Sunday, July 21, 2024
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थूकने, माँस फेंकने, पीटने के बाद अब बरेली में मुस्लिमों ने काँवड़ियों को बस्ती से गुजरने से रोका, शिवभक्तों ने कहा- यही हमारा पारम्परिक रास्ता

हाल ही में बरेली में ही लखौरा से कछला जा रहे काँवड़ियों को परगवाँ गाँव में महिला प्रधान शकीना के ससुर और उसके समर्थकों ने रोक दिया। बवाल के लिए उन्होंने डीजे बजाने को मुद्दा बनाते हुए कई काँवड़ियों को पीट दिया। इसी तरह मेरठ में दो लोगों ने काँवड़ियों के जल पर थूक कर अपवित्र कर दिया था।

हिंदुओं के पवित्र सावन महीने में भगवान शंकर के जलाभिषेक के लिए यात्रा पर जाने वाले काँवड़ियों को परेशान करने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली में मुस्लिम समुदाय के लोग अपने इलाके से काँवड़ियों को जाने से रोक रहे हैं। इसके पहले काँवड़ियों पर कुछ मुस्लिमों द्वारा गंदा पानी फेंकने, थूकने आदि की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

बरेली के दुनका में मुस्लिम बस्ती की पीडब्ल्यूडी रोड से होकर जाने वाले काँवड़ियों को रोका जा रहा है। इसके बदले उन्हें दूसरे रास्ते से हरिद्वार जाने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो इस रूट से काफी लंबा बताया जा रहा है।

बता दें कि काँवड़िए भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कई-कई दिनों तक पैदल और भूखे चलकर हरिद्वार पहुँचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्हें छोटा रास्ता देने के बजाए लंबे रूट पर जाने के लिए बाध्य करना एक तरह से प्रताड़ना है।

मुस्लिमों के विरोध और हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में पुलिस और पीएसी तैनात की गई है। वहीं, प्रशासन भी काँवड़ियों को लंबे रूट से जाने के लिए कह रहा है, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।

कुछ साल तक काँवड़ लेकर जाने वाले इसी मुस्लिम बस्ती से होकर जाते थे, लेकिन कुछ वर्ष पहले मुस्लिमों ने इन्हें उधर से गुजरने पर बवाल कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन अधिकारियों ने दोनों समुदाय के लोगों के साथ बैठकर साल 2014 में दोनों समुदाय के धार्मिक जुलूस व कार्यक्रमों के रूट तय कर दिए थे।

इस समझौते के तहत तय किया गया था कि काँवड़िये दुनकी के बाग के पास से चकरोड से होकर हरिद्वार जाएँगे। वे मुस्लिम बस्ती के पीडब्ल्यूडी रोड से होकर नहीं गुजरेंगे। हालाँकि, यह रोड लंबा पड़ता है।

बता देें कि मुस्लिमों का दबाव की राजनीति में कई ऐसे इलाके हैं जहाँ रूट बदल दिया गया है। वहीं, कई ऐसे इलाके हैं, जहाँ बवाल करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनके दबाव में प्रशासन को रास्ता बदलने का निर्णय लेना पड़े।

काँवड़ियों को पीटने और उनके जल को खंडित करने की कई घटनाएँ

हाल ही में बरेली में ही लखौरा से कछला जा रहे काँवड़ियों को परगवाँ गाँव में महिला प्रधान शकीना के ससुर और उसके समर्थकों ने रोक दिया। बवाल के लिए उन्होंने डीजे बजाने को मुद्दा बनाते हुए कई काँवड़ियों को पीट दिया।

इस दौरान मुस्लिमों ने काँवड़ियों को न सिर्फ रोका बल्कि उनमें से कई को बुरी तरह पीट भी दिया। इस दौरान मुस्लिम महिलाओं ने अपनी-अपनी छतों से काँवड़ियों पर पथराव किया और उनपर गंदा पानी फेंक कर उनकी पवित्र यात्रा को खंडित कर दिया।

इसी तरह मेरठ के कंकरखेड़ा के पास NH 58 पर 22 जुलाई 2022 को कुछ काँवड़िए अपने काँवड़ को रखकर शिविर में आराम कर रहे थे। तभी दूसरे समुदाय के दो युवक बाइक से आए और काँवड़ पर थूकने का प्रयास किया। आगे चलकर इनमें से एक युवक बाइक से उतरा और काँवड़ पर थूक कर अपवित्र कर दिया।

संभल जिले के खग्गूसराय में काँवड़ियों के साथ अभद्रता करने का मामला सामने आ चुका है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हरिद्वार से लौट रहे काँवड़ यात्रियों पर संभल में छतों से थूका गया, उनके ऊपर पत्थर फेंके गए और उनका रास्ता तक रोक दिया गया। 

मुरादाबाद के इब्राहिमपुर गाँव में भी ऐसी ही घटना घटी जहाँ  मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने काँवड़ियों को इब्राहिमपुर में आगे बढ़ने से चारपाई लगाकर रोक दिया। उन्होंने सड़क पर खाट बिछा दी और माँग की कि काँवड़िए वापस जाएँ और निर्धारित मार्ग का पालन करें। यहाँ, महिलाओं ने जिन काँवड़ियों को रोका, वे उसी इब्राहिमपुर गाँव के ही थे।

बता दें कि काँवड़ियों की काँवड़ खंडित करने का ये प्रयास पहला नहीं है। 19 जुलाई को मुस्लिम बहुल सीलमपुर इलाके में हरिद्वार से राजस्थान जा रहे काँवड़ यात्रा पर किसी ने मांस का टुकड़ा फेंक दिया था। घटना शाम के वक्त हुई, जिसके बाद काँवड़ यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं ने एक घंटे तक सड़क जाम कर दिया था। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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