े अन्य लोगों को भी इसमें नामजद किया गया है। साहिबाबाद थाने में ये मामला दर्ज हुआ है।

साहिबाबाद थाने के पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार त्रिपाठी ने इस मामले की जाँच सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद्रा को सौंप भी दी है। बयान दर्ज करने के लिए फिल्म के निर्देशक को नोटिस जल्द ही जाने वाला है। IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-295 (किसी वर्ग की धार्मिक मान्यताओं या विश्वास का अपमान करना) के तहत ये केस दर्ज हुआ है। अमित राठौड़ ने इस दौरान कहा कि आमिर खान जैसों की फिल्मों का आजकल बहिष्कार इसीलिए हो रहा है, क्योंकि उन्होंने बार-बार हिन्दुओं की भावनाओं को आहत किया है।

हालाँकि, निर्देशक संतोष उपाध्याय कह रहे हैं कि वो किसी भी कीमत पर माफ़ी नहीं माँगेंगे, भले ही उन्हें फाँसी पर क्यों न लटका दिया जाए। ‘TV9 भारतवर्ष’ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पोस्टर को लेकर हंगामे की उन्हें उम्मीद नहीं थी, क्योंकि उनका ऐसा कुछ उद्देश्य ही नहीं था। उन्होंने इसे एक क कमर्शियल फिल्म न बताते हुए मैसेज देने के लिए बनी फिल्म बताया और कहा कि फिल्म में मासिक धर्म के दौरान प्रतिमा के स्पर्श को दिखाया गया है।

उन्होंने फिल्म का विरोध करने वालों को ‘धर्म का ठेकेदार’ बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर अभिनेत्री के हाथों में है, ये ज़ूम करने पर पोस्टर में दिख सकता है। उन्होंने इसे बेवजह की कंट्रोवर्सी बताते हुए ये भी कहा कि किसी भी उम्र के लोग इस फिल्म को देख सकते हैं, सेंसर बोर्ड से इसे सर्टिफिकेट मिला है। 2 घंटे 25 मिनट की इस फिल्म का आधार उन्होंने बताया कि मासिक धर्म अशुभ नहीं होता – यही दिखाया गया है।

बता दें कि इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि बॉलीवुड अपनी दुर्गति के बावजूद हिन्दू विरोध में डूबा हुआ है।  दावा किया जा रहा है कि इस फिल्म को महिलाओं को आने वाले पीरियड्स और इसकी समस्याओं पर बनाया गया है। मेंस्टुरेशन पर बनी इस फिल्म में सैनिटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण को दिखाए जाने का विरोध हो रहा है। अभिनेत्री एकावली खन्ना ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार के विरोध के अभियान की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो निर्माताओं का किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई आशय नहीं था।

‘रेप पीड़िताओं की हत्या के पीछे मोदी सरकार’ : ‘फर्जी’ कानून गढ़ कर CM गहलोत ने केंद्र पर लगाया इल्जाम, जानें रेप दोषी को कब मिलती है मौत की सजा?

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रेप के बाद होती हत्याओं के पीछे का सारा दोष कुछ दिन पहले केंद्र पर मढ़ा था। उन्होंने कहा था कि ये जो केंद्र ने निर्भया कांड के बाद रेप दोषियों को फाँसी की सजा देने का कानून बना दिया है उसकी वजह से हालात बद्तर हो गए हैं।

उन्होंने अपनी 4 मिनट 36 सेकेंड की प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश में बच्चियों के साथ हो रहे दुष्कर्म पर चिंता जाहिर तो की थी। मगर साथ ही ये भी कहा था,

“ऐसा कानून बनने के बाद, रेप पीड़िताओं को मारने के मामले बढ़ गए हैं। जब दोषी देखते हैं कि वो पीड़िता तो उन्हें सजा दिला सकती है, उनके खिलाफ गवाह बन सकती है, तो वह उन्हें मार देते हैं। मैं ये सब हमारे देश में बहुत ज्यादा होता देख रहा हूँ। ये लोकतंत्र पर खतरा है। हमने ऐसी स्थिति पहले बिलकुल नहीं देखी थी”

अशोक गहलतो के दावों में कितनी सच्चाई? क्या है कानून?

