नीतीश कुमार ने 8वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, वहीं तेजस्वी यादव नई राज्य सरकार में डिप्टी सीएम बने हैं। राज्यपाल फागू चौहान ने इन दोनों को शपथ दिलाई। जदयू ने भाजपा का साथ छोड़ते हुए फिर से राजद-कॉन्ग्रेस के लिए गठबंधन किया है।
वहीं बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने ताज़ा घटनाक्रम को लेकर नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें सबसे अधिक दिक्कत इस बात की भी है कि पिछड़े जाति का व्यक्ति क्यों प्रदेश अध्यक्ष बना है, पिछड़े जाति का बेटा उप-मुख्यमंत्री बना हुआ है और क्यों अति-पिछड़ी जाति की बेटी भी बिहार की उप-मुख्यमंत्री बनकर बैठी हुई है। उन्होंने कहा कि जदयू हमेशा अपनी तरह से गोटी को सेट करता है।
संजय जायसवाल ने ‘आज तक’ से बात करते हुए कहा, “RCP सिंह सरकारी नौकरी में थे, नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिलाकर अपने साथ रखा। पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष, फिर केंद्रीय मंत्री बनाया। अब ओडिशा कैडर के मनीष वर्मा को इस्तीफा दिलाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। अफसरों का ये इस्तेमाल करते है। बिहार में लगातार आपराधिक घटनाएँ बढ़ रही थीं। अपराध नियंत्रित नहीं कर रहे थे। भाजपा की सबसे बड़ी यूएसपी अपराध नियंत्रण ही है। वो आज मनीष वर्मा को रखें या आरसीपी सिंह को, कोई फर्क नहीं पड़ता। नीतीश कुमार का दल और अवसर, राष्ट्रीय अध्यक्ष – सब बदलता रहता है।”
महागठबंधन सरकार के विरोध में 12 अगस्त को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में एवं 13 अगस्त को प्रखंड मुख्यालयों पर भी भाजपा द्वारा ‘महाधरना’ का आयोजन किया जाएगा। वहीं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि नीतीश कुमार उससे आज मिले है, जिसके खिलाफ वो शुरू से लड़ते रहे। उन्होंने कहा कि RJD के आतंकराज से, गुंडाराज से जनता मुक्ति चाहती थी और भाजपा ने संघर्ष कर उन्हें मुख्यमंत्री भी बनाया।
वहीं पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कहा जा रहा है कि JDU को तोड़ने की कोशिश की जा रही है और शिवसेना का उदाहरण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना हमारा सहयोगी दल थोड़े ही था, वो वहाँ (महाराष्ट्र) सत्ताधारी दल था। बकौल सुशील मोदी, भाजपा ने सहयोगी दल रहते हुए किसी पार्टी को नहीं तोड़ा। उन्होंने कहा, “आपको हम तोड़ भी देते तो सरकार कैसे बनती।” भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की पूरे घटनाक्रम पर नजर है।
पंजाब के जालंधर में रहने वाले 92 साल के सरवन सिंह ने कभी सोचा नहीं था कि वो 75 साल बाद अपने बिछड़े भतीजे को देख पाएँगे। भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त जब हर जगह हाहाकार मचा था, इस्लामी कट्टरपंथी हिंदुओं और सिखों को पाकिस्तान से काफिर कहकर मार-मारकर भगा रहे थे, तब उस हिंसा की गाज सरवन सिंह के परिवार पर भी गिरी थी।
पाकिस्तान के ‘चक 37’ गाँव में उस दौरान एक हमला हुआ। उस हमले में सरवन सिंह के घर के करीबन दो दर्जन (22) लोग मौत के घाट उतारे गए थे। उन्हीं परिजनों के बीच सरवन सिंह का भतीजा मोहन भी था, जो कि तब सिर्फ 6 बरस का था। मोहन उस हिंसा में बच गया था और घरवालों के गुजर जाने के बाद पाकिस्तान में ही रहने लगा था। एक मुस्लिम परिवार ने उसे पाला और उसे धर्म बदलवाकर अफजल खालिक कर दिया गया।
92-year-old Sarwan Singh, who lost 22 members of his extended family to the carnage of partition, met his nephew Mohan Singh – who is now called Abdul Khaliq
इतने वर्षों तकसरवन को नहीं पता था कि उनका भतीजा कहाँ है और न ही मोहन जानते थे कि उनके किसी रिश्तेदार को आज भी वह याद हो सकते हैं। लेकिन दोनों को मिलाने में जो सूत्रधार बने वो ऑस्ट्रेलिया के यूट्यूबर गुरुदेव सिंह हैं।
गुरुदेव ने विभाजन से जुड़ी वीडियोज देखने की कड़ी में एक जगह सरवन सिंह को मोहन के गायब होने का दर्द बयां करते सुना। दूसरी ओर उन्हें पाकिस्तान के एक ऐसे ही शख्स का पता चला जो अपने बारे में वही डिटेल्स बता चुके थे जो सरवन अपने भतीजे के बारे में बता रहे थे।
GurdevSingh from Australia had seen a documentary in which Sarwan Singh mentioned about missing Mohan & an interview of a Pakistani who revealed similar stuff about himself. GurdevSingh managed to contact & connect them. Lakhs & lakhs lost their dear ones forever..??
