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जिम के लिए पैसे ऐंठे, धर्मांतरण कर ‘ज़ोया खान’ बनाने के भी आरोप: नगरपालिका कर्मचारी नंदिनी तोमर की मिली थी लाश, पड़ोसी तौफीक गिरफ्तार

एक और हिन्दू महिला को ‘लव जिहाद’ के कारण अपनी जान गँवानी पड़ी। ताज़ा मामला मध्य प्रदेश के भिंड का है। 2 महीने पहले नंदिनी तोमर नामक युवती की आत्महत्या की खबर आई थी। वो नगरपालिका में कर्मचारी थीं। तौफीक खान ने प्यार का नाटक कर के जिम के लिए उससे रुपए ऐंठे। आरोप है कि यहाँ तक कि वोटर आईडी कार्ड में उसका नाम बदलवा कर ज़ोया खान करवा दिया। लेकिन, जब युवती ने शादी की बात की तो तौफीक खान मुकर गया।

आरोप तो ये भी है कि नाम बदलने का कारण ये था कि आरोपित ने युवती का धर्म-परिवर्तन करा कर उसे मुस्लिम बना दिया, फिर छोड़ दिया। हालाँकि, पुलिस ने वोटर आईडी कार्ड को फेक बताया है। 5 जून, 2022 को नंदिनी तोमर की लाश संदिग्ध अवस्था में मिली। तभी उनकी बहन ने तौफीक खान पर आरोप लगाए थे। वो उनके घर के सामने ही रहता था। उससे रुपए ऐंठ कर तौफीक खान ने जिम खोला। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब नंदिनी तोमर ने अपने रुपए वापस माँगे, तब तौफीक ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

37 वर्षीय नंदिनी तोमर की बड़ी बहन की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले की FIR दर्ज की। वो शासकीय क्वार्टर में रहती थी। 2013 में अनुकंपा के तहत पिता की नौकरी नंदिनी को मिली थी। पुलिस का कहना है कि परिजनों ने बताया कि रुपए न मिलने पर परेशान होकर फाँसी लगा कर नंदिनी तोमर ने आत्महत्या की। नंदिनी तोमर के गले में दुपट्टा पड़ा हुआ था। पड़ोसियों की सूचना के बाद छत से घर में जाकर परिजनों ने पुलिस के साथ दरवाजा तोड़ा, तब उसकी लाश जमीन पर पड़ी दिखी।

हिन्दू संगठनों ने तौफीक खान के जिम ‘द फिटनेस सेंटर’ के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। भिंड के लहार चौराहे पर करणी सेना के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। हाइवे पर चक्का जाम भी किया गया, जिसके बाद पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहे। अब आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालाँकि, मध्य प्रदेश पुलिस ने इसे ‘लव जिहाद’ का मामला मानने से इनकार किया है।

अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को 100% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने बताया असंवैधानिक: झारखंड सरकार के फैसले को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को झटका देते हुए अनुसूचित जिलों या क्षेत्रों में शिक्षकों के जारी सौ प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसके पीड़ित अंतत: आदिवासी बच्चे ही होंगे।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बी वी नागरत्ना की खंडपीठ ने सितंबर 2020 में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा इससे संबंधित नियुक्ति की अधिसूचना को रद्द कर दिया है।

साल 2016 में झारखंड राज्य ने एक अधिसूचना किया था, जिसमें राज्य के 13 अनुसूचित जिलों/क्षेत्रों के स्कूलों में स्थानीय उम्मीदवारों/निवासियों के लिए 100% आरक्षण देने की व्यवस्था की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “अधिक मेधावी शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाकर कुछ जिलों के शिक्षकों के पक्ष में 100% आरक्षण देकर स्कूल जाने वाले बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है।”

