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बदरुद्दीन अजमल का निजी बोर्ड चलाता है 1000 मदरसे, सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने दिया जिहादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन

असम में लगभग 1,000 निजी मदरसों पर हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार लगाम कसने जा रही है। यह एक्शन इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि हाल ही में मोरीगाँव, बारपेटा, गुवाहाटी और गोलपारा जिलों में अल-कायदा (एक्यूआईएस) और बांग्लादेश स्थित अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) सहित कई अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों से जुड़ाव की वजह से 11 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था।

इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड मुस्तफा उर्फ ​​मुफ्ती मुस्तफा को बुधवार 27 जुलाई 2022 को अन्य संदिग्धों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। वह मोरीगाँव के सहरिया के सरूचला अल-जमीअतस सलीहाट मदरसातुल बनत (Saruchala Al-Jamiatus Salihat Madarasatul Banat) में आलिम था।

इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, असम में कम से कम 1,000 निजी मदरसे चल रहे हैं। जबकि 2016 के 788 से आँकड़े के संख्या बढ़ी हुई है। हालाँकि, उनकी कोई औपचारिक संख्या या रिकॉर्ड नहीं है। इन मदरसों से संबद्धता के संबंध में सरकारी रिकॉर्ड भी ठीक नहीं हैं। वहीं राज्य सरकार पहले ही सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों को पारंपरिक स्कूलों में बदलने का निर्णय ले चुकी है।

वहीं इस मामले में असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने कहा, “हम रिपोर्ट इकट्ठा कर रहे हैं और जाँच कर रहे हैं कि क्या हम निजी मदरसों में कुछ नियमों को लागू कर सकते हैं और वहाँ आधुनिक शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दे सकते हैं। हम कानूनी राय ले रहे हैं। मुझे ऐसे किसी बोर्ड की कोई जानकारी नहीं है जो इन निजी मदरसों को चला रहा हो। हमारे पास इन मदरसों के बारे में कोई विशेष डेटा नहीं है।”

असम पुलिस के महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने कहा कि पुलिस ने इन मदरसों का सर्वेक्षण किया था और पूरी जानकारी थी। फिर भी, अधिकारी ने कोई विशेष जानकारी देने से अपना बचाव किया।

एक्शन के मूड में हिमंत बिस्वा सरमा

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कुछ और मदरसों की पुलिस जाँच करेगी। द सेंटिनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “हमने पहले ही दो मदरसों को उनके जिहादी लिंक की वजह से सील कर दिया है। मदरसों के यदि जिहादी लिंक के बारे में कोई ठोस शिकायत मिलने पर सरकार की नीति है कि वह मदरसों को सील कर दे। इसके बाद अधिकारी सील किए गए मदरसों के छात्रों को पास के सामान्य स्कूलों में प्रवेश देंगे।”

उन्होंने कहा, “हमारे राज्य में कोई सरकारी मदरसा नहीं है। हम पहले ही 750 सरकारी मदरसों को बंद कर चुके हैं। केवल निजी रूप से संचालित मदरसे ही चालू हैं। हालाँकि, अगर हमें कट्टरपंथियों के साथ उनके संबंधों के बारे में कोई ठोस जानकारी मिलती है, तो हम उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

मदरसों का संचालन करने वाला एक निजी निकाय

इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट की रिपोर्ट से पता चला है कि ऑल असम तंजीम मदारिस कौमिया, जिसका मुख्यालय होजई जिले के नीलबगान में है, असम राज्य के सभी निजी मदरसों को नियंत्रित करता है। यह एक निजी बोर्ड है जो निकटवर्ती राज्यों नागालैंड और मेघालय में भी मदरसों को नियंत्रित करता है। असम के इन मदरसों में करीब एक लाख छात्रों का नामांकन है। इनमें से अधिकांश मदरसे नागाँव, होजई, धुबरी और गोलपाड़ा जिलों में स्थित हैं, जहाँ नामांकन दर भी काफी अधिक है।

इसमें आगे कहा गया है कि जिस मदरसे में मुस्तफा ने पढ़ाया था, सरुचला अल-जमीअतुस सलीहत मदरसातुल बनत, वह भी ऑल असम तंजीम मदारिस कौमिया से संबद्ध है। मोरीगाँव की एसपी अपर्णा नटराजन के मुताबिक मुस्तफा एक अन्य निजी मदरसे को भी चला रहा था, जहाँ से उसे हिरासत में लिया गया था। हालाँकि, सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मुस्तफा की गिरफ्तारी का यह मतलब नहीं है कि सभी मदरसों, या उनसे जुड़े छात्रों और आलिमों का आतंकवाद से कोई संबंध है।