गुरुदेव ने दोनों बयानों में इतनी समानताएँ पाने के बाद दोनों परिवारों के नंबर जुटाए। उनसे बात की और आखिर में उन्हें मिलवाने का बीड़ा उठाया। गुरुदेव के प्रयासों के बाद अभी हाल में जब सरवन सिंह अपनी बेटी के साथ करतारपुर साहिब गए तो उनकी मुलाकात मोहन से हुई।
मोहन उनके लिए घर से लड्डू बनवाकर लाए थे। एक दूसरे को देखते ही दोनों की आँख में आँसू गए और और उन्होंने गले लगकर अपनी खुशी जताई। दोनों एक दूसरे को देख यकीन नहीं कर पा रहे थे कि वो दूसरे से 75 साल बाद मिल पा रहे हैं।
भतीजे को देख सरवन सिंह ने कहा,
“मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा, मुझे मेरा भतीजा मिल गया। कोई उम्मीद नहीं थी। भगवान ने मुझे लंबी उम्र दी कि मैं उससे मिल पाऊँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि अगर दोनों देशों की सरकारें मान जाएँ तो वो भारत आए और हमसे मिले।”
केरल (Kerala) में सड़क पर बने गड्ढे में गिरकर एक व्यक्ति की मौत के बाद हाईकोर्ट (High Court) ने सड़कों की मरम्मत को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए किसी और घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता। वहीं, सड़कों पर गड्ढों को लेकर केरल में एक ही अनूठे ढंग से विरोध प्रदर्शन किया।
राज्य के मलप्पुरम (Malappuram) जिले में एक व्यक्ति ने रास्ते में विधायक के सामने सड़क पर बने गड्ढे में हुए जल-जमाव में स्नान और योग किया। इस व्यक्ति के इस अनोखे अंदाज में सड़कों पर बने गड्ढों के विरोध का वीडियो वायरल हो रहा है।
#WATCH | Kerala: A man in Malappuram protested against potholes on roads in a unique way by bathing & performing yoga in a water-logged pothole in front of MLA on the way pic.twitter.com/XSOCPrwD5f
सड़क की हालत को लेकर अनोखे अंजाम में विरोध करने वाले शख्स का नाम नजीम बताया जा रहा है और वह पाडिक्कड़ ग्राम पंचायत का रहने वाला बताया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि नजीम एक गड्ढे में बैठा है और अपने कपड़े धो रहा है। इस दौरान मंजेरी विधायक यूए लतीफ अपनी कार से वहाँ गुजर रहे थे। नजीम को देखकर लतीफ ने कार से उतर उससे बात करने की कोशिश की।
हालाँकि, नजीम ने विधायक लतीफ से बात करने से इनकार दिया और विरोध दर्ज कराने के लिए विधायक के सामने योग मुद्रा में खड़ा हो गया। नजीम का यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।
उधर, केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस देवन रामचंद्रन ने NHAI को फटकार लगाते हुए कहा, “हम न तो दूसरे शिकार की प्रतीक्षा कर सकते हैं, न ही हम केरल की सड़कों को मरने का मैदान नहीं बनने दे सकते- चाहे वह NHAI, PWD या स्थानीय सरकारी संस्थानों के अधीन हो।”
कोर्ट ने आगे कहा, “केरल में स्थिति की गंभीरता अब सबके सामने है। हम तब तक प्रतिक्रिया नहीं करते जब तक कि हम पीड़ित न हों या हमारे किसी परिचित को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।”
आगे इस तरह की किसी भी दुखद घटना को रोकने के लिए न्यायालय ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रमुख के रूप में जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले जिन सड़कों पर गड्ढे हैं, उसके जिम्मेदार इंजीनियर, ठेकेदार या कोई अन्य व्यक्ति, के खिलाफ कार्रवाई करें।
अदालत ने ये टिप्पणी साल 2008 में दाखिल की गई रिट पिटीशन पर सुनवाई के दौरान कही। इस याचिका में संबंधित अधिकारियों को उनके द्वारा बनाई गई सड़कों के रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की माँग की गई थी।
