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सैटेलाइट फोन के साथ एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था आतंकवादी, केरल के CM विजयन ने भगाने में UAE की मदद की: स्वप्ना सुरेशा का दावा, कहा- आगे और खुलासे करूँगी

केरल सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने 8 अगस्त 2022 को केरल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके पूर्व सचिव शिवशंकर पर संगीन इल्जाम लगाए। स्वप्ना ने आरोप लगाते हुए कहा कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आतंकियों को भगाने में यूएई वाणिज्य दूतावास की मदद की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वप्ना ने दावा किया कि मिस्र में पैदा हुआ यूएई नागरिक 30 जून 2017 को केरल पहुँचा था और सीआईएसएफ उसे 4 जुलाई 2017 को गिरफ्तार किया था। उसके पास से थुरया सैटेलाइट फोन मिला था जो भारत में प्रतिबंधित था। स्वप्ना के अनुसार, इसी आदमी को छुड़ाने के लिए यूएई ने मुख्यमंत्री से बात की।

स्वप्ना ने बताया, उन्हें संयुक्त अरब अमीरात वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों का फोन आया था और इस मामले में सीएम से बात करने को कहा गया था था। स्वप्ना आगे कहती हैं, 

“मैंने सीएम के सचिव एम शिवशंकर से बात की और उन्हें पूरे मामले के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वह विजयन से बात करेंगे। 5-10 मिनट के बाद शिवशंकर ने मुझे फोन किया और एक अधिकारी को लिखित हलफनामा लेने के लिए पुलिस थाने भेजने को कहा। मुझे वैसा ही हलफनामा वाणिज्य दूतावास को देने के लिए कहा गया था। मैंने शिवशंकर के कहने पर वैसा ही किया।”

स्वप्ना की मानें तो पुलिस ने इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के बाद आरोपित को छोड़ दिया। इसके बाद इस मामले में कोई जाँच नहीं हुई। स्वप्ना बताती हैं कि सीएम अपनी बेटी के हितों की खातिर हर अवैध गतिविधि का समर्थन करते हैं। उन्होंने सीएम को लेकर कहा कि वह आने वाले समय में उनसे जुड़े और खुलासे करेंगी।

केरल सीएम पर सोना तस्करी में शामिल होने का आरोप लगा चुकी हैं स्वप्ना सुरेश

बता दें कि सोना तस्करी मामले की आरोपित स्वप्ना सुरेश पिछले काफी समय से पिनराई विजयन को लेकर आरोप लगाती रही हैं। उन्होंने इससे पहले खुलासा किया था कि विजयन डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी घोटाले में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि जब विजयन 2016 में दुबई में थे, तब उन्हें करंसी से भरा एक बैग भेजा गया था। स्वप्ना ने ये भी कहा था, “मेरी जान को खतरा है। इसलिए मैंने अदालत को एक बयान देने का फैसला किया है। मैं सभी तथ्यों (सोने की तस्करी से संबंधित) और इसमें शामिल लोगों के नाम का खुलासा करूँगी।’’

दुबई होते हुए नेपाल आई 24 साल की पाकिस्तानी युवती, बिहार के रास्ते भारते में घुसते पकड़ी गईः 2 युवकों को भी SSB ने दबोचा

नेपाल के रास्ते भारत में घुसने की कोशिश कर रहे तीन संदिग्धों को सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने पकड़ा है। इनमें से एक पाकिस्तानी युवती है। बिहार के सीतामढ़ी जिले के भिट्ठामोड़ में एसएसबी चेकपोस्ट के पास इन्हें पकड़ा गया।

तीनों भारत में घुसने की फिराक में थे। 24 साल की पाकिस्तानी युवती के साथ जो दो लोग पकड़े गए हैं, उनमें एक नेपाल का नागरिक है। दूसरा युवक भारतीय मुस्लिम बताया जा रहा। गिरफ्तार युवती के पास से कॉलेज आईकार्ड, आधार कार्ड, ATM कार्ड, नेपाली और पाकिस्तानी मोबाइल सिम सहित अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक युवती का नाम खादीजा नूर है। आशंका है कि युवती जासूसी के इरादे से भारत में घुसपैठ करना चाहती थी। तीनों को SSB कैंप में रखा गया और उनसे पूछताछ की जा रही है।

