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जब सिंध में हिन्दुओं-सिखों का हो रहा था कत्लेआम, 10000 स्वयंसेवकों के साथ पहुँचे थे ‘गुरुजी’: भारत-Pak विभाजन के समय कहाँ थे कॉन्ग्रेस नेता?

आज़ाद भारत के इतिहास में आज़ादी का दिन 15 अगस्त जितना महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है, उतना ही महत्व रखने वाले 15 अगस्त के पहले के कुछ दिन भी है। वे 15 दिन और उनमें होने वाली घटनाएँ आने वाले भविष्य के लिए निर्णायक होने वाली थीं। 1 से 15 अगस्त की कुछ विशेष घटनाओं और इन दिनों के दौरान प्रमुख नेताओं ने क्या गतिविधियाँ की, इस पर प्रशांत पौल द्वारा लिखी पुस्तक “वे पन्द्रह दिन” कुछ रोचक तथ्य सामने लाती है।

यह पुस्तक कुछ नवीन चर्चाओं को जन्म भी देती है जो चिंता करने योग्य है। भारत अपनी आज़ादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा है, लेकिन हमें इस उत्साह के वातावरण में विभाजन के कारणों को नहीं भूलना चाहिए। यह भी नहीं भूलना चाहिए की आज़ादी हमें मिली नहीं थी, बल्कि अनेक वीरों के वर्षों के संघर्ष के बाद हमने पाई थी। 15 अगस्त, 1947 के कुछ दिनों पहले आज़ादी मिलने की जितनी ज्यादा खुशी और उत्साह था, उतना ही विभाजन के प्रति भय और आक्रोश भी था।

जैसे-जैसे आजादी का दिन निकट आ रहा था, एक नया वातावरण तैयार हो रहा था। यह वातावरण आज़ाद भारत की खुशी का भी था और विभाजन के दुख का भी। विभाजन, जिसकी नींव मजहब पर रखी गई, उसने अपने ही घरों और मकानों में रहने वाले लोगो को शरणार्थी बना दिया था। जल्द ही पाकिस्तान बनने वाले भारत के उस हिस्से में भय पूर्ण वातावरण बना चुका था। लाहौर और कराची इस आग में जल रहे थे और जल रहे थे वो लोग, जो बचपन से वहाँ पैदा हुए और बड़े हुए।

हिंदुओं और सिखों के लिए अब कई पाकिस्तान बनने वाले भारत में रहना जैसे एक जुर्म बन गया था, जिसकी सज़ा थी केवल मौत। हिंदू और सिख व्यापारियों को भगाना, मारना और उनकी बहन-बेटियों को उठा ले जाना अब आम बात बनती जा रही थी। ‘मुस्लिम नेशनल गार्ड’ जैसे संगठन आक्रमकता बढ़ा रहे थे और दंगे भड़का रहे थे। दंगों, आगजनी, लूटपाट और बलात्कार के इस अशांत वातावरण के बीच हिंदू और सिखों की रक्षा और मदद के लिए कौन था? उन लोगों की दुःख एवं पीड़ा को अपनी पीड़ा समझ कर आगे नहीं आई कोई राजनीतिक पार्टियाँ और ना ही आए वह नेता, जो उस समय इतिहास में खुद को दर्ज कराना चाहते थे।

उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ही था, जिसने कराची और लाहौर जैसे प्रांतों में रहने वाले हजारों लाखों सिखों को यह अहसास दिलाया की उनके साथ भी कोई है और वे एकजुट रहें। दंगों और आगजनी के बीच संघ के प्रमुख गुरु गोलवलकर 5 अगस्त से चार दिन के सिंध प्रांत के प्रवास पर जाने वाले थे। अपनी जान की चिंता न करते हुए, गुरु जी ही थे जो जमीनी स्तर पर जा कर, उस अशांत और भयपूर्ण वातावरण में भी हिंदुओं और सिखों के लिए डट कर खड़े थे।

5 अगस्त के दिन बंबई के जुहू से गुरू जी टाटा एयर सर्विसेज के विमान से कराची के लिए रवाना हुए। गुरु जी की सुरक्षा का जिम्मा स्वयंसेवकों ने अपने हाथों में लिया हुआ था। शांत रहने वाले कराची एयरपोर्ट पर उस दिन काफी चहल पहल थी और क्योंकि की आज गुरु जी यहाँ आने वाले थे। स्वयंसेवकों के मन में एक चिंता भी थी, क्योंकि गुरु उस सिंध प्रांत के प्रवास पर थे जो दस दिनों के भीतर ही पाकिस्तान में जाने वाला था।

जिस कराची को पाकिस्तान की स्थायी राजधानी कहा जा रहा था, ऐसे शहर में हिंदुओं का पथ-संचलन निकालना और गुरु जी की आमसभा आयोजित करने की सोचना भी एक साहसी कदम था। और ऐसा ही हुआ। संघ ने दस हज़ार स्वयंसेवकों का यह शानदार संचलन निकाला। सुरक्षा ऐसी थी कि किसी भी मुस्लिम की हिम्मत नहीं हुई कि इस पर हमला कर दे। कराची के प्रमुख चौराहे के पास स्थित खाली मैदान में गुरू जी की आमसभा हुई।

