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जेल में हो सकती है अर्पिता मुखर्जी की हत्या? ED ने कोर्ट को बताया- खतरे के खुफिया इनपुट मिले हैं, बिना चखे खाना-पानी भी न दिया जाए

पश्चिम बंगाल में SSC स्कैम में फँसी अर्पिता मुखर्जी की जान को खतरा है। ऐसा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने PMLA कोर्ट में बताया है। ईडी ने अदालत से कहा कि अर्पिता को जेल में खाना देने से पहले उसे चखा जाना जरूरी है। इसके अलावा उन्हें जेल में चार से ज्यादा कैदियों के साथ रखना भी खतरनाक है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने कोर्ट को बताया कि उन्हें खुफिया सूत्रों से ये बात पता चली है कि अर्पिता सुरक्षित नहीं हैं। उनकी जान को खतरा है। वहीं पार्थ चटर्जी को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें पार्थ चटर्जी को लेकर ऐसे कोई इनपुट नहीं मिले हैं।

बता दें कि शुक्रवार को पीएमएलए कोर्ट में मुखर्जी और चटर्जी की बेल याचिका पर सनुवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट को बताया था कि वह पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी की 14 दिन की हिरासत चाहते हैं। उनके अनुसार, उन्हें दोनों के खिलाफ ऐसे सबूत मिले हैं जिनकी कड़ियों का जुड़ना जरूरी है।

ईडी के वकील ने कोर्ट को कहा, पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी ने 1 जनवरी 2012 को एपीए यूटिलिटी सर्विसेज (APA utility services) के तहत पार्टनरशिप डीड की थी। एजेंसी ने कहा,

“आरोपितों ने कुछ संपत्तियाँ कैश देकर भी खरीदी थीं। इन संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए धन का स्रोत पता लगाया जा रहा है। हमने कुछ समय का फोन डेटा भी बरामद किया है जिसके बारे में पार्थ चटर्जी से पूछा जाना है। इसलिए हम अदालत से अनुरोध करते हैं कि उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।”

अपनी इसी माँग के साथ उन्होंने कोर्ट को अर्पिता को लेकर मिले इनपुट के बारे में बताया और कहा कि अभी 50 खातों की जाँच चल रही है। ऐसे में जरूरी है कि जो भी खाना अर्पिता को जेल में मिले, उसे एक बार टेस्ट किया जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपितों की बेल याचिका को खारिज कर दिया और सुनवाई की अगली तारीख 18 अगस्त दी।

गौरतलब है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी करोड़ों रुपए के एसएससी भर्ती घोटाले को लेकर ईडी की हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापेमारी कर अब तक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश और 5 किलो सोना बरामद कर चुका है। उनके घर से सेक्स टॉय मिलने की भी खबरें सामने आई थी। इसके अलावा उनके घर से 31 पॉलिसी पेपर भी जब्त किए गए हैं। इन सबमें नॉमिनी के नाम पर टीएमसी के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी का नाम हैं।

‘श्रीकांत त्यागी का BJP किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं’: बोले पार्टी इकाई अध्यक्ष, महिला के साथ गाली-गलौच के मामले में पुलिस ने तेज कर दी तलाश

नोएडा का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें महिला से अभद्रता करने वाले श्रीकांत त्यागी नाम के शख्स को भाजपा (BJP) के किसान मोर्चा का नेता बताया जा रहा है। हालाँकि, भाजपा ने उसके पार्टी से जुड़े होने से इनकार किया था।

भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर ने इस बावत एक बयान भी जारी किया है। उधर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ केस दर्ज करके गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

मामला नोएडा के सेक्टर 93 के ओमेक्स सोसाईटी का है। यहाँ पेड़ लगाने के विवाद में एक महिला और श्रीकांत त्यागी के बीच शुरू हुए विवाद ने गाली-गलौज का रूप ले लिया। इसका वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया।

कई लोगों और मीडिया संस्थानों ने इस वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को भाजपा नेता श्रीकांत त्यागी बताया। कुछ ने तो त्यागी को भाजपा विधायक तक बता डाला था। हालाँकि, बाद में आरोपित को विधायक बताने पर उन्हें माफ़ी भी माँगनी पड़ी।

आरोपित के भाजपा से जुड़े होने के आरोपों पर पार्टी के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वीडियो जारी कर के सफाई दी है। सांसद राजकुमार चाहर ने कहा, “मैं आप सभी को अवगत करवाना चाहता हूँ कि श्रीकांत त्यागी नाम का व्यक्ति भाजपा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में न था और न ही है। इसका किसान मोर्चे से कोई वास्ता नहीं है। सरकार और कानून उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करे।”