ऑल असम तंजीम मदारिस क़ौमिया, जिसे पहले मदारिस-ए क्वामिया के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1955 में न केवल मदरसों की स्थापना करने के लिए बल्कि उनकी प्रशासनिक और शैक्षिक प्रक्रियाओं को संचालित करने के लिए किया गया था। हालाँकि, 1982 में इसे इसका वर्तमान नाम दिया गया था। शुरुआत में इसके संचालन को नागाँव जिले के दक्षिणी हिस्सों तक सीमित करते हुए, बोर्ड ने अपनी पहुँच को लगातार बढ़ाया। AIUDF (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) के नेता और एक परफ्यूम व्यवसायी बदरुद्दीन अजमल बोर्ड के अध्यक्ष हैं।

हालाँकि, बोर्ड की प्रस्तावना के अनुसार, यह इस्लामिक दर्शन के साथ-साथ “इस्लामिक विज्ञान” और दुनिया भर में ज्ञान की रक्षा और प्रचार करने के लिए स्थापित किया गया था ताकि ऐसे व्यक्ति तैयार किए जा सकें जो इस्लाम और मदरसों के बारे में फैलाए जा रहे तथाकथित झूठ और गलत बयानी का विरोध कर सकें। साथ ही मुस्लिम विरोधी प्रभाव को खत्म करना इनका उद्देश्य तय किया गया था। ऑल असम तंजीम मदारिस क्वामिया के महासचिव मौलाना अब्दुल कादिर कासिमी के अनुसार, बोर्ड मदरसों को अनुदान नहीं देता है, फिर भी, गोपनीयता के वादे के तहत, कई मदरसों के प्रमुखों ने इंडिया टुडे को स्वीकार किया कि उन्हें नियमित रूप से धन मिलता है।

हाल के वर्षों में अधिक छात्राओं ने लिया दाखिला

गौरतलब है कि राज्य में तीन प्रकार के मदरसों में से एक बनत मदरसा है (केवल छात्राओं के लिए है); अन्य दो अरब (समुदाय द्वारा नियंत्रित एक कौमी मदरसा) और हाफिजिया (जहाँ कुरान रटाया जाता है) थे। 2016 और 2021 के बीच असम में बनत मदरसों की संख्या 140 से बढ़कर 219 हो गई, जो तीनों में से सबसे बड़ी वृद्धि को दर्शाती है।

मुस्तफा का मदरसा इस बोर्ड से नहीं था संबद्ध

हालाँकि, मुस्तफा द्वारा चलाया जा रहा मदरसा इस बोर्ड से जुड़ा नहीं था। लेकिन मौलाना अब्दुल कादिर कासिमी ने स्वीकार किया कि मुस्तफा एक मदरसे से थोड़े समय के लिए जुड़ा था जिसे इस बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त थी। कासिमी मानते हैं कि बोर्ड की कड़ी निगरानी के बावजूद गलतियाँ की गई हैं।

उन्होंने कहा, “हमने मदरसों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति प्रवेश न करे। सिर्फ आलिमों की ही नहीं बल्कि छात्रों की भी जाँच होनी चाहिए। किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अतिथि के रूप में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कुछ ऐसे भी हैं जो जाँच से बचने का जुगत भिड़ाते रहते हैं और हम हर जगह सीसीटीवी कैमरे तो नहीं लगा सकते हैं।”

कुछ मुस्लिम निकाय मदरसों के विस्तार को लेकर चिंतित

कुछ मुस्लिम नेता जाहिर तौर पर निजी मदरसों के यूँ बढ़ने को लेकर चिंतित हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारी समिति के सदस्य एडवोकेट हाफिज राशिद चौधरी के अनुसार मदरसों की गतिविधियों और कार्यों की निगरानी के लिए एक नियामक एजेंसी की आवश्यकता है।

चौधरी ने कहा, “मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ अंग्रेजी, इतिहास और सामाजिक अध्ययन जैसी आधुनिक शिक्षा को भी शामिल करने की जरूरत है। राष्ट्र की अखंडता को मजबूत करने के लिए तुलनात्मक धर्म पर एक विषय का भी अध्धयन किया जाना चाहिए।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन के प्रमुख रेजौल करीम सरकार ने मदरसों की संख्या में बेतहासा वृद्धि की आलोचना की, जिन्होंने अपने मौलिक लक्ष्यों को हासिल नहीं किया। उन्होंने कहा, “हमें मदरसों की जरूरत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ये संस्थान हर जगह फैलने लगें। ये ऐसे कई काम कर रहे हैं, भले ही वे एक अच्छा छात्र नहीं पैदा कर सकते। ” मौलाना अब्दुल कादिर कासिमी ने भी कहा है कि जरूरत से ज्यादा मदरसे पहले से ही हैं।

वहीं मुफ्ती मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद मदरसों की सरकारी जाँच के बढ़ने की उम्मीद है।

‘ये रूस का करती हैं समर्थन’: राष्ट्रपति पुतिन की ‘जिम्नास्ट GF’ पर अमेरिका ने लगाया बैन, वीजा भी किया फ्रीज