इसमें उन्होंने कहा, “हमारी मातृभूमि पर एक बड़ी विपत्ति आन पड़ी है। मातृभूमि का विभाजन अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति का ही परिणाम है। मुस्लिम लीग ने जो पाकिस्तान हासिल किया है, वह हिंसात्मक पद्धति से, अत्याचार का तांडव मचाते हुए हासिल किया है। हमारा दुर्भाग्य है कि कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए। मुस्लिमों और उनके नेताओं को गलत दिशा में मोड़ा गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि वे इसलाम पंथ का पालन करते हैं, इसलिए उन्हें अलग राष्ट्र चाहिए। जबकि देखा जाए तो उनके रीति-रिवाज, उनकी संस्कृति पूर्णतः भारतीय है अरबी मूल की नहीं।”

उन्होंने आगे कहा था, “यह कल्पना करना भी कठिन है कि हमारी खंडित मातृभूमि, सिंधु नदी के बिना हमें मिलेगी। यह प्रदेश सप्त सिंधु का प्रदेश है। राजा दाहिर के तेजस्वी शौर्य का यह प्रदेश है। हिंगलाज देवी के अस्तित्व से पावन हुआ, ये सिंध प्रदेश हमें छोड़ना पड़ रहा है। इस दुर्भाग्यशाली और संकट की घड़ी में सभी हिंदुओं को आपस में मिल-जुलकर, एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए। संकट के यह दिन भी खत्म हो जाएँगे, ऐसा मुझे विश्वास है।”

5 अगस्त को जब दिल्ली में बड़े नेता सोए हुए थे और लाहौर, बंगाल व पंजाब में भीषण दंगों का दौर चल रहा था, उस समय भी गुरु जी जैसा तपस्वी मातृभूमि की रक्षा के लिए तत्पर था। 6 अगस्त को गुरुजी स्वयंसेवकों की भारी सुरक्षा के साथ हैदराबाद जो की कराची से 94 मील दूर है, वहाँ के लिए रवाना हुए। गुरु जी हैदराबाद में हिंदुओं को भारत कैसे सुरक्षित पहुँचाया जाए, इस बात का चिंतन कर रहे थे। इसी को लेकर लगभग दो हजार स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण वहाँ हुआ।

आज़ाद भारत की होने वाली सरकार को यह होश ही नहीं था कि सिंध में क्या हो रहा है। हजारों लाखों हिंदू सिखों को सुरक्षित भारत लाना – यह सोचने और करने वाला सिर्फ RSS ही था। ऐसे अनेकों महत्वपूर्ण प्रसंग हैं, जो हमें आसानी से इतिहास की पुस्तकों में नहीं मिलते। यह प्रसंग हमें इतिहास को एक अलग दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित भी करता है और विभाजन के कारणों से अवगत भी। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमने अपने दो हाथ, जो आज पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं, उनको अपने से अलग करके आज़ादी प्राप्त की थी।

देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। आज पाकिस्तान में जहाँ हिन्दू समाज लगभग समाप्त ही हो गया है, वही बांग्लादेश में भी हिन्दू जनसंख्या में भरी गिरावट आई है। हिन्दू या अन्य अल्पसंख्यक धर्मों के लोगों पर निरंतर हमले होते रहते है, उनका जबरन धर्मांतरण किया जाता है। भारतीयों को इन विषयों से अवगत रहना चाहिए, ताकि हमारे देश कि एकता, अखंडता एवं संप्रभुता अखंडता पर फिर से कोई प्रश्न ना उठा सके।

(लेखक सतीश कुमार और निखिल यादव विवेकानंद केंद्र, उत्तर प्रांत के क्रमशः विभाग एवं प्रांत युवा प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं)

‘बच्चा ऐसे ही होता है’: रेप के आरोप में मिर्ची बाबा गिरफ्तार, दिग्विजय सिंह की जीत के लिए किया यज्ञ, कमलनाथ सरकार में था राज्यमंत्री का दर्जा

वैराज्ञानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसे ग्वालियर के एक होटल से पकड़ा गया। कॉन्ग्रेस का करीबी रहा मिर्ची बाबा 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त तब चर्चा में आया था, जब उसने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जीत के लिए यज्ञ किया था। कॉन्ग्रेस नेता की हार पर उसने समाधि लेने की बात कही थी। साध्वी प्रज्ञा ने उस चुनाव में दिग्विजय सिंह को पराजित किया था।

भोपाल-ग्वालियर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बाबा (Mirchi Baba Rape Case) को गिरफ्तार किया। पीड़िता के मुताबिक, वह संतान प्राप्ति के लिए बाबा से मिली थी। लेकिन मिर्ची बाबा ने मौके का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। साथ ही धमकाया कि वह इस बारे में किसी को नहीं बताए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता रायसेन जिले की रहने वाली है। उसने अपनी शिकायत में पुलिस को बताया कि उसकी शादी को चार साल हो चुके हैं, लेकिन कोई संतान नहीं हैं। संतान प्राप्ति की चाह में वह मिर्ची बाबा के पास पूजा-पाठ के लिए गई थी, लेकिन बाबा ने संतान होने का दावा कर उसे इलाज के नाम पर नशे की गोलियाँ खिलाकर उसके साथ बलात्कार किया। विरोध करने पर बाबा ने कहा कि बच्चा ऐसे ही होता है। यह घटना इसी साल जुलाई की बताई जा रही है। पीड़िता के बयान के बाद कथित बाबा पर धारा 376, 506 और 342 के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

