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‘मोदी सरकार ने हमें दी जीवन की साँस’: श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संसद में भारत का जताया आभार, कहा – आर्थिक संकट से जूझ रहे देश को…

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे (Ranil Wickremesinghe) ने संकटग्रस्त श्रीलंका की मदद करने के लिए भारत को धन्यवाद दिया है। उन्होंने बुधवार (3 अगस्त, 2022) को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में भारत ने गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे उनके देश को ‘जीवन की साँस’ प्रदान की है। राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने संसद के तीसरे सत्र को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

रानिल विक्रमसिंघे ने सात दिन तक स्थगित रहने के बाद 3 अगस्त को फिर से बुलाए गए संसद के सत्र में कहा, “मैं आर्थिक संकट से उबरने के हमारे प्रयासों के लिए हमारे निकटतम पड़ोसी देश भारत द्वारा मुहैया कराई गई मदद का विशेष रूप से जिक्र करना चाहता हूँ।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने हमें जीवन की साँस दी है। मैं अपने और हमारे देश के लोगों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी, सरकार और भारत की जनता का आभार व्यक्त करता हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को बधाई देते हुए कहा था, “भारत आर्थिक संकट से उबरने एवं स्थिरता के प्रयासों में श्रीलंका के लोगों की स्थापित लोकतांत्रिक माध्यमों से मदद करना जारी रखेगा।”

बता दें कि 20 जुलाई, 2022 को श्रीलंका के सांसदों ने पीएम रानिल विक्रमसिंघे को अगला राष्ट्रपति चुना था। श्रीलंका की संसद में 44 वर्षों में पहली बार अस्थिरता के बीच हुए त्रिकोणीय राष्ट्रपति चुनाव में रानिल विक्रमसिंघे को 134 सांसदों का समर्थन मिला था। वहीं उनके प्रतिद्वंदी दुल्लास अल्हाप्पेरुमा को 82 वोट ही मिले थे। रानिल नवंबर, 2024 तक पूर्णकालिक राष्ट्रपति रहेंगे।

गौरतलब है कि श्रीलंका में विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के बाद इसी साल मई में रानिल विक्रमसिंघे को देश का पीएम चुना गया था। पीएम चुने जाने पर उन्होंने देश की संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि श्रीलंका बहुत ही कठिन हालात का सामना कर रहा है और आगे अभी बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

AMU में होगी सनातन धर्म की पढ़ाई, नए कोर्स के लिए प्रस्ताव पास: भड़के पूर्व प्रोफेसर जाहिद अली खान, कहा – ये पढ़ाना है तो अलग विभाग बनाओ

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में सनातन धर्म की पढ़ाई के लिए प्रस्ताव पास किया गया है। इसके लिए UG (स्नातक) और PG (स्नाकोत्तर) का कोर्स भी शुरू होगा। सब केवल इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगनी बाकी है। AMU के शताब्दी कार्यक्रम के दौरान हुए वर्चुअल समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी सलाह दी थी। AMU के ‘इस्लामिक स्टडी डिपार्टमेंट’ ने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि इस कोर्स के तहत छात्रों को सभी मजहबों की बारीकियाँ सिखाई जाएँगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि AMU के छात्रों को भारतीय संस्कृति से भी रूबरू कराया जाना चाहिए। अगले सेशन से इसकी पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। इसमें छात्रों को न सिर्फ सनातन धर्म के बारे में बताया जाएगा, बल्कि अन्य धर्मों के साथ एक तुलनात्मक अध्ययन भी पढ़ने को मिलेगा। इसके सिलेबस पर काम शुरू हो गया है।

‘Comparative Religion’ नाम से इस कोर्स को शुरू किया जा रहा है। बता दें कि 467.6 एकड़ में फैली AMU के अंतर्गत 7 कॉलेज आते हैं, जहाँ छात्रों के लिए 80 हॉस्टल और 19 ‘हॉल ऑफ रेजिडेंस’ हैं। वैश्विक स्तर पर इसे 801वाँ और भारत में 10वें स्थान पर रैंक किया गया है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ का दर्जा वापस दे दिया था। हालाँकि, यहाँ अन्य धर्मों के छात्र भी पढ़ने आते रहे हैं।