यूक्रेन के साथ चल रहे रूस के विवाद के बीच अमेरिका ने रूस के 12 नए एलीट लोगों के ऊपर प्रतिबंध लगाए हैं। इन लोगों की सूची में एक नाम राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कथित गर्लफ्रेंड अलीना कबाएवा का भी है।

अलीना के अलावा अमेरिका के वित्त विभाग ने एंड्री ग्रिगोरीविच गुरेव पर भी बैन लगाए हैं। वह विटनहर्स्ट एस्टेट के मालिक हैं। उनका 25 कमरों वाला विटनहर्स्ट एस्टेट, लंदन में बकिंघम पैलेस के बाद दूसरा सबसे बड़ा महल है। उनके 12 करोड़ डॉलर के याच पर भी बैन लगा है।

अमेरिका के वित्त विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यूएस ने अलीना के वीजा को फ्रीज कर दिया है और उनकी संपत्तियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। विभाग ने कहा कि कबाएवा, रूस की उस मीडिया कंपनी की प्रमुख हैं, जो यूक्रेन पर रूसी आक्रमण का समर्थन करती हैं।

रूस की जेल में बंद एलेक्शी नवलनी लंबे अरसे से काबेवा के खिलाफ बैन लगाने की माँग कर रहे थे। उनका कहना था कि वह रूस के आक्रमण का न केवल समर्थन करती हैं बल्कि जो पश्चिमी देश टिप्पणी करते हैं उसका दुष्प्रचार भी करती है।
यूएस से पहले अलीना पर ब्रिटेन ने प्रतिबंधों को मंजूरी दी थी।

बता दें कि अलीना पूर्व ओलंपिक जिम्नास्ट रह चुकी हैं। उन्होंने जिम्नास्ट में कई मेडल भी जीते हैं। इसके अलावा उनकी रूस की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी की बोर्ड अध्यक्ष हैं और साथ ही वह पूर्व रूसी सांसद भी रह चुकी हैं। कथिततौर पर उन्हें पुतिन का करीबी माना जाता है। अफवाह है कि वह राष्ट्रपति पुतिन के बच्चे की माँग बनने वाली थी।

2008 में भी ये खबर आई थी कि पुतिन अपनी पत्नी को तलाक देकर अलीना से शादी करेंगे। हालाँकि बाद में ऐसा नहीं हुआ। पुतिन अपनी पत्नी से अलग हुए लेकिन खबरें फैलने के पूरे 5 साल बाद।

मालूम हो कि पुतिन की पूर्व पत्नी को भी यूके ने प्रतिबंधित किया है। इसके अलावा पुतिन की दोनों बेटियों व्लादिमीरोवना तिखोनोवा और मारिया व्लादिमीरोवना वोरोत्सोवा पर अभी अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।

ED ने सील किया ‘नेशनल हेराल्ड’ का दफ्तर, सोनिया गाँधी के आवास के बाहर भी पुलिस की भारी तैनाती: कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर भी बढ़ी सुरक्षा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘नेशनल हेराल्ड’ के मुख्यालय को सील कर दिया है। साथ ही कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के निवास स्थान 10, जनपथ के बाहर भी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पार्टी ने बड़ी संख्या में अपने कार्यकर्ताओं को वहाँ बुलाया है। ED ने कहा है कि उसके आदेश के बिना अब ‘नेशनल हेराल्ड’ के मुख्यालय का परिसर नहीं खोला जाएगा और न ही कोई अंदर जाएगा।

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने ये कार्रवाई की है। लोकसभा में सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सांसदों ने वेल में ED के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। कॉन्ग्रेस नेताओं का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने पार्टी मुख्यालय की तरफ जाने वालों सड़कों को ब्लॉक कर दिया है। जिस दफ्तर को सील किया गया है, उसे ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ नामक कंपनी चलाती है। इस कार्रवाई से एक दिन पहले ED ने इस मामले में 11 जगहों पर छापेमारी की थी।

जिस दफ्तर को को सील किया गया है, वो नई दिल्ली के बहादुरशाह जफ़र मार्ग पर स्थित है। हेराल्ड की इमारत के बाहर बड़ी संख्या में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमा होकर हंगामा किया। कॉन्ग्रेस पार्टी इसे बदले की राजनीति बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानून पर ही सवाल खड़े कर रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन बंसल ने इस दफ्तर का दौरा भी किया था। पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए ED का इस्तेमाल कर रही है।

इधर सुब्रमण्यन स्वामी ने बताया कि बताया कि कैसे इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया। उन्होंने समझाया कि कॉन्ग्रेस ने पहले 5 लाख शेयर कैपिटल पर यंग इंडिया लिमिटेड को बनाया और फिर कॉन्ग्रेस की 90 करोड़ कर्ज वाली AJL को ये कहकर खरीद लिया कि उसमें कुछ बचा नहीं था, फिर उन्होंने उसे 50 लाख रुपए में खरीदा। स्वामी राहुल-सोनिया को अपराधी बताते हुए कहते हैं कि एजीएल पर 90 करोड़ रुपए का कोई कर्ज नहीं था। कंपनी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग हुई।