इंदिरा साहनी बनाम चीबरोलू राव मामले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में इंदिरा साहनी और चीबरोलू राव जैसे उदाहरणों में तय किया जा चुका है कि आरक्षण सुरक्षात्मक रूप में अनुमोदित है और इसे 100 प्रतिशत बनाकर भेदभावपूर्ण और अनुचित नहीं बनाया जा सकता।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है और इसके अवसर से किसी को अन्यायपूर्ण तरीके से वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के समान अधिकार हैं और संविधान निर्माताओं ने एक वर्ग का बहिष्कार करके दूसरे के लिए अवसर पैदा करने पर कभी विचार नहीं किया गया।

हालाँकि, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल और सुनील कुमार ने तर्क दिया कि राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना कानून के अनुरूप थी, क्योंकि यह भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 5 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों के तहत दी गई थी। वह राज्यपालों को अनुसूचित क्षेत्रों के लिए कानून बनाने और उन्हें संसदीय कानूनों के दायरे से बाहर करने की शक्ति देता है।

इस पर, न्यायालय ने तर्क दिया कि राज्यपाल मौलिक अधिकारों की गारंटी को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं कर सकते। अदालत ने कहा, “संबंधित अनुसूचित जिलों/क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों के लिए 100% आरक्षण करने का आदेश/अधिसूचना भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (2) का उल्लंघन है, क्योंकि यह गैर-अनुसूचित उम्मीदवार को गारंटीकृत मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है।”

कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 13 के अनुसार, राज्य 107 का पृष्ठ 95 ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगा जो संविधान के भाग III के तहत गारंटीकृत क्षेत्र द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनता या कम करता है। इसके उल्लंघन में बनाया गया कोई भी कानून अनुच्छेद 13 (2) की उल्लंघन पर शून्य होगा।”

सत्यजीत कुमार एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य मामले को लेकर न्यायालय ने यह भी नोट किया कि अनुच्छेद 16 (3) के साथ अनुच्छेद 35 के अनुसार, स्थानीय डोमिसाइल आरक्षण केवल संसद द्वारा अधिनियमित कानून के माध्यम से प्रदान किया जा सकता है। राज्य विधानमंडल को ऐसा करने की शक्ति नहीं है। इसलिए, अधिसूचना को अनुच्छेद 16(3) और 35 का भी उल्लंघन करने वाला माना गया।

बता दें कि साल 2020 में चेब्रोलू लीला प्रसाद राव एवं अन्य बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आंध्र प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को दिए गए 100% आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

दरअसल, साल 2016 में झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में 2,400 से अधिक टीजीटी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भर्ती निकाली, लेकिन 13 अनुसूचित जिलों में स्थित स्कूलों में नियुक्ति नहीं की। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। तब उच्च न्यायालय ने कहा था कि संविधान के अनुरूप नहीं है, क्योंकि इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की ऊपरी सीमा 50% तय की है।

‘राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त की रेवड़ियाँ अर्थव्यवस्था के लिए घातक’: सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार, SC ने शीर्ष संस्था के गठन की जताई आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त की रेवड़ियाँ बाँटे जाने के सम्बन्ध में एक शीर्ष संस्था के गठन की आवश्यकता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संस्था में नीति आयोग, RBI, सत्ताधारी एवं विपक्षी पार्टियाँ और अन्य हितधारकों को शामिल किया जाना चाहिए। राजनीतिक दल अक्सर चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्त की रेवड़ियाँ बाँटते हैं या फिर ऐसे वादे करते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और वरिष्ठ अधिवक्ता व राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के अलावा अन्य याचिकाकर्ताओं से एक विशेषज्ञ समिति के गठन को लेकर सुझाव माँगा, जो मुफ्त की रेवड़ियों के सम्बन्ध में सुझाव दे सके। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुफ्त की रेवड़ियों के फायदे-नुकसान का अध्ययन करने के लिए एक समिति की आवश्यकता है, क्योंकि अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ता है।

ये संस्था इसका अध्ययन कर के केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुफ्त की बाँटी जाने वाली रेवड़ियाँ आर्थिक आपदा लेकर आएगी। वहीं कपिल सिब्बल की राय है कि इस सम्बन्ध में संसद में बहस के बाद कानून बनाया जाना चाहिए। CJI रमना ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक दल इसके विरुद्ध नहीं जाएगा, क्योंकि सभी Freebies बाँटना चाहते हैं।

