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‘यूक्रेन अपने नागरिकों को नुकसान पहुँचा रहा’: बोला उदारवादियों का प्रिय ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’, टूट पड़े वामपंथी

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गुरुवार (4 अगस्त 2022) को यूक्रेनी सेना पर मानवीय कानूनों का उल्लंघन करने और नागरिक वस्तुओं को सैन्य लक्ष्यों में बदलने का आरोप लगाया है। अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ ने कहा, “यूक्रेनी सैनिकों ने आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में ठिकाने और ऑपरेटिंग हथियार प्रणाली स्थापित करके नागरिकों को नुकसान पहुँचाया है।”

इस पर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक विस्तृत लेख भी प्रकाशित किया कि कैसे यूक्रेन की सेना अपने नागरिकों के जीवन को किस तरह खतरे में डाल रही है। महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने बताया, “हमने यूक्रेनी बलों के एक पैटर्न का दस्तावेजीकरण किया है, जो नागरिकों को जोखिम में डालते हैं। जब वे आबादी वाले क्षेत्रों में काम करते हैं तो युद्ध के कानूनों का उल्लंघन करते हैं।”

रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है, “अधिकांश रिहायशी इलाके जहाँ सैनिक थे, वे अग्रिम पंक्ति से कई किलोमीटर दूर थे। हालाँकि, इसके लिए विकल्प उपलब्ध थे, जिससे नागरिक खतरे में नहीं पड़ते, जैसे कि सैन्य ठिकाने या आसपास के घने जंगल या आवासीय क्षेत्रों से दूर अन्य संरचनाएंँ।”

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि कैसे यूक्रेन द्वारा स्कूलों और अस्पतालों को सैन्य लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, “अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून में सभी पक्षों को घनी आबादी वाले क्षेत्रों के भीतर या उसके आसपास सैन्य उद्देश्यों के इस्तेमाल से रोका गया है। नागरिकों को हमलों के प्रभाव से बचाने के लिए सैन्य ठिकानों के आसपास से उन्हें हटाना और हमलों के प्रभाव के बारे में उन्हें जानकारी देना शामिल है।”

वाम-उदारवादी का रुदन

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर वाम उदारवादियों गुट इस अंतरराष्ट्रीय एनजीओ को कठघरे में खड़े कर रहे हैं। उन्होंने एमनेस्टी पर पक्षपात और झूठी रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया है। कॉलिन दाराह नाम के एक यूजर ने लिखा, “शायद सबसे हास्यास्पद बयानों में से एक, जो मैंने कभी किसी एनजीओ से देखा है !! इसकी किसने पुष्टि की है?? यूक्रेन अपनी संप्रभुता, स्वतंत्रता और लोगों के लिए पूरी ताकत से लड़ रहा है। शर्मनाक बयान।”

एक अन्य यूजर ने पूछा, “तो आप दावा करते हैं कि रूसी आक्रमण किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता है? क्या आप मुझे बता सकते हैं कि यूक्रेनी लोगों का खून कितना स्वादिष्ट है? मुझे यकीन है, आप इसे रूसियों के साथ खूब पीते हैं।”

जोनाथन डेविस ने लिखा, “मैं हाल ही में #HumanRights की रक्षा करने के लिए उसका सदस्य बना था, लेकिन इस पोस्ट को देखकर मैं उस पर पुनर्विचार कर रहा हूँ। आप यूक्रेन की निंदा कैसे कर सकते हैं, जब वह एक ऐसे हमलावर से अपने देश की रक्षा कर रहा है जिसने लगातार अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है।”

जिस गुट ने वर्षों तक पोषित किया और साथ खड़ा रहा, उसी से लताड़ खाने के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नाराजगी को शांत करने के लिए रूस पर भी निशाना साधा। उसने एक ट्वीट में कहा, “जबसे रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू किया है, तब से हम मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन को उजागर कर रहे हैं। इज़ियम की तबाही से लेकर मारियुपोल की घेराबंदी तक, कीव में बमबारी से लेकर लविव में विस्थापित लोगों तक, रूस का शुरू किया युद्ध आक्रामकता है।”

केरल के ‘द वीक’ मैगजीन ने छापी माँ काली और भगवान शंकर की आपत्तिजनक तस्वीर, FIR दर्ज, स्तंभकार बिबेक देबरॉय ने भी जताई नाराजगी

