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खिसियानी चीन, बारूद फूँके: नैंसी पेलोसी के लैंडिंग के बाद ताइवान में घुसाए 20+ लड़ाकू विमान, सीमा के चारों तरफ ड्रिल के नाम पर मिसाइल और गोलों की बारिश

अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान में लैंड करने के बाद चीन बौखलाया हुआ है। खबर है कि पहले चीन ने अमेरिका को धमकी दी थी कि वो नैंसी को ताइवान न भेंजे वरना ठीक नहीं होगा। लेकिन जब नैंसी ने मंगलवार (2 अगस्त 2022) को ताइवान में लैंड किया तो यह देख चीन और आग बबूला हो गया और अमेरिका को परिणाम भुगतने की धमकी दे दी । साथ ही ताइवान के नजदीक युद्धाभ्यास शुरू कर दिया।

इतना ही नहीं चीन ने ताइवान को टारगेटेड मिलिट्री ऑपरेशन की धमकी दी है। जिसके बाद हालातों को देखते हुए ताइवान में भी लेवल-2 का अलर्ट जारी हो चुका है। ये अलर्ट द्वीप पर 1996 के बाद पहली बार जारी हुआ है।

ताइवान के नजदीक चीन की सेना

खबरों के अनुसार, चीन की सेना ताइवान के नजदीक ड्रिल करने लगी है और उनके एंटी एयरक्राफ्ट गन आसमान में ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा रहे हैं। इसके अलावा ताइवान से महज 150 किलोमीटर की दूरी पर चीन एम्फिबियस टैंक को तैनात कर चुका है। वहीं जंगी जहाज लायोनिंग और शैंनदोंग भी ताइवान की घेराबंदी के लिए रवाना किए जा चुके हैं।

चीन की स्थानीय मीडिया ने भी बताया है कि वहाँ की आर्मी ने ताइवान के बाद मिलिट्री ऑपरेशन को शुरू कर दिया है। चीन लगातार ताइवान को अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है। उसने अपने 20 से ज्यादा लड़ाकू विमानों को ताइवान की डिफेंस लाइन के पास भेजा और फिर उन्हें भेदते हुए एयर डिफेंस में घुस गए। इतना ही नहीं ताइवान सेना की मानें तो चीन ने KJ500 अवाक्स विमान और जेएफ16, जेएफ11, Y9 EW और Y8 ELINT विमान को तैनात किया हुआ था।

चीन-ताइवान विवाद में अमेरिका घुसा

गौरतलब है कि अमेरिकी नेता के एक दौरे की वजह से ताइवान पर चीन का संकट गहरा गया है। दूसरी ओर खबर है कि रूस भी ताइवान मामले में चीन के साथ आ चुका है। उन्होंने भी पेलोसी के दौरे को उकसाने वाली कार्रवाई कहा है

याद दिला दें कि अमेरिका ने यूक्रेन के समय में इसी तरह नाटो के नाम पर रूस को भड़काने का काम किया था और बाद में मदद को कितना आगे आए ये पूरी दुनिया ने देखा। अब ताइवान के समय भी यही हाल हो रहा है। एक ओर चीन है जो सालों से ताइवान को हड़पने की ताक में बैठा है और दूसरी ओर अमेरिका है जो दावा तो करता है कि वो चीन-ताइवान विवाद में ताइवान के साथ होंगे। लेकिन समय आने पर ये साथ किस तरह निभाएँगे ये नहीं बताते।

लॉन बॉल्स में ‘गोल्ड’ जीत महिला टीम ने रचा इतिहास, टेबल टेनिस में भी भारत को ‘सोना’: 346 किलो उठाकर विकास ठाकुर को मिली ‘चांदी’

बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Commonwealth Games 2022) में भारत को पाँचवा गोल्ड मेडल हासिल हुआ है। पुरुष टेबल टेनिस टीम ने मंगलवार (2 अगस्त 2022) को खेले गए फाइनल मुकाबले में सिंगापुर को 3-1 से शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। दूसरा गोल्ड मेडल भारत की बेटियों ने लॉन बॉल (Lawn Bowls) में साउथ अफ्रीका को हराकर जीता है। वहीं, भारत के वेटलिफ्टर विकास ठाकुर (Vikas Thakur) ने वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल पर कब्जा किया।