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से ये निर्देश देने की अपील की कि सभी राजनीतिक दलों को चुनाव से पहले सार्वजनिक फंड से मुफ्त की रेवड़ियाँ बाँटने या इसके लिए वादे करने से रोका जाए। उन्होंने ऐसी पार्टियों का पंजीकरण रद्द कर के उनका चुनाव चिह्न वापस लिए जाने के निर्देश देने की माँग की। इस साल जनवरी में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नोटिस जारी करते हुए कहा था कि मुफ्त की रेवड़ियों के बदले वोट जुटाना एक गंभीर मुद्दा है।

केंद्र सरकार का भी मानना है कि इसके विपरीत परिणाम आते हैं। SG ने अश्विनी उपाध्याय की याचिका का समर्थन करते हुए ECI को इस पर नजर डालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये वैसा ही है, जैसे उनके दाहिने वाले पॉकेट में कुछ डाला जा रहा हो और फिर बाएँ पॉकेट से निकाल लिया जा रहा हो। उपाध्याय ने याचिका में उदाहरण दिया कि कैसे AAP ने महिलाओं को 1000 रुपए के मासिक भत्ते का लालच दिया था, अकाली दल ने 2000 रुपए देने का वादा किया था और कॉन्ग्रेस ने यूपी में छात्राओं को स्कूटी का लालच दिया।

जुमे पर किंडरगार्टेन के बच्चों को मस्जिद ले जाना चाहता था वडोदरा का एक स्कूल, बजरंग दल के विरोध के बाद ट्रिप रद्द

गुजरात के एक प्राइवेट स्कूल ने किंडरगार्टन के बच्चों को मस्जिद की ट्रिप पर ले जाने की योजना बनाई थी। यह स्कूल वडोदरा के कलाली में है। लेकिन विरोध के कारण दिल्ली पब्लिक स्कूल को यह ट्रिप मंगलवार (2 अगस्त 2022) को रद्द करना पड़ा। बताया जा रहा है कि अभिभावकों की आपत्ति के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता इस ट्रिप के विरोध में आगे आए थे।

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इससे पहले बच्चों को एक मंदिर में ले जाया गया था। साथ ही एक अनाम अभिभावक के हवाले से बताया है कि उन्हें मस्जिद की ट्रिप में कुछ भी गलत नहीं लगा। रिपोर्ट में आगे इसे अभिभावक के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि अन्य बच्चों के माता-पिता भी इस ट्रिप के लिए राजी थे।

इतना ही नहीं अनाम अभिभावक के हवाले से बजरंग दल कार्यकर्ताओं को ‘उन्मादी’ बताते हुए और दावा किया गया है कि वे बच्चों के मस्जिद नहीं जाने से निराश हैं। इससे पहले वे एक चर्च में गए थे और प्रार्थना के बारे में सीखा था। एक अन्य अनाम माता-पिता ने कथित तौर पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनकी बेटी मस्जिद जाने के लिए उत्साहित थी। इससे पहले वह कभी मस्जिद नहीं गई थी। यह ध्यान देने योग्य है कि महिलाओं को मस्जिद जाने और वहाँ नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होती है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए विश्व हिंदू परिषद के कॉर्डिनेटर केतन त्रिवेदी (Ketan Trivedi) ने कहा कि स्कूल ने 5 अगस्त (शुक्रवार) का दिन मस्जिद ट्रिप के लिए चुना था। ऐसा लगता है कि उनकी मंशा थी कि बच्चे जुमे की नमाज का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा, “अगर स्कूल को बच्चों को सच में कुछ दिखाना है, तो वे बच्चों को अस्पताल, सेना के शिविरों में ले जा सकते थे, ताकि उन्हें डॉक्टर, सैनिक बनने की प्रेरणा मिल सके। उन्हें मस्जिद ले जाने की योजना क्यों बनाई गई?”