माँ काली के फिल्मी पोस्टर के बाद भगवान शंकर की आपत्तिजनक तस्वीर छापने का मामला सामने आया है। यह आपत्तिजनक तस्वीर केरल की मैगजीन ‘द वीक’ में प्रकाशित की गई है। इसको लेकर विवाद गहरा गया है। इसी बीच खबर है कि उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘द वीक’ मैगजीन के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। भाजपा नेता प्रकाश शर्मा ने मैगजीन के खिलाफ कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी।

भाजपा नेता ने कहा, “मैगजीन ने भगवान शिव और माँ काली की आपत्तिजनक फोटो छापी है। 30 जुलाई को वह दिल्ली से कानपुर लौटे। उन्होंने सेंट्रल स्टेशन के एक बुक स्टॉल से 24 जुलाई को प्रकाशित हुई द वीक मैगजीन खरीदी। मैगजीन के 62 व 63 पेज पर भगवान शिव व माँ काली की आपत्तिजनक फोटो छपी हुई थी। ऐसी तस्वीरें हिंदुओं की भावनाएँ को ठेस पहुँचाती हैं।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैगजीन ने 24 जुलाई के अंक में हिंदू देवी माँ काली को लेकर एक लेख छापा है। इस लेख में भगवान शंकर की जो तस्वीर छापी गई है, उसे आपत्तिजनक और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाला बताया जा रहा है।

लेख का स्क्रीनशॉट फोटो साभार: दैनिक भास्कर

इस लेख को बिबेक देबरॉय ने लिखा है। ‘द वीक’ के स्तंभकार बिबेक देबरॉय ने 4 अगस्त को ट्विटर पर घोषणा की कि वह इस मैगजीन से खुद को अलग कर रहे हैं। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा, “मैगजीन ने मुझसे पूछे बिना लेख में माँ काली की आपत्तिजनक तस्वीर का इस्तेमाल किया। मैं इससे आहत हूँ।” प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ बिबेक देबरॉय एक अर्थशास्त्री और सम्मानित लेखक के रूप में जाने जाते हैं।

लेख में आपत्तिजनक तस्वीर का प्रयोग करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए देबरॉय ने मैगजीन की पत्रकारिता नैतिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, “मेरा यह पत्र ‘माँ काली’ पर विशेष कॉलम से संबंधित है, जिसे ‘द वीक’ ने मुझे लिखने के लिए कहा था। यह 24 जुलाई, 2022 के अंक में ‘ए टंग ऑफ फायर’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। साथ में एक जादू टोना पर आधारित पेंटिंग का चित्र भी है। लेख के कंटेंट और इस तस्वीर के बीच एक बहुत ही कमजोर कड़ी है। मैं काली की कई बेहतर तस्वीर के बारे में सोच सकता हूँ और उसे उपलब्ध करवा सकता हूँ। इस तस्वीर को जान-बूझकर उकसाने और भड़काने के लिए चुना गया था। कम से कम, मैं इसे इस तरह से समझता हूँ।”

द वीक ने माँ काली की आपत्तिजनक फोटो का श्रेय बिबेक देबरॉय के लेख को दिया है

बता दें कि लेखक बिबेक देबरॉय (Bibek Debroy) ने ‘The fire has seven tongues, and one of these is Kali’ शीर्षक से लेख लिखा था, जो 24 जुलाई, 2022 को ‘द वीक’ में प्रकाशित किया गया था।

थूकने, माँस फेंकने, पीटने के बाद अब बरेली में मुस्लिमों ने काँवड़ियों को बस्ती से गुजरने से रोका, शिवभक्तों ने कहा- यही हमारा पारम्परिक रास्ता

हिंदुओं के पवित्र सावन महीने में भगवान शंकर के जलाभिषेक के लिए यात्रा पर जाने वाले काँवड़ियों को परेशान करने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में मुस्लिम समुदाय के लोग अपने इलाके से काँवड़ियों को जाने से रोक रहे हैं। इसके पहले काँवड़ियों पर कुछ मुस्लिमों द्वारा गंदा पानी फेंकने, थूकने आदि की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

बरेली के दुनका में मुस्लिम बस्ती की पीडब्ल्यूडी रोड से होकर जाने वाले काँवड़ियों को रोका जा रहा है। इसके बदले उन्हें दूसरे रास्ते से हरिद्वार जाने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो इस रूट से काफी लंबा बताया जा रहा है।