बता दें कि वैराज्ञानंद को नागा साधु का दर्जा हासिल है, वह कॉन्ग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। इसके साथ ही उसे कमलनाथ सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल चुका है।

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, राबड़ी देवी के आवास पर नई सरकार के लिए मंथन: बोली JDU – देश कर रहा इंतजार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद वो पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर राजद नेताओं से मिलने के लिए निकल गए। जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “नए स्वरूप में नए गठबंधन के नेतृत्व की जवाबदेही के लिए नीतीश कुमार को बधाई। नीतीश जी आगे बढ़िए, देश आपका इंतजार कर कर रहा है। नीतीश कुमार ने शाम के 4 बजे मंगलवार (9 अगस्त, 2022) को राज्यपाल फागू चौहान को अपना इस्तीफा सौंपा।

इस्तीफा देते समय मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, “सभी सांसद और विधायक इस बात पर सहमत हुए कि हमें NDA छोड़ देना चाहिए। इसके तुरंत बाद मैंने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।” वामपंथी दल पहले ही उन्हें समर्थन का ऐलान कर चुके हैं और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी उनकी फोन पर बात हुई है। तेजस्वी यादव के साथ बैठक के बाद महागठबंधन की नई सरकार का औपचारिक ऐलान होगा।

ये भी कहा जा रहा है कि 160 विधायकों के समर्थन का पत्र पेश करते हुए नीतीश कुमार ने नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है।

लालू-नीतीश से ऊब चुके बिहार में कौन होगा BJP का देवेंद्र फड़नवीस? कीचड़ में कमल खिलाने वाला चाहिए, लेकिन पार्टी के अधिकतर नेता अपने जिले के बाहर फुस्स

2014 में लोकसभा चुनाव हुए। नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर थी। बिहार में पार्टी को 22 सीटें मिलीं। उसकी सहयोगी लोजपा को 6 और रालोसपा को 3 सीटें मिलीं। इस तरह 40 में से 31 सीटें राजग गठबंधन ने अपने नाम कर ली। लेकिन, इसके डेढ़ वर्षों बाद विधानसभा चुनाव हुए। 243 में से 151 सीटें राजद-जदयू गठबंधन ने अपने नाम कर लिया। भाजपा 53 पर सिमट गई। ये सब उसके बावजूद हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धुआँधार 31 रैलियाँ की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शायद ही किसी राज्य के चुनाव में इतनी रैलियाँ की हों, लेकिन इसके बावजूद हुई भाजपा की इस हार ने शायद पार्टी को इतना डरा दिया कि जब 2017 में नीतीश कुमार वापस NDA में आए तो उसने बाहें फैला कर उनका स्वागत किया और फिर 2020 के विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटें होने के बावजूद उन्हें ही मुख्यमंत्री के पद पर सुशोभित देखना पसंद किया। क्या भाजपा को बिहार में अकेले जाने से डर लगता है?

इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि बिहार में भाजपा के पास एक सर्व-स्वीकार्य नेता नहीं है, जिसके नाम पर वो पूरे राज्य में वोट माँग सके। जो बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं, उनका खुद का जनाधार पश्चिम चंपारण जिले से बाहर कहीं नहीं है। उन्होंने भले ही लोकसभा में हैट्रिक लगाईं हो और कभी उनके पिता भी इसी पार्टी से बतौर सांसद हैट्रिक लगा चुके हों, लेकिन तब भी आस-पड़ोस के जिले के अलावा बाकी की जनता शायद ही उन्हें जानती हो।

इनके पड़ोसी जिले के ही सांसद हैं राधा मोहन सिंह, उन्होंने भी 2019 में लोकसभा जीत की हैट्रिक लगाई। 6 बार सांसद रहने वाले राधा मोहन सिंह ने पहली जीत 1989 में ही दर्ज की थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्र में 5 साल कृषि मंत्री रहने के बावजूद भाजपा उनके नाम पर पूर्वी चंपारण से बाहर वोट नहीं माँग सकती। चंपारण में इन दोनों की आपसी अदावत की भी चर्चाएँ अंदरखाने में होती रहती हैं। फ़िलहाल राधा मोहन सिंह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

अब बात करते हैं भाजपा के दोनों उप-मुख्यमंत्रियों की। तारकिशोर प्रसाद ने कटिहार विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार जीत दर्ज की है, लेकिन पूर्वी बिहार से बाहर अधिकतर ऐसे लोग हैं जिन्होंने इनका नाम पहली बार तभी सुना जब इन्हें डिप्टी सीएम का पद दिया गया। दूसरी उप-मुख्यमंत्री रेणु देवी बेतिया से चौथी बार विधायक बनी हैं, लेकिन इन्हें पूरे पश्चिम चंपारण में भी सभी नहीं जानते होंगे। वैसे भी ये बिहार का सबसे बड़ा जिला है।

पटना के नितिन नवीन युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं और भाजयुमो बिहार के प्रदेश अध्यक्ष भी, लेकिन 4 बार विधायक बनने के बावजूद राजधानी से बाहर वो अपनी छवि नहीं बना पाए और अनुभवी नेताओं की फ़ौज में खोए-खोए से हैं। भाजपा के अन्य अनुभवी नेताओं में आते हैं – सुशील कुमार मोदी, नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार और शाहनवाज हुसैन। सुशील कुमार मोदी को लेकर लोगों और कार्यकर्ताओं ने गुस्सा इस कदर है कि उन्हें उप-मुख्यमंत्री का पद इस बार नहीं दिया गया था।