पंजाब के एक खिलाड़ी को पैसा भी, दूसरे को केवल शुभकामना: हिंदू एथलीट से ‘भेदभाव’ पर CM भगवंत मान घिरे, फिर प्राइज मनी का किया ऐलान

बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारतीय एथलीट अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब की हरजिंदर कौर (Harjinder Kaur ) और विकास ठाकुर (Vikas Thakur) ने वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज और सिल्‍वर मेडल जीते। पंजाब सरकार पर ठाकुर के साथ भेदभाव का आरोप नेटिजन्स ने लगाए हैं। हालाँकि इसके बाद राज्य की AAP सरकार ने प्राइज मनी का ऐलान कर उठ रहे सवालों को शांत करने के कोशिश की।

हरजिंदर कौर पंजाब के नाभा के पास मेहस गाँव की रहने वाली हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (CM Bhagwant Man) ने उन्हें बधाई देते हुए ट्वीट किया, “राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीतने के लिए नाभा की हरजिंदर कौर को बधाई। हरजिंदर, आप पंजाब की लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। आपके माता-पिता और कोच को भी बधाई। भविष्य के लिए शुभकामनाएँ। चक दे इंडिया।”

ट्वीट करने के दो घंटे बाद ही सीएम भगवंत मान ने राज्य सरकार की खेल नीति के तहत कौर को 40 लाख रुपए नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “पंजाब की वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता। नाभा की रहने वाली हरजिंदर कौर को पंजाब सरकार की खेल नीति के तहत 40 लाख रुपए की इनामी राशि दी जाएगी। हरजिंदर की ये उपलब्धि भविष्य में खिलाड़ियों, खास तौर पर हमारी बेटियों को प्रोत्साहित करेगी।”

वेटलिफ्टिंग में लुधियाना के विकास ठाकुर ने सिल्वर मेडल जीता। सीएम मान ने उनके लिए लिखा, “पंजाब का एक और एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की मेडल लिस्ट में शामिल हो गया। लुधियाना के विकास ठाकुर ने पुरुषों के 96 किलोग्राम भारवर्ग प्रतियोगिता में 346 किग्रा भार उठाकर रजत पदक जीता। बधाई हो। कड़ी मेहनत करते रहो। भविष्य के लिए शुभकामनाएँ। बहुत बढ़िया। चक दे इंडिया!”

लेकिन कई घंटे बीतने के बाद भी जब मुख्यमंत्री की ओर से ठाकुर के लिए नकद पुरस्कार की कोई घोषणा नहीं की गई, तो नेटिज़न्स ने उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली सिख एथलीट को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया, लेकिन एक हिंदू एथलीट को सिल्‍वर मेडल जीतने के बाद कुछ भी नहीं मिला। ट्विटर यूजर 4racs ने कहा, “यूनेस्को ने ‘आप’ को ब्रह्मांड का सबसे धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल घोषित किया है।” इसके बाद उन्होंने सीएम मान के ट्वीट के स्क्रीनशॉट साझा किए।

एक अन्य ट्विटर यूजर ऋतिक ने कहा, “पंजाब की एक सिख ने कांस्य पदक जीता तो उसे 40 लाख का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई, लेकिन जब पंजाब के एक हिंदू ने रजत पदक जीता तो उसे पंजाब के सीएम की ओर से केवल शुभकामनाएँ दी गईं। भगवंत मान का यह दोहरा रवैया है।”

ट्विटर यूजर Equateall लिखते हैं, “श्री भगवंत मान जी, रजत पदक कांस्य से भी बड़ा सम्मान है। लुधियाना के वेटलिफ्टर विकास ठाकुर रजत पदक जीतने के लिए पंजाब सरकार से उचित नकद पुरस्कार पाने के हकदार हैं।”

ठाकुर को बधाई देने वाले ट्वीट के 15 घंटे बाद आखिरकार सीएम मान ने उन्हें नकद इनाम देने की घोषणा की। उन्होंने कहा, “लुधियाना के विकास ठाकुर ने बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीता है। पंजाब सरकार की खेल नीति के अनुसार, विकास को इनाम के तौर पर ₹50 लाख दिए जाएँगे। मेरी सरकार पंजाब के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें हरसंभव मदद मुहैया कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि मान ने नेटिज़न्स की प्रतिक्रिया के बाद नकद इनाम की घोषणा की है या फिर सरकार की ओर से घोषणा में किसी कारणवश देर हुई थी।

चीन के नर्सरी स्कूल में मास्क पहनकर घुसा हमलावर, चाकू से किए हमलेः 3 की मौत-6 घायल, Video वायरल