बता दें कि काँवड़िए भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कई-कई दिनों तक पैदल और भूखे चलकर हरिद्वार पहुँचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्हें छोटा रास्ता देने के बजाए लंबे रूट पर जाने के लिए बाध्य करना एक तरह से प्रताड़ना है।

मुस्लिमों के विरोध और हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में पुलिस और पीएसी तैनात की गई है। वहीं, प्रशासन भी काँवड़ियों को लंबे रूट से जाने के लिए कह रहा है, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।

कुछ साल तक काँवड़ लेकर जाने वाले इसी मुस्लिम बस्ती से होकर जाते थे, लेकिन कुछ वर्ष पहले मुस्लिमों ने इन्हें उधर से गुजरने पर बवाल कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन अधिकारियों ने दोनों समुदाय के लोगों के साथ बैठकर साल 2014 में दोनों समुदाय के धार्मिक जुलूस व कार्यक्रमों के रूट तय कर दिए थे।

इस समझौते के तहत तय किया गया था कि काँवड़िये दुनकी के बाग के पास से चकरोड से होकर हरिद्वार जाएँगे। वे मुस्लिम बस्ती के पीडब्ल्यूडी रोड से होकर नहीं गुजरेंगे। हालाँकि, यह रोड लंबा पड़ता है।

बता देें कि मुस्लिमों का दबाव की राजनीति में कई ऐसे इलाके हैं जहाँ रूट बदल दिया गया है। वहीं, कई ऐसे इलाके हैं, जहाँ बवाल करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनके दबाव में प्रशासन को रास्ता बदलने का निर्णय लेना पड़े।

काँवड़ियों को पीटने और उनके जल को खंडित करने की कई घटनाएँ

हाल ही में बरेली में ही लखौरा से कछला जा रहे काँवड़ियों को परगवाँ गाँव में महिला प्रधान शकीना के ससुर और उसके समर्थकों ने रोक दिया। बवाल के लिए उन्होंने डीजे बजाने को मुद्दा बनाते हुए कई काँवड़ियों को पीट दिया।

इस दौरान मुस्लिमों ने काँवड़ियों को न सिर्फ रोका बल्कि उनमें से कई को बुरी तरह पीट भी दिया। इस दौरान मुस्लिम महिलाओं ने अपनी-अपनी छतों से काँवड़ियों पर पथराव किया और उनपर गंदा पानी फेंक कर उनकी पवित्र यात्रा को खंडित कर दिया।

इसी तरह मेरठ के कंकरखेड़ा के पास NH 58 पर 22 जुलाई 2022 को कुछ काँवड़िए अपने काँवड़ को रखकर शिविर में आराम कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के दो युवक बाइक से आए और काँवड़ पर थूकने का प्रयास किया। आगे चलकर इनमें से एक युवक बाइक से उतरा और काँवड़ पर थूक कर अपवित्र कर दिया।

संभल जिले के खग्गूसराय में काँवड़ियों के साथ अभद्रता करने का मामला सामने आ चुका है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हरिद्वार से लौट रहे काँवड़ यात्रियों पर संभल में छतों से थूका गया, उनके ऊपर पत्थर फेंके गए और उनका रास्ता तक रोक दिया गया। 

मुरादाबाद के इब्राहिमपुर गाँव में भी ऐसी ही घटना घटी जहाँ  मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने काँवड़ियों को इब्राहिमपुर में आगे बढ़ने से चारपाई लगाकर रोक दिया। उन्होंने सड़क पर खाट बिछा दी और माँग की कि काँवड़िए वापस जाएँ और निर्धारित मार्ग का पालन करें। यहाँ, महिलाओं ने जिन काँवड़ियों को रोका, वे उसी इब्राहिमपुर गाँव के ही थे।

बता दें कि काँवड़ियों की काँवड़ खंडित करने का ये प्रयास पहला नहीं है। 19 जुलाई को मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके में हरिद्वार से राजस्थान जा रहे काँवड़ यात्रा पर किसी ने मांस का टुकड़ा फेंक दिया था। घटना शाम के वक्त हुई, जिसके बाद काँवड़ यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने एक घंटे तक सड़क जाम कर दिया था। 

धार्मिक ट्रस्टों और सरायों को GST से छूट, केंद्र ने फर्जी खबरों पर दिया पर स्पष्टीकरण, आम आदमी पार्टी ने फैलाया था झूठ