उनकी पूरी की पूरी राजनीति लालू यादव और उनके परिवार के भ्रष्टाचार के खुलासों पर ही टिकी रह गई। नंदकिशोर यादव बढ़िया बोलते हैं, नेता प्रतिपक्ष और कई बार मानते रहे हैं। लेकिन, 6 बार विधायक रहने के बावजूद वो चर्चा में नहीं रहते। कोई व्यक्ति 8 बार विधायक रहा हो (2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे) तो उसका कद अपने-आप बढ़ जाता है। गया के प्रेम कुमार नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं, लेकिन जिले के बाहर उनके नाम पर भी कोई वोट नहीं देगा।

सैयद शाहनवाज हुसैन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे, लेकिन आज बिहार सरकार में मंत्री हैं और वो भी आलाकमान की कृपा से। वरना वो भी नेपथ्य में ही थे। राजीव प्रताप रूड़ी इस बार केंद्रीय मंत्री नहीं बनाए गए। गिरिराज सिंह अपने बयानों की वजह से चर्चा में ज़रूर रहते हैं और कन्हैया कुमार को हरा कर लगातार दूसरी बार केंद्रीय मंत्री भी बने, बिहार में लगभग हर इलाके के लोग उन्हें जानते भी हैं, लेकिन वो खुद कह चुके हैं कि ये उनकी राजनीति का अंतिम चरण है। उनके नाम पर दाँव खेलने का रिस्क भाजपा शायद ही लेगी।

मिथिला में हुकुमदेव नारायण यादव भाजपा के सबसे बड़े नेता हुआ करते थे, लेकिन उन्होंने राजनीति से संन्यास ले रखा है। 1977 में पहली बार जीतने वाले हुकुमदेव नारायण यादव संसद में अपने भाषणों की वजह से चर्चा में ज़रूर आए, फ़िलहाल उनके बेटे अशोक मधुबनी से सांसद भी हैं, लेकिन अब वो नेपथ्य में हैं। नित्यानंद राय को आलाकमान आगे बढ़ा रहा है, वो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहने के बाद केंद्र में मंत्री हैं और अमित शाह के मातहत काम करते हैं – लेकिन समस्तीपुर से बाहर उनकी स्थिति भी वैसी ही है।

कीर्ति झा आज़ाद और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे सेलेब्रिटी (कभी हुआ करते थे) नेता भाजपा छोड़ चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा के लिए स्थानीय नेतृत्व की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? जो कार्य महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने किया, क्या बिहार भाजपा में कोई नेता ऐसा करने का माद्दा रखता है? शायद नहीं। भाजपा को बिहार में एक ऐसा नेता ढूँढना होगा, आगे करना होगा, जो सभी जिलों और सभी समाज के बीच स्वीकार्यता रखता हो।

यहाँ समाज की बात इसीलिए आ जाती है, क्योंकि भले ही लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के नाम पर जात-पात के समीकरण टूट जाते हों लेकिन विधानसभा चुनावों में ये अभी भी नहीं। तेजस्वी यादव ने 2020 विधानसभा चुनाव में राजद को 75 सीटें जिता कर सबसे बड़ी पार्टी बनाया, ऐसे में नकारा नहीं जा सकता कि यादव-मुस्लिम वोट्स उनके पास बहुतायत में हैं और जदयू-राजद-कॉन्ग्रेस के अकेले लड़ने पर भाजपा फिर पटखनी खा सकती है।

कारण वही होगा – स्थानीय नेतृत्व का अभाव। हाँ, ये भी सही है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ कर भाजपा ने कई राज्यों में स्थानीय नेतृत्व पैदा कर दिया है। उदाहरण के तौर पर झारखंड में रघुबर दास, हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर, महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस, उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत, हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ (2017) के नामों की घोषणा चुनाव पूर्व नहीं की गई थी। इनमें से कई कसौटी पर खड़े भी उतरे। संयोग की बात कि देवेंद्र फड़नवीस बिहार भाजपा के प्रभारी भी रहे हैं।

बिहार में तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी या सुशील मोदी उप-मुख्यमंत्री रहने के बावजूद ऐसा कोई कारनामा करने की कुव्वत नहीं रखते। बिहार को एक देवेंद्र फड़नवीस की ज़रूरत है, एक ऐसा नेता जो धुआँधार बोलता भी हो और संगठन के कार्य में निपुण होने के साथ-साथ जनता में भी लोकप्रिय हो। लोकप्रिय न सही तो कम से कम स्वीकार्य तो हो। लालू यादव के नाम पर अभी भी यादव वोट मिलते हैं, नीतीश कुमार ने ‘कुर्मी चेतना रैली’ से अपना असली राजनीतिक करियर ही शुरू किया, रामविलास पासवान अपनी जाति के 8% वोटों की बदौलत पार्टी चलाते रहे, ऐसे में भाजपा को भी कुछ नया सोचना होगा।