संदिग्ध पाकिस्तानी युवती के कॉलेज का आई कार्ड (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

फैसलाबाद की रहने वाली है युवती

रिपोर्टों के मुताबिक युवती पाकिस्तान के फैसलाबाद की रहने वाली है। पाकिस्तानी युवती और संदिग्धों के पकड़े जाने पर सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हो गई हैं। घुसपैठ का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। युवती के पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट और नेपाल स्थित इस्लामाबाद दूतावास से जारी टूरिजस्ट वीजा मिला है।

बताया जा रहा है कि उसके वीजा पर वापसी की तारीख 4 सितंबर 2022 है। एसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं वह स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर भारत में किसी साजिश को अंजाम देने या फिर किसी जगह की रेकी करने तो नहीं आ रही थी। रिपोर्ट के अनुसार युवती दुबई के रास्ते नेपाल आई थी।

2 चीनी नागरिक भी पकड़े गए थे को किया गया था गिरफ्तार

इससे पहले 11 जून 2022 को सीतामढ़ी से लगी सीमा से दो चीनी नागरिकों को SSB ने पकड़ा था था। दोनों नेपाल के काठमांडू से दिल्ली और नोएडा आए थे। इसके बाद दोनों नेपाल के रास्ते चीन जाने का प्रयास कर रहे थे।

NIA ने भोपाल से दबोचे 2 बांग्लादेशी आतंकी, इससे पहले 7 हो चुके हैं गिरफ्तार: सोशल मीडिया से जिहादी सामग्री फैला रहे थे हमीदुल्ला-अबिदुल्लाह

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दो और बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान हमीदुल्ला उर्फ समीद अली मियाँ और मोहम्मद सहादत हुसैन उर्फ अबिदुल्लाह के रूप में हुई है। ये दोनों ही जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के आतंकवादियों के मॉड्यूल से जुड़े हुए थे। 

इनका कनेक्शन उन 7 आतंकियों से जुड़ा है, जिन्हें मार्च 2022 में भोपाल समेत प्रदेश के अन्य शहरों से गिरफ्तार किया गया था। अब तक इस मामले में कुल 9 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। एजेंसी ने बताया कि उनके साथ भोपाल के ऐशबाग से तीन अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी भी पकड़े गए हैं। जानकारी के मुताबिक हमीदुल्ला और मोहम्मद सहादत हुसैन पर भारत में जिहादी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है। 

दोनों गिरफ्तार आरोपित मूल रूप से बंग्लादेश के रहने वाले हैं। इन पर जेएमबी के विचारों को फैलाने की साजिश का आरोप है। एजेंसी ने बताया कि दोनों आरोपित बेहद कट्टरपंथी  और घृणित और आपत्तिजनक सामग्री ऑनलाइन पोस्ट कर रहे थे। दोनों ही आरोपित सोशल मीडिया के जरिए जहर फैला रहे थे और युवाओं को भारत के खिलाफ जिहाद करने के लिए प्रेरित करने में शामिल थे। इसके लिए ये एनक्रिप्टेड ऐप का इस्तेमाल करते थे। अलग-अलग ऐप के माध्यम से बांग्लादेश में संपर्क करते थे। फिलहाल केस में छानबीन लगातार जारी है।

यह मामला शुरू में 14 मार्च को मध्य प्रदेश के भोपाल में FIR संख्या 13/2022 के रूप में दर्ज किया गया था और 5 अप्रैल को NIA द्वारा फिर से पंजीकृत किया गया था। इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

अब तक नौ आतंकी हो चुके गिरफ्तार

STF ने 13 मार्च को भोपाल के ऐशबाग इलाके से आतंकी संगठन जेएमबी के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनमें फजहर अली उर्फ महमूद, मोहम्मद अकील उर्फ अहमद, जहरुद्दीन उर्फ इब्राहिम और फजर जैनुल अबादीन उर्फ अकरम शामिल थे। इनकी पूछताछ के बाद तीन अन्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया। जो इनकी मदद करते थे। केंद्र सरकार ने मई 2019 में आतंकी समूह जेएमबी पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भादो से पहले नीतीश कुमार बिहार में फिर जलाएँगे लालू की लालटेन? तेजस्वी के साथ राज्यपाल से मिलेंगे, BJP के मंत्री दे सकते हैं इस्तीफा