सोशल मीडिया और मीडिया में इस तरह का दावा किया जा रहा है कि 18 जुलाई, 2022 से धर्मार्थ ट्रस्टों पर जीएसटी लागू किया गया है। इसको लेकर भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह का दावा करने वाली मीडिया रिपोर्ट्स फर्जी हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ वर्ग यह संदेश फैला रहे हैं कि 18 जुलाई, 2022 से जीएसटी लागू किया गया है, यहाँ तक कि धार्मिक/धर्मार्थ ट्रस्टों द्वारा संचालित सरायों पर भी यह संदेश फैलाया जा रहा है, यह सच नहीं है।”

सिलसिलेवार कई ट्वीट कर सीबीआईसी ने बताया, जीएसटी परिषद (GST Meeting) की 47वीं बैठक की सिफारिश के मुताबिक 1,000 रुपए प्रतिदिन के किराए वाले होटल कमरों से GST छूट वापस ली गई है। अब उन पर 12% GST लगाया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि धार्मिक ट्रस्टों या सरायों से किसी भी प्रकार का जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) नहीं किया जा रहा है औऱ इसको लेकर आ रही सभी खबरें फेक हैं। यहाँ 1000 रुपए प्रतिदिन से कम किराया वाले कमरों दी जा रही छूट में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एवं कस्टम्स (CBIC) ने छूट अधिसूचना और क्रमांक संख्या भी शेयर की है। अधिसूचना संख्या 12/2017-सीटीआर दिनांक 28.06.2017 की संख्या 13 में छूट से संबंधित सभी डिटेल्स हैं।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एवं कस्टम्स ने 3 सराय गुरु गोबिंद सिंह NRI निवास, बाबा दीप सिंह निवास और माता भाग कौर निवास के बारे में स्पष्ट किया कि इनमें से किसी को भी नोटिस नहीं दिया गया। हो सकता है कि इन्होंने खुद ही GST भरना शुरू किया हो।

दरअसल, CBIC ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की सरायों पर GST नहीं लगाया गया है। ना ही इन सरायों में से किसी को भी कोई GST भरने के लिए नोटिस जारी किया गया है। हो सकता है कि उन्होंने खुद ही GST जमा करवा दिया हो जिसके लिए वे बाध्य नहीं थे। इस संबंध में जारी नोटिफिकेशन के आधार पर एसजीपी की सराय को दी गई छूट का लाभ उठा सकती हैं।

बता दें कि इसको लेकर आम आदमी पार्टी के नेता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ‘Golden Temple’ के सरायों पर 12% GST लगाकर संगत का अपमान किया है। सांसद राघव चड्डा ने गुरुवार (4 अगस्त 2022) को कहा, “ये Tax Aurangzeb के ‘जजिया टैक्स’ की याद दिलाता है, जब तीर्थ यात्रा पर टैक्स वसूला जाता था। 3 करोड़ पंजाबियों की ओर से वितमंत्री निर्मला सीतारमण से टैक्स वापस लेने की माँग की है।”

इसको लेकर एक ट्विटर यूजर ने राघव चड्डा के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग की। उसने कहा, “पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में अफवाहें फैलाने के लिए ‘आप’ के इस प्रवक्ता के खिलाफ पुलिस केस क्यों नहीं दर्ज कराते। राष्ट्र को तोड़ने वाले बयान देने वालों और झूठे लोगों को दंडित करने में किसी भी तरह की ढील के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।”

माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, ‘भगोड़े’ की यूपी पुलिस कर रही तलाश: कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

बाहुबली मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी की जमानत अर्जी खार‍िज हो गई। अब उनकी गिरफ्तारी किसी भी वक्त हो सकती है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने हथियार लाइसेंस मामले में अब्बास अंसारी की दलीलों को दरकिनार कर बेल अर्जी को खार‍िज कर दिया।। पिछले सप्ताह ही अब्बास अंसारी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। पर उनको सफलता हासिल नहीं हुई। अब्बास अंसारी के पिता बाहुबली मुख्तार अंसारी आजकल बंद जेल में बंद हैं।