बिहार एक गरीब राज्य है, ऐसे में कई विश्लेषक ये भी कहते हैं कि यहाँ सत्ता पाने को लेकर विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी न कोई हड़बड़ी में रहती है और न ही इसके लिए विशेष प्रयास करती है। हालाँकि, ये सही नहीं है। 2015 के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी का ढाई दर्जन रैलियाँ करना इसे नकारता है। 10 करोड़ की जनसंख्या वाले राज्य को कौन सी दल या नेता अपने हाथ से जाने देगा? 243 विधानसभ और 40 लोकसभा सीटों से राष्ट्रीय स्तर पर कई समीकरण बन-बिगड़ सकते हैं। बस भाजपा एक नेता ढूँढ निकाले, या कोई खुद ऊपर आ जाए।

बिहार में अरविंद केजरीवाल वाली करतूतें नहीं चलेंगी। पुष्पम प्रिय चौधरी की पार्टी का हाल हमलोग देख चुके हैं। तेजस्वी यादव अपने पिता वाले ठेठ अंदाज़ में ही जनता से कनेक्ट करते हैं। हर कोई नरेंद्र मोदी नहीं हो सकता कि जनता से सीधा कनेक्शन स्थापित कर ले, लेकिन बिहार भाजपा का कोई नेता इसकी कोशिश तो कर ही सकता है। यहाँ की जनता लालू-नीतीश से ऊब चुकी है। उसे कुछ नया चाहिए। नया नहीं आएगा तो राजद लौटेगी और तेजस्वी यादव CM बने तो जंगलराज भी लौटेगा।

फ़िलहाल समय भी बिलकुल मुफीद है। लालू यादव ने 15 वर्ष बिहार पर शासन किया और नीतीश कुमार पिछले 17 वर्षों से सत्ता के शीर्ष पर काबिज हैं। 32 वर्षों से बिहार ने किसी तीसरे चेहरे को मैदान में नहीं देखा। अब जब लालू यादव भ्रष्टाचार मामलों में सज़ायाफ्ता हैं और स्वास्थ्य के कारण निष्क्रिय हैं और नीतीश कुमार की छवि पलटूराम की बन चुकी है, बिहार भाजपा अपने तैरकर से कोई ऐसा तीर निकाल दे जो इनके मुकाबले खड़ा हो सके तो बात बन जाए।

‘वो इस्लाम बैन करें, तुम 16 बुतों का घर बनाओ’: दुबई में हिंदू मंदिर देख भड़के कट्टरपंथी, तस्वीर शेयर करने वाले को कहा- काफिर, तुझे शहर के बीच काट देना चाहिए

दुबई के जेबल अली में हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो रहा है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए 5 अक्टूबर 2022 से खुलेंगे। इसमें 16 देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित होंगी। भीतर एक ज्ञान कक्ष होगा और अन्य क्रियाकलापों के एक सामुदायिक भवन भी।

सिंधु गुरु दरबार मंदिर के ट्रस्टी राजू श्रॉफ ने खलीज टाइम्स से पुष्टि की कि मंदिर 5 अक्टूबर को हिंदुओं का प्रमुख त्योहार दशहरा है। ऐसे में उसी दिन आधिकारिक तौपर पर जनता के लिए दरवाजे खोले जाएँगे। श्रॉफ के अनुसार, ये मंदिर दो चरणों में खुलेगा। पहले में तो केवल श्रद्धालु के लिए पूजा पाठ के लिए द्वार खोले जाएँगे। दूसरे में जो कि 14 जनवरी 2023 को होगा उसमें समुदाय भवन और ज्ञान कक्ष खोला जाएगा।

इस मंदिर में 1000-2000 श्रद्धालु पूजा कर पाएँगे। हिंदू त्योहारों और वीकेंड में ये संख्या और बढ़ने के अनुमान हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड भी इंस्टॉल किया गया है। यहाँ अपॉइंटमेंट बुक हो सकेगी। मंदिर का समय सुबह 6 से रात के 9 बजे तक रहेगा। हर हिंदू त्योहार यहाँ मनेगा और अच्छे भोग के लिए रसोई व कोल्ड स्टोरेज का भी इंतजाम हैं। मंदिर के भीतर एलसीडी लगाई जाएँगी जहाँ श्लोक होंगे और ज्ञान आदि की बातें होंगी।

कट्टरपंथियों को मंदिर देख आया गुस्सा

बता दें कि दुबई में बन रहे इस हिंदू मंदिर के लिए विश्व भर से हिंदू दुबई को आभार जता रहे हैं जबकि कट्टरपंथी दुबई में मंदिर को देख आग बबूला हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर इन लोगों ने गुस्सा जाहिर किया है।

हरीथ महसूद ने कहा, “जब वो अपने देशों में इस्लाम बैन कर रहे हैं। हम उनके फर्जी भगवानों के लिए मंदिर बना रहे हैं और फिर पूछते हैं कि हमारी गती हैं। हम सबको एक दिन अल्लाह के आगे जवाब देना होगा।”

हमजा ने कहा, “मुस्लिमों की गिराई जाने वाली हर मस्जिद के बदले तुम अरब की जमीन पर एक मंदिर बनाने को तैयार रहना। क्या एक्सचेंज ऑफर चला रखा है तुम लोगों ने।”

एक यूजर कहता है, “16 बुतों का घर… अरब राष्ट्र में रहते हुए सोचो ये सब बकवास देखना पड़े।” वहीं दूसरा ये पूछता है कि आखिर ऐसे मुस्लिमों के लिए क्या हुक्म है जो मंदिर बनाकर शिर्क करते हैं?”