चीन के एक नर्सरी स्कूल में एक सिरफिरे आदमी ने चाकू घोंपकर तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया है जबकि छह लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना की सूचना जियांग्शी पुलिस ने बुधवार (3 अगस्त, 2022) की सुबह चीन के ट्विटर वर्जन वीबो पर दी थी। हालाँकि, पुलिस ने मृतकों और घायलों की उम्र अभी नहीं बताई है। समाचार एजेंसी एएफपी ने बताया कि ये घटना बुधवार को जिंयाशी के किंडरगार्टन में घटी है। ये हमला स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे हुआ है।

वहीं चीनी सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिसवाला एक बच्चे को लेकर भागता दिखाई दे रहा है। हालाँकि, चीनी पुलिस की पोस्ट में बताया गया कि एक नुकीला टोपी और मुँह पर मास्क पहने एक बदमाश ने अन्फू काउंटी के एक प्राइवेट किंडरगार्टन में घुसकर हमला कर दिया। चीन की पुलिस ने संदिग्ध का नाम लियु मोउनहुई बताया है और उसकी उम्र 48 वर्ष बताई है।

समाचार एजेंसी एएफपी ने बताया कि ये घटना बुधवार को जिंयाशी के किंडरगार्टन में घटी है। बताया जा रहा है कि ये हमला स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे हुआ है। हालाँकि, अभी तक वारदात की वजह का पता नहीं चल सका है। जबकि बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपित को खोजने के लिए टीमों का गठन कर दिया है।

पहले भी हो चुके हैं हमले

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सालभर पहले ही, उसी क्षेत्र में एक प्राइमरी स्कूल में चाकू से किए गए हमले में करीब 40 लोग घायल हो गए थे। दरअसल, पिछले साल अप्रैल 2020 में चीन के गुआंग्शी जुआंग के एक शहर बेइलू में एक शख्स ने चाकू से हमला कर दिया था। हमलावर की उम्र 24 साल थी। हालाँकि, पुलिस ने उसे दबोच लिया था लेकिन उसका सरनेम ‘जेंग’ ही जारी किया गया था। इस मामले में हांगकांग की मीडिया ने बताया था कि शख्स का पत्नी से तलाक हो गया था जो उस स्कूल में काम करती थी। इस हमले में 39 छात्र, स्कूल के स्टाफ के दो लोग और हेड मास्टर घायल हो गए थे।

हालाँकि, हमले को लेकर एक सुरक्षा गार्ड पर शक था, जिसे मौके पर ही धर दबोचा गया था। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, घटना वांगफू टाउन के सेंट्रल प्राइमरी स्कूल में स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 8.30 बजे हुई, जिसमें कई छात्र प्रीस्कूलर थे।

नेपाल बॉर्डर से लगे 116 गॉंवों में मुस्लिम 50% के पार, 4 साल में 25% बढ़ गए मस्जिद-मदरसे: रिपोर्ट में दावा- घुसपैठियों की पहचान नहीं आसान

नेपाल की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश के जिलों में मुस्लिमों की बढ़ती संख्या एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। एकदम से जनसंख्या में आए उछाल के पीछे पुलिस अंदाजा लगा रही है कि शायद यहाँ मुस्लिमों को बाहर से लाकर बसाया जा रहा है। आँकड़े बताते हैं कि यूपी के 5 जिलों के 116 गाँवों में 50 फीसद मुस्लिम बढ़ गए हैं। वहीं 4 साल में 25% मस्जिद-मदरसों में इजाफा देखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के 5 जिले जिनकी जनसांख्यिकी में परिवर्तन हुआ, वह पीलीभीत, खीरी, महाराजगंज, बलरामपुर और बहराइच हैं। 2011 के राष्ट्रीय औसत अनुमान के मुकाबले यहाँ 20% ज्यादा मुस्लिम बढ़े हैं। इन पाँचों सीमावर्ती जिलों में 1000 से अधिक गाँव बसे हुए हैं। लेकिन उनमें भी 116 ऐसे छाँटे गए हैं जहाँ मुस्लिम आबादी 50 फीसद तक बढ़ गई है जबकि 303 गाँव वो हैं जहाँ 30-50% का उछाल आया है।

इसके अलावा अप्रैल 2018 से लेकर मार्च 2022 तक में यूपी के सीमावर्ती इलाकों में मदरसों-मस्जिदों की संख्या भी 25% बढ़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में सीमावर्ती जिलों में जहाँ कुल 1349 मस्जिदें और मदरसे थे, वो अब बढ़कर 1688 हो गए हैं।

बता दें कि यूपी पुलिस ने सीमा से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी रिपोर्ट बनाई और इसे गृह मंत्रालय के पास भेजा। उन्होंने घुसपैठ की आशंका जताते हुए कहा कि इन सीमावर्ती इलाकों में आने वाले ज्यादातर लोग मुस्लिम हैं और पुलिस के सामने चुनौती ये है कि वो ये चीज कैसे पता लगाए कि पंचायत के रिकॉर्ड में जो नए नाम दर्ज हुए हैं वो वैध है या अवैध। सुरक्षा एजेंसियाों को भी संदेह है कि इन इलाकों में लोग बाहर से ही आए हैं और इनके दस्तावेजों की जाँच बेहद मुश्किल है।