हाल ही में AMU ने पाकिस्तानी इस्लामी स्कॉलर अबुल अला मोदुदी की किताब को अपने सिलेबस से हटा दिया था। 20 से ज्यादा शिक्षाविदों ने इस सम्बन्ध में पीएम मोदी को पत्र भी लिखा था, जिसके बाद अबुल और सय्यद क़ुतुब की किताबों को हटाया गया। AMU के ताज़ा फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। थियोलॉजी विभाग के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद अली खान ने कहा कि अगर सनातन धर्म पढ़ाना ही है तो उसके लिए अलग विभाग बना कर ऐसा किया जाना चाहिए।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के PRO उमर सलीम पीरजादा का कहना है कि AMU में थियोलॉजी विभाग पिछले 5 दशकों से सनातन धर्म की पढ़ाई करा रहा है, वहीं अब इस्लामी स्टडीज के तहत भी इसे लाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पहले इसे PG के कोर्स में लाया जाएगा। इस विषय में MA का कोर्स शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चूँकि इस आवासीय विश्वविद्यालय में सभी धर्मों एवं जाति के छात्र पढ़ते हैं, इसीलिए ये एक अच्छी पहल है।

‘हिरोइन होने का मतलब अपने संस्कार भूलना नहीं’: बोलीं प्रणिता सुभाष- परंपराओं में मेरा दृढ़ विश्वास, पति के चरणों में बैठ पूजा करने पर उड़ा रहे थे मजाक

दक्षिण भारतीय फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रणिता सुभाष (Pranitha Subhash) की हाल में वायरल हुई एक फोटो को लेकर उन्हें काफी ट्रोल किया गया। इस पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वे शुरू से ही एक घरेलू एवं पारंपरिक लड़की रही हैं और इसमें वह दृढ़ता से विश्वास करती हैं।

बता दें कि इस फोटो में प्रणिता अपने पति के चरणों में बैठ पूजा कर रही थीं। फोटो वायरल के होने के बाद कथित नारीवादियों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया और इसे पुरुषवादी वर्चस्व को बढ़ावा देने वाला बताया।

दरअसल, एक अनुष्ठान के दौरान प्रणिता अपने पति की पूजा कर रही थीं, जो आषाढ़ माह में विवाहित महिलाएँ मनाती हैं। तस्वीर में कन्नड़, तेलुगु, तमिल और हिंदी फिल्मों एक प्रसिद्ध अभिनेत्री प्रणिता अपने पति नितिन राजू के चरणों में बैठी भीमना अमावस्या की पूजा करती दिखाई दे रही थीं।

कई सोशल मीडिया यूजर ने अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए प्रणिता की खूब प्रशंसा की। वहीं, कुछ यूजर्स इससे नाराज थे। एक यूजर ने ट्वीट किया, “सभी पुरुष उनकी तारीफ कर रहे हैं। पुरुष महिलाओं के पैर क्यों नहीं धोते? यही समानता है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “बस पूछ रहा हूँ.. आपको अपने पति के चरणों में बैठने की क्या जरूरत है… आप दोनों बराबर हैं…इस पितृसत्ता को रोकें…।” लगातार ट्रोल होने के बाद अभिनेत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

ईटाइम्स से बातचीत के दौरान प्रणिता सुभाष ने कहा, “वैसे, जीवन में हर चीज के दो पहलू होते हैं, लेकिन इस मामले में 90 प्रतिशत लोगों के पास कहने के लिए एक अच्छी बात थी। बाकियों को मैंने अनदेखा किया।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक अभिनेत्री हूँ और ग्लैमर की दुनिया से मेरा संबंध है। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उन संस्कारों का अनुकरण नहीं करूँ जिनके साथ मैं पली बढ़ी हूँ, जिनमें मेरा पूरी तरह से विश्वास है। मेरे सभी कजिन्स, पड़ोसी और दोस्तों ने यह पूजा की है। मैंने पिछले साल भी पूजा की थी जब मेरी नई-नई शादी हुई थी, लेकिन तब तस्वीर साझा नहीं की थी।”