त्रिवेदी ने आगे कहा कि विहिप ने स्कूल अधिकारियों से कहा कि इस तरह की फील्ड ट्रिप से किसी की भी धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं। यह एजुकेशनल ट्रिप की तुलना में एक स्टंट प्रतीत होता है। उन्होंने कहा, “स्कूल को धर्म पर नहीं, शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें उस स्थान पर ले जाते हैं, जहाँ उन्हें शिक्षा के साथ प्रेरणा मिल सके। बच्चों को धार्मिक स्थलों पर ले जाकर आप उन्हें धर्म के बारे में सोचने पर मजबूर कर देते हैं, जैसे मुस्लिम क्या करते हैं, ईसाई क्या करते हैं। इसकी जगह उन्हें पुलिस थानों या सैन्य शिविरों में क्यों नहीं ले जाते?”

बता दें कि इस ट्रिप पर अभिभावकों की आपत्ति के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्कूल के बाहर ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। इस हंगामे के बाद स्कूल ने अगस्त महीने के सभी फील्ड ट्रिप रद्द कर दिए हैं।

‘अपराधी हैं सोनिया और राहुल गाँधी, अब जाएँगे जेल’: ED जाँच से सुब्रमण्यम स्वामी संतुष्ट, कहा – सबूत नहीं होता तो यहाँ तक नहीं पहुँचता नेशनल हेराल्ड केस

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही नेशनल हेराल्ड केस की जाँच ने धीरे-धीरे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की परेशानियाँ बढ़ा दी हैं। 2 अगस्त 2022 को इस केस के संबंध में देश भर में 12 जगह छापेमारी हुई थी, जबकि उससे पहले कॉन्ग्रेस के दोनों नेताओं से लंबी पूछताछ ईडी कर चुकी है। अब इस केस का खुलासा करने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि जल्द ही राहुल-सोनिया जेल जाएँगे और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में सजा होगी।

विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपयों में किया गया कन्वर्ट

भाजपा नेता ने इस संबंध में दैनिक भास्कर से विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि कैसे इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया। उन्होंने समझाया कि कॉन्ग्रेस ने पहले 5 लाख शेयर कैपिटल पर यंग इंडिया लिमिटेड को बनाया और फिर कॉन्ग्रेस की 90 करोड़ कर्ज वाली AJL को ये कहकर खरीद लिया कि उसमें कुछ बचा नहीं था, फिर उन्होंने उसे 50 लाख रुपए में खरीदा।

स्वामी राहुल-सोनिया को अपराधी बताते हुए कहते हैं कि एजीएल पर 90 करोड़ रुपए का कोई कर्ज नहीं था। कंपनी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग हुई। स्वामी के अनुसार सोनिया गाँधी-राहुल गाँधी विदेशी मुद्रा में रकम लाए होंगे और उन्होंने इस हेरा-फेरी से उसे भारतीय रुपयों में कन्वर्ट किया।

जेल जाएँगे राहुल-सोनिया: सुब्रमण्यम स्वामी

सुब्रमण्यम स्वामी ने इस केस में चल रही जाँच पर अपनी संतुष्टि जताई। साथ ही कहा कि अब तक भाजपा में भी कुछ ऐसा नेता रहे जिनकी वजह से सोनिया राहुल बचते रहे। हालाँकि अब जाँच सही से हो रही है। उन्होंने बताया कि ये पूरा सही है और आगे इस केस में राहुल-सोनिया को जेल जाना होगा। वह बोले, “इन दोनों (राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी) को पहले जेल में रखा जाएगा। फिर इनको कोर्ट में आना होगा। बहस के बाद इन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत सजा होगी।

ईडी कई बार कर चुकी है पूछताछ

बता दें कि नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाए जाने के बाद से ये केस चर्चा में बना हुआ है। बीते दिनों राहुल गाँधी से कई बार ईडी ने घंटों अपने ऑफिस में पूछताछ की और सोनिया गाँधी को भी तीन बार कार्यालय बुलाकर सवाल-जवाब हुए। इस बीच कॉन्ग्रेस कार्याकर्ता विरोध के तौर पर सड़कों पर प्रदर्शन करते रहे और दावा किया गया कि पूरा केस फर्जी है जबकि सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि उन्होंने केस के संबंध में जो याचिकाएँ लगाई हैं उसमें सारे सबूत हैं। अगर सबूत नहीं होते तो केस यहाँ तक नहीं पहुँचता। वह बोले कोर्ट ने दोनों को कटघरे में खड़ा करके जमानत पर छोड़ा है, इससे ज्यादा केस की प्रमाणिकता के और क्या सबूत चाहिए।

क्या आरोप हैं?