रेप दोषियों को सजा-ए-मौत दिए जाने वाले सीएम गहलोत के बयान में कितनी सच्चाई है, इसके बारे में बता दें कि अब तक केंद्र ने रेप के सभी दोषियों के लिए मौत की सजा को अनिवार्य नहीं बनाया हुआ है। ऐसे में उनके बनाए कानून के कारण रेप दोषी हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, ये कथन सत्य नहीं है।

केंद्र सरकार ने कठुआ और उन्नाव जैसे रेप केसों के बाद क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2018 को पास किया था। उन्होंने आईपीसी की भारतीय दंड संहिता 1860 और बाल यौन अपराध निवारण अधिनियम 2012 में संशोधन किया था ताकि बलात्कार के दोषियों के लिए कठोर सजा का प्रावधान किया जा सके। कानून में मुख्य बदलाव जो हुए थे वो ये थे कि एक बलात्कार के लिए न्यूनतम सजा को 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया था। वहीं 16 साल से कम उम्र की नाबालिग का बलात्कार करने वाले के लिए कानून में और सख्ती करते हुए दोषी की सजा कम से कम 20 वर्ष कर दी गई थी।

इसी तरह 12 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ रेप या गैंगरेप करने पर इस कानून में दोषी को आजीवन कारावास से लेकर सजा-ए-मौत देने का प्रावधान आईपीसी की धारा 376 में किया गया था।

केंद्र के संशोधन के बाद 376 एबी धारा को कानून में जोड़ा गया था। इस धारा में कहा गया है कि 12 वर्ष से कम उम्र की लड़की का रेप करने वाले को कम से कम 20 साल की सजा होगी। ये सजा आगे आजीवन कारावास में बढ़ सकती है। उसे जुर्माने और मौत की सजा देकर भी दंडित किया जा सकता है।

एक और धारा, जिसे कानून में जोड़ा गया वो 376 डीबी है। इस धारा के तहत अगर 12 आयु से कम उम्र वाली लड़की का रेप एक व्यक्ति या एक से ज्यादा व्यक्ति समूह बनाकर करते हैं, या इस इरादे से आगे बढ़ते हैं तो हर किसी को रेप का दोषी माना जाएगा और उन्हें आजीवन कारावास की सजा होगी। इसमें उसके लिए जुर्माने के साथ मौत की सजा का प्रावधान भी है।

बता दें कि नाबालिगों के लिए बनाए गए इन कानूनों के अतिरिक्त अगर रेप दोषियों के लिए सजा-ए-मौत का प्रावधान है तो वो उन दोषियों के लिए हैं जो दोबारा-दोबारा अपराध को दोहराते हों। आईपीसी की धारा 376ई कहती है कि अगर एक रेप आरोपित दोबारा रेप करे तो उसे मौत की सजा दी जा सकती हैं।

इस धारा के अनुसार, “जो कोई भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376A या 376D के अधीन दण्डनीय किसी अपराधों के लिए पहले कभी दण्डित किया गया हो और बलातकार के अपराध 376, 376A 376B , 376C 376D में बताए गए किसी भी अपराध को दोहराता है तो उस उस दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास या मृत्यु दण्ड से दण्डित किया जाएगा।”

निश्चित केसों में ही दी जाती है सजा-ए-मौत

अब शायद ये बातें स्पष्ट हों कि सजा-ए-मौत का जो प्रावधान कानून में किया गया वो निश्चित मामलों के लिए है। पीड़िता अगर 12 साल से कम उम्र की है, तभी इस सजा के बारे में सोचा जा सकता है। और इसका भी ये अर्थ नहीं कि दोषी को यही सजा होती होगी। ये न्यायपालिका पर निर्भर करता है कि सजा की मात्रा क्या तय की जाएगी। वहीं बाकी धाराओं में तो सजा-ए-मौत का उल्लेख भी नहीं है। अगर दोषी ने 12 साल से ज्यादा उम्र वाली लड़की का बलात्कार किया है तो न्यायपालिका चाहकर भी उसे सजा-ए-मौत नहीं दे सकती क्योंकि ऐसा प्रावधान नहीं है।