बिहार में एक बार फिर से जदयू-राजद की सरकार के लिए समीकरण सेट हो गए हैं। भाजपा कोटे के सभी 16 मंत्री जल्द ही इस्तीफे देंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार (9 अगस्त, 2022) की दोपहर राज्यपाल फागू चौहान से मिलने का समय माँगा था, तभी तस्वीर साफ़ हो गई थी। तेजस्वी यादव के साथ उनकी बैठक भी होने वाली है, जिसमें गठबंधन सरकार के समीकरण पर चर्चा होगी। राजद बिहार विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है।

कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ेंगे और तेजस्वी यादव को उप-मुख्यमंत्री का पद देते हुए गृह विभाग भी दिया जा सकता है। भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालाँकि, केंद्रीय गृह मंत्री एवं भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह की नीतीश कुमार से फोन कॉल पर बातचीत की खबर भी सामने आई थी। वामपंथी दलों ने पहले ही जदयू-राजद गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान कर रखा है।

सोनिया गाँधी से नीतीश कुमार की बातचीत के बाद ये भी साफ़ हो गया है कि इस सरकार में कॉन्ग्रेस भी शामिल रहेगी। मीडिया ये भी कयास लगा रही है कि नीतीश कुमार 2024 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए ताल ठोकेंगे और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद की कमान दे दी जाएगी। इस तरह से 2025 बिहार विधानसभा चुनाव सीधे तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राजद और भाजपा के बीच होगा। भाजपा के पास फ़िलहाल बिहार में कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं है।

ये भी जानकारी सामने आई थी कि नीतीश कुमार महागठबंधन के विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपेंगे। जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनकी पार्टी को तोड़ने का षड्यंत्र हो रहा है, तभी साफ़ हो गया था कि जदयू ने भाजपा पर ये आरोप लगाया है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के हाल के बाद नीतीश कुमार की चिंताएँ बढ़ गई थीं। RCP सिंह को जदयू से निकाला जाना एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

श्रीकांत त्यागी मेरठ से गिरफ्तार, बीवी-वकील को कॉल करने पर पकड़ा गया: UP पुलिस की 8 टीमें 3 राज्यों में कर रही थी तलाश

महिला के साथ बदलूकी करने वाले श्रीकांत त्यागी को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ मेरठ में तीन और लोग गिरफ्तार हुए हैं। प्रशासन ने इससे पहले उसके अवैध घर पर बुलडोजर कार्रवाई की थी। वहीं भाजपा ने भी साफ किया था कि उसका बीजेपी किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं हैं।

बता दें कि 5 अगस्त 2022 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें त्यागी एक महिला के साथ अभद्रता करता दिख रहा था। इस वीडियो में उसे महिला के साथ सरेआम गाली-गलौच और हाथापाई करते देखा गया था जबकि वहाँ खड़े लोग मूकदर्शक बने दिख रहे थेव वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जब उसकी तलाश शुरू की तो वो फरार पाया गया।

पुलिस ने इसके बाद उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया और 8 टीमें बनाकर 3 राज्यों में तलाश जारी की। बताया जा रहा है कि श्रीकांत त्यागी लगातार अपनी पत्नी और वकील से संपर्क करने की कोशिश कर रहा था। इसी के चलते उसकी लोकेशन का खुलासा हुआ और आखिरकार वह पकड़ा गया। श्रीकांत को मेरठ से गिरफ्तार किया गया हैं। पुलिस ने उसकी पत्नी को हिरासत में लेकर 24 घंटे पूछताछ की थी

उल्लेखनीय है कि श्रीकांत की वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने उसके नोएडा सेक्टर-93 बी में बने अवैध निर्माण पर कार्रवाई की थी और वहाँ बुलडोजर चलवा दिया था। स्थानीयों ने इस कार्रवाई को खूब सराहा था। इसी बीच भाजपा की ओर से भी बयान आया जिसमें बताया गया कि श्रीकांत जो खुद को बीजेपी किसान मोर्चा से जुड़ा बताया जा रहा है, वो हकीकत में भाजपा से नहीं है। इस संबंध में भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर ने भी बयान जारी किया है।