यह मामला कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व में ‘यंग इंडियन’ में वित्तीय अनियमितता की जाँच के सिलसिले में दर्ज किया गया था। सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और अन्य पर धोखाधड़ी की साजिश रचने और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के फंड का गबन करने का आरोप है। इसके अलावा यह भी आरोप आरोप है कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपए की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपए का भुगतान किया था, जो एजेएल पर कॉन्ग्रेस का बकाया था।

बंगाल का टीचर भर्ती घोटाला: काली कमाई से अर्पिता मुखर्जी ने बनाई 18 प्रॉपर्टी, एक में ममता बनर्जी के मंत्री रहे पार्थ चटर्जी भी साझीदार

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पूर्व मंत्री एवं TMC नेता पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) और अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) के बीच प्रत्यक्ष वित्तीय संबंध का खुलासा हुआ है। सामने आए दस्तावेजों में कहा गया है कि मुखर्जी ने यह स्वीकार करने से इनकार किया कि उनके अपार्टमेंट से बरामद पैसा उनका है, लेकिन उन्होंने घोटाले की काली कमाई से साल 2011 से 2022 के बीच 18 संपत्तियाँ खरीदी हैं।

रिपब्लिक भारत द्वारा हासिल किए गए दस्तावेजों के अनुसार, अर्पिता मुखर्जी द्वारा खरीदी गई कई संपत्तियों में से एक में पार्थ चटर्जी सह-खरीदार हैं। यह बीरभूम में लगभग 7,300 वर्ग फुट की भूमि का एक टुकड़ा है, जिसे साल 2012 में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी ने मिलकर खरीदा था।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) अर्पिता मुखर्जी के दो घरों पर छापेमारी की है। दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज में मुखर्जी के डायमंड सिटी घर पर छापेमारी के दौरान भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में 20 करोड़ रुपए नकद और 2 किलोग्राम सोने के आभूषण जब्त किए गए थे।

वहीं, अर्पिता मुखर्जी के कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके में स्थित बेलघरिया के एक घर से 27.90 करोड़ रुपए नकद और 6 किलोग्राम सोना ईडी ने बरामद किया था। हालाँकि, उन्होंने ईडी को बताया कि उनके अपार्टमेंट में रखा पैसा उनका नहीं है और उनकी अनुपस्थिति में यह पैसा रखा गया था।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले कोलकाता में उसके घरों से 50 करोड़ रुपए से अधिक नकद बरामद किया था। 2 अगस्त 2022 को अर्पिता के बयानों के बाद ईडी ने कोलकाता में उनके अन्य परिसरों पर फिर से छापेमारी की।

ईडी की छापेमारी में यह पाया गया है कि पार्थ चटर्जी के पास बड़ी संख्या में फ्लैट हैं, जिनमें से कई उन्होंने अर्पिता मुखर्जी और मोनालिसा दास सहित अपने ‘करीबी सहयोगियों’ को उपहार में दिए हैं। इससे पहले अर्पिता ने ईडी को बताया था कि पार्थ चटर्जी ने उनके फ्लैट का इस्तेमाल ‘मिनी बैंक’ के तौर पर किया था।

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला, जिसे आमतौर पर एसएससी घोटाले के रूप में जाना जाता है, 2014-16 का है। एसएससी राज्यस्तरीय चयन परीक्षा (SLT) के माध्यम से आयोजित किया जाता है।

इस दौरान राज्यस्तरीय चयन परीक्षा में शामिल कई उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों ने मेरिट सूची में उच्च रैंक प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि जो उम्मीदवार मेरिट सूची में नहीं थे, उन्हें भी नियुक्ति पत्र भेजा गया था।