NHAI के स्थायी वकील एडवोकेट बिधान चंद्र ने कहा कि यह सड़क ‘बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर’ समझौते के तहत बनाया गया है और इसके रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी बनाने वाली की है। उन्होंने आगे बताया कि राज्य भर में राष्ट्रीय राजमार्ग के हर हिस्से की मरम्मत के लिए कदम उठाए जा चुके हैं, ताकि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।
बिहार के बेतिया से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गोपालपुर थाना क्षेत्र के बकुलहर मठ स्थित राम जानकी मंदिर के पुजारी का सिर काटकर हत्या कर दी गई। उनका कटा सिर करीब 3 किलोमीटर दूर पिपरा काली मंदिर में झोले में रखा मिला। कुछ रिपोर्टों में दोनों मंदिर के बीच की दूरी एक किलोमीटर ही बताई गई है।
बुधवार (10 अगस्त 2022) की सुबह जब लोग काली मंदिर में पूजा करने गए, तो मंदिर के गेट पर पुजारी का कटा सिर देख दंग रह गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान 55 वर्षीय रुदल प्रसाद वर्णवाल के तौर पर हुई है। वे राम जानकी मंदिर में करीब 40 साल से पूजा-पाठ कर रहे थे। पूजा-पाठ के अलावा उनको किसी से कोई मतलब नहीं रहता था। इस हत्याकांड के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, बकुलहर राम जानकी मंदिर के पुजारी प्रतिदिन की तरह मंगलवार (9 अगस्त 2022) की रात मंदिर परिसर में सोए हुए थे। सुबह उनका सिर कटा शव मिला। हत्यारों का अब तक सुराग नहीं है।
बकुलहर गाँव के रहने वाले अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि बुधवार सुबह जब लोग मठ की ओर गए तो उन्होंने राम जानकी मंदिर में खून देखा। पुजारी का धड़ वहीं पड़ा था। इसी बीच सूचना मिली की पिपरा के काली मंदिर में उनका सिर मिला है। इस घटना के बाद दोनों मंदिरों के समीप लोगों की भारी भीड़ जुट गई। पुजारी की निर्मम हत्या को लेकर लोगों में काफी गुस्सा हैं। घटना का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। चनपटिया थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। पुलिस ने कटे सिर व धड़ को अपने कब्जे में ले लिया है। जल्द ही मामले का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
न्यू मेक्सिको में 4 लोगों की सीरियल किलिंग के मामले में पुलिस ने मुहम्मद सईद नाम के एक अफगानी प्रवासी को गिरफ्तार किया है। ये घटना अल्बकरीक की है। मृतकों में सभी मुस्लिम ही थे। इस घटना के बाद से पुलिस ने न्यू मेक्सिको के सबसे बड़े शहर अल्बकरीक में स्थित प्रमुख मस्जिद के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी थी। इस मामले को पहले ‘इस्लामोफोबिया’ और मुस्लिमों से घृणा करने वाले की करतूत बताया जा रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने इसे ‘मुस्लिम समुदाय’ पर हमला बताते हुए इसकी निंदा की थी और कहा था कि प्रशासन मुस्लिम समाज के साथ मजबूती से खड़ा है।
अब पुलिस का कहना है कि ये हत्याएँ आपसी दुश्मनी के कारण हो सकती है और मुस्लिम समाज के भीतर ही अलग-अलग समुदायों के बीच संघर्ष को भी इसके कारण के रूप में संदेहित किया जा रहा है। जहाँ एक व्यक्ति की हत्या नवंबर 2021 में हुई थी, बाकी के तीनों की हत्याएँ पिछले दो सप्ताह में ही हुई हैं। मृतकों में सभी अफगान और पाकिस्तानी मूल के थे। पुलिस ने आरोपित के घर की भी तलाशी ली, जिससे पता चला कि वो मृतकों से परिचित था।
पुलिस ने कहा है कि वो अभी भी इन हत्याओं के पीछे की मंशा का पता लगा रहे हैं। आशंका जताई गई है कि मुस्लिमों के भीतर का सांप्रदायिक संघर्ष का इसमें रोल है, जिससे वो एक-दूसरे से घृणा करने लगते हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या के कारण का ये एक हिस्सा हो सकता है, बड़े कारण के बारे में वो लोग पता लगा रहे हैं। मुहम्मद सईद पर पहले से घरेलू हिंसा का एक मामला दर्ज है। एक संदिग्ध कार की मदद से उसे पकड़ा गया, जिसका इस्तेमाल एक हत्या में हुआ था।