भारतीय पुरुष टेबल टेनिस टीम ने हरमीत देसाई और जी साथियान ने डबल्स मैच में जीत दर्ज कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। हालाँकि, सिंगापुर की च्यू झे यू क्लेरेंस ने अगला गेम जीतकर सिंगापुर को 1-1 से बराबरी पर ला दिया, लेकिन जी. साथियान और हरमीत देसाई ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर भारत के लिए गोल्ड पक्का कर दिया।

यह पहली बार भारत ने एक अनजाने खेल लॉन बॉल (Lawn Bowls) में साउथ अफ्रीका को 15-10 से हराकर गोल्ड मेडल पर कब्जा किया है। अभी तक इस खेल में भारत ने कोई पदक नहीं जीता था। लॉन बॉल्स ज्यादातर भारतीय लोगों के लिए बिल्कुल अनजाना सा खेल है। लेकिन इस अनजाने खेल में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर भारत की बेटियों ने इतिहास रच दिया है।

भारत के विकास ठाकुर ने पुरुषों के 96 किग्रा वेटलिफ्टिंग में दूसरे स्थान पर रहे। विकास ने स्नैच राउंड में 155 और क्लीन एंड जर्क राउंड में 191 किग्रा भार उठाया। इस तरह उन्होंने रजत जीतने के लिए कुल 346 किग्रा भार उठाया। विकास से आगे समोआ के डॉन ओपेलोग रहे। ओपेलोग ने स्नैच राउंड में 171 और क्लीन एंड जर्क राउंड में 210 किग्रा भार उठाया। इस तरह उन्होंने कुल 381 किग्रा भार उठाया। इस भार के साथ ओपेलोग गोल्ड मेडल जीता।

बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत को अब तक 12 मेडल मिले हैं, जिसमें पाँच गोल्ड, चार सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।

ताजमहल कॉरिडोर के पीछे ‘हिन्दू महासभा’ ने किया जलाभिषेक, 18 गिरफ्तार: संगठन ने कहा – ये कोई अपराध नहीं, ‘तेजो महालय’ एक मंदिर

सावन के तीसरे सोमवार को ताजमहल की परिक्रमा कर जलाभिषेक करने की घोषणा करने वाले हिंदू महासभा के लोगों को आगरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके बावजूद ताजमहल कॉरिडोर के पीछे कुछ लोगों ने जलाभिषेक किया। इस मामले में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसको लेकर हिंदू महासभा के नेताओं का कहना है कि उन्होंने जलाभिषेक करके कोई अपराध नहीं किया है। पुलिस ने जिस तरह से उन्हें जलाभिषेक करने से रोका है, वह गलत है।

बताया जा रहा है कि सावन के तीसरे सोमवार के मौके पर हिंदू महासभा के प्रवक्ता संजय जाट ने ताजमहल कॉरिडोर के पीछे जलाभिषेक करने का ऐलान कर हड़कंप मचा दिया था, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हिए हिंदू महासभा के 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इस पर हिंदू महासभा के एक कार्यकर्ता ने कहा, “तेजो महालय एक मंदिर है, हम इसकी लड़ाई हम लड़ते रहेंगे। हमने कप्तान से बात की थी, अपना कार्यक्रम भी आगे बढ़ा दिया था, लेकिन फिर भी हमारे लोगों को गिरफ्तार किया गया।”

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई घंटों तक हिंदूवादियों को थाने में बैठाया गया। इनके आधार कार्ड की फोटो स्टेट जमा करवाई और चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।

बता दें कि पुलिस की नजरों से बचते हुए सोमवार को दर्जन भर से अधिक कार्यकर्ता ताजमहल पर जल चढ़ाने उस जगह पहुँचे, जहाँ बसपा प्रमुख मायावती कॉरिडर बनवाना चाहती थी। यह जगह ताजमहल और किले के बीच में है। यह ताजमहल से करीब 1 किमी दूरी पर है। ये सभी एक किमी दूर से ही ताजमहल को देखकर जलाभिषेक करने लगे और जय श्री राम..हर हर महादेव के नारे लगाने लगे।