इसके अलावा, वर्ष 2016 में पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में समूह सी और समूह डी के कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में भ्रष्टाचार के कई आरोप सामने आए। यह मामला इस साल मार्च में तब सामने आया था, जब राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई गई थी।

जिस मौलाना से मिले थे NSA डोभाल, वो PFI को बैन करने वाले प्रस्ताव से पलटा: RSS से की तुलना, कहा – व्यक्ति पर कार्रवाई करो, संगठन पर नहीं

सैयद सलमान नदवी कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI को प्रतिबंधित करने के अपने बयान से पलट गए हैं। हाल ही में NSA अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की थी। ‘ऑल इंडिया सूफी सज्दानशीं काउंसिल (AISSC)’ के सम्मेलन में ये मुलाकात हुई थी। इसी कार्यक्रम के दौरान अजीत डोभाल ने कहा था कि कुछ लोग धर्म के नाम पर कटुता फैलाने में लगे हैं, जिसका न सिर्फ देश पर विपरीत असर पड़ता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके दुष्परिणाम आते हैं।

हाल ही में जारी किए गए एक वीडियो में सैयद सलमान नदवी ने कहा कि इस्लाम में आस्था रखने वाले हर उस व्यक्ति का कार्य है कि वो मिल्लत को जोड़े, उम्मत को जोड़े और कलमे की बुनियाद पर पूरी उम्मत में इत्तिफाक पैदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के तहत उन्होंने उस कार्यक्रम में शिरकत की थी और उन्हें पता भी नहीं था कि PFI पर प्रतिबंध की जा रही है, न ही ऐसा कोई प्रस्ताव लाया गया और न ही इस पर किसी ने हस्ताक्षर किए।”

सलमान नदवी ने दावा किया कि PFI ढंग के काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर उसके किसी व्यक्ति की तरफ से ऐसी कोई गलती हुई जो कानून की नजर में गलत है, अगर उसके खिलाफ सबूत हो तो उस व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अपराध किया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए और कोई जुल्म नहीं होनी चाहिए। मौलाना ने कहा कि पूरी जमात को प्रतिबंधित किए जाने का कार्य नहीं होना चाहिए।

हैरान करने वाली बात ये है कि उन्होंने इस दौरान PFI और तबलीगी जमात जैसे संगठनों की तुलना RSS, VHP (विश्व हिन्दू परिषद) और ‘बजरंग दल’ से कर डाली। उन्होंने एक साथ इन सबका नाम लेते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के अपराध के लिए पूरे संगठन को बैन करने का कोई तुक नहीं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कुछ ऐसे बयान दे या कार्य करे जो कानून की नजर में गलत हो तो उसी पर कार्रवाई हो, पूरे संगठन को इसका दोष नहीं देना चाहिए।

इस दौरान PFI की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन कई अच्छे कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और समाज के क्षेत्र में PFI ने अच्छा कार्य किया है, लेकिन अगर उसके कुछ अपराध हद से आगे बढ़ गए हैं तो उस व्यक्ति पर कार्रवाई हो। ‘जमीयत शबाब इल-इस्लाम’ के अध्यक्ष ने इससे पहले कार्यक्रम में कहा था कि भारत में किसी भी धर्म के विरुद्ध घृणा या उत्तेजना के लिए कोई जगह नहीं है। अजीत डोभाल का इस मौलानाओं से मिलना ‘उदार मुस्लिमों’ के बीच मोदी सरकार की पहुँच स्थापित करने के रूप में देखा गया था।

‘संजय राउत को हर महीने ₹2 लाख, परिवार को फॉरेन टूर’: रिपोर्ट में दावा- प्रवीण के पैसों से शिवसेना MP ने अलीबाग में खरीदे 10 प्लॉट

महाराष्ट्र के चॉल जमीन घोटाले (Chawl Land Scam) में शिवसेना नेता संजय राऊत (Shiv Sena Leader Sanjay Raut) ने अपने करीबी प्रवीण राऊत (Pravin Raut) का इस्तेमाल किया। राऊत ने जमीन खरीदने के लिए 3 करोड़ रुपए नकद दिया है।