उन्होंने कहा, “वास्तव में यह मेरे लिए नया नहीं है। मैं हमेशा दिल से एक पारंपरिक लड़की रही हूँ और मूल्यों, रीति-रिवाजों और परिवार से जुड़ी हर चीज से प्यार करती हूँ। घरेलू रहना मुझे हमेशा से पसंद रहा है और इसलिए एक संयुक्त परिवार में रहना पसंद है।”

उन्होंने आगे कहा, “अपने माता-पिता के अलावा मैं भी चाची, दादी और चाचाओं से घिरी हुई बड़ी हुई हूँ और मुझे यह पसंद है। सनातन धर्म एक अवधारणा है, जो बहुत सुंदर है और सभी को गले लगाती है और मैं इसका दृढ़ता से पालन करती हूँ। कोई आधुनिक हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई अपनी जड़ों को भूल जाए।”

प्रणिता ने इसके बाद ऑनलाइन बहस पर भी अपने विचार साझा किए कि क्यों केवल पत्नी ही पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना कर रही है, न कि पति। उन्होंने कहा कि बहस का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वे एक-दूसरे के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।

नदीम ने हकीम से इलाज के बहाने हिन्दू युवती का किया रेप, उसका वीडियो बनाया, फिर दोस्तों से कराया गैंगरेप

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक हिन्दू लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। हकीम से दवा दिलाने के बहाने नदीम ने युवती को पानी में नशा देकर बेहोश कर दिया। फिर उसके साथ रेप किया एवं उसका वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देकर फिर दोस्तों के साथ मिलकर गैंगरेप किया। वहीं हिन्दू युवती ने जब इसका विरोध किया तो नदीम ने उसे कोठे पर बिठा देने की धमकी दी। आरोपितों के खिलाफ थाना इज्जतनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला शहर के इज्जतनगर इलाके का है। जहाँ युवती के पिता करीब पाँच साल से लकवाग्रस्त हैं। साल भर पहले नदीम ने पीलीभीत में किसी हकीम से इलाज कराकर उन्हें ठीक कराने का झाँसा दिया। हिन्दू युवती ने नदीम की बात पर भरोसा कर लिया और उसके साथ पीलीभीत चली गई। लेकिन रास्ते में ही विलयधाम पुल के पास नदीम ने उसे पहले ठंडा पानी पीने को दिया। जिसके बाद उसके सिर में दर्द होने लगा। इस पर नदीम ने अपने दोस्त इसरार को भी फोन कर बुला लिया और सिर दर्द की दवा के बहाने उसने उसे नशीली गोली खिलाकर बेहोश कर दिया।

जिसके बाद नदीम ने उसके साथ रेप किया और उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर नदीम ने एक साल में उससे कई बार दुष्कर्म किया। वहीं इस साल 22 जुलाई को रात 11 बजे नदीम उसके घर आया और उसे जबरन खेत में खींचकर ले गया जहाँ नदीम ने इसरार के साथ मिलकर गैंगरेप किया।

गौरतलब है कि गैंगरेप के बाद भी उसने युवती को धमकी देते हुए कहा कि अगर पुलिस से शिकायत की तो तुझे वेश्या बना देंगे। नदीम ने युवती को जान से मारने की धमकी भी दी। इस पर उसने मामले की शिकायत थाना इज्जतनगर में पुलिस से की। जहाँ नदीम, इसरार व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं इस मामले में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

भोपाल के छोला इलाके में खंडित मिला शिवलिंग: आक्रोशित हिंदू संगठन सड़क पर उतरे, कार्रवाई की माँग, CCTV खंगाल रही पुलिस