गौरतलब है कि ताजमहल को लेकर यह विवाद कोई पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले अयोध्या की तपस्वी छावनी के संत जगद्गुरु परमहंसाचार्य (Jagadguru Paramhansacharya) को ताजमहल (Taj Mahal) में जाने से रोकने का मामला सामने आया था। जगद्गुरु 26 अप्रैल 2022 को शिष्यों के साथ ताजमहल गए थे। उन्होंने प्रवेश के लिए टिकट भी लिया था। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने भगवा वस्त्र और ब्रह्मदंड के कारण उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया था।

बेरोजगार ग्रेजुएट को ₹5000, पोस्ट-ग्रेजुएट को ₹7500: केजरीवाल सरकार का एक और झूठ खुला, जो योजना है ही नहीं, उसका हुआ प्रचार-प्रसार

दिल्ली की जनता से बड़े-बड़े वादे करके मुकर जाने वाले अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से सवालों के घेरे में हैं। कुछ समय पहले उनकी सरकार ने ऐलान किया था कि वे बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देंगे। उनकी योजना में कहा गया था कि सरकार ‘ग्रेजुएट’ बेरोजगार युवाओं को 5000 रुपए/माह देगी और ‘पोस्ट ग्रेजुएट’ युवाओं को 7500 रुपए/माह मिलेगा।

अब इसी योजना से दिल्ली के कितने युवा लाभान्वित हुए, इसकी जानकारी एक आरटीआई में माँगी गई। लेकिन आरटीआई ने युवाओं की संख्या बताने की जगह एक चौंकाने वाला खुलासा किया। इसमें बताया गया कि ऐसी कोई योजना दिल्ली सरकार नहीं चलाती है।

RTI में पूछे गए 3 सवाल

एक्टिविस्ट विवेक पांडे ने ये आरटीआई 29 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री कार्यालय में दी थी। इसके बाद ये रोजगार निदेशालय दी गई। इस आरटीआई में उन्होंने तीन सवालों के जवाब माँगे थे। पहला-अब तक इस योजना के लिए पंजीकृत लोगों की कुल संख्या। दूसरा- इस योजना के तहत अब तक लाभान्वित हुए लोगों की कुल संख्या का विवरण। तीसरा- योजना के तहत अब तक दिल्ली सरकार द्वारा जारी की गई कुल राशि की जानकारी।

1 अगस्त 2022 को इसका जवाब आया और इसी में लिखा था कि दिल्ली सरकार इस तरह की कोई योजना नहीं लागू की गई है।

छलावा थी केजरीवाल सरकार की घोषणा

मालूम हो कि इस योजना का पंजीयन रोजगार निदेशालय के द्वारा ऑनलाइन माध्यम से किया जाना था। लेकिन जब योजना शुरू ही नहीं हुई तो फिर इसमें पंजीकरण कराने वाले युवाओं की जानकारी होने का सवाल ही नहीं उठता। विवेक की आरटीआई से हुए इस खुलासे के बाद पता चल चुका है कि दिल्ली सरकार की ‘योजना’ छलावा थी, जो कि पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं कों सांत्वना देने मात्र की गई थी।

दिल्ली में पूरे नहीं किए वादे, गुजरात में दिखा रहे सपने

हैरानी इस बात की है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिन्होंने दिल्ली की जनता से किए वादे ही पूरे नहीं किए, वह गुजरात चुनावों से पहले वहाँ की जनता से भी ऐसे वादे कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात चुनावों के मद्देनजर कहा है कि अगर उनकी सरकार आई तो वो हर रोजगार और बेरोजगार युवा को 3000 रुपए देंगें।

विवेक पांडे ने अपने ट्विटर आरटीआई के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं और कहा है कि दिल्ली में योजना लागू तक नहीं हुई और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी अनाउंसमेंट गुजरात में भी कर दी। इस योजना की सच्चाई क्या है ये दिल्ली में देख सकते हैं।

प्रचार में नहीं है कोई कमी?