ED ने खुलासा किया है कि शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राऊत के प्रवीण राऊत से गहरे संबंध हैं। जाँच के दौरान ईडी को पता चला कि संजय राऊत को प्रवीण राऊत से महीने ₹2 लाख मिलते थे। इतना ही नहीं, प्रवीण राऊत ने संजय राऊत और उनके परिवार के ‘घरेलू और विदेशी दौरों’ का भी ध्यान रखा।

ईडी ने अदालत में यह भी बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि संजय राऊत ने अलीबाग के किहिम में जमीन खरीदने में भारी मात्रा में नकदी का इस्तेमाल किया था और इसकी पुष्टि कुछ विक्रेताओं ने की है।

ईडी ने कहा, “संजय राउत के प्रॉक्सी के रूप में प्रवीण राऊत अनुमति या मंजूरी आदि प्राप्त करने के लिए अधिकारियों के साथ संपर्क करते थे, जो कि 1,039.79 करोड़ रुपए के अपराध की आय का प्राथमिक कारण है।” प्रवीण राऊत के खातों में मिले ₹112 करोड़ में से संजय राऊत और उनके परिवार को ₹1.06 करोड़ दिए जाने का भी पता चला है।

ईडी ने कोर्ट को आगे बताया कि शिवसेना के बड़े और कद्दावर नेता ने विक्रेताओं को किहिम बीच और अलीबाग में स्थित अपनी जमीन बेचने की धमकाया। साथ ही ईडी के सामने गवाही देने वाले गवाहों को भी धमकी दी है।

ईडी ने कहा कि गोरेगाँव के पात्रा चॉल के पुनर्विकास में घोटाले के बाद हुई आय का इस्तेमाल इन जगहों की जमीनों को खरीदने के लिए किया गया था। यह नकदी गुरुआशीष कंस्ट्रक्शन के निदेशक और मामले के मुख्य आरोपित प्रवीण राउत द्वारा प्रदान किया गया था। इसके अलावा, 10 पार्सल जमीन के विक्रेताओं को संजय राऊत ने 3 करोड़ रुपए नकद भी दिए थे।

बता दें कि शिवसेना नेता संजय राऊत को ईडी ने रविवार और सोमवार (31जुलाई-1 अगस्त 2022) की रात को गिरफ्तार किया था। इससे पहले उनसे लगभग 14 घंटे तक पूछताछ हुई थी।

पुणे में उद्धव के शिवसैनिक गिरफ्तार, आदित्य ठाकरे की सभा के बाद शिंदे गुट के MLA की कार पर हुआ था हमला: ठाणे में रेप पीड़िता को धमकाने में शिवसेना नेता गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट के शिवसेना विधायक उदय सामंत (Uday Samant) की कार पर मंगलवार (3 अगस्त 2022) को हमला हुआ। हमला पुणे के काटराज चौक के ट्रैफिक सिग्नल पर किया गया। हमले से कुछ घंटे पहले ही यहाँ आदित्य ठाकरे ने एक जनसभा की थी।

हमले में महाविकास आघाड़ी सरकार में मंत्री रह चुके सामंत की कार की विंडो का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है। इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह जानकारी पुणे के भारतीय विद्यापीठ थाने के सीनियर इंस्पेक्टर जगन्नाथ कालस्कर के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने दी है। गिरफ्तार लोगों में संजय मोरे भी शामिल हैं। वे शिवसेना की पुणे महानगर ईकाई के मुखिया हैं।

उदय सामंत की कार पर हमले के बाद महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने मीडियाकर्मियों से कहा, “यह हमला एक कायराना हरकत है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। अगर कोई कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी को शांति बनाए रखनी चाहिए।”