बता दें कि कट्टरपंथियों को सिर्फ इस बात से दिक्कत नहीं है कि दुबई में हिंदू मंदिर बन गया। उन्हें उस मुस्लिम से भी समस्या है जो इसे एक अच्छी पहल मान रहा है। अली नाम का यूजर हसन सजवानी(जिन्होंने तस्वीरें शेयर की) उन्हें कहता है, “16 बुतों का घर- अल्लाह की कसम तुम काफिर और तुम्हें तो शहर के बीच लाकर काटा (चाकू का निशान बनाकर) जाना चाहिए।”

कानपुर में तिरंगे का अपमान, बनाया मस्जिद और चाँद तारे के निशान, हिन्दू संगठनों ने दर्ज कराई शिकायत

कानपुर में मुहर्रम की पूर्व संध्या पर निकाले गए जुलुस में तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है। जहाँ देश की शान तिरंगे पर मस्जिद, चाँद, तारों बनाया गया है। यहाँ तक की उसके आकार को भी बदलकर मुस्लिम ताजिए के निशान का रूप दिया गया था। जिसे लेकर राष्ट्रभक्तों में आक्रोश है। वहीं पूरे मामले में बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने विरोध दर्ज कराया है।

जुलुस का एक वीडियो न्यूज़ नेशन के रिपोर्टर ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “कानपुर में तिरंगे के अपमान का आरोप लगा है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने शिकायत की है, कि मोहर्रम के जुलूस में निशान के तौर पर तिरंगा के रूप और आकार को बदल कर उसके चिन्ह को बदल कर अपमानित करने का काम किया गया है।”

वहीं इस मामले के सामने आने के बाद हिन्दू संगठनों में आक्रोश है। बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं ने कानपुर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर शिकायत की है। उनका कहना है कि इस मामले का संज्ञान लेकर FIR दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

वहीं पुलिस कमिश्नर ने भी इसकी जाँच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा, “कुछ संगठनों के कार्यकर्ता हमारे पपास आए थे। शिकायत दी है उन्होंने। तिरंगे के अपमान वाली बात बताई है। हम डीसीपी और वरिष्ठ अधिकारियों से हम जाँच करा रहे हैं। यदि शिकायत सत्य पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी कानपुर से ही तिरंगे के अपमान का बहुत पहले एक और मामला सामने आया था। जहाँ तिरंगे पर चक्र की जगह मस्जिद का निशान बना हुआ था। मामला कानपुर स्थित रावतपुर में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का है। सोशल मीडिया पर उस समय इसका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक बड़े से डीजे स्पीकर के बगल में तिरंगा झंडा लगा हुआ देखा जा सकता था। 

नीतीश कुमार के गृह जिले के सरकारी स्कूल में फहराया SDPI का झंडा, बच्चों ने दी सलामी: Video वायरल, बिहार के स्कूल में इस्लामी घुसपैठ

पिछले दिनों बिहार के मुस्लिम बहुल इलाकों के सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दिए जाने का मामला प्रकाश में आया था। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के एक सरकारी स्कूल में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का झंडा फहराए जाने की घटना सामने आई है। एसडीपीआई कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की राजनीतिक शाखा है। हाल ही में राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ से पीएफआई के संदिग्धों को पकड़ते हुए पुलिस ने 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिशों का खुलासा किया था।

नालंदा के सरकारी उर्दू स्कूल में SDPI का झंडा फहराने की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही है। वायरल तस्‍वीरों में बच्‍चों को भी SDPI के झंडे को सलामी देते देखा जा सकता है। यह घटना किस दिन की है, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है। मामला संज्ञान में आने के बाद SDM कुमार अनुराग ने जाँच कर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

बिहार शरीफ के SDM कुमार अनुराग ने मीडियाकर्मियों को बताया कि जिस तरह स्कूल परिसर में SDPI का झंडा फहराया गया है, यह खुलेआम कानून का उल्लंघन है। यह तस्वीर कब की है, इसकी जाँच की जा रही है। जो भी लोग इसमें शामिल हैं, फोटो से उनकी पहचान कर उन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय प्रशासन को इस मामले की जानकारी है या नहीं, इस संबंध में उनसे भी पूछा जाएगा। इसमें अगर किसी भी प्रकार से स्कूल की भूमिका पाई गई तो उनके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी स्कूलों में एसडीपीआई का झंडा फहराए जाने का वीडियो सामने के बाद आम लोगों में भी काफी आक्रोश है। वे खुलेआम तिरंगे का अपमान करने से आहत हैं और दोषियों के खिलाफ सख्‍त से सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि जुलाई में पटना पुलिस ने फुलवारी शरीफ से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े लोग पकड़े थे। इन पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने फुलवारी शरीफ से पकड़े गए आतंकियों पर दो अलग-अलग FIR दर्ज की है। पहली FIR में 26 संदिग्धों का नाम है, जबकि दूसरी FIR में एक आरोपित नामजद है। पहली FIR के मुताबिक कुछ संदिग्ध बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे में गड़बड़ी करना चाह रहे थे।

प्रोफेसर की बिकनी वाली तस्वीरें देख रहा था छात्र, माता-पिता की शिकायत के बाद देना पड़ा इस्तीफा: कहा – इंस्टाग्राम हैक कर के लीक की गई फोटो