असम में भी खतरा

उल्लेखनीय है कि सिर्फ यूपी पुलिस को ही सीमावर्ती इलाकों में अचानक से मुस्लिमों की बढ़ती तादाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं लग रही, बल्कि असम में भी यही हाल है। असम के कुछ इलाके बांग्लादेश से लगते हैं। ऐसे में देखा गया है कि धुवरी, करीमगंज, दक्षिण सलमारा और काछर जैसे इलाकों में मुस्लिमों की संख्या 32% बढ़ी है, जबकि 2011 की जनगणना के राष्ट्रीय औसत अनुमान के हिसाब से ये 12.5 और राज्य स्तरीय अनुमान के मुताबिक 13.5 होना चाहिए था।

डॉलर-विदेशी नौकरी के लालच में खालिस्तान का मत बनो हथियार: सिखों के धार्मिक नेता बाबा दादूवाल, कहा- कट्टरता और हिंसा की तरफ न बढ़ें युवा

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGMC) के प्रमुख बाबा बलजीत सिंह दादूवाल (Baba Baljit Singh Daduwal) ने सिख युवाओं से कट्टरवाद और हिंसा से दूर रहने की नसीहत दी है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने युवाओं से अलगाववादी संगठनों के ‘डॉलर के सपनों’ के लालच में भी नहीं फँसने की अपील की।

बाबा बलजीत ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि आज कई परिवार इस बात से पीड़ित हैं कि उनके बच्चों को कुछ हजार डॉलर के बदले या अमेरिका में नौकरी का लालच देकर अलगाववादी उनसे खालिस्तान के झंडे लहराने या खालिस्तानी नारे लिखने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे कट्टरता में अपने जीवन को बर्बाद ना करें और अपने परिवार की देखभाल करें।

बाबा दादूवाल ने कहा, डॉलर के लालच में आकर कई युवा जेलों में बंद हैं। यह सिखों के लिए पीड़ादायक है कि उनसे में अधिकांश अमृतधारी सिख हैं। कई युवा दो साल से अधिक समय से जेलों में बंद हैं और वे जमानत भी नहीं पा रहे हैं। जिन गैर-कानूनी संगठनों से ये काम उनसे करवाया है, वे इसके लिए पैसे भी नहीं दिए।”

सिखों को गुमराह करने वाले विदेशी संगठनों से उन्होंने कहा कि अगर युवाओं की बेरोजगारी को लेकर वे इतने ही चिंतित हैं तो उन्हें भारत में आकर फैक्ट्रियाँ खोलनी चाहिए और सिख युवाओं को नौकरी देनी चाहिए। उन्होंने अन्य धार्मिक नेताओं से भी ऐसी ही अपील करने का आग्रह किया।

उधर, दिल्ली सिख गुरुदारा प्रबंधक कमेटी पंजाब में नशाखोरी और धर्मांतरण को रोकने के लिए जागरूकता अभियान शुरू कर रही है। कमिटी ने इसके लिए अमृतसर में धर्म प्रचार सेवा केंद्र की शुरुआत की है। इस कार्य के लिए संस्था ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, श्री दमदमा साहिब व निहंग सिंग जत्थेबंदियों से सहयोग माँगी है। 

बता दें कि आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस और उसके आतंकी गुुरपतवंत सिंह पन्नू ने कई बार वीडियो मैसेज डालकर सिख युवाओं को बरगलाने और भड़काने का काम किया है। वह युवाओं को हरियाणा, हिमाचल और पंजाब में खालिस्तानी झंडे लहराने के लिए उकसाया था।

इसके बाद खालिस्तानी झंडे लहराने और खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे जाने की कई घटनाएँ अलग-अलग प्रदेशों में सामने आईं। इन मामलों में पुलिस ने कई युवाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

सनवर को पकड़ने पहुँची दिल्ली पुलिस पर जहाँगीरपुरी में फेंकी ईंटें, फिर भी पकड़ा गया हिंसा का वांटेडः हिंदुओं और पुलिस पर हमले के लिए उकसाया था

जहाँगीरपुरी हिंसा के वांटेड को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार (2 अगस्त 2022) को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान 29 वर्षीय सनवर मलिक उर्फ अकबर उर्फ कालिया के तौर पर हुई है। उस पर अपने साथियों के साथ मिलकर हनुमान जयंती (16 अप्रैल 2022) शोभा यात्रा में शामिल हिंदुओं और पुलिस पर हमले के लिए उकसाने का आरोप है। इसके लिए काँच की बोतलें और पत्थर जुटाने में भी वह शामिल था।

हिंसा के बाद सनवर फरार हो गया था। वह पश्चिम बंगाल और अन्य जगहों पर छिपा हुआ था। रोहिणी कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपए का इनाम रखा था।