बेल याचिका के खिलाफ सरकारी वकील मनोज त्रिपाठी ने कई दलीलें पेश की। उन्होंने कहा कि अभियुक्त के पास से प्रतिबंधित बोर के काफी मात्रा में कारतूस बरामद हुए थे। लखनऊ स्थित महानगर पते से जारी लाइसेंस के आधार पर दिल्ली में खरीदे गए शस्त्र लाइसेंस को दिल्ली पुलिस ने भी रद कर दिया था। यह दलील भी दी गई कि अभियुक्त लगातार फरार चल रहा था, जिससे वह पिछले दिनों राष्ट्रपति चुनाव में मत डालने भी नहीं गया।

विशेष जज हरबंश नारायण ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त के खिलाफ सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस मामले में गिरफ्तारी वारंट भी जारी है। लिहाजा ऐसी परिस्थिति में अर्जी स्वीकार करने योग्य नहीं है। इसलिए अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है। बता दें कि 14 जुलाई को एमपी-एमएलए की विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में अभियुक्त अब्बास अंसारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब अब्बास अंसारी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

क्या है मामला?

बता दें कि 12 अक्टूबर 2019 को लखनऊ के महानगर थाने में अब्बास अंसारी के खिलाफ पुलिस की तरफ से एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमे आरोप लगाया गया था कि मेट्रो सिटी निवासी अब्बास अंसारी ने 2012 में डीबीडीएल गन का लाइसेंस लिया था। मुख्तार अंसारी के बेटे पर आरोप है कि उसने शूटिंग के बहाने नियम के खिलाफ कई असलहे और कारतूस खरीदे थे।

रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपित ने लखनऊ पुलिस को बिना जानकारी दिए और अनुमति लिए धोखाधड़ी कर लाइसेंस को दिल्ली स्थानांतरित करवाया और उस पर कई हथियार लिए। जाँच-पड़ताल के दौरान लखनऊ पुलिस ने अब्बास अंसारी के आवास से 6 असलहे और अलग-अलग बोर के 4,431 कारतूस बरामद किए थे। इसके बाद महानगर पुलिस ने थाने में आईपीसी की धारा 467, 468, 471, 420 और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।

वेल्डर पिता को खाना देने जाती थी 13 साल की बेटी, उसी दौरान करता था रेप: बच्ची ने बेटे को दिया जन्म, वेल्लोर पुलिस ने POSCO में किया गिरफ्तार

तमिलनाडु के वेल्लोर से एक घिनौनी खबर सामने आई है। यहाँ वेल्डर का काम करने वाले 41 वर्षीय एक व्यक्ति को अपनी 13 साल की नाबालिग लड़की का रेप करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जब बेटी ने एक बच्चे को जन्म दिया, तब इस मामले का खुलासा हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, वेल्लोर जिले के अडुक्कंबरै का यह कुकर्मी पिता पिछले 10 महीनों से अपनी बेटी का यौन शोषण कर रहा था। एक सरकारी स्कूल में 8वीं में पढ़ने वाली लड़की को जब पेट में दर्द हुआ तो उसे वेल्लोर गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहाँ पता चला वह गर्भवती है और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

नाबालिग लड़की ने जब मंगलवार (2 अगस्त 2022) को बच्चे को जन्म दिया तो अस्पताल के डॉक्टरों ने इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति को दी। इसके बाद समिति ने इसकी शिकायत वेल्लोर पुलिस में दर्ज कराई।

वेल्लोर पुलिस की टीम ने इस संबंध में नाबालिग लड़की से पूछताछ की। पूछताछ में उसने बताया कि उसके पिता ने पिछले 10 महीनों से उसका यौन शोषण कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने उसके पिता को POCSO सहित विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया। पिता वेल्लोर के मैन्युफैक्चरिंग इकाई में वेल्डर का काम करता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की के माता-पिता 8 साल पहले अलग हो गए थे। लड़की और उसका भाई अपने पिता तथा दादा-दादी के साथ रहते थे। लड़की हर दिन अपने पिता के पास अपनी दादी द्वारा दिए गए खाना को देने के लिए जाती थी। इसी दौरान उसका पिता उसके साथ रेप करता था।

नाबालिग लड़की ने बताया कि उसके पिता ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने इस बारे में किसी को बताया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद वह डर गई थी और इसके बारे में किसी को नहीं बताया था।

इसी तरह की एक घटना पिछले महीने राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले से आई थी। वहाँ एक व्यक्ति अपनी नाबालिग बेटी के साथ लगभग डेढ़ साल तक बलात्कार करता रहा। जब लड़की ने विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी। उसके बाद लड़की ने शिकायत दर्ज कराई और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया था।