आप देखेंगे कि भारतीय अदालतों में आजतक रेप दोषियों को सजा-ए-मौत दिए जाने के बहुत कम ही मामले देखने को मिले हैं। न्यायपालिका अपराध की गंभीरता देखने के बाद ये सजा दोषियों को देती है। इनमें ज्यादातर रेप के बाद हत्या वाले केस होते हैं। इन केसों में भी कई बार मौत की सजा, आजीवन कारावास में बदल दी जाती है। 21 वीं सदी में भारत में ऐसा केवल दो बार हुआ है जब दोषियों को मौत की सजा अदालत ने दी हो। एक हेतल पारेख का मामला और दूसरा निर्भया कांड। ये दोनों रेप और हत्या के मामले हैं।

इस तरह ये साबित होता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री जो दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार ने रेप दोषियों के लिए मौत की सजा अनिवार्य कर दी और इसी की वजह से रेप पीड़िताएँ मारी जा रही हैं… ये बिलकुल गलत है।

‘एक लाख राजपूतों के सिर कटेंगे, तब औरंगजेब श्रीनाथ जी को छू पाएगा’: जब डर से कोई नहीं दे रहा था आश्रय, तब मेवाड़ के राणा राज सिंह ने बनवाया मंदिर

मथुरा के केशवदेव मंदिर (Keshav Dev Temple, Mathura) की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के परपोते और अनिरुद्ध के पुत्र वज्रनाभ ने किया था और विभिन्न कालखंड में यह मंदिर इस्लामी आक्रांताओं के हमले झेलता रहा। मुगल बादशाह अकबर (Akbar) ने भी इस मंदिर से जुड़े चबूतरे को तोड़ने के लिए अपने सैनिक भेजे थे, लेकिन मथुरा राजा मानसिंह की जागीर होने के कारण मुगल सैनिक वहाँ कुछ नहीं कर सके।

बाद में राजा मानसिंह ने वहाँ पर एक एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। जब क्रूरता और हिंदू घृणा के लिए कुख्यात मुगल आक्रांता औरंगजेब (Aurangzeb) गद्दी पर बैठा तो इस मंदिर को तोड़कर मस्जिद बना दिया और इसकी छत पर बैठकर नमाज भी पढ़ा। इस मंदिर से जुड़े घटनाक्रम का पिछली स्टोरी में हमने विस्तार से जिक्र किया है।

जिस जगह भगवान कृष्ण का मूल मंदिर था, वहीं द्वापर में उनके मामा कंस का कटरा कारागार था। इसी कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस कारागार पर बने मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूल प्रतिमा थी। आज इस जगह पर ईदगाह मस्जिद स्थित है और मूल स्थान के बगल में केशवदेव मंदिर स्थित है।

केशवदेव से श्रीनाथ मंदिर

कहा जाता है कि जब इस्लामी आक्रांतों के हमले धर्मनगरी मथुरा के मंदिरों पर बढ़ गए तो वहाँ के पुजारियों ने भगवान के बाल रूपी मूल विग्रह, जिसे श्रीनाथजी कहा जाता है, को अपवित्र होने से बचाने के लिए केशवदेव मंदिर से हटा दिया और वृंदावन भेज दिया। समय बीतने के साथ केशवदेव मंदिर में भगवान कृष्ण की दूसरी प्रतिमा स्थापित की गई।

एक दूसरी मान्यता यतह है कि श्रीनाथजी के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की बाल काल वाली प्रतिमा स्वयंभू है और यह वृंदावन के गोवर्धन पर्वत की गुफा में सन 1556 के आसपास प्रकट हुई थी। उस समय वैष्णव संप्रदाय के वल्लभाचार्य ब्रज की यात्रा पर थे।

इसकी जानकारी जब वल्लभाचार्य को मिली तो वे भगवान का दर्शन करने पहुँचे और उनका नाम गोपाल रखकर पर्वत पर ही कच्ची मिट्टी का एक छोटा-सा मंदिर बनवा दिया। उसी मंदिर में भगवान की पूजा-पाठ होने लगी और पुजारी के रूप में रामदास चौहान को नियुक्त किया गया।