आरोपित के भाजपा से जुड़े होने के आरोपों पर पार्टी के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वीडियो जारी कर के सफाई दी है। सांसद राजकुमार चाहर ने कहा, “मैं आप सभी को अवगत करवाना चाहता हूँ कि श्रीकांत त्यागी नाम का व्यक्ति भाजपा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में न था और न ही है। इसका किसान मोर्चे से कोई वास्ता नहीं है। सरकार और कानून उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करे।”

कोउ नृप (सरकार) होउ बिहारी को ही हानी… नीतीश कुमार इधर रहें या जंगलराज की छाया में पसरें, बिहार पर बोझ बना रहेगा

बिहार की राजनीति में बड़े उलटफेर के कयास लगाए जा रहे हैं। मीडिया की खबरों में बताया जा रहा है कि जेडीयू एक बार फिर एनडीए से बाहर होने जा रही है। नई सरकार के गठन को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से बात होने के दावे हैं। लालू प्रसाद यादव की राजद, वामपंथी पार्टियों और अन्य छोटे दलों से भी उनकी बातचीत चलने की खबरें आ रही है। इन सबके बीच सत्ता की साझीदार बीजेपी के नेताओं ने रहस्यमयी चुप्पी बना रखी है। जब बिहार के कई हिस्सों में नदियाँ उफना रहीं हैं, कुछ हिस्सों में जमीन पानी को तरस रही है, सवाल है कि इस राजनीतिक उफान से राज्य और उसकी जनता को क्या हासिल होना है?

गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है;

करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा। बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा॥
कोउ नृप होउ हमहि का हानी। चेरि छाड़ि अब होब कि रानी॥

राम के राज्याभिषेक की घोषणा के बाद जब मंथरा के झाँसे में कैकेयी नहीं आती हैं, तो वह अपनी स्थिति का हवाला देते हुए कहती है कि राजा राम बने या भरत, उसके जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता। वह चाकर ही रहेगी। लेकिन बिहार ऐसा अभिशप्त है कि कोई भी राजा बने, हानि जनता को ही होनी है।

दरअसल, लोकतंत्र में जब चुनाव होते हैं तो अमूमन जनता उस पक्ष को चुनती है जो उसकी समझ में बेहतर होता है। लेकिन बिहार के लिए परिस्थिति इसके उलट है। यहाँ की जनता बेहतरी के लिए वोट नहीं करती। वह उसका चुनाव करने को मजबूर है, जिसका सत्ता में होना उसकी समझ से कम बदतर है। तुम्हारी कमीज से मेरी कमीज ज्यादा सफेद है, वाले राजनीतिक चलन जैसे। जबकि कमीज वाले और उन्हें देखने वाले, दोनों जानते हैं कि छींटे सबके कपड़ों पर हैं।

इसी विकल्पहीनता की स्थिति में बिहार ने 2020 के विधानसभा चुनावों में एनडीए को चुना था। ऐसा नहीं था कि नीतीश के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कामकाज से लोग खुश थे। खासकर, जेडीयू और नीतीश कुमार को लेकर पूरे राज्य में भारी नाराजगी थी। फिर भी जनता ने NDA को सत्ता सौंपी, क्योंकि दूसरी तरफ जो लोग खड़े थे उनके पीछे जंगलराज की विरासत थी। इसी जंगलराज से बचने के लिए बिहार की जनता ने 2005 में नीतीश कुमार को चुना था। 2010 में दोबारा उन्हें मौका दिया।