41 वर्षीय आफताब हुसैन और 27 वर्षीय अफजल हुसैन की हत्याओं के मामले में मुहम्मद सईद को आधिकारिक रूप से आरोपित बनाया गया है, जिनकी हत्याएँ क्रमशः 26 जुलाई और 1 अगस्त को हुई थीं। उसके बाद 25 साल के ट्रक ड्राइवर नईम हुसैन की हत्या हुई, जो 8 जुलाई को ही अमेरिका का नागरिक बना था। उससे पहले के दोनों मृतकों की अंतिम क्रिया में शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद बाद उसे निशाना बनाया गया।
इस हत्या 62 वर्षीय मुहम्मद अहमदी की हुई थी, जो अफगानिस्तानी मूल का था। उसे 7 नवंबर, 2021 को मार डाला गया था। शहर के दक्षिणी-पूर्वी भाग में एक कैफे और एक दुकान के बाहर वो सिगरेट पी रहा था, तभी उसे शिकार बनाया गया। इस दुकान को वो अपने भाई के साथ मिल कर चलाता था। दो हत्याओं में इस्तेमाल किए गए बंदूक मुहम्मद सईद के के घर से मिली। बुलेट्स की जाँच कर पुलिस इस नतीजे पर पहुँची।
अल्बकरीक की 5.65 लाख जनसंख्या में 5000 मुस्लिम हैं, जो वहाँ की मस्जिद में नमाज पढ़ने आते हैं। ऐसे में वहाँ सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। यूनिवर्सिटी और न्यू मेक्सिको के कुछ छात्रों ने डर से शहर छोड़ दिया था, तो कई मुस्लिम परिवार घरों में बंद थे। शहर के मुस्लिम समाज के अध्यक्ष ने कहा कि शिया-सुन्नी समाज का एक निकाह इसका कारण हो सकता है, जिससे आरोपित गुस्से में था। मरने वालों में एक सुन्नी है। सईद 6 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था। अल्बकरीक में अफगानिस्तान के कई मुस्लिम आकर बसे हैं, खासकर वहाँ से अमेरिकी सेना के निकलने के बाद।
लाल सिंह चड्ढा की रिलीज डेट नजदीक आने के साथ ही इस फिल्म का क्या हाल होगा इस पर लगने वाले अनुमान बढ़ते ही जा रहे हैं। एक तरफ दर्शक हैं जो सोशल मीडिया पर आमिर खान के पुराने बयानों को देख उखड़े हुए हैं। वहीं दूसरी ओर आमिर खान और उनकी पूरी लाल सिंह चड्ढा की टीम है जो इस फिल्म को सुपरहिट कराने के लिए मंदिर-गुरुद्वारे जा रही है और फर्जी एडवांस बुकिंग के नाम पर माहौल बना रही है।
उम्मीदों से भी कम हुई एडवांस बुकिंग में कमाई
एडवांस बुकिंग का और फिल्म के सुपरहिट होने का आपस में कोई खास संबंध नहीं है। फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने तो आज अपने ट्वीट में ये तक कहा है कि जो एडवांस बुकिंग का हल्ला काट कर सबकुछ ‘चंगा’ दिखाने की कोशिश हो रही है, वो एडवांस बुकिंग वास्तविकता में उम्मीदों से भी कम हुई है। आदर्श ने साफ कहा है कि चाहे वो लाल सिंह चड्ढा हो या रक्षा बंधन, दोनों की इज्जत केवल स्पॉट बुकिंग और पहले दिन फिल्म देखने के बाद आए रिएक्शन पर निर्भर होगी। इसके अलावा और कुछ नहीं।
STOP painting a rosy picture… Let’s get the facts right… The *advance bookings* of #LaalSinghChaddha and #RakshaBandhan are way BELOW EXPECTATIONS… Both dependent on [i] spot bookings / walk-in audience and [ii] word of mouth to put up strong totals on Day 1 [Thu]. pic.twitter.com/EA9RPbZ9eh
तरण आदर्श ने फिल्मों पर ऐसी टिप्पणी जाहिर है इनकी एडवांस बुकिंग से हुई कमाई को देखकर की है। लाल सिंह चड्ढा की अभी तक केवल 8 करोड़ रुपए की प्री बुकिंग हुई है। अनुमान है कि रिलीज से पहले ये कमाई ज्यादा से ज्यादा 10 करोड़ रुपए पहुँचेगी। उससे ज्यादा नहीं।
83 जितनी हुई लाल सिंह चड्ढा की एडवांस बुकिंग