हालाँकि, मुस्लिम आक्रमणों के डर से उस विग्रह को समय-समय पर कई स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता रहा। श्रीनाथ जी की प्रतिमा को मथुरा और आगरा में भी कुछ दिन छिपा कर रखा गया। हालाँकि, आगे चलकर पुरनमल खत्री नाम के व्यवसायी के धन और आगरा के शिल्पीकार हीरामल के सहयोग से एक स्थायी भव्य मंदिर का निर्माण 1576 ईस्वी में किया गया।

औरंगजेब ने मंदिर ध्वस्त करने का दिया आदेश

औरंगजेब ने मथुरा के केशवदेव मंदिर के साथ-साथ जिले में स्थित के श्रीनाथ जी का मंदिर भी ध्वस्त करने का आदेश दे दिया। इस बात की जानकारी जैसे ही मंदिर के ब्राह्मणों को लगी, वे परेशान हो गए। मुगल सैनिकों के पहुँचने से पहले ही मंदिर के पुजारी दामोदर दास बैरागी मूर्ति को मंदिर से बाहर निकाल लाए।

वल्लभाचार्य के वंशज और वल्लभ संप्रदाय के वैरागी दामोदर दास भगवान को लेकर बैलगाड़ी में निकल पड़े। इधर जब औरंगजेब को पता लगा कि मंदिर को तोड़ दिया गया, लेकिन भगवान के विग्रह को सुरक्षित निकालकर कहीं और स्थापित करने के लिए पुजारी अपने साथ ले गए तो वह क्रोधित हो उठा।

औरंगजेब ने चेतावनी जारी कर दी कि जो भी इन पुजारियों को शरण देगा और मंदिर बनवाएगा, उसे मुगल शासन के क्रोध का सामना करना पड़ेगा। उधर दामोदर दास संतों के साथ बैलगाड़ी पर श्रीनाथ जी को लेकर जगह-जगह भटकते रहे और उनकी स्थापना के लिए भूमि की माँग करते रहे, लेकिन औरंगजेब की क्रूरता की वजह से किसी ने भी उन्हें आश्रय नहीं दिया।

उस समय मेवाड़ के उदयपुर के महाराणा और महाराणा प्रताप सिंह के परपोते राज सिंह औरंगजेब को ललकार रहे थे। इन दोनों के बीच गहरी शत्रुता पनप चुकी थी। श्रीनाथ जी लिए घुम रहे पुरोहितों को उम्मीद की आखिरी किरण महाराणा राज सिंह में नजर आई।

महाराणा राज ने दी औरंगजेब को चुनौती

ब्राह्मणों ने महाराणा राज सिंह से श्रीनाथ जी के लिए मंदिर बनवाने और खुद के आश्रय की विनती की। महाराणा राज सिंह इसके लिए तैयार हो गए। ‘महाराणा: सहस्त्र वर्षों के इतिहास’ में डॉक्टर ओमेंद्र रत्नू लिखते हैं कि इसके बाद राज सिंह ने पुरोहितों को उत्तर भेजवाकर आमंत्रित किया।

महाराणा राज सिंह ने ब्राह्मणों से कहा, “जब तक मेरे एक लाख राजपूतों के मस्तक कट नहीं जाते, तब तक औरंगजेब श्रीनाथ जी की मूर्ति को स्पर्श भी नहीं कर पाएगा।” राज सिंह ने ब्राह्मणों को अपने राज्य में ना सिर्फ संरक्षण दिया, बल्कि श्रीनाथ जी के लिए मंदिर बनवाने हेतु स्वेच्छा से स्थान चुनने के लिए भी कहा।

इसके बाद ब्राह्मणों ने मंदिर के लिए उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर बनास नदी के किनारे सिहाड़ नाम के ग्राम को चुना। 20 फरवरी 1672 ईस्वी को श्रीनाथ जी को वहाँ स्थापित कर दिया गया। आज वह स्थान ‘नाथद्वारा’ के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