हनुमानगढ़ के SP अजय सिंह के अनुसार, “बच्ची की माँ की मौत हो गई थी। उस दौरान उसकी उम्र करीब 13 साल थी। लड़की ने कहा कि आरोपित पिता उसके साथ डेढ़ साल से बलात्कार कर रहा था। जब उसने विरोध किया और अपनी दादी तथा मामा को इसके बारे में बताने की बात कही तो तो आरोपित पिता ने उसे जान से मारने की धमकी दी।”

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 4 रोहिंग्या मुस्लिम महिलाओं को वापस म्यांमार भेजने से रोका: 13 बच्चों के साथ भारत में किया था घुसपैठ

पश्चिम बंगाल स्थित कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य की एकल पीठ ने देश में अवैध रूप से रहीं चार रोहिंग्या मुस्लिम महिलाओं को वापस म्यांमार भेजने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने गुरुवार (4 जुलाई 2022) को केंद्र सरकार से कहा कि 10 अगस्त को उनकी याचिका पर सुनवाई होने तक उन्हें वापस नहीं भेजा जाए।

दरअसल, इन महिलाओं ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि म्यांमार में उनके जीवन को खतरा है, इसलिए उन्हें वापस नहीं भेजा जाए और उन्हें शरणार्थी के रूप में भारत में ही रहने की अनुमति दी जाए।

इसी साल 31 जनवरी को दी याचिका में रोहिंग्या महिलाओं ने कोर्ट से यह माँग की है कि बंगाल के विभिन्न बाल सुधार गृहों में बंद उनके नाबालिग बच्चों को उनके साथ रहने की अनुमति दी जाए।

बता देें कि साल 2016 में चारों महिलाएँ अपने 13 बच्चों के साथ अवैध रूप से भारत में घुस आई थीं। इसमें इन महिलाओं और उनके बच्चों को दोषी माना गया था। साल 2019 में उनकी सजा पूरी हो गई। इसके बाद सरकार उन्हें वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया में लग गई। तब उन्हें बंगाल के दमदम स्थित सुधार गृह में रखा गया है।

इन महिलाओं ने गुरुवार को एक अर्जेंट याचिका दाखिल कर कोर्ट को बताया कि उन्हें 5 अगस्त को म्यांमार भेजा जा रहा है। इसलिए इस पर तुरंत रोक लगाई जाए और उन्हें भारत में ही रहने की इजाजत दी जाए।

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट की न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य की एकल पीठ ने राज्य सुधार सेवा विभाग को चार रोहिंग्या कैदियों को सभी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार के वकीलों से पूछा कि क्या इस मामले में कोई विशेष निर्देश है। इस पर केंद्र सरकार के वकील धीरज त्रिवेदी और राज्य सरकार के वकील अनिर्बन रॉय ने किसी भी आदेश की जानकारी से इनकार किया।

इसके बाद न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि मौजूदा स्थिति में चारों याचिकाकर्ताओं को वापस म्यांमार नहीं भेजा जा सकता। उन्होंने दमदम केंद्रीय सुधार गृह अधिकारियों को उनके रहने की बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी।

नेशनल हेराल्ड को 1981 में लीज पर दी गई थी 1.14 एकड़ जमीन, कॉन्ग्रेस ने बना डाले बड़े-बड़े शोरूम: दिल्ली के बाद अब भोपाल में भी सील होगी बिल्डिंग

नेशनल हेराल्ड मामले में कॉन्ग्रेस की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। बुधवार (3 जुलाई 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल हेराल्ड बिल्डिंग के अंदर मौजूद यंग इंडिया के ऑफिस को सील कर दिया था। अब भोपाल में नेशनल हेराल्ड की प्रॉपर्टी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। भोपाल में भी नेशनल हेराल्ड के ऑफिस पर कार्रवाई हो सकती है। शिवराज सरकार में मंत्री भूपेंद्र सिंह ने ये बड़ा दावा किया है।

मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कोर्ट में मामला होने के चलते अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार अदालत में मामले की बारीकी से निगरानी कर रही है और साथ ही सरकार ने भी जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच कराने के बाद जो रिपोर्ट सामने आएगी, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जाँच रिपोर्ट 1 महीने में देने के लिए कहा गया है। भूपेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो जाँच पूरी होने के बाद परिसर को सील कर दिया जाएगा। 