अमर उजाला में दिया गया ‘बेरोजगारी भत्ता’ योजना का विवरण

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार द्वारा युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ता की घोषणा किए जाने के बाद तमाम पोर्टल्स पर इसकी जानकारी प्रकाशित हुई थी। इंटरनेट पर यदि सर्च करें तो पाएँगे कि कुछ लेखों में एक-एक स्टेप के साथ बताया गया है कि बेरोजगार युवा इसका लाभ कैसे ले सकते हैं। जॉब की जानकारी देने वाली साइट्स पर भी इस योजना का विवरण छपा है।

icdsupweb.org पर दिया गया विवरण

सवाल है कि अगर हकीकत में ऐसी कोई योजना है ही नहीं, तो फिर वे लिंक किस काम के हैं जिन पर बेरोजगारी भत्ता के लिए पंजीकरण करने को कहा जाता है?

विवेक पांडे की आरटीआई ने साफ कर दिया है कि दिल्ली सरकार जिन सुविधाओं को देने का प्रचार केजरीवाल सरकार करवाती है उन्हें जारी रखना तो दूर, उन्हें शुरू तक नहीं करती। ऐसा ही खिलवाड़ उन्होंने दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र में किया हुआ है। उन्होंने वादा किया था कि एक साल में 7 अस्पताल बनाएँगे। मगर, हाल ही में ये पता चला कि 7 तो दूर की बात है 1 अस्पताल भी पिछले 1 साल में नहीं खुला।

अब्दुल शाहजहाँ ने ‘मिंटू रॉय’ बन हिन्दू लड़की को फाँसा, पोल खुलने पर जबरन खिलाया गोमांस: कामाख्या मंदिर में की थी शादी

असम में लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है जहाँ पुलिस ने पहचान छिपाकर अपनी हिंदू पत्नी को प्रताड़ित करने और उसे जबरन गोमांस खिलाने के आरोप में एक मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

ईटीवी भारत (असम) की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित की पहचान अब्दुल शाहजहाँ (Abdul Sahjahan) के रूप में हुई है। जिसने ‘मिंटू रॉय’ नाम के एक हिंदू बंगाली नाम से एक हिंदू लड़की को फँसाकर शादी का प्रस्ताव दिया। उनकी शादी गुवाहाटी के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में हुई थी।

वहीं शादी के 6 महीने बाद ही पीड़िता को अब्दुल की असली पहचान के बारे में पता चल गया। वहीं तेजपुर में हिंदू महिला से दोस्ती और फिर शादी करने वाला अब्दुल शाहजहाँ पहले से ही शादीशुदा था।

इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि पीड़िता के पास ₹7 लाख नकद थे। जब अब्दुल को इसकी जानकारी हुई तो वह उसे प्रताड़ित करने लगा। यहाँ तक कि अब्दुल ने उसे बीफ खाने के लिए भी मजबूर किया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल ने उसका पैसा छीन लिया और उसी तरह एक और हिंदू लड़की को फँसाने के लिए इस्तेमाल किया। जब अब्दुल की प्रताड़ना बढ़ने लगी तब महिला ने मामले की जानकारी आसाम पुलिस को दी। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तेजपुर पुलिस ने आरोपित अब्दुल शाहजहाँ को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उससे इस मामले में पूछताछ की जा रही है।

ईटीवी भारत (असम) को अपनी पीड़ा के बारे में बोलते हुए, पीड़िता ने कहा, “मैं हिंदू महिलाओं से मुस्लिम पुरुषों से शादी नहीं करने की अपील करना चाहती हूँ। उनके जाल से सावधान रहें… वे आपको कुछ समय तक ठीक से रखेंगे और फिर आपको शारीरिक रूप से प्रताड़ित करेंगे, आपको खाना देना बंद कर देंगे…”

बरेली में हिन्दू नाबालिग लड़की को भगा ले गया साहिल, पुलिस ने शुरू की तलाश: जिले में 1 साल में 50+ हिन्दू लड़कियाँ बनीं शिकार