मंदिर बनने तक श्रीनाथ जी की मूर्ति बैलगाड़ी में जोधपुर के पास चौपासनी गाँव में कई महीनों तक रही और यही उनकी पूजा होती रही। यह चौपासनी गाँव अब जोधपुर का हिस्सा है और जिस स्थान पर बैलगाड़ी खड़ी थी, वहाँ आज श्रीनाथ जी का एक मंदिर बनाया गया है। श्रीनाथ जी की चरण पादुकाएँ उसी समय से इस मंदिर में हैं। यह स्थान चरण चौकी कहलाता है।

इधर औरंजेब को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उसने महाराणा राज सिंह को ब्राह्मणों को शरण नहीं देने के लिए लिखा, लेकिन राज सिंह पर कोई फर्क नहीं पड़ा। हालाँकि, भावी युद्ध को देखते हुए उन्होंने सिंहाड़ में सैनिक तैनात कर दिए, ताकि श्रीनाथ जी को कोई मुगल छू ना पाए।

औरंगजेब के साथ महाराणा राज सिंह का युद्ध

राज सिंह से औरंगजेब विशेष रूप से चिढ़ता था, क्योंकि उन्होंने सल्तनत की लड़ाई में औरंगजेब के भाई दारा शिकोह का साथ देते हुए उसे कुछ दिनों के लिए अपने राज्य में आश्रय दिया था। औरंगजेब इसे अपना अपमान मानता था।

इधर मराठा क्षत्रिय शिवाजी महाराज की मदद करने के आरोप में औरंगजेब जयपुर के मिर्जा राजा जयसिंह को विष दिलवा कर हत्या करवा चुका था। इससे महाराणा राज सिंह अत्यंत दुखित और औरंगजेब पर कुपित थे। जय सिंह महाराणा के बेहद मददगार और हिंदुओं को परोक्ष रूप से मुगलों के खिलाफ मदद करते थे।

इसी दौरान पता चला कि औरंगजेब मेवाड़ के अंतर्गत आने वाले किशनगढ़ की राजकुमारी रूपमती से जबरन शादी करने के लिए सेना लेकर आ रहा है। उधर रूपमती ने राज सिंह को चिट्ठी लिखकर उनसे ही शादी करने की इच्छा जाहिर कर दी।

महाराणा राज सिंह ने सामंत रतन सिंह चूड़वात को अपने सैनिकों के साथ अजमेर कूच करने और औरंगजेब की सेना को रोकने का आदेश दिया। रतन सिंह चूड़ावत की नई-नई शादी हुई थी। वह पत्नी के मोहपाश में बंधे हुए थे और बार-बार उसके लिए युद्ध क्षेत्र से संदेश भेजवा रहे थे।

युद्ध क्षेत्र में भ्रमित अपने पति को देखकर बूँदी के हाड़ा वंश की राजकुमारी ने अपना सिर काटकर थाली में रतन सिंह चूड़ावत को भेजवा दिया। रतन सिंह चूड़ावत बेहद साहसी और वीर योद्धा थे। जब दूत के माध्यम से उन्हें अपनी पत्नी का सिर मिला तो वे उसका मंतव्य समझ गए और अकल्पनीय युद्ध करते हुए औरंगजेब की सेना को रोके रखा और अंतत: वीरगति को प्राप्त हो गए।

उधर औरंगजेब की सेना युद्ध में उलझी रही और राजसिंह चारूमती से विवाह कर कृष्णभक्त राजकुमारी के सतीत्व को बचा लिया। इसके साथ ही महाराणा राज सिंह ने हिंदू राजाओं को इसके लिए तैयार कर लिया कि वे किसी भी हाल में मुगलों को जजिया ना दें। इससे औरंगजेब और कुद्ध हो गया।

औरंगजेब ने मेवाड़ पर हमला कर दिया। युद्ध नीति के तहत अपने से कई गुणा बड़ी सेना से लड़ने के लिए महाराणा राज सिंह ने अरावली की पहाड़ियों को चुना। मुगलों के अत्याचार से बचाने के लिए जनता को भी पहाड़ियों में भेज दिया।