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ अज्ञात लोगों ने शिव मंदिर में शिवलिंग को खंडित कर दिया। घटना हनुमानगंज थाना क्षेत्र के छोला इलाके की है। इस घटना की जानकारी तब हुई जब सुबह शिवभक्त पूजा करने मंदिर पहुँचे तो उन्हें जैसे ही जानकारी हुई बात पूरे इलाके में फैल गई। जहाँ इस घटना के बाद लोगों में नाराजगी है वहीं शिवलिंग तोड़े जाने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के हनुमानगंज थाने के पास छोला रोड पर वीर सावरकर चौक पर पिपलेश्वर महादेव का मंदिर है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग को रात में कुछ उपद्रवियों ने पत्थर मारकर तोड़ दिया। बुधवार (3 अगस्त, 2022) की सुबह जब लोग पूजा करने शिव मंदिर पहुँचे तो उनके सामने टूटा शिवलिंग था। इसे लेकर क्षेत्र के रहवासियों में आक्रोश है।”

वहीं इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है, “जब सुबह जब मैं घूमने जा रहा था, तो शिव मंदिर में शिवलिंग टूटी हुई दिखाई दी। जब मैंने करीब जाकर देखा, तो शिवलिंग टूटी हुई पड़ी थी और बगल में पत्थर पड़ा था। इसकी जानकारी मैंने तुरंत इलाके के लोगों को दी और फिर पुलिस को बताया। लोगों को जैसे ही इस बात का पता चला, तो वे सभी यहाँ पर इकट्ठे हो गए और इलाके में इस घटना के बाद से आक्रोश फैल गया।”

बता दें कि शिव मंदिर में शिवलिंग के खंडित किए जाने की जानकारी जैसे ही हिन्दू संगठनों को हुई तो विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि के पदाधिकारी मंदिर पहुँचकर, मंदिर के सामने बैठकर नारेबाजी की। उन्होंने अज्ञात बदमाशों को गिरफ्तार करने की माँग की। वहीं भड़के लोगों ने कुछ समय के लिए सड़क जाम भी किया।

गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपित की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हनुमानगंज पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को चोट पहुँचाना या उसे अपवित्र करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘बूस्टर डोज लगने के बाद भी हो रहा है कोरोना, ये मॉडर्न मेडिकल साइंस की असफलता’: बोले बाबा रामदेव – जड़ी-बूटी की तरफ लौटेगी

हमेशा सुर्खियों में रहने वाले योग गुरु बाबा रामदेव (Baba Ramdev) ने एक बार कोरोना वैक्सीन के माध्यम से मॉडर्न मेडिकल साइंस पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बूस्टर डोज लगने के बाद भी अगर किसी को कोरोना होता है तो यह मेडिकल साइंस की असफलता है।

बाबा रामदेव ने कहा कि मेडिकल साइंस अभी अपने शैशवावस्था में है, इसीलिए बूस्टर डोज लगवाने के बाद भी लोगों को कोरोना हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों प्राकृतिक जीवन-पद्धति अपनाना होगा।

बाबा रामदेव ने कहा कि बदलते समय के साथ ही दुनिया फिर से जड़ी-बूटियों की ओर लौटेगी। गिलॉय के ऊपर रिसर्च की जाए और दवाइयाँ बनाई जाएँ तो भारत विश्व में सबसे बड़ी इकॉनोमी बन सकता है।

पारम्परिक भारतीय चिकित्सा का आधुनिकीकरण, लोक स्वास्थ्य एवं ओद्यौगिक परिप्रेक्ष्य विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि प्रकृति से ही संस्कृति की पहचान होती है। इसी से समृद्धि व स्वास्थ्य भी मिलता है।

वहीं, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कटोच ने कहा कि कोरोना के दौरान आयुष विधा का योगदान संपूर्ण विश्व ने देखा। उन्होंने कहा कि इस दौरान आयुष संजीवनी ऐप पर आए 1.47 करोड़ लोगों में 89 प्रतिशत लोगों ने आयुष का इस्तेमाल किया।

इससे पहले भी बाबा रामदेव ने कोविड वैक्सीन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने ऐलान कहा था कि वे संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन नहीं लगवाएँगे। उन्होंने कहा था कि ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ उन्हें सुरक्षा कवच देगा हुए।

उन्होंने कहा था कि वे वर्षों से योगाभ्यास करते हैं, इसलिए उन्हें कोरोना का खतरा नहीं है। हालाँकि, हर तरफ से आलोचना होने के बाद वे बैकफुट पर आ गए थे और उन्होंने वैक्सीन लगवाने की बात कही थी।