उत्तर प्रदेश के बरेली से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है, जहाँ साहिल नाम का एक युवक एक हिन्दू किशोरी को अपने साथ भगा कर ले गया। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। हिन्दू नाबालिग लड़की को भगा कर ले जाने जाने की घटना के बाद क्षेत्र में भी तनाव पसरा हुआ है। पुलिस अभी तक लड़की की बरामदगी में सफल नहीं हुई है। दो समुदाय का मामला होने के कारण तनाव की स्थिति है।

बरेली में इससे पहले भी ‘लव जिहाद’ के कई मामले सामने आ चुके हैं। नया मामला फरीदपुर कस्बे का है। परिजनों का आरोप है कि मुस्लिम आरोपित साहिल हिन्दू किशोरी को बहला-फुसला कर ले गया। बताया जा रहा है कि साहिल फ़िलहाल राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपने दोस्त के यहाँ गया है, जहाँ हिन्दू किशोरी भी उसके साथ है। पीड़ित पिता ने बताया कि रविवार (31 जुलाई, 2022) की रात को अचानक से लापता हो गई थी।

इसके बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला। इंस्पेक्टर क्राइम राजेश कुमार ने जानकारी दी कि युवक को पकड़ने और युवती की बरामदगी के लिए पुलिस की टीमों को लगाया गया है। उन्होंने आरोपित युवक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। स्थानीय सभासद ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। सोशल मीडिया पर आरोपित युवक की तमंचे के साथ तस्वीर वायरल हो रही है। ‘पत्रिका’ की खबर के अनुसार, सिर्फ इसी साल अब तक 50 हिन्दू युवतियाँ ‘लव जिहाद’ का शिकार बन चुकी हैं।

इनमें से कई नाबालिग हैं और अधिकतर मामलों में इन लड़कियों को नाम बदल कर धर्म-परिवर्तन का दबाव बनाया गया और निकाह कर लिया गया। 24 घंटे बाद भी पीड़िता का कोई सुराग नहीं मिल पाया। बता दें कि भाजपा शासित राज्यों में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून है, लेकिन गैर-भाजपा शासित राज्यों में कानून न होने की वजह से इन मामलों में कड़ी सज़ा नहीं हो पाती। पुलिस ने ताज़ा मामले में आरोपित के खिलाफ सम्बद्ध धाराओं में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

म्यूजिक वीडियो की शूटिंग कर रही थी 8 मॉडल, नकाबपोशों ने किया गैंगरेप: बंदूक की नोंक पर घटना, 80 आरोपित अदालत में पेश

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) की एक अदालत में गैंगरेप के मामले में गिरफ्तार 80 से अधिक लोगों को सोमवार (1 अगस्त 2022) को पेश किया गया। पिछले हफ्ते म्यूजिक वीडियो की शूटिंग के दौरान 8 मॉडल के साथ नकाबपोश, हथियारों से लैस लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था। इसको लेकर जैसे ही सोमवार को सुनवाई हुई, क्रुगर्सडॉर्प मजिस्ट्रेट कोर्ट (Krugersdorp Magistrates Court) के बाहर अपना रोष व्यक्त करने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।

अभी तक इनमें से किसी पर भी बलात्कार का आरोप नहीं लगाया गया है। पुलिस घटना की जाँच कर रही है। यह घटना जिस इलाके में हुई है वो अवैध खनन गतिविधियों के लिए जाना जाता है।

पुलिस मंत्रालय की प्रवक्ता लिरांडज़ु थेम्बा (Lirandzu Themba) ने वीओए को बताया कि पिछले गुरुवार (28 जुलाई 2022) को जोहान्सबर्ग के बाहर क्रूगर्सडॉर्प के खनन क्षेत्र में एक वीडियो शूट करते समय आठ महिलाओं के साथ बलात्कार और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक नकाबपोश बदमाशों ने बंदूक की नोक पर उन महिलाओं से कई बार बलात्कार किया।

थेम्बा ने कहा, “रविवार को पुलिस अधिकारी भीकी सेले ने आठ में से छह गैंगरेप पीड़िता से मुलाकात की।” सेले ने कहा कि इनमें सबसे कम उम्र की 19 वर्ष की एक लड़की है। ये सभी इस घटना के बाद से काफी डरी हुई हैं।”