कोलकाता में एक छात्र के माता-पिता की शिकायत के बाद सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ने इस्तीफा दे दिया है। सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी की पूर्व सहायक प्रोफेसर (Former Assistant Professor ) के मुताबिक, “एक छात्र इंस्टाग्राम पर मेरी बिकनी वाली तस्वीरें देख रहा था। उसके पिता ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी में मेरी शिकायत की, जिसके बाद मुझे इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।” पूर्व प्रोफेसर का दावा है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया है और उनकी निजी तस्वीरें लीक कर दी गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनिवर्सिटी को अभिभावक की ओर से शिकायत मिली थी कि उनका बेटा प्रोफेसर की बिकनी पहने हुए फोटो देख रहा था। पूर्व सहायक प्रोफेसर नंदिनी गुहा (बदला हुआ नाम) ने आरोप लगाया कि पिछले साल स्नातक प्रथम वर्ष के छात्र के पिता से लिखित शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने उस पर संज्ञान लिया। पत्र में माता-पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को विश्वविद्यालय की प्रोफेसर की तस्वीरों को देखते हुए पकड़ा था, जो आपत्तिजनक, न्यूड और वल्गर थीं।

पत्र में यह भी लिखा गया, “हाल ही में मैं अपने बेटे को प्रोफेसर की बिकनी वाली तस्वीरें देखने पर दंग रह गया। इंस्टाग्राम पर जानबूझकर अंग प्रदर्शन करते इस तरह की तस्वीरें शेयर की गईं थीं। एक प्रोफेसर को सोशल मीडिया पर अपनी बिकनी वाली तस्वीरें अपलोड करते हुए देखना अभिभावक के रूप में मेरे लिए बेहद शर्मनाक है, क्योंकि मैंने अपने बेटे को इन सबसे दूर रखने की कोशिश की है। यह अश्लील और अनुचित है। एक 18 वर्षीय छात्र अपनी प्रोफेसर को सार्वजनिक मंच पर अंग प्रदर्शन करते हुए देखता है, यह बहुत गलत है।”

बता दें कि 7 अक्टूबर, 2021 को सेंट जेवियर्स के कुलपति और अन्य अधिकारियों के साथ एक बैठक में गुहा को अभिभावक का शिकायत पत्र और उनके निजी इंस्टाग्राम अकाउंट से ली गई तस्वीरों के स्क्रीनशॉट के साथ एक पेपर दिखाया गया था। हालाँकि, उन्होंने दावा किया है कि उन्हें इस बारे में सूचित नहीं किया गया था कि वे तस्वीरें छात्र के पास कैसे पहुँची और क्या वे उनकी तस्वीरें थीं, जिन्हें छात्र देख रहा था। उन्होंने कहा कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया है और तस्वीरें लीक कर वहीं से शेयर की गई हैं।

‘मेरे सभी भाई मेरी दोस्तों के साथ सो चुके हैं’: सोनम कपूर के खुलासे से ‘शर्मिंदा’ हुए अर्जुन, अभिनेत्री ने रणबीर कपूर को बताया ‘बेस्ट मैन’

‘कॉफ़ी विद करण’ के एपिसोड 6 के गेस्ट सोनम कपूर (Sonam Kapoor) और अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) होंगे। ये दोनों चचेरे भाई-बहन हैं। करण जौहर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस एपिसोड का एक छोटा सा वीडियो शेयर कर इस बात की जानकारी दी है। शो का नया प्रोमो जारी किया गया है।

करण जौहर ने इस प्रोमो को शेयर कर लिखा है, ‘यह शो S एंड M के बारे में है। एक तरफ हँसी का पिटारा होगा तो दूसरी तरफ दिल-दिमागो को हिला देने वाले खुलासे होंगे।” वहीं, सोनम S से खुद को मानती हैं, लेकिन करण से पूछती हैं कि यह एम कौन है। बताया जा रहा है कि करण ने ‘M’ अर्जुन कपूर की गर्लफ्रेंड मलाइका अरोड़ा के लिए इस्तेमाल किया है।

प्रोमो वीडियो में सोनम ने अर्जुन कपूर से पूछा, “तुम्हें मेरी सबसे परेशान करने वाली बात क्या लगती है?” इस पर अर्जुन कपूर ने कहा कि वह किसी के तारीफ का इंतजार नहीं करती है। खुद ही पूछती है और फिर खुद ही अपनी तारीफ भी करने लग जाती है। इस पर सोनम कहती हैं कि वह ऐसा इसलिए करती हैं, क्योंकि वह अनिल कपूर की बेटी हैं।

इसके बाद वीडियो में करण जौहर सोनम से उनके भाइयों के बारे में पूछते हैं, जहाँ सोनम कपूर भाईयों को लेकर चौंकाने वाली बात कही। करण ने सोनम से पूछा कि अर्जुन कपूर उनके दोस्तों में से किसके साथ सोए है या रिलेशनशिप में थे। इस पर वो कहती हैं, “इनके बारे में मैं डिस्कस नहीं कर रही, लेकिन मेरे सारे भाई मेरे सभी दोस्तों के साथ सो चुके हैं। कोई नहीं बचा है।”

सोनम कपूर की बातें सुनकर अर्जुन कपूर और करण जौहर दोनों हैरान रह जाते है। करण कहते हैं, “तुम्हारे कैसे भाई हैं यार।” इस पर अर्जुन कहते हैं, “कैसी बहन हो यार तुम। ये कैसी कह सकती हो।” अर्जुन कहते है कि उन्हें लग रहा है कि उन्हें शो पर सोनम के द्वारा ट्रोल किए जाने के लिए बुलाया गया है। 