युद्ध के मैदान में औरंगजेब के साथ उदैपुरी नाम की उसकी बीवी भी साथ में थी। युद्ध के दौरान राजपूताने के सैनिकों ने उदैपुरी को गिरफ्तार कर लिया। पहाड़ियों में छापामार युद्ध और बीबी की गिरफ्तारी से औरंगजेब को पीछे हटना पड़ा और वह लौट गया। औरंगजेब की वापसी सुनिश्चित होने पर उदैपुरी को ससम्मान औरंगजेब के पास भेजवा दिया गया।

हालाँकि, 3 नवंबर 1680 को महाराणा राज सिंह की जय सिंह की ही भाँति विष देकर हत्या करवा दी गई। कुंभलगढ़ के ओढ़ा गाँव में राज सिंह अपने विश्वासपात्र और मित्र आसकरण चारण के साथ भोजन कर रहे थे। भोजन में विष मिला होने के कारण दोनों की मौत हो गई। इस तरह मरते दम तक उन्होंने श्रीनाथ जी को दिए वचन का पालन किया।

राजस्थान के नाथद्वारा में भगवान का स्वरूप

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा (Nathdwara Temple) मंदिर में स्थापित श्रीनाथ जी के विग्रह को भगवान कृष्ण का द्वितीय रूप माना जाता है। मंदिर में विग्रह उसी अवस्था में है, जिस अवस्था में बाल रूप में भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने बाएँ हाथ की उंगली पर उठा रखा था।

श्रीनाथ जी का यह विग्रह दुर्लभ काले संगमरमर से बना है। विग्रह का बायाँ हाथ हवा में उठा हुआ है और दाहिना हाथ कमर पर है। श्रीनाथ जी के विग्रह के साथ में एक शेर, दो गाय, दो तोता और दो मोर भी हैं। इन सबके अलावा, तीन ऋषि-मुनियों के चित्र भी विग्रह के साथ हैं।

जनश्रुतियों के अनुसार, भगवान श्रीनाथ जी की ठोढी में हीरा जड़ा हुआ है। यह मूल्यवान हीरा औरंगजेब की माँ ने भेंट किया था। लोक कथाओं के अनुसार, एक बार औरंगजेब इस मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की तो वह अंधा हो गया। इसके बाद उसने अपनी दाढ़ी से मंदिर की सफाई की, इसके बाद उसकी आँखों की ज्योति लौटी। इससे खुद होकर उसकी माँ ने हीरा भेंट किया था।

21 तोपों की दी जाती है सलामी

भगवान श्रीनाथ जी बाल रूप में हैं। जन्माष्टमी यानी उनके जन्मदिन पर उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह मेवाड़ राजघराने की परंपरा आज भी जारी है। बालक रूप में होने के कारण उन्हें दिन में 8 बार उन्हें भोग लगाया जाता है। उनके भोग में 56 प्रकार के व्यंजन शामिल किए जाते हैं। आने वाले श्रद्धालु श्रीनाथ जी के लिए तरह-तरह के खिलौने भी लेकर आते हैं और उन्हें चढ़ाते हैं।

नाथद्वारा में हर साल धुलंडी पर ‘बादशाह की सवारी’ निकलती। इस प्राचीन परंपरा में एक व्यक्ति नकली दाढ़ी-मूँछ और आँखों में सुरमा लगाकर तथा मुगल शासक का पोशाक पहनकर औरंगजेब बनता है और अपने हाथ में श्रीनाथ जी की तस्वीर लेकर पालकी में चलता है। मंदिर पहुँचने के बाद वह अपनी दाढ़ी से सीढ़ियों को साफ करता है। इस दौरान लोग उसे तरह-तरह से अपमानित करने का स्वांग करते हैं।

उदयपुर के महाराजा ने सन 1934 में श्रीनाथ जी मंदिर से जुड़ी सभी प्रकार की संपत्ति को पूरी तरह मंदिर के अधिकार में दे दिया था। उस समय के श्रीनाथ जी मंदिर के मुख्य पुजारी तिलकायत जी को मंदिर का संरक्षक, ट्रस्टी और प्रबंधक नियुक्त किया गया था।