वहीं, नोएडा पुलिस ने आरोपित श्रीकांत त्यागी के खिलाफ FIR दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। सेंट्रल नोएडा की ADCP ने कहा, “वीडियो 5 अगस्त 2022 को वायरल हुआ है। इसका नोएडा पुलिस ने संज्ञान लिया है।”

ADCP ने आगे कहा, “मामले की FIR दर्ज कर फरार आरोपित श्रीकांत त्यागी की तलाश में पुलिस टीमें लगी हुई हैं। नोएडा पुलिस इस मामले में कठोर कार्रवाई अमल में लाएगी।” सुरक्षा की दृष्टि से घटनास्थल पर पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

वीडियो में श्रीकांत त्यागी नाम का व्यक्ति महिला के साथ सरेआम गाली-गलौच और हाथापाई करने की कोशिश करते हुए दिख रहा है। वहीं, वीडियो में यह भी दिख रहा है कि उसके आसपास खड़े लोग मूकदर्शक बने हुए हैं।

1 किलोमीटर की दूरी 9 साल में… Google ने मिलाया असली माँ से: दूसरी क्लास की पूजा को किडनैप कर बना दिया था ईसाई एनी

मुंबई में 9 साल पहले अपहरण की गई एक लड़की अपने असली परिजनों से 5 अगस्त 2022 (शुक्रवार) को मिलीं। इतने सालों तक असली माँ-बाप से अलग रही लड़की का नाम है पूजा गौड़। अब पूजा 16 साल की हो गई हैं। जब पूजा का अपहरण हुआ था, तब वो मात्र 7 साल की थीं।

इस कहानी की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि अपहरण कर ली गई पूजा अपने असली माँ-बाप और भाई-बहन से महज 1 किलोमीटर दूर झुग्गियों में रहती थी, मतलब अपने अपहरणकर्ताओं के साथ। इस केस में पुलिस ने आरोपित डिसूजा पति-पत्नी पर केस दर्ज कर के पति हैरी डिसूजा को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूजा का अपहरण करने के आरोपित हैरी डिसूजा और उसकी पत्नी सोनी अँधेरी के डीएन नगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र की जूही गली में रहते थे। पूजा का अपहरण 22 जनवरी 2013 को तब हुआ, जब वो क्लास 2 में थी और अपने घर से 1 किलोमीटर दूर नगर निगम के स्कूल में सुबह 8:30 पर पढ़ने जा रही थी।

जिस दिन पूजा का अपहरण हुआ, उस समय उनके आगे उनका भाई रोहित भी चल रहा था, जो क्लास 4 में पढ़ता था। अब 19 साल के हो चुके रोहित के मुताबिक थोड़ी देर बाद जब उसने पीछे मुड़ कर देखा तो उसकी बहन पूजा उसे नहीं दिखी। रोहित ने आगे बताया:

“मैं स्कूल में अपनी बहन को खोजा पर वो वहाँ नहीं थी। आखिरकार मैं उसी दिन 9:30 पर अपने घर भाग आया और अपने परिवार वालों को इसकी जानकारी दी। मेरे पिता संतोष और चाचा विनोद ने पूजा को खोजा और जब वो नहीं मिली तब डीएन नगर थाने में उन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। रिपोर्ट के बाद भी हम लगातार पूजा को तलाशते रहे। पर वो नहीं मिली। मेरी माँ पूनम लगातार पूजा को याद कर के रोती रहीं।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की खोजी लिस्ट में पूजा का नंबर 66 था। पूजा के मुताबिक, “डिसूजा अंकल ने घटना के दिन मुझ चॉकलेट और आइसक्रीम का लालच दिया था। घटना के बाद पति-पत्नी मुझे एक पहाड़ी पर मौजूद हाजी मलंग ले गए, जहाँ वो 2 दिन रहे। इस दौरान मुझे धमकियाँ दी जाती रहीं कि अगर मैंने किसी को अपने अपहरण की बात बताई तो मुझे पहाड़ी के नीचे फेंक दिया जाएगा।”

पूजा ने आगे बताया कि हाजी मलंग के बाद हैरी डिसूजा और उसकी पत्नी सोनी गोवा गए। यहाँ वो हैरी की मौसी के घर पर 3 से 4 महीने रहे। गोवा के बाद ये लोग फिर मुंबई आ गए और विरार में रहने लगे। इन लोगों ने इसके बाद पढ़ाई के लिए पूजा को कर्नाटक के रायचूर भेज दिया, वहाँ पूजा एक हॉस्टल में रहती थी।

पूजा के मुताबिक, “साल 2015 में वो मुझे लेकर मुंबई लौट आए। मुझे नया नाम ‘एनी’ दिया गया। शुरू में हैरी और सोनी ने मुझे अच्छे से रखा लेकिन बाद में जब सोनी का अपना बच्चा हो गया, तब वो मुझे परेशान करने लगी। मेरी पिटाई होती थी और जेल जैसे घर में बंद रखा जाता था। हैरी अंग्रजी बोलता था और उसने मुझे घर पर ही अंग्रेजी लिखना सिखाया। बाद में हैरी ने मुझे जुहू में एक बिजनेसमैन के घर पर काम करने और उसके छोटे बच्चों की देखभाल के लिए लगा दिया।”

