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महाराष्ट्र पंचायत चुनावों में शिवसेना के शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे को दी मात: 271 में से 82 सीटें के साथ BJP पहले स्थान पर

इन चुनावों में मिली सफलता पर बोलते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "हमने इन चुनावों की ठीक से तैयारी भी नहीं की थी, फिर भी हमें और हमारी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को अच्छी सफलता मिली है।"

महाराष्ट्र (Maharashtra) में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में भाजपा (BJP) ने बाजी मारी है, जबकि दूसरे स्थान पर शरद पवार की पार्टी NCP रही है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) का खेमा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) गुट से पीछे चौथे नंबर पर रहा।

गठबंधन के हिसाब से बात करें तो भाजपा व शिंदे गुट मिला कर कुल 122 सीटों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि 102 सीटों के साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) दूसरे नंबर पर रहा। वहीं, 33 ग्राम पंचायतों के चुनाव निर्विरोध हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 271 सीटों में भाजपा 82 सीटों के साथ पहले नंबर पर रही। 53 सीटों के साथ NCP ने दूसरे स्थान पर कब्ज़ा जमाया। शिवसेना का शिंदे गुट 39 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना गुट को 28 सीटों पर ही सफलता मिल पाई। पाँचवें नंबर पर कॉन्ग्रेस रही है, जिसके खाते में कुल 22 सीटें आई हैं। खास बात ये है कि अन्य का आँकड़ा 47 रहा, जो संख्या के हिसाब से तीसरे स्थान पर माना जा सकता है।

अगर इन आँकड़ों को क्षेत्र के हिसाब से देखा जाए तो मराठवाड़ा में शिवसेना के शिंदे गुट का बोलबाला रहा। धुले और औरंगाबाद में शिंदे गुट ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की और उद्धव खेमे पर बढ़त बनाई।

शोलापुर में भाजपा, ठाकरे खेमा और स्थानीय पार्टियों का त्रिकोणीय मुकाबला हुआ, जबकि बीड जले में NCP आगे रही। यहाँ भाजपा ने दूसरा स्थान हासिल किया। उद्धव ठाकरे गुट पुणे में एकतरफा जीत हासिल करने में सफल रहा।

इन चुनावों में मिली सफलता पर बोलते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “हमने इन चुनावों की ठीक से तैयारी भी नहीं की थी, फिर भी हमें और हमारी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी को अच्छी सफलता मिली है।”

जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव पर फिलहाल रोक

वहीं, एक अन्य घटनाक्रम में राज्य चुनाव आयोग ने जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव पर फिलहाल रोक लगा दी है। ऐसा निर्णय राज्य जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 में राज्य सरकार द्वारा लिए गए बदलाव के चलते लिया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद इसको लेकर नए आदेश जारी किए जाएँगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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