इसके अलावा जो लोग भी कामर्शियल उपयोग कर रहे हैं या जिन्होंने किया है उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कॉन्ग्रेसी नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर जगह ली गई और कॉन्ग्रेस नेताओं ने उसे अपने नाम पर करा लिया।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि देश में आजादी के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर जमीन ली उसके बाद संपत्ति अपने नाम करा ली। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में नेशनल हेराल्ड के दफ्तर में विशाल मेगा मार्ट समेत कई कमर्शियल दफ्तर संचालित है।

उन्होंने कहा कि भोपाल के एमपी नगर में नेशनल हेराल्ड को अलॉट हुई जमीन का लैंड यूज चेंज कराने वाले तत्कालीन अधिकारियों की भी जाँच मध्य प्रदेश सरकार कराएगी। मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर जमीन ली और उसके बाद संपत्ति अपने नाम करा ली। ऐसे लोगों की भी जाँच होगी।

भोपाल के नेशनल हेराल्ड की कहानी

भोपाल के प्रेस कॉम्प्लेक्स में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को 1981 में 1.14 एकड़ जमीन महज 1 लाख रुपए में 30 साल के लिए लीज पर आवंटित की गई थी। AJL ने उस समय अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड, हिंदी दैनिक नवजीवन और उर्दू दैनिक कौमी आवाज प्रकाशित की थी। 2011 में लीज समाप्त होने के बाद भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) यहाँ मालिकाना हक लेने पहुँचा तो पाया कि इसका इस्तेमाल समाचार पत्रों के प्रकाशन के बजाय व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था। समाचार पत्रों का प्रकाशन तो 1992 में ही बंद हो चुका था और उसके बाद से इसका कॉमर्शियल इस्तेमाल हो रहा था।

प्रेस को दिए गए प्लॉट पर व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स बनने का पता चलने के बाद भोपाल विकास प्राधिकरण ने इसे अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की लेकिन इसी बीच कई खरीददार सामने आ गए और मामला अदालत पहुँच गया। इस वजह से कार्रवाई बीच में ही अटक गई। हालाँकि, 2012 में भोपाल विकास प्राधिकरण ने इस प्लॉट की लीज को रद्द कर दिया था लेकिन तब से लेकर अब तक इस प्लॉट के अलग-अलग खरीददार और भोपाल विकास प्राधिकरण के बीच मालिकाना हक को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सबसे पहले 2012 में नेशनल हेराल्ड केस का मुद्दा उठाया। इसके बाद 2014 में ईडी ने संज्ञान लेते हुए मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। इस केस में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के ही मोतीलाल वोरा समेत अन्य को आरोपित बनाया। मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ईडी ने दिल्ली की नेशनल हेराल्ड बिल्डिंग में स्थित यंग इंडिया कंपनी के ऑफिस को सील कर दिया। इस कार्रवाई से एक दिन पहले ED ने इस मामले में 11 जगहों पर छापेमारी की थी।

नमाज पढ़ते दबकर मर गईं थी जिसकी 3 बेटियाँ, उसके घर से 10 क्विंटल विस्फोटक मिलाः पीलीभीत में अजीम बेग और उसका बेटा गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक घर से 10 क्विंटल से ज्यादा विस्फोटक बरामद किया गया है। यह घर अजीम बेग के उस मकान से अलग है जो 2 जुलाई 2022 को धमाके से जमींदोज हो गया था। धमाके के वक्त अजीम की तीन बेटियाँ घर में नमाज पढ़ रहीं थीं और मलबे में दबकर उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में अजीम और उसके बेटे तस्लीम को गिरफ्तार किया है।