याद दिला दें इससे पहले एडवांस बुकिंग में इतनी कमाई रणवीर सिंह की फिल्म 83 की हुई थी। कपिल देव जैसा बड़ा नाम जुडे़ होने बावजूद उस फिल्म की कितनी भद्द पिटी, ये किसी से छिपी नहीं हैं। उस फिल्म को क्रिस्मस जैसे मौके पर रिलीज किया गया था जब फिल्मों के चलने की ज्यादा संभावना होती है। फिर भी हाल क्या हुआ सबने देखा।
ये बात सच है कि दर्शक जिस फिल्म को चाहते हैं वो ही फिल्म ब्लॉकबस्टर पर ‘सुपरहिट’ या ‘सुपरफ्लॉप’ होती है। एडवांड बुकिंग सिर्फ फिल्म कैसी कमाई करेगी इसके शुरुआती अनुमान होते हैं। केजीएफ-2 जैसी साउथ सिनेमा की फिल्म ने अपनी रिलीज से पहले ही 22.50 करोड़ रुपए की कमाई की थी। इसके अलावा सोशल मीडिया पर सामान्य लोग खुद उसका प्रचार कर रहे थे।
आमिर खान दर्शकों को मनाने में जुटे
अब सोच सकते हैं कि लोगों में उस फिल्म को देखने का क्रेज कितना ज्यादा रहा होगा। लेकिन इन हालिया बॉलीवुड फिल्मों के साथ समस्या ये है कि इन्हें सामान्य दर्शक ही बॉयकॉट करने की ठाने बैठा है। लोगों में पुराने बयान सुनने के बाद गुस्सा इतना है कि दंगल, थ्री इडियट जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुके बॉलीवुड के ‘मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट’ गहरी चिंता में हैं।
वो अपनी फिल्म के रिलीज से पहले उसका प्रमोशन तो कर ही रहे हैं, लेकिन साथ ही वो दर्शकों से विनती भी कर रहे हैं कि उनकी फिल्म जाकर देंखे वरना वह बहुत टूट जाएँगे। मंदिर, गुरुद्वारे जाकर माथ टेककर वो लोगों को बता रहे हैं कि जिन्होंने उनके लिए सोचा है कि वो भारत को पसंद नहीं करते, वो सब लोग गलत हैं।
उन्होंने मीडिया में जाकर प्लीज कहते हुए दर्शकों से अपील कर रहे हैं कि उनकी फिल्म को देखा जाए। इसके अलावा आज तो उन्होंने स्वर्ण मंदिर जाकर अरदास भी लगाई है। हालात कितने बुरे हैं इसे इस बात से समझा जा सकता है कि आमिर खान की साख बचाए रखने के लिए फिल्म में शाहरुख खान को शामिल करके, लाल सिंह चड्ढा का रिव्यू देने के लिए मैदान में उतारा गया है। शाहरुख तक ने इसे प्रमोट किया है।
इसके अलावा फिल्म को प्रमोट करने के लिए झूठ का सहारा भी लिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर पिछले दिनों हिंदुओं की माँग को गलत ठहराने के लिए फर्जी मैसेज वायरल किए गए थे जिसमें कहा गया था कि लाल सिंह चड्ढा के बॉयकॉट की माँग करके भक्तों ने उसका प्रमोशन कर दिया। जिसके बाद फिल्म की 80 फीसदी बुकिंग है वो हो चुकी है और फिल्म ने 550 करोड़ कमा भी दिए।
सोशल मीडिया पर फैलाया गया झूठ
हालाँकि ये बातें कितनी फर्जी हैं इसकी पोल अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने तर्कों के साथ खोलीं। बाकायदा दिखाया गया कि कैसे ‘बुक माय शो’ जैसी एप पर कहीं पर किसी भी सिनेमा हॉल में अगर लाल सिंह चड्ढा की बुकिंग करने जाएँगे तो आपको अधिकांश सीटें खाली ही मिलेंगी।
As tweeted earlier,PR is in full force to portray that Lal Singh Chaddha is doing so well& its superhit even before its release Dont fall for it.This guys has exposed their claim of 80% advance booking
बता दें कि लाल सिंह चड्ढा फिल्म को लेकर समस्या ये नहीं है कि इस फिल्म से किसी की भावनाएँ आहत हो रही हैं या फिर कोई विवादित कंटेंट हैं। सब जानते हैं कि ये टॉम हैंक की क्लासिक फिल्म फॉरेस्ट गंप की कॉपी है। अगर लोगों ने उसे पसंद किया है तो इसे भी देख सकते हैं। मगर, आमिर की माफी के बावजूद इस फिल्म के बहिष्कार की माँग लगातार इसलिए बनी है क्योंकि लोगों को लगने लगा है कि आमिर ने पिछली फिल्मों के समय से हिंदुओं की भावना का मजाक लिबर्टी और क्रिएटिव कंटेंट के नाम पर उड़ाया जबकि लिबरल गिरोह दर्शकों के सामने उन्हें मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट बताकर पेश करता रहा।