इन दो चुनावों के बाद ऐसा लग रहा था कि बिहार अब पटरी पर लौट रहा है। जो विश्वविद्यालय 5-6 साल में तीन साल की डिग्री देने को कुख्यात थे, वहाँ सत्र समय की परिधि में आ रहा था। जर्जर स्कूलों, अस्पतालों के भवन खड़े हो रहे थे। सड़कें बन रहीं थी। बिजली गाँव-गाँव पहुँचाने के प्रयास हो रहे थे। जिन बाहुबलियों पर जंगलराज के जमाने में पुलिस के हाथ डालने की भी कल्पना नहीं की जा सकती थी, वे जेल के भीतर में थे। फास्ट ट्रैक अदालतों में उनके मामलों की सुनवाई हो रही थी। अपहरण जैसे उद्योग बंद हो चुके थे। कुल मिलाकर बिहार उस स्थिति में आ गया था, जहाँ से वह विकास के स्वप्न देखने लगा था। ध्यान रहे कि उपर मैंने जिन कार्यों का जिक्र वे एक तरह से उन गड्ढों को भरने के प्रयास थे जो जंगलराज ने बिहार की छाती पर खोद दिए थे।

ऐसे हालात में 2013 में नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की वजह से एनडीए से अलग हो गए। यह एक तरह से बिहार के सपनों पर कुठाराघात जैसा था। 2005 से 2013 तक की जो कमाई थी वह धीरे-धीरे लुटने लगी। 2015 में नीतीश उस लालू यादव के साथ चुनाव में गए, जिनके जंगलराज के कारण उनका राजनीतिक उदय हुआ था। उनको जीत मिली और फिर गिरावट तेज हुई। अचानक से बाहुबलियों और गुंडों के वही तेवर दिखने लगे। विकास के काम ठप हो गए। शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था फिर गर्त की ओर बढ़ चले। 2017 में नीतीश लौट आए। बीजेपी के साथ सरकार बनाई। लेकिन हालात नहीं बदले। बीते 5 साल में भी बिहार उस स्थिति में नहीं पहुँच पाया है, जहाँ वह 2005 से शुरू हुए सफर के कारण 2013 में था। यही कारण है कि 2020 के विधानसभा चुनावों में नीतीश से हर तबका नाराज था। सरकार बचाने के लिए उन्हें अपना अंतिम चुनाव होने की दुहाई तक देनी पड़ी थी।

लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से पहले बिहार को यह सुकून था कि वह कम से काम जंगलराज की छाया से दूर है। आँकड़े बताते हैं कि राज्य में लगातार अपराध बढ़ रहा। हाल में जब अग्निपथ विरोधी हिंसा हुई थी तो सरकार में शामिल बीजेपी के बड़े नेताओं के घर तक निशाना बने थे। इन सबके बावजूद ऐसी स्थिति नहीं थी जिसमें सीवान में कोई गुंडा किसी चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाकर मार दे। यदि नीतीश फिर से पाला बदलते हैं तो बिहार कई शहाबुद्दीन देखेगा। कई चंदा बाबू के बेटे तेजाब से नहलाकर मार दिए जाएँगे। वैसे भी नीतीश कुमार पिछले कुछ सालों से बिहार के लिए उसी तरह बोझ बने हुए हैं, जैसा करीब डेढ़ दशक पहले लालू-राबड़ी थे।

जिस जेल में रखा गया ‘आतंकी’ उसके कमोड पर बैठ बीती पार्थ चटर्जी की रात, सब्जी-चावल के लिए रोए: अर्पिता मुखर्जी का भी बुरा हाल, नहीं खाया डिनर, कैदी देते हैं दोनों को गाली

SSC स्कैम में फँसे बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के लिए जेल में दिन-रात काटना भारी हो रहा है। वहाँ के कैदी उन्हें ‘चोर-चोर’ कहकर बुला रहे हैं। उनपर भद्दी-भद्दी फब्तियाँ कसी जा रही हैं। हाल ऐसे हो गए कि जेल में पहली रात तो पार्थ को कमोड पर बैठकर गुजारनी पड़ी जबकि अर्पिता ने पहले दिन कुछ खाया ही नहीं, वो सिर्फ रोती रहीं।

बता दें कि अर्पिता मुखर्जी और पार्थ चटर्जी दोनों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस दौरान वह जेल में ही रहेंगे। पार्थ को कोलकाता प्रेसीडेंसी जेल के ‘पोइला बैश’ में रखा गया है जबकि उनकी साथी अर्पिता को उनकी जेल से पाँच मिनट की दूरी पर बनी ‘अलीपुर वीमन करेक्शनल होम’ में रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को अर्पिता जब जेल में आईं तो बहुत दुखीं थीं। वो लगातार रो रही थीं और उन्होंने उस रात डिनर भी नहीं किया।