ये मुल्क का झंडा, हर घर पर क्यों फहराएँ: ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर भड़के सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क, कहा- संविधान में कंपल्सरी नहीं

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिस पर विवाद हो शुरू हो गया है। सपा नेता ने कहा है कि ये मुल्क का झंडा है। मुल्क वाले इसे लगाते हैं। सत्ताधारी बीजेपी की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि वे तो हमें मुल्क का नहीं मानते। उन्होंने कहा कि तिरंगा मुल्क का झंडा है, मुल्क के कार्यालयों पर फहराया जाए। इस अभियान पर विवादित बयान देते हुए सपा सांसद ने कहा है कि जिसकी मर्जी हो वह झंडा लगाए। क्या झंडा लगाने से ही देशभक्ति साबित होगी।

दरअसल, संसद के मॉनसून में भाग ले रहे शफीकुर्रहमान बर्क ने राष्ट्रध्वज फहराने के अभियान को ही सवालों के घेरे में ला दिया है। पीएम मोदी के हर घर पर तिरंगा लहराए जाने की अपील पर संविधान का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि संविधान में ऐसा कंपल्सरी तो नहीं है। उन्होंने कहा, “संविधान में कहीं भी तिरंगा घरों पर फहराए जाने को अनिवार्य नहीं किया गया है। फिर इस प्रकार के अभियान की क्या जरूरत?”

शफीकुर्रहमान बर्क ने आजतक से बातचीत में कहा कि संविधान में ऐसा जरूरी नहीं किया गया है कि हर घर पर तिरंगा लहराया जाए। सपा सांसद ने इस अभियान को भी लोकसभा चुनाव 2024 से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इनकी हर योजना और पॉलिसी में प्रचार होता है। 2024 इन्हें दिखाई दे रहा है।

बता दें कि पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वो 2 से 15 अगस्त के बीच सोशल मीडिया पर तिरंगे को अपनी प्रोफाइल पिक्चर के रूप में इस्तेमाल करें। उसके बाद पीएम मोदी के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई बीजेपी नेताओं ने भी अपनी डीपी बदलते हुए तिरंगा लगाया था। इसके जरिए लोगों को अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान का भाव का विकसित करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, 75 साल पुरानी आजादी के मायनों को तिरंगे के माध्यम से समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि देशभर में इन दिनों आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। 11 अगस्त से हर घर तिरंगा अभियान शुरू हो रहा है। लोगों से अपने घरों में तिरंगा लगाने की अपीलें की जा रही हैं। वहीं सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का बयान पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की हर घर पर तिरंगा फहराए जाने की अपील के एक दिन बाद आया है।

बता दें कि इससे पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी शफीकुर्रहमान बर्क ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बच्चा पैदा करने का ताल्लुक अल्लाह से है, इंसान से नहीं है। अल्लाह बच्चा पैदा करता है तो पालने का भी इंतजाम करता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार फिर भी कानून लाना चाहती है तो इसकी जगह पर बच्चों की तालीम पर ध्यान देना चाहिए। अगर बच्चे को तालीम मिल जाएगी तो जनसंख्या का मुद्दा खुद ही सुलझ जाएगा।

सैनिटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण, ‘मासूम सवाल’ के पोस्टर का लोगों ने किया विरोध: दुर्गति के बावजूद हिन्दू विरोध पर अड़ा बॉलीवुड

तमाम विरोधों के बावजूद भी बॉलीवुड अपना हिन्दू विरोधी रुक त्यागने को तैयार नहीं है। अब फिल्म ‘मासूम सवाल’ के पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें सैनिटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण को दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि इस फिल्म को महिलाओं को आने वाले पीरियड्स और इसकी समस्याओं पर बनाया गया है। मेंस्टुरेशन पर बनी इस फिल्म में सैनिटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण को दिखाए जाने का विरोध हो रहा है।

सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि बॉलीवुड अपनी दुर्गति के बावजूद हिन्दू विरोध में डूबा हुआ है। फिल्म के निर्देशक संतोष उपाध्याय और अभिनेत्री एकावली खन्ना ने विरोध पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सैनिटरी पैड को दिखाने के पीछे वाजिब कारण हैं। डायरेक्टर ने कहा कि कभी-कभी चीजों को देखने का हमारा नजरिया गलत होता है, जिससे भ्रम पैदा होता है। उन्होंने कहा कि पूरी फिल्म मेंस्टुरेशन पर आधारित है, इसीलिए सैनिटरी पैड दिखाना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि पोस्टर में सैनिटरी पैड है और उस पर भगवान श्रीकृष्ण नहीं हैं। हालाँकि, पोस्टर में स्पष्ट देखा जा सकता है कि सैनिटरी पैड की आकृति पर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर बनी हुई है। फिल्म के लोगो में भी भगवान श्रीकृष्ण हैं। वहीं अभिनेत्री खन्ना ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार के विरोध के अभियान की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो निर्माताओं का किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई आशय नहीं था।

उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र कारण यही है कि मेंस्टुरेशन और सैनिटरी पैड को लेकर समाज में जो सोच है उसे बदला जाए और नैरेटिव को बदला जाए। इस फिल्म का ट्रेलर भी यूट्यूब पर जारी किया जा चुका है। इसमें अभिनेत्री ने एक वकील का किरदार अदा किया है, जो एक लड़की का केस लड़ती है। उस लड़की पर समाज तरह-तरह के प्रतिबंध लगाता है और परिवार उसकी संवेदनाओं को नहीं समझता। हाल ही में माँ काली को सिगरेट पीते हुए और LGBTQ का झंडा उठाए एक फिल्म के पोस्टर में दिखाया गया था, जिसके बाद इसका विरोध हुआ था।

जनेऊधारी-दत्तात्रेय गोत्री ब्राह्मण का कर्नाटक में नया अवतार, लिंगायत दीक्षा लीः मुरुगा मठ पहुँचे राहुल गाँधी, कहा- शिव योग सिखाने के लिए किसी को भेज दें

कॉन्ग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने बुधवार (3 अगस्त 2022) को कर्नाटक (Karnataka) में प्रभावशाली लिंगायत समुदाय के धर्मगुरु के साथ मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने लिंगायत समुदाय की लिंग दीक्षा भी ली। बता दें कि राहुल गाँधी को जनेऊधारी ब्रह्मण बताते रहे हैं और उनका नया अवतार लिंगायत के रूप में हुआ है।

राहुल गाँधी ने पार्टी नेता डीके शिवकुमार और केसी वेणुगोपाल के साथ चित्रदुर्ग में श्री मुरुघा मठ पहुँचे। वहाँ पर उन्होंने मठ के धर्मगुरु डॉ श्री शिवमूर्ति मुरुघ शरणारू से लिंग दीक्षा ली। आमतौर पर लिंगायत समुदाय के लोग क्रिस्टल से बना इष्टलिंग पहनकर इस अनुष्ठान को करते हैं और दीक्षा लेते हैं।

इस दौरान राहुल गाँधी ने कहा, मैं पिछले कुछ समय से बसवन्ना जी को फॉलो कर रहा हूँ और उनके बारे में पढ़ रहा हूँ। इसलिए, यहाँ होना मेरे लिए वास्तविक सम्मान की बात है। मेरा एक निवेदन है, अगर आप मुझे कोई ऐसा व्यक्ति भेज सकते हैं, जो मुझे इष्टलिंग और शिवयोग के बारे में विस्तार से बता सके तो मुझे शायद इससे फायदा होगा।”

बता दें कि कर्नाटक में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। राज्य में लिंगायत समुदाय की आबादी 18 प्रतिशत से अधिक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव में लिंगायतों को साधने के लिए उन्होंने लिंग दीक्षा है। बता दें कि लिंगायत समुदाय खुद को हिंदू समुदाय से अलग होने लगातार प्रयासरत है। वहीं, राहुल गाँधी भी हिंदू और हिंदुत्व में अंतर बताकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमले करते रहते हैं। राहुल हिंदुत्व को हिंसक बताते आए हैं।