बताया जा रहा है कि ये संदिग्ध कथित रूप से अवैध खनिक हैं जिन्हें जमा-जमास (zama-zamas) के नाम से जाना जाता है। ये जोहान्सबर्ग के कई बंद खदानों में सोने के लिए खुदाई करते हैं।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई खनिक (खदानों में काम करने वाले) विदेशी हैं। स्थानीय निवासी भी इस क्षेत्र में बढ़ रहे अपराधों के लिए जमा-जमास गिरोह को दोषी ठहराते हैं। प्रदर्शनकारी लेराटो नोगोबेनी का कहना है, “वे हमें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।” एक अन्य प्रदर्शनकारी, डेविड मक्गाका ने दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय रक्षा बल (South African National Defence Force) को तैनात करने का अनुरोध किया और कहा कि स्थानीय पुलिस बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है।

बिरयानी फेस्टिवल में ‘बीफ’ नहीं शामिल करने पर भड़का तमिलनाडु SC/ST आयोग, बताया भेदभाव, कलेक्टर को नोटिस

तमिलाडु के अंबुर में आयोजित बिरयानी उत्सव में बीफ को शामिल नहीं करने को लेकर विवाद के महीनों बाद राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने सख्त हिदायत दी है। आयोग ने कहा कि सरकारी कार्यक्रम में बीफ बिरयानी को नजरअंदाज करना ‘भेदभाव’ के बराबर है। आदि द्रविड़ और अनुसूचित जनजाति के लिए आयोग ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में इस तरह का पक्षपात नहीं होना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने बताया कि उनसे स्थानीय विदुथलाई चिरुथईगल काची (वीसीके) श्रमिक मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मिलकर आरोप लगाया था कि इस आयोजन में ‘बीफ बिरयानी’ को शामिल न करना अंबुर और उसके आसपास रहने वाली एक महत्वपूर्ण अनुसूचित जाति की आबादी के खिलाफ ‘खाद्य भेदभाव’ है।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने सोमवार (1 अगस्त, 2022) को जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि जिला कलेक्टर ने घोषणा की थी कि ‘खाद्य उत्सव’ में ‘बीफ बिरयानी’ को शामिल नहीं किया जाएगा। मई में ‘अंबूर बिरयानी थिरुविझा 2022’ का आयोजन प्रस्तावित था जिसका मकसद यहाँ से लगभग 186 किलोमीटर दूर अंबुर के लोकप्रिय व्यंजन के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई टैग) हासिल करना था। हालाँकि, तब जिला प्रशासन ने बारिश के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए विवाद होने पर इस आयोजन को टाल दिया था।

वहीं इस पूरे मामले में तमिलनाडु अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने तिरुपथुर के कलेक्टर अमर कुशवाहा को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि उनकी घोषणा अंबूर क्षेत्र के दो लाख अनुसूचित जाति-जनजाति के सदस्यों के खिलाफ ‘आधिकारिक भेदभाव’ है। आयोग ने कलेक्टर से पूछा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

जबकि कार्यक्रम को स्थगित करने के बाद कलेक्टर ने अपने जवाब में कहा कि आयोग की कार्रवाई उन पर लागू नहीं होगी, क्योंकि ‘अंबूर बिरयानी थिरुविझा 2022’ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया था। वहीं आयोग के नोटिस के जवाब में अधिकारी ने दावा किया कि बिरयानी में सूअर के मांस का इस्तेमाल नहीं किया गया था, जो दरअसल ‘स्थानीय मुसलमानों का समर्थन हासिल करने’ के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

‘लाल सिंह चड्ढा’ को बचाने का हर जतन कर रहे आमिर खान: अब सैन्य ट्रेनिंग वाला क्लिप दिखाया, करण जौहर को ‘सेक्सी’ सवालों पर धोया, साउथ के हीरो को ले आए

आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की बहिष्कार की अपील हो रही है, जिसके बाद वो इसे हिट कराने के लिए हर जतन कर रहे हैं। अब फिल्म की एक झाँकी जारी की गई है। इस वीडियो में उन्हें करीना कपूर के साथ गोलगप्पे खाते हुए, फिर सेना का प्रशिक्षण लेते हुए दिखाया गया है। इस दौरान उन्हें बंदूक के साथ भी दिखाया गया है। आमिर खान कह रहे होते हैं कि उनकी माँ उन्हें सेना में भेजना चाहती हैं, लेकिन उन्हें लोगों को मारना अच्छा नहीं लगता।

इस क्लिप को ‘Viacom 18 Studios’ ने जारी किया है, जिसकी शुरुआत में आमिर खान अपनी माँ से आशीर्वाद ले रहे होते हैं। दक्षिण के अभिनेता नाग चैतन्य भी इस फिल्म में हैं, जिन्हें आर्मी ट्रेनिंग स्कूल में उनके दोस्त के रूप में दिखाया गया है। तेलुगु अभिनेता नाग चैतन्य सुपरस्टार नागार्जुन के बेटे हैं और सामंथा के पूर्व पति हैं। ‘फारेस्ट गम्प’ की नकल करते हुए इसमें भी आमिर खान का सीनियर सैन्य अधिकारी उन्हें ‘जीनियस’ बताते हुए उनकी तारीफ करता है।

इसके अलावा करण जौहर के शो ‘कॉफी विद करण’ में भी आमिर खान और करीना कपूर दिखाई देंगे, जिसका प्रोमो हॉटस्टार ने जारी किया है। शो के 7वें सीजन के 5वें एपिसोड में इन दोनों की मेजबानी करण जौहर ने की। फिल्म निर्देशक ने इस दौरान करीना कपूर से पूछा कि बच्चे होने के बाद ‘क्वालिटी सेक्स’ एक मिथक है या फिर वास्तविकता? इस पर करीना कपूर कहती हैं कि आप ये नहीं जान पाओगे। इस पर करण जौहर कहते हैं कि उनकी माँ ये शो देख रही हैं और आप मेरे सेक्स लाइफ के बारे में बात कर रही हैं?

इस पर आमिर खान उन्हें जवाब देते हैं, “जब आप दूसरे लोगों की सेक्स के बारे में बात करते हो, तब क्या आपकी माँ को फर्क नहीं पड़ेगा?” इस पर निरुत्तर होकर करण जौहर कहते हैं कि क्या वो शो के साथ आगे बढ़ सकते हैं? आमिर खान को एक सवाल दिया गया – मुझमें ऐसा क्या है जो आप दूसरों में बर्दाश्त नहीं करेंगे? इस पर करीना कपूर ने जवाब दिया कि अक्षय कुमार जिस चीज को पूरा करने में 30 दिन लगाते हैं, आप उसमें 100-200 दिन लगाते हो।

हाल ही करीना कपूर ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बॉयकॉट की अपील को लेकर अकड़ दिखाई थी। उन्होंने बॉयकॉट की अपील को ‘कैंसल कल्चर’ बताते हुए कहा कि आज लोगों की विभिन्न प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच है, इसीलिए वो हर चीज पर राय दे रहे हैं। पहले करीना कपूर ने कहा था कि लोग फिल्म न देखें, उनसे किसी ने जबरदस्ती थोड़े की है। अब उन्होंने कहा, “हर कोई आजकल अपने विचार रखना चाहता है। आजकल अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स हैं और हर कोई के पास कोई न कोई राय है। इसीलिए, अगर आज आपको रहना है तो कुछ चीजों को नजरअंदाज करना सीखना होगा।”

7 नए अस्पताल, 6800 टोटल बेड: CM केजरीवाल के झूठे वादों का फिर पर्दाफाश, RTI ने बताया- एक साल में एक भी अस्पताल नहीं खुला

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली को दिखाए गए सपनों की पोल अब खुलने लगी है। एक आरटीआई से मालूम चला है कि पिछले साल सीएम केजरीवाल ने जो दिल्ली में अस्पताल बनाने के वादे किए थे वो बिलकुल खोखले थे और इन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है।