सनवर मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हल्दिया का रहने वाला है। वहाँ से आकर वह दिल्ली के जहाँगीरपुरी में बस गया। दिल्ली पुलिस को उसके जहाँगीरपुरी के सी-ब्लॉक में मौजूद होने के सूचना मिली थी। इस पर कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने उसे दबोच लिया। पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) ने कहा, “हमें सूचना मिली थी कि आरोपित जहाँगीरपुरी के सी-ब्लॉक में छिपा हुआ है। यदि वह पकड़ में नहीं आएगा तो पश्चिम बंगाल में भाग जाएगा। डीसीपी अनिल शर्मा के नेतृत्व में एक टीम मौके पर पहुँची। उसने वहाँ से भागने की कोशिश की। पुलिस से बचने के लिए वह उस तरफ भागने लगा, जहाँ से उसे पकड़ा ना जा सके। इस दौरान कुछ लोगों ने आरोपित की मदद करने के लिए पुलिसकर्मियों पर ईंटें भी फेंकीं। चोट लगने के बाद भी पुलिसकर्मी मलिक को पकड़ने में कामयाब रहे।”

सनवर मलिक और जहाँगीरपुरी के कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्य में बाधा डालने और ईंट फेंकने का मामला दर्ज किया है। आरोपित जहाँगीरपुरी में कबाड़ी का काम करता था। उस पर दंगा फैलाने और हत्या के प्रयास सहित कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जहाँगीरपुरी हिंसा

गौरतलब है कि 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर हिंदू शोभा यात्रा निकाल रहे थे। जब शोभा यात्रा उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जहाँगीरपुरी से गुजर रही थी, उसी वक्त मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कथित तौर पर हिंदुओं और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो भी सामने आए थे, मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को शोभायात्रा के दौरान लोगों पर गोलियाँ चलाते हुए देखा गया था। पिछले महीने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए 37 आरोपितों के खिलाफ 2063 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।

आमिर खान ने खुद शुरू करवाया ‘बॉयकॉट लाल सिंह चड्ढा’ का ट्रेंड: कंगना रनौत का दावा, मिलिंद सोमन ने फिल्म के विरोधियों को बताया ‘ट्रॉल्स’

सोशल मीडिया पर फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बॉयकॉट अभियान के बीच मॉडल मिलिंद सोमन ने कहा है कि ट्रॉल्स अच्छी फिल्मों को नहीं रोक सकते। उन्होंने किसी फिल्म का नाम नहीं लिया और न ही कोई हैशटैग लगाया, लेकिन लोग अंदाज़ा लगा रहे हैं कि उन्होंने आमिर खान की फिल्म के समर्थन में ये ट्वीट किया है। उधर कंगना रनौत ने कहा है कि खुद आमिर खान ने ही अपनी फिल्म के बहिष्कार का अभियान चालू किया है।

कंगना रनौत ने कहा कि सोशल मीडिया पर ‘Boycott Laal Singh Chaddha’ ट्रेंड के मास्टरमाइंड खुद आमिर खान ही हैं। उनका कहना है कि मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के तहत आमिर खान ने खुद अपने फिल्म के बॉयकॉट का अभियान चालू करवा दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म की नकारात्मकता फैलाने के पीछे आमिर खान की सोची-समझी योजना है। बकौल कंगना, इस साल एक कॉमेडी फिल्म के सीक्वल (भूल भुलैया 2) के अलावा कोई हिंदी फिल्म नहीं चली है।

अभिनेत्री ने कहा कि लोगों ने सिर्फ दक्षिण भारत की फिल्मों को पसंद किया है, या फिर हमारी संस्कृति पर आधारित फ़िल्में ही चली हैं। उन्होंने कहा कि एक हॉलीवुड रीमेक वैसे भी नहीं चलेगी। कंगना रनौत ने कहा कि अब ये लोग भारत को असहिष्णु बताएँगे। उन्होंने हिंदी फिल्मों को दर्शकों के नब्ज समझने की सलाह देते हुए कहा कि हिन्दू-मुस्लिम होने से फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने आमिर खान को उनकी हिन्दू विरोधी फिल्म PK की भी याद दिलाई।

‘लाल सिंह चड्ढा’ को लेकर कंगना रनौत की इंस्टाग्राम स्टोरी

उन्होंने इसे धर्म एवं विचारधारा से न जोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि उनकी खराब एक्टिंग और बुरी फिल्मों से अलग बात है। उधर लोगों ने मिलिंद सोमन के ट्वीट का भी करारा जवाब दिया है। ‘द स्किन डॉक्टर’ ने कहा कि मिलिंद सोमन भी करीना कपूर जैसा ही दंभ दिखा रहे हैं, अगर वो चाहते हैं कि फिल्म चले तो उन्हें विनम्र होना चाहिए। ऋषि बागरी ने कहा कि उन्होंने कोशिश तो की, लेकिन ‘रॉकेट्री’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों को नहीं रोक पाए।