इसके पहले राहुल गाँधी खुद को कश्मीरी पंडित, जनेऊधारी ब्राह्मण और ‘दत्तात्रेय गोत्र वाले ब्राह्मण‘ बता चुके हैं। दरअसल, यूपी और लोकसभा चुनावों के दौरान खुद को ब्राह्मण बताकर राहुल गाँधी बाह्मण वोट को साधना चाहते थे। आजादी के बाद से एक दशक पहले तक ब्राह्मणों और दलित के समीकरण पर सत्ता-सुख भोगने के बावजूद कॉन्ग्रेस को इन चुनावों में कुछ खास लाभ नहीं हुआ।

अब, कर्नाटक में विधानसभा चुनाव देखकर राहुल गाँधी ब्राह्मण से लिंगायत में दीक्षित हो गए हैं। वे इस समुदाय के संस्थापक बसवन्ना को फॉलो कर रहे हैं और उनके बारे में पढ़ रहे हैं, जिन्होंने ब्राह्मणों के वर्चस्ववादी व्यवस्था का विरोध किया था। बसवन्ना जन्म आधारित व्यवस्था की जगह कर्म आधारित व्यवस्था में विश्वास करते थे। इसलिए इसकी कुरीतियों को हटाने के लिए उन्होंने नए सम्प्रदाय की स्थापना 12वीं शताब्दी में की थी।

लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं और इन दोनों समुदायों का जन्म 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक बसवन्ना ने ही किया था। लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। कर्नाटक के साथ-साथ महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लिंगायतों की अच्छी खासी आबादी है।

चुनाव के मौसम में विभिन्न अवतार में प्रकट होने होने वाले राहुल गाँधी का अगला अगले चुनाव के समय मराठों या सिखों के रूप में हो कोई अचरज की बता नहीं होगी।

10 दिन तक मुफ्त में देखें देश की ऐतिहासिक इमारतें, मोदी सरकार ने किया फ्री एंट्री का ऐलान: ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के तहत फैसला

देश की ऐतिहासिक इमारतों में अगले 10 दिन (5 से 15 अगस्त) तक एंट्री फीस नहीं लगेगी। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार ( 3 अगस्त 2022 ) को ट्वीट कर यह जानकारी दी। यह आदेश पाँच अगस्त (शुक्रवार) से लागू होगा। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने कहा कि देश भर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने संरक्षित सभी स्मारकों और स्थलों में 5 से 15 अगस्त तक मुफ्त प्रवेश की घोषणा की है। उन्होंने एएसआई का एक बयान साझा किया है।

इसमें लिखा गया है, “आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi ka Amrit Mahotsav) और 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 5 से 15 अगस्त 2022 तक देश भर में अपने सभी संरक्षित स्मारकों/स्थलों पर पर्यटकों के लिए प्रवेश निःशुल्क कर दिया है।”

दरअसल, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ अभियान के तहत भारत की आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मनाने के लिए कई पहल कर रहा है। स्मारकों, संग्रहालयों में फ्री एंट्री भी इसका प्रमुख हिस्सा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की ‘डिस्प्ले’ तस्वीर पर मंगलवार (2 अगस्त 2022) को ‘तिरंगा’ लगाया और लोगों से भी ऐसा करने का आग्रह किया

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई को ‘मन की बात‘ कार्यक्रम में कहा था कि ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ एक जनांदोलन के रूप में तब्दील हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जनता से अपील की थी कि 2 से 15 अगस्त के बीच अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्रोफाइल पिक्चर के रूप में ‘तिरंगे’ की तस्वीर लगाएँ। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्रोफाइल पिक्चर बदलने के साथ ट्वीट किया था, “आज 2 अगस्त विशेष दिन है! ऐसे समय में जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, हमारा देश हर घर तिरंगा अभियान के लिए पूरी तरह तैयार है। तिरंगा महोत्सव एक सामूहिक आंदोलन है। मैंने अपने सोशल मीडिया पर डीपी बदल दी है और आप सभी से भी ऐसा ही करने का आग्रह करता हूँ।”