कैसे मिली पूजा

मुंबई पुलिस ने पूजा को खोजने की तमाम कोशिशें कीं लेकिन वो नाकामयाब रहे। पूजा के वापस मिलने की सूत्रधार पुलिस नहीं बल्कि प्रमिला नाम की एक महिला बनीं, जो घरों में काम करती हैं। हुआ यूँ कि आरोपित हैरी ने पूजा को जिस व्यापारी के घर काम पर लगाया था, उसी घर में प्रमिला भी काम करती थीं। एक साथ काम करने के दौरान पूजा ने प्रमिला को बताया कि बचपन में उसका अपहरण हुआ था और उसका अपहरण करने वाले उसको परेशान करते हैं।

पूजा की दी गई जानकारी पर प्रमिला ने गूगल से जानकारी जुटाई। पुरानी खबरों, उसमें छपी फोटो के आधार पर पूजा ने खुद के बचपन वाले फोटो को पहचान लिया। 9 साल बाद वो अपने असली परिवार से मिल पाईं, जिसे उनसे छिन लिया गया था। बस एक अफसोस के साथ… असली पिता से भेंट नहीं हो पाई।

पिछले 9 सालों में पूजा के पिता संतोष का निधन हो गया। पूजा की माँ पूनम अँधेरी स्टेशन के बाहर चने बेचने का काम करती हैं। उनके 2 बेटे हैं। पहला 19 साल का रोहित और दूसरा 12 साल का राहुल। रोहित ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ कर प्राइवेट सेक्टर में काम शुरू कर दिया है।

आरोपित हैरी पर पुलिस ने अपहरण की धारा 363, अपहरण के प्रयास की धारा 365, अवैध तरीके से कैद करने की धारा 368, मानव तस्करी की धारा 370 और जबरन काम करवाने की धारा 374 के तहत FIR दर्ज की है। हैरी डिसूजा 10 अगस्त तक पुलिस की कस्टडी रिमांड पर है।

‘खतरों के खिलाड़ी 12’ फेम एरिका पैकर्ड ने करवाया न्यूड फोटोशूट, बोलीं- मैं रणवीर को कंपनी दे रही हूँ, लेकिन आप…

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह (Bollywood Actor Ranveer Singh) बोल्ड फोटोशूट (Bold/Naked Photoshoot) कराने के बाद से विवादों में हैं। कई जगहों पर उनके खिलाफ FIR भी दर्ज हुए हैं। अब ‘खतरों के खिलाड़ी 12’ फेम अभिनेत्री एरिका पैकर्ड (Erika Packard) भी रणवीर सिंह के नक्शे-कदम पर उतर आई हैं। उन्होंने अपनी टॉपलेस तस्वीर (Topless Photo) सोशल मीडिया पर शेयर की है।

रणवीर के सपोर्ट में एरिका ने कराया सेमी न्यूड फोटोशूट

एरिका पैकर्ड ने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर अपनी एक सेमी न्यूड फोटो पोस्ट की है। इस फोटो में वो काफी बोल्ड अंदाज में दिख रही हैं। एरिका ने लाइट ब्लू कलर की हाई वेस्ट जींस पहनी हुई हैं। वेवी हेयरस्टाइल के साथ एरिका कैमरा को देख रही हैं।

इस फोटो के साथ एरिका ने मजाकिया अंदाज में कैप्शन लिखा, “रणवीर सिंह को कंपनी दे रही हूँ, लेकिन आप मेरे बम्स नहीं देख सकते।” उन्होंने अपना बैक दिखाते हुए फोटो क्लिक करवाई है।

अपने सेमी-न्यूड फोटोशूट को लेकर एरिका अब लाइमलाइट में आ गई हैं। सोशल मीडिया पर यूजर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। कई ने अभिनेत्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने की माँग की है। वहीं, कई लोगों ने उनके बोल्डनेस, अंदाज और हिम्मत की तारीफ की।

फोटो साभार: एरिका इंस्टाग्राम
फोटो साभार: एरिका इंस्टाग्राम

इस फोटो पर एरिका को सेलेब्स और फैंस का मजेदार रिएक्शन मिल रहा है। एक यूजर ने लिखा, “तुम जो बर्गर खाती हो वो जाते कहाँ हैं?” एक्ट्रेस राधिका पंडित ने कमेंट किया, “Ooh mamacitaaa।”

एक यूजर ने मजाक में लिखा, “ये आगे चलकर राष्ट्रीय मुद्दा बनेगा।” एक ने पूछा, “रणवीर सिंह कहाँ हैं?” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “आपका कोई मुकाबला नहीं है बेब।”

फोटो साभार: एरिका इंस्टाग्राम

कौन हैं एरिका?