वहीं पार्थ ने भी शुक्रवार को जेल में पहली रात काटी जो कि उनके लिए काफी दुखदायी थी। कभी बंगाल सरकार में ताकतवर मंत्री रहे चटर्जी के लिए जेल में कोई अलग से सुविधा नहीं थी। उन्हें जेल के सबसे सुरक्षित भाग में रखा गया था जहाँ कभी अमेरिकी सेंटर पर अटैक का मास्टरमाइंड आतंकी अफताब अंसारी रखा जाता था।

6*8 फीट की जेल में बिस्तर के लिए जमीन पर कंबल थे, एक सीलिंग फैन था, एक कमोड था और एक वाटर फिल्टर था। इसके अलावा वहाँ कोई फर्नीचर नहीं था। पार्थ चटर्जी का चूँकि वजन ज्यादा है इसलिए जब वो जेल पहुँचे तो उनसे कुछ ही देर जमीन पर बैठा गया। इसके बाद वह कमोड पर बैठ गए। उन्होंने पूरी रात उसी कमोड पर गुजारी। 

जेल प्रशासन ने अगले दिन उन्हें चरपाई और कुर्सी लाकर दी। इसके बाद उन्हें कैदियों के लिए बनाया गया खाना परोसा गया, जिसे देख उन्होंने चॉप-मुरी की माँग की। रविवार शाम को उनकी इस इच्छा को भी जेल प्रशासन ने पूरा किया और उनकी जेल में बने कमोड को भी ठीक करवाया। इसके अतिरिक्त उन्हें जेल में अखबार और किताबों की सुविधा भी दी गई। फिलहाल वह लगातार कानूनी सलाहकारों के साथ संपर्क में हैं। उन्होंने फैसला किया है कि वो अभी विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे।

जानकारी के मुताबिक, पार्थ चटर्जी पर 24 घंटे निगरानी रखी गई है। उन्हें कम से कम किसी कैदी से मिलने दिया जा रहा है। सीनियर जेलर खुद हर घंटे उनकी जेल में जाकर चीजों का मुआएना करते हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जेल के कैदियों का व्यवहार उनके प्रति अलग है। रविवार को जब वह अपनी जेल से बाहर आए थे तो उन्हें कैदियों ने चोर-चोर कहा था। अर्पिता के नाम की फब्तियाँ भी कसी गई थीं। साथ ही कई अपशब्द भी उन्हें कहे गए थे। पार्थ ने इस दौरान सब अनसुना कर दिया और वापस अपनी जेल में जाकर बैठ गए।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जेल में जाने के बाद पार्थ का चलना-फिरना बिलकुल बंद हो गया है। वह ज्यादातर बस सोते रहते हैं। जिसकी वजह से उनके पाँव में सूजन आ गई थी। यह देख जेल प्रशासन ने उन्हें डॉक्टर को दिखाया। लेकिन जब डॉक्टर आए तब भी वो सोते ही मिले। एक दोपहर उन्हें दाल-भात-मच्छी परोसी गई जिसे खाकर उन्होंने दोबारा रात में चावल माँगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के एसएससी घोटाले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को ईडी ने 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। दोनों की बेल याचिका खारिज करते हुए स्पेशल कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। ईडी को जाँच में अर्पिता के दो फ्लैट से करीब 50 करोड़ रुपए कैश बरामद हुए थे।

‘फिल्मों से भारत की अर्थव्यवस्था को मिलती है मदद’: अक्षय कुमार बायकॉट ट्रेंड से उखड़े, कहा- बदमाशी कर रहे ट्रोलर्स

बॉलीवुड के हिंदूफोबिक चरित्र के कारण कई हिंदी फिल्मों को हाल ही में जनता की कड़ी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है। सोशल मीडिया में आमिर खान की आने वाली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बायकॉट करने की बात चल रही है। अक्षय कुमार की रक्षाबंधन (#BoycottRakshaBandhan) की भी तीखी आलोचना हो रही है।