हालाँकि, मंदिर से जुड़ी 562 प्रकार की सम्पत्ति का दुरुपयोग न हो, इसके लिए उदयपुर के महाराजा ने श्रीनाथ जी मंदिर की देखरेख का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा। यह अधिकार आज भी उदयपुर राजघराने के पास है। नाथद्वारा मंदिर भारत के सबसे धनवान मंदिरों में से एक है।

दानिश मंसूरी ने खुद को हिन्दू बता कर 13 साल की लड़की को फाँसा, अश्लील तस्वीरों से ब्लैकमेल: निकाह और धर्मांतरण का बनाया दबाव

मध्य प्रदेश के इंदौर में 13 साल की लड़की के साथ ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। दानिश मंसूरी खुद को हिन्दू बता कर उससे मिला था। मामला हिन्दू संगठनों और पुलिस तक पहुँचने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। लगभग 4 महीने पहले दानिश मंसूरी ने झाँसा देकर लड़की से दोस्ती की और फिर मामला ब्लैकमेल करने और धर्मांतरण कर निकाह के दबाव तक पहुँच गया। पीड़िता 8वीं कक्षा की छात्रा है।

वो काफी दिनों से अवसाद में थी और अंत में उसने इस घटना को अपनी माँ के साथ साझा किया। छात्रा ने बताया कि वो एक मेडिकल की दुकान पर दवा लेने गई थी। वहाँ दानिश मंसूरी ने खुद को हिन्दू बता कर उससे जान-पहचान की। युवक ने मदद के बहाने उससे मेलजोल बढ़ाना शुरू किया और उसका फोन नंबर भी ले लिया। लड़की दवा लेकर जब घर पहुँची तो दानिश ने उसे फोन किया। पहले तो छात्रा ने उसे नज़रअंदाज़ किया। ये मामला क्षिप्रा थाना क्षेत्र का है

लेकिन, बाद में वो उससे बातें करने लगी। छात्रा का कहना है कि पहले उसकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। दानिश ने जब उससे मिलने बुलाया, तब भी वो चली गई। वहाँ उसने लड़की के साथ कुछ तस्वीरें खींच ली। उसके साथ गंदी हरकतें करने का भी प्रयास किया। कुछ दिनों बाद उसने खुद भाँडा फोड़ दिया कि वो हिन्दू नहीं है और उससे निकाह करने के लिए लड़की को धर्मांतरण कर मुस्लिम बनना पड़ेगा। उसने छात्रा को उसकी एडिटेड तस्वीरें वायरल करने की भी धमकी दी।

साथ ही उसने कह दिया कि अब से लड़की का नाम रूही है और उसे उसी नाम से पुकारने लगा। गुरुवार (4 अगस्त, 2022) को भी उसने लड़की को मिलने बुलाया था, लेकिन वो अपने परिवार और हिन्दू संगठनों के साथ पहुँची। उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया गया। सलमान मंसूरी के 19 वर्षीय बेटे के खिलाफ अब FIR दर्ज कर ली गई है। ‘लव जिहाद’ के अलावा छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट की धाराएँ भी लगाई गई हैं। मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ पर 10 साल तक की जेल की सज़ा है।

12% आबादी वालों की जिम कॉर्बेट में ‘घुसपैठ’, जंगल में बना डाली कई मजार: टूर ऑपरेटर ने बताया- मुस्लिमों का यहाँ दबदबा

उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र में अवैध मजारों पर कुछ समय पहले हमारी रिपोर्ट के बाद हमने इसी प्रदेश के एक अन्य हिस्से रामनगर का दौरा किया। यहाँ पर वन्य जीवों के लिए जिम कार्बेट नेशनल पार्क सबसे चर्चित स्थान माना जाता है जहाँ लाखों की संख्या में टूरिस्ट आते हैं। हैरानी की बात ये रही कि ये जगह भी अवैध मजारों से अछूती नहीं रही।