एरिका एक इंडियन मॉडल, एक्ट्रेस और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। वो हाल ही में रोहित शेट्टी के शो ‘खतरों के खिलाड़ी 12’ में नजर आई थीं। हालाँकि, शो में वो ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाईं और पहले ही हफ्ते में शो से बाहर हो गईं। बता दें एरिका बॉलीवुड के फेमस विलेन गैविन पैकर्ड की बेटी हैं।

नकुल मेहता भी कर चुके हैं रणवीर का समर्थन

यह पहली बार नहीं है जब किसी कलाकार ने रणवीर सिंह के न्यूड फोटोशूट का समर्थन किया है। इसके पहले टेलीविजन कलाकार नकुल मेहता ने भी अपनी एक तस्वीर शेयर की थी। हालाँकि, यह एक फोटोशॉप तस्वीर थी।

उन्होंने मजे लेने के लिए रणवीर सिंह के फोटो पर अपना चेहरा लगाकर शेयर कर दिया था। नकुल ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “मुझसे नफरत करने वाले कहेंगे कि मैंने रणवीर सिंह का कारपेट उधार लिया है।”

वहीं, ‘बिग बॉस’ के एक्स कंटेस्टेंट एक्टर आसिम रियाज (Asim Riaz) ने भी सोशल मीडिया पर अपनी न्यूड फोटोज शेयर की थी। इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीरों में वो शर्टलेस नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपनी डेनिम को काफी नीचे कर फोटोशूट करवाया है। इसके बाद से यूजर्स के निशाने पर आ गए थे।

आसिम रियाज की फोटो पर कमेंट कर लोगों ने इसके लिए रणवीर सिंह को जिम्मेदार बताया था। एक यूजर ने कमेंट किया, “रणवीर भैया ने सबको बिगाड़ दिया।” हालाँकि आसिम की ये फोटो अभी की नहीं थी, बल्कि 2017 की है, जो उन्होंने 30 जुलाई 2022 को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया था।

रणवीर सिंह ने हाल ही में एक मैगजीन के लिए न्यूड फोटोशूट कराया था

रणवीर सिंह ने हाल ही में एक मैगजीन के लिए न्यूड फोटोशूट कराया था। इसके बाद रणवीर सिंह के खिलाफ दो केस भी दर्ज किए गए हैं। उन पर भावनाएँ आहत करने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं, अब पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (PETA) ने रणवीर सिंह से न्यूड फोटोशूट कराने के लिए कहा है। संस्था चाहती है कि रणवीर सिंह दुबारा न्यूड हों, ताकि वह उनके माध्यम से शाकाहार का प्रचार कर सके।

महाराष्ट्र पंचायत चुनावों में शिवसेना के शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे को दी मात: 271 में से 82 सीटें के साथ BJP पहले स्थान पर

महाराष्ट्र (Maharashtra) में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में भाजपा (BJP) ने बाजी मारी है, जबकि दूसरे स्थान पर शरद पवार की पार्टी NCP रही है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) का खेमा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) गुट से पीछे चौथे नंबर पर रहा।

गठबंधन के हिसाब से बात करें तो भाजपा व शिंदे गुट मिला कर कुल 122 सीटों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि 102 सीटों के साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) दूसरे नंबर पर रहा। वहीं, 33 ग्राम पंचायतों के चुनाव निर्विरोध हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 271 सीटों में भाजपा 82 सीटों के साथ पहले नंबर पर रही। 53 सीटों के साथ NCP ने दूसरे स्थान पर कब्ज़ा जमाया। शिवसेना का शिंदे गुट 39 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना गुट को 28 सीटों पर ही सफलता मिल पाई। पाँचवें नंबर पर कॉन्ग्रेस रही है, जिसके खाते में कुल 22 सीटें आई हैं। खास बात ये है कि अन्य का आँकड़ा 47 रहा, जो संख्या के हिसाब से तीसरे स्थान पर माना जा सकता है।

अगर इन आँकड़ों को क्षेत्र के हिसाब से देखा जाए तो मराठवाड़ा में शिवसेना के शिंदे गुट का बोलबाला रहा। धुले और औरंगाबाद में शिंदे गुट ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की और उद्धव खेमे पर बढ़त बनाई।

शोलापुर में भाजपा, ठाकरे खेमा और स्थानीय पार्टियों का त्रिकोणीय मुकाबला हुआ, जबकि बीड जले में NCP आगे रही। यहाँ भाजपा ने दूसरा स्थान हासिल किया। उद्धव ठाकरे गुट पुणे में एकतरफा जीत हासिल करने में सफल रहा।