अक्षय कुमार ने रक्षाबंधन के बायकॉट पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि यह एक आजाद देश है। हर किसी को वह करने की आजादी है, जो वे करना चाहते हैं। साथ ही ट्रोलर्स और मीडिया से फिल्मों का बायकॉट करने के चलन से दूर रहने को कहा। अक्षय कुमार ने कहा, “इंडियन फिल्म इंडस्ट्री से देश की अर्थव्यवस्था को मदद मिलती है। कुछ ऐसे लोग हैं, जो ये सब चीजें (बायकॉट) करते हैं। वे (ट्रोलर्स) बदमाशी कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं यही कहना चाहता हूँ कि कोई भी इंडस्ट्री हो, चाहें फिल्म इंडस्ट्री हो या फिर कपड़ों की इंडस्ट्री हो, ये सब भारत की अर्थव्यवस्था में मदद करती है। इस तरह की चीजें करने का कोई मतलब नहीं है। हम सब अपने देश को सबसे बड़ा और महान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं रिक्वेस्ट करूँगा कि इसमें शामिल न हों, क्योंकि यह हमारे देश के लिए बेहतर होगा।”

क्यों हो रही रक्षाबंधन के बायकॉट की माँग

दरअसल रक्षाबंधन के बायकॉट की माँग इस फिल्म की लेखिका कनिका ढिल्लों की वजह से हो रही है। कनिका के कई ऐसे पुराने ट्वीट हाल में वायरल हुए थे, जो हिंदूघृणा से भरे थे। फिल्म की रिलीज को देखते हुए उन्होंने 1 अगस्त 2022 को करीब आधे घंटे के भीतर ऐसे 17 ट्वीट डिलीट किए थे।

इन पुराने ट्वीट्स में कनिका ढिल्लों ने हर उस प्रदर्शन को समर्थन देते हुए दिखीं थी, जो मोदी सरकार के विरोध में था या फिर जहाँ हिंदुत्व को गाली दी गई अथवा देश को कोसा गया था। उन्होंने CAA के विरोध में ट्वीट करते हुए लिखा था- हम कागज नहीं दिखाएँगे। कनिका ने गोवंश को लेकर भी ट्वीट किया था। एक से ज्यादा ट्वीट में कनिका ढिल्लों ने भारत को लिंचिस्तान कहा था।

बता दें कि रक्षाबंधन और लाल सिंह चड्ढा 1 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। लाल सिंह चड्ढा को बायकाॅट करने की वजह आमिर खान का 2015 का इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने कहा था, “भारत देश बहुत ही सहिष्णु है लेकिन कुछ लोग यहाँ पर असहिष्णुता फैलाने का काम कर रहे हैं।” इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर ने नेपोटिज्म पर करीना कपूर खान के उस बयान को भी हाइलाइट किया, जिसमें वामपंथी पत्रकार बरखा दत्त के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद के लिए दर्शकों को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि अगर किसी को उनकी फिल्मों से दिक्कत है तो वे न देखें।

डोनाल्ड ट्रंप के ‘खूबसूरत घर’ पर FBI की रेड: पूर्व राष्ट्रपति बोले- मेरी तिजोरी में भी सेंध मारी, दावा- व्हाइट हाउस से लेकर चले आए थे 15 बक्से दस्तावेज

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घर फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) का छापा पड़ा है। ये जानकारी खुद ट्रंप ने दी है। उन्होंने बताया कि फ्लोरिडा में पाल्म बीच स्थित उनके ‘खूबसूरत घर’ मार-ए-लागो में एफबीआई ने छापा मारा है। 

ट्रंप ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा कि ये समय देश के लिए काला समय है। ऐसा कभी भी उस व्यक्ति के साथ पूर्व में नहीं हुआ होगा जो कभी अमेरिका का राष्ट्रपति रहा हो। सरकारी एजेंसियों को सहयोग देने के बावजूद उन लोगों का इस तरह घर पर छापा मारना न केवल गैरजरूरी है बल्कि गलत भी है। 