ट्विटर यूजर अमित कुमार ने इस बाबत आरटीआई फाइल करके पूछा था कि दिल्ली में 1 जुलाई 2021 से जुलाई 2022 के बीच कितने अस्पताल बने। आरटीआई का मकसद यही था कि पता चल सके दिल्ली सरकार जनता से किए कितने वादे पूरे कर रही है। लेकिन, जवाब आने पर उनका संदेह सही निकला।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के जनसूचना अधिकारी ने आरटीआई का जवाब देते हुए बताया कि एक भी अस्पताल दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2021 से जुलाई 202 के बीच में नहीं बनाए हैं।

इस आरटीआई में अमित ने तीन सवाल और किए थे। इनमें एक था कि पिछले 1 साल में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कितने बेड और जुड़े? दूसरा ये पूछा गया था कि दिल्ली अस्पातल जिनका संचानल केजरीवाल सरकार करती है, उनमें कितनी एंबुलेंस जोड़ी गईं? तीसरा ये था कि मोहल्ला क्लिनीक में कितने मरीजों का इलाज हुआ? इन तीनों प्रश्नों को लेकर आरटीआई में कहा गया कि ये जानकारी डीजीएचएस के अस्पातल सेल के पास नहीं हैं।

आरटीआई डालने वाले अमित से ऑपइंडिया की बात

अमित शर्मा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “मैंने कभी ऐसा राजनेता नहीं देखा जो इतना खुला झूठ बोले और कहीं उसका फैक्ट चेक भी न हो। एक पत्रकार तक ने उनके झूठ की पोल नहीं खोली। हर वादा जो उन्होंने किया वो अधूरा हैं। मगर आप कभी किसी को उनकी असफलताओं को हाईलाइट करते नहीं देखेंगे।”

अमित ने कहा, “इसीलिए मैंने निर्णय लिया है कि मैं उनके हर झूठ का पर्दाफाश करूँगा। उन्होंने हर फैक्टचेकर और अधिकांश पत्रकारों को अपने विज्ञापन देकर खरीद लिया है।”

7 अस्पतालों का वादा

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने साल 2021 में एक कार्यक्रम में वादा किया था कि दिल्ली सरकार 7 अस्पताल बनाने जा रही है, जिनमें टोटल बेडो की कैपेसिटी 6800 होगी। उन्होंने ये भी कहा था कि ये अस्पताल 6 महीनों में बन जाएँगे।

हालाँकि इसके बाद फरवरी 2022 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई और कहा गया कि अस्पताल बनने के काम में देरी हो रही है। लेकिन इनमें एक अस्पातल 2022 के मध्य तक बन जाएगा और बाकी के 6 सितंबर तक पूरे होंगे में बनेंगे। हमने इस खबर को पढ़ने के बाद दिल्ली में हाल फिलहाल में शुरू हुए अस्पताल पर खबर ढूँढी मगर हमें कहीं ऐसी कोई खबर नहीं मिली।

जब खरीद से ज्यादा कबाड़ में बिकी एंबुलेंस

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार के हेल्थ मॉडल की पोल पहली बार नहीं खुली। पिछले ही महीने ट्विटर और फेसबुक पर एक्टिव रहे सुजीत पटेल की आरटीआई से चौंकाने वाली बात सामने आई थी। सुजीत ने पूछा था कि 2014 के बाद दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने कितनी पैसेंजर और लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदी। इसके अलावा उन्होंने ये जानना चाहा था कि तब से अब तक में कितनी एंबुलेंस कबाड़ में बेची गई।

आरटीआई के जवाब में दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि 2014 से लेकर अप्रैल 2022 के बीच में केजरीवाल सरकार ने एक भी मरीज को लाने-ले जाने वाली एंबुलेंस नहीं खरीदी। वहीं 9 एंबुलेंस ऐसी थी जिन्हें केजरीवाल सरकार ने 23, 659 रुपए में यानी कबाड़ के दाम में बेचा।

इसी तरह 2014 से 2020 के बीच में केजरीवाल सरकार ने 10 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस खरीदी जिसमें ऑक्सीजन, आईसीयू और ईसीजी की सुविधा थीं। लेकिन इसी काल में उन्होंने इन्हीं सुविधाओं से लैस 20 एंबुलेंस को 75, 246 रुपए के रेट में बेचा भी।