इन चुनावों में मिली सफलता पर बोलते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “हमने इन चुनावों की ठीक से तैयारी भी नहीं की थी, फिर भी हमें और हमारी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को अच्छी सफलता मिली है।”

जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव पर फिलहाल रोक

वहीं, एक अन्य घटनाक्रम में राज्य चुनाव आयोग ने जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव पर फिलहाल रोक लगा दी है। ऐसा निर्णय राज्य जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 में राज्य सरकार द्वारा लिए गए बदलाव के चलते लिया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद इसको लेकर नए आदेश जारी किए जाएँगे।

उमेश कोल्हे की हत्या के बाद मौलवी मुशफीक और अरबाज ने की थी बिरयानी पार्टी, कई और लोग थे भी शामिल: NIA बोली- पहचान का काम जारी

महाराष्ट्र के अमरावती (Amaravati, Maharashtra) में हुए उमेश कोल्हे की हत्या में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने शुक्रवार (5 अगस्त 2022) को कोर्ट में बताया कि गिरफ्तार मौलवी मुशफीक अहमद (41) और अब्दुल अरबाज (23) ने उमेश कोल्हे को मौत के घाट उतारने के के बाद जश्न मनाने के लिए बिरयानी पार्टी का आयोजन किया था।

जाँच एजेंसी ने कहा कि इस बिरयानी पार्टी में और भी कई लोगों को बुलाया गया था। इस बारे में कोर्ट को सूचित करते हुए NIA ने कहा कि अब उसे यह पता लगाना है कि इस डिनर पार्टी में कौन-कौन लोग शामिल थे।

बता दें कि उमेश कोल्हे हत्याकांड में NIA ने बुधवार (3 अगस्त 2022) को दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम मौलवी मुशफीक अहमद और अब्दुल अरबाज है। आरोपितों की ओर से कोर्ट में वकील अली काशिफ खान देशमुख ने अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज ने दोनों आरोपितों को 12 अगस्त तक के लिए NIA की हिरासत में भेज दिया। 

NIA के मुताबिक, अहमद ने आरोपितों को लॉजिस्टिकल सपोर्ट दिया था। अरबाज ने उमेश कोल्हे और उनकी दुकान पर नजर रखी थी। जाँच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि दोनों ने उमेश की हत्या के बाद अन्य आरोपितों को फरार रहने में भी मदद की थी। 

मुशफीक ने हत्या के बाद शेख इरफान से फोन पर बात की थी। वहीं, अब्दुल मास्टरमाइंड इरफान के ऑर्गनाइजेशन में ड्राइवर का काम कर रहा था। इरफान एक स्वयंसेवी संगठन (NGO) चलाता था, जिसका नाम रहबर हेल्पलाइन था।

NIA ने बताया कि अन्य आरोपों के अलावा, दोनों पर आरोपितों को पनाह देने के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

नूपूर के समर्थन में पोस्ट डालने पर हुई थी हत्या

पैगंबर मोहम्मद के बारे में विवादास्पद टिप्पणी को लेकर भाजपा की निलंबित नेता नुपुर शर्मा का समर्थन करने वाला एक पोस्ट साझा करने पर कोल्हे की 21 जून को अमरावती शहर में हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अरबाज और मुशफीक पहले गिरफ्तार किए गए आरोपितों- इरफान शेख, शोएब खान, मुदस्सिर अहमद, शाहरुख पठान, अब्दुल तौफुक, आतिफ राशिद और यूसुफ खान के सहयोगी हैं।

उदयपुर में कन्हैया लाल की हुई थी गला काटकर हत्या

इसी तरह नूपुर शर्मा का पैगंबर मोहम्मद के बारे में की गई टिप्पणी के मामले में उदयपुर के दर्जी कन्हैया लाल के बच्चों ने उनके मोबाइल से समर्थन कर दिया था। इसके बाद उनके दुकान में ग्राहक बनकर घुसे दो मुस्लिमों ने गला काटकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। इस मामले की जाँच भी NIA कर रही है।

25 दिन बाद आम आदमी के लिए विदेशी/महंगे शराब… आम आदमी पार्टी की सरकार ने लिया फैसला: मॉल, पॉश एरिया में भी ठेका

नई आबकारी नीति 2021-22 को रद्द कर निजी शराब दुकानों पर ताला लगाने के बाद अब दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के पॉश इलाके में प्रीमियम लिकर शॉप खोलने का निर्णय लिया है। दिल्ली सरकार की ऐसी कुछ दुकानें 1 सितंबर से शुरू करने का फैसला किया है।

केजरीवाल सरकार सरकारी शराब दुकानों को चलाने वाले अपने चार विभागों- दिल्ली राज्य औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम (DSIIDC), दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (DTTDC), दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर (DCCWS) और दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (DSCSC) के जरिए ये दुकानें खोलेगी। सरकार के चारों विभाग 5-5 प्रीमियम शराब दुकान खोलेगी।