इसके बाद करण जौहर एक्टर अर्जुन कपूर से पूछते हैं कि उन्होंने मलाइका अरोड़ा का नंबर फोन में किस नाम से सेव किया है। इस अर्जुन कपूर कहते हैं कि उन्हें मलाइका नाम बहुत पसंद है। इसलिए उन्होंने इसी नाम से सेव किया है। वहीं, करण जौहर सोनम से बेस्ट मैन के बारे में पूछते हैं, जिस पर सोनम कपूर एक्टर रणबीर कपूर को बेस्ट बताती है। हालाँकि वह रणबीर की आने वाली फिल्म का सही नाम नहीं बता पाती है। इसको लेकर करण और अर्जुन हँसने लगते हैं।

बता दें कि रणबीर कपूर और सोनम कपूर को लेकर चर्चा थी कि दोनों की शादी होने वाली है। दोनों को अफेयर को लेकर कई बातें चली थीं। गौरतलब है कि रणबीर कपूर ने फिल्म सांवरिया से सोनम कपूर के साथ बॉलीवुड डेब्यू किया था। जिसके बाद दोनों को लेकर चर्चा का बाजार गर्म हो गया था। वहीं, साल 2018 में सोनम कपूर ने बिजनेसमैन आनंद आहूजा से शादी रचाई और अब वह प्रेग्नेंट हैं।

अटारी बॉर्डर पर सबसे ऊँचे तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराने की साजिश रच रहा एसएफजे? बुर्का वाली महिला का वीडियो वायरल, अलर्ट पर आईबी

प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस को लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो अलर्ट पर है। दरअसल, हाल ही में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक संदिग्ध वीडियो सामने आया था जिसमें एक बुर्का पहनी हुई महिला यह कह रही है कि प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस को कश्मीरी अलगाववादियों का पूरा समर्थन है।

वीडियो में, बुर्का पहने महिला यह घोषणा करती हुई दिखाई दे रही है, “गुरुओं की पवित्र भूमि पर ‘हत्यारे’ तिरंगे को फहराने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वह आगे कहती हैं, “अटारी अमृतसर गुरुओं की भूमि है, लेकिन भारत का हत्यारा तिरंगा झंडा वहाँ फहराता रहता है। सिख भूमि पर भारतीय कब्जे का यह 75वाँ वर्ष है। हमारा उद्देश्य है कि अटारी बॉर्डर पर तिरंगा की जगह खालिस्तान का झंडा वहाँ फहराया जाए। यह निर्णायक समय है। हम कश्मीरी मुजाहिदीन खालिस्तान की लड़ाई में अपने सिख भाइयों और बहनों के साथ हर कदम पर हैं। अल्लाह हू अकबर।”

WhatsApp Video 2022-08-09 at 9.41.35 AM.mp4 from OpIndia Videos on Vimeo.

मात्र 47 सेकंड के इस छोटे से वीडियो में 26 जनवरी, 2021 की हिंसा के दौरान लाल किले पर पीले झंडे को फहराए जाने का फुटेज भी दिखाया गया है। इसमें एक क्लिप ऐसी भी है जिसमें तिरंगे को गोलियों से भून दिया गया है।

वहीं आईबी के सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि वे फुटेज का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इसके सोर्स को समझा जा सके और वीडियो में महिला की पहचान का पता लगाया जा सके। आईबी ने कहा कि एसएफजे ने अटारी सीमा पर उड़ने वाले सबसे ऊँचे तिरंगे की जगह खालिस्तान का झंडा फहराने की योजना बना रहा है।

एसएफजे ने कथित तौर पर भारत सरकार को ‘चुनौती’ दी है कि वे अटारी सीमा पर सबसे ऊँचे तिरंगे को हटाकर खालिस्तानी झंडे से बदल देंगे। वहीं सएफजे के गुरपतवंत सिंह पन्नून द्वारा ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ के बारे में एक और घोषणा में, उसने कहा है कि जब पंजाब में खालिस्तान जनमत संग्रह होगा तब वह 15 अगस्त से 26 जनवरी तक ‘घर घर खालिस्तान’ अभियान शुरू करेगा।

बता दें कि सोशल मीडिया पर एसएफजे का एक और वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एसएफजे के पन्नून को भी इसी तरह का दावा करते हुए दिखाया गया है कि तिरंगा जलाया जाएगा और पंजाब का हर घर खालिस्तान का झंडा फहराएगा।

गौरतलब है कि एसएफजे ने पहले भी प्रमुख भारतीय प्रतिष्ठानों पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की थी। यहाँ तक कि पिछले साल नवंबर में, उसने शीतकालीन सत्र के पहले दिन भारतीय संसद में खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को 125,000 डॉलर देने की घोषणा की थी।

वहीं इस महीने की शुरुआत में खालिस्तान समर्थक दल खालसा ने घर-घर तिरंगा अभियान का विरोध किया था और सिखों से निशान साहब को फहराने को कहा था।

उल्लेखनीय है कि अटारी-वाघा सीमा पर 360 फुट की ऊँचाई पर भारत के सबसे ऊँचे तिरंगे का उद्घाटन 2017 में किया गया था। कहा जाता है कि वहाँ उड़ता हुआ तिरंगा पाकिस्तान से भी देखा जा सकता है।