लोगों के सवाल यही है कि जब आमिर खान ने खुद अपने मजहब और उससे जुड़ी आस्थाओं का पूरा पालन किया, और किसी ने उन्हें कुछ नहीं कहा, तब उन्होंने क्यों हिंदू धर्म और पूजा-पाठ के तरीकों पर सवाल उठाया? क्यों अपनी फिल्मों में देवी-देवताओं को मजाक का पात्र बनाया? लोगों के मन में ये सवाल छोड़ा कि शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाना गलत है?
बिकनी वाली फोटो के कारण जिस महिला प्रोफेसर को कथित तौर पर कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से इस्तीफा देना पड़ा था, अब उन्हें 99 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस विश्वविद्यालय ने भेजा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिला प्रोफेसर इस नोटिस को अदालत में चुनौती दे सकती हैं।
महिला प्रोफेसर ने दावा किया था स्विमिंग सूट में तस्वीरें पोस्ट करने के कारण उन्हें पिछले साल अक्टूबर में इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था। उनके खिलाफ एक अभिवावक ने शिकायत की थी, जिसने अपने बेटे को सोशल मीडिया में उनकी तस्वीर को घूरते देखा था। हालाँकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि महिला ने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया था।
इस घटना के बाद से महिला प्रोफेसर दूसरे राज्य में रह रही हैं। उनका कहना है कि वह इस महीने कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta HC) में मानहानि नोटिस के खिलाफ याचिका दायर करेंगी। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने उनसे ‘बिना शर्त माफी’ माँगने और सेंट जेवियर्स की छवि धूमिल करने के लिए मुआवजे के रूप में 99 करोड़ रुपए की माँग की है।
अभिवावक की शिकायत के बाद महिला प्रोफेसर ने जाधवपुर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट हैक होने की आशंका जताई थी, क्योंकि उनकी तस्वीर उनके फॉलोअर्स के अलावा कोई नहीं देख सकता। जिस अभिवावक ने शिकायत की थी उसका बेटा सेंट जेवियर्स का ही छात्र है।
विश्वविद्यालय अधिकारियों से की गई शिकायत में कहा गया था, “हाल ही में मेरा बेटा प्रोफेसर की बिकनी वाली तस्वीर देख रहा था। मैं दंग रह गया। इंस्टाग्राम पर जानबूझकर अंग प्रदर्शन करते इस तरह की तस्वीरें शेयर की गईं थीं। एक प्रोफेसर को सोशल मीडिया पर अपनी बिकनी वाली तस्वीरें अपलोड करते हुए देखना अभिभावक के रूप में मेरे लिए बेहद शर्मनाक है, क्योंकि मैंने अपने बेटे को इन सबसे दूर रखने की कोशिश की है। यह अश्लील, असभ्य और अनुचित है। एक 18 वर्षीय छात्र अपनी प्रोफेसर को सार्वजनिक मंच पर अंग प्रदर्शन करते हुए देखता है, यह बहुत गलत है।”
इसके बाद सेंट जेवियर्स के कुलपति और अन्य अधिकारियों के साथ एक बैठक में प्रोफेसर से इस मामले पर स्पष्टीकरण माँगा गया था। इसको लेकर उन्होंने कहा था कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी छात्र उन तस्वीरों तक नहीं पहुँच सकता है, जो उन्होंने विश्वविद्यालय ज्वाइन करने से दो महीने पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट की थीं, क्योंकि तब तक उनकी तस्वीरें अपने आप ट्रैश सेक्शन में चली जाती थीं। उन्होंने तर्क दिया कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट है। इसलिए उनकी तस्वीरें उनके फॉओअर्स के अलावा कोई नहीं देख सकता। साथ ही पूर्व प्रोफेसर ने दावा किया था है हो सकता है उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया हो और वहीं से उनकी निजी तस्वीरें लीक कर दी गई हों।