इनमें से हर विभागों 1 सितंबर से अपने दो प्रीमियम शॉप शुरू कर देगा, जबकि इस साल दिसंबर तक बाकी तीन दुकानों को भी शुरू कर देगा। इन प्रीमियम शॉप में आयातित और महंगे शराब बेचे जाएँगे। ये मॉल, बड़े बाजारों और पॉश एरिया में खोले जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य पड़ोसी राज्यों से काला बाजारी और तस्करी को रोकने के लिए बिक्री को अधिकतम करना है। इसके लिए सरकार ने दुकानों का आकार को भी कम कर 300-500 वर्ग फुट कर दिया है।

दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, “पुरानी नीति के तहत आयातित ब्रांड निजी विक्रेताओं द्वारा बेचे जाते थे, जबकि सरकारी दुकानों में बड़े पैमाने पर देशी शराब और कुछ भारतीय निर्मित विदेशी शराब की बिक्री होती थी। अब सरकार ने निजी दुकानों को बंद कर दिया है तो प्रीमियम वेंड खोलने की योजना है, ताकि लोग बिना किसी हड़बड़ी के अंदर जा सकें और खरीद सकें।”

बता दें कि उप-राज्यपाल के साथ मतभेद के बाद दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति 2021-22 को 31 जुलाई से खत्म कर दिया था। इसमें निजी शराब दुकानों को बिक्री का लाइसेंस दिया गया था। इस नीति को खत्म करने के बाद सरकार ने सरकारी दुकानों में शराब बिक्री की पुरानी शराब नीति लागू कर दी थी।

पुरानी आबकारी व्यवस्था को लागू करने की घोषणा करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा था, “हम भ्रष्टाचार को रोकने के लिए नई शराब नीति लाए। इससे पहले सरकार को 850 शराब की दुकानों से करीब 6,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता था। नई नीति के बाद हमारी सरकार को उन्हीं दुकानों से 9,000 करोड़ रुपए से अधिक मिले।”

मनीष सिसोदिया ने कहा था कि नई नीति से पहले सरकारी दुकानों में शराब बेची जाती थीं, लेकिन निजी दुकानें भी थीं। इन निजी दुकानों के लाइसेंस अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को दे दिए जाते थे। इसमें खूब भ्रष्टाचार होता था। इस भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ही नई आबकारी नीति लागू की गई थी।

बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली एलजी वीके सक्सेना ने नई शराब नीति में अनियमितताओं को लेकर सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे। दिल्ली सरकार ने इसके खिलाफ खूब हल्ला बोल किया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने अंतत: इसे वापस लेने का फैसला लिया।

जगदीप धनखड़ ही होंगे देश के नए उप राष्ट्रपति? विपक्षी मार्गरेट अल्वा को ममता बनर्जी ने ’36’ से किया कमजोर: समझें पूरा आँकड़ा

देश के नए उप राष्ट्रपति चुनाव (Vice President Election) के लिए संसद भवन में आज (6 अगस्त 2022) सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएँगे। इसके तुरंत बाद वोटों की गिनती की जाएगी। देर शाम तक निर्वाचन अधिकारी देश के नए उप राष्ट्रपति के नाम की घोषणा कर देंगे।

इस बार मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) और विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा (Margaret Alva) के बीच है। आँकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल धनखड़ की जीत सुनिश्चित लग रही है। विपक्ष की तरफ से मार्गरेट अल्वा चुनाव जरूर लड़ रही हैं, लेकिन धनखड़ ने एक मजबूत लीड बना रखी है।

उप राष्ट्रपति का चुनाव, एनडीए का आँकड़ा

उप राष्ट्रपति के चुनाव में हर सांसद का एक वोट गिना जाता है। लेकिन खेल ये रहता है कि सांसद को अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है। मतलब जो ज्यादा पंसद वो पहले नंबर पर और जो कम वो दूसरे नंबर पर। इसी प्रक्रिया के आधार पर देखें तो एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के खाते में अभी 396 वोट दिख रहे हैं।

उप राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के लिए कम से कम 394 वोटों की जरूरत पड़ती है। मतलब जितने वोटों की जरूरत है, उससे ज्यादा जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) के पक्ष में पहले ही जाते दिख रहे हैं। इसी वजह से इस चुनाव में उनकी जीत तय मानी जा रही है। वर्तमान में बीजेपी के लोकसभा में 303 सांसद हैं और राज्यसभा में पार्टी के पास 93 सांसद हैं।