पीलीभीत पुलिस के मुताबिक खपरैल के एक घर से बरामद विस्फोटक की मात्रा 10 क्विंटल 20 किलोग्राम है। ये विस्फोटक प्लास्टिक की बोरियों में रखे हुए थे। इसके अलावा 20 बोरियों में बने हुए पटाखे मिले हैं, जिसका वजन 5 क्विंटल बताया जा रहा है। बताया जाता है कि अजीम लम्बे समय से इस घर का इस्तेमाल विस्फोटक रखने के लिए कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने आरोपित अजीम का मकान भी सील कर दिया है। बरामद विस्फोटक को परीक्षण के लिए लखनऊ की प्रयोगशाला में भेजा गया है। इस जाँच के बाद विस्फोटक के प्रयास और उसकी क्षमता की जानकारी सामने आएगी, जिसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई होगी। पीलीभीत पुलिस के मुताबिक इस मामले में IPC की धारा 285,286,304,427 के साथ व 9B विस्फोटक अधिनियम 1884 के तहत कार्रवाई की गई है। पीलीभीत पुलिस ने SSP दिनेश कुमार पी ने कार्रवाई की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि अजीम अवैध तौर पर घनी बस्ती के बीच पटाखे बनाता था। 2 अगस्त को जहानाबाद के मोहल्ला जोशी टोला निवासी अजीम के घर में विस्फोट हुआ था। विस्फोट से अजीम का दो मंजिला मकान ढह गया। आसपास के 11 मकानों में दरार पड़ गई थी। विस्फोट में अजीम की 3 बेटियों निशा, सानिया और नगमा की मौत हो गई थी। धमाके के वक्त अजीम घर में नहीं था।

मुरली श्रीशंकर ने राष्ट्रमंडल खेलों में रचा इतिहास, लॉन्ग जंप में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट: PM मोदी ने दी बधाई

भारत के मुरली श्रीशंकर ने गुरुवार (4 अगस्त 2022) को राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की एथलेटिक्स प्रतियोगिता की पुरुष वर्ग की लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप के फाइनल में 8.08 मीटर के बेस्ट जंप के साथ रजत पदक हासिल किया। इसी के साथ श्रीशंकर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लॉन्ग जंप इवेंट में रजत पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरुष एथलीट बन गए हैं।

बता दें कि स्वर्ण पदक जीतने वाले बहामास के लकन नैरन ने भी 8.08 मीटर का ही जंप लगाया। हालाँकि, उन्होंने यह जंप अपने दूसरे अटैम्प्ट में ही लगाया था। इस वजह से उन्हें स्वर्ण पदक मिला। वहीं, श्रीशंकर ने पाँचवें प्रयास में ऐसा किया। तीसरे स्थान पर 8.06 मीटर के जंप के साथ दक्षिण अफ्रीका के जोवान वान वूरन रहे। उन्हें कांस्य पदक मिला।

पुरुष लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले मुरली श्रीशंकर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘‘एम श्रीशंकर का राष्ट्रमंडल खेलों में जीता गया रजत पदक खास है। भारत ने दशकों बाद राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की लंबी कूद में पदक जीता। उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य के लिए बढ़िया है। उनको ढेर सारी बधाई। उम्मीद है कि वह भविष्य में भी ऐसा ही प्रदर्शन जारी रखेंगे।’’

केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी श्रीशंकर को बधाई दी। अनुराग ठाकुर ने ट्वीट किया, “कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर पदक जीतने पर एम श्रीशंकर को बधाई। लंबी कूद में 4 दशकों के बाद पदक जीता। यह वास्तव में भारत में खेलों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। इस पदक के साथ आपने एथलेटिक्स की दुनिया में भारत की निरंतर वृद्धि को मजबूत किया है। मैं आपसे कई और जीत की उम्मीद करता हूँ।”

बता दें कि इससे पहले महिलाओं में पूर्व एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज और प्रज्यूषा मलाइखल पदक जीत चुकी हैं। अंजू बॉबी ने 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में लॉन्ग जंप में कांस्य और प्रज्यूषा ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। वहीं, पुरुषों में सुरेश बाबू ने 1978 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता था। यह लॉन्ग जंप में भारत के लिए प्रज्यूषा के बाद दूसरा रजत पदक है। 

सातवें दिन भारत के लिए पहला पदक

श्रीशंकर का पदक भारत के लिए सातवें दिन का पहला पदक रहा। श्रीशंकर के बाद पैरा-पावरलिफ्टर सुधीर ने स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले चार भारतीय बॉक्सर सेमीफाइनल में पहुँच गए और भारत के लिए चार पदक भी पक्का कर लिया। मेन्स बॉक्सिंग में अमित पंघाल, सागर अहलावत, रोहित टोकस और महिला बॉक्सिंग में जैस्मिन ने सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कुल मिलाकर सात भारतीय बॉक्सर बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में अपने-अपने इवेंट में सेमीफाइनल में पहुँच चुके हैं। भारत अब तक बर्मिंघम में कुल 20 पदक जीत चुका है। इनमें छह स्वर्ण, सात रजत और सात कांस्य पदक शामिल हैं।