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें जजों के खिलाफ आई शिकायतों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने को कहा गया था। साथ ही हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति को नोटिस भी जारी किया है, जिसने आयोग से इस संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था। लेकिन इस फैसले से भी ज्यादा दिलचस्प वह प्रक्रिया है जिसके तहत हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के खिलाफ पहले पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका दायर करवाई। फिर खुद सुनवाई करते हुए आदेश पर रोक लगा दी। आयोग के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट ने अपने ज्वाइंट रजिस्ट्रार से याचिका दायर करवाई। इसमें कहा गया कि सूचना आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जानकारी माँगी है। इसलिए कोर्ट इस पर रोक लगाए। जस्टिस महावीर सिंह संधू ने सुनवाई करते हुए आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और आयोग तथा सूचना माँगने वाली व्यक्ति को नोटिस जारी किया है।
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर
दरअसल, नारनौल जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मनीष वशिष्ठ ने अगस्त 2019 में एक आरटीआई लगाई थी। इसमें उन्होंने निचली अदालतों के जजों, हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ मिली शिकायतों और उन पर कार्रवाई के बारे में जानकारी माँगी थी। हाई कोर्ट के मना करने के बाद उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की। इसके बाद आयोग को हाई कोर्ट ने बताया कि लंबे समय तक जिला जजों का रिकॉर्ड नहीं रखा जा सकता। साथ ही जजों के बारे में माँगी गई सूचना सार्वजनिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत है। इसलिए ये जानकारी सूचना के अधिकार के तहत नहीं दी जा सकती हैं।
केंद्रीय सूचना आयोग ने हाई कोर्ट के जवाब पर असहमति जताते हुए जिला अदालतों को छोड़कर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ आई शिकायत और उनके स्टेटस की जानकारी देने का आदेश दिया। आदेश के बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वयं याचिका दायर की और जज बनकर इस पर सुनवाई करते हुए खुद को राहत दे दी।
महाराष्ट्र के पालघर जिले के डहाणू इलाके में वनवासी महिला को ईसाई बनाने के लिए घर में घुसे 4 मिशनरी एजेंटों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये लोग वनवासी महिला की स्थिति को देख उसके पास आए थे और उसे पैसों का लालच देकर ईसाई धर्म स्वीकारने को कह रहे थे। महिला का आरोप है कि उसके मना करने के बावजूद इन लोगों ने उसपर दबाव बनाया और न मानने पर घर में घुस धमकी भी दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन आरोपितों की पहचान क्लेमंत डी बेला, मरियम टी फिलिप्स, परमजीत कौर और परशुराम धर्म ढिंगाणा के तौर पर हुई है। वनवासी महिला की शिकायत के आधार पर इनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 153, 295, 448 और 34 में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने इन्हें 5 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
इन चारों पर आरोप है कि ये वनवासी महिला के घर में तब घुसे जब वो घर में अकेली थी। इसके बाद इन्होंने उसे पैसे का लालच दिया व अन्य कई लुभावने ऑफर दिए। मगर, जब महिला ने नहीं सुना तो इन लोगों ने उसे धमकी देनी शुरू कर दी।
हालाँकि, मौके पर पहुँचे ग्रामीणों के कारण महिला को इन लोगों के चंगुल से छुड़ा लिया गया और पुलिस को इस संबंध में सूचित किया गया। इसके बाद इन चारों की गिरफ्तारी हुई।
वकील आशुतोष जे दुबे ने अपने ट्विटर पर घटना संबंधी वीडियो को शेयर किया। इसमें दो महिला और एक पुरुष सफेद कपड़े पहने देखा जा सकता है। इसके अलावा एक गाड़ी की वीडियो है जिसमें ‘गॉड इज लव, गुड एंड ग्रेट लिखा है।’