आँकड़ों की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर एनडीए के उम्मीदवार के साथ जाने का फैसला कर लिया है। राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने वाली मायावती ने उप राष्ट्रपति चुनाव में भी जगदीप धनखड़ का समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा जनता दल (यूनाइटेड), वाईएसआर कॉन्ग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, अन्नाद्रमुक और शिवसेना ने धनखड़ का समर्थन करने की घोषणा की है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि दूसरे पार्टियों के समर्थन मिलने से एनडीए का कुल आँकड़ा 515 के करीब पहुँच सकता है। वहीं विपक्ष का आँकड़ा 200 के करीब सिमट सकता है। 

विपक्ष में बिखराव, TMC ने बिगाड़ा खेल

उप राष्ट्रपति चुनाव (Vice President Election) में आँकड़े पूरी तरह मार्गरेट अल्वा के खिलाफ जाते दिख रहे हैं। इन सब के ऊपर अगर क्रॉस वोटिंग हुई तो जगदीप धनखड़ की जीत और ज्यादा बड़ी बन सकती है।

विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा का समर्थन देने वालों में आम आदमी पार्टी, टीआरएस, AIMIM और  JMM पार्टी शामिल है। विपक्ष का ये समीकरण ममता बनर्जी की वजह से खराब होता दिख रहा है। टीएमसी उप राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग नहीं करने जा रही है। ऐसे में उसके कुल 36 सांसद वोट नहीं डालेंगे और इतने ही वोट अल्वा को कम मिल सकते हैं।

उप राष्ट्रपति चुनाव: वोट, प्रक्रिया, संख्या और जीत

उप राष्ट्रपति का चुनाव देश के लोकतंत्र में काफी मायने रखता है। ये पद कितना अहम है, इसे ऐसे समझा जा सकता है कि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति को ही सारी जिम्मेदारियों का निर्वाहन करना होता है।

उप राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते हैं। जो सदस्य मनोनीत होते हैं, उन्हें भी वोट डालने का अधिकार रहता है। ऐसे में वोटों की कुल संख्या 788 रहती है। इसमें लोकसभा के 543 वोट रहते हैं और राज्यसभा के 243।

किसी को भी उप राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के लिए कम से कम 394 वोटों की जरूरत पड़ती है। जो भी इस आँकड़े तक पहुँच जाता है, उसकी जीत सुनिश्चित हो जाती है। आपको बता दें कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव में किसी भी संदेह या विवाद सामने आने पर संविधान के अनुच्छेद-71 के मुताबिक, फैसले का अधिकार केवल देश की सुप्रीम कोर्ट को है।

जिला जज ने स्वागत क्यों नहीं किया, कार्रवाई हो: हाई कोर्ट के जज ने ‘खतरे में न्यायपालिका की स्वतंत्रता’ को बताया झूठ

कर्नाटक हाईकोर्ट (धारवाड़ बेंच) के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. कृष्ण भट 4 अगस्त 2022 को सेवानिवृत्त हो गए। अपने फेयवेल स्पीच में जस्टिस भट ने न्यायपालिका से जुड़ी कई बातों को साथी जजों एवं वकीलों के साथ साझा किया।

जस्टिस भट ने कहा कि ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता’ के लिए खतरा एक मिथक के अलावा कुछ नहीं है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता एक न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र रहकर महसूस की जा सकती है। यह ‘वैरागी’ न्यायाधीश (भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ई.एस. वेंकटरमैया के बधाई शब्दों में) ही एक स्वतंत्र न्यायपालिका बनाता है।

इस दौरान न्यायमूर्ति भट ने 1998 से एक जिला न्यायाधीश के रूप में अपने 22 वर्षों के अनुभव को साझा किया। इस दौरान वे वे तीन प्रमुख पदों- रजिस्ट्रार (सतर्कता), रजिस्ट्रार (न्यायिक) और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार-जनरल के रूप में काम किया। इसके बाद वे साल 2020 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हो गए।

एक घटना को याद करता हुए जस्टिस भट ने कहा, “मुझे एक घटना याद है, जिसमें हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र एक जिला जज के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था, क्योंकि वह व्यक्तिगत रूप से हवाई अड्डे पर पहुँच कर स्वागत नहीं किया था। यह रिकॉर्ड का हिस्सा है।”

उन्होंने कहा, “यदि देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के उत्तराधिकारी न्यायिक अधिकारियों (जेओ) को अपने आवास पर वादियों को पर्चियाँ देने के प्रयास में बुलाते हैं और सुरक्षा के संकेत के साथ उनके पूर्ववर्तियों के नाम हटा देते हैं तो तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर समस्या है।”

जस्टिस भट ने कहा, “न्यायिक अधिकारी तब तक स्वतंत्र रहेंगे जब तक वे ‘प्रोटोकॉल’ के नाम पर ज्यादती करने से बचते हैं और संभावित ‘फोन कॉल’ और ‘स्लिप पास’ और अपरिहार्य संभावित प्रतिशोध की परवाह किए बिना निडर और स्वतंत्र तरीके से प्रशासन का कार्य करते हैं।” उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के नाम पर ‘घोर आज्ञाकारिता’ और ‘महंगी वस्तुओं को उपहार में देना’ शामिल है।