डॉ उदिता त्यागी ने पूछा कि क्या मिलिंद सोमन ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ को फ्लॉप करवाने की सुपारी ले ली है? एक महिला ने कहा कि पुरानी एक्टिंग को ही बार-बार दोहराने से ज़रूर तथाकथित अच्छी फिल्म रुक जाएगी। एक ने तो मिलिंद सोमन से ही पूछ डाला कि क्या उन्होंने कभी अपने पूरे जीवन में एक भी अच्छी फिल्म की है? एक व्यक्ति ने लिखा कि हिन्दू धर्म को भला-बुरा कहने वाले ‘बुद्धिजीवी’ कहे जाते हैं, जबकि बॉलीवुड की आलोचना कर रही जनता ‘ट्रॉल्स’ कहलाती है।

नमाज पढ़ रही थी अजीम बेग की 3 बेटियाँ, घर में विस्फोट से मलबे में दबकर मर गईंः 1 घंटे तक आती रहे धमाके की आवाज, पीलीभीत की घटना

पीलीभीत के जहानाबाद कस्बे के जोशीटोला में घनी बस्ती के बीच बने एक मकान में अवैध रूप से रखी पटाखे की 25 पेटियों में मंगलवार (2 अगस्त, 2022) दोपहर में आग लगने से विस्फोट हो गया। ब्लास्ट के कारण दो मंजिला मकान के परखच्चे उड़ गए। हादसे में पटाखा व्यापारी अजीम बेग की तीन बेटियों की झुलसने और मलबे में दबकर मौत हो गई। मृतकों की पहचान निशा, सानिया और नगमा के रूप में हुई है।

धमाका इतना तेज था कि आस-पास के घरों के लोग डर गए थे। बताया जा रहा है कि करीब आधा किलोमीटर दूर तक धमाकों की आवाज सुनी गई थी। वहीं घटना की सूचना मिलने पर एसपी दिनेश कुमार पी, एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी, एसडीएम योगेश कुमार गौड़, फोरेंसिक टीम मौके पर पहुँची। बताते है कि पुलिस और दमकल की गाड़ियों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

पटाखा बनाते समय हुआ हादसा

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अजीम बेग ने अपने घर में नीचे के कमरे में पटाखों का भंडार जमा कर रखा था। घर में दोपहर करीब ढाई बजे पटाखे में आग लगने से विस्फोट हो गया। विस्फोट के समय मकान में पटाखा व्यापारी अजीम बेग की पत्नी फिरोज बेगम और उसके 6 बच्चे मौजूद थे। तीन बेटियाँ अंदर के हिस्से में और माँ समेत 3 बच्चे बाहरी हिस्से में थे। जहाँ फिरोज बेगम ने बताया कि हादसे के दौरान तीनों बेटियाँ नमाज पढ़ रहीं थीं। वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि पटाखा बनाते समय हुए विस्फोट से मकान भर-भराकर गिर गया।

रिपोर्ट के अनुसार, पटाखों का कारोबार करने वाले अजीम बेग मंगलवार को किसी काम से बाहर गए हुए थे। इस दौरान उनकी बेटियाँ नगमा, सानिया और निशा पटाखा बना रही थी।कहा जा रहा है कि हवाई पटाखा बनाते वक्त यह हादसा हुआ। उसी दौरान पास के रहने वाले लोगों को तेज से धमाके की आवाज सुनाई दी। विस्फोट के समय छत पर बने कमरे में मौजूद अजीम बेग की दो बेटियाँ निशा और सानिया बुरी तरह घायल हो गईं। जबकि तीसरी बेटी नगमा नीचे गिरकर मलबे में दब गई।

बताते हैं कि करीब एक घंटे तक पटाखों में विस्फोट की आवाज आती रही। इस बीच तेज आवाज और चीख पुकार सुनकर पहुँचे स्थानीय लोगों की मदद से आग की लपटों के बीच से घुसकर पुलिस ने निशा और सानिया को निकाला और जिला अस्पताल भर्ती कराया जहाँ उनकी गंभीर हालत देखते हुए उन्हें बरेली हायर सेंटर रेफर कर दिया। वहाँ शाम को तीनों की मौत हो गई।

गौरतलब है कि अजीम के घर विस्फोट होने से उनके सगे भाई नसीम बेग, कदीर ख़ाँ, महीवली जोशी, पप्पू के मकान क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं एसपी ने बताया कि पटाखा बनाने और बिक्री के लिए अजीम के पास वर्ष 2025 तक का लाइसेंस है। उसने इसके लिए कस्बे से एक किलोमीटर दूर गोदाम भी बनाया है। लाइसेंस भी वहीं के लिए है। इसके बावजूद अजीम ने अपने घर में काफी पटाखे जमा कर रखा था। पुलिस और फोरेंसिक विभाग इस मामले में जाँच कर रही है।