ट्रंप ने कहा, “‘यह अभियोजन पक्ष का कदाचार है, न्याय प्रणाली का हथियारकरण और कट्टर लेफ्ट डेमोक्रेट्स का हमला है, वे लोग नहीं चाहते कि मैं 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए उतरूँ, वो भी हालिया नतीजों के आधार पर। जो लोग ऐसा करना चाहते हैं वो रिपब्लिकन्स और कन्जर्वेटिव्स को रोकने के लिए कुछ भी करेंगे। ऐसे हमले केवल हारे या थर्ड वर्ल्ड देशों में होते हैं। दुख की बात है कि अमेरिका भी उनमें से एक हो गया, भ्रष्टाचार इतना है जितना पहले कभी नहीं देखा। इन लोगों ने मेरी तिजोरी में भी सेंध मारी।”

ट्रंप ने पूछा कि आखिर क्या फर्क रह गया इसमें और वाटरगेट मामले में। वहाँ कुछ लोगों ने डेमोक्रेट नेशनल कमेटी के दफ्तरों में सेंध लगाई थी, यहाँ उलटा हो गया है जहाँ डेमोक्रेट्स अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के घर में घुस आए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जाँच चल रही हैं। ये सर्च सोमवार (8 अगस्त 2022) सुबह शुरू हुआ। जो कई घंटों तक चला। वहीं अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि उन्होंने ऐसी कोई रेड नहीं पड़वाई। एफबीआई ने भी इस मामले में चुप्पी साधी हुई हैं। कुछ खबरों में कहा जा रहा है कि ट्रंप ने जब राष्ट्रपति भवन को छोड़ा था उस समय वह अपने साथ महत्वपूर्ण कागजातों से भरे करीब 15 बक्से ले गए थे। अब ट्रंप के घर उन्हीं बक्सों में रखे गए दस्तावेजों की तलाशी हो रही है।

मंत्री के काफिले के लिए रोकी गई एंबुलेंस, तमिलनाडु में DMK का VVIP कल्चर: सलामी देती रही पुलिस, कलक्टर सहित कई अधिकारी स्वागत में

तमिलनाडु के तंजावुर (Tamil Nadu’s Thanjavur) में सोमवार (8 अगस्त, 2022) को एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई। कुंभकोणम शहर में राज्य के शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी (Anbil Mahesh Poyyamozhi) के काफिले को रास्ता देने के लिए एक एंबुलेंस को रोका गया। एंबुलेंस मंत्री का काफिला गुजरने तक सायरन बजाते हुए इंतजार करती रही। काफिले के गुजरने के लिए एंबुलेंस को कुंभकोणम में एक पुल के पास रोकने का वीडियो वायरल होने के बाद अंबिल महेश पोय्यामोझी ने इस घटना आलोचना की है।

‘टाइम्स नाउ‘ के मुताबिक, बाढ़ रोकथाम कार्य की समीक्षा करने जा रहे मंत्री के काफिले में करीब 20-25 कारें थीं। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एम्बुलेंस को पूरा काफिला गुजरने तक इंतजार करना पड़ा। वीडियो के अनुसार, एक पुलिसकर्मी भी एम्बुलेंस के पास खड़ा होकर कारों के गुजरने पर सलामी देते हुए दिखाई दे रहा है। मंत्री के साथ कलेक्टर और अन्य अधिकारी भी थे। मंत्रियों के सभी वाहन जाने के बाद एंबुलेंस को रास्ता दिया गया।

सोशल मीडिया पर लोगों के आक्रोश व्यक्त करने पर पर अंबिल महेश ने सफाई देते हुए कहा, “अनाईकट्टी पुल (Anaikatti Bridge) का केवल एक हिस्सा आवाजाही के लिए खुला हुआ था, क्योंकि दूसरी हिस्से की मरम्मत की जा रही थी। पुल संकरा है, इसलिए वाहनों को लाइन में जाने दिया जा रहा था।”

विपक्षी दलों ने इस घटना की आलोचना की है। उन्होंने मंत्री के साथ-साथ इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) ने कहा कि मंत्री आम आदमी के प्रति असंवेदनशील हो गए हैं। चैनल से बातचीत में अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता कोवई सत्यन (Kovai Sathyan) ने याद दिलाया कि सीएम ने कहा था कि वह अपने काफिले को 50 फीसदी कम करने जा रहे हैं, जो अभी तक नहीं हुआ है। वहीं भाजपा के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति (Narayanan Tirupathy) ने माँग की है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को मंत्री समेत इसके लिए जिम्मेदार लोगों को निलंबित करना चाहिए।