उन्होंने कहा, “पहली बार में यह बेतुका और कठोर लग सकता है। न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों और लोकायुक्त/उप-लोकायुक्त जैसे अन्य उच्च अधिकारियों को नार्को-विश्लेषण परीक्षण के लिए खुद को पेश करना चाहिए, साथ ही संबंधित पदाधिकारी द्वारा नामित व्यक्तियों पर समान परीक्षण का समान दायित्व होना चाहिए, यदि पदाधिकारी को लगता है कि शिकायत झूठी और प्रेरित है।”

उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह यदि न्यायाधीश संदिग्ध कंपनी के डेस्टिनेशन हॉलिडे के में घूमते पाए जाते हैं तो न्यायाधीश के रूप में उनकी स्वतंत्रता के बारे में सवाल उठना लाजिमी है।” उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, “यह मेरी जानकारी में आया है कि एक प्रधान जिला न्यायाधीश ने निजी यात्रा पर आए नई दिल्ली के एक गणमान्य व्यक्ति की पत्नी को देने के लिए एक महंगी साड़ी खरीदी की, और गणमान्य युगल इसे लिए बिना चले गए।”

‘राममंदिर शिलान्यास के दिन विरोध कर कॉन्ग्रेस ने दिया तुष्टिकरण का संदेश’: राहुल गाँधी की अगुआई में काले कपड़े में प्रदर्शन पर अमित शाह ने साधा निशाना

कॉन्ग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने शुक्रवार (5 अगस्त 2022) को कहा कि वह ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ कर राजनीति कर रही है। गृहमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने महंगाई के नाम पर प्रदर्शन के लिए उस दिन को चुना, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने दो साल पहले राम मंदिर की नींव रखी थी।

अमित शाह ने कहा, “आज का दिन कॉन्ग्रेस ने इसलिए काले कपड़ों में विरोध के लिए चुना, क्योंकि वे इसके माध्यम से संदेश देना चाहते हैं कि हम राम जन्मभूमि के शिलान्यास का विरोध करते हैं और अपनी तुष्टिकरण की नीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि आज ही के दिन साल 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने राम जन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास किया था और ऐसा करके उन्होंने 550 साल पुरानी समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकाला था। शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस वास्तव में मंदिर निर्माण पर अपना विरोध जता रही है।

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए गृहमंत्री ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और महंगाई का मुद्दा बस बहाना है। वह तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस खुले तौर पर मंदिर का विरोध नहीं कर सकती थी, इसलिए महंगाई और ED के नाम पर गुप्त संदेश देने की कोशिश की है।

गृहमंत्री शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से अधिकांश समय कॉन्ग्रेस सत्ता में रही है, लेकिन उसने इस पुराने विवाद को सुलझाने का कभी प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकाला।

बता दें कि कॉन्ग्रेस ने शुक्रवार को महंगाई, बेरोजगारी और GST के दायरे को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सारे नेता काले रंग के कपड़े पहन रखे थे। प्रदर्शन राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा समेत कई नेताओं और सांसदों शामिल थे।

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की अगुवाई में कॉन्ग्रेस के सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन के लिए मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया और सबको हिरासत में ले लिया। बाद में पुलिस ने सबको रिहा कर दिया। 

इसके अलावा, केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने दूरदर्शन पर प्रसारण के लिए मेगा हिंदी सीरियल ‘स्वराज: भारत के स्वतंत्रता संग्राम की समग्र गाथा’ का उद्घाटन किया। 75 एपिसोड वाले इस सीरियल में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी उन घटनाओं के बारे में बताया गया है, जिसके बारे में लोग कम जानते हैं।

इस अवसर पर शाह ने कहा कि भारत तब तक स्वराज हासिल नहीं कर सकता, जबकि तक कि वह पुरातन संस्कृति और भाषा का संरक्षण करने के साथ-साथ अपनी समृद्ध इतिहास से भावी पीढ़ियों को अवगत नहीं कराता।

उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति 12,000 साल पुरानी है और किसी NGO को संस्कृति के बारे में भारत को बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “जिन्होंने हम पर शासन किया और हमारे सिस्टम को नष्ट किया, वे हम पर तभी शासन कर पाए जब हमारे लोगों ने खुद को हीन समझा। हम उनसे हर क्षेत्र में आगे हैं। उन्होंने झूठ फैलाया कि हम निरक्षर हैं। एक निरक्षर देश विश्व को गीता और वेद जैसा ग्रंथ कैसे दे सकता है।”