वहीं उद्धव ठाकरे गुट से ही ताल्लुक रखने वाले ठाणे के शिवसेना अध्यक्ष केदार दीघे (Kedar Dighe) के खिलाफ मुंबई पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। वे दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दीघे के भतीजे भी हैं। हाल ही में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केदार दीघे (42) को ठाणे जिला प्रमुख के रूप में नियुक्त किया था। मुंबई पुलिस ने बताया कि दीघे पर दुष्कर्म पीड़िता को धमकाने के बाद यह मामला दर्ज किया गया है।

बता दें कि दीघे पर आईपीसी की धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हमने केदार दीघे के दोस्त रोहित कपूर के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया है। दीघे पर शिकायतकर्ता को कथित तौर पर धमकी देने के लिए मामला दर्ज किया गया है।”

ओडिशा में जनजाति आयोग की टीम पर 2 बार हमला, 300 की भीड़ ने घेरा: NCST ने तलब की रिपोर्ट, कहा – सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं

ओडिशा में ‘National Commission for Scheduled Tribes (NCST)’ के सदस्य पर भीड़ ने हमला कर दिया। इस सम्बन्ध में संस्था ने अब राज्य के मुख्य सचिव, DGP और ADG (क्राइम ब्रांच) से रिपोर्ट तलब किया है। ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग’ के सदस्य जनजातीय समुदाय की समस्याओं की सुनवाई के लिए वहाँ गए थे। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं और ओडिशा की ही हैं।

NCST के सदस्य अनंता नायक पर ये हमला क्योंझर इलाके में हुआ। अनंता नायक पर हाल ही में दो बार हमला हुआ, जिससे अधिकारियों को मिली सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इस हमले को साजिश के तहत हुई घटना करार देते हुए बताया कि स्थानीय SP को इस सम्बन्ध में पहले ही सूचित कर दिया गया था। कुछ लोगों ने उन्हें कांजीपानी पुलिस थाने के पास एक शिकायत के निपटारे को कह कर अपने साथ ले लिया और आगे ले जाकर हमला कर दिया।

NCST के सदस्य ने बताया, “मुझे तेलकोइ प्रखंड के बलभद्रपुर पंचायत में लोगों की शिकायत सुनने के लिए जाना था। कांजीपानी के पास लगभग 300 लोगों ने हमें घेर लिया और शिकायत दर्ज कराने की बात कही। लेकिन, उनकी कुछ और ही साजिश थी। उन्होंने हम पर हमला कर दिया। हमारी टीम के कुछ सदस्य घायल भी हो गए। जिला प्रशासन ने हमें उचित सुरक्षा नहीं मुहैया कराई थी। इसी कारण ये घटना हुई।” इसके बाद NCST की टीम किसी अन्य रास्ते से बलभद्रपुर पहुँची और लोगों की शिकायतें सुनी।

इससे दो दिन पहले NCST की टीम पर हरीचंदनपुर प्रखंड के भंगमुण्डा में हमला हुआ था। इस घटना के बारे में बताते हुए जनजातीय नेता किरण बाला नायक ने बताया कि NCST को जनजातीय समुदाय को न्याय देने से रोकने के लिए ऐसे हमलों को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय का विकास कुछ लोगों को खटक रहा है, इसीलिए वो ऐसी हरकतें कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन पर ऐसे तत्वों को बचाने का आरोप लगाया। NCST की सेक्रेटरी अलका तिवारी ने अब अधिकारियों को नोटिस भेज कर जवाब तलब किया है।

NCST ने ओडिशा के अधिकारियों से जवाब तलब किया

इस पत्र में उन्होंने बुधवार (29 जुलाई, 2022) की पहली घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि करीब 50 लोगों ने NCST की टीम को घेर कर नारेबाजी और गालियाँ दी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन को इस सम्बन्ध में सूचित कर सुरक्षा बढ़ाने की माँग की गई। दूसरा हमला 1 अगस्त को हुआ। NCST का कहना है कि ये सब पूर्व-नियोजित साजिश के तहत हुआ लगता है और टीम की सुरक्षा को प्रशासन गंभीर नहीं है। 3 दिन के अंदर जाँच पूरी कर रिपोर्ट माँगते हुए आयोग ने इसे इंटेलिजेंस फेलियर भी करार दिया है।