रामनगर-रानीखेत मार्ग पर पक्की मजार

हमने यह दौरा जून 2022 में किया था। दिल्ली से हम मुरादाबाद के रास्ते अपने निजी वाहन से रामनगर पहुँचे। रामनगर बाजार से हम रानीखेत रोड पर आगे बढ़े। बीच-बीच में जंगली जानवरों से सावधानी के बोर्ड लगे दिखाई दिए। जंगलों के बीच गुजरती इस सड़क पर लगभग 5 किलोमीटर आगे जाने के बाद एक जगह सड़क मुड़ी दिखाई दी। उस मुड़ी सड़क पर एक बड़ी सी मजार बनी थी जिसे बाकायदा एक घरनुमा आकार से कवर कर दिया गया था। हमने उतर कर उस मजार के किसी संरक्षक से बात करनी चाही लेकिन मौके पर कोई नहीं दिखा।

इस मजार पर एक बड़ा सा पोस्टर लगा था जिस पर सबसे ऊपर 786 लिखा था। बाद में लिखा था, “भूरे शाह शेर अली जुल्फकार दादमियाँ का उर्स”। पोस्टर में उर्स में ज्यादा से ज्यादा लोगों के शामिल होने की अपील की गई थी।

मुख्य सड़क से सट कर बनी मज़ार

झिरना इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में मजार

ऑपइंडिया की टीम ने अगले दिन जिम कार्बेट नेशनल पार्क में प्रवेश किया। यहाँ पर बाघ, तेंदुए, हाथी, हिरन जैसे कई अन्य जीव अच्छी संख्या में पाए जाते हैं। पार्क के इंट्री गेट के अंदर किसी भी को रहने की अनुमति नहीं है। अंदर केवल वन विभाग के ही लोग आ और जा सकते हैं। हमने नेशनल पार्क के झिरना क्षेत्र में प्रवेश किया। लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर हमें एक और मजार दिखी। यह मजार सड़क से एकदम सटा कर बनाई गई है। इस मजार पर बाकायदा रंग रोशन किया गया था और चादर भी चढ़ाई गई थी। इस जगह पर हमारे गाईड ने हमें वाहन से उतरने से साफ़ मना कर दिया क्योंकि वो इलाका बाघों का क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में मन में सवाल आया कि फिर इस मजार पर रंग-रोशन कौन करता है ?

नो मैन्स लैंड में बनी मजार

इस मजार के बारे में जब हमने अपने गाईड और ड्राइवर से पूछा तब वो इसके इतिहास के बारे में नहीं बता सके। सबसे हैरानी की बात ये थी कि मजार के नीचे बाकायदा पत्थरों को सेट किया गया था और उस पर किसी के द्वारा चादर भी चढ़ाई गई थी।

घने जंगल के बीच मजार

जंगल में लगभग 45 मिनट अंदर चल कर जब दूर-दूर केवल वन विभाग वालों की चौकियों के टॉवर भर दिखाई दे रहे थे उस समय एक और मजार दिखाई पड़ी। हमारे गाइड ने हमें बताया कि वह स्थान बाघों का सबसे सघन इलाका माना जाता है। हमने उस स्थान पर कुछ हिरन दिखाई दिए। कुछ ही दूरी पर एक तेंदुआ भी सड़क पार करता दिखाई दिया था। ऐसे में उस स्थान पर किसी मजार का होना मेरे साथ सफारी करने आए बाकी लोगों को भी अजीब लगा।

घने जंगल में मजार

हमने बाकी जीप चालकों इस मजार के बारे में जानकारी ली पर वो इस बारे में कुछ नहीं बता पाए। हालाँकि स्थिति के हिसाब से इस मजार पर लोगों की आवाजाही कम लगी। मजार का रख रखाव भी कुछ दिनों से नहीं हुआ दिखाई पड़ा। लेकिन मजार पक्की सीमेंट की थी और उसके आस-पास का बड़ा चौकोर क्षेत्र भी सीमेंट से बना दिखाई दिया।

मजार के पास दौड़ते हिरन

2011 की जनगणना के आँकड़ों के मुताबिक, नैनीताल जिले में मुस्लिमों की कुल आबादी 12.65% है। वहीं जिम कॉर्बेट क्षेत्र में टूर ऑपरेटर रमेश ने हमें बताया कि यहाँ पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अच्छा-ख़ासा कारोबार जमा लिया है। जंगल सफारी करवाने के लिए अधिकतर वाहन मुस्लिम समुदाय के लोगों के हैं।