पालघर जिल्हा के तलावपाड़ा में आज एक आदिवासी महिला को राष्ट्रीय हिन्दू सेवा संघ द्वारा कानूनी सलाहकार के तौर पर कानूनी सहायता कर धर्मांतरण से बचाया गया।
— ADV. ASHUTOSH J. DUBEY ?? (@AdvAshutoshBJP) August 5, 2022
वीडियो में राष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ के लोगों को ईसाई मिशनरियों से सवाल करते देखा जा सकता हैं। वहीं आसपास देख सकते हैं कि इन मिशनरियों के पास छानबीन में पैसों के लिफाफे मिले। वीडियो बनाने वाले लोग इन लिफाफों और पैसों को दिखाकर दावा करते हैं कि इन्हीं को देकर ये लोग आदिवासियों पर ईसाई धर्म स्वीकारने के दबाव बनाते हैं।
पालघर में सक्रिय ईसाई मिशनरियाँ
बता दें कि महाराष्ट्र के पालघर जिले के सूदुर आदिवासी इलाकों में लंबे समय से ईसाई मिशनरियाँ सक्रिय हैं। ये लोग न केवल लोगों को ईसाई धर्म में आने के लिए तरह-तरह के ऑफर देते हैं। बल्कि हिंदू आस्था के प्रति घृणा को भी बढ़ावा देते हैं। कथिततौर पर हिंदू धर्म, संस्कृति और पूजा पाठ करने की पद्धति का मजाक उड़ाना इन लोगों के लिए आम हैं।
2019 में पालघर में कुछ ईसाई उपदेशकों व नाराज स्थानीयों में झड़प भी हुई थी। तब, इन मिशनरियों ने आकर हनुमान जी को बंदर और भगवान गणेश को हाथी कहा था। इसके अलावा साल 2020 में इसी पालघर में दो साधुओं की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। तब भी यही सामने आया था कि लेफ्ट विंग नक्सलियों और मिशनरियों का इन सबमें हाथ है।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) में मोहम्मद फुरकान (Mohammad Furqan) नाम के शख्स ने 13 साल के लड़के का गला घोंटकर उसकी हत्या दी। बताया जा रहा है कि आरोपित लड़के के साथ कुकर्म करना चाहता था। लेकिन इसमें विफल होने पर उसने लड़के की हत्या कर दी। पुलिस ने मोहम्मद फुरकान को गिरफ्तार कर लिया है। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक दिनेश सिंह ने बताया कि लड़का 3 अगस्त को लापता हो गया था, जिसके बाद परिवार के सदस्यों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर उसकी काफी तलाश की, लेकिन देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिला।
पुलिस के मुताबिक, 13 वर्षीय रिहान (अब्बा का नाम शकील) दारानगर गंज का रहने वाला था। 4 अगस्त को उसका शव बिजनौर के दारानगर में कश्यप मोहल्ले के पीछे वन विभाग की जमीन पर पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गला घोंटने की वजह से उसकी मृत्यु हुई है। आरोपित फुरकान उर्फ काला (25 साल) को पुलिस ने 8 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में आरोपित ने अपने जुर्म कबूला है। उनसे बताया कि रिहान उसी के गाँव का रहने वाला था। वह रिहान के साथ गलत काम करने के लिए उसे काफी दिनों से बहला-फुसला रहा था। 3 अगस्त को मौका पाते ही वह लड़के को बहला-फुसलाकर अपने साथ रात करीब 8 बजे जंगल की ओर ले गया। वहाँ उसने रिहान के कपड़े उतारे और जैसे ही आरोपित उसके साथ गलत काम करने लगा, वह उसके चंगुल से भागकर जोर-जोर से शोर मचाने लगा और कहने लगा कि वह सारी बात अपने घर वालों बताएगा।
गाँव में बदनामी के डर से उसने (फुरकान) रिहान को पकड़ लिया और अपने हाथों से गला दबाकर उसकी हत्या की दी। घटना को अंजाम देने के बाद वह वहाँ से भाग गया।
गौरतलब है कि इसी साल मार्च में राजस्थान की राजधानी जयपुर (Jaipur, Rajasthan) में एक ऐसी घटना सामने आई थी। शौहर मोहम्मद रियाज (27) और बीवी रुही परवीन (25) ने एक नाबालिग बच्चों के साथ ना सिर्फ मारपीट की, बल्कि शराब के नशे में रियाज उसके साथ कुकर्म भी किया। इतना ही नहीं, नाबालिग बंधकर बनाकर रखा गया और खाने के नाम पर उसे बिस्किट और पानी दिया जाता था।